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  • Q3 में ACC का रिकॉर्ड ब्रेकिंग रिजल्ट, मुनाफे में 346% की छलांग, बिक्री शिखर पर

    Q3 में ACC का रिकॉर्ड ब्रेकिंग रिजल्ट, मुनाफे में 346% की छलांग, बिक्री शिखर पर

    नई दिल्ली | अदाणी ग्रुप की प्रमुख सीमेंट कंपनी एसीसी लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) सालाना आधार पर 346 प्रतिशत बढ़कर 380 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, तिमाही आय 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 6,483 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

    रिकॉर्ड सीमेंट बिक्री, उत्पादन में भी तेज बढ़त

    एक्सचेंज फाइलिंग में एसीसी ने बताया कि 31 दिसंबर को समाप्त तिमाही में कंपनी ने अब तक की सबसे ज्यादा सीमेंट बिक्री दर्ज की है।
    इस दौरान कुल सीमेंट उत्पादन 11.3 मिलियन टन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 15 प्रतिशत अधिक है।

    प्रीमियम सीमेंट और RMC कारोबार बना ताकत

    एसीसी लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक एवं सीईओ विनोद बहेटी ने कहा कि कंपनी ने एक और मजबूत तिमाही के साथ अपनी ग्रोथ को बरकरार रखा है।

    उन्होंने बताया कि प्रीमियम सीमेंट, ट्रेड सेगमेंट और रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) कारोबार के विस्तार से कंपनी को उद्योग की अन्य कंपनियों की तुलना में बेहतर कीमतें मिलीं, जिससे बाजार में उसकी स्थिति और मजबूत हुई।

    अंबुजा सीमेंट्स में विलय से बनेगा ‘वन सीमेंट प्लेटफॉर्म’

    कंपनी के मुताबिक, तिमाही के दौरान सबसे बड़ा रणनीतिक बदलाव एसीसी लिमिटेड का अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड में विलय है।

    इस विलय से एक साझा ‘वन सीमेंट प्लेटफॉर्म’ बनेगा, जो ग्रोथ को तेज करने, संचालन को बेहतर बनाने, लागत घटाने और लंबे समय में कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक मजबूती बढ़ाने में मदद करेगा।

    विनोद बहेटी ने कहा कि सभी कानूनी मंजूरियां मिलने के बाद यह एकीकरण खरीद, निर्माण और वितरण के क्षेत्रों में बेहतर तालमेल लाएगा।

    नए श्रम कानूनों से बढ़ा खर्च

    नवंबर 2025 से नए लेबर कोड लागू होने के बाद एसीसी ने 50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च दर्ज किया है। यह राशि कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और अवकाश भुगतान से जुड़ी देनदारियों के लिए है।

    FY28 तक लागत घटाने का बड़ा लक्ष्य

    एसीसी ने बताया कि वह अपनी मूल कंपनी के साथ मिलकर लगातार लागत कम करने पर काम कर रही है।
    कंपनी का लक्ष्य है कि वित्त वर्ष 2028 तक प्रति टन लागत 3,650 रुपये तक लाई जाए।

    नए प्लांट और प्रीमियम पोर्टफोलियो से बढ़ेगा मुनाफा

    कंपनी ने जानकारी दी कि सलाई बनवा (2.4 मिलियन टन) और कलंबोली (1.0 मिलियन टन) की सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट्स FY26 की चौथी तिमाही में शुरू होने की राह पर हैं।

    इसके अलावा, ACC गोल्ड जैसे प्रीमियम सीमेंट बेहतर मार्जिन दे रहे हैं। ट्रेड और प्रीमियम सेगमेंट की बढ़ती हिस्सेदारी से आगे भी बेहतर रियलाइजेशन की उम्मीद जताई गई है।

    कंक्रीट कारोबार में भी जबरदस्त विस्तार

    पिछले एक साल में एसीसी ने 14 नए कंक्रीट प्लांट जोड़े हैं।
    अब कंपनी के कुल 117 प्लांट, देश के 45 शहरों में संचालित हो रहे हैं।

    विनोद बहेटी ने ग्राहकों, एक लाख से ज्यादा डीलर-रिटेलर और सात लाख से अधिक मिस्त्री-ठेकेदारों का आभार जताया।

  • घनी और खूबसूरत आइब्रो के लिए रामबाण घरेलू नुस्खे: अब पतली भौंहों को कहें अलविदा

    घनी और खूबसूरत आइब्रो के लिए रामबाण घरेलू नुस्खे: अब पतली भौंहों को कहें अलविदा


    नई दिल्ली। चेहरे की बनावट में आइब्रो बहुत बड़ा हाथ होता है। सही आकार और घनी आइब्रो न केवल आंखों को उभारती हैं, बल्कि आपके पूरे लुक को अट्रैक्टिव बनाती हैं। अगर आप भी पतली या हल्की आइब्रो से परेशान हैं और महंगे केमिकल वाले सीरम का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो ये घरेलू उपाय आपके लिए जादू की तरह काम करेंगे।

    क्यों पतली होती हैं आइब्रो

    नुस्खों से पहले यह जानना जरूरी है कि आइब्रो हल्की क्यों होती हैं:पोषण की कमी: विटामिन A, C, E और प्रोटीन की कमी।हार्मोनल बदलाव: थायराइड या अन्य शारीरिक बदलाव। ओवर-प्लक‍िंग: बार-बार थ्रेडिंग या प्लकिंग करना। तनाव अत्यधिक मानसिक दबाव भी बालों के झड़ने का कारण बनता है।

    अरंडी का तेल नेचुरल ग्रोथ बूस्टर

    अरंडी का तेल आइब्रो को घना बनाने का सबसे पुराना और असरदार तरीका है। इसमें मौजूद रिसिनोइलिक एसिड बालों के रोम छिद्रों को उत्तेजित करता है। कैसे इस्तेमाल करें: रात को सोने से पहले अपनी उंगलियों या क्यू-टिप से तेल को भौंहों पर लगाएं और 2-3 मिनट मसाज करें। सुबह इसे गुनगुने पानी से धो लें।

    नारियल तेल प्रोटीन का पोषण

    नारियल तेल में फैटी एसिड और विटामिन E होता है, जो बालों के टूटने को कम करता है।फायदा यह न केवल आइब्रो को काला बनाता है, बल्कि सर्दियों में होने वाले डैंड्रफ से भी बचाता है। इसे हल्का गुनगुना करके लगाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।

    प्याज का रस सल्फर की शक्ति

    प्याज के रस में सल्फर की प्रचुर मात्रा होती है, जो कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है। यह नई ग्रोथ लाने में बहुत मददगार है। सावधानी इसे रुई की मदद से लगाएं और ध्यान रहे कि यह आंखों में न जाए। 30-40 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें।

    एलोवेरा जेल जड़ों की मजबूती

    एलोवेरा में एलोनिन नामक तत्व होता है जो बालों की बनावट में सुधार करता है। यह चिपचिपा नहीं होता, इसलिए आप इसे दिन में भी लगा सकते हैं। विधि ताजे एलोवेरा जेल से आइब्रो की मसाज करें। यह जड़ों को गहराई से पोषण देता है।

    जैतून का तेल विटामिन का खजाना

    जैतून का तेल विटामिन A और E से भरपूर होता है। विटामिन E बालों को पोषण देता है जबकि विटामिन A नेचुरल ऑयल सीबम के उत्पादन को बढ़ाता है। टिप इसे रोज रात को लगाने से आइब्रो रेशमी और घनी दिखने लगती हैं।

    जरूरी टिप्स

    मसाज रोजाना रात को 5 मिनट आइब्रो की मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है जिससे बाल जल्दी उगते हैं। थ्रेडिंग से ब्रेक आइब्रो की ग्रोथ के लिए कम से कम 6-8 हफ्तों तक थ्रेडिंग न कराएं। हाइड्रेशन पर्याप्त पानी पिएं और डाइट में आयरन और प्रोटीन युक्त चीजें शामिल करें।

  • यूजीसी के नए नियमों पर छात्र राजनीति गरम: NSUI ने मांगी जजों की भागीदारी ABVP ने कहा- भ्रांतियां दूर करे आयोग

    यूजीसी के नए नियमों पर छात्र राजनीति गरम: NSUI ने मांगी जजों की भागीदारी ABVP ने कहा- भ्रांतियां दूर करे आयोग


    नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग UGC द्वारा जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम 2026 को लेकर देश के दो सबसे बड़े छात्र संगठनों NSUI और ABVP ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। जहां दोनों संगठनों ने कैंपस में जाति आधारित भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य का स्वागत किया है वहीं इसके कार्यान्वयन और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए हैं।

    NSUI की मांग कागजी नहीं जवाबदेह बने समिति

    कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया ने नियमों का स्वागत तो किया लेकिन इन्हें अधूरा बताया है। संगठन का कहना है कि भेदभाव विरोधी समितियां विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए। रिटायर्ड जजों की एंट्री: NSUI ने मांग की है कि समितियों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए इसमें कार्यरत या सेवानिवृत्त न्यायाधीशोंको शामिल किया जाना चाहिए।

    प्रतिनिधित्व की शर्त: संगठन के अनुसार समिति में एससी एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों और शिक्षकों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होना चाहिए। प्रशासन पर निशाना ने आशंका जताई कि स्पष्ट संरचना के अभाव में ये समितियां विश्वविद्यालय प्रशासन की कठपुतली बन सकती हैं जिससे न्याय का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। जवाबदेही: संगठन ने मांग की है कि आरक्षण नीतियों और रिक्त पदों NFS के कारण खाली के मामले में दोषियों की जवाबदेही तय की जाए।

    ABVP का रुख संवाद और स्पष्टता की जरूरत

    वहीं आरएसएस समर्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने यूजीसी के नियमों में अस्पष्टता और शब्दावली को लेकर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि नियमों को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रांतियां पैदा हो रही हैं। भ्रांतियों का निवारण: ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि यूजीसी को तत्काल अधिसूचना के उन उपबंधों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए जिनकी शब्दावली को लेकर समाज में भ्रम है। कोर्ट में पक्ष: चूंकि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए ABVP ने मांग की है कि यूजीसी को शीघ्र हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। मान अधिकार: परिषद का कहना है कि सभी संस्थानों को लोकतांत्रिक भावना का सम्मान करना चाहिए ताकि हर छात्र को समान अधिकार मिलें और कैंपस भेदभाव-मुक्त हो।

    क्या है UGC विनियम 2026
    यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति लिंग या अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें प्रत्येक संस्थान में एक प्रभावी निवारण तंत्र बनाने और समता को बढ़ावा देने के प्रावधान शामिल हैं। नों ही संगठनों का एक सुर में कहना है कि कैंपस में भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। हालांकि NSUI जहां संरचनात्मक बदलाव और न्यायिक हस्तक्षेप पर जोर दे रहा है वहीं ABVP वैधानिक स्पष्टता और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहा है।
  • कर्नाटक कांग्रेस में कलह की गूंज: सिद्धारमैया की रैली में लगे डीके-डीके के नारे मुख्यमंत्री ने मंच से खोया आपाzz

    कर्नाटक कांग्रेस में कलह की गूंज: सिद्धारमैया की रैली में लगे डीके-डीके के नारे मुख्यमंत्री ने मंच से खोया आपाzz


    नई दिल्ली । कर्नाटक की सियासत में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच की अंदरूनी खींचतान मंगलवार को एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर नुमाया हो गई। बेंगलुरु में आयोजित एक विरोध रैली के दौरान मुख्यमंत्री उस वक्त बेहद असहज हो गए और अपना आपा खो बैठे जब उनके भाषण से ठीक पहले पार्टी कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने अपने चहेते नेता डीके शिवकुमार के पक्ष में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।

    रैली का मंजर: जब सिद्धारमैया पर भारी पड़े डीके के नारे

    मंगलवार 27 जनवरी को बेंगलुरु में कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बड़ी रैली बुलाई थी। मंच पर दिग्गज नेताओं की मौजूदगी थी लेकिन माहौल तब बिगड़ गया जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पोडियम की ओर बढ़े: नारेबाजी की गूंज: जैसे ही सिद्धारमैया अपनी कुर्सी से उठे यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने “डीके डीके” के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते ये शोर इतना बढ़ा कि मुख्यमंत्री का भाषण शुरू होना मुश्किल हो गया।

    आपा खो बैठे सीएम: नारेबाजी से चिढ़कर सिद्धारमैया ने पहले शांति की अपील की लेकिन जब हंगामा नहीं थमा तो उन्होंने गुस्से में चिल्लाकर पूछा ये कौन है जो DK DK चिल्ला रहा है मंच से चेतावनी: स्थिति बिगड़ती देख मंच संचालक को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने यूथ कांग्रेस के नेताओं को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाते हुए कहा “हम जानते हैं आप कौन हैं शांति से मुख्यमंत्री की बात सुनिए।”

    मुद्दा पीछे छूटा गुटबाजी आई सामने

    यह रैली असल में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह नया मिशन लाने के प्रस्ताव के विरोध में थी। रैली में डीके शिवकुमार रणदीप सुरजेवाला और कई मंत्री भी मौजूद थे लेकिन नेतृत्व संघर्ष की छाया ने असल मुद्दे को गौण कर दिया। राजनीतिक गलियारों की चर्चा: विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल नारेबाजी नहीं थी बल्कि कर्नाटक कांग्रेस के भीतर चल रहे शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा है। कई विधायक और एमएलसी खुले तौर पर डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की लॉबिंग कर रहे हैं।

    नेतृत्व परिवर्तन पर क्या है स्थिति

    यद्यपि सिद्धारमैया बार-बार दावा कर रहे हैं कि वे अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और उन्हें आलाकमान का पूरा समर्थन प्राप्त है लेकिन मंगलवार की घटना ने साफ कर दिया कि पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा डीके शिवकुमार के लिए बेताब है। हालांकि डीके शिवकुमार ने आधिकारिक तौर पर यही कहा है कि वे हाईकमान के हर फैसले को स्वीकार करेंगे पर उनके समर्थकों का उत्साह सिद्धारमैया की राह में रोड़े अटका रहा है।

  • अकीरा नंदन AI फिल्म केस: दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख फर्जी सामग्री 72 घंटे में हटाने का आदेश

    अकीरा नंदन AI फिल्म केस: दिल्ली हाई कोर्ट का कड़ा रुख फर्जी सामग्री 72 घंटे में हटाने का आदेश


    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI के बढ़ते दुरुपयोग और डीपफेक तकनीक पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने आंध्र प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और सुपरस्टार पवन कल्याण के बेटे अकीरा नंदन की तस्वीर और नाम का इस्तेमाल कर बनाई गई AI फिल्म के प्रसारण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी की निजता और व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    क्या है पूरा मामला

    अकीरा नंदन अकीरा देसाई की ओर से दायर याचिका में संभवमी स्टूडियोज एलएलपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे बिना अनुमति फिल्म: स्टूडियो ने अकीरा की अनुमति के बिना उनकी इमेज का उपयोग कर लगभग एक घंटे की फिल्म बनाई और उसे यूट्यूब पर दुनिया की पहली ग्लोबल एआई फिल्म बताकर पोस्ट कर दिया। मनगढ़ंत सीन: याचिका में दावा किया गया कि फिल्म में AI के जरिए अकीरा के फर्जी रोमांटिक सीन दिखाए गए हैं जिससे उनकी प्रतिष्ठा और सामाजिक छवि को गहरा नुकसान पहुंचा है।अधिकारों का हनन: अकीरा के व्यक्तित्व आवाज और नाम का कमर्शियल उपयोग उनकी निजता के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

    दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ

    मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला की पीठ ने कहा एआई टूल्स का उपयोग करके किसी व्यक्ति को उसकी अनुमति के बिना मुख्य भूमिका में दिखाना और मनगढ़ंत सामग्री पेश करना उसके व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन है। यदि इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो याचिकाकर्ता को ऐसी क्षति हो सकती है जिसकी भरपाई संभव नहीं होगी।

    अदालत का आदेश और टेक कंपनियों को निर्देश

    अदालत ने अकीरा के पक्ष में अंतरिम आदेश जारी करते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं: ब्रॉडकास्ट पर रोक: विवादित फिल्म के सर्कुलेशन और ब्रॉडकास्ट पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध। मेटा को निर्देश कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वह उल्लंघन करने वाले सभी URL की पहचान करे। 2 घंटे की डेडलाइन: संबंधित प्लेटफॉर्म्स को 72 घंटे के भीतर इस सामग्री को हटाने का आदेश दिया गया है। यदि स्टूडियो सामग्री नहीं हटाता है तो मेटा खुद इसे ब्लॉक/डिलीट करेगा। अगली सुनवाई: इस गंभीर विषय पर अब अगली सुनवाई 5 फरवरी 2026 को होगी।

    व्यक्तित्व अधिकार क्या हैं

    यह कानूनी अधिकार किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को अपने नाम छवि आवाज या व्यक्तित्व की अन्य विशेषताओं को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होने से रोकने की शक्ति देता है। हाल के दिनों में अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर जैसे सितारों ने भी अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए कोर्ट से आदेश प्राप्त किए हैं।

  • चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    नई दिल्ली । देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थलों बद्रीनाथ केदारनाथ और गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने की सुगबुगाहट ने देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर इसे लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने इस संभावित फैसले का पुरजोर समर्थन कर सबको चौंका दिया है। इमाम इलियासी ने इसे पूरी तरह आस्था का विषय करार देते हुए तर्क दिया है कि जिस प्रकार इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है उसी तरह हिंदू धर्मस्थलों को भी अपने नियम तय करने का पूरा अधिकार है।

    आस्था और मर्यादा की दलील इमाम उमर अहमद इलियासी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर धर्मस्थल की अपनी गरिमा और मर्यादा होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक मुसलमान का गंगोत्री या केदारनाथ जैसे पवित्र सनातनी केंद्रों में क्या काम? उनके अनुसार यदि कोई मुस्लिम ऐसी जगहों पर जाता है जहां सदियों पुरानी सनातनी परंपराएं जुड़ी हैं तो वहां वैचारिक या शारीरिक टकराव की स्थिति बन सकती है। उन्होंने नसीहत दी कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की अत्यंत पवित्र जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। इमाम ने तिरुपति बालाजी मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इसी प्रकार के कड़े नियम लागू हैं और सभी समुदायों को एक-दूसरे के धार्मिक नियमों और सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक इस मुद्दे पर राजनीति करना व्यर्थ है क्योंकि यह सीधे तौर पर किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है।

    मंदिर समितियों की एकजुटता वर्तमान स्थिति यह है कि गंगोत्री मंदिर समिति ने पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय ले लिया है। वहीं बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी संबंधित हितधारकों और तीर्थ पुरोहितों के साथ इस विषय पर आम सहमति बना ली है। अब बस बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाना बाकी है। हालांकि समितियों ने यह स्पष्ट किया है कि सनातन धर्म में सच्ची आस्था रखने वाले किसी भी व्यक्ति का स्वागत किया जाएगा चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि का हो। दूसरी ओर हरिद्वार की गंगा सभा ने भी हर की पौड़ी पर इसी तरह की पाबंदी लगाने की मांग तेज कर दी है जिससे यह अभियान पूरे उत्तराखंड में फैलता दिख रहा है।

    सियासी घमासान और विरोध के स्वर जैसे-जैसे यह मामला चर्चा में आ रहा है उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति बताया है। उत्तराखंड कांग्रेस का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के भावनात्मक विवाद पैदा कर रही है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंगोत्री जैसे ऊंचे और पवित्र स्थानों पर पहले से ही कोई मुसलमान नहीं जाता लेकिन वहां पहचान साबित करने जैसी अनिवार्य शर्तें लगाना समाज में नफरत का जहर घोलने जैसा है। फिलहाल उत्तराखंड सरकार ने इस संवेदनशील विषय पर फूंक-फूंक कर कदम रखने का संकेत दिया है और कहा है कि सभी मंदिर समितियों का पक्ष सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।

  • RBI का फरवरी तोहफा: लोन की EMI में बड़ी कटौती के संकेत जानें कैसे आपकी जेब को मिलेगी राहत

    RBI का फरवरी तोहफा: लोन की EMI में बड़ी कटौती के संकेत जानें कैसे आपकी जेब को मिलेगी राहत


    नई दिल्ली । देश के करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों और कर्जदारों के लिए फरवरी का महीना खुशियों की सौगात लेकर आ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समिति की बैठक को लेकर वित्तीय गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका की ताजा रिपोर्ट और आर्थिक संकेतकों की मानें तो आगामी 6 फरवरी को केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती का ऐतिहासिक फैसला ले सकता है। यदि यह अनुमान हकीकत में बदलता है तो आपके होम लोन कार लोन और पर्सनल लोन की मासिक किस्तों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी जिससे आम आदमी की मासिक बजट योजना को बड़ी मजबूती मिलेगी।

    मुद्रास्फीति में नरमी और रेपो रेट का गणित आर्थिक विशेषज्ञों का तर्क है कि देश में मुद्रास्फीति महंगाई दर के आंकड़े अब धीरे-धीरे आरबीआई के संतोषजनक दायरे में आ रहे हैं। इसी अनुकूल स्थिति का लाभ उठाते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में नरमी का रुख अपना सकता है। वर्तमान में जो रेपो रेट लागू है उसमें कटौती के बाद यह घटकर 5.25 प्रतिशत के स्तर पर आ सकता है। गौरतलब है कि रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से पैसा उधार लेते हैं। जब बैंकों को केंद्रीय बैंक से सस्ता फंड मिलता है तो वे अपनी लेंडिंग दरों में कटौती करते हैं जिसका सीधा फायदा अंतिम उपभोक्ता को सस्ती EMI के रूप में मिलता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह वर्तमान कटौती चक्र की अंतिम कटौती हो सकती है जिसके बाद स्थिरता का दौर शुरू होगा।

    सिस्टम में नकदी बढ़ाने का मास्टर प्लान आरबीआई केवल ब्याज दरें घटाने तक सीमित नहीं है बल्कि वह भारतीय बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक लिक्विडिटी मैनेजमेंट प्लान पर भी काम कर रहा है। इसके तहत केंद्रीय बैंक 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। ओपन मार्केट ऑपरेशंसके माध्यम से होने वाली यह खरीद दो चरणों में 29 जनवरी और 5 फरवरी को आयोजित की जाएगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकों के हाथ में अधिक पैसा देना है ताकि वे आम जनता और उद्योगों को बिना किसी बाधा के कर्ज बांट सकें। इसके अतिरिक्त 4 फरवरी को 10 अरब डॉलर की डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी भी की जाएगी जो विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने और दीर्घकालिक तरलता को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी।

    अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति वित्तीय जानकारों का कहना है कि बजट के ठीक बाद आरबीआई के ये कदम वास्तविक अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे। ब्याज दरों में कमी से न केवल व्यक्तिगत कर्जदारों को राहत मिलेगी बल्कि कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए भी पूंजी जुटाना सस्ता होगा जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 6 फरवरी को होने वाले औपचारिक ऐलान पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

  • बांग्लादेश और चीन के बीच बड़ा रक्षा समझौता: अब ढाका में बनेगी ड्रोन फैक्ट्री चीन देगा अपनी तकनीक

    बांग्लादेश और चीन के बीच बड़ा रक्षा समझौता: अब ढाका में बनेगी ड्रोन फैक्ट्री चीन देगा अपनी तकनीक


    नई दिल्ली । दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने मंगलवार को चीन के साथ एक रणनीतिक रक्षा समझौते पर मुहर लगा दी है। इस ऐतिहासिक डील के तहत अब बांग्लादेश की धरती पर मानवरहित हवाई वाहनों यानी ड्रोन्स का निर्माण किया जाएगा। यह समझौता बांग्लादेश वायु सेना और चीन की दिग्गज सरकारी डिफेंस कंपनी चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉरपोरेशन इंटरनेशनल के बीच हुआ है।

    यह समझौता न केवल बांग्लादेश की सैन्य शक्ति को बढ़ाएगा बल्कि उसे रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर भी ले जाएगा। समझौते के मुख्य स्तंभ: तकनीक का हस्तांतरण इस डील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि चीन केवल ड्रोन बेचेगा नहीं बल्कि बांग्लादेश को इन्हें बनाने की तकनीकभी देगा। अत्याधुनिक सुविधा: ढाका में एक हाई-टेक फैक्ट्री स्थापित की जाएगी जहाँ ड्रोन्स का उत्पादन और असेंबलिंग होगी।

    आत्मनिर्भरता: तकनीक मिलने के बाद भविष्य में बांग्लादेश वायु सेना स्वतंत्र रूप से अपने ड्रोन्स विकसित कर सकेगी जिससे उसकी विदेशी निर्भरता कम होगी। किस तरह के आसमानी शिकारी तैयार करेगा बांग्लादे शुरुआत में फैक्ट्री में दो मुख्य श्रेणियों के ड्रोन्स पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ये ड्रोन मध्यम ऊंचाई पर लंबी दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम होते हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से निगरानी और टोही अभियानों के लिए किया जाता है।

    ये ड्रोन किसी हेलीकॉप्टर की तरह सीधे उड़ान भर सकते हैं और उतर सकते हैं। इन्हें रनवे की जरूरत नहीं होती जो इन्हें दुर्गम क्षेत्रों और आपदा प्रबंधन के लिए बेहद उपयोगी बनाता है।बहुउद्देशीय उपयो इन ड्रोन्स का इस्तेमाल केवल युद्ध के लिए ही नहीं बल्कि मानवीय सहायता आपदा प्रबंधन खोज एवं बचाव अभियान और सीमा सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाएगा। चीनी कंपनी और बढ़ता रक्षा सहयोग
    दुनिया की उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल है जो न केवल ड्रोन बल्कि अत्याधुनिक राडार दूरसंचार उपकरण और सैन्य सॉफ्टवेयर भी बनाती है।

    रक्षा आपूर्तिकर्ता: चीन दशकों से बांग्लादेश का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है। अगला बड़ा कदम: ड्रोन्स के अलावा बांग्लादेश अपने पुराने हो चुके F-7 और MiG-29 विमानों को बदलने के लिए चीन से 20 चेंगदू J-10C विगोरस ड्रैगन लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में है। यह डील लगभग 2.2 अरब डॉलर 18 हजार करोड़ रुपये की हो सकती है। हस्ताक्षर समारोह: ढाका छावनी स्थित BAF मुख्यालय में हुए इस समारोह में बांग्लादेश के वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान और चीन के राजदूत याओ वेन सहित कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मौजूद थे।

  • ट्रंप की आर्थिक नीतियों पर भारी पड़ा अविश्वास: मंदी की दहलीज पर अमेरिका, कोविड काल से भी नीचे गिरा उपभोक्ता भरोसा

    ट्रंप की आर्थिक नीतियों पर भारी पड़ा अविश्वास: मंदी की दहलीज पर अमेरिका, कोविड काल से भी नीचे गिरा उपभोक्ता भरोसा


    नई दिल्ली। अमेरिका में सत्ता परिवर्तन और डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति की वापसी के बावजूद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था गहरे संकट के संकेतों से घिरी नजर आ रही है। सख्त इमिग्रेशन नियमों और भारी-भरकम टैरिफ के जरिए देश को ट्रिलियन डॉलर का फायदा पहुंचाने के ट्रंप सरकार के दावों पर अब खुद अमेरिकी जनता ने ही सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। ताजा आर्थिक आंकड़ों ने व्हाइट हाउस की चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि अमेरिका का कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स उपभोक्ता विश्वास सूचकांक फिसलकर उस स्तर पर जा पहुंचा है जो 2020-21 की विनाशकारी कोविड महामारी के दौर में भी नहीं देखा गया था।

    आंकड़ों में मंदी की आहट यूएस कॉन्फ्रेंस बोर्ड द्वारा जनवरी 2026 के लिए जारी किए गए आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। उपभोक्ता विश्वास का ग्राफ एक ही महीने में 94.2 फीसदी से गिरकर 84.5 फीसदी पर आ गया है। साल 2014 के बाद यह सबसे निचला स्तर है जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि जनता का अपनी अर्थव्यवस्था पर से भरोसा डगमगा रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नागरिकों में भविष्य की आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं लगातार गहरा रही हैं। विशेष रूप से एक्सपेक्टेशन इंडेक्स जो भविष्य की आय और व्यावसायिक स्थितियों का आकलन करता है वह 65.1 पॉइंट पर आ गया है। अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है कि यदि यह सूचकांक 80 से नीचे रहता है तो यह आने वाली भीषण मंदी का स्पष्ट पूर्व-संकेत होता है। ऐसे में ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन जैसे नारे अब धरातल पर हवा-हवाई साबित होते दिख रहे हैं।

    महंगाई और बेरोजगारी का दोहरा वार अमेरिकी जनता के इस असमंजस के पीछे सबसे बड़ा कारण बेतहाशा बढ़ती महंगाई है। किराने का सामान और रोजमर्रा की जरूरतें इतनी महंगी हो गई हैं कि मध्यम वर्ग की कमर टूट चुकी है। कॉन्फ्रेंस बोर्ड की चीफ इकॉनमिस्ट दाना पीटरसन का कहना है कि सूचकांक के पांचों प्रमुख घटक अपने निचले स्तर पर हैं। वहीं दूसरी ओर लेबर मार्केट की स्थिति भी उत्साहजनक नहीं है। ट्रंप सरकार ने स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने के नाम पर वीजा और इमिग्रेशन नियमों को कड़ा तो किया लेकिन इसका सकारात्मक असर नौकरियों पर नहीं दिखा। दिसंबर 2025 में केवल 50 हजार नई नौकरियां सृजित हुईं जबकि तुलनात्मक रूप से साल 2024 में जहां 20 लाख नौकरियां मिली थीं वहीं 2025 में यह आंकड़ा सिमटकर महज 6 लाख रह गया।

    टैरिफ और ट्रेड पॉलिटिक्स का दुष्प्रभाव डोनाल्ड ट्रंप की ट्रेड वॉर और टैरिफ नीतियों ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है जिससे लेबर मार्केट में लो हायर-लो फायर (कम भर्ती कम छंटनी) की स्थिति बन गई है। कंपनियां अनिश्चितता के माहौल में नई नियुक्तियों से बच रही हैं। वर्तमान में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.4 प्रतिशत है लेकिन रोजगार सृजन की सुस्त रफ्तार ने भविष्य को अंधकारमय बना दिया है। निष्कर्षतः ट्रंप की आर्थिक नीतियां फिलहाल उनके ही प्रशासन के लिए गले की हड्डी बनती दिख रही हैं जहां दावे तो ट्रिलियन डॉलर के मुनाफे के हैं लेकिन हकीकत में जनता मंदी के साये में जीने को मजबूर है।

  • सरहद पार से आई सुखद खबर: लाहौर किले में 'लौह मंदिर' का जीर्णोद्धार संपन्न, अब लव की नगरी में गूंजेगी आस्था

    सरहद पार से आई सुखद खबर: लाहौर किले में 'लौह मंदिर' का जीर्णोद्धार संपन्न, अब लव की नगरी में गूंजेगी आस्था


    नई दिल्ली । भगवान श्री राम के भक्तों और भारतीय संस्कृति में गहरी आस्था रखने वालों के लिए पड़ोसी देश पाकिस्तान से एक बेहद उत्साहजनक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित लाहौर किले के भीतर स्थित प्राचीन लौह मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। सदियों पुराने इस मंदिर की चमक अब फिर से लौट आई है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासन ने इसे अब आम जनता और श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया है।

    यह मंदिर केवल एक ढांचा नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर रामायण काल और भगवान श्री राम के कुल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार यह मंदिर भगवान राम के पुत्र लव को समर्पित है। जनश्रुतियों में यह गहरा विश्वास है कि वर्तमान लाहौर शहर की स्थापना माता सीता के ज्येष्ठ पुत्र लव ने ही की थी और उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम कालांतर में लाहौर पड़ा। यही कारण है कि इस मंदिर का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व सरहद के दोनों ओर रहने वाले लोगों के लिए बेहद खास है।

    सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की कवायद वाल्ड सिटी लाहौर अथॉरिटी ने मंगलवार को आधिकारिक रूप से इस पुनरुद्धार की घोषणा की। अथॉरिटी की प्रवक्ता तानिया कुरैशी ने मीडिया को बताया कि लौह मंदिर के साथ-साथ सिख साम्राज्य की स्मृतियों को संजोए हम्माम और महाराजा रणजीत सिंह के प्रसिद्ध अठदारा पैविलियन का भी संरक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। इस पूरे अभियान का मूल उद्देश्य लाहौर किले की उस बहुआयामी विरासत को प्रदर्शित करना है, जहाँ मुगलकालीन मस्जिदें, ब्रिटिश काल के भवन और हिंदू-सिख मंदिर एक साथ खड़े होकर इतिहास की गवाही देते हैं। जीर्णोद्धार की प्रक्रिया में ऐतिहासिक मौलिकता को बनाए रखने के लिए आधुनिक और व्यापक वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लिया गया है।

    सिख साम्राज्य का वैभव और शोध इस जीर्णोद्धार के पीछे एक लंबा शोध और ऐतिहासिक दस्तावेजों का गहरा अध्ययन शामिल है। साल 2025 में एक सिख शोधकर्ता ने लाहौर किले में सिख युग 1799-1849 के दौरान मौजूद लगभग 100 स्मारकों की पहचान की थी। हालांकि समय की मार के कारण इनमें से 30 स्मारक अब विलुप्त हो चुके हैं, लेकिन शेष बचे हिस्सों को बचाने के लिए अब बड़े स्तर पर प्रयास हो रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित सिख शोधकर्ता डॉ. तरुणजीत सिंह बुटालिया को एक विशेष टूर गाइडबुक ‘सिख साम्राज्य के दौरान लाहौर किला’ लिखने का दायित्व सौंपा गया है।

    डॉ. बुटालिया ने इस प्रोजेक्ट पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि लाहौर किला सिख मानस और हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए भावनात्मक रूप से बहुत करीब है। यह किला आधी शताब्दी तक सिख सत्ता का केंद्र रहा और उनके पूर्वजों ने भी इसी दरबार में अपनी सेवाएं दी थीं। इस मंदिर का खुलना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि दक्षिण एशिया की साझा विरासत और अंतर-सांस्कृतिक सौहार्द को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा। अब दुनिया भर से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु लाहौर किले में लव की विरासत और सिख काल के वैभव को करीब से देख सकेंगे।