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  • UPI पेमेंट पर MDR चार्ज लगाने की समय सीमा बढ़ी, 1 जनवरी 2027 तक टली व्यवस्था से व्यापारियों को मिलेगी राहत

    UPI पेमेंट पर MDR चार्ज लगाने की समय सीमा बढ़ी, 1 जनवरी 2027 तक टली व्यवस्था से व्यापारियों को मिलेगी राहत

    नई दिल्ली । त्योहारी सीजन के दौरान डिजिटल भुगतान करने वाले व्यापारियों के लिए राहत की खबर है। यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने की समय सीमा आगे बढ़ा दी गई है। पहले इस व्यवस्था को 15 अक्टूबर से लागू किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन अब इसकी समय सीमा बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 कर दी गई है। इस फैसले से देशभर के छोटे-बड़े दुकानदारों और कारोबारियों को अतिरिक्त समय मिल गया है। त्योहारी खरीदारी के बीच व्यापारियों की चिंताओं और नई व्यवस्था को लागू करने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

    एमडीआर का पूरा नाम मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। यह वह शुल्क होता है, जो किसी दुकानदार या कारोबारी से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले लिया जाता है। आमतौर पर यह रकम भुगतान सेवाएं उपलब्ध कराने वाले बैंकों, फिनटेक कंपनियों या भुगतान व्यवस्था से जुड़ी संस्थाओं को मिलती है। यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों के लिए इस तरह के शुल्क की समय सीमा और दरें कारोबार की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। इसी वजह से एमडीआर लागू करने की तारीख को लेकर व्यापारियों के बीच चिंता बनी हुई थी।

    हाल ही में 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क तय किए जाने की बात सामने आई थी। इस व्यवस्था से भुगतान गेटवे और पेटीएम तथा मोबिक्विक जैसी कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद जताई गई थी। शुल्क लागू होने की संभावित व्यवस्था को लेकर भुगतान सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के राजस्व में बढ़ोतरी की संभावना भी चर्चा में रही। हालांकि, अब समय सीमा आगे बढ़ने के कारण व्यापारियों और संबंधित कंपनियों को नई व्यवस्था के लिए तैयारी करने का अधिक समय मिलेगा।

    समय सीमा बढ़ाने के पीछे व्यापारियों की ओर से उठाई गई चिंताओं को भी अहम माना गया है। कारोबारियों और मर्चेंट्स की मांग थी कि नई व्यवस्था को ठीक से समझने और लागू करने के लिए उन्हें कुछ और समय दिया जाए। त्योहारी सीजन को देखते हुए 15 अक्टूबर से इसे लागू करने के बजाय समय सीमा आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। इस दौरान दुकानदारों को अपने भुगतान से जुड़े कामकाज और व्यवस्था को समझने का अवसर मिलेगा। त्योहारी खरीदारी के समय डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बढ़ने के बीच यह फैसला कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    समय सीमा बढ़ने से देशभर के लाखों छोटे-बड़े व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। कई कारोबारी संभावित डिजिटल भुगतान शुल्क को लेकर चिंतित थे, क्योंकि इससे उनके कारोबार की लागत और मुनाफे पर असर पड़ सकता था। अब नई तारीख तक उन्हें इस व्यवस्था को समझने और उसके लिए तैयारी करने का अतिरिक्त समय मिलेगा। हालांकि, शुल्क लागू होने पर इसका वास्तविक असर कारोबार के आकार और भुगतान व्यवस्था के इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करेगा।

    इस फैसले का असर भुगतान सेवाएं देने वाली कंपनियों पर भी पड़ सकता है। जब पिछले महीने एमडीआर से जुड़ी व्यवस्था की घोषणा हुई थी, तब भुगतान गेटवे और फिनटेक कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई थी। उस समय इन कंपनियों के राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई थी। अब शुल्क लागू करने की समय सीमा बढ़ने से इस व्यवस्था के प्रभाव को लेकर बाजार की उम्मीदों और व्यापारियों की तैयारियों के बीच अधिक समय मिल गया है। फिलहाल, एमडीआर से जुड़ी नई समय सीमा 1 जनवरी 2027 तय की गई है।

  • हूतियों के हमलों से दहला सऊदी… दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी अरामको पर दागी मिसाइल

    हूतियों के हमलों से दहला सऊदी… दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी अरामको पर दागी मिसाइल


    नई दिल्ली।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) और यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के बीच छिड़ा संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. मंगलवार देर रात सऊदी अरब के पूर्वी शहर धहरान (Dharan) में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ (World’s Largest oil company, ‘Saudi Aramco’) के प्रशासनिक परिसर को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया गया. सऊदी सरकारी समाचार एजेंसी एसपीए ने बुधवार को ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले के बाद इमारत में आग लगी, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि मिसाइल हमले में ऑफिस बिल्डिंग की ऊपरी तीन मंजिलों को नुकसान पहुंचा. सूत्र और मामले से परिचित दो अन्य लोगों ने इमारत में आग लगने की जानकारी दी. हालांकि, हमले की जिम्मेदारी को लेकर उपलब्ध रिपोर्ट में स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

    अरामको का यह परिसर कंपनी के एक प्रमुख संचालन केंद्र के रूप में काम करता है. दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल अरामको सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था का अहम आधार है. इसके संचालन नेटवर्क में तेल के कुएं, पाइपलाइन, रिफाइनरी और निर्यात टर्मिनल शामिल हैं।


    रियाद समेत कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन नष्ट करने का दावा

    सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि धहरान के ऊपर रोकी गई एक मिसाइल के टुकड़े आवासीय इलाके में गिरे. हालांकि, इससे हुए नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई. अधिकारियों ने रियाद और देश के दक्षिणी हिस्से में भी मिसाइलों तथा ड्रोन को रोककर नष्ट करने की जानकारी दी।

    इससे पहले मंगलवार को सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हूतियों को बार-बार हमले करने के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी.

    रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह से हूती विद्रोही सऊदी अरब के अहम ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं. इनमें राजधानी रियाद का हवाई अड्डा भी शामिल है. शनिवार को रियाद हवाई अड्डे पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले में 13 लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी. रिपोर्ट इसे पिछले एक दशक में सऊदी अरब पर हुआ सबसे घातक हमला बताती है. लगातार हमलों के कारण देश में उड़ान सेवाएं भी प्रभावित हुईं. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया, जब सऊदी अरब में एक बड़े ऊर्जा सम्मेलन का आयोजन हो रहा था।


    हूतियों ने पहले ही अरामको को दी थी धमकी

    धहरान पर हमले से पहले हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने यमन की राजधानी सना पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हमलों के जवाब में ‘कड़ी और दर्दनाक’ कार्रवाई की चेतावनी दी थी. उनके मुताबिक, संभावित निशानों में धहरान स्थित अरामको मुख्यालय और रियाद की एक तेल रिफाइनरी शामिल थे.हूतियों ने सऊदी अरब में तेल क्षेत्र के कर्मचारियों को भी उन ठिकानों से दूर रहने की चेतावनी दी थी, जिन्हें वे संभावित लक्ष्य मानते हैं।


    सना में तेल डिपो पर भी हमला

    हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सऊदी अरब सना पर हमले कर रहा है. दूसरी ओर, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित एक तेल डिपो से नागरिकों को दूर रहने की चेतावनी दी. हूती संचालित अल-मसीरा टेलीविजन ने बताया कि गठबंधन ने यमन पेट्रोलियम कंपनी के सबाह केंद्रीय स्टेशन को निशाना बनाया. यह ईंधन डिपो सना के बाहर स्थित है. गठबंधन ने स्टेशन और अन्य ठिकानों पर हमले की पुष्टि की. उसका कहना था कि कार्रवाई का उद्देश्य हूतियों की सऊदी अरब, यमन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खतरा पहुंचाने की क्षमता को कमजोर करना था।

  • वित्तीय संकट का हवाला देकर डिप्टी सीएम की नई कारों पर रोक, दूसरी ओर सीएम और मंत्रियों के लिए खरीदी गईं गाड़ियां

    वित्तीय संकट का हवाला देकर डिप्टी सीएम की नई कारों पर रोक, दूसरी ओर सीएम और मंत्रियों के लिए खरीदी गईं गाड़ियां

    भोपाल । मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में सरकारी वाहनों की खरीद को लेकर नया मामला सामने आया है। सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए नई गाड़ियां खरीदी हैं, लेकिन दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल को नई कार देने के प्रस्ताव वित्त विभाग ने लौटा दिए हैं। विभाग ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए दोनों डिप्टी सीएम को मौजूदा सरकारी वाहनों की मरम्मत कराकर इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इस फैसले के बाद सरकारी खर्चों पर नियंत्रण के निर्देशों और नई गाड़ियों की खरीद को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
    जानकारी के अनुसार दोनों उपमुख्यमंत्रियों के सरकारी वाहन निर्धारित किलोमीटर की सीमा पार कर चुके हैं। नियमानुसार सरकारी वाहन के एक लाख दस हजार किलोमीटर चलने के बाद उसे बदलने का प्रावधान है। दोनों डिप्टी सीएम की गाड़ियां इस सीमा से अधिक चल चुकी हैं। इसके बाद गृह विभाग के माध्यम से नई कार खरीदने के प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे गए थे। हालांकि वित्त विभाग ने इन प्रस्तावों को मंजूरी देने के बजाय वापस कर दिया और पुरानी गाड़ियों की मरम्मत कराकर चलाने के निर्देश दिए।
    दूसरी ओर चालू वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए नई इलेक्ट्रिक कार खरीदी गई है। इसके अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के लिए इनोवा क्रिस्टा खरीदी गई। गृह सचिव कृष्णा वेणी के लिए भी नई इनोवा क्रिस्टा की व्यवस्था की गई है। इस तरह मुख्यमंत्री मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारी के लिए नई गाड़ियों की खरीद हुई है, जबकि दोनों डिप्टी सीएम के प्रस्तावों को वित्तीय कारणों से मंजूरी नहीं मिल सकी। इसी अंतर को लेकर सरकारी वाहन खरीद की नीति और प्राथमिकताओं पर चर्चा हो रही है।
    गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने करीब तीन महीने पहले वित्तीय स्थिति को देखते हुए सरकारी खर्चों में कटौती करने के निर्देश जारी किए थे। अधिकारियों के विदेश दौरे महंगे होटलों में बैठकें और अन्य गैरजरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखने को कहा गया था। सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागों को यथासंभव वर्चुअल बैठकें आयोजित करने और जिलों के अधिकारियों को अनावश्यक रूप से भोपाल नहीं बुलाने के निर्देश भी दिए थे। मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या कम करने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाकर सात रखने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद नई गाड़ियों की खरीद जारी रहने से खर्चों पर नियंत्रण के निर्देशों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
    वाहनों की खरीद का पिछला रिकॉर्ड भी इस मामले को महत्वपूर्ण बनाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश में सबसे ज्यादा 27 कारें खरीदी गई थीं। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक चार नई कारों की खरीद हुई है। इनमें मुख्यमंत्री की इलेक्ट्रिक कार और तीन इनोवा क्रिस्टा शामिल हैं। वहीं दोनों उपमुख्यमंत्रियों के लिए नई कार खरीदने के प्रस्ताव मंजूर नहीं किए गए हैं।
    वित्त विभाग ने आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले दूसरे अनुपूरक बजट को लेकर भी विभागों को निर्देश दिए हैं। प्रस्ताव 22 अक्टूबर तक ऑनलाइन भेजने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे नए मदों के प्रस्ताव शामिल नहीं किए जा सकेंगे जिनसे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़े। वाहन खरीद के प्रस्तावों को भी अनुपूरक बजट में शामिल नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे नई गाड़ियों की खरीद के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने की संभावना सीमित होती दिखाई दे रही है।
    इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने वीवीआईपी और राज्य अतिथियों की सुरक्षा तथा परिवहन व्यवस्था के लिए 12.68 करोड़ रुपये की 44 नई गाड़ियां खरीदने को मंजूरी दी है। इनमें 4.08 करोड़ रुपये की बुलेटप्रूफ टोयोटा लैंड क्रूजर 300 भी शामिल है। मध्य प्रदेश में डिप्टी सीएम की कारों के प्रस्ताव खारिज होने और महाराष्ट्र में महंगी गाड़ियों की खरीद की मंजूरी के बीच सरकारी वाहन खर्च का मुद्दा चर्चा में है। फिलहाल मध्य प्रदेश में दोनों उपमुख्यमंत्रियों को पुरानी गाड़ियों से ही काम चलाना होगा और नई कारों को लेकर आगे का फैसला वित्तीय मंजूरी पर निर्भर करेगा।
  • भोपाल में गरबा महोत्सव की धूम, 4000 से ज्यादा प्रतिभागियों ने की रिहर्सल, खास थीम और महाआरती के साथ सजेगा पंडाल

    भोपाल में गरबा महोत्सव की धूम, 4000 से ज्यादा प्रतिभागियों ने की रिहर्सल, खास थीम और महाआरती के साथ सजेगा पंडाल


    भोपाल । भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित पांच दिवसीय अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव 2026 का दूसरा दिन आज उत्साह और पारंपरिक रंगों के बीच मनाया जाएगा। मंगलवार से शुरू हुए इस आयोजन में गरबा प्रेमियों के बीच खास उत्साह देखने को मिल रहा है। गुजराती लोकगीतों की धुन पर गरबा डांडिया और तीन ताली के जरिए प्रतिभागी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। रंग-बिरंगे परिधान रोशनी से सजा पंडाल और पारंपरिक संगीत इस आयोजन को खास बनाने की तैयारी में हैं। नवरात्र के अवसर पर आयोजित यह महोत्सव लोगों को धार्मिक आस्था के साथ भारतीय लोक संस्कृति से जुड़ने का अवसर दे रहा है।
    महोत्सव की तैयारियों को लेकर पहले से ही व्यापक स्तर पर अभ्यास किया गया है। पहली ग्राउंड रिहर्सल में चार हजार से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान गुजराती पारंपरिक गीतों की धुन और प्रशिक्षकों की काउंटिंग के साथ प्रतिभागियों ने गरबा डांडिया और तीन ताली का अभ्यास किया। सामूहिक नृत्य के दौरान तालमेल बनाए रखने और निर्धारित स्टेप्स को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने पर जोर दिया गया। सोमवार को दूसरी ग्राउंड रिहर्सल भी आयोजित की गई थी ताकि मुख्य आयोजन के दौरान प्रतिभागी पूरे उत्साह और बेहतर तालमेल के साथ प्रस्तुति दे सकें।
    इस बार महोत्सव में पारंपरिक गुजराती वेशभूषा के साथ अलग-अलग राज्यों की पोशाकों और विशेष थीम का आकर्षण भी देखने को मिल सकता है। पिछले आयोजनों में राजस्थानी परिधान महाकुंभ और श्रीनाथ जैसी थीम के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता दिखाई थी। इस बार भी प्रतिभागियों की वेशभूषा और पंडाल की सजावट उत्सव में चार चांद लगाने की तैयारी में है। पारंपरिक आभूषणों और रंगीन परिधानों के साथ गरबा करने वाले प्रतिभागियों के बीच उत्सव का माहौल और आकर्षक बनेगा।
    आयोजन में बढ़ती भागीदारी को देखते हुए गरबा सर्किल का आकार भी बढ़ाया गया है। पहले इसका आकार 100 फीट था जिसे बढ़ाकर 110 फीट कर दिया गया है। इससे प्रतिभागियों को सामूहिक नृत्य के दौरान अधिक जगह मिल सकेगी। बड़े गरबा सर्किल में एक साथ बड़ी संख्या में प्रतिभागियों के नृत्य करने से आयोजन की भव्यता बढ़ने की उम्मीद है। गरबा की पारंपरिक लय और डांडिया की खनक के बीच पूरा मैदान उत्सव के रंग में रंगा नजर आएगा।
    अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव में माता अम्बे की पूजा-अर्चना और महाआरती भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पारंपरिक नृत्य का यह संगम श्रद्धालुओं और गरबा प्रेमियों को आकर्षित करता है। रोशनी से सजे पंडाल में माता की आराधना के बाद गरबा और डांडिया का उत्साह देखने को मिलेगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में शहर के लोगों को परिवार और दोस्तों के साथ उत्सव का आनंद लेने तथा गुजराती संस्कृति की परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
    महोत्सव में प्रवेश के लिए पास अनिवार्य रखा गया है। आयोजकों के अनुसार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पास प्राप्त किए जा सकते हैं। एक कपल पास पर दो लोगों को प्रवेश मिलेगा और इनमें एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य है। पास अभिव्यक्ति मैनेजमेंट द्वारा निर्धारित दुकानों से खरीदे जा सकते हैं। इसके अलावा भेल दशहरा मैदान स्थित गरबा ग्राउंड पर बनाए गए दो ऑफलाइन स्टॉल से भी पास लेने की सुविधा है। ऑनलाइन पास के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था भी की गई है। आयोजकों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत माध्यमों से ही पास खरीदें ताकि प्रवेश के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
  • एमपी में बस सफर होगा हाईटेक, मोबाइल एप से बुक करें टिकट, नियम तोड़ने वाले कंडक्टरों पर होगी सख्त कार्रवाई

    एमपी में बस सफर होगा हाईटेक, मोबाइल एप से बुक करें टिकट, नियम तोड़ने वाले कंडक्टरों पर होगी सख्त कार्रवाई


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बस से सफर करने वाले यात्रियों के लिए जल्द ही बड़ी सुविधा शुरू हो सकती है। अब यात्रियों को बस का टिकट लेने के लिए काउंटर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। रेलवे की तर्ज पर मोबाइल एप के जरिए घर बैठे बस टिकट बुक करने की व्यवस्था तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत शुरू होने वाली इस सुविधा का उद्देश्य यात्रियों को आसान और पारदर्शी परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है। इसके लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड आईआरसीटीसी की तर्ज पर मोबाइल एप तैयार करा रही है। शुरुआती चरण में भोपाल और इंदौर के आईएसबीटी से इस सुविधा की शुरुआत करने की तैयारी है।
    प्रस्तावित एप के माध्यम से यात्री अपने सफर का रूट चुन सकेंगे। इसके अलावा बस में चढ़ने का स्थान और गंतव्य निर्धारित करके टिकट बुक किया जा सकेगा। हालांकि अभी एप का आधिकारिक नाम और डाउनलोड लिंक जारी नहीं किया गया है। बुकिंग शुरू होने की तारीख भी घोषित नहीं हुई है। ऐसे में यात्रियों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा। किसी अनजान वेबसाइट या अनधिकृत एप से टिकट बुक करने से बचना जरूरी है।
    डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था में भुगतान की प्रक्रिया भी अहम होगी। प्रस्तावित योजना के अनुसार टिकट की राशि सीधे संबंधित बस ऑपरेटर के खाते में जमा होगी। एप के संचालन के लिए टिकट राशि पर 0.1 से 0.2 प्रतिशत तक कन्विनियंस फीस लेने की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि यात्रियों को टिकट बुक करते समय पूरा किराया देना होगा या भुगतान के दूसरे विकल्प भी मिलेंगे इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यूपीआई डेबिट और क्रेडिट कार्ड सहित अन्य भुगतान माध्यमों को लेकर भी अंतिम नियमों का इंतजार है।
    यात्रियों के सामने सबसे बड़ा सवाल बस छूट जाने की स्थिति में टिकट की वैधता को लेकर है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बुक किया गया टिकट केवल निर्धारित बस और समय के लिए मान्य होगा या उसी रूट की अगली बस में भी उसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। टिकट कैंसिल कराने समय बदलने और रिफंड से जुड़े नियम भी घोषित नहीं किए गए हैं। इसलिए यात्रियों को बुकिंग शुरू होने से पहले इन शर्तों की जानकारी लेना जरूरी होगा।
    बसों की निगरानी के लिए भी योजना में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सेवा में शामिल निजी बसों में जीपीएस और कैमरा सिस्टम चालू रखना अनिवार्य होगा। इससे बसों की लोकेशन और संचालन पर नजर रखने में मदद मिलेगी। हालांकि यात्रियों को एप पर लाइव लोकेशन देखने की सुविधा मिलेगी या नहीं इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। बस का प्लेटफॉर्म अधिकृत स्टॉपेज और बोर्डिंग की जगह से जुड़ी जानकारी भी आधिकारिक नियम जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
    योजना में टिकट व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान भी प्रस्तावित है। किराया लेने के बाद टिकट नहीं देने वाले कंडक्टर के खिलाफ केस और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। वहीं बिना टिकट यात्रा करते पकड़े जाने पर यात्रियों पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि जुर्माने की राशि और जांच की प्रक्रिया के विस्तृत नियम अभी सामने नहीं आए हैं। यात्रियों को सलाह है कि किराया देने के बाद टिकट जरूर लें और यात्रा पूरी होने तक उसे सुरक्षित रखें।
    इसी बीच मध्य प्रदेश में सड़क हादसों को कम करने के लिए 38 नए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की तैयारी भी चल रही है। भोपाल ग्वालियर उज्जैन छतरपुर और बैतूल में पांच रीजनल ड्राइविंग सेंटर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके अलावा 33 अन्य प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाने हैं। इनमें 11 केंद्रों के प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं जबकि 22 केंद्रों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। प्रदेश में इंदौर और छिंदवाड़ा में पहले से ड्राइविंग एंड ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट संचालित हैं। इन पहलों से बस परिवहन को अधिक व्यवस्थित बनाने और वाहन चालकों के प्रशिक्षण में सुधार की उम्मीद है।
  • नवरात्रि व्रत में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करें ये 6 मसाले, जानें किन 5 मसालों से परहेज करना चाहिए

    नवरात्रि व्रत में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करें ये 6 मसाले, जानें किन 5 मसालों से परहेज करना चाहिए

    नई दिल्ली । नवरात्रि के दौरान व्रत रखने वाले लोग फलाहार के साथ साबूदाने की खिचड़ी, आलू के पकवान और कुट्टू से बनी चीजें खाते हैं। व्रत के भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए मसालों का चुनाव भी अहम होता है। रोजाना इस्तेमाल होने वाले कई मसालों की जगह व्रत में कुछ खास विकल्प अपनाए जाते हैं। जीरा, काली मिर्च और सेंधा नमक का इस्तेमाल कई घरों में किया जाता है, जबकि कुछ मसालों से परहेज रखा जाता है। हालांकि, व्रत में किन चीजों का इस्तेमाल करना है, यह परिवार की परंपरा और अपने व्रत के नियमों पर निर्भर करता है।

    व्रत के खाने में जीरे का इस्तेमाल कई घरों में किया जाता है। इसकी सौंधी खुशबू साबूदाने की खिचड़ी और उबले आलू जैसी साधारण डिश का स्वाद बढ़ा सकती है। भुने हुए जीरे का पाउडर दही या रायते में मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी तरह, काली मिर्च को तीखापन लाने के विकल्प के तौर पर चुना जाता है। जिन लोग व्रत में लाल मिर्च पाउडर नहीं खाते, वे कुटी हुई काली मिर्च से आलू, खीरे के रायते और फ्रूट चाट का स्वाद बढ़ा सकते हैं।

    सेंधा नमक भी व्रत के भोजन में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख विकल्प है। कई परिवार नवरात्रि के दौरान सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, नमक के इस्तेमाल को लेकर अपने व्रत के नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। मीठे पकवानों में हरी इलायची का इस्तेमाल किया जा सकता है। खीर, दूध से बनी मिठाइयों और मखाने के मीठे पकवानों में इसकी सुगंध स्वाद को बेहतर बनाती है। दालचीनी भी कुछ व्यंजनों में इस्तेमाल की जाती है। इसे दूध में उबालकर या मीठे पकवानों में थोड़ी मात्रा में डाला जा सकता है, लेकिन व्रत में इसका इस्तेमाल घर की परंपरा के अनुसार ही किया जाता है।

    अजवाइन भी उन मसालों में शामिल है, जिनका इस्तेमाल कुछ घरों में व्रत के नमकीन पकवानों और स्नैक्स में किया जाता है। इसकी तेज खुशबू खाने का स्वाद बढ़ा सकती है। हालांकि, हर परिवार में व्रत के दौरान अजवाइन खाने की अनुमति नहीं होती। इसलिए किसी भी मसाले को इस्तेमाल करने से पहले अपने यहां अपनाए जाने वाले नियमों को ध्यान में रखना चाहिए।

    व्रत के दौरान कुछ मसालों से परहेज भी किया जाता है। इनमें हींग शामिल है, जिसका इस्तेमाल सामान्य दिनों में सब्जियों और दालों में तड़का लगाने के लिए होता है। नवरात्रि के व्रत में कई परिवार हींग नहीं खाते। पैकेट में मिलने वाली हींग में गेहूं का आटा या दूसरी सामग्री भी हो सकती है, इसलिए सामग्री की जानकारी रखना उपयोगी है। राई भी रोजाना के भोजन में तड़के और अचार के लिए इस्तेमाल होती है, लेकिन कई घरों में व्रत के दौरान इसे नहीं खाया जाता।

    मेथी दाना भी उन मसालों में शामिल है, जिनसे व्रत में कई परिवार दूरी रखते हैं। इसका स्वाद हल्का कड़वा होता है और इसे अचार, मसालों के मिश्रण तथा सब्जियों में इस्तेमाल किया जाता है। हल्दी को लेकर भी नियम अलग-अलग हैं। रोजाना के भोजन में इस्तेमाल होने वाली हल्दी कुछ परिवार नवरात्रि के व्रत वाले पकवानों में नहीं डालते। इसी तरह, लाल मिर्च पाउडर से भी कई लोग परहेज करते हैं और तीखापन लाने के लिए काली मिर्च चुनते हैं। हरी मिर्च के इस्तेमाल को लेकर भी परिवारों की परंपराएं अलग हो सकती हैं।

    इस तरह, नवरात्रि के व्रत में मसालों का चयन करते समय केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि अपने घर में माने जाने वाले नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी है। जीरा, काली मिर्च, सेंधा नमक, हरी इलायची, दालचीनी और अजवाइन का इस्तेमाल कुछ घरों में किया जाता है, जबकि हींग, राई, मेथी दाना, हल्दी और लाल मिर्च पाउडर से परहेज रखा जा सकता है। सभी मसालों के लिए एक जैसा नियम नहीं होता, इसलिए व्रत का भोजन तैयार करते समय पारिवारिक परंपरा के अनुसार फैसला करना चाहिए।

  • राजस्थान बॉर्डर पर ड्रोन से हथियारों की खेप बरामद, 600 कारतूस और विस्फोटक मिले, दो आरोपी गिरफ्तार

    राजस्थान बॉर्डर पर ड्रोन से हथियारों की खेप बरामद, 600 कारतूस और विस्फोटक मिले, दो आरोपी गिरफ्तार


    जयपुर। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रोन के जरिए गिराई गई हथियारों और विस्फोटकों की खेप बरामद की है। रावला क्षेत्र के एक खेत से 7.7 किलोग्राम प्लास्टिक एक्सप्लोसिव, दो पिस्टल, करीब 600 कारतूस और अन्य संदिग्ध उपकरण मिले हैं। मामले में पंजाब निवासी लखविंद्र सिंह और सुखविंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया है। राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने संयुक्त अभियान चलाकर यह कार्रवाई की।

    ANTF के आईजी विकास कुमार के मुताबिक, ड्रोन की तीन उड़ानों के जरिए सीमा क्षेत्र में हथियार, कारतूस और विस्फोटक गिराए गए थे। बरामद सामग्री की गिनती और जांच की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि खेप में आईईडी बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और विस्फोटक से जुड़ी अन्य सामग्री भी शामिल है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर से विशेष बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया है, जो मौके पर पहुंचकर विस्फोटकों की जांच और उन्हें निष्क्रिय करने की कार्रवाई करेगा।

    खेत में मिले तीन पैकेट, विस्फोटक भी बरामद

    जानकारी के मुताबिक, श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र में सीमा के पास 12 केएनडी इलाके के एक खेत में ड्रोन से तीन पैकेट गिराए गए थे। तलाशी के दौरान इन पैकेटों से 7.7 किलोग्राम प्लास्टिक एक्सप्लोसिव, दो पिस्टल, करीब 600 कारतूस और चार मैगजीन बरामद हुईं।

    इसके अलावा एक रिमोट, दो केपलर और चार बैटरियां भी मिली हैं। सुरक्षा एजेंसियां बरामद सामग्री की प्रकृति, इस्तेमाल और संभावित खतरे का आकलन कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, विस्फोटकों की स्थिति की जांच के बाद उन्हें निष्क्रिय करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हथियारों और विस्फोटकों की खेप किसके लिए भेजी गई थी, इसे आगे कहां पहुंचाया जाना था और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

    मजदूर बनकर रह रहे थे दोनों संदिग्ध

    इस मामले में गिरफ्तार लखविंद्र सिंह और सुखविंद्र सिंह पंजाब के रहने वाले हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दोनों रावला मंडी क्षेत्र में मजदूर बनकर रह रहे थे। जांच एजेंसियों को संदेह है कि वे ड्रोन से गिराए गए पैकेट लेने के लिए वहां पहुंचे थे।

    एजेंसियां उन बाइक सवार युवकों की भी तलाश कर रही हैं, जो कथित तौर पर दोनों को रावला छोड़ने आए थे। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संदिग्धों का संपर्क किन लोगों से था और हथियारों की खेप मंगाने के पीछे किसका निर्देश था।

    मामले की जांच जारी होने के कारण अधिकारियों ने गिरफ्तार आरोपियों से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की है।

    एक महीने से संदिग्धों की गतिविधियों पर थी नजर

    ANTF के आईजी विकास कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई पहले से मिली खुफिया सूचना के आधार पर की गई। एजेंसी को करीब एक महीने पहले जानकारी मिली थी कि पंजाब के दो संदिग्ध किसी खास मकसद से राजस्थान के सीमावर्ती इलाके में मौजूद हैं। इसके बाद टीम ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी थी।

    विकास कुमार के मुताबिक, संदिग्धों की निगरानी के दौरान बाद में सूचना मिली कि हथियारों और विस्फोटकों की खेप अगले दिन पहुंचने वाली है। इसके बाद ANTF और BSF ने संयुक्त अभियान की योजना बनाई और कार्रवाई करते हुए कथित तौर पर खेप लेने पहुंचे दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया।

    फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां बरामद हथियारों, विस्फोटकों और अन्य उपकरणों की जांच के साथ पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। जांच का प्रमुख पहलू यह है कि खेप कहां से भेजी गई थी और इसे हासिल करने के बाद किस ठिकाने तक पहुंचाया जाना था।

  • 14 अक्टूबर को अस्त होंगे शुक्र, 4 राशियों को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की सलाह

    14 अक्टूबर को अस्त होंगे शुक्र, 4 राशियों को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की सलाह


    नई दिल्ली। सुख-सुविधा, धन और वैभव का कारक माने जाने वाला शुक्र ग्रह 14 अक्टूबर को तुला राशि में अस्त होने जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र के अस्त रहने की अवधि कुछ राशियों के लिए आर्थिक और करियर से जुड़ी चुनौतियां लेकर आ सकती है। ज्योतिषविदों के मुताबिक, शुक्र 14 से 30 अक्टूबर तक अस्त रहेंगे। इस दौरान वृषभ, मिथुन, तुला और मकर राशि के जातकों को खर्च, निवेश और कामकाज से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने की सलाह दी गई है। हालांकि, ये ज्योतिषीय आकलन हैं, इन्हें निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।

    वृषभ राशि: सुख-सुविधाओं पर पड़ सकता है असर
    ज्योतिषीय आकलन के मुताबिक, शुक्र के अस्त होने की अवधि में वृषभ राशि के जातकों को स्वास्थ्य और ऊर्जा से जुड़ी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। शारीरिक सक्रियता में कमी आने और कामकाज में उत्साह घटने की आशंका जताई गई है।

    करियर के मोर्चे पर भी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। जिन सुख-सुविधाओं या खुशियों की उम्मीद है, उनके लिए कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में अपनी सेहत का ध्यान रखने और कामकाज में धैर्य बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    मिथुन राशि: नौकरी और कारोबार में सावधानी जरूरी
    मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय करियर की दृष्टि से थोड़ा चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाने में परेशानी हो सकती है। वहीं, कारोबारियों को सरकारी नियमों, नीतियों या प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।

    शेयर बाजार, ट्रेडिंग या सट्टे से जुड़े लोगों को खास तौर पर जोखिम भरे फैसलों से बचने की सलाह दी गई है। जल्दबाजी में निवेश करने के बजाय वित्तीय स्थिति का आकलन करना और सोच-समझकर निर्णय लेना बेहतर रहेगा।

    तुला राशि: साझा निवेश और रिश्तों पर ध्यान दें
    तुला राशि के जातकों को इस अवधि में सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। दूसरों के प्रभाव में आकर निर्णय लेने से परेशानी बढ़ने की आशंका जताई गई है। आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है और सुख-सुविधाओं को बनाए रखने के लिए जरूरत से ज्यादा खर्च करने का दबाव भी बन सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जीवनसाथी के साथ साझा धन, संयुक्त संपत्ति या निवेश से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है। ससुराल पक्ष के साथ संबंधों में भी तनाव की आशंका जताई गई है। ऐसे में बातचीत और आर्थिक फैसलों में पारदर्शिता बनाए रखना उपयोगी रहेगा।

    मकर राशि: आय-खर्च का संतुलन बनाए रखें
    मकर राशि के जातकों के लिए कार्यक्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका जताई गई है। करियर में मनचाही प्रगति हासिल करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। ज्योतिषीय आकलन में छिपे विरोधियों के कारण कामकाज प्रभावित होने की संभावना भी बताई गई है।

    आर्थिक मोर्चे पर आय और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में गैरजरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखने और बजट के अनुसार चलने की सलाह दी गई है। विद्यार्थियों को पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं।

  • जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के बाद CJP के तीन नेता गिरफ्तार, बिना अनुमति कर रहे थे प्रवेश

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के बाद CJP के तीन नेता गिरफ्तार, बिना अनुमति कर रहे थे प्रवेश


    नई दिल्ली। दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को एहतियातन गिरफ्तार किया गया है। तीनों को एसईएम कोर्ट में पेश किया गया। इससे पहले पुलिस ने कथित तौर पर बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने के मामले में सौरव दास, आशुतोष रांका और संगठन के अन्य सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

    CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया था कि तीनों नेताओं को अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक, प्राथमिकी में शांति बनाए रखने के लिए पहले दिए गए पीस बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन से संबंधित धाराएं भी शामिल की गई हैं।

    यह कार्रवाई उस समय हुई, जब CJP के कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग के बीच जंतर-मंतर क्षेत्र में दाखिल हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। हाल ही में जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया गया है।

    CJP का दावा- करीब 11 कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए

    मंगलवार सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका और संगठन के कुछ अन्य सदस्यों को निषेधाज्ञा का कथित उल्लंघन कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। CJP का दावा है कि उसके करीब 11 सदस्यों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

    पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को द्वारका जिले के जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया। इस दौरान कुछ CJP कार्यकर्ता थाने के बाहर जमा हो गए, जिसके बाद थाने और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई।

    CJP के संस्थापक दीपके ने संगठन की कार्रवाई को जंतर-मंतर पर दोबारा अपना अधिकार जताने की कोशिश बताया। उनका कहना है कि प्रदर्शन स्थल को निर्धारित स्थानों की सूची से हटाए जाने के बावजूद संगठन का आंदोलन जारी रहेगा।

    एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर मिली थी रिहाई

    इससे पहले शनिवार को भी दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया था। उस समय कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP का प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं हो सका था।

    तीनों को एक दिन बाद इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। पुलिस के अनुसार, मौजूदा मामले में पीस बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

    प्रदर्शन के लिए नए स्थान तय किए जाने पर विवाद

    दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को एक स्थायी आदेश जारी किया था। इसमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को धरना-प्रदर्शन के लिए नए निर्धारित स्थलों के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।

    CJP का कहना है कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने की घोषणा 12 अक्टूबर को हुई। संगठन के मुताबिक, इसी दिन उसके प्रतिनिधि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय कराने के उद्देश्य से संसद मार्ग थाने पहुंचे थे।

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश के बाद पुलिस की कार्रवाई से CJP और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। संगठन ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है, जबकि पुलिस ने निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन और शांति बनाए रखने की शर्तों से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है।

  • वास्तु टिप्स: घर में इन जगहों पर मनी प्लांट रखने से बचें, जानें किस दिशा में लगाना माना जाता है शुभ

    वास्तु टिप्स: घर में इन जगहों पर मनी प्लांट रखने से बचें, जानें किस दिशा में लगाना माना जाता है शुभ

    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में मनी प्लांट को शुभ पौधों में गिना जाता है। मान्यता है कि इसे घर में लगाने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और खुशहाली आती है। हालांकि, वास्तु के नियमों के अनुसार इसे घर में रखते समय दिशा और स्थान का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। गलत जगह पर रखने से इसकी शुभता और प्रभाव कम होने की मान्यता है। इसलिए मनी प्लांट लगाने से पहले इससे जुड़े कुछ नियमों की जानकारी रखना उपयोगी हो सकता है।

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मनी प्लांट को घर की उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने से बचना चाहिए। इस दिशा को वास्तु में शुभ माना जाता है, लेकिन मनी प्लांट रखने के लिए इसे उपयुक्त नहीं बताया गया है। मान्यता के मुताबिक, पौधे को सही दिशा में रखने से इसका सकारात्मक प्रभाव बना रहता है। इसी वजह से मनी प्लांट की जगह तय करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

    मनी प्लांट को ऐसी जगह रखने से भी बचना चाहिए, जहां उस पर सीधे तेज धूप पड़ती हो। पौधे को बहुत अधिक धूप मिलने से इसकी पत्तियां जल्दी पीली पड़ सकती हैं। इसे ऐसी जगह रखना बेहतर माना जाता है, जहां हल्की रोशनी आती हो। पौधे की पत्तियों का हरा और स्वस्थ बने रहना इसके रखरखाव के लिए भी जरूरी है। इसलिए घर में मनी प्लांट रखने के लिए ऐसी जगह चुननी चाहिए, जहां उसे पर्याप्त रोशनी मिले, लेकिन सीधी और तेज धूप का सामना न करना पड़े।

    मनी प्लांट की बेल को लेकर भी वास्तु में कुछ मान्यताएं हैं। इसके अनुसार, बेल को जमीन पर फैलने देने के बजाय ऊपर की ओर बढ़ने के लिए सहारा देना चाहिए। इसके लिए स्टैंड, रेलिंग या किसी दूसरे उपयुक्त सहारे का इस्तेमाल किया जा सकता है। वास्तु मान्यता के अनुसार, ऊपर की ओर चढ़ती हुई मनी प्लांट की बेल तरक्की और विकास का संकेत मानी जाती है। इस वजह से पौधे की बेल को व्यवस्थित रखना जरूरी बताया जाता है।

    अगर मनी प्लांट को बेडरूम में रखा जा रहा है, तो इसे बिस्तर के ठीक पास रखने से बचने की सलाह दी जाती है। वास्तु नियमों के मुताबिक, सोने की जगह के बिल्कुल नजदीक इस पौधे को रखना उचित नहीं माना जाता। इसलिए इसे बेड के पास मौजूद साइड टेबल या दराज पर रखने से बचना चाहिए। पौधे के लिए ऐसी जगह चुनना बेहतर माना जाता है, जो बिस्तर से कुछ दूरी पर हो।

    मनी प्लांट की देखभाल करते समय सूखी पत्तियों को हटाने और गमले की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि पौधे की पत्तियां सूख गई हैं, तो उन्हें हटा देना चाहिए। वहीं, गमला खराब हो गया हो, तो उसे बदलने की कोशिश करनी चाहिए। वास्तु मान्यताओं में मनी प्लांट का सूखा रहना अच्छा नहीं माना जाता है। इसलिए पौधे को स्वस्थ रखने और उसकी नियमित देखभाल करने की सलाह दी जाती है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, मनी प्लांट लगाने के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण को उपयुक्त माना जाता है। मान्यता है कि इस दिशा में रखा गया मनी प्लांट अधिक प्रभावी होता है और घर में बरकत लाता है। ऐसे में पौधे को रखने के लिए जगह चुनते समय दक्षिण-पूर्व दिशा पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, ये बातें वास्तु शास्त्र से जुड़ी मान्यताओं पर आधारित हैं।