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  • इंदौर में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, एमडी ड्रग्स और ब्राउन शुगर के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

    इंदौर में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई, एमडी ड्रग्स और ब्राउन शुगर के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

    मध्य प्रदेश: के इंदौर में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयां करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन कार्रवाइयों में पुलिस ने कुल 11 ग्राम एमडी ड्रग्स और 8.8 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की है। दोनों आरोपियों के खिलाफ स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त और उनकी आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

    पहली कार्रवाई इंदौर क्राइम ब्रांच ने की। पुलिस ने एमआर-10 ब्रिज के नीचे मेट्रो के पिलर नंबर 409 के पास से अनस खान को पकड़ा। वह खरगोन जिले का निवासी बताया गया है। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 11 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया।

    पुलिस अब अनस खान से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद नशीला पदार्थ कहां से लाया गया था। इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि वह इसे किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंचाने वाला था या इसके पीछे कोई संगठित आपूर्ति नेटवर्क सक्रिय है। मामले में नशीले पदार्थों की खरीद और बिक्री से जुड़े संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    दूसरी कार्रवाई राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने की। पुलिस ने पानी की टंकी के पास से 23 वर्षीय आयुष ठाकुर को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उसके पास से 8.8 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की गई। पुलिस ने इस मामले में भी एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। दोनों कार्रवाइयां अलग-अलग स्थानों पर की गईं और दोनों आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग प्रकार के नशीले पदार्थ मिलने की जानकारी सामने आई है।

    पुलिस के अनुसार, आयुष ठाकुर के खिलाफ पहले भी जुआ, लूट और मादक पदार्थों से संबंधित मामले दर्ज होने की जानकारी है। हालांकि, उसके पुराने मामलों की वर्तमान स्थिति और उनसे जुड़े विस्तृत तथ्यों की पुष्टि जांच के दौरान की जानी है। फिलहाल, ताजा मामले में बरामद ब्राउन शुगर के स्रोत और उससे जुड़े संभावित संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।

    दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का ध्यान नशीले पदार्थों की आपूर्ति के स्रोत तक पहुंचने पर है। जांच के तहत यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपियों को मादक पदार्थ किसने उपलब्ध कराए और वे किन लोगों के संपर्क में थे। इसके साथ ही शहर में नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त के संभावित तरीकों और आपूर्ति से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

    इंदौर में की गई इन कार्रवाइयों के बाद पुलिस दोनों मामलों में साक्ष्य और अन्य जरूरी जानकारी जुटा रही है। बरामद पदार्थों की मात्रा, आरोपियों के संपर्कों और संभावित आपूर्ति नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की पड़ताल आगे की जांच का हिस्सा है। फिलहाल, अनस खान और आयुष ठाकुर के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं और पुलिस की जांच जारी है।

  • शिवपुरी में कब्रिस्तान की जमीन बदलने की मांग पर विवाद, बजरंग दल कार्यकर्ता को धमकी देने के आरोप में FIR दर्ज

    शिवपुरी में कब्रिस्तान की जमीन बदलने की मांग पर विवाद, बजरंग दल कार्यकर्ता को धमकी देने के आरोप में FIR दर्ज

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले के बैराड़ में कब्रिस्तान की भूमि को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग को लेकर विवाद सामने आया है। इस मामले में बजरंग दल के कार्यकर्ता प्रिंस प्रजापति को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के आधार पर बैराड़ थाना पुलिस ने साबिर खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय हिंदू समाज के लोगों के साथ मिलकर बैराड़ की हनुमान कॉलोनी में हनुमान मंदिर के सामने आवंटित कब्रिस्तान की भूमि को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग उठाई थी। इस संबंध में तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया था। इसके दो दिन बाद, 12 अक्टूबर को प्रिंस प्रजापति को फोन पर धमकी दिए जाने का आरोप सामने आया।

    विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष राम सिंह यादव के मुताबिक, साबिर खान ने कथित तौर पर फोन करके प्रिंस प्रजापति को जान से मारने की धमकी दी थी। संगठन ने दावा किया है कि इस बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है। हालांकि, धमकी से जुड़े आरोपों की विस्तृत पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले में एक अन्य घटना गुरुवार को सामने आने का आरोप है। राम सिंह यादव के अनुसार, प्रिंस प्रजापति शिवपुरी से बैराड़ पहुंचे थे और मोटरसाइकिल से अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान पशु चिकित्सालय के पास साबिर खान ने कथित तौर पर उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि यहां उनके साथ गाली-गलौज की गई।

    शिकायत के मुताबिक, कब्रिस्तान की जमीन को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दोबारा आवाज उठाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। आरोप है कि प्रिंस प्रजापति को जान से मारने और उनके हाथ-पैर तोड़ने की बात कही गई। घटना के बाद प्रिंस प्रजापति थाने पहुंचे और पुलिस को शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने साबिर खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।

    इस मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। संगठनों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाने चाहिए।

    राम सिंह यादव ने दावा किया कि साबिर खान के खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस आधार पर संगठनों ने उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कराने और नाम गुंडा सूची में शामिल करने की मांग की है। इसके साथ ही जिला बदर की कार्रवाई शुरू करने तथा प्रिंस प्रजापति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।

    संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो जिलेभर में आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल, बैराड़ थाना पुलिस ने साबिर खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

  • शिवपुरी के बदरवास रेलवे स्टेशन पर बढ़ेंगी सुविधाएं? सिंधिया ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर मांगों पर तत्काल पहल का किया आग्रह

    शिवपुरी के बदरवास रेलवे स्टेशन पर बढ़ेंगी सुविधाएं? सिंधिया ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर मांगों पर तत्काल पहल का किया आग्रह

    मध्य प्रदेश। के शिवपुरी जिले में बदरवास और आसपास के क्षेत्रों में रेल सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर रेलवे सुविधा संघर्ष समिति ने पहल की है। समिति की ओर से प्रस्तुत मांग पत्र को शिवपुरी-गुना के सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संज्ञान में लेते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है। उन्होंने रेल मंत्री से मांग पत्र में उठाए गए मुद्दों पर तत्काल और सार्थक पहल करने का आग्रह किया है। इन मांगों का उद्देश्य क्षेत्र में रेल संपर्क को बेहतर बनाना और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना है।

    समिति के अनुसार, बदरवास और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार और धार्मिक यात्राओं के लिए दूसरे शहरों का रुख करते हैं। ऐसे में प्रमुख ट्रेनों का ठहराव बढ़ने और स्टेशन पर आवश्यक सुविधाएं विकसित होने से यात्रियों को लाभ मिल सकता है। समिति ने अपनी मांगों में धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के साथ ही दिल्ली, मुंबई, इंदौर और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों से संपर्क बेहतर करने पर जोर दिया है।

    बदरवास रेलवे स्टेशन पर कई प्रमुख ट्रेनों के ठहराव की मांग उठाई गई है। इनमें उज्जैनी एक्सप्रेस, झांसी-बांद्रा एक्सप्रेस, लक्ष्मीबाई नगर इंदौर-योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस, ग्वालियर-बेंगलुरु एक्सप्रेस और अमृतसर-इंदौर एक्सप्रेस शामिल हैं। समिति का मानना है कि इन ट्रेनों का ठहराव मिलने से यात्रियों को उज्जैन, हरिद्वार, मथुरा-वृंदावन और अमृतसर जैसे धार्मिक स्थलों तक जाने में सुविधा होगी। साथ ही दिल्ली, मुंबई, इंदौर और बेंगलुरु जैसे शहरों की यात्रा के लिए भी बेहतर विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे।

    रेलवे स्टेशन के विकास को लेकर भी समिति ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें बदरवास स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल करना, दूसरा प्लेटफॉर्म बनाना और फुट ओवरब्रिज का निर्माण करना शामिल है। समिति ने यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए प्लेटफॉर्म पर लंबे टीनशेड लगाने की मांग भी की है। फुट ओवरब्रिज बनने से यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए रेलवे ट्रैक पार नहीं करना पड़ेगा। इससे आवागमन अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है।

    यात्री सुविधाओं को बेहतर करने के लिए स्टेशन पर टिकट रिजर्वेशन काउंटर खोलने, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की आउटपोस्ट स्थापित करने और ट्रेनों की जानकारी देने के लिए कोच डिस्प्ले बोर्ड लगाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। समिति का कहना है कि इन सुविधाओं से यात्रियों को टिकट संबंधी सेवाओं, सुरक्षा और ट्रेन में अपने कोच की स्थिति जानने में सहूलियत मिलेगी। इसके अलावा क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्टेशन पर रैक प्वाइंट विकसित करने की मांग भी शामिल की गई है।

    समिति ने क्षेत्रीय रेल संपर्क मजबूत करने के लिए गुना, अशोकनगर या रुठियाई से ग्वालियर के बीच मेमू ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही इंदौर-ऊना हिमाचल एक्सप्रेस को प्रतिदिन संचालित करने की मांग की गई है। उधना-बनारस एक्सप्रेस और ग्वालियर-दौंड एक्सप्रेस के फेरे बढ़ाकर सप्ताह में तीन से चार दिन करने का आग्रह भी किया गया है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य यात्रियों को अधिक नियमित रेल सेवाएं उपलब्ध कराना है।

    समिति के गोविंद अवस्थी ने बताया कि इन मांगों के पूरा होने से बदरवास और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को शिक्षा, इलाज, व्यापार और धार्मिक यात्राओं के लिए बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकती है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से रेल मंत्री को पत्र भेजे जाने के बाद समिति को उम्मीद है कि रेलवे मंत्रालय इन प्रस्तावों पर विचार करेगा और क्षेत्र में रेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा। हालांकि, इन मांगों पर रेलवे मंत्रालय की ओर से निर्णय और उनके क्रियान्वयन की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

  • इंदौर एयरपोर्ट से 25 अक्टूबर को बदलेगा फ्लाइट शेड्यूल, मुंबई और अहमदाबाद के यात्रियों को मिलेंगे नए विकल्प

    इंदौर एयरपोर्ट से 25 अक्टूबर को बदलेगा फ्लाइट शेड्यूल, मुंबई और अहमदाबाद के यात्रियों को मिलेंगे नए विकल्प

    मध्य प्रदेश: के इंदौर स्थित देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर 25 अक्टूबर 2026 से उड़ानों का नया विंटर शेड्यूल लागू होने जा रहा है। इसके तहत मुंबई और अहमदाबाद जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त उड़ानों के विकल्प मिलेंगे। अहमदाबाद के लिए तीसरी सीधी फ्लाइट शुरू करने की तैयारी है, जबकि मुंबई के लिए सुबह की नई उड़ान उपलब्ध होगी। इसके अलावा गोवा और पुणे के रास्ते कोच्चि जाने वाले यात्रियों के लिए भी कनेक्टिंग फ्लाइट के विकल्प रहेंगे।

    नए शेड्यूल में अहमदाबाद और मुंबई के रूट पर विशेष बदलाव किए गए हैं। इन दोनों शहरों के बीच इंदौर से बड़ी संख्या में लोग कारोबार, नौकरी, पढ़ाई और अन्य निजी कार्यों के लिए यात्रा करते हैं। उड़ानों के समय में बदलाव और नए विकल्प मिलने से यात्रियों को अपनी जरूरत के अनुसार यात्रा की योजना बनाने में सुविधा होगी।

    अहमदाबाद के लिए तीसरी सीधी उड़ान

    इंदौर से अहमदाबाद जाने वाले यात्रियों को नए विंटर शेड्यूल में तीसरी सीधी उड़ान का विकल्प मिलेगा। इस रूट पर पहले से संचालित दोनों उड़ानों के समय में भी बदलाव किया जाएगा। दोनों मौजूदा फ्लाइट अब अपने वर्तमान प्रस्थान समय से 30 मिनट पहले रवाना होंगी। इससे यात्रियों को उपलब्ध उड़ानों के समय के अनुसार अपना कार्यक्रम तय करना होगा।

    नई उड़ान दोपहर 12:05 बजे अहमदाबाद से इंदौर पहुंचेगी। इसके बाद विमान शाम 5 बजे इंदौर से अहमदाबाद के लिए रवाना होगा। वापसी के क्रम में अहमदाबाद से शाम 7:25 बजे उड़ान भरने के बाद विमान रात 8:35 बजे इंदौर पहुंचेगा। इस तरह अहमदाबाद रूट पर उड़ानों की संख्या बढ़ने से यात्रियों को यात्रा के समय के अधिक विकल्प मिल सकेंगे।

    अहमदाबाद व्यापार और कारोबार के लिहाज से इंदौर के लिए महत्वपूर्ण शहर है। दोनों शहरों के बीच व्यावसायिक गतिविधियों के साथ निजी कामों के लिए भी यात्रियों की आवाजाही होती है। ऐसे में तीसरी सीधी उड़ान शुरू होने से यात्रियों को पहले से उपलब्ध सेवाओं के अलावा एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    मुंबई के लिए सुबह 8 बजे उड़ान

    मुंबई जाने वाले यात्रियों के लिए भी 25 अक्टूबर से नया विकल्प उपलब्ध होगा। एयर इंडिया इस रूट पर तीसरी इंदौर-मुंबई उड़ान शुरू करेगी। यह फ्लाइट सुबह 8 बजे इंदौर से रवाना होगी। इससे मुंबई जाने वाले यात्रियों को सुबह के समय हवाई यात्रा करने का एक और विकल्प मिलेगा।

    इंदौर और मुंबई के बीच कारोबारी बैठकों, नौकरी, पढ़ाई और अन्य जरूरी कामों के लिए लगातार यात्रा होती है। कई यात्रियों को सुबह मुंबई पहुंचने की आवश्यकता होती है। नई उड़ान से वे अपनी जरूरत और निर्धारित समय के अनुसार यात्रा की योजना बना सकेंगे।

    गोवा और पुणे के रास्ते कोच्चि की कनेक्टिंग फ्लाइट

    इंदौर से कोच्चि जाने वाले यात्रियों के लिए गोवा और पुणे के रास्ते कनेक्टिंग फ्लाइट की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। गोवा के रास्ते जाने वाले यात्रियों की उड़ान शाम 5:25 बजे इंदौर से रवाना होकर शाम 7 बजे गोवा पहुंचेगी। इसके बाद रात 8 बजे गोवा से कोच्चि के लिए विमान रवाना होगा और रात 9:20 बजे कोच्चि पहुंचेगा।

    वापसी में कोच्चि से दोपहर 1:20 बजे उड़ान भरने वाला विमान दोपहर 3:10 बजे गोवा पहुंचेगा। वहां से शाम 4:50 बजे इंदौर पहुंचने का निर्धारित समय है।

    पुणे के रास्ते कोच्चि जाने के लिए इंदौर से रात 10:25 बजे उड़ान मिलेगी। यह विमान रात 11:40 बजे पुणे पहुंचेगा। इसके बाद रात 12:40 बजे पुणे से कोच्चि के लिए रवाना होगा और अगले दिन तड़के 2:25 बजे कोच्चि पहुंचेगा।

    टिकट बुक करने से पहले जांचें समय

    25 अक्टूबर या उसके बाद यात्रा करने वाले यात्रियों को टिकट बुक करने से पहले नई उड़ानों का समय जांच लेना चाहिए। जिन यात्रियों ने पहले ही टिकट बुक कर लिया है, उन्हें भी अपनी फ्लाइट का प्रस्थान समय दोबारा देखना चाहिए। विंटर शेड्यूल लागू होने के साथ उड़ानों के समय और संचालन में बदलाव हो सकता है। इसलिए यात्रा से पहले संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर उपलब्ध नवीनतम जानकारी की पुष्टि करना उपयोगी रहेगा।

  • मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहराया, किसानों को 10 घंटे के वादे के बदले सिर्फ 2 घंटे आपूर्ति का आरोप

    मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहराया, किसानों को 10 घंटे के वादे के बदले सिर्फ 2 घंटे आपूर्ति का आरोप

    मध्य प्रदेश: में बिजली की मांग बढ़ने और उत्पादन प्रभावित होने के बीच बिजली आपूर्ति का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। प्रदेश में खेती और सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत बढ़ी है। इसी बीच कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि किसानों को निर्धारित समय के अनुसार बिजली नहीं मिल रही है। पार्टी का कहना है कि कई क्षेत्रों में किसानों को प्रतिदिन मुश्किल से दो घंटे बिजली मिल पा रही है, जबकि खेती और सिंचाई के लिए 10 घंटे बिजली देने का वादा किया गया था।

    प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने पंजाब और उत्तर प्रदेश से बिजली मांगी है। बिजली उत्पादन पर असर पड़ने और बोवनी में देरी के कारण मांग बढ़ने की बात सामने आई है। ऐसे हालात में बिजली की उपलब्धता और नियमित आपूर्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। किसानों के साथ घरेलू उपभोक्ता भी बिजली कटौती से प्रभावित हो रहे हैं।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बिजली संकट को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि किसान गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। खेती के काम और सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। किसानों को जरूरत के मुताबिक बिजली उपलब्ध नहीं होने पर खेतों में सिंचाई का काम प्रभावित हो रहा है। इससे कृषि कार्यों को समय पर पूरा करने में भी परेशानी आ सकती है।

    पटवारी ने यह भी कहा कि बिजली की समस्या केवल किसानों तक सीमित नहीं है। आम लोगों को भी अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के कई इलाकों में 10-10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। इस वजह से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

    बिजली की अनियमित आपूर्ति से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के अलावा पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ने की बात कही गई है। बार-बार बिजली जाने से छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को भी कामकाज में परेशानी होती है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की नियमित उपलब्धता जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने से दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

    किसानों के लिए सिंचाई के समय बिजली उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है। यदि जरूरत के अनुसार बिजली नहीं मिलती, तो फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इससे किसानों की आमदनी और आर्थिक स्थिति पर भी दबाव पड़ सकता है। खेती की बढ़ती लागत और अन्य चुनौतियों के बीच बिजली की कमी किसानों के लिए अतिरिक्त परेशानी बन सकती है।

    कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया है कि किसानों को तय समय के मुताबिक बिजली क्यों नहीं मिल रही है और घरेलू उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती से राहत कब मिलेगी। पार्टी ने नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। साथ ही, बिजली कटौती होने पर उसकी पूर्व सूचना देने और कटौती के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करने की जरूरत पर जोर दिया है।

    बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच बने अंतर को दूर करना सरकार के सामने चुनौती है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने और घरेलू उपभोक्ताओं की परेशानी कम करने का मुद्दा अहम बना हुआ है। फिलहाल, बिजली संकट को लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा है और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

  • ग्वालियर हादसे में भाई को बचाने 8 किलोमीटर दौड़ा सौरभ, हाइड्रा लेकर लौटा, लेकिन नहीं बचा सका गौरव की जान

    ग्वालियर हादसे में भाई को बचाने 8 किलोमीटर दौड़ा सौरभ, हाइड्रा लेकर लौटा, लेकिन नहीं बचा सका गौरव की जान

    मध्य प्रदेश: के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास मेले के दौरान हुए सड़क हादसे ने कई परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया। इस दुर्घटना में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। हादसे के दौरान अपने भाई गौरव परिहार को बचाने के लिए सौरभ परिहार ने हर संभव कोशिश की। वह मदद जुटाने के लिए करीब आठ किलोमीटर तक दौड़ा और आखिरकार हाइड्रा मशीन लेकर घटनास्थल पर पहुंचा, लेकिन तब तक गौरव की मौत हो चुकी थी।

    यह हादसा उस समय हुआ, जब श्रद्धालु शीतला माता मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। इसी दौरान एक ट्रक भीड़ के बीच घुस गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई लोग ट्रक की चपेट में आ गए, जबकि कुछ घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। हादसे के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

    सौरभ परिहार के मुताबिक, वह अपने परिवार के साथ दर्शन के लिए जा रहा था। इसी दौरान दुर्घटना हुई। उसने देखा कि उसकी बहन का पैर ट्रक के टायर के नीचे दबा हुआ था। वह बहन की स्थिति देख रहा था, लेकिन उसे अपना भाई गौरव दिखाई नहीं दिया। इसके बाद उसे आशंका हुई कि गौरव ट्रक के नीचे फंसा हो सकता है।

    गौरव को बाहर निकालने के लिए भारी वाहन को उठाने वाली मशीन की जरूरत थी। सौरभ ने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से क्रेन या हाइड्रा मशीन मंगवाने का अनुरोध किया। उसे बताया गया कि कुछ ही मिनटों में मदद पहुंच सकती है। हालांकि, भाई की हालत को लेकर चिंतित सौरभ ने इंतजार करने के बजाय खुद मशीन की तलाश में निकलने का फैसला किया।

    मदद जुटाने के लिए सौरभ ने रास्ते में कई वाहनों को रोकने की कोशिश की। शुरुआत में कई वाहन चालकों ने गाड़ी नहीं रोकी। बाद में कुछ लोगों ने उसे लिफ्ट दी, जिससे वह विक्ट्री फैक्टरी तक पहुंच सका। वहां उसने हाइड्रा मशीन की व्यवस्था की और इसके लिए ऑनलाइन 800 रुपये का भुगतान किया। इसके बाद वह मशीन लेकर दुर्घटनास्थल पर वापस लौटा।

    घटनास्थल पर पहुंचने के बाद हाइड्रा की मदद से ट्रक को उठाया गया, ताकि उसके नीचे फंसे गौरव को बाहर निकाला जा सके। लेकिन सौरभ की तमाम कोशिशों के बावजूद उसके भाई की जान नहीं बच सकी। जिस उम्मीद के साथ वह मशीन लेकर लौटा था, वह पूरी नहीं हो पाई। हादसे के बाद सौरभ के संघर्ष का वीडियो भी सामने आया, जिसमें भाई को बचाने के लिए की गई उसकी कोशिशों का घटनाक्रम दिखाई देता है।

    इस दुर्घटना में अन्य परिवारों को भी गंभीर नुकसान हुआ है। मृतकों में एक किशोर और उसके ताऊ भी शामिल बताए गए हैं। दोनों परिवार के साथ मंदिर में दर्शन करने आए थे। हादसे में किशोर के माता-पिता और परिवार के दूसरे सदस्य भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों का अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में उपचार चल रहा है।

    हादसे में शिवपुरी जिले की 20 वर्षीय जाह्नवी भी घायल हुई। वह अपनी बहन और सहेली के साथ मंदिर आई थी। दुर्घटना में उसका पैर फ्रैक्चर हो गया। जाह्नवी ने बताया कि ट्रक अचानक लोगों के बीच आ गया। स्थिति इतनी तेजी से बदली कि श्रद्धालुओं को संभलने का मौका नहीं मिला। उसे ऐसा लगा, जैसे अचानक कोई बड़ा तूफान आ गया हो। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और लोग बचने के लिए भागने लगे। इसी दौरान वह भी गिर गई। उसने बताया कि मृतकों में उसके गांव के दो लोग भी शामिल हैं।

    हादसे में कुल 41 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें 15 की मौत हुई और 26 घायल हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ट्रक चालक रास्ता तलाशने के लिए गूगल मैप का इस्तेमाल कर रहा था। मामले में पुलिस ने चालक और ट्रक मालिक को गिरफ्तार किया है। दुर्घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।

  • नर्मदापुरम में गड्ढे से बिगड़ा तेज रफ्तार कार का संतुलन, सड़क से उतरकर पेड़ पर चढ़ी गाड़ी

    नर्मदापुरम में गड्ढे से बिगड़ा तेज रफ्तार कार का संतुलन, सड़क से उतरकर पेड़ पर चढ़ी गाड़ी

    मध्य प्रदेश: के नर्मदापुरम जिले में माखननगर क्षेत्र के आरी-सांगाखेड़ा मार्ग पर रविवार शाम एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ पर चढ़ गई। हादसा शाम करीब 7 बजे हुआ। राहत की बात यह रही कि दुर्घटना में किसी को चोट नहीं आई और कार में सवार सभी लोग सुरक्षित बच गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सड़क पर मौजूद गड्ढे की वजह से कार का संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    घटना के दौरान कार सड़क से नीचे उतर गई और सीधे पेड़ पर जा चढ़ी। हादसे के बाद आसपास के लोगों का ध्यान मौके पर पहुंची गाड़ी की ओर गया। दुर्घटना में किसी के घायल नहीं होने से लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि, इस घटना ने क्षेत्र की सड़क की स्थिति और वहां से गुजरने वाले वाहनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    स्थानीय किसान एवं ग्रामीण केशव साहू के मुताबिक, दुर्घटना रविवार शाम करीब 7 बजे हुई। उस समय एक कार सड़क से उतरकर पेड़ पर चढ़ गई। उन्होंने बताया कि हादसे में किसी को चोट नहीं आई और सभी लोग सुरक्षित हैं। दुर्घटना की वजह तेज रफ्तार के दौरान सड़क के गड्ढे में कार का संतुलन बिगड़ना मानी जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हादसे के कारण की आधिकारिक पुष्टि का उल्लेख नहीं है।

    ग्रामीणों के अनुसार, आरी और सांगाखेड़ा कला क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सड़क पर इन दिनों भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ी हुई है। इसकी एक प्रमुख वजह तवा पुल का क्षतिग्रस्त होने के कारण बंद रहना बताई गई है। पुल बंद होने से भारी वाहनों को दूसरे रास्ते से निकाला जा रहा है। इस मार्ग पर आरी और सांगाखेड़ा कला होते हुए वाहनों का आवागमन जारी है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार भारी वाहनों के गुजरने से सड़क की हालत खराब हो गई है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे छोटे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की खराब स्थिति के कारण ग्रामीणों को भी आवागमन में दिक्कतें हो रही हैं। विशेष रूप से शाम और रात के समय गड्ढों के कारण वाहन चालकों के लिए रास्ते पर संभलकर चलना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

    ग्रामीणों के मुताबिक, इस मार्ग पर आए दिन दुर्घटनाएं होने की स्थिति बनी रहती है। सड़क पर गड्ढों और भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए उन्होंने मार्ग की मरम्मत कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सड़क की स्थिति में सुधार होने से स्थानीय लोगों और इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन चालकों को राहत मिल सकती है।

    ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क का निर्माण या जरूरी मरम्मत कराने की मांग की है। उनका आग्रह है कि क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त किया जाए, ताकि आवागमन सुरक्षित हो सके और दुर्घटनाओं की आशंका कम हो। रविवार शाम हुई कार दुर्घटना में सभी सवारों का सुरक्षित रहना राहत की बात है, लेकिन सड़क पर बने गड्ढों और बढ़ते यातायात के कारण पैदा हो रही समस्याओं का समाधान स्थानीय लोगों की प्रमुख मांग बना हुआ है।

  • दशहरा 2026 कब मनाया जाएगा, 20 या 21 अक्टूबर? जानें विजयादशमी की सही तारीख, दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त और रावण दहन का समय

    दशहरा 2026 कब मनाया जाएगा, 20 या 21 अक्टूबर? जानें विजयादशमी की सही तारीख, दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त और रावण दहन का समय


    नई दिल्ली ।
    दशहरा यानी विजयादशमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में दशहरे की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। कुछ लोग 20 अक्टूबर को त्योहार मनाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर 21 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इसकी वजह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का दो दिनों तक रहना है। उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जबकि पश्चिम बंगाल में स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार 21 अक्टूबर को विजयादशमी का उत्सव होगा।

    हिंदू पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। इसी वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में त्योहार मनाने की तारीख में अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्सों में 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। वहीं, पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की परंपराओं के अनुसार 21 अक्टूबर को मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। इस अवसर पर सिंदूर खेला जैसी पारंपरिक रस्में भी निभाई जाती हैं।

    विजयादशमी 2026 का शुभ मुहूर्त
    दशहरे के दिन विजय मुहूर्त में पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दौरान लोग अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और शस्त्रों की पूजा करते हैं। नई दिल्ली में 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में पूजा और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

    वहीं, अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक बताया गया है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग के आधार पर मुहूर्त में अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

    दशहरे पर रावण दहन कब होगा?
    उत्तर भारत में दशहरे के अवसर पर 20 अक्टूबर की शाम को रामलीला के समापन के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। इस परंपरा को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। आमतौर पर रावण दहन सूर्यास्त के बाद किया जाता है, लेकिन इसके लिए पूरे देश में एक समान समय निर्धारित नहीं है।

    अलग-अलग शहरों में रामलीला समितियां और स्थानीय आयोजक अपने कार्यक्रम के अनुसार रावण दहन का समय तय करते हैं। ऐसे में आयोजन में शामिल होने वाले लोगों को अपने शहर की रामलीला या संबंधित समिति से समय की जानकारी लेनी चाहिए।

    क्यों मनाया जाता है दशहरा?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में दशहरे पर रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है। यह पर्व लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

    दशहरे का संबंध मां दुर्गा और महिषासुर के युद्ध से भी है। मान्यता है कि मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर उसके अत्याचारों से संसार को मुक्ति दिलाई थी। इसी कारण विजयादशमी को शक्ति, साहस और अन्याय पर विजय का प्रतीक भी माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को स्थानीय रीति-रिवाजों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है।

    शस्त्र पूजन और शमी पूजा का महत्व

    दशहरे पर शस्त्र पूजन और शमी वृक्ष की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है। कई जगहों पर लोग अपने वाहनों, औजारों, मशीनों और कामकाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करते हैं। व्यापारी वर्ग इस दिन बही-खातों और कारोबार से जुड़ी वस्तुओं का पूजन करता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, विजयादशमी पर शुभ कार्यों की शुरुआत करना सफलता और समृद्धि की कामना से जुड़ा है। हालांकि, पूजा की विधि, मुहूर्त और त्योहार मनाने के तरीके अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित परंपराओं के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए दशहरे की तैयारी करते समय स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों का ध्यान रखना चाहिए।

  • सलमान खान, बाबा सिद्दीकी और रोहित शेट्टी के बाद टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग, बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा और मुंबई की कानून-व्यवस्था पर सवाल

    सलमान खान, बाबा सिद्दीकी और रोहित शेट्टी के बाद टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग, बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा और मुंबई की कानून-व्यवस्था पर सवाल


    नई दिल्ली । मुंबई को सपनों की नगरी कहा जाता है। देशभर से लोग यहां अपनी किस्मत आजमाने आते हैं और बॉलीवुड के सितारे लाखों लोगों के दिलों पर राज करते हैं। लेकिन जब फिल्मी हस्तियों के घरों के बाहर गोलियां चलने लगें, उन्हें धमकियां मिलने लगें और चर्चित लोगों की हत्या हो जाए, तो मामला केवल सितारों की निजी सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता। इससे महानगर की कानून-व्यवस्था और अपराधियों के बढ़ते हौसले पर भी सवाल खड़े होते हैं। हाल के वर्षों में मुंबई में फिल्म जगत से जुड़े लोगों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आई हैं। अब अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी ने इस चिंता को एक बार फिर बढ़ा दिया है।

    18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना सामने आई। बताया गया कि अभिनेता फुटबॉल मैच खेलने के बाद लौट रहे थे, तभी उनकी कार को निशाना बनाया गया। इस घटना में टाइगर सुरक्षित रहे, हालांकि उनके ड्राइवर और अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। इस दावे में सलमान खान से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की धमकी भी दी गई। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही स्पष्ट किया जा सकेगा।

    सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग

    फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ऐसी घटनाओं में सबसे चर्चित मामला 14 अप्रैल 2024 का है। उस दिन मुंबई के बांद्रा स्थित सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर बाइक सवार दो हमलावरों ने गोलियां चलाई थीं। पुलिस की जांच में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े कथित सदस्यों की भूमिका सामने आई। जांच के अनुसार, इस वारदात को विक्की गुप्ता और सागर पाल ने अंजाम दिया था। सलमान खान को इससे पहले भी धमकियां मिलती रही थीं। उनके घर के बाहर हुई गोलीबारी ने फिल्म उद्योग में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी।

    बाबा सिद्दीकी की हत्या से बढ़ी चिंता
    12 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता बाबा सिद्दीकी की मुंबई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाबा सिद्दीकी को सलमान खान का करीबी माना जाता था। इस हत्याकांड के बाद पुलिस की जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों के नाम सामने आए और मामले में गिरफ्तारियां भी हुईं। जांच में यह आरोप सामने आया कि सलमान खान से बाबा सिद्दीकी की नजदीकी उन्हें निशाना बनाए जाने की वजहों में से एक हो सकती थी। इस घटना ने राजनीतिक और फिल्मी जगत में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।

    रोहित शेट्टी के घर के बाहर भी हुई थी गोलीबारी
    31 जनवरी और 1 फरवरी 2026 की दरमियानी रात मुंबई के जुहू इलाके में फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर के बाहर भी फायरिंग हुई थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर शुभम लोनकर और आरजू बिश्नोई नाम के लोगों ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। पोस्ट में रोहित शेट्टी को पहले संदेश भेजे जाने और उनकी बात नहीं मानने पर हमले की बात कही गई थी।

    जांच के अनुसार, आरोपी ने रोहित शेट्टी के घर से कुछ दूरी पर बाइक खड़ी की और पैदल शेट्टी टावर तक पहुंचा। इसके बाद इमारत की ओर कई राउंड फायरिंग कर वह मौके से फरार हो गया। इस वारदात ने एक बार फिर फिल्मी हस्तियों के घरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

    बॉलीवुड में दबदबा कायम करने की आशंका
    इन घटनाओं में बार-बार लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आने से पुलिस की जांच और गिरोह के कथित मकसद पर चर्चा तेज हुई है। पुलिस की जांच और दाखिल चार्जशीट में यह पहलू सामने आया है कि चर्चित हस्तियों को निशाना बनाकर गिरोह फिल्म उद्योग में भय और दबदबा कायम करने की कोशिश कर सकता है। ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य कथित तौर पर रंगदारी और दूसरी अवैध गतिविधियों के लिए दबाव बनाना भी हो सकता है।

    हालांकि, हर घटना में आरोपों, सोशल मीडिया पर किए गए दावों और जांच से स्थापित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है। टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में भी हमले की वजह, हमलावरों की पहचान और गिरोह की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएंगे। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा के साथ-साथ मुंबई में कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • अहमदाबाद में नवरात्रि की आठवीं रात पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं गरबा, 200 साल पुरानी परंपरा के पीछे है साडू माता के बलिदान की कहानी

    अहमदाबाद में नवरात्रि की आठवीं रात पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं गरबा, 200 साल पुरानी परंपरा के पीछे है साडू माता के बलिदान की कहानी

    नई दिल्ली । गुजरात में नवरात्रि के दौरान गरबा और देवी की आराधना का विशेष महत्व है। इस उत्सव के बीच अहमदाबाद के शाहपुर इलाके में एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो अपनी अनूठी पहचान के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करती है। यहां नवरात्रि की आठवीं रात बारोट समुदाय के पुरुष साड़ी पहनकर गरबा करते हैं। माथे पर सिंदूर की बिंदी लगाकर होने वाला यह आयोजन करीब 200 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस रस्म का संबंध साडू माता के बलिदान और उनकी रक्षा नहीं कर पाने के बाद समुदाय द्वारा किए गए प्रायश्चित से है।

    शाहपुर की साडू माता नी पोल में हर साल नवरात्रि की आठवीं रात पुरुष एकत्र होते हैं और पारंपरिक तरीके से गरबा करते हैं। इस आयोजन में बारोट समुदाय के लोगों के साथ दूसरे समुदायों के लोग भी भाग लेते हैं। इस वर्ष भी कम से कम 40 पुरुष इस परंपरा में शामिल हुए। इनमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी मौजूद थे। यह आयोजन अलग-अलग समुदायों की भागीदारी के साथ परंपरा के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाता है।

    60 वर्षीय सतीश बारोट ने बताया कि वह 40 साल से अधिक समय से इस रस्म का हिस्सा बनते आ रहे हैं। वहीं, सुरेंद्रनगर से पिंटू बारोट अपने परिवार के साथ इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे। उनके 10 वर्षीय बेटे, भाई और भतीजे ने पहली बार इस परंपरा में भाग लिया। इस तरह परिवार की नई पीढ़ी भी इस पुरानी रस्म से जुड़ रही है।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस परंपरा की शुरुआत लगभग 200 साल पहले हुई एक घटना से जुड़ी है। मान्यता है कि बारोट समुदाय की साडू माता अपनी असाधारण सुंदरता के लिए जानी जाती थीं। उस समय के शासक ने उन्हें दरबार में पेश करने का आदेश दिया था। इस आदेश को पूरा कराने के लिए सैनिकों की एक टुकड़ी भेजी गई थी।

    स्थानीय मान्यता के अनुसार, समुदाय के लोगों ने साडू माता को उनकी इच्छा के विरुद्ध दरबार ले जाने का विरोध किया। इस दौरान सैनिकों और समुदाय के लोगों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। बताया जाता है कि खतरा बढ़ने पर साडू माता ने पहले अपनी बेटी अजूबा की जान ले ली। इसके बाद उन्होंने अपने पति हाथीसिंह बारोट से कहा कि उन्हें शाही दरबार में ले जाने देने के बजाय तलवार के एक वार से उनकी जान ले लें। मान्यता के अनुसार, इसके बाद साडू माता की मृत्यु हो गई।

    इस घटना के बाद समुदाय के लोगों को गहरा पछतावा हुआ कि वे साडू माता की रक्षा नहीं कर सके। स्थानीय विश्वास के मुताबिक, उनकी मृत्यु के बाद समुदाय के परिवारों पर श्राप लगने की आशंका जताई जाने लगी। लोगों का दावा था कि परिवारों में पुरुषों की मौतें होने लगीं और वंश को आगे बढ़ाने में कठिनाइयां आने लगीं।

    इसके बाद समुदाय के लोग साडू माता के स्मारक पर एकत्र हुए। उन्होंने अपनी गलती के लिए प्रायश्चित किया और परिवारों की खुशहाली तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रार्थना की। इसी दौरान पुरुषों ने साडू माता से जुड़े वस्त्र पहनने का संकल्प लिया। समुदाय का विश्वास है कि प्रार्थनाओं के बाद परिवारों की वंश-परंपरा फिर आगे बढ़ने लगी। समय के साथ साड़ी पहनकर गरबा करने की यह रस्म नवरात्रि की आठवीं रात की स्थायी परंपरा बन गई।

    आज इस आयोजन में शामिल होने वाले पुरुष इसे केवल नृत्य या धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति, कृतज्ञता और सामूहिक प्रायश्चित के प्रतीक के रूप में देखते हैं। अहमदाबाद के शाहपुर में निभाई जाने वाली यह परंपरा गुजरात के नवरात्रि उत्सव की विविधता और स्थानीय लोकविश्वासों से जुड़ी पुरानी स्मृतियों को सामने लाती है।