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  • राम-लक्ष्मण से कम, रावण से ज्यादा बातचीत: दीपिका चिखलिया ने बताए ‘रामायण’ सेट के किस्से

    राम-लक्ष्मण से कम, रावण से ज्यादा बातचीत: दीपिका चिखलिया ने बताए ‘रामायण’ सेट के किस्से


    नई दिल्ली।
    भारतीय टेलीविजन के इतिहास में रामायण एक ऐसा सीरियल रहा है, जिसने दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी। इस सीरियल में मां सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया आज भी उसी भूमिका के कारण पहचानी जाती हैं। उनका कहना है कि इस किरदार ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया, लेकिन इसके पीछे कई ऐसे अनुभव भी रहे, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

    दीपिका चिखलिया ने बताया कि जब उन्हें सीता के किरदार के लिए चुना गया, तो यह उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ था। ऑडिशन की प्रक्रिया लंबी और प्रतिस्पर्धी थी, जहां कई राउंड के बाद उनका चयन हुआ। उस समय यह अंदाजा नहीं था कि यह किरदार उन्हें इतनी बड़ी पहचान दिला देगा।

    सेट पर माहौल काफी अनुशासित रहता था। हर कलाकार अपने किरदार में इतना डूबा रहता था कि आपसी बातचीत सीमित हो जाती थी। अरुण गोविल और अन्य सह-कलाकारों के साथ उनका संवाद औपचारिक और कम ही होता था, क्योंकि सभी अपनी भूमिकाओं की गंभीरता को बनाए रखते थे।

    उन्होंने यह भी बताया कि सेट पर अपेक्षाकृत अधिक बातचीत अरविंद त्रिवेदी से होती थी, जिन्होंने रावण का किरदार निभाया था। हालांकि यह बातचीत भी सीमित दायरे में ही रहती थी और उसमें निजी संबंधों की गहराई नहीं बन पाई।

    सीरियल के प्रसारण के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। लोग उन्हें वास्तविक जीवन में भी देवी स्वरूप मानने लगे। कई बार सार्वजनिक जगहों पर लोग उनके चरण स्पर्श करते, आरती करते और फूल अर्पित करते नजर आते थे। यह लोकप्रियता उनके लिए जितनी सम्मानजनक थी, उतनी ही असामान्य भी साबित हुई।

    एक अनुभव के दौरान उन्हें ऐसी स्थिति का भी सामना करना पड़ा जहां लोगों की आस्था के कारण सामान्य जीवन प्रभावित हुआ और भोजन जैसी बुनियादी चीजों में भी कठिनाई आ गई। यह उनके लिए भावनात्मक रूप से एक अलग और यादगार अनुभव था।

    इस पूरी यात्रा ने उन्हें यह एहसास कराया कि एक किरदार केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह कलाकार की वास्तविक पहचान बन सकता है। दीपिका चिखलिया की यह कहानी आज भी बताती है कि लोकप्रियता के साथ जिम्मेदारी और चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं।

  • फोलिक एसिड क्यों कहलाता है ‘प्रेग्नेंसी का विटामिन’? मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी

    फोलिक एसिड क्यों कहलाता है ‘प्रेग्नेंसी का विटामिन’? मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद जरूरी


    नई दिल्ली गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है, क्योंकि इस समय मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे का भी विकास हो रहा होता है। इसी कारण डॉक्टर फोलिक एसिड के सेवन की सलाह देते हैं, जिसे अक्सर “प्रेग्नेंसी विटामिन” भी कहा जाता है।

    फोलिक एसिड, विटामिन-बी समूह का एक सिंथेटिक रूप है, जबकि इसका प्राकृतिक रूप फोलेट कहलाता है। यह हरी पत्तेदार सब्जियों, दालों और कुछ सूखे मेवों में पाया जाता है। शरीर में यह नई कोशिकाओं के निर्माण और लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    गर्भावस्था में इसका सबसे अहम काम भ्रूण के न्यूरल ट्यूब (brain and spinal cord) का सही विकास करना होता है। यदि गर्भधारण से पहले और शुरुआती तीन महीनों में फोलिक एसिड पर्याप्त मात्रा में न लिया जाए, तो बच्चे में जन्मजात विकारों का खतरा बढ़ सकता है, जैसे रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क का विकास प्रभावित होना।

    इसी वजह से विशेषज्ञ गर्भधारण से पहले ही फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर में इसकी पर्याप्त मात्रा बनी रहे और भ्रूण का विकास सही तरीके से हो सके।

    फोलिक एसिड की कमी से गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, कमजोरी, थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। यह शरीर में रक्त निर्माण को भी संतुलित रखता है, जिससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं।

    आयुर्वेद में गर्भावस्था को “गर्भिणी परिचर्या” कहा गया है, जिसमें संतुलित आहार को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें पालक, मेथी, आंवला, संतरा, अनार, मूंग, चना, बादाम और अखरोट जैसे फोलिक एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह दी जाती है।

    इसके अलावा शतावरी, अश्वगंधा और गिलोय जैसी औषधियों का सेवन भी डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार किया जा सकता है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि संतुलित आहार और फोलिक एसिड का सही सेवन गर्भावस्था को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है।

  • वाराणसी में ऐतिहासिक तैयारी,पीएम मोदी के दौरे से पहले शहर में रोशनी और विकास का अद्भुत नजारा

    वाराणसी में ऐतिहासिक तैयारी,पीएम मोदी के दौरे से पहले शहर में रोशनी और विकास का अद्भुत नजारा

    नई दिल्ली। वाराणसी इस समय एक अलग ही रंग में नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय दौरे से पहले पूरा शहर रोशनी, सजावट और उत्साह से भर गया है। सड़कें, चौराहे और प्रमुख मार्ग इस तरह सजाए गए हैं कि पूरा शहर किसी बड़े पर्व जैसा दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों से लेकर प्रशासन तक हर कोई इस दौरे को सफल बनाने में जुटा हुआ है।

    दौरे की शुरुआत धार्मिक परंपराओं के साथ हुई, जहां काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस पूजा ने पूरे कार्यक्रम को आध्यात्मिक शुरुआत दी और इसे केवल एक राजनीतिक दौरा नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ा अवसर भी बना दिया। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने इस क्षण को बेहद महत्वपूर्ण बताया और इसे काशी की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा।

    इसके बाद शहर में तैयारियों का दायरा और बढ़ गया। जिन रास्तों से प्रधानमंत्री गुजरेंगे, उन्हें विशेष रूप से सजाया गया है। सड़क किनारे रोशनी, रंगीन सजावट और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया है। पूरा शहर एक नए रूप में नजर आ रहा है, जहां आधुनिक विकास और पारंपरिक संस्कृति का सुंदर मेल देखने को मिल रहा है।

    इस दौरे के दौरान एक बड़ा जनसंबोधन कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। खासकर महिलाओं की भागीदारी को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे यह कार्यक्रम सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है। इस अवसर पर कई विकास परियोजनाओं की घोषणा और शुरुआत की जाएगी, जो क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं।

    इन परियोजनाओं में सड़क, परिवहन और शहरी विकास से जुड़े कई बड़े काम शामिल हैं। इसके अलावा कुछ नई ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी, जिससे विभिन्न शहरों के बीच संपर्क और मजबूत होगा। इन सभी योजनाओं को क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। पूरे शहर में बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। महिला पुलिस बल की भी मजबूत उपस्थिति देखने को मिल रही है। निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है और पूरे क्षेत्र को कई सुरक्षा स्तरों में बांटा गया है ताकि किसी भी स्थिति पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।

    प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में एक लंबा रोड शो भी शामिल है, जहां वे जनता का अभिवादन करते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेंगे। इस रोड शो को लेकर लोगों में खासा उत्साह है और बड़ी संख्या में नागरिक सड़कों पर उनका स्वागत करने की तैयारी में हैं।

    पूरे शहर का माहौल इस समय एक उत्सव जैसा है, जहां आस्था, विकास और जनसंपर्क एक साथ दिखाई दे रहे हैं। वाराणसी का यह दृश्य न केवल स्थानीय लोगों के लिए खास है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

  • काशी में हाई अलर्ट: पीएम मोदी के आगमन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद

    काशी में हाई अलर्ट: पीएम मोदी के आगमन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद

    नई दिल्ली। वाराणसी में प्रधानमंत्री के आगामी दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। पूरे शहर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण से लेकर वीआईपी मूवमेंट तक के लिए विशेष योजना तैयार की है, ताकि कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।

    शहर के प्रमुख आयोजन स्थलों और मार्गों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मियों की भी बड़ी संख्या शामिल है, जिन्हें विशेष रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जिस स्थान पर बड़ा जनसमूह जुटने की संभावना है, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है।

    पूरे कार्यक्रम क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से लैस सुरक्षा घेरे में रखा गया है। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का व्यापक नेटवर्क सक्रिय किया गया है, जिससे हर गतिविधि पर रियल टाइम नजर रखी जा सके। इसके साथ ही ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम भी लगाया गया है।

    भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है और यातायात को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों की योजना बनाई गई है। इससे आम लोगों को कम से कम असुविधा हो और शहर में आवाजाही सामान्य बनी रहे।

    कार्यक्रम के दौरान एक बड़े महिला सम्मेलन का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है, ताकि पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

    इसके अलावा प्रधानमंत्री के धार्मिक कार्यक्रमों को देखते हुए भी विशेष तैयारी की गई है। शहर में उत्साह का माहौल है और लोग उनके स्वागत के लिए तैयार हैं। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि दौरा पूरी तरह सुरक्षित, व्यवस्थित और सफल रहे।

  • मुंबई में परिवार की मौत के बाद तरबूज पर सवाल, क्या इससे हो सकती है फूड प्वाइजनिंग? डॉक्टरों ने बताया सच

    मुंबई में परिवार की मौत के बाद तरबूज पर सवाल, क्या इससे हो सकती है फूड प्वाइजनिंग? डॉक्टरों ने बताया सच


    नई दिल्ली।
    गर्मियों में तरबूज को सबसे ताजगी देने वाले फलों में गिना जाता है, लेकिन हाल ही में मुंबई में हुई एक दर्दनाक घटना ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत के बाद आशंका जताई जा रही है कि मामला फूड प्वाइजनिंग से जुड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि परिवार ने पहले बिरयानी खाई थी और उसके बाद घर में रखा तरबूज खाया था। कुछ ही घंटों बाद सभी की तबीयत बिगड़ गई और उल्टी-दस्त जैसे लक्षण सामने आए। अस्पताल पहुंचने पर सभी की मौत हो गई।

    पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और इसे फिलहाल संदिग्ध फूड प्वाइजनिंग मानते हुए खाद्य सामग्री को जांच के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही मौत के कारणों की स्पष्ट पुष्टि हो सकेगी।

    क्या तरबूज से हो सकती है मौत?
    इस घटना के बाद यह सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या तरबूज खाना जानलेवा भी हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, तरबूज खुद में सुरक्षित फल है, लेकिन अगर यह दूषित हो जाए या गलत तरीके से स्टोर किया जाए तो इसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे फूड प्वाइजनिंग हो सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज में पानी और प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए खराब या संक्रमित होने पर यह बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है। कुछ मामलों में इसमें मिठास बढ़ाने के लिए बाहरी पदार्थ मिलाने की भी आशंका रहती है, जो जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

    डॉक्टरों के मुताबिक फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द शामिल हैं। इसकी गंभीरता बैक्टीरिया के प्रकार और व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि केवल तरबूज को दोष देना सही नहीं है। फूड प्वाइजनिंग किसी भी दूषित भोजन या असुरक्षित तरीके से रखे गए खाने से हो सकती है, इसलिए पूरे मामले की जांच के बाद ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

  • बंगाल की सियासी ज़मीन पर टकराव: IPS अधिकारी और TMC उम्मीदवार के बीच बयानबाज़ी से बढ़ा तनाव

    बंगाल की सियासी ज़मीन पर टकराव: IPS अधिकारी और TMC उम्मीदवार के बीच बयानबाज़ी से बढ़ा तनाव

    नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है और इसी बीच दक्षिण 24 परगना क्षेत्र में सामने आया एक विवाद अब राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। इस घटनाक्रम में कानून व्यवस्था संभाल रहे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एक राजनीतिक उम्मीदवार के बीच हुई बयानबाज़ी ने पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। मामला सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह खुली राजनीतिक टकराव की स्थिति में बदल गया है।

    पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब कुछ स्थानीय लोगों ने शिकायत दर्ज कराई कि एक राजनीतिक उम्मीदवार के समर्थक इलाके में लोगों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा एजेंसियों की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया गया। इसी दौरान पुलिस अधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी तरह की धमकी, अनुशासनहीनता या कानून तोड़ने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। कुछ ही समय बाद राजनीतिक उम्मीदवार ने भी सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत चाहे किसी भी तरफ से मानी जाए, लेकिन उसका अंत वही तय करेंगे। उनके शब्दों में आत्मविश्वास के साथ-साथ चुनौती का भाव भी साफ दिखाई दिया। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी दबाव या सुरक्षा व्यवस्था से डरने वाले नहीं हैं और जनता उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

    इस बयानबाज़ी के बाद इलाके का राजनीतिक माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है। एक तरफ समर्थकों के बीच जोश और उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। चुनावी समय में इस तरह की बयानबाज़ी अक्सर जनता की राय और राजनीतिक माहौल दोनों को प्रभावित करती है, जिससे तनाव और बढ़ जाता है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं चुनावी प्रक्रिया को और जटिल बना देती हैं। जब प्रशासनिक जिम्मेदारियों और राजनीतिक दावों के बीच सीधा टकराव जैसा माहौल बनता है, तो स्थिति को संभालना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे समय में सभी पक्षों के लिए संयम और संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ सके।

  • गर्मियों का एनर्जी बूस्टर: शिकंजी, स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल

    गर्मियों का एनर्जी बूस्टर: शिकंजी, स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल

    नई दिल्ली| गर्मियों की तेज धूप और लू से राहत पाने के लिए शिकंजी एक बेहतरीन और प्राकृतिक पेय माना जाता है। यह न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि शरीर को तुरंत ऊर्जा और ठंडक भी प्रदान करती है। नींबू, काला नमक, भुना जीरा और पुदीने से बनी यह पारंपरिक ड्रिंक गर्मियों में शरीर के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, शिकंजी शरीर में पसीने के जरिए खोए हुए इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई करती है। इसमें मौजूद नींबू विटामिन-सी से भरपूर होता है, जो इम्युनिटी को मजबूत बनाता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।

    शिकंजी पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाती है। भुना जीरा पाचन क्रिया को मजबूत करता है और सूजन कम करने में सहायक होता है, जबकि पुदीना शरीर को ताजगी देता है और डिटॉक्स प्रक्रिया को तेज करता है।

    इसके अलावा यह वजन नियंत्रित करने में भी मददगार है। नींबू में मौजूद पेक्टिन फाइबर भूख को नियंत्रित करता है, जिससे कैलोरी इनटेक कम हो सकता है। यही कारण है कि इसे एक हेल्दी समर ड्रिंक माना जाता है।

    गर्मियों में शरीर में पानी की कमी आम समस्या है, ऐसे में शिकंजी हाइड्रेशन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। यह थकान को कम करती है और शरीर को पूरे दिन तरोताजा बनाए रखती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार के कृत्रिम और मीठे पेय की बजाय घर पर बनी शिकंजी का सेवन अधिक फायदेमंद है। इसे बनाना भी बेहद आसान है ताजा नींबू का रस, ठंडा पानी, काला नमक, भुना जीरा और पुदीना मिलाकर कुछ ही मिनटों में तैयार किया जा सकता है।

    नियमित रूप से शिकंजी का सेवन गर्मियों में शरीर को न सिर्फ ठंडक देता है, बल्कि त्वचा की सेहत और पाचन को भी बेहतर बनाता है।


  • दिल्ली के बल्लेबाजों ने बेंगलुरु के सामने टेके घुटने, पावरप्ले के न्यूनतम स्कोर के साथ माथे पर लगा सबसे बड़ा कलंक

    दिल्ली के बल्लेबाजों ने बेंगलुरु के सामने टेके घुटने, पावरप्ले के न्यूनतम स्कोर के साथ माथे पर लगा सबसे बड़ा कलंक


    नई दिल्ली।
    क्रिकेट के मैदान पर अनिश्चितताओं का दौर हमेशा बना रहता है, लेकिन दिल्ली कैपिटल्स ने सोमवार को जो कर दिखाया, उसने प्रशंसकों को हतप्रभ कर दिया है। शनिवार को जिस टीम ने विपक्षी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए 264 रनों का पहाड़ खड़ा किया था, वही टीम मात्र 48 घंटे के भीतर ताश के पत्तों की तरह ढह गई। अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ आईपीएल इतिहास का सबसे शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। टीम महज 75 रनों पर सिमट गई, लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला प्रदर्शन पावरप्ले के दौरान रहा। दिल्ली की टीम शुरुआती 6 ओवरों के भीतर केवल 13 रन बना सकी और इस दौरान उसने अपने 6 प्रमुख बल्लेबाजों को गंवा दिया, जो कि टूर्नामेंट के इतिहास में अब तक का सबसे खराब पावरप्ले प्रदर्शन है।

    मैच की शुरुआत से ही दिल्ली के बल्लेबाजों में आत्मविश्वास की भारी कमी दिखी और बेंगलुरु के गेंदबाजों ने इसका भरपूर फायदा उठाया। भुवनेश्वर कुमार की स्विंग और सटीक गेंदबाजी के आगे दिल्ली का शीर्ष क्रम पूरी तरह बेबस नजर आया। पहले ही ओवर की दूसरी गेंद पर विकेट गिरने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह थमने का नाम ही नहीं ले रहा था। आलम यह था कि महज 8 रन के स्कोर तक दिल्ली कैपिटल्स के आधे से ज्यादा बल्लेबाज पवेलियन वापस लौट चुके थे। केएल राहुल, समीर रिज्वी, ट्रिस्टन स्टब्स और अक्षर पटेल जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी क्रीज पर टिकने का साहस नहीं जुटा पाए। पावरप्ले में 13 रन पर 6 विकेट का यह स्कोर अब राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के उन पुराने रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ चुका है, जहां टीमें 14 रन बनाकर संघर्ष कर रही थीं।

    दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह हार न केवल तकनीकी रूप से एक झटका है, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी यह टीम को झकझोर देने वाली घटना है। एक मैच में रनों का अंबार लगाने वाली टीम का अगले ही मैच में 100 रन के आंकड़े तक न पहुंच पाना खेल की अनिश्चितता और टीम के अस्थिर प्रदर्शन को उजागर करता है। बेंगलुरु के कप्तान के टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने के फैसले को उनके गेंदबाजों ने बिल्कुल सही साबित कर दिखाया। पूरी पारी के दौरान दिल्ली का कोई भी बल्लेबाज पिच के मिजाज को नहीं समझ सका और गलत शॉट चयन की वजह से विकेट गंवाते चले गए। अब यह टीम मैनेजमेंट के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण है कि कैसे एक ही सीजन में टीम का प्रदर्शन इतनी बुरी तरह अर्श से फर्श पर आ गया।

  • हाथ-पैर का ठंडा रहना सिर्फ सामान्य नहीं, कई बीमारियों का संकेत हो सकता है

    हाथ-पैर का ठंडा रहना सिर्फ सामान्य नहीं, कई बीमारियों का संकेत हो सकता है


    नई दिल्ली| कई लोग अक्सर हाथ और पैरों के ठंडे या सुन्न रहने की समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल मौसम या सामान्य बदलाव नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही कुछ समस्याओं का संकेत हो सकता है।
    डॉक्टरों के मुताबिक जब शरीर में रक्त संचार सही तरीके से नहीं होता है, तो हाथ और पैरों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता। इस वजह से ये हिस्से ठंडे महसूस होने लगते हैं। रक्त का सही प्रवाह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है।
    इसके अलावा खराब पाचन भी इस समस्या का एक बड़ा कारण हो सकता है। जब शरीर को पूरी ऊर्जा और पोषण नहीं मिल पाता, तो इसका असर सबसे पहले हाथ-पैरों पर दिखाई देता है।
    तनाव और कमजोरी भी इस स्थिति को और बढ़ा सकते हैं। लगातार तनाव रहने से शरीर का संतुलन बिगड़ता है, जिससे नसों में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे तो यह गंभीर बीमारियों का रूप भी ले सकती है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार हाथ-पैर ठंडे रहने की स्थिति में रेनॉड्स डिजीज का खतरा हो सकता है, जिसमें रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे हाथ-पैरों में दर्द, सुन्नपन और अन्य जटिल समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
    इसके साथ ही वैरिकोज वेन्स जैसी समस्याएं भी इस स्थिति से जुड़ी हो सकती हैं।
    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस समस्या से बचने के लिए नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज और पैदल चलना चाहिए, ताकि रक्त संचार बेहतर बना रहे। हाथ-पैरों की हल्की मालिश और गर्म रखने के उपाय भी राहत दे सकते हैं।
    इसके अलावा शरीर में आयरन और विटामिन की कमी भी एक प्रमुख कारण हो सकती है, इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है।

  • पीयूष गोयल ने EPC प्रमुखों संग की बैठक, निर्यात बढ़ाने और वैश्विक अवसरों पर किया मंथन

    पीयूष गोयल ने EPC प्रमुखों संग की बैठक, निर्यात बढ़ाने और वैश्विक अवसरों पर किया मंथन


    नई दिल्ली| भारत के निर्यात क्षेत्र को नई गति देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने सोमवार को विभिन्न निर्यात संवर्धन परिषदों (EPCs) के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में निर्यात को मजबूत बनाने और वैश्विक व्यापार अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    मंत्री Piyush Goyal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में क्षेत्र-विशेष प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों की रचनात्मक प्रतिक्रियाएं भी सुनी गईं।

    बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि हाल ही में भारत द्वारा किए गए विभिन्न मुक्त व्यापार समझौते (FTA) देश के निर्यातकों के लिए नए बाजार खोल सकते हैं। इन समझौतों का अधिकतम लाभ उठाकर भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने पर फोकस किया गया।

    मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार निर्यातकों को मजबूत बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार नीतिगत सहयोग प्रदान कर रही है।

    इससे पहले, Piyush Goyal ने भारत-न्यूजीलैंड व्यापार मंच को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत का बड़ा बाजार, कुशल कार्यबल, डिजिटल क्षमता और विनिर्माण शक्ति न्यूजीलैंड की कृषि-तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और फिनटेक विशेषज्ञता के साथ मिलकर नए अवसर पैदा कर सकती है।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। दोनों देशों का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में व्यापार को 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का है, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की यह पहल भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।