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  • मंत्रालय में मार्च माह के प्रथम कार्य दिवस पर हुआ सामूहिक राष्ट्र-गीत एवं राष्ट्र-गान गायन

    मंत्रालय में मार्च माह के प्रथम कार्य दिवस पर हुआ सामूहिक राष्ट्र-गीत एवं राष्ट्र-गान गायन


    भोपाल। मार्च माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर मंत्रालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने राष्ट्र गीत वंदे मातरम और राष्ट्र गान जन गण मन का सामूहिक गायन किया। यह कार्यक्रम मंत्रालय के सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में आयोजित किया गया।

    सामूहिक गान के दौरान पुलिस बैंड ने मधुर धुनों के माध्यम से कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव सचिव एम. रघुराज मंत्रालय वल्लभ भवन सतपुड़ा विंध्याचल भवन के अधिकारी कर्मचारी और पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

    इस आयोजन का उद्देश्य कर्मचारियों में राष्ट्रीय भावना को जागृत करना और शासकीय कार्यों के प्रति प्रतिबद्धता को बढ़ावा देना बताया गया। अधिकारियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान गाकर देशभक्ति की अनुभूति साझा की।

  • विद्युत समाधान योजना 2025-26 की अवधि 31 मार्च तक बढ़ी, एकमुश्त भुगतान पर 90% तक सरचार्ज माफी

    विद्युत समाधान योजना 2025-26 की अवधि 31 मार्च तक बढ़ी, एकमुश्त भुगतान पर 90% तक सरचार्ज माफी


    भोपाल। प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि मध्यप्रदेश सरकार की विद्युत समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय एवं अंतिम चरण की अवधि 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी गई है। पहले यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। अब तीन माह से अधिक समय से बकाया रखने वाले उपभोक्ता 31 मार्च तक एकमुश्त भुगतान कर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ ले सकेंगे।

    ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि योजना की शुरुआत 3 नवम्बर 2025 को की गई थी। इसका उद्देश्य ऐसे उपभोक्ताओं को राहत देना है जो सरचार्ज की अधिक राशि के कारण मूलधन जमा नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने अपील की है कि जो उपभोक्ता अभी तक योजना से नहीं जुड़ पाए हैं वे निर्धारित अवधि के भीतर पंजीयन कराकर इस विशेष छूट का लाभ उठाएं।

    21 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को राहत

    28 फरवरी 2026 तक 21 लाख 67 हजार बिजली उपभोक्ता इस योजना का लाभ ले चुके हैं। योजना के तहत कुल 1043 करोड़ 53 लाख रुपये की राशि जमा हुई है जबकि 388 करोड़ 77 लाख रुपये का सरचार्ज माफ किया गया है।मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के तहत 6 लाख 38 हजार जमादार लाभार्थियों ने पंजीयन कराया। कंपनी को 616 करोड़ 42 लाख रुपये की मूल राशि प्राप्त हुई और 285 करोड़ 39 लाख रुपये का सरचार्ज माफ किया गया।

    इसी प्रकार पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख से अधिक लाभार्थियों ने लाभ लिया। यहां 222 करोड़ 82 लाख रुपये जमा हुए और 73 करोड़ 7 लाख रुपये का सरचार्ज माफ किया गया। वहीं पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 29 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ उठाया। कंपनी के खाते में 204 करोड़ 29 लाख रुपये जमा हुए और 30 करोड़ 31 लाख रुपये का सरचार्ज माफ किया गया।

    एकमुश्त भुगतान पर अधिक लाभ

    समाधान योजना जल्दी आएं एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। एकमुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 प्रतिशत तक तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट दी जा रही है।योजना में शामिल होने के लिए उपभोक्ताओं को संबंधित विद्युत वितरण कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना होगा।
    घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं को कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर-घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं को 25 प्रतिशत राशि जमा कर पंजीयन कराना होगा। विस्तृत जानकारी संबंधित कंपनी की वेबसाइट या विद्युत वितरण केंद्र से प्राप्त की जा सकती है। सरकार का मानना है कि यह योजना बकायादार उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है और समय पर भुगतान की संस्कृति को भी बढ़ावा दे रही है।

  • चैती छठ 2026: 22 मार्च से शुरू होगा महापर्व, जानिए नहाय खाय से पारण तक की सटीक तिथियां

    चैती छठ 2026: 22 मार्च से शुरू होगा महापर्व, जानिए नहाय खाय से पारण तक की सटीक तिथियां


    नई दिल्ली । चैत्र मास की शुरुआत के साथ ही लोक आस्था का महापर्व चैती छठ आने वाला है। सूर्योपासना को समर्पित यह चार दिवसीय व्रत विशेष रूप से बिहार झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। छठ पर्व में भगवान Surya और Chhathi Maiya की उपासना की जाती है। मान्यता है कि यह व्रत संतान सुख दीर्घायु और परिवार की समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी होता है। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च से होगी और 25 मार्च को उषा अर्घ्य व पारण के साथ इसका समापन होगा।

    चैती छठ 2026 की प्रमुख तिथियां

    नहाय खाय 22 मार्च 2026 पहला दिन इस दिन व्रती पवित्र नदी या घर में स्नान कर शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। परंपरागत रूप से कद्दू भात कद्दू की सब्जी और चावल बनाया जाता है। इसी के साथ व्रत की औपचारिक शुरुआत होती है।

    खरना 23 मार्च 2026 दूसरा दिन

    व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर पूजा की जाती है। प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है।

    संध्या अर्घ्य 24 मार्च 2026 तीसरा दिन

    इस दिन अस्ताचलगामी सूर्य को नदी तालाब या जलाशय के किनारे अर्घ्य अर्पित किया जाता है। यह छठ पर्व का सबसे भावनात्मक और भव्य दृश्य होता है जब घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

    उषा अर्घ्य एवं पारण 25 मार्च 2026 चौथा दिन

    अगली सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही व्रत का समापन होता है और प्रसाद ग्रहण कर पारण किया जाता है।
    चैती छठ का धार्मिक महत्व
    यह पर्व शुद्धता संयम और अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। मान्यता है कि व्रत करने से संतान सुख और परिवार की खुशहाली प्राप्त होती है। चैत्र मास में होने के कारण इसे विशेष आध्यात्मिक फल देने वाला माना जाता है।छठ पूजा में बनाया जाने वाला ठेकुआ मुख्य प्रसाद होता है जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। चैती छठ प्रकृति सूर्य और जल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। चार दिनों तक चलने वाला यह व्रत आत्मसंयम भक्ति और पारिवारिक एकता का संदेश देता है।

  • फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा


    नई दिल्ली । फाल्गुन मास की पूर्णिमा सनातन परंपरा में अत्यंत पावन मानी गई है। इसे वसंत पूर्णिमा और होली पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम पूर्णिमा होती है और इस दिन भगवान Vishnu माता Lakshmi भगवान Narasimha तथा Radha Krishna की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से व्रत और पूजा करने से सुख समृद्धि सौभाग्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026 का शुभ मुहूर्त

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे तक रहेगी। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक लगने के कारण पूजा में बाधा रहेगी इसलिए 2 मार्च 2026 को व्रत रखना अधिक शुभ माना गया है।

    फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

    पूर्णिमा व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है। इस दिन स्नान दान जप और पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे धन धान्य में वृद्धि होती है और कुंडली में चंद्र दोष होने पर मानसिक शांति मिलती है। व्रत करने वालों को अगले दिन स्नान दान अवश्य करना चाहिए तभी व्रत पूर्ण फलदायी माना जाता है।
    फाल्गुन पूर्णिमा व्रत विधि
    प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें। घर में स्वच्छ स्थान पर लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। तिलक पुष्प और वस्त्र अर्पित करें।  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। भोग लगाकर पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल में कच्चा दूध मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें। अगले दिन दान पुण्य अवश्य करें।

    विशेष मंत्र और महाउपाय

    फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न वस्त्र या धन का दान करने से लक्ष्मी कृपा स्थायी होती है।यह दिन भक्ति श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। विधि विधान से श्री लक्ष्मीनारायण की आराधना करने पर जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

  • Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को दिखेगा ब्लड मून, जानिए ग्रहण से जुड़ी 15 जरूरी बातें

    Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को दिखेगा ब्लड मून, जानिए ग्रहण से जुड़ी 15 जरूरी बातें


    नई दिल्ली । 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। यह खगोलीय घटना इसलिए खास है क्योंकि इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। भारत में भी यह ग्रहण देखा जा सकेगा। आइए ग्रहण से जुड़े 15 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सरल भाषा में समझते हैं।

    चंद्र ग्रहण कब लगेगा?

    3 मार्च 2026 मंगलवार को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। भारत में ग्रहण का समय क्या रहेगा? भारतीय समयानुसार ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:47 बजे समाप्त होगा। भारत में यह मुख्यतः चंद्रोदय के समय दिखाई देगा।

    क्या यह पूरे भारत में दिखेगा?

    हाँ, पूरे भारत में देखा जा सकेगा, लेकिन अधिकांश जगहों पर इसका अंतिम आंशिक चरण ही दिखाई देगा। पूर्वोत्तर राज्यों में दृश्य अधिक स्पष्ट रहेगा।

    सूतक काल कब से लगेगा?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू होता है। यानी सुबह लगभग 6:20 बजे से सूतक मान्य होगा।

    ब्लड मून क्या होता है?

    पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुँचती, बल्कि पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर लाल प्रकाश चंद्रमा तक जाता है। इससे चंद्रमा तांबे या लाल रंग का दिखता है इसे ही ब्लड मून कहते हैं।

    क्या चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देख सकते हैं?

    हाँ, चंद्र ग्रहण को बिना किसी विशेष उपकरण के सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।

    क्या इसे देखने के लिए चश्मा जरूरी है?
    नहीं। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण देखने के लिए विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती।

    क्या गर्भवती महिलाओं को सावधानी रखनी चाहिए?
    वैज्ञानिक रूप से कोई हानिकारक प्रभाव सिद्ध नहीं है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    क्या ग्रहण के दौरान खाना खा सकते हैं?

    वैज्ञानिक दृष्टि से खाना खाने पर कोई रोक नहीं है। धार्मिक मान्यताओं में सूतक काल में भोजन न करने की परंपरा है।

    मंदिर कब बंद होंगे?
    अधिकांश मंदिर सूतक काल से ही बंद कर दिए जाते हैं और ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण के पश्चात खुलते हैं।

    क्या ग्रहण का असर राशियों पर पड़ता है?
    ज्योतिष के अनुसार कुछ राशियों पर प्रभाव बताया जाता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसका कोई प्रमाण नहीं है।

    ग्रहण कितनी देर का होगा?
    कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी, लेकिन भारत में पूरा चरण दिखाई नहीं देगा।

    क्या यह साल का इकलौता चंद्र ग्रहण है?
    नहीं, 2026 में अन्य ग्रहण भी लग सकते हैं, लेकिन 3 मार्च का यह पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा।

    ग्रहण क्यों लगता है?
    जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है।

    यह घटना क्यों खास है?
    पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का लाल रंग में बदलना एक दुर्लभ और आकर्षक दृश्य होता है, जिसे देखने के लिए खगोल प्रेमी विशेष इंतजार करते हैं। 3 मार्च की शाम आसमान में दिखने वाला ब्लड मून विज्ञान और आस्था दोनों के लिए खास अनुभव होगा। यदि मौसम साफ रहा तो यह नजारा बेहद मनमोहक होगा।

  • डालर चने के दाम पर किसानों का गुस्सा, ट्रैक्टरों से हाईवे जाम

    डालर चने के दाम पर किसानों का गुस्सा, ट्रैक्टरों से हाईवे जाम


    खरगोन। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में डालर चने के कम दाम को लेकर किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। किसानों ने बावड़ी बस स्टैंड के पास चित्तौड़गढ़-भुसावल राजमार्ग पर ट्रैक्टर खड़े कर रास्ता जाम कर दिया और जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि डालर चने का उचित समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। वर्तमान में 6 से 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी हो रही है, जबकि उनकी मांग है कि भाव कम से कम 10 से 12 हजार रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए। किसानों के मुताबिक उत्पादन लागत, बीज, खाद और मजदूरी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए मौजूदा दर घाटे का सौदा साबित हो रही है।

    ट्रैक्टरों से रोका यातायात

    आक्रोशित किसानों ने अपने ट्रैक्टर सड़क पर खड़े कर हाईवे पूरी तरह जाम कर दिया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात बाधित हो गया। यात्री बसें, ट्रक और अन्य वाहन घंटों फंसे रहे। स्थिति की जानकारी मिलते ही एसडीएम वीरेंद्र कटारे और कर्नाटक टीआई बीएल मंडलोई पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर समाधान निकालने की कोशिश की। बाद में किसानों और प्रशासन के बीच मंडी परिसर में बातचीत शुरू हुई।

    वाजिब दाम नहीं तो आंदोलन तेज होगा
    प्रदर्शन कर रहे किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि डालर चने के दाम में बढ़ोतरी नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर समर्थन मूल्य बढ़ाना चाहिए, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। फिलहाल प्रशासन किसानों से संवाद कर रास्ता निकालने का प्रयास कर रहा है। हालांकि किसानों के तेवर देखते हुए यह मुद्दा क्षेत्र में बड़ा आंदोलन बन सकता है।

  • मिडिल ईस्ट संकट का असर, दुबई एयरपोर्ट तीन दिन से बंद-3,000 से अधिक फ्लाइट रद्द

    मिडिल ईस्ट संकट का असर, दुबई एयरपोर्ट तीन दिन से बंद-3,000 से अधिक फ्लाइट रद्द


    नई दिल्ली। सोमवार को दुनिया भर में हवाई यात्रा पर संकट जारी रहा। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद सैकड़ों उड़ानें रद्द की गईं, जिससे लाखों यात्री प्रभावित हुए। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सोमवार सुबह तक 1,239 उड़ानें पहले ही रद्द हो चुकी थीं। शनिवार को लगभग 2,800 और रविवार को 3,156 उड़ानें रद्द हुई थीं। फ्लाइट रेडार 24 के अनुसार ईरान, इराक, कुवैत, इज़राइल, बहरीन, यूएई और कतर के ऊपर हवाई क्षेत्र लगभग खाली दिख रहा था।

    दुबई और खाड़ी के हवाई अड्डों पर सबसे बड़ा असर


    मध्य पूर्व के प्रमुख हवाई अड्डों को सबसे अधिक झटका लगा है। दुबई एयरपोर्ट तीसरे दिन भी बंद रहा। अबू धाबी और दोहा के एयरपोर्ट या तो पूरी तरह बंद रहे या सीमित सेवाओं के साथ ही संचालित हुए। एमिरेट्स ने दुबई से सभी निर्धारित उड़ानें निलंबित कर दीं, एतिहाद एयरवेज ने अबू धाबी के लिए सेवाएं रोक दीं, और कतर एयरवेज ने कतर के हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उड़ान संचालन स्थगित किया। इन तीनों एयरलाइंस ने मिलकर सैकड़ों फ्लाइट्स रद्द कीं।

    भारत और एशिया पर असर


    संकट का असर भारत पर भी पड़ा। एयर इंडिया ने दिल्ली, मुंबई और अमृतसर से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानें रद्द कर दीं। यूरोप और एशिया तक कनेक्टिंग फ्लाइट्स बाधित होने से यात्री बाली से फ्रैंकफर्ट तक फंसे हुए हैं। रविवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से 100 उड़ानें रद्द की गईं।

    अनिश्चितता और विमानन उद्योग पर दबाव

    विश्लेषकों का कहना है कि जैसे-जैसे संघर्ष लंबा खिंचेगा, विमानन उद्योग को वित्तीय नुकसान बढ़ता जाएगा। पायलट और क्रू अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं, जिससे हवाई क्षेत्र खुलने के बाद भी सेवाओं को तुरंत बहाल करना चुनौतीपूर्ण होगा। लेबनान तक संघर्ष फैलने और बेरूत में हवाई हमलों के कारण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बंद हवाई क्षेत्र में तब्दील हो गया।

    वैश्विक प्रभाव


    मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक टकराव, बंद हवाई क्षेत्र और बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक हवाई यात्रा को फिर अस्थिर कर दिया है। यात्रियों और एयरलाइंस दोनों के लिए यह कोविड-19 महामारी के बाद का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। इस संकट की लंबी अवधि में वैश्विक यात्रा की नियमितता पर गंभीर असर पड़ सकता है, और उद्योग को वित्तीय तथा परिचालन दोनों प्रकार के दबावों का सामना करना पड़ेगा।
  • जन्मदिन पर अपराधी को कंधे पर बैठाया, टीआई दर्शन शुक्ला निलंबित; सीएम डॉ. मोहन यादव की सख्त कार्रवाई

    जन्मदिन पर अपराधी को कंधे पर बैठाया, टीआई दर्शन शुक्ला निलंबित; सीएम डॉ. मोहन यादव की सख्त कार्रवाई


    भोपाल/मुरैना। मध्यप्रदेश में पुलिस की छवि को धक्का पहुंचाने वाले एक वायरल वीडियो पर मुख्यमंत्रीमोहन यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए मुरैना जिले के जौरा थाना प्रभारी निरीक्षक दर्शन शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में टीआई शुक्ला कथित बाइक चोर गिरोह के सरगनालवकुश शर्मा के कंधे पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। बताया गया कि यह वीडियो थाना परिसर में मनाए गए जन्मदिन समारोह का है, जहां केक काटा गया और ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे थे।

    सीएम के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई
    मामले की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कड़ी नाराजगी जताई और शासन को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देश के बाद मुरैना एसपी कार्यालय से निलंबन आदेश जारी किया गया। आदेश में उल्लेख है कि 28 फरवरी 2026 को थाना प्रभारी जौरा निरीक्षक दर्शन शुक्ला अपने जन्मदिन समारोह के दौरान आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति लवकुश शर्मा के साथ उपस्थित थे।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लवकुश शर्मा पर थाना कोतवाली क्षेत्र में मोटरसाइकिल चोरी और थाना जौरा क्षेत्र में शासकीय कार्य में बाधा डालने जैसे मामले दर्ज हैं। ऐसे व्यक्ति के साथ थाना परिसर में जश्न मनाना पुलिस आचरण संहिता के विपरीत माना गया।

    पुलिस रेगुलेशन का उल्लंघन
    आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यह आचरण मध्यप्रदेश पुलिस रेगुलेशन के पैरा 64(3)(11) का उल्लंघन है और इससे पुलिस की निष्पक्ष छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसी आधार पर निरीक्षक दर्शन शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।

    निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय रक्षित केंद्र, मुरैना निर्धारित किया गया है। उन्हें बिना लिखित अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी और प्रत्येक गणना में उपस्थित रहना अनिवार्य रहेगा। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

    कर्तव्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या आपराधिक तत्वों से निकटता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई पुलिस महकमे के लिए कड़ा संकेत मानी जा रही है कि शासन अपराधियों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी को स्वीकार नहीं करेगा।

  • नागलवाड़ी में पहली कृषि कैबिनेट, लोक देवता भीलट देव से समृद्धि की कामना

    नागलवाड़ी में पहली कृषि कैबिनेट, लोक देवता भीलट देव से समृद्धि की कामना


    भोपाल/बड़वानी। किसान कल्याण वर्ष के संकल्प के साथ मध्यप्रदेश सरकार की पहली कृषि कैबिनेट की शुरुआत आस्था और परंपरा के वातावरण में हुई। मुख्यमंत्री मोहन यादव और मंत्रि परिषद के सदस्यों ने बड़वानी जिले के नागलवाड़ी स्थित भीलट देव मंदिर में निमाड़ मालवा के लोक देवता भीलट देव के दर्शन कर प्रदेश के किसानों की सुख समृद्धि की कामना की। सतपुड़ा की सुरम्य पहाड़ियों पर बसे इस तपोभूमि में आयोजित कैबिनेट बैठक ने विकास और संस्कृति के समन्वय का संदेश दिया।

    दर्शन के उपरांत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि निमाड़ मालवा क्षेत्र के आराध्य भीलट देव के आशीर्वाद से जो भी निर्णय लिए जाएंगे, वे किसानों और प्रदेशवासियों के हित में होंगे। मुख्यमंत्री ने निमाड़ क्षेत्र को मां नर्मदा का वरदान बताते हुए कहा कि नर्मदा के जल से सिंचित यह भूमि किसानों को समृद्ध और प्रगतिशील बना रही है। सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से बड़वानी सहित पूरे निमाड़ क्षेत्र में खेती को नई मजबूती मिली है।

    उन्होंने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उत्पादन कम हो सकता है, लेकिन इससे मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ेगी और दीर्घकाल में उत्पादन क्षमता में स्थायी वृद्धि होगी। किसानों की आर्थिक उन्नति को ही प्रदेश की समग्र उन्नति का आधार बताते हुए उन्होंने कृषि सुधारों को सरकार की प्राथमिकता बताया।

    मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर की भव्यता और सकारात्मक ऊर्जा की सराहना करते हुए कहा कि सतपुड़ा की वादियों में बसा नागलवाड़ी का यह धाम आध्यात्मिक शक्ति से परिपूर्ण है। मंदिर के जीर्णोद्धार में संत श्री सियाराम बाबा के योगदान का भी उन्होंने स्मरण किया। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री और मंत्रि परिषद सदस्यों ने सामूहिक रूप से मंदिर परिसर में फोटो भी खिंचवाया।

    कैबिनेट बैठक से पूर्व मुख्यमंत्री ने निमाड़ क्षेत्र की कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में प्राकृतिक खेती के प्रभावी मॉडल, वोकल फॉर लोकल, केला विकास मॉडल, डॉलर चना की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला, बड़वानी मिर्च प्लास्टर, तिल को उभरती फसल के रूप में प्रोत्साहन, गन्ना आधारित आर्थिक मॉडल, मिशन सिकलसेल उन्मूलन और वन्य ग्राम समृद्धि अभियान जैसी थीम प्रस्तुत की गईं। बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह ने विभिन्न कृषि पहलों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया।

    नागलवाड़ी में आयोजित यह पहली कृषि कैबिनेट केवल प्रशासनिक बैठक नहीं रही, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सरकार परंपरा, प्रकृति और प्रगति को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है। लोक आस्था के आंगन से शुरू हुआ यह संकल्प किसानों की समृद्धि और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • रंग नहीं, राख की होली! कर्नाटक के इस मंदिर में अनोखी परंपरा, शिव-कामदेव से जुड़ा इतिहास

    रंग नहीं, राख की होली! कर्नाटक के इस मंदिर में अनोखी परंपरा, शिव-कामदेव से जुड़ा इतिहास


    नई दिल्ली। देशभर में 4 मार्च को होली का उल्लास छाएगा। जहां उत्तर भारत में यह पर्व प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा है, वहीं दक्षिण भारत में इसका संबंध भगवान शिव और कामदेव की कहानी से माना जाता है। यहां होली को अहंकार के नाश और आत्मशुद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    गर्भगृह में साथ विराजते हैं शिव और कामदेव


    कर्नाटक का Rama Lingeshwara Kamanna Temple अपनी अनोखी परंपरा के कारण प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यह दक्षिण भारत का पहला मंदिर है, जहां गर्भगृह में भगवान शिव के साथ कामदेव की प्रतिमा स्थापित है। शिवलिंग के समीप ध्यान मुद्रा में विराजमान कामदेव की मूर्ति इस मंदिर को विशेष बनाती है। मान्यता है कि होली के दिन यहां दोनों के एक साथ दर्शन करने से पापों का नाश होता है और जीवन से अहंकार दूर होता है।

    कामदेव और शिव की कथा

    पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव गहन तपस्या में लीन हो गए थे। सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने के लिए देवताओं ने कामदेव से मदद मांगी। कामदेव ने शिव की तपस्या भंग करने के लिए कामबाण चलाया। तप भंग होने पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर अपना तीसरा नेत्र खोला, जिसकी ज्वाला से कामदेव भस्म हो गए। यह घटना अहंकार के अंत का प्रतीक मानी जाती है।

    राख से खेली जाती है होली


    इसी कथा की स्मृति में इस मंदिर में होली के दिन रंगों की जगह राख का प्रयोग किया जाता है। श्रद्धालु माथे पर राख लगाते हैं, जिसे कामदेव के दहन और अहंकार के नाश का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि शक्ति या सौंदर्य का घमंड क्षणभर में मिट सकता है।

    पांच दिन चलता है उत्सव


    रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर में होली का उत्सव पांच दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान होते हैं। भक्त चांदी की वस्तुएं, खासकर चांदी का पालना अर्पित करते हैं। मान्यता है कि संतान की इच्छा रखने वाले दंपत्ति अगर श्रद्धा से चांदी का झूला चढ़ाते हैं तो उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।