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  • ओले-बारिश का असर: मौसम के बदलते मिजाज से ‘कंफ्यूज’ हुए पेड़-पौधे, समय से पहले निकल रहीं पत्तियां

    ओले-बारिश का असर: मौसम के बदलते मिजाज से ‘कंफ्यूज’ हुए पेड़-पौधे, समय से पहले निकल रहीं पत्तियां


    नई दिल्ली। Climate Change का असर अब सिर्फ तापमान या मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के मूल चक्र को भी प्रभावित करने लगा है। भोपाल और आसपास के इलाकों में हालिया ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने पेड़-पौधों को ‘कंफ्यूज’ कर दिया है। स्थिति यह है कि जिन पेड़ों को इस समय पतझड़ में होना चाहिए था, उनमें नई पत्तियां और कलियां निकलने लगी हैं। विशेषज्ञ इसे प्राकृतिक चक्र के साथ ‘धोखा’ मान रहे हैं, जिसका सीधा असर भविष्य की खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।

    समय से पहले पत्तियां, बिगड़ा प्राकृतिक चक्र

    पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में पाए जाने वाले सागौन जैसे पेड़ गर्मियों में अपने पत्ते गिरा देते हैं। लेकिन इस बार अप्रैल में हुई असामान्य बारिश के कारण उन्हें मानसून जैसा भ्रम हो गया। नतीजतन, पतझड़ के बाद भी उनमें नई पत्तियां निकल आईं। यह बदलाव सामान्य नहीं है और आने वाले समय में पौधों की वृद्धि और उत्पादन पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    खाद्यान्न उत्पादन पर मंडराया संकट

    विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो सबसे बड़ा खतरा Food Security पर होगा। मौसम के असंतुलन से फसलों का चक्र प्रभावित हो रहा है। फरवरी में अचानक बढ़ी गर्मी के कारण गेहूं समय से पहले पक गया, जिससे दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए। वहीं, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने सब्जियों की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया, जिससे बाजार में कीमतें भी बढ़ने लगी हैं।

    ‘सडन क्लाइमेट चेंज’ से बढ़ी अनिश्चितता

    मौसम में अचानक बदलाव गर्मी में बारिश और सर्दी में गर्मी अब आम होता जा रहा है। वैज्ञानिक इसे ‘सडन क्लाइमेट चेंज’ का परिणाम मानते हैं। इसके पीछे El Niño और La Niña जैसे वैश्विक कारक भी जिम्मेदार माने जाते हैं, जो समुद्री तापमान और हवाओं के जरिए पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करते हैं। हालांकि, इनके ट्रिगर होने के कारणों पर अभी भी शोध जारी है।

    ग्लोबल वार्मिंग बना सबसे बड़ा खतरा

    Global Warming इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके चलते आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्रों की बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2050 तक कई तटीय शहरों पर डूबने का खतरा मंडरा सकता है। इसका असर भारत के तटीय क्षेत्रों पर भी पड़ेगा, जहां बड़े पैमाने पर पलायन की स्थिति बन सकती है।

    स्वास्थ्य और आयुर्वेद पर भी असर

    मौसम के इस असंतुलन का असर अब स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, हर ऋतु के अनुसार तय उपचार पद्धतियां अब प्रभावित हो रही हैं। मार्च-अप्रैल का ‘संधिकाल’ पहले से ही संवेदनशील माना जाता था, लेकिन अब बदलते मौसम के कारण मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। इम्युनिटी बढ़ाने और शरीर को अनुकूल बनाने के लिए नई उपचार पद्धतियों पर जोर दिया जा रहा है।

    प्रकृति से छेड़छाड़ का परिणाम

    विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ता प्रदूषण, वनों की कटाई और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियां इस असंतुलन की मुख्य वजह हैं। “जो बाहर है, वही अंदर है”—इस सिद्धांत के अनुसार प्रकृति में हो रहे बदलाव सीधे मानव जीवन और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।

    बेमौसम बारिश और तापमान बदलाव से पेड़-पौधों का चक्र गड़बड़ा गया है, जिससे फसल उत्पादन और फूड सिक्योरिटी पर बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।

  • तिलक विवाद गरमाया: Bhopal में Lenskart स्टाफ को तिलक लगाकर जताया विरोध, बोले-‘अपमान नहीं सहेंगे’

    तिलक विवाद गरमाया: Bhopal में Lenskart स्टाफ को तिलक लगाकर जताया विरोध, बोले-‘अपमान नहीं सहेंगे’


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की राजधानी Bhopal के न्यू मार्केट रोशनपुरा इलाके में Lenskart के शोरूम के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ। हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने कथित ड्रेस कोड विवाद को लेकर शोरूम का घेराव किया और कर्मचारियों को तिलक लगाकर तथा मंत्रोच्चार के साथ कलावा बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।

     “सनातन प्रतीकों का अपमान नहीं सहेंगे”
    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि देश में तिलक, कलावा और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी कंपनी ने इन पर रोक लगाने की कोशिश की, तो उसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि संगठन Lenskart के बहिष्कार की अपील कर रहा है और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

     कर्मचारियों का दावा- “कोई रोक नहीं”
    प्रदर्शन के बीच शोरूम कर्मचारियों ने इन आरोपों को खारिज किया। एक कर्मचारी ने बताया कि उन्हें कभी भी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया। उनका कहना है कि नवरात्रि जैसे अवसरों पर वे खुद इन धार्मिक प्रतीकों के साथ काम पर आते रहे हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर चल रही बातें उनकी व्यक्तिगत अनुभव से मेल नहीं खातीं और उन्हें कंपनी की ओर से कोई दबाव महसूस नहीं हुआ।

    सोशल मीडिया से शुरू हुआ पूरा विवाद
    दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से हुई। इसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोका गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई लोगों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया।

     ‘ग्रूमिंग गाइड’ पर भी उठे सवाल
    सोशल मीडिया पर एक कथित ‘ग्रूमिंग गाइड’ भी वायरल हुई, जिसमें महिला कर्मचारियों के लिए बिंदी और क्लचर पर पाबंदी की बात कही गई थी। साथ ही कलावा या रिस्ट बैंड पर भी रोक का दावा किया गया।
    हालांकि, इन दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इससे विवाद और गहरा गया।

    कंपनी की सफाई
    विवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि कंपनी सभी धर्मों और उनकी मान्यताओं का सम्मान करती है। कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है।
    इसके बावजूद प्रदर्शन कर रहे संगठन कंपनी के जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने विरोध जारी रखने की बात कही है।

  • केदारनाथ धाम: जानिए कैसे हुई इस नाम की उत्पत्ति, स्कंदपुराण में वर्णित इससे जुड़ा रहस्य

    केदारनाथ धाम: जानिए कैसे हुई इस नाम की उत्पत्ति, स्कंदपुराण में वर्णित इससे जुड़ा रहस्य

    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चार धामों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अक्षय तृतीया से चारधाम यात्रा की शुरुआत होती है और गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद अब 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह पवित्र धाम भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

    पांडवों से जुड़ी कथा, लेकिन यह पूरी कहानी नहीं
    अक्सर केदारनाथ धाम के इतिहास को महाभारत काल से जोड़कर देखा जाता है, जिसमें पांडवों के तप और शिवजी के बैल रूप में प्रकट होने की कथा प्रचलित है। मान्यता है कि पांडवों ने शिवजी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए तप किया था और बाद में भगवान शिव ने केदार घाटी में बैल का रूप धारण कर उन्हें दर्शन दिए थे। इसी आधार पर केदारनाथ धाम का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है।

    स्कंदपुराण में मिलता है केदारनाथ नाम का वास्तविक स्रोत
    हालांकि, केदारनाथ नाम और इसकी उत्पत्ति को लेकर एक विस्तृत वर्णन स्कंदपुराण में मिलता है। इस कथा के अनुसार, एक बार हिरण्याक्ष नामक दैत्य ने तीनों लोकों पर अधिकार कर देवताओं को स्वर्ग से बाहर कर दिया था। पराजित होकर देवराज इंद्र अन्य देवताओं के साथ हिमालय क्षेत्र में पहुंचे और मंदाकिनी नदी के किनारे भगवान शिव की तपस्या करने लगे। इंद्र की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव महिष (भैंसे) के रूप में प्रकट हुए। उसी रूप में उन्होंने इंद्र से पूछा “के दारयामि?” यानी “किसका विनाश करूं?” यही प्रश्न आगे चलकर ‘केदार’ नाम की उत्पत्ति का आधार बना।

    देवताओं की विनती और दैत्यों का अंत
    इंद्र ने भगवान शिव को उन दैत्यों के नाम बताए जो देवताओं के लिए संकट बने हुए थे हिरण्याक्ष, सुबाहु, वक्त्रकंधर, त्रिशृंग और लोहिताक्ष। भगवान शिव ने भैंसे के रूप में ही इन दैत्यों का संहार किया, जिससे देवताओं को राहत मिली। इसके बाद भगवान शिव ने एक कुंड का निर्माण किया और इंद्र की प्रार्थना पर उसी स्थान पर केदारनाथ रूप में निवास करने का वरदान दिया। कहा जाता है कि इस स्थान पर पूजा और जल अर्पण से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनके कुल का उद्धार होता है।

    मोक्ष और आस्था का केंद्र
    मान्यता है कि यहां किया गया पिंडदान और पूजा अत्यंत फलदायी होती है और यह स्थल मोक्ष प्राप्ति का विशेष केंद्र माना जाता है। यही कारण है कि केदारनाथ धाम को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली तीर्थों में स्थान प्राप्त है।

  • ‘मैंने प्यार किया’ में Salman Khan नहीं, अमाल के पिता बनने वाले थे हीरो! सिंगर का बड़ा खुलासा

    ‘मैंने प्यार किया’ में Salman Khan नहीं, अमाल के पिता बनने वाले थे हीरो! सिंगर का बड़ा खुलासा


    नई दिल्ली। म्यूजिक कंपोजर Amaal Mallik ने हाल ही में एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने बॉलीवुड फैंस को चौंका दिया है। उन्होंने बताया कि सुपरहिट फिल्म Maine Pyar Kiya में शुरुआत में Daboo Malik को हीरो के तौर पर कास्ट किया गया था, न कि Salman Khan को।

    फिल्म की शूटिंग भी कर चुके थे डब्बू मलिक
    एक इंटरव्यू में अमाल ने बताया कि उनके पिता डब्बू मलिक ने फिल्म के शुरुआती शेड्यूल में हीरो के रूप में शूटिंग भी कर ली थी। उस समय फिल्म के निर्देशक Sooraj Barjatya और उनके परिवार ने उन्हें यह मौका दिया था।
    फोटोशूट और कुछ सीन पूरे हो चुके थे, और फिल्म का काम आगे बढ़ रहा था। लेकिन इसी बीच कहानी में अचानक बड़ा मोड़ आ गया।

    अचानक हुई एंट्री और बदल गया फैसला
    अमाल मलिक के मुताबिक, इसी दौरान एक नए चेहरे की एंट्री हुई—जो बाद में सुपरस्टार बने Salman Khan।
    उन्होंने बताया कि उनके पिता ने खुद उस दिन को याद करते हुए कहा था कि ऑफिस की सीढ़ियों पर उन्हें एक हैंडसम लड़का दिखा, जो बाद में फिल्म का नया हीरो बना।

     बिना बताए कर दिया गया रिप्लेस
    सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि डब्बू मलिक को उनके रिप्लेस होने की जानकारी सीधे तौर पर नहीं दी गई। अमाल के अनुसार, उनके पिता को यह बात एक सिक्योरिटी गार्ड से पता चली।
    यह घटना उनके लिए काफी झटका देने वाली थी। उस समय वे मानसिक रूप से परेशान भी हुए, लेकिन हालात को स्वीकार करने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं था।

    सालों बाद सलमान को बताई थी सच्चाई
    अमाल ने यह भी बताया कि बाद में जब Daboo Malik ने Sohail Khan की फिल्म के लिए गाना बनाया, तब उन्होंने यह पूरी कहानी Salman Khan को खुद सुनाई थी।

    सलमान के करियर की बनी टर्निंग प्वाइंट
    गौरतलब है कि Maine Pyar Kiya सलमान खान के करियर की पहली बड़ी हिट फिल्म थी, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज वे इंडस्ट्री के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में गिने जाते हैं।

    आगे भी व्यस्त हैं सलमान खान
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, Salman Khan जल्द ही नई फिल्मों में नजर आने वाले हैं, जिनमें एक बड़ा प्रोजेक्ट इस साल और एक अगली ईद पर रिलीज हो सकता है।

  • तेज धूप में नंगे पैर Vrindavan पहुंचे Virat Kohli-Anushka Sharma, सादगी ने जीता दिल

    तेज धूप में नंगे पैर Vrindavan पहुंचे Virat Kohli-Anushka Sharma, सादगी ने जीता दिल


    नई दिल्ली। क्रिकेट और बॉलीवुड की चर्चित जोड़ी Virat Kohli और Anushka Sharma एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर सुर्खियों में हैं। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर यह कपल Vrindavan पहुंचा, जहां उन्होंने प्रसिद्ध संत Premanand Maharaj के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया।

     आम श्रद्धालुओं की तरह सुना प्रवचन
    विराट और अनुष्का ने किसी वीआईपी की तरह नहीं, बल्कि आम भक्तों की तरह बैठकर प्रवचन सुना। दोनों पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए और Radha Krishna की आराधना में डूबे दिखे। उनकी सादगी और समर्पण ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।

    नंगे पैर गलियों में चलते दिखे ‘विरुष्का’
    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कपल को वृंदावन की गलियों में नंगे पैर चलते देखा गया। भीषण गर्मी के बावजूद दोनों ने किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं ली और पूरी श्रद्धा के साथ गुरु के दरबार तक पहुंचे।
    लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा— “सच्ची भक्ति वही है, जहां दिखावा नहीं, सिर्फ समर्पण होता है।”

     राधिका वाटिका में किए दर्शन
    कपल राधिका वाटिका भी गया, जहां उन्होंने बड़े महाराज के दर्शन किए। जैसे ही लोग उन्हें पहचान पाए, फोटो और वीडियो बनाने की होड़ लग गई। इसके बावजूद दोनों शांत भाव से पूजा-पाठ में लगे रहे।

     एयरपोर्ट पर दिखे संस्कार
    एक और वीडियो में अनुष्का शर्मा एक व्यक्ति के पैर छूकर आशीर्वाद लेती नजर आईं, फिर उन्हें गले लगाया। इस व्यवहार ने फैंस को खासा प्रभावित किया।
    बताया जा रहा है कि यह शख्स Premanand Maharaj के आश्रम से जुड़े संत हो सकते हैं, जो कपल को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे।

    पारंपरिक लुक में दिखा अलग अंदाज
    इस दौरान विराट और अनुष्का ट्रेडिशनल पहनावे में नजर आए। गले में तुलसी की माला और माथे पर तिलक लगाए दोनों पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगे दिखे।

     5 महीनों में तीसरी बार दर्शन
    गौरतलब है कि पिछले 5 महीनों में यह तीसरा मौका है, जब विराट-अनुष्का Premanand Maharaj के दर्शन करने पहुंचे हैं। व्यस्त शेड्यूल, खासकर आईपीएल 2026 के बीच विराट का इस तरह आध्यात्म की ओर झुकाव लोगों को काफी प्रभावित कर रहा है।

  • ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर

    ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर


    नई दिल्ली।
    इंटरनेशनल मार्केट (International Market) में क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में उथल-पुथल मची हुई है. एक द‍िन पहले ज‍िस क्रूड के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही थी, अगले द‍िन उसी में तेजी देखी जा रही है. दो द‍िन पहले की ही बात है जब ईरान ने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को कमर्श‍ियल श‍िप के लि‍ए पूरी तरह खोल द‍िया गया है. इसके बाद क्रूड के दाम 9 प्रत‍िशत तक टूट गए. लेक‍िन डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump.) की तरफ से जब यह बयान आया क‍ि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी झंडे वाला कार्गो जहाज को जब्‍त कर ल‍िया है. इसके बाद तेल की कीमत में तेजी देखी गई. अब फ‍िर क्रूड ऑयल के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही है।

    मंगलवार सुबह क्रूड ऑयल के दाम में फ‍िर से ग‍िरावट देखी जा रही है. WTI क्रूड के रेट में 0.87 डॉलर प्रत‍ि बैरल की ग‍िरावट देखी गई और यह 86.63 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह टूटकर 95.09 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद सीजफायर के बीच क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है. आने वाले समय में तेल की कीमत में अस्थिरता बनी रहने उम्मीद है. होर्मुज बंद होने के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन टूट चुकी है. दुन‍ियाभर के ऑयल मार्केट का 20 फीसदी इसी रास्ते से होकर गुजरता है।


    ट्रंप ने दी चेतावनी

    इससे पहले अमेर‍िका और ईरान की पाक‍िस्‍तान में सोमवार को होने वाली बातचीत से ईरान ने यह कहकर क‍िनारा कर ल‍िया क‍ि यूएस की लगातार बढ़ती मांगों और धमकी के आगे वह नहीं झुकेगा. इसके बाद दोनों देशों का तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है. दोनों पक्षों के बीच 8 अप्रैल को शुरू हुआ सीजफायद 22 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है. ईरान के बातचीत से क‍िनारा क‍िये जाने से नाराज ट्रंप ने कहा कि यद‍ि सीजफायर बिना किसी समझौते के मंगलवार शाम को खत्म हो जाता है तो फिर बहुत सारे बम फटने लगेंगे।


    भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल का हाल

    क्रूड के दाम में उठा-पटक का असर सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल के रेट पर देखा जाता है. प‍िछले द‍िनों क्रूड के दाम में तेजी आई तो तेल कंपन‍ियों के प्रॉफ‍िट पर सीधा असर पड़ा. इसे मैनेज करने के लि‍ए सरकार ने आम आदमी को राहत देते हुए एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती कर तेल कंपन‍ियों के दबाव को कम क‍िया. अगर क्रूड के दाम लंबे समय तक 100 डॉलर के आसपास बने रहे तो इसका असर आम आदमी पर देखने को म‍िल सकता है।


    पेट्रोल-डीजल के रेट

    > दिल्ली : पेट्रोल 94.77, डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर
    > मुंबई: पेट्रोल 103.54, डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर
    > चेन्नई: पेट्रोल 100.84, डीजल 92.48 रुपये प्रति लीटर
    > कोलकाता: पेट्रोल 105.45, डीजल 91.81 रुपये प्रति लीटर

  • संघ प्रमुख मोहन भागवत की Z प्लस सिक्योरिटी को लेकर HC में याचिका… जानें क्या की गई डिमांड?

    संघ प्रमुख मोहन भागवत की Z प्लस सिक्योरिटी को लेकर HC में याचिका… जानें क्या की गई डिमांड?


    नई दिल्ली।
    RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) को मिली Z प्लस सुरक्षा को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court.) में याचिका दाखिल हुई। इस याचिका के जरिए मांग की गई थी कि सुरक्षा पर हो रहे खर्च का भुगतान संघ की तरफ से ही किया जाना चाहिए। हालांकि, उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं।


    40 से 45 लाख रुपये महीने का खर्च

    उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष दायर जनहित याचिका में दावा किया गया कि सुरक्षा कवर की लागत कथित तौर पर 40 लाख से 45 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है, जो सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और राज्य के खजाने का नुकसान है क्योंकि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन नहीं है।

    याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और जस्टिस अनिल किलोर की पीठ ने याचिका दायर करने के पीछे याचिकाकर्ता के मकसद और इरादे पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता के वकील ने यह जानकारी दी।


    याचिका में क्या

    नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा अपने वकील अश्विन इंगोले के माध्यम से दायर याचिका में यह दलील दी गई कि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग ऐसे व्यक्ति को ‘जेड-प्लस’ श्रेणी की वीवीआईपी सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जा रहा है, जिसका संगठन ‘पंजीकृत’ नहीं है। याचिकाकर्ता ने सरकार की तरफ से भागवत को दी गई उच्च स्तरीय सुरक्षा के लिए उनसे शुल्क की भरपाई का अनुरोध किया था।


    मुकेश अंबानी केस का दिया हवाला

    उन्होंने 2023 में उच्चतम न्यायालय द्वारा उद्योगपति मुकेश अंबानी से संबंधित एक मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने भारत सरकार की नीति के अनुसार उन्हें ‘जेड-प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था। साथ ही इसका पूरा खर्च उनके परिवार द्वारा उठाया जाना था।


    मोहन भागवत को कब मिली थी जेड प्लस सिक्योरिटी

    जून 2015 में संघ प्रमुख भागवत की सुरक्षा को बढ़ाकर जेड प्लस श्रेणी का कर दिया गया था। इसके साथ ही उनके सुरक्षा घेरे को संभालने का जिम्मा CISF यानी सेंट्रल आर्म्ड इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्सेज के पास आ गया था। इससे पहले उनकी सुरक्षा में महाराष्ट्र पुलिस की टुकड़ियां तैनात थीं। खास बात है कि पहली बार साल 2012 में यूपीए सरकार के दौरान भागवत को जेड प्लस सिक्योरिटी देने के आदेश दिए गए थे। तब सुशील कुमार शिंदे देश के गृहमंत्री थे।

  • हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरानी फायरिंग के बाद ऐक्शन में भारत…

    हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरानी फायरिंग के बाद ऐक्शन में भारत…


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps.- IRGC) के सैनिकों द्वारा की गई गोलीबारी की घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। यह घटना 18 अप्रैल को हुई थी। सरकार ने तत्काल कूटनीतिक कदम उठाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया और इस घटना पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। अभी भी हॉर्मुज में करीब 14 भारतीय जहाज फंसे हैं जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भारत ने प्रयास तेज कर दिए हैं। दूसरी ओर भारतीय नौसेना ने 7 युद्धपोत तैनात कर जहाजों को एस्कॉर्ट करना शुरू कर दिया है।


    कूटनीतिक प्रतिक्रिया और भारत का रुख

    गोलीबारी की घटना के बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूत से मुलाकात कर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से इस क्षेत्र से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि भारत ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से तेजी से कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा- हम भारतीय जहाजों की सुरक्षा के संबंध में ईरानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और उन्हें सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।

    यह फायरिंग ईरानी अधिकारियों और स्थानीय IRGC यूनिट के बीच ‘संचार की कमी’ का नतीजा प्रतीत होती है। राहत की बात ये है कि जहाजों को कोई बड़ा ढांचागत नुकसान नहीं पहुंचा है। घटना के दौरान जहाजों के कुछ हिस्सों में शीशे (कांच) टूटने की सूचना मिली है।


    UKMTO की रिपोर्ट और हमलों का विवरण

    यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी अपनी रिपोर्ट में इस घटना का जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल को कुल तीन जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनमें से दो भारतीय थे।

    पहली घटना: एक भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकर के पास दो ईरानी सैन्य गनबोट (हथियारबंद नावें) आईं और बिना किसी पूर्व चेतावनी या रेडियो संपर्क के फायरिंग शुरू कर दी। गनीमत रही कि चालक दल पूरी तरह सुरक्षित बच गया।

    दूसरी घटना: इसके कुछ ही समय बाद, ओमान के तट के पास एक अन्य भारतीय सुपरटैंकर को निशाना बनाया गया। इस जहाज पर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल (गोला/मिसाइल) टकराने की खबर है, जिससे इस अहम समुद्री मार्ग में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

    इस गंभीर घटना के बीच, भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में 7 युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। फंसे जहाजों को लारक आइलैंड से दूर रहने और केवल अनुमति मिलने पर आगे बढ़ने की एडवाइजरी जारी की गई है। नौसेना जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है।


    वर्तमान स्थिति और भारतीय जहाजों की मौजूदगी

    इस समय स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। हॉर्मुज स्ट्रेट में कम से कम 14 भारतीय ध्वज वाले जहाज अभी भी लंगर डाले हुए हैं, जिनमें तीन बड़े तेल टैंकर और एक एलपीजी (LPG) कैरियर शामिल हैं। 28 फरवरी को मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद से भारत पहले ही 10 भारतीय एलपीजी और तेल टैंकरों को इस क्षेत्र से सुरक्षित निकाल चुका है। अब बाकी बचे 14 जहाजों की सुरक्षित वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं। ईरान में भारी संख्या में भारतीय नागरिक भी मौजूद हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना नई दिल्ली की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत लगातार ईरान पर कूटनीतिक दबाव बना रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो और भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी मिल सके।

  • तेज प्रताप के बयान से बिहार के सियासी गलियारों में हलचल…. बोले- कभी भी बिखर सकती है RJD

    तेज प्रताप के बयान से बिहार के सियासी गलियारों में हलचल…. बोले- कभी भी बिखर सकती है RJD


    पटना।
    लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) ने एक बार फिर अपने बेबाक बयानों से बिहार के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। एक मीडिया चैनल पर खास बात-चीत करते हुए तेज प्रताप ने न केवल पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Former Chief Minister Nitish Kumar.) के कामकाज की जमकर सराहना की, बल्कि अपने छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के नेतृत्व वाली राजद (RJD) के भविष्य पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया।


    “मेरे अलग होने से कमजोर हुई राजद”

    तेज प्रताप यादव ने राजद की वर्तमान स्थिति पर कड़ा प्रहार करते हुए दावा किया कि पार्टी अब बिखरने की कगार पर है। उन्होंने साफ लहजे में कहा, “जब से हम राजद से अलग हुए हैं, पार्टी कमजोर हुई है।” उन्होंने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वह जनता से दूरी बनाए हुए हैं। तेज प्रताप ने यहाँ तक चेतावनी दे डाली कि राजद की स्थिति फिलहाल ऐसी है कि उसके विधायकों पर अन्य दलों की नजर बनी हुई है और पार्टी कभी भी टूट सकती है। उनके बचे हुए 25 विधायकों को कोई भी कभी भी तोड़ सकता है।

    नीतीश कुमार को 10 में से 9 नंबर
    जब तेज प्रताप से पूछा गया कि वह नीतीश कुमार के कार्यकाल को कैसे देखते हैं, तो उन्होंने बेहद बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार हमारे पिता लालू प्रसाद यादव के पुराने साथी रहे हैं। वह हमारे चाचा के समान हैं और राजनीति में बहुत सीनियर हैं। हम लोग तो अभी उनके सामने बच्चे हैं।” दिलचस्प बात यह रही कि जब उन्हें याद दिलाया गया कि उनकी माता राबड़ी देवी को हटाकर ही नीतीश सीएम बने थे, तो तेज प्रताप ने कहा कि राजनीति में उलटफेर चलते रहते हैं, लेकिन व्यक्तिगत संबंध अपनी जगह हैं। उन्होंने मजाकिया लहजे में नीतीश कुमार की एक खूबी भी गिनाई और कहाँ कि “चाचा काम के दौरान न्यूट्रल रहते थे और जिस तरह वह अपना पेट सहलाते हैं, वह मुझे बहुत अच्छा लगता है।”


    बदलते सियासी समीकरण के संकेत?

    बता दें कि नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल को राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा था। इसके बाद 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। तेज प्रताप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति एक नए दौर से गुजर रही है। भाई तेजस्वी यादव पर तंज और चाचा नीतीश की इतनी बड़ी रेटिंग, कहीं न कहीं बिहार में एक नए सियासी समीकरण की आहट दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप का यह ‘नंबर गेम’ आने वाले दिनों में राजद के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है।

  • ब्रह्मा जी के आंसुओं से बना दिव्य फूल: ब्रह्म ऊर्जा और धन का स्रोत, जानें सही दिशा और नियम

    ब्रह्मा जी के आंसुओं से बना दिव्य फूल: ब्रह्म ऊर्जा और धन का स्रोत, जानें सही दिशा और नियम

    नई दिल्ली। कल्पना कीजिए एक ऐसे फूल की, जो साल में सिर्फ एक बार खिले, वह भी आधी रात को… और सुबह होते ही मुरझा जाए। यही अद्भुत विशेषता ब्रह्म कमल को सामान्य फूलों से अलग बनाती है। हिमालय की ऊंचाइयों में पाया जाने वाला यह दुर्लभ पुष्प न केवल अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता भी बहुत गहरी है। मान्यता है कि यह फूल घर में हो तो सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वातावरण पवित्र बना रहता है।

     आस्था और पौराणिक महत्व से जुड़ा फूल

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा का संबंध कमल से है और इसी कारण ब्रह्म कमल को अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह फूल भगवान शिव, भगवान विष्णु और नंदा देवी को भी प्रिय बताया गया है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध धाम केदारनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर में इसे प्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता है।

    ऐसी मान्यता है कि ब्रह्म कमल के दर्शन मात्र से व्यक्ति की एक मनोकामना अवश्य पूरी होती है। यही वजह है कि इसे शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

     घर में ब्रह्म कमल लगाने के चमत्कारी लाभ

    ब्रह्म कमल को घर में लगाना आसान नहीं होता, लेकिन जहां यह स्थापित हो जाता है, वहां कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

    घर का वातावरण शुद्ध और शांत रहता है
    नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
    मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है
    परिवार में सामंजस्य और आध्यात्मिक उन्नति होती है
    धन और समृद्धि के योग मजबूत होते हैं
    धार्मिक मान्यता के अनुसार यह फूल चंद्र ऊर्जा से जुड़ा होता है, जिससे घर के लोगों का मन शांत और संतुलित रहता है।

    वास्तु और ज्योतिष के अनुसार महत्व

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, ब्रह्म कमल को सही दिशा में रखने से घर में सुख-समृद्धि आती है। ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना गया है। यहां रखने से घर की नकारात्मकता खत्म होती है और धन के रास्ते खुलते हैं।
    ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह फूल बेहद खास है। माना जाता है कि इसके घर में होने से ग्रह दोष, खासकर चंद्र और शनि से जुड़े दोष कम होते हैं और जीवन में उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

    ब्रह्म कमल लगाने की सही दिशा और नियम

    ब्रह्म कमल की ऊर्जा का पूरा लाभ लेने के लिए इसे सही स्थान पर लगाना जरूरी है—

    घर का केंद्र (ब्रह्म स्थान) सबसे उत्तम माना गया है
    उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में रखना शुभ होता है
    पूजा घर या ध्यान स्थल के पास रखना लाभकारी है
    पूर्व दिशा में लगाने से नए अवसर और सफलता मिलती है

    वहीं, इसे दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे बाधाएं और आर्थिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।

    देखभाल से जुड़े जरूरी नियम
    ब्रह्म कमल ठंडे और छायादार वातावरण में ही पनपता है
    तेज धूप से इसे बचाना चाहिए
    पौधे को साफ-सुथरी जगह पर रखें
    नियमित रूप से हल्का पानी देना जरूरी है