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  • बैतूल के मां चंडी दरबार पर बढ़ा विवाद, आदिवासी संगठनों ने मंदिर और जमीन का प्रबंधन ग्राम सभा को सौंपने की मांग उठाई

    बैतूल के मां चंडी दरबार पर बढ़ा विवाद, आदिवासी संगठनों ने मंदिर और जमीन का प्रबंधन ग्राम सभा को सौंपने की मांग उठाई


    मध्य प्रदेश ।
    के बैतूल जिले की चिचोली तहसील के गोधना गांव में स्थित मां चंडी दरबार को लेकर विवाद बढ़ गया है। रविवार को जिले के अलग-अलग इलाकों से आदिवासी समुदाय और सामाजिक संगठनों के लोग मंदिर परिसर पहुंचे और प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने गर्भगृह के पास बलि देकर अपना विरोध दर्ज कराया। उनकी प्रमुख मांग है कि मंदिर और उससे जुड़ी जमीन का प्रबंधन ग्राम सभा को सौंपा जाए, ताकि धार्मिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं से जुड़े फैसलों में समुदाय की भागीदारी बनी रहे।

    आदिवासी समाज का कहना है कि मां चंडी दरबार सैकड़ों साल पुराना धार्मिक स्थल है और उसका गहरा संबंध उनकी आस्था तथा परंपराओं से है। समुदाय के लोगों के मुताबिक, मां चंडी को कली कंकाली दाई के नाम से भी जाना जाता है और गोंडवाना शासन के समय से ही उन्हें आदिवासी समाज की आराध्य माना जाता रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मंदिर का संचालन निजी हाथों में जाने के बाद से उनकी नाराजगी बढ़ी है। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था के कारण पूजा-पाठ और मंदिर प्रबंधन से जुड़ी पुरानी परंपराओं में बदलाव किए गए हैं।

    मंदिर के संचालन को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद व्यवस्था में बदलाव हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत के आदेश के बाद मंदिर का संचालन स्थानीय यादव परिवार को सौंपा गया। आदिवासी समुदाय का आरोप है कि इसके बाद पहले से चली आ रही पूजा-पाठ की व्यवस्था में परिवर्तन किया गया और पुरानी संचालन समिति को हटा दिया गया। इसके साथ ही पुराने मंदिर के ढांचे को हटाकर नया निर्माण कराया जा रहा है। समुदाय के लोगों का कहना है कि इन बदलावों से उनकी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर असर पड़ रहा है।

    प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि मंदिर और जमीन के प्रबंधन से संबंधित निर्णय ग्राम सभा की भागीदारी से लिए जाएं। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों की आस्था से जुड़े विषयों में समुदाय की राय को महत्व दिया जाना चाहिए। आदिवासी समाज के मुताबिक, हर रविवार और बुधवार को मां चंडी दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर की पूजा व्यवस्था और परंपराओं को लेकर होने वाले फैसलों में स्थानीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    आदिवासी संगठनों ने अपनी मांग के समर्थन में पेसा कानून और वनाधिकार कानून का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि इन कानूनों में आदिवासी परंपराओं और अधिकारों की रक्षा से संबंधित प्रावधान हैं। समुदाय के लोग हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करने की बात कह रहे हैं, लेकिन उनका आरोप है कि मामले की सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन की ओर से जरूरी तथ्य अदालत के सामने नहीं रखे गए। यह आरोप आदिवासी समाज की ओर से लगाया गया है।

    दूसरी ओर, मंदिर के संचालन से जुड़े विवाद में यादव परिवार की जमीन होने की बात भी सामने आई है। विवाद बढ़ने के बाद परिवार ने सहयोग करने की बात कही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में परिवार की ओर से सहयोग के स्वरूप या प्रबंधन को ग्राम सभा को सौंपने की मांग पर किसी विस्तृत निर्णय का उल्लेख नहीं है।

    मां चंडी दरबार को लेकर विवाद का मुख्य केंद्र मंदिर की संचालन व्यवस्था, जमीन के प्रबंधन और पारंपरिक पूजा-पद्धति में बदलाव का मुद्दा है। आदिवासी और सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे मंदिर और जमीन के प्रबंधन में ग्राम सभा की भागीदारी चाहते हैं। फिलहाल, इस मांग और उससे जुड़े आरोपों के बीच मंदिर के संचालन को लेकर विवाद बना हुआ है।

  • कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलेगा कारण

    कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलेगा कारण

    मध्य प्रदेश । के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा के आठ महीने के एक शावक की मौत हो गई है। सोमवार को नियमित निगरानी के दौरान वन विभाग की टीम को आशा के साथ पांच के बजाय चार शावक दिखाई दिए। एक शावक के गायब होने की जानकारी मिलने के बाद उसकी तलाश शुरू की गई। कुछ समय बाद तलाशी अभियान के दौरान उसका शव बरामद कर लिया गया। फिलहाल शावक की मौत की वजह स्पष्ट नहीं हुई है और अधिकारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शावक के दिखाई नहीं देने पर पार्क में उसकी तलाश के लिए अभियान चलाया गया। इसके तहत वन कर्मियों ने पार्क के बड़े हिस्से में खोजबीन की। तलाशी के दौरान शावक का शव मिलने के बाद उसकी मौत के कारणों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    मादा चीता आशा भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम के तहत नामीबिया से लाए गए चीतों में शामिल है। उसे विशेष विमान के जरिए कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया था। इस साल की शुरुआत में आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया था। इन शावकों के जन्म को देश में चीता पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया था। अब उसके एक शावक की मौत के बाद वन विभाग उसके कारणों की जांच कर रहा है।

    कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि शावक की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की वजह के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। फिलहाल किसी निश्चित कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि शावक की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

    यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब कूनो नेशनल पार्क में चीतों के प्रजनन से जुड़ी सकारात्मक खबरें भी सामने आती रही हैं। पार्क में शावकों के जन्म से भारत में चीते की आबादी को स्थापित करने और उसे स्थायी बनाने की उम्मीदों को बल मिला है। हालांकि, आशा के आठ महीने के शावक की मौत के बाद इस मामले में वन विभाग की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो गई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 59 बताई गई है। इनमें 40 शावक भारत में जन्मे हैं। वहीं, 15 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। शावक की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए वन विभाग रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

  • बुधनी के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 घर तोड़ने पर शिवराज की नाराजगी, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच के आदेश दिए

    बुधनी के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 घर तोड़ने पर शिवराज की नाराजगी, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच के आदेश दिए

    मध्य प्रदेश। के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 घर तोड़े जाने का मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरे मामले की रिपोर्ट अधिकारियों से मांगी गई है। उन्होंने मुख्य सचिव को भी इस संबंध में निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जांच के बाद मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

    शिवराज सिंह चौहान रविवार को कोसमी गांव पहुंचे थे। वहां उन्होंने आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे जुल्म की पराकाष्ठा बताया। उन्होंने कहा था कि इन्हीं लोगों के वोटों से डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री बने हैं। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई।

    सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह संवेदनशील है और यदि पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता ने कोई बात उठाई है, तो उसकी जांच कराने में कोई हर्ज नहीं है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अधिकारियों से घटना की रिपोर्ट तलब की गई है। उन्होंने निष्पक्ष जांच के जरिए पूरे मामले की स्थिति सामने आने की बात कही। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में जांच के निष्कर्ष या घर तोड़े जाने की कार्रवाई के पीछे के कारणों का विवरण नहीं दिया गया है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल की सराहना करते हुए मध्य प्रदेश में पिछले करीब 12 वर्षों के विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने रोजगार, निवेश, नदी जोड़ो परियोजनाओं, मेट्रो विस्तार, ऊर्जा उत्पादन और धार्मिक पर्यटन से जुड़े कार्यों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली का जिक्र करते हुए कहा कि उनका मूल मंत्र असंभव दिखाई देने वाले कार्यों को भी संकल्प के साथ पूरा करना है।

    राहुल गांधी के हालिया वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक तरफ उनकी बहन योजनाओं और काम की बात करती हैं, जबकि राहुल गांधी तांडव की बात करते हैं। उन्होंने भगवान शिव के तांडव को सृजन और विसर्जन से जुड़ा बताते हुए इसे अराजकता से अलग रखने की बात कही। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेताओं को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं और मर्यादाओं का पालन करने की सलाह दी।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वह जितनी बार विधायक बने, उतनी बार मुख्यमंत्री रहे और जितनी बार सांसद बने, उतनी ही बार प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 2014 और 2019 में भाजपा को मिले पूर्ण बहुमत का भी जिक्र किया। इसके अलावा गरीब कल्याण योजनाओं, मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत, आवास योजना, उज्ज्वला योजना, पीएम स्वनिधि और जल जीवन मिशन जैसी पहलों की जानकारी दी।

    डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक स्थलों के विकास और अंतरिक्ष कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने धारा 370 हटाने, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। अयोध्या के राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन के श्री महाकाल लोक के विकास के साथ चंद्रयान मिशन को भी उपलब्धियों में शामिल किया।

    मध्य प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल और ताप्ती नदी जोड़ो परियोजनाओं, गांधी सागर की 2,000 मेगावाट क्षमता वाली पंप स्टोरेज परियोजना, कूनो में चीता संरक्षण और भोपाल-इंदौर मेट्रो का उल्लेख किया। उन्होंने महिला सशक्तीकरण और रोजगार के बारे में बताते हुए कहा कि प्रदेश में 65 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। उनके अनुसार, 85 हजार सरकारी पदों पर भर्तियां हो चुकी हैं और एक लाख नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत और आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के लक्ष्य के अनुरूप दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करने की बात भी कही।

  • शराब दुकानों के ठेकों और लाइसेंस ट्रांसफर में गड़बड़ी, 2.75 करोड़ की ई-एफडीआर पर बैंक ने उठाए सवाल

    शराब दुकानों के ठेकों और लाइसेंस ट्रांसफर में गड़बड़ी, 2.75 करोड़ की ई-एफडीआर पर बैंक ने उठाए सवाल

    मध्य प्रदेश। में शराब दुकानों के ठेके और लाइसेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया में अनियमितताओं के मामले में आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा को निलंबित कर दिया गया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने 12 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। रायचूरा पर भोपाल में वर्ष 2024-25 के दौरान शराब दुकानों के ठेके आवंटित करने और लाइसेंस हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं करने के आरोप हैं। मामले की जांच के लिए गठित दो सदस्यीय टीम की रिपोर्ट में उनकी भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाई गई थी। इसके बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की।

    मामला 8 अक्टूबर को एक यूट्यूब चैनल पर प्रसारित खबर और 9 अक्टूबर को प्रकाशित समाचार के बाद सामने आया था। आरोपों की पड़ताल के लिए आबकारी विभाग ने दो सदस्यीय जांच दल बनाया। जांच में सात तरह की अनियमितताएं सामने आईं। इनमें 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की ई-एफडीआर, निर्धारित श्रेणी में शामिल नहीं होने वाले बैंक की प्रतिभूति स्वीकार करना, समय पर पूरी राशि जमा नहीं होना और लाइसेंस ट्रांसफर के दौरान निजी खाते की बैंक गारंटी तथा चेक स्वीकार करना शामिल है।

    जांच में सबसे गंभीर मामला AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की ई-एफडीआर से संबंधित पाया गया। रिकॉर्ड में 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की ई-एफडीआर और उसके सत्यापन की रिपोर्ट दर्ज थी। विभाग ने बैंक से इस दस्तावेज की पुष्टि कराई। बैंक ने 12 अक्टूबर को जारी पत्र में स्पष्ट किया कि संबंधित ई-एफडीआर उसके द्वारा जारी नहीं की गई थी। इससे दस्तावेज की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हुए। जांच में यह भी सामने आया कि एफडीआर के सत्यापन के लिए मई 2024 में विभाग की ओर से पत्र जारी किया गया था, लेकिन संबंधित अधिकारी तक पत्र पहुंचने का रिकॉर्ड नहीं मिला। बैंक को सत्यापन के लिए पत्र भेजे जाने का प्रमाण भी फाइल में उपलब्ध नहीं था। इसके बजाय लाइसेंसी जसवंत के ई-मेल से मिली सत्यापन रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई।

    जांच दल ने प्रतिभूति स्वीकार करने की प्रक्रिया में भी नियमों के उल्लंघन की बात कही। संबंधित प्रावधानों के अनुसार, केवल निर्धारित तीन श्रेणियों में आने वाले बैंकों की प्रतिभूतियां स्वीकार की जा सकती थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि AU स्मॉल फाइनेंस बैंक उस समय इन श्रेणियों में शामिल नहीं था, फिर भी उसकी एफडीआर स्वीकार की गई। ठेकेदार ने प्रतिभूति की आधी राशि 1 करोड़ 37 लाख 76 हजार 768 रुपये नकद जमा की थी। शेष आधी राशि 30 अप्रैल 2024 तक जमा होनी थी, लेकिन यह रकम 12 मई 2024 को जमा की गई। यानी निर्धारित समयसीमा से 22 दिन की देरी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस देरी पर नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय राशि स्वीकार कर ली गई।

    मेसर्स मां माइन्स के लाइसेंस ट्रांसफर में भी गड़बड़ियां सामने आईं। फर्म के लाइसेंस हस्तांतरण के लिए 10 जुलाई 2024 को आवेदन मिला था और भोपाल कलेक्टर ने 27 दिसंबर 2024 को आदेश जारी किया। जांच में पाया गया कि साझेदारी से जुड़े दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। एक समझौता पत्र में विजय सिंह को फर्म का साझेदार बताया गया था, जबकि आबकारी पोर्टल पर उपलब्ध पूरक दस्तावेजों में उन्हें साझेदार नहीं बताया गया। नियमों के अनुसार, ट्रांसफर लेने वाली फर्म को पूरी प्रतिभूति जमा करनी थी, लेकिन फर्म के बजाय विजय सिंह की ओर से 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय विजय सिंह का फर्म से कोई दर्ज संबंध नहीं था।

    जांच रिपोर्ट में फर्म के खाते के बजाय विजय सिंह के निजी बैंक खाते के पोस्ट-डेटेड चेक स्वीकार करने पर भी सवाल उठाए गए। विभागीय पत्राचार में कुछ व्यक्तियों को मां माइन्स का साझेदार या लाइसेंसी बताकर पत्र भेजे गए, जबकि उपलब्ध दस्तावेजों में उनके साझेदार होने की पुष्टि नहीं थी। एक मामले में लाइसेंस ट्रांसफर का आवेदन मिलने से पहले ही संबंधित व्यक्ति को हस्तांतरण से जुड़ा पत्र जारी किए जाने का उल्लेख भी किया गया।

    आदेश में इन अनियमितताओं को मध्य प्रदेश राजपत्र में निर्धारित नियमों और आबकारी आयुक्त के निर्देशों का उल्लंघन बताया गया है। विभाग के अनुसार, इन प्रक्रियाओं से सरकारी राजस्व की सुरक्षा जोखिम में पड़ी और अधिकारी ने अपने पद से जुड़े दायित्वों का उचित पालन नहीं किया। इसी आधार पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत रायचूरा को निलंबित किया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है। आदेश में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का भी उल्लेख है।

  • विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना ने मुख्यमंत्री थलापति विजय से की मुलाकात, अभिनेता ने की तारीफ, रश्मिका बोलीं- मैं उनकी फैन हूं

    विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना ने मुख्यमंत्री थलापति विजय से की मुलाकात, अभिनेता ने की तारीफ, रश्मिका बोलीं- मैं उनकी फैन हूं

    नई दिल्ली ।अभिनेता विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय से मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीरें दोनों कलाकारों ने साझा की हैं। विजय देवरकोंडा ने मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत को खास अनुभव बताया और उनके व्यवहार की तारीफ की। वहीं, रश्मिका मंदाना ने भी मुख्यमंत्री विजय के प्रति अपना सम्मान जाहिर करते हुए कहा कि एक प्रशंसक के रूप में उन्हें हमेशा से उनसे लगाव रहा है।

    विजय देवरकोंडा ने मुलाकात की तीन तस्वीरें साझा कीं। इनमें एक तस्वीर में मुख्यमंत्री विजय दोनों कलाकारों के साथ खड़े होकर तस्वीर खिंचवाते दिखाई दे रहे हैं। दूसरी तस्वीर में तीनों बैठकर बातचीत करते नजर आ रहे हैं, जबकि तीसरी तस्वीर में मुख्यमंत्री अभिनेता विजय देवरकोंडा को गले लगाते दिख रहे हैं। इन तस्वीरों के साथ अभिनेता ने मुलाकात के अनुभव को भी साझा किया।

    विजय देवरकोंडा ने अपने संदेश में कहा कि थलापति विजय के साथ समय बिताना उनके लिए बेहद सुखद रहा। उन्होंने बताया कि व्यस्त दिन होने के बावजूद मुख्यमंत्री ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान निजी जीवन, काम और दुनिया से जुड़े विभिन्न विषयों पर बातचीत हुई। अभिनेता ने यह भी कहा कि एक ही मुलाकात के बाद थलापति विजय उनके पसंदीदा लोगों में शामिल हो गए। उनके संदेश से मुख्यमंत्री के प्रति सम्मान और उनके साथ हुई बातचीत को लेकर उत्साह जाहिर हुआ।

    रश्मिका मंदाना ने भी मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए मुख्यमंत्री विजय के लिए खास संदेश लिखा। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद विजय सर से मिलना उनके लिए अच्छा अनुभव रहा। रश्मिका ने एक प्रशंसक के रूप में उन्हें पसंद करने से लेकर उनके साथ काम करने का अवसर मिलने तक के सफर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में उनकी प्रशंसा करते हुए खुशी हो रही है। अभिनेत्री ने उन्हें आगे के लिए प्यार और शुभकामनाएं भी दीं।

    थलापति विजय के तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने पर विजय देवरकोंडा ने पहले भी खुशी जाहिर की थी और उन्हें बधाई दी थी। हालांकि, अभिनेता ने वर्ष 2018 में एक साक्षात्कार के दौरान कहा था कि उन्होंने थलापति विजय की कोई भी फिल्म पूरी नहीं देखी है, लेकिन उनकी फिल्मों के ट्रेलर उन्हें पसंद आते हैं। हालिया मुलाकात के बाद अभिनेता की टिप्पणी ने दोनों कलाकारों के बीच हुई बातचीत को फिर चर्चा में ला दिया है।

    कामकाज की बात करें तो विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना आगामी फिल्म ‘राणाबाली’ में एक साथ नजर आने वाले हैं। फिल्म से जुड़े कई वीडियो पहले ही चर्चा में आ चुके हैं। फिल्म 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। दर्शक दोनों कलाकारों को एक बार फिर पर्दे पर साथ देखने का इंतजार कर रहे हैं।

    विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना इससे पहले ‘गीता गोविंदम’ और ‘डियर कॉमरेड’ में साथ काम कर चुके हैं। ‘राणाबाली’ में दोनों तीसरी बार एक साथ पर्दे पर दिखाई देंगे। दोनों के निजी जीवन को लेकर भी प्रशंसकों में दिलचस्पी रही है। दी गई जानकारी के मुताबिक, दोनों ने इसी साल फरवरी में उदयपुर में शादी की थी और इसके बाद हैदराबाद में भव्य रिसेप्शन आयोजित किया था। शादी के बाद ‘राणाबाली’ उनकी पहली साथ आने वाली फिल्म है।

  • सगाई तोड़ने के फैसले के बाद फिर साथ आए पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल, बोले- अब अपने भरोसे और समझ से तय करेंगे भविष्य

    सगाई तोड़ने के फैसले के बाद फिर साथ आए पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल, बोले- अब अपने भरोसे और समझ से तय करेंगे भविष्य

    नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और अभिनेत्री-इन्फ्लुएंसर आकृति अग्रवाल ने अपने रिश्ते को लेकर नया फैसला किया है। सगाई तोड़ने और अलग होने की जानकारी देने के कुछ सप्ताह बाद दोनों ने फिर से साथ रहने का निर्णय लिया है। 12 अक्टूबर 2026 को दोनों ने एक साझा व्यक्तिगत स्पष्टीकरण जारी कर अपने रिश्ते में आए बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब वे अपने भविष्य से जुड़े फैसले आपसी बातचीत, समझ और भरोसे के आधार पर लेना चाहते हैं।

    पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल ने इसी साल मार्च में सगाई की थी। दोनों ने 8 मार्च को अपने रिश्ते को नया नाम देते हुए सगाई की तस्वीरें साझा की थीं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच इस रिश्ते को लेकर उत्साह देखा गया था। हालांकि, कुछ समय बाद दोनों के बीच अनबन की खबरें सामने आने लगीं। अगस्त से उनके रिश्ते में तनाव की चर्चाएं होने लगी थीं। इसके बाद 17 सितंबर 2026 को आकृति ने एक पोस्ट के जरिए अलग होने के फैसले की जानकारी दी थी।

    12 अक्टूबर को साझा किए गए स्पष्टीकरण में सगाई तोड़ने के फैसले के पीछे की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया। इसमें बताया गया कि उस समय करीबी लोगों की बातों को अधिक महत्व दिया गया और उनके सुझावों के आधार पर रिश्ता खत्म करने का निर्णय लिया गया। पोस्ट में कहा गया कि कुछ लोग उनके रिश्ते के बारे में उनसे भी अधिक जानते होने का दावा करते थे और उनके फैसलों पर उनका काफी प्रभाव था। इसी वजह से रिश्ते को लेकर गलत निर्णय लिया गया।

    साझा संदेश में इस बात पर भी जोर दिया गया कि उस समय दोनों के बीच बातचीत की कमी रही। पोस्ट के अनुसार, सगाई तोड़ने से पहले एक-दूसरे के साथ खुलकर बात करना जरूरी था। अब दोनों ने बीते घटनाक्रम पर चर्चा की है और एक-दूसरे के नजरिए को समझने की कोशिश की है। इसी बातचीत के बाद उन्होंने अपने रिश्ते को फिर से आगे बढ़ाने का फैसला किया।

    संदेश में आगे कहा गया कि सगाई तोड़ने के फैसले और उससे हुई तकलीफ की जिम्मेदारी स्वीकार की गई है। दोनों ने स्पष्ट किया कि वे एक-दूसरे के लिए पर्याप्त हैं और अपने रिश्ते को लेकर बाहरी लोगों के हस्तक्षेप पर निर्भर नहीं रहना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि आगे का जीवन किस दिशा में बढ़ेगा, इसका फैसला उनकी अपनी समझ, आपसी भरोसे और प्यार के आधार पर होगा।

    इससे पहले 17 सितंबर को आकृति अग्रवाल ने अलग होने की जानकारी देते हुए कहा था कि दोनों के भविष्य के लक्ष्य और परिस्थितियां अलग थीं। इसी कारण उन्होंने अलग होने का फैसला किया था। उस समय उनके बयान से सगाई टूटने की पुष्टि हुई थी। अब नए साझा संदेश के जरिए दोनों ने अपने फैसले में बदलाव की जानकारी दी है।

    पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल ने अपने रिश्ते को एक और अवसर देने का निर्णय लेते हुए लोगों से उनकी निजता और फैसले का सम्मान करने की अपील की है। दोनों के मुताबिक, वे अब नई शुरुआत कर रहे हैं और अपने रिश्ते का भविष्य आपसी समझ तथा विश्वास के आधार पर तय करना चाहते हैं।

  • मोहनलाल ने देखी अजय देवगन की ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’, फिल्म के अंत से हुए प्रभावित, पूरी टीम को दी बधाई

    मोहनलाल ने देखी अजय देवगन की ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’, फिल्म के अंत से हुए प्रभावित, पूरी टीम को दी बधाई


    नई दिल्ली: अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ को लेकर अभिनेता मोहनलाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। फिल्म देखने के बाद उन्होंने इसकी कहानी के अंत और पूरी यात्रा को लेकर अपनी खुशी जाहिर की। मोहनलाल ने फिल्म की तारीफ करते हुए निर्देशक अभिषेक पाठक, कुमार मंगत पाठक, अजय देवगन और पूरी कास्ट व क्रू को बधाई दी। अजय देवगन की इच्छा थी कि मोहनलाल उनकी फिल्म देखें और उसे लेकर अपना रिव्यू साझा करें। अब मोहनलाल ने फिल्म देखने के बाद अपना अनुभव बताया है।

    मोहनलाल ने एक वीडियो साझा कर कहा कि उन्होंने ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ देखी और वह इससे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने खास तौर पर इस बात का जिक्र किया कि फिल्म की कहानी और पूरी यात्रा का अंत जिस तरह हुआ, वह उन्हें पसंद आया। इसके साथ ही उन्होंने अभिषेक पाठक, कुमार मंगत पाठक, अजय देवगन और फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों तथा तकनीकी टीम को बधाई दी। उनके इस बयान से फिल्म को लेकर उनकी सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। फिल्म की रिलीज से पहले ट्रेलर लॉन्च के दौरान अजय देवगन ने भी इच्छा जताई थी कि मोहनलाल उनकी फिल्म देखें।

    ‘दृश्यम’ की शुरुआत मलयालम फिल्म से हुई थी, जिसमें मोहनलाल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इसी फिल्म का हिंदी रीमेक अजय देवगन के साथ बनाया गया था। शुरुआती दोनों संस्करणों में कहानी समान थी, लेकिन तीसरे भाग को लेकर स्थिति अलग रही। हाल ही में रिलीज हुए मलयालम संस्करण के तीसरे भाग को दर्शकों से अच्छा प्रतिसाद मिला था। इसके बाद हिंदी फिल्म ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ भी सिनेमाघरों में पहुंची और बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर रही है। इस बार हिंदी और मलयालम संस्करणों की कहानी में अंतर देखने को मिला। कुछ दर्शकों ने हिंदी संस्करण को मलयालम फिल्म से बेहतर भी बताया है।

    फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन की बात करें तो ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ ने भारत में अब तक 370.80 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया है। वहीं, दुनियाभर में इसकी कुल कमाई 479.80 करोड़ रुपये बताई गई है। फिल्म की कमाई ने इसे अजय देवगन की चर्चित फिल्मों में शामिल कर दिया है। कहानी के समापन के साथ फिल्म को दर्शकों की प्रतिक्रिया भी मिल रही है और अब मोहनलाल की तारीफ ने इसे लेकर चर्चा को एक नया पहलू दिया है।

    इस फिल्म में अजय देवगन के साथ तब्बू, रजत कपूर, इशिता दत्ता, मृणाल जाधव और कमलेश सावंत जैसे पुराने कलाकार भी नजर आए हैं। वहीं, इस बार जयदीप अहलावत और प्रकाश राज की भी फिल्म में एंट्री हुई है। फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है। उन्होंने आमिल कीयान खान और परवेज शेख के साथ इसकी कहानी लिखी है। अभिषेक पाठक फिल्म के निर्माता भी हैं। उनके साथ आलोक जैन, अजीत अंधारे और कुमार मंगत पाठक ने भी निर्माण की जिम्मेदारी संभाली है। अजय देवगन ने पहले बताया था कि अभिषेक और लेखकों ने पटकथा पर करीब दो साल तक मेहनत की। कहानी के आकार लेने और फिल्म बनने के बाद इसे ‘दृश्यम’ की अंतिम कड़ी बनाने का फैसला किया गया।

  • पैरा एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों पर रहेंगी नजरें, हांगझोऊ में 40 पदक जीतकर बढ़ाया था देश का मान

    पैरा एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों पर रहेंगी नजरें, हांगझोऊ में 40 पदक जीतकर बढ़ाया था देश का मान

    नई दिल्ली: पैरा एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के पीछे महिला पैरा एथलीटों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है। हांगझोऊ में 2022 में आयोजित पिछले पैरा एशियाई खेलों में भारत ने कुल 111 पदक जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया था। इनमें 40 पदक महिला खिलाड़ियों के नाम रहे थे। अब जापान के आइची-नागोया में 18 से 24 अक्टूबर 2026 तक होने वाले पैरा एशियन गेम्स में भारतीय महिला खिलाड़ियों से एक बार फिर दमदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। भारत का लक्ष्य पिछले खेलों में हासिल की गई पदक संख्या को पीछे छोड़ना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करना है।

    हांगझोऊ पैरा एशियाड में भारत ने 2018 में जीते गए 72 पदकों की तुलना में उल्लेखनीय सुधार किया था। भारतीय दल ने कुल 111 पदक अपने नाम किए और पदक तालिका में पांचवां स्थान हासिल किया। इनमें महिला खिलाड़ियों ने 40 पदक जीतकर कुल पदकों में लगभग 36 प्रतिशत योगदान दिया था। एथलेटिक्स, बैडमिंटन, तीरंदाजी और टेबल टेनिस जैसे खेलों में महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन खास तौर पर उल्लेखनीय रहा। इन उपलब्धियों ने दिखाया कि भारतीय महिला पैरा एथलीट देश की पदक उम्मीदों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    पिछले खेलों में शीतल देवी ने पैरा तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वह महिला कंपाउंड और मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय पैरा एथलीट बनी थीं। उनके प्रदर्शन ने भारतीय पैरा तीरंदाजी को नई पहचान दिलाई। आगामी प्रतियोगिता में भी उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। वहीं, पैरा बैडमिंटन में थुलासिमथी मुरुगेसन ने महिला एकल एसयू-5 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। इस बार उनके खेल में भाग लेने को लेकर अंतिम चयन की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

    पैरा पावरलिफ्टिंग में जैनब खातून ने हांगझोऊ में महिला 61 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था। उनकी उपलब्धि ने भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मानसी जोशी ने महिला एकल एसएल-3 वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया था। पैरा टेबल टेनिस में भाविना पटेल ने महिला एकल क्लास-4 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इस बार भाविना को भारतीय दल की ध्वजवाहिका चुना गया है। उनकी यह जिम्मेदारी भारतीय टीम के लिए खास महत्व रखती है। हालांकि, कुछ खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की अंतिम सूची घोषित होने का इंतजार है, इसलिए सभी खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

    भारत ने 2010 में चीन के ग्वांगझू में आयोजित पहले पैरा एशियाई खेलों में 14 पदक जीतकर 15वां स्थान हासिल किया था। इसके बाद हर संस्करण में देश की पदक संख्या में वृद्धि दर्ज की गई। हांगझोऊ में 111 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर पहुंचना भारतीय पैरा खेलों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। अब 2026 के खेलों में भारत इस प्रदर्शन को और बेहतर करने के लक्ष्य के साथ उतरेगा। इस प्रतियोगिता में 45 देशों के लगभग 3,000 पैरा एथलीट हिस्सा लेंगे। कुल 18 खेलों में 492 पदक स्पर्धाएं आयोजित होंगी। भारत की ओर से 121 खिलाड़ियों का दल जापान जाएगा, जिसमें 80 पुरुष और 41 महिला पैरा एथलीट शामिल हैं। भारतीय महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस बार भी देश की कुल पदक संख्या और रैंकिंग के लिहाज से अहम रहने वाला है।

  • सुरेश रैना ने परिवार संग मां बगलामुखी के किए दर्शन, मंदिर में हवन के दौरान लाल मिर्च चढ़ाने की क्या है मान्यता?

    सुरेश रैना ने परिवार संग मां बगलामुखी के किए दर्शन, मंदिर में हवन के दौरान लाल मिर्च चढ़ाने की क्या है मान्यता?

    नई दिल्ली: पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना ने शारदीय नवरात्र के पहले दिन अपने परिवार के साथ हिमाचल प्रदेश स्थित मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन किए। नवरात्र के अवसर पर उन्होंने मां के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माना जाता है। देशभर से श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां बगलामुखी की उपासना शत्रुओं पर विजय, बाधाओं से मुक्ति और जीवन में आने वाली कठिनाइयों से निपटने की शक्ति प्राप्त करने के लिए की जाती है। मंदिर में विशेष हवन का भी महत्व है, जिसमें लाल मिर्च की आहुति देने की परंपरा प्रचलित है।

    मां बगलामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के बनखंडी क्षेत्र में स्थित है। यह शक्तिपीठ श्रद्धालुओं के बीच अपनी विशिष्ट पूजा पद्धति और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन की परेशानियों से छुटकारा पाने की कामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं। सुरेश रैना का परिवार के साथ मंदिर में दर्शन करना भी इसी धार्मिक अवसर से जुड़ा रहा। नवरात्र के पहले दिन देवी की आराधना को विशेष महत्व दिया जाता है और भक्त विधि-विधान से पूजा कर आशीर्वाद मांगते हैं।

    मां बगलामुखी की पूजा में हवन का विशेष स्थान माना जाता है। इस दौरान लाल मिर्च की आहुति देने की परंपरा मंदिर की पहचान से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां बगलामुखी को शत्रुओं की वाणी और नकारात्मक शक्तियों को नियंत्रित करने वाली देवी माना जाता है। लाल मिर्च की आहुति को इसी मान्यता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इस प्रकार का हवन विरोधियों से उत्पन्न परेशानियों, विवादों और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना के लिए किया जाता है। यह धार्मिक आस्था पर आधारित परंपरा है, जिसका महत्व श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के अनुसार समझते हैं।

    मां बगलामुखी को पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है। उनकी पूजा में पीले रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, देवी को पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं और पूजा में पीले फूलों तथा अन्य पीली सामग्री का उपयोग किया जाता है। मंदिर में होने वाले विशेष अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के अनुसार पूजा कराते हैं। मां बगलामुखी की साधना को विशेष रूप से उन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जाता है, जब व्यक्ति किसी विवाद, विरोध या कठिन चुनौती का सामना कर रहा हो। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार धार्मिक विश्वास है और इन्हें आस्था के संदर्भ में ही देखा जाता है।

    मां बगलामुखी से जुड़ी धार्मिक कथाओं में देवी को असाधारण शक्ति वाली महाविद्या के रूप में वर्णित किया गया है। मान्यता है कि देवी की आराधना से संकटों का सामना करने का साहस और मानसिक मजबूती मिलती है। नवरात्र के दौरान शक्तिपीठों में पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रहता है। इस समय श्रद्धालु उपवास रखते हैं, देवी के मंत्रों का जाप करते हैं और हवन के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। सुरेश रैना का परिवार के साथ मां बगलामुखी के दर्शन करना इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ा प्रसंग है। मंदिर में लाल मिर्च की आहुति की परंपरा भी देवी की शक्ति और शत्रु बाधाओं से रक्षा की मान्यता के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती है।

  • सचिन, युवराज और गंभीर को टीम से बाहर करने पर सालों बाद चर्चा, संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अनुभव बताए

    सचिन, युवराज और गंभीर को टीम से बाहर करने पर सालों बाद चर्चा, संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अनुभव बताए

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में टीम चयन को लेकर हमेशा चर्चा होती रही है। किसी खिलाड़ी को टीम में जगह देना हो या किसी अनुभवी क्रिकेटर को बाहर बैठाने का फैसला लेना हो, चयनकर्ताओं के लिए यह जिम्मेदारी आसान नहीं होती। सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और गौतम गंभीर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के करियर में भी ऐसे दौर आए, जब उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। इन फैसलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर और चयनकर्ता संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभवों के आधार पर इस तरह के फैसलों की परिस्थितियों पर चर्चा की है।

    संदीप पाटिल भारतीय क्रिकेट के उन पूर्व खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने मैदान पर खेलने के साथ-साथ चयनकर्ता की भूमिका भी निभाई। चयन समिति में रहते हुए उन्हें कई बार ऐसे फैसले लेने पड़े, जिनका सीधा असर स्थापित खिलाड़ियों के करियर पर पड़ता था। भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए प्रदर्शन, फिटनेस, टीम की जरूरत और उपलब्ध विकल्पों जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है। किसी खिलाड़ी का बड़ा नाम या पुराना रिकॉर्ड हमेशा उसकी जगह सुनिश्चित नहीं करता। चयनकर्ताओं के सामने यह चुनौती रहती है कि वे व्यक्तिगत लोकप्रियता के बजाय टीम के हित और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लें।

    सचिन तेंदुलकर का करियर भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित अध्यायों में से एक रहा है। उन्होंने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व किया और कई रिकॉर्ड बनाए। इसके बावजूद उनके करियर में भी ऐसे मौके आए, जब उनके चयन या टीम में भूमिका को लेकर चर्चा हुई। युवराज सिंह ने भारत की कई महत्वपूर्ण जीतों में योगदान दिया और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई। वहीं, गौतम गंभीर ने भी भारतीय टीम के लिए अहम पारियां खेलीं। इन खिलाड़ियों के अनुभव बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबे समय तक प्रदर्शन करने के बावजूद टीम में जगह बनाए रखना लगातार चुनौतीपूर्ण रहता है।

    टीम चयन के फैसलों में केवल किसी खिलाड़ी का पिछला प्रदर्शन ही निर्णायक नहीं होता। चयनकर्ता यह भी देखते हैं कि टीम को किस तरह के संयोजन की जरूरत है, खिलाड़ी का हालिया प्रदर्शन कैसा है और आगामी मुकाबलों की परिस्थितियों के लिए कौन उपयुक्त होगा। कई बार किसी खिलाड़ी को बाहर रखने का फैसला अस्थायी होता है, जबकि कुछ परिस्थितियों में टीम में बदलाव लंबे समय के लिए भी हो सकता है। ऐसे फैसलों के कारण प्रशंसकों और पूर्व खिलाड़ियों के बीच बहस होना स्वाभाविक है, क्योंकि लोकप्रिय खिलाड़ियों से दर्शकों की भावनाएं जुड़ी रहती हैं।

    संदीप पाटिल के अनुभवों के संदर्भ में चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी का एक और पहलू सामने आता है। खिलाड़ियों के साथ निजी संबंध, दोस्ती या व्यक्तिगत समीकरण चयन प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करने चाहिए। चयनकर्ता का दायित्व टीम के लिए उपयुक्त खिलाड़ियों का चुनाव करना है, भले ही किसी फैसले से लोकप्रिय खिलाड़ी या उनके प्रशंसक निराश हों। हालांकि, सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और गौतम गंभीर को टीम से बाहर किए जाने के अलग-अलग कारण रहे होंगे। इन तीनों के मामलों को एक जैसा मानना उचित नहीं है, क्योंकि उनके करियर, प्रदर्शन और टीम की जरूरतें अलग-अलग समय पर अलग थीं।

    भारतीय क्रिकेट में चयन को लेकर होने वाली चर्चाएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि टीम बनाना केवल नामों का चुनाव नहीं, बल्कि परिस्थितियों और रणनीति के बीच संतुलन बनाने की प्रक्रिया है। संदीप पाटिल जैसे पूर्व खिलाड़ियों के अनुभव इस प्रक्रिया को समझने का अवसर देते हैं। किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर रखने का फैसला उसके पूरे करियर का मूल्यांकन नहीं होता, बल्कि अक्सर किसी खास समय की जरूरतों और उपलब्ध विकल्पों से जुड़ा होता है। इसलिए पुराने चयन फैसलों को समझने के लिए उस समय की परिस्थितियों और संबंधित खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी ध्यान में रखना जरूरी है।