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  • नोएडा एक्सप्रेसवे हादसा: कार की टक्कर से चार घायल, यूट्यूबर मृदुल तिवारी ने पहुंचाया अस्पताल

    नोएडा एक्सप्रेसवे हादसा: कार की टक्कर से चार घायल, यूट्यूबर मृदुल तिवारी ने पहुंचाया अस्पताल

    नई दिल्ली ।  नोएडा में शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने लोगों को झकझोर दिया जब एक तेज रफ्तार कार ने सड़क पार कर रहे एक ही परिवार के चार लोगों को जोरदार टक्कर मार दी। यह घटना सेक्टर-148 के पास नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर हुई, जहां तेज गति से आ रही स्विफ्ट डिजायर कार ने अचानक नियंत्रण खोते हुए राहगीरों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी तेज थी कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े।

    घटना के समय वहां से गुजर रहे यूट्यूबर मृदुल तिवारी ने बिना देर किए अपनी गाड़ी रोकी और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घायलों की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने चारों घायलों को अपनी गाड़ी में बैठाया और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। समय पर मिली इस मदद की वजह से घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सकी, जिससे उनकी हालत बिगड़ने से बच गई। इस पूरी घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके बाद मृदुल तिवारी की त्वरित और मानवीय प्रतिक्रिया की व्यापक सराहना हो रही है।

    हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही ट्रैफिक पुलिस और नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल कार को अपने कब्जे में ले लिया है और चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि वाहन तेज गति से चलाया जा रहा था, जिसके कारण चालक नियंत्रण नहीं रख सका और यह दुर्घटना हो गई।

    घायलों को इलाज के लिए कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों के अनुसार सभी की हालत फिलहाल स्थिर है और वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। हालांकि उन्हें हल्की चोटें आई हैं, लेकिन समय पर उपचार मिलने से उनकी स्थिति गंभीर नहीं बनी।

    इस घटना के कारण कुछ समय के लिए एक्सप्रेसवे पर यातायात भी प्रभावित रहा, क्योंकि दुर्घटना के बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई थी और राहत कार्यों में समय लगा। बाद में पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए ट्रैफिक को सामान्य कर दिया।

    यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार वाहनों और सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी के खतरों को सामने लाता है। विशेषज्ञों के अनुसार सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। वहीं इस घटना में मृदुल तिवारी की त्वरित मानवीय मदद ने यह भी दिखाया कि सही समय पर की गई छोटी कोशिश किसी की जान बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

  • रफ्तार के दम पर आसमान पर राज! दुनिया के सबसे तेज लड़ाकू विमानों में रूस का दबदबा, अमेरिका भी पीछे

    रफ्तार के दम पर आसमान पर राज! दुनिया के सबसे तेज लड़ाकू विमानों में रूस का दबदबा, अमेरिका भी पीछे



    नई दिल्ली। हाइपरस्पीड फाइटर जेट्स की दुनिया में रूस ने अपनी अलग पहचान बनाई है। MiG-25 और MiG-31 जैसे विमान आज भी दुनिया के सबसे तेज ऑपरेशनल फाइटर जेट्स माने जाते हैं, जबकि अमेरिका ने F-22 और F-15 जैसे एडवांस विमान बनाकर तकनीक और स्टील्थ में बढ़त हासिल की है।

    आधुनिक हवाई युद्ध अब सिर्फ मिसाइलों और स्टील्थ तकनीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रफ्तार भी जीत का बड़ा हथियार बन चुकी है। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी सैन्य ताकतें ऐसे लड़ाकू विमान तैयार कर रही हैं, जो कुछ ही मिनटों में हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर सकें। सबसे तेज फाइटर जेट्स की सूची में रूस का दबदबा साफ दिखाई देता है, क्योंकि सोवियत दौर से ही वहां लंबी दूरी और तेज प्रतिक्रिया वाले इंटरसेप्टर विमान विकसित किए जाते रहे हैं।

    इस सूची में सबसे ऊपर रूस का Mikoyan-Gurevich MiG-25 फॉक्सबैट आता है, जिसकी अधिकतम रफ्तार Mach 3.2 यानी करीब 3524 किमी प्रति घंटा है। इसे खास तौर पर अमेरिकी जासूसी विमानों और बमवर्षकों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया था। इसकी रफ्तार इतनी खतरनाक थी कि अमेरिका को जवाब में F-15 Eagle विकसित करना पड़ा। हालांकि MiG-25 की कमजोरी यह रही कि कम ऊंचाई पर इसकी क्षमता सीमित थी और डॉगफाइट में यह उतना प्रभावी नहीं माना गया।

    दूसरे स्थान पर रूस का ही MiG-31 फॉक्सहाउंड है, जिसकी स्पीड Mach 2.83 यानी करीब 3000 किमी प्रति घंटा है। यह विमान सिर्फ इंटरसेप्टर नहीं बल्कि लंबी दूरी की निगरानी और मिसाइल हमलों के लिए भी जाना जाता है। इसके बाद अमेरिका का F-15 Eagle आता है, जिसकी अधिकतम रफ्तार Mach 2.5 है। F-15 को दुनिया के सबसे सफल एयर सुपीरियरिटी फाइटर जेट्स में गिना जाता है और इसका युद्ध रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है।

    रूस का Sukhoi Su-27 और MiG-23 भी इस सूची में शामिल हैं। Su-27 को लंबी दूरी के एयर सुपीरियरिटी मिशन के लिए तैयार किया गया था, जबकि MiG-23 को कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों वाले एयरबेस से ऑपरेट करने के लिए डिजाइन किया गया। दोनों विमान अपनी स्पीड और ताकत के लिए मशहूर रहे हैं।

    अमेरिका का F-14 Tomcat भी दुनिया के सबसे तेज लड़ाकू विमानों में शामिल है। यह दुनिया का पहला चौथी पीढ़ी का फाइटर जेट माना जाता है, जिसने वेरिएबल-स्वीप विंग तकनीक के जरिए एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशन में नई क्रांति ला दी थी। इसके अलावा पांचवीं पीढ़ी का अमेरिकी F-22 Raptor अपनी सुपरक्रूज क्षमता के लिए जाना जाता है, जो बिना आफ्टरबर्नर के भी सुपरसोनिक रफ्तार बनाए रख सकता है।

    इजरायल का IAI Kfir और अमेरिका का F-4 Phantom II भी इस सूची में अपनी जगह बनाए हुए हैं। F-4 Phantom II शीत युद्ध के दौर का बेहद भरोसेमंद फाइटर जेट रहा, जबकि Kfir को Mirage-5 प्लेटफॉर्म पर विकसित कर नई ताकत दी गई।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस में तेज रफ्तार वाले फाइटर जेट्स के विकास की सबसे बड़ी वजह उसका विशाल भूभाग रहा है। वहां हर क्षेत्र में एयरबेस बनाना आसान नहीं था, इसलिए ऐसे विमान तैयार किए गए जो बेहद कम समय में लंबी दूरी तय कर सकें। हालांकि आज के दौर में सिर्फ स्पीड ही सब कुछ नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, स्टील्थ तकनीक, एयर-टू-एयर मिसाइल और नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता भी उतनी ही अहम हो चुकी है। फिर भी दुनिया के सबसे तेज लड़ाकू विमानों की बात हो तो रूस का नाम आज भी सबसे ऊपर दिखाई देता है।

  • कीमती सामान नहीं मिला तो जूते चुराकर भागे चोर, CCTV में कैद

    कीमती सामान नहीं मिला तो जूते चुराकर भागे चोर, CCTV में कैद


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र के खतौरा गांव में चोरी की एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां शनिवार देर रात 7 से 8 बदमाश चोरी की नीयत से एक घर में घुसे, लेकिन जब उन्हें कोई कीमती सामान नहीं मिला तो वे घर से दो जोड़ी जूते चुराकर फरार हो गए। पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी है।

    जानकारी के अनुसार, खतौरा गांव निवासी मोहर सिंह कुशवाह के घर में शनिवार रात करीब 3:38 बजे बदमाश बाउंड्री फांदकर अंदर दाखिल हुए। सीसीटीवी फुटेज में कई संदिग्ध घर के आसपास घूमते और छत पर चढ़ने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि बदमाश करीब 10 मिनट तक घर के अंदर और बाहर मंडराते रहे। कुछ आरोपियों के पास हथियार होने की भी आशंका जताई गई है।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब सुबह करीब 4 बजे मोहर सिंह कुशवाह की नींद खुली। उन्होंने घर में लगे एलसीडी स्क्रीन पर देखा कि कुछ सीसीटीवी कैमरों के एंगल बदले हुए हैं। शक होने पर जब रिकॉर्डिंग चेक की गई तो घर में कई बदमाश घूमते नजर आए।

    परिवार के अनुसार, चोरों ने घर में काफी तलाश की, लेकिन उन्हें कोई नकदी या कीमती सामान हाथ नहीं लगा। आखिर में बदमाश किरायेदारों के दो जोड़ी जूते उठाकर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और लोग रात की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में रात के समय संदिग्ध गतिविधियां बढ़ रही हैं और पुलिस गश्त को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी है। यह घटना भले ही सुनने में अजीब लगे, लेकिन इससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि अगर बदमाश हथियार लेकर घरों में घुस रहे हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

  • सरकार का बड़ा फैसला: शराब टैक्स व्यवस्था बदली, उपभोक्ताओं को मिल सकता है फायदा

    सरकार का बड़ा फैसला: शराब टैक्स व्यवस्था बदली, उपभोक्ताओं को मिल सकता है फायदा

    नई दिल्ली ।  कर्नाटक सरकार ने शराब पर टैक्स लगाने की व्यवस्था में एक बड़ा और संरचनात्मक बदलाव करते हुए राज्य की आबकारी नीति को नए स्वरूप में ढाल दिया है। इस नई नीति के तहत अब शराब पर टैक्स उसकी बोतल की कीमत के आधार पर नहीं, बल्कि उसमें मौजूद अल्कोहल की मात्रा के आधार पर तय किया जाएगा। इस प्रणाली को Alcohol-in-Beverage यानी AIB मॉडल कहा जाता है, जिसे दुनिया के कई देशों में एक पारदर्शी और वैज्ञानिक टैक्स व्यवस्था के रूप में अपनाया जाता है।

    सरकार के इस फैसले के बाद कर्नाटक देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने इस तरह के मॉडल को व्यापक रूप से लागू किया है। नई व्यवस्था को वर्ष 2026-27 के बजट प्रावधानों के तहत लागू किया गया है, जिसके बाद शराब की कीमत तय करने का पूरा ढांचा बदल गया है। अब तक जहां शराब की कीमतें कई स्लैब और सरकारी नियंत्रण के आधार पर तय होती थीं, वहीं अब यह प्रक्रिया अधिक बाजार-आधारित और सरल हो गई है।

    नई नीति के अनुसार इंडियन मेड लिकर की कैटेगरी में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जहां कई स्लैब मौजूद थे, उन्हें घटाकर एक सीमित संख्या में लाया गया है, जिससे टैक्स संरचना को समझना और लागू करना दोनों आसान हो गया है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से न केवल सिस्टम अधिक पारदर्शी बनेगा, बल्कि कर निर्धारण में अनावश्यक जटिलता भी समाप्त होगी।

    आबकारी विभाग के अनुसार इस नई प्रणाली का उद्देश्य शराब की कीमतों को अधिक तर्कसंगत बनाना है, जिससे उपभोक्ताओं को वास्तविक मूल्य निर्धारण का लाभ मिल सके। इसके साथ ही सरकार का यह भी मानना है कि इस मॉडल से पड़ोसी राज्यों के बीच कीमतों का अंतर कम होगा, जिससे अवैध या सीमा पार खरीदारी पर भी अंकुश लग सकता है।

    नई नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि अब कंपनियों को अपने उत्पादों की कीमत और श्रेणी तय करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। हालांकि यह स्वतंत्रता बाजार की मांग और गुणवत्ता के आधार पर नियंत्रित ढांचे के भीतर रहेगी। इससे उद्योग को लचीलापन मिलेगा और प्रतिस्पर्धा भी अधिक संतुलित होने की संभावना है।

    सरकार का दावा है कि यह मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे आधुनिक टैक्सिंग सिस्टम में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें उत्पाद की वास्तविक संरचना को आधार बनाकर टैक्स लगाया जाता है। इससे न केवल राजस्व प्रणाली अधिक वैज्ञानिक बनती है, बल्कि उपभोक्ता हितों को भी बेहतर तरीके से संतुलित किया जा सकता है।

    हालांकि इस बदलाव को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वास्तव में इससे शराब की कीमतों में कमी आएगी या कंपनियां नई संरचना के तहत अपने मूल्य निर्धारण को किसी अन्य तरीके से संतुलित करेंगी। आने वाले समय में बाजार की प्रतिक्रिया और उपभोक्ता व्यवहार यह तय करेगा कि यह नीति कितनी प्रभावी साबित होती है। फिलहाल इस बदलाव ने राज्य की आबकारी नीति को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

  • केरल में नई सरकार की तस्वीर साफ, सतीशन कैबिनेट में चेन्निथला से लेकर युवा चेहरों तक पर बड़ा दांव

    केरल में नई सरकार की तस्वीर साफ, सतीशन कैबिनेट में चेन्निथला से लेकर युवा चेहरों तक पर बड़ा दांव


    नई दिल्ली ।  केरल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक हलचल अब नई सरकार के गठन पर केंद्रित हो गई है, जहां यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की भारी जीत के बाद वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में बनने वाली नई कैबिनेट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों के मजबूत जनादेश के साथ यूडीएफ ने जहां सत्ता में वापसी की है, वहीं अब मंत्रिमंडल में किसे जगह मिलेगी, इस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं। मुख्यमंत्री पद के लिए मनोनीत वी.डी. सतीशन और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठकों के बाद मंत्रिमंडल की रूपरेखा लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, और माना जा रहा है कि विभागों के बंटवारे के साथ नामों की आधिकारिक घोषणा जल्द हो सकती है।

    सूत्रों के अनुसार, नई सरकार में अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि मंत्रिमंडल न केवल प्रशासनिक रूप से मजबूत हो, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करे। इसी रणनीति के तहत क्षेत्रीय संतुलन को भी प्रमुखता दी गई है, जिसमें त्रावणकोर, कोच्चि और मालाबार क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। इसके साथ ही समुदायिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नायर, ईझवा, ईसाई और मुस्लिम समुदायों के बीच भी उचित भागीदारी देने की योजना तैयार की गई है, ताकि सरकार को व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता मिल सके।

    सबसे चर्चित नामों में वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है, जिन्हें गृह या वित्त जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी मिल सकती है। पार्टी के भीतर उन्हें एक अनुभवी और भरोसेमंद नेता के रूप में देखा जाता है, और ऐसे में उनकी भूमिका नई सरकार में काफी अहम मानी जा रही है। इसके अलावा सहयोगी दलों में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को उनके मजबूत प्रदर्शन के आधार पर महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए जाने की संभावना है, जबकि केरल कांग्रेस के जोसेफ गुट को भी सरकार में सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है।

    नई कैबिनेट में युवाओं और पहली बार मंत्री बनने वाले चेहरों को भी शामिल किए जाने की तैयारी है, जिससे सरकार में नई ऊर्जा का संचार हो सके। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आने वाले वर्षों में विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए युवा नेतृत्व की भूमिका अहम होगी। इसके साथ ही महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है और दो महिला विधायकों को कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे सरकार का सामाजिक आधार और व्यापक हो सके।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल न केवल सत्ता संतुलन का प्रतीक होगा, बल्कि केरल की विकास यात्रा को नई दिशा देने का भी प्रयास करेगा। मुख्यमंत्री सतीशन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार पूरी तरह पारदर्शिता, जवाबदेही और विकास के एजेंडे पर काम करेगी। शपथ ग्रहण समारोह से पहले राज्य में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरम है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नई सरकार अपने पहले फैसलों से जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।

  • सनघटा डैम में कार्रवाई: बालाजी क्रेशर सील, भारी मात्रा में गिट्टी जब्त

    सनघटा डैम में कार्रवाई: बालाजी क्रेशर सील, भारी मात्रा में गिट्टी जब्त


    नई दिल्ली। शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में निर्माणाधीन सनघटा डैम परियोजना में गुणवत्ता को लेकर सामने आई लापरवाही पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर अर्पित वर्मा के औचक निरीक्षण के बाद खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बालाजी क्रेशर को सील कर दिया। मौके से करीब 4 हजार घनमीटर गिट्टी के साथ एक पोकलेन और एक हाइड्रा मशीन भी जब्त की गई है।

    दरअसल, शनिवार को कलेक्टर अर्पित वर्मा ने सनघटा डैम, निर्माणाधीन पंप स्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन के कार्यों का अचानक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान निर्माण सामग्री की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई। कई जगहों पर सामग्री की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके निर्देश के बाद खनिज विभाग की टीम हरकत में आई और खनिज निरीक्षक सोनू श्रीवास के नेतृत्व में मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की गई।

    खनिज विभाग ने गिट्टी निर्माण के लिए संचालित बालाजी क्रेशर को सील कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अगली अनुमति तक क्रेशर बंद रहेगा। इसके अलावा मौके पर मौजूद लगभग 4000 घनमीटर गिट्टी को जब्त किया गया। कार्रवाई के दौरान एक पोकलेन मशीन और एक हाइड्रा मशीन भी जब्त की गई, जिनका उपयोग निर्माण कार्यों में किया जा रहा था।

    प्रशासन की इस कार्रवाई से निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में चल रही अन्य परियोजनाओं की भी गुणवत्ता जांच की जाएगी और जहां भी अनियमितता मिलेगी वहां सख्त कार्रवाई होगी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। अब प्रशासन की सख्ती से उम्मीद जगी है कि विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब सरकारी परियोजनाओं में लापरवाही और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल पर प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

  • जुनैद सुल्तानी और अशद साबरी के बीच सूफियाना मुकाबला, श्रद्धालुओं की भीड़

    जुनैद सुल्तानी और अशद साबरी के बीच सूफियाना मुकाबला, श्रद्धालुओं की भीड़


    सागर । सागर में सर्वधर्म कौमी एकता और भाईचारे के प्रतीक माने जाने वाले पीली कोठी वाले बाबा की दरगाह पर इन दिनों आस्था और सूफियाना रंग का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। यहां आयोजित हो रहे कुतुब हजरत सैयद दाऊद मक्की चिश्ती साबरी के 76वें सालाना उर्स के दूसरे दिन शनिवार रात दरगाह परिसर कव्वालियों और गजलों की गूंज से सराबोर रहा। दूर-दूर से पहुंचे अकीदतमंदों ने बाबा की दरगाह पर मत्था टेककर अमन, चैन और खुशहाली की दुआ मांगी।

    उर्स के दूसरे दिन आयोजित कव्वाली कार्यक्रम में मशहूर फनकार जुनैद सुल्तानी कव्वाल पार्टी और अशद निशहद साबरी कव्वाल पार्टी के बीच शानदार मुकाबला हुआ। दोनों कलाकारों की सूफियाना प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। कव्वालियों की धुन पर लोग देर रात तक झूमते रहे और दरगाह परिसर में उत्साह का माहौल बना रहा।

    कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और सम्मान के साथ हुई। इसके बाद नाते पाक, सलाम और फातिहा पेश की गई। दरगाह पर पहुंचे लोगों ने देश की एकता, अखंडता और भाईचारे के लिए दुआ मांगी। आयोजन के दौरान तबर्रुक भी वितरित किया गया।

    उर्स कमेटी के अध्यक्ष अरशद अली ने बताया कि तीन दिवसीय उर्स का समापन रविवार को होगा। अंतिम दिन हिंदुस्तान के मशहूर फनकार चांद कादरी कव्वाल पार्टी और शब्बीर सदाकत साबरी कव्वाल पार्टी के बीच कव्वाली मुकाबला आयोजित किया जाएगा। इसी कार्यक्रम के साथ उर्स का औपचारिक समापन होगा।

    उर्स में शहर सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। दरगाह परिसर में लगे मेले में भी लोगों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। आयोजन में उर्स कमेटी के सदस्य और स्थानीय लोग लगातार व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं।

    यह उर्स केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग एक साथ शामिल होकर इंसानियत और मोहब्बत का संदेश दे रहे हैं।

  • ब्रिटेन में सियासी भूचाल! PM कीर स्टारमर के इस्तीफे की अटकलें तेज, लेबर पार्टी में बढ़ी अंदरूनी कलह

    ब्रिटेन में सियासी भूचाल! PM कीर स्टारमर के इस्तीफे की अटकलें तेज, लेबर पार्टी में बढ़ी अंदरूनी कलह



    नई दिल्ली। यूनाइटेड किंगडम की राजनीति में इस समय बड़ा राजनीतिक संकट देखने को मिल रहा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर को लेकर इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष, गिरती लोकप्रियता और लगातार विवादों के बीच स्टारमर ने अपने करीबी सहयोगियों से संकेत दिए हैं कि वह सही समय आने पर पद छोड़ने पर विचार कर सकते हैं।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के अंदर यह माना जा रहा है कि मौजूदा हालात लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि स्टारमर सम्मानजनक तरीके से और अपनी शर्तों पर पद छोड़ना चाहते हैं।

    लेबर सरकार पर कई मोर्चों से दबाव
    ब्रिटेन की लेबर सरकार हाल के महीनों में कई विवादों में घिरी रही है। पार्टी के भीतर नियुक्तियों को लेकर सवाल उठे, जबकि कुछ नेताओं के विवादित नामों से जुड़े आरोपों ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा स्थानीय चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन ने भी नेतृत्व पर दबाव बढ़ा दिया है।

    स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पूर्व हेल्थ सेक्रेटरी वेस स्ट्रीटिंग ने इस्तीफा देकर खुलकर नेतृत्व को चुनौती देने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में लेबर पार्टी में नेतृत्व की दौड़ होती है तो वह प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि स्टारमर को अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट टाइमलाइन तय करनी चाहिए।



    लोकप्रियता में भारी गिरावट
    यूगव यूके के सर्वे के मुताबिक करीब 69 प्रतिशत ब्रिटिश नागरिकों की राय कीर स्टारमर को लेकर नकारात्मक है। रिपोर्ट्स में उन्हें हाल के वर्षों के सबसे कम लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में गिना जा रहा है। कई राजनीतिक विश्लेषक उनकी तुलना पूर्व प्रधानमंत्री लिज ट्रस से भी कर रहे हैं, जिनका कार्यकाल बेहद छोटा रहा था।

    लेबर पार्टी के अंदर भी चिंता बढ़ती जा रही है कि अगर लोकप्रियता में गिरावट जारी रही तो भविष्य के चुनावों में पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है। साथ ही दक्षिणपंथी नेता निगेल फराज और उनकी पार्टी Reform UK को इसका फायदा मिलने की आशंका जताई जा रही है।

    इस्तीफे की अटकलों पर स्टारमर का जवाब
    बढ़ती अटकलों के बीच प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सीधे इस्तीफे पर टिप्पणी नहीं की, लेकिन देश में बढ़ते सामाजिक और राजनीतिक तनाव पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन नफरत और विभाजन फैलाने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    स्टारमर ने यह भी कहा कि सरकार कट्टरपंथी और उग्र विचारों को बढ़ावा देने वाले तत्वों पर नजर रख रही है और ऐसे लोगों को ब्रिटेन के मूल्यों के खिलाफ बताया।

  • NTA भंग करने की मांग तेज, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन

    NTA भंग करने की मांग तेज, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन

    रीवा। NEET 2026 पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में उठ रहे विरोध के बीच रीवा में भी सियासी और छात्र संगठनों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने 19 मई को डिप्टी सीएम आवास के बाहर बड़ा प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि छात्रों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी के खिलाफ यह आंदोलन किया जाएगा।

    रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में NSUI रीवा जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता घंटी और शंख बजाकर विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    NSUI ने “NEET 2026 न्याय अभियान” के तहत कई अहम मांगें रखी हैं। संगठन ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तत्काल भंग करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे और पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित छात्रों के लिए मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य सहायता और फ्री लीगल एड उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।

    संगठन का कहना है कि यदि दोबारा परीक्षा आयोजित की जाती है तो छात्रों को मुफ्त यात्रा और ठहरने की सुविधा भी सरकार को उपलब्ध करानी चाहिए। NSUI नेताओं ने कहा कि केवल री-एग्जाम कराना समाधान नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

    प्रेस वार्ता में नेताओं ने 2015 के AIPMT पेपर लीक, 2024 और अब 2026 के NEET विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि बार-बार सामने आ रहे घोटाले शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने कोटा, सीकर और जयपुर जैसे बड़े कोचिंग हब की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई।

    इधर, NSUI के प्रदर्शन ऐलान से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी रीवा में मशाल जुलूस निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    रीवा में बढ़ते विरोध प्रदर्शन से साफ है कि NEET पेपर लीक मामला अब सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक और जनआंदोलन बनता जा रहा है।

  • जनरल द्विवेदी के बयान से बौखलाया पाकिस्तान, परमाणु ताकत का जिक्र कर दी बड़ी चेतावनी

    जनरल द्विवेदी के बयान से बौखलाया पाकिस्तान, परमाणु ताकत का जिक्र कर दी बड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की पाकिस्तान पर की गई सख्त टिप्पणी के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तान की सेना ने भारतीय आर्मी चीफ के बयान को “उकसावे वाला” बताते हुए परमाणु ताकत का जिक्र कर अप्रत्यक्ष चेतावनी दी है।

    दरअसल, नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर निशाना साधते हुए कहा था कि पाकिस्तान को तय करना होगा कि वह “भूगोल का हिस्सा बना रहना चाहता है या इतिहास बनना चाहता है।” उनका यह बयान तेजी से चर्चा में आ गया।

    भारतीय सेना प्रमुख की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान सेना की मीडिया विंग ISPR ने बयान जारी किया। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि पाकिस्तान एक “घोषित परमाणु शक्ति” है और दक्षिण एशिया के भूगोल व इतिहास का स्थायी हिस्सा रहेगा।

    ISPR ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाले हैं और दक्षिण एशिया को संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं। बयान में यह भी कहा गया कि अगर पाकिस्तान पर हमला हुआ तो उसके परिणाम “व्यापक और पारस्परिक” होंगे।

    पाकिस्तानी सेना ने भारत पर “सभ्यतागत श्रेष्ठता” दिखाने और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने का आरोप भी लगाया। साथ ही दावा किया कि जिम्मेदार परमाणु देशों को संयम और रणनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहिए।

    हालांकि भारत की ओर से लंबे समय से यह कहा जाता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देता रहा है और सीमा पार आतंकी गतिविधियां दोनों देशों के रिश्तों में सबसे बड़ी बाधा हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में बढ़ी बयानबाजी और सुरक्षा मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव फिर से तेज होता दिखाई दे रहा है।