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शाहरुख-काजोल से शुरू हुआ कॉफी विद करण का सफर, गोविंदा को नहीं मिला न्योता तो रेखा को बुलाने से क्यों झिझके करण
नई दिल्ली। करण जौहर का चर्चित टॉक शो कॉफी विद करण एक बार फिर मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। फिल्मी सितारों की निजी जिंदगी से जुड़े सवालों उनके रिश्तों और करियर के अनसुने किस्सों के साथ इस शो ने टेलीविजन की दुनिया में अलग पहचान बनाई है। शो में कई बड़े कलाकार अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं लेकिन कुछ ऐसे चर्चित सितारे भी हैं जो कभी इसके मेहमान नहीं बने। गोविंदा से लेकर रेखा और श्रीदेवी तक कई नाम ऐसे हैं जिनकी गैरमौजूदगी को लेकर दर्शकों के मन में सवाल उठते रहे हैं। इस बीच शो की शुरुआत से जुड़ी कहानी भी काफी दिलचस्प है।कॉफी विद करण शुरू करने का विचार करण जौहर के मन में उस समय आया जब सेलिब्रिटी इंटरव्यू का अंदाज काफी औपचारिक हुआ करता था। करण चाहते थे कि सितारों से बातचीत का तरीका थोड़ा अलग हो और दर्शकों को उनके व्यक्तित्व का एक नया पहलू देखने को मिले। उनका विचार था कि दो फिल्मी सितारों को एक साथ बैठाकर उनसे दोस्ती रिश्तों और फिल्मी करियर से जुड़े दिलचस्प सवाल पूछे जाएं। इस तरह दर्शकों को मनोरंजन के साथ सितारों की जिंदगी के ऐसे किस्से जानने का मौका मिल सकता था जो आमतौर पर सामने नहीं आते।बताया जाता है कि जून 2004 में करण ने अपने पिता और मशहूर फिल्म निर्माता यश जौहर के सामने इस शो का विचार रखा था। शुरुआत में उनके पिता इस प्रस्ताव को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में सवाल किया था कि जब करण अपने दोस्तों से पहले ही बातचीत करते हैं तो उसी बातचीत के लिए कोई पैसे क्यों देगा। इसके बावजूद करण ने अपने विचार पर काम जारी रखा। इसी दौरान 26 जून 2004 को यश जौहर का निधन हो गया। पिता को खोने के दुख के बीच भी करण ने अपने सपने को पूरा करने का फैसला किया।करण ने 16 अगस्त 2004 को शो की शूटिंग शुरू की और 19 नवंबर 2004 को इसका पहला एपिसोड स्टार वर्ल्ड इंडिया पर प्रसारित हुआ। पहले एपिसोड में शाहरुख खान और काजोल मेहमान बनकर पहुंचे थे। दोनों की दोस्ती और बेबाक बातचीत ने शो को खास शुरुआत दी। इसके बाद रैपिड फायर राउंड शो की पहचान बन गया। इस दौर में सितारों से तेजी से सवाल पूछे जाते थे और उनके जवाब कई बार मनोरंजक होने के साथ चर्चा और विवाद की वजह भी बन जाते थे।शो में शामिल नहीं होने वाले सितारों की बात करें तो गोविंदा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है। खबरों के मुताबिक गोविंदा ने एक बार नाराजगी जताई थी कि उन्हें शो में आमंत्रित नहीं किया गया। बाद में करण जौहर ने उनसे माफी भी मांगी थी। वहीं रेखा को लेकर करण ने कहा था कि वह उनके रहस्यमयी व्यक्तित्व को बरकरार रखना चाहते हैं और उन्हें शो में बुलाने को लेकर झिझकते रहे। इससे रेखा की गैरमौजूदगी के पीछे की वजह को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई।दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी भी कभी इस शो में मेहमान बनकर नहीं आईं। करण जौहर उनके प्रशंसक रहे हैं लेकिन उनका शो में शामिल होना संभव नहीं हो पाया। इसी तरह अभिनेता इरफान खान और नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी इस कार्यक्रम में नजर नहीं आए। फिल्म निर्माता आदित्य चोपड़ा को लेकर भी करण जौहर कह चुके हैं कि उन्हें शो में आमंत्रित करने की हिम्मत नहीं हुई। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी इस शो का हिस्सा नहीं बने। हालांकि इन सभी कलाकारों के शो में न आने के पीछे एक जैसी वजह नहीं थी और हर मामले में व्यक्तिगत कारणों या आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा।कॉफी विद करण ने मनोरंजन के साथ विवादों के कारण भी सुर्खियां बटोरी हैं। शो में क्रिकेटर हार्दिक पंड्या और केएल राहुल की टिप्पणी के बाद बड़ा विवाद हुआ था और दोनों को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इस घटना ने दिखाया कि मनोरंजन के मंच पर कही गई बातें भी व्यापक सार्वजनिक बहस का रूप ले सकती हैं। यही बेबाक अंदाज शो को लोकप्रिय बनाने के साथ विवादों में भी रखता आया है। करण जौहर का यह कार्यक्रम फिल्मी सितारों की दुनिया को करीब से देखने का मंच बना और इसकी शुरुआत से लेकर मेहमानों की सूची तक आज भी दर्शकों की दिलचस्पी का विषय बनी हुई है। -

50 राज्य और हजारों काउंटी, क्या अमेरिकी चुनाव में धांधली करना वाकई असंभव है, जानिए पेपर ट्रेल का सुरक्षा कवच
नई दिल्ली। अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच निष्पक्ष मतदान और वोटों की सुरक्षा पर बहस छिड़ी हुई है। आशंकाएं जताई जा रही हैं कि क्या मौजूदा राजनीतिक माहौल में अमेरिकी चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित रह पाएंगे। इस सवाल पर द न्यूयॉर्क टाइम्स ने चुनाव कानून प्रशासन और राजनीतिक रणनीतियों से जुड़े आठ विशेषज्ञों से चर्चा की। विशेषज्ञों की राय के मुताबिक अमेरिकी चुनाव व्यवस्था में कई ऐसे सुरक्षा उपाय मौजूद हैं जो बड़े स्तर पर चुनावी धांधली करना बेहद कठिन बनाते हैं। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका पूरी तरह समाप्त हो जाती है।विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की चुनाव प्रणाली का विकेंद्रीकरण उसकी सबसे बड़ी ताकत है। वहां चुनाव कराने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्यों और स्थानीय काउंटी प्रशासन के पास होती है। राष्ट्रपति या संघीय सरकार सीधे तौर पर पूरे देश की चुनाव प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में नहीं ले सकती। अमेरिका के 50 राज्यों और हजारों स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों में मतदान की व्यवस्था संचालित होती है। ऐसे में किसी एक केंद्रीय स्तर से पूरी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करना आसान नहीं है। चुनाव अधिकारियों की भूमिका और स्थानीय स्तर पर निगरानी भी मतगणना की विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।चर्चा में शामिल विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि चुनावी व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और वास्तविक प्रशासनिक अधिकारों के बीच अंतर समझना जरूरी है। विशेषज्ञ बॉब बाउर के अनुसार राष्ट्रपति के अधिकारों को लेकर कई बार बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए जाते हैं। वहीं बेन गिंसबर्ग का कहना है कि राष्ट्रपति के पास सीधे चुनाव संचालित करने की शक्ति नहीं है लेकिन उनके बयान जनता के बीच संदेह और अविश्वास जरूर पैदा कर सकते हैं। कानून के प्रोफेसर डेरेक मुलर के मुताबिक इतनी बड़ी और विकेंद्रीकृत व्यवस्था को एकतरफा तरीके से बदल पाना बेहद मुश्किल है। विशेषज्ञों ने इस बात पर भरोसा जताया कि चुनाव अधिकारी मतदाताओं के वोटों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।अमेरिकी चुनावों में पेपर ट्रेल यानी मतदान का सत्यापन योग्य रिकॉर्ड भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। जहां मतपत्रों का कागजी रिकॉर्ड उपलब्ध होता है वहां जरूरत पड़ने पर मशीनों से मिले नतीजों की दोबारा जांच की जा सकती है। ऑडिट और पुनर्गणना की प्रक्रिया से मतगणना में संभावित गलतियों का पता लगाने में मदद मिलती है। हालांकि अमेरिका में मतदान की तकनीक और नियम सभी राज्यों में एक जैसे नहीं हैं। इसलिए सुरक्षा उपायों की प्रकृति भी राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। कागजी रिकॉर्ड चुनाव परिणामों की जांच को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद करता है।इसके बावजूद विशेषज्ञों ने कुछ गंभीर चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया है। बॉब बाउर के मुताबिक चुनाव अधिकारियों के खिलाफ मुकदमे की धमकियां और संघीय एजेंसियों की संभावित भूमिका को लेकर बयानबाजी माहौल को तनावपूर्ण बना सकती है। एडवर्ड फोली ने बेहद करीबी चुनाव परिणामों की स्थिति में लंबे कानूनी विवाद की आशंका जताई। ऐसी परिस्थितियों में मतगणना और नतीजों की आधिकारिक पुष्टि में देरी हो सकती है। वनीता गुप्ता ने चिंता जताई कि यदि मतदाता चुनाव प्रणाली पर भरोसा खो देते हैं तो वे मतदान करने से पीछे हट सकते हैं। इससे लोकतांत्रिक भागीदारी प्रभावित होने का खतरा रहता है।कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में डीपफेक वीडियो और भ्रामक सूचनाएं भी चुनावी प्रक्रिया के लिए चुनौती बन रही हैं। गलत जानकारी तेजी से फैलने से मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा हो सकता है और चुनाव अधिकारियों पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है। विशेषज्ञों की राय का सार यह है कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली में सुरक्षा के कई स्तर मौजूद हैं लेकिन किसी भी लोकतंत्र में पारदर्शिता जवाबदेही और मतदाताओं का विश्वास बनाए रखना जरूरी है। पेपर ट्रेल और विकेंद्रीकृत व्यवस्था चुनावों की विश्वसनीयता मजबूत कर सकते हैं लेकिन भ्रामक सूचनाओं और राजनीतिक तनाव से निपटने के लिए प्रशासनिक सतर्कता भी उतनी ही आवश्यक है। -

14 अक्टूबर 2026 का पंचांग: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा, जानें राहुकाल और शुभ-अशुभ समय
नई दिल्ली: 14 अक्टूबर 2026, बुधवार को आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। पंचांग के अनुसार, इस तिथि के देवता भगवान गणेश माने जाते हैं। यह दिन विरोधियों के खिलाफ रणनीतिक योजना बनाने के लिए अच्छा बताया गया है। हालांकि, रिक्ता तिथि होने के कारण इस दिन शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा-अर्चना का भी विशेष महत्व है।आज विक्रम संवत 2083 चल रहा है और मास आश्विन है। पक्ष शुक्ल तथा दिन बुधवार है। तिथि शुक्ल पक्ष चतुर्थी, योग आयुष्यमान और करण वणिज है। चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा, जबकि सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा। आज सूर्योदय सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर तथा चंद्रास्त शाम 7 बजकर 54 मिनट पर निर्धारित है।
आज चंद्रमा वृश्चिक राशि में अनुराधा नक्षत्र में रहेगा। यह नक्षत्र वृश्चिक राशि में 3 डिग्री 20 मिनट से 16 डिग्री 40 मिनट तक फैला हुआ है। अनुराधा नक्षत्र के शासक ग्रह शनि हैं और इसके देवता मित्र माने जाते हैं, जो 12 आदित्यों में से एक हैं। इस नक्षत्र का स्वभाव सौम्य बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह नक्षत्र ललित कलाओं को सीखने, मित्रता करने, रोमांस, नए वस्त्र धारण करने, विवाह, गायन और जुलूस में शामिल होने के लिए अनुकूल माना जाता है। कृषि कार्यों और यात्रा के लिए भी इसे शुभ बताया गया है।
पंचांग के अनुसार, बुधवार को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम के समय का भी ध्यान रखना चाहिए। यमगंड का समय सुबह 7 बजकर 47 मिनट से 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी महत्वपूर्ण या शुभ कार्य की योजना बनाते समय इन समयावधियों को ध्यान में रखना उचित माना जाता है।
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 अक्टूबर को आएंगे भारत दौरे पर… ट्रेड डील पर बड़ी उम्मीद!
वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका (India and America) के बीच ट्रेड डील (Trade deal) को लेकर जारी बातचीत के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री (US Secretary of State) मार्को रुबियो (Marco Rubio) 17 से 22 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर आएंगे. इस दौरान वह मुंबई और जामनगर भी जाएंगे. अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, रुबियो की यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और व्यापार, ऊर्जा तथा क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना है।रुबियो की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है. भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को संकेत दिया कि वार्ता किसी नतीजे के करीब पहुंच रही है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है।
नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के दौरान जयशंकर ने ट्रेड डील से संबंधित एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्हें लगता है कि यह मुद्दा अब किसी निष्कर्ष की ओर बढ़ रहा है. जयशंकर के मुताबिक, अमेरिका अपनी घरेलू औद्योगिक क्षमता को फिर मजबूत करने और दूसरे देशों को अपने बाजार तक पहुंच देने की शर्तों में बदलाव करने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में भारत को भी अमेरिका के साथ अपने आर्थिक संबंधों की शर्तों का नए सिरे से आकलन करना होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है और दूसरे देशों को उसके साथ अपने रिश्तों का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ रहा है।
उज्बेकिस्तान के बाद भारत आएंगे रुबियो
अमेरिकी विदेश विभाग की घोषणा के मुताबिक, रुबियो पहले उज्बेकिस्तान के समरकंद जाएंगे. वहां वह मध्य एशिया के पांच गणराज्यों के साथ होने वाली सी5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे. इसके बाद वह भारत पहुंचेंगे. यह इस साल भारत की उनकी दूसरी आधिकारिक यात्रा होगी। भारत में रुबियो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. बातचीत में द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी, क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम तथा ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी. वह कारोबार जगत के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे, ताकि निवेश और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाया जा सके.इससे पहले मार्को रुबियो इसी मई में चार दिवसीय भारत दौरे पर आए थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की थी. उस समय रुबियो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पीएम मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी दिया था. जयशंकर के साथ बैठक के दौरान रुबियो ने भरोसा जताया था कि दोनों देश टिकाऊ व्यापार समझौते तक पहुंच सकते हैं. उन्होंने कहा था कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है और अमेरिका ऐसा समझौता करना चाहता है, जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो।
मई की बातचीत में ऊर्जा स्रोतों में विविधता, परमाणु सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज, प्रौद्योगिकी और भारतीय यात्रियों के वीजा से जुड़े मुद्दे भी उठे थे. रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की थी. वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी लेकर आए थे।
टैरिफ और बाजार तक पहुंच अब भी बड़ी चुनौती
मई में हुई बातचीत के बावजूद व्यापार वार्ता में अमेरिकी शुल्क नीति और बाजार तक पहुंच को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 अक्टूबर को कहा था कि बातचीत एक ठहराव पर पहुंच गई है और दोनों पक्षों के लिए आगे रियायत देना कठिन होता जा रहा है। अमेरिका अपने व्यापार असंतुलन को दूर करने और भारतीय बाजार में अधिक पहुंच हासिल करने की कोशिश कर रहा है. वहीं, भारत चाहता है कि समझौते की शर्तें घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा करें और भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित न हो. -

अब PF खाते से आवश्यकतानुसार पैसे निकाल सकेंगे कर्मचारी… EPFO ने आसान किए नियम
नई दिल्ली। कभी अचानक इलाज पर बड़ा खर्च आ जाता है, तो कभी बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर बनवाने के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है. ऐसी जरूरतों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (Employees’ Provident Fund- PF) में जमा रकम मददगार हो सकती है. अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees’ Provident Fund Organisation- EPFO) ने पीएफ से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) के नियम आसान कर दिए हैं।नए ढांचे के तहत पात्र सदस्य अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं. बाकी 25% रकम खाते में न्यूनतम बैलेंस के तौर पर रखनी होगी. हालांकि, निकासी की सीमा, सेवा अवधि और कितनी बार पैसा निकाला जा सकता है, यह जरूरत की श्रेणी पर निर्भर करेगा. पीएफ की आंशिक निकासी के इस नए ढांचे को 1 जुलाई 2026 से लागू किया गया है. नियमों और आवेदन से जुड़ी जानकारी के लिए ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट https://www.epfindia.gov.in/ देख सकते हैं।
पीएफ निकासी के नियमों में क्या बदला?
पहले पीएफ से आंशिक निकासी के लिए अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से कई नियम थे. इससे पात्रता और निकासी की शर्तें समझना मुश्किल हो सकता था. अब इन प्रावधानों को तीन प्रमुख श्रेणियों में रखा गया है।
₹1 लाख जमा हैं, तो कितना पैसा निकाल पाएंगे?
नियम के मुताबिक, पात्र पीएफ बैलेंस का अधिकतम 75% निकाला जा सकता है और कम से कम 25% रकम खाते में बचाकर रखनी होगी. यहां 25% बैलेंस का मतलब कोई तय रकम नहीं है. यह आपके पात्र पीएफ बैलेंस के हिसाब से तय होगा. वास्तविक निकासी संबंधित श्रेणी की शर्तों और पात्रता पर भी निर्भर करेगी.
बीमारी, पढ़ाई और शादी के लिए कितनी बार निकाल सकेंगे पैसा?
बीमारी, शिक्षा और शादी को जरूरी जरूरतों की श्रेणी में रखा गया है. इन मामलों में कम से कम 12 महीने की सेवा पूरी करने के बाद निकासी के लिए आवेदन किया जा सकता है.
– बीमारी: एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 3 बार निकासी की अनुमति.
– पढ़ाई: पूरी सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 10 बार निकासी.
– शादी: पूरी सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 5 बार निकासी.इन जरूरतों के लिए भी निकासी की अधिकतम सीमा और बाकी शर्तें लागू रहेंगी. इसलिए केवल पात्र होने का मतलब यह नहीं है कि हर बार खाते में जमा पूरी रकम निकाली जा सकेगी.
घर खरीदने, बनाने या होम लोन चुकाने के नियम
अगर आप घर खरीदने, प्लॉट लेने, मकान बनवाने या होम लोन चुकाने के लिए पीएफ का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो हाउसिंग श्रेणी में निकासी का प्रावधान है. घर की मरम्मत, सुधार या नवीनीकरण के लिए भी तय शर्तों के तहत पैसा निकाला जा सकता है।इसके लिए कम से कम 12 महीने की सदस्यता पूरी होनी चाहिए. आवास संबंधी जरूरतों के लिए पूरी सदस्यता अवधि में अधिकतम 5 बार निकासी की अनुमति है. हालांकि, आवेदन मंजूर होने के लिए संबंधित योजना की पात्रता शर्तें पूरी करना जरूरी है.
25% रकम खाते में क्यों रखनी होगी?
पीएफ का मकसद केवल जरूरत के समय पैसा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि नौकरी के बाद के जीवन के लिए बचत तैयार करना भी है. बार-बार निकासी करने पर रिटायरमेंट के समय खाते में कम रकम बच सकती है. इसी वजह से न्यूनतम 25% बैलेंस बनाए रखने का प्रावधान किया गया है. खाते में बची रकम पर ब्याज मिलता रह सकता है और समय के साथ ब्याज पर ब्याज यानी चक्रवृद्धि का लाभ भी मिल सकता है. इससे लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए बचत तैयार करने में मदद मिलती है।
विशेष परिस्थितियों में भी निकाल सकते हैं पैसे
विशेष परिस्थितियों की श्रेणी में नियमों को आसान किया गया है. इसके तहत सदस्य को कुछ स्थितियों में निकासी का कारण बताने की जरूरत नहीं होती. हालांकि, इस श्रेणी में भी निर्धारित शर्तें और निकासी की सीमाएं लागू होती हैं. बेरोजगारी की स्थिति में सदस्य तत्काल अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकता है. बाकी 25% रकम 12 महीने की बेरोजगारी के बाद निकाली जा सकती है. यह सामान्य आंशिक निकासी के नियमों से अलग प्रावधान है.इसके अलावा, रिटायरमेंट और कुछ अन्य निर्धारित परिस्थितियों में पूरी रकम के अंतिम निपटान की अनुमति हो सकती है. इनमें स्थायी विकलांगता, छंटनी, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और स्थायी रूप से विदेश जाने जैसी स्थितियां शामिल हैं. हालांकि, हर मामले में संबंधित नियमों के मुताबिक पात्रता की जांच जरूरी है.
पीएफ निकालने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पीएफ से जरूरत के समय पैसा निकालने की सुविधा राहत देती है, लेकिन इसे नियमित खर्चों का विकल्प नहीं बनाना चाहिए. खाते से निकाली गई रकम पर आगे मिलने वाला ब्याज और चक्रवृद्धि का लाभ कम हो सकता है. इसका असर रिटायरमेंट के समय मिलने वाली कुल बचत पर पड़ सकता है. इसलिए बीमारी या किसी जरूरी खर्च के लिए निकासी करते समय अपनी मौजूदा जरूरत और भविष्य की बचत, दोनों का हिसाब रखें. आवेदन करने से पहले ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट पर नियम और पात्रता जरूर जांचें। -

MP: बांधवगढ़ रिजर्व में मानसून में शुरू हुआ प्रयोग हुआ हिट… 100 दिनों में पहुंचे 3780 पर्यटक
उमरिया। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) में वन्यजीव पर्यटन (Wildlife tourism) को लेकर सैलानियों का उत्साह लगातार चरम पर है. कोर जोन के साथ-साथ अब बफर जोन पर्यटन (Bandhavgarh Buffer Zone Safari) भी भारी लोकप्रियता हासिल कर रहा है. मानसून के दौरान जब कोर जोन में सफारी पूरी तरह बंद रहती है, तब बफर क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां शुरू की गई थीं. यह प्रयोग इतना सफल रहा कि चालू पर्यटन सत्र (2026-27) के शुरुआती 100 दिनों के भीतर परासी और पचपेड़ी बफर जोन में 3,780 पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया।आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई से 8 अक्टूबर तक कुल 802 वाहनों के माध्यम से पर्यटकों ने बफर जोन का भ्रमण किया. इसमें 3,758 भारतीय और 22 विदेशी पर्यटक शामिल रहे।
परासी बफर जोन: यहां 550 वाहनों से 2,588 पर्यटकों ने भ्रमण किया. पचपेड़ी बफर जोन: यहां 252 वाहनों के जरिए 1,192 पर्यटक जंगल सफारी के लिए पहुंचे। महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई में 243 वाहनों से 1,109, अगस्त में 265 वाहनों से 1,247 और सितंबर में 168 वाहनों से 780 पर्यटक आए. वहीं 1 से 8 अक्टूबर के दौरान 126 वाहनों से 644 सैलानी बफर जोन पहुंचे. पूरी अवधि में अगस्त माह में सबसे अधिक सैलानियों का आगमन दर्ज किया गया.
प्राकृतिक परिवेश में बाघों के दीदार और स्थानीय रोजगार
बफर जोन में पर्यटकों को बाघ (टाइगर) सहित अन्य दुर्लभ वन्यप्राणियों के उनके प्राकृतिक परिवेश में नियमित दीदार हो रहे हैं. कोर जोन खुलने के बाद भी बफर जोन के प्रति पर्यटकों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। बफर क्षेत्र में पर्यटन संचालन का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय आदिवासी और आसपास के समुदायों को मिला है. जिप्सी संचालन, गाइड सेवा, होमस्टे और स्थानीय हस्तशिल्प के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। -

MP: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की मची होड़…. अक्टूबर के शुरुआती 13 दिन में 4 लाख से ज्यादा आवेदन
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मतदाता सूची (Voter List) में नाम जुड़वाने के लिए 1 अक्टूबर से अब तक Form 6 के 4,06,338 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें 18 से 19 वर्ष की उम्र के युवाओं के 1,92,851 आवेदन शामिल हैं. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) संजीव कुमार झा ने यह जानकारी दी।मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा (Chief Electoral Officer Sanjeev Kumar Jha) के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के निर्देशों के तहत प्रदेशभर में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) Form 6 के आवेदन एकत्र कर रहे हैं. पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर विशेष शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का उद्देश्य पात्र नागरिकों को आवेदन जमा करने में मदद करना और उनका नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
क्या है Form 6 और कौन कर सकता है आवेदन?
Form 6 भारतीय नागरिकों के लिए मतदाता सूची में नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने का निर्धारित आवेदन पत्र है. इसके लिए आवेदक की उम्र निर्धारित अर्हता तिथि पर कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए. साथ ही, उसे उस निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना जरूरी है, जहां वह मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना चाहता है।ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकते हैं आवेदन
भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, पात्र नागरिक Form 6 के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं.
ऑनलाइन: निर्वाचन आयोग के Voter Services Portal के माध्यम से.
ऑफलाइन: संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) या बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास आवेदन जमा करके।Form 6 पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इस बीच, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत ने नए Form 6 को न तो मंजूरी दी है और न ही उसे खारिज किया है। पीठ के अनुसार, बिहार में SIR से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान इस मुद्दे पर न्यायिक निर्णय नहीं दिया गया था.दरअसल, निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में संकेत दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 के बिहार SIR से संबंधित फैसले में Form 6 के घोषणा-पत्र को बरकरार रखा था. अब शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि उस सुनवाई में नए Form 6 की वैधता या स्वीकार्यता पर फैसला नहीं हुआ था।
युवाओं के लिए मतदाता बनने का अवसर
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से अब तक मिले कुल 4,06,338 आवेदनों में करीब 47.45 प्रतिशत आवेदन 18 से 19 वर्ष के युवाओं के हैं. यह आंकड़ा नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी को दर्शाता है. पात्र नागरिक Form 6 के माध्यम से मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने से पहले निर्धारित पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल से प्राप्त की जा सकती है। -

MP: उज्जैन पुलिस ने पकड़े 2 करोड़ रुपये के तांबे स्क्रैप से भरे पांच वाहन, 5 तस्कर गिरफ्तार
उज्जैन। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) में अवैध गतिविधियों और संदिग्ध मामलों पर नकेल कसते हुए उज्जैन पुलिस (Ujjain Police) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने चेकिंग के दौरान तांबे के चूरे स्क्रैप से भरे पांच लोडिंग वाहनों को पकड़ा है। जब्त किए गए वाहनों और उनमें भरे माल की कुल अनुमानित कीमत लगभग दो करोड़ रुपये आंकी गई है।पुलिस को मिली खास सूचना के आधार पर रणकेश्वर मंदिर के पास ब्रिज के नीचे यह कार्रवाई की गई। पकड़े गए पांचों टाटा एस लोडिंग वाहनों के चालकों से जब माल से संबंधित वैध बिल, बिल्टी और परिवहन दस्तावेज मांगे गए, तो वे कोई भी वैध कागजात या संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद चोरी के माल के संदेह में पुलिस ने माल और वाहनों को विधिवत जब्त कर लिया।
बताया जाता है कि पुलिस ने श्री हरिओम धर्मकांटा पर टाटा एस (MP-09-AX-5704): वजन – 4,165 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (नया वाहन, बिना नंबर): वजन – 2,335 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (MP-09-AJ-2175): वजन – 4,035 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (MP-09-BK-4988): वजन – 2,965 किलोग्राम, टाटा एस गोल्ड (MP-09-BR-4162): वजन – 3,075 किलोग्राम है पांचों वाहनों का कुल ग्रॉस वजन 16,575 किलोग्राम है, जिसमें लगभग 11 टन तांबे का स्क्रैप (कीमत करीब 2 करोड़ रुपए) शामिल है।
पुलिस ने मौके से पांचों वाहन चालकों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान सुरेश पिता मोहनलाल सोलंकी (निवासी – इंदौर), राहुल पिता राधेश्याम चौहान (निवासी – इंदौर), शंकर पिता कैलाश सिंह ढाला (निवासी – इंदौर), रामकिशन पिता मांगीलाल पंवार (निवासी – इंदौर), विनायक पिता रमेश राठौर (निवासी – इंदौर) के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) एवं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(1)(e)/106 के तहत इस्तगासा पंजीबद्ध कर लिया है। जब्त वाहनों और माल को थाने में सुरक्षित रखवाया गया है। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि यह तांबे का चूरा कहां से लाया गया था और इसके तार किन चोरियों या अवैध नेटवर्क से जुड़े हैं।
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मुरुगन के मंत्रि-परिषद और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा…. कैबिनेट में जल्द हो सकता है फेरबदल
नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन (L. Murugan) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद (Ministers Council) और राज्यसभा (Rajya Sabha) की सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया है। मुरुगन ने प्रधानमंत्री को पांच पृष्ठों का पत्र लिखकर राज्य में जाकर संगठन को मजबूत करने की इच्छा जताई है। उनके इस्तीफे से केंद्रीय मंत्रिपरिषद में एक और पद रिक्त हो जाएगा। पहले से ही कई मंत्री पद खाली हैं।वहीं, कुछ राज्यसभा सदस्यों को दोबारा कार्यकाल नहीं मिलने के कारण भी मंत्रिपरिषद में और पद रिक्त होंगे। ऐसे में इस बात की संभावना जताई जा रही है कि इसी माह केंद्रीय मंत्रिपरिषद का विस्तार और फेरबदल हो सकता है। हालांकि, इसे लेकर भाजपा नेतृत्व की तरफ से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।
तमिलनाडु में काम करने की जताई इच्छा
मुरुगन ने अपना इस्तीफा वाला पत्र एक्स पर पोस्ट किया है। प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भारत माता और तमिलनाडु की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। विनम्रता और कृतज्ञता के साथ उन्होंने अनुरोध किया कि उन्हें राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया जाए और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की भी अनुमति दी जाए, ताकि वह तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करने के लिए पूरा समय समर्पित कर सकें। मुरुगन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं।उन्होंने पत्र में लिखा, ‘पिछले पांच वर्षों से आपकी सरकार में सेवा करने का सम्मान दिए जाने के लिए मैं गहरी कृतज्ञता के साथ यह अनुरोध कर रहा हूं। दिहाड़ी मजदूरों के बेटे पर आपने जो भरोसा जताया, वह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बना रहेगा। अब मैं अपने लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अथक मेहनत करके उस भरोसे पर खरा उतरने के लिए आपका आशीर्वाद चाहता हूं।’
मुरुगन सितंबर 2021 से राज्यसभा के सदस्य हैं और अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश से उच्च सदन के लिए दोबारा निर्वाचित हुए थे। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 में समाप्त होगा। मंत्री ने कहा कि वह राज्यसभा की सदस्यता छोड़ना चाहते हैं।
खुद ही छोड़ने के लिए कहा था
मुरुगन ने कहा, ‘मैंने प्रधानमंत्री से मंत्रिपरिषद और राज्यसभा से मुझे मुक्त करने का अनुरोध किया है, क्योंकि मैं तमिलनाडु जाकर अपनी पार्टी को मजबूत करना चाहता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में मैंने कहा है कि मैं गांवों, गलियों और हर जगह जाकर अपनी पार्टी को मजबूत करना चाहता हूं और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए जमीन तैयार करना चाहता हूं।’
5 नए मंत्री आ सकते हैं
खास बात है कि इससे पहले जॉर्ज कुरियन इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं, पार्टी के राज्यसभा सांसद रहे रवनीत सिंह बिट्टू ने भी जुलाई में इस्तीफा दे दिया था। वहीं हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भी हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश से दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था। हालांकि, वह केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बने हुए हैं। इसी तरह उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री बी एल वर्मा को भी उच्च सदन के चुनाव के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया था। वह भी अपने पद पर बने हुए हैं। -

हेमा मालिनी ने 77 साल की उम्र में दुर्गा डांस से जीता लोगों का दिल… तस्वीरें और वीडियो किया शेयर
आगरा। हेमा मालिनी (Hema Malini) ने नवरात्रि के शुभ अवसर पर 11 अक्टूबर को तेलंगाना के ‘आगरा डांडिया नवरात्रि उत्सव’ (‘Agra Dandiya Navratri Festival’) में अपने पॉपुलर डांस ड्रामा ‘दुर्गा’ से लोगों का दिल जीता। हेमा मालिनी ने इस परफॉर्मेंस की तस्वीरें और वीडियो अपने सोशल मीडिया पर शेयर कीं।हेमा मालिनी को ड्रीमगर्ल (Dream Girl) के नाम से जाना जाता है। एक बेहतरीन एक्ट्रेस होने के साथ-साथ हेमा मालिनी शानदार क्लासिकल डांसर (Classical dancer) भी हैं। हेमा मालिनी ने 77 साल की उम्र में दुर्गा बैले डांस (Durga Ballet Dance) कर लोगों का दिल जीता। इस परफॉर्मेंस की कुछ झलकियां हेमा मालिनी ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। हेमा मालिनी माता पार्वती के गेटअप में काफी खूबसूरत नजर आईं।
हेमा मालिनी ने शेयर की तस्वीरें और वीडियो
हेमा मालिनी ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उसमें से एक तस्वीर में हेमा मालिनी माता पार्वती के गेटअप में नजर आईं। वहीं, उनके साथ भगवान शिव के गेटअप में एक आर्टिस्ट साथ खड़े नजर आए। इन तस्वीरों के साथ हेमा मालिनी ने लिखा- तेलंगाना के अग्रवाल समाज के लिए ‘आगरा डांडिया नवरात्रि सेलिब्रेशन’ में क्लासिक कन्वेंशन सेंटर में कल शाम को परफॉर्म किया। ये कार्यक्रम 11 अक्टूबर को महाराजा अग्रसेन जयंती के अवसर पर भी आयोजित किया गया था। नवरात्रि के पहले दिन अपने सबसे लोकप्रिय बैले ‘दुर्गा’ को परफॉर्म करना एक बहुत ही सुंदर और खास अनुभव था और मैंने सचमुच खुद को सौभाग्यशाली महसूस किया।
क्या बोले सोशल मीडिया यूजर्स?
हेमा मालिनी के इस पोस्ट ने सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत लिया है। लोगों ने हार्ट इमोजी बनाकर एक्ट्रेस पर प्यार लुटाया है। एक यूजर ने लिखा- हमेशा की तरह शानदार। एक दूसरे यूजर ने लिखा- वाह हेमा मैम, बहुत ही प्यारी आपकी कलाकृति। एक ने कहा- सदाबहार खूबसूरती। एक ने कहा- अप्रतिम किरदार। माता पार्वती की जय हो।
1968 में किया था बॉलीवुड डेब्यू
हेमा मालिनी की बात करें तो उन्होंने साल 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म में उनके साथ राज कपूर नजर आए थे। बॉलीवुड में आने से पहले उन्होंने 1963 में तमिल फिल्म ‘इधु सत्यम’ से बतौर डांसर अभिनय की शुरुआत की थी।हेमा मालिनी की अन्य पॉपुलर फिल्मों की बात करें तो उनमें अंदाज़ (1971), लाल पत्थर (1971), शोले (1975) और सीता और गीता (1975) जैसी फिल्में शामिल हैं। एक्टर और डांसर होने के साथ-साथ हेमा मालिनी एक राजनेता भी हैं। वो उत्तर प्रदेश की मथुरा लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद हैं। हेमा मालिनी साल 2003 से 2009 और 2011 में राज्यसभा की मनोनीत सदस्य भी रह चुकी हैं।
इन फिल्मों में हेमा मालिनी और धर्मेंद्र ने साथ किया काम
हेमा मालिनी के निजी जीवन की बात करें तो उन्होंने बॉलीवुड के ही-मैन यानी धर्मेंद्र से साल 1980 में शादी रचाई थी। हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की पहली मुलाकात 1968 में एक फिल्म के प्रीमियर के दौरान हुई थी। हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की साथ में पहली फिल्म 1970 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म का नाम ‘तुम हसीन मैं जवान’ था। अपने करियर के दौरान हेमा मालिनी और धर्मेंद्र ने कुल 28 फिल्मों में साथ में काम किया था। इन फिल्मों में दोस्त (1974), शोले (1975), चरस, जुगनू, अपना खून, आज़ाद (1978) और दिल्लगी (1978) जैसी फिल्में शामिल हैं।