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  • 2026-27 के बजट प्रस्तावों में हर वर्ग के विकास पर फोकस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, 18 फरवरी को विधानसभा में पेश होगा बजट

    2026-27 के बजट प्रस्तावों में हर वर्ग के विकास पर फोकस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, 18 फरवरी को विधानसभा में पेश होगा बजट


    भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में राज्य के सभी क्षेत्रों और समाज के हर वर्ग के विकास तथा कल्याण का विशेष ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री ने बजट प्रस्तावों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप और संतुलित बताते हुए उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा के दृष्टिकोण की सराहना की।

    मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बजट निर्माण में लगे विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के परिश्रम की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि यह प्रदेश के विकास की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई अपर मुख्य सचिव (वित्त) श्री मनीष रस्तोगी सहित वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रेजेंटेशन के दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं विकास कार्यों सामाजिक कल्याण अधोसंरचना शिक्षा स्वास्थ्य कृषि और रोजगार से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। बजट में गरीब किसान महिला युवा और श्रमिक वर्ग के हितों को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही औद्योगिक विकास निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने वाले प्रस्तावों को भी इसमें शामिल किया गया है।

    मुख्यमंत्री के समक्ष प्रेजेंटेशन के बाद मंत्रि-परिषद के समक्ष भी बजट प्रस्तावों का प्रस्तुतीकरण किया गया जिसे कैबिनेट ने अनुमोदित कर दिया है। मंत्रि-परिषद से मंजूरी मिलने के बाद अब यह बजट 18 फरवरी को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

    सरकार का दावा है कि यह बजट विकासोन्मुख होने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन को भी ध्यान में रखेगा। इसमें राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने आधारभूत ढांचे के विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देने पर जोर रहेगा।

    प्रदेश सरकार के इस बजट को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि 2026-27 का बजट मध्य प्रदेश के विकास को नई दिशा देगा और राज्य को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

  • BSE के Q3 नतीजों ने मचाया धमाल शेयर ने बनाया नया रिकॉर्ड..

    BSE के Q3 नतीजों ने मचाया धमाल शेयर ने बनाया नया रिकॉर्ड..


    नई दिल्ली । बीएसई के शेयरों ने तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद बाजार में जबरदस्त हलचल मचा दी है। एक्सपायरी डेट सितंबर 2025 में बदले जाने के बावजूद वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही बीएसई के लिए बेहद मजबूत साबित हुई है। शानदार ट्रेडिंग आंकड़ों और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के चलते कई ब्रोकरेज हाउस ने अपने टारगेट प्राइस बढ़ा दिए हैं। इसी का असर रहा कि आज शुरुआती कारोबार में बीएसई के शेयरों में छह फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली।

    कारोबार के दौरान बीएसई का शेयर 6.81 फीसदी की उछाल के साथ 3188.40 रुपये के रिकॉर्ड हाई स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली की जिससे भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन इसके बावजूद शेयर मजबूत स्थिति में बना हुआ है। फिलहाल बीएसई का शेयर 6.25 फीसदी की तेजी के साथ 3171.60 रुपये पर कारोबार कर रहा है।

    एनालिस्ट्स की राय भी बीएसई के पक्ष में दिखाई दे रही है। इसे कवर करने वाले 16 एनालिस्ट्स में से 12 ने शेयर पर खरीद की सलाह दी है जबकि चार ने होल्ड रेटिंग दी है। खास बात यह है कि किसी भी एनालिस्ट ने शेयर बेचने की सिफारिश नहीं की है। यूबीएस जेफरीज और नुवामा जैसी बड़ी ब्रोकरेज फर्मों ने बीएसई के टारगेट प्राइस में इजाफा किया है।

    दिसंबर 2025 की तिमाही बीएसई के लिए काफी दमदार रही है। तिमाही आधार पर कंपनी का टर्नओवर 30 फीसदी बढ़ा है। औसत दैनिक नोशनल टर्नओवर 28 फीसदी की वृद्धि के साथ 210 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जबकि औसत दैनिक प्रीमियम टर्नओवर 29.7 फीसदी बढ़कर 19459 करोड़ रुपये हो गया। एक्सचेंज के ट्रांजैक्शन चार्ज से होने वाली आय के चलते रेवेन्यू परफॉर्मेंस बाजार की उम्मीदों से बेहतर रही।

    बीएसई की ऑपरेटिंग इनकम तिमाही आधार पर 16 फीसदी बढ़कर 1244 करोड़ रुपये हो गई है जबकि ऑपरेटिंग प्रॉफिट 13 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 778 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि रेगुलेटरी कंट्रीब्यूशन बढ़ने से मार्जिन पर थोड़ा दबाव जरूर देखने को मिला है। रेगुलेटरी कंट्रीब्यूशन तिमाही आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 187 करोड़ रुपये हो गया जिससे मार्जिन 64.7 फीसदी से घटकर 62.5 फीसदी पर आ गया।

    ब्रोकरेज सेंटिमेंट की बात करें तो यूबीएस ने बीएसई पर बाय रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3650 रुपये कर दिया है। यूबीएस का कहना है कि ज्यादा लागत के चलते कंपनी अपने प्रॉफिट टारगेट से थोड़ी चूकी जरूर है लेकिन शेयर प्राइस में मजबूती रेवेन्यू ग्रोथ और प्रीमियम एवरेज डेली टर्नओवर की मजबूती इसे सपोर्ट कर रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एसटीटी रेट बढ़ने का ऑप्शन वॉल्यूम पर असर पहले की आशंका से कम हो सकता है।

    जेफरीज ने बीएसई को होल्ड रेटिंग दी है लेकिन टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3050 रुपये कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि 610 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट उम्मीद से बेहतर रहा है। हालांकि नए प्रोडक्ट्स को लेकर अनिश्चितता FY2029 के बाद ग्रोथ के लिए चुनौती बन सकती है।

    नुवामा ने बीएसई पर बाय रेटिंग देते हुए टारगेट प्राइस 3760 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज के मुताबिक एक्सपायरी डेट बदलने के बावजूद बीएसई ने इंडेक्स ऑप्शंस में मजबूत मार्केट शेयर हासिल किया है जिससे रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में तेज उछाल देखने को मिला है। कुल मिलाकर मजबूत नतीजों और सकारात्मक ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के चलते बीएसई का शेयर आने वाले समय में निवेशकों के रडार पर बना रह सकता है।

  • भोपाल की सड़कों पर मौत से खेल: चलती बाइक पर खड़े होकर नाबालिग का खतरनाक स्टंट, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    भोपाल की सड़कों पर मौत से खेल: चलती बाइक पर खड़े होकर नाबालिग का खतरनाक स्टंट, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप


    भोपाल। राजधानी भोपाल की सड़कों पर यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ताजा मामला एक ऐसे वायरल वीडियो का है, जिसने आम लोगों से लेकर प्रशासन तक को चौंका दिया है। इस वीडियो में वीआईपी चौराहे से इकबाल मैदान की ओर जाती सड़क पर एक नाबालिग बच्चा चलती दोपहिया गाड़ी पर खड़े होकर जानलेवा स्टंट करता नजर आ रहा है।

    वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बाइक पर पीछे बैठा बच्चा सीट पर खड़ा है और संतुलन बनाते हुए खतरनाक करतब दिखा रहा है, जबकि बाइक चालक पूरी तरह बेफिक्र होकर वाहन चला रहा है। सड़क पर अन्य वाहन भी चल रहे हैं और जरा सी चूक किसी बड़े हादसे में बदल सकती थी। यह दृश्य न सिर्फ डराने वाला है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    यह मामला मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। नाबालिग को इस तरह खुलेआम स्टंट करने देना उसकी जान से खिलवाड़ है, साथ ही यह अन्य वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है। नियमों के अनुसार, दोपहिया वाहन पर इस तरह का स्टंट और नाबालिग की सुरक्षा से समझौता करना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं।

    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। कई यूजर्स ने ट्रैफिक पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि सिर्फ चालान काटना ही काफी नहीं, बल्कि ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की लापरवाही न करे।

    गौरतलब है कि भोपाल में पिछले कुछ समय से इस तरह के स्टंट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कुछ दिन पहले वीआईपी रोड पर एक बाइक पर सात लोग सवार होकर स्टंट करते पाए गए थे। इसके बावजूद ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।

    अब सवाल यह उठता है कि क्या ट्रैफिक पुलिस इस वायरल वीडियो के आधार पर वाहन चालक की पहचान कर पाएगी और क्या नाबालिग को खतरे में डालने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई होगी। राजधानी की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन को अब सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि ऐसे जानलेवा स्टंट पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

  • रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का अर्धनग्न प्रदर्शन जारी

    रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का अर्धनग्न प्रदर्शन जारी


    भोपाल /मध्यप्रदेश में चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है राजधानी भोपाल में दूसरे दिन भी चयनित अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर डटे रहे और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए मुंडन कराकर विरोध दर्ज कराया भावी शिक्षकों का कहना है कि वे चयनित होने के बावजूद नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं जबकि प्रदेश में हजारों शिक्षक पद आज भी खाली पड़े हैं

    सोमवार को अभ्यर्थियों ने पैदल मार्च निकालते हुए लोक शिक्षण संचालनालय का घेराव किया था इसके बाद मंगलवार को आंदोलन और उग्र रूप में सामने आया जब भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने मुंडन कराकर अपना आक्रोश जताया कई अभ्यर्थी अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शन करते नजर आए उनका कहना है कि यह आंदोलन सम्मान और रोजगार के लिए हैप्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रदेश में हजारों शिक्षक पद रिक्त होने के बावजूद सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में सीटों की संख्या कम कर दी गई है उनका कहना है कि शिक्षक भर्ती परीक्षाएं ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं वर्तमान में केवल 13 हजार पदों पर भर्ती निकाली गई है जबकि आवश्यकता कहीं अधिक है

    अभ्यर्थियों के अनुसार माध्यमिक शिक्षकों के करीब 10 हजार पद रिक्त हैं जबकि प्राथमिक शिक्षकों के लगभग 3 हजार पद खाली हैं इसके बावजूद सरकार ने केवल सीमित संख्या में ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की है चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं फिर भी नियुक्ति नहीं मिलने से उनका भविष्य अंधकार में है

    प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि शिक्षक भर्ती की संख्या बढ़ाकर कम से कम 25 हजार पदों पर नियुक्ति की जाए इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया का दूसरा चरण भी जल्द शुरू किया जाए ताकि रिक्त पदों को भरा जा सके उनका कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है

    भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की है

    राजधानी भोपाल में चल रहे इस प्रदर्शन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला हैचयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का यह आंदोलन अब प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है मुंडन और अर्धनग्न प्रदर्शन के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं जब तक रिक्त पदों पर भर्ती नहीं होती और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा

  • राजधानी की हरियाली पर स्लो प्वाइजन हमला: पेड़ काटे नहीं जा रहे, जहर देकर सुखाए जा रहे भोपाल की ग्रीनरी खतरे में

    राजधानी की हरियाली पर स्लो प्वाइजन हमला: पेड़ काटे नहीं जा रहे, जहर देकर सुखाए जा रहे भोपाल की ग्रीनरी खतरे में


    भोपाल। राजधानी भोपाल की पहचान मानी जाने वाली हरियाली पर अब खुलकर बुरी नजर लग चुकी है। विकास के नाम पर पहले ही लाखों पेड़ काटे जा चुके हैं और अब पेड़ों को खत्म करने का एक नया और खतरनाक तरीका सामने आया है। पेड़ काटने के बजाय उन्हें स्लो प्वाइजन देकर सुखाया जा रहा है, ताकि कटाई की अनुमति लेने की जरूरत ही न पड़े।

    राजधानी के सबसे अधिक ग्रीन कवर वाले इलाकों में शामिल प्रोफेसर कॉलोनी में यह गंभीर मामला सामने आया है। यहां वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों में छेद करके केमिकल भरा गया है और ऊपर से मिट्टी लगा दी गई है। इसका असर यह हो रहा है कि पेड़ खड़े-खड़े सूख रहे हैं। कई पेड़ पहले ही सूख चुके हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह कोई पहला मामला नहीं है। अब बारी उन पेड़ों की है, जो अभी हरे हैं और लोगों को ऑक्सीजन व फल दोनों दे रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका बेहद खतरनाक है, क्योंकि इससे न तो पेड़ काटने की अनुमति लेनी पड़ती है और न ही तत्काल कार्रवाई का शक होता है। धीरे-धीरे पेड़ सूख जाते हैं और फिर उन्हें काट दिया जाता है।

    एनजीटी की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में भोपाल में 6 लाख से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। वर्ष 2016 की तुलना में राजधानी का ग्रीन कवर तेजी से घटा है। मेट्रो प्रोजेक्ट, स्मार्ट सिटी, सड़क चौड़ीकरण, वीवीआईपी बंगलों के पुनर्विकास और खनन परियोजनाओं के कारण हजारों पेड़ों की बलि दी गई है। रिपोर्ट बताती है कि शहर का ग्रीन कवर 22 से 26 प्रतिशत तक घट चुका है, जिससे तापमान और प्रदूषण दोनों में इजाफा हुआ है।

    इस मामले पर महापौर मालती राय ने कहा है कि मामला संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और हरियाली को नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। वहीं कांग्रेस ने भी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    पर्यावरण विशेषज्ञ नूर राशिद खान का कहना है कि यह सीधा कानूनी अपराध है। हरे-भरे पेड़ों को जहर देकर मारना अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि यह इलाका रामसर साइट से भी जुड़ा हुआ है, जहां बिना अनुमति निर्माण और इस तरह की गतिविधियां पूरी तरह गैरकानूनी हैं।

    कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने सवाल उठाया कि नगर निगम आखिर क्या कर रहा है। जिन जगहों पर पेड़ों में सुराख कर जहर डाला गया है, वहां निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब भोपाल में पेड़ सिर्फ नाम के रह जाएंगे। हरियाली बचेगी तभी शहर की हवा साफ रहेगी, वरना भोपाल भी सिंगरौली जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकता है।

  • प्री वैलेंटाइन पर जेल का गिफ्ट इंदौर में पत्नी ने पति को पहुंचाया सलाखों के पीछे

    प्री वैलेंटाइन पर जेल का गिफ्ट इंदौर में पत्नी ने पति को पहुंचाया सलाखों के पीछे


    मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आया यह मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि समाज और सिस्टम दोनों को आईना दिखाने वाला भी है। यहां एक महिला ने रिश्तों से ऊपर कानून को रखते हुए अपने ही पति के खिलाफ ड्रग्स कारोबार की शिकायत कर उसे जेल भिजवा दिया। यह घटना साबित करती है कि जब एक महिला ठान ले तो गलत के खिलाफ सबसे पहले वही खड़ी होती है चाहे सामने उसका अपना पति ही क्यों न हो।

    मल्हारगंज क्षेत्र में रहने वाली एक अकाउंटेंट महिला ने पुलिस कमिश्नर इंदौर को शिकायत दी थी जिसमें उसने बताया कि उसका पति लंबे समय से गांजा और पाउडरनुमा ड्रग्स का अवैध कारोबार कर रहा है। आरोप है कि आरोपी ने अपने ही घर को ड्रग्स का गोदाम बना रखा था और महालक्ष्मी नगर स्थित एक पान दुकान के जरिए कॉलेज और हॉस्टल की लड़कियों तक नशा सप्लाई करता था। महिला का कहना है कि घर में दो नाबालिग बेटियां भी रहती हैं और इस गंदे धंधे का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा था।

    महिला ने बताया कि जब उसने इस अवैध कारोबार का विरोध किया तो पति और ससुराल पक्ष ने उसे चुप रहने की धमकी दी। चार फरवरी को तो मामला इस हद तक पहुंच गया कि पति ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की जिससे उसकी आंख के ऊपर गंभीर चोट आई और सात से आठ टांके लगाने पड़े। इसके बाद महिला ने हिम्मत जुटाकर पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

    पीड़िता ने सबसे पहले मल्हारगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस घर तक पहुंची लेकिन आरोप है कि सामने रखे गांजा और ड्रग्स के बावजूद न तो कोई जब्ती की गई और न ही एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई हुई। इस कथित ढिलाई के बाद महिला को लगा कि स्थानीय स्तर पर उसे न्याय नहीं मिलेगा।

    इसके बाद महिला ने सोशल मीडिया पर चल रही नशामुक्ति मुहिम से प्रेरणा ली और नौ फरवरी को पति के घर से बाहर जाने के बाद घर में रखे ड्रग्स का वीडियो बना लिया। उसने यह वीडियो और पूरी शिकायत सीधे पुलिस कमिश्नर इंदौर कार्यालय को भेज दी। शिकायत मिलते ही कमिश्नर कार्यालय हरकत में आया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    कमिश्नर के आदेश पर विजय नगर जोन के माध्यम से लसूड़िया थाना पुलिस ने मल्हारगंज थाना क्षेत्र में ही दबिश दी। देर रात हुई कार्रवाई में घर से भारी मात्रा में गांजा और ड्रग्स की पुड़िया बरामद की गई और आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई के बाद मल्हारगंज थाने की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    पीड़िता के वकील कृष्ण कुमार कुन्हारे का कहना है कि महिला ने पत्नी धर्म से ऊपर कानून को रखा है जिससे कई युवाओं की जिंदगी नशे में बर्बाद होने से बच सकती है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ रूपाली राठौर ने बताया कि महिला पूरे सबूतों के साथ उनके पास पहुंची थी और शिकायत सीधे कमिश्नर तक पहुंचाने में मदद की गई जिस पर तुरंत कार्रवाई हुई।

    यह मामला केवल एक गिरफ्तारी की कहानी नहीं है बल्कि सिस्टम के दो चेहरों को भी उजागर करता है। एक तरफ वह प्रशासन जो शिकायत मिलते ही सक्रिय हुआ और दूसरी तरफ वह स्थानीय थाना जो सब कुछ सामने होने के बावजूद चुप बैठा रहा। इस पूरी कहानी की सबसे मजबूत कड़ी वह मां है जिसने अपने बच्चों और शहर को नशे से बचाने के लिए अपने ही पति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

  • लापरवाही से गई जान: बैतूल में पानी की टंकी से गिरकर मजदूर की मौत, बिना सुरक्षा काम करवा रहा था ठेकेदार

    लापरवाही से गई जान: बैतूल में पानी की टंकी से गिरकर मजदूर की मौत, बिना सुरक्षा काम करवा रहा था ठेकेदार


    बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां सरकारी योजना के तहत बन रही पानी की टंकी एक मजदूर की मौत का कारण बन गई। यह हादसा न सिर्फ एक व्यक्ति की जान जाने का मामला है, बल्कि सिस्टम और ठेकेदारी व्यवस्था की भारी लापरवाही को भी उजागर करता है।

    बैतूल जिले की बडोरा ग्राम पंचायत में जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन पानी की टंकी से गिरकर एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान मुकेश सिरसाम, निवासी हमलापुर के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, मुकेश करीब 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर पुताई का काम कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि वह बिना सेफ्टी बेल्ट, बिना हेलमेट और बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम कर रहा था।

    काम के दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह ऊंचाई से नीचे गिर पड़ा। हादसे में उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे तुरंत जिला अस्पताल बैतूल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    नियम साफ कहते हैं कि ऊंचाई पर काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा उपकरण अनिवार्य हैं। इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के मजदूर से काम करवाया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या जल जीवन मिशन के नाम पर मजदूरों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है? क्या ठेकेदार खुद को कानून से ऊपर समझ रहे हैं?

    बताया जा रहा है कि यह पानी की टंकी पीएचई लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत ठेकेदार के माध्यम से बनाई जा रही थी। हैरानी की बात यह है कि हादसे के बाद न तो ठेकेदार सामने आया है और न ही पीएचई विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। मृतक मजदूर के परिजनों को अब तक किसी तरह की आर्थिक सहायता या राहत की घोषणा भी नहीं की गई है।

    मुकेश सिरसाम की मौत सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह उस लापरवाह सिस्टम का नतीजा है, जिसमें गरीब मजदूरों की जान की कीमत कुछ भी नहीं मानी जाती। सवाल यह भी है कि क्या इस मामले में जिम्मेदार ठेकेदार पर कार्रवाई होगी, क्या पीएचई विभाग अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करेगा या फिर यह मामला भी अन्य हादसों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा। स्थानीय लोगों में घटना को लेकर आक्रोश है और वे दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है।

  • 20 साल मंत्री रहे गोपाल भार्गव ने छलका दर्द, बोले- दिग्विजय ने कांग्रेस में आने का ऑफर दिया था

    20 साल मंत्री रहे गोपाल भार्गव ने छलका दर्द, बोले- दिग्विजय ने कांग्रेस में आने का ऑफर दिया था


    सागर: बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पिछले 40 वर्षों से विधायक रहे गोपाल भार्गव ने मोहन कैबिनेट में जगह न मिलने का अपना दर्द सार्वजनिक रूप से साझा किया। सागर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्ष और अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद अपेक्षित सम्मान न मिलना गहरा दुख देता है।

    गोपाल भार्गव ने बताया कि उन्होंने 20 साल तक लगातार मंत्री पदों पर रहते हुए कठिन परिस्थितियों का सामना किया, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी नहीं टिक पाते। उन्होंने कहा, राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। अगर किसी व्यक्ति की बात सरकार नहीं सुनती, तो उसका मन टूट जाता है।

    कार्यक्रम में उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उन्हें एक बार कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए भार्गव ने कहा, मैंने साफ कह दिया था कि यह माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने हमेशा सिद्धांतों की राजनीति की है और किसी भी प्रकार के राजनीतिक सौदे से खुद को दूर रखा।

    गोपाल भार्गव ने संकेत दिया कि लंबे समय तक पार्टी को समर्पित रहने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिलना उनकी पीड़ा का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा, मैंने पार्टी को जीवन दिया है, और यह सीधे तौर पर मंत्री नहीं बनाए जाने की पीड़ा की ओर इशारा करता है।उल्लेखनीय है कि गोपाल भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा से लगातार नौ बार विधायक चुने गए हैं। वे भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और पूर्व में लोक निर्माण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं।

    इससे पहले दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा था, हर जगह सिर्फ ब्राह्मणों को ही टारगेट किया जा रहा है। इस बयान ने प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी। उनके हालिया बयान और मंत्री न बनने की पीड़ा भविष्य में पार्टी और प्रदेश की राजनीति पर क्या असर डालेगी, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी।

    गोपाल भार्गव की यह खुलकर कही गई भावनाएं वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और पार्टी में वरिष्ठता के महत्व को भी उजागर करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में स्थायित्व, सेवा और नैतिकता उनके लिए हमेशा प्राथमिकता रही है, और कोई भी पद उनके सिद्धांतों से ऊपर नहीं है।सागर और प्रदेश के राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भार्गव के बयान आने वाले दिनों में पार्टी के अंदर और समाज में हलचल पैदा कर सकते हैं। वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाएं, सम्मान और उनके अनुभव को अगर नजरअंदाज किया गया, तो राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है

  • पचमढ़ी चौरागढ़ मेला प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था में भक्तों की आस्था का जीवंत दर्शन

    पचमढ़ी चौरागढ़ मेला प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था में भक्तों की आस्था का जीवंत दर्शन


    सतपुड़ा की पहाड़ियों में स्थित पचमढ़ी इन दिनों भक्ति और श्रद्धा से सराबोर नजर आ रहा है महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित चौरागढ़ मेला पूरे जोश के साथ चल रहा है चारों ओर हर-हर महादेव के जयघोष ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तों की आस्था से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया है भगवान शिव के दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर चौरागढ़ शिखर तक पहुंच रहे हैं

    कठिन और पथरीली चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालु अपने कंधों पर भारी त्रिशूल उठाकर मंदिर तक जाते हैं मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर त्रिशूल चढ़ाया जाता है इसी कारण दिनभर नहीं बल्कि देर रात तक भी भक्तों की कतार शिखर मंदिर तक बनी रहती है भक्त नाचते गाते जयकारे लगाते हुए भोलेनाथ के दर्शन कर रहे हैं पहाड़ी की ठंडी हवा और थकान भी आस्था के आगे कमजोर साबित हो रही है

    मेले में भारी भीड़ के बीच अपनों से बिछड़ने वालों के लिए प्रशासन द्वारा बनाया गया खोया-पाया केंद्र काफी कारगर साबित हो रहा है पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए लगातार घोषणाएं की जा रही हैं हाल ही में सिवनी जिले का आठ वर्षीय बालक शौर्य नायक भीड़ में खो गया था जिसे कंट्रोल रूम की सतर्कता से ढूंढकर परिजनों को सौंपा गया इसी तरह छिंदवाड़ा निवासी आशा राठौर को भी उनके भाई से मिलवाया गया

    कलेक्टर सोनिया मीणा के निर्देश पर मेला व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन और एसडीएम आकिब खान स्वयं पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पल-पल की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दे रही हैं सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है

    मेले में सुरक्षा के लिए पुलिस बल चौबीस घंटे तैनात है परिवहन विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि श्रद्धालुओं से अतिरिक्त किराया न वसूला जाए वहीं स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने के लिए सफाई मित्र सुबह से सक्रिय रहते हैं शौचालयों की नियमित सफाई कचरा प्रबंधन और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव से स्वच्छ वातावरण बनाए रखा जा रहा है

    पचमढ़ी का चौरागढ़ मेला न केवल धार्मिक आयोजन है बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी आस्था की जीत का जीवंत उदाहरण बन गया है त्रिशूल लेकर शिखर तक पहुंचते भक्त प्रशासन की सजग व्यवस्था सुरक्षा और स्वच्छता का अनुभव कर आस्था और विश्वास से परिपूर्ण हो रहे हैं इस मेला ने यह दिखा दिया है कि कठिन मार्ग और भारी भीड़ के बीच भी श्रद्धा कभी कमजोर नहीं होती है

  • बालाघाट में कृषि कैबिनेट, तलाकशुदा पुत्री को भी मिलेगी पेंशन ,डॉ. मोहन सरकार के बड़े फैसले, 18 फरवरी को पेश होगा बजट

    बालाघाट में कृषि कैबिनेट, तलाकशुदा पुत्री को भी मिलेगी पेंशन ,डॉ. मोहन सरकार के बड़े फैसले, 18 फरवरी को पेश होगा बजट


    भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने एक के बाद एक कई बड़े और अहम फैसले लिए हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सामाजिक, कृषि, सांस्कृतिक और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक की शुरुआत वंदेमातरम गान के साथ हुई। कैबिनेट मंत्री चेतन कश्यप ने फैसलों की जानकारी मीडिया को दी।

    कैबिनेट में तय किया गया कि बालाघाट जिले में कृषि कैबिनेट का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही तारीख तय की जाएगी। मंत्री चेतन कश्यप ने बताया कि बालाघाट के नक्सल मुक्त होने के बाद यह निर्णय लिया गया है। यहां होने वाली कृषि कैबिनेट में जिले के समग्र विकास, कृषि, किसानों और स्थानीय जरूरतों को लेकर अहम फैसले लिए जाएंगे।

    प्रदेश सरकार ने जू में रेस्क्यू सेंटर बनाने का भी बड़ा निर्णय लिया है। इस रेस्क्यू सेंटर में घायल और बीमार वन्य जीवों का इलाज किया जाएगा। इससे वन्य जीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी और समय पर उपचार संभव हो सकेगा। सामाजिक स्तर पर एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए डॉ. मोहन यादव सरकार ने तलाकशुदा पुत्री को भी पेंशन देने का निर्णय लिया है। मंत्री चेतन कश्यप ने बताया कि यह प्रावधान पहली बार किया गया है। इसके तहत पारिवारिक पेंशन में विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही 2005 की नई पेंशन योजना को लेकर भी निर्णय लिया गया है, जिसके अंतर्गत 2026 में नए नियम बनाए गए हैं।

    संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 19 मार्च को गुड़ी पड़वा पर्व सरकारी स्तर पर मनाने का फैसला लिया है। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को नई पहचान मिलेगी।विकास योजनाओं की बात करें तो धरती आवा कार्यक्रम के तहत 63 हजार आदिवासी घरों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए 366 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी।

    कैबिनेट ब्रीफिंग में यह भी जानकारी दी गई कि 18 फरवरी को विधानसभा में बजट पेश किया जाएगा। यह बजट संतुलित और विकासोन्मुख होगा। इसके अलावा स्वास्थ्य क्षेत्र में भी प्रदेश ने उपलब्धि हासिल की है। नेशनल हेल्थ इंडेक्स में मध्य प्रदेश ने बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 हो गई है, जिसे सरकार ने बड़ी सफलता बताया है।कुल मिलाकर डॉ. मोहन यादव सरकार के ये फैसले सामाजिक सुरक्षा, सांस्कृतिक सम्मान, विकास और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।