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  • PWD इंजीनियर आरती यादव की मौत मामले में बड़ा मोड़, पति निलेश यादव पर प्रताड़ना का केस दर्ज

    PWD इंजीनियर आरती यादव की मौत मामले में बड़ा मोड़, पति निलेश यादव पर प्रताड़ना का केस दर्ज


    इंदौर। इंदौर के पलासिया इलाके में PWD की महिला इंजीनियर आरती यादव की मौत के मामले में पुलिस ने करीब 20 दिन बाद उनके पति निलेश यादव के खिलाफ प्रताड़ना से जुड़ी धाराओं में FIR दर्ज की है। आरती की मौत के बाद मायके पक्ष ने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच के लिए SIT का गठन किया था। जांच के बाद पलासिया पुलिस ने गुरुवार देर रात पति के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। पुलिस अब FIR में लगाए गए आरोपों और सामने आए साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है।

    आरती यादव PWD में वरिष्ठ इंजीनियर के पद पर पदस्थ थीं। उनके पति निलेश यादव भी लोक निर्माण विभाग में कार्यरत हैं। दोनों की शादी करीब 10 साल पहले हुई थी और दंपती की दो बेटियां हैं। आरती का मायका इंदौर के सुखलिया इलाके में बताया गया है जबकि उनका ससुराल झाबुआ में है। घटना के बाद मायके पक्ष ने आरोप लगाया था कि पति पत्नी के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था और इसी वजह से आरती मानसिक दबाव में थीं।

    पुलिस के मुताबिक आरती ने पलासिया स्थित अपने सरकारी क्वार्टर में फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। इसके बाद उनके पति निलेश उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में उपचार के दौरान अगले दिन आरती की मौत हो गई। घटना के बाद मामला पहले मर्ग के तौर पर जांच में लिया गया था। लेकिन मायके पक्ष की शिकायत और लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया।

    जांच के लिए गठित SIT ने मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को खंगाला। पुलिस ने आरती के मायके पक्ष के लोगों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा पति और पत्नी के संबंधों तथा घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने के लिए अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की गई। दंपती की दोनों बेटियों के बयान भी जांच का हिस्सा रहे। पुलिस ने इन बयानों के साथ उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया।

    इससे पहले आरती के भाई उपेन्द्र ने दोनों के बीच लंबे समय से तनाव होने की बात कही थी। मायके पक्ष ने पुलिस से पूरे मामले की गहराई से जांच करने और यदि प्रताड़ना के आरोप सही पाए जाएं तो कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

    आरती की मौत से जुड़े मामले में सामने आए कुछ अन्य दावों की भी अलग-अलग रिपोर्टों में चर्चा हुई थी। मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए थे और घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाए थे। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस सभी तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाकर आगे बढ़ रही है।

    अब पति निलेश यादव के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मामले में कानूनी जांच का नया चरण शुरू हो गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आरती को कथित तौर पर किस तरह की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था और उसका उनकी मौत से कोई संबंध था या नहीं। जांच में सामने आने वाले बयान और अन्य साक्ष्य आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेंगे।

    फिलहाल पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऐसे संवेदनशील मामले में आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। आरती की मौत के वास्तविक कारणों और पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • धार्मिक शुचिता को ध्यान में रखते हुए रामलला के अर्चक अब बिना सिलाई वाले पीत वस्त्रों में नजर आएंगे।

    धार्मिक शुचिता को ध्यान में रखते हुए रामलला के अर्चक अब बिना सिलाई वाले पीत वस्त्रों में नजर आएंगे।


    नई दिल्ली । 
    अयोध्या स्थित भव्य राम जन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की पूजा-अर्चना व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित तथा मर्यादित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। मंदिर ट्रस्ट द्वारा तय की गई नई व्यवस्था के अंतर्गत अब गर्भगृह में सेवा देने वाले सभी अर्चक एक समान पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएंगे। यह नया ड्रेस कोड 15 अगस्त से प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

    नए ड्रेस कोड के दिशानिर्देशों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु के दौरान सभी अर्चक नीचे पीली धोती और ऊपर बिना सिला हुआ पीला रेशमी अंगवस्त्र धारण करेंगे। कंधों पर रखा जाने वाला यह अंगवस्त्र पूरी तरह से बिना सिलाई का होगा। धार्मिक परंपराओं में गर्भगृह की पवित्रता और शुचिता को बनाए रखने के लिए बिना सिले रेशमी वस्त्रों के उपयोग को विशेष रूप से प्राथमिकता दी जाती है।

    मौसम में परिवर्तन के अनुसार पुजारियों के परिधान सामग्री में बदलाव किया जाएगा, लेकिन वस्त्रों का रंग पीला ही रहेगा। आगामी शीत ऋतु के आगमन पर मौसम के अनुकूल पीले रंग के ऊनी वस्त्र उपलब्ध कराए जाएंगे। धार्मिक न्यास समिति के अनुसार, सनातन और वैष्णव परंपराओं में सूती अथवा सिले हुए कपड़ों की तुलना में रेशमी और ऊनी वस्त्रों को पूजा-अर्चना के दौरान सर्वाधिक शुद्ध माना गया है।

    पूजा-अर्चना में संलग्न पुजारियों का कार्य समय और रोस्टर प्रत्येक माह की अमावस्या और पूर्णिमा तिथियों के अनुसार परिवर्तित होता रहता है। रोस्टर में बदलाव के साथ ही नए वस्त्र कोड का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि इस पहल का उद्देश्य पूजा व्यवस्था में एकरूपता और धार्मिक मर्यादाओं का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना है।

    अयोध्या में रामलला के नए ड्रेस कोड और धार्मिक अनुष्ठानों की शुचिता को लेकर देश भर के श्रद्धालुओं में विशेष श्रद्धा देखी जा रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और उज्जैन जैसे सांस्कृतिक शहरों के राम भक्तों और धार्मिक विद्वानों ने भी इस पारंपरिक पहल का स्वागत किया है। मध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भी इस प्रकार की वैदिक परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा मंदिर परिसर की सुरक्षा, प्रबंधन और दान व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। पूर्व में सामने आई व्यवस्थात्मक कमियों को दूर करते हुए प्रबंधन में कई व्यापक सुधार किए गए हैं, जिसमें कर्मचारियों और अर्चकों की कार्यशैली को और अधिक अनुशासित बनाना शामिल है।

    वैदिक आचार्यों और धार्मिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि पवित्र गर्भगृह के भीतर मर्यादा और शुचिता का पालन सर्वोपरि होता है। बिना सिले वस्त्र धारण कर पूजा-अर्चना करने की यह प्राचीन पद्धति राम मंदिर की भव्यता और सनातन संस्कृति के गौरव को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगी।

    इस नए नियम के लागू होने के बाद मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन के साथ-साथ अर्चकों की एकरूप और सात्विक वेशभूषा का अनूठा अनुभव प्राप्त होगा, जो मंदिर की पावन छवि को एक नया आयाम प्रदान करेगा।

  • इंदौर में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज! घने बादलों के बीच तेज बारिश का अनुमान, सीजन में 18 इंच बरसा पानी

    इंदौर में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज! घने बादलों के बीच तेज बारिश का अनुमान, सीजन में 18 इंच बरसा पानी


    इंदौर। इंदौर में शुक्रवार सुबह से मौसम ने करवट ली और शहर के आसमान पर घने बादल छा गए। कई इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी देखने को मिली। लंबे समय से रुक रुककर हो रही बारिश के बीच अब मौसम विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई है। बंगाल की खाड़ी में बने मौसम सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश में मानसून के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। मौजूदा मौसम पूर्वानुमान में भी इंदौर के लिए आने वाले दिनों में बादल और बारिश का दौर बने रहने के संकेत हैं।

    इस मानसून सीजन में इंदौर में अब तक करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। हालांकि अगस्त की शुरुआत से अब तक बारिश का जोर बहुत ज्यादा नहीं रहा है। शहर में कई दिनों से कभी बूंदाबांदी तो कभी हल्की बारिश का सिलसिला जारी है लेकिन किसी दिन भी बारिश ने लंबा और तेज दौर नहीं बनाया। ऐसे में मौसम के जानकारों की नजर अब मानसून के बचे करीब डेढ़ महीने पर है। अगर आने वाले दिनों में सक्रिय सिस्टम बनते रहे तो इंदौर में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर जाने की संभावना बन सकती है।

    मौसम में बदलाव की बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक 12 अगस्त को उत्तर बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के तटवर्ती इलाकों के पास निम्न दबाव का क्षेत्र बना था। इसके बाद यह सिस्टम और सक्रिय हुआ। इसके प्रभाव से मध्य भारत में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना बनी है।

    इस मौसम सिस्टम का असर मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा दिखाई दे सकता है। कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इंदौर में इसका असर बादल छाने और बारिश के दौर के रूप में देखने को मिल सकता है। मौजूदा पूर्वानुमान में इंदौर में 14 अगस्त से आगे भी बादल और बारिश की संभावना बनी हुई है।

    अगस्त का महीना इंदौर के लिए बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। शहर में इस महीने औसतन करीब 10 से 11 इंच बारिश होती है और कई दिनों तक बारिश का दौर देखने को मिलता है। इतिहास में अगस्त के दौरान इससे कहीं ज्यादा बारिश भी दर्ज हो चुकी है। वर्ष 1944 में अगस्त महीने में करीब 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड बताया जाता है। वहीं 22 अगस्त 2020 को 24 घंटे के दौरान करीब साढ़े 10 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    इस लिहाज से अगस्त के बाकी दिनों में बनने वाले मौसम सिस्टम इंदौर के लिए काफी अहम रहेंगे। यदि बंगाल की खाड़ी से लगातार सिस्टम बनते रहे और मानसून ट्रफ सक्रिय रही तो शहर में बारिश का जोर बढ़ सकता है। इससे न केवल मौजूदा बारिश के आंकड़े में सुधार होगा बल्कि पूरे सीजन की कुल बारिश भी औसत के आसपास या उससे ऊपर पहुंच सकती है।

    फिलहाल शुक्रवार सुबह घने बादलों और बूंदाबांदी ने शहरवासियों को एक बार फिर तेज बारिश की उम्मीद दी है। हालांकि किसी एक दिन के मौसम को देखकर पूरे सीजन की स्थिति तय नहीं की जा सकती। आने वाले दिनों में सिस्टम की दिशा और उसकी सक्रियता यह तय करेगी कि इंदौर में बारिश कितनी तेज और कितने लंबे दौर तक होती है। फिलहाल मौसम का बदला मिजाज मानसून के लिए राहत भरे संकेत जरूर दे रहा है।

  • संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    नई दिल्ली । संसद के हाल ही में संपन्न हुए मानसून सत्र के दौरान देश की राजनीतिक फिजां में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सत्र की शुरुआत से पहले जहां सत्तारूढ़ गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा था, वहीं सत्र के दौरान हुए घटनाक्रमों और छात्र आंदोलनों के कारण विपक्षी दल सरकार पर रणनीतिक दबाव बनाने में पूरी तरह सफल रहे।

    मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले राजनीतिक समीकरण एनडीए के पक्ष में दिखाई दे रहे थे। विभिन्न राज्यों के राजनीतिक घटनाक्रमों से विपक्षी दल मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस कर रहे थे। हालांकि, सत्र के दौरान देश के कई हिस्सों में शुरू हुए छात्र आंदोलनों, पेपर लीक विवादों और पुलिस कार्रवाई के मुद्दों ने पूरे परिदृश्य को बदलकर रख दिया।

    संसद भवन के भीतर और बाहर कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट हुए विपक्षी दलों ने इन संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सरकार के खिलाफ बने इस माहौल को बांकीपुर और दतिया उप-चुनावों में सत्तारूढ़ दल को मिली शिकस्त ने और अधिक बल दिया। इन चुनावी नतीजों से विपक्षी सांसदों का उत्साह और आक्रामकता दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    विपक्ष के कड़े तेवरों और लगातार जारी हंगामे के कारण सरकार को कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर अपने कदम पीछे खींचने पड़े। एफसीआरए संशोधन विधेयक को आगे की समीक्षा के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े विधेयकों पर भी विस्तृत चर्चा संभव नहीं हो सकी।

    सत्र के दौरान विभिन्न क्षेत्रीय दलों के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अलग-अलग मुद्दों पर एक-दूसरे का पुरजोर समर्थन किया। नीट परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों पर हुई कार्रवाई के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एक सुर में गृह मंत्री से जवाब मांगने पर अड़ा रहा, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

    संसदीय गतिरोध का असर देश के विभिन्न राज्यों की राजनीति पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के दतिया उप-चुनाव में आए नतीजों और राज्य के युवाओं से जुड़े रोजगार व परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में भी छात्र संगठनों द्वारा इन मुद्दों को लेकर लगातार संवाद और प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

    मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा विवाद, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा अधूरी रह गई। लगातार होते स्थगन के कारण विभिन्न क्षेत्रों के सांसदों द्वारा उठाए जाने वाले शून्यकाल के मुद्दे भी सदन के पटल पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र में जिस तरह से विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है, उससे आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। छात्र आंदोलनों और जनहित के मुद्दों को आगे भी बरकरार रखना विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती सिद्ध होगा।

  • पूर्णिया के झंडा चौक पर 1947 की ऐतिहासिक रात से लगातार निभाई जा रही मध्यरात्रि ध्वजारोहण की अनोखी परंपरा।

    पूर्णिया के झंडा चौक पर 1947 की ऐतिहासिक रात से लगातार निभाई जा रही मध्यरात्रि ध्वजारोहण की अनोखी परंपरा।

    नई दिल्ली । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब पूरा देश 15 अगस्त की सुबह राष्ट्रीय ध्वज फहराने और जश्न की तैयारियों में जुटा होता है, वहीं बिहार के पूर्णिया जिले में एक अनोखी और ऐतिहासिक परंपरा दशकों से निभाई जा रही है। शहर के भट्ठा बाजार स्थित प्रसिद्ध झंडा चौक पर 14 अगस्त की मध्यरात्रि ठीक 12 बजकर 01 मिनट पर तिरंगा फहराया जाता है। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी यह ऐतिहासिक और गौरवशाली परंपरा विगत 79 वर्षों से लगातार बिना किसी रुकावट के जारी है।

    इस अनूठी परंपरा की शुरुआत 14 अगस्त 1947 की उस ऐतिहासिक रात को हुई थी, जब पूरा देश आजादी की औपचारिक घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। उस वक्त पूर्णिया के स्थानीय नागरिक और स्वतंत्रता सेनानी भट्ठा बाजार स्थित एक दुकान के बाहर रेडियो पर प्रसारित हो रहे समाचार सुन रहे थे। जैसे ही ऑल इंडिया रेडियो पर देश के स्वतंत्र होने की आधिकारिक घोषणा हुई, पूरा क्षेत्र देश भक्ति के जयकारों से गूंज उठा।

    स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह और उनके सहयोगियों ने तय किया कि आजादी की पहली सांस के साथ ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा। उन्होंने तुरंत बांस और रस्सी की व्यवस्था की और रात ठीक 12:01 बजे तिरंगा फहरा दिया। इस ऐतिहासिक घटना के बाद ही उस स्थान का नाम औपचारिक रूप से ‘झंडा चौक’ रखा गया और वहां मौजूद लोगों ने हर वर्ष इस परंपरा को इसी समय दोहराने का सामूहिक संकल्प लिया।

    वर्ष 1947 में ली गई वह शपथ आज भी पूरी निष्ठा और राष्ट्रीय सम्मान के साथ निभाई जा रही है। शुरुआत करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के निधन के बाद उनकी अगली पीढ़ियां इस धरोहर और परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता हर साल 14 अगस्त की रात झंडा चौक पर एकत्र होते हैं और घड़ी की सुई 12:01 पर पहुंचते ही राष्ट्रगान और देशभक्ति के नारों के साथ ध्वजारोहण करते हैं।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्वतंत्रता दिवस को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में जहां 15 अगस्त की सुबह प्रभात फेरियों और मुख्य समारोहों के साथ तिरंगा फहराया जाता है, वहीं बिहार के पूर्णिया की यह मध्यरात्रि ध्वजारोहण की परंपरा पूरे देश के लिए कौतूहल और प्रेरणा का विषय बनी रहती है।

    हर साल की तरह इस बार भी 14 अगस्त की देर रात झंडा चौक पर भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज नजर आया। रोशनी से जगमगाते चौराहे पर रात 12:01 बजते ही जैसे ही तिरंगा लहराया गया, पूरा माहौल भारत माता की जय और वंदे मातरम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

    यह ऐतिहासिक आयोजन केवल एक रस्म नहीं बल्कि उन अमर सेनानियों के प्रति श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। पूर्णिया वासियों के लिए यह क्षण अत्यंत गर्व और स्वाभिमान का प्रतीक है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और राष्ट्रीय इतिहास से जोड़े रखता है।

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा भी इस वार्षिक आयोजन के अवसर पर सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं। 79 वर्षों से चली आ रही यह निष्ठा साबित करती है कि देशभक्ति का यह जज्बा आने वाले कई दशकों तक इसी तरह अमर रहेगा।

  • नालसर लॉ यूनिवर्सिटी विवाद के बाद बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ विपक्ष ने खोला मोर्चा।

    नालसर लॉ यूनिवर्सिटी विवाद के बाद बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ विपक्ष ने खोला मोर्चा।


    नई दिल्ली । 
    बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा एक नए प्रशासनिक और वित्तीय विवाद के केंद्र में आ गए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने बीसीआई के आधिकारिक बजटीय खर्चों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हुए संगठन की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर तीखा हमला बोला है।

    यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब बीसीआई ने हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों के वकालत नामांकन पर अस्थायी रोक लगाने का प्रशासनिक आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के आमंत्रण का विरोध करने वाले छात्र जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहे हैं, इसलिए उनसे संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी।

    हालांकि, इस फैसले के सामने आते ही विधिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में व्यापक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। विभिन्न स्तरों पर हुए विरोध और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सलाह के बाद बीसीआई ने कुछ ही घंटों के भीतर अपना आदेश वापस ले लिया। बीसीआई अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि प्राप्त फीडबैक के आधार पर यह पाया गया कि छात्रों की सीधी संलिप्तता नहीं थी, जिसके बाद सभी कार्यवाहियां समाप्त कर दी गईं।

    इस प्रशासनिक यू-टर्न के तुरंत बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने बीसीआई के वार्षिक आय-व्यय के आंकड़ों को सार्वजनिक करते हुए अध्यक्ष की घेराबंदी शुरू कर दी। प्रवक्ता सौरव दास ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के ऑडिटेड आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बैठकों, सम्मेलनों और यात्रा-आवास मद में करोड़ों रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है।

    सौरव दास ने मीडिया के सामने सवाल उठाया कि संस्था द्वारा इतनी बड़ी धनराशि खर्च किए जाने के बावजूद युवा वकीलों के कल्याण और देश भर के लॉ स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कोई ठोस योजना लागू नहीं की गई है। उन्होंने बीसीआई नेतृत्व के लंबे कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की है।

    देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश के विधिक गलियारों और कानून के छात्रों के बीच भी इस पूरे घटनाक्रम की व्यापक चर्चा हो रही है। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर के लॉ कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र और युवा वकील बार काउंसिल की नीतियों तथा हालिया आदेशों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

    विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी स्वायत्त और शीर्ष विधिक संस्था को अपने फैसलों में अधिक पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता है। छात्रों पर प्रतिबंध लगाने और उसे तुरंत वापस लेने की घटना से संस्था की छवि पर असर पड़ा है, जिसकी भरपाई के लिए प्रशासनिक सुधार जरूरी हैं।

    वर्तमान में इस विवाद के बाद बीसीआई नेतृत्व पर वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बीसीआई प्रबंधन इन वित्तीय आरोपों और प्रशासनिक फैसलों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है।

  • नागालैंड के मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान नागा व्यक्ति का मजेदार वीडियो शेयर किया।

    नागालैंड के मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान नागा व्यक्ति का मजेदार वीडियो शेयर किया।


    नई दिल्ली । 
    पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड के पर्यटन एवं उच्च शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक बेहद रोचक और मनोरंजक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में एक स्थानीय नागा व्यक्ति को डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया के दौरान अपनी आंखों को मोबाइल स्कैनर के सामने पहचान कराने में आ रही परेशानियों का सामना करते हुए देखा जा सकता है।

    साझा किए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति अपना बायोमेट्रिक सत्यापन कराने के लिए एक खुले स्थान पर बैठा हुआ है। जब संबंधित अधिकारी मोबाइल डिवाइस के स्कैनर कैमरे से उसकी आंखों की पुतली को स्कैन करने का प्रयास करते हैं, तो डिवाइस का सॉफ्टवेयर छोटी आंखों के कारण पुतली की स्पष्ट पहचान नहीं कर पाता है।

    स्कैनर द्वारा पहचान न कर पाने की स्थिति में वहां उपस्थित दो-तीन अन्य लोग उस व्यक्ति की सहायता के लिए आगे आते हैं। वे उंगलियों के सहारे उसकी पलकों को थोड़ा चौड़ा करने का प्रयास करते हैं ताकि कैमरा पुतलियों को स्पष्ट रूप से स्कैन कर सके। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वहां मौजूद लोग और स्वयं वह व्यक्ति अपनी हंसी रोक नहीं पाते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि यह संघर्ष पूरी तरह से वास्तविक है। अपने अनोखे और हास्यपूर्ण अंदाज के लिए देश भर में पहचाने जाने वाले मंत्री का यह पोस्ट देखते ही देखते इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित हो गया और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    उल्लेखनीय है कि मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग पूर्व में भी पूर्वोत्तर के लोगों की शारीरिक बनावट और छोटी आंखों को लेकर अपने सकारात्मक और हास्यपूर्ण बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं। उन्होंने पूर्व में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि छोटी आंखों के अनेक व्यावहारिक फायदे होते हैं, जिनमें आंखों में धूल-मिट्टी कम जाना और लंबे आयोजनों के दौरान सहजता शामिल है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस प्रकार के वायरल और मनोरंजक वीडियो को सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा व्यापक रूप से पसंद किया जाता है। मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों इंदौर और भोपाल में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच तकनीक की व्यावहारिक चुनौतियों और ऐसे हास्यस्पद पलों को लेकर लोगों के बीच अक्सर उत्सुकता देखने को मिलती है।

    यद्यपि यह वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का भरपूर मनोरंजन कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही यह आधुनिक तकनीकी प्रणालियों की व्यावहारिक सीमाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है। कई तकनीकी विशेषज्ञों और उपयोगकर्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई है कि डिजिटल सत्यापन प्रणालियों और सॉफ्टवेयर को देश के सभी क्षेत्रों के नागरिकों की विभिन्न शारीरिक विशेषताओं और विविधता के अनुरूप अधिक सक्षम और सर्वसमावेशी बनाया जाना चाहिए।

    बायोमेट्रिक सत्यापन की इस प्रक्रिया में सामने आई इस अनूठी चुनौती ने जहां एक ओर इंटरनेट पर लोगों को मुस्कुराने का अवसर दिया है, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी दिया है कि तकनीकी विकास के दौर में क्षेत्रीय और भौगोलिक विविधताओं का समावेश किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

  • भारत द्वारा बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को मिले दो द्विपक्षीय निमंत्रणों पर बांग्लादेश सरकार ने व्यस्तता का हवाला दिया।

    भारत द्वारा बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को मिले दो द्विपक्षीय निमंत्रणों पर बांग्लादेश सरकार ने व्यस्तता का हवाला दिया।


    नई दिल्ली । 
    भारत की ओर से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को दिए गए दो अलग-अलग आधिकारिक निमंत्रणों पर पड़ोसी देश की ओर से अभी तक कोई अंतिम प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ढाका की ओर से संकेत दिए गए हैं कि प्रस्तावित भारत यात्रा का अंतिम ढांचा प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम और दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय बातचीत की प्रगति पर निर्भर करेगा।

    भारत ने सितंबर महीने में आयोजित होने जा रहे आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के विशेष सत्र के लिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया है। इसके अतिरिक्त एक पृथक द्विपक्षीय वार्ता के लिए भी नई दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि, बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अभी पर्याप्त समय शेष है और सरकार इस दौरान कई महत्वपूर्ण घरेलू व संवैधानिक प्राथमिकताओं में व्यस्त है।

    विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, बिम्सटेक संगठन के वर्तमान अध्यक्ष के नाते भारत ने बांग्लादेश को ब्रिक्स सम्मेलन के संपर्क सत्र में शामिल होने का विशेष अवसर प्रदान किया है। इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से बने तनावपूर्ण माहौल को सामान्य बनाना और द्विपक्षीय वार्ता के जरिए आपसी संबंधों को नई दिशा देना है।

    ढाका में अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकार सभी देशों के साथ सकारात्मक संबंधों की पक्षधर है। यदि आगामी दिनों में स्थितियां अनुकूल रहती हैं और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो निश्चित रूप से भारत यात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा। दोनों पड़ोसी मुल्कों के शीर्ष नेतृत्व के बीच प्रत्यक्ष संवाद से कई लंबित क्षेत्रीय व व्यापारिक मुद्दों के हल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बांग्लादेश में बीते समय में हुए राजनीतिक बदलावों के बाद से ही नई दिल्ली और ढाका के बीच रणनीतिक व कूटनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे समय में शीर्ष स्तर की यह प्रस्तावित बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। द्विपक्षीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि व्यापार, सुरक्षा और ऊर्जा संकट जैसे संवेदनशील विषयों पर दोनों देशों का मिलकर काम करना बेहद आवश्यक है।

    अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की इस हलचल का सीधा असर भारत के विभिन्न राज्यों और व्यापारिक साझेदारियों पर भी देखा जा सकता है। मध्य प्रदेश जैसे औद्योगिक और कृषि प्रधान राज्य, जो वस्त्र और हस्तशिल्प निर्यात से जुड़े हैं, वे भी पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक स्थिरता की उम्मीद रखते हैं। मध्य प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक घरानों और नीति निर्माताओं की नजरें भी इन अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बनी रहती हैं।

    दक्षिण एशियाई कूटनीति में बिम्सटेक और ब्रिक्स जैसे मंचों की भूमिका आने वाले समय में और अधिक निर्णायक होने की संभावना है। यदि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री इस सम्मेलन में भाग लेते हैं, तो यह क्षेत्र में आर्थिक सहयोग और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध हो सकता है।

    हाल के समय में पैदा हुए गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों के राजनयिक लगातार संपर्क में हैं। अब सभी की नजरें ढाका के अंतिम आधिकारिक निर्णय पर टिकी हुई हैं कि क्या ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता संभव हो पाती है या नहीं।

  • सच्ची घटनाओं पर आधारित मलयालम क्राइम थ्रिलर फिल्म 'उइर' ओटीटी प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर दर्शकों को खूब भा रही है।

    सच्ची घटनाओं पर आधारित मलयालम क्राइम थ्रिलर फिल्म 'उइर' ओटीटी प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर दर्शकों को खूब भा रही है।

    नई दिल्ली ।डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर शैलियों की फिल्मों को दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। इसी क्रम में जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही मलयालम भाषा की क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘उइर’ दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई है। सच्ची घटनाओं पर आधारित यह फिल्म अपने अनूठे कथानक और अप्रत्याशित मोड़ों के चलते लगातार ट्रेंडिंग लिस्ट में बनी हुई है।

    यह फिल्म एक पुलिस अधिकारी अनशाद एस. के वास्तविक जीवन के अनुभवों और सच्ची घटनाओं पर आधारित है। फिल्म की पटकथा दर्शकों को शुरुआत से ही बांधे रखती है। कहानी की शुरुआत एक सामान्य ट्रेन यात्रा से होती है, जहां सफर के दौरान परिवार की एक छोटी बच्ची अचानक गायब हो जाती है। इस घटना के बाद दर्शकों को लगता है कि पूरी कहानी बच्ची की खोज के इर्द-गिर्द घूमेगी, लेकिन यहीं से फिल्म एक नया मोड़ लेती है।

    कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, जांच अधिकारियों को एक कुएं में महिला का संदिग्ध शव मिलने की सूचना प्राप्त होती है। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की गहन जांच के बाद पुलिस को अहसास होता है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि बेहद सोच-समझकर अंजाम दिया गया हत्याकांड है।

    हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए जब पुलिस जांच का दायरा बढ़ाती है, तो हर चरण पर नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं। फिल्म में एक के बाद एक आने वाले मोड़ दर्शकों का सस्पेंस बढ़ाए रखते हैं। जब भी ऐसा प्रतीत होता है कि केस हल हो चुका है, तभी कहानी में आया एक नया मोड़ पूरी जांच प्रक्रिया को एक नई दिशा में मोड़ देता है।

    फिल्म का निर्देशन एम. पद्मकुमार ने किया है, जिन्होंने थ्रिलर जॉनर के तत्वों का बेहद कुशलता से संयोजन किया है। मुख्य भूमिकाओं में सैयामी खेर, रोशन मैथ्यू, दिव्या एम. नायर और विनीत थट्टिल डेविड जैसे कुशल कलाकारों ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी है। फिल्म की संवाद अदायगी और बैकग्राउंड स्कोर सस्पेंस को और गहरा बनाता है।

    डिजिटल माध्यमों की बढ़ती पहुंच के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में क्षेत्रीय भाषाओं की उत्कृष्ट फिल्मों की लोकप्रियता बढ़ी है। मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे शहरों में भी ओटीटी के माध्यम से दक्षिण भारतीय सिनेमा की थ्रिलर फिल्मों को काफी पसंद किया जा रहा है। हिंदी भाषा में डब होकर उपलब्ध होने के कारण राज्य के दर्शक भी इस फिल्म का पूरा आनंद ले रहे हैं।

    फिल्म समीक्षकों और दर्शकों की ओर से इस फिल्म को मिली-जुली और विचारोत्तेजक प्रतिक्रियाएं मिली हैं। आईएमडीबी पर 6.5 की रेटिंग हासिल करने वाली यह फिल्म अपनी मनोरंजक और कसी हुई पटकथा के कारण इस वीकेंड के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरी है।

    वर्तमान में जियो हॉटस्टार की टॉप-10 लिस्ट में शामिल यह फिल्म साबित करती है कि वास्तविक घटनाओं पर आधारित यथार्थवादी सिनेमा दर्शकों को आकर्षित करने में पूरी तरह सफल रहता है। सस्पेंस और थ्रिलर कंटेंट के शौकीनों के लिए यह एक देखने योग्य फिल्म है।

  • संजय दत्त स्टारर पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म 'आखिरी सवाल' सिनेमाघरों के बाद अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई है।

    संजय दत्त स्टारर पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म 'आखिरी सवाल' सिनेमाघरों के बाद अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गई है।

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय दत्त की हालिया रिलीज पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म आखिरी सवाल अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों के लिए उपलब्ध हो गई है। सिनेमाघरों में मई महीने के दौरान प्रदर्शित होने के बाद इस फिल्म ने आखिरकार ओटीटी का रुख किया है। जो दर्शक सिनेमाघरों में इस फिल्म को देखने से चूक गए थे, वे अब इसे घर बैठे डिजिटल माध्यम पर देख सकते हैं।

    यह बहुप्रतीक्षित फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म लायनगेट्स प्ले पर 13 अगस्त से स्ट्रीम की जा रही है। प्लेटफॉर्म ने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर फिल्म का आधिकारिक प्रोमो शेयर करते हुए इसकी डिजिटल स्ट्रीमिंग की घोषणा की है। फिल्म की विषय-वस्तु तीखे सामाजिक और राजनीतिक सवालों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसको लेकर दर्शकों में उत्सुकता देखी जा रही है।

    फिल्म की कहानी मुख्य रूप से एक प्रोफेसर और उनके एक बागी छात्र के बीच के वैचारिक मतभेदों और संवाद पर आधारित है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास और प्रासंगिकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर तार्किक चर्चा दिखाई गई है। कहानी में छात्र द्वारा उठाए गए पांच मुख्य सवालों और प्रोफेसर द्वारा दिए जाने वाले जवाबों को बेहद नाटकीय अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।

    मुख्य स्टारकास्ट की बात करें तो संजय दत्त ने फिल्म में प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी की मुख्य भूमिका निभाई है, जबकि युवा अभिनेता नमाशी चक्रवर्ती ने छात्र की भूमिका में उनका सामना किया है। इनके अलावा नीतू चंद्रा, आयूषी चतुर्वेदी, त्रिधा चौधरी और अर्चना आर्या जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म का निर्देशन अभिजीत वारंग ने किया है।

    इस फिल्म का संगीत मॉन्टी शर्मा द्वारा तैयार किया गया है, जबकि इसके गीत प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं। सिनेमाघरों में अपनी रिलीज के दौरान बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म व्यावसायिक रूप से खास कमाल नहीं दिखा सकी थी और इसका कुल घरेलू बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग तीन करोड़ रुपये के आसपास ही सीमित रहा था।

    व्यावसायिक असफलताओं के बावजूद, फिल्म को समीक्षकों और डिजिटल दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। संजय दत्त के अभिनय और फिल्म के गंभीर विषय की सराहना की जा रही है। ऑनलाइन रेटिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी दर्शकों ने इसे विचारोत्तेजक और संजय दत्त के दमदार अभिनय से सजी फिल्म करार दिया है।

    मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों में डिजिटल कंटेंट और ओटीटी फिल्मों को लेकर युवाओं के बीच खासा क्रेज देखा जाता है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों को राज्य के दर्शक हमेशा से गंभीरता से देखते आए हैं, ऐसे में मध्य प्रदेश के सिनेमा प्रेमियों के बीच भी इस फिल्म की ओटीटी रिलीज को लेकर चर्चा बनी हुई है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि फिल्म को बड़ा दर्शक वर्ग मिलेगा। संजय दत्त के फैंस के लिए यह फिल्म उनके अभिनय का एक अलग रूप देखने का शानदार मौका है, जहां वे एक गंभीर और बौद्धिक भूमिका में नजर आ रहे हैं।