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  • शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला नेचुरल ड्रिंक: लस्सी के फायदे और सही समय

    शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला नेचुरल ड्रिंक: लस्सी के फायदे और सही समय


    नई दिल्ली।  गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक और ताजगी देने वाले पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में लोग अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स और आर्टिफिशियल पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसके मुकाबले लस्सी एक पारंपरिक और प्राकृतिक ड्रिंक है, जो न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी मदद करती है।
    दही से बनने वाली सेहतमंद ड्रिंक
    लस्सी दही से तैयार किया जाने वाला एक लोकप्रिय भारतीय पेय है, जिसे मथकर उसमें चीनी या नमक और अन्य स्वाद बढ़ाने वाली चीजें मिलाकर बनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका स्वाद और बनाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। यह स्वाद और सेहत का बेहतरीन संयोजन मानी जाती है।
    गर्मी में शरीर को देती है ठंडक
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लस्सी एक प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक है जिसकी तासीर ठंडी होती है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर को तुरंत राहत देता है और तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ तुरंत ऊर्जा भी प्रदान करती है।
    पाचन और हड्डियों के लिए फायदेमंद
    लस्सी पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक होती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
    लस्सी पीने का सही समय
    विशेषज्ञों के अनुसार लस्सी का सेवन दिन के समय, विशेषकर दोपहर में करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। दोपहर के भोजन के साथ लस्सी पीने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को गर्मी से राहत मिलती है।
    रात में सेवन से बचें
    हालांकि कुछ लोग रात में भी लस्सी का सेवन करते हैं, लेकिन यह सभी के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। रात में इसका सेवन कुछ लोगों में भारीपन या पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए इसे दिन में ही पीना बेहतर माना जाता है।
    गर्मी में प्राकृतिक राहत
    कुल मिलाकर, लस्सी गर्मियों में शरीर के लिए एक प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है, जो बिना किसी नुकसान के शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों प्रदान करती है।

  • अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम

    अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम


    नई दिल्ली: देश के ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही अदाणी पावर लिमिटेड ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है कंपनी ने एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली स्टेप डाउन सहायक इकाई के गठन की घोषणा की है जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में काम करेगी इस कदम को भारत के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप एक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है

    कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड ने रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक नई इकाई का गठन किया है यह नई कंपनी 20 अप्रैल 2026 को स्थापित की गई है और इसे 5 लाख रुपए की अधिकृत पूंजी के साथ शुरू किया गया है इस पूंजी को 10 रुपए प्रति शेयर के 50 हजार इक्विटी शेयरों में विभाजित किया गया है

    इस नई इकाई की संरचना को देखें तो यह पूरी तरह से समूह के नियंत्रण में है रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के पास है और अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की पूरी हिस्सेदारी अदाणी पावर लिमिटेड के पास है इस प्रकार यह कंपनी समूह की एक स्टेप डाउन सहायक इकाई के रूप में कार्य करेगी जो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशेगी

    इसी क्रम में समूह की एक अन्य इकाई ने भी न्यूक्लियर क्षेत्र में अपनी सक्रियता दिखाई है अदाणी एनर्जी ने कोस्टल महा एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक और स्टेप डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी का गठन किया है यह इकाई परमाणु ऊर्जा के उत्पादन ट्रांसमिशन और वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में संलग्न रहेगी जिससे ऊर्जा क्षेत्र में विविधता और मजबूती आएगी

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल व्यावसायिक विस्तार तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के स्वच्छ और सतत ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक बड़ा संकेत है देश तेजी से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से हटकर स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ रहा है और न्यूक्लियर एनर्जी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है

    वर्तमान समय में भारत की स्थापित न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता लगभग 8 दशमलव 7 गीगावाट है लेकिन देश ने वर्ष 2047 तक इसे बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है

    अदाणी समूह का यह कदम दर्शाता है कि वह भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो को विविध बना रहा है और नई तकनीकों तथा क्षेत्रों में निवेश कर रहा है न्यूक्लियर एनर्जी में यह विस्तार न केवल कंपनी के लिए नए अवसर खोलेगा बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा

  • सूरज बड़जात्या ये प्रेम मोल लिया में आयुष्मान और शरवरी की जोड़ी बनेगी आकर्षण का केंद्र..

    सूरज बड़जात्या ये प्रेम मोल लिया में आयुष्मान और शरवरी की जोड़ी बनेगी आकर्षण का केंद्र..

    नई दिल्ली।  हिंदी सिनेमा में पारिवारिक फिल्मों की एक अलग पहचान बनाने वाले सूरज बड़जात्या एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपनी नई फिल्म ये प्रेम मोल लिया के साथ वापसी करने जा रहे हैं। इस फिल्म के ऐलान के साथ ही दर्शकों के बीच उत्सुकता का माहौल बन गया है क्योंकि यह एक म्यूजिकल फैमिली एंटरटेनर के रूप में सामने आएगी जिसमें भावनाओं और रिश्तों को खास महत्व दिया जाएगा। फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में आयुष्मान खुराना और शरवरी वाघ नजर आएंगे और दोनों कलाकार पहली बार एक साथ स्क्रीन साझा करते दिखाई देंगे।

    फिल्म को 27 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना बनाई गई है और इसे लेकर फिल्म प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसके जरिए लंबे समय बाद राजश्री फिल्मों का लोकप्रिय किरदार प्रेम फिर से बड़े पर्दे पर वापसी कर रहा है। लगभग बारह वर्षों के अंतराल के बाद लौट रहे इस किरदार को इस बार आयुष्मान खुराना निभाते नजर आएंगे। अपनी सहज और प्रभावशाली अभिनय शैली के लिए पहचाने जाने वाले आयुष्मान इस भूमिका में एक नया रंग भर सकते हैं जिससे यह किरदार आधुनिक दौर के दर्शकों के साथ भी गहराई से जुड़ सके।

    फिल्म में शरवरी वाघ का किरदार भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो पारंपरिक भारतीय नारी की छवि को एक नए अंदाज में प्रस्तुत करेगा। उनके किरदार में सादगी के साथ आत्मविश्वास और भावनात्मक मजबूती देखने को मिलेगी जो पारिवारिक फिल्मों की मूल भावना को और गहरा बनाएगी। आयुष्मान और शरवरी की ताजा जोड़ी को लेकर दर्शकों में खास दिलचस्पी है और माना जा रहा है कि दोनों के बीच की केमिस्ट्री फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।

    फिल्म की कहानी पूरी तरह परिवार और रिश्तों के इर्द गिर्द बुनी गई है जिसमें प्रेम त्याग और आपसी समझ जैसे मूल्यों को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। सूरज बड़जात्या की फिल्मों की खासियत हमेशा यह रही है कि वे दर्शकों को एक सुकून भरा अनुभव देती हैं और पारिवारिक रिश्तों की अहमियत को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करती हैं। बदलते समय में भी ऐसी फिल्मों की प्रासंगिकता बनी हुई है और यही वजह है कि इस फिल्म से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं।

    फिल्म का संगीत हिमेश रेशमिया द्वारा तैयार किया जा रहा है जो लंबे समय बाद सूरज बड़जात्या के साथ काम कर रहे हैं। इससे पहले दोनों ने प्रेम रतन धन पायो में साथ काम किया था और उस फिल्म के गानों ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। ऐसे में इस नई फिल्म के संगीत को लेकर भी काफी उम्मीदें जताई जा रही हैं और माना जा रहा है कि इसके गीत कहानी को और अधिक भावनात्मक गहराई देंगे।

    निर्माताओं का विश्वास है कि यह फिल्म एक बार फिर परिवारों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफल होगी और उन्हें एक साथ बैठकर फिल्म देखने का अवसर देगी। ऊंचाई जैसी सराहनीय फिल्म के बाद सूरज बड़जात्या अपनी पारंपरिक शैली में लौटते नजर आ रहे हैं और यह फिल्म दर्शकों को भावनाओं से जुड़ा एक यादगार अनुभव देने की पूरी कोशिश करेगी।

  • देवास में अनोखी पहल: गोशाला में लगाए गए कूलर, गोवंश को मिली गर्मी से राहत

    देवास में अनोखी पहल: गोशाला में लगाए गए कूलर, गोवंश को मिली गर्मी से राहत


     देवास। जिले में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी के बीच शंकरगढ़ पहाड़ी स्थित गोशाला में गोवंश को राहत देने के लिए सराहनीय पहल की गई है। संस्था अभिरंग ने गर्मी से बेहाल गायों के लिए गोशाला में दो बड़े कूलर लगाए हैं, जिससे वातावरण को ठंडा रखने में मदद मिल रही है।
    43 डिग्री तक पहुंचा तापमान, गोवंश पर बढ़ा असर
    जानकारी के अनुसार, देवास जिले में इन दिनों तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक बना हुआ है, जबकि शंकरगढ़ पहाड़ी क्षेत्र में यह सामान्य से 2 से 3 डिग्री अधिक रहता है। इस कारण गोशाला में गोवंश को अत्यधिक गर्मी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा था।
    संस्था अभिरंग की पहल से मिली राहत
    भीषण गर्मी को देखते हुए संस्था अभिरंग के सदस्यों ने आपसी सहयोग से गोशाला में कूलर लगाने की व्यवस्था की। मंगलवार को दो बड़े कूलर लगाए गए, जिनसे गोशाला के अंदर ठंडी हवा पहुंच रही है और गोवंश को राहत मिल रही है।
    गोशाला में बदला माहौल, पशुओं को मिली राहत
    कूलर लगने के बाद गोशाला के वातावरण में काफी सुधार देखा गया है। पहले जहां गर्मी के कारण गायें बेचैन रहती थीं, वहीं अब उन्हें अपेक्षाकृत ठंडा वातावरण मिल रहा है, जिससे उनकी स्थिति में सुधार हुआ है।
    संस्था अध्यक्ष ने बताया उद्देश्य
    संस्था अभिरंग के अध्यक्ष बसंत वर्मा ने बताया कि वर्तमान में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिसका सीधा असर गोवंश पर पड़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके और उनकी देखभाल बेहतर तरीके से हो सके।
    पशुसेवा की मिसाल बनी पहल
    स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भीषण गर्मी में गोवंश की देखभाल के लिए किया गया यह प्रयास एक प्रेरणादायक कदम है, जो पशुसेवा और संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करता है।

  • वैश्विक संकट के बीच भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर कई देशों में 85 प्रतिशत तक उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत

    वैश्विक संकट के बीच भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर कई देशों में 85 प्रतिशत तक उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत

    नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जहां कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है वहीं भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वृद्धि दर्ज की जा रही है इसके बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिलती नजर आ रही है

    दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है आंकड़ों के अनुसार यूएई में डीजल की कीमतों में लगभग 85 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी डीजल की कीमतें 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ी हैं वहीं कनाडा पाकिस्तान फ्रांस श्रीलंका और ब्रिटेन जैसे देशों में यह वृद्धि 35 से 50 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से भू राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण मानी जा रही है

    पेट्रोल की कीमतों का रुझान भी इसी प्रकार का रहा है पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में सबसे अधिक लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है जबकि अमेरिका और यूएई में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है अन्य देशों जैसे कनाडा श्रीलंका और चीन में भी पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है हालांकि ब्राजील और रूस जैसे देशों में यह वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही है

    इसके विपरीत भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें वर्ष की शुरुआत के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं डीजल की कीमत लगभग 87 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत करीब 94 रुपए प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है यह स्थिरता ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब वैश्विक बाजार में अस्थिरता अपने चरम पर है और कई देश महंगाई के दबाव से जूझ रहे हैं

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कीमतों को नियंत्रित रखने में सरकारी नीतियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की रणनीति का महत्वपूर्ण योगदान है तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से ईंधन की खरीद इस तरह कर रही हैं जिससे खुदरा कीमतों को स्थिर रखा जा सके हालांकि इसके चलते कंपनियों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है

    आर्थिक विश्लेषण यह भी संकेत देता है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ती हैं तो भारतीय तेल कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है अनुमान के अनुसार यदि कीमतें 135 से 165 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती हैं तो पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 18 रुपए और डीजल पर लगभग 35 रुपए तक का नुकसान हो सकता है इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से लागत में करीब 6 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हो सकती है

    कुल मिलाकर वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि जहां वैश्विक बाजार में अस्थिरता और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है वहीं भारत में संतुलित नीतियों और प्रबंधन के चलते ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में सफलता मिली है यह न केवल उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है बल्कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक साबित हो रही है

  • हाईटेक निगरानी में सुरक्षित चीते: वन्यजीव संरक्षण में Madhya Pradesh ने हासिल की अहम उपलब्धि

    हाईटेक निगरानी में सुरक्षित चीते: वन्यजीव संरक्षण में Madhya Pradesh ने हासिल की अहम उपलब्धि

    मंदसौर/नीमच। मध्यप्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य से वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक उपलब्धि सामने आई है। यहां छोड़े गए दो चीते ‘प्रभास’ और ‘पावक’ ने अपने प्रवास का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि प्रदेश में चल रहे चीता प्रोजेक्ट और जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।

    20 अप्रैल 2025 को हुआ था पुनर्वास, मुख्यमंत्री ने छोड़ा था अभयारण्य में

    इन दोनों चीतों को चीता प्रोजेक्ट के तहत 20 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ा गया था। यह पहल प्रदेश में वन्यजीवों के पुनर्वास और प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना गया था।

    नए वातावरण में सफलतापूर्वक ढले दोनों चीते

    एक वर्ष के दौरान ‘प्रभास’ और ‘पावक’ ने नए पर्यावरण के साथ खुद को पूरी तरह अनुकूलित कर लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों चीते स्वस्थ हैं और उनकी गतिविधियों में प्राकृतिक व्यवहार स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। यह संकेत इस परियोजना की सफलता को मजबूत करता है।

    हाईटेक सिस्टम से लगातार निगरानी

    वन विभाग द्वारा दोनों चीतों की 24 घंटे सख्त निगरानी की जा रही है। उनके मूवमेंट, स्वास्थ्य और शिकार गतिविधियों पर GPS कॉलर और आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों की टीम लगातार उनकी स्थिति का विश्लेषण कर रही है ताकि उन्हें किसी प्रकार का खतरा न हो।

    वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा करना मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल जैव विविधता को बढ़ावा देता है, बल्कि भविष्य की वन्यजीव पुनर्वास परियोजनाओं के लिए भी एक मजबूत मॉडल प्रस्तुत करता है

    गांधी सागर बनेगा चीतों का स्थायी आवास

    वन विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में ‘प्रभास’ और ‘पावक’ गांधी सागर अभयारण्य में स्थायी रूप से बस जाएंगे। इसके साथ ही यह क्षेत्र चीतों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित होगा।

    प्रदेश के लिए गर्व का विषय

    इन दोनों चीतों का एक वर्ष पूरा करना न केवल वन विभाग, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि राज्य को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिला सकती है।

  • लापरवाही पर गिरी गाज: ग्रामीणों द्वारा पकड़कर सौंपने के बावजूद जांच न करने पर कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

    लापरवाही पर गिरी गाज: ग्रामीणों द्वारा पकड़कर सौंपने के बावजूद जांच न करने पर कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई


    रतलाम। जिले में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाले एक मामले में एसपी अमित कुमार ने सख्त कार्रवाई करते हुए माणकचौक थाना प्रभारी (TI) पातीराम डावरे को लाइन अटैच कर दिया है। इसके साथ ही 14 हेड कॉन्स्टेबलों के थानों में भी बदलाव किया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
    जांच में लापरवाही पर कार्रवाई
    जानकारी के अनुसार, टीआई पर आरोप है कि एक गंभीर घटना के बाद भी उन्होंने उचित जांच नहीं की और मामले को आगे नहीं बढ़ाया। इसी लापरवाही को देखते हुए एसपी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच करने के आदेश जारी किए।
    मथुरी तालाब घटना से जुड़ा मामला
    पूरा मामला 15 अप्रैल की रात करमदी के मथुरी तालाब क्षेत्र का है, जहां तीन युवक संदिग्ध हालत में पहुंचे थे। ग्रामीणों ने मोटर चोरी की आशंका में तीनों को पकड़ने की कोशिश की। इस दौरान दो युवक मौके से भाग निकले, जबकि एक को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
    पकड़े गए युवक पर सिर्फ शांति भंग की कार्रवाई
    पुलिस ने पकड़े गए युवक के खिलाफ केवल शांति भंग की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। बाद में वह जमानत पर रिहा भी हो गया। वहीं, फरार हुए दो अन्य युवकों की तलाश में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे मामले की गंभीरता पर सवाल उठे।
    ग्रामीणों की सूचना के बाद भी नहीं हुई जांच
    ग्रामीणों द्वारा संदिग्धों को पकड़कर पुलिस को सौंपे जाने के बावजूद मामले की गंभीरता से जांच नहीं करने और आगे की कार्रवाई न करने को लेकर टीआई की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं। इसी को आधार बनाकर एसपी ने यह कड़ा कदम उठाया है।
    पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल
    इस कार्रवाई के साथ ही एसपी ने जिले के 14 हेड कॉन्स्टेबलों के भी तबादले कर दिए हैं। इससे पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है।
    नया टीआई अब तक नियुक्त नहीं
    कार्रवाई के बाद माणकचौक थाने में अभी तक किसी नए थाना प्रभारी की नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे थाने का अतिरिक्त प्रभार अन्य अधिकारी को दिया गया है।
    एसपी के सख्त संदेश से मचा हड़कंप
    एसपी अमित कुमार की इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम के बाद जिले के पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।

  • कुएं में डूबने से 8 वर्षीय बालक की मौत, बकरियां चराने गया था मासूम

    कुएं में डूबने से 8 वर्षीय बालक की मौत, बकरियां चराने गया था मासूम


    झाबुआ। जिले के पेटलावद थाना क्षेत्र के दाड़िया गांव में मंगलवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जहां 8 वर्षीय बालक की कुएं में डूबने से मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

    बकरियां चराने गया था मासूम, दोपहर तक नहीं लौटा

    जानकारी के अनुसार, दिलीप देवदा का पुत्र अरुण सुबह करीब 8 बजे घर से बकरियां चराने के लिए निकला था। रोज की तरह वह गांव के आसपास पशु चराने गया था, लेकिन दोपहर तक जब बकरियां तो घर लौट आईं, मगर अरुण वापस नहीं आया तो परिजनों को चिंता होने लगी।

    तलाश के दौरान कुएं में मिला सुराग

    परिजनों और ग्रामीणों ने बालक की तलाश शुरू की। इसी दौरान गांव के पास स्थित एक कुएं के पास उसकी चप्पल और पानी की बोतल दिखाई दी, जो पानी में तैर रही थी। संदेह होने पर ग्रामीणों ने कुएं में झांककर देखा तो वहां से मासूम का शव बरामद हुआ।

    पुलिस मौके पर पहुंची, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया

    घटना की सूचना मिलते ही पेटलावद पुलिस मौके पर पहुंची। जितेंद्र सिंह दोहरे के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव का पंचनामा तैयार किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया।

    गांव में पसरा मातम

    बालक की आकस्मिक मौत से दाड़िया गांव में मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मासूम की मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है, लोग परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।

    पुलिस कर रही जांच

    पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि बालक कुएं में कैसे गिरा। फिलहाल इसे एक दुखद हादसा माना जा रहा है।

  • PNB ने सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरों के लिए सरकारी नौकरी का अवसर..

    PNB ने सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरों के लिए सरकारी नौकरी का अवसर..

    नई दिल्ली: बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे इंजीनियर युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने विभिन्न तकनीकी शाखाओं में ऑफिसर पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें कुल 30 पदों को भरा जाएगा। यह भर्ती अभियान बैंक के इंजीनियरिंग विभाग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिसमें सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग से जुड़े योग्य उम्मीदवारों को अवसर प्रदान किया जा रहा है। आवेदन प्रक्रिया 21 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवारों के पास 5 मई तक आवेदन करने का अंतिम अवसर रहेगा।

    इस भर्ती में सबसे अधिक 21 पद ऑफिसर (सिविल इंजीनियर) के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के लिए 7 पद और मैकेनिकल इंजीनियर के लिए 2 पद रखे गए हैं। सभी पद जूनियर मैनेजमेंट ग्रेड (JMG) स्केल-I के अंतर्गत आते हैं, जो बैंकिंग क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित और स्थिर करियर की शुरुआत का अवसर प्रदान करते हैं। चयनित उम्मीदवारों को न केवल आकर्षक वेतन मिलेगा, बल्कि बैंक के नियमों के अनुसार अन्य भत्ते और सुविधाएं भी दी जाएंगी, जो इस नौकरी को और अधिक आकर्षक बनाते हैं।

    आवेदन के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से संबंधित इंजीनियरिंग शाखा में बीई या बीटेक की डिग्री होना अनिवार्य है, जिसमें न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्र में कार्य अनुभव और अन्य निर्धारित पात्रताओं को भी पूरा करना जरूरी होगा। बैंक ने आयु सीमा भी निर्धारित की है, जिसके अनुसार उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए। आयु की गणना निर्धारित तिथि के आधार पर की जाएगी, जबकि आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट प्रदान की जाएगी।

    चयन प्रक्रिया को कई चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें सबसे पहले ऑनलाइन लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके बाद योग्य उम्मीदवारों को इंटरव्यू राउंड के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। अंतिम चयन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेरिट के आधार पर किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य योग्य और तकनीकी रूप से सक्षम उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित करना है, जो बैंक के इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

    आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों को 1180 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए शुल्क 59 रुपये निर्धारित किया गया है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है, जिससे उम्मीदवार घर बैठे आसानी से आवेदन कर सकते हैं।

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को पहले बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद लॉगिन कर सभी आवश्यक व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी भरनी होगी। दस्तावेज अपलोड करने के बाद निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा और अंत में फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रखना होगा। यह भर्ती उन युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर है जो बैंकिंग सेक्टर में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

  • मंडी व्यवस्था पर सवाल: Burhanpur में किसानों की भीड़, उप संचालक बोले- व्यवस्था सुधरी

    मंडी व्यवस्था पर सवाल: Burhanpur में किसानों की भीड़, उप संचालक बोले- व्यवस्था सुधरी


     बुरहानपुर। जिले की तुकईथड़ कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य पर चना बेचने पहुंचे किसानों को मंगलवार को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। कई किसान अपनी उपज लेकर रात से ही ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ मंडी परिसर में पहुंच गए थे, लेकिन मंडी का मुख्य गेट सुबह से दोपहर 12 बजे तक बंद रहने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा।
    रातभर मंडी के बाहर डटे रहे किसान
    जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में किसान रात में ही मंडी पहुंच गए थे ताकि सुबह जल्दी अपनी उपज की बिक्री कर सकें। लेकिन सुबह होने के बाद भी जब मंडी का गेट नहीं खुला तो किसानों में नाराजगी और असंतोष देखने को मिला। कई किसान खुले आसमान के नीचे पूरी रात अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
    गेट बंद रहने से बढ़ी परेशानी
    मंडी गेट पर ताला लगा होने के कारण किसानों को न तो प्रवेश मिल पाया और न ही खरीदी प्रक्रिया शुरू हो सकी। इस दौरान किसानों की भीड़ लगातार बढ़ती गई और मौके पर अफरा-तफरी जैसे हालात बन गए।
    सूचना पर प्रशासन मौके पर पहुंचा
    स्थिति बिगड़ती देख नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचीं और पूरी व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर तत्काल समाधान के निर्देश दिए, जिसके बाद खरीदी प्रक्रिया को शुरू कराने की कवायद तेज हुई।
    दोपहर 12 बजे खुला गेट, शुरू हुई खरीदी
    लगभग दोपहर 12 बजे मंडी का गेट खोला गया और चना खरीदी की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद धीरे-धीरे किसानों की भीड़ को नियंत्रित किया गया और उपज की तुलाई व खरीदी कार्य प्रारंभ हुआ।
    अधिकारियों का पक्ष व्यवस्था सामान्य हुई
    उप संचालक कृषि एवं खरीदी प्रभारी एमएस देवके ने बताया कि मंडी मैनेजर के पारिवारिक कारणों से समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण देरी हुई। जैसे ही जानकारी मिली, तुरंत वैकल्पिक कर्मचारी भेजकर खरीदी शुरू कराई गई। उन्होंने कहा कि दोपहर तक सभी व्यवस्थाएं सामान्य हो गईं और खरीदी कार्य सुचारू रूप से चलने लगा।
    प्रशासन ने बताया अधिकार क्षेत्र का मामला
    इस पूरे मामले पर एसडीएम भागीरथ वाखला ने कहा कि यह विषय उप संचालक कृषि के अधिकार क्षेत्र में आता है और आगे की व्यवस्था संबंधित विभाग द्वारा देखी जाएगी।
    किसानों में नाराजगी बरकरार
    हालांकि खरीदी शुरू हो गई, लेकिन किसानों ने देर से प्रक्रिया शुरू होने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि समय पर व्यवस्था होती तो उन्हें रातभर परेशानी नहीं उठानी पड़ती।