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  • अब नहीं छूटेगा साल 5वीं 8वीं के फेल और अनुपस्थित छात्रों के लिए जून में फिर परीक्षा

    अब नहीं छूटेगा साल 5वीं 8वीं के फेल और अनुपस्थित छात्रों के लिए जून में फिर परीक्षा


    भोपाल । मध्यप्रदेश के भोपाल सहित पूरे प्रदेश में कक्षा 5वीं और 8वीं के छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है जहां फेल और अनुपस्थित विद्यार्थियों को एक और मौका दिया जा रहा है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब ये छात्र 1 जून से 6 जून 2026 के बीच आयोजित होने वाली पुन परीक्षा में शामिल हो सकेंगे जिससे उनका एक शैक्षणिक वर्ष बच सकता है।

    शिक्षण सत्र 2025 26 की मुख्य परीक्षा में असफल या अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। इस पुन परीक्षा में सरकारी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों अनुदान प्राप्त संस्थानों और पंजीकृत मदरसों में पढ़ने वाले छात्र भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई केवल एक परीक्षा के कारण बाधित न हो।

    परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश पत्र 25 मई तक उपलब्ध करा दिए जाएंगे। छात्र अपना एडमिट कार्ड राज्य शिक्षा केंद्र के आधिकारिक पोर्टल www.rskmp.in से डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए शाला प्रमुख जनशिक्षा केंद्र प्रभारी और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि सभी छात्रों तक समय पर प्रवेश पत्र पहुंचाया जाए।

    पुन परीक्षा की तैयारी को लेकर भी खास व्यवस्था की गई है। परीक्षा से पहले शाला स्तर पर विषयवार अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाएंगी ताकि छात्र बेहतर तरीके से तैयारी कर सकें। जिन छात्रों ने पहले प्रोजेक्ट कार्य पूरा नहीं किया था या जिनके अंक कम थे उन्हें दोबारा प्रोजेक्ट पूरा करने और मूल्यांकन का अवसर भी दिया जाएगा।

    इस बार परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था भी अलग तरीके से की गई है। सभी परीक्षा केंद्र जनशिक्षा केंद्र स्तर पर बनाए जाएंगे ताकि परीक्षा प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी रहे। यदि किसी केंद्र पर 500 से अधिक छात्र होते हैं तो राज्य शिक्षा केंद्र की अनुमति से अतिरिक्त केंद्र भी बनाए जा सकेंगे।

    परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्न पत्रों की ऑन द स्पॉट प्रिंटिंग की जाएगी। यानी प्रश्न पत्र सीधे परीक्षा केंद्र पर ही डाउनलोड और प्रिंट किए जाएंगे जिससे लीक जैसी समस्याओं की संभावना कम होगी।

    गर्मी के मौसम को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। हर परीक्षा केंद्र पर पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। साथ ही बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पिलाने लू और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ORS उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

    कुल मिलाकर यह पहल उन छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है जो किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे। अब उनके पास अपनी मेहनत से खुद को साबित करने और अगली कक्षा में आगे बढ़ने का एक और सुनहरा अवसर है।

  • नियम तोड़े तो नहीं मिलेगी राहत इंदौर में अवैध बिल्डिंग पर निगम की सख्त कार्रवाई

    नियम तोड़े तो नहीं मिलेगी राहत इंदौर में अवैध बिल्डिंग पर निगम की सख्त कार्रवाई


    इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर में अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम का सख्त रुख लगातार देखने को मिल रहा है। शहर के साउथ तोड़ा इलाके में निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक निर्माणाधीन भवन के अवैध हिस्सों पर बुलडोजर चला दिया जिससे इलाके में हड़कंप मच गया और अन्य निर्माणकर्ताओं के बीच भी संदेश साफ पहुंच गया कि नियमों के उल्लंघन पर अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

    जानकारी के मुताबिक साउथ तोड़ा क्षेत्र में करीब तीन हजार स्क्वेयर फीट में एक भवन का निर्माण किया जा रहा था लेकिन जांच में पाया गया कि इस निर्माण में कई हिस्से स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनाए जा रहे थे। जैसे ही इसकी सूचना नगर निगम को मिली टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बिना देरी किए कार्रवाई शुरू कर दी गई।

    नगर निगम के अधिकारियों ने जेसीबी मशीन की मदद से अवैध हिस्सों को तोड़ दिया। यह कार्रवाई मोहम्मद शरीफ के निर्माणाधीन भवन पर की गई जहां नियमों का खुला उल्लंघन सामने आया था। कार्रवाई के दौरान मौके पर पुलिस बल भी मौजूद रहा ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

    निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर में अवैध निर्माण को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    इस कार्रवाई के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी निर्माण कार्य कर रहे लोगों में हलचल देखी गई है। कई लोगों ने अपने निर्माण की वैधता को लेकर दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है ताकि किसी भी तरह की कार्रवाई से बचा जा सके।

    नगर निगम की इस सख्ती को शहर में व्यवस्थित विकास और कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि शहर के मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना की स्थिति न बने। इंदौर में लगातार हो रही इस तरह की कार्रवाइयों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि अवैध निर्माण करने वालों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं और नियमों का पालन ही एकमात्र रास्ता बचा है।

  • गाय बचाने की कोशिश में दर्दनाक हादसा सीहोर में बस पेड़ से टकराई हेल्पर की मौत

    गाय बचाने की कोशिश में दर्दनाक हादसा सीहोर में बस पेड़ से टकराई हेल्पर की मौत


    सीहोर/आष्टा। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में इंदौर भोपाल राज्यमार्ग पर एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है जहां तेज रफ्तार बस अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। आष्टा के कोठरी के पास हुए इस हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चार अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार अहमदाबाद से भोपाल जा रही वर्मा ट्रेवल्स की बस सुबह के समय इस मार्ग से गुजर रही थी। तभी अचानक सड़क पर एक गाय आ गई जिसे बचाने के प्रयास में चालक ने जोर से ब्रेक लगाया। इसी दौरान बस का टायर फट गया और वाहन का संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते बस सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई और जोरदार आवाज के साथ हादसा हो गया।

    हादसे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। केबिन में बैठे हेल्पर सुनील मुकाती जो बड़ी पोलाई के निवासी थे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वह केबिन में बुरी तरह फंस गए थे और उन्हें बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू टीम को कटर की मदद लेनी पड़ी।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत बचाव दल मौके पर पहुंचा और तत्काल घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। चार यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार हादसे का प्राथमिक कारण गाय को बचाने के प्रयास में अचानक ब्रेक लगाना और उसी दौरान टायर फटना माना जा रहा है। हालांकि पूरे मामले की जांच की जा रही है ताकि सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

    इस घटना के बाद कुछ समय के लिए मार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ जिसे बाद में नियंत्रित किया गया। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में सहयोग किया और घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की।

    यह हादसा एक बार फिर यह संकेत देता है कि सड़क पर अचानक आने वाली बाधाएं और तेज रफ्तार किस तरह जानलेवा साबित हो सकती हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है।

  • पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 भारत में नहीं दिखेगा फिर भी क्यों खास है यह खगोलीय घटना

    पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 भारत में नहीं दिखेगा फिर भी क्यों खास है यह खगोलीय घटना


    नई दिल्ली । साल 2026 में लगने वाला दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के रूप में सामने आ रहा है जिसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखी जा रही है यह ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और वैज्ञानिक के साथ साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसे खास माना जा रहा है हालांकि भारत में रहने वाले लोग इस ग्रहण को अपनी आंखों से नहीं देख पाएंगे क्योंकि जिस समय यह ग्रहण लगेगा उस समय भारत में रात होगी

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक चलेगा इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेगा जिससे कुछ क्षेत्रों में दिन के समय भी अंधकार जैसा वातावरण बन जाएगा यह नजारा मुख्य रूप से आर्कटिक क्षेत्र ग्रीनलैंड और आइसलैंड में साफ तौर पर देखा जा सकेगा इसके अलावा उत्तरी स्पेन और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में भी इसका प्रभाव दिखाई देगा जबकि फ्रांस ब्रिटेन और इटली जैसे देशों में यह आंशिक रूप से नजर आएगा

    भारत में इस ग्रहण के दिखाई न देने के कारण इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस ग्रहण का दृश्य प्रभाव किसी स्थान पर नहीं होता वहां सूतक काल लागू नहीं माना जाता इसलिए भारत के लोगों को इस दौरान किसी विशेष नियम का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी हालांकि परंपराओं और मान्यताओं के चलते कुछ लोग फिर भी सावधानी बरतना पसंद करते हैं

    भारतीय संस्कृति में ग्रहण को लेकर कई परंपराएं प्रचलित हैं जिनका पालन आज भी किया जाता है मान्यता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है इसलिए लोग इस समय भोजन से दूरी बनाते हैं और पूजा पाठ या ध्यान में समय बिताते हैं खासकर गर्भवती महिलाओं को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है उन्हें घर के अंदर रहने और किसी भी नुकीली वस्तु के उपयोग से बचने को कहा जाता है

    ग्रहण का समय आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है कई लोग इसे मंत्र जाप और ध्यान साधना के लिए शुभ मानते हैं ऐसा विश्वास है कि इस दौरान किया गया जाप और साधना अधिक फलदायी होता है ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान करने की भी परंपरा है जिसे शुद्धि और पुण्य प्राप्ति से जोड़ा जाता है

    हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है जो सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी की विशेष स्थिति के कारण घटित होती है फिर भी इसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ा हुआ है यही कारण है कि हर ग्रहण को लेकर लोगों में जिज्ञासा और आस्था दोनों बनी रहती हैं

  • ‘हम तुम्हारे हैं सनम’ की अनोखी कहानी: लंबा इंतजार और बिना फीस शाहरुख का फैसला

    ‘हम तुम्हारे हैं सनम’ की अनोखी कहानी: लंबा इंतजार और बिना फीस शाहरुख का फैसला

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कुछ फिल्में सिर्फ अपनी कहानी की वजह से नहीं, बल्कि अपने बनने की प्रक्रिया के कारण भी लंबे समय तक याद रखी जाती हैं। ऐसी ही एक फिल्म रही, जिसमें तीन बड़े सितारे एक साथ नजर आए, लेकिन इसके बनने और रिलीज होने की कहानी उतनी ही दिलचस्प और लंबी रही जितनी इसकी स्टारकास्ट बड़ी थी।
    इस फिल्म की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में हुई थी, जब इसे बड़े स्तर पर बनाने की योजना तैयार की गई। इसमें शाहरुख खान, सलमान खान और माधुरी दीक्षित जैसे बड़े नामों को एक साथ जोड़ा गया, जिससे शुरुआत से ही इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी उम्मीदें थीं। लेकिन जैसे-जैसे फिल्म की शूटिंग आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कई तकनीकी और रचनात्मक कारणों से इसका काम धीमा होता गया।
    समय के साथ फिल्म के कई हिस्सों में बदलाव करने पड़े। गानों से लेकर कुछ दृश्यों तक को दोबारा तैयार किया गया, क्योंकि बदलते समय के साथ फिल्म को नए अंदाज़ में ढालने की जरूरत महसूस की गई। यही कारण रहा कि यह प्रोजेक्ट अपने तय समय पर पूरा नहीं हो सका और लगातार आगे खिसकता चला गया।
    करीब 6 साल की लंबी प्रक्रिया के बाद आखिरकार यह फिल्म 2002 में दर्शकों के सामने आई। इतने लंबे इंतजार के बावजूद इस फिल्म को लेकर लोगों में उत्साह बना रहा, क्योंकि इसमें उस दौर के तीन बड़े सितारे एक साथ स्क्रीन पर नजर आए थे।
    इस फिल्म में शाहरुख खान ने एक ऐसा किरदार निभाया जो उनके पारंपरिक रोमांटिक रोल्स से काफी अलग था। यह किरदार एक ऐसे व्यक्ति का था जिसमें भावनात्मक संघर्ष और शंका जैसे पहलू दिखाए गए थे। शुरुआत में उन्होंने इस भूमिका को लेकर संकोच भी जताया था, लेकिन बाद में रचनात्मक टीम के समझाने पर उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया।
    सबसे खास बात यह रही कि शाहरुख खान ने इस फिल्म के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया। बताया जाता है कि उनका मेहनताना पहले तय किया गया था, लेकिन फिल्म के निर्माण में देरी और बढ़ते खर्च को देखते हुए उन्होंने स्वेच्छा से फीस लेने से इनकार कर दिया। उनका यह निर्णय फिल्म निर्माण टीम के लिए बड़ी मदद साबित हुआ।
    फिल्म से जुड़े लोगों का मानना है कि इतने लंबे समय तक प्रोजेक्ट का अटका रहना आसान नहीं था, लेकिन कलाकारों के सहयोग और उनके आपसी तालमेल ने इसे पूरा करने में अहम भूमिका निभाई। खासकर तीनों प्रमुख कलाकारों की मौजूदगी ने इस फिल्म को किसी तरह अंतिम रूप तक पहुंचाने में मदद की।
    आज भी यह फिल्म उस दौर की उन खास फिल्मों में गिनी जाती है, जिनकी पहचान सिर्फ कहानी से नहीं बल्कि उनके बनने के पीछे की लंबी और संघर्षपूर्ण यात्रा से भी होती है। यह फिल्म यह भी दिखाती है कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए धैर्य, सहयोग और समर्पण कितना जरूरी होता है।
  • राघव चड्ढा का ही ये बिल अगर पास हो जाता तो नहीं बदल पाते पार्टी, चली जाती सांसदी! जानिए कैसे ?

    राघव चड्ढा का ही ये बिल अगर पास हो जाता तो नहीं बदल पाते पार्टी, चली जाती सांसदी! जानिए कैसे ?


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता राघव चड्ढा द्वारा हाल ही में राज्यसभा के 6 अन्य सदस्यों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा के बीच एक दिलचस्प राजनीतिक विरोधाभास सामने आया है। अगर चार साल पहले उन्होंने खुद जिस दल-बदल विरोधी कानून को और सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा था, वह कानून बन गया होता, तो आज उनकी राजनीतिक स्थिति पूरी तरह अलग होती।

    सूत्रों के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत राज्यसभा में किसी दल के दो-तिहाई (2/3) सांसदों के एक साथ अलग होने पर उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से छूट मिल जाती है। इसी आधार पर 10 में से 7 सांसदों (चड्ढा सहित) के एक साथ जाने से उनकी सदस्यता सुरक्षित रहने की बात सामने आई है। लेकिन मामला यहीं दिलचस्प मोड़ लेता है। वर्ष 2022 में राज्यसभा में प्रवेश के कुछ ही महीनों बाद राघव चड्ढा ने एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था, जिसमें उन्होंने दल-बदल कानून को और सख्त बनाने की मांग की थी।

    उनके प्रस्तावित बिल में क्या था खास?

    इस विधेयक में उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव सुझाए थे। प्रस्ताव था कि किसी पार्टी के विलय को वैध मानने के लिए 2/3 की जगह 3/4 (तीन-चौथाई) समर्थन जरूरी किया जाए। साथ ही, पार्टी बदलने वाले सांसदों और विधायकों पर 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का भी सुझाव दिया गया था। इसके अलावा, ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ और विधायकों की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए भी सख्त प्रावधान प्रस्तावित किए गए थे, जिसमें सरकार गिरने की स्थिति में सांसदों/विधायकों को तय समय में सदन के सामने पेश होने की अनिवार्यता शामिल थी।

    संवैधानिक बदलाव का प्रस्ताव

    चड्ढा ने अपने विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 तथा दसवीं अनुसूची में संशोधन की मांग की थी, ताकि जनप्रतिनिधियों को अधिक जवाबदेह बनाया जा सके और दल-बदल पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    वर्तमान स्थिति

    राज्यसभा रिकॉर्ड के अनुसार, राघव चड्ढा का यह प्राइवेट मेंबर बिल अब भी लंबित है और कानून का रूप नहीं ले पाया। इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि यदि उनका ही प्रस्तावित सख्त कानून लागू हो जाता, तो आज दल-बदल के मौजूदा नियमों के तहत उन्हें और उनके साथियों को मिलने वाली छूट संभव नहीं होती।

  • आसाराम के आश्रम को सुप्रीम कोर्ट से राहत, बुलडोजर कार्रवाई पर लगाई रोक, जाने क्या है मामला?

    आसाराम के आश्रम को सुप्रीम कोर्ट से राहत, बुलडोजर कार्रवाई पर लगाई रोक, जाने क्या है मामला?


    जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद स्थित आसाराम के आश्रम से जुड़े मामले में बड़ा अंतरिम आदेश देते हुए बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि विवादित 45 हजार वर्ग मीटर जमीन पर 4 मई तक यथास्थिति बनाए रखी जाए।

    यह जमीन 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गुजरात सरकार द्वारा वापस लिए जाने की प्रक्रिया में है। वहीं आश्रम ट्रस्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें अतिक्रमण और पट्टे की शर्तों के उल्लंघन के आधार पर जमीन खाली करने का आदेश दिया गया था।

    SC ने क्या कहा?

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार से जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने को कहा है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रस्ट को उचित नोटिस नहीं दिए गए थे। सरकार को तीन दिन के भीतर दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, जबकि ट्रस्ट को भी जवाब देने के लिए समान समय दिया गया है। अदालत ने साफ किया कि अगली सुनवाई तक जमीन पर किसी भी तरह की तोड़-फोड़ या कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    सरकार और ट्रस्ट के दावे
    गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि ट्रस्ट द्वारा पट्टे की शर्तों का उल्लंघन किया गया है और बिना अनुमति कई निर्माण किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप हैं। वहीं ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह जमीन सामाजिक कार्यों और स्कूल संचालन के लिए दी गई थी और 1960 में चैरिटेबल ट्रस्ट को वैध रूप से आवंटित की गई थी। उनके अनुसार, किसी भी तरह का उल्लंघन नहीं हुआ है और सरकार अब जमीन वापस लेने की कोशिश कर रही है।

    अदालत की टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि पहले जमीन का पट्टा दिया गया, फिर विस्तार किया गया और अब उसे अचानक खत्म करने की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई। अंत में सरकार की ओर से अदालत को भरोसा दिलाया गया कि 4 मई तक मौके पर कोई भी निर्माण या तोड़-फोड़ नहीं होगी। अगली सुनवाई अगले सोमवार को होगी।

  • हंसाने वाले एक्टर का गंभीर अतीत: राजपाल यादव का सेना से जुड़ा अनोखा सफर..

    हंसाने वाले एक्टर का गंभीर अतीत: राजपाल यादव का सेना से जुड़ा अनोखा सफर..

    नई दिल्ली। कॉमेडी फिल्मों में अपनी बेहतरीन टाइमिंग और सरल अभिनय से दर्शकों को हंसाने वाले राजपाल यादव की असल जिंदगी पर्दे पर दिखने वाली उनकी छवि से कहीं ज्यादा संघर्षपूर्ण रही है। फिल्मों में लोगों को गुदगुदाने वाले यह कलाकार अपने शुरुआती दिनों में एक बिल्कुल अलग और कठिन सफर से गुजरे हैं।

    अपने करियर की शुरुआत में उनका सपना नौसेना में शामिल होने का था, लेकिन शारीरिक कारणों की वजह से यह सपना पूरा नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और नए अवसरों की तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्हें एक ऐसी जगह काम करने का मौका मिला, जहां उन्हें सेना के लिए जरूरी वर्दी तैयार करने का काम दिया गया।

    इस काम में उनका सीधा संबंध सेना के जवानों की जरूरतों से था। वे उन कपड़ों और वर्दियों को तैयार करते थे, जिन्हें देश के सैनिक पहनते हैं। यह जिम्मेदारी उनके लिए भले ही अलग थी, लेकिन इसने उन्हें अनुशासन और मेहनत का असली मतलब सिखाया।

    शुरुआत में उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह काम उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने समझा कि देश की सेवा सिर्फ हथियार उठाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि हर छोटे योगदान का भी बड़ा महत्व होता है।

    बाद में उनके इस योगदान को पहचान भी मिली और यह अनुभव उनके जीवन में गर्व का कारण बना। यह उनके लिए एक ऐसा पड़ाव था, जिसने उनके सोचने और आगे बढ़ने के तरीके को बदल दिया।

    इसके बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा और अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर खास पहचान बनाई। आज वे भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी कलाकारों में गिने जाते हैं। उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि जीवन में कोई भी अनुभव छोटा नहीं होता और हर अनुभव आगे बढ़ने की ताकत देता है।

  • केरल में 8 जहरीले सांपों और किंग कोबरा के लिए नहीं है खास एंटीवेनम, इलाज बना चुनौती

    केरल में 8 जहरीले सांपों और किंग कोबरा के लिए नहीं है खास एंटीवेनम, इलाज बना चुनौती


    नई दिल्ली। केरल में सांप काटने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में पाए जाने वाले आठ प्रमुख विषैले सांपों और किंग कोबरा के लिए कोई विशेष एंटीवेनम उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से डॉक्टरों को मरीजों का इलाज केवल लक्षणों के आधार पर करना पड़ रहा है।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिट वाइपर प्रजाति के सांप इस समस्या के केंद्र में हैं। इनमें कूबड़दार नाक वाला पिट वाइपर (हाइपनेल हाइपनेल) सबसे खतरनाक माना जाता है, जो जंगलों, रबर बागानों और खेतों में आमतौर पर पाया जाता है। यह केरल में सांप काटने के लगभग 25 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार बताया जाता है और इसकी मृत्यु दर भी अधिक है।

    इलाज सीमित, चुनौतियां बड़ी

    फिलहाल इन मामलों में इलाज डायलिसिस और प्लाज्मा थेरेपी जैसे तरीकों से लक्षण नियंत्रित करने तक सीमित है। स्वास्थ्य और वन विभाग लंबे समय से स्थानीय एंटीवेनम विकसित करने की सिफारिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस प्रगति नहीं हो पाई है।

    केरल में पाए जाने वाले प्रमुख विषैले सांप

    राज्य में मालाबार पिट वाइपर की विभिन्न किस्में, हॉर्सशू पिट वाइपर की दो प्रजातियां, बांस पिट वाइपर और बड़े आकार के पिट वाइपर जैसे सांप पाए जाते हैं। इनमें से कई प्रजातियां राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में फैली हुई हैं और इनके काटने के मामले सामने आते रहते हैं।

    किंग कोबरा और कोरल स्नेक पर भी संकट

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किंग कोबरा के लिए भारत में कोई स्वदेशी एंटीवेनम उपलब्ध नहीं है। असम में एक उत्पादन केंद्र पहले मौजूद था, लेकिन कम मांग के कारण उसे बंद कर दिया गया। इसी तरह पश्चिमी घाट में पाए जाने वाले कोरल स्नेक के लिए भी कोई एंटीवेनम विकसित नहीं किया गया है।

    वर्तमान में भारत में बहुसंयोजक (मल्टी-वैलेंट) एंटीवेनम चेन्नई से एकत्र किए गए विष के आधार पर तैयार किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केरल की स्थानीय सांप प्रजातियों के अनुसार अलग एंटीवेनम तैयार करना जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो राज्य में सांप काटने से होने वाली मौतों का खतरा और बढ़ सकता है।

  • 71 की उम्र में भी फिटनेस का जलवा, अनुपम खेर की जिम मेहनत ने सबको चौंकाया..

    71 की उम्र में भी फिटनेस का जलवा, अनुपम खेर की जिम मेहनत ने सबको चौंकाया..


    नई दिल्ली।
    कई लोग 70 की उम्र के बाद जीवन को आराम और सीमित गतिविधियों तक समेट लेते हैं, लेकिन अनुपम खेर इस सोच को पूरी तरह बदलते नजर आते हैं। 71 वर्ष की उम्र में भी वे जिस तरह से खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रखे हुए हैं, वह लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है। हाल ही में उनका एक जिम वीडियो सामने आया, जिसमें उनकी फिटनेस और ऊर्जा ने सभी का ध्यान खींच लिया।

    इस वीडियो में वे पूरी लगन के साथ व्यायाम करते दिखाई देते हैं। उनका अंदाज़ यह दर्शाता है कि वे फिटनेस को केवल एक शौक नहीं, बल्कि जीवन का जरूरी हिस्सा मानते हैं। वर्कआउट के दौरान उनकी एकाग्रता और निरंतरता यह साबित करती है कि उन्होंने अनुशासन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है।

    अनुपम खेर का मानना है कि शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उनके अनुसार नियमित व्यायाम न केवल शरीर को मजबूत करता है, बल्कि मन को भी शांत और स्थिर बनाता है। यही कारण है कि वे हर परिस्थिति में अपनी फिटनेस रूटीन को प्राथमिकता देते हैं।

    कई बार जब सामान्य रूप से मन व्यायाम करने का नहीं होता, तब भी वे खुद को प्रेरित करते हैं और अभ्यास जारी रखते हैं। उनका यह दृष्टिकोण दिखाता है कि असली अनुशासन वही है जो बिना मन के भी जिम्मेदारी को निभाए। इसी वजह से उनकी फिटनेस यात्रा लोगों के लिए एक मजबूत संदेश बन चुकी है।

    उनकी यह सक्रिय जीवनशैली केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच को भी दर्शाती है। वे अक्सर अपने अनुभवों के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि जीवन में निरंतरता और सकारात्मकता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

    उनका यह भी मानना है कि जब कोई व्यक्ति अपने अनुशासन और प्रयासों से दूसरों को प्रेरित करने लगता है, तो उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। इसी सोच के साथ वे अपनी फिटनेस यात्रा को साझा करते हैं ताकि लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो सकें।

    फिलहाल अनुपम खेर अपने थिएटर और अन्य रचनात्मक प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपने फिटनेस रूटीन से समझौता नहीं करते। उनकी यह जीवनशैली यह साबित करती है कि उम्र कभी भी सक्रियता और सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती, अगर व्यक्ति में इच्छाशक्ति और अनुशासन मजबूत हो।