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  • लाल किले से मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का नाम न लेने पर आरिफ मसूद ने जताई नाराजगी, PM मोदी से माफी की मांग

    लाल किले से मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का नाम न लेने पर आरिफ मसूद ने जताई नाराजगी, PM मोदी से माफी की मांग


    भोपाल । स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी और देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने प्रधानमंत्री के भाषण पर ऐतराज जताते हुए मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का मुद्दा उठाया है। मसूद ने आरोप लगाया कि आजादी के संघर्ष की चर्चा के दौरान मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने इसे दुखद बताते हुए प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है। प्रधानमंत्री के भाषण में स्वतंत्रता सेनानियों को व्यापक रूप से श्रद्धांजलि दी गई थी और इसके साथ ही देश के विकास तथा राष्ट्र निर्माण के कई मुद्दों पर जोर दिया गया।

    आरिफ मसूद का कहना है कि भारत की आजादी किसी एक समुदाय की लड़ाई नहीं थी बल्कि इसमें देश के अलग अलग वर्गों और समुदायों के लोगों ने योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन से देश को मुक्त कराने के संघर्ष में अनेक लोगों ने अपना जीवन और सर्वस्व कुर्बान किया। ऐसे में स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा करते समय मुस्लिम सेनानियों के योगदान को भी सामने रखना जरूरी है। मसूद ने अपने ज्ञापन में कहा है कि इतिहास के अलग अलग दौर में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों और उलेमा ने भी अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया था।

    मसूद ने अपने तर्क के समर्थन में देश के कई ऐतिहासिक स्थलों का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री यदि नेशनल वॉर मेमोरियल और अंडमान निकोबार की सेलुलर जेल जैसे स्थानों पर दर्ज नामों को देखें तो वहां विभिन्न समुदायों के स्वतंत्रता सेनानियों की मौजूदगी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास व्यापक है और इसे किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।

    कांग्रेस विधायक ने अपने ज्ञापन में 18वीं और 19वीं सदी के कई आंदोलनों का उल्लेख भी किया है। उन्होंने बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंदमठ में वर्णित फकीर और संन्यासी विद्रोह का उदाहरण देते हुए मजनू शाह फकीर और उनके साथियों का नाम लिया। मसूद के मुताबिक मजनू शाह के बाद मूसा शाह चिराग अली और नूरुल मोहम्मद जैसे लोगों ने भी इस संघर्ष को आगे बढ़ाया। उन्होंने 1857 के विद्रोह में अहमदुल्ला शाह मदरासी की भूमिका का भी उल्लेख किया और दावा किया कि उन्होंने कई इलाकों में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम किया।

    मसूद ने 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों की कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उस दौर में बड़ी संख्या में लोगों को कठोर दमन का सामना करना पड़ा और मुस्लिम उलेमा समेत कई लोगों ने भी बलिदान दिया। ज्ञापन में उन्होंने विभिन्न ऐतिहासिक पुस्तकों और लेखों का हवाला देते हुए अंग्रेजी शासन के दौरान हुई कार्रवाई का जिक्र किया है। हालांकि ज्ञापन में बताए गए कुछ आंकड़ों और ऐतिहासिक दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है।

    भोपाल में विधायक ने स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरों वाला पोस्टर भी लगाया। उनका कहना है कि आजादी के संघर्ष की पूरी तस्वीर देश के सामने रखी जानी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां यह समझ सकें कि भारत की स्वतंत्रता अनेक लोगों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम थी। मसूद ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को सभी समुदायों के योगदान के साथ देखा जाए।

    मसूद ने अपने ज्ञापन के अंत में कहा कि देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के भाषण में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख नहीं होने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई और इस पर देश से माफी मांगने की मांग की। इस मुद्दे के सामने आने के बाद स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अलग अलग समुदायों की भूमिका और राजनीतिक दलों के बीच इतिहास की व्याख्या को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

  • सिनेमाघरों में मचेगा धमाल टॉक्सिक से लेकर मिर्जापुर द मूवी तक, फैंस को है इन 7 फिल्मों का इंतजार

    सिनेमाघरों में मचेगा धमाल टॉक्सिक से लेकर मिर्जापुर द मूवी तक, फैंस को है इन 7 फिल्मों का इंतजार


    नई दिल्ली ।सिनेमाप्रेमियों के बीच आगामी बड़ी फिल्मों को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। हाल ही में प्रदर्शित फिल्मों को मिले बेहतर प्रतिसाद के बाद अब दर्शक सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली नई फिल्मों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
    इस रुझान को देखते हुए ऑनलाइन मूवी डेटाबेस प्लेटफॉर्म आईएमडीबी ने सबसे ज्यादा प्रतीक्षित फिल्मों की सूची जारी की है, जो यूजर्स के रियल टाइम रुझान और सर्च डेटा पर आधारित है। सूची में पहले स्थान पर कन्नड़ सुपरस्टार यश अभिनीत बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ बनी हुई है। एक्शन क्राइम थ्रिलर शैली की इस फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है।
    इस भव्य प्रोजेक्ट में यश के साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और अक्षय ओबेरॉय जैसे जाने-माने कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। यह फिल्म बड़े पर्दे पर दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए 26 अगस्त को रिलीज होने जा रही है। दूसरे स्थान पर लोकप्रिय वेब सीरीज पर आधारित फीचर फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का दबदबा कायम है।
    4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही इस फिल्म का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, रवि किशन, रसिका दुग्गल, जीतेंद्र कुमार और अभिषेक बनर्जी जैसे दिग्गज कलाकार अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।सूची में तीसरे स्थान पर मलयालम सिनेमा की एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘खलीफा’ शामिल है, जिसे वैशाख ने निर्देशित किया है।
    इस फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन, नील नितिन मुकेश और मोहनलाल मुख्य किरदारों में दिखेंगे। चौथे पायदान पर अक्षय कुमार और सैफ अली खान की थ्रिलर फिल्म ‘हैवान’ है, जिसका निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है। इसमें मोहनलाल, राजपाल यादव और शारिब हाशमी भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं।
    पांचवें स्थान पर तेलुगु भाषा की एक्शन एडवेंचर फिल्म ‘द पैराडाइज’ है, जिसका निर्देशन श्रीकांत ओडेला कर रहे हैं। इस सूची में छठे नंबर पर दुलकर सलमान अभिनीत एक्शन क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘आई एम गेम’ है, जिसका निर्देशन नहास हिदायत ने किया है।वहीं सातवें स्थान पर शिवा निर्वाण द्वारा निर्देशित तेलुगु फिल्म ‘इरुमुडी’ शामिल है।
    फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारतीय सिनेमा और हिंदी सिनेमा का यह अनूठा संगम बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता है। मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों के मल्टीप्लेक्स व एकल सिनेमाघरों में इन फिल्मों के लिए अग्रिम बुकिंग और प्रचार अभियान की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं।
  • दीपिका पादुकोण की डिलीवरी डेट करीब! बेंगलुरु के लिए हुईं रवाना, रणवीर सिंह भी आए छोड़ने

    दीपिका पादुकोण की डिलीवरी डेट करीब! बेंगलुरु के लिए हुईं रवाना, रणवीर सिंह भी आए छोड़ने


    नई दिल्ली । दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों की दस्तक होने वाली है। बॉलीवुड का यह चर्चित कपल अपने दूसरे बच्चे के स्वागत की तैयारी कर रहा है। इसी बीच 15 अगस्त की शाम दीपिका पादुकोण को मुंबई एयरपोर्ट पर देखा गया जहां से वह बेंगलुरु के लिए रवाना हुईं। एयरपोर्ट पर उनका लुक काफी सिंपल और आरामदायक नजर आया। इस दौरान उनका बेबी बंप भी दिखाई दिया। दीपिका की बेंगलुरु रवानगी को लेकर उनके फैंस के बीच भी काफी उत्सुकता देखने को मिल रही है।

    दीपिका और रणवीर ने 19 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया के जरिए अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की खुशखबरी साझा की थी। दोनों ने अपनी बेटी दुआ पादुकोण सिंह की एक प्यारी तस्वीर के जरिए यह जानकारी फैंस तक पहुंचाई थी। तस्वीर में दुआ के हाथ में पॉजिटिव प्रेग्नेंसी टेस्ट दिखाई दिया था। इस घोषणा के बाद से ही फैंस लगातार कपल को बधाइयां दे रहे हैं।

    अब प्रेग्नेंसी के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ दीपिका अपने परिवार के करीब रहना चाहती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वह मुंबई से बेंगलुरु के लिए रवाना हुई हैं जहां उनका परिवार रहता है। एयरपोर्ट पर उन्हें नीले रंग की ओवरसाइज्ड शर्ट और बैगी जींस में देखा गया। उन्होंने सनग्लासेस लगाए हुए थे और हाथ में टोट बैग के साथ व्हाइट स्नीकर्स पहने थे। उनका पूरा लुक बेहद कंफर्टेबल और कैजुअल दिखाई दिया।

    इस दौरान रणवीर सिंह भी दीपिका को एयरपोर्ट छोड़ने पहुंचे। दीपिका जब कार से बाहर निकलीं तो रणवीर कार के भीतर ही बैठे रहे। दोनों की यह झलक फैंस के लिए खास रही क्योंकि अब कपल अपने परिवार को और बड़ा करने की तैयारी में है। दीपिका और रणवीर की बेटी दुआ का जन्म सितंबर 2024 में हुआ था और अब वह जल्द ही बड़ी बहन बनने वाली हैं।

    दीपिका ने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी के दौरान काम से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। उन्होंने शाहरुख खान की फिल्म किंग की शूटिंग में भी हिस्सा लिया। प्रेग्नेंसी की घोषणा के बाद वह दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में फिल्म के शूटिंग शेड्यूल में शामिल हुई थीं। उस दौरान उनकी तस्वीरें भी सामने आई थीं जिनमें उनका बेबी बंप नजर आया था।

    किंग दीपिका के लिए खास प्रोजेक्ट माना जा रहा है क्योंकि यह उनकी बेटी दुआ के जन्म के बाद बड़े पर्दे पर महत्वपूर्ण वापसी होगी। फिल्म में वह शाहरुख खान के साथ नजर आएंगी। इसके अलावा रिपोर्ट्स में दीपिका के अल्लू अर्जुन की फिल्म राका से जुड़े होने की भी जानकारी सामने आई है।

    फिलहाल दीपिका के बेंगलुरु पहुंचने के बाद फैंस की नजर इस बात पर है कि कपल अपने दूसरे बच्चे के स्वागत से जुड़ी कोई नई जानकारी कब साझा करता है। हालांकि डिलीवरी की सटीक तारीख या अस्पताल से जुड़ी जानकारी को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी अटकल को पक्की खबर मानने के बजाय आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना बेहतर होगा।

  • समुद्र की लहरों से प्राकृतिक जलाभिषेक का अद्भुत केंद्र गंगेश्वर महादेव, पांडवों ने स्थापित किए थे पांच अलग-अलग शिवलिंग

    समुद्र की लहरों से प्राकृतिक जलाभिषेक का अद्भुत केंद्र गंगेश्वर महादेव, पांडवों ने स्थापित किए थे पांच अलग-अलग शिवलिंग

    नई दिल्ली । केन्द्र शासित प्रदेश दीव के फुदम गांव के समीप अरब सागर के तट पर स्थित गंगेश्वर महादेव मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का एक अद्भुत संगम है। दीव शहर से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण दुनियाभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    इस पवित्र स्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के पांच शिवलिंग एक साथ स्थापित हैं। धार्मिक परंपराओं और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में वनवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में आए थे। उन्होंने भगवान शिव की कठिन तपस्या की और पांच अलग-अलग आकारों के शिवलिंगों की स्थापना की। मान्यता है कि युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव ने अपने-अपने कद और स्वभाव के अनुसार इन शिवलिंगों का निर्माण किया था।

    गंगेश्वर महादेव मंदिर की एक और अद्वितीय विशेषता इसका भौगोलिक स्थान और प्राकृतिक जलाभिषेक की प्रक्रिया है। जब समुद्र में उच्च ज्वार आता है, तब अरब सागर की उत्तुंग लहरें प्राकृतिक चट्टानों के बीच से बहती हुई सीधे मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचती हैं। ये लहरें पांचों शिवलिंगों का स्पर्श कर उनका प्राकृतिक अभिषेक करती हैं और फिर वापस समुद्र में समा जाती हैं।

    ज्वार और भाटा के चक्र के साथ मंदिर का दृश्य बदलता रहता है। भाटा के दौरान जब समुद्र का जलस्तर नीचे चला जाता है, तब पांचों शिवलिंग पूर्णतः स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं। इस दौरान श्रद्धालु आसानी से पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मंदिर का यह प्राकृतिक चक्र श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत आध्यात्मिक और दर्शनीय अनुभव प्रदान करता है।

    सावन के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख पर्वों पर यहां देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तजन भगवान शिव को जलाभिषेक, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। लहरों की गर्जना और हर-हर महादेव के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

    भारत में समुद्र तटीय धार्मिक स्थलों का अपना विशेष महत्व रहा है, और मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु इस स्थान की प्राकृतिक भव्यता से अभिभूत हो जाते हैं। गंगेश्वर महादेव केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के नियमों और धार्मिक श्रद्धा के अनोखे तालमेल को भी प्रदर्शित करता है।

    दीव आने वाले पर्यटकों के लिए समुद्र की विशालता, तटीय चट्टानों की बनावट और समुद्र जल से स्वतः अभिषेक होने वाले यह पवित्र शिवलिंग एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करते हैं। प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ज्वार के समय विशेष सतर्कता बरती जाती है।

  • सावन के अंतिम सोमवार पर नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग, 17 अगस्त को इस शुभ मुहूर्त में होगी पूजा

    सावन के अंतिम सोमवार पर नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग, 17 अगस्त को इस शुभ मुहूर्त में होगी पूजा

    नई दिल्ली : सनातन परंपरा में सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस वर्ष नाग पंचमी का पावन पर्व 17 अगस्त को बेहद शुभ संयोग में मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि का प्रारंभ 16 अगस्त की शाम से हो रहा है, लेकिन शास्त्रों में उदयातिथि की मान्यता के कारण यह पर्व 17 अगस्त को ही देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

    धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस बार नाग पंचमी पर सावन सोमवार का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नाग देवता भगवान शिव के अत्यंत प्रिय हैं और उनके गले का आभूषण हैं। यही कारण है कि इस दिन शिवजी के साथ-साथ नाग देव की उपासना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और साधक को भय से मुक्ति मिलती है।

    इस साल पूजन के लिए सुबह का समय अत्यंत फलदायी बताया गया है। 17 अगस्त की सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 8 बजकर 29 मिनट तक पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु शिव मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर स्थापित नाग देव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

    धार्मिक ग्रंथों और भविष्य पुराण में नाग पंचमी के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। मान्यता है कि इस तिथि पर नाग लोक में विशेष उत्सव मनाया जाता है, इसलिए पृथ्वी लोक पर भी नाग देव की पूजा का विधान है। महाभारतकालीन राजा जनमेजय के नाग यज्ञ और आस्तिक मुनि द्वारा नागों की रक्षा की कथा भी इस पर्व से गहराई से जुड़ी हुई है, जो जीवों के प्रति दया और संरक्षण का संदेश देती है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष या राहु-केतु से जुड़े कष्ट होते हैं, उनके लिए इस दिन पूजा-पाठ और दान करना विशेष लाभप्रद माना जाता है। उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में, जिनमें मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्य शामिल हैं, घर के मुख्य द्वार पर गोबर से नाग देव की आकृति बनाकर पूजन करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना भी आवश्यक है। कई स्थानों पर जीवित सर्पों को दूध पिलाने का प्रयास किया जाता है, जो वैज्ञानिक रूप से अनुचित है। इसलिए श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी जीव को कष्ट दिए बिना केवल मंदिर में स्थापित प्रतिमा या चित्र की ही शास्त्रीय विधि से पूजा करें।

  • बिहार के मोतिहारी में घोड़ागाड़ी से विदेशी शराब की तस्करी का भंडाफोड़, पुलिस ने दो सौ बोतलें जब्त कीं

    बिहार के मोतिहारी में घोड़ागाड़ी से विदेशी शराब की तस्करी का भंडाफोड़, पुलिस ने दो सौ बोतलें जब्त कीं


    नई दिल्ली । 
    बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी क्षेत्र में अवैध शराब की तस्करी को लेकर एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए पारंपरिक परिवहन साधनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए स्थानीय पुलिस ने एक घोड़ागाड़ी को रोककर भारी मात्रा में विदेशी शराब जब्त की है।

    पुलिस को सूचना मिली थी कि तस्कर वाहनों की नियमित जांच से बचने के लिए घोड़े का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस आधार पर पुलिस टीम ने बेघर गांव के पास नाकाबंदी कर संदिग्ध घोड़ागाड़ी को रोका। तलाशी के दौरान उसमें विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खानों से विभिन्न ब्रांडों की लगभग दो सौ बोतलें विदेशी शराब बरामद की गईं।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से तस्करी में संलिप्त एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि उसका एक अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क के मुख्य आपूर्तिकर्ताओं और खरीदारों का पता लगाया जा सके।

    जांच अधिकारियों के अनुसार, राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद से तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। आमतौर पर चार पहिया वाहनों, ट्रकों या यात्री बसों का उपयोग किया जाता था, लेकिन पुलिस की सख्ती के कारण अब ग्रामीण इलाकों के कच्चे रास्तों और जानवरों का सहारा लिया जा रहा है।

    प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह खेप पड़ोसी क्षेत्रों से लाकर स्थानीय स्तर पर ऊंचे दामों में खपाने की योजना थी। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय तस्करों से जुड़े हैं और क्या पूर्व में भी इस माध्यम का उपयोग किया गया था।

    शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुलिस प्रशासन ने सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। संदेह के आधार पर कृषि कार्यों या माल ढुलाई में लगे पारंपरिक साधनों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है ताकि तस्करी के किसी भी प्रयास को विफल किया जा सके।

    उल्लेखनीय है कि अवैध मादक पदार्थों और शराब की अंतरराज्यीय तस्करी की रोकथाम के लिए बिहार पुलिस के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी विशेष जांच अभियान चलाए जाते रहे हैं, जिससे तस्करों के नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सके।

    पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भागे हुए आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। जब्त शराब और वाहन को कानूनी प्रक्रिया के तहत सील कर दिया गया है तथा संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है।

  • प्रभास का खून से सना अंदाज और सामने महात्मा गांधी, ‘फौजी’ के पोस्टर में दिखी आजादी की जंग की झलक

    प्रभास का खून से सना अंदाज और सामने महात्मा गांधी, ‘फौजी’ के पोस्टर में दिखी आजादी की जंग की झलक


    नई दिल्ली । स्वतंत्रता दिवस के मौके पर साउथ सुपरस्टार प्रभास के फैंस को बड़ा सरप्राइज मिला है। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म फौजी का नया पोस्टर सामने आया है जिसने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। पोस्टर में प्रभास बेहद रफ और इंटेंस अंदाज में नजर आ रहे हैं। फिल्म का निर्देशन हनु राघवपुड़ी कर रहे हैं और इसे पीरियड एक्शन ड्रामा के तौर पर पेश किया जा रहा है। मेकर्स पहले ही फिल्म की रिलीज डेट 3 दिसंबर 2026 तय कर चुके हैं।

    फौजी की कहानी आजादी से पहले के भारत की पृष्ठभूमि में रखी गई है। फिल्म में प्रभास एक सैनिक की भूमिका में दिखाई देंगे। मेकर्स ने कहानी को इतिहास के एक कम चर्चित अध्याय से जोड़ते हुए पेश किया है। सामने आए पोस्टर और अब तक जारी जानकारी से साफ है कि फिल्म में देशभक्ति के साथ युद्ध और एक्शन का जबरदस्त मिश्रण देखने को मिल सकता है। हालांकि फिल्म की पूरी कहानी और प्रभास के किरदार की विस्तृत जानकारी अभी मेकर्स ने सामने नहीं रखी है।

    फिल्म के पोस्टर में प्रभास का लुक खास तौर पर चर्चा में है। वह खून से सने शरीर और हाथ में हथियार के साथ बेहद आक्रामक अंदाज में दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर के साथ दी गई टैगलाइन A Battalion Who Fights Alone भी फिल्म के केंद्रीय किरदार की ओर इशारा करती है। इसमें एक ऐसे योद्धा की झलक मिलती है जो मुश्किल हालात में अकेले मोर्चा संभालता नजर आ सकता है। यही वजह है कि पोस्टर रिलीज होते ही प्रभास के फैंस के बीच फिल्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    फौजी को लेकर एक और खास बात इसकी स्टारकास्ट है। प्रभास के साथ इमानवी मुख्य भूमिका में हैं। दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर भी फिल्म का हिस्सा हैं। उनके अलावा मिथुन चक्रवर्ती और जया प्रदा जैसे अनुभवी कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। अनुपम खेर ने स्वतंत्रता दिवस पर फिल्म के नए पोस्टर को लेकर अपनी खुशी जाहिर करते हुए इसे बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने पर गर्व की बात बताया।

    फिल्म का निर्देशन हनु राघवपुड़ी कर रहे हैं जिन्हें सीता रामम जैसी पीरियड रोमांटिक ड्रामा के लिए जाना जाता है। फौजी में उनका फोकस इतिहास की पृष्ठभूमि में एक बड़े स्तर की कहानी पेश करने पर है। फिल्म को Mythri Movie Makers प्रोड्यूस कर रहा है जबकि T-Series Films इसे प्रस्तुत कर रहा है। यह सहयोग फिल्म के बड़े पैमाने और पैन इंडिया अपील की ओर भी इशारा करता है।

    फौजी की रिलीज को लेकर भी अब तस्वीर साफ है। फिल्म दुनियाभर के सिनेमाघरों में 3 दिसंबर 2026 को दस्तक देगी। रिलीज डेट की आधिकारिक घोषणा जुलाई में नए पोस्टर के साथ की गई थी। इसके बाद से फिल्म को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है।

    प्रभास इससे पहले बाहुबली जैसी फिल्मों के जरिए पीरियड और भव्य सिनेमा में अपनी खास पहचान बना चुके हैं। ऐसे में फौजी में उनका सैनिक वाला अवतार दर्शकों के लिए खास आकर्षण बन गया है। स्वतंत्रता दिवस पर जारी पोस्टर ने फिल्म के देशभक्ति और एक्शन से जुड़े पहलू को और मजबूत कर दिया है। अब दर्शकों की नजर फिल्म के अगले अपडेट और इसके टीजर पर है क्योंकि वही कहानी और प्रभास के किरदार को लेकर तस्वीर और साफ करेगा।

  • शरीर में बढ़ रही है पेट की चर्बी तो न करें नजरअंदाज, ब्लड शुगर बढ़ने के साथ बढ़ सकता है बीमारियों का जोखिम

    शरीर में बढ़ रही है पेट की चर्बी तो न करें नजरअंदाज, ब्लड शुगर बढ़ने के साथ बढ़ सकता है बीमारियों का जोखिम


    नई दिल्ली । आज की बदलती जीवनशैली में वजन बढ़ना और ब्लड शुगर का असंतुलन तेजी से चिंता का विषय बनता जा रहा है। लंबे समय तक बैठकर काम करना कम शारीरिक गतिविधि करना और जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाला भोजन लेना शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने का कारण बन सकता है। खासतौर पर पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी को मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जोखिम कारक माना जाता है। शोधों में पेट की चर्बी और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच संबंध भी सामने आया है। इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सामान्य तरीके से प्रतिक्रिया नहीं करतीं जिससे ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

    जब शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा खर्च नहीं हो पाती है तो उसका कुछ हिस्सा फैट के रूप में जमा होने लगता है। लगातार वजन बढ़ना और खासकर कमर के आसपास चर्बी बढ़ना टाइप 2 डायबिटीज और दूसरी मेटाबॉलिक समस्याओं के जोखिम से जुड़ा पाया गया है। भारत में हुए अध्ययनों की समीक्षा में भी अधिक वजन और मोटापे को मेटाबॉलिक सिंड्रोम के ज्यादा जोखिम से जोड़ा गया है। इसलिए केवल वजन मशीन पर दिखने वाले आंकड़े पर ध्यान देने के बजाय कमर के आसपास बढ़ती चर्बी और पूरी जीवनशैली पर नजर रखना भी जरूरी है।

    दूसरी ओर ब्लड शुगर शरीर के लिए ऊर्जा का जरूरी स्रोत है लेकिन इसका स्तर लंबे समय तक सामान्य सीमा से अधिक रहना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। टाइप 2 डायबिटीज में इंसुलिन का प्रभाव कम हो सकता है और समय के साथ शरीर के लिए ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। लगातार हाई ब्लड शुगर रहने पर रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। डायबिटीज का लंबे समय तक खराब नियंत्रण हृदय रोग स्ट्रोक किडनी की बीमारी और आंखों से जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

    फैट और शुगर के इस संबंध को समझने के लिए इंसुलिन रेजिस्टेंस को समझना जरूरी है। जब शरीर में अतिरिक्त फैटी एसिड का बोझ बढ़ता है तो इसका असर मांसपेशियों लिवर और शरीर के दूसरे हिस्सों में ग्लूकोज के इस्तेमाल पर पड़ सकता है। इससे इंसुलिन सिग्नलिंग प्रभावित हो सकती है और ब्लड शुगर बढ़ने की स्थिति बन सकती है। हालांकि हर व्यक्ति में इसका असर एक जैसा नहीं होता और आनुवंशिकता उम्र नींद तनाव खानपान और शारीरिक गतिविधि जैसे कई कारक भी मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।

    इस जोखिम को कम करने के लिए सबसे पहले रोजमर्रा की गतिविधियों को बेहतर बनाना जरूरी है। नियमित तेज चाल से चलना साइकिल चलाना तैराकी या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी शारीरिक गतिविधियां की जा सकती हैं। वयस्कों के लिए सामान्य स्वास्थ्य लाभ के लिहाज से हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि और सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधि की सलाह दी जाती है।

    खानपान में भी संतुलन जरूरी है। अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों और जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाले भोजन को सीमित करना और भोजन में सब्जियों दालों साबुत अनाज तथा पर्याप्त प्रोटीन जैसे पौष्टिक विकल्पों को शामिल करना मददगार हो सकता है। केवल किसी एक भोजन को छोड़ देने या लंबे समय तक भूखे रहने को हर व्यक्ति के लिए जरूरी उपाय नहीं माना जाना चाहिए। खासकर डायबिटीज गर्भावस्था या किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे लोगों को डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से सलाह लेनी चाहिए।

    अगर वजन लगातार बढ़ रहा है कमर का घेरा बढ़ रहा है या बार बार ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा मिल रहा है तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है। समय रहते वजन खानपान शारीरिक गतिविधि और ब्लड शुगर पर ध्यान देने से मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि केवल सुबह खाली पेट 20 मिनट चलने या किसी एक खास डाइट से सभी लोगों में फैट और शुगर तेजी से कम होने की गारंटी नहीं होती। स्वास्थ्य संबंधी बदलाव व्यक्ति की स्थिति के अनुसार किए जाने चाहिए।

  • रक्तदान से पहले डॉक्टर की ये बातें जरूर जान लें, कौन दे सकता है ब्लड और किसे करना चाहिए परहेज

    रक्तदान से पहले डॉक्टर की ये बातें जरूर जान लें, कौन दे सकता है ब्लड और किसे करना चाहिए परहेज


    नई दिल्ली । रक्तदान को जीवन बचाने वाला सबसे बड़ा सामाजिक योगदान माना जाता है। एक यूनिट रक्त को अलग अलग घटकों में इस्तेमाल किया जाए तो इससे एक से अधिक मरीजों की मदद हो सकती है। यही वजह है कि अस्पतालों और ब्लड बैंकों की ओर से लोगों को नियमित रक्तदान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हालांकि रक्तदान करने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि हर व्यक्ति ब्लड डोनेट करने के लिए योग्य नहीं होता। शरीर की सामान्य स्थिति उम्र वजन और स्वास्थ्य से जुड़े कई मानकों की जांच के बाद ही रक्तदान की अनुमति दी जाती है। भारत सरकार के e-RaktKosh के अनुसार सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति की उम्र 18 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसका वजन कम से कम 45 किलोग्राम होना चाहिए।

    रक्तदान से पहले ब्लड बैंक में व्यक्ति की सामान्य स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसमें मेडिकल हिस्ट्री के साथ ब्लड प्रेशर पल्स और शरीर का तापमान देखा जाता है। इसके अलावा उंगली से लिए गए रक्त के नमूने से हीमोग्लोबिन या आयरन की पर्याप्तता की जांच की जाती है। यदि जांच में कोई ऐसी स्थिति सामने आती है जिसमें रक्तदान करना सुरक्षित नहीं है तो व्यक्ति को उस समय रक्तदान से रोक दिया जाता है। इसलिए केवल उम्र और वजन सही होना ही पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए।

    आम तौर पर स्वस्थ वयस्क रक्तदान कर सकते हैं लेकिन यदि किसी व्यक्ति को गंभीर एनीमिया है या वह किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है तो उसे रक्तदान से बचना चाहिए। हाल ही में हुई सर्जरी या कुछ चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के बाद भी कुछ समय तक रक्तदान टाला जा सकता है। इसी तरह कुछ संक्रमणों और स्वास्थ्य स्थितियों में डॉक्टर या ब्लड बैंक की मेडिकल टीम रक्तदान को अस्थायी या स्थायी रूप से रोक सकती है। इसलिए यदि आप किसी बीमारी का इलाज करा रहे हैं या नियमित दवाएं लेते हैं तो रक्तदान से पहले इसकी जानकारी ब्लड बैंक के चिकित्सकीय स्टाफ को देना जरूरी है।

    गर्भावस्था के दौरान रक्तदान नहीं किया जाता। डिलीवरी के बाद भी महिला को तुरंत रक्तदान नहीं करना चाहिए और उचित समय तथा स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार ही दोबारा रक्तदान किया जाना चाहिए। इसी तरह हाल में टीकाकरण या टैटू जैसी कुछ परिस्थितियों में भी रक्तदान कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। इन मामलों में प्रतीक्षा की अवधि हर स्थिति के लिए एक जैसी नहीं होती इसलिए अंतिम निर्णय संबंधित ब्लड सेंटर की मेडिकल स्क्रीनिंग के आधार पर लिया जाना चाहिए।

    रक्तदान से पहले कुछ सामान्य सावधानियां भी मददगार होती हैं। खाली पेट रक्तदान करने से बचना चाहिए और पर्याप्त पानी पीना चाहिए। अच्छी नींद लेना भी जरूरी है। रक्तदान से पहले हल्का और संतुलित भोजन करना बेहतर माना जाता है। शराब का सेवन करके रक्तदान करने से बचना चाहिए। रक्तदान के बाद भी शरीर को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ देना चाहिए। e-RaktKosh के अनुसार रक्तदान के बाद अगले 24 से 48 घंटे तक तरल पदार्थ बढ़ाने और कुछ समय तक भारी शारीरिक मेहनत तथा वजन उठाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    रक्तदान के दौरान किसी तरह की कमजोरी या चक्कर महसूस हो तो तुरंत मेडिकल स्टाफ को बताना चाहिए। रक्तदान के बाद कुछ देर आराम करना और उपलब्ध कराए गए हल्के जलपान का सेवन करना उपयोगी होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रक्तदान नेक काम जरूर है लेकिन इसे केवल उत्साह में आकर नहीं करना चाहिए। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में सही जानकारी देकर ही रक्तदान करें। अंतिम पात्रता का निर्णय ब्लड बैंक की मेडिकल स्क्रीनिंग और लागू रक्तदान दिशानिर्देशों के अनुसार होता है।

  • ODI वर्ल्ड कप 2027 की बदलेगी शुरुआत की तारीख? गांधी जयंती पर होगा पहला मुकाबला, जानें पूरा प्लान

    ODI वर्ल्ड कप 2027 की बदलेगी शुरुआत की तारीख? गांधी जयंती पर होगा पहला मुकाबला, जानें पूरा प्लान


    नई दिल्ली । वनडे वर्ल्ड कप 2027 को लेकर क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी खबर सामने आई है। दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की शुरुआत की तारीख में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी ICC अब 2 अक्टूबर 2027 को टूर्नामेंट शुरू करने पर विचार कर रहा है। यह तारीख इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भारत में महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। हालांकि अभी ICC की ओर से नई शुरुआत की तारीख का औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है।

    शुरुआती कार्यक्रम के मुताबिक 2027 वनडे वर्ल्ड कप की शुरुआत अक्टूबर के पहले सप्ताह के बाद होनी थी। पहले 8 अक्टूबर को मुख्य टूर्नामेंट शुरू करने की योजना सामने आई थी और उससे पहले वार्म अप मुकाबले खेले जाने थे। अब अगर ICC की नई योजना पर सहमति बनती है तो मुख्य टूर्नामेंट 2 अक्टूबर से शुरू हो सकता है। फाइनल फिलहाल 21 नवंबर को होने की उम्मीद है। इस स्थिति में प्रतियोगिता करीब 50 दिनों तक चल सकती है।

    गांधी जयंती को टूर्नामेंट के आगाज से जोड़ने के पीछे महात्मा गांधी और दक्षिण अफ्रीका के बीच गहरा ऐतिहासिक संबंध भी एक अहम वजह माना जा रहा है। गांधी ने अपने जीवन के करीब 21 वर्ष दक्षिण अफ्रीका में बिताए थे। वहीं उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया था। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप की शुरुआत गांधी जयंती से करना एक प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    2027 का वर्ल्ड कप कई मायनों में खास होने वाला है। इस बार प्रतियोगिता में 14 टीमें हिस्सा लेंगी और मुकाबले दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे तथा नामीबिया में खेले जाएंगे। ICC ने टूर्नामेंट के लिए 12 वेन्यू की जानकारी भी साझा की है। दक्षिण अफ्रीका के आठ शहरों में मुकाबले होंगे जबकि जिम्बाब्वे के तीन और नामीबिया के एक वेन्यू को शामिल किया गया है।

    टूर्नामेंट के फॉर्मेट में भी बड़ा बदलाव किया गया है। ICC ने 2027 वर्ल्ड कप को 14 टीमों का करने के साथ क्वालिफिकेशन चरण में नई सुपर सीरीज व्यवस्था जोड़ी है। सबसे निचली रैंक वाली तीन क्वालिफाइड टीमों को सुपर सीरीज में आपस में मुकाबले करने होंगे और इस चरण से एक टीम मुख्य प्रतियोगिता के लिए आगे बढ़ेगी। इसके बाद मुख्य टूर्नामेंट में 12 टीमों को दो ग्रुप में बांटकर मुकाबले कराए जाएंगे। ग्रुप चरण के बाद सुपर सिक्स चरण और फिर सेमीफाइनल तथा फाइनल का रास्ता होगा।

    वर्ल्ड कप के लिए भारत समेत कई बड़ी टीमों ने अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड पाकिस्तान इंग्लैंड श्रीलंका बांग्लादेश अफगानिस्तान और मेजबान दक्षिण अफ्रीका तथा जिम्बाब्वे भी क्वालिफाई कर चुके हैं। वहीं नामीबिया समेत बाकी टीमों की स्थिति क्वालिफिकेशन प्रक्रिया से तय होगी।

    फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा गांधी जयंती के दिन वर्ल्ड कप शुरू होने को लेकर है। अगर ICC इस प्रस्ताव पर मुहर लगाता है तो 2027 वनडे वर्ल्ड कप का आगाज सिर्फ क्रिकेट के लिहाज से ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदेश के लिहाज से भी बेहद खास बन जाएगा। हालांकि अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि ICC के आधिकारिक ऐलान के बाद ही होगी।