Blog

  • रजक समाज ने भोपाल में किया जोरदार प्रदर्शन, एक प्रदेश, एक आरक्षण की मांग

    रजक समाज ने भोपाल में किया जोरदार प्रदर्शन, एक प्रदेश, एक आरक्षण की मांग


    भोपाल में गुरुवार को रजक समाज ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। एक प्रदेश, एक समुदाय, एक आरक्षण का नारा लगाते हुए प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री निवास के घेराव के लिए आगे बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इसके बाद आंदोलनकारी वहीं धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।

    प्रदर्शन के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक मुख्यमंत्री से सीधी मुलाकात नहीं होगी और ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा। कुछ नेताओं ने आमरण अनशन की भी घोषणा की। इस मौके पर संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक कैलाश नाहर ने बताया कि वर्तमान में रजक/धोबी जाति को केवल भोपाल, सीहोर और रायसेन जिलों में अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में यही जाति पिछड़ा वर्ग में शामिल है।

    कैलाश नाहर ने कहा कि एक ही राज्य में एक ही समुदाय के लिए अलग-अलग आरक्षण व्यवस्था लागू करना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। विवाह के बाद बच्चों की श्रेणी बदल जाना प्रशासनिक और सामाजिक विसंगति पैदा करता है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि 14 जुलाई 2006 को मध्यप्रदेश शासन ने रजक/धोबी समाज को पूरे प्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा था, लेकिन आदिम जाति अनुसंधान संस्थान की टिप्पणी के आधार पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

    प्रदेश संयोजक मोनू लक्ष्मण ने कहा कि समाज अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से यह मांग की गई है कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना को ध्यान में रखते हुए ऐतिहासिक निर्णय लिया जाए और केंद्र सरकार को पुनः प्रस्ताव भेजकर रजक/धोबी समाज को संपूर्ण मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए।

    प्रदर्शन के दौरान रजक समाज के लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें प्रस्तुत करते रहे और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि आंदोलनकारियों ने यह स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो आंदोलन तेज और व्यापक स्तर पर जारी रहेगा।

    इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश में सामाजिक न्याय और आरक्षण की नीति पर चर्चा को नया आयाम दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में समान जाति के लिए अलग-अलग आरक्षण व्यवस्था सामाजिक असमानता पैदा कर सकती है और इसके समाधान के लिए स्पष्ट सरकारी कदम जरूरी हैं।

    रजक समाज का यह प्रदर्शन राजधानी में सामाजिक न्याय की मांग और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति सजगता को दर्शाता है। आमरण अनशन और ज्ञापन के माध्यम से उनका उद्देश्य सरकार को संवैधानिक और सामाजिक उत्तरदायित्व की याद दिलाना है।

  • मध्य प्रदेश कैलेंडर विवाद: हिरण की तस्वीर पर दिग्विजय सिंह और भाजपा में जुबानी जंग

    मध्य प्रदेश कैलेंडर विवाद: हिरण की तस्वीर पर दिग्विजय सिंह और भाजपा में जुबानी जंग


    भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी कैलेंडर पर छपी एक हिरण की तस्वीर ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि कैलेंडर पर जिस हिरण का चित्र लगाया गया है, वह इम्पाला है, जो केवल अफ्रीका में पाया जाता है और न तो मध्य प्रदेश में मिलता है और न ही पूरे भारत में। दिग्विजय ने पोस्ट में लिखा, मुख्यमंत्री जी, जिस हिरण का चित्र आपने एमपी के कैलेंडर पर लगाया है वह एमपी में ही नहीं बल्कि भारत में भी नहीं पाया जाता। कृपया सोच-समझ कर शासकीय कैलेंडर पर चित्र लगवाया करें। जय सिया राम।”

    पूर्व मुख्यमंत्री के इस पोस्ट के बाद उनके बेटे और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने भी समर्थन जताया। जयवर्धन ने कहा कि मध्य प्रदेश एक वाइल्डलाइफ स्टेट है, बावजूद इसके कैलेंडर में विदेशी हिरण की तस्वीर छापी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें जमीनी स्तर की जानकारी नहीं है और इस कदम से बड़ी त्रुटि हुई है।

    भाजपा की ओर से पलटवार करते हुए प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस नेता बच्चों की पुलिस की तरह व्यवहार कर रहे हैं। सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल विरोध के लिए विरोध कर रही है और नकारात्मक राजनीति में लिप्त है। उन्होंने कहा कि मूल मुद्दों पर ध्यान न देकर ऐसे तुच्छ विवाद उठाना उनकी आदत बन गई है।

    यह विवाद इस बात को उजागर करता है कि सरकारी कैलेंडर और प्रतीकों को लेकर राजनीतिक दल कितनी तेजी से प्रतिक्रियाशील हो जाते हैं। दिग्विजय और जयवर्धन का तर्क है कि राज्य की पहचान और प्राकृतिक विरासत को सही रूप में प्रस्तुत करना जरूरी है। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि ऐसे मुद्दों को राजनीतिक हथियार बनाना सही नहीं है।

    मध्य प्रदेश में वाइल्डलाइफ और जैवविविधता के संरक्षण को लेकर यह बहस एक नई दिशा में बढ़ सकती है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है। लेकिन इस विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सामाजिक मीडिया पर एक छोटी सी छवि भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकती है।

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला केवल कैलेंडर का नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सांस्कृतिक प्रतीकों और स्थानीय पहचान को लेकर बढ़ते मतभेद का संकेत है। इस मामले में जनता और मीडिया की नजरें अब इस पर टिकी हुई हैं कि सरकार इस मुद्दे का समाधान कैसे करती है और क्या भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए कदम उठाए जाते हैं।

  • राजामौली का दावा: 'वाराणसी' में बाहुबली से भी ज्यादा भव्य और दमदार सिनेमाई अनुभव

    राजामौली का दावा: 'वाराणसी' में बाहुबली से भी ज्यादा भव्य और दमदार सिनेमाई अनुभव



    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एस. एस. राजामौली इन दिनों अपनी मेगा बजट फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। करीब 1300 करोड़ रुपये के बजट में बन रही यह एक्शन-एडवेंचर फिल्म अगले साल रिलीज के लिए तैयार बताई जा रही है। फिल्म में महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनास और पृथ्वीराज सुकुमारन लीड रोल में नजर आएंगे। रिलीज से पहले ही यह प्रोजेक्ट देश-विदेश में जबरदस्त चर्चा बटोर रहा है।

    हैदराबाद स्थित अन्नपूर्णा स्टूडियो में हाल ही में शुरू हुई अत्याधुनिक मोशन कैप्चर फैसिलिटी में फिल्म के कई अहम सीक्वेंस शूट किए गए हैं। राजामौली का कहना है कि यह भारत की सबसे उन्नत मो-कैप लैब में से एक है, जहां हाई-प्रिसिजन टेक्नोलॉजी के जरिए बड़े और जटिल दृश्यों को पहले से ज्यादा प्रभावशाली ढंग से फिल्माया जा सकता है।

    इसी दौरान राजामौली ने अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म बाहुबली: द बिगिनिंग का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर उस समय भारत में इतनी एडवांस मोशन कैप्चर तकनीक उपलब्ध होती, तो वे ‘बाहुबली’ और ‘ईगा’ जैसी फिल्मों को और भी बेहतर बना सकते थे। उनके मुताबिक भारत में टैलेंट की कभी कमी नहीं रही, लेकिन विश्वस्तरीय तकनीकी ढांचे की कमी के कारण कई बार विज़न को पूरी क्षमता के साथ पर्दे पर उतारना संभव नहीं हो पाता था।

    राजामौली ने बताया कि अब हालात बदल रहे हैं। नई तकनीक की बदौलत भारतीय फिल्मकारों को बड़े विजुअल सीक्वेंस के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ‘वाराणसी’ के कुछ जटिल एक्शन और फैंटेसी दृश्यों में इसी मोशन कैप्चर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसके परिणाम से टीम बेहद संतुष्ट है।

    फिल्म की पहली झलक पेरिस के प्रतिष्ठित सिनेमा हॉल Le Grand Rex में आयोजित एक ट्रेलर फेस्टिवल में दिखाई गई, जहां दर्शकों ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी। इससे साफ है कि ‘वाराणसी’ को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्सुकता बढ़ चुकी है।

    पोस्टर्स में महेश बाबू का ‘रुद्र’, पृथ्वीराज का ‘कुंभ’ और प्रियंका का ‘मंदाकिनी’ अवतार पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुका है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो यह फिल्म 7 अप्रैल 2027 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। राजामौली का मानना है कि नई तकनीक और बड़े विज़न का यह संगम भारतीय सिनेमा को एक नए स्तर पर ले जाएगा—और शायद यही वजह है कि वे आज भी मानते हैं, “बाहुबली को मैं और बेहतर बना सकता था।”

  • पॉलिसी सरेंडर करने से पहले रुकिए! वरना डूब सकते हैं हजारों-लाखों रुपए

    पॉलिसी सरेंडर करने से पहले रुकिए! वरना डूब सकते हैं हजारों-लाखों रुपए



    नई दिल्ली। इंश्योरेंस पॉलिसी लेना आसान है, लेकिन बीच में उसे छोड़ना भारी पड़ सकता है। कई लोग आर्थिक दबाव, बदलती प्राथमिकताओं या गलत वित्तीय योजना के कारण पॉलिसी सरेंडर करने का फैसला कर लेते हैं, जबकि इसके दूरगामी नुकसान को पूरी तरह समझ नहीं पाते। पॉलिसी को तय अवधि से पहले बंद करने पर बीमा कंपनी पूरी जमा राशि वापस नहीं करती, बल्कि कटौतियों के बाद जो रकम देती है उसे ‘सरेंडर वैल्यू’ कहा जाता है। शुरुआती वर्षों में यह राशि अक्सर भरे गए कुल प्रीमियम से काफी कम होती है, क्योंकि पहले कुछ सालों में प्रीमियम का बड़ा हिस्सा कमीशन और प्रशासनिक खर्च में चला जाता है।

    सबसे बड़ा झटका यह होता है कि पॉलिसी बंद करते ही जीवन बीमा कवरेज तुरंत समाप्त हो जाता है। यानी किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार को कोई डेथ बेनिफिट नहीं मिलेगा। टर्म इंश्योरेंस के मामले में तो कोई बचत घटक होता ही नहीं, इसलिए उसे बीच में छोड़ने पर कोई पैसा वापस नहीं मिलता। वहीं एंडोमेंट, मनी-बैक या ULIP जैसी योजनाओं में कुछ सरेंडर वैल्यू मिल सकती है, लेकिन भविष्य के बोनस, गारंटीड रिटर्न और मैच्योरिटी लाभ खत्म हो जाते हैं।

    बीमा नियामक Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) ने हाल के वर्षों में कुछ नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे पारंपरिक पॉलिसियों में सरेंडर वैल्यू पहले की तुलना में कुछ बेहतर हो सकती है, खासकर यदि कम से कम एक साल का प्रीमियम जमा किया गया हो। फिर भी, यह जरूरी नहीं कि नुकसान पूरी तरह टल जाए।

    पूरी तरह पॉलिसी बंद करने की बजाय ‘पेड-अप’ विकल्प पर विचार किया जा सकता है, जिसमें आगे प्रीमियम देना बंद कर दिया जाता है, लेकिन कम बीमा राशि के साथ पॉलिसी जारी रहती है। इसके अलावा, कंपनियां 15–30 दिन का ग्रेस पीरियड देती हैं और कुछ शर्तों के तहत लैप्स पॉलिसी को दोबारा चालू (रिवाइवल) भी किया जा सकता है।

    इसलिए पॉलिसी सरेंडर करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, परिवार की सुरक्षा, सरेंडर चार्ज, भविष्य के लाभ और वैकल्पिक विकल्पों का संतुलित आकलन करना बेहद जरूरी है। जल्दबाजी में लिया गया फैसला भविष्य में बड़ी आर्थिक और सुरक्षा संबंधी परेशानी का कारण बन सकता है।

  • चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और शिवराज सिंह सहित नेताओं ने किया बलिदान दिवस पर याद

    चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और शिवराज सिंह सहित नेताओं ने किया बलिदान दिवस पर याद


    नई दिल्ली । देश के महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि आज 27 फरवरी को बलिदान दिवस के रूप में मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आजाद का बलिदान और त्याग हमेशा देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया जिसके लिए वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।

    पीएम मोदी के अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा मां भारती के अमर सपूत महान क्रांतिकारी वीर हुतात्मा चंद्रशेखर आजाद जी के बलिदान दिवस पर उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके ओजस्वी विचार और तेजस्वी जीवन जन जन को राष्ट्र और समाज की उन्नति एवं सेवा के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे। मातृभूमि का कण कण आपका अनंत काल तक ऋणी रहेगा।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में चंद्रशेखर आजाद को याद करते हुए कहा दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे आजाद ही रहे हैं आजाद ही रहेंगे। मातृभूमि की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। उनका त्याग और तेजस्वी व्यक्तित्व युगों युगों तक राष्ट्र सेवा एवं मां भारती के प्रति बलिदान की प्रेरणा देता रहेगा।

    इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद अब प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में चंद्रशेखर आजाद और अंग्रेजों के बीच लंबी मुठभेड़ हुई। जब उनकी गोलियों का स्टॉक समाप्त हो गया तो उन्होंने अंतिम गोली खुद को मारकर अपना बलिदान दे दिया। उनके इस अदम्य साहस और देशभक्ति के कारण हर साल इस दिन को बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

    चंद्रशेखर आजाद का जीवन स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का प्रतीक है। उनके त्याग और साहस ने आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए प्रेरित किया। उनके बलिदान को याद कर देशवासियों में आज भी देशभक्ति की भावना जागृत होती है। नेता और नागरिक समान रूप से उन्हें याद करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देते हैं।

    आजाद की पुण्यतिथि पर सभी नेताओं ने यह संदेश दिया कि मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर करना सर्वोच्च बलिदान है। उनका जीवन यह सिखाता है कि स्वतंत्रता और देशभक्ति केवल शब्द नहीं बल्कि कर्म और समर्पण का नाम है। चंद्रशेखर आजाद हमेशा स्मरणीय रहेंगे और उनके बलिदान की कहानी हर दिल में जीवित रहेगी।

  • खेल-खेल में हादसा: घड़ी का सेल निगलने के बाद बच्चे की जान बचाई डॉक्टरों ने

    खेल-खेल में हादसा: घड़ी का सेल निगलने के बाद बच्चे की जान बचाई डॉक्टरों ने


    खंडवा से बुधवार को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। बुरहानपुर निवासी 10 वर्षीय कृष्णा खेलते समय गलती से अपनी घड़ी का सेल निगल बैठा। छोटे बच्चे की लापरवाही एक बड़ी परेशानी बन गई, जब सेल गले के निचले हिस्से में फंस गया। कृष्णा को तेज दर्द, बेचैनी और सांस लेने में कठिनाई होने लगी, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।

    परिवार ने देखते ही बच्चे को जिला अस्पताल सह शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय खंडवा पहुंचाया। वहां के नाक-कान-गला विभाग (ईएनटी) में डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत एक्स-रे जांच कराई। जांच में स्पष्ट हुआ कि घड़ी का सेल आहार नली के निचले हिस्से में फंस गया है और यदि समय पर कार्रवाई न की जाए तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

    विभागाध्यक्ष और ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. सुनील बाजोलिया ने तुरंत उपचार की कमान संभाली। उन्होंने अपनी टीम के साथ बिना समय गंवाए दूरबीन पद्धति यानी एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से ऑपरेशन शुरू किया। यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और जटिल थी, क्योंकि घड़ी का सेल गले के नाजुक हिस्से में फंसा हुआ था।

    करीब आधे घंटे की लगातार मेहनत और विशेषज्ञता के बाद डॉक्टरों ने बच्चे की घड़ी का सेल सुरक्षित निकाल लिया। बच्चे की जान इस समय पूरी तरह सुरक्षित बताई जा रही है और वह अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट रहा है।

    डॉ. बाजोलिया ने बताया कि बच्चों की ऐसी लापरवाही अक्सर गंभीर परिणाम दे सकती है। खेलते समय छोटे सामान निगल जाने की घटनाएं आम हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से बड़ी अनहोनी टली जा सकती है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों पर नजर रखें और छोटे-छोटे खतरनाक सामान उनके हाथों से दूर रखें।

    इस घटना ने खंडवा अस्पताल की ईएनटी टीम की विशेषज्ञता और तत्परता को भी उजागर किया। बच्चे की स्थिति को देखते हुए तुरंत एक्स-रे, सही निदान और एंडोस्कोपिक प्रक्रिया ने मुश्किल हालात में भी जान बचाई। परिवार ने डॉक्टरों की सराहना की और कहा कि समय पर इलाज मिलने से बड़े हादसे से बचा जा सका।

    खेलते समय बच्चों की सुरक्षा और सतर्कता पर इस घटना ने एक बार फिर जोर दिया। अस्पताल अधिकारियों का कहना है कि समय रहते सही कदम उठाने से ऐसी अनहोनी टाली जा सकती है और छोटे-छोटे हादसे बड़े संकट में नहीं बदलते।

  • नौकरी जाने का तनाव, शराब और हादसा: भोपाल में सीढ़ियों से गिरकर युवक की मौत

    नौकरी जाने का तनाव, शराब और हादसा: भोपाल में सीढ़ियों से गिरकर युवक की मौत


    भोपाल  भोपाल के छोला मंदिर इलाके में गुरुवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में 36 वर्षीय मधुर नामदेव की मौत हो गई। वह कैंची छोला फाटक के पास अपने परिवार के साथ रहता था। जानकारी के अनुसार मधुर पूर्व में जिंसी स्थित एक कार शोरूम में ड्राइवर के रूप में कार्यरत था, लेकिन करीब दो महीने पहले उसकी नौकरी छूट गई थी। तब से वह नई नौकरी की तलाश में लगातार शोरूम और अन्य स्थानों पर रिज्यूमे दे रहा था, मगर सफलता नहीं मिल रही थी, जिससे वह मानसिक तनाव में रहने लगा था।

    गुरुवार रात वह शराब के नशे में घर लौटा। बताया जा रहा है कि दूसरी मंजिल पर जाने के लिए सीढ़ियां चढ़ते समय उसका संतुलन बिगड़ा और वह नीचे गिर गया। गिरने से उसके सिर में गंभीर चोट आई। परिजन उसे संभाल पाते, उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी। शुक्रवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि हादसा नशे की हालत में पैर फिसलने से हुआ। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। बेरोजगारी, मानसिक तनाव और नशे की बढ़ती आदत ने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया, और यह घटना एक बार फिर सामाजिक व व्यक्तिगत दबावों के गंभीर परिणामों की ओर इशारा करती है।

  • गोवा हादसे में पिता की मौत, बेटी का दर्द छलका: बदला नहीं, इंसाफ चाहिए

    गोवा हादसे में पिता की मौत, बेटी का दर्द छलका: बदला नहीं, इंसाफ चाहिए


    नई दिल्ली। 23 फरवरी को जन्मदिन मनाने गोवा पहुंची रुचिका शर्मा के लिए यह तारीख हमेशा का जख्म बन गई। तेज रफ्तार थार की टक्कर में उनके पिता भगतराम शर्मा की मौत हो गई, मां लीला शर्मा गंभीर रूप से घायल हैं और तीन महीने की मासूम बच्ची भी चोटिल हुई। रुचिका का आरोप है कि हादसे के बाद आरोपी मदद करने के बजाय वीडियो बनाता रहा और एंबुलेंस बुलाने की जगह अपने पिता को फोन किया। परिवार का कहना है कि अगर उस वक्त संवेदनशीलता दिखाई जाती, तो शायद दर्द कुछ कम होता।

    परिजन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहते हैं कि भगतराम शर्मा की गर्दन टूटने और अंदरूनी रक्तस्राव से मौत हुई, जबकि मां की पेल्विस, पसलियों और कंधे में फ्रैक्चर है। गोवा पुलिस के मुताबिक गाड़ी शौर्य नामक युवक चला रहा था, उसे गिरफ्तार कर जमानत मिल चुकी है। परिवार का कहना है कि यह सिर्फ सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक पूरा परिवार टूटने की कहानी है। रुचिका ने कहा, “हमें बदला नहीं, इंसाफ चाहिए, ताकि कोई और बेटी अपने पिता को इस तरह न खोए।

  • ग्वालियर में हर्बल गुलाल की बढ़ती मांग, त्वचा और स्वास्थ्य बनी प्राथमिकता..

    ग्वालियर में हर्बल गुलाल की बढ़ती मांग, त्वचा और स्वास्थ्य बनी प्राथमिकता..

    ग्वालियर में होली का त्योहार अब सिर्फ चटख रंग और हुड़दंग तक सीमित नहीं रह गया है। शहर के लोग अब अपनी सेहत और त्वचा के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं। इस जागरूकता के चलते इस बार बाजार में केमिकल वाले पक्के रंगों की जगह हर्बल और आर्गेनिक गुलाल ने ले ली है।

    हाट बाजार में हर्बल गुलाल की मांग में तेजी देखी जा रही है। दुकानदारों ने भी प्राकृतिक रंगों का भारी स्टॉक जमा कर लिया है। पिछले कुछ वर्षों के अनुभवों ने लोगों को सतर्क कर दिया है। पक्के रंगों में मौजूद कांच के कण, लेड और अन्य खतरनाक केमिकल्स त्वचा में जलन, आंखों में समस्या और सांस की बीमारियों का कारण बनते रहे हैं। शहर के त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि होली के बाद क्लीनिकों में आने वाले मरीजों की संख्या पहले बढ़ जाती थी, लेकिन अब लोग खुद ही सतर्क हो रहे हैं और हर्बल गुलाल का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    ठिकाना शहर के फूलबाग के पास हाट बाजार में इस बार विशेष हर्बल कार्नर सजाए गए हैं। यहां स्थानीय स्वयं सहायता समूह और कारीगरों द्वारा तैयार किए गए रंग उपलब्ध हैं। रंग बनाने में गेंदे के फूल, चुकंदर, पालक और हल्दी का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा चंदन और गुलाब की खुशबू वाले गुलाल की डिमांड सबसे अधिक है। ये गुलाल चेहरे पर लगने के बाद भी सौम्य रहते हैं और त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते।

    27 फरवरी यानी शुक्रवार से हाट बाजार में होली पर स्पेशल मेला आयोजित किया जा रहा है। इसमें महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार हर्बल रंग और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। विनीत गुप्ता, डीपीएम, जिला पंचायत ने बताया कि मेले में प्राकृतिक रूप से तैयार किए गए गुलाल और रंग खरीदारों को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे होली खेलने पर स्किन को नुकसान नहीं पहुंचे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में हर्बल के नाम पर नकली रंग भी मिल सकते हैं। असली हर्बल गुलाल पहचानने का तरीका सरल है। इसे हाथों पर लगाने पर हल्का महसूस होना चाहिए। इसकी महक तेज या चुभने वाली नहीं होनी चाहिए। पानी से हाथ धोने पर यह आसानी से निकल जाता है और कोई दाग नहीं छोड़ता। इस तरह से लोग नकली और असली हर्बल रंग में अंतर कर सकते हैं।

    इस वर्ष ग्वालियर में होली का त्योहार न केवल रंगों से बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ नजर आ रहा है। लोगों की जागरूकता और स्थानीय कारीगरों की भागीदारी से यह पर्व अब पूरी तरह से सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके से मनाया जा सकेगा।

  • ग्वालियर व्यापार मेला में टूटा 100 साल का रिकॉर्ड: 38 दिन में 32,787 वाहन पंजीकृत, कारों ने बाइक को पछाड़ा

    ग्वालियर व्यापार मेला में टूटा 100 साल का रिकॉर्ड: 38 दिन में 32,787 वाहन पंजीकृत, कारों ने बाइक को पछाड़ा


    नई दिल्ली। ग्वालियर व्यापार मेला इस बार 100 साल के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए ऑटोमोबाइल सेक्टर में नया इतिहास रच गया है। 38 दिनों तक चलने वाले मेले में कुल 32,787 वाहनों का पंजीयन हुआ, जिनमें 17,736 कारें और 15,051 दोपहिया वाहन शामिल थे। पांच साल पहले जहां कारों की बिक्री करीब 7,500 थी, अब यह संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई, जो शहर की बढ़ती क्रय शक्ति और चार पहिया वाहनों की ओर रुझान को दर्शाती है।

    मेले के दौरान रोड टैक्स में 50% तक की छूट, आसान फाइनेंस सुविधा और ऑन-द-स्पॉट पंजीयन जैसे ऑफर्स ने ग्राहकों को आकर्षित किया। अंतिम दिन तक 1,351 वाहनों का पंजीयन हुआ, जिससे बिक्री में निरंतर उत्साह बना रहा। हालांकि 50 लाख से 2 करोड़ रुपए तक की लग्जरी कारों की बिक्री में गिरावट देखी गई, केवल 62 कारें बिकीं।

    आरटीओ विक्रमजीत सिंह कंग ने बताया कि लोगों ने दोपहिया की बजाय चार पहिया वाहनों पर अधिक ध्यान दिया। वाहन डीलरों और फाइनेंस कंपनियों में रिकॉर्ड बिक्री से उत्साह देखा गया है और कोविड काल के बाद बाजार में आई सुस्ती अब पूरी तरह समाप्त होती नजर आ रही है। कुल मिलाकर, ग्वालियर व्यापार मेला ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए ऐतिहासिक और आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी का संकेत बन गया है।

    कीवर्ड (कॉमा से अलग):
    ग्वालियर व्यापार मेला, रिकॉर्ड पंजीयन, 32,787 वाहन, कार बिक्री, दोपहिया वाहन, ऑटोमोबाइल सेक्टर, रोड टैक्स छूट, आसान फाइनेंस, ऑन-द-स्पॉट पंजीयन, लग्जरी कार, बाजार उत्साह, कोविड के बाद बाजार, आरटीओ विक्रमजीत सिंह कंग, आर्थिक गतिविधियां, वाहन डीलर, वाहन बिक्री, अंतिम दिन बिक्री, ग्वालियर, व्यापार मेले का इतिहास