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  • ग्वालियर में नए साल की सुबह ‘दूध अभियान’: शराब छोड़, सेहत से की नववर्ष की शुरुआत

    ग्वालियर में नए साल की सुबह ‘दूध अभियान’: शराब छोड़, सेहत से की नववर्ष की शुरुआत

    ग्वालियर। नए साल 2026 की शुरुआत शहर में कुछ अलग अंदाज में हुई। इंदरगंज चौराहे पर आयोजित दूध अभियान में लोगों ने शराब छोड़कर दूध पीकर नववर्ष का स्वागत किया। एसोसिएशन ऑफ ग्वालियर यूथ सोसाइटी और यातायात पुलिस के संयुक्त प्रयास से यह अनोखा अभियान चलाया गया।सुबह-सुबह पंडाल पर 2 क्विंटल केसरिया दूध तैयार कर निशुल्क वितरण किया गया। राहगीरों, वाहन चालकों, युवाओं और बुजुर्गों ने रुककर दूध पिया और अभियान का समर्थन किया। एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल ने खुद लोगों को दूध दिया और नशामुक्त नववर्ष का संदेश फैलाया। पंडाल के आसपास बड़े-बड़े बैनरों और साउंड सिस्टम के जरिए संदेश दिया गया-दारू से नहीं, दूध से करें नववर्ष की शुरुआत।

    आयोजकों का कहना है कि नए साल पर शराब पीने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाएं, घरेलू हिंसा और स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। युवाओं में नशे की लत चिंता का विषय है। इसी चुनौती के समाधान के लिए यह अभियान शुरू किया गया।दूध वितरण कार्यक्रम में लोगों की लंबी कतारें लग गईं। कई लोगों ने इसे नए साल की सबसे अच्छी और सार्थक शुरुआत बताया। युवाओं ने कहा कि ऐसे अभियान नशे के प्रति सोच बदलने में मददगार हैं। स्थानीय निवासियों ने आयोजन की सराहना की और इसे आगे जारी रखने की मांग की।

    यातायात पुलिस ने भी मौके पर लोगों से नशे में वाहन न चलाने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने और सुरक्षित जीवनशैली अपनाने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि जश्न वही बेहतर है, जो खुद के साथ दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।ग्वालियर की यह पहल केवल एक आयोजन नहीं बल्कि सार्वजनिक जागरूकता का संदेश है। नए साल की सुबह दूध के माध्यम से लोगों को यह बताया गया कि जश्न और जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकते हैं। शहर की इस अनोखी शुरुआत ने साबित कर दिया कि बदलाव छोटे कदमों से ही शुरू होता है।

  • नए साल 2026: भोपाल में 26 ट्रेनों की टाइमिंग बदली, बिजली कटौती नहीं, कृषि उद्योगों पर सरकार का फोकस

    नए साल 2026: भोपाल में 26 ट्रेनों की टाइमिंग बदली, बिजली कटौती नहीं, कृषि उद्योगों पर सरकार का फोकस


    भोपाल। नए साल 2026 की शुरुआत मध्यप्रदेश और राजधानी भोपाल के लिए कई महत्वपूर्ण अपडेट के साथ हुई। रेलवे शेड्यूल से लेकर बिजली, सरकारी योजनाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक-ज का दिन आम लोगों के लिए कई मायनों में खास रहा।

    रेलवे अपडेट:

    1 जनवरी से भोपाल, रानी कमलापति और संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन से चलने वाली 26 ट्रेनों की टाइमिंग में बदलाव किया गया है। रेलवे ने नया शेड्यूल जारी किया है और अब ट्रेन रिजर्वेशन चार्ट 10 घंटे पहले तैयार होगा।

    कुछ प्रमुख ट्रेनों का नया समय:

    22145 भोपाल-रीवा एक्सप्रेस: रात 11:05 → 11:00

    19324 भोपाल-डॉ. अंबेडकर नगर एक्सप्रेस: शाम 5:00 → 5:10

    14814 भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस: शाम 4:55 → 4:40

    12185 रानी कमलापति-रीवा एक्सप्रेस: रात 10:00 → 9:55

    22172 रानी कमलापति-पुणे एक्सप्रेस: दोपहर 3:50 → 3:40

    रेलवे ने यात्रियों से यात्रा से पहले अपडेटेड टाइमिंग देखने की अपील की है।

    बिजली की राहत:

    भोपालवासियों को नए साल की शुरुआत में बड़ी राहत मिली। आज शहर में कहीं भी बिजली मेंटेनेंस नहीं किया जाएगा, जिससे पूरे दिन निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित रहेगी।

    कृषि आधारित उद्योग वर्ष:

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में सरकार ने 2026 कोकृषि आधारित उद्योग वर्ष घोषित किया है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं:सिंचाई रकबा 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्यकेन-बेतवा परियोजना शुरू पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना पर काम जारी

    मेगा तापी रिचार्ज परियोजना को मंजूरी

    राजनीतिक गतिविधि:

    नए साल से कांग्रेस ने प्रदेशभर में गांव चलो अभियान’ की शुरुआत की। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भोपाल के गांवों से अभियान का आगाज किया। इसका मुख्य फोकस पंचायत स्तर पर संगठन को मजबूत करना है।

    सरकारी भर्ती: 

    मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडलMPESB ने 474 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
    अंतिम तिथि: 7 जनवरी 2026संशोधन की अंतिम तिथि: 12 जनवरी 2026

    सांस्कृतिक कार्यक्रम:

    भोपाल में नए साल के अवसर पर शलाका चित्र प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। स्थान: जनजातीय संग्रहालय समय: दोपहर 12 बजे से नए साल 2026 के पहले दिन मध्यप्रदेश और भोपालवासियों के लिए यह दिन परिवहन, ऊर्जा, कृषि और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिहाज से खास रहा।
  • सुपरस्टार बनने से पहले संघर्ष के दिन, Gippy Grewal की संघर्ष और मेहनत की कहानी

    सुपरस्टार बनने से पहले संघर्ष के दिन, Gippy Grewal की संघर्ष और मेहनत की कहानी


    नई दिल्ली। पंजाबी फिल्मों और संगीत की दुनिया के सुपरस्टार गिप्पी ग्रेवाल ने सफलता का लंबा सफर मेहनत और संघर्ष से तय किया है। आज जहां उनका नाम करोड़ों फैंस के दिलों में गूंजता है, वहीं शुरूआत में उन्होंने गाड़ियों धोने, सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी और कनाडा में रेस्तरां में वेटर जैसी नौकरियां की। गिप्पी का जन्म 2 जनवरी 1983 को हुआ था और आज वह अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं।

    बचपन से संगीत की ओर झुकाव
    गिप्पी बचपन से ही संगीत और नाटकों में रुचि रखते थे। पढ़ाई में उनकी दिलचस्पी कम थी, और उन्होंने केवल इतनी पढ़ाई की कि पास हो सकें। 12वीं के बाद उन्होंने म्यूजिक सीखना शुरू किया।

    उनके गुरु ने उनकी रफ आवाज पर काम करने की सलाह दी, जिसे उन्होंने सुधारकर अपनी अलग पहचान बनाई। यह रफ और अनोखी आवाज ही उन्हें पंजाबी संगीत और फिल्मों में अलग मुकाम दिलाने में मददगार साबित हुई।

    छोटी नौकरियों से बड़ी मंजिल तक
    गिप्पी ग्रेवाल पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता, गायक, निर्माता, निर्देशक और लेखक के रूप में सक्रिय हैं। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने कनाडा में वेटर, दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड और गाड़ियों की धोने जैसी नौकरियों में काम किया।

    उनका मानना है कि किसी भी काम में शर्म नहीं होनी चाहिए और ईमानदारी से कमाए पैसे से ही सुकून मिलता है। यही मेहनत और समर्पण उन्हें संगीत में करियर बनाने के लिए प्रेरित करता रहा।

    संगीत और फिल्म की दुनिया में धमाका
    गिप्पी ने अपने संगीत करियर की शुरुआत हिट अलबम ‘चक्ख लाई’ से की। इसके बाद साल 2010 में उन्हें पंजाबी फिल्म ‘मेल करादे रब्बा’ में काम करने का मौका मिला और फिर ‘जिहने मेरा दिल लुटेया’ में उनकी लोकप्रियता बढ़ी। साल 2012 में उन्होंने खुद ‘कैरी ऑन जट्टा’ का निर्माण किया, जो इंडस्ट्री की बड़ी हिट साबित हुई। इसके बाद ‘कैरी ऑन जट्टा 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर 60 करोड़ रुपये कमाए। अब उनके फैंस इस साल तीसरे भाग का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

    मेहनत और ईमानदारी की मिसाल
    गिप्पी ग्रेवाल की कहानी यह साबित करती है कि संघर्ष, मेहनत और ईमानदारी से कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है। आज वह पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार हैं और संगीत की दुनिया में भी करोड़ों फैंस के दिलों पर राज कर रहे हैं। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी नए कलाकारों और फैंस के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनी हुई है।

  • इंदौर दूषित पानी कांड: 5 महीने के मासूम अव्यान की मौत, 1,100 से अधिक लोग बीमार

    इंदौर दूषित पानी कांड: 5 महीने के मासूम अव्यान की मौत, 1,100 से अधिक लोग बीमार


    इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पीने के पानी से फैल रही गंभीर बीमारी ने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं। पांच महीने के मासूम अव्यान साहू की मौत दस्त और उल्टी से हुई। बच्चे के परिवार ने बताया कि घर में गाढ़े दूध में नगर निगम के नल का पानी मिलाकर पिलाया गया था, लेकिन वही पानी जहरीला साबित हुआ। स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के अनुसार, दूषित पानी ने पूरे इलाके में व्यापक स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया।

    अव्यान का परिवार पिछले 10 सालों से उसकी उपस्थिति का इंतजार कर रहा था, लेकिन यह खुशी मातम में बदल गई। पिता सुनील साहू ने मीडिया से बताया कि बच्चे को उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हुई थी। चिकित्सक से परामर्श के बाद घर पर दवाइयां दी जा रही थीं, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई। उन्होंने कहा कि दूध गाढ़ा था, इसलिए वे इसे नगर निगम के नल के पानी में मिलाकर पिला रहे थे, लेकिन वही पानी उनके बच्चे के लिए जानलेवा साबित हुआ।

    सरकारी आंकड़ों और स्थानीय बयानों के अनुसार, अब तक भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण कम-से-कम सात लोगों की मौत हो चुकी है और 1,100 से अधिक लोग पेट और दस्त जैसी बीमारियों से प्रभावित हैं। कई गंभीर मरीज शहर के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं।प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मुख्य जलापूर्ति लाइन में लीकेज के कारण नालों का गंदा पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में मिला। नगर निगम के कर्मचारियों ने मंगलवार देर शाम इस लीकेज का पता लगाया। फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं ताकि स्थिति और अधिक गंभीर न हो।

    इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने अब तक सात मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोग यह दावा कर रहे हैं कि नौ लोगों की मौत दूषित पानी की वजह से हुई। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जांच जारी है।स्थानीय निवासियों ने बताया कि इलाके में गंदा पानी नल से बहते देखा गया है और पहले भी अस्वस्थ जल आपूर्ति पर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। लेकिन यह समस्या पिछले एक सप्ताह में जानलेवा रूप ले चुकी है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे और जांच अभियान शुरू किया है, और प्राथमिक उपचार तथा अस्पतालों में भर्ती की सुविधा प्रदान की जा रही है।

    यह मामला इंदौर जैसे “सबसे स्वच्छ शहर” के दावे पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जल स्रोत की सुरक्षा और जलापूर्ति अवसंरचना की निगरानी में खामियों ने स्थानीय निवासियों को भारी कीमत चुकाई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि दूषित पानी के फैलाव को रोकने, नियमित जांच करने और सार्वजनिक जल आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक हैअदालत और उच्च प्रशासन ने भी इस स्थिति पर संज्ञान लिया है। व्यापक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए रिपोर्ट मांगी गई है। पीड़ित परिवारों को मुआवजा और चिकित्सा सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

  • कुली फिल्म सेट पर अमिताभ बच्चन का एक्सीडेंट: ICU में जिंदगी और परिवार की चिंता

    कुली फिल्म सेट पर अमिताभ बच्चन का एक्सीडेंट: ICU में जिंदगी और परिवार की चिंता


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के जीवन का जुलाई 1982 का महीना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। इस दौरान वे बेंगलुरु में फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग कर रहे थे, जब उन्हें एक गंभीर एक्सीडेंट में चोट लगी। चोट इतनी गंभीर थी कि उनके लिए जानलेवा स्थिति बन गई। तत्काल एयर एम्बुलेंस के जरिए उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया।अस्पताल में अमिताभ की गंभीर हालत के कारण इंडस्ट्री और परिवार के लोग लगातार मिलने आए। इस दौरान अभिनेता के ससुर, जया बच्चन के पिता तरुण कुमार, भी अपनी बेटी के साथ ICU में पहुंचे। तरुण कुमार ने बाद में अपने लेख में इस पूरे घटनाक्रम का विवरण साझा किया।

    तरुण कुमार ने लिखा कि जब उन्हें एक्सीडेंट की खबर मिली, तो वे और उनकी बेटी जया कुछ समय पहले लंदन गए हुए थे। लखनऊ लौटने के बाद उन्होंने तुरंत मुंबई के लिए रवाना होना तय किया। पूरे देश में लोग अमिताभ की सुरक्षित वापसी और ठीक होने के लिए प्रार्थना कर रहे थे। तरुण कुमार ने अपने लेख में इसे चिकित्सीय चमत्कार बताया और कहा कि अगर अमिताभ नहीं बचते, तो सभी डॉक्टरों को दोषी ठहराया जाता।उन्होंने लिखा, “हम लखनऊ से मुंबई के लिए रवाना हुए। पूरा देश एक आदमी के ठीक होने के लिए दुआ कर रहा था। जब अमिताभ बच गए, तो मेरी पत्नी और लाखों लोगों ने इसे ईश्वर की कृपा बताया। मैं इससे सहमत नहीं हूं। मेरे लिए यह ब्रीच कैंडी अस्पताल की चिकित्सा टीम का चमत्कार था।”

    इस कठिन समय में जया बच्चन ने भी पूरी मजबूती दिखाई। तरुण कुमार ने अपने लेख में विस्तार से बताया कि अस्पताल में भर्ती अमिताभ के दौरान जया ने संयम और धैर्य बनाए रखा। उन्होंने मनके और ताबीज पहनकर और दिल से प्रार्थना करते हुए अमिताभ के जल्दी ठीक होने की कामना की। बाहरी तौर पर जया शांत और संयमित दिखीं, लेकिन अंदर से उन्होंने स्थिति को स्वीकार किया और सबसे बुरे हालात के लिए भी तैयार रहीं।तरुण कुमार ने लिखा कि जया बच्चन ने इस समय में अपनी हिम्मत और धैर्य से परिवार के लिए मिसाल पेश की। उन्होंने अस्पताल में रहने वाले अमिताभ की देखभाल और मानसिक समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाई।

    इस घटना ने न केवल अमिताभ के परिवार को बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया। मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री लगातार उनके स्वास्थ्य की जानकारी साझा कर रही थी। अमिताभ के जल्द स्वस्थ होने और अस्पताल से बाहर निकलने के बाद देश में राहत की लहर दौड़ गई।कुली फिल्म सेट पर हुए इस एक्सीडेंट ने यह भी साबित किया कि संकट के समय परिवार और चिकित्सकीय टीम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह घटना बॉलीवुड इतिहास में यादगार और महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज हुई है, जिसने परिवार और इंडस्ट्री दोनों के लिए धैर्य, साहस और सहनशीलता की मिसाल पेश की।

  • नववर्ष 2026: मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नए साल का भव्य आगाज

    नववर्ष 2026: मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नए साल का भव्य आगाज


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की पहली सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्साह के बीच शुरू हुई। 1 जनवरी की सुबह होते ही प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में तड़के चार बजे से दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह नौ बजे तक लगभग 80 हजार श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके थे। प्रशासन के अनुसार दिनभर यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।महाकाल मंदिर में नए साल के अवसर पर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई और श्रद्धालुओं के लिए कतारबद्ध दर्शन की सुविधा सुनिश्चित की गई। इस दौरान महिला क्रिकेट विश्वकप विजेता भारतीय टीम की सदस्य भी मंदिर पहुंचीं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंधन समिति ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।

    उज्जैन के अलावा नर्मदा तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी सुबह से भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया गया और मंगला आरती के बाद दर्शन खोले गए। इसके साथ ही ओरछा के रामराजा मंदिर, मैहर के शारदा देवी मंदिर, नलखेड़ा के मां बगलामुखी धाम और देवास के प्रमुख मंदिरों में भी हजारों भक्त नए साल की पहली सुबह दर्शन के लिए पहुंचे।सीहोर जिले के प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर में ठंड और कोहरे के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। दमोह जिले के बांदकपुर स्थित जागेश्वरनाथ धाम में भी विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। गुना के हनुमान टेकरी मंदिर में सुबह की आरती के साथ ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा, जहां प्रशासन ने अनुमान लगाया कि एक लाख से अधिक भक्त पहुंचे।

    धार्मिक गतिविधियों के साथ ही प्रदेश के शहरों और पर्यटन स्थलों पर नए साल का जश्न भी देर रात तक चलता रहा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में लोग सड़कों, होटलों और सार्वजनिक स्थलों पर एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दे रहे थे। मांडू और पचमढ़ी जैसे पर्यटन केंद्रों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत और अलाव के माध्यम से नए साल का स्वागत किया गया।जबलपुर के भेड़ाघाट धुआंधार में साल के पहले सूर्योदय को देखने बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचे। उगते सूर्य के साथ लोगों ने नए साल की शुरुआत को यादगार बनाया। इस प्रकार, मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्सव दोनों के लिए विशेष रही।

  • साल 2025 की सबसे बड़ी फ्लॉप बॉलीवुड फिल्में: बजट और कमाई में साबित हुई 'निकाल पाईं'

    साल 2025 की सबसे बड़ी फ्लॉप बॉलीवुड फिल्में: बजट और कमाई में साबित हुई 'निकाल पाईं'


    नई दिल्ली। साल 2025 बॉलीवुड के लिए बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। जहां इस साल कई फिल्में ब्लॉकबस्टर हिट रही, वहीं कुछ ऐसी फिल्में भी रिलीज हुईं जिन्हें न केवल बॉक्स ऑफिस पर करारी हार मिली, बल्कि दर्शकों और क्रिटिक्स ने सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना की।इस साल हिट फिल्मों की बात करें तो धुरंधर, छावा, सैयारा और महावतार नरसिम्हा जैसी फिल्मों ने प्रोड्यूसर्स को शानदार मुनाफा दिया। लेकिन वहीं, कुछ बड़ी बजट वाली फिल्में दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाईं और इन्हें साल की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्मों में गिना गया।

    बागी 4
    टाइगर श्रॉफ की यह एक्शन फ्रेंचाइजी फिल्म 120 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी, लेकिन वर्ल्डवाइड कमाई केवल 66 करोड़ तक ही पहुंच पाई। क्रिटिक्स ने फिल्म को 1-2 स्टार दिए और दर्शकों ने कहानी और VFX दोनों की आलोचना की। इस फ्रेंचाइजी की यह अब तक की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्म साबित हुई।

    इमरजेंसी
    कंगना रनौत की पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म इमरजेंसी भी इस साल की बड़ी फ्लॉप रही। लगभग 50 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने केवल 22 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया। कई लोगों ने इसे कमजोर स्क्रीनप्ले वाली फिल्म बताया, तो कई ने इसे प्रोपेगेंडा फिल्म करार दिया।

    सिकंदर
    सलमान खान की फिल्म सिकंदर ईद पर रिलीज़ हुई, जो आमतौर पर हिट मानी जाती है। लेकिन इस बार यह फिल्म 200 करोड़ के बजट के बावजूद केवल 182 करोड़ की कमाई कर पाई। निर्देशक ए.आर. मुरुगदास ने फिल्म की जिम्मेदारी सलमान पर डाली, जबकि सलमान ने भी शो में इसपर तंज कसा।

    वॉर 2
    ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर की इस एक्शन फिल्म का बजट 400 करोड़ था, लेकिन वर्ल्डवाइड कमाई केवल 360-370 करोड़ रही। बजट भी पूरी तरह से रिकवर नहीं हो पाया। इस फिल्म को एक्शन और स्टार कास्ट के बावजूद दर्शकों ने पसंद नहीं किया।

    इस साल की इन फ्लॉप फिल्मों ने यह साफ कर दिया कि बड़े बजट और स्टार कास्ट हमेशा बॉक्स ऑफिस हिट की गारंटी नहीं होती। क्रिटिक्स और दर्शकों की राय, कहानी और तकनीकी पहलू किसी फिल्म की सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं।इस साल की फ्लॉप फिल्मों की लिस्ट बताती है कि दर्शक अब कहानी, स्क्रीनप्ले और नए विषयों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। जबकि हिट फिल्में अपने कंटेंट और मार्केटिंग के दम पर सफल हुईं, फ्लॉप फिल्मों ने प्रोड्यूसर्स और निर्माताओं को सतर्क किया है।

  • रतलाम में फर्जी पहचान से महिला को झूठे प्रेम जाल में फंसाने का मामला, पुलिस जांच जारी

    रतलाम में फर्जी पहचान से महिला को झूठे प्रेम जाल में फंसाने का मामला, पुलिस जांच जारी


    रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम में एक सनसनीखेज मामला सामने आया हैजिसमें एक व्यक्ति ने अपनी असली पहचान छुपाकर एक शादीशुदा महिला को प्रेम जाल में फंसाया और उसकी जिंदगी को प्रभावित किया। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी जैसी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

    पीड़िता के अनुसारआरोपी ने खुद को अलग नाम से पेश किया और शादी का झांसा देकर करीब पांच साल तक महिला के साथ लगातार शारीरिक उत्पीड़न किया। घटना की शुरुआत 2020 में हुईजब महिला की मुलाकात रतलाम के राम मंदिर क्षेत्र में आरोपी से हुई। उस समय आरोपी ने खुद को सोनू बताकर महिला को भरोसा दिलाया कि वह भी उसी धर्म का है। महिला की मौजूदा शादी थीलेकिन आरोपी ने धीरे-धीरे उसके विश्वास को तोड़ा और उसे अपने प्रेम जाल में फंसाया।2023 में आरोपी ने महिला को अपने संपर्क में लिया और उसे अपने पति से तलाक लेने के लिए उकसाया। महिला ने उसकी बातों में आकर जुलाई 2023 में अपना घर छोड़ दिया और अपने पिता के पास रहने लगी। कुछ ही समय बाददोनों नयागांव में किराए के कमरे में रहने लगे और पति-पत्नी की तरह व्यवहार करने लगे। इस दौरान आरोपी ने लगातार महिला का शारीरिक उत्पीड़न किया।

    कुछ समय बाद महिला को पता चला कि जिसे वह सोनू समझ रही थीअसल में उसका नाम इमरान था। इसके बावजूद महिला ने शादी की उम्मीद में उसका साथ रखा। नवंबर 2024 में महिला का पति से आधिकारिक तलाक हो गयालेकिन आरोपी ने शादी करने से इनकार कर दिया। दिसंबर 2025 में जब महिला ने शादी का दबाव डालातो आरोपी ने उस पर हिंसा की और जान से मारने की धमकी दी।पीड़िता ने आखिरकार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि आरोपी ने उसे कई जगहों पर पत्नी के रूप में पेश किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जांच में पता चला कि आरोपी पहले ड्रग तस्करी के मामले में जेल जा चुका है। पुलिस अब उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।

    इस मामले ने महिलाओं की सुरक्षा और समाज में जागरूकता पर भी सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले हमें चेतावनी देते हैं कि व्यक्तिगत पहचान की पुष्टि और भरोसेमंद रिश्तों में सावधानी बहुत जरूरी है। पुलिस और कानून व्यवस्था लगातार ऐसे अपराधों पर नज़र रखती हैंलेकिन पीड़ितों की सुरक्षा और कानूनी मदद सुनिश्चित करना सबसे अहम है।इस घटना ने रतलाम और मध्य प्रदेश में लोगों को व्यक्तिगत सुरक्षारिश्तों में सतर्कता और धोखाधड़ी से बचाव के महत्व के प्रति जागरूक किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी जल्द ही पकड़ा जाएगा और कानून के तहत सजा भुगतने के लिए तैयार होगा।

  • भारत में इस साल कूनो में 12 चीता शावक पैदा हुए, 3 की मौत

    भारत में इस साल कूनो में 12 चीता शावक पैदा हुए, 3 की मौत

    भोपाल। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (KNP) में चीतों के पुनर्वास से जुड़ा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट साल 2025 में तेजी से आगे बढ़ा। इस साल पार्क में 12 शावकों का जन्म हुआ। हालांकि दुख की बात ये है कि इनमें से तीन शावक अलग-अलग कारणों से जीवित नहीं रह सके। इसके बावजूद भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 30 हो गई है।

    इस साल कुल 6 चीतों की हुई मौत

    देश में चीतों के बारे में यह जानकारी प्रोजेक्ट चीता के फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने दी।उन्होंने बताया कि साल 2025 में कुल छह चीतों की मौत हुई, जिनमें तीन शावक शामिल हैं। इसके अलावा नामीबिया से लाए गए एक वयस्क चीते और दो उप-वयस्क चीतों की भी मौत दर्ज की गई। इस साल तीन मादा चीतों ने इन 12 शावकों को जन्म दिया था। अधिकारियों के अनुसार, शावकों की मौत के पीछे अलग-अलग प्राकृतिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण रहे।
    7 दशक पहले भारत से विलुप्त हो चुका है चीता

    आपको जानकर हैरानी होगी कि चीता करीब सात दशक पहले भारत से विलुप्त हो चुका था। इसे दोबारा देश में बसाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत की। इसके तहत सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीतों को भारत लाया गया, जबकि फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया था।
    चीतों को जल्द मिलेगा तीसरा ठिकाना

    फिलहाल भारत में कुल 30 चीतों में से 27 कूनो नेशनल पार्क में मौजूद हैं, जबकि तीन चीतों को मंदसौर जिले के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में ट्रांसफर किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, अब चीतों को भारत में तीसरा ठिकाना भी मिलने वाला है। मध्य प्रदेश के सागर जिले स्थित नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य को चीतों के नए घर के तौर पर तैयार किया जा रहा है।

    अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल भारत में मौजूद 30 चीतों में से 19 का जन्म भारत में ही हुआ है, जो इस परियोजना की बड़ी सफलता मानी जा रही है। बीते तीन वर्षों में देश ने 20 चीतों के आयात के बाद अपनी कुल चीता आबादी में 10 की शुद्ध बढ़ोतरी दर्ज की है।
    8 और चीतों को भारत लाने की तैयारी

    अधिकारियों के अनुसार, बोत्सवाना से आठ और चीतों को भारत लाने की तैयारी चल रही है। ये चीते वहां पहले ही पकड़े जा चुके हैं और फरवरी तक कूनो नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं। प्रोजेक्ट चीता को भारत में वन्यजीव संरक्षण के इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

  • 'सूअर के मल से उगा मक्का खा रहे बांग्लादेशी'

    'सूअर के मल से उगा मक्का खा रहे बांग्लादेशी'


    ढाका । अमेरिका से बांग्लादेश में मक्का (कॉर्न) के आयात ने सोशल मीडिया पर एक अनोखा विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी दूतावास की एक पोस्ट के बाद लोग व्यंग्य कर रहे हैं कि यह मक्का ‘सूअर के मल की अच्छाई’ से भरपूर है, क्योंकि अमेरिका में मक्का की खेती में सूअर के मल (पिग मैन्योर) को आमतौर पर खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। बांग्लादेश एक मुस्लिम-बहुल देश है, जहां इस्लामी शरीअत के तहत सूअर और उससे जुड़े उत्पाद हराम (निषिद्ध) माने जाते हैं। ऐसे में पिग मैन्योर के उपयोग का मुद्दा धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ गया।

    क्या था अमेरिकी दूतावास का पोस्ट?
    अमेरिकी दूतावास ने अपने पोस्ट में लिखा था कि इस महीने अमेरिकी मकई बांग्लादेश पहुंचने वाली है। पोस्ट में मकई को पौष्टिक बताते हुए कहा गया कि इसका उपयोग कॉर्नब्रेड, ब्रेकफास्ट सीरियल्स जैसे खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पशुओं के चारे में भी होता है, जिससे मांस, डेयरी और अंडों की आपूर्ति सुनिश्चित होती है। हालांकि, पोस्ट में सीधे तौर पर सूअर के मल का जिक्र नहीं था, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स ने अमेरिकी खेती पद्धतियों का हवाला देते हुए इस बिंदु को उछाल दिया।

    पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने व्यंग्यात्मक और आलोचनात्मक लहजे में प्रतिक्रियाएं दीं। एक पत्रकार ने कटाक्ष करते हुए लिखा- डॉन (ट्रंप) की चापलूसी के बदले बांग्लादेश को सूअर के मल से उगा अमेरिकी मकई मिला। अन्य यूजर ने इसे सांस्कृतिक असंवेदनशीलता बताते हुए कहा कि यह बांग्लादेश जैसे देश के लिए अपमानजनक है। अब तक अमेरिकी दूतावास की ओर से इस आलोचना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
    पहले भी उठ चुका है ‘पॉर्क’ का मुद्दा

    यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में पोर्क से जुड़ा विवाद सामने आया हो। कुछ साल पहले मछली और पशु आहार के लिए आयात किए जा रहे मीट एंड बोन मील (MBM) में पोर्क (सूअर के मांस) के अंश पाए गए थे। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने MBM के आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।
    अमेरिकी मकई और पिग मैन्योर

    मकई की अधिक पैदावार के लिए भारी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता होती है और अमेरिका में सुअर के मल का उपयोग आम है। इस साल अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर मकई उत्पादन हुआ है, जिसके चलते वह बांग्लादेश और भारत जैसे बाजारों में निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अधिक उत्पादन के कारण अमेरिकी किसान सड़कों के किनारे मकई फेंकने को मजबूर हुए।
    भारत की हिचक और व्यापार वार्ता

    भारत ने अमेरिकी दबाव के बावजूद बड़े पैमाने पर अमेरिकी मकई और सोयाबीन आयात से परहेज किया है। भारत का तर्क है कि इससे छोटे किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। हालांकि, रायटर्स के अनुसार, भारत एथेनॉल उत्पादन के लिए सीमित मात्रा में आयात की अनुमति दे सकता है। माना जा रहा है कि इसी मुद्दे पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत अटकी हुई है।
    अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार तनाव

    बांग्लादेश का अमेरिका के साथ लगभग 6 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव भी देखने को मिला।

    इस वर्ष अमेरिका ने बांग्लादेश पर 37% टैरिफ लगाया था, जिससे उसके कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट निर्यात को बड़ा झटका लगा। बांग्लादेश के कुल निर्यात में कपड़ा क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 80% है।

    बाद में बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर अमेरिका से आयात बढ़ाने का वादा किया, जिसके बाद टैरिफ घटाकर 20% कर दिया गया। इस वादे में अमेरिकी गेहूं, मकई और सोयाबीन शामिल थे। हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने सरकार-से-सरकार समझौते के तहत करीब 2.20 लाख मीट्रिक टन अमेरिकी गेहूं खरीदने की मंजूरी भी दी है।
    बांग्लादेश के लिए धार्मिक और स्वास्थ्य पहलू

    बांग्लादेश में 90% से अधिक आबादी मुस्लिम है, जहां सूअर का मांस खाना इस्लामी नियमों के खिलाफ है। हालांकि, मक्का में खाद के रूप में सूअर के गोबर का उपयोग वैज्ञानिक रूप से सामान्य है और इसमें कोई सूअर का मांस अवशेष नहीं रहता। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं से जुड़कर वायरल हो गया।