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  • वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर बरसे CM मोहन यादव, बोले- देशभक्ति के गीत का सम्मान करना चाहिए

    वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर बरसे CM मोहन यादव, बोले- देशभक्ति के गीत का सम्मान करना चाहिए


    इंदौर । इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार ऐसा अवसर आया है जब वंदे मातरम् को पूरे देश में व्यापक रूप से सम्मान दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता इस राष्ट्रीय गीत को लेकर सम्मान का भाव नहीं दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस न इंदौर में वंदे मातरम् गाती है और न ही दिल्ली में उसके नेता इसका सम्मान करते हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से अपने रुख को लेकर देश से माफी मांगने की मांग की।

    मुख्यमंत्री इंदौर दौरे के दौरान शहर के चिड़ियाघर भी पहुंचे। यहां उन्होंने तोते उड़ाकर नए 14D थिएटर का शुभारंभ किया। इस थिएटर में दर्शकों को सामान्य फिल्म देखने से अलग तरह का अनुभव देने की व्यवस्था की गई है। थिएटर में करीब 20 मिनट के शो के लिए टिकट दर 70 रुपये निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। (naidunia.com)

    इंदौर में कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि देश के स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की भावना से जुड़ा हुआ प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने लोगों में देश के प्रति समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसे सम्मान मिलना पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के मौके पर देशभक्ति से जुड़े प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के कथित बयानों पर आपत्ति जताई और कहा कि यदि किसी नेता ने वंदे मातरम् का अपमान किया है तो उसे देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। हालांकि मुख्यमंत्री के इस बयान में जिन कांग्रेस नेताओं या बयानों का उल्लेख किया गया है उनकी विस्तृत जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने अपने इंदौर दौरे के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि अटल जी की पुण्यतिथि पर देश उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। मुख्यमंत्री ने उनके राजनीतिक जीवन और विपक्ष में लंबे समय तक काम करने का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व में संवाद के जरिए समाधान निकालने और सभी को साथ लेकर चलने की विशेष क्षमता थी।

    मोहन यादव ने अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल से जुड़े कई प्रसंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अटल जी ने पड़ोसी देश के साथ संवाद का रास्ता अपनाया लेकिन जब पाकिस्तान ने इसका सम्मान नहीं किया तो कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने दृढ़ता के साथ जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने अटल जी के नेतृत्व को राष्ट्रहित और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से जोड़ते हुए उनके योगदान को याद किया।

    मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि रानी अवंतीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन बलिदान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का माध्यम है।

    इंदौर के चिड़ियाघर में 14D थिएटर का शुभारंभ शहर में मनोरंजन और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक नई पहल के तौर पर देखा जा रहा है। सामान्य थिएटर की तुलना में 14D तकनीक दर्शकों को स्क्रीन पर दिखाई जा रही कहानी के साथ अधिक इमर्सिव अनुभव देने के लिए जानी जाती है। इसमें दृश्य प्रभावों के साथ सीट मूवमेंट और अन्य प्रभावों का इस्तेमाल किया जाता है।

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान मछलियां भी छोड़ीं और शहर की पर्यावरणीय तथा मनोरंजन संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इंदौर लगातार शहरी विकास के साथ पर्यटन और मनोरंजन के नए विकल्प विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    वंदे मातरम् को लेकर मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय प्रतीकों और देशभक्ति से जुड़े गीतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। मुख्यमंत्री ने इसे राजनीतिक विवाद से आगे देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान का विषय बताया। वहीं कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

  • दिमागी नक्सल बयान पर सियासी घमासान, चिदंबरम ने कहा गर्व है, विपक्ष ने पीएम मोदी की टिप्पणी पर उठाए सवाल

    दिमागी नक्सल बयान पर सियासी घमासान, चिदंबरम ने कहा गर्व है, विपक्ष ने पीएम मोदी की टिप्पणी पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली । 
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से दिए गए संबोधन में दिमागी नक्सल शब्द के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में समाज को गलत दिशा में ले जाने वाले तत्वों को पहचानने की जरूरत पर जोर दिया था। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें दिमागी नक्सल होने पर गर्व है। चिदंबरम की इस प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री के बयान को विपक्ष और सरकार से असहमति रखने वाले लोगों के संदर्भ में देखा और इस तरह की शब्दावली के इस्तेमाल पर सवाल उठाए।

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए अर्बन नक्सल शब्द के पुराने इस्तेमाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री की ओर से अर्बन नक्सल शब्द का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन संसद में इसकी परिभाषा को लेकर सवाल पूछे जाने पर स्पष्ट परिभाषा सामने नहीं आई थी।

    जयराम रमेश ने जाति जनगणना के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक जाति जनगणना की मांग को अर्बन नक्सल सोच से जोड़कर देखा जाता था, जबकि बाद में सरकार ने जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, सरकार की ओर से पहले किसी मांग या विचार को एक विशेष राजनीतिक शब्दावली से जोड़ना और बाद में उसी दिशा में कदम उठाना सवाल खड़े करता है।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर आपत्ति जताई। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने या उनसे असहमति जताने वालों को इस तरह के विशेषणों से संबोधित करना उचित नहीं है।

    वाम दलों ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी को गंभीरता से लिया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के महासचिव एमए बेबी ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। वाम नेताओं ने दिमागी नक्सल जैसे शब्द के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक विमर्श के लिए गंभीर विषय बताया।

    इस पूरे विवाद की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन से हुई। लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश के सामने मौजूद चुनौतियों और समाज को प्रभावित करने वाली विचारधाराओं का उल्लेख किया। इसी दौरान उन्होंने दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल किया और ऐसे तत्वों को पहचानने की आवश्यकता बताई, जो उनके अनुसार समाज को गलत दिशा में ले जाने का प्रयास करते हैं।

    प्रधानमंत्री की टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद अब सार्वजनिक बहस का रूप ले चुके हैं। कांग्रेस और वाम दल जहां इस शब्दावली को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री के बयान का संदर्भ सामाजिक और वैचारिक चुनौतियों से जुड़ा बताया जा रहा है।

    दिमागी नक्सल शब्द पर शुरू हुआ यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राजनीतिक दल स्वतंत्रता दिवस के संदेशों और देश की दिशा से जुड़े मुद्दों पर अपनी-अपनी विचारधारा के आधार पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। चिदंबरम की टिप्पणी और विपक्षी नेताओं की आपत्तियों ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस शब्द को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

  • अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने सदैव अटल पहुंचकर श्रद्धांजलि दी

    अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति मुर्मू, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने सदैव अटल पहुंचकर श्रद्धांजलि दी

    नई दिल्ली । पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर रविवार को देश ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। नई दिल्ली स्थित उनके स्मारक सदैव अटल पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी।

    श्रद्धांजलि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री, सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेता भी शामिल हुए। सभी ने वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन, राष्ट्र के प्रति उनके योगदान और भारतीय राजनीति में उनकी विशिष्ट भूमिका को याद किया। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व को लोकतांत्रिक मूल्यों, प्रभावी नेतृत्व और राष्ट्रहित से जोड़कर देखा गया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वाजपेयी को याद करते हुए उनके नेतृत्व और विचारों को देश के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित किया और उनके विचार तथा कार्य आज भी देशवासियों को दिशा देते हैं। वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी रहा।

    अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में शामिल रहे जिनकी पहचान केवल प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता, कवि और राजनेता के तौर पर भी बनी। उनकी भाषण शैली, सरल व्यवहार और राजनीतिक संवाद का अलग अंदाज उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देता था। संसद में उनके वक्तव्यों को लंबे समय तक राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

    वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। वर्ष 1996 में उन्होंने पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला, लेकिन उनकी सरकार 13 दिन ही चल सकी। इसके बाद वर्ष 1998 में उन्होंने दोबारा प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1999 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने 2004 तक सरकार का नेतृत्व किया। इस दौरान गठबंधन सरकार को स्थिरता के साथ चलाना उनके राजनीतिक कौशल की महत्वपूर्ण मिसाल माना गया।

    उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में वर्ष 1998 का पोखरण परमाणु परीक्षण भारत की महत्वपूर्ण रणनीतिक घटनाओं में शामिल रहा। इस निर्णय के बाद भारत की परमाणु क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई। इसके साथ ही उनके कार्यकाल में बुनियादी ढांचे और सड़क संपर्क को मजबूत करने से जुड़ी कई योजनाओं को आगे बढ़ाया गया।

    स्वर्णिम चतुर्भुज योजना उनके कार्यकाल की प्रमुख विकास परियोजनाओं में रही। इसका उद्देश्य देश के प्रमुख महानगरों और महत्वपूर्ण शहरों को बेहतर सड़क नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना था। इसके अलावा ग्रामीण सड़क संपर्क और दूरसंचार क्षेत्र में भी उनके कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण पहल हुईं।

    अटल बिहारी वाजपेयी को वर्ष 2015 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र के लिए किए गए योगदान के प्रति देश की मान्यता के रूप में देखा गया।

    16 अगस्त 2018 को वाजपेयी का निधन हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। आठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर भी उनके स्मारक सदैव अटल पर नेताओं ने पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को याद किया। भारतीय राजनीति में वाजपेयी की विरासत आज भी उनके नेतृत्व, भाषण कला, कविताओं और राष्ट्रसेवा से जुड़ी स्मृतियों के रूप में मौजूद है।

  • दुबलेपन को न समझें अच्छी सेहत की निशानी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया असली फिटनेस का वास्तविक पैमाना

    दुबलेपन को न समझें अच्छी सेहत की निशानी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया असली फिटनेस का वास्तविक पैमाना

    नई दिल्ली :आधुनिक दौर में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण अधिकांश लोग पतले दिखने को ही अच्छी फिटनेस का पर्याय मानने लगे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल वजन कम होना या दुबला दिखना किसी व्यक्ति के पूर्ण स्वस्थ होने का प्रमाण नहीं है। वास्तविक फिटनेस का सीधा संबंध इस बात से है कि आपका शरीर दैनिक जीवन के कार्यों को कितनी सहजता और ऊर्जा के साथ पूरा करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बाहरी शारीरिक बनावट के आधार पर किसी के स्वास्थ्य का सही आकलन नहीं किया जा सकता। यदि कोई व्यक्ति दिखने में सामान्य या पतला है, लेकिन दिनभर सुस्ती महसूस करता है, सीढ़ियां चढ़ने में हांफने लगता है या उसकी नींद पूरी नहीं होती, तो उसे पूर्णतः स्वस्थ नहीं माना जा सकता। असली फिटनेस शरीर को क्रियाशील, ऊर्जावान और बीमारियों से मुक्त बनाए रखने में निहित है।

    शारीरिक क्षमता का परीक्षण दैनिक गतिविधियों से होता है। थोड़ा सा चलने, वजन उठाने या सामान्य मेहनत के काम करने पर अत्यधिक थकान या सांस फूलना खराब कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस का संकेत हो सकता है। यदि पहले की तुलना में सामान्य काम करने में भी परेशानी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय अपनी जीवनशैली और आहार में आवश्यक सुधार करना चाहिए।

    एक स्वस्थ शरीर के लिए लचीलापन और शारीरिक संतुलन भी बेहद महत्वपूर्ण घटक हैं। बिना किसी कठिनाई के झुकना, मुड़ना और दैनिक गतिविधियों के दौरान संतुलन बनाए रखना अच्छी शारीरिक स्थिति को दर्शाता है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर की स्थिरता बनाए रखने के लिए नियमित रूप से हल्का व्यायाम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना बेहद लाभकारी सिद्ध होता है।

    शारीरिक संकेतकों की बात करें तो रेस्टिंग हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण पैमाना हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, सामान्य स्थिति में नियंत्रित ब्लड प्रेशर और स्थिर हृदय गति अंदरूनी रूप से मजबूत शरीर का संकेत देती है। बाहर से फिट दिखने वाले व्यक्ति भी उच्च रक्तचाप या अन्य आंतरिक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं, इसलिए नियमित जांच आवश्यक है।

    शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन भी उतना ही अनिवार्य है। अत्यधिक तनाव, चिड़चिड़ापन या उदासी व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि न केवल मांसपेशियों को मजबूत करती है, बल्कि मानसिक तनाव को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है।

    मध्य प्रदेश सहित देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोग केवल वजन घटाने वाले भ्रामक पैमानों के पीछे न भागें। संतुलित पोषण, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त दिनचर्या को अपनाकर ही वास्तविक फिटनेस हासिल की जा सकती है। अपने शरीर के संकेतों को समझना और आंतरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना ही लंबे समय तक स्वस्थ रहने का सबसे कारगर तरीका है।

  • कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए बड़ा आदेश: CPCT के साथ 10 सर्टिफिकेट कोर्स और 50 क्रेडिट अनिवार्य, नहीं तो मानदेय पर संकट

    कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए बड़ा आदेश: CPCT के साथ 10 सर्टिफिकेट कोर्स और 50 क्रेडिट अनिवार्य, नहीं तो मानदेय पर संकट


    भोपाल । मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए सरकार ने तकनीकी दक्षता और साइबर सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक नगर पालिक निगम नगरपालिका और नगर परिषद में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को निर्धारित योग्यता और प्रशिक्षण पूरा करना होगा। इसके लिए 30 दिन की समय सीमा तय की गई है। तय अवधि में जरूरी शर्तें पूरी नहीं करने वाले ऑपरेटरों के नियोजन और मानदेय या वेतन भुगतान को लेकर कार्रवाई की जा सकती है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नगरीय निकायों का काम तेजी से ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल सिस्टम पर निर्भर हो रहा है।

    विभाग के अनुसार नगरीय निकायों की अलग अलग शाखाओं में कंप्यूटर ऑपरेटर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते हैं। जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर संपत्ति कर जलकर राजस्व प्रधानमंत्री आवास योजना और दूसरी नागरिक सेवाओं से जुड़े ऑनलाइन काम इनके माध्यम से किए जाते हैं। ऐसे में ऑपरेटरों की कंप्यूटर दक्षता के साथ सरकारी डेटा की सुरक्षा और साइबर खतरों की समझ भी जरूरी मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में CPCT पहले से ही कई कंप्यूटर आधारित सरकारी पदों के लिए महत्वपूर्ण योग्यता परीक्षा रही है। सरकारी विभागों में कंप्यूटर दक्षता से जुड़े पदों पर CPCT की अनिवार्यता के उदाहरण पहले भी सामने आते रहे हैं।

    नए निर्देशों के तहत कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी गई हैं। पहली शर्त CPCT परीक्षा पास करने से जुड़ी है। यानी संबंधित ऑपरेटर के पास निर्धारित कंप्यूटर दक्षता का प्रमाण होना जरूरी होगा। दूसरी शर्त भारत सरकार के मिशन कर्मयोगी यानी iGOT Karmayogi पोर्टल पर उपलब्ध साइबर सिक्योरिटी और आईटी से संबंधित सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करने की है। तीसरी शर्त इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कम से कम 50 क्रेडिट पॉइंट हासिल करने की है। मिशन कर्मयोगी का व्यापक उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता और कार्य दक्षता बढ़ाना है।

    आदेश के साथ प्रशिक्षण के लिए जरूरी पाठ्यक्रमों की सूची भी बताई गई है। इनमें बेसिक कंप्यूटर से जुड़े पाठ्यक्रमों के अलावा माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सेल जैसे सॉफ्टवेयर से जुड़े प्रशिक्षण शामिल हैं। डेटा एंट्री और सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने वाले काम में इनकी उपयोगिता बताई गई है। इसके साथ साइबर सिक्योरिटी बेसिक्स और डिजिटल सेफ्टी जैसे पाठ्यक्रमों के जरिए सरकारी कंप्यूटर सिस्टम और पासवर्ड सहित महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी को सुरक्षित रखने की जानकारी दी जाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित निर्णय लेने से जुड़े प्रशिक्षण भी ऑपरेटरों की डिजिटल क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से शामिल किए गए हैं।

    सरकार की इस व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन कंप्यूटर ऑपरेटरों पर पड़ सकता है जिन्होंने अभी तक निर्धारित तकनीकी योग्यता या प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है। आदेश के मुताबिक 30 दिनों की समय सीमा में जरूरी शर्तें पूरी नहीं होने पर संबंधित ऑपरेटर को आगे नियोजन में रखने या हटाने और नियमानुसार मानदेय या वेतन भुगतान को लेकर कार्रवाई की जा सकती है। यानी यह सिर्फ प्रशिक्षण पूरा करने का निर्देश नहीं है बल्कि इसके साथ सेवा और भुगतान पर भी असर जुड़ा हुआ है।

    नगरीय निकायों में कंप्यूटर ऑपरेटरों की संख्या एक समान नहीं होती। बड़े नगर निगमों में कई जोनल कार्यालय और अलग अलग शाखाएं होने के कारण ऑपरेटरों की जरूरत ज्यादा होती है। वहीं नगरपालिकाओं में राजस्व स्थापना लेखा और नागरिक सेवाओं से जुड़े काउंटरों पर ऑपरेटर काम करते हैं। नगर परिषदों में अपेक्षाकृत कम संख्या में कर्मचारी डिजिटल सेवाओं और प्रशासनिक कामकाज को संभालते हैं।

    सरकार के इस कदम का उद्देश्य डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के साथ सरकारी डेटा को साइबर खतरों से सुरक्षित रखना भी बताया जा रहा है। नगरीय निकायों में नागरिकों से जुड़ी बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत और प्रशासनिक जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहती है। ऐसे में कंप्यूटर सिस्टम चलाने वाले कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के बुनियादी नियमों की जानकारी होना जरूरी है। बढ़ते साइबर अपराधों के बीच सरकारी संस्थानों में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों को देखते हुए पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार अनजान लिंक ओटीपी और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों से सावधानी बरतने की सलाह देते रहे हैं।

    इस आदेश के बाद अब नगरीय निकायों में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के सामने 30 दिन में अपनी तकनीकी योग्यता और प्रशिक्षण पूरा करने की चुनौती है। विभाग की मंशा साफ है कि डिजिटल शासन व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों की क्षमता केवल कंप्यूटर चलाने तक सीमित न रहे बल्कि उन्हें साइबर सुरक्षा डेटा प्रबंधन और आधुनिक तकनीक की भी पर्याप्त समझ हो। आने वाले दिनों में नगरीय निकायों में इन निर्देशों के पालन और ऑपरेटरों की योग्यता की स्थिति पर निगरानी बढ़ने की संभावना है।

  • भोपाल में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप का शानदार समापन, NSS भोपाल बना विजेता; CM बोले- खेलों में लगातार आगे बढ़ रहा MP

    भोपाल में राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप का शानदार समापन, NSS भोपाल बना विजेता; CM बोले- खेलों में लगातार आगे बढ़ रहा MP


    भोपाल । भोपाल के बड़े तालाब पर छह दिनों तक चली राजा भोज मल्टी क्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप के तीसरे संस्करण का रविवार को भव्य समापन हुआ। बोट क्लब पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए और विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया। प्रतियोगिता में नेशनल सेलिंग स्कूल भोपाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया जबकि नेवी यूथ स्पोर्ट्स क्लब गोवा दूसरे और सिकंदराबाद तीसरे स्थान पर रहा। प्रतियोगिता में 12 क्लबों के 87 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और अलग अलग वर्गों में कुल 110 रेस के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। भोपाल में बड़े तालाब की लहरों पर आयोजित इस प्रतियोगिता ने शहर को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के वाटर स्पोर्ट्स केंद्र के रूप में पहचान दिलाई। भोपाल में इससे पहले भी राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप में देशभर के 100 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले चुके हैं।
    समापन समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश खेलों के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक एक स्टेडियम विकसित किया जाए। इन स्टेडियमों के साथ अलग अलग खेलों के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है ताकि गांव और छोटे शहरों में मौजूद प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का अवसर मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल विभाग का बजट बढ़ाना उनके लिए संतोष और खुशी की बात है। उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत को प्रदेश की बढ़ती खेल उपलब्धियों का महत्वपूर्ण आधार बताया।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक कुछ वर्ष पहले तक राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में मध्यप्रदेश की स्थिति 16वें या 17वें स्थान के आसपास थी लेकिन अब प्रदेश तीसरे स्थान तक पहुंच चुका है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय खिलाड़ियों की मेहनत और खेल सुविधाओं के विस्तार को दिया। उनका कहना था कि ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की उपलब्धियों में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है।

    डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में फिलहाल 18 खेलों के लिए 11 खेल अकादमियां संचालित की जा रही हैं। सरकार का जोर केवल खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने तक सीमित नहीं है बल्कि उनके प्रशिक्षण शिक्षा और भविष्य के अवसरों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कोचों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षकों के करियर और भविष्य की चिंता करना भी जरूरी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत खेलों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

    प्रतियोगिता के दौरान बड़े तालाब की लहरों पर खिलाड़ियों ने संतुलन गति और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। अलग अलग वर्गों में खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। राष्ट्रीय रैंकिंग से जुड़ी इस प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन खिलाड़ियों के लिए आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मजबूत करने में मददगार माना जा रहा है।

    NSS भोपाल की विजेता टीम में वायु चंद्रवंशी माही वर्मा तुलसी पटले एकलव्य वायम वंशिका शिकारवार आर्यन पाटीदार प्रार्थना मोई अंकित सिसोदिया समर पंचेश्वर और सिद्धि टंडन शामिल रहे। वहीं NYSC गोवा की उपविजेता टीम में शशांक जाधव हृदय जोशी मोह रिजवान शिवम वाल्मीकि और हेमंत पपौला शामिल रहे। NSS भोपाल के मुख्य प्रशिक्षक जीएल यादव के साथ राम मिलन नरेंद्र एस राजपूत और अनिल शर्मा ने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया।

    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि भोपाल का बड़ा तालाब प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत है और सरकार इसका उपयोग खेल के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से भोपाल में खेल संग्रहालय विकसित करने का आग्रह किया ताकि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों और उनकी उपलब्धियों को एक स्थान पर प्रदर्शित किया जा सके। उन्होंने बड़े तालाब में शिकारा संचालन को भी पर्यटन विकास से जोड़ने की बात कही।

    समारोह में मुख्यमंत्री ने जूडो में कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक विजेता यामिनी मौर्य समेत विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों को सम्मानित किया। शॉटपुट खिलाड़ी समरदीप सिंह गिल पोल वॉल्ट खिलाड़ी देव कुमार मीणा कुलदीप कुमार और फेंसिंग खिलाड़ी खुशी दाबोड़े को भी सम्मान मिला। जूनियर हॉकी चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की टीम के खिलाड़ियों का भी सम्मान किया गया।

    मध्यप्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने में भोपाल की झीलों की अहम भूमिका है। राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना 2007 में हुई थी जहां सेलिंग रोइंग कयाकिंग केनोइंग और स्लालम जैसी विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। राजा भोज सेलिंग चैंपियनशिप जैसे आयोजन इस बुनियादी ढांचे और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से विधानसभा स्तर तक खेल सुविधाएं बढ़ाने की योजना पर जोर दिए जाने से आने वाले समय में प्रदेश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से भी नई खेल प्रतिभाओं के सामने आने की उम्मीद है।

  • अमेरिका में नई कार की पूजा के दौरान पंडित ने स्वस्तिक बनाने से किया इनकार, सामने आई बड़ी वजह

    अमेरिका में नई कार की पूजा के दौरान पंडित ने स्वस्तिक बनाने से किया इनकार, सामने आई बड़ी वजह

    नई दिल्ली ।विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी सांस्कृतिक जड़ों और धार्मिक परंपराओं को सहेजकर रखने के लिए जाने जाते हैं। चाहे कोई नया घर खरीदना हो या नई गाड़ी, पूजा-पाठ और अनुष्ठान की रस्में पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती हैं। हाल ही में अमेरिका से एक ऐसा ही दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां एक भारतीय मूल की महिला ने अपनी नई कार की वैदिक रीति-रिवाज से पूजा कराई। हालांकि, इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान एक अनोखी स्थिति देखने को मिली, जब पंडित ने गाड़ी पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाने से मना कर दिया।

    सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के अनुसार, अमेरिका में रह रही सारिका नाम की कंटेंट क्रिएटर ने अपनी नई कार की पूजा का आयोजन किया था। इस दौरान धोती-कुर्ता पहने पंडित ने भारतीय परंपरा के अनुसार पूरी विधि से पूजा संपन्न कराई। कार के बोनट पर सिंदूर से भगवान गणेश की आकृति बनाई गई, पुष्प अर्पित किए गए और सुरक्षा की कामना के साथ गंगाजल का छिड़काव किया गया। इसके अतिरिक्त, टायर के नीचे नींबू रखकर गाड़ी आगे बढ़ाने जैसी पारंपरिक रस्म भी पूरी की गई।

    पूजा के दौरान जब महिला ने कार पर ‘ओम’ और ‘स्वस्तिक’ बनाने का अनुरोध किया, तो पंडित ने ‘ओम’ का चिन्ह सहजता से अंकित कर दिया। हालांकि, जब स्वस्तिक बनाने की बात आई तो उन्होंने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। पंडित का यह फैसला किसी धार्मिक मान्यता या मतभेद के कारण नहीं, बल्कि अमेरिका में स्वस्तिक को लेकर व्याप्त गलतफहमी और उससे उत्पन्न होने वाले संभावित विवादों से बचाव के लिए था।

    दरअसल, पश्चिमी देशों में कई लोग सनातन परंपरा के शुभ प्रतीक स्वस्तिक और नाजी जर्मनी के प्रतीक ‘हाकेनक्रूज’ के बीच अंतर नहीं समझ पाते हैं। अमेरिका में अनेक लोग स्वस्तिक को नाजी विचारधारा से जोड़कर देखने की भूल कर बैठते हैं। इसी भ्रम के कारण यह आशंका रहती है कि सार्वजनिक स्थान पर गाड़ी पर स्वस्तिक बना देखकर कोई स्थानीय निवासी विरोध दर्ज करा सकता है या फिर वाहन को क्षति पहुंचा सकता है।

    सांस्कृतिक विशेषज्ञों के अनुसार, हिंदू धर्म में स्वस्तिक को हजारों वर्षों से अत्यंत पवित्र, मंगलकारी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता रहा है। किसी भी शुभ कार्य, नए प्रतिष्ठान या वाहन क्रय पर स्वस्तिक का निर्माण अनिवार्य माना जाता है। इसके विपरीत, पश्चिमी समाज में ऐतिहासिक कारणों से इस चिन्ह को लेकर एक नकारात्मक धारणा बनी हुई है। इसी व्यावहारिक समस्या को देखते हुए अमेरिका में कई भारतीय परिवार कार के बाहरी हिस्से पर स्वस्तिक बनाने के बजाय उसे कागज पर बनवाकर गाड़ी के अंदर रख लेते हैं।

    विदेशों में रहने वाले भारतीयों को अक्सर अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन करते समय स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों और संवेदनशीलता का ध्यान रखना पड़ता है। मध्य प्रदेश सहित भारत के विभिन्न राज्यों से विदेश गए लोग अपनी संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास करते हैं, लेकिन सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए समय-समय पर व्यावहारिक बदलाव भी अपनाते हैं।

    इस घटनाक्रम ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय प्रतीकों को लेकर जागरूकता और सही जानकारी के प्रसार की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय को पंडित जी की समझदारी और व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जिसने एक धार्मिक रस्म को किसी भी संभावित विवाद से बचा लिया।

  • टीकाकरण के बाद मासूम की मौत पर परिजनों का ओवरडोज का आरोप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज

    टीकाकरण के बाद मासूम की मौत पर परिजनों का ओवरडोज का आरोप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज


    भोपाल । भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र की नवजीवन कॉलोनी में दो माह की मासूम बच्ची की इलाज के दौरान मौत के बाद हड़कंप मच गया है। बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया है कि 14 अगस्त को आंगनवाड़ी केंद्र में टीकाकरण और पोलियो की दवा पिलाए जाने के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी। परिवार का दावा है कि बच्ची को पोलियो की सात बूंद दवा पिलाने के साथ तीन इंजेक्शन भी लगाए गए थे। इसके बाद उसकी हालत खराब होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां रविवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक फिलहाल टीकाकरण और बच्ची की मौत के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मृत बच्ची की पहचान लक्ष्मी के रूप में हुई है। वह नवजीवन कॉलोनी छोला क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रहती थी। परिवार मूल रूप से सिरोंज का रहने वाला बताया जा रहा है। परिजनों के मुताबिक लक्ष्मी परिवार की इकलौती बेटी थी और उसका एक बड़ा भाई है। बच्ची की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजन पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

    परिवार के अनुसार 14 अगस्त को लक्ष्मी को नियमित स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी केंद्र ले जाया गया था। वहां उसे पोलियो की दवा पिलाई गई और टीकाकरण किया गया। परिजनों का दावा है कि इसी दौरान बच्ची को तीन इंजेक्शन भी लगाए गए। घर लौटने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। उसकी हालत को देखते हुए परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान उसकी हालत गंभीर बनी रही और रविवार सुबह उसने दम तोड़ दिया।

    बच्ची के पिता हलके राम ने आरोप लगाया है कि दो माह की मासूम को सात बूंद पोलियो दवा पिलाने के अलावा तीन इंजेक्शन लगाए गए थे। उनका कहना है कि दवा या इंजेक्शन की अधिक मात्रा के कारण बच्ची की तबीयत बिगड़ी और बाद में उसकी मौत हो गई। हालांकि यह परिवार का आरोप है और इसकी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने भी मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    छोला मंदिर थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी के मुताबिक परिजनों के बयान में टीकाकरण के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। पुलिस ने मर्ग कायम किया है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बच्ची को केंद्र पर कौन से टीके लगाए गए थे और उसे कौन सी दवा दी गई थी। संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों से जानकारी लेने के साथ रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    स्वास्थ्य कार्यक्रमों में बच्चों को टीके और पोलियो की दवा देना नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। मध्यप्रदेश में पल्स पोलियो अभियान के दौरान पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाती रही है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक इसका उद्देश्य बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखना है। ऐसे में इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि बच्ची की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और क्या उसकी तबीयत बिगड़ने के पीछे टीकाकरण से जुड़ी कोई प्रतिकूल प्रतिक्रिया थी या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण। इसका जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।

    फिलहाल पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। परिवार की ओर से लगाए गए ओवरडोज और लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई। जांच रिपोर्ट सामने आने तक टीकाकरण को मौत का कारण बताना जल्दबाजी होगी।

  • पिता धर्मेंद्र की सुरक्षात्मक सोच के कारण अधूरा रह गया सनी देओल का पेशेवर रेसर बनने का बड़ा सपना

    पिता धर्मेंद्र की सुरक्षात्मक सोच के कारण अधूरा रह गया सनी देओल का पेशेवर रेसर बनने का बड़ा सपना

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सनी देओल ने अपने निजी जीवन और बचपन की इच्छाओं को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। एक लोकप्रिय टीवी क्विज शो के दौरान दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन से बातचीत करते हुए सनी देओल ने बताया कि वह एक समय पेशेवर फॉर्मूला वन रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे, लेकिन अपने पिता धर्मेंद्र के कारण उनका यह सपना अधूरा ही रह गया।

    सनी देओल हाल ही में अपनी नई फिल्म के प्रचार सिलसिले में सह-कलाकारों आमिर खान और प्रीति जिंटा के साथ पहुंचे थे। बातचीत के दौरान जब अमिताभ बच्चन ने उनके रेसिंग के प्रति जुनून के बारे में पूछा, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें तेज ड्राइविंग और थ्रिलर स्पोर्ट्स का बेहद शौक था। हालांकि, पारिवारिक माहौल और पिता के कड़े रुख के चलते वे इसमें आगे नहीं बढ़ सके।

    अभिनेता ने बताया कि उनके पिता धर्मेंद्र बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा बेहद सतर्क और संवेदनशील रहते थे। उस दौर में मोटर स्पोर्ट्स और फॉर्मूला वन रेसिंग जैसे खेलों को काफी जोखिम भरा और खतरनाक माना जाता था। इसी वजह से धर्मेंद्र जी ने उन्हें ऐसे किसी भी खतरनाक खेल में उतरने की अनुमति नहीं दी और उनका यह शौक महज एक इच्छा बनकर रह गया।

    भले ही सनी देओल का रेसिंग ड्राइवर बनने का सपना पूरा न हो सका हो, लेकिन उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक सफल और प्रतिष्ठित अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1983 में फिल्म ‘बेताब’ से अपने अभिनय सफर की शुरुआत करने वाले सनी ने ‘घायल’, ‘दामिनी’, ‘बॉर्डर’ और ‘गदर’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं, जिनकी बदौलत वे आज भी दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं।

    वर्तमान में सनी देओल अपनी नई रिलीज हुई फिल्म के प्रचार-प्रसार में व्यस्त हैं, जिसका निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है। इस फिल्म में उनके साथ प्रीति जिंटा, करण देओल, शबाना आजमी और अली फजल जैसे मंझे हुए कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इमरान हाशमी की नई एक्शन फिल्म के साथ कड़े मुकाबले का सामना कर रही है।

    मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में सनी देओल के प्रशंसकों के बीच उनकी फिल्मों को लेकर हमेशा से जबरदस्त उत्साह देखने को मिलता रहा है। दर्शक उनके एक्शन और दमदार अभिनय को खूब पसंद करते हैं, और उनके पारिवारिक जीवन से जुड़ी यह नई बात जानकर उनके प्रशंसक काफी प्रभावित दिख रहे हैं।

    फिल्म विश्लेषकों का मानना है कि सनी देओल का यह ईमानदारी भरा स्वीकारोक्ति बयान यह दर्शाता है कि भारतीय परिवारों में माता-पिता की सुरक्षात्मक सोच बच्चों के फैसलों को किस तरह प्रभावित करती है। बहरहाल, सिनेमा जगत में अपने चार दशक लंबे करियर में सनी देओल ने जो मुकाम हासिल किया है, वह बेहद सराहनीय है।

  • पत्नी सुनीता के बयानों पर अभिनेता गोविंदा का पलटवार, कहा- मुझे बदनाम करने की रची जा रही है साजिश

    पत्नी सुनीता के बयानों पर अभिनेता गोविंदा का पलटवार, कहा- मुझे बदनाम करने की रची जा रही है साजिश

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच जारी आपसी खींचतान अब सार्वजनिक रूप से खुलकर सामने आ गई है। अपनी पत्नी के हालिया बयानों पर चुप्पी तोड़ते हुए अभिनेता ने एक वीडियो संदेश के जरिए कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। गोविंदा ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी उनके पेशेवर जीवन और काम में अड़चनें पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।

    सोशल मीडिया पर सामने आए बयान में गोविंदा ने कहा कि उनकी पत्नी उन्हें सार्वजनिक तौर पर नीचा दिखाने और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। अभिनेता ने स्पष्ट किया कि रियलिटी शो ‘लॉकअप’ में वह अपनी मर्जी से नहीं गए थे, बल्कि उनकी पत्नी ने बेटी टीना के जरिए उन्हें वहां आने के लिए कहा था, जिसके बाद वह वहां पहुंचे थे।

    अभिनेता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब उनकी पत्नी अपने कार्यक्रमों में व्यस्त थीं, तब उन्होंने हमेशा उनका सहयोग किया और अपनी सेवाएं दीं। हालांकि, अब जब वे अपने नए प्रोजेक्ट्स और फिल्मों पर काम शुरू कर रहे हैं, तो उनके काम में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है। गोविंदा का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से उनके व्यावसायिक अवसरों और जनमानस में उनकी साख पर असर पड़ रहा है।

    हाल ही में सुनीता आहूजा द्वारा एक अन्य अभिनेत्री को लेकर दी गई टिप्पणियों पर भी गोविंदा ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि फिल्म उद्योग में संघर्ष कर रहे या साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले कलाकारों को इस तरह अपमानित या जलील नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर प्रदत्त क्षमता और शोहरत का इस्तेमाल दूसरों को नीचा दिखाने के लिए करना किसी को शोभा नहीं देता।

    उल्लेखनीय है कि सुनीता आहूजा कुछ समय पूर्व एक रियलिटी शो का हिस्सा बनी थीं, लेकिन स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए वे बीच में ही बाहर आ गई थीं। उस दौरान गोविंदा अपनी बेटी के साथ उन्हें लेने पहुंचे थे। इस पारिवारिक विवाद की चर्चा अब पूरे मनोरंजन जगत में जोर-शोर से हो रही है।

    उत्तर भारत और मध्य प्रदेश सहित देश भर में गोविंदा के प्रशंसकों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग अभिनेता के आगामी प्रोजेक्ट्स का इंतजार कर रहे हैं, जबकि यह देखना बाकी है कि इस पारिवारिक बयानबाजी पर आगे क्या स्थिति बनती है।