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  • हरियाली तीज कब है? 14 अगस्त की शाम से शुरू होगी तृतीया, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत

    हरियाली तीज कब है? 14 अगस्त की शाम से शुरू होगी तृतीया, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत

    नई दिल्ली। सनातन धर्म में हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर महिलाएं पति की लंबी आयु सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। सावन में चारों ओर दिखाई देने वाली हरियाली के कारण इस पर्व को हरियाली तीज कहा जाता है। इस दिन महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनती हैं हरी चूड़ियां धारण करती हैं मेहंदी लगाती हैं और सोलह श्रृंगार करके झूला झूलने के साथ तीज के लोकगीत गाती हैं।

    इस बार हरियाली तीज की तारीख को लेकर 14 और 15 अगस्त के बीच कंफ्यूजन बना हुआ है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त से शुरू हो रही है लेकिन उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 शनिवार को रखा जाएगा। दिल्ली के लिए द्रिक पंचांग भी 15 अगस्त को ही हरियाली तीज का पर्व बता रहा है। हालांकि अलग अलग शहरों के पंचांग में तिथि शुरू होने और समाप्त होने के समय में अंतर हो सकता है।

    पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त को सुबह 9 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 15 अगस्त को सुबह 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगी।因此 15 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने के कारण इसी दिन व्रत और पर्व मनाया जाएगा। अपने शहर के अनुसार पूजा का सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।

    हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। कुछ परंपराओं में बालू या मिट्टी से शिव पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाने का भी विधान बताया गया है। पूजा में माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है जबकि भगवान शिव को बेलपत्र फल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाई जाती है। इसके बाद धूप दीप जलाकर आरती की जाती है और हरियाली तीज की व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार हरियाली तीज का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक तप किया था और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी वजह से विवाहित महिलाएं इस दिन शिव और पार्वती की पूजा करके अपने दांपत्य जीवन में प्रेम सुख और स्थिरता की कामना करती हैं।

    इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। हालांकि निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर व्रत की कठोरता से बचना और अपनी सेहत को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है। पूजा के साथ महिलाएं सास या घर की वरिष्ठ महिलाओं को सुहाग सामग्री और उपहार देकर उनका आशीर्वाद भी ले सकती हैं।

    हरियाली तीज पर हरे रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनना इस पर्व की पारंपरिक पहचान है। इसके अलावा पौधरोपण को भी इस दिन शुभ माना जाता है। सावन और हरियाली से जुड़े इस पर्व पर एक पौधा लगाकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया जा सकता है।

    इस तरह 14 अगस्त से तृतीया तिथि शुरू होने के बावजूद हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 शनिवार को मनाई जाएगी। इसलिए 14 या 15 अगस्त को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। व्रत रखने वाली महिलाएं 15 अगस्त को अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की विधि पूर्वक पूजा कर सकती हैं।

  • सालों तक आरोपों और जांच के बीच रहीं रिया चक्रवर्ती, Karan Johar के शो में बोलीं- अब नहीं चाहिए ट्रेटर का टैग

    सालों तक आरोपों और जांच के बीच रहीं रिया चक्रवर्ती, Karan Johar के शो में बोलीं- अब नहीं चाहिए ट्रेटर का टैग


    नई दिल्ली। अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती एक बार फिर अपने बीते मुश्किल दौर को लेकर चर्चा में हैं। रियलिटी शो द ट्रेटर्स सीजन 2 में नजर आ रहीं रिया ने होस्ट करण जौहर के सामने अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर कीं। शो में जब उनसे पूछा गया कि वह इनोसेंट बनना पसंद करेंगी या ट्रेटर तो रिया ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा कि वह इनोसेंट रहना चाहेंगी। उनके इस जवाब में साल 2020 के बाद उनकी जिंदगी में आए बदलाव और लंबे समय तक चले विवाद का दर्द साफ नजर आया।

    करण जौहर के सवाल का जवाब देते हुए रिया ने कहा कि इसी साल उन्हें क्लीन चिट मिली है और इसी साल लोगों को पता चला है कि वह बेगुनाह हैं। उन्होंने कहा कि वह काफी लंबे समय तक शक के घेरे में रही हैं और अब उन्हें यह स्थिति पसंद नहीं है। रिया के मुताबिक उन्होंने कई साल तक ऐसा दौर देखा है जब लोगों की नजर में उन्हें संदेह की नजर से देखा जाता रहा। द ट्रेटर्स के खेल से जुड़े एक सामान्य सवाल के दौरान रिया का यह जवाब उनकी निजी जिंदगी के बेहद संवेदनशील अध्याय की तरफ इशारा करता नजर आया।

    सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद साल 2020 में रिया चक्रवर्ती देशभर में चर्चा के केंद्र में आ गई थीं। सुशांत की मौत के मामले की जांच के साथ ड्रग्स से जुड़े मामले में भी रिया और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती से पूछताछ हुई थी। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ड्रग्स मामले में दोनों को गिरफ्तार किया था। रिया को जेल में भी समय बिताना पड़ा था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी पर भी काफी असर पड़ा।

    समय के साथ सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI तक पहुंची। 2025 में CBI ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए इसे आत्महत्या का मामला माना और किसी साजिश या आपराधिक भूमिका का सबूत नहीं मिलने की बात सामने आई। इस रिपोर्ट के बाद रिया और उनके परिवार को मामले में बड़ी राहत मिली। हालांकि ड्रग्स से जुड़े मामले की कानूनी स्थिति अलग थी और उसे सुशांत की मौत की जांच से अलग समझना जरूरी है।

    रिया इससे पहले भी कई मौकों पर उस दौर के अपने अनुभवों के बारे में बात कर चुकी हैं। उन्होंने बताया है कि सुशांत की मौत के बाद उन्हें मीडिया ट्रायल और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा। जेल जाने और लंबे समय तक काम से दूर रहने का असर भी उनकी जिंदगी पर पड़ा। रिया ने अपने पुराने इंटरव्यू में मानसिक स्वास्थ्य पर पड़े प्रभाव को लेकर भी बात की थी।

    अब द ट्रेटर्स सीजन 2 में रिया एक बिल्कुल अलग माहौल में दिखाई दे रही हैं। यह रियलिटी शो रणनीति शक और भरोसे के खेल पर आधारित है। इसमें कंटेस्टेंट्स को इनोसेंट्स और ट्रेटर्स की भूमिका में बांटा जाता है। इनोसेंट्स को छिपे हुए ट्रेटर्स को पहचानकर उन्हें गेम से बाहर करना होता है जबकि ट्रेटर्स अपनी पहचान छिपाकर दूसरे खिलाड़ियों के खिलाफ रणनीति बनाते हैं।

    रिया का इनोसेंट बनने की इच्छा जताना इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि यह उनके वास्तविक जीवन के अनुभवों से जुड़ा हुआ महसूस हुआ। करण जौहर के सामने उन्होंने जिस तरह अपने अतीत का जिक्र किया उससे साफ हुआ कि सालों तक चले विवाद और शक का दौर उनकी यादों में आज भी गहरा असर छोड़ता है। हालांकि अब वह अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने और नए काम के जरिए अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। द ट्रेटर्स 2 में उनकी मौजूदगी इसी नए दौर की ओर इशारा करती है।

  • 3 फीट का कद, हौसला आसमान से ऊंचा! KBC 18 में छाए डॉ. गणेश बरैया की कहानी सुन भावुक हुए लोग

    3 फीट का कद, हौसला आसमान से ऊंचा! KBC 18 में छाए डॉ. गणेश बरैया की कहानी सुन भावुक हुए लोग


    नई दिल्ली। अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति 18 में इस बार हॉट सीट पर पहुंचे डॉ. गणेश बरैया ने अपने खेल से ज्यादा अपनी जिंदगी की कहानी से लोगों का ध्यान खींचा। गुजरात के भावनगर जिले के गोरखी गांव से आने वाले गणेश का कद भले ही करीब 3 फीट है लेकिन उनके हौसले और संघर्ष की कहानी किसी बड़े प्रेरणादायक किरदार से कम नहीं है। KBC 18 के हालिया एपिसोड में उन्होंने अपने बचपन से लेकर डॉक्टर बनने तक के सफर के कई ऐसे किस्से साझा किए जिन्हें सुनकर दर्शक भावुक हो गए।

    गणेश बरैया जन्म से ड्वार्फिज्म की चुनौती से जूझते रहे हैं और उनके शरीर का 72 प्रतिशत हिस्सा लोकोमोटर डिसेबिलिटी से प्रभावित है। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई में कभी अपनी शारीरिक स्थिति को बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने 12वीं कक्षा में 87 प्रतिशत अंक हासिल किए और साल 2018 में NEET परीक्षा भी पास की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने दिव्यांग कोटे के तहत मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की थी। हालांकि डॉक्टर बनने की उनकी राह इतनी आसान नहीं थी। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से उनकी शारीरिक अक्षमता को लेकर MBBS में प्रवेश पर आपत्ति जताई गई थी।

    इसके बाद गणेश के स्कूल प्रिंसिपल डॉ. दलपत कटारिया उनके साथ मजबूती से खड़े हुए। मामला अदालत तक पहुंचा और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से गणेश के पक्ष में फैसला आया। इसके बाद 2019 में उन्हें भावनगर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला और उन्होंने MBBS की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान भी उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन शिक्षकों और दोस्तों के सहयोग से उन्होंने अपनी मंजिल हासिल की।

    गणेश की जिंदगी का सबसे भावुक अध्याय उनके बचपन से जुड़ा है। उन्होंने KBC में बताया कि जब वह छोटे थे तब सर्कस से जुड़े कुछ लोग उनके घर पहुंचे थे। उनके पिता को गणेश को अपने साथ ले जाने के बदले 5 लाख रुपये देने का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन उनके पिता ने पैसों के बजाय बेटे की पढ़ाई और सम्मान को चुना। इस घटना की पुष्टि पहले की रिपोर्टों में भी हुई है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक गणेश करीब 10 साल के थे जब एक सर्कस मंडली ने उन्हें खरीदने के लिए 5 लाख रुपये की पेशकश की थी। उनके पिता ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और इसके बाद गणेश की सुरक्षा को लेकर और भी सतर्क रहे।

    गणेश बताते हैं कि उनकी बहनें उन्हें गोद में उठाकर स्कूल ले जाती थीं और उनके पिता उन्हें कंधे पर बैठाकर पढ़ने भेजते थे। परिवार के इसी भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। आज वही गणेश भावनगर के अस्पताल में डॉक्टर के तौर पर मरीजों की सेवा कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार वह मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम कर चुके हैं और अस्पताल में मरीजों के इलाज से जुड़े काम में सक्रिय रहे हैं।

    KBC 18 में गणेश ने फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट चैलेंज जीतकर हॉट सीट तक अपनी जगह बनाई। उन्होंने शुरुआती सवालों का सही जवाब देते हुए 3 लाख रुपये के सवाल तक का सफर तय किया लेकिन उस समय तक उनकी सभी लाइफलाइन खत्म हो चुकी थीं। सवाल का सही जवाब नहीं दे पाने के कारण उनकी जीती हुई रकम घटकर 25 हजार रुपये रह गई और उनकी KBC यात्रा वहीं समाप्त हो गई।

    गणेश बरैया की कहानी इस बात की मिसाल है कि किसी इंसान की पहचान उसके कद या शारीरिक स्थिति से नहीं बल्कि उसके हौसले और काम से होती है। जिस बच्चे को कभी सर्कस में भेजने के लिए 5 लाख रुपये की पेशकश की गई थी आज वही बच्चा डॉक्टर बनकर मरीजों की जिंदगी बचाने के काम में जुटा है। KBC की हॉट सीट पर गणेश की मौजूदगी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सपनों की कोई ऊंचाई नहीं होती और मजबूत इरादों के सामने मुश्किल से मुश्किल रास्ता भी आसान हो सकता है।

  • गणेश चतुर्थी पर होगा India-Afghanistan T20 का महामुकाबला? ACB ने BCCI से मांगी 14 सितंबर की तारीख

    गणेश चतुर्थी पर होगा India-Afghanistan T20 का महामुकाबला? ACB ने BCCI से मांगी 14 सितंबर की तारीख


    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच सितंबर में होने वाली तीन मैचों की T20 इंटरनेशनल सीरीज को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। दोनों टीमों के बीच मुकाबलों का कार्यक्रम पहले ही तय हो चुका है लेकिन अब अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी ACB इसमें एक बदलाव चाहता है। ACB ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI से संपर्क कर सीरीज के एक मुकाबले को 14 सितंबर को कराने का प्रस्ताव रखा है। खास बात यह है कि 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। फिलहाल दोनों बोर्ड के बीच इस प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है और अंतिम फैसला BCCI की मंजूरी के बाद ही होगा।

    मौजूदा कार्यक्रम के मुताबिक भारत और अफगानिस्तान के बीच तीनों T20 मुकाबले दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाने हैं। पहला मैच 13 सितंबर को दूसरा 15 सितंबर और तीसरा मुकाबला 17 सितंबर को निर्धारित है। BCCI ने भी इस कार्यक्रम की पुष्टि की है। अब ACB चाहता है कि 13 या 15 सितंबर को होने वाले मुकाबलों में से किसी एक को 14 सितंबर को आयोजित किया जाए। यानी मैचों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा बल्कि सिर्फ एक मुकाबले की तारीख बदली जाएगी।

    सवाल यह है कि आखिर ACB सोमवार यानी 14 सितंबर को ही मुकाबला क्यों कराना चाहता है। दरअसल 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का त्योहार है और इस मौके पर दिल्ली में आंशिक छुट्टी रहने की उम्मीद है। आमतौर पर सोमवार को क्रिकेट मैच कराने पर कामकाजी दिन होने के कारण स्टेडियम में दर्शकों की संख्या कम रहने की आशंका रहती है। लेकिन गणेश चतुर्थी के कारण छुट्टी और त्योहार का माहौल होने से ACB को उम्मीद है कि मैच के लिए बड़ी संख्या में दर्शक स्टेडियम पहुंच सकते हैं। इससे मुकाबले की दर्शक उपस्थिति और फैन एंगेजमेंट बेहतर होने की संभावना है।

    अगर BCCI इस प्रस्ताव पर सहमत हो जाता है तो भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली सीरीज का एक मुकाबला गणेश चतुर्थी के दिन खेला जाएगा। हालांकि अभी इसे अंतिम कार्यक्रम नहीं माना जा सकता। जब तक BCCI की मंजूरी नहीं मिलती तब तक आधिकारिक शेड्यूल 13 15 और 17 सितंबर का ही रहेगा।

    इस सीरीज की एक और खास बात यह है कि मुकाबले भारत में होने के बावजूद इसे अफगानिस्तान की घरेलू सीरीज माना जा रहा है। सुरक्षा परिस्थितियों के कारण अफगानिस्तान लंबे समय से अपने कई अंतरराष्ट्रीय घरेलू मुकाबले विदेशों में आयोजित करता रहा है। इस बार दिल्ली को उसके होम मैचों के लिए चुना गया है। Reuters के मुताबिक भारत ने अफगानिस्तान को इस महत्वपूर्ण सीरीज की मेजबानी के लिए अपनी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

    भारत और अफगानिस्तान के लिए यह सीरीज एशियन गेम्स की तैयारियों के लिहाज से भी अहम होगी। दोनों टीमें आगामी बड़े मुकाबलों से पहले T20 फॉर्मेट में अपनी तैयारियों को परखना चाहेंगी। दिल्ली में लगातार तीन मुकाबले होने से खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने का मौका भी मिलेगा।

    इस बीच भारत के बांग्लादेश दौरे को लेकर भी स्थिति बदलती नजर आ रही है। पहले सितंबर में भारतीय टीम के बांग्लादेश दौरे का कार्यक्रम सामने आया था लेकिन अब अफगानिस्तान के खिलाफ T20 सीरीज की पुष्टि के बाद उस दौरे की संभावना कम बताई जा रही है। ऐसे में सितंबर में भारतीय टीम के लिए अफगानिस्तान के खिलाफ दिल्ली में होने वाली T20 सीरीज महत्वपूर्ण मुकाबलों में से एक हो सकती है।

    फिलहाल क्रिकेट फैंस की नजर BCCI के फैसले पर है। अगर भारतीय बोर्ड ACB के प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है तो 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन दिल्ली में भारत और अफगानिस्तान के बीच T20 मुकाबला देखने को मिल सकता है। यानी अभी मैच की तारीख बदली नहीं है लेकिन ACB की मांग ने सीरीज के कार्यक्रम में एक दिलचस्प ट्विस्ट जरूर ला दिया है।

  • US: ट्रंप के नए आदेश से बदल जाएगी बच्चों के टीकाकरण की व्यवस्था….

    US: ट्रंप के नए आदेश से बदल जाएगी बच्चों के टीकाकरण की व्यवस्था….


    वॉशिंगटन ।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के नए कार्यकारी आदेश से बच्चों के टीकाकरण (Child Vaccination) की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। आदेश में खसरा, गलसुआ और रूबेला यानी एमएमआर जैसे संयुक्त टीकों को अलग-अलग टीकों में बांटने और जहां संभव हो, टीकों के बीच ज्यादा अंतर रखने की बात कही गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर सिर्फ टीका लगाने के तरीके पर नहीं पड़ेगा, बल्कि दवा कंपनियों, डॉक्टरों और माता-पिता पर भी पड़ेगा। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अमेरिका में इन बीमारियों के अलग-अलग टीके दशकों से व्यापक रूप से इस्तेमाल नहीं हुए हैं।

    ट्रंप के आदेश में आखिर क्या बदलने की बात कही गई?
    ट्रंप के आदेश के तहत संघीय अधिकारियों को 90 दिनों के भीतर एमएमआर टीके को अलग-अलग करने और दूसरे टीकों के बीच अंतर बढ़ाने की योजना तैयार करने को कहा गया है। अभी एमएमआर टीका तीनों बीमारियों से एक साथ बचाव करता है। अमेरिका में इस तीन-इन-वन व्यवस्था का इस्तेमाल 1970 के दशक से मानक रूप में हो रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त टीकों से बच्चों के स्कूल जाने की उम्र तक संक्रामक बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित होने की संभावना बढ़ती है।

    क्या कंपनियों को दशकों पुराने टीके फिर बनाने पड़ेंगे?
    अमेरिका में फिलहाल खसरा, गलसुआ और रूबेला के अलग-अलग टीके उपलब्ध नहीं हैं। इन तीनों बीमारियों के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन से मंजूर टीके संयुक्त रूप में हैं। अगर उन्हें अलग किया जाता है तो दवा कंपनियों को पुराने व्यक्तिगत टीकों का उत्पादन फिर शुरू करना होगा। इसके लिए नए अध्ययन, उत्पादन सुविधाएं और संघीय मंजूरी की जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक नई वैक्सीन फैक्टरी तैयार करने और उसे मंजूरी मिलने में करीब पांच साल तक लग सकते हैं। इसके अलावा कंपनियों को नए उत्पादन संयंत्रों पर करोड़ों डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं।


    क्या अलग-अलग टीकों को मंजूरी लेना भी मुश्किल होगा?

    अलग-अलग टीकों को तैयार करने के बाद उन्हें अलग-अलग मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। पूर्व एफडीए वैक्सीन प्रमुख जेसी गुडमैन के मुताबिक कंपनियों को यह दिखाने के लिए बड़े अध्ययन करने पड़ सकते हैं कि नए व्यक्तिगत टीके बच्चों में मौजूदा टीकों जैसी प्रतिरोधक क्षमता पैदा करते हैं। साथ ही उत्पादन की नई प्रक्रिया और संयंत्र की सुरक्षा भी साबित करनी होगी। अमेरिका में दशकों से व्यक्तिगत खसरा टीके का बड़े स्तर पर उत्पादन नहीं हुआ है। इसलिए यह प्रक्रिया सामान्य बदलाव की तुलना में काफी जटिल हो सकती है।

    माता-पिता को बच्चों को लेकर कितने ज्यादा चक्कर लगाने पड़ेंगे?
    एमएमआर टीका फिलहाल दो खुराक में दिया जाता है। पहली खुराक आम तौर पर एक साल की उम्र में और दूसरी चार साल की उम्र के बाद दी जाती है। अगर हर खुराक को खसरा, गलसुआ और रूबेला के तीन अलग-अलग टीकों में बांट दिया जाए तो छह अलग-अलग टीकाकरण यात्राएं करनी पड़ सकती हैं। दूसरे संक्रामक रोगों के टीकों के बीच भी अंतर बढ़ाया गया तो डॉक्टर के चक्कर और बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों को डर है कि ज्यादा समय और खर्च के कारण कुछ माता-पिता टीकाकरण के लिए अपॉइंटमेंट छोड़ सकते हैं।


    क्या इससे बच्चों का टीकाकरण कम हो सकता?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि टीकाकरण की प्रक्रिया जितनी लंबी और महंगी होगी, उतने ही ज्यादा लोगों के बीच इसे पूरा कराना मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञ एना डर्बिन ने कहा कि संयुक्त टीकों को अलग करने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इससे व्यवस्था कम सुविधाजनक और महंगी हो सकती है। इसके विपरीत ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव से माता-पिता को बच्चों के टीकाकरण के समय और अंतर को लेकर ज्यादा विकल्प मिलेंगे और इससे तीनों बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण दर बढ़ सकती है।


    क्या ट्रंप का यह आदेश कंपनियों को टीके बनाने के लिए मजबूर कर सकता?

    आदेश के बावजूद दवा कंपनियों को नए व्यक्तिगत टीके बनाने और मंजूरी के लिए आवेदन करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कंपनियों के लिए भी अलग टीके बनाना कारोबारी रूप से आकर्षक नहीं हो सकता, क्योंकि वे पहले से संयुक्त टीके बेच रही हैं। मर्क और जीएसके ने अपने मौजूदा टीकों की सुरक्षा और प्रभावशीलता पर भरोसा जताया है। मर्क ने कहा है कि अब तक ऐसा कोई प्रकाशित वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, जो एमएमआर टीके को तीन अलग-अलग टीकों में बांटने से कोई फायदा दिखाता हो।


    क्या यह आदेश तुरंत लागू हो जाएगा?

    ट्रंप के आदेश के बावजूद बदलाव तुरंत लागू होना तय नहीं है। संघीय अधिकारियों को पहले योजनाएं तैयार करनी होंगी और फिर अलग-अलग टीकों के विकास, उत्पादन और मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विशेषज्ञों ने भी इसकी कानूनी और व्यावहारिक प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। व्हाइट हाउस और एफडीए दवा कंपनियों को नए टीके विकसित करने के लिए सीधे मजबूर नहीं कर सकते। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के आदेश और वास्तविक टीकाकरण व्यवस्था में बदलाव के बीच लंबी प्रक्रिया हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले समय में इस योजना को लेकर वैज्ञानिक, कारोबारी और कानूनी स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है।

  • शादमान इस्लाम का विकेट लेते ही स्टार्क का ऐतिहासिक कमाल, हेराथ को पीछे छोड़ा और कपिल देव के क्लब में पहुंचे

    शादमान इस्लाम का विकेट लेते ही स्टार्क का ऐतिहासिक कमाल, हेराथ को पीछे छोड़ा और कपिल देव के क्लब में पहुंचे


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने टेस्ट क्रिकेट में अपने शानदार करियर का एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। बांग्लादेश के खिलाफ डार्विन में खेले जा रहे पहले टेस्ट में शादमान इस्लाम का विकेट लेते ही स्टार्क ने इतिहास रच दिया। इस विकेट के साथ उनके टेस्ट क्रिकेट में 434 विकेट पूरे हो गए और वह टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के गेंदबाज बन गए। स्टार्क ने इस मामले में श्रीलंका के महान स्पिनर रंगना हेराथ को पीछे छोड़ दिया है। मैच शुरू होने से पहले स्टार्क और हेराथ दोनों के नाम 433 टेस्ट विकेट थे।

    बांग्लादेश की पहली पारी के नौवें ओवर में स्टार्क ने शादमान इस्लाम को अपनी गेंद पर आउट किया। नाथन लायन ने उनका कैच पकड़ा और इसी विकेट के साथ स्टार्क के नाम एक बड़ा रिकॉर्ड दर्ज हो गया। 36 साल के स्टार्क अब टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खब्बू गेंदबाज हैं। उनके नाम 434 विकेट हो चुके हैं जबकि रंगना हेराथ ने अपने टेस्ट करियर में 433 विकेट हासिल किए थे।

    स्टार्क की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि 434 विकेट के आंकड़े तक पहुंचते ही उन्होंने भारत के महान कप्तान और दिग्गज ऑलराउंडर कपिल देव की भी बराबरी कर ली। कपिल देव ने 1978 से 1994 के बीच 131 टेस्ट मैच खेलकर 434 विकेट लिए थे। स्टार्क ने यह आंकड़ा अपने 106वें टेस्ट मैच में हासिल किया है। इस तरह टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में स्टार्क और कपिल देव अब संयुक्त रूप से 11वें स्थान पर हैं।

    बाएं हाथ के गेंदबाजों की बात करें तो स्टार्क इस सूची में सबसे ऊपर पहुंच चुके हैं। उनके बाद रंगना हेराथ 433 विकेट के साथ दूसरे स्थान पर हैं। पाकिस्तान के महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम 414 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर हैं। न्यूजीलैंड के डेनियल वेटोरी ने 362 विकेट लिए हैं जबकि श्रीलंका के चामिंडा वास के नाम 355 विकेट हैं। भारत के रवींद्र जडेजा भी 348 टेस्ट विकेट के साथ इस खास सूची में शामिल हैं।

    अब स्टार्क की नजर टेस्ट क्रिकेट के सर्वकालिक सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की टॉप-10 सूची पर है। इस सूची में दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज तेज गेंदबाज डेल स्टेन 439 विकेट के साथ 10वें स्थान पर हैं। स्टार्क के खाते में फिलहाल 434 विकेट हैं। यानी स्टेन को पीछे छोड़कर टॉप-10 में जगह बनाने के लिए स्टार्क को छह और विकेट हासिल करने होंगे। जिस तरह वह लगातार विकेट चटका रहे हैं उसे देखते हुए यह मुकाम भी उनके लिए ज्यादा दूर नजर नहीं आता।

    स्टार्क ने अक्टूबर 2010 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। अपनी तेज रफ्तार गेंदबाजी स्विंग और खतरनाक यॉर्कर के दम पर उन्होंने दुनिया के सबसे प्रभावशाली तेज गेंदबाजों में अपनी जगह बनाई। खासकर बड़े टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया की सफलता का अहम हिस्सा रहा है। वह 2015 और 2023 में वनडे विश्व कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा रहे। 2015 विश्व कप में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी चुना गया था।

    स्टार्क उन चुनिंदा क्रिकेटरों में शामिल हैं जिन्होंने वनडे विश्व कप टी20 विश्व कप और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब जीता है। वनडे क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड शानदार है। उन्होंने 130 वनडे इंटरनेशनल मुकाबलों में 23.58 की औसत से 247 विकेट हासिल किए हैं। सितंबर 2025 में उन्होंने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया था लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका शानदार सफर अब भी जारी है।

    शादमान इस्लाम का विकेट स्टार्क के लिए सिर्फ एक और विकेट नहीं था बल्कि यह उनके लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर की एक ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया। रंगना हेराथ को पीछे छोड़कर टेस्ट के सबसे सफल खब्बू गेंदबाज बनने के बाद अब उनकी निगाहें डेल स्टेन के 439 विकेट पर हैं। अगर स्टार्क छह और विकेट हासिल कर लेते हैं तो टेस्ट क्रिकेट के सर्वकालिक टॉप-10 गेंदबाजों में उनका नाम भी दर्ज हो जाएगा।

  • चमोली टनल हादसा: पानी और मलबा गले तक भरा…., नीले ड्रमों के सहारे रेस्क्यू में जुटे जवान

    चमोली टनल हादसा: पानी और मलबा गले तक भरा…., नीले ड्रमों के सहारे रेस्क्यू में जुटे जवान


    चमोली।
    अलकनंदा नदी (Alaknanda River) पर निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना (Vishnugad-Pipalkoti Hydroelectric Project) की टीआरटी (टेल रेस टनल) में जिस स्थान पर मजदूर काम कर रहे थे, वहां से करीब 150 मीटर दूर हुए भूस्खलन (Landslide) के बाद पानी के साथ पत्थर और मलबा टनल के अंदर घुस गया, जिसकी चपेट में कई मजदूर आ गए।

    बताया जा रहा है कि टनल में गले तक पानी और मलबा भर गया है। रात करीब दस बजे एनडीआरएफ की टीमें तीन वाहनों से टनल में घुसी। नीले रंग के ड्रम भी टनल में ले जाए गए हैं। पानी में इन ड्रमों के सहारे आगे बढ़कर जवान रेस्क्यू अभियान में जुटे हैं। देर रात तक घायलों का रेस्क्यू अभियान जारी था।

    वहीं, टनल में अधिक पानी भरने के कारण रेस्क्यू में दिक्कतें आ रही हैं। एसपी चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि श्रीनगर गढ़वाल से राफ्ट मंगाई गई है, उससे लापता छह लोगों का रेस्क्यू किया जाएगा।

    उधर, प्रोजेक्ट निदेशक शरद कुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है। उन्होंने बताया कि हमारी पहली प्राथमिकता सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए सभी संसाधनों को पूरी तरह से लगाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी और घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी।

    बताया कि प्रोजेक्ट की मैनेजमेंट टीम भी राहत एवं बचाव कार्य में पूरी तरह जुटी हुई है। प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राहत कार्य तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लोगों को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता।

    बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था। मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और अन्य फंसे हुए लोगों को निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

  • E20 पेट्रोल पर नया विवाद: कार कंपनियों की ईमेल बातचीत में सामने आई चिंता तो SIAM ने क्यों वापस लिया पत्र?

    E20 पेट्रोल पर नया विवाद: कार कंपनियों की ईमेल बातचीत में सामने आई चिंता तो SIAM ने क्यों वापस लिया पत्र?


    नई दिल्ली। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच एक नई रिपोर्ट ने ऑटो सेक्टर में हलचल बढ़ा दी है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर पहले से ही वाहन मालिकों के बीच कई तरह की चिंताएं सामने आती रही हैं। अब Reuters की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Tata Motors Maruti Suzuki और Mahindra जैसी बड़ी ऑटो कंपनियों के अधिकारी भी E20 फ्यूल की गुणवत्ता को लेकर आपस में चर्चा कर रहे थे। कंपनियों के बीच हुई ईमेल बातचीत में पेट्रोल में क्लोराइड और नमी की मात्रा को लेकर चिंता सामने आने की बात कही गई है।

    भारत में E20 फ्यूल को पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से बढ़ावा दिया गया है। सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत देशभर में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। लेकिन इसके साथ ही वाहन मालिकों की चिंता भी बढ़ी है कि लंबे समय तक ऐसे ईंधन के इस्तेमाल का गाड़ियों पर क्या असर पड़ेगा। इसी बीच ऑटो कंपनियों से जुड़े कुछ आंतरिक डेटा ने इस बहस को और गंभीर बना दिया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक कई ऑटोमेकर्स ने करीब एक साल की अवधि में 21 राज्यों के 250 से ज्यादा पेट्रोल पंपों से ईंधन के सैंपल इकट्ठा कर उनकी जांच की थी। दावा है कि 18 राज्यों के कई सैंपल में क्लोराइड की मात्रा और नमी का स्तर ज्यादा पाया गया। कंपनियों से जुड़े अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में इन तत्वों की वजह से वाहनों के कुछ हिस्सों में संभावित समस्याओं को लेकर चिंता जताई गई थी।

    हालांकि इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑटो कंपनियां सार्वजनिक तौर पर E20 फ्यूल का विरोध नहीं कर रही हैं। बल्कि उद्योग संगठन SIAM ने भी बाद में सरकार को भेजे गए अपने पत्र को वापस ले लिया था। 28 जुलाई को भेजी गई शिकायत में E20 पेट्रोल में संभावित मिलावट और गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई गई थी लेकिन बाद में SIAM ने कहा कि पत्र में इस्तेमाल किए गए कुछ आंकड़ों की और जांच तथा वैलिडेशन की जरूरत है।

    SIAM के मुताबिक यह डेटा आंतरिक चर्चा और वैलिडेशन के लिए जुटाया गया था। संगठन का कहना है कि टेस्टिंग का आधार और सैंपल साइज किसी अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं था। इसी वजह से सरकार को भेजे गए पत्र को वापस लेने का फैसला किया गया। साथ ही SIAM इस विषय पर ज्यादा व्यापक और वैज्ञानिक अध्ययन कराने की योजना बना रहा है।

    इस बीच पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से इस रिपोर्ट पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि SIAM का पत्र मिलने से करीब दो सप्ताह पहले ही सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता और संभावित मिलावट की जांच शुरू कर चुकी थीं। उनके मुताबिक जांच में केवल चार मामले ही इस तरह की समस्या से जुड़े मिले।

    सरकारी तेल कंपनियों ने भी रैंडम और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर बड़ी चिंता की बात को खारिज किया है। उनका कहना है कि किए गए परीक्षणों में ईंधन में ऐसी कोई व्यापक समस्या सामने नहीं आई जिससे वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत हो।

    वहीं Mahindra ने Reuters की रिपोर्ट में ईमेल के आधार पर निकाले गए निष्कर्षों को पूरी तरह गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर निकाले गए परिणाम सही नहीं हैं। दूसरी तरफ Maruti Suzuki और Tata Motors की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है।

    पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि एक तरफ सरकारी तेल कंपनियां E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त कर रही हैं और दूसरी तरफ ऑटो इंडस्ट्री के भीतर हुए परीक्षणों तथा बातचीत को लेकर रिपोर्ट में अलग तस्वीर सामने आई है। ऐसे में अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि E20 पेट्रोल सभी वाहनों के लिए नुकसानदायक है। फिलहाल सबसे जरूरी है कि ईंधन की गुणवत्ता और संभावित क्लोराइड तथा नमी की समस्या को लेकर व्यापक वैज्ञानिक जांच हो और उसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं। इससे वाहन मालिकों के बीच बनी आशंकाओं को भी स्पष्ट जवाब मिल सकेगा।

  • आजादी की पूर्व संध्या पर क्या कर रहा था भारत? 14 अगस्त 1947 की रात लिए गए थे नए राष्ट्र के बड़े फैसले

    आजादी की पूर्व संध्या पर क्या कर रहा था भारत? 14 अगस्त 1947 की रात लिए गए थे नए राष्ट्र के बड़े फैसले


    नई दिल्ली। 14 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का ऐसा दिन था जब देश ब्रिटिश शासन से आजादी मिलने से महज कुछ घंटे दूर था। हालांकि यह दिन केवल 15 अगस्त का इंतजार करने तक सीमित नहीं था बल्कि इसी दौरान स्वतंत्र भारत की सरकार का ढांचा तैयार हो चुका था। नेताओं के बीच मंत्रालयों की जिम्मेदारियां तय की जा रही थीं और संविधान सभा अपने उस ऐतिहासिक मध्यरात्रि सत्र की तैयारी में जुटी थी जिसने भारत के इतिहास की दिशा बदल दी। सत्ता हस्तांतरण के साथ ही नए भारत के सामने शासन चलाने से लेकर आर्थिक व्यवस्था संभालने और रियासतों को एक राजनीतिक व्यवस्था में जोड़ने तक कई बड़ी चुनौतियां मौजूद थीं।

    स्वतंत्र भारत की पहली कैबिनेट में देश के प्रमुख नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं। जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री के साथ विदेश मामलों कॉमनवेल्थ संबंधों और वैज्ञानिक अनुसंधान की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सरदार वल्लभभाई पटेल को गृह सूचना एवं प्रसारण तथा रियासतों से जुड़े विभाग मिले थे। यह जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण थी क्योंकि उस समय भारत के सामने सैकड़ों रियासतों को नई राजनीतिक व्यवस्था से जोड़ने की चुनौती थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद को खाद्य एवं कृषि और मौलाना अबुल कलाम आजाद को शिक्षा विभाग सौंपा गया था।

    डॉ. जॉन मथाई के पास रेलवे एवं परिवहन जबकि सरदार बलदेव सिंह के पास रक्षा विभाग था। जगजीवन राम को श्रम मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी। सीएच भाभा को वाणिज्य और रफी अहमद किदवई को संचार विभाग सौंपा गया। राजकुमारी अमृत कौर स्वास्थ्य मंत्रालय संभालने वाली थीं जबकि डॉ. बीआर आंबेडकर को कानून विभाग की जिम्मेदारी मिली। आरके षणमुखम चेट्टी के पास वित्त मंत्रालय था जबकि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उद्योग एवं आपूर्ति और एनवी गाडगिल को कार्य खान एवं बिजली विभाग दिया गया था।

    यह कैबिनेट अचानक तैयार नहीं हुई थी। स्वतंत्र भारत की सरकार बनाने की प्रक्रिया पहले से चल रही थी। 4 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने लॉर्ड माउंटबेटन को नई कैबिनेट के सदस्यों के नाम भेजे थे। विभागों का अंतिम बंटवारा सरकार की शुरुआती बैठकों में तय किया जाना था। यानी 14 अगस्त तक भारत केवल आजादी का जश्न मनाने की तैयारी नहीं कर रहा था बल्कि शासन की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथों में लेने की तैयारी भी कर चुका था।

    इसके बाद आया वह ऐतिहासिक क्षण जिसका इंतजार पूरे देश को था। 14 अगस्त की मध्यरात्रि को संविधान सभा का विशेष सत्र हुआ। इसी दौरान जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण दिया। नेहरू ने कहा कि जब दुनिया का बड़ा हिस्सा सो रहा होगा तब भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जागेगा। उनके भाषण में आजादी की खुशी के साथ उस जिम्मेदारी का भी उल्लेख था जो नए राष्ट्र के सामने खड़ी थी।

    नेहरू के लिए आजादी केवल सत्ता हासिल करने का अवसर नहीं थी। उन्होंने भारत की सेवा को देश की करोड़ों जनता की सेवा से जोड़ा और गरीबी अज्ञानता बीमारी तथा असमानता से जूझ रहे लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उनका संदेश साफ था कि स्वतंत्रता के बाद असली काम शुरू होना था। देश को अपने सपनों को वास्तविकता में बदलने के लिए लगातार मेहनत करनी थी।

    इसी मध्यरात्रि सत्र में भारत और उसके लोगों की सेवा करने का संकल्प भी लिया गया। इसमें देश को दुनिया में उसका उचित स्थान दिलाने के साथ विश्व शांति और मानव कल्याण में योगदान देने की प्रतिबद्धता शामिल थी। आजादी की उस रात संविधान सभा में गीत गाने को लेकर भी चर्चा हुई थी। उस समय भारत का कोई आधिकारिक राष्ट्रगान नहीं था और इस कारण कार्यक्रम में गायन को लेकर भी विचार किया गया।

    आजादी के साथ राष्ट्रीय ध्वज भी नए भारत की पहचान का प्रमुख प्रतीक बन चुका था। संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय किए थे। तिरंगे में मौजूद चक्र को भी विशेष प्रतीकात्मक अर्थ दिया गया था। यह ध्वज भारत के अतीत की विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं को जोड़ने वाला प्रतीक बनकर सामने आया।

    सत्ता हस्तांतरण के साथ आर्थिक मोर्चे पर भी तैयारियां चल रही थीं। भारत और ब्रिटेन के बीच वित्तीय मुद्दों पर बातचीत हो रही थी और स्टर्लिंग बैलेंस से जुड़े समझौते किए जा रहे थे। वहीं रियासतों का एकीकरण भी नए भारत की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल था। यानी 14 अगस्त की रात जब देश आजादी की दहलीज पर खड़ा था तब एक तरफ उत्सव की तैयारी थी और दूसरी तरफ एक विशाल राष्ट्र को संभालने की जिम्मेदारी सामने थी।

    इस तरह 14 अगस्त 1947 की रात केवल आजादी से पहले की रात नहीं थी। यह उस भारत की नींव रखने वाली रात थी जिसे अपनी सरकार खुद चलानी थी अपनी समस्याओं का समाधान खुद तलाशना था और अपने भविष्य का निर्माण अपने फैसलों से करना था। आधी रात को देश ने स्वतंत्रता हासिल की लेकिन उसी क्षण नए भारत के निर्माण की जिम्मेदारी भी उसके नेताओं और करोड़ों नागरिकों के कंधों पर आ गई।

  • पत्नी के नाम G+3 और G+2 बिल्डिंग समेत करोड़ों की संपत्ति! इंदौर निगम अधिकारी के घर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

    पत्नी के नाम G+3 और G+2 बिल्डिंग समेत करोड़ों की संपत्ति! इंदौर निगम अधिकारी के घर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई


    इंदौर  इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के ठिकानों पर लोकायुक्त ने शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर लोकायुक्त की करीब 20 सदस्यीय टीम ने सुबह लगभग 6 बजे उनके घर और उनकी पत्नी भावना पांडेय के नाम दर्ज हॉस्टल समेत दो ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में अधिकारी की वैध आय और सामने आई संपत्ति के बीच बड़ा अंतर होने की बात कही गई है।

    लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के मुताबिक जितेंद्र कुमार पांडेय नगर निगम में करीब 31 साल से नौकरी कर रहे हैं। उनके पूरे सेवाकाल में करीब 80 लाख रुपये वेतन के रूप में मिलने का अनुमान लगाया गया है। दूसरी तरफ प्रारंभिक जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपये की संपत्ति और खर्च से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब 1.73 करोड़ रुपये का अंतर है। प्रारंभिक गणना में इसे करीब 216.35 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति बताया गया है। हालांकि लोकायुक्त ने साफ किया है कि अभी यह आंकड़ा अंतिम नहीं है। दस्तावेजों और संपत्तियों के विस्तृत सत्यापन के बाद ही आय से अधिक संपत्ति की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

    कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त की टीम ने पांडेय की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की। टीम में डीएसपी सुनील तालान आनंद चौहान और निरीक्षक आशुतोष मिठास तथा सचिन पटेरिया समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे। जांच का मुख्य फोकस अधिकारी की आय के स्रोत और उनके परिवार के नाम खरीदी गई संपत्तियों के बीच तालमेल पर है।

    प्रारंभिक जांच में पांडेय की पत्नी भावना पांडेय के नाम दो इमारतें सामने आने की बात कही गई है। पहली इमारत आनंद नगर एक्सटेंशन में बताई गई है। नवलखा-चितावद क्षेत्र में 40×50 फीट के प्लॉट पर इस भवन का निर्माण हुआ है। यह G+3 इमारत है और इसके निर्माण पर करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। लोकायुक्त की टीम अब यह पता लगा रही है कि इस संपत्ति के निर्माण और खरीद के लिए रकम का स्रोत क्या था।

    दूसरी इमारत गजाधर नगर चितावद के गुलमोहर का बगीचा इलाके में भावना पांडेय के नाम बताई गई है। यह G+2 बिल्डिंग है और इसमें हॉस्टल संचालित होने की जानकारी सामने आई है। इसके निर्माण पर करीब 91.50 लाख रुपये खर्च होने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। दोनों संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच के साथ उनके निर्माण की लागत और मौजूदा मूल्य का भी सत्यापन किया जा रहा है।

    लोकायुक्त की जांच में पांडेय के परिवार के नाम कई वाहन खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है। पत्नी बेटे और बेटी के नाम चार पहिया और दोपहिया वाहन होने की बात कही गई है। इन वाहनों पर करीब 14 लाख रुपये खर्च होने का प्रारंभिक आकलन है। अब जांच एजेंसी यह देख रही है कि इन संपत्तियों और वाहनों की खरीद के लिए इस्तेमाल रकम का स्रोत क्या रहा।

    अधिकारियों का कहना है कि छापे के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही अनुपातहीन संपत्ति का अंतिम आंकड़ा तय किया जाएगा। यानी फिलहाल सामने आए आंकड़ों को प्रारंभिक माना जा रहा है और जांच आगे बढ़ने के साथ संपत्ति का कुल मूल्य बढ़ या घट सकता है।

    इंदौर की इस कार्रवाई के बीच जबलपुर लोकायुक्त की एक अन्य कार्रवाई भी चर्चा में है। सिवनी में पदस्थ बाबू सुभाष शर्मा के जबलपुर और सिवनी स्थित पांच ठिकानों पर छापे में करोड़ों रुपये की जमीन प्लॉट फार्महाउस और मकानों से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई थी। इससे मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लगातार चल रही कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में आ गई है।