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  • Sai Baba Puja: गुरुवार को क्यों माना जाता है सबसे शुभ दिन, जानिए Sai Baba of Shirdi की पूजा विधि

    Sai Baba Puja: गुरुवार को क्यों माना जाता है सबसे शुभ दिन, जानिए Sai Baba of Shirdi की पूजा विधि


    नई दिल्ली। शिरडी के साईं बाबा भारत के सबसे पूजनीय संतों में से एक माने जाते हैं, जिन्होंने जीवनभर “सबका मालिक एक” का संदेश देकर प्रेम, करुणा और एकता का प्रचार किया। उनकी शिक्षाएं आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के जीवन का आधार हैं। साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिन आध्यात्मिक गुरु बृहस्पति देव से जुड़ा है, जिन्हें ज्ञान, धर्म और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

     गुरुवार को साईं बाबा की पूजा क्यों होती है विशेष
    गुरुवार का संबंध देवताओं के गुरु बृहस्पति से माना जाता है, जो ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक शक्ति के कारक ग्रह हैं। साईं बाबा को भी एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने समाज को सत्य, सेवा और प्रेम का मार्ग दिखाया। इसलिए गुरुवार को साईं बाबा की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

     शिरडी में गुरुवार का विशेष महत्व
    महाराष्ट्र के शिरडी में हर गुरुवार को साईं बाबा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन भव्य पालकी यात्रा भी निकाली जाती है, जो द्वारकामाई से साईं समाधि मंदिर तक जाती है। इस शोभायात्रा में हजारों भक्त शामिल होते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और फूलों से सजी पालकी में बाबा की मूर्ति का स्वागत करते हैं। यह आयोजन साईं भक्ति और श्रद्धा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।

    घर पर कैसे करें साईं बाबा की पूजा
    गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ या हल्के पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ कर साईं बाबा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
    इसके बाद दीपक जलाएं और बाबा को फूल अर्पित करें। पीले या सफेद फूल सबसे शुभ माने जाते हैं। भोग के रूप में सात्विक भोजन जैसे खिचड़ी, खीर, हलवा, फल या बेसन के लड्डू अर्पित किए जा सकते हैं।
    पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ “ॐ साईं राम” मंत्र का जाप करें और साईं चालीसा का पाठ करें। इससे मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    साईं बाबा की शिक्षाएं और उनका महत्व
    साईं बाबा ने हमेशा सभी धर्मों को समान माना और लोगों को जाति-धर्म से ऊपर उठकर मानवता की सेवा करने का संदेश दिया। उनका प्रसिद्ध संदेश “सबका मालिक एक” आज भी एकता और भाईचारे का प्रतीक है। यही कारण है कि देश-दुनिया में उनके लाखों मंदिर स्थापित हैं और भक्तों की आस्था दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

    गुरुवार के दिन साईं बाबा की पूजा करने से आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक सोच और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है। यह दिन गुरु तत्व से जुड़ा होने के कारण विशेष फलदायी माना जाता है, जिससे भक्तों की आस्था और विश्वास और भी मजबूत होता है।

  • गर्मियों में राहत का देसी उपाय: शिकंजी से पाचन बेहतर और शरीर रहेगा एनर्जी से भरपूर

    गर्मियों में राहत का देसी उपाय: शिकंजी से पाचन बेहतर और शरीर रहेगा एनर्जी से भरपूर


    नई दिल्ली। गर्मियों की तपती धूप में शरीर को ठंडक और एनर्जी देने के लिए देसी पेय शिकंजी को सबसे आसान और असरदार उपाय माना जाता है। तापमान बढ़ने के साथ जब पानी की कमी, थकान और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं, तब शिकंजी एक प्राकृतिक राहत देने वाला पेय साबित होती है।

    नींबू, पानी, काला नमक, जीरा पाउडर और हल्की चीनी या गुड़ से बनने वाली शिकंजी न सिर्फ स्वाद में ताजगी देती है, बल्कि शरीर को हाइड्रेट भी रखती है। कई लोग इसमें पुदीना और अदरक मिलाकर इसके फायदे और बढ़ा देते हैं। उत्तर भारत में तो गर्मियों के दिनों में सड़क किनारे मिट्टी के बर्तनों में रखी ठंडी शिकंजी आम दृश्य होती है, जो लोगों को तुरंत राहत देती है।

    घर पर इसे बनाना भी बेहद आसान है। एक जग ठंडे पानी में नींबू का रस मिलाएं, फिर स्वादानुसार काला नमक, भुना जीरा पाउडर और थोड़ी चीनी डालें। चाहें तो पुदीना पत्ते और अदरक का रस मिलाकर इसे और पौष्टिक बनाया जा सकता है। बिना चीनी के भी यह उतनी ही फायदेमंद रहती है।

    शिकंजी के नियमित सेवन से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। नींबू में मौजूद विटामिन C रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है, जबकि जीरा और अदरक पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैं और गैस-एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं। यह शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में भी मदद करती है, जिससे त्वचा साफ और स्वस्थ रहती है।

    गर्मी में शरीर के तापमान को संतुलित रखने और डिहाइड्रेशन से बचाने में शिकंजी बेहद कारगर है। यह तुरंत एनर्जी देती है और थकान को कम करती है। साथ ही मेटाबॉलिज्म को तेज कर वजन नियंत्रण में भी सहायक मानी जाती है।

    आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, घर की बनी ताजी शिकंजी बाजार के पैक्ड ड्रिंक्स की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है। इसलिए गर्मी के मौसम में इसे रोजाना की दिनचर्या में शामिल करना सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है।

  • 23 अप्रैल राशिफल: किस राशि के लिए रहेगा शुभ दिन और किसे रहना होगा सावधान, पढ़ें डेली भविष्यफल

    23 अप्रैल राशिफल: किस राशि के लिए रहेगा शुभ दिन और किसे रहना होगा सावधान, पढ़ें डेली भविष्यफल


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की चाल का सीधा प्रभाव 12 राशियों पर पड़ता है। 23 अप्रैल 2026, गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विष्णु पूजा करने से सुख-समृद्धि और धन लाभ के योग बनते हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर कुछ राशियों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ रहेगा, जबकि कुछ को सतर्क रहने की जरूरत होगी।

     मेष राशि (Aries)
    आज का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं और आर्थिक मामलों में सुधार होगा। हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। प्रेम जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।

     वृषभ राशि (Taurus)
    नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं जो भविष्य में लाभ देंगी। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत की सराहना होगी। रिश्तों में स्थिरता बनी रहेगी, लेकिन जल्दबाजी से निर्णय न लें।

     मिथुन राशि (Gemini)
    आर्थिक मामलों में सावधानी जरूरी है। किसी भी निवेश से पहले सोच-विचार करें। प्रेम संबंधों में पुराने विवाद खत्म हो सकते हैं। कार्यस्थल पर मेहनत का पूरा फल मिलेगा।

     कर्क राशि (Cancer)
    आज का दिन शुभ संकेत लेकर आया है। वरिष्ठों से प्रशंसा मिलेगी और धन लाभ के योग बन रहे हैं। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बीतेगा।

     सिंह राशि (Leo)
    आर्थिक स्थिति मजबूत होगी लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी।

     कन्या राशि (Virgo)
    नए प्रोजेक्ट शुरू करने का सही समय है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक है। कार्य-जीवन संतुलन बनाए रखें।

     तुला राशि (Libra)
    सामाजिक और पारिवारिक जीवन में खुशियां बढ़ेंगी। कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। वित्तीय मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें।

     वृश्चिक राशि (Scorpio)
    रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे। विवाह के योग बन सकते हैं। मानसिक शांति बनी रहेगी।

     धनु राशि (Sagittarius)
    खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। स्वास्थ्य में हल्की समस्या हो सकती है। करियर में चुनौतियों के बावजूद सफलता मिलेगी।

     मकर राशि (Capricorn)
    स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिलेंगी। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी।

     कुंभ राशि (Aquarius)
    आर्थिक फैसलों में सतर्क रहें। कार्यस्थल पर मेहनत रंग लाएगी। प्रेम संबंधों में सुधार होगा।

     मीन राशि (Pisces)
    व्यक्तिगत विकास के लिए अच्छा दिन है। पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी लेकिन वरिष्ठों से बहस से बचें।

    23 अप्रैल 2026 का दिन कुछ राशियों के लिए आर्थिक और करियर में उन्नति लेकर आएगा, जबकि कुछ को स्वास्थ्य और खर्चों पर ध्यान देने की जरूरत होगी। विष्णु पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होने की संभावना बढ़ती है।

  • आंवला से पपीता तक, लिवर के लिए 'सुरक्षा कवच' हैं ये फल, रोजाना सेवन से मिलेंगे कई फायदे

    आंवला से पपीता तक, लिवर के लिए 'सुरक्षा कवच' हैं ये फल, रोजाना सेवन से मिलेंगे कई फायदे


    नई दिल्ली। लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो न केवल खून को साफ करता, पाचन क्रिया को बेहतर करता बल्कि हानिकारक तत्वों को शरीर से बाहर निकालने में भी मदद करता है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बाहर का तला-भुना खाना और अनियमित दिनचर्या धीरे-धीरे हमारे लिवर को नुकसान पहुंचा रही है।

    लिवर की सेहत के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस मनाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ चुनिंदा फल और पत्ते लिवर को स्वस्थ रखने में बेहद फायदेमंद साबित होते हैं। आंवला से लेकर पपीता तक ये फल लिवर के लिए वरदान की तरह काम करते हैं।

    भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, आयुर्वेदिक ज्ञान और माइंडफुल ईटिंग अपनाकर हम लिवर को मजबूत बना सकते हैं। विश्व लिवर दिवस पर आयुष मंत्रालय लोगों को सही आहार और प्राकृतिक चीजों के जरिए लिवर की देखभाल करने की सलाह दे रहा है।

    विशेषज्ञों का सुझाव है कि इन फलों और पत्तों को अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करें। ताजा फल खाएं, जूस बनाकर पीएं या सलाद में डालकर खाएं। साथ ही तला-भुना, जंक फूड और ज्यादा शराब से बचें। नियमित व्यायाम और अच्छी नींद भी लिवर की सेहत के लिए जरूरी है।

    आंवला: लिवर का सबसे बड़ा दोस्त माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। रोजाना आंवला का सेवन या आंवला जूस लिवर को स्वस्थ रखता है।

    पपीता: यह पाचन शक्ति बढ़ाता है और लिवर में जमा विषाक्त पदार्थों को शरीर से निकालने में सहायक है। यह लिवर की सूजन कम करने में भी मददगार है।

    अनार: अनार के रस में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट लिवर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और खून को शुद्ध रखते हैं।

    अंगूर: अंगूर में मौजूद कंपाउंड लिवर को डिटॉक्स करने और सूजन कम करने में मदद करते हैं।

    संतरा और नींबू: ये दोनों फल विटामिन सी से भरपूर होते हैं। नींबू पानी सुबह खाली पेट पीने से लिवर अच्छी तरह साफ होता है। फलों के साथ ही लिवर के लिए पत्ते भी फायदेमंद हैं। इनमें माकोय के पत्ते हैं, जो लिवर की सूजन और संबंधित समस्याओं में राहत देते हैं। आयुर्वेद में इन्हें लिवर टॉनिक माना जाता है। वहीं मोरिंगा के पत्तों में पोषक तत्वों की भरमार होती है। ये लिवर को मजबूत बनाते हैं और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं।

  • भोजशाला परिसर विवाद पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी, सभी पक्षों को दस्तावेज सौंपने के निर्देश

    भोजशाला परिसर विवाद पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी, सभी पक्षों को दस्तावेज सौंपने के निर्देश


    मध्य प्रदेश/धार: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े विवाद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं, जिनसे मामले की जांच और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को आदेश दिया है कि 98 दिनों तक चले सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पक्षों को वीडियो रिकॉर्डिंग सौंप दी जाए, ताकि वे अपने तर्क और दावे इन साक्ष्यों के आधार पर प्रस्तुत कर सकें।

    इस मामले में भोजशाला परिसर के अधिकार को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद जारी है और अदालत में इस विषय पर नियमित सुनवाई हो रही है। याचिका मुस्लिम पक्ष की ओर से कमाल मौला वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा दायर की गई है, जिस पर डबल बेंच में सुनवाई की जा रही है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से अपने कानूनी तर्क और ऐतिहासिक तथ्यों को प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न न्यायिक निर्णयों और पूर्व मामलों का उल्लेख भी शामिल है।

    सुनवाई के दौरान कानूनी बहस मुख्य रूप से टाइटल विवाद, साक्ष्यों की स्वीकार्यता और याचिका की वैधता जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत दलीलों में यह कहा गया कि एएसआई सर्वे की रिपोर्ट और उसकी प्रक्रिया को लेकर पहले भी न्यायालयों द्वारा कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें इस मामले में भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    मुस्लिम पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सर्वे प्रक्रिया के दौरान कुछ पहलुओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। उनका कहना है कि सर्वे के दौरान की गई खुदाई और रिकॉर्डिंग में कुछ अवशेषों को लेकर असमानता देखने को मिली है, जिससे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि वीडियोग्राफी से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और अदालत के समक्ष सभी पक्षों के दावों का सही मूल्यांकन संभव हो सकेगा।

    दूसरी ओर, पक्षकारों का कहना है कि सर्वे के दौरान विभिन्न धार्मिक और ऐतिहासिक अवशेषों को रिकॉर्ड किया गया है और इन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत किया गया है। इस पूरे मामले में दोनों पक्ष अपने अपने दावों को मजबूत करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों पर आधारित दलीलें पेश कर रहे हैं।

    अदालत के इस आदेश के बाद अब सभी पक्षों को 27 अप्रैल तक संबंधित वीडियो क्लिप्स उपलब्ध कराई जाएंगी, जिसके बाद मामले की आगे की सुनवाई में इन साक्ष्यों के आधार पर तर्क प्रस्तुत किए जाएंगे। यह निर्णय मामले की पारदर्शिता और निष्पक्ष सुनवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आगे की कानूनी प्रक्रिया और स्पष्ट हो सकेगी।

  • नेपाल में राजनीतिक हलचल तेज, गृह मंत्री के इस्तीफे से सरकार पर बढ़ा दबाव…

    नेपाल में राजनीतिक हलचल तेज, गृह मंत्री के इस्तीफे से सरकार पर बढ़ा दबाव…


    नई दिल्ली: पड़ोसी देश नेपाल की राजनीति में इन दिनों गंभीर अस्थिरता का माहौल देखा जा रहा है, जहां प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार को एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का सामना करना पड़ा है। कार्यकाल शुरू होने के महज छब्बीस दिनों के भीतर गृह मंत्री सूदन गुरुंग के इस्तीफे ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस घटनाक्रम को सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक संतुलन पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। काठमांडू में हाल के दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक मतभेदों के बीच यह इस्तीफा स्थिति को और अधिक जटिल बनाता दिखाई दे रहा है।

    गृह मंत्री के इस्तीफे को लेकर सामने आ रही जानकारी के अनुसार उन पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में विभिन्न कारोबारी समूहों के साथ कथित वित्तीय संबंध और कुछ कंपनियों में संदिग्ध निवेश की बात शामिल रही है। जैसे ही यह मामले सार्वजनिक हुए, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर उनके खिलाफ आलोचना तेज हो गई। कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की छवि के बावजूद इन आरोपों ने उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता को गहरा झटका दिया।

    स्थिति तब और गंभीर हो गई जब विभिन्न दस्तावेजों और रिपोर्टों के आधार पर यह दावा किया गया कि गृह मंत्री के कुछ विवादित व्यापारिक संस्थानों से संबंध रहे हैं। इसके साथ ही उन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी सामने आए, जिससे राजनीतिक माहौल और तनावपूर्ण हो गया। विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर काठमांडू में विरोध प्रदर्शन किए और इस्तीफे की मांग को और तेज कर दिया। लगातार बढ़ते दबाव और राजनीतिक अस्थिरता के बीच सरकार के लिए स्थिति को संभालना कठिन होता गया।

    इस घटनाक्रम ने नेपाल की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां सरकार के भीतर स्थिरता और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी कम अवधि में एक महत्वपूर्ण पद से इस्तीफा सरकार की कार्यप्रणाली और गठबंधन की मजबूती पर प्रभाव डाल सकता है। साथ ही यह स्थिति आने वाले समय में प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।

    काठमांडू में मौजूदा राजनीतिक माहौल में यह घटना सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखी जा रही है, जहां आगे की रणनीति और नेतृत्व की परीक्षा और अधिक कठिन हो सकती है। बढ़ती अस्थिरता के बीच सभी राजनीतिक दलों की नजर अब आने वाले निर्णयों और संभावित बदलावों पर टिकी हुई है।

  • प्रेगनेंसी के अनुभव और रिश्तों पर रुबीना दिलैक का खुलासा, निजी जीवन को लेकर साझा किए विचार

    प्रेगनेंसी के अनुभव और रिश्तों पर रुबीना दिलैक का खुलासा, निजी जीवन को लेकर साझा किए विचार


    नई दिल्ली: टेलीविजन जगत की जानी-मानी अभिनेत्री रुबीना दिलैक ने हाल ही में अपने निजी जीवन और रिश्तों को लेकर खुलकर बातचीत की है। लोकप्रिय धारावाहिकों से घर-घर में पहचान बनाने वाली रुबीना ने अपने जीवन के उस दौर का उल्लेख किया जब वे प्रेगनेंसी के समय भावनात्मक और मानसिक बदलावों से गुजर रही थीं। उन्होंने बताया कि यह समय उनके लिए केवल शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण रहा, जिसमें उन्होंने अपने आसपास के लोगों को नए दृष्टिकोण से समझा।

    रुबीना दिलैक ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रेगनेंसी के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि कुछ लोग केवल दिखावे के लिए उनके जीवन में मौजूद थे। उनके अनुसार, जब जीवन में सब कुछ सामान्य और अच्छा चल रहा था तब कई लोग करीब थे, लेकिन कठिन समय में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। इसी अनुभव ने उन्हें अपने रिश्तों को दोबारा आंकने पर मजबूर किया और उन्होंने कई ऐसे संबंधों से दूरी बना ली जिन्हें वे लंबे समय से निभा रही थीं।

    उन्होंने यह भी बताया कि यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन उस समय उन्होंने अपनी मानसिक शांति और आत्मसम्मान को प्राथमिकता दी। रुबीना के अनुसार, जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों पर इंसान को यह समझ आता है कि कौन वास्तव में उसके साथ खड़ा है और कौन केवल औपचारिकता निभा रहा है। इसी समझ ने उनके दृष्टिकोण को बदल दिया और उन्हें अपने जीवन में स्पष्टता दी।

    अपने परिवारिक जीवन पर बात करते हुए रुबीना ने अपने पति और बच्चों के साथ संबंधों को सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि मातृत्व ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया है और उन्हें जीवन के प्रति अधिक संवेदनशील और मजबूत बनाया है। उनके अनुसार, बच्चों के आने के बाद प्राथमिकताएं बदल जाती हैं और इंसान अधिक जिम्मेदार हो जाता है।

    रुबीना दिलैक ने यह भी कहा कि जीवन में हर अनुभव, चाहे वह अच्छा हो या कठिन, व्यक्ति को आगे बढ़ने की सीख देता है। उन्होंने अपने अनुभवों को व्यक्तिगत विकास का हिस्सा बताया और कहा कि समय के साथ उन्होंने खुद को बेहतर तरीके से समझना शुरू किया है। उनके अनुसार, सच्चे रिश्ते वही होते हैं जो बिना किसी शर्त के हर परिस्थिति में साथ निभाते हैं।

    उनके इस बयान के बाद उनके प्रशंसकों में भी उनकी ईमानदारी और स्पष्ट सोच को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। रुबीना का यह अनुभव यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत जीवन में बदलाव अक्सर व्यक्ति को अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाते हैं।

  • फिल्म ‘ढाई अक्षर प्रेम के’ से शुरू हुआ रिश्ता, ‘गुरु’ तक पहुंचकर बनी जिंदगी की कहानी..

    फिल्म ‘ढाई अक्षर प्रेम के’ से शुरू हुआ रिश्ता, ‘गुरु’ तक पहुंचकर बनी जिंदगी की कहानी..

    नई दिल्ली: बॉलीवुड के चर्चित कपल अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी और रिश्ते को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में दोनों ने अपनी शादी की 19वीं सालगिरह मनाई, जिसके बाद अभिषेक बच्चन ने अपनी लव स्टोरी और रिश्ते से जुड़े कई दिलचस्प पहलुओं पर बात की।

    अभिषेक बच्चन के अनुसार उनकी ऐश्वर्या राय से पहली मुलाकात साल 2000 में फिल्म ‘ढाई अक्षर प्रेम के’ की शूटिंग के दौरान हुई थी। उस समय दोनों सिर्फ एक-दूसरे के सह-कलाकार थे और किसी तरह के रिश्ते की शुरुआत नहीं हुई थी। इसके बाद समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और फिल्म ‘उमराव जान’ तथा अन्य प्रोजेक्ट्स के दौरान यह रिश्ता और गहरा होता चला गया। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती प्यार में बदल गई।

    अभिषेक ने बताया कि उनके रिश्ते में असली मोड़ फिल्म ‘गुरु’ के समय आया, जिसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया। यह फिल्म उनके लिए सिर्फ पेशेवर नहीं बल्कि निजी जीवन में भी एक अहम पड़ाव साबित हुई। साल 2007 में दोनों ने शादी कर ली और इसके बाद 2011 में उनकी बेटी आराध्या का जन्म हुआ।

    अपने वैवाहिक जीवन के बारे में बात करते हुए अभिषेक ने कहा कि उनका रिश्ता समय के साथ और मजबूत हुआ है और ऐश्वर्या सिर्फ उनकी पत्नी नहीं बल्कि उनकी सबसे बड़ी ताकत भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार उनके जीवन का सबसे अहम हिस्सा है और वह अपनी बेटी को अच्छे संस्कार देने में ऐश्वर्या के योगदान की सराहना करते हैं।

    आगामी 20वीं सालगिरह को लेकर अभिषेक ने संकेत दिए कि उन्होंने कुछ खास प्लान तैयार किए हैं, हालांकि उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने बस इतना कहा कि यह दिन उनके लिए बेहद खास होने वाला है।

    अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की जोड़ी बॉलीवुड की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक मानी जाती है। दोनों ने साथ में ‘धूम 2’, ‘सरकार राज’, ‘बंटी और बबली’ और ‘गुरु’ जैसी फिल्मों में भी काम किया है। निजी जीवन को लेकर दोनों हमेशा ही काफी प्राइवेट रहते हैं, लेकिन उनके फैंस हमेशा उनकी झलक पाने के लिए उत्सुक रहते हैं।
  • Dry Skin Care Tips : गर्मियों में भी ड्राई स्किन की खास देखभाल जरूरी, इन घरेलू उपायों से पाएं मुलायम और निखरी त्वचा

    Dry Skin Care Tips : गर्मियों में भी ड्राई स्किन की खास देखभाल जरूरी, इन घरेलू उपायों से पाएं मुलायम और निखरी त्वचा


    नई दिल्ली। अक्सर यह माना जाता है कि ड्राई स्किन की समस्या सिर्फ सर्दियों में होती है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। गर्मियों में भी तेज धूप, पसीना, धूल-मिट्टी और गलत स्किन केयर रूटीन के कारण त्वचा और ज्यादा रूखी और बेजान हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर मौसम में त्वचा को नमी (moisture) की जरूरत होती है, और अगर इसकी अनदेखी की जाए तो स्किन में खिंचाव, खुजली और डलनेस जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।

    गर्मियों में कई लोग गर्म पानी से नहाने या ज्यादा केमिकल युक्त ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे स्किन की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है। यही कारण है कि ड्राई स्किन वालों को इस मौसम में भी विशेष देखभाल की जरूरत होती है।

    नारियल तेल से मिलेगी गहरी नमी

    ड्राई स्किन के लिए नारियल तेल बेहद फायदेमंद माना जाता है। नहाने के बाद या रात में सोने से पहले त्वचा पर हल्के हाथों से नारियल तेल लगाने से स्किन में नमी लॉक हो जाती है और रूखापन कम होता है।

    एलोवेरा जेल से त्वचा बनेगी मुलायम

    एलोवेरा जेल त्वचा के लिए नेचुरल मॉइश्चराइजर की तरह काम करता है। इसे चेहरे पर 5 से 10 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करने के बाद धोने से स्किन सॉफ्ट और फ्रेश नजर आती है। इसके बाद मॉइश्चराइजर लगाना और भी बेहतर परिणाम देता है।

    एवोकाडो मास्क से मिलेगा ग्लो

    एवोकाडो में मौजूद विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को गहराई से पोषण देते हैं। इसका फेस मास्क लगाने से ड्राई स्किन में सुधार आता है और चेहरा प्राकृतिक रूप से चमकदार दिखता है।

    नहाने के पानी में तेल मिलाना है फायदेमंद

    अगर नहाने के पानी में थोड़ा सा नारियल या बादाम तेल मिला लिया जाए तो त्वचा लंबे समय तक हाइड्रेट रहती है। इससे स्किन की ड्राइनेस काफी हद तक कम हो जाती है।

    ग्लिसरीन से मिलेगी रातभर की केयर

    सोने से पहले चेहरे पर ग्लिसरीन की हल्की परत लगाने से त्वचा की डैमेज सेल्स की मरम्मत होती है और सुबह स्किन ज्यादा मुलायम महसूस होती है।

    ड्राई स्किन की देखभाल सिर्फ क्रीम लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही दिनचर्या और प्राकृतिक उपाय अपनाकर भी इसे स्वस्थ रखा जा सकता है। गर्मियों में नियमित देखभाल से त्वचा न सिर्फ रूखेपन से बचती है, बल्कि प्राकृतिक निखार भी बनाए रखती है।

  • BJP विधायक प्रीतम लोधी पर गिरेगी गाज! 3 दिन में जवाब तलब, खंडेलवाल ने भेजा नोटिस

    BJP विधायक प्रीतम लोधी पर गिरेगी गाज! 3 दिन में जवाब तलब, खंडेलवाल ने भेजा नोटिस



    मध्य प्रदेश शिवपुरी । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर संगठनात्मक अनुशासन का मुद्दा सुर्खियों में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने शिवपुरी जिले के पिछोर से विधायक प्रीतम लोधी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर से जारी किया गया है, जिसमें विधायक से तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
    जारी पत्र में पार्टी ने स्पष्ट किया है कि हाल के दिनों में विधायक प्रीतम लोधी का आचरण “अत्यंत आपत्तिजनक” पाया गया है और यह पार्टी की अनुशासनात्मक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं माना जा रहा है। भाजपा ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जवाब तलब किया है और साफ संकेत दिया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    यह नोटिस 22 अप्रैल 2026 को जारी किया गया है और इसकी प्रतिलिपि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को भी भेजी गई है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भाजपा नेतृत्व इस पूरे मामले को केवल औपचारिकता नहीं मान रहा, बल्कि इसे अनुशासन से जुड़ा गंभीर विषय मानकर आगे बढ़ रहा है।
    हालांकि, नोटिस में किसी विशेष बयान या घटना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे हाल के बयानों और सार्वजनिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाकर संगठन में अनुशासन और एकरूपता बनाए रखना चाहता है।
    भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पार्टी लंबे समय से सार्वजनिक मंचों पर दिए जा रहे विवादित बयानों और अनुशासनहीन गतिविधियों को लेकर सतर्क है। इसी क्रम में यह कार्रवाई एक संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है कि पार्टी लाइन से बाहर जाकर बयानबाजी या आचरण को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
    इस नोटिस के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्ष भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, जबकि भाजपा के भीतर इसे अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामान्य हिस्सा बताया जा रहा है।
    अब सभी की निगाहें विधायक प्रीतम लोधी के जवाब पर टिकी हैं। उनका स्पष्टीकरण यह तय करेगा कि मामला यहीं समाप्त हो जाता है या आगे किसी बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की दिशा में बढ़ता है।