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  • आईएमएफ के 7 प्रतिशत विकास दर अनुमान से भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा मजबूत, विशेषज्ञों ने खपत, निवेश और युवा आबादी को बताया बड़ी ताकत

    आईएमएफ के 7 प्रतिशत विकास दर अनुमान से भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा मजबूत, विशेषज्ञों ने खपत, निवेश और युवा आबादी को बताया बड़ी ताकत

    नई दिल्ली ।अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत रहने के अनुमान को अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों ने देश की आर्थिक क्षमता पर वैश्विक भरोसे का संकेत बताया है। इस अनुमान के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश की विशाल आबादी, मजबूत घरेलू खपत, निवेश की संभावनाएं और सरकारी नीतियां आर्थिक विस्तार में अहम भूमिका निभा रही हैं।

    अर्थशास्त्री विजय सरदाना के मुताबिक, 1.5 अरब से अधिक आबादी वाले भारत में विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उनका कहना है कि देश के मौजूदा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े इसकी आर्थिक क्षमता को दर्शाते हैं। भारत का बाजार निवेश और कारोबार के लिए बड़े अवसर उपलब्ध कराता है। वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बदलाव के दौर में भी देश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    सरदाना ने घरेलू खपत को भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख ताकत बताया। उनके अनुसार, बड़ी आबादी की रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र और तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों की गतिविधियों को समर्थन देता है। उन्होंने कहा कि आईएमएफ का अनुमान आर्थिक विश्वास बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन केवल जीडीपी की वृद्धि से आम लोगों के जीवन में बदलाव सुनिश्चित नहीं होता। इसके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और लोगों की आय में सुधार जरूरी है।

    अर्थशास्त्री और कर विशेषज्ञ सीए योगेंद्र कपूर का मानना है कि भारत में 7 प्रतिशत या इससे अधिक की विकास दर बनाए रखने की क्षमता है। उनके अनुसार, डिजिटलीकरण, बुनियादी ढांचे के विकास और आर्थिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने पर सरकार का जोर निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है। आयकर और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में लगातार बढ़ोतरी को उन्होंने अर्थव्यवस्था के औपचारिक ढांचे की ओर बढ़ने का संकेत बताया। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होने में भी मदद मिली है।

    हालांकि, कपूर ने महंगाई को अर्थव्यवस्था के सामने प्रमुख चुनौती बताया। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में विकास की गति बनाए रखने के लिए मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना जरूरी होगा।

    बाजार विशेषज्ञ एपी शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों के बावजूद अपनी विकास गति बनाए रखी है। उन्होंने सरकार की नीतियों, बेहतर कारोबारी माहौल और बढ़ते निजी निवेश को अर्थव्यवस्था के लिए सहायक बताया। शुक्ला के अनुसार, भारत की युवा आबादी भी वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने वाली प्रमुख ताकत है।

    अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ विनोद रावल ने आईएमएफ के 7 प्रतिशत विकास दर के अनुमान को भारत के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि 12 लाख रुपये तक की आय पर आयकर में राहत देने के फैसले से लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ सकती है। उनके मुताबिक, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रहा विकास भी भविष्य में अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचा सकता है। रावल ने पेट्रोल की कीमतों के पहले के स्तर पर लौटने की संभावना भी जताई, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। उन्होंने घरेलू मांग, सरकारी नीतियों और नई तकनीकों में विकास को आर्थिक वृद्धि के महत्वपूर्ण आधार बताया।

  • अमिताभ बच्चन ने ऑनलाइन ट्रोलिंग पर साझा किया अनुभव, बोले- अपमानजनक कमेंट पढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर लिखना कर दिया कम

    अमिताभ बच्चन ने ऑनलाइन ट्रोलिंग पर साझा किया अनुभव, बोले- अपमानजनक कमेंट पढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर लिखना कर दिया कम


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और आलोचना को लेकर अपना अनुभव साझा किया है। इन दिनों वह ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ की मेजबानी कर रहे हैं। शो के दौरान वह प्रतियोगियों से बातचीत करते हुए अपने जीवन से जुड़े कई किस्से भी सुनाते हैं। हाल ही के एक एपिसोड में एक प्रतियोगी ने उनसे ऑनलाइन आलोचना से निपटने के तरीके के बारे में सवाल किया। इसके जवाब में अमिताभ ने बताया कि सोशल मीडिया पर लोगों की टिप्पणियां पढ़ने के बाद उनके विचार और व्यवहार में बदलाव आया।

    कार्यक्रम के दौरान प्रतियोगी ने अमिताभ बच्चन से पूछा कि वह सोशल मीडिया पर होने वाली आलोचना का सामना कैसे करते हैं। प्रतियोगी ने कहा कि उसकी उम्र के लोगों के लिए नकारात्मक टिप्पणियों को संभालना आसान नहीं होता और वे अक्सर इससे परेशान हो जाते हैं। इस सवाल के जवाब में अमिताभ ने सोशल मीडिया पर अपनी शुरुआत के दिनों को याद किया और बताया कि पहले वह इसे अपने विचार व्यक्त करने का अच्छा माध्यम मानते थे।

    अमिताभ ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि सोशल मीडिया एक ऐसा जरिया है, जिसके माध्यम से वह अपने मन की बातें खुलकर लोगों तक पहुंचा सकते हैं। वह इस मंच पर अपने विचार लिखते थे, लेकिन बाद में जब उन्होंने लोगों की प्रतिक्रियाएं पढ़नी शुरू कीं, तो उनका नजरिया बदल गया। कुछ टिप्पणियों में इस्तेमाल की गई भाषा उन्हें अजीब और असहज लगी। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर पहले की तुलना में कम लिखना शुरू कर दिया।

    अभिनेता ने बातचीत के दौरान एक अपमानजनक टिप्पणी का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि कुछ लोग उनसे सवाल करते हुए लिखते थे, ‘अपने आप को क्या समझता है रे तू बुढ़ऊ।’ ऐसी टिप्पणियों और उनके लिए इस्तेमाल की जाने वाली भाषा का जिक्र करते हुए अमिताभ ने कहा कि इस तरह की प्रतिक्रियाएं पढ़ने के बाद उन्होंने लिखना कम कर दिया। उनके मुताबिक, शुरुआत में सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करना अच्छा लगता था, लेकिन कमेंट पढ़ने के बाद उनका अनुभव बदल गया।

    इस बातचीत के दौरान अमिताभ ने अपने अनुभव को सहज अंदाज में साझा किया। उन्होंने बताया कि अब वह सोशल मीडिया पर पहले की तरह ज्यादा नहीं लिखते। उनकी बातों से यह स्पष्ट हुआ कि ऑनलाइन मंच पर विचार व्यक्त करने के साथ लोगों की प्रतिक्रियाएं भी उनके अनुभव का हिस्सा रही हैं। प्रतियोगी के सवाल के जवाब में उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर बताया कि नकारात्मक टिप्पणियों ने उनके सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के तरीके को प्रभावित किया।

    बातचीत के अंत में अमिताभ ने हल्के-फुल्के अंदाज में एक और बात कही। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखना कम किया है, तब से उनके फॉलोअर्स की संख्या बढ़ती जा रही है। उनकी इस टिप्पणी पर स्टूडियो में मौजूद लोग हंसने लगे। इस तरह उन्होंने ट्रोलिंग से जुड़े अपने अनुभव को हास्यपूर्ण अंदाज में समाप्त किया।

    अमिताभ बच्चन वर्ष 2008 में अपना निजी ब्लॉग लिखना शुरू कर चुके थे। इसके बाद से वह विभिन्न डिजिटल मंचों पर सक्रिय रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट अक्सर चर्चा में रहते हैं। बीते 11 अक्टूबर को उन्होंने अपना 84वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर उनके प्रशंसकों और दोस्तों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। फिलहाल वह ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के जरिए दर्शकों से जुड़े हुए हैं, जहां प्रतियोगियों के सवालों के साथ उनके निजी अनुभव भी बातचीत का हिस्सा बनते हैं।

  • सलमान खान होंगे ‘कॉफी विद करण 9’ के पहले मेहमान, 20 सेकंड के प्रोमो में दिखा नया लुक, 14 अक्टूबर से शुरू होगा आखिरी सीजन

    सलमान खान होंगे ‘कॉफी विद करण 9’ के पहले मेहमान, 20 सेकंड के प्रोमो में दिखा नया लुक, 14 अक्टूबर से शुरू होगा आखिरी सीजन

    नई दिल्ली ।अभिनेता सलमान खान करण जौहर के लोकप्रिय चैट शो ‘कॉफी विद करण’ के नौवें सीजन के पहले मेहमान बनने जा रहे हैं। शो के नए सीजन का पहला प्रोमो जारी कर दिया गया है, जिसमें सलमान खान की झलक देखने को मिली है। करीब 20 सेकंड के इस वीडियो में अभिनेता नए हेयरस्टाइल और अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। प्रोमो सामने आने के बाद दर्शकों ने अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं।

    प्रोमो की शुरुआत सलमान खान की पहचान से जुड़े कुछ संकेतों के साथ होती है। सबसे पहले उनके हाथ में पहना ब्रेसलेट और घड़ी दिखाई देती है। इसके बाद अभिनेता नए हेयरस्टाइल में नजर आते हैं। वीडियो में सलमान नीले रंग की शर्ट और काली पैंट पहने दिखाई दे रहे हैं। प्रोमो में करण जौहर और सलमान खान के बीच बातचीत की छोटी-सी झलक भी दिखाई गई है।

    इस वीडियो में दोनों इस बात पर चर्चा करते नजर आते हैं कि एपिसोड में बातचीत किस दिशा में जा सकती है। उनकी बातचीत से संकेत मिलता है कि शो के दौरान अलग-अलग विषयों पर चर्चा हो सकती है। करण जौहर ने प्रोमो साझा करते हुए अपने संदेश में लिखा कि आखिरी बार वह अपने भाई के साथ कॉफी पीने जा रहे हैं। इस संदेश के जरिए उन्होंने सलमान खान के साथ शो के नए सीजन की शुरुआत का संकेत दिया।

    सलमान खान के पहले मेहमान होने की जानकारी सामने आने के बाद दर्शकों ने प्रोमो पर उत्साह जताया। कुछ लोगों ने कहा कि अब शो देखने में मजा आएगा, जबकि अन्य ने पहले एपिसोड के प्रसारण का इंतजार करने की बात कही। कुछ दर्शकों ने यह जानने में भी दिलचस्पी दिखाई कि शो में आगे कौन-कौन से मेहमान शामिल होंगे। हालांकि, जारी प्रोमो में पहले एपिसोड की बातचीत के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है।

    करण जौहर पिछले करीब 20 वर्षों से ‘कॉफी विद करण’ की मेजबानी कर रहे हैं। इस शो की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी और अब तक इसके आठ सीजन प्रसारित हो चुके हैं। अलग-अलग सीजन में ऐश्वर्या राय, शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, करीना कपूर, प्रियंका चोपड़ा और अमिताभ बच्चन सहित कई बड़े फिल्मी सितारे मेहमान बनकर आ चुके हैं। शो में कलाकारों की निजी जिंदगी, करियर और फिल्म जगत से जुड़े विषयों पर बातचीत होती रही है। कई मौकों पर यहां हुई चर्चाएं भी सुर्खियों में रही हैं।

    नए सीजन में शाहरुख खान, आमिर खान, करीना कपूर, सैफ अली खान, रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा जैसे सितारों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, इन सभी कलाकारों के मेहमान बनने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। शो में कुछ नए कलाकार भी दिखाई दे सकते हैं। फिलहाल पहले एपिसोड के लिए सलमान खान के नाम की जानकारी सामने आई है।

    करण जौहर ने पहले ही संकेत दिया था कि ‘कॉफी विद करण 9’ इस शो का आखिरी सीजन होगा। इसके बाद कार्यक्रम का नया सीजन नहीं आएगा। करण जौहर के किसी नए चैट शो को शुरू करने की चर्चाएं भी रही हैं, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नौवें सीजन का प्रसारण 14 अक्टूबर से जियोहॉटस्टार पर शुरू होने वाला है। ऐसे में सलमान खान की मौजूदगी वाले पहले एपिसोड को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

  • मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर कानूनी रणनीति बनाने दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, उमंग सिंघार ने विशेष सत्र बुलाने की मांग की

    मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर कानूनी रणनीति बनाने दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, उमंग सिंघार ने विशेष सत्र बुलाने की मांग की

    मध्य प्रदेश। में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात की। इस बैठक में प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह भी मौजूद रहे। चर्चा का मुख्य विषय ओबीसी आरक्षण से जुड़े हाईकोर्ट के निर्णय के कानूनी पहलू और आगे की कार्रवाई की रणनीति रहा।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैठक के बाद बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ ओबीसी आरक्षण के मामले पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि चर्चा में उच्च न्यायालय के फैसले से संबंधित कानूनी पहलुओं के साथ आगामी कानूनी कार्रवाई की रणनीति पर भी बात हुई। सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाएगी, इसे लेकर अब कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।

    इस बीच, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सॉलिसिटर जनरल से बातचीत कर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगवाना चाहते हैं, लेकिन इस उद्देश्य से दिल्ली जाने की जरूरत पर उन्होंने सवाल किया। सिंघार के मुताबिक, राज्य सरकार के पास विधानसभा के माध्यम से भी इस विषय पर कदम उठाने का विकल्प है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि जब विधानसभा मौजूद है, तो ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर विशेष सत्र क्यों नहीं बुलाया जा रहा है।

    उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने के पक्ष में है और इसके लिए तैयार है। उन्होंने राज्य सरकार से ओबीसी आरक्षण के संबंध में अध्यादेश जारी करने तथा कानून पारित कराने की मांग की। सिंघार ने सवाल उठाया कि सरकार ऐसा करने से क्यों बच रही है और बार-बार मामले को अदालत के निर्णय पर क्यों छोड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ओबीसी वर्ग को फिर से झूठे सपने दिखा रहे हैं।

    नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि सरकार की नीयत स्पष्ट है, तो उसे तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर ओबीसी आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनके बयान के अनुसार, विधानसभा में इस विषय पर चर्चा और जरूरी कदम उठाने से सरकार की स्थिति सामने आ सकती है। हालांकि, विशेष सत्र बुलाने या अध्यादेश जारी करने को लेकर सरकार की ओर से किसी नए फैसले की जानकारी खबर में नहीं दी गई है।

    हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार की अगली कानूनी कार्रवाई को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। मुख्यमंत्री की सॉलिसिटर जनरल से मुलाकात के दौरान कानूनी पहलुओं और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तारीख या इस संबंध में किसी औपचारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि राज्य सरकार इस मामले को आगे किस कानूनी प्रक्रिया के तहत ले जाएगी।

    ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत किए जाने का मामला अब राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और विपक्ष की मांगों के बीच केंद्र में है। यदि सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाती है, तो उसे आरक्षण बढ़ाने के समर्थन में अपना कानूनी आधार प्रस्तुत करना होगा। फिलहाल, मुख्यमंत्री की कानूनी सलाह-मशविरा संबंधी पहल और उमंग सिंघार की विशेष सत्र बुलाने की मांग इस मुद्दे पर सामने आए प्रमुख घटनाक्रम हैं।

  • धीरेंद्र शास्त्री ने दमोह में हिंदुओं से एकजुट रहने की अपील की, बोले- मुसीबत में घर से नहीं निकले तो सबसे बड़े बुजदिल

    धीरेंद्र शास्त्री ने दमोह में हिंदुओं से एकजुट रहने की अपील की, बोले- मुसीबत में घर से नहीं निकले तो सबसे बड़े बुजदिल


    दमोह जिले:
    बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथयात्रा तीसरे दिन मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हटा से रवाना हुई। यात्रा आगे बढ़ने से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान गौरीशंकर के दर्शन किए। इसके बाद सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ और राष्ट्रगान हुआ। इस दौरान बच्चों को सनातन धर्म, हिंदू एकता और सामाजिक समरसता से जुड़े सात वचनों का पालन करने की शपथ दिलाई गई।

    यात्रा में अयोध्या की हनुमानगढ़ी के राजू दास महाराज, मलूकपीठ के गंगा दास महाराज, हरिद्वार के मोनी महाराज और चित्रकूट धाम के राधेश्याम महाराज भी धीरेंद्र शास्त्री के साथ मौजूद रहे। हटा से यात्रा रवाना होने के दौरान श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर स्वागत किया। ग्रामीणों ने फूलों से रंगोली बनाई और ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रा का अभिनंदन किया। स्वागत के लिए स्कूली छात्राएं भी कलश लेकर खड़ी रहीं।

    इस दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से सवाल किया कि यदि भविष्य में किसी हिंदू पर मुसीबत आती है, तो क्या वे उसकी मदद के लिए घर से बाहर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि यदि संकट के समय भी लोग घर से बाहर नहीं निकलते हैं, तो वे सबसे बड़े बुजदिल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रथयात्रा का उद्देश्य राजनीति में प्रवेश करना या किसी को वोट दिलवाना नहीं है।

    यात्रा के पहले दिन भी धीरेंद्र शास्त्री ने धर्म के प्रति प्रतिबद्धता और हिंदुओं की एकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि चाहे कितने भी विरोधी सामने आएं, प्राण चले जाने की स्थिति में भी धर्म नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने सनातन धर्म को मानने वालों की एकजुटता को भारत की मजबूती से जोड़ा। यात्रा के दौरान श्रद्धालु जात-पात समाप्त करने और आपसी भाईचारे का संदेश देने वाले नारे लगाते रहे।

    यात्रा में शामिल कुछ युवकों ने भी उत्साह जताते हुए कहा कि कोई आकर यात्रा रोककर दिखाए। बिहार से आए संत ऋषि ने पन्ना में मिले सहयोग और उत्साह की सराहना की। उन्होंने लोगों से अच्छे कार्यों में सहयोग करने, गुरु के साथ जुड़े रहने और उनकी बातों का पालन करने की अपील की।

    सनातन हिंदू एकता रथयात्रा 3.0 रविवार सुबह करीब 11:30 बजे बागेश्वर धाम से शुरू हुई थी। पांच दिनों की इस यात्रा में लगभग 500 किलोमीटर की दूरी तय की जानी है। यात्रा पांच जिलों से होकर गुजरेगी। इसके घोषित उद्देश्यों में सनातन एकता, सामाजिक समरसता, नशामुक्ति और लव जिहाद से मुक्त बुंदेलखंड का संकल्प शामिल है। सोमवार को पन्ना में रात्रि विश्राम के बाद यात्रा सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, राष्ट्रगान और बच्चों को शपथ दिलाने के कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ी।

    यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। इंदौर की दीपिका ने कहा कि साधु-संतों और सुंदरकांड मंडल के प्रयासों से ऐसा हिंदू राष्ट्र बनना चाहिए, जो केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों के विचारों और आचरण में भी दिखाई दे। उन्होंने सभी को समान अधिकार और सम्मान मिलने की बात कही।

    कानपुर के मातृशक्ति सुंदरकांड मंडल की सदस्य संध्या सिंह अपने साथियों के साथ पैदल यात्रा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी इच्छा से गुरु सेवा और हिंदू राष्ट्र के संकल्प के लिए निकली हैं तथा इसे अपनी जिम्मेदारी भी मानती हैं। श्रद्धालु पूजा दुबे ने बताया कि महाराज के आशीर्वाद से उनके परिवार और बेटी को लाभ मिला है। वहीं, सीता व्यास ने कहा कि वह चार साल से धीरेंद्र शास्त्री से जुड़ी हैं और उन्हें देखकर भावुक हो जाती हैं।

  • ग्वालियर में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा लिफ्ट में 15 मिनट तक फंसे, दूसरे फ्लोर पर तकनीकी खराबी से अचानक रुकी लिफ्ट

    ग्वालियर में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा लिफ्ट में 15 मिनट तक फंसे, दूसरे फ्लोर पर तकनीकी खराबी से अचानक रुकी लिफ्ट

    मध्य प्रदेश । के ग्वालियर में सोमवार शाम पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा लिफ्ट में फंस गए। वह जयेंद्रगंज इलाके में एक नई इंग्लिश कोचिंग क्लास की शाखा का उद्घाटन करने पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थल पर पहली मंजिल से तीसरी मंजिल तक जाने के दौरान लिफ्ट दूसरे फ्लोर पर तकनीकी खराबी के कारण अचानक रुक गई। इसके बाद उन्हें करीब 10 से 15 मिनट तक लिफ्ट के अंदर रहना पड़ा। बाद में कर्मचारियों ने दरवाजा खोलकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    यह कार्यक्रम लश्कर क्षेत्र के जयेंद्रगंज में संजय कॉम्प्लेक्स के सामने स्थित एक इमारत में आयोजित किया गया था। यहां ‘ग्वालियर नंबर 01 स्पोकन इंग्लिश क्लासेस’ की नई शाखा शुरू की जानी थी। डॉ. नरोत्तम मिश्रा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे थे। निर्धारित कार्यक्रम के तहत उन्हें तीसरी मंजिल पर स्थित कोचिंग सेंटर तक जाना था।

    जानकारी के अनुसार, डॉ. मिश्रा पहली मंजिल से लिफ्ट में सवार हुए। लिफ्ट ऊपर की ओर बढ़ी, लेकिन दूसरे फ्लोर पर पहुंचते ही तकनीकी समस्या के कारण झटके के साथ रुक गई। लिफ्ट के अचानक बंद होने से उसमें मौजूद लोग अंदर ही फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही इमारत में मौजूद कर्मचारियों और कार्यक्रम के आयोजकों ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश शुरू की।

    लिफ्ट का दरवाजा खोलने के लिए कर्मचारियों ने प्रयास किए। करीब 10 से 15 मिनट की मशक्कत के बाद दरवाजा खुल सका और डॉ. मिश्रा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान कार्यक्रम के आयोजक, उनके सुरक्षाकर्मी और पुलिसकर्मी भी परेशान रहे। हालांकि, उन्हें बाहर निकालने के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया।

    घटना के समय मौजूद किसी व्यक्ति ने लिफ्ट में फंसने और बाहर निकाले जाने का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसके बाद मामला चर्चा में आया। वीडियो में लिफ्ट से जुड़ी घटना के दृश्य सामने आए। हालांकि, लिफ्ट में तकनीकी खराबी किस वजह से आई, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    लिफ्ट से बाहर आने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कोचिंग संस्थान की नई शाखा का उद्घाटन किया। उन्होंने रिबन काटकर केंद्र की शुरुआत की और इसके बाद कार्यक्रम में शामिल हुए। इस तरह लिफ्ट में फंसने की घटना के बावजूद उद्घाटन कार्यक्रम पूरा किया गया।

    कार्यक्रम के बाद डॉ. मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कुछ तस्वीरें और वीडियो साझा किए। उन्होंने कोचिंग संस्थान को युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक बेहतर विकल्प बताया। वहीं, लिफ्ट में उनके फंसने और कर्मचारियों द्वारा सुरक्षित बाहर निकाले जाने से जुड़ा वीडियो भी प्रसारित हो रहा है। घटना के संबंध में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लिफ्ट दूसरे फ्लोर पर तकनीकी खराबी के कारण रुकी थी और करीब 10 से 15 मिनट बाद उन्हें बाहर निकाला गया।

  • कोयंबतूर से भोपाल बाइक पर जा रहे 29 वर्षीय युवक की बैतूल में मौत, नेशनल हाईवे-47 पर अज्ञात भारी वाहन ने मारी टक्कर

    कोयंबतूर से भोपाल बाइक पर जा रहे 29 वर्षीय युवक की बैतूल में मौत, नेशनल हाईवे-47 पर अज्ञात भारी वाहन ने मारी टक्कर

    मध्य प्रदेश। के बैतूल जिले में नेशनल हाईवे-47 पर हुए सड़क हादसे में 29 वर्षीय एस. गौतम की मौत हो गई। वह तमिलनाडु के कोयंबतूर के रहने वाले थे और दुबई में नौकरी करते थे। गौतम बाइक से कोयंबतूर से भोपाल जा रहे थे। मंगलवार देर रात रास्ते में एक अज्ञात भारी वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।

    यह दुर्घटना बैतूल बाजार थाना क्षेत्र में झिटापटी यात्री प्रतीक्षालय के पास हुई। हादसे का समय रात करीब 2:30 से 3 बजे के बीच बताया गया है। टक्कर मारने वाले भारी वाहन की पहचान अभी नहीं हो सकी है। पुलिस वाहन और उसके चालक का पता लगाने में जुटी है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गौतम भोपाल में अपने किसी पारिवारिक मित्र से मिलने के लिए निकले थे। वह कोयंबतूर से भोपाल तक लगभग 1,800 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए बाइक से यात्रा कर रहे थे। बताया गया है कि फ्लाइट उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने सड़क मार्ग से जाने का फैसला किया था। हालांकि, दुर्घटना के समय तक वह कितनी देर से लगातार बाइक चला रहे थे, इस संबंध में जानकारी सामने नहीं आई है।

    हादसे की सूचना मिलने के बाद शव को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की एंबुलेंस से बैतूल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मर्चुरी में रखवा दिया गया। फिलहाल पोस्टमार्टम की प्रक्रिया परिवार के सदस्यों के आने के बाद पूरी की जाएगी।

    घटना के बाद भोपाल से गौतम के कुछ परिचित बैतूल पहुंचे। उनके परिवार के सदस्यों के पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। परिजनों के आने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    गौतम के पारिवारिक जीवन को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनके पिता का कुछ वर्ष पहले निधन हो गया था। परिवार में उनकी मां, भाई और भाभी हैं। उनका पालन-पोषण पारिवारिक संघर्षों और कई परेशानियों के बीच हुआ था। वह दुबई में नौकरी करते थे और भोपाल में एक पारिवारिक मित्र से मिलने जा रहे थे।

    बैतूल बाजार थाने के बीट प्रभारी रमन धुर्वे के मुताबिक, दुर्घटना के बाद शव को एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया गया था। फिलहाल पुलिस अज्ञात भारी वाहन की पहचान करने का प्रयास कर रही है। हादसे के कारणों और टक्कर मारने वाले वाहन के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

  • जबलपुर हाईकोर्ट में बार अध्यक्ष के व्हाट्सऐप अकाउंट बैन का मामला, मेटा ने कहा विवाद अधिवक्ता और व्हाट्सऐप के बीच

    जबलपुर हाईकोर्ट में बार अध्यक्ष के व्हाट्सऐप अकाउंट बैन का मामला, मेटा ने कहा विवाद अधिवक्ता और व्हाट्सऐप के बीच


    मध्य प्रदेश।
    के जबलपुर हाईकोर्ट में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह का व्हाट्सऐप अकाउंट बंद किए जाने के मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान मेटा की ओर से कहा गया कि विवाद का संबंध सीधे तौर पर व्हाट्सऐप और याचिकाकर्ता के बीच है तथा इसमें मेटा की कोई भूमिका नहीं है। अदालत ने व्हाट्सऐप कंपनी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

    सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच के समक्ष हुई। मेटा की ओर से अधिवक्ता मयंक उपाध्याय अदालत में पेश हुए, जबकि वरुण पाठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यवाही में शामिल हुए। मेटा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले में विवाद व्हाट्सऐप और याचिकाकर्ता के बीच का है। वहीं, भारत संघ की ओर से अधिवक्ता सचिन जैन मौजूद रहे। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल और अधिवक्ता गुंचा रसूल ने पक्ष रखा।

    याचिका के अनुसार, मृगेंद्र सिंह का व्हाट्सऐप अकाउंट 23 अगस्त 2026 को बंद कर दिया गया था। उनका कहना है कि अकाउंट बंद करने से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही इसकी वजह बताई गई। सिंह के मुताबिक, वह कई वर्षों से इस नंबर का इस्तेमाल कर रहे थे। उनके पेशे से जुड़े कई जरूरी काम इसी अकाउंट के माध्यम से किए जाते थे। इनमें कानूनी कामकाज, मामलों का प्रबंधन, मुवक्किलों से बातचीत और केस से संबंधित दस्तावेजों का आदान-प्रदान शामिल था।

    मृगेंद्र सिंह ने याचिका में बताया कि अकाउंट बंद होने वाले दिन ही उन्होंने ऐप के माध्यम से इसकी समीक्षा करने का अनुरोध किया था। हालांकि, उनके अनुसार इस प्रक्रिया से कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि अकाउंट बंद होने से उनके नियमित पेशेवर कामकाज पर असर पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से राहत देने की मांग की है। उनका पक्ष है कि डिजिटल माध्यम से होने वाला संवाद बाधित होने से कानूनी कार्यों को संचालित करने में परेशानी होती है।

    याचिकाकर्ता ने अकाउंट बंद किए जाने को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 का उल्लंघन बताया है। इसके अलावा, उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के पालन में भी कथित चूक का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिकायत के निपटारे के लिए निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया गया। ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं और मामले में अदालत का अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।

    मेटा और व्हाट्सऐप के संबंधों का मुद्दा भी इस मामले में सामने आया। मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक ने वर्ष 2014 में व्हाट्सऐप के अधिग्रहण की घोषणा की थी और उसी वर्ष यह प्रक्रिया पूरी हुई थी। व्हाट्सऐप एलएलसी मेटा की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। इसके बावजूद सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से कहा गया कि मौजूदा विवाद में उसकी सीधी भूमिका नहीं है।

    हाईकोर्ट ने फिलहाल व्हाट्सऐप को अपना जवाब पेश करने का अवसर दिया है। मृगेंद्र सिंह ने याचिका में अपना अकाउंट बहाल करने, राहत प्रदान करने और कथित नियम उल्लंघन के संबंध में भारत संघ को उचित कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है। अब 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में कंपनी का पक्ष सामने आने की उम्मीद है।

  • एमपी टीईटी 2026 में शिक्षकों का विरोध बरकरार, तारीख तीन बार बढ़ाने और ऑफलाइन परीक्षा के फैसले के बावजूद आवेदन कम

    एमपी टीईटी 2026 में शिक्षकों का विरोध बरकरार, तारीख तीन बार बढ़ाने और ऑफलाइन परीक्षा के फैसले के बावजूद आवेदन कम

    मध्य प्रदेश। में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी 2026 को लेकर शिक्षकों का विरोध जारी है। आवेदन की समयसीमा तीन बार बढ़ाए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों ने परीक्षा के लिए पंजीयन नहीं कराया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, परीक्षा के लिए करीब 30 हजार शिक्षकों ने ही आवेदन किया है, जबकि प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख शिक्षक इसके दायरे में आते हैं। इस तरह करीब 1.20 लाख शिक्षकों ने निर्धारित समय तक फॉर्म नहीं भरा। आवेदन की अंतिम तारीख 11 अक्टूबर थी।

    आवेदन प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों को अतिरिक्त समय देने के लिए तीन बार समयसीमा बढ़ाई गई थी। इसके बावजूद पंजीयन की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ी। कुल डेढ़ लाख शिक्षकों की तुलना में लगभग 30 हजार पंजीयन का आंकड़ा बताता है कि बड़ी संख्या में शिक्षक अभी भी परीक्षा से दूर हैं। इस स्थिति के पीछे शिक्षकों का विरोध प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। शिक्षक संगठन लंबे समय से सेवा दे रहे अध्यापकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।

    शिक्षक संगठनों का कहना है कि जो शिक्षक पहले से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर प्रदेश में आंदोलन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षकों की समस्या के समाधान के लिए आयोग बनाने का भरोसा दिया था और उनसे परीक्षा के फॉर्म भरने की अपील की थी। इसके बाद शिक्षकों ने अपना आंदोलन स्थगित किया, लेकिन उनकी मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में दोबारा प्रदर्शन करने का विकल्प खुला रखा है। टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग अब भी विवाद का मुख्य विषय बनी हुई है।

    सरकार ने परीक्षा के तरीके को लेकर भी बदलाव का फैसला किया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन परीक्षा कराने की घोषणा की थी। इसके बाद ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। यह कदम शिक्षकों की मांगों के बीच उठाया गया था, लेकिन इससे विरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। शिक्षकों की मुख्य मांग परीक्षा के माध्यम को बदलने के बजाय टीईटी की अनिवार्यता से राहत देने की है।

    शुरुआत में परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी ईएसबी को दी गई थी। इसके तहत 12 अक्टूबर से परीक्षा कराने की तैयारी की गई थी, लेकिन ऑफलाइन परीक्षा के लिए जरूरी व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो सकीं। इसी कारण तय कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा नहीं हो पाई। ऑफलाइन परीक्षा में अभ्यर्थियों को कंप्यूटर के बजाय कागज पर प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। इसके लिए परीक्षा केंद्रों और अन्य जरूरी संसाधनों की अलग व्यवस्था करनी पड़ती है।

    अब परीक्षा कराने के लिए दूसरी एजेंसी की तलाश की जा रही है। हायर एजुकेशन बोर्ड के माध्यम से दिसंबर में परीक्षा आयोजित कराने की तैयारी बताई गई है। हालांकि, यह योजना अभी तैयारी के स्तर पर है और परीक्षा की नई तारीख या आगे की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में शिक्षकों के सामने परीक्षा की तारीख और अनिवार्यता से जुड़ी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार बना हुआ है। आवेदन के आंकड़े बताते हैं कि तारीख बढ़ाने और परीक्षा के तरीके में बदलाव के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक अब तक पंजीयन से दूर हैं।

  • ग्वालियर के 400 कमरों वाले जय विलास पैलेस के बिजली बिलों पर सवाल, कई कनेक्शनों में सालभर शून्य या बेहद कम खपत दर्ज

    ग्वालियर के 400 कमरों वाले जय विलास पैलेस के बिजली बिलों पर सवाल, कई कनेक्शनों में सालभर शून्य या बेहद कम खपत दर्ज

    मध्य प्रदेश । के ग्वालियर स्थित जय विलास पैलेस के बिजली बिलों और खपत के आंकड़ों को लेकर सवाल उठे हैं। करीब 80 एकड़ में फैले इस महल में लगभग 400 कमरे हैं और बिजली कंपनी के कुल 21 कनेक्शन बताए गए हैं। इन कनेक्शनों के बिलों की पड़ताल में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पिछले 12 महीनों के दौरान बिजली की खपत शून्य या बेहद कम दर्ज की गई। अधिकांश कनेक्शनों पर पुराने मीटर लगे होने की जानकारी भी सामने आई है। महल के रानी महल वाले हिस्से में ज्योतिरादित्य सिंधिया का परिवार रहता है।

    उपलब्ध बिजली बिलों के अनुसार, रानी महल वाले हिस्से में लगे स्मार्ट मीटर पर पिछले 12 महीनों में कुल 360.389 यूनिट बिजली खपत दर्ज की गई। वहीं, महादजी चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर दर्ज घरेलू कनेक्शन में अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक सभी 12 महीनों में शून्य यूनिट खपत दिखाई गई। इस दौरान इस कनेक्शन पर कुल 1006 रुपये का बिल जारी हुआ, जिसमें अन्य शुल्क शामिल बताए गए हैं। बिलों में नियमित रीडिंग दर्ज होने की बात भी कही गई है।

    एक अन्य कनेक्शन चीफ सेक्रेटरी टू श्रीमंत हिज हाईनेस महाराजा के नाम पर दर्ज है। यह कनेक्शन 31 जुलाई 2015 को लगाया गया था और इस पर एक किलोवाट का विद्युत भार स्वीकृत है। नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक इसमें 2016 यूनिट बिजली की खपत दर्ज की गई। इस कनेक्शन पर 14,777 रुपये बकाया बताए गए, जिनमें पिछले महीनों की 14,686 रुपये की बिल राशि शामिल थी। बिल जमा करने की अंतिम तारीख 14 अक्टूबर 2026 दर्ज थी।

    पैलेस गार्डन स्थित एक व्यावसायिक कनेक्शन में अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच केवल पांच यूनिट बिजली खपत दर्ज की गई। यह कनेक्शन एक जुलाई 1980 को लगाया गया था और इस पर तीन किलोवाट का विद्युत भार स्वीकृत है। इसी तरह, वसुंधरा राजे चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर दर्ज कनेक्शन में एक साल के दौरान 2764 यूनिट खपत सामने आई। इस कनेक्शन पर 24,687 रुपये का पिछला बिल बकाया बताया गया था। अगस्त 2026 के बिल की राशि 471 रुपये दर्ज थी।

    मन्नू महल पैलेस के नाम पर दर्ज घरेलू कनेक्शन में अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक शून्य यूनिट खपत दिखाई गई। जूनियर महारानी स्वीट हाउस के पते पर दर्ज एक अन्य कनेक्शन में भी 12 महीनों तक बिजली खपत शून्य रही, जबकि इस अवधि में कुल 1322 रुपये का बिल आया। द महारानी स्वीट हाउस के नाम पर दर्ज कनेक्शन में भी पूरे साल शून्य यूनिट खपत दर्ज की गई और बिल की कुल राशि 1388 रुपये बताई गई।

    पैलेस परिसर के अन्य कनेक्शनों में भी बहुत कम खपत के आंकड़े सामने आए। एमपी सिंह सेक्रेटरी के नाम पर दर्ज दो कनेक्शनों में एक साल के दौरान दो-दो यूनिट बिजली खपत दर्ज की गई। इन पर क्रमशः 957 रुपये और 1180 रुपये का बिल बताया गया। वहीं, हिरनवन कोठी के पीआरओ के नाम पर दर्ज कनेक्शन में नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक केवल एक यूनिट बिजली खपत दर्ज हुई। इस कनेक्शन की सालाना बिल राशि 6700 रुपये बताई गई। इन आंकड़ों के साथ कई कनेक्शनों पर पुराने मीटर लगे होने की जानकारी भी दी गई है।

    जय विलास पैलेस परिसर के एक हिस्से में स्थित उषा किरण पैलेस होटल का बिजली कनेक्शन अलग है। होटल का संचालन ताज समूह के अधीन होता है और यहां 50 कमरे बताए गए हैं। होटल के पास 400 किलोवोल्ट एम्पियर क्षमता का अलग उच्च तनाव वाला कनेक्शन है। अगस्त महीने का इसका बिजली बिल 18 लाख 11 हजार 67 रुपये बताया गया है। यह बिल होटल के पृथक कनेक्शन का है, इसलिए इसे महल के अन्य घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शनों से अलग रखा गया है।

    बिजली कंपनी के उपमहाप्रबंधक गगनदेव शर्मा ने कहा कि होटल का बिल हर महीने जारी होता है और उसका कनेक्शन अलग है। उन्होंने यह भी कहा कि जय विलास पैलेस के घरेलू तथा व्यावसायिक कनेक्शनों पर बिल कम आने या खपत कम दर्ज होने के मामले की जांच कराई जा सकती है। हालांकि, आगे की कार्रवाई के बारे में दोबारा पूछे जाने पर कोई जानकारी नहीं दी गई। महल के प्रबंधक मयंक मधुकर और ज्योतिरादित्य सिंधिया के जनसंपर्क अधिकारी अनिल मिश्रा से भी पक्ष मांगा गया, लेकिन उन्होंने जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। बिजली कंपनी के महाप्रबंधक से भी लिखित जवाब मांगा गया, पर प्रतिक्रिया नहीं मिली।