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  • ज्योतिष में क्यों खास माना जाता है हरा कलावा? बुध ग्रह से जुड़ी मान्यताओं के बीच जानिए इसे धारण करने के बताए जाने वाले लाभ

    ज्योतिष में क्यों खास माना जाता है हरा कलावा? बुध ग्रह से जुड़ी मान्यताओं के बीच जानिए इसे धारण करने के बताए जाने वाले लाभ

    नई दिल्ली । भारतीय धार्मिक परंपराओं में कलावा का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और शुभ कार्यों के दौरान आमतौर पर लाल या पीले रंग का कलावा बांधा जाता है। हालांकि ज्योतिष शास्त्र में विभिन्न रंगों के कलावों का भी उल्लेख मिलता है, जिनका संबंध अलग-अलग ग्रहों और उनके प्रभावों से जोड़ा जाता है। इन्हीं में से एक हरा कलावा भी है, जिसे विशेष परिस्थितियों में धारण करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि यह कलावा बुध ग्रह से संबंधित माना जाता है और इसे पहनने से व्यक्ति के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध ग्रह बुद्धि, वाणी, तर्क क्षमता, संवाद कौशल, शिक्षा और व्यापार का कारक माना जाता है। इसी कारण हरे रंग को बुध ग्रह का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर स्थिति में होता है या जो अपनी संवाद क्षमता, अध्ययन और निर्णय क्षमता को बेहतर बनाना चाहते हैं, उन्हें ज्योतिषीय सलाह के आधार पर हरा कलावा धारण करने की सलाह दी जाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरा कलावा आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक माना जाता है। कहा जाता है कि इसे धारण करने से व्यक्ति की अभिव्यक्ति क्षमता बेहतर हो सकती है और वह अपने विचारों को अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर पाता है। विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए इसे लाभकारी बताया जाता है जो सार्वजनिक संवाद, व्यापार, शिक्षा या प्रबंधन जैसे क्षेत्रों से जुड़े होते हैं। मान्यता है कि बुध ग्रह के सकारात्मक प्रभाव से व्यक्ति का आत्मबल मजबूत होता है और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार आता है।

    हरे कलावे को मानसिक शांति और एकाग्रता से भी जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह मन को स्थिर रखने और अनावश्यक चिंताओं को कम करने में सहायक माना जाता है। विशेष रूप से विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए इसे शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि एकाग्रता बढ़ने से अध्ययन में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिल सकती है और व्यक्ति अपने लक्ष्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाता है।

    करियर और व्यवसाय के क्षेत्र में भी हरे कलावे का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार बुध ग्रह व्यापार, लेखन, संचार, मार्केटिंग और वित्तीय गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में हरा कलावा धारण करने को व्यावसायिक प्रगति और नए अवसरों से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति की सोच अधिक व्यवस्थित होती है और वह कार्यक्षेत्र में बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनता है।

    हरा कलावा धारण करने के लिए बुधवार का दिन सबसे उपयुक्त माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन बुध ग्रह और भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। परंपरागत मान्यता है कि बुधवार को स्नान के बाद भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर श्रद्धा और सकारात्मक भावना के साथ हरा कलावा धारण किया जाए तो इसका शुभ प्रभाव अधिक माना जाता है।

    ज्योतिषीय परंपराओं में इसे बांधने के कुछ नियम भी बताए गए हैं। मान्यता है कि कलावा तीन गांठों के साथ बांधा जाना चाहिए। पुरुषों के लिए दाहिने हाथ और महिलाओं के लिए बाएं हाथ में इसे धारण करने की परंपरा बताई जाती है। हालांकि ज्योतिषीय उपायों और धार्मिक मान्यताओं को व्यक्तिगत आस्था का विषय माना जाता है और इनके प्रभाव को लेकर अलग-अलग लोगों की मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय उपायों का उद्देश्य व्यक्ति में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन को बढ़ावा देना भी होता है। हरा कलावा भी ऐसी ही मान्यताओं का हिस्सा है, जिसे बुध ग्रह की शुभता और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

  • सिर्फ शुभ मुहूर्त नहीं ग्रहों की चाल भी है जरूरी, जानिए कब करें नए काम की शुरुआत

    सिर्फ शुभ मुहूर्त नहीं ग्रहों की चाल भी है जरूरी, जानिए कब करें नए काम की शुरुआत


    नई दिल्ली । जीवन में नई नौकरी जॉइन करना नया व्यापार शुरू करना या किसी महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत करना हर व्यक्ति के लिए एक बड़ा कदम होता है। भारतीय सनातन परंपरा में ऐसे कार्यों से पहले शुभ मुहूर्त देखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि सही समय पर शुरू किया गया कार्य सफलता के द्वार खोल सकता है। हालांकि ज्योतिष शास्त्र केवल मुहूर्त देखने तक सीमित नहीं है बल्कि ग्रहों की स्थिति दशा और गोचर को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है।

    ज्योतिषाचार्य पंडित शैलेंद्र पांडेय के अनुसार किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले व्यक्ति को अपनी ग्रह दशाओं पर भी ध्यान देना चाहिए। कई बार शुभ मुहूर्त होने के बावजूद ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति कार्य में बाधाएं उत्पन्न कर सकती है। वहीं अनुकूल ग्रह दशाएं व्यक्ति को नए अवसरों और सफलता की ओर तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करती हैं।

    ज्योतिष के अनुसार जब कुंडली में बृहस्पति या शुक्र की महादशा अथवा अंतरदशा चल रही हो तब नए कार्यों की शुरुआत के लिए समय बेहद अनुकूल माना जाता है। ये दोनों ग्रह समृद्धि प्रगति और सकारात्मक अवसरों के कारक माने जाते हैं। इसी प्रकार यदि गोचर में गुरु और शनि अनुकूल स्थिति में हों तो करियर व्यवसाय और आर्थिक मामलों में अच्छे परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

    इसके अलावा साढ़ेसाती या ढैया जैसी चुनौतीपूर्ण अवधियों के समाप्त होने के बाद भी जीवन में नए अध्याय शुरू करने के योग बनते हैं। ऐसे समय में व्यक्ति को नई नौकरी व्यापार विस्तार या निवेश जैसे फैसले लेने का अवसर मिल सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भाग्य स्थान के स्वामी यानी भाग्येश तथा सप्तम भाव के स्वामी सप्तमेश की दशा भी जीवन में नए अवसर लेकर आती है। इन ग्रहों की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को नई जिम्मेदारियां प्रतिष्ठा और उन्नति के अवसर प्रदान कर सकती है। इसलिए किसी बड़े निर्णय से पहले कुंडली का विश्लेषण कराना लाभकारी माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि नए कार्य की शुरुआत करते समय केवल दिन नहीं बल्कि समय और स्थान का चयन भी महत्वपूर्ण होता है। चंद्रबल और ताराबल मजबूत होने पर कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही कार्य के अनुरूप नक्षत्र का चयन और राशि के अनुसार शुभ दिन का चुनाव भी सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में राशि अनुसार कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन करके नए कार्य की शुरुआत करना शुभ माना गया है। मेष राशि के लोग गुरुवार को पीली सरसों ग्रहण कर सकते हैं। वृष और कुंभ राशि वालों के लिए घी शुभ माना गया है। मिथुन तुला और मकर राशि के जातक दही या दही चीनी खाकर शुरुआत कर सकते हैं। कर्क राशि वालों को गुड़ जबकि सिंह और वृश्चिक राशि वालों को पान का सेवन शुभ माना गया है। कन्या और मीन राशि के लोग हरा धनिया खाकर नया कार्य शुरू कर सकते हैं। वहीं धनु राशि वालों के लिए पीली मिठाई शुभ फलदायी मानी गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सही समय सही ग्रह दशा और सकारात्मक संकल्प के साथ शुरू किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को और मजबूत बना सकता है।

  • सावन 2026 की तैयारी शुरू, घर में रखी कुछ पुरानी और अनुपयोगी वस्तुएं बढ़ा सकती हैं परेशानी; जानिए क्या हटाना माना जाता है शुभ

    सावन 2026 की तैयारी शुरू, घर में रखी कुछ पुरानी और अनुपयोगी वस्तुएं बढ़ा सकती हैं परेशानी; जानिए क्या हटाना माना जाता है शुभ

    नई दिल्ली । हिंदू पंचांग में सावन का महीना अत्यंत पवित्र और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह माह भगवान शिव की आराधना, आध्यात्मिक साधना और आत्मिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। देशभर में श्रद्धालु सावन के दौरान व्रत, पूजा-पाठ, जलाभिषेक और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान शिव की उपासना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के आगमन से पहले घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ तथा व्यवस्थित रखना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि साफ-सुथरा और सकारात्मक वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक होता है।

    धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार सावन की शुरुआत से पहले घर में मौजूद कुछ अनुपयोगी या क्षतिग्रस्त वस्तुओं को हटाने की परंपरा रही है। इन वस्तुओं को नकारात्मक ऊर्जा, अव्यवस्था और मानसिक तनाव से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार अलग-अलग हो सकता है, लेकिन स्वच्छता और व्यवस्थित जीवनशैली के दृष्टिकोण से इन्हें उपयोगी माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार घर में रखे सूखे या मुरझाए पौधे सबसे पहले हटाने योग्य वस्तुओं में शामिल होते हैं। हरियाली को जीवन, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। यदि घर में तुलसी या अन्य पौधे पूरी तरह सूख चुके हैं तो उन्हें सम्मानपूर्वक हटाकर नए पौधे लगाने की सलाह दी जाती है। सावन प्रकृति और हरियाली से जुड़ा महीना माना जाता है, इसलिए घर के आसपास का वातावरण भी जीवंत और स्वच्छ रखने पर जोर दिया जाता है।

    इसी प्रकार टूटे हुए बर्तन, चटके हुए कांच और क्षतिग्रस्त शीशों को भी घर में लंबे समय तक रखने से बचने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं में इन्हें अव्यवस्था और नकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। साथ ही ऐसे सामान घर की सुंदरता को भी प्रभावित करते हैं और कई बार दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए सावन से पहले घर की सफाई के दौरान इन्हें हटाना उचित माना जाता है।

    पुराने और अत्यधिक खराब हो चुके झाड़ू को भी बदलने की परंपरा कई परिवारों में देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को स्वच्छता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। ऐसे में टूटी या अनुपयोगी झाड़ू को बदलकर नई झाड़ू रखना शुभ माना जाता है। हालांकि इसका मुख्य उद्देश्य घर में स्वच्छता बनाए रखना और साफ-सफाई को प्राथमिकता देना भी है।

    घर में लंबे समय से रखे खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी हटाने या मरम्मत कराने की सलाह दी जाती है। बंद पड़े मिक्सर, पंखे, प्रेस, टेलीविजन या अन्य उपकरण न केवल जगह घेरते हैं बल्कि अव्यवस्था भी बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवस्थित और साफ वातावरण मानसिक शांति तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। इसी कारण ऐसे अनुपयोगी सामान को हटाने पर जोर दिया जाता है।

    पूजा स्थल की स्वच्छता को भी सावन की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा में उपयोग किए गए पुराने दीपक, राख, आधी जली अगरबत्तियां या अन्य अवशेषों को उचित तरीके से हटाकर पूजा स्थान को साफ रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ पूजा स्थल में आराधना अधिक एकाग्रता और श्रद्धा के साथ की जा सकती है।

    सावन का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक अनुशासन, स्वच्छता और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का भी अवसर माना जाता है। इसी कारण कई लोग इस अवधि से पहले घर की सफाई, अनुपयोगी वस्तुओं की छंटनी और वातावरण को व्यवस्थित करने का कार्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ यह प्रक्रिया मानसिक और सामाजिक दृष्टि से भी लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण व्यक्ति के दैनिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और बेहतर कार्यक्षमता को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है।

  • बिजली के बढ़ते बिल ने खोला चौंकाने वाला राज, फ्लैट में चल रहा था 300 से ज्यादा अजगरों का अवैध ठिकाना; पुलिस छापे में हुआ खुलासा

    बिजली के बढ़ते बिल ने खोला चौंकाने वाला राज, फ्लैट में चल रहा था 300 से ज्यादा अजगरों का अवैध ठिकाना; पुलिस छापे में हुआ खुलासा

    नई दिल्ली । चीन के झेजियांग प्रांत से सामने आए एक हैरान करने वाले मामले ने वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों और कानून प्रवर्तन संस्थाओं का ध्यान आकर्षित किया है। एक सामान्य आवासीय फ्लैट के भीतर 300 से अधिक अजगरों की मौजूदगी का खुलासा होने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। विशेष बात यह रही कि पूरे मामले का पर्दाफाश किसी गुप्त सूचना या शिकायत से नहीं, बल्कि असामान्य रूप से बढ़ी बिजली खपत की जांच के दौरान हुआ। अधिकारियों ने जब फ्लैट पर छापा मारा तो वहां का दृश्य देखकर वे भी चौंक गए।

    मामले की शुरुआत उस समय हुई जब एक स्थानीय निवासी ने पहाड़ी क्षेत्र के पास एक असामान्य आकार और रंग का विशाल सांप देखा। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार सांप सामान्य स्थानीय प्रजातियों से अलग दिखाई दे रहा था और उसका आकार भी काफी बड़ा था। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस और वन्यजीव विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई गई कि सांप स्थानीय प्राकृतिक आवास का हिस्सा नहीं है और संभवतः किसी निजी स्थान से बाहर निकला है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों ने जांच के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अजगरों जैसी प्रजातियों को नियंत्रित वातावरण में जीवित रखने और उनकी संख्या बढ़ाने के लिए विशेष तापमान और नमी की आवश्यकता होती है। इसके लिए बड़े हीटर, तापमान नियंत्रण उपकरण और नमी बनाए रखने वाली मशीनों का लगातार उपयोग करना पड़ता है। ऐसी व्यवस्था सामान्य घरेलू उपयोग की तुलना में कहीं अधिक बिजली की खपत करती है।

    इसी जानकारी के आधार पर जांचकर्ताओं ने क्षेत्र के बिजली उपभोग के आंकड़ों का विश्लेषण शुरू किया। इस दौरान एक फ्लैट ऐसा मिला जहां बिजली की खपत आसपास के अन्य घरों की तुलना में कई गुना अधिक दर्ज की गई थी। लगातार बढ़ती बिजली खपत ने अधिकारियों का संदेह और मजबूत कर दिया। इसके बाद संबंधित फ्लैट की निगरानी की गई और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद वहां छापेमारी की गई।

    छापे के दौरान अधिकारियों को जो मिला, उसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। फ्लैट के अलग-अलग कमरों और विशेष रूप से तैयार किए गए हिस्सों में 300 से अधिक अजगर पाए गए। जांच में पता चला कि घर को व्यवस्थित रूप से एक निजी ब्रीडिंग सेंटर के रूप में विकसित किया गया था। सांपों को नियंत्रित तापमान और नमी वाले वातावरण में रखा गया था ताकि उनकी देखभाल और प्रजनन प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।

    अधिकारियों के अनुसार बरामद किए गए अधिकांश अजगर संरक्षित श्रेणी के वन्यजीवों में शामिल हैं। संबंधित कानूनों के तहत ऐसे जीवों को बिना अनुमति खरीदना, बेचना, पालना या उनका परिवहन करना गंभीर अपराध माना जाता है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी आवश्यक सरकारी स्वीकृतियों के बिना इन जीवों का पालन कर रहा था। इसके बाद उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया।

    मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने तथा अवैध ब्रीडिंग गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर सजा सुनाई। अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई अवैध वन्यजीव व्यापार और गैरकानूनी प्रजनन गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में कई देशों में पारंपरिक पालतू जानवरों के स्थान पर दुर्लभ और विदेशी प्रजातियों को पालने का चलन बढ़ा है। हालांकि यह प्रवृत्ति वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है। इसी कारण विभिन्न देशों की एजेंसियां ऐसे मामलों की निगरानी बढ़ा रही हैं। झेजियांग का यह मामला भी इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि आधुनिक जांच तकनीकों और डेटा विश्लेषण की मदद से असामान्य गतिविधियों का पता लगाकर बड़े अवैध नेटवर्क का खुलासा किया जा सकता है।

  • मनी प्लांट के साथ लगाएं ये 5 चमत्कारी पौधे, वास्तु के अनुसार खुल सकते हैं धन के द्वार

    मनी प्लांट के साथ लगाएं ये 5 चमत्कारी पौधे, वास्तु के अनुसार खुल सकते हैं धन के द्वार


    नई दिल्ली ।घर में लगे पौधे केवल सजावट का हिस्सा नहीं होते, बल्कि वास्तु शास्त्र और फेंग शुई में इन्हें सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का स्रोत भी माना गया है। मान्यता है कि कुछ विशेष पौधों को सही दिशा में रखने से घर में सुख, शांति और आर्थिक उन्नति के योग मजबूत होते हैं। यदि आप मनी प्लांट के साथ कुछ और शुभ पौधे लगाना चाहते हैं, तो ये विकल्प आपके लिए लाभदायक माने जाते हैं।

    सबसे पहले बात करें लकी बैम्बू की। फेंग शुई में इसे सौभाग्य और सफलता का प्रतीक माना जाता है। इसे घर के उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि तीन डंठल खुशियों और छह डंठल समृद्धि का प्रतीक होते हैं।

    जेड प्लांट भी धन आकर्षित करने वाले पौधों में शामिल किया जाता है। इसकी गोल और हरी पत्तियां आर्थिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती हैं। वास्तु के अनुसार इसे घर के दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय कोण में रखने से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

    मनी ट्री को नए अवसरों और आर्थिक प्रगति का प्रतीक माना जाता है। यह पौधा भी दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने पर शुभ फल देने वाला माना जाता है। इसकी देखभाल अपेक्षाकृत आसान होती है और यह घर की सुंदरता भी बढ़ाता है।

    तुलसी का पौधा भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। इसे धार्मिक और वास्तु दोनों दृष्टियों से शुभ माना गया है। तुलसी को घर के उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और शांति बनी रहती है।

    चमेली यानी जैस्मीन का पौधा अपनी मनमोहक सुगंध के लिए जाना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इसे दक्षिण दिशा में या घर के प्रवेश द्वार और खिड़की के आसपास लगाना शुभ माना जाता है। यह रिश्तों में मधुरता और सकारात्मकता बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है।

    इसके अलावा गुलाब और शैमरोक प्लांट भी शुभ पौधों की श्रेणी में रखे जाते हैं। गुलाब को दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाना अच्छा माना जाता है, जबकि शैमरोक प्लांट को पूर्व दिशा में रखना सौभाग्य से जोड़ा जाता है।

  • निर्जला एकादशी पर तुलसी जी को अर्पित करें ये वस्तुएं, घर में आएगी सुख-समृद्धि और धन की बरसात

    निर्जला एकादशी पर तुलसी जी को अर्पित करें ये वस्तुएं, घर में आएगी सुख-समृद्धि और धन की बरसात


    नई दिल्ली ।हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से वर्षभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून गुरुवार को रखा जाएगा। चूंकि गुरुवार भगवान विष्णु का प्रिय दिन माना जाता है, इसलिए इस बार इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

    ज्योतिष और धर्मशास्त्रों में तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय और माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी की नियमित पूजा होती है, वहां सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहता है। निर्जला एकादशी के दिन तुलसी माता की विशेष पूजा करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।

    तुलसी माता को अर्पित करें ये शुभ वस्तुएं

     अक्षत और हल्दी
    निर्जला एकादशी के दिन तुलसी माता को हल्दी मिले हुए पीले अक्षत अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पीला रंग भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों को प्रिय है। यह उपाय आर्थिक उन्नति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

     लाल या पीली चुनरी
    तुलसी माता को नई लाल या पीली चुनरी अर्पित करने का विशेष महत्व है। यह सम्मान, श्रद्धा और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    सुहाग की सामग्री
    चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, कुमकुम और अन्य सुहाग सामग्री तुलसी माता को अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में सुख, सौहार्द और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। यह उपाय विशेष रूप से महिलाओं के लिए शुभ माना गया है।

    कलावा बांधें
    तुलसी के तने पर सात बार कलावा या मौली बांधकर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

     घी का दीपक और परिक्रमा
    शाम के समय तुलसी माता के समक्ष गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और कम से कम तीन या सात बार परिक्रमा करें। यह उपाय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी माध्यम माना जाता है।

    भूलकर भी न करें यह गलती
    निर्जला एकादशी के दिन तुलसी माता को जल अर्पित नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता स्वयं भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना और पत्तियां तोड़ना वर्जित माना गया है। इस नियम का पालन करना बेहद आवश्यक माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी पर तुलसी माता की विधि-विधान से पूजा करने और इन उपायों को अपनाने से घर में धन, वैभव और खुशहाली का आगमन होता है। साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

  • सिनेमाई मर्यादा और सेट अनुशासन पर गंभीर सवाल: जब इंटीमेट सीन्स के दौरान नियंत्रण खो बैठे थे दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना

    सिनेमाई मर्यादा और सेट अनुशासन पर गंभीर सवाल: जब इंटीमेट सीन्स के दौरान नियंत्रण खो बैठे थे दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कलाकारों की कला और उनके किरदारों की हमेशा प्रशंसा की जाती है, लेकिन कई बार सेट पर घटित कुछ अप्रत्याशित और असहज करने वाली घटनाएं वर्षों बाद भी गंभीर चर्चाओं का विषय बन जाती हैं। सत्तर और अस्सी के दशक के शीर्ष अभिनेताओं में शुमार दिवंगत सुपरस्टार विनोद खन्ना से जुड़े कुछ पुराने विवाद इस समय गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। एक वरिष्ठ मनोरंजन पत्रकार द्वारा हाल ही में दिए गए साक्षात्कार के अनुसार, फिल्मों में रोमांटिक और संवेदनशील दृश्यों को फिल्माते समय विनोद खन्ना अक्सर अपने अभिनय में इस कदर डूब जाते थे कि वे पूरी तरह से अपना नियंत्रण खो बैठते थे। इसका खामियाजा उनके साथ काम करने वाली समकालीन और नवोदित अभिनेत्रियों को शारीरिक और मानसिक पीड़ा के रूप में भुगतना पड़ा था।

    यह पहली बड़ी घटना फिल्म ‘प्रेम धरम’ के निर्माण के दौरान सामने आई थी, जिसका निर्देशन जाने-माने फिल्म निर्माता महेश भट्ट कर रहे थे। इस फिल्म के एक मुख्य दृश्य में विनोद खन्ना और अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया के बीच एक बेहद संवेदनशील और इंटीमेट दृश्य को फिल्माया जा रहा था। जैसे ही कैमरे ने काम करना शुरू किया, अभिनेता दृश्य के प्रभाव में इस कदर खो गए कि उन्हें आसपास के माहौल का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रहा। दृश्य की समाप्ति पर जब निर्देशक महेश भट्ट ने लाउडस्पीकर के माध्यम से बार-बार ‘कट’ बोला, तब भी विनोद खन्ना नहीं रुके। डिंपल कपाड़िया उस समय फिल्म उद्योग में बहुत नई थीं और वे निर्देशक के निर्देश और अभिनेता के इस व्यवहार के बीच पूरी तरह असमंजस में फंस गईं। आखिरकार, स्थिति को नियंत्रण से बाहर होते देख निर्देशक और सेट पर मौजूद चार-पांच क्रू सदस्यों को खुद आगे आकर दोनों को अलग करना पड़ा था।

    इसके बाद, साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म ‘दयावान’ के सेट पर एक और अधिक गंभीर वाकया हुआ, जिसने फिल्म जगत को स्तब्ध कर दिया था। इस फिल्म में विनोद खन्ना के साथ मुख्य भूमिका में अभिनेत्री माधुरी दीक्षित थीं, जो उस समय उम्र और अनुभव में अभिनेता से काफी छोटी थीं। फिल्म के एक गीत के दौरान दोनों के बीच एक बेहद नजदीकी किसिंग सीन फिल्माया जाना तय हुआ था। इस दौरान अभिनेता ने एक बार फिर अपना आपा खो दिया और निर्देशक द्वारा दृश्य समाप्त करने की घोषणा के बाद भी वे नहीं रुके।

    यह स्थिति तब और अधिक दर्दनाक हो गई जब उत्तेजना के प्रवाह में आकर विनोद खन्ना ने सह-अभिनेत्री के होठों को दांतों से काट लिया। घाव इतना गहरा था कि माधुरी दीक्षित के होठों से तत्काल खून बहने लगा, जिसे देखकर सेट पर उपस्थित सभी लोग सन्न रह गए। इसके बाद ही अभिनेता होश में आए और पीछे हटे। इस पूरे वाकये ने युवा अभिनेत्री को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया था। अपमान और दर्द से भरी माधुरी दीक्षित तुरंत सेट छोड़कर अपनी वैनिटी वैन में चली गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं। इस कटु अनुभव का उनके मन पर इतना गहरा असर हुआ कि उन्होंने भविष्य में कभी भी फिल्मों में इस तरह के अत्यधिक इंटीमेट दृश्यों को न करने की शपथ ले ली थी। सिनेमाई सेटों पर सुरक्षा और गरिमा के लिहाज से यह ऐतिहासिक संदर्भ आज भी प्रासंगिक माना जाता है।

  • 25 जून को निर्जला एकादशी का महासंयोग, मेष से कुंभ तक इन राशियों पर बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा

    25 जून को निर्जला एकादशी का महासंयोग, मेष से कुंभ तक इन राशियों पर बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा


    नई दिल्ली ।निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून गुरुवार को पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। गुरुवार स्वयं भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का दिन माना जाता है। ऐसे में इस बार का व्रत श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार निर्जला एकादशी पर एक साथ कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। सुबह 5 बजकर 25 मिनट से शाम 4 बजकर 29 मिनट तक रवि योग रहेगा, जिसे सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इसके अलावा सुबह 10 बजकर 53 मिनट से सिद्ध योग प्रारंभ होगा, जो देर रात तक प्रभावी रहेगा। सिद्ध योग को सफलता, उन्नति और मनोकामना पूर्ति का कारक माना जाता है। वहीं सिद्ध योग से पहले शिव योग का निर्माण भी होगा, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ परिणाम लेकर आता है। इन विशेष योगों का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन चार राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है।

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए निर्जला एकादशी नई उम्मीदें लेकर आ सकती है। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आएगी और आर्थिक मामलों में राहत मिलने की संभावना है। घर, भूमि या संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां धीरे-धीरे कम होने के संकेत हैं। निवेश और भविष्य की योजनाओं में भी सफलता मिलने के योग बन रहे हैं।

    कर्क राशि

    कर्क राशि वालों के लिए यह समय पारिवारिक सुख और शांति लेकर आ सकता है। परिवार के सदस्यों के बीच चल रही गलतफहमियां दूर होंगी और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। घरेलू वातावरण सकारात्मक रहेगा और परिवार के साथ यादगार समय बिताने का अवसर मिलेगा।

    तुला राशि
    तुला राशि के जातकों के लिए यह शुभ संयोग करियर और आर्थिक क्षेत्र में सफलता दिलाने वाला साबित हो सकता है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत का फल मिलेगा और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा किसी कीमती वस्तु की खरीदारी का योग बन सकता है। स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह समय राहत देने वाला रहेगा, विशेषकर आंखों से जुड़ी समस्याओं में सुधार देखने को मिल सकता है।

    कुंभ राशि
    कुंभ राशि वालों के लिए व्यापार और व्यवसाय में लाभ के संकेत हैं। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। मानसिक तनाव में कमी आएगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। स्वास्थ्य पहले की तुलना में बेहतर रहेगा, हालांकि खान-पान और दिनचर्या को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। व्यापारिक निर्णयों में सफलता मिलने की संभावना है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य और व्रत करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इस बार बन रहे शुभ योगों के कारण यह पर्व आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • नीति आयोग समर्थित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में युवा स्टार्टअप्स का दमदार प्रदर्शन, सस्टेनेबिलिटी आधारित छह नवाचारों को मिली बड़ी पहचान और वित्तीय सहायता

    नीति आयोग समर्थित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में युवा स्टार्टअप्स का दमदार प्रदर्शन, सस्टेनेबिलिटी आधारित छह नवाचारों को मिली बड़ी पहचान और वित्तीय सहायता

    नई दिल्ली । देश में नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय स्तर की एक प्रमुख प्रतियोगिता में युवाओं द्वारा संचालित छह स्टार्टअप्स को विजेता घोषित किया गया है। सस्टेनेबिलिटी, संसाधन संरक्षण और सामाजिक प्रभाव पर आधारित इन स्टार्टअप्स ने अपने अभिनव समाधानों के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। चयनित उद्यमों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ प्रशिक्षण, मेंटरशिप और उद्योग जगत से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उनके विचारों को बड़े स्तर पर विकसित करने में मदद मिलेगी।

    यह प्रतियोगिता देश में उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और सतत विकास से जुड़े समाधान विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। इसमें सर्कुलर इकोनॉमी, टिकाऊ वस्त्र एवं फैशन, पर्यावरण-अनुकूल खाद्य प्रणालियां तथा जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को केंद्र में रखा गया। इन विषयों पर आधारित नवाचारों ने न केवल तकनीकी क्षमता दिखाई बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रस्तुत कीं।

    प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिस्पर्धा मिली। देश के 28 राज्यों से 350 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 50 संभावनाशील स्टार्टअप्स का चयन एक विशेष क्षमता विकास कार्यक्रम के लिए किया गया। तीन महीने तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को व्यवसाय विकास, बाजार रणनीति, प्रभाव मूल्यांकन और निवेशकों से संवाद जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और उद्योग जगत से जुड़े अनुभवी पेशेवरों ने मार्गदर्शन प्रदान किया।

    कार्यक्रम के तहत सभी चयनित स्टार्टअप्स को अपने विचार और व्यवसाय मॉडल विशेषज्ञों की जूरी के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिला। मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद शीर्ष 20 स्टार्टअप्स को एक विशेष इमर्शन बूटकैंप के लिए चुना गया, जहां उन्हें उद्यमिता से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों और उद्योग की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर मिला। इस दौरान निवेशकों, नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और सफल उद्यमियों के साथ संवाद ने प्रतिभागियों को अपने मॉडल को और अधिक मजबूत बनाने में सहायता प्रदान की।

    अंतिम चरण में तीन स्टार्टअप्स को विजेता घोषित करते हुए उन्हें 3.5 लाख रुपये की सीड ग्रांट प्रदान की गई, जबकि तीन अन्य स्टार्टअप्स को उपविजेता के रूप में 2.2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। इसके अतिरिक्त सभी विजेता टीमों को क्षमता विकास कार्यक्रमों और राष्ट्रीय नवाचार नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है ताकि वे अपने समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू कर सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रतिभा और नवाचार की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों और अवसरों का समान वितरण अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बड़े शहरों में निवेश और मार्गदर्शन अपेक्षाकृत अधिक उपलब्ध है, जबकि छोटे शहरों, दूरस्थ क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों के उद्यमियों तक ऐसे अवसर सीमित रूप से पहुंच पाते हैं। इसी अंतर को कम करने के लिए इस प्रकार की पहलें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि चयनित स्टार्टअप्स में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कुल चयनित उद्यमों में 40 प्रतिशत से अधिक महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो देश के नवाचार परिदृश्य में बढ़ती महिला भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, युवा नेतृत्व, तकनीकी नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व का यह संगम भारत को सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

  • सरकारी बीमा दिग्गज एलआईसी का बड़ा तोहफा: 10 रुपए प्रति शेयर लाभांश के लिए आज ही खरीदने होंगे शेयर

    सरकारी बीमा दिग्गज एलआईसी का बड़ा तोहफा: 10 रुपए प्रति शेयर लाभांश के लिए आज ही खरीदने होंगे शेयर


    नई दिल्ली । भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयरधारकों के लिए बुधवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 10 रुपए प्रति इक्विटी शेयर के अंतिम डिविडेंड की घोषणा की है और इसके लिए 25 जून को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की गई है। ऐसे में जो निवेशक इस लाभांश का फायदा उठाना चाहते हैं, उनके लिए 24 जून तक शेयर खरीदना जरूरी है।

    भारतीय शेयर बाजार में लागू टी+1 सेटलमेंट व्यवस्था के अनुसार किसी भी निवेशक का नाम रिकॉर्ड डेट तक कंपनी के शेयरधारकों की सूची में होना चाहिए। इसके लिए निवेशकों को रिकॉर्ड डेट से एक कारोबारी दिन पहले तक शेयर खरीदने होते हैं ताकि तय तारीख तक शेयर उनके डीमैट खाते में दिखाई दें। इसी कारण 24 जून को एलआईसी के शेयर खरीदने वाले निवेशक डिविडेंड के पात्र माने जाएंगे।

    कंपनी ने अपने शेयरधारकों को प्रति इक्विटी शेयर 10 रुपए के अंतिम लाभांश का प्रस्ताव दिया है। यह भुगतान उन निवेशकों को मिलेगा जिनके नाम रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज होंगे। डिविडेंड को निवेशकों के लिए अतिरिक्त आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है, क्योंकि कंपनियां अपने मुनाफे का एक हिस्सा शेयरधारकों के साथ साझा करती हैं।

    एलआईसी ने हाल के महीनों में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है, जिसका असर कंपनी के निवेशकों के विश्वास पर भी दिखाई दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 23.2 प्रतिशत बढ़कर 23,420 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा 19,013 करोड़ रुपए था। इस प्रदर्शन के साथ एलआईसी वित्तीय क्षेत्र की सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में शामिल रही।

    जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में कंपनी की शुद्ध प्रीमियम आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़कर लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जबकि एक वर्ष पहले समान अवधि में यह करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए थी। प्रीमियम आय में यह वृद्धि कंपनी के व्यवसाय विस्तार और बाजार में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाती है।

    एलआईसी ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के बीच सबसे अधिक तिमाही लाभ अर्जित करने वाली कंपनी का स्थान भी बनाए रखा है। मजबूत आय, लाभ में वृद्धि और स्थिर कारोबारी प्रदर्शन के कारण कंपनी निवेशकों के बीच लगातार आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    कंपनी की परिसंपत्तियों के आकार में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 31 मार्च 2026 तक प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां 57 लाख करोड़ रुपए से अधिक के स्तर पर पहुंच गईं। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। एसेट्स अंडर मैनेजमेंट में लगातार वृद्धि कंपनी की वित्तीय मजबूती और निवेशकों के भरोसे को प्रतिबिंबित करती है।

    डिविडेंड आय से जुड़े कर नियमों को लेकर भी निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। वर्तमान नियमों के अनुसार यदि किसी निवासी व्यक्ति को एक वित्त वर्ष में 5,000 रुपए से अधिक का कुल डिविडेंड प्राप्त होता है, तो उस पर 10 प्रतिशत की दर से स्रोत पर कर कटौती लागू होती है। इसलिए निवेशकों को अपने कर दायित्वों का भी ध्यान रखना चाहिए।

    मजबूत वित्तीय परिणाम, बढ़ता लाभ, विशाल परिसंपत्ति आधार और आकर्षक डिविडेंड घोषणा के चलते एलआईसी के शेयर एक बार फिर निवेशकों की चर्चा के केंद्र में हैं। रिकॉर्ड डेट से पहले डिविडेंड पात्रता हासिल करने की होड़ के बीच बाजार की नजरें अब कंपनी के आगामी प्रदर्शन और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।