Blog

  • महाकाल की नगरी में विजय सिन्हा भक्ति में लीन भस्म आरती के साक्षी बन मांगी देश और बिहार की खुशहाली

    महाकाल की नगरी में विजय सिन्हा भक्ति में लीन भस्म आरती के साक्षी बन मांगी देश और बिहार की खुशहाली


    उज्जैन । मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन एक बार फिर आध्यात्मिक आस्था का केंद्र बनी जब बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने प्रवास के दौरान विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन किए। कालों के काल कहे जाने वाले भगवान महाकाल की शरण में पहुंचे उपमुख्यमंत्री पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए और उन्होंने मंदिर परिसर में कुछ समय बिताकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

    मंदिर पहुंचने के बाद विजय कुमार सिन्हा ने सबसे पहले नंदी हॉल में बैठकर ध्यान लगाया जहां वे कुछ समय तक गहन भक्ति में लीन रहे। इस दौरान उन्होंने मन की शांति और आध्यात्मिक संतुलन का अनुभव किया। इसके बाद उन्होंने विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दिव्य और अलौकिक दृश्य के दर्शन किए जो उज्जैन की पहचान मानी जाती है। भस्म आरती के साक्षी बनने के बाद उन्होंने गर्भगृह की चौखट से भगवान महाकाल के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना।

    परंपराओं का पालन करते हुए उपमुख्यमंत्री ने बाबा महाकाल को जल अर्पित किया और पूरे विधि विधान के साथ पूजन अर्चन किया। इस दौरान उन्होंने बिहार राज्य की प्रगति और समृद्धि के साथ साथ पूरे देशवासियों के सुख समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने मां भारती के गौरव को बढ़ाने और राष्ट्र के उज्जवल भविष्य के लिए भी प्रार्थना की।

    विजय कुमार सिन्हा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की जड़ें अत्यंत गहरी हैं और महाकाल की ऊर्जा समाज में सकारात्मकता और संतुलन स्थापित करने का आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आध्यात्मिक स्थलों से व्यक्ति को नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है जो उसे समाज और राष्ट्र के लिए बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।

    उन्होंने विशेष रूप से महिला शक्ति के सशक्तिकरण और समाज के समग्र विकास के लिए भी प्रार्थना की और कहा कि एक सशक्त समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि यहां की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अनुशासन हर श्रद्धालु को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

    उज्जैन में उपमुख्यमंत्री का यह दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि आस्था और संस्कृति के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा को दर्शाता है। यह यात्रा इस बात का प्रतीक है कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले जनप्रतिनिधि भी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं और समय समय पर इन पवित्र स्थलों पर पहुंचकर राष्ट्र और समाज के कल्याण की कामना करते हैं।

  • जब ट्रैजिक एंडिंग बनी सफलता की गारंटी राजेश खन्ना की 10 सुपरहिट फिल्में

    जब ट्रैजिक एंडिंग बनी सफलता की गारंटी राजेश खन्ना की 10 सुपरहिट फिल्में


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना ने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में दीं जो आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हुई हैं। खास बात यह है कि उनकी कई फिल्मों में उनके किरदार की मौत हो जाती थी लेकिन इसके बावजूद ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुईं। उस दौर में जहां दर्शक हैप्पी एंडिंग पसंद करते थे वहीं राजेश खन्ना ने ट्रैजिक एंडिंग को भी लोकप्रिय बना दिया।

    उनकी फिल्मों आनंद आराधना और सफर की सफलता के बाद यह ट्रेंड साफ नजर आने लगा कि जिन फिल्मों में उनके किरदार की मौत होती है वे दर्शकों को ज्यादा भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं। खासकर आनंद में उनका डायलॉग और किरदार आज भी लोगों के बीच अमर है। इस फिल्म में उनके साथ अमिताभ बच्चन भी नजर आए थे।

    राजेश खन्ना ने इस पैटर्न को समझते हुए कई और फिल्में कीं जिनमें उनके किरदार का अंत दुखद होता है। इनमें नमक हराम अवतार और कुदरत जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों में उनकी एक्टिंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया और यही उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।

    इसी तरह अमर दीप दर्द आपकी कसम और रोटी जैसी फिल्मों में भी उनके किरदार की मौत दिखाई गई लेकिन हर बार दर्शकों ने उन्हें भरपूर प्यार दिया। इन फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि मजबूत कहानी और दमदार अभिनय के सामने अंत का सुखद या दुखद होना ज्यादा मायने नहीं रखता।

    हालांकि उनके परिवार में हर कोई इस तरह की फिल्मों को पसंद नहीं करता था। उनकी चाईजी को उनकी ऐसी फिल्में देखना अच्छा नहीं लगता था जिनमें उनका किरदार तकलीफ झेलता या मर जाता है। बताया जाता है कि फिल्म सफर देखने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी जिसके बाद राजेश खन्ना ने उन्हें ऐसी फिल्में दिखाना बंद कर दिया।

    राजेश खन्ना का यह दौर भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान लेकर आया। उन्होंने यह साबित किया कि एक अभिनेता अपनी अदाकारी से हर तरह के किरदार को अमर बना सकता है चाहे उसका अंत कितना ही दुखद क्यों न हो। यही वजह है कि आज भी उनकी ये फिल्में क्लासिक मानी जाती हैं और नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उतनी ही लोकप्रिय हैं।

  • Heatwave Alert: शरीर कितनी गर्मी झेल सकता है? बढ़ते तापमान में बड़ा सवाल

    Heatwave Alert: शरीर कितनी गर्मी झेल सकता है? बढ़ते तापमान में बड़ा सवाल


    नई दिल्ली।देश के कई हिस्सों में गर्मी ने एक बार फिर अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और कई राज्यों में हालात ऐसे हैं कि दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इस बीच लू का असर भी तेज हो गया है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। ऐसे माहौल में सबसे अहम सवाल यह उठता है कि आखिर इंसानी शरीर कितनी गर्मी सह सकता है और कब यह सीमा टूटने लगती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इंसानी शरीर की गर्मी सहने की क्षमता सिर्फ तापमान पर निर्भर नहीं करती, बल्कि हवा में मौजूद नमी भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। इसे समझने के लिए “वेट बल्ब तापमान” की अवधारणा का उपयोग किया जाता है। यह बताता है कि शरीर पसीने के जरिए खुद को कितनी प्रभावी तरह से ठंडा कर सकता है। सामान्य तौर पर पहले माना जाता था कि इंसान लगभग 35 डिग्री सेल्सियस तक के वेट बल्ब तापमान को सहन कर सकता है, लेकिन नई समझ के अनुसार यह सीमा लगभग 30 से 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास मानी जाती है। इससे अधिक होने पर शरीर की प्राकृतिक ठंडा करने की प्रक्रिया कमजोर पड़ने लगती है।

    नमी वाली गर्मी को सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसमें पसीना शरीर से जल्दी वाष्पित नहीं हो पाता। जब पसीना सूख नहीं पाता तो शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और अंदरूनी तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। यही कारण है कि कम तापमान होने के बावजूद अधिक नमी वाली जगहों पर गर्मी ज्यादा असहनीय महसूस होती है।

    जब शरीर का तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच जाता है, तो स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। इस अवस्था को हीट स्ट्रोक कहा जाता है, जिसमें शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला तंत्र पूरी तरह से प्रभावित हो जाता है। इसके शुरुआती संकेतों में चक्कर आना, सिर दर्द, भ्रम की स्थिति, तेज कमजोरी और घबराहट शामिल होते हैं। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।

    तेज गर्मी का असर केवल बाहरी शरीर पर ही नहीं, बल्कि अंदरूनी अंगों पर भी पड़ता है। दिमाग पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है, जिससे व्यक्ति मानसिक भ्रम या बेहोशी की स्थिति में जा सकता है। दिल को भी सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे शरीर पर तनाव बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर शरीर का संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।

    ऐसे मौसम में सावधानी बेहद जरूरी हो जाती है। दोपहर के समय धूप में निकलने से बचना चाहिए, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए और शरीर को ठंडा रखने की कोशिश करनी चाहिए। हल्के कपड़े पहनना, छांव में रहना और शरीर में पानी की कमी न होने देना जरूरी है। साथ ही ज्यादा मेहनत वाले काम गर्मी के समय से बचकर करने चाहिए।

    बढ़ती गर्मी और लू के इस दौर में जागरूक रहना ही सबसे बड़ा बचाव है। समय पर सावधानी अपनाकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है और शरीर को इस बढ़ते तापमान के खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • जमीनी अनुभव से बनेगा मजबूत प्रशासन सीएम मोहन यादव ने 8 IAS अधिकारियों को सौंपी अहम जिम्मेदारी

    जमीनी अनुभव से बनेगा मजबूत प्रशासन सीएम मोहन यादव ने 8 IAS अधिकारियों को सौंपी अहम जिम्मेदारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल सामने आई है जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवा प्रशासनिक अधिकारियों को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक दूरदर्शी निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने 2025 बैच के 8 युवा आईएएस अधिकारियों को उनकी पहली पदस्थापना के रूप में आदिवासी बहुल और ग्रामीण जिलों में सहायक कलेक्टर के पद पर नियुक्त किया है। यह कदम केवल एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक व्यापक सोच का हिस्सा है जिसका उद्देश्य भविष्य के प्रशासन को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाना है।

    सरकार का मानना है कि प्रशासनिक सेवा में आने वाले युवा अधिकारियों के लिए केवल किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं होता बल्कि उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में काम करने का अनुभव भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के तहत इन अधिकारियों को ऐसे जिलों में भेजा गया है जहां विकास की चुनौतियां अधिक जटिल और बहुआयामी हैं। आदिवासी क्षेत्रों में काम करते हुए ये अधिकारी न केवल शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करेंगे बल्कि स्थानीय समाज की वास्तविक समस्याओं को समझने का भी अवसर प्राप्त करेंगे।

    जिन अधिकारियों को पहली पोस्टिंग दी गई है उनमें आयुषी बंसल को झाबुआ आशी शर्मा को धार माधव अग्रवाल को बड़वानी सौम्या मिश्रा को सिंगरौली श्लोक वाइकर को कटनी शिल्पा चौहान को खंडवा खोट पुष्पराज को बैतूल और शैलेन्द्र चौधरी को मंडला में सहायक कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये सभी जिले आदिवासी और ग्रामीण विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं जहां प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता लगातार बनी रहती है।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का स्पष्ट मानना है कि जब युवा अधिकारी अपने करियर की शुरुआत में ही इन क्षेत्रों में कार्य करेंगे तो उन्हें विकास की असली तस्वीर देखने और समझने का अवसर मिलेगा। यहां की सामाजिक संरचना स्थानीय भाषा सांस्कृतिक विविधता और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे पहलुओं से रूबरू होकर वे अधिक संवेदनशील निर्णय लेने में सक्षम बनेंगे। इससे भविष्य में नीति निर्माण और क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

    यह पहल प्रशासनिक प्रशिक्षण की एक नई दिशा को भी दर्शाती है जहां अनुभव को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि ये युवा अधिकारी सीधे जनता से संवाद स्थापित करें उनकी समस्याओं को समझें और समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाएं। इससे न केवल योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।

    कुल मिलाकर यह निर्णय मध्यप्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जमीनी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहल आने वाले समय में राज्य के विकास मॉडल को नई दिशा दे सकती है जहां युवा ऊर्जा और अनुभव का संतुलन बेहतर शासन की नींव तैयार करेगा।

  • IPL 2026 अपडेट: टॉप 4 की रेस हुई और रोमांचक, RCB ने बढ़ाई मुश्किलें..

    IPL 2026 अपडेट: टॉप 4 की रेस हुई और रोमांचक, RCB ने बढ़ाई मुश्किलें..


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का सीजन अब अपने मध्य चरण की ओर बढ़ चुका है और जैसे-जैसे मुकाबले आगे बढ़ रहे हैं, पॉइंट्स टेबल में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। हर जीत और हार के साथ टीमें अपनी स्थिति मजबूत करने या फिर कमजोर पड़ने की स्थिति में आ रही हैं। इस बार सबसे बड़ा बदलाव रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की रैंकिंग में देखने को मिला है, जिसने शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरे स्थान पर अपनी जगह बना ली है।

    RCB ने हाल ही में हुए मुकाबले में गुजरात टाइटन्स को हराकर यह बड़ी छलांग लगाई है। टीम ने 7 मैचों में 5 जीत दर्ज करते हुए 10 अंक हासिल किए हैं। बेहतरीन नेट रन रेट की वजह से वह पॉइंट्स टेबल में ऊपर पहुंचने में सफल रही है। गुजरात टाइटन्स को इस हार के बाद भी ज्यादा नुकसान नहीं हुआ और टीम 7वें स्थान पर बनी हुई है, हालांकि उनकी स्थिति अब दबाव में आ गई है।

    पॉइंट्स टेबल में फिलहाल शीर्ष स्थान पर पंजाब किंग्स मजबूती से काबिज है। टीम ने अब तक 6 में से 5 मैच जीते हैं और एक मुकाबला बेनतीजा रहा है। कुल 11 अंकों के साथ पंजाब किंग्स इस समय टूर्नामेंट की सबसे स्थिर और मजबूत टीम नजर आ रही है। तीसरे स्थान पर राजस्थान रॉयल्स है, जिसने 7 में से 5 मुकाबले जीतकर 10 अंक अपने नाम किए हैं। हालांकि नेट रन रेट के मामूली अंतर के कारण वह RCB से पीछे है। वहीं चौथे स्थान पर सनराइजर्स हैदराबाद मौजूद है, जिसने अब तक 4 जीत के साथ 8 अंक जुटाए हैं और टॉप 4 में अपनी जगह बनाए रखी है।

    मध्य क्रम में चेन्नई सुपर किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स दोनों टीमें 6-6 अंकों के साथ क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर हैं। दोनों टीमों के लिए आगे का सफर काफी महत्वपूर्ण होने वाला है क्योंकि प्लेऑफ की दौड़ में बने रहने के लिए लगातार जीत जरूरी हो गई है। नीचे की रैंकिंग में मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। दोनों ही टीमों ने अब तक 2-2 जीत हासिल की हैं और 4-4 अंकों के साथ निचले हिस्से में मौजूद हैं। लगातार खराब प्रदर्शन ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

    सबसे नीचे कोलकाता नाइट राइडर्स है, जिसने अब तक सिर्फ एक जीत दर्ज की है और एक मुकाबला बेनतीजा रहा है। टीम के खाते में केवल 3 अंक हैं और स्थिति बेहद कमजोर नजर आ रही है। कुल मिलाकर IPL 2026 का यह सीजन बेहद रोमांचक होता जा रहा है, जहां टॉप 4 की रेस में हर टीम अपनी जगह बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। RCB की शानदार वापसी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है, जबकि पंजाब किंग्स लगातार अपने प्रदर्शन से दबदबा बनाए हुए है।

  • चार साल बाद दी चुनौती नहीं मिली राहत हाईकोर्ट ने डबरा नगर पालिका चुनाव याचिका खारिज की

    चार साल बाद दी चुनौती नहीं मिली राहत हाईकोर्ट ने डबरा नगर पालिका चुनाव याचिका खारिज की


    ग्वालियर । मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा नगर पालिका से जुड़े बहुचर्चित चुनावी विवाद में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए अध्यक्ष लक्ष्मीबाई को बड़ी राहत दी है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया और स्पष्ट कर दिया कि देर से न्याय की मांग करने वालों को राहत नहीं दी जा सकती।

    यह मामला वर्ष 2022 के नगर पालिका चुनाव से जुड़ा हुआ था जिसमें लक्ष्मीबाई अध्यक्ष चुनी गई थीं। इस चुनाव को डबरा नगर पालिका के उपाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार दुबे और अन्य पार्षदों द्वारा चुनौती दी गई थी। याचिका में यह तर्क रखा गया कि अध्यक्ष के चुनाव का गजट नोटिफिकेशन निर्धारित समय सीमा यानी 30 दिनों के भीतर जारी नहीं किया गया, इसलिए पूरे चुनाव को अवैध घोषित किया जाना चाहिए।

    हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और पाया कि जिस मुद्दे को आधार बनाकर याचिका दायर की गई है वह वर्ष 2022 से संबंधित है, जबकि याचिका जनवरी 2026 में दायर की गई। अदालत ने इस देरी को अत्यधिक और अनुचित माना। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा इतनी लंबी देरी के पीछे कोई ठोस और संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो पक्ष वर्षों तक अपने अधिकारों को लेकर निष्क्रिय रहता है, उसे बाद में संवैधानिक राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत राहत पाने के लिए समय पर कार्रवाई करना अनिवार्य है। देरी से दायर याचिकाओं पर अदालत हस्तक्षेप करने से बचती है, खासकर तब जब संबंधित पदाधिकारी अपने कार्यकाल में कई प्रशासनिक और नीतिगत फैसले ले चुका हो।

    कोर्ट ने यह भी माना कि अध्यक्ष लक्ष्मीबाई द्वारा पिछले वर्षों में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा चुके हैं और अब इतने समय बाद चुनाव प्रक्रिया में दखल देना प्रशासनिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में न्यायालय ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

    इस फैसले के साथ ही डबरा नगर पालिका में चल रहा यह विवाद समाप्त हो गया है और अध्यक्ष लक्ष्मीबाई की स्थिति पूरी तरह मजबूत हो गई है। हाईकोर्ट के इस निर्णय को प्रशासनिक स्थिरता और समयबद्ध न्याय की आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि कानूनी अधिकारों के लिए समय पर कदम उठाना बेहद जरूरी है, अन्यथा देर से की गई कार्रवाई का कोई लाभ नहीं मिलता।

  • धुरंधर विवाद पर फिर गरजीं अमीषा पटेल जाकिर खान को दिया करारा जवाब

    धुरंधर विवाद पर फिर गरजीं अमीषा पटेल जाकिर खान को दिया करारा जवाब

    नई दिल्ली । फिल्म इंडस्ट्री में बयानबाजी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है और इसी कड़ी में एक बार फिर अमीषा पटेल ने कॉमेडियन जाकिर खान पर निशाना साधा है। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में अमीषा ने जाकिर के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने कहा था कि फिल्म धुरंधर की सफलता से इंडस्ट्री के लोग अंदर ही अंदर जल रहे हैं।

    अमीषा पटेल ने साफ कहा कि वह जाकिर खान को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानतीं लेकिन उनके बयान से वह सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सफल व्यक्ति का मजाक उड़ाना बहुत आसान होता है लेकिन उससे पहले खुद कुछ हासिल करना जरूरी है। उनके मुताबिक बिना किसी ठोस उपलब्धि के दूसरों पर टिप्पणी करना सही नहीं है।

    उन्होंने कॉमेडियन्स के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसी की सफलता को नीचा दिखाकर मजाक बनाना उचित नहीं है। उनके अनुसार इंडस्ट्री में कई ऐसे विषय हैं जिन पर रचनात्मक तरीके से बात की जा सकती है लेकिन बार बार सफल लोगों को ही निशाना बनाना ठीक नहीं है।

    अमीषा ने जाकिर खान के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें उन्होंने कहा था कि इंडस्ट्री के लोग धुरंधर की सफलता से जल रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि आखिर किसने उन्हें फोन करके यह बताया कि लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनके मुताबिक उल्टा इंडस्ट्री के कई लोगों ने फिल्म की सराहना की और इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

    इससे पहले भी अमीषा पटेल ने सोशल मीडिया पर जाकिर खान के बयान की आलोचना करते हुए कहा था कि इस तरह की बातें अनावश्यक नकारात्मकता फैलाती हैं। उन्होंने कहा था कि फिल्म को लेकर लोगों ने सम्मान और समर्थन दिखाया है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    दरअसल, यह पूरा विवाद एक अवॉर्ड शो के दौरान शुरू हुआ था जहां जाकिर खान होस्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि भले ही लोग सोशल मीडिया पर फिल्म की तारीफ कर रहे हों लेकिन अंदर से सभी को इसकी सफलता से जलन हो रही है। उनके इसी बयान ने बहस को जन्म दिया और अब यह विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।

  • कुपोषण और राशन गड़बड़ी पर प्रशासन सख्त बैतूल में कलेक्टर ने दिए तत्काल कार्रवाई के आदेश

    कुपोषण और राशन गड़बड़ी पर प्रशासन सख्त बैतूल में कलेक्टर ने दिए तत्काल कार्रवाई के आदेश


    भोपाल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में प्रशासनिक सख्ती का एक स्पष्ट संदेश देखने को मिला जब कलेक्टर डॉ. सौरभ सोनवणे ने जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। शाहपुर क्षेत्र के ग्राम निशान और पाठई के दौरे के दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति का जायजा लिया जहां मध्यान्ह भोजन में गंभीर खामियां सामने आईं। निरीक्षण के दौरान जब यह पाया गया कि बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में सब्जी तक उपलब्ध नहीं है तो कलेक्टर ने तत्काल नाराजगी जाहिर की और स्पष्ट निर्देश दिए कि गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    निरीक्षण के दौरान तीन गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों का मामला सामने आया जिन्हें अब तक न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर में भर्ती नहीं कराया गया था। इस पर कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे सभी बच्चों को बिना देरी के NRC में भर्ती कराया जाए ताकि उनका उचित इलाज और पोषण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    इसी क्रम में राशन वितरण प्रणाली की भी जांच की गई जहां एक दुकान में स्टॉक में गड़बड़ी पाई गई। इस अनियमितता को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने फूड इंस्पेक्टर और समिति प्रबंधक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीबों के जीवन से जुड़ी योजना है और इसमें किसी भी तरह की हेराफेरी सीधे तौर पर जरूरतमंदों के अधिकारों का हनन है।

    इसके अलावा खाद्यान्न पर्ची के लंबित आवेदनों को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई और पंचायत सचिव को नोटिस देने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि सभी लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल सके।

    महिला स्व सहायता समूहों के संदर्भ में भी उन्होंने विशेष जोर दिया और कहा कि समूहों को केवल योजनाओं तक सीमित न रखकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। उन्होंने उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग और आय बढ़ाने के लिए नवीन उपाय अपनाने की बात कही जिससे ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

    शाहपुर क्षेत्र में किए गए इस निरीक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अब योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर पूरी तरह सतर्क और सख्त है। कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी योजना में लापरवाही अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी और जिम्मेदारों पर सीधे कार्रवाई होगी। यह सख्ती न केवल सिस्टम को सुधारने का प्रयास है बल्कि यह भी संकेत है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता से काम कर रहा है।

  • Uttarakhand Board Result 2026 जारी 10वीं में 98% पास 12वीं में लड़कियों का जलवा

    Uttarakhand Board Result 2026 जारी 10वीं में 98% पास 12वीं में लड़कियों का जलवा


    नई दिल्ली । Uttarakhand Board of School Education ने वर्ष 2026 के लिए 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस साल करीब 2.15 लाख से ज्यादा छात्र इन परीक्षाओं में शामिल हुए थे और कुल मिलाकर परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं।

    10वीं कक्षा का रिजल्ट इस बार बेहद शानदार रहा है। कुल 98.20 प्रतिशत छात्र परीक्षा में सफल हुए हैं जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। टॉपर्स की बात करें तो अक्षत गोपाल ने 98.20 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं ईशांत कोठारी और भूमिका ने 98 प्रतिशत के साथ दूसरा स्थान हासिल किया जबकि योगेश जोशी 97.80 प्रतिशत अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

    12वीं कक्षा के परिणामों में भी अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला है लेकिन इस बार खास बात यह रही कि लड़कियों ने बाजी मार ली। कुल पास प्रतिशत 85.11 रहा जिसमें लड़कियों का पास प्रतिशत 88.09 और लड़कों का 81.93 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके अलावा गीतिका पंत और सुशीला ने 98 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉपर्स की सूची में अपना नाम दर्ज कराया।

    रिजल्ट देखने के लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट ubse uk gov in और uaresults nic in पर जाकर आसानी से अपना परिणाम चेक कर सकते हैं। इसके लिए छात्रों को 10वीं या 12वीं के रिजल्ट लिंक पर क्लिक कर अपना रोल नंबर दर्ज करना होगा जिसके बाद स्क्रीन पर उनका परिणाम दिखाई देगा।

    अगर वेबसाइट पर अधिक ट्रैफिक के कारण दिक्कत आती है तो छात्र SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं। 10वीं के छात्र UK10 रोल नंबर लिखकर 5676750 पर भेज सकते हैं जबकि 12वीं के छात्र UK12 रोल नंबर लिखकर इसी नंबर पर SMS भेजकर अपना परिणाम जान सकते हैं।

    इसके अलावा DigiLocker के माध्यम से भी छात्र अपनी डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें ऐप या वेबसाइट पर मोबाइल नंबर के जरिए लॉगिन करना होगा।

    इस साल की परीक्षा 21 फरवरी से 20 मार्च 2026 के बीच आयोजित की गई थी जबकि प्रैक्टिकल परीक्षाएं 16 जनवरी से 15 फरवरी तक हुई थीं। कुल मिलाकर इस बार का रिजल्ट छात्रों के लिए काफी सकारात्मक रहा है जहां 10वीं में रिकॉर्ड पास प्रतिशत और 12वीं में लड़कियों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है।

  • घायल वन्स अगेन' और सनी देओल: लेखन से लेकर निर्देशन तक, सनी ने झोंकी पूरी ताकत पर फिल्म रही नाकाम।

    घायल वन्स अगेन' और सनी देओल: लेखन से लेकर निर्देशन तक, सनी ने झोंकी पूरी ताकत पर फिल्म रही नाकाम।


    नई दिल्ली। आज हम आपको उन सेलेब्स के बारे में बताने वाले हैं जिन्होंने अपनी ही फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी और उसमें परफॉर्म भी किया है। जानें उनकी फिल्मों का हाल कैसा रहा।  काफी समय से एक्टर्स अलग-अलग फिल्ड में भी अपना कमाल दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। कई एक्टर्स, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर बनते हैं। लेकिन आज हम उन एक्टर्स के बारे में बताने वाले हैं जिन्होंने फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी है और उसमें परफॉर्म भी किया है। इनमें से कुछ की फिल्में हिट रही हैं तो कुछ की फ्लॉप हुईं। चलिए आगे जानते हैं कि किस एक्टर ने कौनसी मूवी की स्क्रिप्ट लिखी थी।

    सनी देओल की फिल्म घायल सुपरहिट हुई थी। उन्होंने फिर घायल वन्स अगेन के साथ कमबैक करने का प्लान बनाया है। उन्होंने ना सिर्फ इस फिल्म में परफॉर्म किया बल्कि इसे डायरेक्ट किया और लिखा भी। फिल्म चली नहीं थी।

    सलमान खान ने फिल्म वीर की स्क्रिप्ट लिखी थी। फिल्म में सलमान का डबल रोल था। इस फिल्म के जरिए उन्होंने जरीन खान को लॉन्च किया था। जरीन जब फिल्म में दिखी थीं तो उनका कम्पैरिजन कटरीना कैफ से काफी हुआ था। उस वक्त दोनों के लुक्स काफी एक-जैसे लगते थे। हालांकि यह फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गई थी।

    अनुपम खेर ने तन्वी द ग्रेट फिल्म जो पिछले साल रिलीज हुई थी, इसकी ना सिर्फ स्क्रिप्ट लिखी थी बल्कि इसे डायरेक्ट भी किया था और परफॉर्म भी किया था। इसे क्रिटिकली काफी अच्छे रिव्यूज मिले थे, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं।

    कल्कि कोचलिन ने द गर्ल इन येलो बट्स फिल्म की सक्रिप्ट लिखी थी और इसमें परफॉर्म किया था। हालांकि इसके बाद कल्कि ने कसम खाई कि वह कभी दोबारा नहीं लिखेंगी क्योंकि फिर वह बतौर एक्टर और राइटर कन्फ्यूज हो गई थीं और उनके लिए काफी मुश्किल रहा ये प्रोसेस।

    विनीत कुमार सिंह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर काफी पॉपुलर हैं। विनीत ने फिल्म मुक्काबाज में काम किया था और इसकी स्क्रिप्ट विनीत ने खुद लिखी थी। विनीत ने काफी मेहनत की थी कि कोई फिल्ममेकर उनकी स्क्रिप्ट पर फिल्म बनाए और अनुराग कश्यप ने उन भरोसा जताया और फिल्म बनाई। इसे क्रिटिकली काफी पसंद किया गया था।

    कादर खान ने कई फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी हैं और उनमें परफॉर्म भी किया है। इस लिस्ट में मुकद्दर का सिकंदर और कुली नंबर 1 भी शामिल है।

    फरहान अख्तर ने वैसे कई फिल्मों के डायलॉग्स ऑर स्क्रीनप्ले लिखे हैं, लेकिन जिसमें उन्होंने खुद एक्टिंग की है वो फिल्में हैं रॉक ऑन, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, दिल धड़कने दो, रॉक ऑन 2 भी इसमें शामिल है।