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  • वास्तु और शास्त्रों की चेतावनी, दरवाजे के पीछे लटकाई ये चीजें रोक सकती हैं सुख-समृद्धि का रास्ता

    वास्तु और शास्त्रों की चेतावनी, दरवाजे के पीछे लटकाई ये चीजें रोक सकती हैं सुख-समृद्धि का रास्ता

    नई दिल्ली ।  Shakun Apshakun: अधिकांश घर में लोग जगह की बचाने के लिए दरवाजे के पीछे, बैग, कपड़े, इत्यादि सामान लटाका देते हैं. वैसे तो लोग इस आदत पर बहुत ध्यान नहीं देते, लेकिन शास्त्रों में इसके बड़े नुकसान बताए गए हैं. शास्त्रों की मानें तो दरवाजे के पीछे सामान लटकाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है.
    ऐसा इसलिए क्योंकि शास्त्रों में इसे अशुभ माना गया है. मान्यता है कि कुछ चीजों को दरवाजे के पीछे लटकाने से निगेटिव एनर्जी बढ़ने लगती है. साथ ही परिवार की आर्थिक तरक्की में अनेक प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होने लगती है. गरुड़ पुराण के मुताबिक, घर के मुख्य द्वार और उसके आसपास की जगह को बेहद साफ-सुथरा रखना चाहिए. आइए, अब जानते हैं कि दरवाजे के पीछे किन चीजों की लटकाना अशुभ माना गया है.

    दरवाजे के पीछे ना लटकाएं कपड़े

    शास्त्र-पुराणों के अनुसार, दरवाजे के पीछे कभी भी सूखे या भींगे कपड़े नहीं लटकाना चाहिए. ऐसा करना अशुभ माना गया है. दरवाजे के पीछे टंगे भींगे कपड़े भयानक वास्तु दोष उत्पन्न करते हैं. इसकी वजह से सकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है. कहा जाता है कि लगातार ऐसा करने से तनाव, कलह और आर्थिक नुकसान की संभावना बढ़ जाती है. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो ऐसा करने से राहु दोष भी उत्पन्न हो सकता है.

    पुराने बैग और दवाइयां
    वास्तु शास्त्र की मानें तो दरवाजे के पीछे दवाइयों का थैला, पुराने बैग इत्यादि टांगने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगता है. वास्तु एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसा करने से परिवार के सदस्य बीमारियों से घिरे रहते हैं. कमाई का अधिकांश हिस्सा इलाज पर खर्च होता है. इसके अलावा दरवाजे के पीछे पुराने कैलेंडर को भी लटकाने से बचना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे करियर में तरक्की रुक जाती है

    जूते और चप्पल
    शकुन शास्त्र के मुताबिक, दरवाजे के पीछे जूते-चप्पल इत्यादि के थैले को भी नहीं टांगना चाहिए. मान्यता है कि इससे घर में दरिद्रता का प्रवेश होने लगता है. इस स्थिति में अच्छी कमाई के बावजूद भी धन नहीं टिकता है. इसलिए, दरवाजे के पीछे भूलकर भी जूते-चप्पल ना लटकाएं

    कैसे दूर होगी निगेटिव एनर्जी?
    वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, दरवाजे के पीछे का हिस्सा बिल्कुल साफ और खाली रखना चाहिए. इसके साथ ही वास्तु दोष को दूर करने के लिए वहां स्वास्तिक का चिह्न बनाना शुभ होता है. ऐसा करने से घर की निगेटिव एनर्जी दूर होने लगती है.

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान, अब तक 32 अवॉर्ड

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान, अब तक 32 अवॉर्ड


    नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। नॉर्वे ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान नॉर्वे का शीर्ष नागरिक अलंकरण माना जाता है, जो असाधारण सेवा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने में योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है।

    इस सम्मान के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को अब तक मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। यह उपलब्धि उनके वैश्विक कूटनीतिक और राजनयिक संबंधों में बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाती है।

    नॉर्वे के रॉयल हाउस की आधिकारिक व्यवस्था के अनुसार, यह ऑर्डर 1985 में किंग ओलाव V द्वारा स्थापित किया गया था। इसे उन विदेशी और नॉर्वेजियन नागरिकों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने नॉर्वे या मानवता के हित में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि यह उनकी नॉर्वे की पहली यात्रा है और पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह देश का पहला दौरा भी है। ओस्लो पहुंचने पर उनका स्वागत नॉर्वे के प्रधानमंत्री और शीर्ष नेतृत्व द्वारा किया गया।

    इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 19 मई को आयोजित होने वाले तीसरे नॉर्डिक-इंडिया समिट में भाग लेंगे। इस सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, स्वीडन और नॉर्वे के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी।

    यह शिखर सम्मेलन पहले स्टॉकहोम (2018) और कोपेनहेगन (2022) में हो चुके सम्मेलनों की कड़ी का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना है।

    विदेश मंत्रालय ने इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि यह भारत और नॉर्वे के बीच व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, हरित तकनीक और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देगा। इसके साथ ही भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच आर्थिक साझेदारी को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह दौरा न केवल भारत-नॉर्वे संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को भी और मजबूत करता है।

  • रूसी तेल खरीद पर राहत, भारत की सप्लाई पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर

    रूसी तेल खरीद पर राहत, भारत की सप्लाई पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर


    नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच अमेरिका ने एक अहम कदम उठाते हुए रूसी तेल से जुड़े प्रतिबंधों में 30 दिनों की अतिरिक्त छूट देने का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार यह राहत उन कच्चे तेल कार्गो पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं, ताकि उनकी सप्लाई बाधित न हो और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।

    यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा संकट और कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अमेरिका का कहना है कि यह “अस्थायी जनरल लाइसेंस” उन देशों के लिए राहत की तरह है, जिनकी ऊर्जा जरूरतें तत्काल हैं और जो समुद्र में फंसे तेल कार्गो पर निर्भर हैं।

    इस बीच भारत ने अपनी स्थिति एक बार फिर स्पष्ट कर दी है कि वह किसी भी अमेरिकी छूट या प्रतिबंध ढांचे पर निर्भर नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेट्री सुजाता शर्मा ने साफ कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदना न तो पहले रोका था, न छूट के दौरान रोका और न ही आगे रोकेगा। उनके मुताबिक यह निर्णय पूरी तरह से व्यावसायिक और आर्थिक जरूरतों पर आधारित है।

    सरकारी पक्ष का कहना है कि भारत की प्राथमिकता देश में ईंधन आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है, ताकि किसी भी प्रकार की कमी या मूल्य वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर न पड़े। हाल के समय में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारत में तेल कंपनियों पर दबाव बना हुआ है, जिससे प्रतिदिन करोड़ों रुपये के नुकसान की स्थिति भी बनी हुई है।

    भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से किसी भी तरह की सप्लाई बाधा देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर सीधा असर डाल सकती है। इसी कारण रूस से कच्चे तेल की खरीद को एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

    आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कुल तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और यह निर्भरता लगातार बढ़ रही है। घरेलू उत्पादन में गिरावट और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती मांग ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में आयातित तेल देश की ऊर्जा व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    कुल मिलाकर, जहां अमेरिका वैश्विक बाजार को स्थिर रखने के लिए अस्थायी राहत दे रहा है, वहीं भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति पूरी तरह घरेलू जरूरतों और आर्थिक वास्तविकताओं पर आधारित रहेगी।

  • राज कुमार की अनोखी आदत का हुआ खुलासा, मूडी नेचर के कारण अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा कठिन थे संभालना

    राज कुमार की अनोखी आदत का हुआ खुलासा, मूडी नेचर के कारण अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा कठिन थे संभालना

    नई दिल्ली ।
    राज कुमार सबको जानी कहकर बात करते थे। आपने फिल्मों में भी कई बार देखा होगा कि वह सामने वाले किरदार को जानी बोलते थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राज, जानी क्यों बोलते थे। इसके पीछे की वजह काफी अलग है और खास भी। फिल्ममेकर केसी बोकादिया ने इसका खुलासा किया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज कुमार को हैंडल करना अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा मुश्किल होता था।

    क्यों सबको जानी बोलते थे राज कुमार

    केसी ने इंडिया टीवी से बात करते हुए कहा, ‘उनके कुत्ते का नाम जानी था, यही वजह है कि वह सबको जानी कहते थे। अच्छी बात यह है कि उन्होंने कभी मुझे इस नाम से नहीं बुलाया और मुझे सिर्फ बोकादिया साब बोलते थे।’ हालांकि उन्होंने यह भी क्लीयर किया कि राज के इरादे इसके पीछे नेगेटिव नहीं थे। वह अपने डॉग को काफी प्यार करते थे और उन्हें ये शब्द काफी पसंद था इसलिए वे सबको जानी बोलते थे।
    राज कुमार को कैसे अपनी फिल्म के लिए मनाया
    केसी ने आगे बताया कि कैसे उनकी फिल्म पुलिस और मुजरिम के लिए उन्होंने राज कुमार को लिया था। वह बोले, मैंने उन्हें एक शाम को फोन किया। हमने फिर अगले दिन मुहर्रत शॉट प्लान किया। अगर वह किसी इंसान का चेहरा नहीं जानते तो वह फिल्म नहीं करते। फिल्म की स्टोरी उनके लिए दूसरे नंबर पर होती थी। अब जैसे ही उन्होंने फोन उठाया मैंने कहा राज साहब, मैं आपको एक लाइन कहना चाहता हूं। वह मान गए। उन्हें हैंडल करना, अमिताभ बच्चन को हैंडल करने से काफी मुश्किल होता था। बच्चन कैलकुलेटिव इंसान हैं और राज साहब मूडी थे।
    अमिताभ बच्चन से ज्यादा मुश्किल था राज कुमार को हैंडल करना
    वह आगे बोले, ‘कैलकुलेटिव इंसान को समझाना आसान होता है, लेकिन जब बात मूडी इंसान की आती है तो ये उनकी मूड पर डिपेंड करता है जो हर समय बदलता रहता है। एक गाय भी तभी दूध देती है जब उसका मन हो, नहीं तो नहीं। तो मेरे सीन के डिसक्रिप्शन को पढ़कर उन्होंने कहा कि ये अच्छा है। मैंने फिर उनसे तुरंत मूवी करने की रिक्वेस्ट की। उन्होंने मुझे कहा कि वह मुझे ना नहीं कह सकते हैं।’
    राज कुमार को ज्यादा पैसे किए ऑफर
    केसी ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि उन्हें कितना पैसा चाहिए तो उन्होंने कहा लास्ट टाइम तुमने कितना दिया था? मैंने कहा 21 लाख तो उन्होंने मुझे ज्यादा अमाउंट देने को कहा तो मैंने 24 लाख कहा और फिर तुरंत मैंने 25 लाख का ऑफर दिया। इसके साथ मैंने उनसे एक और फेवर मांगा और रिक्वेस्ट किया कि आप अगली सुबह ही मुझे ज्वाइन करोगे क्योंकि मुहूर्त अगले दिन का शेड्यूल है।’
    पुराना आउटफिट पहन दिया था मुहूर्त शॉट
    राज ने फिर पूछा कि इतनी जल्दी कॉस्ट्यूम कैसे तैयार होंगे तो मैंने उन्हें कहा कि आप पिछले 25-30 साल से वैसे ही लग रहे हो तो न्यू कॉस्ट्यूम की क्या जरूरत। मुझे बस आपसे मुहूर्त शॉट चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि राज फिर आए और उन्होंने वही येलो कलर का कोट पहना है जो उन्होंने नीले गगन के तले पहना था, हमराज फिल्म में।

  • IPL 2026 Playoffs: एक अनार, कई दावेदार… आखिरी जगह के लिए जोरदार टक्कर

    IPL 2026 Playoffs: एक अनार, कई दावेदार… आखिरी जगह के लिए जोरदार टक्कर


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का सीजन अब अपने सबसे रोमांचक पड़ाव पर पहुंच चुका है, जहां प्लेऑफ्स की जंग ने पूरी तरह से समीकरण बदल दिए हैं। क्रिकेट फैंस के लिए यह स्थिति बिल्कुल वैसी हो गई है जैसे कहावत “एक अनार और सौ बीमार”, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां एक नहीं बल्कि सिर्फ एक प्लेऑफ स्पॉट के लिए पांच टीमें मैदान में जूझ रही हैं।

    अब तक मिली जानकारी के अनुसार, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB), सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और गुजरात टाइटन्स (GT) ने प्लेऑफ्स में अपनी जगह पक्की कर ली है। SRH की चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ जीत के बाद यह तस्वीर और साफ हो गई कि टॉप-4 की तीन सीटें भर चुकी हैं, जबकि चौथे स्थान के लिए घमासान जारी है।

    इस आखिरी जगह के लिए पंजाब किंग्स (PBKS), राजस्थान रॉयल्स (RR), चेन्नई सुपर किंग्स (CSK), कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिल रही है। पॉइंट्स टेबल की स्थिति इतनी पेचीदा हो गई है कि हर मैच सीधे प्लेऑफ समीकरण को बदल सकता है।

    फिलहाल पंजाब किंग्स चौथे स्थान पर बनी हुई है, लेकिन उनके लिए आगे की राह आसान नहीं है क्योंकि अधिकतम 15 अंकों तक ही पहुंचने की संभावना है। वहीं राजस्थान रॉयल्स इस रेस में सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरी है, क्योंकि वह अकेली टीम है जो 16 अंकों तक पहुंचकर सीधे प्लेऑफ का टिकट हासिल कर सकती है।

    राजस्थान के पास अभी दो अहम मुकाबले बचे हैं, और खास बात यह है कि ये दोनों टीमें पहले ही प्लेऑफ रेस से बाहर हो चुकी हैं। ऐसे में अगर राजस्थान दोनों मैच जीत लेती है तो वह बिना किसी अन्य परिणाम पर निर्भर हुए क्वालीफाई कर जाएगी। लेकिन यदि एक भी मैच में हार होती है, तो पूरा गणित बिगड़ जाएगा और फिर पंजाब, KKR और अन्य टीमों के बीच नेट रन रेट का खेल शुरू हो जाएगा।

    दूसरी ओर, कोलकाता नाइट राइडर्स के पास भी उम्मीद बाकी है, लेकिन उन्हें अपने दोनों मैच जीतने होंगे ताकि वे 15 अंकों तक पहुंच सकें। वहीं दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स की उम्मीदें भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन उनका सफर अब दूसरों के परिणामों पर निर्भर हो चुका है।

    इस पूरे परिदृश्य ने IPL 2026 के लीग स्टेज को बेहद रोमांचक बना दिया है, जहां हर ओवर, हर रन और हर विकेट प्लेऑफ की तस्वीर बदल सकता है। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह अंतिम सप्ताह किसी फाइनल से कम नहीं होगा।

  • परिवार के दर्द को दिल में दबाकर मैदान में उतरे ईशान किशन, तूफानी पारी खेल SRH को दिलाई यादगार जीत

    परिवार के दर्द को दिल में दबाकर मैदान में उतरे ईशान किशन, तूफानी पारी खेल SRH को दिलाई यादगार जीत

    नई दिल्ली ।  चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ सनराइजर्स हैदराबाद को आईपीएल 2026 के मैच में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले ईशान किशन एक असहनीय दर्द में थे। यह दर्द उनके शरीर में नहीं, बल्कि उनके दिल और दिमाग पर हावी था। 70 रनों की मैच विनिंग पारी खेलने के बाद प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए ईशान किशन ने बताया कि उनके कजिन की बहन का हाल ही में देहांत हो गया था। वह उनके लिए आज की पारी की मोटिवेशन था। उनका कजिन स्टैंड्स में था। पूरे परिवार के लिए मैंने यह मैच जीता।

    पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन सेरेमनी में ईशान किशन ने कहा, “मुझे लगता है, जब मैं विकेट कीपिंग कर रहा था, तो मुझे लगा कि यह विकेट आसान नहीं है। मुझे अब भी लगता है कि इस टोटल का पीछा करना थोड़ा मुश्किल था, क्योंकि विकेट बिल्कुल भी आसान नहीं था, खासकर जब स्पिनर बॉलिंग कर रहे थे और वे स्लो बॉल बहुत अच्छी तरह से काम कर रही थीं, लेकिन साथ ही, नंबर तीन बैटर के तौर पर, मुझे लगा कि मेरा काम बस गेम खत्म करने की कोशिश करना है, क्योंकि बैट्समैन जो अंदर आ रहे हैं, खासकर बैक एंड पर, उनके लिए सिंगल लेना और साथ ही बाउंड्री लगाना मुश्किल होता है। इसलिए मुझे बस आखिरी ओवर तक खेलना था।”
    IPL 2026 News in Hindi – आईपीएल 2026 न्यूज़,आईपीएल समाचार
    ऐसी पिच पर कैसे अप्रोच करनी चाहिए? इस पर ईशान ने कहा, “यह बस वहां रहने, खुद पर विश्वास करने के बारे में था। कभी-कभी वह सिचुएशन मुश्किल होती है, लेकिन हम सब जानते हैं कि कैसे, ये गेम जीते जाते हैं, क्योंकि आपको खुद पर विश्वास करने की जरूरत होती है। आप किसी भी समय खुद पर शक नहीं कर सकते। इसलिए मैं बस इसे सिंपल रखने की कोशिश कर रहा था, जितना हो सके उतने ओवर बैटिंग करने की कोशिश कर रहा था, क्योंकि लेफ्ट-हैंडर होने के नाते, बीच में होने के कारण, बॉलर्स के लिए हर बार एरिया सही रखना मुश्किल होता है। ऐसे में, मैं बस इसे सिंपल रख रहा था और आखिरी ओवर तक खेलने की कोशिश कर रहा था।”

    परिवार में आई त्रासदी को लेकर ईशान किशन ने कहा, “कभी-कभी मुझे लगता है कि यह मोटिवेशन के बारे में भी है और मेरे लिए मेरा मोटिवेशन आज था, मेरा कजिन बस वहीं खड़ा था। उसने अपनी बहन को खो दिया। यह हमारे परिवार में एक मुश्किल समय था और वे यहां पहली बार मैच देख रहे थे। इसलिए मैं बस उनके लिए गेम फिनिश करना चाहता था और मुझे खुशी है कि वे इस इनिंग्स को देखने के लिए यहां थे और मैं यह गेम खत्म कर पाया। मैं भगवार का शुक्रगुजार हूं। मुझे पावर का एहसास हो रहा था।
  • फिल्म सेट पर अचानक फैली दहशत, सांप के डसने से मचा हड़कंप

    फिल्म सेट पर अचानक फैली दहशत, सांप के डसने से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में आज भले ही VFX और CGI ने फिल्मों की दुनिया को सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत बना दिया हो, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब कलाकारों को असली खतरे के बीच शूटिंग करनी पड़ती थी। ऐसा ही एक खौफनाक और चर्चित किस्सा 1982 में आई फिल्म ‘अशांति’ से जुड़ा हुआ है, जिसने उस समय दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे।

    इस फिल्म में एक ऐसा सीन फिल्माया गया था, जो आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे जोखिम भरे दृश्यों में गिना जाता है। कहानी के मुताबिक, फिल्म में विलेन का किरदार निभा रहे अभिनेता को एक जिंदा कोबरा सांप के साथ सीन करना था। दृश्य यह था कि वह सांप को अपने हाथ में उठाकर उसकी मौजूदगी को अपने चेहरे के बेहद करीब लाएगा और अपनी जीभ बाहर निकालकर ऐसा दिखाएगा कि सांप उसे काट रहा है।

    सेट पर असली कोबरा मौजूद था और पूरी यूनिट इस सीन को बेहद सतर्कता के साथ शूट कर रही थी। जैसे ही अभिनेता ने सांप को उठाकर अपने चेहरे के करीब लाया और अभिनय शुरू किया, तभी अचानक एक अप्रत्याशित घटना हुई सांप ने उसकी जीभ के बेहद पास डसने की कोशिश की और उसे काट लिया।

    इस घटना के बाद सेट पर कुछ पलों के लिए पूरी तरह सन्नाटा पसर गया। हर कोई घबरा गया, लेकिन बाद में पता चला कि सांप का जहर पहले ही निकाला जा चुका था, इसलिए किसी बड़ी अनहोनी से बचाव हो गया।

    यह खतरनाक सीन फिल्म में अमरीश पुरी द्वारा निभाए गए राजा भीष्म बहादुर सिंह के किरदार का हिस्सा था। उनके इस किरदार को और भी अधिक डरावना और प्रभावशाली दिखाने के लिए यह दृश्य फिल्माया गया था, जिसमें वे खुद को इतना निर्दयी दिखाते हैं कि सांप के जहर का भी उन पर कोई असर नहीं होता।

    फिल्म रिलीज होने के बाद यह सीन इतना चर्चित हुआ कि कई दर्शकों को यकीन ही नहीं हुआ कि यह वास्तविक शूटिंग थी। अमरीश पुरी की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और इस खतरनाक स्टंट ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार खलनायकों में और भी मजबूत जगह दिलाई।

    आज भी ‘अशांति’ का यह सीन भारतीय फिल्म इतिहास के उन दुर्लभ दृश्यों में गिना जाता है, जिन्हें देखकर दर्शक हैरान भी होते हैं और उस दौर की फिल्ममेकिंग के साहस को सलाम भी करते हैं।

  • कोरियोग्राफी में बदलाव के बाद बिना डांसर्स के शूट हुआ गाना

    कोरियोग्राफी में बदलाव के बाद बिना डांसर्स के शूट हुआ गाना


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा श्रीदेवी को इंडस्ट्री की पहली महिला सुपरस्टार माना जाता है। अपनी अदाकारी, एक्सप्रेशन और डांस के दम पर उन्होंने लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया। लेकिन हाल ही में सामने आए एक पुराने किस्से ने उनके करियर से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू फिर चर्चा में ला दिया है।

    यह दावा किया है एक इंटरव्यू में श्रीदेवी के साथ बैकग्राउंड डांसर रह चुकी रुबीना खान ने, जिन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब एक गाने की शूटिंग को लेकर बड़ा बदलाव करना पड़ा।

    मामला फिल्म ‘चांद का टुकड़ा’ के टाइटल ट्रैक ‘तू लगे चांद का टुकड़ा’ से जुड़ा बताया जाता है। इस गाने की कोरियोग्राफी मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान द्वारा की जा रही थी। सेट पर श्रीदेवी को सफेद ड्रेस में एक खास थीम के तहत शूट किया गया था, जबकि करीब 10 बैकग्राउंड डांसर्स को अलग-अलग आउटफिट्स में रखा गया था ताकि गाने को भव्य रूप दिया जा सके।

    हालांकि, शूटिंग के बाद जब गाने का फाइनल वर्जन तैयार हुआ, तो कथित तौर पर श्रीदेवी इससे संतुष्ट नहीं थीं। दावा किया जाता है कि उन्हें लगा कि बैकग्राउंड डांसर्स के बीच उनका लुक अपेक्षाकृत फीका पड़ रहा है। इसी वजह से उन्होंने गाने को लेकर असंतोष जताया और पूरे सीन को दोबारा बनाने की बात सामने आई।

    इसके बाद गाने में बड़ा बदलाव किया गया। पहले जहां सरोज खान इसकी कोरियोग्राफी संभाल रही थीं, वहीं बाद में इसे दोबारा तैयार करने के लिए कोरियोग्राफर चुन्नी प्रकाश को जिम्मेदारी दी गई। नए वर्जन में सबसे बड़ा बदलाव यह था कि गाने को बिना किसी बैकग्राउंड डांसर्स के शूट किया गया, जिससे पूरा फोकस केवल श्रीदेवी पर रहा।

    इस किस्से को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक चर्चा होती रही है। हालांकि यह पूरी तरह से एक पुराना दावा और इंटरव्यू पर आधारित कहानी है, जिसे लेकर अलग-अलग पक्षों की राय भी सामने आती रही है।

    फिर भी यह घटना उस दौर की फिल्म मेकिंग और स्टार पावर को समझने का एक दिलचस्प उदाहरण मानी जाती है, जहां एक कलाकार की स्क्रीन प्रेजेंस पूरी फिल्म की दिशा बदल सकती थी।

  • ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ सुनकर भावुक हो उठे थे नेहरू, जानिए पूरा किस्सा

    ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ सुनकर भावुक हो उठे थे नेहरू, जानिए पूरा किस्सा


    नई दिल्ली। भारत के सांस्कृतिक और देशभक्ति इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं जो केवल संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं और बलिदान की जीवंत तस्वीर बन जाते हैं। ऐसा ही एक अमर गीत है ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’, जिसने न सिर्फ देशवासियों की आंखें नम कीं, बल्कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भी भावुक कर दिया था।

    यह कहानी 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद की है, जब देश अपने कई वीर सैनिकों के बलिदान से शोक में डूबा हुआ था। इसी दर्द को शब्दों में ढालने का काम किया प्रसिद्ध गीतकार कवि प्रदीप (रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी) ने। उन्होंने यह गीत शहीदों की याद और उनके परिजनों के सम्मान में लिखा था।

    इस गीत को 26 जनवरी 1963 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के रामलीला मैदान में पहली बार लता मंगेशकर की आवाज में प्रस्तुत किया गया। जैसे ही लता मंगेशकर ने अपनी भावपूर्ण आवाज में इसे गाना शुरू किया, पूरा माहौल गहरे सन्नाटे और भावनाओं में डूब गया। हजारों की भीड़ के साथ-साथ मंच पर मौजूद पंडित जवाहरलाल नेहरू की आंखों में भी आंसू आ गए। यह क्षण भारतीय इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।

    कहा जाता है कि इस गीत ने शहीदों के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को एक नई ऊंचाई दी। बाद में कवि प्रदीप ने इस गीत से प्राप्त धनराशि को युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

    कवि प्रदीप का जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। उनका जन्म उज्जैन में हुआ था और उन्होंने 1940 में फिल्म ‘बंधन’ से अपने गीत लेखन करियर की शुरुआत की। 1943 में फिल्म ‘किस्मत’ का प्रसिद्ध गीत ‘दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है’ उस समय इतना प्रभावशाली था कि ब्रिटिश सरकार इससे नाराज हो गई और उनके खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए गए। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें कुछ समय तक भूमिगत रहना पड़ा।

    इसके बावजूद उन्होंने अपने लेखन को जारी रखा और आगे चलकर ‘जागृति’, ‘जय संतोषी मां’ जैसी फिल्मों के लिए कई अमर गीत लिखे, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। 1998 में 83 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके गीत आज भी देशभक्ति की प्रेरणा बने हुए हैं।

    ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि और राष्ट्रीय एकता की अमर गाथा बन चुका है।

  • पासपोर्ट विवाद में बढ़ी कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें, पवन खेड़ा के बाद अब रणदीप सुरजेवाला को समन

    पासपोर्ट विवाद में बढ़ी कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें, पवन खेड़ा के बाद अब रणदीप सुरजेवाला को समन



    नई दिल्ली। असम में कथित पासपोर्ट विवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गुवाहाटी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उन्हें 23 मई को क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने को कहा गया है।

    यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पासपोर्ट से जुड़े आरोपों से संबंधित है। असम पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में लगाए गए आरोपों की जांच क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही है।

    इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को भी इसी मामले में समन भेजा गया था। दरअसल, अप्रैल 2026 में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास भारत के अलावा यूएई, मिस्र और एंटीगुआ जैसे देशों के पासपोर्ट भी हैं। साथ ही उन्होंने सरमा परिवार पर विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने का आरोप लगाया था।

    इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में धोखाधड़ी, जालसाजी, चुनाव के दौरान भ्रामक बयान देने और मानहानि जैसे आरोप लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद पवन खेड़ा को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए थे।

    पवन खेड़ा 13 मई 2026 को गुवाहाटी क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए थे, जहां उनसे पहले दिन 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। इसके अगले दिन 14 मई को भी उनसे करीब 8 घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। अब उन्हें आगे की जांच के लिए 25 मई 2026 को फिर से पेश होने का निर्देश दिया गया है।