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  • मंत्रालय में शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन, महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यर्पण

    मंत्रालय में शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन, महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यर्पण


    भोपाल ।  30 जनवरी 2026 को मंत्रालय स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बलिदान दिवस और वीर शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन धारण किया गया। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यर्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने मंत्रालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर सुबह 11 बजे दो मिनट का मौन रखा। इस मौन सभा के माध्यम से देश के उन सभी वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया गया, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की स्वतंत्रता और अखंडता सुनिश्चित की।

    इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव श्री मनु श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव श्री पी. नरहरि सचिव श्री एम. रघुराज, श्री मनीष सिंह सहित मंत्रालय के वल्लभ भवन सतपुड़ा विंध्याचल भवन के अधिकारी-कर्मचारी और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यर्पण किया और उनकी शिक्षाओं तथा अहिंसा और सत्य के मार्ग को याद किया।

    कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल शहीदों की स्मृति को सम्मानित करना था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी उनके बलिदान और देशभक्ति से प्रेरित करना बताया गया। मुख्य सचिव श्री जैन ने उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी और अन्य शहीदों के आदर्श आज भी समाज और प्रशासनिक कार्यों में मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कहा कि दो मिनट का मौन रखना एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुष्ठान है, जो हमें अपने कर्तव्यों और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की याद दिलाता है।

    इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और यह संकल्प लिया कि वे अपने कार्य क्षेत्र में देश की सेवा और नागरिक कल्याण को सर्वोपरि रखेंगे। माल्यर्पण और मौन धारण का यह आयोजन मंत्रालय में शांति और श्रद्धा का वातावरण बनाए रखने में सफल रहा।

    इस प्रकार, 30 जनवरी के अवसर पर मंत्रालय ने महात्मा गांधी और वीर शहीदों को याद कर उनके योगदान को सम्मानित किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने न केवल पुष्प अर्पित किए, बल्कि महात्मा गांधी और शहीदों के आदर्शों को अपने कार्य और जीवन में अपनाने का संकल्प भी लिया।

  • Senior Women Kabaddi Nationals: रेलवे और हरियाणा की जीत, सेमीफाइनल लाइन-अप तय

    Senior Women Kabaddi Nationals: रेलवे और हरियाणा की जीत, सेमीफाइनल लाइन-अप तय

    नई दिल्ली। गत चैंपियन भारतीय रेलवे ने क्वार्टरफाइनल-1 में अपने अनुभव और गहराई का शानदार नमूना पेश किया। रेलवे ने महाराष्ट्र को 58-23 के बड़े अंतर से हराकर सेमीफाइनल में कदम रखा। रेलवे की ओर से साक्षी ने 10 पॉइंट्स के साथ शानदार प्रदर्शन किया, जबकि पूजा ने 9 पॉइंट्स जोड़कर टीम की बढ़त को मजबूत किया। डिफेंस में सोनाली शिंगटे और मंदिरा संपत कोमकर ने अहम टैकल पॉइंट्स लेकर महाराष्ट्र को पूरे मैच में दबाव में रखा।

    हरियाणा का तूफानी खेल, मध्य प्रदेश को रौंदा

    दूसरे क्वार्टरफाइनल में हरियाणा ने टूर्नामेंट के सबसे प्रभावशाली प्रदर्शनों में से एक दिखाया। हरियाणा ने मध्य प्रदेश को 63-16 से हराकर एकतरफा मुकाबला खेला।
    राज रानी ने 17 पॉइंट्स के साथ मैच पर पूरी तरह कब्जा जमाया। उनके अलावा रुचि (11 पॉइंट्स) और निकिता (10 पॉइंट्स) ने भी शानदार सहयोग दिया। हरियाणा की आक्रामक रेडिंग और मजबूत डिफेंस ने विपक्ष को संभलने का मौका ही नहीं दिया।

    रोमांचक मुकाबले में तमिलनाडु की जीत

    क्वार्टरफाइनल का सबसे करीबी और रोमांचक मुकाबला तमिलनाडु और चंडीगढ़ के बीच देखने को मिला। तमिलनाडु ने कांटे की टक्कर में चंडीगढ़ को 39-37 से हराया।
    तमिलनाडु की कार्थिका आर ने 15 पॉइंट्स के साथ एक बार फिर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। सूजी एम ने 9 पॉइंट्स जोड़कर उनका अच्छा साथ दिया। चंडीगढ़ की ओर से अंजलि (10 पॉइंट्स) और मोनिका रानी (7 पॉइंट्स) ने संघर्ष जारी रखा, लेकिन निर्णायक पलों में तमिलनाडु की सूझबूझ भारी पड़ी।

    हिमाचल प्रदेश ने दिखाई मजबूती, पंजाब बाहर

    चौथे क्वार्टरफाइनल में हिमाचल प्रदेश ने पंजाब को 48-25 से हराकर सेमीफाइनल लाइन-अप पूरा किया। हिमाचल की पुष्पा ने 16 पॉइंट्स के साथ शानदार खेल दिखाया, जबकि ज्योति ने 12 पॉइंट्स जोड़कर टीम को लगातार बढ़त दिलाई। पंजाब की ओर से सिमरन कंबोज ने 17 पॉइंट्स के साथ संघर्ष किया, लेकिन टीम जीत से दूर रही।

    सेमीफाइनल से पहले बढ़ा रोमांच

    चार मजबूत टीमों के सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही टूर्नामेंट अपने निर्णायक मोड़ पर आ गया है। रेलवे, हरियाणा, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश के बीच होने वाले सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सी टीम खिताब की दौड़ में अंतिम बाज़ी मारती है।

  • राज्यपाल श्री पटेल ने महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि, शहीद दिवस पर रखी दो मिनट की मौन सभा

    राज्यपाल श्री पटेल ने महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि, शहीद दिवस पर रखी दो मिनट की मौन सभा


    भोपाल । राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर राज्यपाल ने दो मिनट का मौन रखकर देशभक्त शहीदों को भी याद किया। कार्यक्रम में लोकायुक्त जस्टिस श्री सतेंद्र कुमार सिंह और राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे।

    राज्यपाल ने महात्मा गांधी के चित्र पर फूल अर्पित करते हुए उनके आदर्शों और अहिंसा के मार्ग का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता का जीवन हमें सत्य, अहिंसा और सेवा की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को याद किया, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

    लोकभवन में राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारियों ने भी महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान शांति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। इस अवसर पर उपस्थित सभी ने महात्मा गांधी के जीवन और उनके राष्ट्रहित में किए गए योगदान को याद किया।

    राज्यपाल श्री पटेल ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि महात्मा गांधी ने हमेशा देशवासियों को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उनके आदर्श आज भी समाज और प्रशासनिक कार्यों में मार्गदर्शन का काम करते हैं। राज्यपाल ने कहा कि शहीद दिवस पर दो मिनट का मौन रखने से हम अपने देश के उन सभी वीरों को सम्मानित करते हैं जिन्होंने स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

    लोकायुक्त जस्टिस सतेंद्र कुमार सिंह ने भी महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनका जीवन देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी उपस्थित कर्मचारियों के साथ मिलकर शहीदों और राष्ट्रपिता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

    इस अवसर पर राज्यपाल कार्यालय में उपस्थित सभी कर्मचारियों ने न केवल पुष्पांजलि अर्पित की, बल्कि महात्मा गांधी के विचारों पर चर्चा भी की और उनके सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। राज्यपाल श्री पटेल ने अंत में कहा कि ऐसे कार्यक्रम हमें हमारे इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों की याद दिलाते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि आने वाली पीढ़ियां भी इन आदर्शों से प्रेरित हों।

  • Budget Impact on Markets: जानिए पिछले 15 बार शेयर बाजार ने किस दिशा में किया रेस्पॉन्ड

    Budget Impact on Markets: जानिए पिछले 15 बार शेयर बाजार ने किस दिशा में किया रेस्पॉन्ड

    नई दिल्ली  हर साल आम बजट पेश होने के बाद शेयर बाजार की चाल निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल बन जाती है। टैक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, कैपेक्स और सेक्टरल घोषणाओं का सीधा असर बाजार पर पड़ता है। इसी को देखते हुए एसबीआई सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट में पिछले 15 बजट के बाद बाजार के प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।

    एक हफ्ते बाद सेंसेक्स का ट्रैक रिकॉर्ड

    रिपोर्ट के मुताबिक, बजट पेश होने के एक हफ्ते बाद सेंसेक्स ने 15 में से 11 बार सकारात्मक रिटर्न दिया है। इस अवधि में औसतन 2.10 प्रतिशत का मुनाफा निवेशकों को मिला।
    हालांकि, चार बार सेंसेक्स नुकसान में भी रहा, जहां औसत गिरावट 2.05 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे साफ है कि शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार का पलड़ा अक्सर सकारात्मक ही रहा है।

    तीन महीने में सेंसेक्स का प्रदर्शन

    अगर थोड़ा लंबा नजरिया अपनाया जाए तो तस्वीर और साफ हो जाती है। बजट के तीन महीने बाद सेंसेक्स ने 15 में से 9 बार सकारात्मक रिटर्न दिया है। इस दौरान औसत मुनाफा 6.77 प्रतिशत रहा।
    वहीं, छह बार बाजार ने नकारात्मक रिटर्न दिया, जिसमें औसत नुकसान 5.28 प्रतिशत दर्ज हुआ।

    निफ्टी भी रहा मजबूत

    निफ्टी के आंकड़े भी लगभग इसी कहानी को दोहराते हैं। बजट के एक हफ्ते बाद निफ्टी ने 15 में से 12 बार सकारात्मक रिटर्न दिया है। इस दौरान औसत रिटर्न 2.04 प्रतिशत रहा।
    तीन बार निफ्टी गिरावट में रहा, जहां औसत नुकसान 2.65 प्रतिशत रहा।

    तीन महीने बाद निफ्टी का ट्रेंड

    तीन महीने की अवधि में निफ्टी ने 15 में से 9 बार सकारात्मक रिटर्न दिया है। इस दौरान औसत मुनाफा 7.40 प्रतिशत रहा। वहीं, छह बार नकारात्मक रिटर्न में औसत नुकसान 5.46 प्रतिशत देखा गया।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा उतार-चढ़ाव

    लार्जकैप के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में ज्यादा वोलैटिलिटी दिखी है।
    बजट के एक हफ्ते बाद निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने 15 में से 11 बार सकारात्मक रिटर्न दिया। मिडकैप का औसत रिटर्न 3.1 प्रतिशत और स्मॉलकैप का 3.3 प्रतिशत रहा।
    तीन महीने बाद मिडकैप ने 10 बार सकारात्मक रिटर्न (औसत 8.67%) दिया, जबकि स्मॉलकैप में केवल 7 बार तेजी दिखी, हालांकि इसका औसत रिटर्न 14.54 प्रतिशत रहा, जो जोखिम के साथ ज्यादा मुनाफे की संभावना दिखाता है।

    निवेशकों के लिए क्या संकेत

    कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि बजट के बाद बाजार ने ज्यादातर मौकों पर निवेशकों को फायदा पहुंचाया है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी अवधि के निवेशक बजट के बाद आने वाले उतार-चढ़ाव को अवसर के रूप में देख सकते हैं, जबकि ट्रेडर्स को जोखिम प्रबंधन पर खास ध्यान देना चाहिए।

  • अदाणी समूह को अंतरराष्ट्रीय भरोसा: जापान की रेटिंग एजेंसी ने तीन प्रमुख कंपनियों को दी मजबूत क्रेडिट रेटिंग

    अदाणी समूह को अंतरराष्ट्रीय भरोसा: जापान की रेटिंग एजेंसी ने तीन प्रमुख कंपनियों को दी मजबूत क्रेडिट रेटिंग

    नई दिल्ली जापान की प्रतिष्ठित क्रेडिट रेटिंग एजेंसी Japan Credit Rating Agency (JCR) ने अदाणी समूह की तीन प्रमुख कंपनियों अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड (APSEZ), अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL)को स्टेबल आउटलुक के साथ दीर्घकालिक फॉरेन करेंसी क्रेडिट रेटिंग प्रदान की है। यह रेटिंग न केवल अदाणी समूह की वित्तीय मजबूती को दर्शाती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच उसके प्रति बढ़ते भरोसे का भी संकेत है।

    किस कंपनी को कितनी रेटिंग

    रतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में शामिल करती है। वहीं, अदाणी ग्रीन एनर्जी और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस दोनों को BBB+ (स्टेबल) रेटिंग मिजेसीआरए ने अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड (APSEZ) को A- (स्टेबल) रेटिंग दी है, जो इसे देश की संप्रभु रेटिंग से ऊपर रखने वाली चुनिंदा भाली है। खास बात यह है कि ये रेटिंग्स भारत की सॉवेरन क्रेडिट रेटिंग (BBB+) के बराबर हैं।

    ग्रुप CFO ने क्या कहा

    अदाणी समूह के ग्रुप सीएफओ जुगेशिंदर सिंह ने इन रेटिंग्स को समूह के लिए अहम उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह रेटिंग्स अनुशासित वित्तीय प्रबंधन, मजबूत बैलेंस शीट और विविध बुनियादी ढांचा पोर्टफोलियो में विश्वस्तरीय निष्पादन को दर्शाती हैं।
    उन्होंने आगे कहा कि यह वैश्विक ऋणदाताओं, संस्थागत निवेशकों और पूंजी बाजारों के उस भरोसे की पुष्टि है, जो अदाणी समूह की दीर्घकालिक रणनीति और सतत विकास मॉडल में दिखाई देता है।

    अदाणी पोर्ट्स की खास उपलब्धि

    जेसीआरए ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अदाणी पोर्ट्स की मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल, विविध परिसंपत्ति आधार और स्थिर नकदी प्रवाह इसे अन्य कंपनियों से अलग बनाते हैं। एजेंसी के अनुसार, कंपनी की बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमताएं, लगातार मजबूत मुनाफा और विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन इसे भारत की विदेशी मुद्रा सॉवेरन रेटिंग से ऊपर स्थान दिलाते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय मानकों से बढ़ता तालमेल

    यह रेटिंग भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए एक अहम संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उन शुरुआती उदाहरणों में से एक है, जहां जापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म को इस स्तर पर आंका है। इससे वैश्विक रेटिंग एजेंसियों के साथ अदाणी समूह के बढ़ते तालमेल और अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट मानकों पर उसकी मजबूत पकड़ स्पष्ट होती है।

    निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत

    कुल मिलाकर, जेसीआरए की यह रेटिंग अदाणी समूह की वित्तीय स्थिरता, दीर्घकालिक विकास क्षमता और भारत के बुनियादी ढांचे के निर्माण में उसकी अग्रणी भूमिका को मजबूती देती है। यह आने वाले समय में विदेशी निवेश और वैश्विक फंडिंग के नए रास्ते भी खोल सकती है।

  • Surajkund Mela 2026: सूरजकुंड मेला जाने का सबसे आसान तरीका क्या है? जानें मेट्रो और बस से कैसे पहुंचें

    Surajkund Mela 2026: सूरजकुंड मेला जाने का सबसे आसान तरीका क्या है? जानें मेट्रो और बस से कैसे पहुंचें

    नई दिल्ली  Surajkund Mela 2026: हरियाणा के फरीदाबाद में लगने वाला सूरजकुंड मेला इस बार 31 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा. बता दें कि साल 2026 में यह 39वां अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेला लगने वाला है. इस साल मेले में मेघालय और उत्तर प्रदेश को थीम स्टेट बनाया गया है. वहीं, मिस्र (Egypt) को पार्टनर कंट्री घोषित किया गया है. फूड कोर्ट में 100 से ज्यादा फूड स्टॉल लगाए जाएंगे. ऐसे में अगर आप भी मेले में जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यहां जानें कि आप मेट्रो, बस या अपनी गाड़ी से कैसे पहुंच सकते हैं. कौन सा रूट आपके लिए सबसे सही रहेगा और मेले तक पहुंचने के लिए आपको कितना किराया देना होगा.

    बस से सूरजकुंड मेला कैसे पहुंचें?
    मेले के दौरान प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा के लिए खास बस सेवा शुरू की है. सूरजकुंड मेले तक पहुंचने के लिए आपको बल्लभगढ़ से बस मिलेगी. 31 जनवरी से रोज सुबह 7 बजे से बसें मिलनी शुरू हो जाएंगी. सबसे अच्छी बात यह है कि बसें हर 30 मिनट के अंतराल पर उपलब्ध होंगी, शनिवार और रविवार के दिन हर 15 मिनट में मेले के लिए बस उपलब्ध रहेंगी. यानी आपको ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.

    बस का किराया भी काफी सस्ता रखा गया है.
    बल्लभगढ़ से सूरजकुंड- सिर्फ 25 रुपये
    बदरपुर से सूरजकुंड- मात्र 20 रुपये
    बड़खल मेट्रो स्टेशन से- 10 रुपये
    ऐसे में कम खर्च में आरामदायक सफर चाहने वालों के लिए बस सबसे बढ़िया विकल्प है.

    मेट्रो से सूरजकुंड मेला कैसे पहुंचें?
    वहीं, अगर आप मेट्रो से जाना चाहते हैं, तो बदरपुर बॉर्डर मेट्रो स्टेशन (वायलेट लाइन) सूरजकुंड मेले के सबसे नजदीक है. स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको ऑटो, ई-रिक्शा और बस आसानी से मिल जाएगी, जो सीधे मेले तक पहुंचा देती हैं. दिल्ली और आसपास के इलाकों से आने वालों के लिए मेट्रो काफी सुविधाजनक रहती है.

    अपनी गाड़ी या कैब से कैसे पहुंचें सूरजकुंड मेला?
    जो लोग अपनी कार या बाइक से जाना चाहते हैं, उनके लिए सड़क मार्ग भी अच्छा है. मेले के पास पार्किंग की व्यवस्था रहती है, हालांकि भीड़ ज्यादा होने पर थोड़ा समय लग सकता है. आप चाहें तो कैब या टैक्सी भी बुक कर सकते हैं.

    एयरपोर्ट से सूरजकुंड मेला कैसे जाएं?
    अगर आप इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सीधे आ रहे हैं, तो पहले नई दिल्ली की ओर आना होगा. एयरपोर्ट से सूरजकुंड की दूरी करीब 30 किलोमीटर है, जिसे आप कैब या मेट्रो के जरिए आसानी से तय कर सकते हैं.

  • "जुकाम का इंजेक्शन, 30 सेकंड और साध्वी की मौत! पढ़िए वो रहस्य जो सबको कर देगा हैरान!"

    "जुकाम का इंजेक्शन, 30 सेकंड और साध्वी की मौत! पढ़िए वो रहस्य जो सबको कर देगा हैरान!"

    नई दिल्ली जोधपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में साध्वी और कथावाचक प्रेम बाईसा की अचानक मौत ने उनके अनुयायियों और ग्रामीण समाज को गहरे शोक में डुबो दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही पलों बाद तबीयत बिगड़ना, अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया जाना और सोशल मीडिया पर उठे सवाल उनकी मौत को रहस्यमयी और चिंता का विषय बना रहे हैं।
    हर घटना की कड़ी अपने आप में गंभीर सवाल खड़े कर रही है और लोग इस हादसे की सही वजह जानने के लिए बेसब्र हैं।

    पार्थिव शरीर परेऊ गांव पहुंचा, शोक और न्याय की मांग
    आज साध्वी प्रेम बाईसा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव परेऊ (बालोतरा) पहुंचा, तो पूरे गांव में शोक का माहौल बन गया। सैकड़ों अनुयायी, ग्रामीण और संत समाज के लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। परिजनों ने परंपरा के अनुसार उन्हें समाधि देने का निर्णय लिया, लेकिन इस बीच न्याय की मांग भी जोर पकड़ने लगी, क्योंकि लोग चाहते हैं कि उनकी मौत के रहस्यमयी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो।

    साध्वी पूरी तरह स्वस्थ, हल्का जुकाम ही था शिकायत
    साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ ने बताया कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी और कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।

    लगातार धार्मिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के कारण थकान जरूर थी, लेकिन स्वास्थ्य सामान्य था। 28 जनवरी को साध्वी को हल्का जुकाम और गले में खराश की शिकायत हुई। वीरम नाथ के अनुसार, “मैंने कहा कि अस्पताल चल लेते हैं, लेकिन उसने कहा कि यह मामूली जुकाम है, डॉक्टर को घर ही बुला लो।”

    इंजेक्शन के 30 सेकंड में तबीयत बिगड़ी
    कंपाउंडर ने शुरुआती जांच के बाद इंजेक्शन लगाया, लेकिन महज 30 सेकंड में ही साध्वी की हालत बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी और अचानक कमजोरी ने सबको हैरान कर दिया। घबराए परिजन तुरंत उन्हें जोधपुर के प्रेक्षा हॉस्पिटल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए-क्या यह एलर्जिक रिएक्शन था, क्या बिना जरूरी जांच के दवा दी गई, या यह मेडिकल लापरवाही थी।

    अंतिम शब्द और न्याय की पुकार
    वीरम नाथ की आंखें भर आती हैं, जब वह अपनी बेटी के अंतिम शब्द याद करते हैं। साध्वी ने कहा था, “मुझे जीते जी तो न्याय नहीं मिला, लेकिन मरने के बाद मुझे न्याय जरूर मिलना चाहिए।” परिवार का कहना है कि वे किसी पर बेबुनियाद आरोप नहीं लगाना चाहते, लेकिन निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया विवाद ने बढ़ाई पीड़ा
    सोशल मीडिया पर इस मामले में आग में घी डालने का काम हुआ। तरह-तरह की पोस्ट, अफवाहें और आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आने लगीं। कुछ पोस्टों में निजी रिश्तों और भगवे को लेकर भी सवाल उठाए गए, जिससे संत समाज में नाराजगी फैली। मेवाड़ से श्रद्धांजलि देने पहुंचे महामंडलेश्वर ईश्वरी नंद गिरी ने कहा कि बिना तथ्य जाने साधु-संतों की छवि खराब की जा रही है और बाप-बेटी के पवित्र रिश्ते को कलंकित करना शर्मनाक है।

    उन्होंने पुलिस से मांग की कि मौत की निष्पक्ष जांच हो और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

    संत समाज की एक सुर में मांग
    संत समाज भी एक सुर में यही मांग कर रहा है

    साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की सच्चाई सामने लाई जाए। कई संतों का कहना है कि बिना प्रमाण की टिप्पणियां न केवल दिवंगत साध्वी का अपमान हैं, बल्कि समाज में भ्रम और नफरत फैलाने का काम कर रही हैं। ऐसे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की जा रही है।
    कंपाउंडर आया और शुरुआती जांच के बाद उसने इंजेक्शन लगाया गया.
    परेऊ गांव में अंतिम दर्शन का भावुक माहौल
    गांव परेऊ में अंतिम दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं भजन गा रही थीं, पुरुषों की आंखों में आंसू थे। हर कोई यही कह रहा था कि प्रेम बाईसा का जीवन सादगी और सेवा का प्रतीक था।
    समाधि देने के फैसले को लेकर गांव में भावनात्मक माहौल था। अनुयायियों का मानना है कि यह कदम साध्वी की साधना और त्याग के प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका है।

    आश्रम से कैमरे हटने और पिछले विवाद की जांच जरूरी
    साध्वी के समर्थक प्रेमराज चौधरी ने कहा कि पूरी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, क्योंकि हाल ही में आश्रम से सीसीटीवी कैमरे हटाए गए हैं, जो संदेह पैदा करते हैं। मृत्यु के बाद डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम करवाने को कहा, लेकिन पिता ने मना कर दिया। गत वर्ष जुलाई में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और पुलिस की कार्रवाई ने भी साध्वी पर दबाव बनाए रखा।

  • पश्चिम बंगाल में TMC की पकड़ मजबूत, BJP को 42% वोट शेयर के बावजूद बड़ा झटका?

    पश्चिम बंगाल में TMC की पकड़ मजबूत, BJP को 42% वोट शेयर के बावजूद बड़ा झटका?


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल गरम है और इसी बीच ताजे सर्वे ने राज्य की राजनीति का नया रुख सामने ला दिया है। सर्वे के अनुसार अगर आज लोकसभा चुनाव होते, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) 2024 के अपने प्रदर्शन को दोहरा सकती है और लगभग सभी सीटें बरकरार रख सकती है। हालांकि भाजपा के लिए भी एक अच्छी खबर है, क्योंकि सर्वे में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA का वोट शेयर 39% से बढ़कर 42% तक पहुंचने की संभावना दिखाई गई है। यह तीन प्रतिशत की बढ़त भाजपा के लिए सकारात्मक मानी जा रही है, लेकिन इस बढ़त के बावजूद बंगाल में बड़े स्तर पर सत्ता परिवर्तन की तस्वीर अभी साफ नहीं दिखती।

    विशेष रूप से यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव सिर्फ दो महीने दूर हैं। ऐसे में यह सर्वे राज्य की जनता के मौजूदा राजनीतिक मूड का संकेत माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक चुनावी नतीजे कई कारकों पर निर्भर करते हैं। फिर भी, सर्वे यह साफ करता है कि बंगाल में अब मुकाबला पूरी तरह TMC और BJP के बीच द्विध्रुवीय होता जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण काफी तेज हुआ है और यह राज्य अब साफ तौर पर TMC और BJP के बीच टकराव की दिशा में बढ़ रहा है। अगर पिछले सर्वे को देखा जाए तो फरवरी 2024 में TMC को 22 सीटें और BJP को 19 सीटें मिलने का अनुमान था। बाद में अगस्त 2024 में TMC के 32 और BJP के 8 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। अब ताजे सर्वे में भाजपा का वोट शेयर बढ़ा है, लेकिन फिर भी TMC की पकड़ मजबूत दिखती है और ममता बनर्जी की छवि बंगाल में एक प्रमुख राजनीतिक धुरी बनी हुई है।

    सर्वे के मुताबिक, BJP के वोट शेयर में बढ़ोतरी के बावजूद वह बंगाल में कोई बड़ा उलटफेर करने की स्थिति में नहीं दिख रही। तृणमूल कांग्रेस की मजबूत सामाजिक और क्षेत्रीय जड़ों के कारण भद्रलोक और ग्रामीण इलाकों में उसकी पकड़ अभी भी टेढ़ी खाई बनी हुई है। वहीं BJP धीरे-धीरे अपना आधार बढ़ा रही है, खासकर कुछ खास इलाकों में जहां पार्टी का संगठन मजबूत हो रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषक यह मान रहे हैं कि यदि चुनाव तक इसी तरह का जनाधार बना रहता है तो बंगाल में कमल का फूल खिलाने का भाजपा का सपना अधूरा रह सकता है। वहीं, ममता बनर्जी के लिए यह सर्वे एक राहत भरा संकेत है कि उनकी पार्टी के प्रति लोगों की विश्वास की लहर अभी भी कायम है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि भाजपा की बढ़ती ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण और वोट शेयर के बदलाव भविष्य में किसी भी मोड़ पर निर्णायक साबित हो सकते हैं।

    अगले कुछ हफ्तों में चुनावी प्रचार, घोषणापत्र, गठबंधन रणनीति और स्थानीय मुद्दों का प्रभाव नतीजों को बदल सकता है। फिलहाल सर्वे यह संकेत दे रहा है कि बंगाल में TMC का प्रभाव अभी भी मजबूत है और BJP को बड़े स्तर पर सत्ता परिवर्तन के लिए अभी और मेहनत करनी होगी। ऐसे में बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य पर नजरें टिके हुए हैं, क्योंकि आने वाले चुनावी माहौल में हर छोटा-सा बदलाव भी बड़े नतीजे ला सकता है।

  • देवालयों में VIP कल्चर पर उठे सवाल, पुजारी महासंघ ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, ‘समान प्रवेश कानून’ की मांग

    देवालयों में VIP कल्चर पर उठे सवाल, पुजारी महासंघ ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, ‘समान प्रवेश कानून’ की मांग


    उज्जैन। देश के प्रमुख देवालयों में बढ़ते वीआईपी कल्चर और सुरक्षा के नाम पर पुजारियों व आम श्रद्धालुओं के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर अब खुलकर विरोध सामने आने लगा है। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने इसे सनातन परंपरा और मंदिरों की मर्यादा के लिए गंभीर संकट बताया है। इसी कड़ी में महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्री महाकालेश्वर मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंदिरों में “वीआईपी प्रवेश प्रतिबंधित कानून” बनाने की मांग की है।

    महेश शर्मा ने पत्र में कहा है कि आज देश के कई प्रमुख मंदिरों में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था इस हद तक बढ़ा दी जाती है कि नित्य पूजा-अर्चना करने वाले पुजारी, पुरोहित और सेवक भी अपने ही गर्भगृह, पूजा कक्ष और आवासीय क्षेत्रों से बाहर कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन के महाकाल मंदिर से लेकर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर तक ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो सनातन परंपराओं के खिलाफ हैं।

    पुजारी महासंघ ने हाल ही में वृंदावन में हुए एक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के दौरे के दौरान पुजारियों, उनके परिवारों और महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। महासंघ का आरोप है कि सुरक्षा के नाम पर मंदिरों की आंतरिक व्यवस्था को पूरी तरह दरकिनार कर दिया जाता है, जिससे न केवल पूजा पद्धति बाधित होती है, बल्कि पुजारियों के सम्मान को भी ठेस पहुंचती है।

    इस मुद्दे पर महासंघ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी तीखे सवाल किए हैं। पत्र में पूछा गया है कि यदि भविष्य में सत्ता परिवर्तन होता है और कोई अन्य मुख्यमंत्री गोरखनाथ पीठ में दर्शन करने पहुंचे तथा सुरक्षा का हवाला देकर योगी आदित्यनाथ या उनके संतों को मठ से बाहर कर दिया जाए, तो क्या वे इसे स्वीकार करेंगे। महासंघ ने तर्क दिया कि यदि यह स्थिति स्वयं के लिए अनुचित मानी जाती है, तो बांके बिहारी मंदिर में पुजारियों के साथ हुआ व्यवहार भी पूरी तरह गलत है।

    अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि जब तक कोई व्यक्ति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन है, उसे पद के प्रोटोकॉल के साथ मंदिरों में प्रवेश नहीं करना चाहिए। यदि वे दर्शन करना चाहते हैं, तो एक सामान्य श्रद्धालु की तरह कतार में लगकर दर्शन करें। इससे मंदिरों की परंपरा, पूजा पद्धति और आध्यात्मिक वातावरण सुरक्षित रहेगा।

    महासंघ का कहना है कि मंदिर किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव या सत्ता प्रदर्शन का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, समानता और श्रद्धा का केंद्र हैं। वीआईपी कल्चर के कारण आम भक्तों में असंतोष बढ़ रहा है और पुजारियों का आत्मसम्मान भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस विषय में हस्तक्षेप कर समान प्रवेश कानून बनाने की अपील की है, ताकि देवालयों की मर्यादा और सनातन परंपरा अक्षुण्ण रह सके।

  • बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों के बैठने का रोस्टर जारी, फरवरी में 20 दिन होगी जनसुनवाई

    बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों के बैठने का रोस्टर जारी, फरवरी में 20 दिन होगी जनसुनवाई


    भोपाल । मध्यप्रदेश में संगठन और सरकार के समन्वय को मजबूत करने की दिशा में भारतीय जनता पार्टी ने एक अहम कदम उठाया है। बीजेपी प्रदेश कार्यालय में फरवरी महीने के लिए मंत्रियों के बैठने का विस्तृत रोस्टर जारी कर दिया गया है। इस रोस्टर के अनुसार, फरवरी माह में कुल 20 कार्यदिवसों पर अलग-अलग मंत्री प्रदेश कार्यालय में मौजूद रहेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं तथा आमजनों की समस्याएं सुनेंगे।

    बीजेपी प्रदेश कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था सोमवार से शुक्रवार तक लागू रहेगी। हर कार्यदिवस दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मंत्रियों की ड्यूटी तय की गई है। खास बात यह है कि इस जनसुनवाई में मंत्रियों के साथ-साथ पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी और विधायक भी मौजूद रहेंगे, ताकि समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

    पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करना, संगठनात्मक फीडबैक लेना और जनहित से जुड़े मुद्दों को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि इससे न केवल संगठन मजबूत होगा, बल्कि जमीनी स्तर की समस्याओं का भी समय पर निराकरण संभव हो सकेगा।

    जारी रोस्टर के मुताबिक फरवरी के पहले सप्ताह में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह जैसे वरिष्ठ मंत्री प्रदेश कार्यालय में बैठेंगे। वहीं दूसरे सप्ताह में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी जनसुनवाई करेंगे।

    तीसरे सप्ताह में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, कृषि मंत्री ऐदलसिंह कंसाना, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया और खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को जिम्मेदारी दी गई है। चौथे सप्ताह में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, एमएसएमई मंत्री चेतन्य कश्यप और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे।

    पार्टी नेताओं का कहना है कि हर दिन अलग-अलग विभागों से जुड़े मंत्री मौजूद रहने से संबंधित विषयों पर सीधे चर्चा संभव हो पाएगी। इसके साथ ही प्रदेश पदाधिकारी भी मंत्रियों के साथ बैठकर मामलों को नोट करेंगे और आवश्यक फॉलोअप सुनिश्चित करेंगे।

    बीजेपी संगठन की इस पहल को आगामी समय में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल का माध्यम माना जा रहा है। इससे कार्यकर्ताओं में भी यह संदेश जाएगा कि पार्टी नेतृत्व उनकी बात सुनने और समाधान निकालने के लिए गंभीर है। प्रदेश कार्यालय में होने वाली यह नियमित सुनवाई आने वाले दिनों में पार्टी की संगठनात्मक मजबूती को और धार देने का काम करेगी।