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  • पीएम मोदी का वीडियो हटाने के विवाद के बाद Meta पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा, सरकार ने अवैध कंटेंट को लेकर मांगा जवाब

    पीएम मोदी का वीडियो हटाने के विवाद के बाद Meta पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा, सरकार ने अवैध कंटेंट को लेकर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी सामग्री को लेकर सरकार का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक वीडियो को फेसबुक से हटाए जाने के विवाद के बाद Meta पर सरकार की निगरानी और दबाव बढ़ा था। इसी पृष्ठभूमि में अब कंपनी की ओर से बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी गैरकानूनी सामग्री यानी CSAM के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम ने भारत में सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और उन्हें मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है।

    सरकारी रुख के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियां यदि अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद गैरकानूनी सामग्री के खिलाफ जरूरी कदम नहीं उठाती हैं तो उन्हें कानूनी संरक्षण को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारियों का कहना है कि कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री के मामलों में सेफ हार्बर का लाभ स्वतः सुनिश्चित नहीं माना जा सकता। हालांकि किसी कंपनी ने कानून का उल्लंघन किया है या नहीं और उसे सेफ हार्बर सुरक्षा मिलेगी या नहीं इसका अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

    Meta के लिए यह मामला केवल CSAM सामग्री हटाने तक सीमित नहीं है। कंपनी के एल्गोरिदम, कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था और प्लेटफॉर्म पर सामग्री की पहुंच बढ़ाने वाली प्रणालियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकार की ओर से कंपनी से इस बात को लेकर जवाब मांगा गया है कि गैरकानूनी सामग्री को रोकने और बार बार सामने आने वाली ऐसी सामग्री पर कार्रवाई करने के लिए उसकी तकनीकी प्रणालियां किस तरह काम करती हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी का फेसबुक वीडियो कुछ समय के लिए हटाए जाने के बाद भारत में Meta की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद काफी बढ़ गया था। इस घटनाक्रम के बाद कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के बीच बैठक भी हुई थी। Meta की ओर से वीडियो हटाए जाने को गलती बताया गया और कंपनी के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने इस मामले पर माफी मांगी थी। इसके बाद सरकार ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद अन्य गंभीर समस्याओं को लेकर भी कंपनी से जवाब तलब किया।

    संसदीय स्तर पर भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लेकर सख्त संदेश दिया गया था। समिति ने बाल यौन शोषण सामग्री, महिलाओं से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री और अन्य गैरकानूनी कंटेंट को हटाने की जिम्मेदारी को गंभीरता से लेने की बात कही थी। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि कानून का पालन नहीं करने की स्थिति में संबंधित प्लेटफॉर्म के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

    सरकार और Meta के बीच हुई चर्चाओं में CSAM के अलावा डीपफेक, वेरिफाइड अकाउंट की सुरक्षा, एल्गोरिद्मिक पक्षपात और भारतीय कानूनों के अनुपालन जैसे मुद्दे भी सामने आए। इससे स्पष्ट है कि भारत में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए केवल कंटेंट हटाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें अपनी मॉडरेशन व्यवस्था और तकनीकी प्रक्रियाओं को भी अधिक जवाबदेह बनाना पड़ सकता है।

    दुनिया के दूसरे देशों में भी सोशल मीडिया से जुड़े नुकसान और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन सहित कई देशों में प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और डिजिटल सामग्री की निगरानी को लेकर नियम कड़े किए जा रहे हैं। भारत में भी सरकार का मौजूदा रुख इसी व्यापक वैश्विक बहस के बीच सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ती जवाबदेही का संकेत माना जा रहा है।

  • नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग फिर तेज, पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान बनाने का दिया प्रस्ताव

    नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग फिर तेज, पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान बनाने का दिया प्रस्ताव

    नई दिल्ली । नेपाल में एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के गुट के राष्ट्रीय सम्मेलन में देश की पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आया। सम्मेलन में सनातन धर्म को नेपाल की राष्ट्रीय पहचान से जोड़ने की बात कही गई, जिसके बाद वहां के राजनीतिक माहौल में नई बहस शुरू हो गई है।

    नेपाल लंबे समय तक हिंदू राष्ट्र के रूप में पहचाना जाता था, लेकिन वर्ष 2008 में राजशाही के अंत और राजनीतिक परिवर्तन के बाद देश को धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित किया गया। इसके बाद से हिंदू राष्ट्र की मांग अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों की ओर से समय-समय पर उठती रही है। हाल के दिनों में मधेश और तराई क्षेत्रों में सामने आए सांप्रदायिक तनाव तथा सामाजिक असंतोष के बीच इस मांग ने फिर जोर पकड़ा है।

    देउबा गुट के सम्मेलन में पारित प्रस्ताव में नेपाल की पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं को राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। प्रस्ताव में सनातन धर्म की पहचान को आगे बढ़ाने के साथ हिंदू, बौद्ध, किरात और प्रकृति आधारित धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की बात भी कही गई। इसके साथ ही सभी धार्मिक समुदायों की स्वतंत्रता, सहिष्णुता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया गया।

    सम्मेलन के समापन समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने अपने धार्मिक विश्वास को लेकर खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह हिंदू हैं और उन्हें यह कहने का अधिकार होना चाहिए कि वह हिंदू हैं। देउबा ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनका रुख किसी समुदाय के विरोध में नहीं है। उनके इस बयान को नेपाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सम्मेलन में नेपाल के मौजूदा संविधान को लेकर भी चर्चा हुई। प्रस्ताव में कहा गया कि संविधान में जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए। हालांकि, ऐसे किसी भी बदलाव के लिए सभी संबंधित समूहों के साथ बातचीत और सहमति की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया। इससे संकेत मिलता है कि संविधान में धार्मिक पहचान से जुड़े किसी बदलाव को लेकर व्यापक राजनीतिक संवाद की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

    नेपाल में हिंदू राष्ट्र की बहाली का मुद्दा केवल धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध देश की राजनीति, संविधान और सामाजिक संरचना से भी है। नेपाल में हिंदू और बौद्ध परंपराओं का ऐतिहासिक प्रभाव रहा है, जबकि देश में अन्य धार्मिक समुदाय भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। ऐसे में हिंदू राष्ट्र की मांग के साथ धार्मिक स्वतंत्रता और समान अधिकारों को लेकर भी बहस तेज होने की संभावना है।

    देउबा गुट की ओर से सामने आया प्रस्ताव नेपाली कांग्रेस के भीतर भी राजनीतिक चर्चा को प्रभावित कर सकता है। नेपाल की मुख्यधारा की राजनीति में धर्मनिरपेक्षता, संवैधानिक व्यवस्था और पारंपरिक धार्मिक पहचान के बीच संतुलन को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। अब सम्मेलन में हिंदू राष्ट्र की पहचान को लेकर उठी आवाज ने इस बहस को फिर राष्ट्रीय स्तर पर ला दिया है। हालांकि, नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए संवैधानिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक प्रक्रिया से गुजरना होगा।

  • CJI सूर्यकांत ने सरकार से जांच जारी रखने वाली FIR की सूची मांगी, सभी पक्षों को कमेटी के सामने रखने होंगे अपने तर्क

    CJI सूर्यकांत ने सरकार से जांच जारी रखने वाली FIR की सूची मांगी, सभी पक्षों को कमेटी के सामने रखने होंगे अपने तर्क

    नई दिल्ली ।पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर हुए प्रदर्शनों के दौरान दर्ज FIR को रद्द करने की मांग पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में प्रदर्शनकारियों की ओर से सभी FIR खत्म करने की मांग रखी गई, जबकि सरकार ने इसका विरोध करते हुए कुछ मामलों में जांच जारी रखने की जरूरत बताई।

    सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने पूरे मामले के लिए हाई पावर्ड कमेटी गठित करने की बात कही। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित पक्ष कमेटी के सामने अपनी बात रख सकेंगे। कमेटी मामले से जुड़े तथ्यों और विभिन्न पक्षों के तर्कों पर विचार करने के बाद अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।

    प्रदर्शनकारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत से सभी FIR रद्द करने का आदेश देने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों पर व्यापक स्तर पर विचार किया जाना चाहिए। वहीं सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया और कुछ मामलों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आरोपियों को राहत देने पर आपत्ति जताई गई।

    सरकार की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को अलग-अलग देखना जरूरी है। उनका तर्क था कि यदि सभी FIR एक साथ रद्द कर दी जाती हैं तो इससे गलत संदेश जा सकता है। संसद मार्च का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान उठाया गया और इसे कानून के दायरे में रहने की आवश्यकता से जोड़ा गया।

    इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि संविधान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार देता है। हालांकि, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रदर्शन के दौरान कानून का उल्लंघन या गंभीर आपराधिक गतिविधि के आरोपों वाले मामलों को अलग नजरिए से देखा जा सकता है।

    सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट से अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर सभी FIR खत्म करने की मांग की जा रही है। अदालत ने सरकार की आपत्तियों और सुझावों को सुनते हुए कहा कि सभी पक्षों की बात को प्रस्तावित कमेटी के समक्ष रखा जा सकता है।

    सुनवाई के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से भी अपनी बात रखने की मांग की गई। उनके पक्ष का कहना था कि FIR या अन्य मामलों में कोई निर्णय लेने से पहले प्रभावित पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की स्थिति पर भी विचार किया जाना चाहिए।

    मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से उन मामलों की सूची भी मांगी जिनमें जांच आगे जारी रखना आवश्यक समझा जा रहा है। अदालत ने संकेत दिया कि प्रस्तावित कमेटी सभी मामलों को देखने के बाद यह समझने में मदद करेगी कि किन मामलों में कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और किन मामलों में राहत पर विचार किया जा सकता है।

    कमेटी की संरचना को लेकर अदालत ने बताया कि एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, पूर्व पुलिस महानिदेशक और पूर्व सीबीआई निदेशक से सहमति ली गई है। इसके अलावा कमेटी में अन्य सदस्यों को शामिल करने के सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।

    अदालत की इस पहल से अब FIR से जुड़े सभी पक्षों को अपनी स्थिति विस्तार से रखने का अवसर मिलेगा। कमेटी की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा। फिलहाल अदालत ने सभी संबंधित मामलों की सूची और पक्षों की दलीलों को एक व्यापक प्रक्रिया के तहत देखने का रास्ता तैयार किया है।

  • TISS दीक्षांत समारोह में बड़ा बदलाव, CJI सूर्यकांत की जगह डॉ. सीएस प्रमेश होंगे 22 अगस्त को मुख्य अतिथि

    TISS दीक्षांत समारोह में बड़ा बदलाव, CJI सूर्यकांत की जगह डॉ. सीएस प्रमेश होंगे 22 अगस्त को मुख्य अतिथि

    नई दिल्ली । मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने अपने 86वें दीक्षांत समारोह के लिए मुख्य अतिथि के रूप में किए गए बदलाव की जानकारी दी है। 22 अगस्त को आयोजित होने वाले समारोह में अब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मुख्य अतिथि नहीं होंगे। उनकी जगह टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सीएस प्रमेश को मुख्य अतिथि बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब हाल के दिनों में CJI को लेकर हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में छात्रों के विरोध का मामला चर्चा में रहा है।

    TISS के दीक्षांत समारोह के लिए पहले CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्हें समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित भी करना था। हालांकि अब संस्थान ने कार्यक्रम में बदलाव करते हुए डॉ. सीएस प्रमेश को मुख्य अतिथि बनाया है। डॉ. प्रमेश टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के निदेशक होने के साथ मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर में थोरैसिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष भी हैं।

    TISS का यह दीक्षांत समारोह पहले 2 अगस्त को आयोजित किया जाना था, लेकिन आयोजन से ठीक दो दिन पहले इसे स्थगित कर दिया गया था। संस्थान ने उस समय अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला देते हुए कार्यक्रम को टालने का फैसला किया था। संस्थान के अनुसार, उस समय छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और आमंत्रित अतिथियों की सुरक्षा के साथ सामान्य कैंपस गतिविधियों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता थी।

    कार्यक्रम स्थगित किए जाने के बाद CJI सूर्यकांत की संभावित मौजूदगी को लेकर कैंपस में विरोध की आशंका भी सामने आई थी। इसके बाद अब 22 अगस्त के कार्यक्रम के लिए मुख्य अतिथि बदलने का निर्णय लिया गया है। हालांकि संस्थान की ओर से बदलाव के पीछे किसी एक कारण को औपचारिक रूप से अंतिम आधार के रूप में नहीं बताया गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में NALSAR का विवाद भी महत्वपूर्ण है। हैदराबाद स्थित इस प्रमुख विधि विश्वविद्यालय में CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति जताई थी। शुरुआत में करीब 70 छात्रों के विरोध से शुरू हुआ मामला बाद में 450 से अधिक छात्रों तक पहुंच गया था।

    छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र देकर निमंत्रण वापस लेने की मांग की थी। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से पूरे 2026 बैच के छात्रों के वकील के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया गया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद CJI सूर्यकांत ने छात्रों को अपनी बात रखने के अधिकार पर जोर दिया और दंडात्मक कार्रवाई से बचने की बात कही।

    इसके बाद संबंधित निर्देश वापस ले लिया गया और विवाद कुछ हद तक शांत हुआ। CJI सूर्यकांत ने बाद में यह भी स्पष्ट किया था कि उन्होंने NALSAR के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था। ऐसे में उनके समारोह में शामिल होने का प्रश्न भी नहीं उठता था।

    TISS के मामले में मुख्य अतिथि के बदलाव ने उच्च शिक्षा संस्थानों में दीक्षांत समारोहों के आयोजन, कैंपस वातावरण और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल 22 अगस्त के समारोह में डॉ. सीएस प्रमेश विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे और दीक्षांत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की भूमिका निभाएंगे।

  • बारिश ने प्रयागराज में मचाई तबाही, 5 हजार घर जलमग्न; 6 फीट तक पानी में फंसे लोग बोले- क्या खाएं, कहां जाएं?

    बारिश ने प्रयागराज में मचाई तबाही, 5 हजार घर जलमग्न; 6 फीट तक पानी में फंसे लोग बोले- क्या खाएं, कहां जाएं?


    उत्तर प्रदेश । प्रयागराज में लगातार हुई भारी बारिश ने शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी है। रविवार रात करीब 1 बजे शुरू हुई बारिश सोमवार दोपहर तक जारी रही और करीब 90 मिमी बारिश दर्ज की गई। कुछ ही घंटों की बारिश के बाद शहर के कई निचले इलाकों में हालात बाढ़ जैसे हो गए। पांच हजार से ज्यादा घरों में पानी घुसने की बात सामने आई है। कई मकानों में चार से छह फीट तक पानी भर गया। ग्राउंड फ्लोर पर रखा घरेलू सामान पानी में डूब गया और लोगों को मजबूरी में ऊपरी मंजिलों या छतों पर शरण लेनी पड़ी। प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि घर में पानी भरा है तो खाना कैसे बने और जाएं तो जाएं कहां।

    करेली इलाके में बारिश का असर सबसे ज्यादा दिखाई दिया। यहां सड़कों पर खड़ी कारें और दोपहिया वाहन पानी में डूब गए। स्थानीय जानकारी के मुताबिक अकेले करेली में करीब 200 कारें पानी में फंस गईं। कई वाहनों को शाम तक ठेलकर या टू-चेन की मदद से गैराज तक पहुंचाया गया। इसके अलावा एक हजार से ज्यादा बाइक और स्कूटी भी जलभराव की चपेट में आ गईं। पानी में लंबे समय तक डूबे रहने के कारण कई वाहनों के खराब होने की आशंका है।

    मुंडेरा समेत कई इलाकों में घरों के भीतर पानी भरने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई। मुंडेरा की रहने वाली उषा देवी ने बताया कि घर में चारों तरफ पानी ही पानी है। छोटे बच्चे घर में हैं और पानी भरने के बाद खाना बनाने से लेकर पीने के पानी तक की समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि समझ नहीं आ रहा कि बच्चों को लेकर क्या करें और कहां जाएं।

    जलभराव को लेकर बच्चों में भी नाराजगी दिखाई दी। मुंडेरा में कुछ बच्चे हाथों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें लेकर सड़क पर पहुंचे और इलाके से पानी निकालने की मांग की। बच्चों का कहना था कि पानी भरने के कारण वे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। घरों के वॉशरूम तक पानी में डूबे हैं और कई जगह सीवर ओवरफ्लो होने से गंदा पानी भी आसपास फैल गया है।

    नैनी इलाके में भी हालात बेहद खराब बताए जा रहे हैं। एक परिवार ने अपने घर के अंदर का हाल दिखाया जहां किचन बेडरूम और वॉशरूम तक पानी पहुंच गया। कई परिवारों ने ग्राउंड फ्लोर पर रखा जरूरी सामान ऊपर की मंजिलों पर शिफ्ट किया। जिन मकानों में ऊपरी मंजिल नहीं है वहां लोग छतों पर बैठकर पानी कम होने का इंतजार करते नजर आए।

    करेली से नैनी तक कई इलाके जलमग्न

    प्रयागराज के करेली के सोलह मार्केट बी ब्लॉक गौस नगर शम्स नगर जेके नगर गड्ढा कॉलोनी और इस्लाम नगर के साथ नैनी के चकदौदी चक फैजुल्ला पंजाबी हाता और जमुनानगर जैसे इलाकों में भी जलभराव की गंभीर स्थिति बनी रही। टैगोर टाउन और सिविल लाइंस जैसे इलाकों में भी बारिश का असर देखने को मिला। कई जगह बारिश के पानी के साथ बड़े नालों का गंदा पानी भी घरों तक पहुंच गया।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान हर साल जलभराव की समस्या सामने आती है लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर है। लोगों ने जल निकासी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बारिश का पानी निकालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई दिए।

    ड्रेनेज कनेक्शन को लेकर उठे सवाल

    मुंडेरा के राहुल यादव ने आरोप लगाया कि इलाके से होकर जाने वाली ड्रेनेज लाइन को आगे मुख्य सीवर लाइन से जोड़ा ही नहीं गया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ड्रेनेज सिस्टम को मेन सीवर से जोड़ दिया जाता तो जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने नगर निगम कर्मचारियों और सीवर का काम करने वाले ठेकेदारों पर लापरवाही का आरोप लगाया।

    राहुल यादव के मुताबिक करीब छह महीने पहले IGRS और स्पीड पोस्ट के जरिए पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह मेयर गणेश केसरवानी और पार्षद शिव कुमार को समस्या की जानकारी दी गई थी। उनका दावा है कि शिकायतों के बाद आश्वासन तो मिला लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

    प्रयागराज में बारिश के बाद पैदा हुए इन हालातों ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारों परिवारों के घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान का नुकसान हुआ है और कई परिवारों के सामने खाने पीने और सुरक्षित जगह पर पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। अब लोगों की निगाह प्रशासन पर है कि जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए कितनी तेजी से कदम उठाए जाते हैं।

  • यूपी में बारिश का कहर! लखनऊ समेत 30 शहरों में झमाझम बारिश, 10 जिलों में स्कूल बंद; काशी के घाट-मंदिर डूबे

    यूपी में बारिश का कहर! लखनऊ समेत 30 शहरों में झमाझम बारिश, 10 जिलों में स्कूल बंद; काशी के घाट-मंदिर डूबे


    उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मंगलवार तड़के करीब 3 बजे से लखनऊ समेत प्रदेश के 30 से ज्यादा शहरों में रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है। कई इलाकों में सुबह से ही आसमान घने काले बादलों से ढका रहा और दिन निकलने के बावजूद अंधेरा छाया रहा। लगातार बारिश के कारण शहरों और कस्बों में जलभराव की स्थिति गंभीर होती जा रही है। कहीं सड़कें तालाब बन गई हैं तो कहीं पुलिस थाने और सरकारी अस्पताल तक पानी में घिर गए हैं। हालात को देखते हुए प्रदेश के करीब 10 जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है।

    संभल में तेज बारिश के बाद रोडवेज बस अड्डा पूरी तरह जलमग्न हो गया। सरकारी अस्पताल में भी बारिश का पानी घुस गया। प्रतापगढ़ के लालगंज इलाके में स्थिति और ज्यादा खराब नजर आई। यहां तहसील परिसर के साथ कोतवाली पुलिस स्टेशन प्राइमरी स्कूल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब दो फीट तक पानी भर गया। पुलिस की गाड़ियों के पहिए तक पानी में डूब गए। निचले इलाकों में कई घरों के भीतर भी बारिश का पानी पहुंच गया है।

    भदोही और कौशांबी में भी भारी जलभराव देखने को मिला। कई प्रमुख सड़कों पर करीब एक फीट तक पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। प्रतापगढ़ में रातभर हुई बारिश के कारण मंदिरों और रिहायशी इलाकों में घुटनों तक पानी भरने की तस्वीरें सामने आई हैं। जलभराव के कारण कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हुई और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए छुट्टी कर दी गई।

    भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रयागराज प्रतापगढ़ मिर्जापुर कौशांबी भदोही हरदोई अमेठी और जौनपुर समेत करीब 10 जिलों में स्कूल बंद रखने का फैसला किया गया है। मौसम विभाग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों और नदियों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

    काशी में गंगा का बढ़ा जलस्तर

    बारिश के साथ गंगा और यमुना समेत उत्तर प्रदेश की कई नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। वाराणसी में गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियों से ऊपर पहुंच गया है। घाट किनारे बने 100 से ज्यादा छोटे मंदिर पानी से घिर गए हैं। मणिकर्णिका घाट पर स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर और दशाश्वमेध घाट का ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर काफी हिस्से तक पानी में डूब गया है। कई जगह मंदिरों का केवल ऊपरी हिस्सा ही दिखाई दे रहा है।

    नमो घाट की सीढ़ियों तक भी गंगा का पानी पहुंच गया है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर दी है और लोगों से घाटों के किनारे नहीं जाने की अपील की गई है। दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती अब छत के ऊपर कराई जा रही है।

    मणिकर्णिका घाट पर बदली अंतिम संस्कार की जगह

    गंगा का जलस्तर बढ़ने से मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थलों तक भी पानी पहुंच गया है। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए ऊपरी सीढ़ियों वाले हिस्से का इस्तेमाल किया जा रहा है। घाटों पर मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।

    कानपुर और उन्नाव में भी गंगा के किनारे बसे इलाकों में पानी भरने की स्थिति बनी हुई है। कई सौ घरों में पानी पहुंचने के कारण प्रभावित परिवारों को छतों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। चित्रकूट में मंदाकिनी और बरदहा नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट की कई सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं।

    23 अगस्त तक सक्रिय रह सकता है मानसून

    लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक हवा में कम दबाव का क्षेत्र बनने मानसून ट्रफ के उत्तर दिशा में खिसकने और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आने के कारण मानसून सक्रिय हुआ है। 19 से 23 अगस्त के बीच प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के सिस्टम का असर भी उत्तर प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे सकता है। खास तौर पर 20 और 21 अगस्त को कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से अपील की गई है कि वे जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचें और नदी तथा घाटों के आसपास जाने में विशेष सावधानी बरतें।

  • केंद्र का बड़ा फोकस, औद्योगिक कॉरिडोरों में मंजूरी के बाद समयबद्ध निर्माण, निवेश और उत्पादन शुरू कराने की रणनीति तेज

    केंद्र का बड़ा फोकस, औद्योगिक कॉरिडोरों में मंजूरी के बाद समयबद्ध निर्माण, निवेश और उत्पादन शुरू कराने की रणनीति तेज

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने औद्योगिक कॉरिडोर और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर अपनी प्राथमिकता में बदलाव करते हुए अब केवल मंजूरी देने के बजाय उन्हें समय पर पूरा कराने, निवेश आकर्षित करने और उत्पादन शुरू कराने पर जोर दिया है। सरकार का मानना है कि किसी परियोजना की वास्तविक सफलता उसकी घोषणा या स्वीकृति से नहीं, बल्कि जमीन पर उसके क्रियान्वयन और आर्थिक गतिविधियों में बदलने से तय होती है।

    राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवं कार्यान्वयन न्यास की शीर्ष निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं की प्रगति और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में राज्यों से भूमि उपलब्धता, परिवहन संपर्क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं, वैधानिक मंजूरियों तथा परियोजना विशेष प्रयोजन इकाइयों से जुड़ी बाधाओं को तेजी से दूर करने पर जोर दिया गया।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटन, सड़क और परिवहन संपर्क, आवश्यक उपयोगिताओं तथा नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी अड़चनों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान होना चाहिए। उन्होंने पीएम गतिशक्ति के माध्यम से समेकित योजना बनाने और निवेशकों के लिए अनुकूल भूमि आवंटन व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

    सरकार की योजना औद्योगिक विकास को केवल फैक्टरियों और उत्पादन इकाइयों तक सीमित रखने की नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल विकास, सार्वजनिक परिवहन और अन्य जरूरी सामाजिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। इससे उद्योगों के आसपास एक ऐसा समग्र इकोसिस्टम विकसित करने की कोशिश है, जिसमें कर्मचारियों और कंपनियों दोनों की जरूरतें पूरी हो सकें।

    केंद्र सरकार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, राज्यों को सहायता और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए बेहतर ऋण सुविधा के माध्यम से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है। कर और सीमा शुल्क से जुड़े उपायों के जरिए देश में विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने औद्योगिक परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति के साथ जोड़कर समेकित क्षेत्रीय विकास मॉडल के तहत आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने निवेशकों तक पहुंच बढ़ाने और औद्योगिक नोड्स की प्रभावी मार्केटिंग पर जोर दिया। उनका कहना है कि वैश्विक निवेश के अवसरों को आकर्षित करने के लिए परियोजनाओं को निवेशकों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।

    मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए देश और क्षेत्र विशेष के औद्योगिक एन्क्लेव विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लैटेड फैक्ट्री, श्रमिक आवास और आर्थिक-सामाजिक सुविधाओं से युक्त तैयार औद्योगिक व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया गया।

    पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने औद्योगिक कॉरिडोरों को राष्ट्रीय जलमार्गों से जोड़ने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि जलमार्गों को औद्योगिक विकास की रीढ़ के रूप में विकसित करने से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में भी बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि और स्थानीय संसाधनों के आधार पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया।

    नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने परियोजना एसपीवी को अधिक अधिकार देने की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि योजना निर्माण, विकास और नगर प्रशासन से जुड़े पर्याप्त अधिकार मिलने से औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा जा सकेगा। सरकार का नया फोकस स्पष्ट रूप से मंजूरी से आगे बढ़कर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और उन्हें वास्तविक आर्थिक गतिविधि में बदलने पर केंद्रित है।

  • दक्षिण कोरिया में जनरेटिव एआई का रोजगार पर असर, युवाओं की 2.85 लाख नौकरियां घटीं, वरिष्ठ कर्मचारियों को मिला फायदा

    दक्षिण कोरिया में जनरेटिव एआई का रोजगार पर असर, युवाओं की 2.85 लाख नौकरियां घटीं, वरिष्ठ कर्मचारियों को मिला फायदा


    नई दिल्ली ।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल का असर अब रोजगार बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरेटिव एआई तकनीकों के तेजी से विस्तार के बाद एआई से अधिक प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं के रोजगार में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि तकनीकी बदलाव का असर अलग-अलग आयु वर्ग के कर्मचारियों पर समान नहीं रहा है।

    जून 2022 से जून 2026 के बीच दक्षिण कोरिया में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लोगों द्वारा किए जा रहे कुल रोजगारों की संख्या में 2.85 लाख की कमी दर्ज की गई। इस गिरावट का सबसे बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों से जुड़ा रहा जिन्हें एआई के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील माना जाता है। कुल कम हुए रोजगारों में करीब 2.68 लाख यानी लगभग 94 प्रतिशत नौकरियां एआई प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित थीं।

    इन क्षेत्रों में आईटी सेवाएं, प्रकाशन, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में ऐसे काम बड़ी संख्या में शामिल हैं जिन्हें जनरेटिव एआई, ऑटोमेशन और डिजिटल टूल्स के जरिए तेजी से बदला या आसान किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, आईटी सेवाओं में युवाओं का रोजगार 31.4 प्रतिशत घटा। यह उन क्षेत्रों में सबसे बड़ी गिरावट रही, जहां एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

    प्रकाशन क्षेत्र में भी युवा रोजगार में 27.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस श्रेणी में सॉफ्टवेयर और वेब डिजाइन से जुड़े पेशे भी शामिल हैं। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग क्षेत्र में युवाओं के रोजगार में 16.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि प्रोफेशनल सर्विसेज में यह कमी 11.6 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि एआई का शुरुआती प्रभाव उन नौकरियों पर अधिक पड़ सकता है जिनमें डिजिटल, दोहराए जाने वाले या सामग्री आधारित कार्य बड़ी भूमिका निभाते हैं।

    इसके विपरीत 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के कर्मचारियों के रोजगार में इसी अवधि के दौरान 2.30 लाख की बढ़ोतरी हुई। खास बात यह रही कि इनमें से 1.73 लाख रोजगार एआई प्रभावित क्षेत्रों में ही बढ़े। इससे यह संकेत मिलता है कि अनुभव, विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र की गहरी समझ वाले कर्मचारियों की मांग कई जगहों पर अभी भी मजबूत बनी हुई है।

    रिपोर्ट में 2022 को आधार वर्ष माना गया है। इसी वर्ष के अंत में चैटजीपीटी के लॉन्च के बाद जनरेटिव एआई तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा। इसके बाद कंपनियों में कंटेंट तैयार करने, कोडिंग, डेटा विश्लेषण और अन्य डिजिटल कार्यों के लिए एआई आधारित उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ कुछ पारंपरिक भूमिकाओं की जरूरत पर भी असर पड़ा है।

    शिक्षा के आधार पर रोजगार की स्थिति में भी बदलाव सामने आया है। 2019 से 2022 के बीच स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारकों की औसत बेरोजगारी दर 8.2 प्रतिशत रही, जबकि माध्यमिक या जूनियर कॉलेज स्तर तक पढ़े युवाओं में यह 8 प्रतिशत थी। 2022 के बाद उच्च शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर 7 प्रतिशत रही, जबकि कम शैक्षणिक योग्यता वाले युवाओं में यह 5.4 प्रतिशत दर्ज की गई।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण कोरिया की लगातार घटती आबादी युवाओं के रोजगार में बदलाव का एक कारण हो सकती है। हालांकि एआई ने इस बदलाव को और तेज किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार एआई युवा कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन यही तकनीक कुछ भूमिकाओं में उनके काम को प्रतिस्थापित भी कर सकती है। इसलिए चुनौती केवल नौकरियां घटने की नहीं, बल्कि युवाओं के लिए पारंपरिक करियर की शुरुआती सीढ़ियों के कमजोर होने की भी है।

  • इस हफ्ते OTT पर क्राइम से लेकर कॉमेडी और रोमांस तक मिलेगा भरपूर मनोरंजन, जानें पूरी रिलीज लिस्ट

    इस हफ्ते OTT पर क्राइम से लेकर कॉमेडी और रोमांस तक मिलेगा भरपूर मनोरंजन, जानें पूरी रिलीज लिस्ट


    नई दिल्ली। अगस्त का तीसरा हफ्ता OTT दर्शकों के लिए काफी खास रहने वाला है। 18 से 21 अगस्त के बीच JioHotstar पर फिल्मों और वेब सीरीज की एक से बढ़कर एक रिलीज देखने को मिलने वाली हैं। इस लिस्ट में हॉलीवुड की चर्चित डार्क कॉमेडी सीरीज से लेकर अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित फिल्म और लोकप्रिय रोमांटिक ड्रामा का नया एपिसोड शामिल है। ऐसे में अगर आप घर बैठे मनोरंजन का प्लान बना रहे हैं तो आने वाले दिनों की ये रिलीज आपके लिए काफी खास हो सकती हैं।

    Its Always Sunny In Philadelphia

    18 अगस्त को JioHotstar पर Its Always Sunny In Philadelphia का नया सीजन स्ट्रीम होने जा रहा है। यह लंबे समय से चल रही डार्क कॉमेडी सीरीज है जिसमें चार्ली डे ग्लेन हॉवर्टन रॉब मैकएल्हेनी कैटलिन ओलसन और डैनी डेविटो जैसे कलाकार नजर आते हैं। शो की कहानी ऐसे लोगों के ग्रुप के इर्द गिर्द घूमती है जिन्हें उनकी अजीबोगरीब सोच और व्यवहार के कारण अलग पहचान मिलती है।

    इस सीरीज में कॉमेडी के साथ कई ऐसे हालात देखने को मिलते हैं जो दर्शकों को हंसाने के साथ चौंकाते भी हैं। यही वजह है कि लंबे समय से यह शो अपने खास अंदाज के कारण दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है। इसका नया सीजन 18 अगस्त से JioHotstar पर देखा जा सकेगा।

    Welcome To The Jungle

    21 अगस्त का दिन अक्षय कुमार के फैंस के लिए खास होने वाला है। अक्षय कुमार स्टारर Welcome To The Jungle 21 अगस्त को JioHotstar पर स्ट्रीम होगी। फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद अब OTT दर्शकों के बीच पहुंचने के लिए तैयार है।

    फिल्म में अक्षय कुमार के साथ रवीना टंडन समेत बड़ी स्टारकास्ट नजर आती है। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी मल्टीस्टार कास्ट बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें करीब 32 कलाकारों ने काम किया है। थिएटर रिलीज के बाद अब दर्शक इस कॉमेडी एंटरटेनर को घर बैठे देख सकेंगे।

    अक्षय कुमार की कॉमेडी फिल्मों को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह रिलीज खास हो सकती है। खासकर वे लोग जो फिल्म को थिएटर में नहीं देख पाए थे उनके पास अब इसे OTT पर देखने का मौका होगा।

    ठुकरा के मेरा प्यार सीजन 2

    21 अगस्त को JioHotstar पर Thukra Ke Mera Pyaar Season 2 का नया एपिसोड भी दर्शकों के बीच आएगा। इस सीरीज को लेकर दर्शकों में पहले से उत्सुकता बनी हुई है। हर नए एपिसोड के साथ कहानी में आने वाले मोड़ दर्शकों की दिलचस्पी बनाए हुए हैं।

    पॉलिटिकल रिवेंज ड्रामा के साथ रोमांस का मिश्रण इस सीरीज को अलग अंदाज देता है। इसमें धवल ठाकुर संचिता बसु अनिरुद्ध दवे गोविंद पांडे सुशील पांडे कपिल कनपुरिया और निहारिका चौकसे जैसे कलाकार नजर आ रहे हैं। दूसरे सीजन के नए एपिसोड को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी चर्चा है।

    18 से 21 अगस्त तक OTT पर क्या देखें

    अगर आप इस हफ्ते OTT पर कुछ नया देखने की तैयारी कर रहे हैं तो 18 अगस्त को Its Always Sunny In Philadelphia का नया सीजन और 21 अगस्त को Welcome To The Jungle के साथ Thukra Ke Mera Pyaar Season 2 का नया एपिसोड आपकी वॉचलिस्ट में शामिल हो सकता है। यानी कॉमेडी से लेकर रोमांस और ड्रामा तक इस हफ्ते OTT पर मनोरंजन के कई विकल्प मौजूद रहेंगे।

    खास तौर पर अक्षय कुमार की Welcome To The Jungle की OTT रिलीज पर दर्शकों की नजर रहेगी। थिएटर के बाद अब फिल्म JioHotstar के जरिए बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंचने वाली है। वहीं लंबे समय से पसंद की जा रही Its Always Sunny In Philadelphia और Thukra Ke Mera Pyaar की नई कड़ियां भी OTT दर्शकों को व्यस्त रखने वाली हैं।

  • सोना 1.54 लाख रुपये के पार, चांदी 2.35 लाख पर पहुंची, घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेज उछा

    सोना 1.54 लाख रुपये के पार, चांदी 2.35 लाख पर पहुंची, घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेज उछा

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को मजबूत तेजी दर्ज की गई। घरेलू सराफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव में करीब 1,800 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई। इस तेजी के बाद 24 कैरेट सोने की कीमत 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई, जबकि चांदी का भाव भी 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर चला गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतों में बढ़त रही, जिसका असर घरेलू बाजार पर दिखाई दिया।

    घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव 1,804 रुपये बढ़कर 1,54,167 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। इससे पहले सोना 1,52,363 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। एक ही कारोबारी सत्र में इतनी बढ़ोतरी से सोने की कीमत ने फिर ऊंचे स्तर की ओर रुख किया है। निवेशकों के साथ आभूषण बाजार की नजर भी अब आगे की कीमतों पर बनी हुई है।

    22 कैरेट सोने की कीमत में भी तेजी रही। इसका भाव 1,652 रुपये बढ़कर 1,41,217 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि इससे पहले कीमत 1,39,565 रुपये थी। इसी तरह 18 कैरेट सोना 1,353 रुपये महंगा होकर 1,15,625 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी स्तर पर इसकी कीमत 1,14,272 रुपये थी।

    चांदी ने भी सोमवार के कारोबार में मजबूती दिखाई। इसकी कीमत 1,800 रुपये बढ़कर 2,35,642 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। इससे पहले चांदी 2,33,842 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी। चांदी में यह तेजी ऐसे समय में आई है, जब औद्योगिक मांग और निवेश से जुड़े कारकों के कारण वैश्विक बाजार में भी इस धातु की कीमतों पर लगातार नजर बनी हुई है।

    हाजिर बाजार के अलावा वायदा कारोबार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी रही। एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 के सोने के अनुबंध में 1,419 रुपये यानी 0.92 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई और भाव 1,55,925 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे घरेलू वायदा बाजार में भी खरीदारी का रुख मजबूत रहने का संकेत मिला।

    चांदी के वायदा अनुबंध में भी बढ़त दर्ज की गई। 4 सितंबर 2026 का अनुबंध 2,419 रुपये यानी 1.03 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,38,343 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। हाजिर और वायदा दोनों बाजारों में एक साथ तेजी से कीमती धातुओं के कारोबार में मजबूती का संकेत मिला है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई। कॉमेक्स पर सोना 0.83 प्रतिशत बढ़कर 4,474 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी में 2.05 प्रतिशत की तेजी रही और इसका भाव 66.43 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया। वैश्विक बाजार की यह मजबूती घरेलू कीमतों को भी समर्थन देती दिखाई दी।

    बाजार विशेषज्ञों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर है। निवेशकों को उम्मीद है कि इससे ब्याज दरों की आगे की दिशा और मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं। ब्याज दरों से जुड़े संकेत वैश्विक स्तर पर सोने की मांग और कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, फेड के रुख और निवेशकों की गतिविधियां सोने तथा चांदी की अगली चाल के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।