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  • उज्जैन में तमन्ना भाटिया की शिवभक्ति, महाकाल के दरबार में टेका माथा, भस्म आरती में हुईं शामिल

    उज्जैन में तमन्ना भाटिया की शिवभक्ति, महाकाल के दरबार में टेका माथा, भस्म आरती में हुईं शामिल


    उज्जैन। बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री तमन्ना भाटिया शनिवार सुबह उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। यहां उन्होंने भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्य भी साथ मौजूद रहे। सुबह करीब 4 बजे मंदिर पहुंचीं तमन्ना पारंपरिक साड़ी में नजर आईं। उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर करीब दो घंटे तक भस्म आरती के दर्शन किए। मंदिर परिसर में अभिनेत्री पूरे श्रद्धाभाव के साथ पूजा-अर्चना करती दिखाई दीं।

    महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भक्त तड़के मंदिर पहुंचते हैं। तमन्ना भाटिया ने भी सुबह की इस विशेष आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। उनके साथ उनकी मां भी मौजूद थीं। अभिनेत्री अपनी मां को भगवान महाकाल के दर्शन कराने के लिए उज्जैन लेकर आई थीं। परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर उन्होंने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा की और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    नंदी हॉल में बैठकर किए दर्शन

    भस्म आरती के दौरान तमन्ना नंदी हॉल में बैठीं और करीब दो घंटे तक आरती में शामिल रहीं। इस दौरान उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की। आरती संपन्न होने के बाद उन्होंने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना भी कही। धार्मिक मान्यता के अनुसार भक्त नंदी के कान में अपनी इच्छा या प्रार्थना कहते हैं। मान्यता है कि नंदी महाराज भक्तों की मनोकामना भगवान शिव तक पहुंचाते हैं। इसी परंपरा का पालन करते हुए तमन्ना ने भी नंदी महाराज के कान में अपनी प्रार्थना कही।

    मंदिर समिति ने किया सम्मान

    दर्शन के दौरान महाकाल मंदिर समिति की ओर से अभिनेत्री तमन्ना भाटिया और उनके परिवार का सम्मान किया गया। मंदिर में दर्शन के बाद तमन्ना ने अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि सुबह होने वाली भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मिलना उनके लिए बेहद आनंद का अनुभव है। उन्होंने बताया कि वह अपनी मां को भी भगवान महाकाल के दर्शन कराने के लिए लेकर आई थीं। मां के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करना उनके लिए बेहद खुशी का पल रहा।

    उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। यहां हर दिन देश और दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। फिल्म और मनोरंजन जगत की हस्तियां भी समय-समय पर बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाती रही हैं। तमन्ना भाटिया का अपनी मां और परिवार के साथ भस्म आरती में शामिल होना भी इसी आस्था से जुड़ा एक खास अवसर रहा। दर्शन के दौरान अभिनेत्री ने धार्मिक माहौल में समय बिताया और भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया।

  • दीपावली से पहले वेतन-बोनस के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की हुंकार, 55 जिलों में 2 नवंबर को सौंपेंगे ज्ञापन

    दीपावली से पहले वेतन-बोनस के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की हुंकार, 55 जिलों में 2 नवंबर को सौंपेंगे ज्ञापन


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के शासकीय विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों ने दीपावली से पहले वेतन और बोनस के भुगतान की मांग तेज कर दी है। त्योहार के मद्देनजर कर्मचारियों को आर्थिक राहत दिलाने के लिए मध्य प्रदेश राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संगठन ने प्रदेशव्यापी अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत 2 नवंबर को प्रदेश के सभी 55 जिलों में श्रम आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। संगठन की प्रमुख मांग है कि सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को 5 नवंबर तक वेतन और दीपावली बोनस का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

    संगठन के जिला अध्यक्ष एवं संभाग प्रभारी रविंद्र जायसवाल और जिला महामंत्री अनुपम वर्मा ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को लंबे समय से आर्थिक और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। त्योहार के समय भी कई विभागों में वेतन और बोनस के भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने घर का खर्च चलाने और दीपावली की तैयारियां करने में परेशानी आ रही है। संगठन का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों से लगातार संपर्क किया जा रहा है ताकि कर्मचारियों को समय पर भुगतान मिल सके।

    22 अक्टूबर को भी दिया गया था ज्ञापन

    संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक इससे पहले 22 अक्टूबर को भी सहायक श्रमायुक्त को ज्ञापन सौंपकर वेतन और बोनस का भुगतान कराने की मांग की गई थी। इसके बाद जबलपुर शहर के कई विभागों में कर्मचारियों को नियमित वेतन और बोनस मिला है। संगठन ने बताया कि प्रशासन के सहयोग से कुछ विभागों में भुगतान की स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि प्रदेश के कई अन्य जिलों और विभागों में अब भी कर्मचारियों का भुगतान बाकी है। इसी वजह से संगठन ने दोबारा प्रदेशव्यापी स्तर पर अपनी मांग उठाने का निर्णय लिया है।

    5100 रुपए बोनस का मुद्दा भी उठाया

    आउटसोर्स कर्मचारी संगठन ने 5100 रुपए बोनस राशि को लेकर भी प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और विभिन्न दिशा-निर्देशों के तहत कुछ विभागों में इस राशि का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद कई विभागों में बोनस को लेकर अब तक लिखित आदेश या स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए हैं। संगठन चाहता है कि संबंधित विभाग इस मामले में स्पष्ट निर्णय लें और पात्र कर्मचारियों को समय पर बोनस का भुगतान किया जाए।

    ट्रेड यूनियन के रूप में पंजीकृत हुआ संगठन

    संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संगठन अब ट्रेड यूनियन के रूप में पंजीकृत हो चुका है और उसे पंजीकरण क्रमांक भी मिल गया है। संगठन का कहना है कि पंजीकरण मिलने से आउटसोर्स कर्मचारियों को अपनी समस्याएं संगठित तरीके से शासन और प्रशासन के सामने रखने में मदद मिलेगी। कर्मचारी वेतन में देरी बोनस भुगतान और अन्य कार्य संबंधी समस्याओं को लेकर एक मंच से आवाज उठा सकेंगे।

    अब 2 नवंबर को प्रदेश के सभी 55 जिलों में ज्ञापन सौंपकर संगठन प्रशासन का ध्यान कर्मचारियों की मांगों की ओर आकर्षित करेगा। कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग दीपावली से पहले भुगतान को लेकर क्या कदम उठाते हैं और 5 नवंबर तक वेतन तथा बोनस देने की मांग पर कितना अमल हो पाता है।

  • मप्र हाईकोर्ट को मिलेंगे 12 नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 7 वकीलों और 5 न्यायिक अधिकारियों के नाम सुझाए

    मप्र हाईकोर्ट को मिलेंगे 12 नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 7 वकीलों और 5 न्यायिक अधिकारियों के नाम सुझाए


    जबलपुर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी दूर करने और लंबित मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में 12 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की है। प्रस्तावित नामों में सात वकील और पांच न्यायिक अधिकारी शामिल हैं। यदि सभी नियुक्तियों को मंजूरी मिल जाती है तो हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी। इससे जबलपुर स्थित मुख्य पीठ के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी न्यायिक कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है।

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से की गई इस सिफारिश को मध्यप्रदेश की न्याय व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है। लंबे समय से अदालतों में लंबित मामलों और न्यायाधीशों की कमी का मुद्दा सामने आता रहा है। ऐसे में 12 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से मुकदमों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ सकती है। इससे मामलों की सुनवाई और उनके निपटारे की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलने की संभावना है।

    पांच न्यायिक अधिकारियों के नाम शामिल

    कॉलेजियम ने न्यायिक सेवा कोटे से पांच वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों को हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाने की अनुशंसा की है। इनमें रेणुका कंचन कृष्णमूर्ति मिश्रा वीरेंद्र सिंह राजपूत ममता जैन और अशिता श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं। ये सभी न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी हैं और अब इनके नामों पर नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    बार कोटे से सात वकीलों की सिफारिश

    वकीलों के कोटे से जिन सात नामों की सिफारिश की गई है उनमें डॉ. विवेक शरण राजेश कुमार शुक्ला कनकलता सिंह भक्ति व्यास श्रेयस पंडित मृणाल केलकर और अविनाश जरगर शामिल हैं। इन नामों को कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया के अगले चरण में भेजा जाएगा। इस तरह न्यायिक सेवा और बार दोनों वर्गों से नए न्यायाधीशों के चयन का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

    राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद होगी नियुक्ति

    कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब नियुक्ति की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रस्ताव केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय को भेजा जाएगा। मंत्रालय में जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नियुक्ति से जुड़ी फाइल राष्ट्रपति के पास भेजी जाएगी। राष्ट्रपति की मंजूरी और नियुक्ति वारंट जारी होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी।

    इसके बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण और कार्यभार संभालने के बाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी।

    नई नियुक्तियों का असर केवल जबलपुर की मुख्य पीठ तक सीमित नहीं रहेगा। इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी न्यायिक कामकाज को इससे मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि लंबित मुकदमों की संख्या कम होने और सुनवाई की गति बढ़ने का वास्तविक असर नए न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब सभी की नजर नियुक्ति की अगली प्रक्रिया पर टिकी है।

  • धार्मिक भावनाओं का हवाला देकर उठी दुकानें बंद कराने की मांग, दूध के बढ़ते दामों पर भी जताई नाराजगी

    धार्मिक भावनाओं का हवाला देकर उठी दुकानें बंद कराने की मांग, दूध के बढ़ते दामों पर भी जताई नाराजगी


    जबलपुर । जबलपुर में देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों के नाम पर संचालित मांस और मछली की दुकानों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू धधार्मिकर्म सेना ने ऐसी दुकानों के नाम पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े नामों का इस्तेमाल मांस और मछली की दुकानों के लिए किया जाना उचित नहीं है। इस मुद्दे को लेकर संगठन के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दुकानों के नाम बदलवाने के साथ ही दूध की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाने की मांग भी उठाई गई।

    हिंदू धर्म सेना के अध्यक्ष नीरज राजपूत ने कहा कि शहर के घंटाघर सहित कई इलाकों में मांस और मछली बेचने वाली दुकानों के नाम देवी-देवताओं और पवित्र प्रतीकों से जुड़े हुए हैं। संगठन के मुताबिक ऐसे नामों से हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। ज्ञापन में घंटाघर क्षेत्र की शुभ नॉनवेज दुकान और एक अन्य स्थान पर संचालित लक्ष्मी चिकन दुकान का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। संगठन ने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाने की मांग की है।

    संगठन की मांग है कि शहर में ऐसी सभी दुकानों की सूची तैयार कराई जाए जिनके नाम धार्मिक मान्यताओं और देवी-देवताओं से जुड़े हैं। इसके बाद संबंधित दुकान संचालकों को नोटिस जारी कर नाम बदलने के लिए कहा जाए। हिंदू धर्म सेना का कहना है कि भविष्य में मांस और मटन की दुकानों के नाम रखने के दौरान भी धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। संगठन ने प्रशासन से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है जिससे आगे इस तरह के विवाद की स्थिति पैदा न हो।

    ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन ने चेतावनी भी दी कि यदि प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की तो हिंदू धर्म सेना खुद कदम उठाने के लिए मजबूर होगी। हालांकि संगठन की ओर से उठाई गई मांगों पर प्रशासन की ओर से किसी कार्रवाई या आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है। अब इस मामले में प्रशासन क्या रुख अपनाता है इस पर सभी की नजर रहेगी।

    ज्ञापन में केवल दुकानों के नाम का मुद्दा ही नहीं उठाया गया बल्कि आम लोगों से जुड़ी एक दूसरी समस्या पर भी ध्यान दिलाया गया। संगठन ने दूध की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से दाम नियंत्रित करने की मांग की। नीरज राजपूत ने कहा कि दूध के दाम अचानक बढ़ने से आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। दूध रोजमर्रा की जरूरत है और इसकी कीमत बढ़ने का असर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी पर पड़ता है।

    संगठन का कहना है कि दूध की कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोगों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो रही है। इसलिए प्रशासन को इस दिशा में भी जरूरी कदम उठाने चाहिए। हिंदू धर्म सेना ने मांग की है कि दूध के दामों की समीक्षा कर आम उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। अब जबलपुर प्रशासन के सामने एक ही ज्ञापन के जरिए धार्मिक भावनाओं और आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़े दो मुद्दे रखे गए हैं। इन मांगों पर प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार है।

  • बेटी को परेशान करने से रोका तो पिता पर चाकू से हमला, घायल पिता को लेकर आधी रात थाने पहुंची बेटी

    बेटी को परेशान करने से रोका तो पिता पर चाकू से हमला, घायल पिता को लेकर आधी रात थाने पहुंची बेटी


    जबलपुर । जबलपुर में बेटी को कथित रूप से परेशान करने का विरोध करना एक पिता को भारी पड़ गया। आरोप है कि दो युवकों ने रास्ते में रोककर उन पर चाकू से हमला कर दिया। घायल पिता को लेकर उनकी 22 वर्षीय छोटी बेटी शुक्रवार देर रात करीब एक बजे सिविल लाइन थाने पहुंची और पुलिस के सामने अपनी शिकायत रखी। युवती ने आरोप लगाया कि वह इससे पहले भी आरोपियों के खिलाफ चार बार एफआईआर दर्ज करवा चुकी है लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से आरोपियों के हौसले बढ़ते गए और अब उन्होंने उसके पिता पर हमला कर दिया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

    जानकारी के मुताबिक हाउसिंग बोर्ड निवासी हीरालाल साहनी शुक्रवार रात मुकादमगंज से अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। रात करीब 12 बजे रास्ते में हेमंत सिंह राजपूत और अभिनव यादव ने उन्हें रोक लिया। युवती का आरोप है कि दोनों ने उनके पिता पर चाकू से हमला किया और उन्हें घायल कर दिया। घटना के बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई। छोटी बेटी अपने घायल पिता को लेकर सीधे सिविल लाइन थाने पहुंची और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    युवती ने पुलिस को बताया कि करीब पांच साल पहले उसकी बड़ी बहन की हेमंत सिंह राजपूत से दोस्ती थी। बाद में जब उसकी बहन ने उससे बातचीत बंद कर दी तो हेमंत कथित तौर पर उसे परेशान करने और धमकाने लगा। युवती का आरोप है कि बहन के इनकार करने के बाद उसके साथ मारपीट भी की गई। इतना ही नहीं परिवार को डराने के लिए घर के सामने बम फेंकने की घटना भी हुई थी।

    पीड़ित परिवार का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों और परेशानियों के कारण घर के लोग भय के माहौल में रहने को मजबूर हैं। युवती ने यह भी आरोप लगाया कि हेमंत की प्रताड़ना से परेशान होकर उसकी बड़ी बहन ने आत्महत्या की कोशिश की थी और फांसी लगाने तक की नौबत आ गई थी। परिवार के मुताबिक करीब एक सप्ताह पहले उसके भाई मोहित साहनी पर भी हेमंत और उसके साथियों ने हमला कर उसे घायल कर दिया था।

    युवती ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि वह पहले चार बार शिकायत और एफआईआर दर्ज करवा चुकी है लेकिन आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। युवती ने दावा किया कि आरोपी हेमंत की बहन कंचन सिंह राजपूत पुलिस विभाग में टीआई हैं। इसी वजह से सिविल लाइन पुलिस पर दबाव होने और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि ये सभी आरोप युवती की शिकायत पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले में सीएसपी सोनू कुर्मी ने बताया कि युवती की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। हमला करने वाले आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीम भेजी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि युवती ने पहले भी शिकायतें की थीं और उन पर कार्रवाई नहीं हुई तो इस पहलू की भी जांच कराई जाएगी।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अब यह पता लगाया जाएगा कि पिता पर हमला किन परिस्थितियों में हुआ और पहले दी गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई थी। पीड़ित परिवार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • दिल्ली की वोट बचाओ रैली के लिए ग्वालियर कांग्रेस का बड़ा प्लान, 90 कारों और 10 बसों से रवाना होंगे कार्यकर्ता

    दिल्ली की वोट बचाओ रैली के लिए ग्वालियर कांग्रेस का बड़ा प्लान, 90 कारों और 10 बसों से रवाना होंगे कार्यकर्ता


    ग्वालियर। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की वोट बचाओ-देश बचाओ रैली को लेकर ग्वालियर कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस रैली में शामिल होने के लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शनिवार को दिल्ली रवाना होंगे। पार्टी नेताओं का दावा है कि ग्वालियर से हजारों कार्यकर्ता इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचेंगे। इसके लिए 90 कारों और 10 बसों के साथ रेल और हवाई मार्ग से भी दिल्ली पहुंचने की योजना बनाई गई है। कांग्रेस ने रास्ते में वाहनों को रोके जाने की आशंका को देखते हुए कार्यकर्ताओं को अलग-अलग माध्यमों से दिल्ली पहुंचाने की रणनीति तैयार की है।

    कांग्रेस नेताओं के मुताबिक दिल्ली में होने वाली रैली को सफल बनाने के लिए संगठन स्तर पर लगातार बैठकें की जा रही हैं। दोपहर से ही कार्यकर्ताओं के दिल्ली रवाना होने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी-4 की बैठक में यात्रा और व्यवस्थाओं को लेकर योजना बनाई गई है। इसमें कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि अधिक से अधिक लोग समय पर रामलीला मैदान पहुंच सकें।

    पार्टी आलाकमान की ओर से भी संगठन को बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के तहत ग्वालियर में शहर और ग्रामीण कांग्रेस के नेताओं ने संयुक्त रूप से तैयारियों की समीक्षा की। बीते सप्ताह एआईसीसी पर्यवेक्षक चंद्रकांत हांडोरे पूर्व सांसद प्रताप भानु शर्मा और प्रदेश प्रभारी पीसी शर्मा भी ग्वालियर पहुंचे थे। कांग्रेस कार्यालय में आयोजित बैठक में स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों को रैली से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।

    इस रैली के जरिए कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाने की तैयारी में है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि भाजपा की ओर से कथित वोट चोरी की जा रही है। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनाव व्यवस्था में निष्पक्षता जरूरी है।

    ग्वालियर कांग्रेस के नेताओं ने दिल्ली पहुंचने के लिए अलग-अलग रास्ते अपनाने का फैसला किया है। उनका दावा है कि इतनी बड़ी रैली में शामिल होने जा रहे कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोके जाने की आशंका है। कांग्रेस नेताओं को डर है कि सड़क मार्ग से आने वाले वाहनों को दिल्ली के बाहरी इलाकों में ही रोकने की कोशिश की जा सकती है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए केवल बसों और कारों पर निर्भर रहने के बजाय रेल मार्ग से भी कार्यकर्ताओं को भेजने की योजना बनाई गई है।

    इसके अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी हवाई मार्ग से भी दिल्ली पहुंचेंगे। कांग्रेस का मानना है कि अलग-अलग माध्यमों से रवाना होने पर कार्यकर्ताओं के रामलीला मैदान तक पहुंचने में आसानी होगी। हालांकि रास्ते में रोकने की आशंका पार्टी नेताओं का दावा है और इस संबंध में किसी आधिकारिक प्रतिबंध की जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल ग्वालियर कांग्रेस का पूरा जोर दिल्ली की रैली में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने पर है। 90 कारों 10 बसों और रेल तथा हवाई मार्ग से कार्यकर्ताओं के रवाना होने की तैयारी के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि ग्वालियर से कितने कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचते हैं और रामलीला मैदान में होने वाली रैली में पार्टी अपनी कितनी ताकत दिखा पाती है।

  • इंदौर आ रहे दो ब्रांच मैनेजरों की दर्दनाक मौत, साथियों का इंतजार करते समय तेज रफ्तार क्रेन ने मारी टक्कर

    इंदौर आ रहे दो ब्रांच मैनेजरों की दर्दनाक मौत, साथियों का इंतजार करते समय तेज रफ्तार क्रेन ने मारी टक्कर


    इंदौर । इंदौर में शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार दो युवकों की मौत हो गई। दोनों युवक एक फाइनेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर के पद पर कार्यरत थे और झाबुआ से इंदौर में आयोजित मीटिंग में शामिल होने के लिए निकले थे। एयरपोर्ट रोड पर नावदापंथ ब्रिज के पास रात करीब 9 बजे तेज रफ्तार क्रेन वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। घटना की खबर मिलते ही कंपनी के कर्मचारियों और साथियों में शोक छा गया।

    जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को फाइनेंस कंपनी के चार कर्मचारी दो बाइकों पर सवार होकर झाबुआ से इंदौर आ रहे थे। सभी को कंपनी की मीटिंग में शामिल होना था। रास्ते में दूसरी बाइक पर सवार उनके दो साथी कुछ पीछे रह गए। इसके बाद आगे चल रहे दोनों युवकों ने अपनी बाइक रोक दी और साथियों का इंतजार करने लगे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रहे क्रेन वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी गंभीर थी कि दोनों युवक सड़क पर गिरकर बुरी तरह घायल हो गए।

    हादसे के वक्त पीछे आ रहे दोनों साथियों ने घटना को अपनी आंखों से देखा। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों की मदद करने में जुट गए। उन्होंने पुलिस को सूचना दी और दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया। हालांकि गंभीर चोटों के चलते दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना ने साथ आए कर्मचारियों को गहरे सदमे में डाल दिया।

    मृतकों की पहचान रोहित मीणा निवासी सुगांव और नौशाद निवासी शाजापुर जिले के करई के पास स्थित एक गांव के रूप में हुई है। दोनों फाइनेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे। शनिवार दोपहर दोनों के शवों का अलग-अलग अस्पतालों में पोस्टमार्टम कराया गया। रोहित का शव एमवाय अस्पताल भेजा गया था जबकि नौशाद का शव जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखा गया।

    कंपनी में उनके साथ काम करने वाले राहुल ने बताया कि हादसे की जानकारी मिलने के बाद वे चंदन नगर थाने पहुंचे। इसके बाद अस्पताल जाकर साथियों के बारे में जानकारी ली। घटना की खबर फैलने पर कंपनी के अन्य कर्मचारी भी अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल में अपने साथियों को खोने का दुख कर्मचारियों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था।

    दोनों युवक काम के सिलसिले में इंदौर आ रहे थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि रास्ते में साथियों का इंतजार करने के दौरान यह हादसा हो जाएगा। एक ही कंपनी में काम करने वाले चार कर्मचारी साथ निकले थे लेकिन इस सफर का अंत दो परिवारों के लिए बेहद दुखद साबित हुआ।

    फिलहाल पुलिस हादसे से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्रेन वाहन किस गति से आ रहा था और टक्कर किन परिस्थितियों में हुई। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क पर तेज रफ्तार और लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं के गंभीर परिणामों को सामने ला दिया है।

  • CM के इंतजार में थमी भाजपा की पदयात्रा, नेता सीढ़ियों पर करते रहे प्रतीक्षा; बच्चों को थमाए गए पार्टी के झंडे

    CM के इंतजार में थमी भाजपा की पदयात्रा, नेता सीढ़ियों पर करते रहे प्रतीक्षा; बच्चों को थमाए गए पार्टी के झंडे


    इंदौर । इंदौर में भाजपा की ओर से निकाली गई लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ पदयात्रा के दौरान शुक्रवार को कई ऐसे नजारे देखने को मिले जिन्होंने कार्यक्रम को चर्चा में ला दिया। सुभाष नगर चौराहे से पाटनीपुरा चौराहे तक निकाली गई इस पदयात्रा के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इंतजार में यात्रा कुछ देर तक रुकी रही। मंच से लेकर सीढ़ियों तक केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री के पहुंचने की प्रतीक्षा करते नजर आए। वहीं कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के हाथों में भाजपा के झंडे और गले में पार्टी के गमछे दिखाई दिए। जब बच्चों से पूछा गया कि वे लोकतंत्र बचाने के लिए क्यों आए हैं तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। शिक्षकों ने उन्हें कार्यक्रम में लाया था।

    पदयात्रा की शुरुआत सुभाष नगर चौराहे से हुई थी। यात्रा परदेशीपुरा चौराहे पहुंची तो वहां मंच से नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माइक संभाला और नारेबाजी करवाकर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और सांसद शंकर लालवानी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। नेताओं के भाषण पूरे होने के बाद भी मुख्यमंत्री मोहन यादव कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचे थे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री के आने का इंतजार शुरू हो गया। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से ये देश है वीर जवानों का गीत सुनाया और लोगों से आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री से पदयात्रा शुरू करने की अनुमति ले ली गई है। विजयवर्गीय ने आगे बढ़ने की बात भी कही लेकिन मुख्यमंत्री के आने की सूचना मिलने पर कार्यक्रम में मौजूद नेता रुक गए।

    मंत्री विजयवर्गीय के आग्रह पर जनप्रतिनिधि मंच से उतरकर सीढ़ियों की ओर बढ़े। हालांकि मुख्यमंत्री के कुछ देर में पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री और अन्य नेता वहीं रुककर उनका इंतजार करने लगे। इस दौरान विजयवर्गीय दोबारा मंच से नारे लगवाते रहे। कुछ समय बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव का काफिला परदेशीपुरा चौराहे पहुंचा। उनके आगमन की घोषणा की गई और फिर मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उन्होंने हवा में गुब्बारे छोड़े और इसके बाद पदयात्रा में शामिल हो गए।

    कार्यक्रम के दौरान एक और घटनाक्रम चर्चा में रहा। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा पाटनीपुरा स्थित मंच की ओर जाने के लिए सड़क की दूसरी लेन में पहुंचे। वहां उन्हें दो युवकों के साथ एक दोपहिया वाहन दिखाई दिया। उन्होंने वाहन रुकवाया और पीछे बैठे युवक को उतारकर खुद बैठ गए। उन्होंने चालक से उन्हें तुरंत मंच तक पहुंचाने को कहा। जैसे ही चालक ने वाहन मोड़ा उसका अगला पहिया फिसल गया। इससे सुमित मिश्रा और चालक दोनों गिरते-गिरते बच गए।

    पदयात्रा में स्कूली बच्चों की मौजूदगी ने भी सवाल खड़े किए। कुछ बच्चे हाथों में भाजपा के झंडे और गले में पार्टी के गमछे डालकर पहुंचे थे। ये बच्चे मां कनकेश्वरी देवी स्कूल के बताए गए। जब उनसे पूछा गया कि लोकतंत्र खतरे में क्यों है तो बच्चों ने कहा कि उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि स्कूल के शिक्षक उन्हें कार्यक्रम में लेकर आए थे और पहले से यह नहीं बताया गया था कि उन्हें किस उद्देश्य से यहां लाया जा रहा है।

    इस पदयात्रा को लेकर शहर में यातायात व्यवस्था पर भी सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक करीब डेढ़ किलोमीटर की यात्रा के लिए लगभग 50 रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई थी। सुबह आठ बजे से शुरू हुई व्यवस्था के कारण कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा और लोगों को करीब छह घंटे तक जाम तथा रास्तों की परेशानी का सामना करना पड़ा। इस तरह भाजपा की पदयात्रा राजनीतिक संदेश के साथ-साथ मुख्यमंत्री के इंतजार स्कूली बच्चों की मौजूदगी और शहर में हुई यातायात व्यवस्था को लेकर भी चर्चा में आ गई।

  • हरदीप पुरी ने भरा राज्यसभा का पर्चा, नामांकन से पहले कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेने से गरमाई सियासत

    हरदीप पुरी ने भरा राज्यसभा का पर्चा, नामांकन से पहले कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेने से गरमाई सियासत


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार को राज्यसभा उपचुनाव को लेकर हलचल तेज रही। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भोपाल में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। वह सुबह करीब 11:30 बजे विधानसभा भवन पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नामांकन से पहले हरदीप सिंह पुरी ने गुरुद्वारे में मत्था टेका और करुणा धाम आश्रम पहुंचकर संत सुदेश शांडिल्य महाराज से आशीर्वाद लिया। वहीं दूसरी ओर नामांकन के दौरान विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस ने युवा कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।

    भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित किया था। यह सीट केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 13 अक्टूबर को अपना इस्तीफा दिया था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। अब इस रिक्त सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने इस चुनाव के लिए पुरी को अपना प्रत्याशी बनाया और उन्होंने शनिवार को औपचारिक रूप से नामांकन दाखिल कर दिया।

    नामांकन की तैयारियां पहले से शुरू हो गई थीं। शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री कृष्णा गौर ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन के लिए प्रस्तावक बनने पर सहमति दी थी। उन्होंने भाजपा प्रदेश कार्यालय में इससे संबंधित सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद शनिवार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुरी ने विधानसभा भवन पहुंचकर अपना नामांकन जमा किया।

    इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा तथा राजेंद्र शुक्ल मौजूद रहे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय प्रहलाद पटेल और नरेंद्र शिवाजी पटेल सहित कई विधायक और पार्टी पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। विधायक सुरेंद्र पटवा समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी में नामांकन की प्रक्रिया पूरी हुई।

    नामांकन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय चुनाव समिति के फैसले के बाद हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। उन्होंने इसे मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि दिवाली से पहले प्रदेश को पुरी के रूप में एक सांसद का उपहार मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पुरी के संसदीय अनुभव और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके योगदान का भी उल्लेख किया।

    सीएम ने कहा कि हरदीप सिंह पुरी ने मध्य प्रदेश को बीना रिफाइनरी नागरिक उड्डयन स्मार्ट सिटी मेट्रो रेल मेट्रोपॉलिटन सिटी और स्वच्छता अभियान जैसे क्षेत्रों में कई सौगातें दी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी पुरी प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    दूसरी ओर नामांकन के दौरान राजनीतिक विरोध की आशंका भी बनी रही। पुलिस ने युवा कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में लिया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में हिरासत में लिए गए नेताओं की संख्या और कार्रवाई के विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं। इस घटनाक्रम ने नामांकन के राजनीतिक माहौल को और चर्चा में ला दिया।

    खास बात यह रही कि नामांकन दाखिल करने से पहले और बाद में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया से बातचीत नहीं की। मीडिया के सामने मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी का पक्ष रखा। अब राज्यसभा उपचुनाव की आगे की प्रक्रिया और चुनावी नतीजे पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

  • रात में ट्रांसफार्मर से छेड़छाड़ और केबल काटने का आरोप, ग्रामीणों ने पुलिस से लगाई कार्रवाई की गुहार

    रात में ट्रांसफार्मर से छेड़छाड़ और केबल काटने का आरोप, ग्रामीणों ने पुलिस से लगाई कार्रवाई की गुहार


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र के श्रीपुर चक्क गांव में बिजली ट्रांसफार्मर में तोड़फोड़ और केबल काटने का मामला सामने आया है। गांव के दो भाइयों पर इस घटना को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि ट्रांसफार्मर और बिजली केबल को नुकसान पहुंचने के बाद पूरे गांव की बिजली सप्लाई बंद हो गई। इसके चलते ग्रामीणों को पूरी रात अंधेरे में गुजारनी पड़ी। मामले को लेकर गांव के सरपंच विनोद कुमार सहित कई ग्रामीण वीडियो लेकर इंदार थाने पहुंचे और पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने शिकायत और वीडियो के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

    ग्रामीणों की शिकायत के मुताबिक मोहर सिंह लोधी और सपेंद्र सिंह लोधी पर रात के समय गांव के बिजली ट्रांसफार्मर यानी डीपी में तोड़फोड़ करने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि दोनों भाइयों ने बिजली लाइन में तार डालकर फॉल्ट पैदा किया। इसके बाद बस्ती की ओर जाने वाली बिजली की केबल भी काट दी गई। इस घटना के कारण गांव की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और घरों में बिजली पहुंचना बंद हो गई।

    सरपंच विनोद कुमार का आरोप है कि दोनों भाई आए दिन गांव में विवाद करते हैं और उत्पात मचाते रहते हैं। इस बार उन्होंने बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जिससे पूरे गांव के लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली सप्लाई बंद होने से रातभर लोगों को अंधेरे में रहना पड़ा। अचानक बिजली गुल होने से गांव के परिवारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    घटना के बाद ग्रामीणों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस तक पहुंचने का फैसला किया। सरपंच विनोद कुमार अन्य ग्रामीणों के साथ इंदार थाने पहुंचे। उनके पास घटना से संबंधित वीडियो भी था जिसे शिकायत के साथ पुलिस को सौंपा गया है। ग्रामीणों ने आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि गांव की बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने से सभी लोगों को परेशानी होती है और इस तरह की घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए।

    इंदार थाना पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस वीडियो और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। फिलहाल दोनों भाइयों पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ट्रांसफार्मर और केबल को किस तरह नुकसान पहुंचाया गया और घटना में कौन-कौन शामिल था।

    इस घटना ने गांव की बिजली व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रांसफार्मर और बिजली केबल जैसी सुविधाएं पूरे गांव के लिए जरूरी होती हैं। इन्हें नुकसान पहुंचने का असर केवल किसी एक परिवार पर नहीं बल्कि पूरी बस्ती पर पड़ता है। अब ग्रामीणों को पुलिस जांच के नतीजे और बिजली व्यवस्था सामान्य होने का इंतजार है।