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  • टैनिंग दूर करने के आसान घरेलू उपाय, चेहरा बनेगा निखरा

    टैनिंग दूर करने के आसान घरेलू उपाय, चेहरा बनेगा निखरा

    लाइफस्टाइल | गर्मियों में धूप, धूल और पसीने की वजह से त्वचा डल और टैन हो जाती है। ऐसे में लोग महंगे फेस वॉश और स्क्रब का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई बार इनमें मौजूद केमिकल्स त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसी कारण अब लोग घरेलू और नेचुरल स्किन केयर की ओर लौट रहे हैं।

    घर पर बने क्लींजर के फायदे
    ब्यूटी एक्सपर्ट्स के अनुसार रसोई में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं:
    त्वचा को गहराई से साफ करती हैं
    डेड स्किन हटाती हैं
    टैनिंग कम करती हैं
    स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाती हैं

    कैसे बनाएं होममेड फेस क्लींजर?
    इसके लिए आपको चाहिए:
    1 चम्मच कॉफी पाउडर
    1 चम्मच ताजा दही
    1 चम्मच शहद
    इन तीनों को अच्छी तरह मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करें।

    कैसे करें इस्तेमाल?
    चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें
    20–25 मिनट तक छोड़ दें
    फिर साफ पानी से धो लें
    हफ्ते में 2–3 बार इस्तेमाल करें

    सावधानी जरूरी है
    पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। अगर जलन या एलर्जी महसूस हो तो तुरंत उपयोग बंद कर दें।
    यह घरेलू क्लींजर बिना केमिकल के त्वचा को साफ करने और प्राकृतिक निखार देने में मदद कर सकता है। नियमित इस्तेमाल से चेहरा ज्यादा मुलायम, साफ और चमकदार दिखाई देने लगता है।
  • हेयर फॉल रोकने के लिए स्कैल्प क्लीनिंग है अहम, एक्सपर्ट टिप्स

    हेयर फॉल रोकने के लिए स्कैल्प क्लीनिंग है अहम, एक्सपर्ट टिप्स


    नई दिल्ली। आज के समय में बाल झड़ने की समस्या हर उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ रही है। जैसे ही बाल गिरने लगते हैं, लोग तुरंत नया शैंपू खरीद लेते हैं कभी प्याज वाला, कभी अदरक वाला, कभी “हर्बल” नाम देखकर। मार्केटिंग भी इसी उम्मीद पर टिकी होती है कि लोग सोचेंगे कि नया प्रोडक्ट ही उनकी समस्या का हल है। लेकिन हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब के मुताबिक यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। उनका मानना है कि शैंपू बदलने से बालों का झड़ना नहीं रुकता, क्योंकि असली समस्या शैंपू नहीं बल्कि स्कैल्प की स्थिति होती है।

    स्कैल्प की गंदगी कैसे बढ़ाती है हेयर फॉल?
    बालों की जड़ों यानी स्कैल्प पर अगर तेल, धूल और पसीना जमा हो जाए तो रोमछिद्र (pores) बंद होने लगते हैं। इससे:
    बालों की जड़ों तक ऑक्सीजन और पोषण कम पहुंचता है
    स्कैल्प में इंफेक्शन या डैंड्रफ बढ़ सकता है
    बाल कमजोर होकर तेजी से गिरने लगते हैं
    इसलिए सिर्फ बाहरी प्रोडक्ट बदलने से ज्यादा जरूरी है कि स्कैल्प को साफ और बैलेंस रखा जाए।

    प्याज और अदरक वाले शैंपू का सच
    आजकल बाजार में “ऑनियन शैंपू”, “जिंजर शैंपू” जैसे कई प्रोडक्ट मिलते हैं, जिनका दावा होता है कि ये हेयर फॉल रोक देंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि शैंपू एक wash-off product होता है, जो कुछ ही मिनट में धो दिया जाता है। ऐसे में उसमें मौजूद हर्बल इंग्रीडिएंट्स को स्कैल्प में गहराई तक असर करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। इसलिए सिर्फ नाम या इंग्रीडिएंट देखकर यह मान लेना कि हेयर फॉल रुक जाएगा, सही नहीं है।

    जावेद हबीब की असली हेयर केयर टिप्स
    हेयर एक्सपर्ट्स के अनुसार बालों की सही देखभाल के लिए कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
    स्कैल्प को नियमित रूप से साफ रखें
    हल्का और बैलेंस्ड शैंपू इस्तेमाल करें
    जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट बदलने से बचें
    डैंड्रफ और ऑयल बिल्डअप को कंट्रोल करें
    सही डाइट और नींद का ध्यान रखें

    बालों का झड़ना रोकने का कोई “मैजिक शैंपू” नहीं है। असली समाधान स्कैल्प की सफाई, सही हेयर केयर रूटीन और लाइफस्टाइल में सुधार है। बार-बार शैंपू बदलना समस्या को हल करने के बजाय उसे और उलझा सकता है।

  • Aaj Ka Rashifal 18 May: 5 राशियों के लिए दिन रहेगा लाभदायक

    Aaj Ka Rashifal 18 May: 5 राशियों के लिए दिन रहेगा लाभदायक


    नई दिल्ली।वैदिक ज्योतिष के अनुसार 18 मई का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के हिसाब से कई राशियों के लिए सकारात्मक परिणाम देने वाला रहेगा। खासतौर पर 5 राशियों के लिए व्यापार और नौकरी में लाभ के योग बन रहे हैं।

    मेष राशि
    व्यापार में नई डील मिलने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं।

    मिथुन राशि
    नए अवसर मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कार्यस्थल पर आपकी बातों को महत्व मिलेगा।

    सिंह राशि
    करियर में प्रगति के योग हैं। प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में लाभ की स्थिति बनेगी।

    तुला राशि
    भाग्य का साथ मिलेगा। नए कॉन्ट्रैक्ट या डील फाइनल हो सकती है। नौकरी में बदलाव के अच्छे अवसर मिलेंगे।

    कुंभ राशि
    आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं। व्यापार में तेजी आएगी। नौकरी में स्थिरता और सम्मान बढ़ेगा।

    बाकी राशियों का हाल
    अन्य राशियों के लिए दिन सामान्य रहेगा। किसी भी बड़े निर्णय में सोच-समझकर आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है।

    18 मई का दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए अच्छा रहेगा जो करियर में बदलाव या व्यापार विस्तार की योजना बना रहे हैं। मेहनत और सही निर्णय से सफलता मिल सकती है।

  • भगवान शिव को कौन से फूल प्रिय हैं, पूजा में क्या करें इस्तेमाल

    भगवान शिव को कौन से फूल प्रिय हैं, पूजा में क्या करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा को अत्यंत सरल और भावपूर्ण माना गया है। शिवजी को “भोलेनाथ” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे केवल सच्ची श्रद्धा और शुद्ध भाव से ही प्रसन्न हो जाते हैं। शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार, शिव पूजा में किसी एक फूल की अनिवार्यता नहीं होती, बल्कि भक्त की भावना सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। फिर भी कुछ फूल और पत्ते ऐसे हैं जिन्हें शिवजी को अत्यंत प्रिय माना गया है।

    शिवजी को प्रिय माने जाने वाले प्रमुख पुष्प
    शिव आराधना में कई प्राकृतिक सामग्री का विशेष महत्व है। इनमें से कुछ मुख्य इस प्रकार हैं-

    धतूरा (Datura)
    धतूरा को शिवजी का अत्यंत प्रिय पुष्प माना गया है। इसे वैराग्य और त्याग का प्रतीक भी माना जाता है। शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    आक/मदार का फूल
    आक या मदार का फूल भी शिव पूजा में विशेष स्थान रखता है। यह शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है और इसे शिव आराधना में अर्पित करना शुभ फलदायी माना जाता है।

    सफेद फूल
    सफेद कमल, चमेली या अन्य सफेद पुष्प शांति, पवित्रता और संतुलन के प्रतीक माने जाते हैं। शिवजी को सफेद रंग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है।

    बेलपत्र: शिव पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा
    हालांकि बेलपत्र फूल नहीं है, लेकिन शिव पूजा में इसे सबसे महत्वपूर्ण सामग्री माना जाता है। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र त्रिदेवों का प्रतीक माना जाता है और इसे अर्पित करने से शिव कृपा प्राप्त होती है।

    शमी के पत्ते और उनका महत्व
    शमी के पत्ते विजय, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें शिव पूजा में अर्पित करने से जीवन में बाधाओं के दूर होने की मान्यता है।

    असली पूजा का सार: भाव और श्रद्धा
    शिव पूजा का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भगवान शिव बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि सच्चे भाव से प्रसन्न होते हैं। किसी भी पुष्प या पत्ते से ज्यादा महत्वपूर्ण है भक्त की आस्था और निष्ठा। शास्त्रों के अनुसार, यदि श्रद्धा शुद्ध हो तो एक साधारण बेलपत्र भी शिव कृपा पाने के लिए पर्याप्त माना जाता है।

    शिव पूजा में धतूरा, आक, सफेद फूल, शमी पत्ते और बेलपत्र का विशेष महत्व है, लेकिन अंततः पूजा का मूल आधार भाव और विश्वास ही है। यही कारण है कि भगवान शिव को “आशुतोष” यानी जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता कहा जाता है।

  • पुरुषों में ज्यादा बाल झड़ने की वजह क्या है? जानें वैज्ञानिक कारण

    पुरुषों में ज्यादा बाल झड़ने की वजह क्या है? जानें वैज्ञानिक कारण


    नई दिल्ली। बालों का झड़ना आज एक आम समस्या बन चुका है, लेकिन पुरुषों और महिलाओं में इसका पैटर्न पूरी तरह अलग होता है। पुरुषों में जहां समय के साथ सिर के आगे और बीच के हिस्से से बाल तेजी से कम होकर गंजापन दिखने लगता है, वहीं महिलाओं में आमतौर पर पूरे सिर में हल्का-हल्का बाल पतला होता है, लेकिन पूरी तरह गंजापन बेहद कम देखा जाता है।

    इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में पाए जाने वाले हार्मोन और उनकी कार्यप्रणाली है।
    पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन एक एंजाइम की मदद से DHT (डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन) में बदल जाता है। यही DHT बालों की जड़ों पर सबसे ज्यादा असर डालता है। यह धीरे-धीरे बालों की जड़ों को कमजोर कर देता है, जिससे बाल पतले होते जाते हैं और अंततः गिरने लगते हैं। समय के साथ यह प्रक्रिया इतनी तेज हो जाती है कि सिर के कुछ हिस्सों में पूरी तरह गंजापन दिखाई देने लगता है।

    महिलाओं में क्यों बच जाते हैं बाल?
    महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह हार्मोन बालों की जड़ों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है और DHT के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित करता है। इसी कारण महिलाओं में बालों का झड़ना होता तो है, लेकिन वह आमतौर पर “डिफ्यूज थिनिंग” के रूप में होता है यानी पूरे सिर में हल्की-हल्की कमी, न कि पुरुषों जैसा पैच वाला गंजापन। इसके अलावा महिलाओं के हेयर फॉलिकल्स (बालों की जड़ें) हार्मोन के प्रति अपेक्षाकृत कम संवेदनशील होती हैं, जिससे बाल लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।

    जेनेटिक्स भी निभाता है बड़ी भूमिका
    बाल झड़ने की समस्या सिर्फ हार्मोन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें जेनेटिक फैक्टर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे मेडिकल भाषा में Androgenetic Alopecia कहा जाता है। अगर परिवार में पिता या दादा को गंजापन रहा है, तो पुरुषों में इसकी संभावना काफी बढ़ जाती है। महिलाओं में भी यह जेनेटिक प्रभाव होता है, लेकिन उसका असर अपेक्षाकृत धीमा और कम गंभीर होता है।

    उम्र और हार्मोनल बदलाव का अस
    जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे बालों का झड़ना बढ़ सकता है। हालांकि तब भी पुरुषों जैसा पूरा गंजापन दुर्लभ होता है।

    पुरुषों में गंजापन मुख्य रूप से DHT हार्मोन के अधिक प्रभाव और जेनेटिक संवेदनशीलता के कारण होता है, जबकि महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन बालों को सुरक्षा प्रदान करता है। यही वजह है कि पुरुषों में गंजापन ज्यादा दिखाई देता है और महिलाओं में बाल झड़ने के बावजूद पूरा सिर आमतौर पर सुरक्षित रहता है।

  • Shiv Puja Tips: सोमवार को कैसे करें शिवजी की पूजा, मिलेगा विशेष फल

    Shiv Puja Tips: सोमवार को कैसे करें शिवजी की पूजा, मिलेगा विशेष फल


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है। शिव को “भोलेनाथ” कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों की सरल भक्ति से भी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। एक लोटा जल, बेलपत्र और सच्चे मन से की गई पूजा से ही महादेव कृपा बरसाते हैं।  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि भक्त अपनी राशि के अनुसार शिव पूजा करें तो उसका प्रभाव और भी अधिक शुभ माना जाता है। इससे न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में बाधाएं भी कम हो सकती हैं।

    राशि अनुसार शिव पूजा विधि-
    मेष राशि
    मेष जातक तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। बेलपत्र पर “श्रीराम” लिखकर अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    वृषभ राशि
    वृषभ जातक दूध, दही और शक्कर से शिव अभिषेक करें। सफेद पुष्प और चंदन अर्पित करें।

    मिथुन राशि
    गन्ने के रस या शहद से शिवलिंग का अभिषेक करें। इससे साधना में सफलता मिलने की मान्यता है।

    कर्क राशि
    कच्चे दूध, दही, घी और मिश्री से अभिषेक करें। सफेद पुष्प और बेलपत्र अर्पित करें।

    सिंह राशि
    गुड़ मिश्रित जल और शुद्ध घी से शिव अभिषेक करें। यह सौभाग्य बढ़ाने वाला माना जाता है।

    कन्या राशि
    भांग, पान, शमीपत्र और बेलपत्र अर्पित करें और विधिवत पूजा करें।

    तुला राशि
    दही, शहद या गन्ने के रस से अभिषेक करें और सुगंधित पुष्प चढ़ाएं।

    वृश्चिक राशि
    दूध, शक्कर और शहद मिलाकर अभिषेक करें। लाल पुष्प और बेलपत्र अर्पित करें।

    धनु राशि
    केसर या हल्दी मिले दूध से अभिषेक करें। पीले फूल और फल चढ़ाएं।

    मकर राशि
    गंगाजल अर्पित करें और नीले पुष्प चढ़ाकर रुद्राक्ष से मंत्र जप करें।

    कुंभ राशि
    तिल या बादाम के तेल से अभिषेक करें और महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।

    मीन राशि
    केसर मिश्रित दूध और जल से अभिषेक करें। पीले फूल और फल अर्पित करें।

    सोमवार को की गई शिव आराधना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति ला सकती है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक राशि अनुसार पूजा की जाए तो यह साधना और भी अधिक फलदायी मानी जाती है।

  • सोमवारी शिव आराधना: जल से लेकर पंचामृत तक, शिवभक्ति से बदल सकता है भाग्य का प्रवाह

    सोमवारी शिव आराधना: जल से लेकर पंचामृत तक, शिवभक्ति से बदल सकता है भाग्य का प्रवाह


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है। इस दिन की गई पूजा-अर्चना को अत्यंत शुभ और शीघ्र फल देने वाली माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि महादेव अत्यंत सरल स्वभाव के देवता हैं, जो केवल सच्चे भाव और श्रद्धा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यही कारण है कि शिव उपासना में जटिल विधियों की बजाय शुद्धता और भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करना सबसे महत्वपूर्ण साधना मानी जाती है, जिससे जीवन के कष्टों का निवारण और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

     पंचामृत और पवित्र जल से अभिषेक का महत्
    शिव पूजन में जल और पंचामृत का विशेष स्थान है। श्रद्धालु भगवान शिव को गंगाजल, स्वच्छ जल, दूध, दही, शहद, चीनी और घी से अभिषेक करते हैं, जिसे पंचामृत कहा जाता है। मान्यता है कि पंचामृत से किया गया अभिषेक न केवल आध्यात्मिक शुद्धि देता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। सफेद चंदन का लेपन मानसिक शांति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, जो भक्त के जीवन में संतुलन लाने में सहायक होता है।

    बेलपत्र, धतूरा और शमी पत्तों का विशेष महत्व
    भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना गया है। ऐसी मान्यता है कि तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अर्पित करने से त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही धतूरा, आंकड़े के फूल और शमी के पत्ते भी शिव पूजा का अभिन्न हिस्सा हैं। ये सभी सामग्री शिव के त्याग, तप और वैराग्य भाव का प्रतीक मानी जाती हैं। भक्त इन वस्तुओं को अर्पित कर अपने जीवन में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने की कामना करते हैं।

    भोग और प्रसाद में सात्विकता का संदेश
    शिव पूजन में भोग का भी विशेष महत्व है। भक्त भगवान शिव को भांग, मिश्री और सात्विक मिठाइयों का भोग लगाते हैं। माना जाता है कि सात्विक भोग से मन शुद्ध होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।  भांग को शिव का प्रिय माना गया है, जो उनके वैराग्य और योगी स्वरूप का प्रतीक है। वहीं मिश्री और मिठाई भक्ति में मधुरता और सौम्यता का संदेश देती हैं।

    श्रद्धा और विश्वास से बदलता जीवन
    सोमवार को की गई शिव आराधना केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम है। जल, पंचामृत और पवित्र पत्तों से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में संतुलन, सुख और समृद्धि लाने की मान्यता रखती है। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से की गई शिव भक्ति से जीवन के सभी कष्ट धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं और भाग्य का नया मार्ग खुलता है।

  • मॉस्को पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, 500+ ड्रोन से रूस दहला, तीन की मौत, एयर डिफेंस ने 556 ड्रोन गिराने का दावा

    मॉस्को पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, 500+ ड्रोन से रूस दहला, तीन की मौत, एयर डिफेंस ने 556 ड्रोन गिराने का दावा


    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को और आसपास के इलाकों पर एक साथ 500 से ज्यादा ड्रोन से बड़ा और संगठित हमला किया, जिसे अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन अटैक माना जा रहा है।

    रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने रातभर में कुल 556 यूक्रेनी ड्रोन को इंटरसेप्ट और नष्ट किया। वहीं मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के मुताबिक, शहर और आसपास के क्षेत्रों में 120 से ज्यादा ड्रोन को मार गिराया गया।

    इस हमले में मॉस्को के पास खिमकी और मितिशची इलाकों में ड्रोन गिरने से कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। एक महिला की मौत घर पर ड्रोन गिरने से हुई, जबकि दो लोगों की जान निर्माणाधीन इमारत पर मलबा गिरने से गई।

    हमले के दौरान कई रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, कुछ जगहों पर आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। रूस के सबसे व्यस्त शेरेमेत्येवो एयरपोर्ट के पास भी ड्रोन के टुकड़े गिरे, हालांकि किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

    रूसी मीडिया TASS के अनुसार, यह हमला पिछले एक साल में मॉस्को पर सबसे बड़ा ड्रोन हमला माना जा रहा है। कई जगहों से आग और धुएं की तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे राजधानी में दहशत का माहौल बन गया।

    उधर, यूक्रेनी वायुसेना ने दावा किया कि रूस ने भी जवाबी कार्रवाई में 287 ड्रोन दागे, जिनमें से अधिकांश को मार गिराया गया। इस हमले में यूक्रेन के Dnipropetrovsk और Zaporizhzhia क्षेत्रों में 9 लोग घायल हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला रूस की राजधानी तक युद्ध के दायरे के और गहराने का संकेत है और आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।

  • मोदी की नीदरलैंड यात्रा में ऐतिहासिक समझौता: 1000 साल पुराने चोल तमिल दस्तावेज भारत लौटेंगे, टाटा-ASML डील से सेमीकंडक्टर सहयोग को बढ़ावा

    मोदी की नीदरलैंड यात्रा में ऐतिहासिक समझौता: 1000 साल पुराने चोल तमिल दस्तावेज भारत लौटेंगे, टाटा-ASML डील से सेमीकंडक्टर सहयोग को बढ़ावा



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत के इतिहास और तकनीकी क्षेत्र दोनों के लिए बड़े समझौते हुए। इस यात्रा में 11वीं सदी के चोल काल के तमिल ताम्र पट्टिकाओं को भारत वापस लाने पर सहमति बनी, वहीं टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदारी भी हुई।

    1000 साल पुराने चोल दस्तावेज भारत लौटेंगे
    भारत और नीदरलैंड के बीच हुए समझौते के तहत 11वीं सदी की चोल ताम्र पट्टिकाएं जल्द भारत लाई जाएंगी। यह संग्रह 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की प्लेटों का है, जिन पर अधिकतर लेख तमिल भाषा में लिखे गए हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इन ऐतिहासिक दस्तावेजों में चोल साम्राज्य के महान शासक राजा राजेंद्र चोल प्रथम और उनके पिता राजा राजराजा चोल प्रथम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दर्ज हैं। ये पट्टिकाएं 19वीं सदी में यूरोपीय व्यापार और शोध के दौरान भारत से बाहर ले जाई गई थीं।

    टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ASML के बीच बड़ा समझौता
    नीदरलैंड के द हेग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच सेमीकंडक्टर और चिप तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का समझौता हुआ।

    ASML दुनिया की अग्रणी चिप मशीन निर्माता कंपनी है, जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण में तेजी से निवेश कर रही है। यह डील भारत को चिप निर्माण क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

    नीदरलैंड के राजा-रानी से मुलाकात
    पीएम मोदी ने नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से शाही महल ‘पैलेस हाउस टेन बॉश’ में मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच शिक्षा, तकनीक, डिजिटल नवाचार, ग्रीन एनर्जी और वाटर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    नीदरलैंड के राजा-रानी ने प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में रात्रिभोज का भी आयोजन किया। मोदी ने 2019 की उनकी भारत यात्रा को याद करते हुए दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बताया।

    भारत में निवेश का सुनहरा मौका: पीएम मोदी
    CEO राउंड टेबल बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में निवेश और कारोबार का यह सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने बताया कि टैक्स और लेबर सुधारों के कारण भारत में मैन्युफैक्चरिंग अब अधिक आसान और सस्ती हो गई है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा निर्यातक बन चुका है और ग्रीन हाइड्रोजन, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    300 से अधिक डच कंपनियां भारत में सक्रिय
    प्रधानमंत्री ने बताया कि पहले से ही 300 से अधिक डच कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।

    स्वीडन के लिए रवाना हुए पीएम मोदी
    नीदरलैंड दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब स्वीडन के गोथेनबर्ग शहर के लिए रवाना हो गए हैं, जहां वे 17 और 18 मई को द्विपक्षीय वार्ता और सहयोग को लेकर चर्चा करेंगे।
    मोदी की नीदरलैंड यात्रा न केवल भारत की ऐतिहासिक धरोहर को वापस लाने में सफल रही, बल्कि सेमीकंडक्टर और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते भी खोल गई। यह दौरा भारत-नीदरलैंड संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला माना जा रहा है।

  • सुबह के नाश्ते की आसान और हेल्दी शुरुआत: झटपट बनने वाला वेजिटेबल उपमा, स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल

    सुबह के नाश्ते की आसान और हेल्दी शुरुआत: झटपट बनने वाला वेजिटेबल उपमा, स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल

    नई दिल्ली ।  लंबी यात्रा का नाम सुनते ही जहां कुछ लोगों के चेहरे पर उत्साह आ जाता है, वहीं कई लोगों के लिए सफर एक बड़ी परेशानी बन जाता है। कार, बस या पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय उल्टी, चक्कर, घबराहट और जी मिचलाने जैसी समस्याएं कई यात्रियों को परेशान करती हैं। इस स्थिति को सामान्य भाषा में मोशन सिकनेस कहा जाता है। यह समस्या न केवल यात्रा का आनंद खराब कर देती है, बल्कि कई बार लोगों को सफर करने से भी डर लगने लगता है। हालांकि, कुछ आसान घरेलू उपायों को अपनाकर इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    मोशन सिकनेस आमतौर पर तब होती है जब आंखों और दिमाग के बीच तालमेल बिगड़ जाता है। चलते वाहन में शरीर एक तरह की गति महसूस करता है, जबकि दिमाग उसे अलग तरीके से समझता है। इसी कारण घबराहट, चक्कर और उल्टी जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। लेकिन यदि सफर से पहले और दौरान कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो यात्रा काफी आरामदायक बन सकती है।

    अदरक को इस समस्या का सबसे प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण पेट को शांत रखने में मदद करते हैं और जी मिचलाने की समस्या को कम करते हैं। सफर पर निकलने से पहले अदरक वाली चाय पीना या अदरक का छोटा टुकड़ा चबाना फायदेमंद साबित हो सकता है। कई लोग अदरक की टॉफी या कैंडी का इस्तेमाल भी करते हैं, जिससे यात्रा के दौरान राहत मिलती है।

    नींबू और काला नमक भी सफर के दौरान काफी लाभकारी माने जाते हैं। नींबू की खुशबू और उसका स्वाद पेट को आराम देता है। यात्रा के दौरान यदि जी मिचलाने लगे तो नींबू के टुकड़े पर थोड़ा काला नमक लगाकर चूसने से तुरंत राहत महसूस हो सकती है। यह तरीका खासतौर पर पहाड़ी रास्तों में बेहद कारगर माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि खाली पेट सफर करने से बचना चाहिए। कई लोग यह सोचकर बिना कुछ खाए यात्रा पर निकल जाते हैं कि इससे उल्टी नहीं होगी, लेकिन वास्तव में खाली पेट होने से परेशानी और बढ़ सकती है। सफर से पहले हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना बेहतर माना जाता है। तला-भुना और अधिक मसालेदार भोजन से दूरी बनाना भी जरूरी है।

    सही सीट का चुनाव भी मोशन सिकनेस को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। कार या बस में आगे की सीट पर बैठने से शरीर को कम झटके महसूस होते हैं। साथ ही बाहर के दृश्यों को देखने से दिमाग और आंखों के बीच बेहतर तालमेल बना रहता है, जिससे चक्कर और घबराहट कम होती है। सफर के दौरान लगातार मोबाइल देखने या किताब पढ़ने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे परेशानी बढ़ सकती है।

    ताजी हवा लेना भी बेहद जरूरी है। बंद खिड़कियां, तेज गंध और घुटन भरा माहौल कई बार उल्टी की समस्या को बढ़ा देते हैं। ऐसे में वाहन की खिड़की थोड़ा खुला रखना या बीच-बीच में ताजी हवा लेना राहत पहुंचा सकता है।

    अगर किसी व्यक्ति को हर यात्रा में गंभीर मोशन सिकनेस की समस्या होती है, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो सकता है। कुछ मामलों में दवाओं की जरूरत भी पड़ सकती है। सही सावधानी और घरेलू उपायों के जरिए सफर को आरामदायक और आनंददायक बनाया जा सकता है।