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  • जालंधर ब्लास्ट की जांच में नया मोड़, दूर से मोबाइल सिग्नल से ट्रिगर किया गया IED हमला

    जालंधर ब्लास्ट की जांच में नया मोड़, दूर से मोबाइल सिग्नल से ट्रिगर किया गया IED हमला

    नई दिल्ली ।  जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़े नए और गंभीर खुलासे सामने आ रहे हैं। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि इस विस्फोट के पीछे पाकिस्तान में बैठे एक आतंकी हैंडलर का हाथ हो सकता है, जिसने मोबाइल सिम आधारित आधुनिक तकनीक के जरिए इस घटना को अंजाम देने की योजना बनाई। इस पूरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह हमला पारंपरिक तरीकों से हटकर अत्याधुनिक रिमोट ट्रिगरिंग सिस्टम के इस्तेमाल की ओर इशारा करता है।

    जांच रिपोर्ट के अनुसार, विस्फोटक उपकरण को पहले से ही घटनास्थल के पास प्लांट किया गया था और उसमें एक सिम कार्ड को विशेष डिवाइस के साथ जोड़ा गया था। इसके बाद यह सिम नंबर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजा गया, जिसने कॉल या मैसेज के जरिए डिवाइस को सक्रिय किया। जैसे ही उस सिग्नल को सिस्टम ने रिसीव किया, एक इलेक्ट्रॉनिक रिले सर्किट सक्रिय हुआ और डेटोनेटर के जरिए विस्फोट हो गया। इस पूरी प्रक्रिया में किसी व्यक्ति की मौके पर मौजूदगी या किसी तार से कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इस तकनीक को बेहद खतरनाक माना जा रहा है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आतंकवाद के नए डिजिटल स्वरूप को दर्शाती है, जिसमें साधारण मोबाइल नेटवर्क का उपयोग विस्फोटक को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इसमें जीएसएम मॉड्यूल, सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का उपयोग कर हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति द्वारा भी विस्फोट को ट्रिगर किया जा सकता है। यह तरीका न केवल आसान है बल्कि इसे ट्रेस करना भी पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।

    इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल नेटवर्क डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोटक सामग्री को मौके तक कैसे पहुंचाया गया और इसमें किन स्थानीय सहयोगियों की भूमिका रही।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह की घटनाएं सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क की बदलती रणनीति को दर्शाती हैं, जहां अब तकनीक का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जा रहा है। यह हमला न केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में आतंकवाद तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत रूप ले सकता है।

    फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस हमले के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

  • अहमदाबाद में विकास की नई उड़ान: अमित शाह बोले- गुजरात को AI, सेमीकंडक्टर और सर्विस सेक्टर में बनाएंगे अग्रणी राज्य

    अहमदाबाद में विकास की नई उड़ान: अमित शाह बोले- गुजरात को AI, सेमीकंडक्टर और सर्विस सेक्टर में बनाएंगे अग्रणी राज्य


    नई दिल्ली ।  अहमदाबाद में विकास और तकनीक की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण किया, जिनमें ‘मिलियन माइंड्स टेक पार्क’ और ‘गणेश रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ शामिल हैं। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात अब केवल औद्योगिक उत्पादन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में यह राज्य तकनीक, सेवा क्षेत्र और नवाचार की वैश्विक पहचान बनने की ओर अग्रसर है। उनके अनुसार राज्य की विकास यात्रा अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जहां डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार होगा।

    लोकार्पण कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गुजरात ने हमेशा देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब यही राज्य तकनीकी क्रांति का नेतृत्व भी करेगा। ‘मिलियन माइंड्स टेक पार्क’ को उन्होंने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक ऐसी परियोजना बताया, जो हजारों युवाओं को उच्च कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध कराएगी। इस टेक पार्क में आधुनिक तकनीकी कंपनियों, अनुसंधान केंद्रों और स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे नवाचार और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

    इसके साथ ही ‘गणेश रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ को शहरी विकास और आधुनिक रियल एस्टेट प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। यह संस्थान आधुनिक शहरी नियोजन, तकनीक आधारित शिक्षा और वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण देकर कुशल मानव संसाधन तैयार करेगा। इससे न केवल रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और पेशेवरता बढ़ेगी, बल्कि शहरी विकास योजनाओं को भी नई दिशा मिलेगी।

    कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि अहमदाबाद-गिफ्ट सिटी-गांधीनगर कॉरिडोर में विकसित हो रही यह टेक सिटी हजारों करोड़ रुपये के निवेश और लाखों रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता रखती है। इस परियोजना के तहत ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस, आवासीय सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, जो भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं के नक्शे पर और मजबूत स्थिति में लाएगा।

    अमित शाह ने यह भी कहा कि गुजरात पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग, पोर्ट डेवलपमेंट, ग्रीन एनर्जी और फार्मा सेक्टर में अग्रणी रहा है, और अब यह राज्य आईटी और नॉलेज-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में गुजरात देश का प्रमुख टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर हब बनकर उभरेगा।

    कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य में विकसित हो रही सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और गिफ्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स भारत को वैश्विक निवेश का आकर्षण केंद्र बना रहे हैं। इस दौरान यह संदेश भी सामने आया कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में गुजरात की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी और यह राज्य देश की विकास यात्रा का प्रमुख इंजन साबित होगा।

  • कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज

    कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज



    नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में बड़ा खुलासा किया है कि आज का भारत कभी अंटार्कटिका से जुड़ा हुआ था। लाखों नहीं बल्कि करोड़ों साल पहले दोनों भूभाग एक विशाल पर्वत श्रृंखला और साझा भूवैज्ञानिक संरचना का हिस्सा थे। अब आंध्र प्रदेश की प्राचीन चट्टानों और पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों के अध्ययन से इस रहस्य पर नई रोशनी पड़ी है।

    रिसर्च के मुताबिक आंध्र प्रदेश के विजयनगरम और सालूर इलाके में मिली चट्टानों की संरचना, उम्र और रासायनिक गुण पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों से काफी मिलते-जुलते पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये दोनों क्षेत्र कभी “रेनर-ईस्टर्न घाट ओरोजेन” नाम की एक ही भूवैज्ञानिक प्रणाली का हिस्सा थे।

    यह अध्ययन भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने किया है। रिसर्च में खास तौर पर ग्रैनुलाइट नाम की मेटामॉर्फिक चट्टानों का अध्ययन किया गया, जो पृथ्वी के भीतर अत्यधिक गर्मी और दबाव में बनती हैं और अरबों साल पुराने भूवैज्ञानिक बदलावों की जानकारी अपने अंदर सुरक्षित रखती हैं।

    वैज्ञानिकों ने जिरकॉन, गार्नेट और मोनाजाइट जैसे खनिजों का आधुनिक तकनीक से परीक्षण किया। इनमें जिरकॉन को सबसे अहम माना गया क्योंकि यह अत्यधिक तापमान और दबाव में भी सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिकों ने जिरकॉन के भीतर मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों के अध्ययन से करोड़ों साल पुराने भूवैज्ञानिक घटनाक्रमों का पता लगाया।

    रिसर्च में सामने आया कि भारत और अंटार्कटिका दोनों क्षेत्रों में भूवैज्ञानिक विकास के तीन बड़े चरण एक जैसे रहे। पहला चरण करीब 1000 से 990 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब विशाल महाद्वीपीय टकराव से बड़ी पर्वत श्रृंखलाएं बनीं। दूसरा चरण 950 से 890 मिलियन वर्ष पहले का था, जिसमें चट्टानों में गहरे संरचनात्मक बदलाव आए। तीसरा चरण 570 से 540 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब खनिजों से भरपूर तरल पदार्थ चट्टानों की दरारों से गुजरे और खास रासायनिक निशान छोड़ गए।

    वैज्ञानिकों के अनुसार, बाद में सुपरकॉन्टिनेंट Gondwana टूटने लगा और करीब 130 से 150 मिलियन वर्ष पहले भारत और अंटार्कटिका अलग हो गए। भारतीय प्लेट उत्तर दिशा में एशिया की ओर बढ़ गई, जबकि अंटार्कटिका दक्षिण की ओर खिसक गया।

    आज दोनों भूभाग हजारों किलोमीटर दूर हैं, लेकिन करोड़ों साल पुरानी चट्टानें अब भी उनके साझा इतिहास की कहानी बयां कर रही हैं।

  • FBI डायरेक्टर काश पटेल पर लग्जरी ट्रिप का आरोप, गर्लफ्रेंड संग कंसर्ट के लिए इस्तेमाल किया सरकारी जेट!

    FBI डायरेक्टर काश पटेल पर लग्जरी ट्रिप का आरोप, गर्लफ्रेंड संग कंसर्ट के लिए इस्तेमाल किया सरकारी जेट!


    नई दिल्ली। अमेरिका की प्रमुख जांच एजेंसी Federal Bureau of Investigation के डायरेक्टर काश पटेल एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल अपनी गर्लफ्रेंड को लग्जरी ट्रीटमेंट देने के लिए किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक काश पटेल ने अपनी निजी यात्रा के दौरान FBI के जेट विमान का इस्तेमाल किया और हजारों डॉलर के आलीशान सुइट में म्यूजिक कंसर्ट का आनंद लिया।

    रिपोर्ट के अनुसार, 10 मई 2025 को काश पटेल अपनी 27 वर्षीय गर्लफ्रेंड एलेक्सिस विलकिंस के साथ FBI के गल्फस्ट्रीम V जेट से वॉशिंगटन से फिलाडेल्फिया पहुंचे थे। वहां दोनों ने मशहूर कंट्री सिंगर्स George Strait और Chris Stapleton का लाइव म्यूजिक कंसर्ट देखा।

    बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के लिए दोनों ने करीब 35 हजार से 50 हजार डॉलर कीमत वाले प्राइवेट लग्जरी सुइट का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, FBI फ्लाइट क्रू और सुरक्षा कर्मियों को देर रात तक ड्यूटी पर इंतजार करना पड़ा, जिसके लिए उन्हें ओवरटाइम भुगतान भी किया गया।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह सवाल उठने लगे कि क्या सरकारी संसाधनों का निजी इस्तेमाल नियमों के खिलाफ था। हालांकि काश पटेल ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    यह पहला मौका नहीं है जब काश पटेल विवादों में आए हों। इससे पहले भी उनकी यात्राओं और आधिकारिक कार्यक्रमों में निजी लोगों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ चुके हैं। हाल ही में पर्ल हार्बर मेमोरियल के पास वीआईपी टूर को लेकर भी उनकी आलोचना हुई थी।

    हालांकि FBI के प्रवक्ता बेन विलियमसन ने इन आरोपों का बचाव करते हुए कहा कि यात्रा को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और यह एक आधिकारिक दौरा था। बावजूद इसके, अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस पूरे मामले को लेकर बहस तेज हो गई है।

  • सोलर सेक्टर की इस कंपनी ने मचाई हलचल, तिमाही नतीजों में रिकॉर्ड कमाई से निवेशक उत्साहित

    सोलर सेक्टर की इस कंपनी ने मचाई हलचल, तिमाही नतीजों में रिकॉर्ड कमाई से निवेशक उत्साहित

    नई दिल्ली ।  रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की तेजी से उभरती कंपनी Solex Energy ने अपने ताजा तिमाही नतीजों से बाजार में हलचल पैदा कर दी है। कंपनी ने चौथी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज करते हुए मुनाफे में 305 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हासिल की है। इसके साथ ही कंपनी का रेवेन्यू भी कई गुना बढ़ा है, जिसने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर अपनी ओर खींच लिया है।

    कंपनी के मुताबिक, चौथी तिमाही के दौरान उसका शुद्ध मुनाफा बढ़कर 57.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 14.3 करोड़ रुपये था। इसी तरह कंपनी की कुल आय में भी बड़ी छलांग देखने को मिली। इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 885.5 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो एक साल पहले 254.4 करोड़ रुपये था। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि कंपनी ने बेहद तेज रफ्तार से कारोबार का विस्तार किया है।

    कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन में भी मजबूत सुधार देखने को मिला। EBITDA यानी ऑपरेटिंग प्रॉफिट 251 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 98.3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 28 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन भी हल्के सुधार के साथ 11.1 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो कंपनी की परिचालन क्षमता को मजबूत दर्शाता है।

    पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी का प्रदर्शन और भी प्रभावशाली रहा। इस दौरान कंपनी की कुल आय 1,621 करोड़ रुपये से अधिक रही, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 144 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं EBITDA 186 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया और कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स भी 132 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 98 करोड़ रुपये के पार निकल गया। इन आंकड़ों ने यह साबित किया है कि कंपनी केवल रेवेन्यू ग्रोथ ही नहीं बल्कि मुनाफे के स्तर पर भी मजबूत पकड़ बना रही है।

    कंपनी प्रबंधन का कहना है कि बीता वित्त वर्ष उसके लिए बदलाव और विस्तार का दौर रहा। Solex Energy अब केवल एक मैन्युफैक्चरिंग आधारित कंपनी नहीं रहना चाहती, बल्कि वह खुद को एक इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी बिजनेस के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी आने वाले समय में वैश्विक बाजारों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है।

    शेयर बाजार में भी कंपनी का प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले पांच वर्षों में इस स्टॉक ने निवेशकों को लगभग 3900 प्रतिशत का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। यही वजह है कि यह स्टॉक लंबे समय से निवेशकों की पसंद बना हुआ है। पिछले तीन वर्षों में भी कंपनी के शेयरों में करीब 300 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है, जबकि एक साल के भीतर भी स्टॉक ने मजबूत रिटर्न दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को मिल रहे सरकारी समर्थन और बढ़ती मांग का सीधा फायदा ऐसी कंपनियों को मिल रहा है, जो सोलर और क्लीन एनर्जी क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही हैं। आने वाले वर्षों में यह सेक्टर और अधिक मजबूत हो सकता है, जिससे इस तरह की कंपनियों के कारोबार में और तेजी देखने को मिल सकती है।

    Solex Energy के ताजा नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी केवल तेजी से बढ़ ही नहीं रही, बल्कि निवेशकों के भरोसे पर भी लगातार खरी उतर रही है।

  • WHO का बड़ा अलर्ट! अफ्रीका में फिर फैला खतरनाक ईबोला वायरस, नई महामारी को लेकर बढ़ी चिंता

    WHO का बड़ा अलर्ट! अफ्रीका में फिर फैला खतरनाक ईबोला वायरस, नई महामारी को लेकर बढ़ी चिंता



    नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization ने अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे ईबोला वायरस को लेकर वैश्विक स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है। WHO ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित करते हुए कहा है कि इस बार फैल रहा बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहले के मुकाबले अलग और बेहद चिंताजनक है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह वायरस ईबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है, जो इंसानों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई विशेष वैक्सीन या प्रभावी दवा उपलब्ध नहीं है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, कांगो के इटुरी प्रांत में ईबोला का यह 17वां बड़ा प्रकोप है। हालांकि इस बार वायरस का प्रकार अलग होने से स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहली बार साल 2007-08 में युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में सामने आया था, जहां सैकड़ों लोग संक्रमित हुए थे और बड़ी संख्या में मौतें दर्ज की गई थीं।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि ईबोला वायरस के कई प्रकार होते हैं, लेकिन ज़ैरे, सूडान और बुंडीबुग्यो स्ट्रेन इंसानों में सबसे ज्यादा संक्रमण फैलाते हैं। ज़ैरे स्ट्रेन सबसे घातक माना जाता है, जबकि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन में भी मौत का खतरा 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

    वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस अफ्रीका के घने जंगलों में मौजूद जंगली जानवरों, खासकर चमगादड़ों से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संपर्क में आने से यह तेजी से दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है।

    ईबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे दिखाई देते हैं। मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द महसूस होता है। बाद में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गले में संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। गंभीर स्थिति में शरीर के अलग-अलग हिस्सों से खून बहना शुरू हो सकता है और कई बार मरीज के अंग काम करना बंद कर देते हैं।

    WHO और स्वास्थ्य एजेंसियां प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने, संक्रमित मरीजों को अलग रखने और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ तो यह संक्रमण कई देशों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

  • घाटे में चल रही कंपनी में भी रिलायंस को दिख रहा भविष्य, आलोक इंडस्ट्रीज के जरिए टेक्सटाइल कारोबार मजबूत करने की तैयारी

    घाटे में चल रही कंपनी में भी रिलायंस को दिख रहा भविष्य, आलोक इंडस्ट्रीज के जरिए टेक्सटाइल कारोबार मजबूत करने की तैयारी

    नई दिल्ली ।
     भारतीय कॉरपोरेट जगत में जब भी लंबी अवधि की रणनीति और बड़े निवेश की बात होती है, तब रिलायंस इंडस्ट्रीज का नाम प्रमुखता से सामने आता है। इसी रणनीतिक सोच के तहत कंपनी ने कुछ वर्ष पहले टेक्सटाइल सेक्टर की संघर्ष कर रही कंपनी आलोक इंडस्ट्रीज में बड़ी हिस्सेदारी खरीदकर बाजार को चौंका दिया था। उस समय यह निवेश कई लोगों के लिए जोखिम भरा माना गया, क्योंकि कंपनी भारी कर्ज, कमजोर वित्तीय स्थिति और लगातार बढ़ते घाटे से जूझ रही थी। हालांकि रिलायंस ने इस निवेश को तात्कालिक मुनाफे के बजाय भविष्य की औद्योगिक मजबूती और वैल्यू चेन विस्तार के नजरिए से देखा। आज भी आलोक इंडस्ट्रीज का शेयर लगभग 13 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है और कंपनी पूरी तरह लाभ में नहीं लौट पाई है, लेकिन इसके बावजूद रिलायंस की रणनीति में कोई बदलाव दिखाई नहीं देता।

    आलोक इंडस्ट्रीज कभी देश की बड़ी वर्टिकली इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल कंपनियों में गिनी जाती थी। कंपनी स्पिनिंग, यार्न, फैब्रिक, गारमेंट्स और होम टेक्सटाइल्स जैसे कई क्षेत्रों में मजबूत मौजूदगी रखती थी। लेकिन समय के साथ गलत विस्तार योजनाएं, प्रबंधन संबंधी चुनौतियां और बढ़ते कर्ज ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया। हालात इतने खराब हो गए कि कंपनी को दिवाला प्रक्रिया के तहत पुनर्गठन के दौर से गुजरना पड़ा। इसी समय रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अवसर को पहचानते हुए कंपनी में हिस्सेदारी लेकर इसे फिर से खड़ा करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

    रिलायंस की रणनीति केवल एक कंपनी को बचाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य टेक्सटाइल कारोबार की पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करना भी था। रिलायंस पहले से ही पॉलिएस्टर और संबंधित कच्चे माल के क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखती है, जबकि आलोक इंडस्ट्रीज यार्न और फाइबर उत्पादन में अच्छी क्षमता रखती है। ऐसे में दोनों कंपनियों के बीच तालमेल के जरिए उत्पादन लागत कम करने, सप्लाई सिस्टम मजबूत करने और बड़े स्तर पर लागत नियंत्रण हासिल करने की योजना बनाई गई। इसके अलावा टेक्सटाइल और रिटेल कारोबार के बीच बेहतर समन्वय भी इस निवेश का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।

    हालांकि कंपनी के सामने अभी भी कई बड़े ऑपरेटिंग चैलेंज बने हुए हैं। बढ़ती कच्चे माल की कीमतें, बिजली और ईंधन पर बढ़ता खर्च, वैश्विक बाजार में कमजोर मांग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े दबाव कंपनी की वित्तीय स्थिति पर असर डाल रहे हैं। कई बार परिचालन स्तर पर सुधार दिखाई देता है और आय में बढ़ोतरी भी दर्ज होती है, लेकिन भारी ब्याज भुगतान और पुराने वित्तीय बोझ के कारण कंपनी का कुल घाटा पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है। लगातार नुकसान का असर कंपनी की नेटवर्थ पर भी दिखाई दे रहा है।

    इसके बावजूद उद्योग जगत में माना जा रहा है कि रिलायंस इस निवेश को तात्कालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक औद्योगिक रणनीति के रूप में देख रही है। कंपनी का फोकस टेक्सटाइल सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और भविष्य के बाजार अवसरों का लाभ उठाने पर है। आने वाले वर्षों में यदि वैश्विक बाजार की स्थिति बेहतर होती है और परिचालन लागत नियंत्रित रहती है, तो आलोक इंडस्ट्रीज धीरे-धीरे मजबूत वापसी कर सकती है।

  • मुनाफा घटा लेकिन कारोबार में जबरदस्त तेजी, Hind Rectifiers की ऑर्डर बुक ₹845 करोड़ के पार

    मुनाफा घटा लेकिन कारोबार में जबरदस्त तेजी, Hind Rectifiers की ऑर्डर बुक ₹845 करोड़ के पार

    नई दिल्ली ।  शेयर बाजार में निवेशकों के बीच चर्चित कंपनी Hind Rectifiers एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल की हिस्सेदारी वाली इस कंपनी ने अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी का मुनाफा भले ही कमजोर रहा हो, लेकिन कारोबार की रफ्तार ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कंपनी के रेवेन्यू में सालाना आधार पर 51 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इसकी ऑर्डर बुक भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्र में इस शेयर की चाल पर बनी हुई है।

    ताजा वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में लगभग 55 प्रतिशत घटकर 4.51 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी ने करीब 9.99 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। हालांकि मुनाफे में यह गिरावट बाजार के लिए चिंता का विषय बनी, लेकिन दूसरी ओर कंपनी के कारोबार में आई तेज वृद्धि ने स्थिति को संतुलित किया। चौथी तिमाही के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 279.8 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 185.1 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है।

    कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन में भी दबाव देखने को मिला। EBITDA में लगभग 58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 8.42 करोड़ रुपये रह गया। इसके साथ ही EBITDA मार्जिन भी घटकर 3 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 10.8 प्रतिशत था। विशेषज्ञ मानते हैं कि लागत बढ़ने और कुछ परिचालन दबावों के कारण कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई है, लेकिन मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ते कारोबार से भविष्य की संभावनाएं अभी भी सकारात्मक दिखाई दे रही हैं।

    Hind Rectifiers ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक उसकी ऑर्डर बुक बढ़कर 845.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो कंपनी के लिए एक बड़ा उपलब्धि स्तर माना जा रहा है। कंपनी का कहना है कि रेलवे सेक्टर में तेजी से बढ़ रहे निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विस्तार ने ऑर्डर बुक को मजबूती दी है। इसके अलावा सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़े क्षेत्रों में किए जा रहे निवेश का भी कंपनी को सीधा फायदा मिल रहा है। यही वजह है कि बाजार में भविष्य को लेकर कंपनी के प्रति सकारात्मक उम्मीदें बनी हुई हैं।

    कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड का भी ऐलान किया है। बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर 1.40 रुपये के डिविडेंड की सिफारिश की है। यह फैसला निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि कमजोर मुनाफे के बावजूद कंपनी ने शेयरधारकों को रिटर्न देने का भरोसा बनाए रखा है।

    बाजार में इस कंपनी को लेकर एक और बड़ी वजह चर्चा में है और वह है दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल की हिस्सेदारी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक उनके पास कंपनी में 1.45 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जो लगभग 5 लाख शेयरों के बराबर है। निवेशकों का मानना है कि किसी अनुभवी निवेशक की मौजूदगी अक्सर कंपनी के भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ाती है। अब आने वाले समय में बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ते कारोबार के दम पर कंपनी अपने मुनाफे को फिर से मजबूत कर पाती है या नहीं।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की बड़ी कंपनी को झटका, घटती कमाई और कमजोर मार्जिन से शेयर टूटा

    इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की बड़ी कंपनी को झटका, घटती कमाई और कमजोर मार्जिन से शेयर टूटा

    नई दिल्ली ।  इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर की प्रमुख कंपनी KEC International के हालिया तिमाही नतीजों ने बाजार और निवेशकों दोनों को चौंका दिया है। मजबूत ऑर्डर बुक और बड़े प्रोजेक्ट्स होने के बावजूद कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया, जिसके चलते शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक पर दबाव साफ दिखाई दिया। चौथी तिमाही के आंकड़ों में मुनाफे, रेवेन्यू और परिचालन आय में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी को बढ़ती लागत, प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में चुनौतियों और मार्जिन दबाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है, जिसका असर सीधे वित्तीय नतीजों पर दिखाई दिया।

    तिमाही रिपोर्ट के अनुसार कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर करीब 28 प्रतिशत घटकर 193 करोड़ रुपए रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा कहीं अधिक मजबूत था। कंपनी के कुल रेवेन्यू में भी गिरावट दर्ज की गई और परिचालन प्रदर्शन पर दबाव साफ दिखाई दिया। इसके साथ ही EBITDA में भी उल्लेखनीय कमी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिलता है कि लागत नियंत्रण और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। EBITDA मार्जिन में आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया, क्योंकि यह किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी की परिचालन क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

    कमजोर नतीजों का असर कंपनी के शेयर पर भी तुरंत दिखाई दिया और बाजार में स्टॉक दबाव में आ गया। बीते कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयर में गिरावट दर्ज की गई और यह अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों में स्टॉक में लगातार कमजोरी देखी गई है, जिससे अल्पकालिक निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई है। हालांकि कंपनी का बाजार पूंजीकरण अभी भी मजबूत बना हुआ है, लेकिन मौजूदा तिमाही के प्रदर्शन ने निवेशकों की उम्मीदों को झटका दिया है।

    इसके बावजूद कंपनी के पास मौजूद मजबूत ऑर्डर बुक और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। पावर ट्रांसमिशन, रेलवे, सिविल कंस्ट्रक्शन और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में कंपनी की मजबूत मौजूदगी आने वाले समय में ग्रोथ को दोबारा गति दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी आने वाली तिमाहियों में प्रोजेक्ट्स के निष्पादन में सुधार करती है और कच्चे माल की लागत स्थिर रहती है, तो उसकी लाभप्रदता में सुधार संभव है।

    सरकार की ओर से लगातार बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणाएं भी कंपनी के लिए दीर्घकालिक अवसर के रूप में देखी जा रही हैं। ऐसे में बाजार की मौजूदा कमजोरी के बावजूद लंबी अवधि में कंपनी के प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। फिलहाल निवेशकों की नजर आने वाली तिमाहियों में कंपनी के परिचालन सुधार और मार्जिन रिकवरी पर बनी रहेगी, जो आगे स्टॉक की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • ग्लैमर और खूबसूरती का परफेक्ट कॉम्बिनेशन हैं शरवरी वाघ, हर लुक बना रहा सुर्खियां

    ग्लैमर और खूबसूरती का परफेक्ट कॉम्बिनेशन हैं शरवरी वाघ, हर लुक बना रहा सुर्खियां

    नई दिल्ली ।  बॉलीवुड की उभरती हुई अभिनेत्री शरवरी वाघ इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को लेकर लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। अपनी दमदार एक्टिंग के साथ-साथ शरवरी अपने ग्लैमरस और स्टाइलिश अंदाज के कारण भी फैंस के बीच खास पहचान बना चुकी हैं। सोशल मीडिया से लेकर फैशन इवेंट्स तक, उनका हर लुक लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। उनकी तस्वीरें सामने आते ही इंटरनेट पर तेजी से वायरल होने लगती हैं और फैंस उनकी खूबसूरती और फैशन सेंस की जमकर तारीफ करते नजर आते हैं।

    फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में शरवरी एक अलग और दिलचस्प किरदार में दिखाई देने वाली हैं। इस फिल्म में वह मशहूर पंजाबी स्टार दिलजीत दोसांझ के साथ स्क्रीन शेयर करती नजर आएंगी। दोनों कलाकारों की जोड़ी को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि फिल्म में रोमांस और इमोशन्स का खास मिश्रण देखने को मिलेगा, जिसमें शरवरी अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का दिल जीतने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    शरवरी वाघ का फैशन सेंस हमेशा चर्चा में रहता है। वह हर आउटफिट को बेहद कॉन्फिडेंस और ग्रेस के साथ कैरी करती हैं। चाहे रेड कार्पेट का लुक हो, फोटोशूट की स्टाइलिंग हो या फिर कैजुअल फैशन, उनका हर अंदाज बेहद आकर्षक नजर आता है। हाल ही में सामने आई उनकी कई तस्वीरों में उन्होंने अलग-अलग ग्लैमरस ड्रेस में अपने स्टाइल का जलवा बिखेरा। किसी तस्वीर में वह शिमरी बॉडीकॉन ड्रेस में नजर आईं तो कहीं मिनी ड्रेस में उनका बोल्ड और स्टाइलिश अंदाज देखने को मिला।

    उनके फैंस खासतौर पर इस बात को पसंद करते हैं कि शरवरी हर लुक में बेहद नेचुरल और कॉन्फिडेंट दिखाई देती हैं। उनकी मुस्कान, एक्सप्रेशन और कैमरे के सामने पोज देने का अंदाज उन्हें बाकी अभिनेत्रियों से अलग बनाता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें कुछ ही समय में वायरल हो जाती हैं और लाखों लाइक्स बटोरती हैं।

    फिल्मी करियर की बात करें तो शरवरी ने कम समय में ही अपनी अलग पहचान बना ली है। वह केवल ग्लैमर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अभिनय के जरिए भी लगातार खुद को साबित कर रही हैं। दर्शकों को उनसे आने वाले समय में कई बड़े और दमदार प्रोजेक्ट्स की उम्मीद है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और फैशन स्टाइल युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

    इन दिनों शरवरी का नाम बॉलीवुड की उन अभिनेत्रियों में शामिल किया जा रहा है जो अपनी खूबसूरती, स्टाइल और अभिनय—तीनों के दम पर इंडस्ट्री में मजबूत जगह बना रही हैं। अपकमिंग फिल्म को लेकर बढ़ती चर्चा और उनके लगातार वायरल हो रहे ग्लैमरस लुक्स ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में शरवरी वाघ मनोरंजन जगत की बड़ी स्टार्स में अपनी जगह बना सकती हैं।