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  • Astro Tips: घर में दरिद्रता ला सकती है आपकी ये 4 आदतें, ज्योतिष में बताया गया अलक्ष्मी का संकेत

    Astro Tips: घर में दरिद्रता ला सकती है आपकी ये 4 आदतें, ज्योतिष में बताया गया अलक्ष्मी का संकेत


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इंसान की दिनचर्या और उसकी कुछ सामान्य आदतें भी उसके जीवन, भाग्य और आर्थिक स्थिति पर असर डालती हैं। शास्त्रों में जहां कई आदतों को शुभ और लाभकारी बताया गया है, वहीं कुछ व्यवहार ऐसे भी माने जाते हैं जो घर की बरकत को प्रभावित कर सकते हैं और आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकते हैं।

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, अनजाने में की जाने वाली कुछ आदतें घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती हैं, जिसे अलक्ष्मी का प्रभाव माना जाता है। आइए जानते हैं ऐसी कुछ आदतें जिन्हें सुधारने की सलाह दी जाती है।

    बैठे-बैठे पैर हिलाने की आदत

    ज्योतिष के अनुसार बिना वजह लगातार पैर हिलाना अशुभ माना जाता है। इसे मानसिक अस्थिरता और चंद्रमा की कमजोरी से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि यह आदत आर्थिक असंतुलन पैदा कर सकती है और अनावश्यक खर्च बढ़ा सकती है।

    नाखून चबाने की आदत

    नाखूनों को दांतों से चबाना न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि इसे नकारात्मक आदत भी माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह आत्मविश्वास को प्रभावित करती है और करियर में बाधाएं उत्पन्न कर सकती है। इसे दरिद्रता को आकर्षित करने वाली आदतों में भी शामिल किया गया है।
    भोजन बनाते समय बार-बार चखना या खाना
    शास्त्रों में रसोई को पवित्र स्थान और मां अन्नपूर्णा का प्रतीक माना गया है। ऐसे में खाना बनाते समय बार-बार भोजन चखना या उसे जूठा करना अनुशासनहीन माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में अन्न और धन की कमी हो सकती है और बरकत प्रभावित होती है।

    दोनों हाथों से सिर खुजलाना

    ज्योतिष ग्रंथों में शरीर की गतिविधियों को लेकर भी कुछ संकेत बताए गए हैं। इनमें दोनों हाथों से एक साथ सिर खुजलाना अशुभ माना गया है। कहा जाता है कि यह आदत निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकती है और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।

  • टैक्स प्लानिंग 2027: पुरानी और नई व्यवस्था में से कौन देगा ज्यादा फायदा, जानिए पूरा गणित..

    टैक्स प्लानिंग 2027: पुरानी और नई व्यवस्था में से कौन देगा ज्यादा फायदा, जानिए पूरा गणित..

    नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही सैलरीड कर्मचारियों के सामने एक बार फिर वही अहम सवाल खड़ा हो गया है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुना जाए या नई टैक्स व्यवस्था को अपनाया जाए। दोनों ही सिस्टम अपने-अपने तरीके से अलग फायदे और सीमाएं लेकर आते हैं, इसलिए सही विकल्प व्यक्ति की आय और वित्तीय योजना पर निर्भर करता है।

    हालांकि इस साल टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कुछ नए अपडेट और स्पष्टताओं के बाद यह चर्चा फिर से तेज हो गई है कि किस व्यवस्था में ज्यादा लाभ मिलेगा। कई मामलों में देखा जा रहा है कि इस बार लोगों के लिए पिछली तुलना में चुनाव अलग भी हो सकता है।

    पुरानी टैक्स व्यवस्था में टैक्सपेयर्स को कई तरह की छूट का लाभ मिलता है। इसमें निवेश पर मिलने वाली कटौती, स्वास्थ्य बीमा, होम लोन पर ब्याज, एचआरए और अन्य भत्ते शामिल हैं। इन सुविधाओं के कारण टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाती है, लेकिन इसके बदले टैक्स दरें अपेक्षाकृत अधिक होती हैं।

    वहीं दूसरी ओर नई टैक्स व्यवस्था को सरल और सीधा बनाया गया है। इसमें टैक्स स्लैब अलग-अलग आय स्तरों पर लागू होते हैं और दरें तुलनात्मक रूप से कम रखी गई हैं, लेकिन अधिकतर छूट और डिडक्शन हटा दिए गए हैं। इसका उद्देश्य टैक्स सिस्टम को आसान बनाना और फाइलिंग प्रक्रिया को कम जटिल करना है।

    अगर किसी व्यक्ति की आय सीमित है और वह ज्यादा निवेश या टैक्स सेविंग विकल्पों का उपयोग नहीं करता, तो नई टैक्स व्यवस्था उसके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है। इसमें कम दरों के कारण हर महीने मिलने वाली सैलरी यानी टेक-होम इनकम ज्यादा रहती है।

    इसके विपरीत, जो लोग नियमित रूप से निवेश करते हैं, बीमा पॉलिसी लेते हैं या होम लोन पर ब्याज चुकाते हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था ज्यादा लाभकारी हो सकती है। खासकर उन परिवारों के लिए जहां कई प्रकार के खर्च और वित्तीय जिम्मेदारियां होती हैं, यह विकल्प टैक्स बचत में मदद करता है।

    सरकार द्वारा समय-समय पर दोनों व्यवस्थाओं में कुछ बदलाव किए जाते हैं ताकि करदाता अपनी जरूरत के अनुसार सही विकल्प चुन सकें। कुछ भत्तों और अलाउंस में संशोधन के कारण टैक्स प्लानिंग पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए सही जानकारी के साथ निर्णय लेना जरूरी हो जाता है।

     यह साफ है कि कोई भी एक टैक्स सिस्टम सभी के लिए सबसे बेहतर नहीं हो सकता। सही चुनाव पूरी तरह व्यक्ति की आय, खर्च, निवेश की आदत और भविष्य की वित्तीय योजना पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले अपनी पूरी आर्थिक स्थिति का आकलन करना सबसे जरूरी कदम है।

  • वैभव सूर्यवंशी की धमाकेदार सेंचुरी पर फिदा हुए पैट कमिंस, बताया अपना नया पसंदीदा खिलाड़ी

    वैभव सूर्यवंशी की धमाकेदार सेंचुरी पर फिदा हुए पैट कमिंस, बताया अपना नया पसंदीदा खिलाड़ी

    नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही सैलरीड कर्मचारियों के सामने एक बार फिर वही अहम सवाल खड़ा हो गया है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुना जाए या नई टैक्स व्यवस्था को अपनाया जाए। दोनों ही सिस्टम अपने-अपने तरीके से अलग फायदे और सीमाएं लेकर आते हैं, इसलिए सही विकल्प व्यक्ति की आय और वित्तीय योजना पर निर्भर करता है।

    हालांकि इस साल टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कुछ नए अपडेट और स्पष्टताओं के बाद यह चर्चा फिर से तेज हो गई है कि किस व्यवस्था में ज्यादा लाभ मिलेगा। कई मामलों में देखा जा रहा है कि इस बार लोगों के लिए पिछली तुलना में चुनाव अलग भी हो सकता है।

    पुरानी टैक्स व्यवस्था में टैक्सपेयर्स को कई तरह की छूट का लाभ मिलता है। इसमें निवेश पर मिलने वाली कटौती, स्वास्थ्य बीमा, होम लोन पर ब्याज, एचआरए और अन्य भत्ते शामिल हैं। इन सुविधाओं के कारण टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाती है, लेकिन इसके बदले टैक्स दरें अपेक्षाकृत अधिक होती हैं।

    वहीं दूसरी ओर नई टैक्स व्यवस्था को सरल और सीधा बनाया गया है। इसमें टैक्स स्लैब अलग-अलग आय स्तरों पर लागू होते हैं और दरें तुलनात्मक रूप से कम रखी गई हैं, लेकिन अधिकतर छूट और डिडक्शन हटा दिए गए हैं। इसका उद्देश्य टैक्स सिस्टम को आसान बनाना और फाइलिंग प्रक्रिया को कम जटिल करना है।

    अगर किसी व्यक्ति की आय सीमित है और वह ज्यादा निवेश या टैक्स सेविंग विकल्पों का उपयोग नहीं करता, तो नई टैक्स व्यवस्था उसके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है। इसमें कम दरों के कारण हर महीने मिलने वाली सैलरी यानी टेक-होम इनकम ज्यादा रहती है।

    इसके विपरीत, जो लोग नियमित रूप से निवेश करते हैं, बीमा पॉलिसी लेते हैं या होम लोन पर ब्याज चुकाते हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था ज्यादा लाभकारी हो सकती है। खासकर उन परिवारों के लिए जहां कई प्रकार के खर्च और वित्तीय जिम्मेदारियां होती हैं, यह विकल्प टैक्स बचत में मदद करता है।

    सरकार द्वारा समय-समय पर दोनों व्यवस्थाओं में कुछ बदलाव किए जाते हैं ताकि करदाता अपनी जरूरत के अनुसार सही विकल्प चुन सकें। कुछ भत्तों और अलाउंस में संशोधन के कारण टैक्स प्लानिंग पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए सही जानकारी के साथ निर्णय लेना जरूरी हो जाता है।

     यह साफ है कि कोई भी एक टैक्स सिस्टम सभी के लिए सबसे बेहतर नहीं हो सकता। सही चुनाव पूरी तरह व्यक्ति की आय, खर्च, निवेश की आदत और भविष्य की वित्तीय योजना पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले अपनी पूरी आर्थिक स्थिति का आकलन करना सबसे जरूरी कदम है।

  • हथेली में सूर्य और भाग्य रेखा का संयोग दिला सकता है धन और प्रसिद्धि, जानिए हस्तरेखा के संकेत

    हथेली में सूर्य और भाग्य रेखा का संयोग दिला सकता है धन और प्रसिद्धि, जानिए हस्तरेखा के संकेत


    नई दिल्ली। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली की रेखाएं और पर्वत केवल हाथ की संरचना नहीं होतीं, बल्कि इन्हें व्यक्ति के भाग्य और जीवन की संभावनाओं का संकेत माना जाता है। मान्यता है कि कुछ लोगों को कड़ी मेहनत के बाद भी आर्थिक संघर्ष करना पड़ता है, जबकि कुछ लोग अपेक्षाकृत कम प्रयास में ही सफलता और धन प्राप्त कर लेते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, हथेली पर मौजूद भाग्य रेखा, सूर्य पर्वत, शनि पर्वत और बुध पर्वत की स्थिति यह तय करने में अहम भूमिका निभाती है कि व्यक्ति के जीवन में धन, सफलता और स्थिरता कैसी रहेगी।

    भाग्य रेखा का महत्व

    धन और सफलता के योग में भाग्य रेखा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह रेखा हथेली के निचले हिस्से से शुरू होकर मध्यमा उंगली के नीचे स्थित शनि पर्वत की ओर बढ़ती है। अगर यह रेखा गहरी, स्पष्ट और बिना टूटे शनि पर्वत तक पहुंचे तो व्यक्ति को जीवन में आर्थिक स्थिरता मिलने की संभावना मानी जाती है।

    यदि यह रेखा मस्तिष्क रेखा के पास जाकर दो भागों में बंट जाए और उसका एक हिस्सा बुद्धि रेखा से जुड़ जाए, तो इसे धन और समृद्धि का विशेष योग माना जाता है। ऐसे व्यक्ति अपनी समझ और निर्णय क्षमता के बल पर संपत्ति अर्जित करने में सफल होते हैं।

    सूर्य पर्वत का संकेत

    अनामिका उंगली के नीचे स्थित सूर्य पर्वत व्यक्ति की प्रतिष्ठा, सम्मान और सफलता को दर्शाता है। यदि यह पर्वत उभरा हुआ, साफ और गुलाबी हो, तो व्यक्ति को समाज में नाम और पहचान मिलने की संभावना मानी जाती है।

    इसके साथ ही यदि सूर्य पर्वत पर त्रिकोण या सीधी रेखाएं हों, तो यह व्यापार, नेतृत्व क्षमता और सफलता के अच्छे संकेत माने जाते हैं। अगर भाग्य रेखा का संपर्क सूर्य पर्वत से हो जाए, तो ऐसे व्यक्ति को कम प्रयास में भी बड़ी सफलता और प्रसिद्धि मिलने का योग माना जाता है।

  • आईपीएल 2026 में जबरदस्त उलटफेर: आरआर-एसआरएच मुकाबले के बाद अंकतालिका और कैप रेस में बड़ा बदलाव

    आईपीएल 2026 में जबरदस्त उलटफेर: आरआर-एसआरएच मुकाबले के बाद अंकतालिका और कैप रेस में बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 का शनिवार क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद रोमांचक और यादगार साबित हुआ, जहां दो मुकाबलों ने पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर को एक नया मोड़ दे दिया। दिन की शुरुआत दिल्ली में हुए मैच से हुई, जहां दिल्ली कैपिटल्स और पंजाब किंग्स आमने-सामने थीं। इस मैच में रन बरसने का ऐसा सिलसिला देखने को मिला कि गेंदबाज पूरी तरह दबाव में नजर आए। पंजाब किंग्स ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए एक विशाल लक्ष्य को हासिल कर क्रिकेट इतिहास में एक यादगार जीत दर्ज की।

    इसके बाद शाम के मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच भी जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। यह मैच भी हाई-स्कोरिंग रहा, जहां दोनों टीमों ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की और दर्शकों को पूरी तरह रोमांचित कर दिया। सनराइजर्स हैदराबाद ने लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत दर्ज की और अपनी स्थिति को अंकतालिका में और मजबूत किया।

    इन दोनों मुकाबलों के बाद अंकतालिका में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पंजाब किंग्स लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर शीर्ष स्थान पर बनी हुई है और 7 मैचों में 13 अंकों के साथ सबसे आगे है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 10 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर अपनी पकड़ बनाए हुए है। वहीं सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स के बीच कड़ी टक्कर जारी है, जहां दोनों टीमों के अंक बराबर हैं, लेकिन नेट रन रेट के आधार पर उनकी रैंकिंग अलग है।

    मध्यक्रम की बात करें तो चेन्नई सुपर किंग्स, दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस एक समान स्थिति में हैं और हर टीम के पास बराबर अंक हैं, जिससे प्लेऑफ की दौड़ और भी रोमांचक हो गई है। मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स अब भी वापसी की कोशिश में हैं, जबकि कोलकाता नाइट राइडर्स को अंकतालिका में सबसे नीचे रहकर संघर्ष करना पड़ रहा है। हर टीम के लिए अब हर मैच बेहद अहम हो चुका है क्योंकि एक छोटी सी जीत या हार पूरे समीकरण को बदल सकती है।

    ऑरेंज कैप की दौड़ में सनराइजर्स हैदराबाद के अभिषेक शर्मा सबसे आगे निकल गए हैं। उन्होंने अब तक शानदार बल्लेबाजी करते हुए 380 रन बना लिए हैं और लगातार आक्रामक खेल दिखा रहे हैं। उनके बाद केएल राहुल और वैभव सूर्यवंशी बराबरी के करीब पहुंच चुके हैं, जो 357-357 रन बनाकर इस रेस को और दिलचस्प बना रहे हैं।

    वहीं गेंदबाजी में पर्पल कैप की रेस में चेन्नई सुपर किंग्स के अंशुल कंबोज ने शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने लगातार विकेट लेकर अपनी टीम के लिए अहम योगदान दिया है और 14 विकेट के साथ शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं। उनकी गेंदबाजी ने कई मुकाबलों का रुख बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    आईपीएल 2026 जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे हर मैच का महत्व बढ़ता जा रहा है। अंकतालिका में हर जीत टीम को ऊपर ले जा रही है और हर हार स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना रही है। ऑरेंज और पर्पल कैप की रेस भी पूरी तरह खुली हुई है, जहां हर खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देकर आगे निकलने की कोशिश कर रहा है। आने वाले मुकाबले यह तय करेंगे कि कौन सी टीमें अंतिम चार में जगह बनाती हैं और कौन खिलाड़ी पूरे सीजन का सितारा बनकर उभरता है।

  • शिवपुरी: माधव टाइगर रिजर्व में बाघिन का हमला, नहाने गए ग्रामीण की मौत, गांव में दहशत

    शिवपुरी: माधव टाइगर रिजर्व में बाघिन का हमला, नहाने गए ग्रामीण की मौत, गांव में दहशत

    शिवपुरी। मध्य प्रदेश के माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती मौजूदगी अब स्थानीय ग्रामीणों के लिए खतरा बनती जा रही है। यहां दिसंबर 2025 में लाई गई मादा बाघिन MT-6 पर एरावन गांव के 50 वर्षीय ग्रामीण की मौत का आरोप है। मृतक सिंध नदी के किनारे नहाने गया था जहां उसका शव टुकड़ों में मिला और उसके कपड़े किनारे पड़े पाए गए।

    घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल फैल गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने शनिवार को सतनवाड़ा नरवर मार्ग पर करीब 5 घंटे तक चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन को मौके पर पहुंचना पड़ा जहां पोहरी विधायक कैलाश कुशवाह भी पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की।

    जानकारी के अनुसार घटना वाले दिन बाघिन MT-6 की लोकेशन भी उसी क्षेत्र में पाई गई थी जहां शव मिला था। पार्क प्रबंधन के अनुसार उसके कॉलर आईडी से उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि हमले की वास्तविक स्थिति क्या थी।

    एरावन गांव माधव टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में स्थित है जहां जंगल से घिरे होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही सामान्य मानी जाती है। लेकिन अब ग्रामीणों का कहना है कि बाघिन की लगातार मौजूदगी से उनकी जान को खतरा बढ़ गया है क्योंकि लोग अभी भी नदी और जंगल क्षेत्र में बेधड़क जाते हैं।

    ग्रामीणों ने मांग की है कि या तो बाघिन MT-6 को यहां से स्थानांतरित किया जाए या फिर गांव को सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए। उनका कहना है कि यदि बाघिन के व्यवहार को आदमखोर माना जाता है तो उसे आबादी के पास नहीं रखा जा सकता।

    वहीं वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया लेकिन ग्रामीणों को ठोस सुरक्षा आश्वासन नहीं दिया जा सका। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट होने की बात कही है।

    विधायक कैलाश कुशवाह ने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और वन विभाग को इस मामले में तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने मृतक के परिजनों को जल्द मुआवजा देने की भी मांग की है। फिलहाल एरावन और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है और लोग वन विभाग की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

  • टी20 सीरीज में भारत की पहली जीत, दीप्ति शर्मा के ऑलराउंड प्रदर्शन से टूटा हार का सिलसिला

    टी20 सीरीज में भारत की पहली जीत, दीप्ति शर्मा के ऑलराउंड प्रदर्शन से टूटा हार का सिलसिला

    नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका में चल रही पांच मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम ने आखिरकार जीत का स्वाद चख लिया है। शुरुआती तीन मुकाबलों में हार का सामना करने के बाद चौथे मैच में टीम इंडिया ने शानदार वापसी करते हुए दक्षिण अफ्रीका को 14 रन से मात दी। इस जीत में सबसे बड़ा योगदान दीप्ति शर्मा का रहा, जिन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन किया।

    पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 185 रन बनाए। शुरुआत थोड़ी धीमी रही, लेकिन मध्यक्रम ने पारी को संभालते हुए स्कोर को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। जेमिमा रोड्रिग्स ने तेजतर्रार बल्लेबाजी करते हुए 43 रन बनाए और टीम को स्थिरता दी। इसके बाद दीप्ति शर्मा और ऋचा घोष ने मिलकर अंतिम ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी की और नाबाद साझेदारी करते हुए टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया।

    दीप्ति शर्मा ने इस मैच में अपनी बल्लेबाजी से भी अहम भूमिका निभाई और 26 गेंदों पर 36 रन बनाए। उनकी पारी में चौकों की झड़ी देखने को मिली, जिसने टीम को जरूरी तेजी दी। ऋचा घोष ने भी तेजी से रन बनाते हुए 34 रनों का योगदान दिया और दोनों ने मिलकर पारी को मजबूत अंत दिया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की टीम शुरुआत से ही दबाव में नजर आई। भारतीय गेंदबाजों ने सटीक लाइन और लेंथ से बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। इसी दौरान दीप्ति शर्मा ने गेंदबाजी में कमाल कर दिया और अपने स्पेल में 5 विकेट हासिल किए। उनकी कसी हुई गेंदबाजी के आगे विपक्षी बल्लेबाज टिक नहीं सके।

    दक्षिण अफ्रीका की टीम पूरे 20 ओवर भी नहीं खेल सकी और 171 रन पर सिमट गई। हालांकि सुने लुस और तंजिम ब्रिट्स ने कुछ संघर्ष जरूर दिखाया, लेकिन बाकी बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजी के सामने ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए।

    इस बेहतरीन प्रदर्शन के लिए दीप्ति शर्मा को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन ने भारत की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई और टीम को सीरीज में पहली जीत दिलाई।

    अब सीरीज का अंतिम मुकाबला खेला जाना बाकी है, जिसमें भारतीय टीम अपनी जीत की लय को बनाए रखने की कोशिश करेगी। हालांकि सीरीज में दक्षिण अफ्रीका अब भी आगे है, लेकिन इस जीत ने भारत का आत्मविश्वास जरूर बढ़ा दिया है और टीम ने मजबूत वापसी का संकेत दिया है।

  • ममता का दावा 100 सीटें जीतने का, अमित शाह बोले- BJP जीतेगी 110 सीटें, बंगाल में सियासी जंग तेज

    ममता का दावा 100 सीटें जीतने का, अमित शाह बोले- BJP जीतेगी 110 सीटें, बंगाल में सियासी जंग तेज


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गर्म है और दूसरे चरण के मतदान से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। दोनों दलों ने पहले चरण के मतदान को लेकर अलग-अलग बड़े दावे किए हैं।

    तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि पहले चरण में उनकी पार्टी ने 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बना ली है। भवानीपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि टीएमसी इस चुनाव में भारी जीत की ओर बढ़ रही है और अगर जनता का समर्थन मिला तो पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिलेगा।

    ममता बनर्जी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी चुनावी दबाव में है और उनके खिलाफ केंद्र सरकार पूरी ताकत झोंक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को कमजोर करने के लिए बड़ी संख्या में हेलीकॉप्टर केंद्रीय बल और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद भाजपा उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। भवानीपुर सीट का जिक्र करते हुए ममता ने कहा कि वे इस क्षेत्र से तीन बार जीत चुकी हैं और इस बार भी जनता का भरोसा उनके साथ है।

    वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पलटवार करते हुए दावा किया कि पहले चरण की 142 सीटों में से भाजपा 110 सीटों पर आगे है। मिदनापुर की रैली में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह परिणाम भाजपा के लिए बड़ी जीत का संकेत है और राज्य में परिवर्तन तय है।

    अमित शाह ने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी और राज्य को भयमुक्त बनाया जाएगा। उन्होंने ममता सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना दक्षिण कोलकाता लॉ कॉलेज की घटना और संदेशखाली में महिलाओं पर कथित अत्याचार जैसे मामलों का उल्लेख किया।

    शाह ने यह भी कहा कि महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद ममता बनर्जी राज्य में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही हैं। इसके अलावा उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार बनने पर मतुआ समुदाय को नागरिकता देने का काम किया जाएगा।

  • डिजिटल स्क्रीन पर लौटेगा रिश्तों का अधूरा सच! वेब सीरीज में तब्दील होगी करण जौहर की 'कभी अलविदा ना कहना', ओटीटी पर मचेगा धमाल।

    डिजिटल स्क्रीन पर लौटेगा रिश्तों का अधूरा सच! वेब सीरीज में तब्दील होगी करण जौहर की 'कभी अलविदा ना कहना', ओटीटी पर मचेगा धमाल।

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में प्रेम और विवाह के पारंपरिक ढांचों को चुनौती देने वाली फिल्म ‘कभी अलविदा ना कहना’ एक बार फिर सुर्खियों में है। लगभग दो दशक पहले बड़े पर्दे पर तहलका मचाने वाली इस कहानी को अब एक नए और विस्तृत कलेवर में पेश करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

    फिल्म निर्माता करण जौहर ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि वह इस कल्ट क्लासिक फिल्म को एक लंबी वेब सीरीज के रूप में विकसित कर रहे हैं। साल 2006 में जब यह फिल्म रिलीज हुई थी, तब इसने समाज में विवाहेतर संबंधों (एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर) जैसे संवेदनशील विषय पर एक बड़ी बहस छेड़ दी थी। अब बदलते दौर के साथ, इस कहानी को ओटीटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से और भी अधिक गहराई से दर्शकों के सामने लाने की योजना है।

    करण जौहर ने इस प्रोजेक्ट के बारे में साझा करते हुए उन दिनों को याद किया जब इस फिल्म के विषय को लेकर लोगों की राय काफी बंटी हुई थी। उस समय कई आलोचकों और दर्शकों ने फिल्म का विरोध करते हुए इसे ‘बेवफाई को बढ़ावा देने वाला’ बताया था।

    हालांकि, करण का हमेशा से यह तर्क रहा कि उन्होंने केवल समाज के उस कड़वे सच को पर्दे पर उतारा जो अक्सर बंद कमरों के पीछे छिपा रहता है। करण का मानना है कि फिल्म के सीमित समय में वह सभी भावनाओं और परिस्थितियों को पूरी तरह से नहीं दिखा पाए थे, जिसे अब वेब सीरीज के लंबे प्रारूप (Long-form format) में बखूबी विस्तार दिया जा सकता है।

    फिलहाल, इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए प्रमुख डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ बातचीत का दौर जारी है। हालांकि करण ने अभी सीरीज की नई स्टार कास्ट और निर्देशन की कमान किसके हाथ में होगी, इसका खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि इसे एक भव्य शो के रूप में प्रोड्यूस किया जाएगा।

    मूल फिल्म में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन और प्रीति जिंटा जैसे बड़े सितारों ने काम किया था, जिन्होंने अपनी अदाकारी से रिश्तों की उलझन को बखूबी पर्दे पर उतारा था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वेब सीरीज के आधुनिक दौर में उन किरदारों को निभाने के लिए किन कलाकारों का चयन किया जाता है।

    व्यावसायिक दृष्टि से भी ‘कभी अलविदा ना कहना’ एक सफल फिल्म रही थी, जिसने वैश्विक स्तर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया था। करण जौहर, जो हाल के वर्षों में निर्देशन से ज्यादा निर्माण और नए प्रयोगों पर ध्यान दे रहे हैं, के लिए यह सीरीज उनके करियर का एक महत्वपूर्ण डिजिटल कदम साबित हो सकती है।

    रिश्तों के उतार-चढ़ाव, अधूरे प्यार और वैवाहिक जीवन की चुनौतियों को समेटे यह सीरीज निश्चित रूप से दर्शकों को एक बार फिर भावनाओं के गहरे समंदर में ले जाएगी। फैंस को अब इंतजार है उस आधिकारिक घोषणा का, जब इस सीरीज की रिलीज डेट और कास्ट से पर्दा उठेगा।

  • मुझ पर 36 केस, ममता पर मेहरबानी क्‍यों? राहुल गांधी ने मोदी सरकार और TMC दोनों पर साधा निशाना

    मुझ पर 36 केस, ममता पर मेहरबानी क्‍यों? राहुल गांधी ने मोदी सरकार और TMC दोनों पर साधा निशाना


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हुगली जिले के सेरामपुर में आयोजित रैली में केंद्र सरकार BJP-RSS और ममता बनर्जी की TMC पर एक साथ तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने सवाल उठाया कि उनके खिलाफ 36 केस दर्ज किए गए और ED ने 55 घंटे पूछताछ की लेकिन ममता बनर्जी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    राहुल गांधी ने दावा किया कि इसका कारण यह है कि ममता बनर्जी BJP से सीधे तौर पर मुकाबला नहीं करतीं इसलिए उन्हें केंद्र से राहत मिलती है। रैली में राहुल ने कहा कि देश में दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष चल रहा है। एक ओर कांग्रेस है जो संविधान एकता और भाईचारे की बात करती है जबकि दूसरी ओर BJP है जो उनके अनुसार नफरत और हिंसा फैलाने का काम करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS और BJP समाज में विभाजन पैदा करते हैं और धर्म के नाम पर लोगों को बांटते हैं।

    कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि इसका उद्देश्य देश में प्रेम और सद्भाव का संदेश फैलाना था। वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्राओं को भारत तोड़ो यात्रा बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार देश को बांटने की राजनीति कर रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी पर हमला जारी रखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते में उन्होंने देश के हितों से समझौता किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील में कृषि छोटे उद्योग ऊर्जा क्षेत्र और देश का डेटा प्रभावित हुआ। राहुल ने यह भी कहा कि कोई भी मजबूत प्रधानमंत्री दबाव में आकर ऐसा फैसला नहीं लेता।

    ममता बनर्जी पर सवाल उठाते हुए राहुल ने अपने खिलाफ कार्रवाई का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उन पर कई राज्यों में केस चल रहे हैं उनसे लंबी पूछताछ हुई यहां तक कि उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई। इसके मुकाबले उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ न तो ED और न ही CBI ने कोई ठोस कार्रवाई की।

    बंगाल की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में नौकरी पाने के लिए TMC से जुड़ाव जरूरी हो गया है। उन्होंने हिंदुस्तान मोटर्स की बंद फैक्ट्री का उदाहरण देते हुए कहा कि जो बंगाल कभी औद्योगिक रूप से मजबूत था वह अब पिछड़ गया है।

    इसके अलावा उन्होंने शारदा और रोज वैली जैसे पोंजी घोटालों कोयला तस्करी और अवैध खनन का मुद्दा उठाया। राहुल ने आरोप लगाया कि राज्य में हर काम के लिए गुंडा टैक्स देना पड़ता है जिससे आम जनता परेशान है।