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  • Holashtak 2026: 24 फरवरी से शुरू होलाष्टक, 8 दिनों तक वर्जित होंगे विवाह और मांगलिक कार्य

    Holashtak 2026: 24 फरवरी से शुरू होलाष्टक, 8 दिनों तक वर्जित होंगे विवाह और मांगलिक कार्य


    नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि यानी 24 फरवरी 2026 से होलाष्टक का काल शुरू हो रहा है। यह अवधि होली पर्व से आठ दिन पूर्व की मानी जाती है और 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा तक चलेगी। इस समय विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। ज्योतिषाचारियों के अनुसार इस आठ दिन के दौरान ग्रहों की स्थिति उग्र होती है, इसलिए इस समय शुभ कार्यों में सफलता नहीं मिलती।

    होलाष्टक के दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु जैसे प्रमुख ग्रह उग्र माने जाते हैं। इनके प्रभाव के कारण मांगलिक कार्य टाल दिए जाते हैं। हालांकि यह समय आत्मशुद्धि, संयम, जप-तप और ईश्वर आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस अवधि में धार्मिक क्रियाओं, ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

    श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार, सभी पंचांगों में होलाष्टक का उल्लेख मिलता है। शास्त्रों के अनुसार इस समय किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किए जाते। होलिका दहन के बाद वातावरण शुद्ध हो जाता है और इसके साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो सकती है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे धार्मिक विश्वास के साथ निभाया जाता है।

    इस वर्ष होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा तिथि के अनुसार 3 मार्च 2026 को भोग 04:57 बजे किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 शाम 05:18 से 3 मार्च 2026 शाम 04:33 तक रहेगी। होलिका दहन के लिए लगभग 1 घंटा 4 मिनट का समय मिलेगा। इसके बाद 4 मार्च को रंगों वाली होली मनाई जाएगी। होलाष्टक के आठ दिनों में कार्यों में बाधा और ग्रहों के उग्र प्रभाव के कारण मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय संयम और तपस्या को अपनाना चाहिए। इस दौरान घर की सफाई, पूजा, जप, ध्यान और दान-पुण्य के कार्य करने से परिवार में शांति और सौभाग्य आता है। इस काल में शुभ कार्यों को रोकना और साधना में समय देना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का माध्यम माना जाता है।

    इसलिए 24 फरवरी से 3 मार्च तक के होलाष्टक काल में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य टालकर ध्यान, पूजा और आत्मशुद्धि पर ध्यान दें। होलाष्टक समाप्त होने के बाद ही मांगलिक कार्य करने से सफलता और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

  • काली पड़ी चांदी? होली के लिए पायल और बिछिया तुरंत चमकाने के आसान घरेलू नुस्खे

    काली पड़ी चांदी? होली के लिए पायल और बिछिया तुरंत चमकाने के आसान घरेलू नुस्खे


    नई दिल्ली ।होली का त्योहार आते ही तैयारियों का दौर शुरू हो जाता है। रंग, परिधान और सजावट के साथ-साथ महिलाओं की सबसे बड़ी चिंता होती है उनके गहनों की चमक। खासकर पायल और बिछिया, जिन्हें महिलाएं अक्सर रोज पहनती हैं, समय के साथ काली पड़ जाती हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि होली पर आपके गहने फिर से चमकदार दिखें, तो कुछ आसान घरेलू नुस्खों से इन्हें आप मिनटों में चमका सकते हैं।

    सबसे पहले बेकिंग सोडा और नींबू का तरीका बहुत कारगर है। एक कटोरी में थोड़ी बेकिंग सोडा लें और उसमें कुछ बूंदें नींबू का रस डालकर पेस्ट तैयार करें। इसे पायल या बिछिया पर हल्के हाथों से रगड़ें और कुछ मिनट बाद साफ पानी से धोकर सूखे कपड़े से पोंछ लें। इससे चांदी की काली परत हटकर गहने फिर से चमकने लगेंगे।

    दूसरा तरीका है टूथपेस्ट का। इसके लिए गहनों पर थोड़ा सा टूथपेस्ट लगाएं और मुलायम ब्रश से हल्के हाथों से साफ करें। इसके बाद गहनों को पानी से धोकर सुखा लें। यह तरीका जल्दी और आसान होने के साथ ही चांदी को खरोंच से भी बचाता है।

    तीसरा तरीका है सिरका और बेकिंग सोडा का मिश्रण। एक कप सफेद सिरके में एक चम्मच बेकिंग सोडा डालें और गहनों को इसमें 10–15 मिनट तक भिगो दें। भिगोने के बाद साफ पानी से धोकर कपड़े से पोंछ लें। इस तरीके से गहनों की काली परत आसानी से हट जाती है और चमक लौट आती है।

    चौथा तरीका है इमली के पानी का। इमली में प्राकृतिक एसिड होता है जो चांदी की काली परत हटाने में मदद करता है। थोड़ी सी इमली को गुनगुने पानी में भिगो दें और जब पानी गाढ़ा हो जाए, उसमें गहनों को 10 मिनट के लिए डुबोकर रखें। इसके बाद मुलायम ब्रश या कपड़े से हल्के हाथों से रगड़कर गहनों को साफ करें।

    पाँचवां और अंतिम आसान तरीका है गर्म पानी और नमक का। एक कटोरी में गर्म पानी लें और उसमें एक चम्मच नमक डालकर घोल बनाएं। इसमें गहनों को 10 मिनट तक भिगोकर, मुलायम ब्रश से साफ करें। इसके बाद पानी से धोकर सुखाएं। यह तरीका भी चांदी की चमक बढ़ाने में बेहद प्रभावी है।

    इन सरल तरीकों से आप अपने पायल और बिछिया को होली से पहले चमकदार और नए जैसे बना सकते हैं। याद रखें कि सफाई करते समय ज्यादा जोर न लगाएं, क्योंकि इससे गहनों पर खरोंच आ सकती है।

    होली पर रंगों के साथ-साथ अपने गहनों की चमक भी बनाए रखें और इन आसान टिप्स के जरिए त्योहार को और भी खास बनाएं।

  • किडनी रोग के शुरुआती संकेत: स्किन पर दिखें ये लक्षण, नज़रअंदाज़ किया तो गंभीर हो सकता है

    किडनी रोग के शुरुआती संकेत: स्किन पर दिखें ये लक्षण, नज़रअंदाज़ किया तो गंभीर हो सकता है


    नई दिल्ली । आज के समय में किडनी की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है और इसे अक्सर साइलेंट कंडीशन कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। लेकिन जैसे जैसे किडनी की कार्यक्षमता घटती है शरीर की त्वचा और नाखून कई संकेत देने लगते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। सबसे आम संकेतों में से एक है त्वचा का अत्यधिक रूखा होना। त्वचा खुरदुरी पपड़ीदार और तनी हुई महसूस हो सकती है कई बार इसमें दरारें भी पड़ जाती हैं और यह मछली की चमड़ी जैसी दिखने लगती है।

    लगातार खुजली भी किडनी रोग का बड़ा संकेत हो सकती है। यह खुजली कभी शरीर के एक हिस्से तक सीमित रहती है और कभी पूरे शरीर में फैल जाती है। अगर यह लंबे समय तक बनी रहती है तो त्वचा पर खरोंच के निशान उभरने लगते हैं। कुछ जगहों पर त्वचा मोटी हो सकती है या सख्त गांठें बन सकती हैं जिससे इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।

    किडनी सही से काम न करे तो खून में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं। इसका असर त्वचा के रंग पर भी दिखाई देता है जो पीली धूसर या असामान्य रूप से फीकी नजर आ सकती है। कुछ लोगों में त्वचा पर मोटी और पीली परत भी बन जाती है। इसके अलावा नाखूनों में बदलाव भी महत्वपूर्ण संकेत हैं। नाखूनों का ऊपरी हिस्सा सफेद और निचला हिस्सा भूरा या लाल दिख सकता है। कभी कभी नाखूनों पर सफेद रेखाएं भी उभर आती हैं जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।

    शरीर में सूजन यानी एडेमा भी किडनी फेलियर का संकेत हो सकता है। पैरों टखनों हाथों या चेहरे पर सूजन आ सकती है और त्वचा तनी या चमकदार दिख सकती है। खून में टॉक्सिन बढ़ने से त्वचा पर छोटे दाने या रैशेज भी उभर सकते हैं जिनमें तेज खुजली होती है और ठीक होने के बाद भी यह दोबारा उभर सकते हैं।

    कुछ गंभीर मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के फफोले भी पड़ सकते हैं। ये हाथ पैर या चेहरे पर दिखाई देते हैं और सूखने के बाद निशान छोड़ जाते हैं। पेट या कमर के आसपास कोई नई गांठ या सूजन दिखे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या या कैंसर का संकेत भी हो सकता है।

    इसलिए अगर त्वचा में लगातार रूखापन खुजली दाने नाखूनों में बदलाव सूजन या किसी भी तरह की असामान्य गांठ नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से गंभीर किडनी समस्याओं और फेलियर को रोका जा सकता है। अपनी किडनी की सेहत पर ध्यान देना जितना जरूरी है उतना ही अपने शरीर के छोटे छोटे संकेतों को समझना भी महत्वपूर्ण है।

  • फरहान अख्तर की मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने BAFTA 2026 अवॉर्ड जीता, भारत के लिए पहला सम्मान

    फरहान अख्तर की मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने BAFTA 2026 अवॉर्ड जीता, भारत के लिए पहला सम्मान


    नई दिल्ली। भारत ने BAFTA 2026 में गर्व का पल मनाया, जब मणिपुरी भाषा की फिल्म ‘बूंग’ ने बेस्ट चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म का अवॉर्ड अपने नाम किया। यह इस साल भारत के लिए पहला BAFTA अवॉर्ड है। फरहान अख्तर के प्रोडक्शन सपोर्ट में बनी यह इमोशनल ड्रामा फिल्म ने इंटरनेशनल कैटेगरी में आर्को, लिलो एंड स्टिच और ज़ूट्रोपोलिस 2 जैसी मजबूत फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की। फरहान अख्तर अपनी पत्नी शिबानी दांडेकर के साथ इस सेरेमनी में मौजूद थे, जिससे यह पल और भी खास बन गया।

    लक्ष्मीप्रिया देवी के निर्देशन में बनी ‘बूंग’ मणिपुर के सामाजिक और राजनीतिक तनाव के बीच अपने परिवार को फिर से जोड़ने की कहानी है। फिल्म का नाम मणिपुरी में “छोटा लड़का” के अर्थ में है। मुख्य किरदार बूंग (गुगुन किपगेन) अपने खोए पिता को घर लाकर अपनी मां मंदाकिनी (बाला हिजाम) को खुश करना चाहता है। अपने सबसे अच्छे दोस्त राजू (अंगोम सनामातुम) की मदद से वह बॉर्डर शहर मोरेह जाता है और पिता की तलाश में म्यांमार भी जाता है। फिल्म में परिवार, दोस्ती और सामाजिक संघर्ष की भावनाओं को बेहद संवेदनशील और रीयलिस्टिक अंदाज में दिखाया गया है।

    यह जीत सिर्फ फिल्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे नॉर्थईस्ट सिनेमा और भारतीय क्षेत्रीय फिल्मों के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि भारत के छोटे इलाकों की सीधी-सादी, सच्ची कहानियां भी दुनिया भर के दर्शकों से जुड़ सकती हैं। फरहान अख्तर के प्रोडक्शन सपोर्ट और लक्ष्मीप्रिया देवी के निर्देशन ने फिल्म को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता दिलाई।

    बॉक्स ऑफिस और अवॉर्ड हाइलाइट्स:

    फिल्म: बूंग

    निर्देशक: लक्ष्मीप्रिया देवी

    प्रोड्यूसर: फरहान अख्तर

    अवॉर्ड: BAFTA 2026 – Best Children & Family Film

    मुख्य कलाकार: गुगुन किपगेन, बाला हिजाम, अंगोम सनामातुम

    खासियत: भारत के लिए इस साल का पहला BAFTA, नॉर्थईस्ट फिल्म को अंतरराष्ट्रीय पहचान

    इस जीत से यह साबित होता है कि छोटे बजट और क्षेत्रीय भाषा की फिल्में भी वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल कर सकती हैं, बशर्ते कहानी दमदार और प्रस्तुति सशक्त हो। ‘बूंग’ ने भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा दी और नॉर्थईस्ट के सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।

    फरहान अख्तर और लक्ष्मीप्रिया देवी की मेहनत, गुगुन किपगेन, बाला हिजाम और अंगोम सनामातुम की शानदार परफॉर्मेंस ने इस फिल्म को दर्शकों और जजेस दोनों के लिए यादगार बना दिया। इस जीत से साफ है कि भारत के छोटे क्षेत्रों की कहानियां भी विश्व स्तर पर सराहना और सम्मान पा सकती हैं।

    अगर चाहें तो मैं इसे और भी न्यूज़पेपर स्टाइल, हेडिंग्स

  • बॉक्स ऑफिस पर रोमांस vs कोर्टरूम क्लैश! तीसरे दिन कौन बना असली विजेता?

    बॉक्स ऑफिस पर रोमांस vs कोर्टरूम क्लैश! तीसरे दिन कौन बना असली विजेता?


    नई दिल्ली। 20 फरवरी 2026 को बॉक्स ऑफिस पर दो अलग-अलग जॉनर की फिल्मों ने दस्तक दीएक तरफ कोर्टरूम ड्रामा तो दूसरी ओर रोमांटिक लव स्टोरी। Assi और Do Deewane Seher Mein के बीच तीसरे दिन भी कांटे की टक्कर देखने को मिली।

    निर्देशक Anubhav Sinha की फिल्म अस्सी में Taapsee Pannu लीड रोल में हैं। यह फिल्म एक रेप केस पर आधारित कोर्टरूम ड्रामा है, जिसमें तापसी के साथ कनी कुसरुति अहम भूमिका में हैं। मजबूत कंटेंट और पॉजिटिव रिव्यू के बावजूद फिल्म की ओपनिंग धीमी रही। पहले दिन 1 करोड़, दूसरे दिन 1.6 करोड़ और तीसरे दिन 1.37 करोड़ की कमाई के साथ फिल्म का कुल कलेक्शन 3.97 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

    वहीं Mrunal Thakur और Siddhant Chaturvedi स्टारर दो दीवाने सहर में एक रोमांटिक ड्रामा है, जिसके गाने और लीड जोड़ी की केमिस्ट्री को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म ने 1.25 करोड़ से ओपनिंग की, दूसरे दिन 1.5 करोड़ और तीसरे दिन 1.31 करोड़ की कमाई की। तीन दिनों में इसका कुल कलेक्शन 4.06 करोड़ रुपये हो गया है।

    अगर तीसरे दिन की कमाई देखें तो अस्सी ने 1.37 करोड़ के साथ हल्की बढ़त बनाई, लेकिन कुल कलेक्शन के मामले में दो दीवाने सहर में 4.06 करोड़ के साथ मामूली अंतर से आगे है। यानी रेस अभी भी बेहद करीब है और असली तस्वीर वीकडे कलेक्शन के बाद साफ होगी।

  • 97 रन की साझेदारी और एक महंगा ओवर… कैसे टूटा भारत का सपना?

    97 रन की साझेदारी और एक महंगा ओवर… कैसे टूटा भारत का सपना?


    नई दिल्ली। भारत की 76 रन की हार सिर्फ एक खराब दिन का नतीजा नहीं थी, बल्कि कई सामूहिक गलतियों का परिणाम रही। ICC Men’s T20 World Cup 2026 के सुपर-8 मुकाबले में India national cricket team को South Africa national cricket team ने पूरी तरह पछाड़ दिया। अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में खेले गए इस मैच की हार के 5 बड़े कारण साफ तौर पर सामने आए:

    1दबाव बनाए रखने में नाकामी
    साउथ अफ्रीका 20 रन पर 3 विकेट खो चुका था। यहां से मैच भारत की पकड़ में आ सकता था, लेकिन डेविड मिलर और डेवाल्ड ब्रेविस की 97 रन की साझेदारी ने मैच का रुख पलट दिया। भारतीय गेंदबाज बीच के ओवरों में आक्रामक फील्डिंग और सटीक लाइन-लेंथ कायम नहीं रख सके।

    2 स्पिन विभाग पूरी तरह फ्लॉप
    वरुण चक्रवर्ती ने 4 ओवर में 47 रन खर्च किए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर को सिर्फ 2 ओवर मिले। स्पिनर्स मिलकर केवल 1 विकेट ले सके। मिडिल ओवरों में विकेट नहीं मिलने से साउथ अफ्रीका ने खुलकर रन बटोरे।

    3️ हार्दिक का महंगा आखिरी ओवर
    आखिरी ओवर में 20 रन लुटाने से लक्ष्य 175 से बढ़कर 188 पहुंच गया। टी20 में 10-12 रन का फर्क भी बड़ा होता है, यहां तो सीधा मानसिक दबाव 13 रन बढ़ गया।

    4️ओपनिंग फिर फेल
    ईशान किशन बिना खाता खोले आउट, तिलक वर्मा सस्ते में निपटे और अभिषेक शर्मा 15 रन बनाकर चलते बने। लगातार खराब शुरुआत ने मिडिल ऑर्डर पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया।

    5 गलत इंटेंट और खराब शॉट चयन
    हर बल्लेबाज पहली गेंद से बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में दिखा। पिच को समझने, साझेदारी बनाने और सिंगल-डबल से पारी संभालने का धैर्य नहीं दिखा। यही जल्दबाजी विकेट गिरने की सबसे बड़ी वजह बनी।

    सुंदर पर प्रयोग क्यों पड़ा भारी?
    अक्षर पटेल की जगह वॉशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया, लेकिन वे गेंद और बल्ले दोनों से असर नहीं छोड़ सके। केवल 2 ओवर गेंदबाजी कराना टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर भी सवाल खड़े करता है। अक्षर की ऑलराउंड उपयोगिता को देखते हुए यह बदलाव जोखिम भरा साबित हुआ।

    भारत मैच में कई बार वापसी कर सकता थाशुरुआती 3 विकेट के बाद, मिडिल ओवरों में, या फिर लक्ष्य का पीछा करते समय। लेकिन सामूहिक रणनीतिक चूक, खराब शॉट चयन और गेंदबाजी में लय की कमी ने जीत का रथ रोक दिया।

  • भोपाल फिल्म फेस्टिवल का आखिरी दिन: 41 फिल्मों की स्क्रीनिंग, हुमा कुरैशी रहीं आकर्षण

    भोपाल फिल्म फेस्टिवल का आखिरी दिन: 41 फिल्मों की स्क्रीनिंग, हुमा कुरैशी रहीं आकर्षण

    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में आयोजित ‘भोपाल फिल्म फेस्टिवल’ का आज अंतिम दिन था। दो दिनों तक चले इस फेस्टिवल में कुल 41 फिल्मों की स्क्रीनिंग हुई, जिसमें मध्य प्रदेश के 25 युवा फिल्मकारों की फिल्में शामिल थीं। आयोजन स्थल हमेशा की तरह हाउसफुल रहा और दर्शकों ने स्थानीय प्रतिभाओं को उत्साहपूर्वक सराहा।

    बच्चों के लिए मास्टरक्लास
    फेस्टिवल का ओपनिंग सेशन बच्चों के लिए मास्टरक्लास के रूप में आयोजित किया गया। इसमें भोपाल की विभिन्न यूनिवर्सिटी के छात्र शामिल हुए और फिल्म डायरेक्शन की बारीकियां सीखीं। प्रोड्यूसर शशांक राणे के अनुसार यह मंच युवा प्रतिभाओं को पहली बार वास्तविक अनुभव देने का अवसर रहा।

    फिल्म पॉलिसी और सिंगल विंडो
    फेस्टिवल में अचिन जैन, यशोवर्धन मिश्रा और अशोक मिश्रा ने मध्य प्रदेश की फिल्म पॉलिसी और ‘मध्य प्रदेश की वॉयसेस’ पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि सिंगल विंडो पॉलिसी से फिल्म प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी और मदद मिल रही है, जिससे प्रदेश के टैलेंट को सही मंच मिल रहा है।

    विभिन्न श्रेणियों में फिल्मों का प्रदर्शन
    फेस्टिवल में फिक्शन, नॉन-फिक्शन, डॉक्यूमेंट्री और एनीमेशन फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। प्रतियोगिता के लिए चार कैटेगरी रखी गईं – जनरल फिक्शन, जनरल नॉन-फिक्शन, वीमेंस वॉइसेस और हार्ट ऑफ इंडिया। इनमें से दो श्रेणियां विशेष रूप से मध्य प्रदेश के फिल्मकारों के लिए थीं।

    हुमा कुरैशी रहीं विशेष आकर्षण
    बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने भी फेस्टिवल में शिरकत की। उन्होंने युवा फिल्मकारों और दर्शकों से बातचीत की और उनके काम की सराहना की।

    समापन और विजेताओं की घोषणा
    अंतिम दिन 20 और फिल्मों की स्क्रीनिंग हुई और फिल्म जुगनूमा के साथ समारोह का समापन हुआ, जिसमें अभिनेता मनोज वाजपेयी शामिल थे। चारों कैटेगरी के विजेताओं की घोषणा की गई:

    जनरल फिक्शन: अर्पित नाग, कार्तिक महाजन, कहकशां फातिमा, परवीन कुमार यादव

    वीमेंस वॉइसेस: प्राची ठाकुर, गुंजन नरूला, दिलग्रेस कौर, निधि नर्नवरे

    जनरल नॉन-फिक्शन: श्रेया समवत्सर, प्रदीप लेकवार, संदीप भाटी, रोशनी चौहान

    हार्ट ऑफ इंडिया: वर्षा रंसोरे, जुनैद अलावी, अपूर्व गौतम

    फेस्टिवल में रनर अप और पुरस्कार राशि की जानकारी साझा नहीं की गई।

    इस प्रकार, भोपाल फिल्म फेस्टिवल ने न सिर्फ युवा प्रतिभाओं को मंच दिया बल्कि शहर में सिनेमा प्रेमियों के लिए उत्सव का माहौल भी बनाया।

  • भारतीय जनता पार्टी एससी मोर्चा की नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित, मध्यप्रदेश में कई नए चेहरे

    भारतीय जनता पार्टी एससी मोर्चा की नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित, मध्यप्रदेश में कई नए चेहरे


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा (मध्यप्रदेश) की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह परमार ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से पदाधिकारियों की सूची जारी की। संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की गई हैं।

    8 प्रदेश उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री नियुक्त
    जारी सूची के अनुसार सत्यप्रकाश सखवार, मोहिनी शाक्यवार, गगन खटीक, धर्मेंद्र आर्य, सत्यनारायण खोईवाल, भगवती प्रसाद शिंदे, प्रवीण मेश्राम और अमित कछवाह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है।

    इसके अलावा गणपत डाबी, रामस्वरूप शुक्रवारे और कृष्णा चौधरी को प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    बसपा से विधायक रहे सत्यप्रकाश सखवार को जिम्मेदारी
    भाजपा ने सत्यप्रकाश सखवार को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। वे 2013 में मुरैना जिले की अंबाह सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। बाद में प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के दौरान वे कांग्रेस में शामिल हुए और 2020 के उपचुनाव में मैदान में उतरे, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। अब उन्हें एससी मोर्चा में अहम जिम्मेदारी दी गई है।

    कोषाध्यक्ष और प्रदेश मंत्री भी नियुक्त
    अंकित थेप्ते को कोषाध्यक्ष और मुकेश कुमार को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं सुखलाल पवार, नितेश नरवले, कन्हैया लाल चौहान, संजय दायमा, डॉ. जगदीश चौहान, महेंद्र कुमार अहिरवार, सौरभ बावरिया और सीताराम साकेत को प्रदेश मंत्री नियुक्त किया गया है।

    मीडिया, सोशल मीडिया और आईटी टीम गठित
    संगठन को डिजिटल और मीडिया स्तर पर मजबूत करने के लिए भी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। संतोष बराड़ा को प्रशिक्षण प्रभारी, गोपाल जाटव को सह-प्रशिक्षण प्रभारी और अमर ऊंटवाल को प्रदेश कार्यालय मंत्री बनाया गया है।

    सुंदरलाल वर्मा को मीडिया प्रभारी तथा कमल अहिरवार और महेश बसवाल को सह मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया है। डॉ. नितिन डेहरिया को सोशल मीडिया प्रभारी और गिरिजा जाटव व हिमांशु मालवीय को सह सोशल मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    नीति एवं शोध प्रकोष्ठ में प्रवीण चावला को प्रभारी तथा किरण सिंह सूर्यवंशी और लक्ष्मीदास चौधरी को सह प्रभारी बनाया गया है। आईटी विभाग में कपिल अंजने संयोजक, जबकि राजेश सिंह और दीपमाला सोलंकर सह संयोजक नियुक्त हुए हैं।

    नई कार्यकारिणी के जरिए भाजपा एससी मोर्चा ने संगठन विस्तार और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने का संदेश दिया है।

  • India vs South Africa पर टिकी रहीं नजरें, भोपाल में हार से छाया मायूसी का माहौल

    India vs South Africa पर टिकी रहीं नजरें, भोपाल में हार से छाया मायूसी का माहौल



    नई दिल्ली। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए हाई-वोल्टेज मुकाबले ने राजधानी भोपाल को पूरी तरह क्रिकेट के रंग में रंग दिया। शहर के न्यू मार्केट, एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी, कोलार, शाहपुरा और हबीबगंज समेत कई इलाकों के रेस्टोरेंट, पब, क्लब और कैफे में लाइव स्क्रीनिंग का खास इंतजाम किया गया था। बड़ी एलईडी स्क्रीन, साउंड सिस्टम और टीम इंडिया की जर्सी पहने युवाओं की मौजूदगी ने माहौल को स्टेडियम जैसा बना दिया था।

    मैच शुरू होने से पहले ही अधिकांश जगहों पर टेबल फुल हो चुकी थीं। कई प्रतिष्ठानों ने खास थीम डेकोरेशन, तिरंगे की सजावट, स्पेशल फूड कॉम्बो और ग्रुप डिस्काउंट ऑफर पेश किए थे। परिवारों से लेकर कॉलेज स्टूडेंट्स तक, हर वर्ग के लोग अपनी-अपनी पसंदीदा टीम को सपोर्ट करते नजर आए। जैसे-जैसे मुकाबला रोमांचक होता गया, दर्शकों का उत्साह भी चरम पर पहुंचता गया। चौके-छक्कों पर तालियों और नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।

    हालांकि मैच का रुख बदलते ही माहौल भी बदल गया। भारतीय टीम की बल्लेबाजी लड़खड़ाने लगी और अहम विकेट गिरते ही रेस्टोरेंट्स में सन्नाटा पसरने लगा। उम्मीदें आखिरी ओवर तक टिकी रहीं, लेकिन टीम इंडिया की हार के साथ ही क्रिकेट प्रेमियों में निराशा छा गई।

    कई प्रशंसकों ने कहा कि टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, जबकि कुछ ने दक्षिण अफ्रीका की शानदार गेंदबाजी और रणनीति की तारीफ की। मैच खत्म होने के बाद लोग शांत मन से लौटते नजर आए, लेकिन चर्चा देर रात तक चलती रही।

    कुल मिलाकर यह मुकाबला सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि शहर के लिए एक सामूहिक अनुभव बन गयाजहां जीत की उम्मीद ने जोश भर दिया और हार ने मायूसी।

  • सुप्रिया श्रीनेत का बीजेपी पर हमला: इंदौर-भोपाल में पत्थरबाजी, दूषित पानी से मौतों पर चुप्पी क्यों?

    सुप्रिया श्रीनेत का बीजेपी पर हमला: इंदौर-भोपाल में पत्थरबाजी, दूषित पानी से मौतों पर चुप्पी क्यों?


    भोपालभोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर और भोपाल में भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस दफ्तरों पर पत्थरबाजी की, बैरिकेड तोड़े और हंगामा किया, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही।

    बीजेपी कार्यकर्ता पत्थरबाज बन गए
    श्रीनेत ने कहा कि दोनों शहरों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने चार-चार बैरिकेड तोड़कर कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने की कोशिश की। उनके मुताबिक पूरी घटना कैमरों में रिकॉर्ड है, इसके बावजूद नामजद एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही। उन्होंने सवाल उठाया, “जब साफ दिख रहा है कि पत्थर कौन चला रहा था, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?उन्होंने इसे राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि “संगठित गुंडागर्दी” करार दिया।

    दूषित पानी से मौतों पर सरकार घिरी
    कांग्रेस प्रवक्ता ने इंदौर में कथित रूप से दूषित पानी पीने से 35 लोगों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोग जान गंवा रहे थे, तब बीजेपी नेताओं की ओर से न तो संवेदना जताई गई और न ही जिम्मेदारी तय की गई।

    श्रीनेत ने कहा, “जब जनता मर रही थी, तब चुप्पी थी। आज राजनीतिक विरोध के नाम पर सड़क पर हिंसा की जा रही है। जनता सब देख रही है।”

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर निशाना
    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। श्रीनेत ने आरोप लगाया कि यह डील किसानों, लघु एवं मध्यम उद्योगों, ऊर्जा सुरक्षा और डेटा संप्रभुता के हितों के खिलाफ है।

    उनके अनुसार, अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी रियायत, रूस से सस्ता तेल खरीदने में दूरी और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने जैसे फैसलों से भारतीय किसानों पर दबाव बढ़ेगा।

    24 फरवरी को किसान महापंचायत
    श्रीनेत ने बताया कि 24 फरवरी को भोपाल में किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल होंगे। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश लंबे समय से किसान आंदोलनों की भूमि रहा है और प्रदेश के किसान पहले से आर्थिक दबाव में हैं, इसलिए आंदोलन की शुरुआत यहीं से की जा रही है।

    युवा कांग्रेस के प्रदर्शन का बचाव
    दिल्ली में एआई समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन पर श्रीनेत ने कहा कि यह समिट के खिलाफ नहीं, बल्कि “देशहित से समझौते” के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि युवा देश की आवाज हैं और आने वाले समय में यह आंदोलन और तेज होगा।