Blog

  • गंजे लुक में नयनतारा की तस्वीरें वायरल, क्या टॉक्सिक की सफलता के लिए मांगी थी मन्नत? सामने आया चौंकाने वाला सच

    गंजे लुक में नयनतारा की तस्वीरें वायरल, क्या टॉक्सिक की सफलता के लिए मांगी थी मन्नत? सामने आया चौंकाने वाला सच


    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री नयनतारा इन दिनों अपनी फिल्म टॉक्सिक से ज्यादा एक वायरल तस्वीर को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर उनकी कुछ तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं जिनमें वह तिरुमला मंदिर के बाहर गंजे लुक में नजर आ रही थीं। तस्वीरें सामने आते ही फैंस के बीच तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। किसी ने इसे फिल्म टॉक्सिक की सफलता के लिए मांगी गई मन्नत से जोड़ दिया तो किसी ने दावा किया कि नयनतारा ने फिल्म के लिए अपना सिर मुंडवा लिया है। लेकिन वायरल तस्वीरों की सच्चाई सामने आने के बाद पूरा मामला ही बदल गया है।

    दरअसल वायरल तस्वीरों को गौर से देखने पर उनमें AI से जुड़े संकेत नजर आए। सोशल मीडिया यूजर्स ने तस्वीर में मौजूद AI वॉटरमार्क को भी नोटिस किया। इसके बाद यह साफ होने लगा कि गंजे लुक वाली तस्वीरें असली नहीं हैं बल्कि AI की मदद से तैयार या बदली गई तस्वीरें हैं। यानी नयनतारा ने वास्तव में अपना सिर नहीं मुंडवाया है। इंटरनेट पर वायरल हो रही तस्वीर ने जरूर फैंस को कुछ समय के लिए हैरान कर दिया लेकिन बाद में इसकी हकीकत सामने आ गई।

    असली तस्वीरें तिरुमला यात्रा की हैं

    वायरल तस्वीरों को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक नयनतारा वास्तव में तिरुमला मंदिर गई थीं। अप्रैल में वह अपने पति विग्नेश शिवन के साथ तिरुमला पहुंची थीं। उनकी मंदिर यात्रा की मौजूदगी वास्तविक थी लेकिन बाद में उसी से जुड़ी तस्वीरों में AI की मदद से उनके सिर के बाल हटाकर उन्हें गंजे लुक में दिखाया गया। इसी बदली हुई तस्वीर को सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जाने लगा।

    तस्वीर वायरल होने के बाद कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या नयनतारा ने अपनी किसी फिल्म के लिए ऐसा कदम उठाया है। वहीं कुछ लोगों ने इसे टॉक्सिक से जोड़ दिया। सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा होने लगी कि अभिनेत्री ने फिल्म की सफलता के लिए मंदिर में मन्नत मांगी है। हालांकि गंजे लुक वाली वायरल तस्वीरों से इस तरह के दावों की पुष्टि नहीं होती है।

    टॉक्सिक से क्यों जोड़ा गया मामला

    नयनतारा जल्द ही यश स्टारर फिल्म टॉक्सिक में नजर आने वाली हैं। फिल्म को लेकर पहले से ही दर्शकों के बीच काफी उत्साह है। टॉक्सिक में यश के साथ नयनतारा कियारा आडवाणी तारा सुतारिया हुमा कुरैशी और रुक्मिणी वसंत जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है।

    फिल्म की रिलीज को लेकर भी काफी चर्चा है। रिपोर्ट के मुताबिक टॉक्सिक 26 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। कन्नड़ भाषा की इस फिल्म को तमिल और हिंदी समेत कई भाषाओं में रिलीज किए जाने की तैयारी है। फिल्म से जुड़े प्रमोशनल इवेंट में नयनतारा की मौजूदगी ने भी फैंस का ध्यान खींचा था।

    नयनतारा के पास कई बड़े प्रोजेक्ट

    टॉक्सिक के अलावा नयनतारा के पास कई महत्वपूर्ण फिल्में हैं। वह हाय मूकुथी अम्मन 2 मन्नांगट्टी सिंस 1960 डियर स्टूडेंट्स और रक्कायी जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आएंगी। हिंदी सिनेमा में भी उनका सफर जारी है। वह सलमान खान के साथ वंशी पैदिपल्ली के निर्देशन में बनने वाली फिल्म एसवीसी63 में भी दिखाई देंगी। यह फिल्म ईद 2027 के आसपास रिलीज होने की बात कही जा रही है।

    फिलहाल नयनतारा के गंजे लुक वाली तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर खूब हलचल जरूर मचा दी है लेकिन तस्वीरों की जांच के बाद यह दावा सही नहीं लगता कि अभिनेत्री ने वास्तव में अपना सिर मुंडवाया है। असली तिरुमला यात्रा की तस्वीरों को AI तकनीक की मदद से बदले जाने के बाद उन्हें नए रूप में वायरल किया गया। ऐसे में सोशल मीडिया पर किसी सेलिब्रिटी की वायरल तस्वीर देखकर तुरंत निष्कर्ष निकालने के बजाय उसके स्रोत और प्रामाणिकता की जांच करना बेहद जरूरी है।

  • भोपाल वालों के लिए मौसम का अपडेट: 18 अगस्त को बारिश की संभावना और सुहाने तापमान के संकेत

    भोपाल वालों के लिए मौसम का अपडेट: 18 अगस्त को बारिश की संभावना और सुहाने तापमान के संकेत


    नई दिल्ली । भोपाल में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ नजर आ रहा है। 18 अगस्त को राजधानी में बारिश के आसार बने हुए हैं और आसमान में बादलों की आवाजाही देखने को मिल सकती है। उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार मंगलवार को भोपाल में हल्की बारिश की संभावना है जबकि तापमान अपेक्षाकृत सामान्य रहने की उम्मीद है। सोमवार शाम तक भोपाल में बादल छाए हुए थे और मौसम में नमी बनी हुई थी।

    मौसम विभाग और उपलब्ध पूर्वानुमानों के संकेतों को देखें तो मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ी हैं। राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है और अगले कुछ दिनों में इसका प्रभाव अलग अलग क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। भोपाल भी उन इलाकों में शामिल है जहां हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में शहरवासियों को आने वाले दिनों में मौसम के बदलते मिजाज के लिए तैयार रहने की जरूरत है।

    18 अगस्त को भोपाल में सुबह से ही बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। बीच बीच में बारिश होने से मौसम सुहावना रह सकता है। बारिश के कारण तापमान में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। उपलब्ध पूर्वानुमान में मंगलवार को अधिकतम तापमान करीब 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

    भोपाल में लगातार बारिश के दौरान शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी सामने आ सकती है। सड़क पर निकलने वाले लोगों को मौसम की स्थिति देखकर यात्रा की योजना बनानी चाहिए। दोपहिया वाहन चालकों के लिए बारिश के दौरान विशेष सावधानी जरूरी होगी क्योंकि गीली सड़कों पर फिसलन बढ़ जाती है। तेज बारिश होने की स्थिति में खुले इलाकों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना भी बेहतर रहेगा।

    मानसून के दौरान भोपाल की झीलों और आसपास के इलाकों में भी मौसम का असर देखने को मिलता है। बारिश के बाद शहर का तापमान कम होने से लोगों को गर्मी से राहत मिलती है। हालांकि लगातार बारिश के कारण यातायात प्रभावित होने और कुछ इलाकों में पानी जमा होने की समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।

    18 अगस्त के बाद भी भोपाल में बारिश की संभावना बनी रहने के संकेत हैं। उपलब्ध साप्ताहिक पूर्वानुमान में 19 अगस्त को भी छिटपुट बारिश और 20 अगस्त को जोरदार बौछारों की संभावना दिखाई गई है। इसके बाद भी सप्ताह के बाकी दिनों में बारिश का दौर बने रहने का अनुमान है।

    कुल मिलाकर भोपाल में 18 अगस्त का मौसम राहत देने वाला रह सकता है। बादलों की मौजूदगी और हल्की बारिश से तापमान नियंत्रित रहने की संभावना है। हालांकि मानसून के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है इसलिए किसी भी यात्रा या जरूरी काम से पहले ताजा मौसम अपडेट देखना सबसे बेहतर रहेगा।

  • सूर्य-गुरु का दुर्लभ संयोग बदल सकता है किस्मत का रुख, मेष सिंह और धनु राशि वालों को मिलेंगे बड़े लाभ के संकेत

    सूर्य-गुरु का दुर्लभ संयोग बदल सकता है किस्मत का रुख, मेष सिंह और धनु राशि वालों को मिलेंगे बड़े लाभ के संकेत


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के गोचर और उनके आपसी संबंधों को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी क्रम में 17 अगस्त 2026 को सूर्य देव ने अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश किया है और अब वह 17 सितंबर तक सिंह राशि में रहेंगे। सूर्य के सिंह राशि में पहुंचते ही देवगुरु बृहस्पति के साथ द्विद्वादश योग का निर्माण हुआ है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जब दो ग्रह एक दूसरे से दूसरे और बारहवें भाव में स्थित होते हैं तो द्विद्वादश योग बनता है। इस योग में गुरु सूर्य से बारहवें भाव में और सूर्य गुरु से दूसरे भाव में स्थित माने जा रहे हैं। सूर्य को मान सम्मान नेतृत्व और आत्मविश्वास का कारक माना जाता है जबकि गुरु ज्ञान विस्तार समृद्धि और सौभाग्य से जुड़े ग्रह हैं। ऐसे में इस योग को कई राशियों के लिए शुभ और आर्थिक रूप से लाभकारी माना जा रहा है।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य और गुरु का यह संबंध काफी सकारात्मक माना जा रहा है। इस अवधि में कार्यक्षेत्र में आपकी नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आ सकती है। नौकरी करने वालों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि से जुड़ा कोई अच्छा समाचार मिल सकता है। अधिकारियों और वरिष्ठ लोगों का सहयोग मिलने की संभावना रहेगी। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए नए कारोबारी समझौते लाभदायक साबित हो सकते हैं। आय के नए स्रोत बनने के संकेत हैं और अचानक धन लाभ भी हो सकता है। इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ समाज में मान सम्मान बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    सिंह राशि

    सूर्य का गोचर सिंह राशि में ही हुआ है इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष महत्व रखता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सिंह राशि वालों के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि हो सकती है। लंबे समय से अटके हुए काम दोबारा गति पकड़ सकते हैं। आर्थिक मोर्चे पर भी राहत मिलने के संकेत हैं और अटका हुआ धन वापस मिलने की संभावना बन सकती है। इसके अलावा नए निवेश से भविष्य में लाभ मिलने के योग बताए गए हैं। परिवार में मांगलिक कार्य हो सकते हैं और वरिष्ठ लोगों का मार्गदर्शन भी प्राप्त होगा।

    धनु राशि

    धनु राशि के स्वामी स्वयं देवगुरु बृहस्पति माने जाते हैं इसलिए सूर्य के इस गोचर को इस राशि के लिए विशेष शुभ बताया जा रहा है। इस दौरान अटके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अच्छी खबर मिल सकती है। विदेश से जुड़े काम कारोबार या अवसरों में सफलता के संकेत हैं। इसके साथ ही सुख सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है और परिवार में सकारात्मक माहौल बनने की संभावना है।

    सूर्य और गुरु को मजबूत करने के उपाय

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य और गुरु के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाने के लिए सुबह सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल अर्पित किया जा सकता है। जल में रोली और पीला पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य देने की सलाह दी जाती है। इसके साथ सूर्य मंत्र और बृहस्पति मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। हालांकि ऐसे उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय नहीं माना जाता।

    कुल मिलाकर 17 अगस्त से 17 सितंबर तक सूर्य के सिंह राशि में रहने के दौरान बनने वाला द्विद्वादश योग ज्योतिषीय गणना के अनुसार मेष सिंह और धनु राशि वालों के लिए आर्थिक और करियर के लिहाज से अनुकूल माना जा रहा है। इन जातकों को नौकरी में तरक्की कारोबार में नए अवसर रुके हुए धन की वापसी और आय के नए रास्ते मिलने के संकेत बताए गए हैं। हालांकि राशिफल और ग्रहों से जुड़ी भविष्यवाणियां ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित होती हैं इसलिए किसी बड़े आर्थिक या निवेश संबंधी फैसले को केवल इनके आधार पर लेना उचित नहीं है।

  • इजरायल ने सीरिया के इदलिब में एयरबेस पर किए हवाई हमाले…. रनवे को उड़ाया

    इजरायल ने सीरिया के इदलिब में एयरबेस पर किए हवाई हमाले…. रनवे को उड़ाया


    नई दिल्ली। 1
    8 अगस्त 2026 की रात सीरिया (Syria) के उत्तर-पश्चिमी प्रांत इदलिब (Eastern Northwestern Province Idlib) के पूर्वी इलाके में स्थित अबू अल-दुहुर सैन्य एयरबेस (Abu al-Duhur Military Airbase) पर चार हवाई हमले हुए हैं. स्थानीय सीरियाई स्रोत, सोशल मीडिया अकाउंट्स और कुछ समाचार एजेंसियों ने बताया कि हमलों का मुख्य निशाना एयरबेस का रनवे था. आकाश में रोशनी वाले फ्लेयर छोड़े जाने का भी जिक्र है, जो आमतौर पर रात के ऑपरेशन में लक्ष्य को रोशन करने या निगरानी के लिए इस्तेमाल होते हैं।

    इन हमलों को इजरायली लड़ाकू विमानों द्वारा अंजाम दिया गया बताया, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में अभी यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि हमला किसने किया. अब तक इजरायल, तुर्की या सीरिया की नई सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसलिए ये खबरें अभी तक स्वतंत्र रूप से पूरी तरह पुष्ट नहीं हुई हैं।

    अबू अल-दुहुर एयरबेस सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान महत्वपूर्ण रहा है. 2012 से 2015 तक विद्रोही ताकतों ने इसे घेरे रखा था और आखिरकार कब्जा कर लिया था. बाद में असद शासन ने इसे वापस लिया, लेकिन दिसंबर 2024 में असद शासन के पतन के बाद विद्रोही समूहों ने इसे फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया.

    फिलहाल यह बेस सीरिया की नई और सीमित वायुसेना के नियंत्रण में बताया जाता है. यहां पुराने सोवियत काल के Su-22 लड़ाकू-बमवर्षक, L-39 ट्रेनर विमान और कुछ हेलीकॉप्टर रखे गए हैं. हाल के हफ्तों में इन पुराने Su-22 विमानों के प्रशिक्षण उड़ानें भरने की खबरें आई थीं, जिससे इजरायल में चिंता जताई गई थी कि नई सीरियाई वायुसेना धीरे-धीरे अपनी क्षमताएं बढ़ा रही है।


    रणनीतिक महत्व और संभावित उद्देश्य

    इदलिब क्षेत्र तुर्की के प्रभाव क्षेत्र के करीब है और सीरिया के नए प्रशासन के लिए उत्तरी हिस्से में नियंत्रण बनाए रखने के लिहाज से अहम है. रनवे को निशाना बनाना यह संकेत देता है कि हमला करने वाली ताकत एयरबेस की परिचालन क्षमता को सीमित करना चाहती थी, ताकि विमान उड़ान न भर सकें.

    इजरायल लंबे समय से सीरिया में किसी भी सैन्य क्षमता के विकास को रोकने की नीति अपनाता रहा है, खासकर असद शासन के पतन के बाद जब उसने कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, ताकि हथियार और विमान नए प्रशासन के हाथ में पूरी तरह न जा सकें. हालिया Su-22 उड़ानों के बाद इस हमले को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में तुर्की बलों की मौजूदगी का भी जिक्र है, जिससे क्षेत्रीय जटिलताएं और बढ़ सकती हैं।


    क्षेत्रीय प्रभाव और अनिश्चितता

    यह घटना मध्य पूर्व की नाजुक सुरक्षा स्थिति को और तनावपूर्ण बना सकती है. सीरिया की नई सरकार अपनी सैन्य क्षमताएं फिर से खड़ी करने की कोशिश कर रही है, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा रेखा बनाए रखना चाहता है. तुर्की की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि वह इदलिब में प्रभाव रखता है.

    फिलहाल नुकसान का पूरा आकलन उपलब्ध नहीं है. न ही किसी बड़े हताहत की पुष्टि हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आधिकारिक पुष्टि या सैटेलाइट चित्र नहीं आते, तब तक पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होगी. यह घटना दिखाती है कि असद के बाद के सीरिया में भी बाहरी शक्तियां सक्रिय रूप से सैन्य संतुलन प्रभावित कर रही हैं.

  • LPG उत्पादन बढ़ाने के सख्त निर्देश… त्योहारी सीजन में नहीं होगी सिलेंडर की किल्लत

    LPG उत्पादन बढ़ाने के सख्त निर्देश… त्योहारी सीजन में नहीं होगी सिलेंडर की किल्लत


    नई दिल्ली।
    मोदी सरकार (Modi government) किसी भी कीमत पर एलपीजी (LPG) की किल्लत नहीं होने देना चाहती। आने वाले त्योहारी और शादियों के सीजन (Festive and Wedding season) से पहले सरकारी और प्राइवेट 21 कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के सख्त आदेश दिए गए हैं। क्योंकि, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर अनिश्चितता आयात पर खतरा पैदा कर रही है।


    सरकार का 13 अगस्त का निर्देश क्या कहता है

    13 अगस्त की सरकारी सूचना के अनुसार, निजी और सरकारी रिफाइनरियों, साथ ही तेल और गैस उत्पादक कंपनियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के लिए “सभी तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव कदम” उठाने का आदेश दिया गया है। इसमें नेफ्था को एलपीजी में बदलने जैसे वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की भी बात कही गई है।


    त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए बढ़ाया गया उत्पादन

    युद्ध से पहले घरेलू रिफाइनरियां रोजाना लगभग 36,000 टन एलपीजी का उत्पादन करती थीं। पारंपरिक त्योहारी सीजन सितंबर से शुरू होकर नवंबर में दिवाली के दौरान चरम पर होता है। इस दौरान बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उन्होंने पहले ही उत्पादन बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया है।


    कंपनियों को मिला नया लक्ष्य और जिम्मेदारी

    सरकार चाहती है कि उद्योग निर्धारित समय-सीमा के भीतर 63,810 टन प्रतिदिन उत्पादन करने में सक्षम हो जाए। सूचना में सभी रिफाइनरियों के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किए गए हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज की घरेलू बाजार पर केंद्रित इकाई को सबसे बड़ा लक्ष्य (18,000 टन प्रतिदिन) दिया गया है, जबकि उसकी निर्यात-केंद्रित स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) रिफाइनरी को इससे छूट दी गई है।

    सरकारी कंपनियों ओएनजीसी, ऑयल इंडिया और राष्ट्रीय गैस पाइपलाइन कंपनी गेल को भी कुल राष्ट्रीय लक्ष्य का लगभग दसवां हिस्सा पूरा करने को कहा गया है।


    आयात पर निर्भरता और खाड़ी संकट

    भारत अपनी एलपीजी खपत का लगभग दो-तिहाई (66%) हिस्सा आयात करता है। इसमें से करीब 90% सप्लाई फारस की खाड़ी के रास्ते से होकर आती है। मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद जब सप्लाई बाधित हुई, तो भारत में LPG की भारी कमी हो गई थी। इस संकट के दौरान हफ्तों तक लोगों को बायोमास और मिट्टी के तेल (केरोसिन) जैसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले विकल्पों का सहारा लेना पड़ा था।


    वैकल्पिक सप्लाई की चुनौती

    रेटिंग एजेंसी ICRA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, “लंबे समय तक चले इस युद्ध के कारण सरकार घरेलू एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करना चाहती है।” उन्होंने बताया कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से वैकल्पिक आपूर्ति लाने में बहुत अधिक समय लगता है, जिससे लागत बढ़ जाती है और इन सप्लाई के लिए महीनों पहले ही इंतजाम करने पड़ते हैं।

  • सावन व्रत में आलू चोखा की जगह बनाएं स्वादिष्ट टमाटर चोखा, 10 मिनट में तैयार होगी चटपटी और सात्विक डिश

    सावन व्रत में आलू चोखा की जगह बनाएं स्वादिष्ट टमाटर चोखा, 10 मिनट में तैयार होगी चटपटी और सात्विक डिश

    नई दिल्ली । सावन का महीना आते ही घरों में व्रत, पूजा और सात्विक भोजन का महत्व बढ़ जाता है। इस दौरान अधिकांश लोग प्याज और लहसुन से परहेज करते हैं और खाने में आलू आधारित व्यंजनों का उपयोग अधिक करने लगते हैं। हालांकि लगातार आलू से बनी चीजें खाने के कारण कई बार स्वाद में एकरसता आ जाती है। ऐसे में टमाटर का चोखा एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ हल्का और झटपट बनने वाला व्यंजन भी है।

    टमाटर का चोखा उत्तर भारत के कई हिस्सों में पसंद किया जाता है। इसका खट्टा-तीखा स्वाद साधारण व्रत के भोजन को भी खास बना देता है। इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे तैयार करने में ज्यादा समय नहीं लगता और बहुत कम सामग्री की आवश्यकता होती है। घर में उपलब्ध कुछ सामान्य चीजों की मदद से इसे आसानी से बनाया जा सकता है।

    इस व्यंजन को बनाने के लिए सबसे पहले तीन से चार पके हुए टमाटर और दो हरी मिर्च लें। इन्हें हल्का सा तेल लगाकर सीधे गैस की आंच पर अच्छी तरह भून लें। जब टमाटर नरम हो जाएं और उनका छिलका काला पड़ने लगे, तब उन्हें निकालकर ठंडा होने दें। इसके बाद टमाटर और मिर्च का छिलका उतार लें। भूनने की प्रक्रिया से इसमें एक विशेष स्मोकी फ्लेवर आता है, जो चोखे के स्वाद को और बेहतर बनाता है।

    अब भुने हुए टमाटर और मिर्च को सिलबट्टे या किसी बर्तन में डालकर हल्का दरदरा कूट लें। इसके साथ दो बड़े चम्मच भूनी हुई मूंगफली, एक छोटा चम्मच भूना जीरा, आधा छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर और स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाएं। इन सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाएं, लेकिन ध्यान रखें कि मिश्रण पूरी तरह पेस्ट न बने। हल्का दरदरा टेक्सचर ही इस रेसिपी की पहचान माना जाता है।

    इसके बाद इसमें बारीक कटा हुआ हरा धनिया और एक छोटा चम्मच ताजा नींबू का रस मिलाएं। सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाने के बाद टमाटर का चोखा तैयार हो जाता है। नींबू का रस इसमें अतिरिक्त ताजगी और स्वाद जोड़ता है, जबकि मूंगफली हल्का कुरकुरापन प्रदान करती है।

    टमाटर का यह चोखा व्रत में खाए जाने वाले कई व्यंजनों के साथ परोसा जा सकता है। इसे कुट्टू या सिंहाड़े की पूरी, साबूदाना टिक्की, राजगीरा पराठा और सामक के चावल के साथ खाया जा सकता है। इसका तीखा और खट्टा स्वाद साधारण भोजन को भी स्वादिष्ट बना देता है। यही कारण है कि यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    पोषण के दृष्टिकोण से भी यह व्यंजन अच्छा माना जाता है। टमाटर में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। वहीं मूंगफली प्रोटीन और हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत है। इस वजह से यह केवल स्वाद ही नहीं बल्कि पोषण भी प्रदान करता है।

    अगर आप सावन के व्रत या सात्विक भोजन के दौरान कुछ नया, हल्का और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो टमाटर का चोखा एक शानदार विकल्प हो सकता है। कम समय, कम सामग्री और बेहतरीन स्वाद की वजह से यह रेसिपी हर उम्र के लोगों को पसंद आ सकती है और व्रत के भोजन में एक नया स्वाद जोड़ सकती है।

  • जनगणना 2027: आधार से लेकर बैंक खातों तक….. लोगों से पूछी जाएंगी ये जानकारियां

    जनगणना 2027: आधार से लेकर बैंक खातों तक….. लोगों से पूछी जाएंगी ये जानकारियां


    नई दिल्ली।
    जनगणना 2027 (Census 2027) को लेकर आधार (Aadhaar), मतदाता पहचान पत्र (Voter ID), ड्राइविंग लाइसेंस (Driving license), पासपोर्ट, मोबाइल नंबर (Mobile number) और बैंक खातों (Bank accounts) से जुड़ी जानकारी मांगे जाने को लेकर लोगों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान नागरिकों से कोई निजी या गोपनीय बैंकिंग जानकारी नहीं मांगी जाएगी। नागरिकों से बैंक खातों की सिर्फ संख्या पूछी जाएगी।

    इसका मतलब है कि बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड, एटीएम या डेबिट कार्ड नंबर, पासवर्ड, पिन, ओटीपी, खाते में जमा राशि या लेन-देन का विवरण नहीं देना है। सिर्फ यह बताना है कि आपके नाम पर कितने बैंक खाते हैं। इसी तरह आधार, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट जैसे सरकार द्वारा जारी पहचान दस्तावेजों से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी। यह जानकारी उपलब्ध होने की स्थिति में ही दी जानी है।

    कर्मियों को क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र: जनगणना का कार्य करने वाले कर्मचारियों की पहचान के लिए क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र की व्यवस्था की गई है। किसी भी तरह का संदेह होने की स्थिति में इस कोड की मदद से कर्मचारी की पहचान सत्यापित की जा सकती है।


    पहले से तैयारी पूरी रखें

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना में करीब 40 प्रश्न पूछे जाने हैं। इसलिए घर पर पहले से आवश्यक जानकारी कागज पर लिखकर तैयार रखना उपयोगी होगा। इससे प्रक्रिया में आसानी और गलत जानकारी देने की संभावना भी कम होगी।


    वित्तीय जानकारी नहीं लेंगे

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना का उद्देश्य लोगों की निजी बैंकिंग या वित्तीय जानकारी हासिल करना नहीं है। इसका उद्देश्य देश की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति, आवास, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और जनसांख्यिकीय पहलुओं से जुड़ा विश्वसनीय आंकड़ा तैयार करना है।


    आपकी जानकारी सुरक्षित

    अधिकारियों ने कहा कि जनगणना की जानकारी ‘जनगणना अधिनियम, 1948’ के तहत एकत्र की जाती है। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत जानकारी गोपनीयता धारा 15 के तहत सुरक्षित है। इसलिए नागरिकों को अनावश्यक भय या भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है।


    साइबर ठगी से सावधान, आपको क्या नहीं बताना है

    1. बैंक अकाउंट नंबर
    2. एटीएम/डेबिट कार्ड नंबर
    3. इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड
    4. यूपीआई पिन
    5. ओटीपी
    6. खाते में उपलब्ध राशि
    7. बैंक लेन-देन का विवरण

  • राजनीति में अपराधियों का बोलबाला…. 326 सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ दर्ज हैं केस….

    राजनीति में अपराधियों का बोलबाला…. 326 सांसदों और 14 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ दर्ज हैं केस….


    नई दिल्ली।
    राजनीति में अपराधीकरण (Criminalization Politics) के संबंध में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को सौंपी गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लोकसभा (Lok Sabha) के 543 सदस्यों में से 251 और राज्यसभा (Rajya Sabha) के 233 सदस्यों में से 75 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    न्यायालय में वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने एक हलफनामा दायर किया है। उन्हें सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) में ‘न्यायमित्र’ (अदालत की मदद करने वाला वकील) नियुक्त किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं।


    28 में से 14 CM के खिलाफ मामलों का अंबार

    हलफनामे में कहा गया है कि 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है, जिनमें गंभीर मामले भी शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ 89 मामले दर्ज हैं, इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (29 मामले) और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार (19 मामले) हैं।

    हंसारिया ने कहा कि मुकदमों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की निगरानी के बावजूद, 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की संख्या लगभग उसी स्तर पर बनी हुई है।

    अलग-अलग उच्च न्यायालय से आंकड़े इकट्ठा करके, न्यायमित्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि 2025 में 1,243 आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया, जबकि उसी साल 1,050 नए मामले दर्ज किए गए। उन्होंने न्यायालय को बताया कि पूर्व और मौजूदा सांसदों/विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 मामले लंबित हैं।


    170 मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी

    लोकसभा में 543 सदस्यों में से 251 सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 170 मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी के हैं (जिनमें पांच साल या उससे अधिक की जेल की सजा हो सकती है)।

    हलफनामे में ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 (33 प्रतिशत) सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 40 (18 प्रतिशत) मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी के हैं (जिनमें पांच साल या उससे अधिक की जेल की सजा हो सकती है)।

    वरिष्ठ वकील ने अलग-अलग उच्च न्यायालय की तरफ से दाखिल रिपोर्ट का विश्लेषण भी जमा किया। इसमें उत्तर प्रदेश शामिल नहीं था क्योंकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय से कोई रिपोर्ट नहीं मिली थी।


    केरल-तेलंगाना का तो हार बुरा है

    वकील स्नेहा कलिता के जरिए दाखिल हलफनामे के मुताबिक, केरल के 20 में से 19 सांसदों (95 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले दर्ज थे और उनमें से 11 पर गंभीर मामले थे। तेलंगाना के 17 सांसदों में से 14 (82 प्रतिशत) पर आपराधिक मामले थे; ओडिशा में यह आंकड़ा 76 प्रतिशत (21 में से 16), झारखंड में 71 प्रतिशत (14 में से 10) और तमिलनाडु में 67 प्रतिशत (39 में से 26) था। वहीं, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य बड़े राज्यों के लगभग 50 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज थे।


    हरियाणा, छत्तीसगढ़ में केवल एक

    हरियाणा (10 सांसद) और छत्तीसगढ़ (11 सांसद) में से सिर्फ एक-एक सांसद पर आपराधिक मामले हैं; पंजाब में 13 में से दो, असम में 14 में से तीन, दिल्ली में सात में से तीन, राजस्थान में 25 में से चार, गुजरात में 25 में से पांच और मध्य प्रदेश में 29 में से नौ सांसदों पर आपराधिक मामले हैं।

    न्यायमित्र ने इस बात पर जोर दिया है कि सांसद/विधायक के खिलाफ आपराधिक मामलों के तेजी से निस्तारण के लिए उच्चतम न्यायालय को उन पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि सांसद/विधायक के लिए तय की गई विशेष अदालत सिर्फ सांसद/विधायक के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई करें और जब इन मामलों की सुनवाई पूरी हो जाए, तभी दूसरे मामलों को लिया जाए। हंसारिया, विधि निर्माताओं के खिलाफ मामलों के जल्द निस्तारण के लिए अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में न्यायालय की मदद कर रहे हैं।

  • गरीब की थाली पर महंगाई की मार…. 4% तक बढ़े गेहूं के दाम…. आटा-रोटी पर असर

    गरीब की थाली पर महंगाई की मार…. 4% तक बढ़े गेहूं के दाम…. आटा-रोटी पर असर


    नई दिल्ली।
    महंगाई (Inflation) की मार अब खाने की थाली (Food plate) तक और बढ़ सकती है। वैश्विक बाजार (Global market) में गेहूं की कीमतों (Wheat prices) में तेजी का असर घरेलू बाजार (Domestic Market) में भी दिखाई देने लगा है। फिलहाल गेहूं की कीमत करीब 6.7 डॉलर प्रति बुशेल के आसपास है, जो 24 जुलाई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। पिछले एक महीने में देश की प्रमुख मंडियों में गेहूं के भाव 3.85 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। अगर यह तेजी आगे भी बनी रहती है तो आटा, ब्रेड और गेहूं से बनने वाले दूसरे खाद्य उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।


    काला सागर का तनाव गेहूं के लिए इतना अहम क्यों है?

    गेहूं की कीमतों में तेजी के पीछे काला सागर क्षेत्र में बढ़ता तनाव बड़ी वजह बन रहा है। रूस और यूक्रेन दुनिया के गेहूं निर्यात में बड़ा हिस्सा रखते हैं। रूस की ओर से यूक्रेन के साथ काला सागर में संभावित युद्धविराम के प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद वहां तनाव बना हुआ है। हमलों से समुद्री रास्तों पर शिपिंग प्रभावित हो रही है और निर्यात घटने की चिंता बढ़ी है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की आपूर्ति को लेकर आशंका पैदा हुई है।


    घरेलू मंडियों में कितनी बढ़ी गेहूं की कीमत?

    इस वैश्विक चिंता का असर भारतीय मंडियों में भी दिख रहा है। 17 जुलाई से 17 अगस्त के बीच राजकोट में गेहूं का भाव 2,600 रुपये से बढ़कर 2,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। दिल्ली में यह 2,782.50 रुपये से बढ़कर 2,870 रुपये, कानपुर में 2,620 रुपये से बढ़कर 2,700 रुपये और कोटा में 2,657.50 रुपये से बढ़कर 2,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इंदौर में भी भाव 2,695 रुपये से बढ़कर 2,708.75 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया। यानी कई प्रमुख मंडियों में एक महीने के भीतर कीमतें बढ़ी हैं।


    क्या आगे भी बढ़ सकती हैं गेहूं की कीमतें?

    गेहूं की कीमतों का आगे का रुख काला सागर क्षेत्र के हालात और मौसम पर निर्भर करेगा। अगर वहां तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर आयातक देशों के बाजारों पर पड़ सकता है। भारत में भी अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का घरेलू बाजार पर असर पड़ता है। ऐसे में फिलहाल गेहूं के ऊंचे भाव चिंता का विषय बने हुए हैं। कीमतों में और तेजी आई तो इसका असर आटे और गेहूं से जुड़े दूसरे उत्पादों पर भी पड़ सकता है।


    गेहूं के साथ प्याज ने भी क्यों बढ़ाई रसोई की चिंता?

    महंगाई का दबाव केवल गेहूं तक सीमित नहीं है। दक्षिण भारत से खरीफ प्याज की आवक में देरी के बीच थोक मंडी में प्याज का भाव बढ़कर 32 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। 17 अगस्त 2026 को प्याज का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 37.20 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जबकि एक महीने पहले यह 34.53 रुपये और एक साल पहले 26.86 रुपये प्रति किलो था। सरकार की ओर से न्यूनतम खरीद मूल्य में सात बार बढ़ोतरी के बावजूद प्याज की खरीद दो लाख टन के लक्ष्य से करीब 25 फीसदी कम रहने का अनुमान है। यानी गेहूं और प्याज दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी ने घरेलू रसोई के बजट को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • Gen Z में बढ़ा Buy Now Pay Later का चलन, शौक और लाइफस्टाइल के लिए बढ़ती उधारी बना रही आर्थिक दबाव का नया कारण

    Gen Z में बढ़ा Buy Now Pay Later का चलन, शौक और लाइफस्टाइल के लिए बढ़ती उधारी बना रही आर्थिक दबाव का नया कारण

    नई दिल्ली । बदलती डिजिटल लाइफस्टाइल के साथ युवाओं के खर्च करने और भुगतान करने के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। खासकर Gen Z के बीच Buy Now Pay Later यानी अभी खरीदें और बाद में भुगतान करें जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। महंगे मोबाइल फोन, ब्रांडेड कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, यात्रा, खान-पान और मनोरंजन जैसी जरूरतों या इच्छाओं को पूरा करने के लिए अब हमेशा खाते में पर्याप्त रकम होने का इंतजार नहीं किया जाता। आसान किस्त और तत्काल क्रेडिट की सुविधा ने खरीदारी को पहले की तुलना में काफी सरल बना दिया है।

    पहले कर्ज को मुख्य रूप से घर खरीदने, शिक्षा, कारोबार या किसी बड़ी आपात जरूरत से जोड़कर देखा जाता था। अब डिजिटल भुगतान व्यवस्था और ऑनलाइन शॉपिंग के विस्तार के साथ छोटे और रोजमर्रा के खर्चों के लिए भी क्रेडिट का इस्तेमाल बढ़ा है। क्रेडिट कार्ड, Buy Now Pay Later और छोटे व्यक्तिगत ऋण युवाओं को तत्काल खर्च करने की सुविधा देते हैं। खरीदारी के समय पूरी रकम चुकाने के बजाय कम मासिक किस्त दिखाई देती है, जिससे महंगा सामान भी आसानी से खरीदने योग्य नजर आने लगता है।

    क्रेडिट व्यवहार से जुड़े आंकड़ों और विश्लेषणों से यह संकेत मिलता है कि अलग-अलग पीढ़ियों में पहली बार उधार लेने की उम्र कम हुई है। युवा वर्ग कम उम्र में ही क्रेडिट सिस्टम से जुड़ रहा है। इसका एक बड़ा कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कुछ ही चरणों में उपलब्ध होने वाली ऋण और किस्त की सुविधा है। कई बार खरीदारी करते समय ही ग्राहक को EMI या Pay Later का विकल्प मिल जाता है। इससे खरीदारी का फैसला बचत और आय के आधार पर करने के बजाय तत्काल उपलब्ध किस्त के आधार पर होने लगता है।

    इस बदलाव का सबसे बड़ा जोखिम तब सामने आता है, जब एक व्यक्ति एक साथ कई क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल करने लगता है। उदाहरण के लिए किसी युवा की मासिक आय 40 हजार रुपये है और वह मोबाइल, कपड़े, यात्रा तथा अन्य खर्चों के लिए अलग-अलग किस्त ले लेता है। प्रत्येक खरीदारी की EMI अकेले देखने पर छोटी लग सकती है, लेकिन महीने के अंत में सभी किस्तों का कुल भुगतान काफी बड़ा हो सकता है। इसके बाद जरूरी घरेलू खर्चों और बचत के लिए उपलब्ध रकम कम हो जाती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार क्रेडिट सुविधा अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इसे अतिरिक्त आय समझना वित्तीय गलती हो सकती है। किसी बैंक या वित्तीय संस्था की ओर से दी गई क्रेडिट लिमिट का अर्थ यह नहीं है कि उतनी पूरी राशि खर्च करना सुरक्षित है। खर्च करने से पहले अपनी आय, मौजूदा कर्ज, मासिक किस्तों और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में ब्याज, लेट फीस और अन्य शुल्क आर्थिक बोझ बढ़ा सकते हैं। लगातार भुगतान में देरी से क्रेडिट रिकॉर्ड पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए युवाओं के लिए जरूरी है कि केवल कम EMI देखकर खरीदारी का फैसला न करें। कुल भुगतान राशि, ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    बढ़ती डिजिटल क्रेडिट सुविधाओं के बीच वित्तीय अनुशासन ही सबसे बड़ा बचाव है। शौक और लाइफस्टाइल को पूरा करने के लिए लिया गया छोटा कर्ज अगर लगातार बढ़ता जाए तो वह भविष्य की बचत और आर्थिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है। जरूरत और इच्छा के बीच अंतर समझकर खर्च करना तथा आय के अनुरूप ही उधारी लेना युवाओं को इस बढ़ते कर्ज के दबाव से बचा सकता है।