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  • मप्र में कलेक्टर्स की अनदेखी के चलते 20 जिलों में 77 करोड़ की 33 सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा

    मप्र में कलेक्टर्स की अनदेखी के चलते 20 जिलों में 77 करोड़ की 33 सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा

    भोपाल। मध्य प्रदेश के 20 जिलों में 77 करोड़ रुपये की 33 सरकारी संपत्तियों का मालिक वक्फ बोर्ड है। वक्फ बोर्ड के नाम पर ये संपत्तियां जिला कलेक्टरों की अनदेखी और लापरवाही की वजह से हुई हैं।

    इसके अलावा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने रायसेन जिले में साढ़े चार किलोमीटर लंबी सड़क ऐसी जगह बना दी, जो कुछ दिन बाद डूब क्षेत्र में आने वाला था। साथ ही विदिशा और नर्मदापुरम जिले में स्वीकृति से ज्यादा लंबी सड़क बनाकर सरकार को 15 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की निष्क्रियता की वजह से प्रदेश में अवैध कॉलोनियां पनप गईं, तो दूसरी तरफ इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर नगर निगम आश्रय शुल्क के रूप में जमा 260 करोड़ रुपये का हिसाब ही नहीं दे पाए।

    यह खुलासा कैग (नियंत्रक महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट को एक दिन पहले विधानसभा में पेश किया गया था, जिसमें 2018 से 2023 के बीच सरकार के 14 विभागों के कामकाज और योजनाओं की पड़ताल करने के बाद उक्त गड़बड़ियों का खुलासा किया है।

    कैग की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर भी ऑडिट किया। वक्फ की 81 संपत्तियों की जांच में पाया कि 20 जिलों की 33( 41 फीसदी) संपत्तियां जो दस्तावेजों में सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज थीं। उन्हें वक्फ की संपत्ति के रूप में रजिस्टर्ड किया गया। कैग ने रिपोर्ट में लिखा है कि इन 20 जिलों के कलेक्टरों ने संपत्तियों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को निरस्त करने करने के लिए कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए। सरकारी विभागों के इस रवैये की वजह से वक्फ एक्ट का दुरुपयोग हुआ बल्कि सरकारी जमीनों पर कब्जा हो गया।

    हालांकि, सरकार ने अपने जवाब में बताया कि ये टेक्निकल मिस्टेक है। ये भी कहा कि वक्फ एक्ट में जिला प्रशासन से एनओसी लेने का कोई प्रोविजन नहीं है। जिला प्रशासन को हर संपत्ति के बारे में पता था। जब राजस्व रिकॉर्ड का कंप्यूटरीकरण किया गया तो उस दौरान स्वामित्व के कॉलम में सरकारी संपत्ति दर्ज हुई।

    कैग ने सरकार के इस उत्तर को खारिज कर दिया और लिखा कि जिन संपत्तियों का परीक्षण किया उनमें से कुछ एक या दो साल पहले ही रजिस्टर्ड हुई हैं। साथ ही ये भी लिखा कि दो संपत्तियों पर कलेक्टरों की तरफ से आपत्ति दर्ज की गई थी इसके बाद भी वक्फ बोर्ड ने उन्हें बतौर वक्फ की संपत्ति दर्ज किया। जिन संपत्तियों को वक्फ ने अपना समझ लिया वो सामुदायिक प्रयोजन के लिए रिजर्व की गई थी।

    कैग ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (नगर तथा ग्राम निवेश) के लेखा परीक्षा के दौरान पांच बड़े शहरों में हुए प्लान्ड डेवलपमेंट को लेकर ऑडिट किया। ये ऑडिट 2018 से 2023 के बीच भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन नगर निगम में किया गया। इस दौरान 10 अहम बातें सामने आईं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग शहरों के व्यवस्थित विकास की प्लानिंग करने में ही नाकाम रहा है। कैग ने लिखा- टीएंडसीपी ने बीना पेट्रोकेमिकल्स और औद्योगिक प्रदेश के अलावा कोई भी प्रादेशिक योजना तैयार नहीं की।

    भोपाल का मास्टर प्लान प्रकाशित नहीं कर पाया। भोपाल में अभी भी साल 2005 का मास्टरप्लान ही लागू है। विकास योजनाओं की तैयारी के लिए टीएंडसीपी उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर ने हितधारकों से इनपुट कलेक्शन नहीं किया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन नगर निगम ने स्थानीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास के लिए जोन स्तर पर प्लान तैयार नहीं किए, जिससे अवैध कॉलोनियों और स्लम एरिया में बढ़ोतरी हुई। अवैध मैरिज गार्डन की 126 शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने में टीएंडसीपी नाकाम रहा। इसके अलावा नालों का अतिक्रमण और नालों के लिए जमीन छोड़ने के नियमों का पालन भी नहीं करा पाया। कॉलोनाइजर्स ने जो अधूरी कॉलोनियां विकसित कीं, उनके पूरी होने से पहले ही कॉलोनी के बंधक रखे प्लॉट्स को मुक्त कर दिया।

    नगर निगमों ने सुपरविजन फीस पर जीएसटी नहीं वसूला, जिसके चलते सरकार को 96 लाख रुपए का नुकसान हुआ। नगर निगम के अफसरों ने कॉलोनी डेवलपमेंट और बिल्डिंग परमिशन जारी करने के बाद विकास कार्य की मॉनिटरिंग नहीं की। रिपोर्ट के अनुसार, 142 बिल्डिंग और 43 कॉलोनियों के भौतिक सत्यापन के दौरान पाया गया कि मिनिमम ओपन स्पेस, तलघर, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट नहीं बनाई गई। ऑडिट के दौरान पाया गया कि टीएंडसीपी से परमिशन लिए बगैर कॉलेज, रिसॉर्ट और आईटी पार्क बन गए।

    मप्र में जीएसटी लागू होने के बाद गड़बड़ियां देखकर भी आंखे मूंदे रहे अफसर, कई शहरों में मिली खामियां

    कैग की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती दौरान में मध्य प्रदेश में व्यापारियों की गड़बड़ियां देखकर भी जीएसटी विभाग के अफसर आंखें मूंदे रहे और उन पर ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते कई शहरों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। इसमें पाया गया कि कई मामलों में जीएसटी विभाग के अफसरों ने ब्याज की राशि के अंतर और ई-वे बिल का कम भुगतान को भी नजरअंदाज किया। गौरतलब है कि 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ था। इसके बाद अधिकारी व व्यापारियों को नियमों को समझने में काफी मशक्कत करना पड़ी थी।

    इंदौर और भिंड में करोड़ों की कर चोरी के मामले

    कैग की रिपोर्ट के मुताबिक भिंड वृत में वर्ष 2018-19 से 2020-21 के बीच एक प्रकरण में 63 से 162 दिनों की देरी से जीएसटी का भुगतान किया गया। इस प्रकरण में 24 करोड़ रुपये का भुगतान ही नहीं किया गया। वहीं इंदौर के एक ई-वे बिल सत्यापन के प्रकरण में कैग ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। इंदौर के एक करदाता के प्रकरण में वर्ष 2018-19 व 2020-21 के दौरान 137.17 करोड़ की देनदारी के ई-वे बिल जारी किए गए लेकिन तीन साल के दौरान फर्म द्वारा 0.15 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह 137.02 करोड़ कर राशि का कम भुगतान किया गया। इतना ही नहीं, इंदौर में आइटीसी इनपुट सेवा वितरक (आईएसडी) क्रेडिट का गलत लाभ उठाकर 4.15 करोड़ रुपये की राशि मिसमैच होने का मामला भी सामने आया।

    भोपाल में टर्नओवर और पीथमपुर में टीडीएस की गड़बड़ी

    भोपाल में जीएसटी वार्षिक रिटर्न के मामले में वर्ष 2020-21 के दौरान लेखापरीक्षित वार्षिक वित्तीय विवरण व जीएसटीआर-9 के बीच 2166.46 कराेड़ का टर्नओवर असमायोजित मिला। कैग द्वारा यह जानकारी शासन को दिए जाने के बाद राज्य शासन ने सितंबर 2024 में करदाता को डीआरसी-01 जारी किया। पीथमपुर के एक प्रकरण में टीडीएस रिटर्न में कम राशि बताई गई। इस प्रकरण में लेखा परीक्षा ने पाया कि जीएसटी के मुताबिक कटौती की गई कर राशि 2.53 करोड़ और कर योग्य मूल्य 126.65 करोड़ था, जबकि इस मामले में 95.42 करोड़ के कर की राशि को छुपाया गया।

    1895 स्कूलों में टीचर्स ही नहीं, 435 स्कूलों में शिक्षक तो हैं, पर बच्चे नहीं

    कैग की रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1895 स्कूल ऐसे हैं, जहां छात्र तो हैं. लेकिन एक भी शिक्षक यहां पदस्थ नहीं है, वहीं, दूसरी ओर 435 स्कूल ऐसे पाए गए, जहां एक भी विद्यार्थी का नामांकन नहीं है, इसके बावजूद यहां शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।

    कैग रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2023 तक प्रदेश के 66 हजार 814 स्कूलों की समीक्षा में यह विसंगतियां सामने आईं हैं. 435 शून्य नामांकन वाले स्कूलों में से 105 स्कूलों में एक वर्ष से, 38 स्कूलों में दो वर्षों से, 33 स्कूलों में तीन वर्षों से और 259 स्कूलों में चार वर्षों से किसी छात्र का नामांकन नहीं हुआ है। इनमें से 320 स्कूलों में शिक्षकों के लिए पद स्वीकृत ही नहीं थे, फिर भी वहां शिक्षक पदस्थ पाए गए। कैग ने विभाग के जवाब को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि बंद करने या तबादले की प्रक्रिया के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।

    छात्र-शिक्षक अनुपात में भारी गड़बड़ी

    शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्राइमरी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1, मिडिल में 35:1 व सेकंडरी और हायर सेकंडरी में 30:1 होना चाहिए। हालांकि, प्राइमरी स्तर पर औसत स्थिति सामान्य बताई गई है, लेकिन मिडिल स्कूलों में यह अनुपात 37:1, सेकंडरी में 40:1 और हायर सेकंडरी में 54:1 दर्ज है। जिलों की स्थिति और भी चिंताजनक है. टीकमगढ़ में मिडिल स्कूलों का पीटीआर 57:1 है, जो राज्य औसत से काफी अधिक है। सेकंडरी स्तर पर अशोक नगर में 66:1 का अनुपात दर्ज हुआ। वहीं, हायर सेकंडरी में टीकमगढ़ का पीटीआर 112:1 पाया गया, जो राज्य औसत से 58 अंक अधिक है।

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  • बांग्लादेशी सेना में बड़ा बदलाव, भारत में तैनात अधिकारी को वापस बुलाया

    बांग्लादेशी सेना में बड़ा बदलाव, भारत में तैनात अधिकारी को वापस बुलाया


    नई दिल्ली । बांग्लादेश सेना के उच्च कमान में रविवार को बड़ा फेरबदल हुआ जिसमें नए चीफ ऑफ जनरल स्टाफ की नियुक्ति भी शामिल है। इस बदलाव से प्रमुख रणनीतिक कमान और देश की मुख्य सैन्य खुफिया एजेंसी प्रभावित हुई है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार ये बदलाव प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई सरकार के सत्ता संभालने के कुछ दिनों बाद हुए। रिपोर्ट के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल एम मैनुर रहमान को CGS नियुक्त किया गया जो पहले सेना प्रशिक्षण और सिद्धांत कमान ARTDOC के प्रमुख या जनरल ऑफिसर कमांडिंग GOC के पद पर थे।

    भारत में तैनात अधिकारी को वापस बुलाया
    भारत में बांग्लादेश उच्चायोग में रक्षा सलाहकार के पद पर तैनात ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल के दर्जे के साथ पैदल सेना डिवीजन का GOC बनने के लिए वापस बुलाया गया है।

    नई सरकार और चुनाव का संदर्भ

    बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी BNP ने 12 फरवरी को हुए चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। 60 वर्षीय तारिक रहमान ने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली जिससे मुहम्मद यूनुस के 18 महीने के अंतरिम शासन का अंत हुआ।

    भारत-बांग्लादेश संवाद को बढ़ावा
    ढाका में नियुक्त भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने कहा कि नई सरकार के साथ सक्रिय संवाद को लेकर भारत उत्सुक है। उन्होंने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात की और संवाद सहयोग और पारस्परिक हितों पर जोर दिया। उच्चायुक्त वर्मा ने कहा कि भारत बांग्लादेश के साथ हर क्षेत्र में सकारात्मक और भविष्योन्मुखी सहयोग को मजबूत करना चाहता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में गिरावट आई थी और 1971 के बाद यह सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे।

  • सिनेमा या सियासी हथियार? केरल स्टोरी 2 के ट्रेलर पर भड़के प्रकाश राज और अनुराग कश्यप, सीएम विजयन ने भी दी तीखी प्रतिक्रिया!

    सिनेमा या सियासी हथियार? केरल स्टोरी 2 के ट्रेलर पर भड़के प्रकाश राज और अनुराग कश्यप, सीएम विजयन ने भी दी तीखी प्रतिक्रिया!


    नई दिल्ली :भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बेहतरीन अदाकारी के साथ-साथ अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अक्सर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सत्ता और सिस्टम को आईना दिखाने वाले प्रकाश राज ने इस बार ‘द केरल स्टोरी 2’ को लेकर छिड़े विवाद में अपनी एंट्री दर्ज कराई है।
    दक्षिण भारतीय फिल्मों से लेकर बॉलीवुड तक अपनी धाक जमाने वाले इस कलाकार ने फिल्म के कंटेंट पर सवाल उठाते हुए एक ऐसा सोशल मीडिया पोस्ट साझा किया है जिसने इंटरनेट की दुनिया में हलचल मचा दी है। प्रकाश राज उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं जो ट्रोलिंग की परवाह किए बिना अपनी बात रखने का साहस रखते हैं और उनके हालिया X पूर्व में ट्विटर पोस्ट ने इसे एक बार फिर साबित कर दिया है।

    विवाद की असली जड़ विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित और कामाख्या नारायण सिंह के निर्देशन में बनी फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ का वह ट्रेलर है जिसमें एक दृश्य दिखाया गया है कि कैसे एक मुस्लिम परिवार एक व्यक्ति को जबरन ‘बीफ’ खिला रहा है। 27 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली इस फिल्म को लेकर जहां एक पक्ष इसे सच्चाई बता रहा है वहीं दूसरी ओर प्रकाश राज ने रविवार को केरल की असली तस्वीर पेश करने की कोशिश की।

    उन्होंने अपने अकाउंट पर पोर्क बीफ और मछली जैसे विभिन्न व्यंजनों की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि असली द केरल स्टोरी यह है कि कैसे ये तमाम पकवान शाकाहारी ‘सद्या’ के साथ मिल-जुलकर रहते हैं। प्रकाश राज ने संदेश दिया कि केरल की पहचान वहां की विविधता और आपसी भाईचारा है न कि नफरत।

    सिर्फ प्रकाश राज ही नहीं बल्कि जाने-माने फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने भी इस फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी फिल्मों में यथार्थवाद दिखाने के लिए मशहूर अनुराग ने इस फिल्म को पूरी तरह बकवास और प्रोपेगेंडा करार दिया। उन्होंने तीखे लहजे में सवाल किया कि भला कोई किसी को इस तरह जबरदस्ती बीफ कैसे खिला सकता है? अनुराग के मुताबिक ऐसी फिल्में समाज में केवल गलत धारणाएं फैलाने का काम करती हैं।

    इस विवाद में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि केरल धार्मिक सद्भाव और सतत विकास की धरती है। उन्होंने जनता से अपील की कि केरल को आतंकवाद के केंद्र के रूप में दिखाने वाली ऐसी कोशिशों और झूठे प्रोपेगेंडा को सिरे से खारिज कर दिया जाए।

    जैसे-जैसे फिल्म की रिलीज डेट करीब आ रही है वैसे-वैसे बॉलीवुड और राजनीति के गलियारों में बहस और तेज होती जा रही है। एक तरफ जहां फिल्म मेकर्स इसे समाज का आईना बता रहे हैं वहीं दूसरी तरफ प्रकाश राज और अनुराग कश्यप जैसे दिग्गज इसे राज्य की धर्मनिरपेक्ष नींव को कमजोर करने वाली साजिश मान रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विरोध के इन सुरों के बीच ‘द केरल स्टोरी 2’ बॉक्स ऑफिस पर क्या प्रभाव डालती है और दर्शकों का इस पर क्या रुख रहता है।

  • गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य में गिद्धों की हुई वृद्धि, 1013 गिद्धों के साथ बना सुरक्षित ठिकाना

    गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य में गिद्धों की हुई वृद्धि, 1013 गिद्धों के साथ बना सुरक्षित ठिकाना

    मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य एक बार फिर गिद्धों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। ‘प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना 2025-26’ के तहत रविवार को संपन्न हुई, जिसमें यहां कुल 1013 गिद्ध पाए गए हैं।

    गणना का निरीक्षण मुख्य वन संरक्षक उज्जैन वृत्त, आलोक पाठक एवं वनमंडलाधिकारी मंदसौर, संजय रायखेरे द्वारा किया गया। बताया गया कि गाँधीसागर अभयारण्य केवल स्थानीय गिद्धों का ही नहीं, बल्कि विदेशी प्रजातियों का भी पसंदीदा ठिकाना है। गणना में पाए गए हिमालयन ग्रिफन, यूरेशियन ग्रिफन और सिनेरियस जैसे गिद्ध लंबी दूरी तय कर यहाँ पहुँचते हैं। ये मुख्य रूप से तिब्बत, मध्य एशिया, और हिमालय की ऊँचाइयों से शीतकाल के दौरान प्रवास करते हैं। ये प्रवासी गिद्ध आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के महीने में गाँधीसागर पहुँचते हैं और गर्मी शुरू होने से पहले यानी मार्च-अप्रैल तक यहाँ रुकते हैं।

    1. स्थानीय निवासी (4 प्रजातियाँ):

    ये गिद्ध वर्ष भर अभयारण्य में रहते हैं और यहीं प्रजनन करते हैं:

    भारतीय गिद्ध : चंबल की ऊँची चट्टानों पर घोंसले बनाने वाली मुख्य प्रजाति।

    सफेद पीठ वाला गिद्ध : पेड़ों पर बसेरा करने वाले ये गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    राज गिद्ध : अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट लाल सिर वाली प्रजाति।

    मिस्र का गिद्ध : आकार में छोटे और सफेद रंग के स्थानीय गिद्ध।

    विदेशी मेहमान/प्रवासी (3 प्रजातियाँ):

    ये प्रजातियाँ शीतकाल (अक्टूबर-नवंबर से मार्च-अप्रैल) के दौरान तिब्बत, मध्य एशिया और हिमालय की ऊँचाइयों से प्रवास कर यहाँ पहुँचती हैं:

    हिमालयन ग्रिफन : हिमालय के ठंडे क्षेत्रों से आने वाले विशालकाय गिद्ध।

    यूरेशियन ग्रिफन : लंबी दूरी तय कर आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रवासी।

    सिनेरियस गिद्ध : दुनिया के सबसे भारी और बड़े गिद्धों में शुमार।

    गाँधीसागर ही क्यों है ‘गिद्धों का स्वर्ग’?

    निरीक्षण के दौरान डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि सुरक्षित चट्टानें चंबल नदी के किनारे स्थित ऊँची और दुर्गम चट्टानें गिद्धों को सुरक्षित घोंसले बनाने और प्रजनन के लिए आदर्श स्थान प्रदान करती हैं। प्रचुर भोजन और जल: अभयारण्य में वन्यजीवों की अच्छी संख्या और आस-पास के क्षेत्रों में पशुधन की उपलब्धता के कारण इन्हें पर्याप्त भोजन मिलता है। चंबल का पानी इनके लिए बारहमासी जल स्रोत है। मानवीय हस्तक्षेप मुक्त: अभयारण्य का शांत वातावरण और सुरक्षित कॉरिडोर इनके फलने-फूलने में मदद करता है।

  • भारतीय सेना में भर्ती के लिए 01 अप्रैल तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

    भारतीय सेना में भर्ती के लिए 01 अप्रैल तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित सेना भर्ती कार्यालय द्वारा भारतीय सेना में विभिन्न पदों पर भर्ती हेतु अधिसूचना को जारी की जा चुकी है। यह अधिसूचना भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in पर उपलब्ध है। सेना में भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 13 फरवरी प्रारंभ हो चुकी है, जो 01 अप्रैल 2026 तक खुली रहेगी।

    जनसम्पर्क अधिकारी अरुण शर्मा ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी निर्धारित समयावधि के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जारी अधिसूचना के अनुसार अग्निवीर पुरुष (जनरल ड्यूटी, तकनीकी, लिपिक/स्टोरकीपर, ट्रेडमैन दसवीं पास, ट्रेडमैन आठवीं पास), अग्निवीर महिला (सेना पुलिस) तथा स्थायी कैडर के अंतर्गत नर्सिंग असिस्टेंट, नर्सिंग असिस्टेंट वेट एवं सिपाही फार्मा के पदों पर भर्ती की जाएगी।

    भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत ऑनलाइन कॉमन एंट्रेंस एग्जाम 01 जून से 10 जून 2026 के मध्य आयोजित किए जाने की संभावना है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा से संबंधित दिशा- निर्देश एवं पात्रता शर्तों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें।

  • जबलपुर में ओवर ब्रिज का एक हिस्सा धंसा, आवागमन प्रभावित

    जबलपुर में ओवर ब्रिज का एक हिस्सा धंसा, आवागमन प्रभावित

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित शहपुरा में नेशनल हाईवे 45 शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का हिस्सा रविवार शाम 5 बजे नीचे गिर गया। जिससे आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया। ओवरब्रिज गिरने से शहपुरा नगर से यातायात को डायवर्ट किया गया है। जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।

    उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2025 के मध्य में जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे 45 पर स्थित शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का एक हिस्सा धंस गया था जिसके बाद वाहनों का आवागमन दुसरे बचे हुए हिस्से हो रहा था। लेकिन आज बढ़े हुए दबाव को वह दूसरा हिस्सा भी नहीं झेल पाया।

    इधर टोल प्लाजा के मैनेजर का कहना हे कि हमने टोल पर वाहनों को बिना किसी शुल्क दिए निकलने की अनुमति दे रखी है। इधर ,युवक कांग्रेस ने ओवर ब्रिज पर जाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी है। खास बात यह है कि यह पुल मुश्किल से 3 साल पहले ही बना था और धंसने की वजह घटिया निर्माण और खराब इंजीनियरिंग बताई जा रही है।

    पुल का हिस्सा धंसने से जबलपुर से भोपाल और नरसिंहपुर की तरफ जाने वाला हाईवे प्रभावित हुआ है। लोगों ने इसे बड़ी लापरवाही बताते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।

  • AI समिट में शर्टलेस विरोध पर दिल्ली कोर्ट का सख्‍त रूख, कहा- देश की कूटनीतिक छवि को पहुंचा नुकसान

    AI समिट में शर्टलेस विरोध पर दिल्ली कोर्ट का सख्‍त रूख, कहा- देश की कूटनीतिक छवि को पहुंचा नुकसान


    नई दिल्ली । दिल्ली की अदालत ने एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस आईवाईसी के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए शर्टलेस विरोध प्रदर्शन को सार्वजनिक व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया। कोर्ट ने कहा कि यह असहमति जताने का उचित तरीका नहीं था और इससे भारत की डिप्लोमैटिक इमेज को नुकसान पहुंचा।

    चार कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में भेजा गया

    ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवि की अदालत ने शनिवार को गिरफ्तार चार कार्यकर्ताओं को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा। इनमें बिहार से राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि, प्रदेश सचिव कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश से प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार और तेलंगाना से नरसिंह यादव शामिल हैं।

    प्रारंभिक जांच में बाहरी साजिश के संकेत

    कोर्ट ने बताया कि आरोपियों के दूर दराज के राज्यों से होने और प्रारंभिक जांच में बाहरी साजिश के संकेत मिलने के कारण उनके फरार होने का खतरा अधिक है। मजिस्ट्रेट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन ने न केवल आयोजन की शुचिता को खतरे में डाला, बल्कि देश की कूटनीतिक प्रतिष्ठा को भी प्रभावित किया।

    क्‍या हैं आरोप?

    अदालत के अनुसार, आरोपियों ने वैश्विक प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में शर्टलेस प्रदर्शन किया, जिसमें भड़काऊ नारे लिखी हुई टी शर्ट पहनी गई थी। आरोप है कि उन्होंने सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों को उनकी ड्यूटी में बाधा पहुंचाई और कुछ पर शारीरिक हमला भी किया।

    सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा
    मजिस्ट्रेट ने कहा, “ऐसा व्यवहार असहमति जताने की वैध सीमा से बाहर है और सार्वजनिक व्यवस्था पर स्पष्ट हमला है। इससे आयोजन की गरिमा और विदेशी हितधारकों के सामने भारत की कूटनीतिक छवि प्रभावित होती है।” कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि आरोपियों के कई सहयोगी संभावित रूप से फरार हैं और डिजिटल या वित्तीय सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।

    कानूनी प्रावधान

    जांच में शामिल आरोप भारतीय न्याय संहिता की धारा 121 लोक सेवक को कर्तव्य से रोकने के लिए चोट पहुंचाना और धारा 61(2) आपराधिक षड्यंत्र के तहत आते हैं, जिनमें तीन साल से अधिक की सजा का प्रावधान है।

  • कृषि विज्ञान मेलों का लाभ उठाएं उन्नत खेती करें किसान : कृषि मंत्री कंषाना

    कृषि विज्ञान मेलों का लाभ उठाएं उन्नत खेती करें किसान : कृषि मंत्री कंषाना


    भोपाल! किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि किसान कल्याण वर्ष 
    2026में कृषि नवाचार और उन्नत खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में कृषि विज्ञान मेलों का आयोजन किया जा रहा है। कृषिउद्यानिकीतकनीक विस्तारण एवं तिलहन मिशन में जिला स्तर पर कृषि विज्ञान मेले आयोजित किया जा रहे हैं। इन मेलों का लाभ उठाकर किसान निरंतर उन्नत खेती करें और प्रदेश की समृद्धि में अपना योगदान दें।   

    कृषि मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि मेलों का उद्देश्य कृषकों को उन्नत कृषि तकनीकों, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, मूल्य संवर्धन, विपणन, सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप एवं स्प्रिंकलर), नरवाई प्रबंधन, तिलहनी-दलहनी फसलों के विस्तार तथा आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी प्रदान करना है। “कृषि विज्ञान मेला” किसानों को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने की दिशा में विशेष महत्व रखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों की समृद्धि और कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

    मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि शासन विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रहा है। उन्होंने मिश्रित खेती की पारंपरिक पद्धति को भूमि की उर्वरता के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि वर्तमान में एकल फसल प्रणाली एवं रासायनिक उर्वरकों-कीटनाशकों के अत्याधिक उपयोग से भूमि की गुणवत्ता के साथ सभी का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने किसानों से नवीन तकनीकों एवं ज्ञान को व्यवहार में लाने तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाकर स्वस्थ समाज एवं समृद्ध किसान के लक्ष्य को साकार करने का आह्वान किया।

    किसान, कृषि विज्ञान मेलों में केवल अवलोकन तक सीमित न रहें, बल्कि शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ लें। कृषि मंत्री श्री कंषाना ने बताया कि प्रदेश में जैविक खेती को व्यापक रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को उन्नत कृषि एवं उद्यानिकी की ओर प्रेरित करना आवश्यक है, जिससे कृषि क्षेत्र में नवाचार एवं समृद्धि सुनिश्चित हो सके। किसान, कृषि विज्ञान मेलों में प्रदर्शनी को ध्यानपूर्वक देखें, समझें और प्राप्त जानकारी को अपनी खेती में लागू करें। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से भूमि की उर्वरकता को हानि होती है तथा दंड का प्रावधान है। नरवाई का उपयोग जैविक खाद एवं अन्य उपयोगों में कर लाभ अर्जित किया जा सकता है।

  • बंदियों की सोच सकारात्मक बनाने के प्रयास हो : राज्यपाल पटेल

    बंदियों की सोच सकारात्मक बनाने के प्रयास हो : राज्यपाल पटेल


    भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि बंदी
     पुनर्वास प्रयासों को समग्रता और बहुआयामी स्वरूप में किया जाना चाहिए। कार्य का दृष्टिकोण मानवतावादी हो। भाव संवेदनशील और विचारशील होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास प्रयासों में सकारात्मक सोच के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री का मन की बात कार्यक्रम बंदियों की सोच को रचनात्मक दिशा देने। भविष्य के प्रति विश्वास और आत्मबल को मजबूत करने में बहुत सहयोगी होगा।

    राज्यपाल श्री पटेल सोमवार को लोकभवन में गृह एवं जेल विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिव शेखर शुक्ला, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, विशेष महानिदेशक जेल श्री अखितो सेमा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने अधिकारियों से कहा कि बंदी उत्पादक गतिविधियों के द्वारा बंदियों के परिवारों के जीवन निर्वाह में आर्थिक सहयोग के उद्देश्य से नियोजन गतिविधियों का संयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि जेलों में बंद मामूली अपराधों के विचाराधीन कैदियों को केवल दंड देना ही नहींबल्कि उन्हें सकारात्मक सुधार के जरिए समाज की मुख्य धारा में वापस भेजना पुनर्वास प्रयासों का मूलाधार होना चाहिए। भाव उनको अपराधी की पहचान से मुक्त होकर बेहतर नागरिक के रूप में स्थापित होने में मदद का होना चाहिए। समाज के नव-निर्माण में वे अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनकर जेल की दीवारों के पीछे एकाकी जीवन जी रहे बंदियों को देश की प्रगति और प्रेरक कहानियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उनके जीवन में आशावाद और नव-निर्माण का संचार होगा। बंदियों के भीतर छिपी नकारात्मकता में कमी आएगी। सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्म-सुधार की भावना जागृत होगी। उन्होंने जेलों में लंबित दया याचिकाओं, महिला बंदियों के बच्चों के उचित लालनपालन की व्यवस्थाओं, महिला बंदियों के पुनर्वास, दिव्यांग एवं बुजुर्ग बंदियों के लिए आवश्यक कृत्रिम उपकरणों की उपलब्धता और श्रम शक्ति के उत्पादक गतिविधियों में नियोजन के संबंध चर्चा की।

    अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2025-26 में प्राप्त 18 दया याचिकाओं का प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर परीक्षण किया जा रहा है। जेल विभाग द्वारा विगत पांच वर्षों में प्राप्त सभी दया याचिकाओं का परीक्षण कराया जा रहा है। विभाग द्वारा उनके त्वरित निराकरण के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 180 देशों के 11 लाख लोगों के द्वारा देखे जाने वाले गीता पाठ के ऑनलाइन कार्यक्रम का प्रदेश की जेलों में प्रसारण की अभिनव पहल जेल विभाग द्वारा की गई है। साप्ताहिक प्रसारण में गीता के श्लोक का शुद्ध उच्चारण और श्लोक का भावार्थ कर समझाया जाता है।

  • जब माधुरी की आंखों में देख शर्मा गए थे जग्गू दादा: 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' में जैकी श्रॉफ ने खोले रोमांस के दिलचस्प राज

    जब माधुरी की आंखों में देख शर्मा गए थे जग्गू दादा: 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' में जैकी श्रॉफ ने खोले रोमांस के दिलचस्प राज


    नई दिल्ली :बॉलीवुड के दो दिग्गज सितारे जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित जब एक साथ ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के मंच पर पहुंचे तो यादों का कारवां मानों ठहर सा गया। कॉमेडी किंग कपिल शर्मा के साथ गुफ्तगू के दौरान जग्गू दादा ने अपनी चिर-परिचित बेबाकी और मासूमियत के साथ माधुरी दीक्षित की जमकर तारीफ की। जैकी ने माधुरी को न केवल एक बेहतरीन अदाकारा बताया बल्कि उन्हें जमीन से जुड़ी हुई एक ऐसी शख्सियत करार दिया जिसकी सादगी का जादू आज भी बरकरार है। बातचीत के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए जैकी ने बताया कि भले ही पर्दे पर उन्होंने कई रोमांटिक किरदार निभाए हों लेकिन असल जिंदगी में वह माधुरी के साथ रोमांटिक सीन फिल्माते समय बुरी तरह शर्माया करते थे।

    यादों के झरोखे को खोलते हुए माधुरी दीक्षित ने अपनी पहली मुलाकात का किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि यह मुलाकात मशहूर फिल्म ‘कर्मा’ के सेट पर हुई थी। उस वक्त माधुरी फिल्म इंडस्ट्री में नई थीं और फिल्म में एक छोटे से गाने का हिस्सा थीं। माधुरी ने हंसते हुए याद किया कि कैसे अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ एक कोने में बैठकर उन्हें ‘तिरछी नजरों’ से देख रहे थे।

    उस समय की अपनी घबराहट को याद करते हुए माधुरी ने बताया कि दो बड़े स्टार्स के सामने वह काफी नर्वस महसूस कर रही थीं। वहीं दूसरी ओर जैकी श्रॉफ ने बताया कि उन्होंने माधुरी के बारे में सबसे पहले मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान से सुना था। सरोज खान ने ही सुभाष घई को माधुरी के हुनर और खूबसूरती के बारे में बताते हुए उन्हें कास्ट करने की सलाह दी थी।

    शो के दौरान जब कपिल शर्मा ने चुटकी लेते हुए जैकी से पूछा कि वे रिहर्सल छोड़कर माधुरी को क्यों निहारते रहते थे तो जग्गू दादा ने बेहद दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया कि कई बार आपको माधुरी जैसी शख्सियत के सामने खुद को भूलना पड़ता है।

    उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी याद दिलाया कि माधुरी ने उनके साथ हर तरह के रिश्ते निभाए हैं-वे पर्दे पर उनकी प्रेमिका पत्नी और यहाँ तक कि ‘संगीत’ फिल्म में उनकी सास का किरदार भी निभा चुकी हैं। जैकी ने स्वीकार किया कि माधुरी की आंखों में देखकर बात करना या उनके साथ रोमांटिक गाने शूट करना उनके लिए सबसे कठिन काम होता था।

    जैकी श्रॉफ ने अपनी झिझक का कारण बताते हुए कहा कि वह कभी भी पर्दे पर निजी भावनाओं को दिखाने के आदी नहीं थे। उनके अनुसार फिल्म भले ही काल्पनिक हो लेकिन कुछ भावनाएं और इमोशन्स बहुत व्यक्तिगत होते हैं जो दिल में बसते हैं।

    ऐसे में माधुरी जैसी प्रभावशाली अभिनेत्री के सामने अभिनय करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। जैकी और माधुरी की यह जुगलबंदी न केवल दर्शकों के लिए मनोरंजन लेकर आई बल्कि बॉलीवुड के उस सुनहरे दौर की यादें भी ताजा कर गई जहाँ सम्मान और सादगी ही रिश्तों की बुनियाद हुआ करती थी।