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  • मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ट्रंप ने दिया बड़ा संकेत-ईरान में सैन्य विकल्प खुले

    मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ट्रंप ने दिया बड़ा संकेत-ईरान में सैन्य विकल्प खुले


    नई दिल्ली। दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। विदेशों में लंबे युद्धों से दूरी बनाने के अपने पुराने रुख से अलग जाते हुए ट्रंप ने कहा है कि “यदि आवश्यकता पड़ी” तो वह ईरान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं करते।

    “मैं यह नहीं कहता कि जमीन पर सैनिक नहीं होंगे”
    अमेरिकी अखबार New York Post को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “जैसा कि हर राष्ट्रपति कहता है, ‘जमीन पर कोई सैनिक नहीं होगा।’ मैं ऐसा नहीं कहता। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सैनिकों को ग्राउंड पर भेजा जा सकता है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिलहाल इसकी आवश्यकता नहीं होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ और हताहतों की खबर
    इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि सोमवार तक अमेरिकी सेना के चार सदस्य मारे गए हैं। शनिवार सुबह ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की घोषणा करते हुए ट्रंप ने संभावित नुकसान का संकेत दिया था। वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, “ईरानी शासन मारना चाहता है। साहसी अमेरिकी नायकों की जान जा सकती है, और हमारे सैनिक हताहत हो सकते हैं; युद्ध में अक्सर ऐसा होता है। ट्रंप ने दावा किया कि यह ऑपरेशन तय समय से आगे चल रहा है और “बहुत तेजी से खत्म होने वाला है।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने में चार सप्ताह लगने की उम्मीद थी, लेकिन 49 नेता “एक दिन में” मारे गए। उनके मुताबिक मारे गए लोगों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei भी शामिल थे। हालांकि, इस दावे पर स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    “जितना समय लगेगा, उतना चलेगा अभियान”

    सोमवार को ट्रंप ने संकेत दिया कि ऑपरेशन चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है और यदि इससे अधिक समय भी लगे तो वह इसके लिए तैयार हैं। संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के स्थायी प्रतिनिधि Danny Danon ने भी कहा कि अभियान में “जितना समय लगेगा, लगेगा। इस बयानबाजी ने संकेत दिया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के खिलाफ लंबी रणनीति पर काम कर सकते हैं।

    अमेरिकी जनता बंटी हुई
    विदेशी युद्धों में अमेरिका की पिछली उलझनों-जैसे इराक और अफगानिस्तान को देखते हुए अमेरिकी जनता सतर्क नजर आ रही है। एक रॉयटर्स-इप्सोस पोल के अनुसार, केवल 27 प्रतिशत लोगों ने ईरान पर हमले का समर्थन किया, जबकि 43 प्रतिशत इससे असहमत थे और 13 प्रतिशत अनिश्चित रहे।

    हालांकि ट्रंप ने पोल के आंकड़ों को खारिज करते हुए कहा, “मुझे पोलिंग की परवाह नहीं है। मुझे सही काम करना है। उन्होंने यह भी कहा कि वह एक “साइलेंट मेजॉरिटी” पर भरोसा करते हैं, जो उनके अनुसार “असली पोल” में दिखाई देगी।

    वैश्विक असर की आशंका
    ट्रंप के इस बयान ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है। यदि वास्तव में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती होती है, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष को व्यापक युद्ध का रूप दे सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाता है।

  • डिजिटल दुनिया में मोदी का जलवा! यूट्यूब चैनल ने पार किए 30 मिलियन सब्सक्राइबर्स

    डिजिटल दुनिया में मोदी का जलवा! यूट्यूब चैनल ने पार किए 30 मिलियन सब्सक्राइबर्स


    नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल ने 30 मिलियन यानी 3 करोड़ सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ ही वे यूट्यूब पर दुनिया के सबसे अधिक सब्सक्राइब किए जाने वाले राजनेता बन गए हैं। यह उपलब्धि न केवल उनकी लोकप्रियता को दर्शाती है, बल्कि डिजिटल माध्यमों पर उनकी सशक्त उपस्थिति का भी प्रमाण है।

    वैश्विक नेताओं में सबसे आगे
    सब्सक्राइबर संख्या के मामले में प्रधानमंत्री मोदी अपने वैश्विक समकक्षों से काफी आगे निकल गए हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति Jair Bolsonaro हैं, जिनके यूट्यूब चैनल पर लगभग 66 लाख (6.6 मिलियन) सब्सक्राइबर्स हैं। यह संख्या पीएम मोदी के मुकाबले करीब एक-चौथाई है।

    यूट्यूब पर मोदी की लोकप्रियता अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump से भी कहीं अधिक बताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के सब्सक्राइबर ट्रंप से कई गुना ज्यादा हैं। इससे स्पष्ट है कि भारतीय प्रधानमंत्री की डिजिटल पहुंच अब वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान बना चुकी है।

    देश के भीतर भी बड़ी बढ़त
    भारत में भी पीएम मोदी का डिजिटल प्रभाव स्पष्ट रूप से नजर आता है। सब्सक्राइबर संख्या के मामले में उनका चैनल कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के यूट्यूब चैनल से लगभग तीन गुना आगे है।

    इतना ही नहीं, उनके सब्सक्राइबरों की संख्या Aam Aadmi Party और Indian National Congress के आधिकारिक चैनलों की तुलना में चार गुना से भी अधिक बताई जा रही है। यह अंतर बताता है कि डिजिटल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में पीएम मोदी ने एक मजबूत और व्यापक दर्शक वर्ग तैयार किया है।

    सोशल मीडिया पर भी शतक
    यूट्यूब के साथ-साथ इंस्टाग्राम पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 100 मिलियन (10 करोड़) से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। इसके साथ ही वे इस आंकड़े को पार करने वाले दुनिया के पहले प्रमुख नेता बन गए हैं।

    2014 में इंस्टाग्राम से जुड़ने के बाद पीएम मोदी ने लगातार सक्रिय रहकर अपने अकाउंट को दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले राजनीतिक प्रोफाइल्स में शामिल कर दिया। वर्तमान में विश्व के बड़े नेताओं में उनके सबसे अधिक फॉलोअर्स बताए जाते हैं। खास बात यह है कि इंस्टाग्राम पर भी उनके फॉलोअर्स की संख्या डोनाल्ड ट्रंप से दोगुने से अधिक बताई जाती है।

    डिजिटल रणनीति का असर
    विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने शुरुआत से ही सोशल मीडिया को सीधे संवाद के माध्यम के रूप में अपनाया। उनके भाषण, कार्यक्रम, ‘मन की बात’, विदेश यात्राओं और सरकारी अभियानों से जुड़े वीडियो नियमित रूप से साझा किए जाते हैं, जिससे आम नागरिकों तक सीधा संदेश पहुंचता है।

    यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवा वर्ग के बीच भी खासा लोकप्रिय बनाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनकी पहुंच पारंपरिक मीडिया से आगे निकलती दिखाई दे रही है, जहां वे सीधे करोड़ों लोगों से संवाद स्थापित कर रहे हैं।

    वैश्विक प्रभाव की झलक
    30 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स के साथ पीएम मोदी का यूट्यूब चैनल अब विश्व स्तर पर नेताओं के बीच सबसे अधिक सब्सक्राइब किया जाने वाला चैनल बन चुका है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक राजनीति में डिजिटल कम्युनिकेशन की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

  • सिनेमा जगत में महासंग्राम: रणवीर बनाम फरहान विवाद में कूदे आमिर खान और ऋतिक रोशन, क्या कानूनी दांवपेच से सुलझेगी गुत्थी?

    सिनेमा जगत में महासंग्राम: रणवीर बनाम फरहान विवाद में कूदे आमिर खान और ऋतिक रोशन, क्या कानूनी दांवपेच से सुलझेगी गुत्थी?


    नई दिल्ली :भारतीय सिनेमा जगत की सबसे चर्चित फ्रेंचाइजी में से एक डॉन 3 इन दिनों अपनी कास्टिंग या स्क्रिप्ट से ज्यादा, अभिनेता रणवीर सिंह और निर्देशक फरहान अख्तर के बीच बढ़ते विवाद को लेकर सुर्खियों में है। पिछले ढाई साल से जिस प्रोजेक्ट का इंतजार दर्शक बेसब्री से कर रहे थे, अब वह कानूनी पचड़ों और आपसी मतभेदों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। ताजा खबरों के मुताबिक, रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच का यह मनमुटाव इस कदर बढ़ गया है कि अब बॉलीवुड के ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ आमिर खान और ऋतिक रोशन जैसे दिग्गजों को बीच-बचाव के लिए आगे आना पड़ा है।

    विवाद की मुख्य जड़ फिल्म से रणवीर सिंह का अचानक बाहर होना और उसके बाद फरहान की प्रोडक्शन कंपनी द्वारा मांगे गए 40 करोड़ रुपये के मुआवजे को माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रोडक्शन हाउस का दावा है कि रणवीर के हटने से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जबकि रणवीर सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस हर्जाने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट ने इस मामले में नया मोड़ दे दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस गंभीर आर्थिक और पेशेवर गतिरोध को सुलझाने के लिए आमिर खान, ऋतिक रोशन, राजकुमार हिरानी, जोया अख्तर, साजिद नाडियाडवाला और रमेश तौरानी जैसे बड़े फिल्ममेकर्स ने एक गुप्त मीटिंग की है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कानूनी कार्रवाई से बचते हुए आपसी सहमति से कोई बीच का रास्ता निकालना था।

    रणवीर सिंह ने इस मामले पर अपना कड़ा रुख अपनाते हुए फरहान अख्तर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अभिनेता का कहना है कि फरहान इस प्रोजेक्ट को लेकर कभी पूरी तरह गंभीर नहीं थे। रणवीर के अनुसार, उन्हें लीड रोल के लिए साइन करने के बावजूद फरहान समानांतर रूप से ऋतिक रोशन से भी बातचीत कर रहे थे। इसके अलावा, रणवीर का आरोप है कि फिल्म की स्क्रिप्ट तैयार नहीं थी और जब उन्होंने कुछ बदलावों का सुझाव दिया, तो मेकर्स ने उसे सिरे से खारिज कर दिया। इन्हीं रचनात्मक मतभेदों और विश्वास की कमी के चलते रणवीर ने खुद को डॉन 3 से अलग करना ही बेहतर समझा।

    दूसरी ओर, प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी अब इस मामले में सक्रियता दिखाई है और जरूरत पड़ने पर कानूनी विशेषज्ञों की मदद लेने की बात कही है। जहाँ एक तरफ डॉन के रूप में अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान की विरासत को आगे बढ़ाने का सपना अधूरा दिखता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ रणवीर सिंह का पूरा ध्यान अपनी हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म धुरंधर की सफलता पर है। पिछले साल बॉक्स ऑफिस हिला देने वाली धुरंधर के बाद, अब इसका दूसरा भाग यानी धुरंधर 2 आगामी 19 मार्च को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। दिलचस्प बात यह है कि उसी दिन साउथ सुपरस्टार यश की फिल्म टॉक्सिक भी रिलीज हो रही है, जिससे बॉक्स ऑफिस पर एक बड़े क्लैश की संभावना बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि फिल्म जगत के दिग्गज डॉन 3 के इस विवाद को सुलझा पाते हैं या यह मामला कोर्ट की दहलीज तक पहुंचेगा।

  • ईरान पर बढ़ा अमेरिकी दबाव: व्हाइट हाउस ने अमेरिकियों पर हमलों की सूची जारी की

    ईरान पर बढ़ा अमेरिकी दबाव: व्हाइट हाउस ने अमेरिकियों पर हमलों की सूची जारी की


    नई दिल्ली विगत लगभग पांच दशकों से अमेरिका की अलग-अलग सरकारें ईरान पर यह आरोप लगाती रही हैं कि वह मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी नागरिकों व सैन्यकर्मियों पर हुए हमलों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल रहा है। इसी क्रम में व्हाइट हाउस ने एक विस्तृत बयान जारी कर ऐसे हमलों की सूची साझा की है।

    बयान में ईरान को “दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश” बताते हुए कहा गया कि उसने “किसी भी अन्य आतंकवादी शासन से अधिक अमेरिकियों को मारा है।” साथ ही यह भी कहा गया कि राष्ट्रपति Donald Trump “वह कर रहे हैं जो पिछले पांच दशकों के राष्ट्रपतियों ने करने से परहेज किया-खतरे को हमेशा के लिए खत्म करना।”

    1979 से शुरू हुआ टकराव
    नवंबर 1979: तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 66 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाए रखा गया।

    अप्रैल 1983: लेबनान की राजधानी Beirut में अमेरिकी दूतावास पर आत्मघाती कार बम हमला, 17 अमेरिकी मारे गए।

    अक्टूबर 1983: बेरूत में मरीन कंपाउंड पर ट्रक बम धमाका, 241 अमेरिकी सैनिकों की मौत।

    1990 का दशक: बड़े आतंकी हमले
    1996: Saudi Arabia में अमेरिकी एयर फोर्स हाउसिंग कॉम्प्लेक्स पर ट्रक बम हमला, 19 एयरमैन की मौत, सैकड़ों घायल।

    1998: Kenya और Tanzania में अमेरिकी दूतावासों पर बम धमाके, 224 लोगों की मौत, जिनमें एक दर्जन अमेरिकी शामिल।

    इन हमलों के लिए अमेरिका ने ईरान समर्थित संगठनों-Hezbollah, Hamas और Islamic Jihad-को जिम्मेदार ठहराया।

    इराक युद्ध और उसके बाद
    2003–2011: इराक युद्ध के दौरान ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा कम से कम 603 अमेरिकी सैनिकों की हत्या का दावा।

    जनवरी 2007: कर्बला में अमेरिकी सैनिकों की हत्या, जिसमें ईरान की कुद्स फोर्स का नाम जोड़ा गया।

    पूर्व एफबीआई एजेंट Robert Levinson 2007 में ईरान में लापता हुए, जिनकी कथित रूप से हिरासत में मौत हो गई।

    हालिया घटनाएं
    जनवरी 2024: जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमला, तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए।

    अक्टूबर 2023: इजरायल पर हमले के दौरान 46 अमेरिकियों की मौत और 12 के अपहरण का आरोप ईरान समर्थित हमास पर लगाया गया।

    नवंबर 2024: एक ईरानी नागरिक और आईआरजीसी से जुड़े व्यक्ति पर डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश का आरोप।

    व्हाइट हाउस ने कहा कि अक्टूबर 2003 से नवंबर 2024 के बीच ईरान और उसके प्रॉक्सी द्वारा मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बलों पर 180 से अधिक हमले किए गए।

    गौरतलब है कि अमेरिका ने 1984 से ईरान को “आतंकवाद प्रायोजक देश” की सूची में शामिल कर रखा है। ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है और अमेरिकी नीतियों को क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए जिम्मेदार ठहराता है।

  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर भीषण झड़पें, अफगान सेना ने 8 पाकिस्तानी चौकियों पर किया कब्जा

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर भीषण झड़पें, अफगान सेना ने 8 पाकिस्तानी चौकियों पर किया कब्जा


    काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर फिर से संघर्ष भड़क गया है। अफगानिस्तान की तालिबान सेना ने सीमा पार करके पाकिस्तान में हमला किया और कई मिलिट्री पोस्टों पर कब्जा कर लिया। तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात कंधार और जाबुल प्रांतों में डूरंड लाइन पार कर अफगान सेना ने कार्रवाई की। मंत्रालय के डेप्युटी प्रवक्ता सेदिकुल्लाह नुसरत ने बताया कि अब तक अफगान सेना ने 8 पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्टों पर कब्जा कर लिया है।

    झड़पों में हुए नुकसान
    सूत्रों के अनुसार, कंधार में पांच, खोस्त में दो और जाबुल में एक पोस्ट पर कब्जा किया गया। कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक इलाके में अफगान सैनिकों ने तीन पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर कब्जा किया। इस हमले में तीन पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि एक को जिंदा पकड़ लिया गया।

    अफगान सैन्य सूत्रों ने बताया कि तालिबान के शासन वाली सेना ने पाकिस्तान का एक और ड्रोन मार गिराया। यह जाबुल प्रांत के शामुलजई जिले में उस समय गिराया गया जब ड्रोन लक्ष्य पर हमला करने जा रहा था। सोमवार को कंधार में एक और ड्रोन मार गिराया गया, यानी सोमवार को अफगान सेना ने कुल चार पाकिस्तानी ड्रोन नष्ट किए।

    पाकिस्तानी मिलिट्री बेस पर एयर स्ट्राइक
    तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने पहले ही सोमवार को बताया था कि उसने पाकिस्तान के कई अहम मिलिट्री बेस पर हमले किए हैं। मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई काबुल और अन्य क्षेत्रों पर पाकिस्तानी सेना के हवाई हमलों के जवाब में की गई। अफगान एयर फोर्स ने रावलपिंडी, बलूचिस्तान के क्वेटा, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य जगहों पर मिलिट्री बेस को निशाना बनाया। इस हमले में पाकिस्तानी सैन्य अड्डों को काफी नुकसान हुआ।

    सोमवार सुबह अफगान रक्षा बलों ने पक्तिका प्रांत में अंगूर अडा बेस के सामने पाकिस्तान के एक आर्मर्ड टैंक को नष्ट कर दिया। झड़पें केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहीं। अफगान रक्षा बलों ने अंगूर अडा इलाके में पाकिस्तान की सेना के खिलाफ जवाबी हमले भी किए।

    जवाबी हमलों का असर
    अफगान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इन ऑपरेशनों के चलते पाकिस्तानी सेना को कई जगहों पर पीछे हटना पड़ा। तालिबान की सेना के जवाबी हमले शुरू होने के बाद से 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, जबकि अफगान बलों ने 30 से ज्यादा चौकियों पर कब्जा कर लिया है। यह स्थिति सीमा पर तनाव को और बढ़ा रही है और दोनों देशों के बीच लड़ाई अब व्यापक पैमाने पर दिखाई दे रही है।

  • Iran-Israel War: कतर में फंसे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी, एयरस्पेस बंद और एयरपोर्ट न जाएं

    Iran-Israel War: कतर में फंसे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी, एयरस्पेस बंद और एयरपोर्ट न जाएं

    नई दिल्ली। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान बौखला गया है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कुवैत, सऊदी अरब, यूएई और बहरीन तक ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों के अलावा सिविलियन जगहों पर भी मिसाइलें दागनी शुरू कर दी हैं। इस कारण खाड़ी देशों में ज्यादातर देशों ने अपने हवाई ऑपरेशंस पर फिलहाल रोक लगा दी है। ऐसे समय बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों में फंस गए हैं। इसी बीच कतर में स्थित भारतीय दूतावास ने कतर में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। इसमें बताया गया है कि इजरायल-ईरान जंग के बीच भारतीय नागरिक किन दिशा-निर्देशों का पालन करें।

    बहुत जरूरी होने पर ही घर से निकलें
    कतर के दोहा में भारतीय दूतावास ने ट्वीट के माध्यम से कहा कि भारतीय समुदाय से अनुरोध है कि वे कतर के अधिकारियों द्वारा ऑफिशियल चैनलों से जारी की गई खबरों और गाइडलाइंस को ध्यानपूर्वक फॉलो करें। निवासियों से कहा गया है कि वे केवल वेरिफाइड और ऑफिशियल जानकारी पर भरोसा करें और केवल बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। सभी भारतीय नागरिकों से सख्ती से निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है।

    कब शुरू होगा फ्लाइट ऑपरेशन
    भारतीय दूतावास ने बताया कि कतर सिविल एविएशन अथॉरिटी ने पुष्टि की है कि कतर का एयरस्पेस फिलहाल बंद है। इसी कारण हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सभी फ्लाइट ऑपरेशन रोक दिए गए हैं। एयरस्पेस को सुरक्षित रूप से फिर से खोलने की घोषणा के बाद ही फ्लाइट संचालन फिर से शुरू होंगे। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरपोर्ट पर न जाएं और लेटेस्ट अपडेट के लिए अपनी एयरलाइन से लगातार संपर्क बनाए रखें।

    इस एडवाइजरी के माध्यम से कतर में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रहने और केवल आधिकारिक चैनलों से जानकारी लेने की हिदायत दी गई है, ताकि किसी तरह की अफवाह या गलत सूचना का असर न पड़े।

  • IND vs ENG T20 World Cup: 41 साल पुराना संयोग, जो टीम इंडिया को फाइनल में दे सकता है तीसरी ट्रॉफी

    IND vs ENG T20 World Cup: 41 साल पुराना संयोग, जो टीम इंडिया को फाइनल में दे सकता है तीसरी ट्रॉफी


    नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में 5 मार्च को वानखेड़े स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड आमने-सामने होंगे। इस मुकाबले को सिर्फ फाइनल में जगह बनाने की लड़ाई ही नहीं, बल्कि एक 41 साल पुराने ‘अजब-गजब’ संयोग की कहानी भी जोड़ रही है। इतिहास कहता है कि जब भी टीम इंडिया ने इंग्लैंड को सेमीफाइनल में हराया है, तब वह टूर्नामेंट का खिताब जीतती रही है। बता दें कि 8 मार्च को मुकाबले का फाइनल मैच खेला जाएगा।

    5वीं भिड़ंत और तीसरी ट्रॉफी का मौका
    आईसीसी टूर्नामेंट्स के रिकॉर्ड के अनुसार, भारत और इंग्लैंड अब तक चार बार सेमीफाइनल में भिड़ चुके हैं। 2-2 के परिणाम के साथ 5वीं भिड़ंत तय करेगी कि कौन आगे बढ़ेगा। अगर टीम इंडिया इस बार जीतती है, तो यह उसका तीसरा खिताब होगा। इसका आधार यही है कि भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ 1983 और 2024 के सेमीफाइनल में जीत दर्ज की और दोनों बार टूर्नामेंट जीतने में सफल रहा।

    भारत-इंग्लैंड सेमीफाइनल का ऐतिहासिक रिकार्ड
    पहला सेमीफाइनल (1983 वनडे वर्ल्ड कप): कपिल देव की कप्तानी में ‘अंडरडॉग’ भारत ने मेजबान इंग्लैंड को 6 विकेट से हराया। इंग्लैंड 213 रन पर ऑलआउट हुई, जबकि भारत ने 217 रन बनाकर जीत दर्ज की।

    दूसरा सेमीफाइनल (1987 वनडे वर्ल्ड कप): इंग्लैंड ने भारत को 254 रन बनाकर रोक दिया और भारत 219 रनों पर आउट हो गई। ग्राहम गूच ने 136 रनों की पारी खेली। यह मैच सुनील गावस्कर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच भी था।

    तीसरा सेमीफाइनल (2022 टी20 वर्ल्ड कप): इंग्लैंड ने भारत को 10 विकेट से करारी हार दी। भारत ने 168 रन बनाए, लेकिन जोस बटलर और एलेक्स हेल्स की साझेदारी ने लक्ष्य सिर्फ 16 ओवर में पूरा कर दिया।

    चौथा सेमीफाइनल (2024 टी20 वर्ल्ड कप): टीम इंडिया ने इंग्लैंड को 68 रनों से हराया। भारत ने 171 रन बनाए, जबकि इंग्लैंड 103 रन पर ऑलआउट हुई। रोहित शर्मा ने 57 रन बनाए और कुलदीप यादव तथा अक्षर पटेल ने 3-3 विकेट लिए।

    क्या इतिहास फिर से दोहराया जाएगा?
    अगर टीम इंडिया इस बार इंग्लैंड को हराती है, तो 41 साल पुराने संयोग को सही ठहराते हुए तीसरी ट्रॉफी भी उसके नाम दर्ज हो जाएगी। इस बार का मुकाबला केवल फाइनल के टिकट की नहीं, बल्कि टीम इंडिया की जीत की परंपरा और इतिहास दोहराने की चुनौती भी लेकर आया है।

  • धरती की समृद्धि का उत्सव! पीएम मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस पर रखा पर्यावरण संरक्षण पर जोर

    धरती की समृद्धि का उत्सव! पीएम मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस पर रखा पर्यावरण संरक्षण पर जोर


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए संदेश में कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस हमारे ग्रह को समृद्ध करने वाली अद्भुत जैव विविधता का उत्सव मनाने का अवसर है। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पित व्यक्तियों के योगदान की सराहना की और कहा कि हमें वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि हमारा वन्य जीवन फलता-फूलता रहे।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला: संरक्षण हमारा संवैधानिक दायित्व
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं। जैव विविधता का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की सुरक्षा का आधार है। उन्होंने भारत में वन और वन्यजीव संरक्षण की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में रामसर आर्द्रभूमियों की संख्या लगभग 100 तक पहुंच गई है। बिरला ने वन्यजीवों की रक्षा को कानूनी और नैतिक दायित्व बताते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प साझा किया।

    जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा: सतत विकास और तालमेल
    जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस पर हमें वन्य जीवन बचाने, इकोसिस्टम की रक्षा करने और इंसानी तरक्की तथा प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्रियों के संदेश
    केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस मनाते हुए हमें अपनी जैव विविधता को खतरों से बचाने और पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि जंगलों से लेकर समुद्रों तक, हर प्रजाति प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। वन्यजीवों की रक्षा करना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा फर्ज है।

    विश्व वन्यजीव दिवस केवल जश्न का दिन नहीं, बल्कि जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का अवसर है। भारत में नेतृत्वकर्ता और नागरिक मिलकर वन्य जीवन, पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने का संकल्प ले रहे हैं। यह दिन हर व्यक्ति को याद दिलाता है कि पृथ्वी की समृद्धि और संतुलन बनाए रखना हमारा साझा दायित्व है।

  • खाली पेट शराब पीना क्यों बन सकता है जानलेवा खतरा लिवर स्पेशलिस्ट की सख्त चेतावनी

    खाली पेट शराब पीना क्यों बन सकता है जानलेवा खतरा लिवर स्पेशलिस्ट की सख्त चेतावनी


    नई दिल्ली :शराब का सेवन सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है लेकिन जब इसे खाली पेट पिया जाता है तो इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अक्सर लोग पार्टियों या त्योहारों के दौरान बिना कुछ खाए ही शराब पीना शुरू कर देते हैं और यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार खाली पेट शराब शरीर में बहुत तेजी से असर दिखाती है और यह तेजी ही सबसे बड़ा खतरा बन जाती है।

    नई दिल्ली स्थित एक गैस्ट्रो और लिवर विभाग के डॉ .के अनुसार जब पेट में भोजन नहीं होता तब शराब पेट में ठहरने के बजाय सीधे छोटी आंत में पहुंच जाती है। छोटी आंत शराब को बेहद तेजी से अवशोषित कर लेती है और वह तुरंत रक्त प्रवाह में मिल जाती है। इससे ब्लड अल्कोहल कंसंट्रेशन अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि खाली पेट शराब पीने वाला व्यक्ति जल्दी नशे में आ जाता है उसका मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है उसे चक्कर आ सकते हैं और कई मामलों में बेहोशी तक हो सकती है।

    खाली पेट शराब पीने का सबसे बड़ा असर लिवर पर पड़ता है। लिवर का मुख्य कार्य खून में मौजूद विषैले तत्वों को फिल्टर करना है। जब शराब तेजी से अवशोषित होकर लिवर तक पहुंचती है तो उसे कम समय में अधिक मात्रा में अल्कोहल को प्रोसेस करना पड़ता है। इससे लिवर पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर फैटी लिवर हेपेटाइटिस और लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन की परत न होने पर शराब की तीव्रता लिवर कोशिकाओं को सीधे नुकसान पहुंचा सकती है।

    सिर्फ लिवर ही नहीं बल्कि पेट भी इससे बुरी तरह प्रभावित होता है। शराब की अम्लीय प्रकृति पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाती है। जब पेट खाली होता है तो शराब और पाचक अम्ल मिलकर गैस्ट्राइटिस अल्सर और तेज जलन का कारण बन सकते हैं। कई लोगों को उल्टी मतली और पेट दर्द की शिकायत होने लगती है। यदि यह आदत लंबे समय तक जारी रहे तो पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है और शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण भी प्रभावित हो सकता है।

    खाली पेट शराब का असर दिमाग पर भी तेजी से होता है। ब्लड में अल्कोहल की मात्रा अचानक बढ़ने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और ब्लैकआउट जैसी स्थिति भी बन सकती है। पोषक तत्वों की कमी के कारण नर्वस सिस्टम पर इसका प्रभाव और ज्यादा गहरा होता है जिससे भविष्य में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

    विशेषज्ञों की साफ सलाह है कि यदि कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता भी है तो उसे पहले पर्याप्त भोजन करना चाहिए और साथ में पर्याप्त पानी पीना चाहिए। इससे शराब का अवशोषण धीमा होता है और शरीर पर अचानक पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है। खाली पेट शराब पीना शरीर के साथ गंभीर खिलवाड़ है जिसके परिणाम लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

  • अजित पवार के बेटे ने वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों पर रोक की मांग की

    अजित पवार के बेटे ने वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों पर रोक की मांग की


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता Ajit Pawar के बेटे जय पवार ने 28 जनवरी 2026 को हुए विमान हादसे के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की उड़ानों को तुरंत रोकने की मांग की है। इस हादसे में उनके पिता का निधन हुआ था, जिसे लेकर जय पवार ने गंभीर सुरक्षा और लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

    वीडियो में कंपनी के मालिक रोहित सिंह मुख्य पायलट सीट पर उड़ान के दौरान सोते हुए दिखाई दे रहे हैं। जय पवार ने लिखा कि “मैंने अपने पिता को खो दिया है… यह पीड़ा जिंदगी भर मेरे साथ रहेगी। ऐसे लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।” उन्होंने DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) से अपील की है कि VSR की सभी उड़ानों को ग्राउंड किया जाए और रोहित सिंह के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

    DGCA की जांच के मुताबिक, 28 जनवरी को बारामती में VSR वेंचर्स के Learjet 45 (VT-SSK) विमान के क्रैश के बाद स्पेशल सेफ्टी ऑडिट कराया गया। ऑडिट में एयरवर्दीनेस, एयर सेफ्टी और फ्लाइट ऑपरेशन के नियमों के कई उल्लंघन सामने आए। इसके बाद DGCA ने चार एयरक्राफ्ट  को तुरंत ग्राउंड कर दिया।

    जय पवार ने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि महाराष्ट्र में हुए इस हादसे की पूरी और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। उन्होंने VSR वेंचर्स की उड़ानों पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जोरदार मांग की।

    यह मामला न केवल पवार परिवार के लिए बल्कि देश की नागरिक हवाई सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। DGCA ने नियमों का उल्लंघन सामने आने के बाद सख्त कदम उठाए हैं और जांच जारी है।