Blog

  • रायसेन में तीन दिवसीय कृषि महोत्सव में आधुनिक खेती तकनीकों का प्रदर्शन

    रायसेन में तीन दिवसीय कृषि महोत्सव में आधुनिक खेती तकनीकों का प्रदर्शन

    रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में आयोजित तीन दिवसीय उन्नत कृषि महोत्सव में देशभर से आए किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर आधुनिक और तकनीक आधारित खेती की नई संभावनाओं को समझा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य परंपरागत कृषि पद्धतियों के साथ स्मार्ट खेती को बढ़ावा देना और किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन के लिए प्रेरित करना है, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो सके।

    कृषि महोत्सव में आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों का व्यापक प्रदर्शन किया गया।यहां किसानों को ड्रिप सिंचाई प्रणाली, संरक्षित खेती और बागवानी आधारित उन्नत फसलों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बदलते समय के अनुसार खेती में तकनीक के उपयोग की आवश्यकता पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया, जिससे वे अपनी खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना सकें।

    वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है और किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक तरीकों को अपना रहे हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को नई तकनीक, बेहतर बीज और आधुनिक उपकरणों की सुविधा मिल रही है, जिससे कृषि उत्पादन में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।

    बागवानी और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि किसान फसल विविधीकरण की ओर बढ़ सकें और अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकें। इसके अंतर्गत फल, सब्जी, फूल, मसाले तथा औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है और किसानों को प्रशिक्षण के साथ वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

    अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के तहत छोटे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और विस्तार के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

    इसके साथ ही संरक्षित खेती जैसे पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस और शेडनेट तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किसानों को बड़ी मात्रा में सब्सिडी दी जा रही है। बागवानी फसलों जैसे आम, अमरूद और आंवला की खेती पर भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे किसान पारंपरिक फसलों से हटकर अधिक लाभकारी विकल्पों की ओर बढ़ सकें।

    ड्रिप सिंचाई प्रणाली को जल संरक्षण और बेहतर उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही ड्रैगन फ्रूट जैसी नई और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे किसान आधुनिक और लाभकारी कृषि मॉडल को अपना सकें।

    कृषि महोत्सव किसानों के लिए ज्ञान और अवसरों का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है, जहां वे नई तकनीकों को समझकर भविष्य की खेती के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं और कृषि क्षेत्र में नवाचार की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

  • ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ी उड़ान: तेजस फाइटर जेट के इंजन रिपेयर सेंटर के लिए GE एयरोस्पेस और IAF में समझौता

    ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ी उड़ान: तेजस फाइटर जेट के इंजन रिपेयर सेंटर के लिए GE एयरोस्पेस और IAF में समझौता


    नई दिल्ली। भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार देते हुए अमेरिकी कंपनी GE Aerospace और भारतीय वायुसेना भारतीय वायुसेना के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत भारत में तेजस फाइटर जेट को शक्ति देने वाले F404-IN20 इंजन के लिए एक आधुनिक रिपेयर और मेंटेनेंस डिपो स्थापित किया जाएगा। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है।

    इस नई सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब तेजस लड़ाकू विमानों के इंजन की मरम्मत और रखरखाव भारत में ही किया जा सकेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि विमान की ऑपरेशनल उपलब्धता भी बढ़ेगी। अभी तक कई महत्वपूर्ण मरम्मत कार्यों के लिए विदेशी सुविधाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन इस डिपो के शुरू होने के बाद यह निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।

    समझौते के अनुसार यह डिपो पूरी तरह भारतीय वायुसेना के स्वामित्व और संचालन में रहेगा, जबकि तकनीकी सहयोग GE एयरोस्पेस द्वारा दिया जाएगा। कंपनी विशेषज्ञ तकनीशियन, प्रशिक्षण, जरूरी उपकरण और स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध कराएगी, जिससे भारत में ही उच्च स्तरीय इंजन मेंटेनेंस संभव हो सकेगा।

    इस समझौते को भारत के रक्षा क्षेत्र में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह देश की स्वदेशी क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ लड़ाकू विमानों की तैयारियों को भी बेहतर बनाएगा। तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान के लिए यह सुविधा बेहद अहम साबित होगी, क्योंकि इससे मिशन रेडीनेस और फ्लीट उपलब्धता में सुधार होगा।

    GE एयरोस्पेस की ओर से कहा गया है कि यह साझेदारी भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कंपनी के अनुसार इससे भारतीय वायुसेना को आधुनिक तकनीक और सपोर्ट तेजी से उपलब्ध होगा, जिससे संचालन और भी प्रभावी होगा।

    कंपनी पहले से ही भारत के रक्षा और विमानन क्षेत्र में सक्रिय है। इसके इंजन P-8I समुद्री निगरानी विमान, MH-60R हेलीकॉप्टर और AH-64 अपाचे जैसे प्लेटफॉर्म्स में उपयोग किए जाते हैं। इसके अलावा GE के LM2500 मरीन गैस टर्बाइन का उपयोग INS विक्रांत और शिवालिक क्लास फ्रिगेट्स में भी किया गया है, जिससे भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ी है।

    पिछले चार दशकों से GE एयरोस्पेस भारत के एयरोस्पेस सेक्टर में सक्रिय है और पुणे स्थित इसका निर्माण संयंत्र तथा देश के कई साझेदार इसके वैश्विक सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा हैं। इस नए डिपो के साथ भारत अब रक्षा मेंटेनेंस और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ा रहा है।

  • ऑफिस लीजिंग में जबरदस्त उछाल: 5 साल में सबसे मजबूत ग्रोथ, 21 मिलियन स्क्वायर फीट के पार बाजार

    ऑफिस लीजिंग में जबरदस्त उछाल: 5 साल में सबसे मजबूत ग्रोथ, 21 मिलियन स्क्वायर फीट के पार बाजार


    नई दिल्ली। भारत के रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी और सकारात्मक रिपोर्ट सामने आई है। देश में ऑफिस लीजिंग की मांग वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 21.6 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई है। यह पिछले पांच वर्षों में दर्ज की गई सबसे मजबूत वृद्धि मानी जा रही है। इस बढ़त ने भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट को नई मजबूती दी है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाया है।

    यह जानकारी सैविल्स इंडिया की ताजा रिपोर्ट में दी गई है, जिसमें कहा गया है कि मजबूत मांग के साथ-साथ आपूर्ति में गिरावट भी देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में ऑफिस स्पेस की नई आपूर्ति सालाना आधार पर 28 प्रतिशत घटकर 7.9 मिलियन स्क्वायर फीट रह गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि देश में खाली पड़े ऑफिस स्पेस का स्तर घटकर कुल उपलब्ध स्टॉक का 13.9 प्रतिशत रह गया, जो बाजार के लिए एक स्वस्थ संकेत माना जा रहा है।

    लीजिंग गतिविधियों में टेक्नोलॉजी सेक्टर की भूमिका सबसे अहम रही, जिसने कुल मांग में 32 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की। इसके बाद फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सेक्टर ने 22 प्रतिशत योगदान दिया, जबकि बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (बीएफएसआई) सेक्टर की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत का ऑफिस मार्केट तेजी से विविधता की ओर बढ़ रहा है और सिर्फ आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं रह गया है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बड़े आकार के ऑफिस स्पेस की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। कुल लीजिंग में एक लाख स्क्वायर फीट या उससे अधिक के सौदों की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत रही, जो यह दर्शाता है कि बड़ी कंपनियां भारत में अपने ऑपरेशन का विस्तार कर रही हैं। वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) भी इस वृद्धि को लगातार सपोर्ट कर रहे हैं, जिससे बड़े शहरों में कमर्शियल डिमांड बढ़ी है।

    शहरों के प्रदर्शन की बात करें तो बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहां आईटी-बीपीएम कंपनियों की मजबूत मौजूदगी के कारण ऑफिस लीजिंग 6 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई। यहां सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दिल्ली-एनसीआर ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 3.6 मिलियन स्क्वायर फीट की मांग दर्ज की। वहीं हैदराबाद ने सबसे तेज उछाल दिखाया, जहां 39 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मांग 4.3 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई। पुणे में भी 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3 मिलियन स्क्वायर फीट की लीजिंग हुई, जबकि मुंबई में 2.8 मिलियन स्क्वायर फीट की मांग दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत का ऑफिस मार्केट लगातार मजबूत हो रहा है। कंपनियां भारत को अपने विस्तार और निवेश के लिए सुरक्षित और लाभकारी बाजार के रूप में देख रही हैं। आने वाले समय में भी इस सेक्टर में स्थिर और मजबूत ग्रोथ की उम्मीद जताई जा रही है, खासकर आईटी, बीएफएसआई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के चलते।

  • नशे की लत ने उजाड़ा हंसता खेलता परिवार और बेटे के हाथों हुई पिता की निर्मम हत्या..

    नशे की लत ने उजाड़ा हंसता खेलता परिवार और बेटे के हाथों हुई पिता की निर्मम हत्या..

    नई दिल्ली: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ से एक ऐसी हृदय विदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय रिश्तों और पारिवारिक मर्यादाओं को झकझोर कर रख दिया है। नशे की विनाशकारी लत के चलते एक युवक ने मामूली विवाद के बाद अपने ही पिता की लोहे की रॉड से हमला कर जान ले ली।

    यह दुखद वारदात शनिवार देर रात एक गांव में घटित हुई जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में मातम और सनसनी का माहौल व्याप्त है। नशा किस प्रकार एक हंसते खेलते परिवार को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है यह घटना उसका एक जीवंत और डरावना उदाहरण बनकर सामने आई है जिसने समाज के सामने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

    प्राप्त प्राथमिक विवरण के अनुसार अठाइस वर्षीय आरोपी युवक लंबे समय से विभिन्न प्रकार के नशों का आदी था और इसी लत के कारण घर में अक्सर कलह की स्थिति बनी रहती थी। शनिवार की रात भी आरोपी का अपने पचास वर्षीय पिता के साथ किसी बहुत ही सामान्य बात को लेकर वाद विवाद शुरू हुआ था।

    नशे के प्रभाव और अनियंत्रित क्रोध में डूबे युवक ने पास ही रखी लोहे की एक भारी रॉड उठाई और अपने पिता के सिर पर जोरदार प्रहार कर दिया। हमले के बाद लहूलुहान होकर पिता जमीन पर गिर पड़े और चीख पुकार सुनकर पहुंचे परिजनों ने उन्हें तत्काल चिकित्सालय पहुंचाया लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की और सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ और ग्रामीणों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी की नशे की लत ने उसे हिंसक बना दिया था और वह छोटी छोटी बातों पर भी अपना आपा खो बैठता था।

    शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। गांव के निवासी इस घटना से स्तब्ध हैं और उनका कहना है कि नशा केवल शरीर को ही नहीं बल्कि व्यक्ति के विवेक और संवेदनाओं को भी पूरी तरह समाप्त कर देता है।

    यह मामला केवल एक आपराधिक घटना मात्र नहीं है बल्कि यह हमारे समाज में तेजी से फैलते नशे के जाल की विभीषिका को भी दर्शाता है। पहाड़ी अंचलों में युवाओं के बीच बढ़ती नशाखोरी अब परिवारों के विनाश का कारण बन रही है जहां संस्कार और रिश्तों की डोर कमजोर पड़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि सामाजिक स्तर पर जागरूकता अभियान और नशामुक्ति प्रयासों की सक्रियता अनिवार्य है। जब तक युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालने के ठोस प्रयास नहीं होंगे तब तक रिश्तों के लहूलुहान होने का यह सिलसिला थमता नजर नहीं आता।

    वर्तमान में आरोपी गिरफ्त में है और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है लेकिन एक पिता को खोने और एक बेटे के अपराधी बनने का यह घाव परिवार के लिए कभी न भरने वाला साबित होगा। गांव की गलियों में आज सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग भारी मन से इस त्रासदी पर चर्चा कर रहे हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दी है कि यदि नशे के बढ़ते प्रभाव पर समय रहते लगाम नहीं कसी गई तो भविष्य में मानवीय मूल्यों का संरक्षण करना कठिन हो जाएगा और समाज को ऐसी ही अन्य पीड़ादायक घटनाओं का गवाह बनना पड़ेगा।

  • फॉर्मूला 1 की भारत वापसी की तैयारी: सरकार ने शुरू की पहल, जल्द मिल सकती है खुशखबरी

    फॉर्मूला 1 की भारत वापसी की तैयारी: सरकार ने शुरू की पहल, जल्द मिल सकती है खुशखबरी


    नई दिल्ली। केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने देश के खेल प्रेमियों को बड़ी उम्मीद दी है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि भारत में दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मोटरस्पोर्ट प्रतियोगिता फॉर्मूला 1 की वापसी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और यह 2027 से पहले देश में दोबारा आयोजित हो सकती है। मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भारत को अंतरराष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बनाना है और इसी दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

    खेल मंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि फॉर्मूला 1 की वापसी को लेकर ट्रैक और तकनीकी स्तर की कई अहम बाधाएं दूर कर ली गई हैं। उनके अनुसार अगले छह महीनों में बाकी तैयारियों को भी पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार चाहती है कि लंबे अंतराल के बाद भारत एक बार फिर दुनिया के सबसे तेज और रोमांचक रेसिंग इवेंट की मेजबानी करे। उन्होंने कहा कि इस दिशा में संबंधित एजेंसियां और खेल मंत्रालय मिलकर तेजी से काम कर रहे हैं ताकि समयसीमा के भीतर सभी व्यवस्थाएं पूरी हो सकें।

    भारत में पहले भी फॉर्मूला 1 का आयोजन हो चुका है, जब 2011 से 2013 के बीच ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में इंडियन ग्रां प्री का आयोजन किया गया था। यह ट्रैक प्रसिद्ध डिजाइनर हरमन टिल्के द्वारा तैयार किया गया था और इसे दुनिया के बेहतरीन रेसिंग ट्रैकों में गिना जाता है। शुरुआती तीन सीजन में सेबेस्टियन वेट्टल ने रेड बुल रेसिंग के लिए लगातार जीत दर्ज कर दबदबा बनाया था, जिससे भारत में इस खेल को काफी लोकप्रियता मिली थी।

    हालांकि 2013 के बाद यह आयोजन भारत में बंद हो गया था। इसके पीछे मुख्य कारण टैक्स संबंधी विवाद, आयोजन की भारी लागत और प्रशासनिक चुनौतियां बताई जाती हैं। इसके बाद यह रेस फॉर्मूला 1 कैलेंडर से पूरी तरह बाहर हो गई। अब सरकार का दावा है कि पुराने अनुभवों से सीख लेते हुए नए मॉडल पर काम किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन स्थायी रूप से भारत में हो सकें।

    खेल मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल फॉर्मूला 1 ही नहीं बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों जैसे मोटोजीपी को भी भारत में लाने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं। सरकार का मानना है कि इससे देश में खेल संस्कृति मजबूत होगी, युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और भारत की वैश्विक पहचान और भी सशक्त होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत में फॉर्मूला 1 की वापसी होती है तो इससे खेल पर्यटन, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बड़ा फायदा मिलेगा। साथ ही, भारत वैश्विक खेल मानचित्र पर एक बार फिर मजबूत उपस्थिति दर्ज कर सकेगा। खेल प्रेमियों में इस घोषणा के बाद उत्साह देखा जा रहा है और सभी को आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

    खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि भारत में फॉर्मूला 1 की वापसी की तैयारियां चल रही हैं और 2027 से पहले रेस दोबारा हो सकती है। सरकार ट्रैक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है, जिससे भारत फिर से इंटरनेशनल मोटरस्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बन सके।

  • मप्र कैबिनेट के बड़े फैसले: 6 जिलों में खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज, 19,810 करोड़ के विकास कार्यों को दी मंजूरी

    मप्र कैबिनेट के बड़े फैसले: 6 जिलों में खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज, 19,810 करोड़ के विकास कार्यों को दी मंजूरी

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में लोक कल्याण और विकास कार्यों के लिए लगभग 19,810 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। साथ ही प्रदेश के छह जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोलने को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

    विभिन्न विभागों की योजनाओं को मिली मंजूरी
    लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि बैठक में लोक निर्माण, सिंचाई, महिला एवं बाल विकास, कृषि और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।

    सिंचाई और सड़क परियोजनाओं पर बड़ा खर्च
    मंत्रिपरिषद ने सागर जिले की मिडवासा मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 286 करोड़ 26 लाख रुपये की प्रशासकीय मंजूरी दी है। इस परियोजना से 27 गांवों की करीब 7200 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग के तहत विभिन्न परियोजनाओं के लिए 10,801 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसमें बीओटी मार्गों का विकास, परियोजनाओं के भुगतान और सड़क विकास निगम की बाह्य वित्त परियोजनाएं शामिल हैं, जिन्हें 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

    पोषण, ग्रामीण विकास और कृषि को बढ़ावा
    पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत प्रधानमंत्री पोषण शक्ति और मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं के संचालन के लिए 3,553 करोड़ 35 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। वहीं, कृषि क्षेत्र में ‘सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (SMAM)’ के तहत 2,250 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा, लागत और समय की बचत होगी तथा ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर
    प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए 1,674 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसके तहत जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए करीब 1,005 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    महिला सशक्तिकरण योजनाओं को भी समर्थन
    महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं—बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन-181 के संचालन के लिए 240 करोड़ 42 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

    8 नए वन स्टॉप सेंटर खुलेंगे
    प्रदेश में आठ नए वन स्टॉप सेंटर शुरू करने का निर्णय लिया गया है। ये सेंटर मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा, धार (मनावर), पीथमपुर, इंदौर (लसूडिया, सांवेर) और झाबुआ (पेटलावद) में स्थापित किए जाएंगे।

    इन जिलों में बनेंगे नए मेडिकल कॉलेज
    मंत्रिपरिषद ने राजगढ़, मंडला, नीमच, मंदसौर, शिवपुरी और सिंगरौली जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा और स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

  • भोपाल में शराब दुकान के खिलाफ धरना: जिपं उपाध्यक्ष ने शटर गिराकर किया विरोध, हाथों में तख्तियां

    भोपाल में शराब दुकान के खिलाफ धरना: जिपं उपाध्यक्ष ने शटर गिराकर किया विरोध, हाथों में तख्तियां


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शराब दुकानों की शिफ्टिंग को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। ईंटखेड़ी में तो हालात ऐसे बन गए कि जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट खुद ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गए। नाराज लोगों ने पहले दुकान का शटर गिराया, फिर मौके पर टेंट लगाकर भजन-कीर्तन शुरू कर दिया।

    शटर गिराकर शुरू किया धरना, प्रशासन को दी चेतावनी

    ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही कलेक्टर को आवेदन देकर शराब दुकान हटाने की मांग की थी, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो सोमवार दोपहर 12 बजे से दुकान के सामने ही धरना शुरू कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक दुकान हटाई नहीं जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और दुकान खुलने नहीं दी जाएगी।

    स्कूल-कॉलेज के रास्ते में दुकान, महिलाओं-बच्चों को परेशानी

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह दुकान भैंरोपुरा, कल्याणपुरा और खामखेड़ा जाने वाले मुख्य रास्ते पर स्थित है। यहां अक्सर लोग बैठकर शराब पीते हैं, जिससे राहगीरों खासकर महिलाओं और बच्चों  को भारी परेशानी होती है। क्षेत्र में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी बढ़ रहा है, जिससे माहौल बिगड़ रहा है।

    भोपाल के कई इलाकों में एक जैसा विरोध

    ईंटखेड़ी ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य इलाकों में भी शराब दुकानों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है-

    अवधपुरी: ऋषिपुरम 80 फीट रोड पर लोग रोज सुंदरकांड पाठ कर विरोध जता रहे हैं।
    सेमराकलां: विजय नगर साईंराम कॉलोनी में एक साल से मांग, अब टेंट लगाकर भजन-कीर्तन।
    कोलार रोड (मंदाकिनी चौराहा): रहवासी इलाके और जैन मंदिर के पास दुकान शिफ्ट होने पर विरोध।
    पॉलिटेक्निक चौराहा: प्रोफेसर कॉलोनी के पास दुकान के खिलाफ छात्र संगठन भी सड़कों पर उतर चुके हैं।

    जनआंदोलन का रूप लेता विरोध

    भोपाल में शराब दुकानों को लेकर बढ़ता विरोध अब जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। ग्रामीणों और शहरवासियों का कहना है कि आबादी वाले इलाकों में ऐसी दुकानों से सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है और सुरक्षा को खतरा बढ़ रहा है।

  • बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, अपनाएं ये आसान उपाय

    बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, अपनाएं ये आसान उपाय

    नई दिल्ली। अप्रैल का महीना जहां मौसम को सुहावना बनाता है, वहीं बच्चों की सेहत के लिए यह चुनौतीपूर्ण भी साबित हो सकता है। कभी तेज धूप तो कभी अचानक बारिश के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव होता रहता है, जिससे बच्चों का शरीर जल्दी तालमेल नहीं बिठा पाता।

    दिन में गर्मी और रात में ठंड के कारण सर्दी-जुकाम, गले में खराश और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा हवा में बढ़ती नमी और धूल से एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। ऐसे में बच्चों की देखभाल के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

    मौसम के अनुसार पहनाएं कपड़े
    इस समय बच्चों को न ज्यादा भारी और न ही बहुत हल्के कपड़े पहनाने चाहिए। बेहतर होगा कि उन्हें लेयरिंग में कपड़े पहनाएं, ताकि जरूरत के अनुसार कपड़े कम या ज्यादा किए जा सकें। घर से बाहर निकलते समय शॉल या हल्की जैकेट साथ रखना खासकर शाम के समय फायदेमंद रहता है।

    पौष्टिक आहार से बढ़ाएं इम्युनिटी
    बदलते मौसम में बच्चों का खानपान बेहद अहम भूमिका निभाता है। उनके आहार में ताजे फल और हरी सब्जियां शामिल करें, जो विटामिन्स से भरपूर हों। ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स से परहेज करना बेहतर होता है। साथ ही बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना जरूरी है, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।

    सफाई और दिनचर्या पर दें ध्यान
    इस मौसम में संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इसलिए बच्चों को साफ-सफाई की आदत सिखाना जरूरी है। बाहर से आने के बाद हाथ-पैर धोना, नियमित नहाना और साफ कपड़े पहनना उनकी सेहत के लिए लाभदायक होता है। इसके अलावा पर्याप्त नींद भी जरूरी है। समय पर सोने से बच्चों की इम्युनिटी बेहतर होती है और वे बीमारियों से दूर रहते हैं।

    लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
    अगर सभी सावधानियों के बावजूद बच्चे में सर्दी, खांसी या किसी भी तरह की परेशानी नजर आए, तो उसे नजरअंदाज न करें। समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि बीमारी बढ़ने से पहले ही उसका इलाज हो सके।

  • भारतीय ‘राजमा-चावल’ का वैश्विक जलवा: दुनिया की टॉप बीन्स डिशेज में बनाई जगह

    भारतीय ‘राजमा-चावल’ का वैश्विक जलवा: दुनिया की टॉप बीन्स डिशेज में बनाई जगह

    नई दिल्ली। भारतीय खानपान के लिए गर्व की बात है कि घर-घर में पसंद किया जाने वाला साधारण लेकिन स्वादिष्ट ‘राजमा-चावल’ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। अपने गाढ़े स्वाद और घरेलू अंदाज के लिए मशहूर यह नॉर्थ इंडियन व्यंजन दुनिया की बेहतरीन बीन्स डिशेज में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि अब भारतीय घरेलू व्यंजन भी वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं और लोगों के दिलों में अपनी जगह बना रहे हैं।

    ग्लोबल रैंकिंग में मिली जगह
    हाल ही में फूड रेटिंग प्लेटफॉर्म TasteAtlas द्वारा जारी सूची में राजमा और राजमा-चावल को दुनिया के टॉप 100 बीन्स डिशेज में स्थान दिया गया है। यह रैंकिंग दुनियाभर के हजारों यूजर्स की पसंद के आधार पर तैयार की गई है, जो भारतीय स्वाद की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है।

    रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन

    इस सूची में राजमा को 14वां स्थान मिला है, जबकि राजमा-चावल की जोड़ी 25वें पायदान पर रही। खास बात यह है कि इस लिस्ट में ब्राजील, पुर्तगाल, मैक्सिको और तुर्की जैसे देशों के पारंपरिक व्यंजन भी शामिल हैं, जिनके बीच भारतीय डिश का यह स्थान काफी अहम माना जा रहा है।

    सिर्फ खाना नहीं, एक एहसास
    राजमा-चावल एक सरल लेकिन बेहद लोकप्रिय डिश है, जिसमें मसालों में पके लाल राजमा को चावल के साथ परोसा जाता है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में यह केवल भोजन नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा स्वाद है, जो लोगों को घर और बचपन की याद दिलाता है।

    सादगी में छिपा है असली स्वाद

    इस डिश की खासियत इसकी पारंपरिक तैयारी में है। राजमा को रातभर भिगोकर प्याज, टमाटर, अदरक, लहसुन और मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू गहराई तक विकसित होती है। चावल के साथ परोसे जाने पर यह स्वाद और पोषण का बेहतरीन मेल बन जाता है।

    टॉप पर रही पुर्तगाल की डिश
    जहां भारतीय राजमा-चावल ने सूची में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं पहला स्थान पुर्तगाल की मशहूर डिश Sopa da pedra को मिला। इसके अलावा टॉप 10 में ब्राजील की फेजोआदा, मैक्सिको की सोपा तारास्का और मिस्र की फुल मेडामेस जैसी डिशेज भी शामिल हैं।

  • घर पर बनाएं बाजार जैसी गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी, जानिए आसान टिप्स और सही तरीका..

    घर पर बनाएं बाजार जैसी गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी, जानिए आसान टिप्स और सही तरीका..

    नई दिल्ली। गर्मियों में ठंडे पेय की चाह बढ़ जाती है, लेकिन बाजार में मिलने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स और कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद केमिकल्स सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में देसी पेय ‘लस्सी’ एक बेहतरीन और हेल्दी विकल्प है, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है बल्कि पोषण भी प्रदान करती है।

    अक्सर लोगों को लगता है कि बाजार जैसी गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी घर पर बनाना मुश्किल है, लेकिन सही तरीके और कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।

    अच्छी लस्सी के लिए दही का सही चयन जरूरी

    लस्सी बनाने के लिए ताजा और हल्का खट्टा दही सबसे उपयुक्त माना जाता है। बहुत ज्यादा खट्टा दही स्वाद को बिगाड़ सकता है। दही जितना फ्रेश होगा, लस्सी उतनी ही स्वादिष्ट बनेगी। लस्सी बनाने से पहले दही को अच्छी तरह फेंट लें, ताकि उसमें कोई गांठ न रहे और टेक्सचर स्मूद बने।

    मीठी और नमकीन लस्सी का सही संतुलन
    लस्सी को अपनी पसंद के अनुसार मीठा या नमकीन बनाया जा सकता है।
    – मीठी लस्सी के लिए चीनी, इलायची पाउडर और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाएं।
    – नमकीन लस्सी के लिए काला नमक, भुना जीरा पाउडर और पुदीना डालने से स्वाद और बढ़ जाता है।
    लस्सी को मथते समय ध्यान रखें कि इसे ज्यादा देर तक ब्लेंड न करें, वरना इसका गाढ़ापन कम हो सकता है।

    ठंडक और परोसने का सही तरीका

    लस्सी को ठंडा बनाने के लिए बर्फ डाली जा सकती है, लेकिन अधिक बर्फ डालने से स्वाद हल्का हो जाता है। बेहतर है कि पहले से ठंडा दही इस्तेमाल करें। परोसते समय ऊपर से मलाई या ड्राय फ्रूट्स डालकर इसे और भी स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। अगर देसी अंदाज में लस्सी का मजा लेना चाहते हैं, तो इसे मिट्टी के कुल्हड़ में सर्व करना एक अच्छा विकल्प है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। इस तरह कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप घर पर ही बाजार जैसी गाढ़ी, ठंडी और स्वादिष्ट लस्सी तैयार कर सकते हैं।