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  • देशभर में आज दशहरे की धूम…. शाम को जलेंगे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले

    देशभर में आज दशहरे की धूम…. शाम को जलेंगे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले


    नई दिल्ली।
    बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने वाला विजयादशमी (दशहरा) (Vijayadashami- Dussehra 2026) का पर्व इस साल आज यानी 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में दशहरे (Dussehra 2026) को धर्म की स्थापना, साहस और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण (Ravana) का अंत किया था। वहीं, देवी दुर्गा (Goddess Durga) ने महिषासुर का वध करके देवताओं और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इन घटनाओं की स्मृति में दशहरा देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन भी किया जाता है।

    पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विजयादशमी पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करने और उपयोगी वस्तुएं दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषीय परंपराओं में राशि के अनुसार दान करने का भी उल्लेख मिलता है। यदि आप दशहरे पर दान करने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी राशि के मुताबिक इन वस्तुओं का चुनाव कर सकते हैं।


    राशि के अनुसार दशहरे पर क्या दान करें?

    – मेष राशि: मेष राशि के जातक विजयादशमी पर गेहूं और गुड़ का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है।

    – वृषभ राशि: इस राशि के लोगों के लिए चावल और आटे का दान करना अच्छा माना जाता है। जरूरतमंद परिवारों को ये खाद्य सामग्री दी जा सकती है।

    – मिथुन राशि: मिथुन राशि वाले साबुत मूंग और हरी सब्जियों का दान कर सकते हैं। इससे जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    – कर्क राशि: कर्क राशि के जातक दूध और दही का दान कर सकते हैं। दान करते समय इनकी स्वच्छता और गुणवत्ता का ध्यान रखें।

    – सिंह राशि: सिंह राशि वालों के लिए गुड़, मूंगफली और सेब का दान करना शुभ माना जाता है।

    – कन्या राशि: कन्या राशि के जातक हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां दान कर सकते हैं। इन्हें जरूरतमंद महिलाओं को देना एक अच्छा विकल्प है।

    – तुला राशि: तुला राशि वाले सफेद वस्त्र और अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार धन का दान कर सकते हैं।

    – वृश्चिक राशि: इस राशि के लोगों के लिए सेब और कपड़ों का दान करना अच्छा माना जाता है।

    – धनु राशि: धनु राशि के जातक पीले रंग के वस्त्र और अनाज जरूरतमंदों को दान कर सकते हैं।

    – मकर राशि: मकर राशि वाले कपड़े, खाद्यान्न और धन का दान कर जरूरतमंदों की सहायता कर सकते हैं।

    – कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातक नीले रंग के वस्त्र या जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल दान कर सकते हैं।

    – मीन राशि: मीन राशि के लोग दशहरे पर खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को भोजन करा सकते हैं।

    विजयादशमी पर दान करते समय अपनी आर्थिक स्थिति और सामने वाले व्यक्ति की जरूरत को प्राथमिकता दें। दान का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता करना भी होना चाहिए। भोजन, कपड़े, अनाज या दैनिक उपयोग की वस्तुएं अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान की जा सकती हैं। किसी भी तरह के दिखावे से बचें और सेवा भाव के साथ दान करें।

  • लालकृष्ण आडवाणी की सेहत में हुआ सुधार…. अस्पताल से हुए डिस्चार्ज

    लालकृष्ण आडवाणी की सेहत में हुआ सुधार…. अस्पताल से हुए डिस्चार्ज


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) को इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ( Hospital) से डिस्चार्ज (Discharge) कर दिया गया है. अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी बयान के अनुसार, 98 वर्षीय वरिष्ठ नेता की सेहत में सुधार हुआ है, इसलिए उन्हें सोमवार को अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है. अस्पताल प्रशासन ने अपने बयान में कहा कि आडवाणी को छाती में संक्रमण के कारण 16 अक्टूबर को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था और राहत मिलने के बाद उन्हें छुट्टी दी जा रही है. आडवाणी न्यूरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विनीत सूरी की देखरेख में थे और उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।

    पूर्व उपप्रधानमंत्री को 16 अक्टूबर की शाम 7:30 बजे छाती में संक्रमण के चलते इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के पल्मोनरी (फेफड़ों से संबंधित) विभाग में भर्ती कराया गया था।


    दिग्गजों ने जाना हाल

    इससे पहले शनिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी अस्पताल में आडवाणी से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना. ऐसा पहली बार नहीं है जब हाल के महीनों में इस वरिष्ठ नेता को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है. इससे पहले, इस साल मई में भी उन्हें उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. तब वे कुछ दिनों तक डॉक्टरों की देखरेख में रहे और फिर उन्हें छुट्टी दे दी गई थी।

    इसके अलावा, दिसंबर 2024 में भी आडवाणी को इलाज और जांच के लिए इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती कराया गया था. उनका इलाज एक न्यूरोलॉजिस्ट की देखरेख में हुआ था।


    शानदार सफर

    8 नवंबर 1927 को कराची में जन्मे आडवाणी भाजपा के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक हैं. उन्होंने भाजपा को एक छोटी राजनीतिक ताकत से बड़े राष्ट्रीय राजनीतिक संगठन के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभाई।

    आडवाणी कई बार भाजपा के अध्यक्ष रहे और उन्होंने पूरे देश में पार्टी के संगठनात्मक आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. 1990 में उनकी देशव्यापी ‘राम रथ यात्रा’ भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुई, जिससे भाजपा की राजनीतिक पहुंच का विस्तार हुआ।

    उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में 2002 से 2004 तक भारत के उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया. अपने राजनीतिक करियर के दौरान, उन्होंने गृह मंत्रालय सहित कई महत्वपूर्ण विभागों (पोर्टफोलियो) की जिम्मेदारी भी संभाली. सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को देखते हुए, आडवाणी को 2024 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया।

    इससे पहले, 2015 में उन्हें ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था. आडवाणी भाजपा के एक वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी के राजनीतिक इतिहास का एक अहम हिस्सा रहे हैं।

  • गल्फ ऑफ अमेरिका के बाद अब न्यू मैक्सिको का नाम बदलने की तैयारी, ट्रंप बोले- ‘न्यू अमेरिका’ कर देना चाहिए

    गल्फ ऑफ अमेरिका के बाद अब न्यू मैक्सिको का नाम बदलने की तैयारी, ट्रंप बोले- ‘न्यू अमेरिका’ कर देना चाहिए


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर जगहों के नाम बदलने को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको का नाम बदलकर ‘न्यू अमेरिका’ करने की मांग की है। ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि राज्य का नाम तुरंत बदल देना चाहिए। उन्होंने लिखा कि अमेरिका, मैक्सिको नहीं, बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका है।

    ट्रंप का तर्क है कि नाम बदलने से न्यू मैक्सिको की पहचान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। उन्होंने यह दावा भी किया कि इससे राज्य के लोगों के घरों की कीमत और उनकी आमदनी में इजाफा हो सकता है। अपने पोस्ट में उन्होंने न्यू मैक्सिको के चुनावों पर भी तंज कसा और कहा कि नाम बदलने से शायद वहां के चुनाव भी ईमानदार हो जाएं। हालांकि, नाम बदलने से संपत्ति की कीमतों या आय में बढ़ोतरी होने के उनके दावे के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं दिया गया है।

    सितंबर में भी उठाई थी मांग
    ट्रंप इससे पहले सितंबर में भी न्यू मैक्सिको का नाम ‘न्यू अमेरिका’ करने की बात कह चुके हैं। उस समय उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ऐसा नक्शा साझा किया था, जिसमें राज्य का नाम बदला हुआ दिखाया गया था। उन्होंने एक वीडियो में भी ‘न्यू अमेरिका’ नाम का इस्तेमाल किया था।

    हालांकि, ट्रंप के इस प्रस्ताव को राज्य की गवर्नर मिशेल लुजान ग्रिशम का समर्थन नहीं मिला। उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा था कि न्यू मैक्सिको का नाम उसके इतिहास से जुड़ा है और इस मुद्दे पर बहस नहीं होनी चाहिए।

    क्या राष्ट्रपति अकेले बदल सकते हैं राज्य का नाम?
    ट्रंप की मांग के बावजूद न्यू मैक्सिको का आधिकारिक नाम बदलना उनके अकेले के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसके लिए राज्य की संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसमें राज्य की विधायिका की मंजूरी और मतदाताओं की सहमति की आवश्यकता हो सकती है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति संघीय सरकारी विभागों को किसी राज्य के लिए नया नाम इस्तेमाल करने का निर्देश दे सकते हैं, लेकिन ऐसा करने भर से राज्य का आधिकारिक नाम नहीं बदल जाता। इसलिए ‘न्यू अमेरिका’ नाम फिलहाल ट्रंप का प्रस्ताव है, आधिकारिक बदलाव नहीं।

    गल्फ ऑफ अमेरिका से माउंट मैकिनले तक नाम बदलने की पहल
    ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में कई भौगोलिक नामों को बदलने की पहल कर चुके हैं। जनवरी 2025 में उन्होंने गल्फ ऑफ मेक्सिको का नाम अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल के लिए ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। इसी दौरान अलास्का की प्रमुख चोटी डेनाली का नाम बदलकर फिर से ‘माउंट मैकिनले’ कर दिया गया।

    अगस्त 2026 में लेक ओंटारियो का नाम अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल के लिए ‘लेक अमेरिका’ करने का आदेश दिए जाने की बात भी सामने आई। इसके अलावा ट्रंप अटलांटिक या प्रशांत महासागर का नाम बदलने का विचार भी जता चुके हैं। उन्होंने प्रशांत महासागर के लिए ‘ट्रंप ओशन’ या ‘ओशन ऑफ द अमेरिकाज’ जैसे नाम सुझाए थे।

    न्यू मैक्सिको का नाम बदलने की नई मांग भी इसी सिलसिले की अगली कड़ी है। हालांकि, इस प्रस्ताव का भविष्य राज्य की संवैधानिक प्रक्रिया और वहां के राजनीतिक समर्थन पर निर्भर करेगा।

  • सौरव दास-आशुतोष रांका पर लगी कई धाराएं, जंतर-मंतर प्रदर्शन केस की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

    सौरव दास-आशुतोष रांका पर लगी कई धाराएं, जंतर-मंतर प्रदर्शन केस की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी


    नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 13 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल को सौंप दी है। इस मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थानों में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में बाधा डाली गई और पुलिसकर्मियों को ड्यूटी करने से रोकने के लिए बल प्रयोग किया गया।

    जांच ट्रांसफर करने का फैसला दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाए जाने के कुछ समय बाद लिया गया। अब मामले से जुड़े आरोपों और घटनाक्रम की आगे की जांच क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल करेगी।

    दोनों एफआईआर में अलग-अलग धाराएं
    कनॉट प्लेस थाने में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223A, 332 और 61(2) लगाई गई हैं। ये धाराएं सरकारी आदेश की अवहेलना, अपराध के इरादे से घर या परिसर में प्रवेश और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं।

    वहीं, संसद मार्ग थाने में दर्ज दूसरी एफआईआर में BNS की धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) शामिल हैं। ये धाराएं सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने, चोट पहुंचाने, ड्यूटी से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल प्रयोग करने और साझा मंशा से जुड़े आरोपों के तहत लगाई गई हैं।

    पुलिस ने प्रदर्शन को लेकर क्या आरोप लगाए?
    दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर इलाके में प्रदर्शन के दौरान CJP के सदस्यों को हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए और राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।

    पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारी एक निजी परिसर से होकर जंतर-मंतर में प्रवेश कर रहे थे। बताया गया कि इस परिसर को प्रदर्शन स्थल की अधिसूचित सूची से एक दिन पहले हटा दिया गया था। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों को सरकारी काम करने से रोका गया। इन आरोपों की जांच अब क्राइम ब्रांच करेगी।

    दो दिन बढ़ी न्यायिक हिरासत
    सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने न्यायिक हिरासत में भेजा था। सोमवार को दोनों को मंदिर मार्ग थाने में नवनियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई।

    इस मामले में CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को पीस बॉन्ड पर रिहा किया गया है। उन्हें छह महीने तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त के साथ निजी मुचलके और 5,000 रुपये की जमानत राशि पर छोड़ा गया। फिलहाल, सौरव दास और आशुतोष रांका से जुड़े मामलों की आगे की जांच क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल करेगी।

  • दाऊद की ‘D-कंपनी’ से लॉरेंस की ‘L-कंपनी’ तक: मुंबई अंडरवर्ल्ड का बदला चेहरा, बॉलीवुड फिर निशाने पर

    दाऊद की ‘D-कंपनी’ से लॉरेंस की ‘L-कंपनी’ तक: मुंबई अंडरवर्ल्ड का बदला चेहरा, बॉलीवुड फिर निशाने पर


    नई दिल्ली। एक दौर था, जब मुंबई की फिल्मी दुनिया में किसी बड़े प्रोजेक्ट की चर्चा के साथ अंडरवर्ल्ड का नाम भी जुड़ जाता था। निर्माता हों, बिल्डर हों, कारोबारी हों या बड़े फिल्मी सितारे—गैंगस्टरों की धमकियों और रंगदारी की खबरें लोगों को दहशत में डाल देती थीं। 1980 और 1990 के दशक में करीम लाला, हाजी मस्तान और वरदराजन मुदलियार जैसे नामों के बाद दाऊद इब्राहिम और उसकी डी-कंपनी का दबदबा चर्चा में आया। वक्त बदला, शहर का नाम बॉम्बे से मुंबई हो गया, लेकिन संगठित अपराध की चुनौती खत्म नहीं हुई।

    1990 के दशक में दाऊद का नेटवर्क तस्करी और अवैध कारोबार से आगे बढ़कर रंगदारी, सुपारी लेकर हत्या, जमीनों पर कब्जे और फिल्म इंडस्ट्री में कथित दखल तक पहुंच गया था। 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के बाद पुलिस ने अंडरवर्ल्ड के खिलाफ कार्रवाई तेज की। कई गैंगस्टर देश छोड़कर चले गए, कुछ गिरफ्तार हुए और पुराने नेटवर्क कमजोर पड़ने लगे। इसके बावजूद संगठित अपराध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ, बल्कि उसके तरीके और नेटवर्क बदलते रहे।

    अब मुंबई में फिल्मी हस्तियों को धमकियां देने, कथित रंगदारी मांगने और गोलीबारी की घटनाओं में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आने से एक बार फिर अंडरवर्ल्ड की चर्चा तेज है। सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग, बाबा सिद्दीकी की हत्या और फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के घर के बाहर गोलीबारी जैसी घटनाओं ने बॉलीवुड की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या दाऊद की डी-कंपनी के बाद मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई की ‘एल-कंपनी’ का दौर शुरू हो रहा है?

    जब डी-कंपनी के नाम से कांपती थी फिल्म इंडस्ट्री
    1990 के दशक में मुंबई के अंडरवर्ल्ड और बॉलीवुड के रिश्ते लगातार सुर्खियों में रहते थे। दाऊद इब्राहिम और उसके गिरोह पर फिल्म निर्माताओं तथा कारोबारियों को धमकाने, रंगदारी मांगने और फिल्म व्यवसाय में दखल देने के आरोप लगते रहे। उस दौर में छोटा राजन, छोटा शकील और अबू सलेम जैसे नाम भी अंडरवर्ल्ड की चर्चाओं में प्रमुखता से सामने आते थे।

    फिल्म उद्योग में बढ़ते कारोबार और विदेशों में भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता के बीच फिल्म फाइनेंस तथा वितरण अधिकार भी गैंगस्टरों की दिलचस्पी का विषय बने। आरोप लगते रहे कि डी-कंपनी से जुड़े लोग फिल्मों में पैसा लगाने के साथ-साथ निर्माताओं पर दबाव बनाते थे। कुछ मामलों में कलाकारों के चयन और फिल्मों के कारोबार को प्रभावित करने की कोशिशों की भी चर्चा हुई।

    हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि उस दौर में हर फिल्म की कास्टिंग, निर्माण या रिलीज पर डी-कंपनी का नियंत्रण था। लेकिन कई चर्चित घटनाओं ने यह जरूर दिखाया कि आपराधिक गिरोह फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को निशाना बनाने और उनके कारोबार पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे थे।

    1993 के बम धमाकों के बाद दाऊद भारत छोड़ चुका था, लेकिन उसके नेटवर्क और सहयोगियों को लेकर पुलिस की जांच जारी रही। उसके गिरोह पर रंगदारी, धमकियों और फिल्म कारोबार में कथित हस्तक्षेप के आरोप लगते रहे।

    गुलशन कुमार की हत्या से राकेश रोशन पर हमले तक
    बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड के खौफ की चर्चा के बीच कई ऐसी वारदातें हुईं, जिन्होंने फिल्मी दुनिया की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा की।

    12 अगस्त 1997 को टी-सीरीज के संस्थापक और संगीत कारोबारी गुलशन कुमार की मुंबई के अंधेरी इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले मार्च 1997 में फिल्म निर्माता मुकेश दुग्गल की हत्या हुई थी और जुलाई में निर्देशक राजीव राय पर हमला किया गया था। जनवरी 2000 में फिल्म निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन को उनके कार्यालय के बाहर गोली मारी गई, हालांकि वह बच गए।

    इन घटनाओं में अलग-अलग आपराधिक गिरोहों के नाम और उनकी कथित भूमिका चर्चा में आई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि फिल्म इंडस्ट्री के सामने खतरा केवल एक गिरोह तक सीमित नहीं था। कई आपराधिक नेटवर्क अपने प्रभाव और वसूली के लिए फिल्मी हस्तियों तथा कारोबारियों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे।

    1990 के दशक के अंत और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई, गिरफ्तारियों तथा कई प्रमुख अपराधियों के देश से बाहर चले जाने या जेल में बंद होने के कारण पुराने गिरोहों के लिए पहले की तरह खुले तौर पर काम करना कठिन हुआ। फिल्म निर्माण और फाइनेंस के औपचारिक ढांचे में भी बदलाव आया। इसके बावजूद संगठित अपराध की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुईं।

    छात्र राजनीति से अपराध की दुनिया तक पहुंचा लॉरेंस बिश्नोई
    पुराने अंडरवर्ल्ड नेटवर्क कमजोर पड़ने के बाद उत्तर भारत में सक्रिय नए गैंगस्टरों के नाम सामने आने लगे। इनमें लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ का नेटवर्क प्रमुखता से चर्चा में आया।

    लॉरेंस बिश्नोई ने पंजाब में छात्र राजनीति के दौरान अपनी पहचान बनाई। वह पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र संगठन एसओपीयू से जुड़ा था। छात्र चुनावों और स्थानीय रंजिशों के बीच उसके खिलाफ मारपीट, धमकी और अन्य आपराधिक मामलों में कार्रवाई हुई। समय के साथ उसके संपर्क दूसरे अपराधियों से बढ़े और उसका नेटवर्क जेलों के भीतर तथा बाहर सक्रिय सहयोगियों तक फैलता गया।

    संपत नेहरा भी उसके नेटवर्क से जुड़ा प्रमुख नाम बना। नेहरा का नाम 2018 में सलमान खान को निशाना बनाने की कथित योजना के सिलसिले में सामने आया था। इससे पहले पंजाब और हरियाणा में स्थानीय चुनावों तथा आपसी रंजिशों से जुड़े हिंसक मामलों में भी उसका नाम चर्चा में रहा।

    लॉरेंस लंबे समय से जेल में बंद रहने के बावजूद अपने सहयोगियों के जरिए नेटवर्क संचालित करने के आरोपों के कारण सुर्खियों में रहा है। गोल्डी बराड़, काला जठेड़ी, रोहित गोदारा और अनमोल बिश्नोई जैसे नाम उसके नेटवर्क से जुड़े मामलों में सामने आते रहे हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क का विस्तार पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों तक रहा है।

    इस गिरोह पर कारोबारियों और अन्य लोगों से रंगदारी मांगने, धमकियां देने, हथियारों से जुड़े अपराधों तथा हत्या की साजिशों में शामिल होने के आरोप हैं। हालांकि, अलग-अलग मामलों में आरोपों और उनकी कानूनी स्थिति का आकलन संबंधित जांच और अदालत की कार्यवाही के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

    साबरमती जेल में बंद, फिर भी नेटवर्क पर सवाल
    लॉरेंस बिश्नोई अगस्त 2023 से गुजरात की अहमदाबाद स्थित साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। उसकी जेल से आवाजाही पर प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था के कारण उसे लेकर कई मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी की खबरें सामने आती रही हैं।

    जेल में बंद होने के बावजूद उसके नाम से जुड़ी धमकियों और हिंसक वारदातों के मामलों ने जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल खड़ा किया है कि उसके सहयोगियों का नेटवर्क किस तरह काम करता है और कथित अपराधों में निर्देश या जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या सबूत उपलब्ध हैं। किसी घटना में गिरोह का नाम सामने आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि जेल में बंद सरगना ने ही उसका निर्देश दिया था; इसके लिए जांच और न्यायिक प्रक्रिया अहम है।

    सलमान खान के घर पर फायरिंग से बाबा सिद्दीकी की हत्या तक
    लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम बॉलीवुड में खास तौर पर सलमान खान को निशाना बनाए जाने के मामलों के बाद चर्चा में आया। 14 अप्रैल 2024 को मुंबई के बांद्रा इलाके में सलमान खान के घर के बाहर बाइक सवार हमलावरों ने गोलियां चलाई थीं। मुंबई पुलिस ने मामले में गिरोह से कथित संबंध रखने वाले कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की और आरोपपत्र दाखिल किया।

    इसके बाद अक्टूबर 2024 में पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या कर दी गई। इस मामले की जांच में सलमान खान से उनकी करीबी को संभावित कारण के तौर पर सामने रखा गया। पुलिस की जांच और आरोपपत्र में इस पहलू का उल्लेख किए जाने की खबरें आईं। हालांकि, किसी भी आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।

    इन घटनाओं ने फिल्मी हस्तियों के साथ-साथ उनसे जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाई। इसके बाद सलमान खान और उनके आसपास के लोगों को धमकियों से जुड़े मामलों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

    रोहित शेट्टी से टाइगर श्रॉफ तक, गोलीबारी की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
    फरवरी 2026 में फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर गोलीबारी की घटना सामने आई। इस मामले में पुलिस ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने के आरोप में कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की और आरोपपत्र दाखिल किए जाने की खबरें आईं।

    इसके बाद 18 अक्टूबर 2026 को अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार को मुंबई के जुहू इलाके में निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, कार पर गोलियां चलाई गईं और अभिनेता इस घटना में सुरक्षित रहे। इस वारदात के बाद एक बार फिर सवाल उठा कि क्या फिल्मी हस्तियों को निशाना बनाकर कोई गिरोह मुंबई में अपनी मौजूदगी और दबदबा स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

    इन घटनाओं की जांच में आरोपियों के संबंध, हमले के पीछे संभावित मकसद और कथित जिम्मेदारी जैसे पहलू महत्वपूर्ण हैं। किसी गिरोह के नाम का इस्तेमाल करके डर पैदा करना और वास्तव में पूरे शहर या फिल्म इंडस्ट्री पर नियंत्रण स्थापित करना दो अलग-अलग बातें हैं।

    डी-कंपनी और एल-कंपनी: क्या हैं दोनों के बीच अंतर?
    डी-कंपनी के दौर में अंडरवर्ल्ड के प्रभाव की चर्चा तस्करी, रंगदारी, फिल्म फाइनेंस, विदेशों में वितरण अधिकार और फिल्मी हस्तियों पर दबाव बनाने के संदर्भ में होती थी। दाऊद के नेटवर्क को लेकर कई मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जांच हुई।

    इसके मुकाबले लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े हालिया मामलों में धमकी भरे संदेश, कथित वसूली की मांग, गोलीबारी और सोशल मीडिया पर हमलों की जिम्मेदारी लेने जैसे तरीके चर्चा में आए हैं। डिजिटल माध्यमों और अलग-अलग राज्यों में फैले सहयोगियों के कारण ऐसे नेटवर्क की जांच में पुलिस को नए तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

    दोनों दौर में रंगदारी, धमकी और हिंसा जैसे कुछ समान तत्व जरूर दिखाई देते हैं। लेकिन उनके नेटवर्क, वित्तीय ढांचे, काम करने के तरीके और वास्तविक प्रभाव की तुलना करने के लिए ठोस जांच संबंधी आंकड़ों तथा मामलों के दस्तावेजों की जरूरत है। केवल चर्चित घटनाओं के आधार पर दोनों गिरोहों की ताकत या नियंत्रण को एक समान नहीं माना जा सकता।

    क्या मुंबई में सचमुच ‘एल-कंपनी’ का दौर है?
    मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों ने संगठित अपराध और बॉलीवुड की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। फिर भी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि इस गिरोह ने पूरे मुंबई शहर या फिल्म इंडस्ट्री पर डी-कंपनी जैसी पकड़ बना ली है।

    मुंबई पुलिस के आंकड़ों पर आधारित फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में 2025 के दौरान रंगदारी के 314 मामले दर्ज हुए, जबकि 2024 में यह संख्या 199 थी। रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से यह भी कहा गया कि रंगदारी के सभी मामलों को बड़े आपराधिक गिरोहों से जोड़ना सही नहीं होगा; इनमें स्थानीय बदमाशों और अन्य प्रकार की वसूली से जुड़े मामले भी हो सकते हैं।

    इसलिए ‘एल-कंपनी का दौर’ फिलहाल मुंबई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों की बढ़ती चर्चा और फिल्मी हस्तियों को मिल रही धमकियों को समझाने वाला एक रूपक है, न कि पूरे शहर पर उसके नियंत्रण का प्रमाण।

    मुंबई के अंडरवर्ल्ड की कहानी में नाम बदले हैं, नेटवर्क बदले हैं और अपराध के तरीके भी बदले हैं। लेकिन किसी गिरोह की वास्तविक ताकत का आकलन सुर्खियों या दावों से नहीं, बल्कि उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों, पुलिस की जांच और अदालत में साबित तथ्यों से किया जाना चाहिए।

  • ‘पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा’, ट्रंप का मैक्रों पर तंज, फ्रांस की इमिग्रेशन नीति को ठहराया हिंसा के लिए जिम्मेदार

    ‘पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा’, ट्रंप का मैक्रों पर तंज, फ्रांस की इमिग्रेशन नीति को ठहराया हिंसा के लिए जिम्मेदार


    नई दिल्ली। फ्रांस में प्रदर्शन, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इमिग्रेशन यानी आव्रजन नीति पर सवाल उठाए हैं। व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने दावा किया कि पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा। उन्होंने कहा कि मैक्रों उनके दोस्त हैं, लेकिन उन्होंने कई साल पहले ही फ्रांसीसी राष्ट्रपति को चेतावनी दी थी कि दूसरे देशों से बड़ी संख्या में लोगों को फ्रांस में आने देना गलत फैसला होगा।

    ट्रंप ने फ्रांस में बिगड़े हालात के लिए मैक्रों की आव्रजन नीति को जिम्मेदार ठहराया और यूरोप की इमिग्रेशन नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैक्रों ने उनकी सलाह पर ध्यान नहीं दिया। हालांकि, फ्रांस में हाल में शुरू हुए प्रदर्शनों की प्रमुख वजह महंगाई, बढ़ते खर्च और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों की नाराजगी बताई गई है। इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगह हिंसा और लूटपाट की घटनाएं भी हुईं।

    ‘मैक्रों को पहले ही चेताया था’

    ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने मैक्रों से काफी पहले कहा था कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोगों को फ्रांस में प्रवेश देने की नीति सही नहीं है। उनका दावा है कि इस नीति के कारण पेरिस का स्वरूप बदल रहा है। ट्रंप ने इसी संदर्भ में फ्रांस को अपनी सीमाओं पर सख्ती बरतने की जरूरत बताई।

    उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब फ्रांस के कई शहरों में सप्ताहांत के दौरान हुए प्रदर्शनों के बाद आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। राजधानी पेरिस के अलावा लिली, नीस और अन्य शहरों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। कुछ इलाकों में सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाई गई और रात के समय पाबंदियां लागू की गईं।

    पेरिस के कुछ इलाकों में कर्फ्यू, इमरजेंसी पर भी चर्चा

    फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने कहा कि फिलहाल पूरे पेरिस में कर्फ्यू लगाने के बजाय संवेदनशील इलाकों में पाबंदियां लगाना अधिक उचित है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर आपातकाल घोषित करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया।

    पेरिस पुलिस ने कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शनों पर रोक लगाई। प्लास दे ला रिपब्लिक और ले आल इलाके में रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया। प्रशासन का जोर हिंसा को रोकने और सार्वजनिक संपत्तियों तथा कारोबार को नुकसान से बचाने पर है।

    फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, हिंसा के बाद करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया और लगभग 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए। वहीं, व्यापार और खुदरा कारोबार से जुड़े संगठनों के अनुसार, हिंसा से करीब 3,000 दुकानें प्रभावित हुईं।

    मैक्रों ने हिंसा की निंदा की, आर्थिक चिंताओं को माना जायज

    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को टेलीविजन पर देश को संबोधित करते हुए हिंसा और तोड़फोड़ की निंदा की थी। उन्होंने कहा कि किसी भी वजह से ऐसी घटनाओं को सही नहीं ठहराया जा सकता। मैक्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों की मांगों को हिंसा में शामिल लोगों की गतिविधियों से अलग रखने पर जोर दिया।

    उन्होंने यह भी माना कि महंगाई, आर्थिक परेशानियों और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों की चिंताओं को समझना जरूरी है। सरकार के सामने एक ओर प्रदर्शनकारियों की समस्याओं का समाधान तलाशने और दूसरी ओर हिंसा पर नियंत्रण करने की चुनौती है।

    स्कूलों की समस्याओं से शुरू हुआ आंदोलन, बाद में बढ़ा दायरा

    फ्रांस में प्रदर्शनों की शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों की कमी और खराब व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन से हुई थी। बाद में महंगाई, बढ़ते खर्च और सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर व्यापक असंतोष भी इसमें शामिल हो गया।

    फिलहाल फ्रांस सरकार सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने, हिंसा से प्रभावित कारोबारियों की मदद करने और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने की कोशिश कर रही है। इसी बीच ट्रंप ने इन घटनाओं को मैक्रों की आव्रजन नीति से जोड़ते हुए अपनी पुरानी चेतावनी का हवाला दिया है। हालांकि, प्रदर्शन शुरू होने के पीछे बताए गए आर्थिक और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दे आव्रजन नीति से अलग हैं।

  • दशहरे पर MP के 25 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट, 50 किमी की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

    दशहरे पर MP के 25 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट, 50 किमी की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर थम नहीं रहा है। दशहरे के दिन मंगलवार को प्रदेश के आधे हिस्से में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नर्मदापुरम और सागर संभाग के 25 जिलों में बारिश हो सकती है। मौसम के इस मिजाज से दशहरा आयोजनों पर भी असर पड़ने की आशंका है।

    बारिश की संभावना को देखते हुए भोपाल में कलाकारों ने रावण के पुतलों को बरसाती से ढक दिया है। इससे पहले 2022 में बारिश के कारण रावण के पुतले ठीक से नहीं जल पाए थे। उस समय उन्हें जलाने के लिए केरोसिन और पेट्रोल का इस्तेमाल करना पड़ा था। इस बार आयोजक पहले से ही एहतियात बरत रहे हैं।

    इन 25 जिलों में बारिश की संभावना

    मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान भोपाल, इंदौर, उज्जैन, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, रायसेन, सागर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश का अनुमान जताया है।

    मौसम में बदलाव की वजह चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और ट्रफ को बताया गया है। इनके प्रभाव से प्रदेश में अगले चार दिन, यानी 23 अक्टूबर तक, कहीं-कहीं बारिश का दौर जारी रह सकता है। इस दौरान 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी संभावना है।

    दूसरी ओर, प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मौसम अपेक्षाकृत साफ रह सकता है। जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों में धूप निकलने के आसार हैं।

    कई जिलों में रात का तापमान 20 डिग्री से नीचे

    बारिश के बीच प्रदेश के कई इलाकों में रात का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। बीती रात छिंदवाड़ा में न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री, कटनी के करौंदी में 17.8 डिग्री, आलीराजपुर और गुना में 18 डिग्री, अमरकंटक में 18.4 डिग्री तथा नीमच के मरुखेड़ा में 18.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    वहीं, दिन में कुछ जिलों में गर्मी का असर बना हुआ है। खंडवा, उज्जैन, खरगोन, रतलाम, राजगढ़ और रायसेन में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया।

    गुना में एक दिन में साढ़े चार इंच बारिश

    प्रदेश में पिछले चार दिनों से आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। गुना में एक ही दिन में करीब साढ़े चार इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, शाजापुर, सीहोर, मंदसौर, उज्जैन, आगर-मालवा, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल और छिंदवाड़ा में भी बारिश हुई।

    इंदौर में सोमवार को दिनभर रुक-रुककर पानी गिरता रहा। प्रदेश के दूसरे जिलों में भी इसी तरह का मौसम बना रहा। बीते सप्ताह पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का असर देखा गया, जबकि पिछले चार दिनों में कुछ इलाकों में तेज बारिश भी हुई।

    3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून, फिर भी जारी बारिश


    मध्यप्रदेश से मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को ही हो चुकी है। इस बार एक ही दिन में पूरे प्रदेश से मानसून लौट गया था। इसके बावजूद चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ जैसे मौसमी सिस्टम सक्रिय होने के कारण बारिश जारी है।

  • रुपए को मजबूती देने और विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार और आरबीआई के कदमों को एसोचैम का समर्थन

    रुपए को मजबूती देने और विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार और आरबीआई के कदमों को एसोचैम का समर्थन


    नई दिल्ली:  
    रुपए में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेश के रुझानों के बीच सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से उठाए गए कदमों को उद्योग संगठन एसोचैम ने समर्थन दिया है। संगठन का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच रुपए को सहारा देने, निवेशकों का भरोसा मजबूत करने और दीर्घकालिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयास सही दिशा में हैं। एसोचैम के मुताबिक, भारत की आर्थिक बुनियाद को मजबूत बनाए रखते हुए स्थायी पूंजी प्रवाह बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

    एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के मौजूदा दौर में व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार और आरबीआई के समन्वित प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने रुपए की दीर्घकालिक मजबूती को देश की आर्थिक स्थिति और लगातार विदेशी पूंजी आकर्षित करने की क्षमता से जोड़कर देखा। संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि केवल अस्थायी पूंजी प्रवाह के बजाय लंबे समय तक टिकने वाले निवेश को बढ़ावा देना जरूरी है।

    मिंडा ने पूर्व आरबीआई गवर्नर डी. सुब्बाराव के विचारों का भी समर्थन किया। सुब्बाराव ने कहा था कि रुपए की दीर्घकालिक मजबूती अंततः भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और निरंतर पूंजी प्रवाह आकर्षित करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। एसोचैम अध्यक्ष के अनुसार, संगठन इस विचार से सहमत है और सरकार तथा आरबीआई की ओर से पहले ही उठाए गए कदमों को महत्वपूर्ण मानता है।

    एसोचैम ने दावा किया कि हाल में किए गए उपायों से रुपया अपने हालिया निचले स्तरों से उबरने में सफल रहा है। संगठन ने 31 अगस्त को समाप्त हुई 133 अरब डॉलर की एफसीएनआर (बी) मोबिलाइजेशन विंडो का भी उल्लेख किया। इस पहल को विदेशी मुद्रा जुटाने से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में अहम बताया गया।

    संगठन के मुख्य अर्थशास्त्री एस.पी. शर्मा ने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। इसके प्रमुख आधारों में पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आरबीआई का 7.1 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान और महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए अपनाई गई संतुलित मौद्रिक नीति शामिल हैं। उनके मुताबिक, ये कारक देश की आर्थिक स्थिरता को समर्थन देते हैं।

    एसोचैम ने विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए वित्त मंत्रालय की ओर से हाल में घोषित कदमों का भी स्वागत किया। इनमें आयकर संशोधन अध्यादेश, 2026 शामिल है। इसके तहत 1 अप्रैल 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई के निवेश पर मिलने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर छूट का प्रावधान किया गया है। संगठन ने इसे विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया।

    इसके अलावा, एसोचैम ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी के दौरान दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर यानी एलटीसीजी और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी को लेकर निवेशकों की राय पर विचार करने की बात कही थी।

    हालांकि, संगठन ने कर व्यवस्था में और सुधार की जरूरत भी बताई। एसोचैम के अनुसार, कर ढांचे को अधिक तर्कसंगत बनाने, नियमों की व्याख्या सरल करने और दीर्घकालिक इक्विटी निवेश को प्रोत्साहित करने वाले उपायों पर विचार किया जाना चाहिए। संगठन ने अल्पकालिक पूंजी प्रवाह की तुलना में लंबे समय तक बने रहने वाले निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

    एसोचैम ने कहा कि भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से वह सरकार, आरबीआई और बाजार नियामक सेबी के साथ मिलकर काम जारी रखेगा। संगठन का मानना है कि स्थिर आर्थिक नीतियां, स्पष्ट कर व्यवस्था और भरोसेमंद निवेश माहौल दीर्घकालिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • शेयर बाजार में भारी बिकवाली, सेंसेक्स 876 अंक टूटा और निफ्टी 23 हजार के स्तर से नीचे फिसला

    शेयर बाजार में भारी बिकवाली, सेंसेक्स 876 अंक टूटा और निफ्टी 23 हजार के स्तर से नीचे फिसला


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 19 अक्टूबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों और प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में मुनाफावसूली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 876.37 अंक यानी 1.17 प्रतिशत टूटकर 73,852.90 पर आ गया। वहीं, निफ्टी 257.20 अंक यानी 1.11 प्रतिशत गिरकर 22,888.95 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ निफ्टी 23,000 के मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया।

    सोमवार के कारोबार में बाजार के ज्यादातर प्रमुख क्षेत्रों में कमजोरी रही। निजी बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, एफएमसीजी और आईटी शेयरों पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों की बिकवाली का असर बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के सूचकांकों पर भी पड़ा। बाजार में व्यापक गिरावट से संकेत मिला कि निवेशक वैश्विक परिस्थितियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा। यह 1.85 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.58 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 1.44 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 1.28 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी सर्विसेज 1.25 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.20 प्रतिशत और निफ्टी कंजप्शन 1.05 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। निफ्टी इंडिया डिफेंस में भी 0.94 प्रतिशत की गिरावट रही।

    बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच निफ्टी पीएसयू बैंक एकमात्र ऐसा प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक रहा, जिसने तेजी दर्ज की। यह 2.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मार्जिन और एसेट क्वालिटी स्थिर रहने की उम्मीदों से समर्थन मिला। इसके विपरीत, निजी बैंकों में तिमाही नतीजों और मुनाफे के मार्जिन को लेकर चिंताओं के कारण दबाव बना रहा।

    बड़ी कंपनियों के अलावा मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 641.80 अंक यानी 1.09 प्रतिशत टूटकर 58,487.95 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 194.05 अंक यानी 1.01 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 18,935.75 पर आ गया। इससे स्पष्ट हुआ कि बिकवाली का असर बाजार के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिला।

    सेंसेक्स में शामिल शेयरों में भारतीय स्टेट बैंक, अदाणी पोर्ट्स, एलएंडटी और इंडिगो बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, एनटीपीसी और एचडीएफसी बैंक समेत कई प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक, आईटीसी, टाइटन, टेक महिंद्रा, एमएंडएम और पावर ग्रिड भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    वैश्विक बाजार की परिस्थितियों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। अमेरिका की ओर से रूस से जुड़े प्रमुख प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने की बात कही गई। इससे वैश्विक बाजार में रूसी ईंधन की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद बनी। हालांकि, भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

    कुल मिलाकर, कमजोर वैश्विक संकेतों, निजी बैंकिंग और आईटी शेयरों में बिकवाली तथा तिमाही नतीजों को लेकर बनी चिंताओं के बीच बाजार दबाव में रहा। निफ्टी का 23,000 से नीचे बंद होना और मिडकैप-स्मॉलकैप में गिरावट निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है।

  • जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग, आठ से ज्यादा दमकल गाड़ियां मौके पर, कारणों की जांच शुरू

    जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग, आठ से ज्यादा दमकल गाड़ियां मौके पर, कारणों की जांच शुरू


    मध्य प्रदेश: के जबलपुर स्थित रिछाई औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार दोपहर पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। आग पर काबू पाने के लिए आठ से अधिक दमकल गाड़ियों को लगाया गया है। घटनास्थल पर आग बुझाने के साथ बचाव अभियान भी चलाया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, फिलहाल किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।

    यह घटना आधारताल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रिछाई औद्योगिक क्षेत्र में हुई। फैक्ट्री में आग लगने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। दमकलकर्मी लगातार आग बुझाने के प्रयास में जुटे हैं। आग की स्थिति को देखते हुए बचाव अभियान भी जारी रखा गया है। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पाने और घटनास्थल की स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    पुलिस के मुताबिक, आग लगने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों से मिली शुरुआती जानकारी में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। हालांकि, इसे आग लगने की पुष्ट वजह नहीं माना गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीष भारद्वाज ने बताया कि फिलहाल घटना में किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। आग लगने की वजह की पुष्टि के लिए जांच जरूरी है। इसके लिए फॉरेंसिक साइंस लैब यानी एफएसएल की टीम की जांच और आकलन महत्वपूर्ण होगा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग किन परिस्थितियों में लगी और इसके पीछे क्या कारण रहे।

    फैक्ट्री में आग लगने की घटना के बाद वहां हुए नुकसान का आकलन भी किया जाना बाकी है। आग से भवन, मशीनों, कच्चे माल और तैयार उत्पादों को कितना नुकसान पहुंचा है, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। दमकलकर्मियों के आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद ही नुकसान की स्थिति का सही आकलन किया जा सकेगा।

    औद्योगिक क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद फिलहाल प्राथमिकता आग बुझाने और बचाव कार्य पूरा करने की है। पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर मौजूद हैं। आग के कारणों की जांच के साथ यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि घटना किस तरह शुरू हुई और किन परिस्थितियों में फैली। शुरुआती स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका सामने आई है, लेकिन जांच से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है।

    फिलहाल, जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में आग बुझाने का अभियान जारी है। पुलिस के अनुसार, अभी तक किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली है। आग पर पूरी तरह नियंत्रण, संभावित नुकसान और घटना के वास्तविक कारणों को लेकर स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।