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  • आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें

    आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें


    भोपाल । मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह से जुड़े विवादित बयान के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान के बाद दर्ज FIR को चुनौती देने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच और अभियोजन मंजूरी की स्थिति पर जानकारी ली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने सरकार की ओर से बताया गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद है। अब चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अभियोजन की मंजूरी लेना जरूरी है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में कैबिनेट स्तर पर विचार हो चुका है और फाइल अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल के पास भेजी गई है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की स्थिति को लेकर स्पष्ट सवाल किया कि जब जांच रिपोर्ट पूरी तरह तैयार है तो क्या अब केवल सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। सरकार की ओर से इसकी पुष्टि की गई। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने बताया कि कैबिनेट इस विषय पर विचार कर चुकी है और फाइल राज्यपाल के पास भेजी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय हो जाएगा। सरकार की ओर से मंत्री के माफीनामे का भी हवाला दिया गया। अदालत से अनुरोध किया गया कि सक्षम प्राधिकारी जब मामले पर विचार करे तो विजय शाह की ओर से घटना के अगले दिन सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को भी ध्यान में रखा जाए।

    विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने भी अदालत के सामने यही बात रखी कि मंत्री ने बयान के बाद माफी मांग ली थी और इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सीलबंद है। अभियोजन मंजूरी का विषय फिलहाल सक्षम प्राधिकारी के सामने लंबित है। मंजूरी मिलने के बाद सीलबंद रिपोर्ट को संबंधित सक्षम अदालत के सामने पेश किया जाएगा।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच अधिकारी और DIG इंटेलिजेंस डी कल्याण चक्रवर्ती की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी अपना काम पूरा कर चुके हैं इसलिए उन्हें बार बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में आने की जरूरत नहीं है। अब सक्षम प्राधिकारी के फैसले के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने की बात भी अदालत के सामने रखी गई।

    मामला मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की उस टिप्पणी से जुड़ा है जो उन्होंने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की थी। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में दिए गए बयान में उन्होंने कर्नल सोफिया को आतंकवादियों की बहन कहकर टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वत संज्ञान लिया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी मध्य प्रदेश सरकार के रुख पर नाराजगी जता चुका है। अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर अदालत ने सरकार को सख्त चेतावनी दी थी और कहा था कि उसके निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। पिछली सुनवाई में मंत्री की ओर से कई बार माफी मांगे जाने की दलील भी दी गई थी लेकिन अदालत ने इसे पर्याप्त नहीं माना था।

    अब पूरा मामला अभियोजन की मंजूरी पर टिक गया है। मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है। राज्यपाल के निर्णय के बाद ही यह तय होगा कि सीलबंद जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे अभियोजन की कार्रवाई होगी या मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।

  • बैरसिया रोड पर तेज रफ्तार ट्रक ने ली मैकेनिक की जान, पीछे से टक्कर के बाद दो ट्रकों के बीच फंसे प्यारे मियां

    बैरसिया रोड पर तेज रफ्तार ट्रक ने ली मैकेनिक की जान, पीछे से टक्कर के बाद दो ट्रकों के बीच फंसे प्यारे मियां


    भोपाल । भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में रविवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में 54 वर्षीय फोर व्हील मैकेनिक की मौत हो गई। प्यारे मियां रोज की तरह अपने परिवार के साथ लांबाखेड़ा स्थित घर पर थे और रात करीब 8 बजे दूध लेने के लिए चौरसिया ढाबे की तरफ निकले थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि घर से कुछ दूरी पर हुआ एक सड़क हादसा उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। ढाबे के पास पहुंचते ही पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे एक ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वे संभल भी नहीं सके और ट्रक के आगे बढ़ने के साथ ही सामने खड़े दूसरे ट्रक की चपेट में आ गए।

    बताया जा रहा है कि सड़क पर पहले से एक ट्रक खड़ा हुआ था। पीछे से आ रहे ट्रक ने प्यारे मियां को टक्कर मारने के बाद आगे खड़े ट्रक को भी टक्कर मार दी। इस दौरान प्यारे मियां दोनों भारी वाहनों के बीच फंस गए। हादसा इतना भीषण था कि उन्हें बचने का मौका तक नहीं मिला और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। हादसे की जानकारी तत्काल पुलिस को दी गई।

    सूचना मिलते ही ईंटखेड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। प्यारे मियां के अचानक चले जाने से परिजन सदमे में हैं।

    पुलिस के मुताबिक हादसे के बाद ट्रक चालक मौके पर वाहन छोड़कर फरार हो गया। पुलिस अब ट्रक को कब्जे में लेकर चालक की तलाश कर रही है। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ के साथ हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्रक की रफ्तार कितनी थी और सड़क पर खड़े दूसरे ट्रक की स्थिति क्या थी।

    बैरसिया रोड और आसपास के इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में सड़क पर खड़े वाहनों और तेज रफ्तार ट्रकों के कारण हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात के समय सड़क पर पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने और वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी नहीं होने की स्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है इसका दर्दनाक उदाहरण यह हादसा बन गया है।

    फिलहाल ईंटखेड़ी थाना पुलिस फरार ट्रक चालक की तलाश में जुटी है। पुलिस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं पोस्टमार्टम के बाद प्यारे मियां का शव परिजनों को सौंप दिया गया है। परिवार के लिए यह हादसा अचानक आई ऐसी त्रासदी है जिसने कुछ ही देर में एक सामान्य रात को मातम में बदल दिया।

  • भोपाल में ईद मिलादुन्नबी के महिला अखाड़े पर विवाद तेज, शहर मुफ्ती के बयान पर विरोध; कमेटी बोली- आत्मरक्षा के हुनर को डांस न कहें

    भोपाल में ईद मिलादुन्नबी के महिला अखाड़े पर विवाद तेज, शहर मुफ्ती के बयान पर विरोध; कमेटी बोली- आत्मरक्षा के हुनर को डांस न कहें


    भोपाल । भोपाल में ईद मिलादुन्नबी के पारंपरिक जुलूस के दौरान महिला अखाड़े के प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। 26 अगस्त को मंगलवारा चौराहे से निकले जुलूस में महिला प्रतिभागियों के तलवारबाजी और अखाड़े के करतब दिखाने का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद शहर मुफ्ती अबुल कलाम की टिप्पणी पर मुस्लिम त्योहार कमेटी ने कड़ी आपत्ति जताई है। शहर मुफ्ती ने इस प्रदर्शन को डांस बताते हुए सवाल उठाया था कि यह अखाड़ा था या डांस। उनके इसी बयान को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के जिला अध्यक्ष ओसाफ अली ने नाराजगी जताई और शहर मुफ्ती के इस्तीफे की मांग कर दी। विवाद के बीच हाफिज अहमद शाहमीरी खुर्रम ने भी वीडियो जारी कर शहर मुफ्ती के बयान पर सवाल खड़े किए हैं।

    दरअसल ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निकले पारंपरिक जुलूस में महिला अखाड़े की प्रतिभागियों ने हाथों में तलवारें लेकर करतब दिखाए थे। सामने आई तस्वीरों में बुर्का पहने महिलाएं अखाड़े के प्रदर्शन में हिस्सा लेती दिखाई दे रही हैं। कुछ प्रतिभागियों के हाथों में घुमावदार तलवारें भी नजर आ रही हैं। आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और कई लोग मोबाइल फोन से इस प्रदर्शन का वीडियो बनाते नजर आए। इसी प्रदर्शन को लेकर शहर मुफ्ती अबुल कलाम ने सवाल उठाते हुए इसे डांस बताया और जुलूस की धार्मिक गरिमा को लेकर आपत्ति जताई।

    मुस्लिम त्योहार कमेटी ने शहर मुफ्ती की इस टिप्पणी को गलत करार दिया है। जिला अध्यक्ष ओसाफ अली का कहना है कि प्रदर्शन को पूरी जानकारी लिए बिना डांस कहना उचित नहीं है। उनके मुताबिक जुलूस में शामिल बच्चियां और महिलाएं किसी मनोरंजन के लिए डांस नहीं कर रही थीं बल्कि अखाड़े की पारंपरिक कला और आत्मरक्षा से जुड़े हुनर का प्रदर्शन कर रही थीं। उनका कहना है कि ऐसे प्रदर्शन से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

    हाफिज अहमद शाहमीरी खुर्रम ने भी वीडियो जारी कर कहा कि शहर मुफ्ती को प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से पहले पूरा संदर्भ समझना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि वीडियो को ध्यान से देखने पर साफ होता है कि बच्चियां डांस नहीं बल्कि अखाड़े के करतब और सेल्फ डिफेंस का प्रदर्शन कर रही थीं। उन्होंने धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए आत्मरक्षा के लिए हथियार चलाने की कला को केवल डांस के रूप में देखने पर सवाल उठाया।

    विवाद के दौरान उन्होंने शहर मुफ्ती से यह भी अपील की कि यदि किसी सामाजिक या धार्मिक गतिविधि पर प्रतिक्रिया देनी है तो सभी मामलों में समान मापदंड अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने यूसीसी और एनआरसी जैसे मुद्दों तथा मसाजिद कमेटी से जुड़े कुछ मामलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि कुछ गतिविधियों पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी गई जबकि महिला अखाड़े के प्रदर्शन पर टिप्पणी की गई।

    ओसाफ अली ने शहर मुफ्ती के पद की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह पद समाज का मार्गदर्शन करने और लोगों को जोड़ने का है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक पद पर रहते हुए राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने काज़ियात कैंपस में पूर्व में हुए कुछ कार्यक्रमों का भी जिक्र किया और दावा किया कि वहां ढोल नगाड़े बजने तथा राजनीतिक कार्यक्रमों के वीडियो सामने आए थे। उनका सवाल है कि यदि उन गतिविधियों पर आपत्ति नहीं जताई गई तो महिला अखाड़े के पारंपरिक प्रदर्शन पर सवाल क्यों उठाया गया।

    कमेटी ने साफ किया कि उसका उद्देश्य किसी धार्मिक व्यक्ति का अपमान करना नहीं है बल्कि धार्मिक पद की गरिमा और निष्पक्षता को लेकर जवाब मांगना है। ओसाफ अली ने शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए जो योग्य होने के साथ निष्पक्ष रूप से समाज का मार्गदर्शन कर सके। फिलहाल महिला अखाड़े के प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद धार्मिक परंपरा आत्मरक्षा की कला और धार्मिक नेतृत्व की भूमिका को लेकर बहस का विषय बन गया है।

  • MP में बारिश का रौद्र रूप जारी, रीवा-शहडोल समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; अगले 3 दिन अति भारी बारिश की आशंका

    MP में बारिश का रौद्र रूप जारी, रीवा-शहडोल समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; अगले 3 दिन अति भारी बारिश की आशंका


    भोपाल । मध्यप्रदेश में मानसून एक बार फिर जोर पकड़ता नजर आ रहा है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव होने के बाद कई जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है। शहडोल के बाणसागर डैम में तेजी से पानी की आवक बढ़ने के बाद इसके 6 गेट खोल दिए गए हैं। वहीं सतना और चित्रकूट में बाढ़ जैसे हालात ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। लगातार बारिश को देखते हुए सतना में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है जबकि मैहर में भी सोमवार को स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है। मौसम विभाग ने सोमवार को रीवा मऊगंज मैहर सीधी उमरिया शहडोल डिंडौरी अनूपपुर मंडला सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    भोपाल समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। राजधानी भोपाल में बड़ा तालाब लगभग भरने की स्थिति में पहुंच गया है। तालाब का जलस्तर 1666.50 फीट तक पहुंच चुका है और अब यह फुल टैंक लेवल से महज 0.30 फीट नीचे है। इसके पूरी तरह भरने के बाद भदभदा डैम के गेट खोले जाने की संभावना है। इससे कलियासोत डैम में भी पानी की आवक बढ़ सकती है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से सुधरा है और कई बांधों में 70 प्रतिशत से ज्यादा पानी पहुंच चुका है।

    पूर्वी मध्यप्रदेश में बारिश ने कई इलाकों में मुश्किलें भी खड़ी कर दी हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी करीब 30 फीट तक उफान पर पहुंच गई थी। गोरगी बांध फूटने के बाद कई इलाकों में पानी भर गया। तेज बहाव के कारण रामघाट का बड़ा पुल भी बह गया। बाढ़ का पानी उतरने के बाद सड़कों और घरों में मिट्टी कीचड़ और मलबा जमा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चित्रकूट पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और राहत शिविर में प्रभावित लोगों से मुलाकात की। उन्होंने अतिक्रमण को भी बाढ़ की संभावित वजहों में शामिल बताया।

    शहडोल के बाणसागर डैम में भी पानी की आवक अचानक बढ़ी। डैम में पानी की आवक 808.64 क्यूमेक्स से बढ़कर 12 घंटे में 2677.29 क्यूमेक्स हो गई। इसके बाद दोपहर में डैम के 6 गेट खोल दिए गए। निचले इलाकों में प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी किया गया है। सिंगरौली मंडला सतना और अन्य जिलों में भी भारी बारिश के कारण नदी नाले उफान पर रहे।

    मौसम विभाग ने सितंबर की शुरुआत के अगले तीन दिनों में भी कई जिलों में अति भारी बारिश की आशंका जताई है। सीधी उमरिया मंडला निवाड़ी छतरपुर पन्ना दमोह नरसिंहपुर और नर्मदापुरम समेत कई क्षेत्रों में 4 से 8 इंच तक बारिश हो सकती है। ऐसे में नदी नालों और निचले इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

    प्रदेश में अब तक करीब 700 मिलीमीटर यानी 27.2 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह सामान्य औसत 30.4 इंच से करीब 3.2 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में करीब 5 प्रतिशत जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि अनूपपुर निवाड़ी सतना शहडोल सीधी सिंगरौली उमरिया समेत कुछ जिलों में औसत से ज्यादा बारिश हुई है। लगातार सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण आने वाले दिनों में बारिश का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है।

  • राहुल गांधी पर FIR से एमपी कांग्रेस में उबाल, पटवारी बोले दलित विरोधी है BJP, कमलनाथ ने कहा चोरी और सीनाजोरी

    राहुल गांधी पर FIR से एमपी कांग्रेस में उबाल, पटवारी बोले दलित विरोधी है BJP, कमलनाथ ने कहा चोरी और सीनाजोरी

    भोपाल । उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मध्य प्रदेश की सियासत में भी जोर पकड़ चुका है। राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने बीजेपी और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे दलितों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान का आरोप लगाया जा रहा है उसमें दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

    जीतू पटवारी ने बीजेपी की विचारधारा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद सभा स्थल का शुद्धिकरण कराया गया। पटवारी के मुताबिक जब राहुल गांधी ने इस कथित घटना और छुआछूत के मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर उठाया तो उनके खिलाफ ही FIR दर्ज करा दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के सिस्टम में दलितों के लिए जगह नहीं है और आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है। पटवारी ने इस पूरे घटनाक्रम को बीजेपी और आरएसएस की दलित विरोधी सोच से जोड़ते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।

    पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस मामले में बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कार्रवाई को चोरी और सीनाजोरी करार देते हुए कहा कि पहले दलित नेता के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कदम उठाया गया और जब उसका विरोध किया गया तो विरोध करने वाले नेता के खिलाफ ही गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर दी गई। कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम को लेकर दलित समाज में नाराजगी पैदा हुई है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।

    दरअसल विवाद उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान से जुड़ा है। यहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा आयोजित हुई थी। आरोप है कि रैली समाप्त होने के कुछ दिन बाद श्री राम सेना नाम के संगठन से जुड़े लोगों ने मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ और हवन किया। कांग्रेस ने इस घटना को जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए विरोध जताया। कांग्रेस की ओर से यह सवाल उठाया गया कि क्या किसी दलित नेता के कार्यक्रम के बाद सार्वजनिक स्थान को शुद्ध करने की जरूरत पड़ती है।

    मामले ने तब और राजनीतिक रंग ले लिया जब राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश में छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ सख्त रुख जरूरी है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड सरकार से कथित शुद्धिकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने इस घटना को छुआछूत से जोड़ते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
    मामले ने तब और राजनीतिक रंग ले लिया जब राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश में छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ सख्त रुख जरूरी है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड सरकार से कथित शुद्धिकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने इस घटना को छुआछूत से जोड़ते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

    राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के अगले दिन हल्द्वानी में उनके खिलाफ FIR दर्ज होने से विवाद और गहरा गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह मामला वाल्मीकि समाज से जुड़े अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायत में दावा किया गया कि मैदान में केवल साफ सफाई अभियान और धार्मिक अनुष्ठान हुआ था तथा इसका किसी जाति या मल्लिकार्जुन खड़गे से संबंध नहीं था। शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी पर धार्मिक आयोजन को छुआछूत से जोड़कर जातिगत तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया।

    पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और धारा 299 के साथ SC-ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। FIR के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस का विरोध सामने आने से यह विवाद अब उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप प्रत्यारोप तेज होने के साथ मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

  • स्कूल ऑडिट की बैठक में घुसे युवाओं ने किया विरोध, CJP से तीखे सवाल और नारेबाजी, माइक छीनने की कोशिश के आरोप पर पहुंची पुलिस

    स्कूल ऑडिट की बैठक में घुसे युवाओं ने किया विरोध, CJP से तीखे सवाल और नारेबाजी, माइक छीनने की कोशिश के आरोप पर पहुंची पुलिस


    भोपाल । भोपाल में सरकारी स्कूलों के ऑडिट को लेकर रविवार शाम गांधी भवन में आयोजित CJP की बैठक उस समय हंगामे में बदल गई जब कुछ छात्र और युवा बैठक के दौरान पहुंच गए। अभियान से जुड़े लोगों की बात सुनने के बाद युवाओं ने स्कूल ऑडिट और CJP की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाने शुरू किए। बातचीत के दौरान मामला इतना बढ़ गया कि नारेबाजी होने लगी और बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। छात्रों ने यह दिल्ली नहीं भोपाल है कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद और तानाशाही नहीं चलेगी जैसे नारे लगाए। हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल गांधी भवन पहुंचा और युवाओं को समझाइश देकर वहां से रवाना किया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बैठक के दौरान छात्रों का एक समूह अंदर पहुंचा था। इनमें कुछ युवक काली टीशर्ट पहने हुए थे। उन्होंने CJP के प्रतिनिधियों से सरकारी स्कूलों के ऑडिट को लेकर सवाल किए। युवाओं ने दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शनों और संगठन की गतिविधियों को लेकर भी जवाब मांगा। छात्र अंश पुरोहित ने कहा कि उनका किसी समुदाय या राजनीतिक दल के खिलाफ विरोध नहीं है। उन्होंने पुलिस और सेना के सम्मान की बात कहते हुए किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करने की बात कही।

    छात्रों का कहना था कि वे बैठक में विरोध करने के इरादे से नहीं पहुंचे थे बल्कि चर्चा सुनना और अपने सवालों के जवाब लेना चाहते थे। उनका सवाल था कि दिल्ली में हुए विवादों के बाद भोपाल में अभियान चलाते समय ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। छात्रों ने कुछ गतिविधियों को एंटीनेशनल बताते हुए CJP से अभियान के उद्देश्य और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल किए।

    विवाद उस समय और बढ़ गया जब छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके हाथ से माइक लेने की कोशिश की गई। अंश पुरोहित के मुताबिक माइक लेने की कोशिश कई बार हुई। इसके बाद वहां मौजूद कुछ छात्र भावुक हो गए और नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामे के बीच CJP की एक महिला प्रतिनिधि ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया और पहले पूरी बात सुनने की बात कही। इस पर छात्रों ने सवाल किया कि अगर उनकी पूरी बात नहीं सुनी जाएगी तो वे अपने सवाल कैसे पूछ पाएंगे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रही। हालांकि माइक छीनने के आरोपों पर CJP की ओर से कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    CJP की अभियान कोऑर्डिनेटर माया विश्वकर्मा ने बैठक को लेकर बताया कि स्कूल ठीक करो अभियान के तहत मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति का नागरिक स्तर पर ऑडिट किया जाना है। उनके मुताबिक ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई बार अधिकारी नियमित रूप से नहीं पहुंच पाते। ऐसे में नागरिकों की भागीदारी के जरिए स्कूलों की वास्तविक स्थिति का डेटा तैयार करने की योजना है।

    इस ऑडिट में स्कूलों में पानी शौचालय बिजली कक्षाओं की स्थिति शिक्षक और विद्यार्थियों का अनुपात विद्यार्थियों की उपस्थिति पाठ्यपुस्तक यूनिफॉर्म छात्रवृत्ति और मिडडे मील जैसी सुविधाओं को देखा जाएगा। इसके अलावा स्कूल भवन की सुरक्षा फर्स्टएड अग्निशामक यंत्र दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं पुस्तकालय और कंप्यूटर की उपलब्धता की भी जानकारी जुटाई जाएगी।

    माया विश्वकर्मा के अनुसार अभियान की शुरुआत 15 अगस्त से की गई थी। भोपाल की बैठक के बाद नरसिंहपुर जिले के साईंखेड़ा ब्लॉक में एक स्कूल का ऑडिट किया जाना है। इसके बाद भोपाल सहित प्रदेश के अन्य इलाकों में भी सर्वे किया जाएगा। अभियान की शुरुआत फिलहाल स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं से की जा रही है और आगे बच्चों के पाठ्यक्रम शिक्षकों तथा अन्य शैक्षणिक समस्याओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा। बैठक में हुआ हंगामा भले ही खत्म हो गया हो लेकिन इस घटनाक्रम ने CJP के अभियान और उसके उद्देश्य को लेकर अलग अलग पक्षों के सवालों को जरूर सामने ला दिया है।

  • भोपाल में यतीमखाने की 2.7 एकड़ जमीन पर नया बवाल, FIR के बाद अस्पताल पर ताला और पानी रोकने का आरोप, 98 बच्चों पर संकट

    भोपाल में यतीमखाने की 2.7 एकड़ जमीन पर नया बवाल, FIR के बाद अस्पताल पर ताला और पानी रोकने का आरोप, 98 बच्चों पर संकट


    भोपाल । भोपाल के शाहजहांनाबाद स्थित दारुल शफकत यतीमखाने की करीब 2.7 एकड़ जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की ओर से संपत्ति को वक्फ की जमीन बताते हुए दारुल शफकत सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष शाहिद अलीम खान समेत अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कराए जाने के बाद अब जीवन रेखा अस्पताल पर यतीमखाने के एक हिस्से में ताला लगाने और पानी की व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप लगे हैं। सोसायटी का दावा है कि ताला लगाए जाने के बाद पानी की मोटर और स्टोरेज टैंक तक पहुंच बंद हो गई है। इससे यतीमखाने में रह रहे करीब 98 बच्चों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है और फिलहाल टैंकर के जरिए पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

    वक्फ बोर्ड के अनुसार विवादित संपत्ति वक्फ इदारा यतीम खाना शाहजहानी के नाम पर दर्ज है और करीब 2.7 एकड़ क्षेत्र में फैली है। बोर्ड का कहना है कि यह संपत्ति वर्ष 1961 में गजट नोटिफाइड वक्फ संपत्ति बनी थी और अब UMEED पोर्टल पर भी दर्ज है। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल का आरोप है कि दारुल शफकत सोसायटी ने संपत्ति के एक हिस्से पर निर्माण कराकर उसे जीवन रेखा अस्पताल को किराए पर दिया। बोर्ड के मुताबिक भवन निर्माण की अनुमति लेते समय सोसायटी के पदाधिकारियों ने खुद को जमीन का मालिक बताया जबकि बोर्ड के रिकॉर्ड में जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है।

    मामले में आर्थिक लेनदेन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वक्फ बोर्ड का कहना है कि जुलाई 2011 से मई 2025 के बीच अस्पताल से करीब 1 करोड़ 96 लाख रुपए किराए और 30 लाख रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर प्राप्त हुए। यानी कुल करीब 2.26 करोड़ रुपए की राशि सामने आती है। बोर्ड का आरोप है कि इस आय का पूरा हिसाब उसे नहीं दिया गया। बोर्ड ने मामले में करीब 28 करोड़ 91 लाख रुपए की आरआरसी जारी किए जाने की बात भी कही है। हालांकि दारुल शफकत सोसायटी इन आरोपों को खारिज करती है और उसका कहना है कि किराए की रकम संस्था के बैंक खाते में जमा होती रही है तथा उसका रिकॉर्ड उपलब्ध है।

    इसी विवाद के बीच सोसायटी ने जीवन रेखा अस्पताल प्रबंधन पर रात के समय यतीमखाने के एक हिस्से में ताला लगाने का आरोप लगाया है। सोसायटी के कार्यकारिणी सदस्य परवेज खान के अनुसार इसी हिस्से में सिलाई सेंटर और बैठक के लिए स्थान था। आरोप है कि वहां रखा सामान बाहर निकाल दिया गया और अस्पताल का सामान अंदर रखकर दोबारा ताला लगा दिया गया। सोसायटी का कहना है कि इस पूरी घटना के CCTV फुटेज भी उसके पास मौजूद हैं।

    सबसे बड़ी चिंता पानी की व्यवस्था को लेकर सामने आई है। सोसायटी के मुताबिक जिस हिस्से में ताला लगाया गया है वहीं पानी का टैंक मोटर और पानी भरने के स्विच मौजूद हैं। मुख्य यतीमखाने से जुड़े रास्ते पर भी ताला लगाए जाने का आरोप है। सोसायटी का कहना है कि अब बच्चों की पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकर बुलाना पड़ रहा है। संस्था के अनुसार अलग-अलग केंद्रों में करीब 98 बच्चे रहते हैं जिनमें 65 लड़के और 33 लड़कियां शामिल हैं। बच्चों के रहने भोजन और शिक्षा की व्यवस्था संस्था द्वारा किए जाने का दावा है।

    विवादित परिसर में गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के लिए सिलाई कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित होने की बात कही गई है। सोसायटी का आरोप है कि ताला लगने से महिलाओं का सामान बाहर हो गया और प्रशिक्षण तथा काम प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर सोसायटी का कहना है कि अस्पताल को वर्ष 2011 में रजिस्टर्ड किरायानामे के जरिए परिसर का हिस्सा दिया गया था और वर्ष 2016 में समझौते को आगे बढ़ाया गया जिसकी अवधि 2026 तक बताई गई है।

    मालिकाना हक को लेकर मामला हाईकोर्ट में भी लंबित बताया जा रहा है। सोसायटी का दावा है कि 2024 से मामले की सुनवाई चल रही है और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश है। वहीं वक्फ बोर्ड संपत्ति को अपनी बताते हुए सोसायटी पर गलत तरीके से स्वामित्व जताने का आरोप लगा रहा है। ऐसे में अब विवाद जमीन के मालिकाना हक से आगे बढ़कर अस्पताल के कब्जे पानी की व्यवस्था और बच्चों की सुविधाओं तक पहुंच गया है। दोनों पक्ष अपने अपने दस्तावेज और दावों के आधार पर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि विवाद का समाधान कब होगा और तब तक यतीमखाने में रह रहे बच्चों की मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

  • भोपाल में रहवासी इलाकों पर निगम का बड़ा एक्शन: रचना नगर का जूंबा डांस हाउस सील, 2 घंटे में 6 प्रतिष्ठान बंद

    भोपाल में रहवासी इलाकों पर निगम का बड़ा एक्शन: रचना नगर का जूंबा डांस हाउस सील, 2 घंटे में 6 प्रतिष्ठान बंद


    भोपाल  भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने अब सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार सुबह करीब 9 बजे से शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान रचना नगर में जूंबा डांस हाउस को सील कर दिया गया। इसके अलावा सर्वधर्म बी सेक्टर अरेरा कॉलोनी गौतम नगर और खानूगांव समेत कई इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कराई गईं। करीब दो घंटे के भीतर छह प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। निगम की टीमों के पहुंचने से पहले ही कुछ संचालकों ने अपने प्रतिष्ठान खुद बंद कर दिए थे। कार्रवाई के दौरान फिलहाल किसी बड़े हंगामे की सूचना नहीं है।

    रचना नगर में जूंबा डांस हाउस पर सीलिंग की कार्रवाई की गई और भवन पर निगम के आदेश से जुड़ी तख्ती लगाई गई। इसी तरह सर्वधर्म बी सेक्टर स्थित क्लियर होटल को भी बंद कराया गया। गौतम नगर में आवासीय भवन में संचालित एक होटल के संचालक ने खुद ही कमर्शियल गतिविधि बंद कर दी। खानूगांव में भी एक भवन के भीतर चल रही व्यावसायिक गतिविधि को बंद कराया गया। वहीं ई 3 अरेरा कॉलोनी में निगम की टीम ने सीलिंग की कार्रवाई शुरू की। यहां दुकानदारों ने अधिकारियों से कुछ समय की मोहलत मांगी लेकिन निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पहले ही कई दिनों की मोहलत दी जा चुकी है।

    नगर निगम की इस कार्रवाई के पीछे आवासीय भवनों में व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर चल रहा मामला अहम है। निगम ने 26 अगस्त तक कुल 8264 नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों के बाद संबंधित मामलों का परीक्षण किया गया। इसके बाद कार्रवाई का सिलसिला शुरू हुआ। इससे पहले वार्ड 58 के गौतम नगर स्थित एक रेसिडेंशियल बिल्डिंग में संचालित होटल को भी सील किया जा चुका है। रविवार को कई जगहों पर 24 घंटे के नोटिस दिए गए थे और सोमवार से सीलिंग तथा व्यावसायिक गतिविधियां बंद कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

    कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम भी किए हैं। मिसरोद हबीबगंज रातीबड़ कोहेफिजा गोविंदपुरा ऐशबाग और कोलार थाना क्षेत्रों से पुलिस बल की तैनाती की गई है। अधिकारियों का कहना है कि अलग अलग इलाकों में नोटिस जारी करने के बाद उनके मामलों का परीक्षण किया जा रहा है और नियमों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई भी महत्वपूर्ण है। आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत आदेशों को भी निरस्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है और इसी दौरान नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश करनी है।

    दूसरी ओर रहवासी इलाकों में रहने वाले लोगों की ओर से भी व्यावसायिक गतिविधियां बंद कराने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में कारोबार होने से शोर भीड़ और ट्रैफिक जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। इससे सार्वजनिक शांति और सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है। असामाजिक गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसके अलावा स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में निगम की मौजूदा कार्रवाई को आने वाले दिनों में और तेज किए जाने की संभावना है।

  • ‘दृश्यम 3’ में सितारों की तगड़ी कमाई, अजय देवगन ने वसूले 22 करोड़ तक, तब्बू-श्रिया सरन की फीस भी जानिए

    ‘दृश्यम 3’ में सितारों की तगड़ी कमाई, अजय देवगन ने वसूले 22 करोड़ तक, तब्बू-श्रिया सरन की फीस भी जानिए


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की चर्चित सस्पेंस थ्रिलर फ्रेंचाइजी दृश्यम अब अपनी तीसरी और आखिरी किस्त के साथ दर्शकों के बीच लौटने के लिए तैयार है। फिल्म दृश्यम द कन्क्लूजन को लेकर पहले से ही जबरदस्त चर्चा है और इसकी स्टारकास्ट भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ा रही है। अजय देवगन एक बार फिर विजय सलगांवकर के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक कर रहे हैं और रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार कहानी को पहले से भी ज्यादा रोमांचक और बड़े स्तर पर पेश करने की तैयारी है।

    फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट के साथ अब सितारों की फीस भी सुर्खियों में है। मीडिया रिपोर्ट्स और सामने आई जानकारी के अनुसार अजय देवगन को दृश्यम 3 के लिए करीब 18 से 22 करोड़ रुपये फीस मिलने की बात कही जा रही है। विजय सलगांवकर का किरदार इस फ्रेंचाइजी की सबसे अहम कड़ी रहा है और अजय देवगन ने दोनों पिछली फिल्मों में इस भूमिका को बेहद प्रभावशाली अंदाज में निभाया था। यही वजह है कि तीसरी फिल्म में भी उनकी फीस सबसे ज्यादा बताई जा रही है।

    अजय देवगन के बाद फिल्म की प्रमुख स्टारकास्ट में तब्बू का नाम आता है। फिल्म में वह एक बार फिर पुलिस अधिकारी मीरा देशमुख की भूमिका में दिखाई देंगी। मीरा और विजय सलगांवकर के बीच चलने वाला तनाव दृश्यम की कहानी का अहम हिस्सा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तब्बू को इस फिल्म के लिए करीब 2.5 से 3.5 करोड़ रुपये की फीस मिलने की बात सामने आई है। उनकी दमदार अदाकारी को देखते हुए फिल्म में उनके किरदार को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बनी हुई है।

    वहीं श्रिया सरन भी नंदिनी सलगांवकर के रूप में अपनी भूमिका दोहराती नजर आएंगी। पिछली दोनों फिल्मों में उन्होंने विजय की पत्नी का किरदार निभाया था और परिवार को मुश्किल परिस्थितियों से बचाने की कहानी में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। रिपोर्ट्स के अनुसार श्रिया सरन को दृश्यम 3 के लिए लगभग 1 से 1.5 करोड़ रुपये फीस मिलने की चर्चा है।

    फिल्म में इशिता दत्ता भी अंजू सलगांवकर की भूमिका में दिखाई देंगी। वह पहली फिल्म से ही कहानी के अहम हिस्से में रही हैं। खबरों के मुताबिक उन्हें इस फिल्म के लिए करीब 50 से 80 लाख रुपये के बीच फीस मिलने की बात कही गई है। वहीं मीरा देशमुख के पति महेश देशमुख की भूमिका निभाने वाले रजत कपूर को कथित तौर पर करीब 40 से 70 लाख रुपये फीस मिलने की जानकारी सामने आई है।

    दृश्यम 3 में इस बार कुछ नए और चर्चित चेहरे भी नजर आने वाले हैं। प्रकाश राज फिल्म में इंद्रजीत शेट्टी नाम का किरदार निभाएंगे जबकि जयदीप अहलावत राजवीर सिंह तोमर की भूमिका में दिखाई देंगे। हालांकि दोनों कलाकारों की फीस को लेकर फिलहाल कोई सटीक जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिल्म की स्टारकास्ट और फीस को लेकर सामने आई ये रकम मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में वास्तविक फीस इससे अलग हो सकती है। फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि विजय सलगांवकर की कहानी तीसरी और आखिरी फिल्म में किस मोड़ पर पहुंचेगी और क्या इस बार मीरा देशमुख के सामने विजय की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

  • ओली रॉबिन्सन का कहर और पाकिस्तान की बेबसी लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड की बड़ी जीत से सीरीज पर कब्जा

    ओली रॉबिन्सन का कहर और पाकिस्तान की बेबसी लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड की बड़ी जीत से सीरीज पर कब्जा


    नई दिल्ली। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 194 रन की बड़ी जीत दर्ज की और तीन मैचों की टेस्ट सीरीज पर कब्जा जमा लिया। इंग्लैंड की इस जीत के साथ पाकिस्तान के लिए सीरीज का संघर्ष और भी मुश्किल हो गया है। चौथे दिन ही मुकाबला अपने नाम करने वाली इंग्लैंड की टीम ने पाकिस्तान के सामने जीत के लिए 389 रन का विशाल लक्ष्य रखा था लेकिन पाकिस्तानी बल्लेबाज एक बार फिर इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सके और पूरी टीम 194 रन पर सिमट गई।

    पाकिस्तान की इस पारी में सऊद शकील ने जरूर संघर्ष का जज्बा दिखाया लेकिन वह भी शतक पूरा नहीं कर सके। पाकिस्तान ने महज 14 रन के स्कोर पर अपने तीन विकेट गंवा दिए थे जिसके बाद सऊद शकील ने शान मसूद के साथ मिलकर पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों बल्लेबाजों ने करीब चार घंटे तक इंग्लैंड के गेंदबाजों का सामना किया और 97 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। शकील ने 97 रन की पारी खेली जो इस सीरीज में अब तक किसी भी बल्लेबाज का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर रहा। हालांकि वह दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से बाउंड्री पर कैच आउट हो गए और उनका शतक केवल तीन रन से रह गया।

    इंग्लैंड की जीत के सबसे बड़े नायक तेज गेंदबाज ओली रॉबिन्सन रहे। उन्होंने पूरे मुकाबले में शानदार गेंदबाजी करते हुए कुल आठ विकेट अपने नाम किए। दूसरी पारी में रॉबिन्सन ने केवल 24 रन देकर चार पाकिस्तानी बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। उन्होंने पहले शान मसूद की साझेदारी को तोड़ा और इसके बाद मोहम्मद रिजवान को आउट किया। रिजवान का विकेट रॉबिन्सन के टेस्ट करियर का 99वां विकेट भी रहा।

    पाकिस्तान की बल्लेबाजी के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पूरी सीरीज में टीम संघर्ष करती दिखाई दी है। इंग्लैंड के खिलाफ पाकिस्तान अब तक किसी भी पारी में 200 रन का आंकड़ा पार नहीं कर पाया है। लॉर्ड्स टेस्ट में भी यही कहानी दोहराई गई और बड़ा लक्ष्य मिलने के बाद टीम दबाव में बिखर गई। बल्लेबाजी की इस कमजोरी ने इंग्लैंड के लिए मुकाबले को अपेक्षाकृत आसान बना दिया।

    पाकिस्तान के लिए मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं जब सलामी बल्लेबाज इमाम उल हक चोट के कारण मैच में बल्लेबाजी के लिए उतर ही नहीं सके। मुकाबले के पहले दिन उनकी बाईं पिंडली में खिंचाव आ गया था। उनकी अनुपस्थिति के कारण पाकिस्तान को मैच में 20 की जगह केवल 18 विकेट ही लेने थे जिससे इंग्लैंड के लिए जीत की राह और आसान हो गई।

    अब दोनों टीमों की नजरें सीरीज के तीसरे और आखिरी टेस्ट पर होंगी। यह मुकाबला 9 सितंबर से बर्मिंघम में खेला जाएगा। इंग्लैंड सीरीज पर कब्जा करने के बाद अब क्लीन स्वीप के इरादे से मैदान में उतरेगा जबकि पाकिस्तान के सामने अपनी साख बचाने की चुनौती होगी। लॉर्ड्स की हार के बाद पाकिस्तान को आखिरी टेस्ट में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।