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  • सफेद बालों को नेचुरल तरीके से काला करने के लिए अपनाएं आंवला और नारियल तेल का घरेलू उपाय

    सफेद बालों को नेचुरल तरीके से काला करने के लिए अपनाएं आंवला और नारियल तेल का घरेलू उपाय


    नई दिल्ली:
    उम्र बढ़ने के साथ बालों का सफेद होना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कई लोगों के बाल कम उम्र में भी सफेद दिखाई देने लगते हैं। आनुवंशिक कारण, उम्र और कुछ स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां बालों के रंग में बदलाव से जुड़ी हो सकती हैं। ऐसे में सफेद बालों को छिपाने के लिए लोग बाजार में उपलब्ध हेयर कलर का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, कुछ उत्पादों में मौजूद रसायन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में जलन या एलर्जी पैदा कर सकते हैं। वहीं, बार-बार कलर करने से बाल रूखे और बेजान भी महसूस हो सकते हैं। ऐसे में बालों की देखभाल के लिए घरेलू उपायों में रुचि रखने वाले लोग आंवला पाउडर और नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह मिश्रण बालों को कंडीशन करने में मदद कर सकता है, लेकिन इससे सफेद बालों के स्थायी रूप से काले होने की गारंटी नहीं है।

    आंवला और नारियल तेल को बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आंवले में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जबकि नारियल तेल बालों में नमी बनाए रखने और प्रोटीन के नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है। नारियल तेल के इस्तेमाल से बालों का रूखापन कम हो सकता है और उनमें चमक दिखाई दे सकती है। आंवला पाउडर भी बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्रियों में शामिल है। हालांकि, इन दोनों चीजों के मिश्रण से बालों के प्राकृतिक रंग को दोबारा काला करने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे सफेद बालों का निश्चित उपचार मानने के बजाय बालों की देखभाल के एक घरेलू विकल्प के रूप में देखना चाहिए।

    इस मिश्रण को तैयार करने के लिए आंवला पाउडर और नारियल तेल की जरूरत होती है। सबसे पहले एक साफ कटोरी में आंवला पाउडर लें और उसमें धीरे-धीरे नारियल तेल मिलाएं। दोनों सामग्रियों को तब तक मिलाएं, जब तक एक समान पेस्ट तैयार न हो जाए। मिश्रण की मात्रा बालों की लंबाई और घनत्व के अनुसार रखी जा सकती है। इसे इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर लगाकर जांच करना बेहतर है। यदि वहां खुजली, जलन, लालिमा या सूजन दिखाई दे, तो इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आंखों और सिर की ऐसी त्वचा पर मिश्रण लगाने से बचें, जहां पहले से घाव या जलन हो।

    इस्तेमाल के लिए मिश्रण को बालों और सिर की त्वचा पर सावधानी से लगाया जा सकता है। इसे लगाने के बाद बालों में बहुत अधिक मात्रा में तेल जमा न होने दें। घरेलू नुस्खे के तौर पर इसे कुछ समय तक बालों में रखने के बाद हल्के शैम्पू से धोया जा सकता है। इसे एक से दो घंटे तक छोड़ना या सप्ताह में दो बार लगाना सफेद बालों को काला करने के लिए प्रमाणित तरीका नहीं है। इस्तेमाल की अवधि और आवृत्ति अपने बालों की प्रकृति तथा त्वचा की प्रतिक्रिया के अनुसार तय करनी चाहिए। यदि बालों में चिपचिपापन बढ़ता है या सिर की त्वचा में परेशानी होती है, तो इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    बालों की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, जरूरी पोषक तत्व और नियमित देखभाल भी महत्वपूर्ण हैं। यदि कम उम्र में अचानक बहुत अधिक बाल सफेद होने लगें या इसके साथ बाल झड़ने जैसी समस्या हो, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है। कुछ मामलों में पोषक तत्वों की कमी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों की जांच की जरूरत हो सकती है। आंवला और नारियल तेल बालों को मुलायम बनाने तथा रूखेपन को कम करने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन पहले से सफेद हो चुके बालों को प्राकृतिक रूप से फिर काला करने के लिए इन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

  • होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने का विरोध….एकजुट हुए 60 देश

    होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने का विरोध….एकजुट हुए 60 देश


    नई दिल्ली।
    दुनिया के अहम समुद्री रास्तों (Sea routes) से जहाजों (Ships) की आवाजाही पर शुल्क लगाने के खिलाफ 60 देश एक साथ आए हैं. यूरोपीय संघ (European Union) के पहल के बाद इन देशों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर गैरकानूनी टोल (Illegal Toll) लगाने और उनकी आवाजाही रोकने वाली पाबंदियों का विरोध किया गया है. 12 अक्टूबर को सामने आई इस घोषणा में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, जापान और ब्रिटेन समेत कई देशों ने समर्थन दिया है।

    इन देशों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों से सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही बनाए रखने के लिए मिलकर काम किया जाना चाहिए. घोषणा में साफ कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों से कानूनी रूप से गुजरने वाले जहाजों पर ऐसे शुल्क नहीं लगाए जाने चाहिए, जो उनकी आवाजाही में बाधा डालें।

    देशों ने गैरकानूनी फीस, भेदभावपूर्ण पाबंदियों और पहले से अनुमति लेने जैसी शर्तों का विरोध किया है. यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने इस पहल की घोषणा की. इसका मकसद समुद्री रास्तों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत खुला रखना और किसी देश की एकतरफा कार्रवाई से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से रोकना है।


    होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों है दुनिया की नजर?

    होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक अहम समुद्री रास्ता है. यहां से खाड़ी क्षेत्र का तेल और प्राकृतिक गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की करीब पांचवीं हिस्सेदारी वाला तेल और लिक्विफाइज नैचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से गुजरते थे।

    ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से नेविगेशन, सुरक्षा और अन्य सेवाओं के नाम पर शुल्क लेने की योजना आगे बढ़ाई थी. इस प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ाई है।


    असर सिर्फ जहाजों तक सीमित नहीं

    समुद्री रास्तों पर पाबंदियां या अतिरिक्त शुल्क लगने से माल ढुलाई महंगी हो सकती है. इसका असर तेल और गैस की आपूर्ति, कारोबार और सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है. इसी वजह से 60 देशों ने समुद्री रास्तों को खुला रखने और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने पर जोर दिया है. अब देखना यह होगा कि समुद्री रास्तों पर आवाजाही बनाए रखने के लिए देश इस साझा घोषणा को किस तरह अमल में लाते हैं।

  • दिल्ली में बारिश से मौसम हुआ सुहाना, आज 23 राज्यों में अलर्ट…. उत्तर भारत में ठंड की दस्तक

    दिल्ली में बारिश से मौसम हुआ सुहाना, आज 23 राज्यों में अलर्ट…. उत्तर भारत में ठंड की दस्तक


    नई दिल्ली।
    गर्मी से परेशान लोगों को अब धीरे-धीरे राहत मिलने लगी है. कहीं बारिश (Rain) ने मौसम सुहाना (Pleasant Weather) कर दिया है, तो कहीं सुबह और रात की हवा में ठंडक महसूस होने लगी है. दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में रातभर हुई बारिश के बाद मंगलवार की सुबह गुलाबी ठंड के एहसास के साथ हुई. उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक मौसम का मिजाज बदला हुआ है. पहाड़ी राज्यों में भी बारिश का असर देखने को मिल रहा है।

    ऐसे में लोगों को अब एसी की ठंडक से ज्यादा मौसम की प्राकृतिक ठंडक राहत दे रही है. आने वाले दिनों में सुबह-शाम की ठंडक बढ़ी, तो पंखों की रफ्तार कम करने और रात में गर्म चादर या रजाई निकालने की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि, दिन में धूप निकलने पर गर्मी का असर अभी बना रह सकता है।


    23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बारिश की संभावना

    मौसम विभाग के 13 अक्टूबर के पूर्वानुमान के मुताबिक, देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बारिश हो सकती है. अंडमान-निकोबार, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. वहीं, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और लक्षद्वीप में मध्यम बारिश के आसार हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, बिहार, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और कर्नाटक में हल्की बारिश हो सकती है. अलग-अलग क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी आशंका है।

    दिल्ली-एनसीआर में रविवार रात से ही बादल छाए हुए थे. इसके बाद तेज हवाओं और बारिश ने मौसम का रुख बदल दिया. राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के इलाकों में मंगलवार रात और सुबह भी बारिश का असर बना रहा. तापमान में गिरावट के चलते सुबह घर से निकलने वाले लोगों को ठंड महसूस हुई और उन्हें हल्के गर्म कपड़े पहनने पड़े. मौसम में आए इस बदलाव का असर अब रोजमर्रा की दिनचर्या पर भी दिखने लगा है. दिन में गर्मी से राहत मिलने के साथ सुबह और रात के समय ठंडक बढ़ रही है।


    दिल्ली में आज कैसा रहेगा मौसम?

    मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, दिल्ली और एनसीआर के कई हिस्सों में 13 अक्टूबर को भी बारिश और गरज-चमक की संभावना है. लगातार बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, यह राहत पूरे दिन एक जैसी बनी रहेगी, इसकी संभावना नहीं है. बादलों की आवाजाही और धूप निकलने के साथ तापमान में उतार-चढ़ाव हो सकता है. आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. यानी दिन में अभी गर्मी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन सुबह और रात के समय ठंडक रह सकती है।


    यूपी से राजस्थान तक बदला मौसम

    उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले दो दिनों के दौरान हुई बारिश से मौसम में बदलाव आया है. पश्चिमी यूपी के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं के कारण ठंडक बढ़ी है. बुलंदशहर समेत कई इलाकों में सुबह हुई रिमझिम बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दी. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, पश्चिमी यूपी में 16 अक्टूबर तक कहीं-कहीं बारिश हो सकती है. अमरोहा, बागपत, बिजनौर, बुलंदशहर, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ और संभल समेत कई इलाकों में बारिश की संभावना है।

    पूर्वी यूपी में 15 और 16 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं. अगले कुछ दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. ऐसे में सुबह और शाम के समय मौसम में ठंडक महसूस हो सकती है. राजस्थान में भी नए वेदर सिस्टम के असर से बारिश दर्ज की गई है. मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और राज्य के उत्तरी हिस्सों में अगले तीन से चार दिनों तक कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. 13 और 14 अक्टूबर को बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बारिश होने की संभावना है।


    पंजाब, हरियाणा, पहाड़ों में मौसम सक्रिय

    उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के साथ पहाड़ी राज्यों में भी मौसम बदला हुआ है. पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बारिश की संभावना है, जबकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी मौसम सक्रिय बना रह सकता है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की विदाई के बाद एक्टिव हुए नए वेदर सिस्टम के असर से उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश और तेज हवाएं देखने को मिली हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण तापमान में गिरावट महसूस हो सकती है. हालांकि, अलग-अलग जिलों में मौसम का असर अलग रहेगा. ऐसे में पहाड़ों की यात्रा पर जाने वाले लोगों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर निकलना चाहिए।


    दक्षिण भारत में भी बारिश के बने आसार

    बारिश का असर सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं है. तमिलनाडु के कई जिलों में भी गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक, नीलगिरि, कोयंबटूर, इरोड, कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, थूथुकुडी, तेनकासी, मदुरै, शिवगंगा, सलेम और तिरुप्पुर में बारिश हो सकती है. पुडुचेरी और कराईकल में भी कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश के आसार हैं. दक्षिण भारत में बारिश का यह दौर स्थानीय मौसम परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग इलाकों में असर दिखा सकता है।

  • कूनो नेशनल पार्क में माता चीता आशा के 8 महीने के शावक की मौत

    कूनो नेशनल पार्क में माता चीता आशा के 8 महीने के शावक की मौत


    श्योपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से बुरी खबर सामने आई है. नामीबियाई मादा चीता आशा (Namibian female cheetah Asha) के 8 महीने के एक शावक की मौत हो गई. आशा ने पांच शावकों को जन्म दिया था. अब उसके चार शावक ही बचे हैं. शावक की मौत का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह सामने आएगी।

    चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्ट उत्तम कुमार शर्मा ने बताया, सोमवार सुबह नियमित मॉनिटरिंग की गई. इस दौरान मादा चीता आशा अपने 5 में से 4 शावकों के साथ नजर आई. एक शावक के गायब होने पर उसकी तलाश शुरू की गई. टीम ने काफी खोजबीन की. इसके बाद शावक मृत अवस्था में मिला।

    शावक की मौत कैसे हुई, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पार्क प्रबंधन ने 12 अक्टूबर को जारी प्रेस नोट में इसकी पुष्टि की है. मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चलेगा।

    उत्तम कुमार शर्मा के मुताबिक, शावक की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 53 रह गई है. इनमें भारत में जन्मे 40 चीते शामिल हैं. पार्क प्रबंधन के मुताबिक, इनमें से 15 चीते फिलहाल जंगल में खुले घूम रहे हैं। वहीं, गांधी सागर अभयारण्य में चार और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (VDTR) में दो चीते मौजूद हैं. इस तरह भारत में चीतों की कुल संख्या अब 59 रह गई है।


    पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आएगी मौत की वजह

    फिलहाल शावक की मौत के कारणों को लेकर स्थिति साफ नहीं है. पार्क प्रबंधन पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह का पता चल सकेगा।

  • Protest: बैटमैन के अवतार में दिखे राहुल गांधी, खरगे ने भी मास्क पहनकर दिया पोज

    Protest: बैटमैन के अवतार में दिखे राहुल गांधी, खरगे ने भी मास्क पहनकर दिया पोज


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में चुनाव आयोग (Election Commission) के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान सोमवार को एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) बैटमैन (Batman) के मास्क के साथ नजर आए, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (President Mallikarjun Kharge) ने भी बैटमैन वाला मास्क पहनकर पोज दिया। विपक्ष का यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के तहत सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाला गया था। यह पूरा मामला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा है।


    राहुल गांधी की बैटमैन वाली तस्वीर हुई चर्चा में

    राहुल गांधी की बैटमैन मास्क के साथ तस्वीर ने लोगों का ध्यान खींचा। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने भी इस तस्वीर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी सोमवार को विरोध मार्च के दौरान बैटमैन के मास्क के साथ पोज देते नजर आए। राजनीतिक रूप से अहम इस प्रदर्शन के बीच दोनों नेताओं का यह अंदाज चर्चा का विषय बना।


    जब राहुल गांधी से पूछा गया था- क्या आप बैटमैन हैं?

    बैटमैन के साथ राहुल गांधी का यह जुड़ाव पहले भी चर्चा में आ चुका है। इससे पहले इंस्टाग्राम पर आयोजित ‘आस्क मी एनीथिंग’ सत्र के दौरान एक यूजर ने उनसे पूछा था कि क्या वह बैटमैन हैं? इस सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने मजाकिया अंदाज में कहा था, “बस इतना कह सकते हैं कि किसी ने मुझे और बैटमैन को कभी एक ही कमरे में साथ नहीं देखा है।” अब विपक्ष के मार्च के दौरान बैटमैन मास्क के साथ उनकी तस्वीर सामने आने से यह पुराना जवाब एक बार फिर प्रासंगिक हो गया।


    SIR के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा INDIA गठबंधन

    बैटमैन मास्क के बीच इस प्रदर्शन की भी खूब चर्चा है। राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के 10 अन्य नेताओं के साथ भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह याचिका विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर दाखिल की गई है। इस याचिका पर मंगलवार यानी आज सुनवाई होने की संभावना है।


    याचिका दाखिल करने वाले नेताओं में शामिल हैं:

    राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष
    मल्लिकार्जुन खरगे
    तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय
    समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद
    अखिलेश यादव
    राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव
    शिवसेना
    (UBT) के सांसद
    संजय राउत
    माकपा महासचिव एमए बेबी
    भाकपा महासचिव डी. राजा
    झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी
    एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले
    इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर


    दिल्ली में जारी है विरोध प्रदर्शन

    दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच सोमवार को दिल्ली पुलिस के एक सर्कुलर के अनुसार, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है।

    यह घटनाक्रम जून और जुलाई में हुए CJP के प्रदर्शनों के बाद सामने आया है। उस दौरान संगठन ने कथित पेपर लीक के मुद्दे पर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

  • राष्ट्रपति ने उत्तराखंड समेत 6 राज्यों में की नए राज्यपालों की नियुक्ति

    राष्ट्रपति ने उत्तराखंड समेत 6 राज्यों में की नए राज्यपालों की नियुक्ति


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रपति दौपदी मुर्मु (President Droupadi Murmu) ने सोमवार को 6 राज्यों के राज्यपालों (Governors 6 states) की नियुक्ति की घोषणा की। राष्ट्रपति भवन (President’s House) की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ओम प्रकाश माथुर को केरलम, सुधा यादव को कर्नाटक, ब्रज मोहन राम को ओडिशा, दुष्यंत गौतम को सिक्किम, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु और डॉ. ढाल सिंह (Dr. Dhal Singh) को उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों से जुड़े आदेश संबंधित राज्यपालों के अपने-अपने पदों का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगे।


    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यपालों की निम्नलिखित नियुक्तियां कीं

    सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया। ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया। डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया। डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया। आर्लेकर को तमिलनाडु का पूर्णकालिक राज्यपाल बनाया गया।

    केरलम से स्थानांतरित किए गए राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मार्च से ही तमिलनाडु के राज्यपाल के कार्यों का निर्वहन कर रहे थे। उस समय आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। ताजा आदेश के बाद आर्लेकर तमिलनाडु के नियमित राज्यपाल होंगे। गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष आर्लेकर हिमाचल प्रदेश और बिहार के राज्यपाल के रूप में भी काम कर चुके हैं।

    ओम प्रकाश माथुर उनकी जगह केरलम के राज्यपाल का पद संभालेंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान से पूर्व राज्यसभा सांसद माथुर ने जुलाई 2024 में सिक्किम के राज्यपाल का कार्यभार संभाला था।


    चार राज्यों को मिले नए राज्यपाल

    ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। पलामू से लोकसभा के पूर्व सांसद राम हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे। कंभमपति ने जनवरी 2025 में ओडिशा के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। सुधा यादव कर्नाटक की नई राज्यपाल होंगी। महेंद्रगढ़ से भाजपा की पूर्व सांसद और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की पूर्व सदस्य यादव, थावरचंद गहलोत की जगह लेंगी।

    मध्य प्रदेश के बालाघाट से लोकसभा के पूर्व सांसद ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की जगह लेंगे। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम सिक्किम के नए राज्यपाल होंगे। वह ओम प्रकाश माथुर का स्थान लेंगे। राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति में हरि बाबू कंभमपति, थावरचंद गहलोत और गुरमीत सिंह के लिए किसी नई जिम्मेदारी की घोषणा नहीं की गई है।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच तेजी से बढ़ रही भारत की अर्थव्यवस्था 7% रहेगी GDP ग्रोथ

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच तेजी से बढ़ रही भारत की अर्थव्यवस्था 7% रहेगी GDP ग्रोथ


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की अर्थव्यवस्था (Economy) वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) ने वर्ष 2026 और 2027, दोनों में भारत की GDP ग्रोथ 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। इसके मुकाबले वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर 2026 में 3.1 फीसदी और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने की संभावना है। हालांकि, ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें, सरकारी कर्ज और वित्तीय जोखिम दुनिया की अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

    IMF ने AI में बढ़ते निवेश को ग्लोबल ग्रोथ के संभावित सहारे के रूप में देखा है। कंप्यूटिंग हार्डवेयर, डेटा सेंटर और AI तकनीक पर खर्च बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल रहा है। लंबे समय में यह तकनीक उत्पादकता बढ़ाने, कामकाज की लागत घटाने और कारोबार की दक्षता सुधारने में मदद कर सकती है।


    मूडीज, एसएंडपी, वर्ल्ड बैंक और फिच भी बढ़ा चुके हैं अनुमान

    इससे पहले मूडीज रेटिंग्स, उसके बाद एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स और विश्व बैंक (World Bank) ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अपना अनुमान बढ़ा चुके हैं। वर्ल्ड बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान जताया है। इससे पहले इसने भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान लगाया था।

    पिछले महीने मूडीज ने भी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 1 प्रतिशत बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया, जबकि एसएंडपी ने अपने अनुमान में 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की। फिच ने भी पिछले महीने भारत के ग्रोथ का अनुमान 6.4 से 6.9% किया था।


    IMF ने चेताया

    IMF के मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था अब तक लगातार आर्थिक झटकों के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ी है, लेकिन यह मजबूती पहले के मुकाबले अधिक नाजुक और असमान होती जा रही है। IMF ने चेतावनी दी है कि एनर्जी सप्लाई में रुकावटें लंबे समय तक बनी रहीं तो आर्थिक विकास पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश से उत्पादकता बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।


    दुनिया के मुकाबले भारत की ग्रोथ दोगुने से ज्यादा

    IMF के अनुमान के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 2026 और 2027 में 7 फीसदी रह सकती है। वहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर इन वर्षों में क्रमशः 3.1 फीसदी और 3.4 फीसदी रहने का अनुमान है। इस तरह भारत की अनुमानित वृद्धि दर वैश्विक औसत से दोगुने से भी अधिक है।


    दुनिया के मुकाबले भारत की ग्रोथ दोगुने से ज्यादा

    IMF के अनुमान के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 2026 और 2027 में 7 प्रतिशत रह सकती है। वहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर इन वर्षों में क्रमशः 3.1 प्रतिशत और 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस तरह भारत की अनुमानित वृद्धि दर दुनिया के औसत से दोगुने से भी अधिक है।


    दुनिया की ग्रोथ 2027 में 3.4% रहने का अनुमान

    IMF के अनुसार, ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ रेट 2026 में 3.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। 2027 में इसके बढ़कर 3.4 प्रतिशत होने का अनुमान है। हालांकि, यह वृद्धि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद जोखिमों को पूरी तरह दूर नहीं करती। फंड का कहना है कि कंपनियां बार-बार आने वाले आर्थिक झटकों के अनुसार खुद को ढाल रही हैं। दूसरी ओर, तकनीकी कंपनियों में निवेश की तेजी ने वित्तीय बाजारों को उम्मीद दी है, लेकिन बाजारों में जोखिमों को कम करके आंकने की आशंका भी बनी हुई है।

  • दिल्ली में मतदाता सूची में नाम जोड़ने का एक और मौका मिलेगा…. SIR में छूटे वोटरों की टेंशन हुई कम

    दिल्ली में मतदाता सूची में नाम जोड़ने का एक और मौका मिलेगा…. SIR में छूटे वोटरों की टेंशन हुई कम


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार (Chief Electoral Officer Ashok Kumar) ने सोमवार को कहा कि एसआईआर प्रक्रिया (SIR Process) के दौरान मतदाता सूची से छूटे पात्र मतदाताओं के लिए 18 और 25 अक्तूबर को विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इनमें जवाब दाखिल कर निस्तारण करा सकेंगे, वहीं पात्र लोग फॉर्म-6 भरकर जमा कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि फॉर्म-6 (Form-6) के साथ जरूरी दस्तावेज जमा करने वाले सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची (Voter List) में शामिल किए जाएंगे। कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर नहीं छूटेगा।

    दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के मुताबिक 33 लाख नोटिस पाने वाले मतदाताओं में से करीब 20 लाख मतदाताओं के नोटिस का निस्तारण किया जा चुका है। सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में सभी एसडीएम ने अपने-अपने क्षेत्रों में जारी नोटिस के निस्तारित हो चुके मामलों की जानकारी दी।

    सीईओ कार्यालय का कहना है कि तार्किक विसंगतियों और नो-मैपिंग के कारण जिन मतदाताओं को नोटिस जारी हुए थे, उनकी ओर से दस्तावेज जमा कराकर नोटिस का निस्तारण कराया जा रहा है। अब तक ऐसे चार विशेष कैंप लगाए जा चुके हैं।


    पिछले हफ्ते मिले थे विपक्षी दल

    इससे पहले इंडिया गठबंधन के नेताओं ने बीते बुधवार को दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की थी और एसआईआर को रद्द करने और राष्ट्रीय राजधानी की मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए 47.56 लाख लोगों के नाम पुनः जोड़ने की मांग की थी। विपक्षी दलों द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, कश्मीरी गेट से दिल्ली निर्वाचन कार्यालय तक मार्च निकालने के बाद कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, माले और तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीईओ अशोक कुमार को एक ज्ञापन सौंपा।

    जानकारी के मुताबिक एसआईआर के दौरान तैयार की गई मसौदा सूची से 47 लाख से अधिक नाम बाहर कर दिए गए हैं, जबकि रिकॉर्ड में विसंगतियां होने के कारण 33 लाख से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। बयान में कहा गया था कि विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने नोटिस वापस लेने और उन सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बहाल करने की मांग की, जिनके नाम हटा दिए गए हैं।

  • शिमला में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा…. कई इलाके बेहद संवेदनशील

    शिमला में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा…. कई इलाके बेहद संवेदनशील


    शिमला।
    राजधानी शिमला (Shimla) पर भूकंप (Earthquake) ही नहीं अब भूस्खलन (Landslides) और फ्लैश फ्लड (Flash Floods) जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। नगर निगम की ओर से कराए गए मल्टी-हैजार्ड क्लाइमेट रिस्क एंड वल्नरेबिलिटी असेसमेंट (सीआरवीए) (Multi-Hazard Climate Risk and Vulnerability Assessment – CRVA) अध्ययन में भूस्खलन को एक बढ़ते खतरे के रूप में शामिल किया है।

    दूसरी ओर इन आपदाओं से बचाव के लिए नगर निगम ने स्ट्रॉम वाटर मैनेजमेंट प्लान तो तैयार किया है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने के लिए बजट नहीं मिल रहा है। निगम का अपना खजाना भी खाली पड़ा है। ऐसे में तीन साल से 77 करोड़ रुपये का यह प्लान फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। नगर निगम शिमला ने इस साल पहली बार 75 करोड़ रुपये का जलवायु बजट पेश किया था। इसके तहत शहर में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले संभावित नुकसान का अध्ययन करवाया है।

    करीब दस वर्षों के आंकड़ों और प्राकृतिक आपदाओं के विश्लेषण पर आधारित इस अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि शिमला के लिए नई आपदा प्रबंधन नीति तैयार की जाए, जिसमें जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को प्राथमिकता दी जाए। रिपोर्ट के अनुसार भविष्य में बादल फटना, अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड), भूस्खलन और अनियोजित निर्माण शहर के लिए बड़ी चुनौतियां बन सकते हैं। इनसे निपटने के लिए मास्टर प्लान तैयार करना जरूरी है।

    77 करोड़ का मास्टर प्लान फाइलों में बंद
    शहर में भूस्खलन का एक बड़ा कारण बारिश के पानी की निकासी बाधित होना है। शहर में बढ़ते निर्माण के चलते अंग्रेजों के समय बनाए गए कई नाले बंद हो चुके हैं। बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था बेहतर करने के लिए नगर निगम ने शहर के नालों का सर्वे करवाया है। इसके आधार पर 77 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। निगम ने बजट जारी करने के लिए केंद्र सरकार को इसका प्रस्ताव भेजा था, लेकिन तीन साल से इसे मंजूरी नहीं मिली है। निगम का अपना खजाना भी खाली है। ऐसे में भूस्खलन के खतरे को स्वीकार करने के बावजूद इससे बचाव की योजना धरातल पर नहीं उतर पा रही है। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि शहर में जल निकासी व्यवस्था बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वार्डों, खासकर संवेदनशील इलाकों में नालों और नालियों को व्यवस्थित करने के लिए उनका चैनलाइजेशन किया जा रहा है।

    शहर में यह हैं भूस्खलन के संवेदनशील इलाके
    भूस्खलन के लिहाज से शहर के कृष्णानगर, शिव बावड़ी, फागली, लोअर कैथू, अपर कैथू, समरहिल, बालूगंज, टूटीकंडी, संजौली, ढली, भराड़ी, जाखू की ढलानें और नवबहार के कुछ हिस्से सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं। इन इलाकों में खड़ी ढलानें, कमजोर भूगर्भीय संरचना, अनियोजित निर्माण, पहाड़ियों की कटिंग और खराब जल निकासी व्यवस्था जोखिम को और बढ़ा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में भूस्खलन और जमीन धंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं। वर्ष 2023 में समरहिल, शिव बावड़ी, कृष्णानगर और फागली, जबकि वर्ष 2025 में बैनमोर, कृष्णानगर, हिमलैंड, पंथाघाटी और न्यू शिमला में जमीन धंसने की घटनाएं हो चुकी हैं।

  • डिजिटल व्यवस्था की राह में साइबर ठगी बनी बाधा… 72% भारतीयों ने बनाई ऑनलाइन दुनिया से दूरी

    डिजिटल व्यवस्था की राह में साइबर ठगी बनी बाधा… 72% भारतीयों ने बनाई ऑनलाइन दुनिया से दूरी


    नई दिल्ली।
    देश जब एआई (AI) और भविष्य के 6जी नेटवर्क में दुनिया का नेतृत्व करने का महत्वाकांक्षी विजन लेकर आगे बढ़ रहा है, तब साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) और ऑनलाइन स्कैम्स (Online Scams) की बाढ़ भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था (Digital Economy) की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर उभर रही है। वैश्विक दूरसंचार संस्था जीएसएमए के एक ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, साइबर ठगी के डर से देश के लगभग तीन-चौथाई (70 से 72 फीसदी) नागरिक ऑनलाइन गतिविधियों से कतरा रहे हैं और अपने डिजिटल व्यवहार को सीमित कर रहे हैं।

    नई दिल्ली में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) के इतर जीएसएमए के एशिया-पैसिफिक प्रमुख जूलियन गोरमैन ने आगाह किया कि यह भरोसे का संकट देश के डिजिटल विकास की गति को कुंद कर सकता है। जीएसएमए के सर्वे के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में भारत में लगभग हर आठ में से एक नागरिक किसी न किसी ऑनलाइन स्कैम का शिकार बना। शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अधिकांश पीड़ितों को कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला। गौरमैन ने कहा, सबसे चिंताजनक है कि 70-72% आबादी घबराई हुई है और ऑनलाइन व्यवहार को सीमित कर रही है।


    1-2% के अंतर को पाटेगा सैटेलाइट

    सैटेलाइट संचार पर छिड़ी बहस पर गोरमैन ने कहा, भारत का जमीनी मोबाइल ब्रॉडबैंड पहले ही 98% से अधिक आबादी तक पहुंच चुका है। सैटेलाइट केवल दूरदराज के क्षेत्रों, जहाजों या जंगलों में बचे 1-2% कनेक्टिविटी गैप को भरने का काम करेगा ना कि मोबाइल नेटवर्क की जगह ले सकता है। भारत सबसे सस्ते मोबाइल टैरिफ वाले देशों में से एक है, यहां सैटेलाइट ब्रॉडबैंड की भारी लागत इसके कार्यान्वयन में बाधा होगी।


    डिजिटल ट्रस्ट बड़ी चुनौती

    गोरमैन ने कहा कि दूरसंचार और डिजिटल सेक्टर के एजेंडे में सबसे ऊपर डिजिटल ट्रस्ट (डिजिटल भरोसा) कायम करना होना चाहिए, क्योंकि धोखाधड़ी ग्राहकों के साथ-साथ व्यवसायों और सरकारी पहलों को भी प्रभावित करती है। विदेशी सैटेलाइट कंपनियां घरेलू ऑपरेटरों पर हावी होनेे के सवाल पर गोरमैन ने कहा, भारत 5जी लॉन्च करने वाला पहला देश नहीं था, लेकिन आज वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5जी बाजार बन चुका है। पहले आना ही सब कुछ तय नहीं करता। उन्होंने सलाह दी कि सभी को सैटेलाइट से जोड़ने की कोशिश के बजाय उन करोड़ों लोगों को मौजूदा मोबाइल ब्रॉडबैंड से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो अब तक इंटरनेट की पहुंच से बाहर हैं।