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  • दिल्ली में ट्रायल में हुए रिजेक्ट, पिता ने तीन दिन में बदल दी किस्मत: संजू सैमसन ने सुनाया संघर्ष का प्रेरक किस्सा

    दिल्ली में ट्रायल में हुए रिजेक्ट, पिता ने तीन दिन में बदल दी किस्मत: संजू सैमसन ने सुनाया संघर्ष का प्रेरक किस्सा


    नई दिल्ली । टी20 विश्व कप 2026 में भारत की खिताबी जीत के अहम नायकों में शामिल विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने अपने क्रिकेट करियर के शुरुआती संघर्षों का भावुक किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की टीम में बार-बार जगह नहीं मिलने के बाद उनके पिता ने ऐसा फैसला लिया जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।

    जियोस्टार के शो ‘सुपरस्टार्स’ में बातचीत के दौरान संजू ने कहा कि बचपन में वह अपने दोस्तों को डीडीसीए की जैकेट पहनकर दिल्ली की टीम के लिए खेलते देखते थे। इससे उनके मन में भी दिल्ली का प्रतिनिधित्व करने का सपना जगा। उन्होंने कई बार ट्रायल दिए, स्टेट कैंप तक पहुंचे और अच्छे रन भी बनाए, लेकिन अंतिम टीम में कभी जगह नहीं मिली।

    संजू ने बताया कि एक ट्रायल के बाद जब चयनित खिलाड़ियों की सूची जारी हुई तो उसमें उनका नाम नहीं था। वह और उनके पिता चुपचाप घर लौट आए। घर पहुंचते ही उनके पिता विश्वनाथन ने मां से कहा कि अब परिवार को केरल जाना होगा। मां ने बच्चों की पढ़ाई का हवाला देते हुए कुछ साल रुकने की सलाह दी, लेकिन पिता अपने फैसले पर अडिग रहे।

    उन्होंने कहा कि पिता ने साफ शब्दों में कहा कि अब और इंतजार नहीं होगा। तीन दिन के भीतर टिकट बुक हुई और पूरा परिवार ट्रेन से केरल रवाना हो गया। वहीं से उनके क्रिकेट करियर का नया अध्याय शुरू हुआ और उन्होंने केरल की ओर से खेलना शुरू किया।

    संजू ने दिल्ली में अपने बचपन की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके पिता दिल्ली पुलिस की फुटबॉल टीम से जुड़े थे और रोज अभ्यास के लिए जाते थे। खेल का माहौल देखकर बचपन से ही उन्हें भी खिलाड़ी बनने की प्रेरणा मिली। पुलिस कॉलोनी की सड़कों पर टेनिस बॉल से गली क्रिकेट खेलते-खेलते उनका क्रिकेट के प्रति जुनून बढ़ता गया।

    उन्होंने बताया कि उनके पिता ने कभी फुटबॉल खेलने के लिए मजबूर नहीं किया। हालांकि वे फुटबॉल भी खेलते थे, लेकिन पिता ने उनकी बल्लेबाजी देखकर महसूस किया कि क्रिकेट में उनका भविष्य बेहतर हो सकता है। इसके बाद उन्होंने संजू और उनके भाई दोनों को क्रिकेट पर पूरा ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

    संजू ने दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम (तत्कालीन फिरोज शाह कोटला) से जुड़ी एक खास याद भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक बार उनके पिता की वहां ड्यूटी थी। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध कर उन्हें नेट्स में अभ्यास करने का मौका दिलाया। संजू, उनके भाई और पिता ने करीब एक घंटे तक नेट्स में अभ्यास किया। संजू ने कहा कि उन्हें आज भी समझ नहीं आता कि उस समय उनके पिता ने यह कैसे संभव किया, लेकिन वही पल उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।

    संजू सैमसन की यह कहानी बताती है कि प्रतिभा के साथ सही समय पर लिया गया साहसी फैसला और परिवार का अटूट विश्वास किसी भी खिलाड़ी की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

  • गुरुग्राम में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान चंद्रचूड़ सिंह के घर के बाहर हुई कार्रवाई, अभिनेता का शांत व्यवहार बना चर्चा का विषय

    गुरुग्राम में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान चंद्रचूड़ सिंह के घर के बाहर हुई कार्रवाई, अभिनेता का शांत व्यवहार बना चर्चा का विषय

    नई दिल्ली । हरियाणा के गुरुग्राम में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह के आवास के बाहर भी प्रशासन ने कार्रवाई की। यह अभियान डीएलएफ फेज-1 से फेज-5 तक विभिन्न स्थानों पर कथित अवैध निर्माण हटाने के लिए चलाया गया। इसी दौरान अभिनेता के घर के बाहर भी बुलडोजर पहुंचा और प्रशासनिक टीम ने निर्धारित दायरे में कार्रवाई की। घटना के दौरान अभिनेता का शांत और संयमित व्यवहार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    जानकारी के अनुसार प्रशासन की टीम जब चंद्रचूड़ सिंह के आवास के बाहर पहुंची तो अभिनेता स्वयं घर से बाहर आए और अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने शांतिपूर्वक यह समझने का प्रयास किया कि कार्रवाई किस सीमा तक की जाएगी। बातचीत के दौरान उन्होंने किसी प्रकार का विरोध या विवाद नहीं किया और पूरी प्रक्रिया के दौरान संयम बनाए रखा।

    घटनास्थल पर मौजूद लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं। वीडियो में अभिनेता प्रशासनिक अधिकारियों से सामान्य तरीके से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। उनके व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर अनेक लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कई उपयोगकर्ताओं ने उनकी सादगी, शालीनता और संयम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी स्थिति को बेहद संतुलित तरीके से संभाला।

    गुरुग्राम प्रशासन इन दिनों शहर के विभिन्न इलाकों में अतिक्रमण हटाने और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चला रहा है। इसी क्रम में डीएलएफ क्षेत्र के कई हिस्सों में भी कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप सार्वजनिक स्थानों और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करना है।

    चंद्रचूड़ सिंह हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल रहे हैं जिन्होंने 1990 के दशक में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने कई सफल फिल्मों में अभिनय कर दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की। बाद के वर्षों में स्वास्थ्य और निजी कारणों से उन्होंने फिल्मी दुनिया से कुछ समय के लिए दूरी बना ली थी, लेकिन हाल के वर्षों में उन्होंने अभिनय में वापसी भी की।

    अभिनेता का पारिवारिक संबंध एक प्रतिष्ठित परिवार से माना जाता है। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी रह चुके थे और सार्वजनिक जीवन से भी जुड़े रहे, जबकि उनकी मां का संबंध पूर्व रियासती परिवार से बताया जाता है। इसके बावजूद अभिनेता का सरल और विनम्र स्वभाव अक्सर चर्चा का विषय रहा है।

    गुरुग्राम में हुई इस कार्रवाई के दौरान भी उनका शांत रवैया लोगों का ध्यान आकर्षित करता दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में अधिकांश प्रतिक्रियाएं उनके संयमित व्यवहार की प्रशंसा करती नजर आ रही हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने का अभियान विभिन्न क्षेत्रों में जारी है और निर्धारित मानकों के अनुसार आगे भी कार्रवाई की जा रही है।

  • इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो करने से तेज हुईं चर्चाएं, प्रिंस नरूला और युविका चौधरी के रिश्ते पर उठे सवाल, आधिकारिक बयान का इंतजार

    इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो करने से तेज हुईं चर्चाएं, प्रिंस नरूला और युविका चौधरी के रिश्ते पर उठे सवाल, आधिकारिक बयान का इंतजार

    नई दिल्ली । टेलीविजन जगत के चर्चित दंपति प्रिंस नरूला और युविका चौधरी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा उनके किसी नए प्रोजेक्ट या सार्वजनिक बयान को लेकर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर हुई एक गतिविधि को लेकर शुरू हुई है। दोनों के इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो करने की जानकारी सामने आने के बाद उनके रिश्ते को लेकर विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अब तक इस विषय पर दोनों कलाकारों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    सोशल मीडिया पर सक्रिय प्रशंसकों ने सबसे पहले यह बदलाव नोटिस किया कि दोनों अब एक-दूसरे की प्रोफाइल को फॉलो नहीं कर रहे हैं। इसके बाद कई प्लेटफॉर्म पर उनके वैवाहिक संबंधों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे रिश्ते में दूरी का संकेत बताया, जबकि कई अन्य लोगों ने बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की सलाह दी।

    दिलचस्प बात यह है कि इंस्टाग्राम पर अनफॉलो किए जाने के बावजूद कुछ संकेत ऐसे भी हैं जो अलग तस्वीर पेश करते हैं। प्रिंस नरूला की प्रोफाइल पर अब भी उनके नाम के साथ युविका का नाम जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। इसके अलावा दोनों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक-दूसरे के साथ साझा की गई पुरानी तस्वीरें या यादगार पोस्ट हटाई नहीं हैं। यही वजह है कि कई प्रशंसकों का मानना है कि यह केवल सोशल मीडिया से जुड़ा बदलाव भी हो सकता है।

    प्रिंस नरूला और युविका चौधरी की प्रेम कहानी टेलीविजन के लोकप्रिय रियलिटी शो के दौरान शुरू हुई थी। शो में हुई दोस्ती समय के साथ गहरे रिश्ते में बदली और दोनों ने कई वर्षों तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद वर्ष 2018 में विवाह किया। शादी के बाद यह जोड़ी मनोरंजन जगत की चर्चित जोड़ियों में शामिल रही और सोशल मीडिया पर भी दोनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही।

    वर्ष 2024 में दोनों ने अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करते हुए बेटी का स्वागत किया। शुरुआत में उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखने की कोशिश की, लेकिन बाद में एक विशेष अवसर पर अपनी बेटी की पहली झलक प्रशंसकों के साथ साझा की थी। इसके बाद से परिवार से जुड़ी उनकी तस्वीरों और वीडियो को भी दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिलता रहा।

    यह पहला अवसर नहीं है जब इस दंपति के रिश्ते को लेकर चर्चाएं सामने आई हों। इससे पहले भी युविका की गर्भावस्था के दौरान उनके अलग रहने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गई थीं। बाद में युविका ने स्पष्ट किया था कि वह स्वास्थ्य संबंधी सुविधा और घर में चल रहे काम के कारण कुछ समय अपनी मां के घर रह रही थीं। उस स्पष्टीकरण के बाद उन अफवाहों पर विराम लग गया था।

    फिलहाल इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो किए जाने के आधार पर उनके रिश्ते को लेकर किसी भी प्रकार का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी माना जा रहा है। जब तक प्रिंस नरूला या युविका चौधरी स्वयं इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं करते, तब तक सामने आ रही चर्चाओं को केवल अटकलों के रूप में ही देखा जा सकता है। प्रशंसकों की नजर अब दोनों की संभावित प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।

  • जमीन के झगड़े में ग्रामीण को पीटकर जिंदा जलाने का आरोप: इलाज के दौरान मौत, पोते ने कहा- मेरी आंखों के सामने डीजल डालकर लगा दी आग

    जमीन के झगड़े में ग्रामीण को पीटकर जिंदा जलाने का आरोप: इलाज के दौरान मौत, पोते ने कहा- मेरी आंखों के सामने डीजल डालकर लगा दी आग


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के पोहरी थाना क्षेत्र के नयागांव में जमीन विवाद को लेकर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक ग्रामीण को कथित तौर पर पहले बेरहमी से पीटा गया और फिर उस पर डीजल डालकर आग लगा दी गई। गंभीर रूप से झुलसे ग्रामीण की शनिवार सुबह जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर जांच शुरू कर दी है और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    मृतक की पहचान अरविंद धाकड़ के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक परिवार में काफी समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था, जिसका मामला अदालत में विचाराधीन है। गुरुवार को अरविंद धाकड़ और उनके परिजनों ने विवादित जमीन पर बोवनी की थी। शुक्रवार दोपहर वह अपने पोते अंशुल धाकड़ के साथ खेत पर फसल देखने पहुंचे थे। इसी दौरान आरोप है कि दूसरे पक्ष के कुछ लोग वहां पहुंचे और विवाद हिंसक हो गया।

    मृतक के पोते अंशुल धाकड़ ने आरोप लगाया कि प्रकाश धाकड़, आशा धाकड़, बंटी धाकड़, हरिओम धाकड़, हरिशंकर और विमल धाकड़ ने आते ही उन पर और उनके दादा पर लाठियों से हमला कर दिया। अंशुल किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग निकला, लेकिन उसने दूर से देखा कि आरोपी उसके दादा की लगातार पिटाई कर रहे थे। अंशुल का आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने ट्रैक्टर से डीजल निकालकर अरविंद धाकड़ के ऊपर डाला और उन्हें आग के हवाले कर दिया।

    घटना के समय अंशुल के पास मोबाइल फोन नहीं था। वह दौड़कर घर पहुंचा और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद गंभीर रूप से झुलसे अरविंद धाकड़ को पहले पोहरी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। शनिवार सुबह करीब पांच बजे इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

    पोहरी थाना प्रभारी रवि चौहान ने बताया कि पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। घटना के संबंध में परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    प्राथमिक जांच में मामला जमीन विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों के लिए मजबूत संकेत, दीर्घकाल में रिकॉर्ड स्तर पर बनी रह सकती है चमक

    सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों के लिए मजबूत संकेत, दीर्घकाल में रिकॉर्ड स्तर पर बनी रह सकती है चमक

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते निवेश माहौल के बीच सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि अल्पकालिक अस्थिरता निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से सोने का भविष्य अब भी मजबूत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सोने की मांग उच्च स्तर पर बनी रह सकती है और इसकी कीमतों में मजबूती देखने को मिल सकती है।

    दुनियाभर में जारी युद्ध जैसे हालात, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता और विभिन्न देशों की आर्थिक नीतियों में बदलाव का सीधा असर सोने के बाजार पर पड़ रहा है। ऐसे समय में निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसके कारण सोना एक बार फिर भरोसेमंद निवेश साधन के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। यही वजह है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में इसकी अहमियत लगातार बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देशों में सोने की मांग केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़ी हुई है। शादी-विवाह, त्योहारों और पारंपरिक अवसरों पर सोने की खरीदारी का चलन वर्षों से कायम है। इसके अलावा युवा आबादी में बढ़ती आय, संगठित ज्वैलरी बाजार का विस्तार और ब्रांडेड आभूषणों की बढ़ती स्वीकार्यता भी इस क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को मजबूत बना रही है।

    हालांकि बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी पर भी दिखाई दिया है। जब सोने के दाम तेजी से बढ़ते हैं तो कई ग्राहक खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल देते हैं। वहीं कीमतों में स्थिरता आने या सीमित गिरावट होने पर बाजार में मांग फिर से बढ़ने लगती है। इससे स्पष्ट है कि उपभोक्ता पूरी तरह बाजार से दूर नहीं हो रहे हैं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार अपने खरीद निर्णय में बदलाव कर रहे हैं।

    बीते वित्तीय वर्ष के दौरान सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। इसका प्रभाव शुरुआती महीनों में मांग पर पड़ा और बाजार में खरीदारी अपेक्षाकृत धीमी रही। हालांकि वर्ष के दूसरे हिस्से में स्थिति में सुधार देखने को मिला और आभूषणों के साथ-साथ सोने के सिक्कों की मांग में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि ऊंची कीमतों के बावजूद सोने के प्रति उपभोक्ताओं का भरोसा बरकरार है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। कई देशों द्वारा व्यापारिक नीतियों में बदलाव, आयात शुल्क में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों ने कारोबारी रणनीतियों को प्रभावित किया है। इसके बावजूद कंपनियां बदलते वैश्विक माहौल के अनुरूप अपनी योजनाओं में संशोधन कर अवसरों का लाभ उठाने की दिशा में काम कर रही हैं। मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कारोबारी सतर्कता भी बढ़ाई गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अब भी एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति बना रहेगा। आर्थिक अस्थिरता, महंगाई और वैश्विक जोखिमों के दौर में सोना निवेश पोर्टफोलियो को संतुलित रखने का प्रभावी माध्यम माना जाता है। यही कारण है कि बाजार में अस्थायी उतार-चढ़ाव के बावजूद दीर्घकाल में सोने की चमक बरकरार रहने और इसकी मांग मजबूत बने रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

  • बर्गर किंग इंडिया में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, अजन्ता फार्मा प्रमोटर्स की कंपनी जुटाएगी 1,800 करोड़ रुपये, QSR सेक्टर में बढ़ेगी पकड़

    बर्गर किंग इंडिया में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, अजन्ता फार्मा प्रमोटर्स की कंपनी जुटाएगी 1,800 करोड़ रुपये, QSR सेक्टर में बढ़ेगी पकड़


    नई दिल्ली। देश के क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर में एक बड़ा कॉर्पोरेट सौदा आकार ले सकता है। अजन्ता फार्मा के प्रमोटर्स की कंपनी इंस्पिरा ग्लोबल बर्गर किंग इंडिया के कारोबार में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल करने की तैयारी कर रही है। इस संभावित अधिग्रहण के लिए कंपनी लगभग 1,800 करोड़ रुपये की प्राइवेट क्रेडिट फंडिंग जुटा रही है। यदि यह सौदा पूरा होता है तो भारतीय फूड सर्विस उद्योग में प्रतिस्पर्धा का नया दौर देखने को मिल सकता है।

    जानकारी के अनुसार, इस प्रस्तावित अधिग्रहण को इंस्पिरा ग्लोबल अपनी फूड एंड बेवरेज इकाई लेनेक्सिस फूडवर्क्स के माध्यम से आगे बढ़ा रही है। लेनेक्सिस पहले से ही क्विक सर्विस रेस्टोरेंट कारोबार में सक्रिय है और कई लोकप्रिय खाद्य ब्रांडों का संचालन करती है। कंपनी का उद्देश्य इस अधिग्रहण के जरिए अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करना और संगठित फूड सर्विस बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना है।

    सूत्रों के मुताबिक, अधिग्रहण के लिए आवश्यक फंडिंग का बड़ा हिस्सा नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) के माध्यम से जुटाया जा रहा है। अब तक लगभग 1,050 करोड़ रुपये की राशि एकत्र की जा चुकी है, जबकि शेष लगभग 800 करोड़ रुपये भी जल्द जुटाने की तैयारी चल रही है। पूरी फंडिंग उपलब्ध होने के बाद अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    भारत में बर्गर किंग ब्रांड का संचालन रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया के माध्यम से किया जाता है। प्रस्तावित सौदे के तहत इसी कंपनी में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, इस संभावित अधिग्रहण को अंतिम रूप देने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं और अन्य व्यावसायिक औपचारिकताओं को पूरा किया जाना आवश्यक होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा सफल रहता है तो भारतीय क्विक सर्विस रेस्टोरेंट बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में संगठित फूड चेन, ऑनलाइन फूड डिलीवरी और उपभोक्ताओं की बदलती खानपान की आदतों के कारण इस क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ा है। ऐसे माहौल में बड़े ब्रांडों में हिस्सेदारी हासिल करना कंपनियों के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश माना जा रहा है।

    इंस्पिरा ग्लोबल का स्वामित्व अजन्ता फार्मा के प्रमोटर परिवार से जुड़े आयुष मधुसूदन अग्रवाल और मधुसूदन अग्रवाल के पास है। समूह पिछले कुछ वर्षों से फूड एवं बेवरेज कारोबार में विस्तार की रणनीति पर काम कर रहा है। लेनेक्सिस फूडवर्क्स के माध्यम से कंपनी पहले ही कई लोकप्रिय फूड ब्रांड संचालित कर रही है और अब वैश्विक फास्ट फूड ब्रांड के भारतीय कारोबार में हिस्सेदारी हासिल कर अपने विस्तार को नई गति देना चाहती है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह अधिग्रहण पूरा होता है तो इससे केवल संबंधित कंपनियों की कारोबारी रणनीति ही नहीं बदलेगी, बल्कि भारतीय QSR उद्योग में निवेश, विस्तार और प्रतिस्पर्धा का नया परिदृश्य भी सामने आ सकता है। फिलहाल निवेशकों और बाजार की नजर इस संभावित सौदे की प्रगति, फंडिंग प्रक्रिया और अंतिम समझौते पर बनी हुई है।

  • तेल कंपनियां कमाई कर रहीं या नुकसान झेल रही हैं? पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सरकार और बाजार विशेषज्ञ आमने-सामने

    तेल कंपनियां कमाई कर रहीं या नुकसान झेल रही हैं? पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सरकार और बाजार विशेषज्ञ आमने-सामने

    नई दिल्ली । देश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री से सरकारी तेल कंपनियों को मुनाफा हो रहा है या वे अब भी घाटे में हैं, इसे लेकर सरकार और बाजार विशेषज्ञों के बीच मतभेद गहरा गया है। एक ओर ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में तेल कंपनियां प्रति लीटर अच्छा लाभ कमा रही हैं, वहीं सरकार और रिफाइनरी अधिकारियों का दावा है कि विशेष रूप से डीजल की बिक्री पर कंपनियां अब भी नुकसान उठा रही हैं। इस विरोधाभास ने ईंधन मूल्य निर्धारण के तरीके को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

    ब्रोकरेज फर्मों के आकलन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मौजूदा कीमतों को देखते हुए सरकारी तेल विपणन कंपनियों का मार्जिन सकारात्मक स्थिति में होना चाहिए। उनका मानना है कि वर्तमान मूल्य स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा बिक्री से कंपनियों को प्रति लीटर उल्लेखनीय लाभ मिल रहा है। इसी आधार पर बाजार विशेषज्ञ तेल कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन को मजबूत मान रहे हैं।

    इसके विपरीत सरकार और रिफाइनरी क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक स्थिति केवल कच्चे तेल की कीमत देखकर तय नहीं की जा सकती। उनका तर्क है कि तैयार पेट्रोल और डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें अभी भी अपेक्षाकृत ऊंची बनी हुई हैं, जिसके कारण लागत बढ़ रही है। उनके अनुसार डीजल पर नुकसान अभी भी अधिक है, जबकि पेट्रोल पर भी सीमित स्तर का घाटा बना हुआ है, हालांकि पहले की तुलना में इसमें कमी आई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की खुदरा कीमतें केवल कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं। मूल्य निर्धारण में तैयार पेट्रोल और डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, समुद्री परिवहन लागत, बीमा व्यय, आयात से जुड़ी लागत और रुपये-डॉलर की विनिमय दर जैसे कई कारक शामिल होते हैं। यही कारण है कि कई बार कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद तैयार ईंधन की लागत अपेक्षाकृत अधिक बनी रहती है।

    हाल के महीनों में सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती करने के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में भी बदलाव किए हैं। इन कदमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को राहत देने के साथ-साथ बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप मूल्य संतुलन बनाए रखना रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों के बीच मौजूद अंतर अभी भी कंपनियों की लागत को प्रभावित कर रहा है।

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजार में केवल कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर तेल कंपनियों के लाभ या हानि का सही आकलन नहीं किया जा सकता। रिफाइनिंग मार्जिन, आयात लागत, मुद्रा विनिमय दर और तैयार उत्पादों की वैश्विक मांग जैसे कारकों का भी अंतिम वित्तीय परिणाम पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

    मौजूदा विवाद यह संकेत देता है कि सरकार और बाजार विशेषज्ञ अलग-अलग मानकों के आधार पर तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति का आकलन कर रहे हैं। जहां ब्रोकरेज संस्थाएं बाजार आधारित गणनाओं को प्रमुख मान रही हैं, वहीं सरकारी पक्ष वास्तविक खरीद लागत और परिचालन खर्च को अधिक महत्व दे रहा है।

    आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक ईंधन बाजार की स्थिति और रुपये की विनिमय दर में होने वाले उतार-चढ़ाव से यह स्पष्ट होगा कि सरकारी तेल कंपनियों का लाभ-हानि संतुलन किस दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों और तेल कंपनियों की कमाई को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच अंतर बना हुआ है।

  • देवास से जैश मॉड्यूल का संदिग्ध गिरफ्तार, गुजरात ATS का दावा- पाकिस्तान हैंडलर्स से जुड़े थे तार

    देवास से जैश मॉड्यूल का संदिग्ध गिरफ्तार, गुजरात ATS का दावा- पाकिस्तान हैंडलर्स से जुड़े थे तार


    देवास । मध्य प्रदेश के देवास से गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े कथित मॉड्यूल के एक संदिग्ध सदस्य को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार युवक की पहचान 18 वर्षीय बिलाल दुरानी मोहम्मद अम्मार घाघा उर्फ अबू दुजाना के रूप में हुई है। गुजरात ATS का दावा है कि वह उस मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसके खिलाफ गुजरात और मध्य प्रदेश में संयुक्त अभियान चलाकर कुल आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया अभी शेष है।

    गुरुवार रात गुजरात ATS की टीम देवास के नाहर दरवाजा क्षेत्र स्थित गफूर बस्ती पहुंची। स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में टीम ने युवक के घर पर पूछताछ की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे अपनी अभिरक्षा में ले लिया। देवास पुलिस अधीक्षक पुनीत गहलोद ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि गुजरात ATS एक संदिग्ध की तलाश में आई थी और नियमानुसार उसे एजेंसी को सौंप दिया गया।

    गुजरात ATS के अनुसार, खुफिया सूचना के आधार पर पता चला था कि कुछ लोग प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा का प्रचार करने और गुजरात में उसका नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद तकनीकी और मानव खुफिया इनपुट के आधार पर गुजरात के बनासकांठा, मेहसाणा, पाटन, नवसारी तथा मध्य प्रदेश के देवास सहित विभिन्न स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई। एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने कथित तौर पर “दारुल इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद” नाम से एक संगठन बनाकर नए लोगों को जोड़ने का प्रयास किया।

    जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों के पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलर्स अब्दुल्ला और मोहम्मद उमर से संपर्क के सबूत मिले हैं। ATS के अनुसार, मॉड्यूल को लगभग तीन लाख रुपए की फंडिंग मिली थी, जिससे एक पुरानी कार खरीदी गई। आरोप है कि जैश से जुड़े साहित्य का गुजराती भाषा में अनुवाद कर कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने का प्रयास भी किया जा रहा था।

    ATS ने छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, कथित जिहादी दस्तावेज, ऑडियो-वीडियो सामग्री, तस्वीरें, संगठन का झंडा, मसूद अजहर से जुड़ी किताबें, उर्दू में लिखे पत्र और गुजराती में अनूदित साहित्य बरामद करने का दावा किया है। इन आधारों पर सभी आठ आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायालय में होने वाली सुनवाई और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

  • RBI की बड़ी कार्रवाई, नियमों के उल्लंघन पर बैंक ऑफ बड़ौदा और GIC हाउसिंग फाइनेंस पर लाखों रुपये का जुर्माना

    RBI की बड़ी कार्रवाई, नियमों के उल्लंघन पर बैंक ऑफ बड़ौदा और GIC हाउसिंग फाइनेंस पर लाखों रुपये का जुर्माना

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग नियमों के पालन में लापरवाही बरतने पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा और जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने दोनों संस्थानों पर कुल 66.7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नियामकीय प्रावधानों के उल्लंघन के मामलों में की गई है। साथ ही RBI ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय का ग्राहकों के खातों, जमा राशि या बैंकिंग सेवाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    RBI के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा पर 63.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच के दौरान पाया गया कि बैंक ने कुछ ऋण खातों में निर्धारित सीमा से अधिक ब्याज वसूला, जो लागू नियामकीय निर्देशों के अनुरूप नहीं था। इसके अलावा बैंक कुछ ग्राहकों से संबंधित केवाईसी दस्तावेज निर्धारित समय के भीतर केंद्रीय रजिस्ट्री में अपलोड करने में भी विफल रहा। केंद्रीय बैंक ने इसे अनुपालन संबंधी गंभीर चूक माना है।

    वहीं जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस पर 3.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच में सामने आया कि कंपनी अपने ऋण खातों के जोखिम का निर्धारित अंतराल पर मूल्यांकन नहीं कर रही थी। नियमानुसार ऐसे खातों की कम से कम प्रत्येक छह महीने में समीक्षा की जानी चाहिए, लेकिन कंपनी इस प्रक्रिया का समय पर पालन नहीं कर सकी। इसी आधार पर नियामकीय कार्रवाई की गई।

    RBI ने कहा है कि वित्तीय संस्थानों के लिए नियामकीय मानकों का पालन अनिवार्य है। बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण और अनुपालन की समीक्षा की जाती है। जहां भी नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं, वहां निर्धारित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है।

    केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि लगाया गया जुर्माना केवल नियामकीय कमियों से संबंधित है और इसका उद्देश्य संस्थानों को नियमों के बेहतर पालन के लिए प्रेरित करना है। यह कार्रवाई किसी ग्राहक के खाते, जमा राशि, ऋण अनुबंध या बैंकिंग लेनदेन की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं डालती। ग्राहकों की धनराशि पूरी तरह सुरक्षित है और बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह सामान्य रूप से जारी रहेंगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में RBI ने अनुपालन मानकों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे ग्राहक हितों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का समय पर पालन करें। नियमों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर केंद्रीय बैंक लगातार निगरानी रख रहा है और आवश्यक होने पर दंडात्मक कार्रवाई भी कर रहा है।

    इस ताजा कार्रवाई को भी वित्तीय क्षेत्र में बेहतर प्रशासन और मजबूत नियामकीय व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। RBI का संदेश स्पष्ट है कि बैंकिंग प्रणाली में नियमों के पालन से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी।

  • महाकाल की दिव्य भस्म आरती, रजत ॐ-बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष माला से हुआ अलौकिक श्रृंगार

    महाकाल की दिव्य भस्म आरती, रजत ॐ-बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष माला से हुआ अलौकिक श्रृंगार


    उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त के दौरान भगवान महाकाल की दिव्य भस्म आरती श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल के साथ हरि ॐ का जल अर्पित कर विशेष पूजा संपन्न हुई।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें रजत का ॐ और बिल्वपत्र मुकुट धारण कराया गया। रुद्राक्ष की माला, रजत की मुंडमाला, डमरू और शेषनाग से सुशोभित रजत मुकुट से अलंकृत किया गया। मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल का तिलक सजाया गया, जबकि सुगंधित पुष्पों की मनमोहक मालाओं से बाबा महाकाल का स्वरूप और भी दिव्य दिखाई दिया।

    श्रृंगार के पश्चात भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित करने के बाद कपूर आरती की गई। इसके उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से पवित्र भस्म अर्पित की गई और परंपरानुसार भस्म आरती संपन्न हुई।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के साथ देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा और भक्तिमय वातावरण ने सभी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।