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  • सलीम दुर्रानी: अफगान मूल के एकमात्र भारतीय क्रिकेटर जिन्हें मिला अर्जुन पुरस्कार

    सलीम दुर्रानी: अफगान मूल के एकमात्र भारतीय क्रिकेटर जिन्हें मिला अर्जुन पुरस्कार


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में अपनी जगह बनाना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं रहा है, लेकिन अगर आप किसी दूसरे देश से हों और वहां क्रिकेट प्रमुख खेल न हो, तो यह और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सलीम दुर्रानी की कहानी इस कठिन रास्ते को पार करने वाले खिलाड़ियों में अद्वितीय है।

    अफगानिस्तान से जामनगर तक का सफर

    सलीम दुर्रानी का जन्म 11 दिसंबर 1934 को खैबर दर्रा, अफगानिस्तान में हुआ। उनके पिता अब्दुल अजीज दुर्रानी पेशेवर क्रिकेटर थे। 1935 में कराची के दौरे पर अब्दुल अजीज की बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग से प्रभावित होकर नवानगर (आज का जामनगर) के जाम साहिब दिग्विजयसिंह रणजीतसिंह ने उन्हें सब-इंस्पेक्टर की नौकरी का ऑफर दिया। इसी अवसर पर दुर्रानी परिवार जामनगर में बस गया। सलीम केवल तीन साल के थे जब वह भारत आ गए। 1947 के बंटवारे के बाद उनके पिता पाकिस्तान चले गए, जबकि उनका परिवार जामनगर में रहा।

    ऑलराउंडर की भूमिका और टेस्ट करियर

    दुर्रानी एक ऑलराउंडर थे। वह धीमे बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज और बाएं हाथ के बल्लेबाज थे। उनके छक्के मारने की क्षमता उन्हें खास बनाती थी। अफगानिस्तान में जन्मे और भारतीय टीम के लिए खेलते हुए, दुर्रानी 1960 में टेस्ट डेब्यू करने के बाद 1973 तक 29 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। उन्होंने 50 पारियों में 1 शतक और 7 अर्धशतक बनाकर 1202 रन बनाए और 75 विकेट लिए।

    महत्वपूर्ण जीतों में अहम भूमिका

    1961-62 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की सीरीज जीत में दुर्रानी ने कोलकाता और चेन्नई में क्रमशः 8 और 10 विकेट लेकर भारत को जीत दिलाई। एक दशक बाद, 1970 में पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की पहली जीत में भी उन्होंने क्लाइव लॉयड और गैरी सोबर्स जैसे दिग्गजों को आउट किया, जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ।

    अर्जुन पुरस्कार और जीवन सम्मान

    सलीम दुर्रानी पहले क्रिकेटर थे जिन्होंने अर्जुन पुरस्कार जीता। 2011 में उन्हें सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया, जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड का सर्वोच्च पुरस्कार है।

    विदाई: 88 साल की उम्र में

    सलीम दुर्रानी ने 2 अप्रैल 2023 को 88 वर्ष की उम्र में कैंसर से अंतिम सांस ली। उनका क्रिकेट और भारतीय खेल जगत में योगदान आज भी याद किया जाता है।

  • समृद्धि और विकास का संतुलित खाका मध्यप्रदेश बजट 2026 27 में महिलाओं किसानों और गांवों पर बड़ा फोकस

    समृद्धि और विकास का संतुलित खाका मध्यप्रदेश बजट 2026 27 में महिलाओं किसानों और गांवों पर बड़ा फोकस


    भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 27 के बजट के माध्यम से समग्र और संतुलित विकास की स्पष्ट दिशा प्रस्तुत की है मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में तैयार इस बजट को आर्थिक समृद्धि का रोडमैप माना जा रहा है जिसमें सामाजिक सुरक्षा महिला सशक्तिकरण कृषि विकास और आधारभूत संरचना को समान रूप से प्राथमिकता दी गई है यह बजट न केवल वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखता है बल्कि भविष्य के विकास की मजबूत नींव भी तैयार करता है

    सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लाड़ली बहना योजना के लिए 23883 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान किया है इसके साथ ही लाड़ली लक्ष्मी योजना और पोषण कार्यक्रमों के लिए भी पर्याप्त बजट निर्धारित किया गया है यह कदम महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पोषण और सशक्तिकरण को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है

    कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भी बजट में कई अहम प्रावधान किए गए हैं अटल कृषि ज्योति योजना के तहत किसानों को बिजली सुविधा सुनिश्चित करने के लिए बड़ी राशि रखी गई है वहीं छोटे कृषि पंपों और घरेलू कनेक्शन के लिए मुफ्त बिजली की प्रतिपूर्ति का प्रावधान किसानों को सीधी राहत देगा मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना और फसल बीमा योजना के लिए भी पर्याप्त बजट निर्धारित कर किसानों की आय और सुरक्षा दोनों पर ध्यान दिया गया है

    ग्रामीण और शहरी अधोसंरचना के विकास को गति देने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर निवेश की योजना बनाई है प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हजारों परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है वहीं ग्रामीण सड़कों और जिला मार्गों के उन्नयन के लिए भी महत्वपूर्ण राशि का प्रावधान किया गया है शहरी क्षेत्रों में मेट्रो परियोजनाओं को गति देने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं जिससे यातायात व्यवस्था और बेहतर होगी

    जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जो ग्रामीण जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा

    शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है प्राथमिक शिक्षा और समग्र शिक्षा अभियान के लिए बड़ी राशि निर्धारित की गई है ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को सशक्त किया गया है

    प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए भी बड़ा बजट रखा गया है उज्जैन में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ के लिए आधारभूत संरचना और व्यवस्थाओं को विकसित करने की दिशा में अभी से काम शुरू किया जा रहा है साथ ही वेदांत पीठ की स्थापना के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है

    रोजगार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने निवेश प्रोत्साहन और एमएसएमई क्षेत्र के लिए बजट में पर्याप्त राशि निर्धारित की है विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार योजना के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है

    कुल मिलाकर यह बजट सामाजिक कल्याण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करता है और मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर तथा विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होता नजर आ रहा है

  • वैश्विक ईंधन संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला: घरेलू उड़ानों के फ्यूल पर आंशिक रोक

    वैश्विक ईंधन संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला: घरेलू उड़ानों के फ्यूल पर आंशिक रोक


    नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने आम यात्रियों और घरेलू विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी को 25 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक उछाल की आशंका जताई जा रही थी।

    तेजी से बढ़ते वैश्विक संकट के बीच हस्तक्षेप

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के मद्देनजर लिया गया है। इस क्षेत्र में अस्थिरता के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे जेट ईंधन महंगा होने का दबाव बढ़ गया था।

    घरेलू एयरलाइंस को राहत, किराए पर नियंत्रण

    सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर यह तय किया कि घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में केवल आंशिक और चरणबद्ध वृद्धि की जाएगी। इसके तहत कीमतों में करीब 25 प्रतिशत यानी लगभग 15 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। इस कदम का उद्देश्य हवाई किराए में अचानक भारी वृद्धि को रोकना और यात्रियों को राहत देना है।

    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागू नहीं होगी राहत

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल घरेलू उड़ानों के लिए है। अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर संचालित उड़ानों को वैश्विक बाजार के अनुसार पूरी कीमत चुकानी होगी। इससे एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय संचालन पर लागत का दबाव बना रहेगा।

    नई दरें लागू, कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज

    1 अप्रैल 2026 से लागू नई दरों के अनुसार, New Delhi में ATF की कीमत बढ़कर 1,04,927 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है, जो मार्च में 96,638.14 रुपए थी। हालांकि वास्तविक वृद्धि लगभग 8.5 प्रतिशत के आसपास रही है, जो संभावित भारी उछाल के मुकाबले काफी नियंत्रित है।

    सरकार और मंत्रालय की प्रतिक्रिया

    नागर विमानन मंत्री Ram Mohan Naidu Kinjarapu ने इस फैसले को व्यावहारिक और दूरदर्शी बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri का आभार जताते हुए कहा कि यह कदम यात्रियों को महंगे हवाई किराए से बचाने, एयरलाइंस पर वित्तीय दबाव कम करने और विमानन क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा।

    व्यापक आर्थिक असर भी सकारात्मक

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सिर्फ यात्रियों को ही राहत नहीं मिलेगी, बल्कि माल ढुलाई और व्यापार के लिए जरूरी हवाई संपर्क भी सुचारु बना रहेगा। इससे अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

  • डॉ मोहन यादव का बड़ा फैसला किसानों को टोल छूट और प्रदेश में तेज होगा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

    डॉ मोहन यादव का बड़ा फैसला किसानों को टोल छूट और प्रदेश में तेज होगा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास


    भोपाल । मध्यप्रदेश में किसान हित और आधारभूत संरचना विकास को लेकर सरकार ने एक साथ कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में किसानों को राहत देने के साथ साथ सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में बड़े निर्णय लिए गए

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में सार्थक बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं इसी क्रम में कृषि कार्य में उपयोग होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर को टोल प्लाजा पर शुल्क से छूट देने का निर्णय लिया गया है यह फैसला सीधे तौर पर किसानों की लागत को कम करेगा और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद करेगा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कंबाइन हार्वेस्टर फसल कटाई का एक महत्वपूर्ण उपकरण है और इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किसानों को टोल शुल्क देना पड़ता था जिससे लागत बढ़ती थी अब टोल से छूट मिलने के बाद परिवहन खर्च में कमी आएगी और इसका सकारात्मक असर कृषि उत्पादन की लागत और अंततः बाजार कीमतों पर भी पड़ेगा यह निर्णय किसानों के लिए राहत और प्रोत्साहन दोनों के रूप में देखा जा रहा है

    बैठक में केवल किसान हित ही नहीं बल्कि प्रदेश के सड़क विकास को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए संचालक मंडल ने इंदौर उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग और उज्जैन जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग के निर्माण को मंजूरी दी है इन परियोजनाओं को नॉन एक्सेस कंट्रोल के रूप में विकसित किया जाएगा जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रा समय में कमी आएगी

    इसके अलावा पश्चिम भोपाल बायपास के परिवर्तित एलाइनमेंट को भी अनुमोदन प्रदान किया गया है इस परियोजना से राजधानी क्षेत्र में यातायात दबाव कम होगा और शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी यह निर्णय आने वाले समय में भोपाल के यातायात ढांचे को नई दिशा देगा

    बैठक में वार्षिक लेखों और अन्य प्रशासनिक विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई और आवश्यक निर्णय लिए गए इस दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

    कुल मिलाकर यह बैठक किसानों और आम नागरिकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है एक ओर जहां किसानों को सीधी आर्थिक राहत दी गई है वहीं दूसरी ओर सड़क परियोजनाओं के जरिए प्रदेश के विकास को गति देने की मजबूत आधारशिला रखी गई है सरकार का यह कदम समृद्ध किसान और विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है

  • प्रीमियम ईंधन महंगा, आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत बरकरार

    प्रीमियम ईंधन महंगा, आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत बरकरार


    नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के बीच देश में ईंधन कीमतों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकारी तेल कंपनी Indian Oil Corporation (आईओसी) ने प्रीमियम ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जबकि आम पेट्रोल और डीजल की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा गया है। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिली है, लेकिन लग्जरी और हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के उपयोगकर्ताओं पर असर पड़ा है।

    एक्सपी100 पेट्रोल में बड़ा उछाल

    आईओसी के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में एक्सपी100 पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर 160 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 149 रुपए थी। यह हाई-ऑक्टेन फ्यूल खासतौर पर लग्जरी कारों और हाई-परफॉर्मेंस मोटरसाइकिलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इंजन की क्षमता और स्मूद परफॉर्मेंस बेहतर होती है। कीमतों में यह उछाल प्रीमियम फ्यूल सेगमेंट में बढ़ती लागत और वैश्विक बाजार के दबाव को दर्शाता है।

    प्रीमियम डीजल भी हुआ महंगा

    सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, बल्कि एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल (प्रीमियम डीजल) की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। अब दिल्ली में इसकी कीमत 92.99 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 91.49 रुपए थी। यह डीजल बेहतर माइलेज और कम उत्सर्जन के लिए जाना जाता है और मुख्य रूप से कमर्शियल और प्रीमियम उपयोग के लिए अपनाया जाता है।

    आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत

    हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में पेट्रोल अभी भी 94.72 रुपए प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपए प्रति लीटर पर स्थिर है। वहीं Mumbai में पेट्रोल 103.44 रुपए और डीजल 89.97 रुपए प्रति लीटर पर बना हुआ है।

    एलपीजी और एटीएफ में भी भारी बढ़ोतरी

    इस बीच, अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में तेजी देखने को मिली है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 195.50 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। वहीं एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें दोगुने से अधिक बढ़कर 2 लाख रुपए प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई हैं, जिससे विमानन सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है।

    वैश्विक तनाव का असर

    ईंधन कीमतों में यह बदलाव वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ा है। पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि अमेरिका आने वाले समय में सैन्य गतिविधियों को सीमित कर सकता है, जिससे हालात में कुछ नरमी की उम्मीद है।

    हालांकि, Iran ने चेतावनी दी है कि यदि उसके हितों पर हमला जारी रहा तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

    भारत में कीमतें क्यों स्थिर?

    वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं। तेल कंपनियां फिलहाल आम उपभोक्ताओं को राहत देने की रणनीति पर काम कर रही हैं, जबकि प्रीमियम और अन्य उत्पादों में लागत का असर दिख रहा है।

  • मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था मजबूत शून्य ड्रॉप आउट की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था मजबूत शून्य ड्रॉप आउट की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश


    भोपाल । मध्यप्रदेश में शासकीय स्कूलों के प्रति अभिभावकों और बच्चों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है और यह बदलाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भोपाल के मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टीटी नगर में राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम 2026 का शुभारंभ करते हुए इस सकारात्मक परिवर्तन को शिक्षा व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक से चार अप्रैल तक चलने वाला स्कूल चले हम अभियान बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का अभिनव प्रयास है जिसका असर अब जमीन पर नजर आ रहा है

    मुख्यमंत्री ने बताया कि शासकीय विद्यालयों में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और यह जनता के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है वर्ष 2025 26 में कुल नामांकन में लगभग बीस प्रतिशत वृद्धि हुई है जबकि सरकारी स्कूलों में यह वृद्धि बत्तीस प्रतिशत से अधिक रही है राज्य सरकार ने इस शैक्षणिक सत्र में एक करोड़ पैंतालीस लाख विद्यार्थियों के नामांकन का लक्ष्य रखा है और इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नव प्रवेशित बच्चों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और उन्हें नि शुल्क साइकिलें तथा पाठ्य पुस्तकें वितरित की उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल आने जाने में सुविधा मिले इसके लिए बड़े स्तर पर साइकिल वितरण किया जा रहा है आने वाले महीनों में लाखों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा साथ ही गणवेश किताबें और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि शासकीय स्कूलों में ड्रॉप आउट की संख्या शून्य करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण कार्य किया है उन्होंने इसके लिए शिक्षकों अभिभावकों और समाज के सहयोग की सराहना की और कहा कि हर बच्चे को स्कूल तक लाना ही सरकार का लक्ष्य है

    उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों और पीएमश्री स्कूलों के माध्यम से आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है इन संस्थानों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अटल टिंकरिंग लैब रोबोटिक लैब और आईसीटी लैब का अवलोकन भी किया जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा अब तकनीक से जुड़ रही है

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे पढ़ लिखकर डॉक्टर इंजीनियर और उद्यमी बनें और अपने भविष्य को मजबूत करें उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती की गई है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके

    मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा लैपटॉप और स्कूटी जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हजारों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला है और आगामी बजट में भी इसके लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया है

    कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि यह दिन शिक्षा विभाग के लिए उत्सव जैसा है उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले ही एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन हो चुका है और प्रयास है कि हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचे साथ ही विकासखंड स्तर पर बुक फेयर आयोजित करने की योजना भी बनाई जा रही है जिससे निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी सस्ती पुस्तकें उपलब्ध हो सकें

    इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों अधिकारियों शिक्षकों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश अब शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत और सकारात्मक परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है

  • जीएसटी रेवेन्यू में उछाल, मार्च में भारत ने पार किया 2 लाख करोड़ का आंकड़ा

    जीएसटी रेवेन्यू में उछाल, मार्च में भारत ने पार किया 2 लाख करोड़ का आंकड़ा


    नई दिल्ली। सकल जीएसटी संग्रह मार्च 2026 में 2,00,064 करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जो पिछले साल इसी महीने के 1,83,845 करोड़ रुपए के मुकाबले 8.8 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। सरकार ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और आयात पर लगने वाले जीएसटी में तेज इजाफे के कारण हुई है। घरेलू सामान पर जीएसटी संग्रह में सालाना आधार पर 5.9 प्रतिशत और आयात पर जीएसटी में 17.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    रिफंड को हटाने पर शुद्ध संग्रह

    यदि 22,074 करोड़ रुपए के रिफंड को हटा दिया जाए, तो मार्च में शुद्ध जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 1,77,990 करोड़ रुपए हो गया। इससे पता चलता है कि कर राजस्व में निरंतर सुधार और बेहतर अनुपालन की स्थिति बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपए रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 20.55 लाख करोड़ रुपए से 8.3 प्रतिशत अधिक है। शुद्ध जीएसटी संग्रह (रिफंड हटाकर) 19.34 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक है।

    उपकर संग्रह में गिरावट

    हालांकि, उपकर संग्रह में मार्च में नकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई और यह -177 करोड़ रुपए पर रहा। इसका मुख्य कारण अधिक रिफंड और समायोजन थे। विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी संग्रह की यह वृद्धि भारत की अनुमानित जीडीपी वृद्धि (लगभग 7 प्रतिशत) के अनुरूप है, जो बढ़ती खपत, आयात और बेहतर कर अनुपालन का संकेत देती है।

    पिछले महीने का प्रदर्शन

    फरवरी 2026 में भी जीएसटी संग्रह में 9.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई थी। फरवरी में सकल संग्रह बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा। इसमें घरेलू जीएसटी राजस्व में 10.2 प्रतिशत और आयात से जीएसटी राजस्व में 5.4 प्रतिशत का योगदान रहा। यह प्रवृत्ति बताती है कि भारत में कर प्रणाली मजबूत होती जा रही है और कर अनुपालन में सुधार हो रहा है।

    विशेषज्ञों की राय और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

    विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च और फरवरी में जीएसटी संग्रह की लगातार वृद्धि यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी हुई है। घरेलू खपत में बढ़ोतरी, आयात में विस्तार और बेहतर अनुपालन ने कर संग्रह को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यह संकेत है कि सरकारी राजस्व आधार मजबूत है और देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल रही है।।

  • आठवें वेतन आयोग के सदस्य सरकारी कर्मचारियों से करेंगे अहम मुद्दों पर चर्चा

    आठवें वेतन आयोग के सदस्य सरकारी कर्मचारियों से करेंगे अहम मुद्दों पर चर्चा


    नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग प्रस्तावित वेतन वृद्धि और भत्तों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से बातचीत करने के लिए तैयार है। आयोग के सदस्य 24 अप्रैल को देहरादून में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करेंगे, जिसमें कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य पक्षकारों के प्रतिनिधि वेतन संरचना, भत्ते और पेंशन से जुड़े सुझाव साझा करेंगे।

    आयोग ने कहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह की बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की समस्याओं और अपेक्षाओं को व्यापक रूप से समझा जा सके। इन बैठकों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर आयोग यह तय करेगा कि वेतन, पेंशन और अन्य लाभों में कितना संशोधन किया जाना चाहिए।

    इच्छुक समूहों और व्यक्तियों को बैठक में भाग लेने के लिए 10 अप्रैल तक समय का अनुरोध करना अनिवार्य होगा। आयोग चयनित प्रतिभागियों को बैठक के सटीक स्थान और समय के बारे में सूचित करेगा। बयान में कहा गया है कि स्थान और कार्यक्रम की जानकारी बाद में दी जाएगी।

    कर्मचारी संघ, पेंशनभोगी संघ, संगठन और व्यक्तिगत कर्मचारी भी वेतन, भत्ते और पेंशन संबंधी मुद्दों पर अपने विचार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 30 अप्रैल तक ज्ञापन के रूप में भेज सकते हैं। आयोग इन सभी प्रस्तुतियों और बैठकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा।

    वर्तमान में लगभग 1.1 करोड़ केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग की त्वरित सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कुल 18 महीने का समय दिया गया है।

  • भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बड़ी खबर: डेटा सेंटर क्षमता में 2026 तक 30% बढ़ोतरी

    भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बड़ी खबर: डेटा सेंटर क्षमता में 2026 तक 30% बढ़ोतरी


    नई दिल्ली।  भारत की डेटा सेंटर इंडस्ट्री अगले सालों में तेजी से बढ़ने की ओर बढ़ रही है। नई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में देश की डेटा सेंटर क्षमता सालाना आधार पर लगभग 30 प्रतिशत बढ़ सकती है। इसके पीछे मजबूत मांग और निवेशकों की लगातार रुचि मुख्य कारण माने जा रहे हैं।

    सीबीआरई के विश्लेषण के अनुसार, इस वर्ष लगभग 500 मेगावाट की नई डेटा सेंटर क्षमता जोड़ी जाएगी, जो 2025 में जोड़ी गई रिकॉर्ड 440 मेगावाट से अधिक है। 2025 के अंत तक घरेलू डेटा सेंटर की कुल क्षमता लगभग 1,700 मेगावाट तक पहुँच चुकी थी।

    निवेश में तेजी और विदेशी पूंजी का योगदान

    डेटा सेंटर सेक्टर में नई पूंजी निवेश भी लगातार आकर्षित हो रही है। 2025 में इस क्षेत्र में 56.4 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धताएँ हुईं, जिससे कुल निवेश प्रतिबद्धताएँ 126 अरब डॉलर तक पहुँच गईं। इस वर्ष निवेश में लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे यह राशि संभावित रूप से 180 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है।

    सीबीआरई के अध्यक्ष और सीईओ Anshuman Magazine ने कहा, “भारत में डेटा सेंटर की कहानी अब संभावनाओं के बारे में नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन के बारे में है।” उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी इस विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रही है।

    राज्यों और शहरों की भूमिका

    रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य डेटा सेंटर निवेश में आगे रहेंगे। वहीं, कम लेटेंसी, 5G रोलआउट और डेटा स्थानीयकरण की बढ़ती मांग के कारण टियर-II शहर जैसे अहमदाबाद, विशाखापत्तनम, पटना और भोपाल में भी तेजी से विकास हो रहा है।

    मुंबई का दबदबा, एआई और क्लाउड की बढ़ती मांग

    भारत में वर्तमान में कुल डेटा सेंटर क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक मुंबई में स्थित है। मुंबई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु मिलकर कुल क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत योगदान देते हैं।

    एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग से बढ़ती मांग बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा रही है, जिससे ऑपरेटर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान दे रहे हैं। भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 44.5 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी।

    सरकारी नीतियों का समर्थन

    रिपोर्ट के अनुसार कर प्रोत्साहन, हरित पूंजीगत व्यय समर्थन और नियामकीय सरलीकरण जैसी सरकारी नीतियां निवेश में और तेजी लाने और भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख डेटा सेंटर केंद्र बनाने में मदद करेंगी।

  • बड़े पद पर सादगी की मिसाल बिहार के अफसरों की संपत्ति ने सबको किया हैरान

    बड़े पद पर सादगी की मिसाल बिहार के अफसरों की संपत्ति ने सबको किया हैरान


    नई दिल्ली । बिहार में प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में उठाए गए एक कदम ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य के कई वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों द्वारा अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने के बाद जो तस्वीर सामने आई है वह चौंकाने वाली भी है और कहीं न कहीं सादगी की मिसाल भी पेश करती है। ऊंचे पदों पर बैठे इन अधिकारियों के पास न तो भारी भरकम संपत्ति है और न ही आलीशान जीवनशैली के संकेत हर जगह नजर आते हैं।

    बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के मामले में यह सामने आया कि उनकी पत्नी के पास उनसे अधिक संपत्ति है। उनके पास नकद राशि मात्र 15400 रुपये है जबकि बैंक खातों में सीमित जमा और थोड़े से निवेश हैं। उनके पास एक पुरानी कार और बहुत कम मात्रा में सोना है। इससे यह साफ होता है कि उच्च पद पर होने के बावजूद उनकी जीवनशैली बेहद साधारण है।

    वहीं बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार का मामला भी चर्चा में है क्योंकि उनके पास नकद राशि बिल्कुल नहीं है। हालांकि उनके बैंक खातों में अच्छी खासी रकम जमा है और आभूषण के रूप में भी निवेश है। यह दर्शाता है कि आज के दौर में कई अधिकारी नकद रखने की बजाय डिजिटल और सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    कई अधिकारियों की संपत्ति में और भी दिलचस्प पहलू सामने आए हैं। जैसे अरविंद कुमार चौधरी के पास खुद की कोई कार नहीं है जबकि नर्मदेश्वर लाल के पास न तो जमीन है और न ही वाहन। यह ऐसे उदाहरण हैं जो आम धारणा को चुनौती देते हैं कि बड़े पदों पर बैठे लोगों के पास अपार संपत्ति होती ही है।

    इसी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव कुमार अनुपम के पास मात्र 5000 रुपये नकद हैं जबकि उनकी कुल बचत बैंक और अन्य योजनाओं में जमा है। यह भी एक संकेत है कि अब वित्तीय प्रबंधन का तरीका बदल रहा है और लोग नकद की बजाय निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    कुछ अधिकारियों ने निवेश के अलग अलग तरीके अपनाए हैं। धर्मेंद्र सिंह के पास जहां बैंक बैलेंस और बॉन्ड निवेश है वहीं उनके पास दो गाय और दो बछड़े भी हैं जो पारंपरिक और ग्रामीण निवेश का उदाहरण पेश करते हैं। वहीं कुंदन कृष्णन ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर आधुनिक वित्तीय योजना को अपनाया है।

    इस पूरी सूची में एक बात साफ तौर पर उभरकर सामने आती है कि बिहार के कई अधिकारी सादगी भरा जीवन जी रहे हैं और अपनी आय को सोच समझकर अलग अलग क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं। कहीं परंपरागत साधन हैं तो कहीं आधुनिक वित्तीय उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    यह खुलासा न सिर्फ पारदर्शिता को बढ़ावा देता है बल्कि आम लोगों के बीच यह संदेश भी देता है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी सादगी और संतुलित जीवनशैली को अपनाते हैं। यह तस्वीर उस सोच को बदलने का काम करती है जिसमें अक्सर यह मान लिया जाता है कि ऊंचे पद का मतलब अत्यधिक संपत्ति और विलासिता ही होता है।