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  • RTO ई-चालान बनकर आया साइबर ठगों का जाल: युवक के खाते से उड़ाए 2.12 लाख, मोबाइल हुआ हैंग

    RTO ई-चालान बनकर आया साइबर ठगों का जाल: युवक के खाते से उड़ाए 2.12 लाख, मोबाइल हुआ हैंग


    नई दिल्ली। ग्वालियर के थाटीपुर क्षेत्र में 27 फरवरी को हुई साइबर ठगी ने लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया। निजी कंपनी में कर्मचारी शशांक गुप्ता को वॉट्सऐप पर एक अनजान नंबर से ‘RTO ई-चालान कॉपी’ नाम की APK फाइल भेजी गई। शशांक ने फाइल खोलते ही मोबाइल हैंग हो गया, और कुछ ही समय बाद उनके बैंक खाते से कुल 2.12 लाख रुपए गायब हो गए।

    घटना का क्रम
    शशांक ने फाइल खोलते ही मोबाइल लगभग 7-8 मिनट तक हैंग हो गया।

    एक घंटे बाद मोबाइल पर संदेश आया कि कैश निकासी हुई-89 हजार, 60 हजार और 63 हजार रुपए ट्रांसफर।

    शशांक तुरंत बैंक पहुंचे, जहां उन्हें पता चला कि उनके खाते से रकम साइबर ठगी के माध्यम से निकाली गई।

    पहले थाने में शिकायत का समाधान नहीं हुआ, लेकिन साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद थाटीपुर थाना ने ई-जीरो FIR दर्ज की।

    पुलिस की जांच और चेतावनी
    थाटीपुर थाना पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने बताया कि ठगों ने APK फाइल में मैलवेयर इंस्टॉल किया। इसके जरिए बैंक खातों से रकम चुराई गई।
    पुलिस ने आम जनता से चेतावनी दी कि:

    वॉट्सऐप या SMS में आने वाली APK फाइल न खोलें।

    RTO चालान की जानकारी केवल सरकारी वेबसाइट या अधिकृत ऐप से ही जांचें।

    सीख और सुरक्षा
    यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि साइबर ठगी के लिए झूठे ई-चालान और फाइलें कितनी खतरनाक हो सकती हैं। सावधानी और अधिकारिक चैनल का इस्तेमाल ही सुरक्षा की कुंजी है।

  • मिडिल ईस्ट वॉर का खौफनाक असर: ओमान में दो जहाजों पर हमला, 3 भारतीय क्रू मेंबर्स की जान गई; तेल की कीमतों में लगी आग

    मिडिल ईस्ट वॉर का खौफनाक असर: ओमान में दो जहाजों पर हमला, 3 भारतीय क्रू मेंबर्स की जान गई; तेल की कीमतों में लगी आग


    नई दिल्ली :पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब समुद्री व्यापारिक मार्गों के लिए काल बनता जा रहा है। इजरायल-अमेरिका के हमलों और ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मृत्यु के बाद प्रतिशोध की आग में जल रहे ईरान ने ओमान की समुद्री सीमा में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है। इस दुखद घटना में कम से कम तीन भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने इस त्रासदी की पुष्टि करते हुए बताया कि ‘एमकेडी व्योम’ MKD VYOM नामक जहाज पर सवार तीन भारतीयों ने अपनी जान गंवा दी है। दूतावास अब ओमान प्रशासन के साथ मिलकर फंसे हुए अन्य भारतीयों को सुरक्षित निकालने के अभियान में जुटा है।

    जानकारी के मुताबिक, ‘एमकेडी व्योम’ पर मार्शल आइलैंड्स का झंडा लगा था और यह मस्कट तट से लगभग 52 नॉटिकल माइल्स की दूरी पर था, जब इस पर हमला हुआ। टक्कर के बाद जहाज के मुख्य इंजन कक्ष में जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे भीषण आग लग गई। ओमान न्यूज एजेंसी के अनुसार, समुद्री सुरक्षा केंद्र के समन्वय से चलाए गए बचाव अभियान में पनामा के टैंकर ‘एमवी सैंड’ की मदद से चालक दल के 21 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इन बचाए गए सदस्यों में 16 भारतीय, चार बांग्लादेशी और एक यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। वर्तमान में ओमान की ‘रॉयल नेवी’ का पोत क्षतिग्रस्त टैंकर की निगरानी कर रहा है ताकि उस क्षेत्र से गुजरने वाले अन्य जहाजों को किसी भी संभावित खतरे से बचाया जा सके।

    यह हमला पिछले दो दिनों में हुई दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में ‘एमवी स्काईलाइट’ नामक तेल टैंकर को भी निशाना बनाया गया था, जिसमें भारत और ईरान के चार चालक सदस्य घायल हुए थे। भारतीय मिशन वर्तमान में उन दो सदस्यों की तलाश के लिए स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है जो इस हमले के बाद से लापता हैं, जिनमें से एक भारतीय बताया जा रहा है। समंदर में बढ़ते इस खतरे का सीधा असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग के प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में 7.6% से 8.6% तक का उछाल आया है, वहीं कतर द्वारा उत्पादन रोके जाने से यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतें 40% तक बढ़ गई हैं।

  • भोपाल का हड़कंप: पूर्व रेलकर्मी राजेश तिवारी का हिडन कैमरा वीडियो वायरल, मंत्री विश्वास सारंग और RSS पर लगाए गंभीर आरोप

    भोपाल का हड़कंप: पूर्व रेलकर्मी राजेश तिवारी का हिडन कैमरा वीडियो वायरल, मंत्री विश्वास सारंग और RSS पर लगाए गंभीर आरोप


    भोपाल। भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र में गिरफ्तार बर्खास्त रेलकर्मी राजेश तिवारी का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। गिरफ्तारी के बाद सामने आए हिडन कैमरा वीडियो में राजेश कथित तौर पर कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग के खिलाफ बोलते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह यह कहता दिख रहा है कि किसी भी धरना-प्रदर्शन में असलम का नाम न आए, बल्कि मामला सीधे सारंग की तरफ डायवर्ट किया जाए। इसके अलावा वह बताता है कि अगर मंत्री पद से हटाया गया तो उसका नाम बदल देना। जब उससे पूछा गया कि क्या मंत्री से व्यक्तिगत दुश्मनी है, तो उसने जवाब दिया, “नहीं, पूरे RSS की है। वीडियो में यह भी दावा किया गया कि मंत्री पद से हटाने की तैयारी है और विस्तार के दौरान बदलाव होंगे।

    पुलिस ने राजेश का मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया है। जांच का नया एंगल अब वायरल वीडियो और मोबाइल डेटा की पुष्टि पर केंद्रित है, यह पता लगाने के लिए कि वीडियो कब रिकॉर्ड हुआ, किसने रिकॉर्ड किया और क्या इसे एडिट किया गया।

    राजेश तिवारी पहले ही ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार है। उसके पास से एमडी ड्रग और अवैध हथियार भी जब्त किए गए हैं। इसके अलावा उसके खिलाफ रेप और हत्या के प्रयास के मामले भी दर्ज हैं। 27 फरवरी को निशातपुरा पुलिस ने उसे 3 लाख रुपए की गैरकानूनी मांग के आरोप में पकड़ा था।

    राजनीतिक और साइबर जांच दोनों ही एंगल से यह मामला अब अहम बन गया है। वायरल हिडन कैमरा वीडियो और फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट भविष्य में इसकी गुत्थी सुलझाने में निर्णायक साबित हो सकती है।

  • सऊदी में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला, यूएस एंबेसी ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी

    सऊदी में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला, यूएस एंबेसी ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी


    नई दिल्ली ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के चौथे दिन सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया गया। Ministry of Defense Saudi Arabia ने मंगलवार सुबह बताया कि दूतावास परिसर पर दो ड्रोन से हमला हुआ, जिससे आग लग गई और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। राहत की बात यह रही कि घटना के समय इमारत खाली थी, इसलिए किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

    ट्रंप की चेतावनी
    हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने तेहरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा,
    “तुम्हें जल्द ही पता चल जाएगा कि जवाबी कार्रवाई क्या होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों पर हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

    एंबेसी की ‘शेल्टर-इन-प्लेस’ एडवाइजरी
    हमले के तुरंत बाद अमेरिकी दूतावास ने एक्स (पूर्व ट्विटर) के जरिए रियाद, जेद्दा और धाहरान में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए ‘शेल्टर-इन-प्लेस’ एडवाइजरी जारी की।

    एडवाइजरी में कहा गया:

    गैर-जरूरी यात्रा से बचें, खासकर सैन्य ठिकानों के आसपास।

    नवीनतम सुरक्षा अलर्ट पर नजर रखें।

    व्यक्तिगत सुरक्षा योजना (Personal Safety Plan) तैयार रखें।

    किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पर शरण लें।

    दूतावास ने कहा कि क्षेत्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और अचानक संकट की स्थिति बन सकती है।

    वीडियो वायरल, एयरपोर्ट संचालन जारी
    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दूतावास परिसर से धुएं का गुबार उठता दिख रहा है, जबकि फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर आग बुझाती नजर आ रही हैं। हालांकि रियाद का King Khalid International Airport फिलहाल चालू है, लेकिन खाड़ी देशों के कुछ हिस्सों में एयरस्पेस बंद होने और क्षेत्रीय हमलों के कारण सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हुई हैं।

    क्षेत्र में बढ़ता तनाव
    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल की एयरस्ट्राइक के बाद जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है। ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत के बाद क्षेत्रीय हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं। सऊदी अधिकारियों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि ड्रोन को रोका गया था या वे राजधानी की एयर डिफेंस को भेदकर दूतावास तक पहुंचे।

    स्थिति पर नजर
    मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस टकराव के बीच कूटनीतिक मिशनों की सुरक्षा, हवाई यातायात और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिकी मिशन ने संकेत दिया है कि हालात के अनुसार आगे और सुरक्षा कदम उठाए जा सकते हैं।

  • अमेरिका-ईरान में जुबानी जंग तेज, अराघची ने मार्को रुबियो पर साधा निशाना

    अमेरिका-ईरान में जुबानी जंग तेज, अराघची ने मार्को रुबियो पर साधा निशाना


    नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच मंगलवार को जुबानी जंग तेज हो गई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ईरान से कभी कोई खतरा था ही नहीं” और अमेरिकी कार्रवाई महज एक बहाना थी। अराघची ने दोनों देशों के नागरिकों के खून-खराबे के लिए सीधे तौर पर इजरायल को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिका ने इजरायल की ओर से अपनी मर्जी से युद्ध लड़ा है।

    क्या कहा था रुबियो ने?
    सोमवार को मीडिया से बातचीत में मार्को रुबियो ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान पर हमला तब किया जब उसे जानकारी मिली कि उसका सहयोगी इजरायल सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

    रुबियो के मुताबिक, वॉशिंगटन को आशंका थी कि इजरायल की कार्रवाई के बाद तेहरान क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सेना के खिलाफ जवाबी हमला कर सकता है। उन्होंने कहा,
    “हमें पता था कि इजरायल कार्रवाई करने वाला है। यदि हम पहले कदम नहीं उठाते, तो हमें ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता था। रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन का मानना था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई आवश्यक थी, भले ही इसका घोषित उद्देश्य ईरानी शासन का अंत नहीं था।

    अराघची का तीखा जवाब
    रुबियो के बयान के बाद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा,
    “मिस्टर रुबियो ने वह माना जो हम सब जानते थे। अमेरिका ने इजरायल की तरफ से अपनी मर्जी से जंग लड़ी है। ईरान से कभी कोई खतरा था ही नहीं।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी और ईरानी दोनों नागरिकों का खून बहा है, जिसकी जिम्मेदारी इजरायल पर है। अराघची ने लिखा,
    “अमेरिकी लोग इससे बेहतर के हकदार हैं।”

    ईरान का यह बयान साफ संकेत देता है कि तेहरान अमेरिकी कार्रवाई को आत्मरक्षा नहीं, बल्कि पूर्व-नियोजित आक्रामक कदम मान रहा है।

    तेहरान हमले पर नया खुलासा
    इससे पहले अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने कहा था कि शनिवार को तेहरान में हुआ हमला इजरायल द्वारा किया गया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, खुफिया जानकारी से संकेत मिला था कि खामेनेई उस समय एक अहम बैठक में मौजूद थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

    बढ़ता कूटनीतिक टकराव
    रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका “खामेनेई प्रतिष्ठान के अंत” को देखना पसंद करेगा, लेकिन मौजूदा सैन्य अभियान का घोषित लक्ष्य शासन परिवर्तन नहीं है। दूसरी ओर, ईरान इस पूरी कार्रवाई को क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बता रहा है और अमेरिका-इजरायल पर संयुक्त साजिश का आरोप लगा रहा है।

    मानना है कि दोनों देशों के बीच बयानबाजी का यह दौर आगे और तीखा हो सकता है। पश्चिम एशिया पहले ही अस्थिर हालात से गुजर रहा है, ऐसे में कूटनीतिक संवाद के बजाय आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

  • अमेरिका ने ईरान के दो महत्वपूर्ण नेवल बेस को किया तबाह, युद्ध का चौथा दिन, जानें 10 बड़ी बातें

    अमेरिका ने ईरान के दो महत्वपूर्ण नेवल बेस को किया तबाह, युद्ध का चौथा दिन, जानें 10 बड़ी बातें


    तेहरान। अमेरिका ने ईरानी नेवी के दो सबसे महत्वपूर्ण नेवल बेस बंदर अब्बास नेवल बेस और कोनार्क नेवल बेस-पर भीषण हमले किए हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इन दोनों नेवल बेस को लेकर कई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में बंदर अब्बास नेवल बेस पर तैनात IRINS मकरान सी बेस-टाइप जहाज पर आग लगी हुई दिख रही है। बंदर अब्बास ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करने के उद्देश्य से बनाया गया नौसेना बेस होने के साथ-साथ ईरानी नौसेना का मुख्य हेडक्वार्टर भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान की नौसेना फोर्स को खत्म करना अमेरिकी अधिकारियों का मुख्य मकसद है। अमेरिका ने अब तक 10 ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाने की बात भी कही है।

    बंदर अब्बास नेवल बेस की तबाही
    प्लैनेट लैब्स की तरफ से जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों में रात को ली गई बंदर अब्बास नेवल बेस की स्थिति का पता चलता है। तस्वीरों में ईरानी नेवी का मुख्य हेडक्वार्टर और इसके कई सबसे काबिल जहाज और सबमरीन तैनात दिख रहे हैं। तस्वीरों में नेवल बेस के ज्यादातर हिस्सों में घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। फैसेलिटी के कई हिस्सों पर हमले का असर साफ देखा जा सकता है। तस्वीरों के आकलन से यह भी पता चलता है कि फ्लोटिंग डॉक को गंभीर नुकसान पहुंचा है, पेट्रोल बोट डैमेज हो चुके हैं और कई बिल्डिंग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं।

    तस्वीरों से स्पष्ट है कि IRINS मकरान जहाज पर हमला किया गया है। इसे नौसेना अड्डे के दक्षिणी छोर पर एक बर्थ पर डॉक किया गया था। यह जहाज मूल रूप से एक ऑयल टैंकर था जिसे ईरानी अधिकारियों ने “फॉरवर्ड बेस शिप” में बदल दिया था। इसके आगे का हिस्सा बड़ा खुला फ्लाइट डेक और कई अन्य खूबियों से लैस था। मकरान जहाज ने 2021 में कमीशन होने के बाद कई बार विदेश यात्राएं की हैं और यह उन कई समुद्री बेस जैसे जहाजों में से एक है जिन्हें ईरान ने हाल के सालों में सेवा में लगाया। 2 मार्च की तस्वीरों की तुलना पहले की तस्वीरों से करने पर लगता है कि एक या दो फ्रिगेट साइज के वॉरशिप पर भी हमला हुआ है। ये साफ तौर पर पोर्ट पर सबसे कीमती टारगेट में से एक थे। पोर्ट में जो एक किलो क्लास पनडुब्बी और छोटी पनडुब्बी हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। कुछ अन्य सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरानी नौसना के कई और मुख्य युद्धपोत शायद तबाह हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा है। बंदर अब्बास पोर्ट ईरान के होर्मोज़्गन प्रांत की राजधानी बंदर अब्बास में स्थित है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य इसके बिल्कुल पास है।

    कोनार्क पोर्ट पर भी अमेरिकी हमले
    बंदर अब्बास की तस्वीर में धुएं की वजह से यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि पोर्ट में कितने जहाजों को नुकसान हुआ। 2 मार्च की तस्वीर की तुलना 26 फरवरी की तस्वीर से करने पर साफ पता चलता है कि कई छोटी नावें और कुछ बड़े जहाज पोर्ट से बाहर कर दिए गए। संभव है कि कुछ जहाज डूब गए हों, लेकिन इसके कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। फिर भी ईरानी नौसेना के कई जहाज अभी भी बचे हैं और ड्राईडॉक में कई जंगी जहाज दिखाई दे रहे हैं।

    बंदर अब्बास के बाहर भी ईरानी नौसेना के एसेट्स पर हमला हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिरे के पास कोनार्क में पोर्ट पर हमले हुए। कई जंगी जहाज नष्ट हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा। शुरुआती अनुमान में यह अलवंद क्लास का फ्रिगेट बताया गया, लेकिन बाद में यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे मौज क्लास के वॉरशिप के रूप में पहचाना, जिसे कभी-कभी जमरान क्लास भी कहा जाता है। कोनार्क पोर्ट ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और चाबहार बंदरगाह के ठीक बगल, ओमान की खाड़ी के पास स्थित है।

    युद्ध के चौथे दिन की 10 बड़ी बातें
    1. 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई।
    2. अमेरिका ने हमले को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और इजरायल ने ‘ऑपरेशन रोअर ऑफ द लॉयन’ नाम दिया।
    3. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दावा किया, जिससे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ।
    4. पेंटागन ने 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 18 घायल होने की पुष्टि की, जबकि इजरायल में अब तक 12 लोगों की मौत हुई।
    5. खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सरकार चलाने के लिए अंतरिम शासी परिषद का गठन किया गया।
    6. ईरान ने खाड़ी के कई देशों जैसे सऊदी अरब, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत पर हमले किए।
    7. अमेरिका के बी-2 बॉम्बर्स ने ईरान के अंडरग्राउंड परमाणु केंद्रों और मिसाइल भंडारण सुविधाओं पर हमला किया।
    8. ईरान के रेड क्रेसेंट के अनुसार मरने वालों की संख्या 600 से अधिक पहुंच गई, जिनमें सैनिक और आम नागरिक शामिल हैं।
    9. अमेरिका ने खाड़ी देशों में स्थित प्रमुख दूतावासों जैसे इराक, जॉर्डन और कुवैत से अपने अधिकारियों को तुरंत निकालने का आदेश दिया।
    10. डोनाल्ड ट्रंप और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि युद्ध 4-5 हफ्ते या उससे अधिक समय तक चल सकता है, और उन्होंने ईरान में सैनिकों को उतारने की संभावना से इनकार नहीं किया।

  • वैश्विक चुनौती बने दुर्लभ रोग…. 10 हजार से अधिक रोगों की पहचान, दुनिया भर में 30 करोड़ पीड़ित

    वैश्विक चुनौती बने दुर्लभ रोग…. 10 हजार से अधिक रोगों की पहचान, दुनिया भर में 30 करोड़ पीड़ित


    नई दिल्ली।
    दुनिया भर (All Over World) में लगभग 30 करोड़ लोग किसी न किसी दुर्लभ रोग (Rare Diseases) से पीड़ित हैं। अब तक 6,000 से 10,000 दुर्लभ रोगों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से करीब 72 प्रतिशत रोग आनुवांशिक कारणों से होते हैं। यह दुर्लभ रोग अब एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती (Global Health Challenge) बन चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य सभा (डब्ल्यूएचए) ने मई 2025 में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित करते हुए दुर्लभ रोगों को वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता घोषित किया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य समय पर और सटीक जांच सुनिश्चित करना, उपचार सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाना, अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है।

    नीति स्तर पर यह स्वीकार किया गया है कि दुर्लभ रोग केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी अंतरराष्ट्रीय रोग वर्गीकरण प्रणाली आईसीडी-11 में लगभग 5,500 दुर्लभ रोगों को शामिल किया गया है।


    मरीजों तक उचित इलाज कब पहुंचेगा?

    इस मानकीकृत वर्गीकरण से डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को रोग की पहचान, दस्तावेजीकरण और उपचार योजना बनाने में सुविधा मिलती है। आईसीडी-11 में शामिल किए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डाटा संग्रह, शोध सहयोग और स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में भी सुधार हुआ है। सही और समय पर वर्गीकरण से निदान की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे मरीजों को उचित इलाज तक जल्दी पहुंच मिलती है।


    पहचान और निदान में देरी से बढ़ रहा मर्ज

    दुर्लभ रोगों के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती समय पर बीमारी की पहचान हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, जांच सुविधाओं का अभाव और आनुवंशिक परीक्षण की सीमित उपलब्धता समस्या को और जटिल बना देती है। इन रोगों का उपचार अक्सर महंगा होता है। इससे प्रभावित परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता है। 30 करोड़ से अधिक लोगों के सामने शारीरिक, मानसिक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी होती हैं, जो स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक गंभीर संकेत हैं।


    भारत में बढ़ी दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता

    भारत में दुर्लभ रोग उन बीमारियों को माना जाता है जो आबादी के बहुत छोटे हिस्से को प्रभावित करती हैं। इन रोगों के लिए विशेष जांच, उन्नत प्रयोगशाला सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता होती है। कई मामलों में मरीजों को सही निदान मिलने में लंबा समय लग जाता है। हालांकि, सरकार और स्वास्थ्य संस्थान अब दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नीतिगत सुधारों पर काम कर रहे हैं, ताकि जांच और उपचार की सुविधा बेहतर बनाई जा सके।

  • US के लिए लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है ईरान युद्ध… अमेरिकी रणनीतिकार नहीं लगा पाए अंदाजा

    US के लिए लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है ईरान युद्ध… अमेरिकी रणनीतिकार नहीं लगा पाए अंदाजा


    तेहरान।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में छिड़ा संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसकी कल्पना शायद अमेरिकी युद्ध नीतिकारों (American War Policymakers) ने नहीं की थी। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) के जरिये खामनेई के खात्मे के बाद यह युद्ध अमेरिका के लिए किसी त्वरित जीत के बजाय एक लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है। ईरान की रणनीति अमेरिका को लंबे और थका देने वाले युद्ध की ओर धकेलने की दिख रही है। अमेरिकी अड्डों पर हुए मिसाइल हमलों और कुवैत में कई लड़ाकू विमान गिराए जाने की सूचनाओं ने वाशिंगटन की वॉर गेमिंग पर सवाल खड़े किए हैं। अमेरिका सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों की सुरक्षा ढाल बनने में नाकाम रहा है। यह अमेरिकी योजना के बिल्कुल विपरीत है।


    ईरान की रणनीति

    ईरान की रणनीति वॉर ऑफ एट्रिशन यानी लंबे और थकाऊ युद्ध की है। अमेरिका और इस्राइल की बेहतर एयरपावर से बचाव के लिए उसने अपने अहम हथियार भूमिगत बंकरों में सुरक्षित कर लिए हैं। उसका इरादा ड्रोन एवं मिसाइलों से अमेरिका के प्रतिष्ठित ठिकानों पर निशाना साधने का है। इससे दुश्मन के अजेय होने की छवि को नुकसान पहुंचेगा और घरेलू मोर्चे पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ेगा।

    जमीनी हमला: विशेषज्ञों की राय में ईरान की कोशिश दुश्मन को जमीनी आक्रमण के लिए उकसाने की दिख रही है। युद्ध जमीन पर आने पर ईरान की बड़ी सेना व दुर्गम भौगोलिक परिस्थितयां अमेरिका व इस्राइल के लिए इसे अफगानिस्तान या वियतनाम जैसा अंतहीन युद्ध भी बना सकते हैं।

    अराघची का बयान: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि शीर्ष कमांडरों को खोने के बाद उन्हें फौरन रिप्लेस कर लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस युद्ध में दूसरे पक्ष के लिए कोई विजय नहीं है। विकेंद्रीकृत कमान के कारण ईरान का मिसाइल नेटवर्क नेतृत्व की कमी के बावजूद सक्रिय है।

    इस्राइल पर प्रभाव: छोटा देश होने के नाते इस्राइल की अर्थव्यवस्था तेज और निर्णायक युद्ध के लिए बनी है, लंबे युद्ध के लिए नहीं। लाखों नागरिक (रिजर्विस्ट) दफ्तर छोड़कर मोर्चे पर तैनात हैं, जिससे हाई-टेक और उत्पादन क्षेत्र प्रभावित रहेगा। ईरान युद्ध को लंबा खींचने में कामयाब रहा तो इस्राइल की अर्थव्यवस्था पतली हो सकती है, इसलिए इस्राइल युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए आक्रामक रुख अपनाता है।


    विशेषज्ञ की राय

    रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा कि ट्रंप ने बहुत बड़ी गलती की है। पहली ही स्ट्राइक में ईरान का शीर्ष नेतृत्व साफ कर दिया। अब इस युद्ध पर नियंत्रण नहीं रह गया है। इससे वैश्विक मंदी आ सकती है, जिससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहेगा। ईरान ने इनका युद्धपोत हिट किया तो 250 सैनिक मारे जाएंगे। अब यह अपना एयरक्राफ्ट कैरियर लिंकन छुपाते फिर रहे हैं। ट्रंप बुरी तरह फंसने वाले हैं। उनके खिलाफ महाभियोग भी चलाया जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा।

  • MP में आदेश निकलने से पहले ही शुरू हो गई टोल वसूली… जनता के जेब से निकाले करोड़ों

    MP में आदेश निकलने से पहले ही शुरू हो गई टोल वसूली… जनता के जेब से निकाले करोड़ों


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में टोल वसूली (Toll Collection) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (Madhya Pradesh Road Development Corporation- MPRDC) ने कई सड़कों पर राज्यपाल की अधिसूचना जारी होने से 6 माह से लेकर एक साल पहले तक टोल वसूली शुरू कर दी थी. यानी जिस तारीख से टोल वसूली कानूनी रूप से लागू होनी थी, उससे पहले ही जनता की जेब से पैसा निकाला जाता रहा. यह खुलासा विधानसभा में PWD की ओर से जारी जवाब से हुआ है।

    कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में सवाल पूछा था कि प्रदेश की कौन-कौन सी सड़कों पर टोल वसूली की अधिसूचना कब-कब जारी हुई और इन पर टोल वसूली कब से शुरू हुई? इसका जवाब जब सदन में रखा गया तो हैरान करने वाली जानकारी सामने आई।

    कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की ओर से शेयर की गई जानकारी के अनुसार कई सड़क परियोजनाओं में अधिसूचना और टोल वसूली की तारीखों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है जो ना सिर्फ नियमों के विरुद्ध है बल्कि सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।


    एक बाइक पर नौ लोगों की सवारी का वायरल वीडियो

    प्रताप ग्रेवाल का कहना है कि इंडियन टोल एक्ट के तहत शासन अपने स्तर पर किसी भी सड़क पर टोल नहीं ले सकता है. सड़क जनता की संपत्ति है , तथा शासन ट्रस्टी है. ट्रस्टी उस संपत्ति से बेजा लाभ नहीं कमा सकता है।


    अधिसूचना बाद में, वसूली पहले?

    कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सदन में पेश आंकड़ों के आधार पर आरोप लगाया कि कई सड़कों पर अधिसूचना जारी होने के पहले से टोल टैक्स वसूली शुरू कर दी गई, जिनमें के कुछ सड़कें हैं:-
    भोपाल बायपास – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2020 | टोल वसूली शुरू: 12 दिसंबर 2019
    इंदौर–उज्जैन मार्ग – अधिसूचना: 30 दिसंबर 2022 | टोल वसूली शुरू: 21 जनवरी 2022
    सागर–दमोह मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021
    भिंड–गोपालपुरा मार्ग – अधिसूचना: 4 जनवरी 2022 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021
    गुना–ईसागढ़ मार्ग – अधिसूचना: 10 अक्टूबर 2024 | टोल वसूली शुरू: 2 जून 2023
    महू–घाटाबिल्लौद मार्ग – अधिसूचना: 24 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 28 फरवरी 2021
    बीना–खिमलासा मार्ग – अधिसूचना: 8 दिसंबर 2021 | टोल वसूली शुरू: 19 मार्च 2021


    43 सड़कों से 603 करोड़ का ‘शुद्ध लाभ’?

    प्रताप ग्रेवाल का आरोप है कि प्रदेश की 43 सड़कों पर अधिसूचना जारी होने से पहले कथित अवैध टोल वसूली के जरिए एमपीआरडीसी ने दिसंबर 2025 तक 603.66 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है जिसकी जांच होनी चाहिए।


    पूरा पैसा सरकारी खजाने में गया, कोई भ्रष्टाचार नहीं

    PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सदन में जो जानकारी दी गई हैए उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि टोल वसूली शासकीय खजाने में ही जमा हुई हैए इसलिए इसमें भ्रष्टाचार का कोई मामला बनता ही नहीं है. जहां तक अधिसूचना जारी होने की बात है तो वो कई बार बैकडेट में भी जारी होती है, इसलिए यह कहना गलत है कि विभाग ने अवैध रूप से टोल वसूली की है।

  • Iran-Israel War ने बढ़ाई आयातकों की टेंशन… गैस टैंकरों का किराया एक ही दिन में हुआ दोगुना

    Iran-Israel War ने बढ़ाई आयातकों की टेंशन… गैस टैंकरों का किराया एक ही दिन में हुआ दोगुना


    तेहरान
    । अटलांटिक बेसिन (Atlantic Basin) में एलएनजी टैंकरों (LNG Tankers) के किराए में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। मामले से वाकिफ सूत्रों के मुताबिक, जहाज मालिक और ब्रोकर (Shipowner and Broker) अब इन टैंकरों के लिए 200,000 डॉलर प्रतिदिन से अधिक की मांग कर रहे हैं, जो कि 24 घंटे से भी कम समय पहले मांगे जा रहे किराए से लगभग दोगुना है।


    कतर में उत्पादन ठप होने से बढ़ी मांग

    ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक किराए में यह उछाल ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बढ़ने के कारण कतर द्वारा अपना एलएनजी उत्पादन बंद करने के बाद आया है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इतनी ऊंची दरों पर अभी तक किसी भी सौदे के होने की पुष्टि नहीं हुई है।


    पिछले दरों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा

    यह ऑफर की जा रही दरें शिपिंग फर्म स्पार्क कमोडिटीज द्वारा सोमवार की शुरुआत में एलएनजी टैंकर के लिए आंकलित अंतिम दर 61,500 डॉलर से कम से कम तीन गुना अधिक हैं। यह भारी उछाल बाजार में अस्थिरता और अनिश्चितता को दर्शाता है।


    विशेषज्ञों की राय में अभी संभलकर चलने की जरूरत

    प्रिसिजन एलएनजी कंसल्टिंग एलएलसी के सलाहकार रिचर्ड प्रैट का मानना है कि अगर कतर और अबू धाबी जैसी जगहों पर उत्पादन में लंबे समय तक कटौती नहीं होती है, तो टैंकरों की दरों में यह भारी उछाल वास्तविक लेन-देन में तब्दील होने की संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका से एशिया तक जहाजों को चलने के लिए आवश्यक अतिरिक्त दूरी भी किराए पर दबाव बनाने में एक भूमिका निभा सकती है।


    शिपिंग कंपनियों ने लगाया इमर्जेंसी चार्ज

    खबर यह भी है कि हमलों से बढ़े खतरे के चलते शिपिंग कंपनियों ने खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों को जाने वाले और वहां से आने वाले माल पर 2000 डॉलर से लेकर 4000 डॉलर प्रति कंटेनर इमर्जेंसी कॉनफ्लिक्ट चार्जेज लगा दिए हैं। यह चार्जेज 2 मार्च से ही लागू हो गए हैं। यह खबर रूरल वॉयस सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से दी है।

    रूरल वॉयस के मुताबिक शिपिंग कंपनियों ने कहा कि शिपिंग के लिए होने वाली बुकिंग पर इमर्जेंसी कॉनफ्लिक्ट चार्जेज लागू होंगे। इराक, बहरीन, कुवैत, यमन, कतर, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), किंगडम ऑफ सऊदी अरब, जार्डन, मिस्र (पोर्ट ऑफ आइन सोखाना), दजिबुती, सूडान और इरिटिया के पोर्ट के लिए भारत से होने वाले निर्यात या इन देशों से भारत के आयात की लोडिंग पर इमर्जेंसी चार्जेज लागू होंगे।

    इमर्जेंसी चार्जेज के तहत 20 फीट के ड्राई कंटेनर पर 2000 डॉलर, 40 फीट के कंटेनर पर 3000 डॉलर और रीफर या स्पेशल इक्विपमेंट पर 4000 डॉलर प्रति कंटेनर का चार्ज फ्रेट रेट में जोड़ा जाएगा।