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  • हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व: करियर और व्यक्तिगत विकास के संकेत..

    हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व: करियर और व्यक्तिगत विकास के संकेत..


    नई दिल्ली। हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत को केवल हथेली की एक विशेष आकृति नहीं बल्कि जीवन के मार्गदर्शन का संकेतक माना जाता है। यह पर्वत अनामिका उंगली के आधार और हृदय रेखा के ऊपरी हिस्से में स्थित होता है और जातक के करियर, आर्थिक स्थिति और समाज में सम्मान का संकेत देता है। यदि सूर्य पर्वत पूर्ण और सुविकसित हो, तो यह व्यक्ति के जीवन में उच्च पद, प्रतिष्ठा और धन की प्राप्ति का संकेत देता है। वहीं, इसका अभाव या कमजोर स्थिति जीवन में सतर्क रहने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का संदेश देती है।

    सूर्य पर्वत मुख्य रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो करियर में ऊँचाई प्राप्त करना चाहते हैं या समाज में मान्यता पाना चाहते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि यह पर्वत गुलाबी रंग और उभार वाला हो, तो जातक स्वभाव से हंसमुख, उदार और मेहनती होता है। ऐसे लोग व्यापार, कला, संगीत और रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। सूर्य पर्वत जन्म से ही अस्तित्व में होता है, लेकिन जीवन के अनुभव, शिक्षा और स्वभाव के अनुसार यह अधिक या कम विकसित हो सकता है।

    सूर्य पर्वत के आकार और स्थिति का अध्ययन जीवन में करियर और आर्थिक निर्णय लेने में भी सहायक है। यदि पर्वत अत्यधिक विकसित है, तो यह कभी-कभी अहंकार या खर्चीले स्वभाव की ओर इशारा कर सकता है। वहीं, कमजोर सूर्य पर्वत आत्मविश्वास में कमी, सम्मान की कमी और आर्थिक चुनौतियों का संकेत देता है। इसके झुकाव से भी जातक के व्यक्तित्व और सफलता की दिशा का अनुमान लगाया जा सकता है। बुध की ओर झुके सूर्य पर्वत वाले व्यक्ति आमतौर पर व्यापार में कुशल और धन संचय करने में सक्षम होते हैं, जबकि शनि की ओर झुके पर्वत वाले लोग अधिकांतप्रिय होते हैं और उन्हें आर्थिक संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

    पहचान के लिए अनामिका उंगली के नीचे के हिस्से और हृदय रेखा के ऊपर के क्षेत्र को देखें। पूर्ण विकसित पर्वत गुलाबी, उभार वाला और स्पष्ट दिखता है। यदि यह सपाट, फीका या कमजोर प्रतीत होता है, तो इसे जीवन में चुनौतियों और सतर्क रहने की चेतावनी के रूप में समझा जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य पर्वत का अध्ययन केवल भविष्य जानने के लिए नहीं, बल्कि करियर योजना, आर्थिक प्रबंधन और व्यक्तिगत विकास के मार्गदर्शन के लिए भी किया जा सकता है। सुविकसित सूर्य पर्वत वाले जातक सामाजिक गतिविधियों और टीम वर्क में सफल रहते हैं। कमजोर सूर्य पर्वत वाले जातकों को आत्मविश्वास बढ़ाने, नेतृत्व कौशल विकसित करने और आर्थिक निर्णयों में सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

    हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसे देखकर व्यक्ति अपने करियर में नई रणनीतियां अपना सकता है, धन प्रबंधन के उपाय कर सकता है और जीवन में सफलता और सम्मान के अवसरों को पहचान सकता है। यही कारण है कि सूर्य पर्वत का अध्ययन हर उम्र के लिए उपयोगी और मार्गदर्शक माना जाता है।

  • नासिक का श्री कालाराम मंदिर: भगवान राम की पवित्रता और अंबेडकर आंदोलन का केंद्र

    नासिक का श्री कालाराम मंदिर: भगवान राम की पवित्रता और अंबेडकर आंदोलन का केंद्र


    नई दिल्ली।महाराष्ट्र के नासिक जिले के पंचवटी क्षेत्र में स्थित श्री कालाराम मंदिर अपने प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व के कारण पूरे भारत में प्रसिद्ध है। यह मंदिर प्रभु श्री राम को समर्पित है और काले पत्थरों से निर्मित होने के कारण इसे कालाराम कहा जाता है। मंदिर की अनूठी वास्तुकला और मूर्तियां श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। मंदिर में भगवान राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण की काली प्रतिमाएं विराजमान हैं, जिन्हें गोदावरी नदी से प्राप्त पत्थरों से बनाया गया था।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास काल से जुड़ा हुआ है। पंचवटी क्षेत्र को रामायण के अनुसार भगवान राम के वनवास का स्थान माना जाता है, जहां उन्होंने माता सीता और लक्ष्मण के साथ समय बिताया। यही कारण है कि यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    मंदिर का निर्माण 1782 ईस्वी में हुआ था। यह 74 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है। मंदिर के चारों दिशाओं में चार प्रवेश द्वार हैं और महाद्वार से प्रवेश करने पर भव्य सभामंडप दिखाई देता है, जिसकी ऊँचाई 12 फीट है। मुख्य मंदिर में 14 सीढ़ियां हैं, जो भगवान राम के वनवास के 14 वर्षों का प्रतीक हैं। मंदिर के चारों ओर 84 स्तंभ खड़े हैं, जो 84 लाख प्रजातियों के चक्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर में हनुमान जी की एक काली मूर्ति भी है, जो भगवान राम के चरणों की ओर देखती हुई नजर आती है।

    श्री कालाराम मंदिर में धार्मिक उत्सवों का आयोजन विशेष धूमधाम से होता है। रामनवमी, दशहरा और चैत्र पड़वा यहां प्रमुख त्योहार हैं, जिनमें देश-दुनिया से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। ये उत्सव न केवल आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी बनाते हैं।

    इस मंदिर की खासियत केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक इतिहास में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 1930 में डॉ. भीम राव अंबेडकर ने यहां दलितों के मंदिर प्रवेश आंदोलन का नेतृत्व किया था। उस समय दलितों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। डॉ. अंबेडकर के नेतृत्व में आंदोलन के बाद दलितों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिली, जिससे सामाजिक असमानता के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश गया। यह आंदोलन आज भी सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

    श्री कालाराम मंदिर का महत्व धार्मिक, ऐतिहासिक और सामाजिक तीनों दृष्टियों से देखा जा सकता है। इसकी वास्तुकला, धार्मिक मान्यताएं, उत्सव और सामाजिक आंदोलन इसे नासिक की पहचान और भारतीय संस्कृति का अनमोल हिस्सा बनाते हैं।

  • द केरला स्टोरी 2 रिलीज से पहले दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस, पीड़ितों ने साझा की अपनी सच्ची कहानियां

    द केरला स्टोरी 2 रिलीज से पहले दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस, पीड़ितों ने साझा की अपनी सच्ची कहानियां


    नई दिल्ली । द केरला स्टोरी 2 गोज बियॉन्ड की रिलीज़ से पहले मेकर्स ने दिल्ली में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जिसमें देशभर से आए पीड़ित और उनके परिवारों को एक साथ लाया गया। इस मौके पर 49 पीड़ित और उनके परिवार के सदस्य मंच पर मौजूद थे जबकि कई अन्य लोग दर्शकों की सीटों पर बैठकर इस सभा का हिस्सा बने।

    इवेंट में बंगाल बिहार भीलवाड़ा गंगापुर राजकोट उदयपुर जम्मू महाराष्ट्र भोपाल झारखंड फरीदाबाद मेरठ दिल्ली नोएडा गुड़गांव और इंदौर के लोग शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार कुल 55 लड़कियों और 33 परिवार के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने मीडिया से अपनी आपबीती साझा करते हुए जागरूकता बढ़ाने की अपील की।

    फिल्म की टीम में प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह डायरेक्टर कामाख्या नारायण सिंह को प्रोड्यूसर आशिन ए. शाह और लीड कास्ट की उल्का गुप्ता ऐश्वर्या ओझा और अदिति भाटिया शामिल थे। कुल छह सदस्य मेकर्स और कलाकारों की ओर से इस सभा में मौजूद थे।

    कामाख्या नारायण सिंह द्वारा निर्देशित यह फिल्म तीन हिंदू लड़कियों उल्का गुप्ता अदिति भाटिया और ऐश्वर्या ओझा की असाधारण और झकझोर देने वाली कहानी पर आधारित है। उनकी जिंदगी तब बदलती है जब उन्हें तीन मुस्लिम लड़कों से प्यार हो जाता है और धीरे धीरे यह रिश्ते धर्म परिवर्तन के एक कथित एजेंडे का खुलासा करते हैं। फिल्म कन्नड़ और तेलुगु भाषाओं में भी रिलीज होगी।

    द केरला स्टोरी 2 गोज़ बियॉन्ड का निर्माण विपुल अमृतलाल शाह ने सनशाइन पिक्चर्स के बैनर तले किया है। फिल्म 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के लिए तैयार है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने न केवल फिल्म का प्रचार किया बल्कि पीड़ितों की आवाज़ को सामने लाकर समाज में जागरूकता फैलाने का भी प्रयास किया।

  • उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाई-वे से किसानों और क्षेत्र का समग्र विकास, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बड़ी सौगात

    उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाई-वे से किसानों और क्षेत्र का समग्र विकास, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बड़ी सौगात


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन से जावरा तक बनने वाली ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाई वे परियोजना को जिले के किसानों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष मंजूरी मिलने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न सिर्फ क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी बल्कि स्थानीय क्षेत्र के समग्र विकास की नई पहचान भी बनेगी। करीब 5017 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह हाई वे किसानों व्यापारियों और आम जनता के जीवन स्तर को सीधे लाभान्वित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास की दिशा में प्रदेश में सभी एकजुट हैं और जीवाईएएन पहल को आगे बढ़ाकर प्रदेश को देश के विकसित प्रदेशों में शामिल करने का लक्ष्य है।

    किसानों की बेहतरी और कृषि उत्पादों को बड़ी मंडियों तक पहुंचाने के लिए यह हाई वे एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने किसान प्रतिनिधि मंडल को संबोधित करते हुए बताया कि उज्जैन जावरा हाई वे परियोजना के अलावा प्रदेश में सड़कों और राजमार्गों का विस्तृत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है जिससे किसानों की पहुंच सुगम होगी। इस अवसर पर घट्टिया विधायक डॉ. सतीश मालवीय और नागदा विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया और उन्हें विकास पुरूष बताया।

    डॉ. यादव ने किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए भी कई योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन उड़द पर हर किसान को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलेगा। इसके साथ ही सरसों चना मसूर तुअर और अन्य दलहन व तिलहन की फसलों के लिए भावांतर भुगतान योजना और उत्पादन बढ़ाने के ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को देश के कुल उत्पादन का 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं। आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों को टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराया जाएगा जिससे उत्पादन और पोषण दोनों में वृद्धि होगी।

    मुख्यमंत्री ने किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता और उद्यमी बनाने की दिशा में भी कार्यरत योजनाओं का जिक्र किया। अगले तीन वर्षों में एक लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे जिससे सिंचाई और अतिरिक्त बिजली उत्पादन का विकल्प मिलेगा। कृषि आधारित उद्योगों और फूड पार्क की स्थापना से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य स्थानीय स्तर पर मिलेगा।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में गरीब युवा किसान और महिला कल्याण के लिए मिशन मोड में कार्य जारी है। उज्जैन मेट्रोपॉलिटिन क्षेत्र में शामिल होने से नागदा खाचरौद और रतलाम सहित पूरे क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। किसान प्रतिनिधिमंडल में मौजूद समाजसेवी और स्थानीय किसानों ने इस पहल का स्वागत किया।

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सियासत तेज, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सियासत तेज, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इस घटनाक्रम के बाद मामला धार्मिक दायरे से निकलकर सियासी अखाड़े में पहुंच गया है। विपक्षी दलों ने इसे गंभीर विषय बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।

    अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा हमला

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सच्चे संतों का अपमान कर भाजपा ने अपनी कार्यशैली उजागर कर दी है। उनके मुताबिक जो भी व्यक्ति या संत सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है उसे झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की जाती है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा का मकसद सत्ता के जरिए धन अर्जित करना है और इसके लिए वह किसी भी स्तर तक जा सकती है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के भीतर भी आपसी मतभेद हैं जिनकी आहट समय-समय पर सुनाई देती रहती है।

    कार्रवाई उन पर होनी चाहिए थी जिन्होंने रोका
    अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि जिस धार्मिक आयोजन में अविमुक्तेश्वरानंद शामिल होना चाहते थे उस दौरान प्रशासन को उनके तय मार्ग पर आपत्ति थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी ने उन्हें स्नान से रोका तो कार्रवाई उन लोगों पर होनी चाहिए थी न कि संत पर।उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक भगवाधारी संत के साथ ऐसा व्यवहार तब हो रहा है जब राज्य में खुद भगवाधारी मुख्यमंत्री सत्ता में हैं।

    भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार

    फिलहाल इस मामले में भाजपा की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है। धार्मिक आस्था कानून और राजनीति के बीच खिंची इस रेखा ने उत्तर प्रदेश की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। अब नजर इस बात पर है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आरोपों की सच्चाई क्या सामने आती है। वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास बता रहा है तो सत्ता पक्ष कानून की प्रक्रिया का हवाला दे रहा है।

  • बीमा की गलत बिक्री अब अपराध: बैंकों को वित्त मंत्री की दो टूक चेतावनी, 1 जुलाई से सख्त नियम

    बीमा की गलत बिक्री अब अपराध: बैंकों को वित्त मंत्री की दो टूक चेतावनी, 1 जुलाई से सख्त नियम


    नई दिल्ली । में बैंकिंग क्षेत्र को स्पष्ट संदेश देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीमा सहित अन्य वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री मिस-सेलिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि भ्रामक तरीके से बीमा बेचने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल को संबोधित करने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकों को अपने मूल कार्य जमा जुटाने और ऋण देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए न कि ग्राहकों पर अनावश्यक बीमा उत्पाद थोपने पर।

    मिस-सेलिंग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं
    वित्त मंत्री ने कहा कि कई मामलों में ग्राहकों को ऐसे बीमा उत्पाद बेचे जा रहे हैं जिनकी उन्हें जरूरत ही नहीं होती। खासकर गृह ऋण के मामलों में संपत्ति पहले से गिरवी होने के बावजूद अतिरिक्त बीमा लेने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि अब स्पष्ट संदेश जाना चाहिए गलत बिक्री कानूनन अपराध है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

    1 जुलाई से लागू होंगे कड़े प्रावधान

    आरबीआई ने 11 फरवरी को मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया था। प्रस्तावित नियमों के अनुसार यदि किसी ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद बेचा जाता है तो संबंधित बैंक को पूरी राशि लौटानी होगी और नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। इन नियमों पर 4 मार्च तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई थीं और अब 1 जुलाई से कड़े प्रावधान लागू किए जाएंगे। इससे ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    नियामकीय खामियों पर भी उठे सवाल

    सीतारमण ने माना कि अब तक आरबीआई और बीमा नियामक के बीच समन्वय की कमी के कारण कुछ मामलों में ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि नियामकीय अंतर रेगुलेटरी गैप का फायदा उठाकर गलत बिक्री की घटनाएं हुईं जिसे अब सख्ती से रोका जाएगा।

    जमा और कासा मजबूत करें बैंक

    वित्त मंत्री ने बैंकों को सलाह दी कि वे गैर-बैंकिंग उत्पादों की आक्रामक बिक्री से बचें और कम लागत वाली जमा व कासा चालू खाता-बचत खाता आधार को मजबूत करें। ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों और उनकी वित्तीय क्षमता को समझना प्राथमिकता होनी चाहिए।

    इस बीच आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि बैंकिंग प्रणाली में जमा वृद्धि दर लगभग 12.5% है जबकि ऋण वृद्धि करीब 14.5% बनी हुई है। फरवरी 2025 से अब तक रेपो दर में 1.25% की कटौती कर इसे 5.25% किया जा चुका है। हालांकि हालिया समीक्षा में वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

    आरबीआई ने भरोसा दिलाया है कि बाजार में पर्याप्त नकदी बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाते रहेंगे। स्पष्ट है कि 1 जुलाई के बाद बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई परीक्षा शुरू होने जा रही है।

  • जायका टीम ने एमपी ट्रांसको की ट्रांसमिशन लाइन और सब स्टेशन का विस्तृत निरीक्षण किया ..

    जायका टीम ने एमपी ट्रांसको की ट्रांसमिशन लाइन और सब स्टेशन का विस्तृत निरीक्षण किया ..


    भोपाल : जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) द्वारा मध्यप्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण हेतु मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) में संचालित जायका-2 वित्त पोषित विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत किए गए कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया गया।जायका जापान की इवैल्यूएटर सुश्री हिसाए ताकाहाशी एवं जायका के भारतीय प्रतिनिधि श्री कुनाल गुप्ता ने निर्माण कार्यों, उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन की बारीकी से जांच-पड़ताल की।

    ढीमरखेडा लाइन एवं सब स्टेशन का किया निरीक्षण

    निरीक्षण के दौरान टीम ने सर्वप्रथम 132 केवी सब स्टेशन ढीमरखेड़ा तथा इसके लिए निर्मित 132 केवी पनागर–ढीमरखेड़ा ट्रांसमिशन लाइन का अवलोकन किया। इवैल्यूएटर सुश्री ताकाहाशी ने लोन स्वीकृति के समय प्रस्तुत प्रारंभिक योजना, परियोजना के क्रियान्वयन, स्थापित उपकरणों की गुणवत्ता, लागत एवं रखरखाव से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण उपरांत उन्होंने सब स्टेशन एवं ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाए जाने पर संतोष व्यक्त किया।

    उपयोगिता जानने के लिए स्थानीय नागरिकों से भी की चर्चा

    जायका द्वारा वित्त पोषित फंड से निर्मित सब स्टेशन की उपयोगिता के संबंध में अधिकारियों से जानकारी लेने के साथ-साथ जायका टीम ने स्थानीय महिलाओं को बुलाकर उनका प्रत्यक्ष फीडबैक भी लिया।महिलाओं ने बताया कि सब स्टेशन के निर्माण से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब उन्हें पर्याप्त एवं निर्बाध बिजली मिल रही है, जिससे सिंचाई के लिए भी पर्याप्त विद्युत उपलब्ध हो रही है। इससे उनके आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है।

    स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर और स्काडा का भी किया अवलोकन

    जायका टीम ने एमपी ट्रांसको के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी )एवं स्वदेशी तकनीकी एवं उपकरणों से निर्मित स्काडा कंट्रोल सेंटर का भी अवलोकन किया और उसकी कार्य प्रणाली की प्रशंसा की।

    ये अधिकारी रहे उपस्थित

    निरीक्षण के दौरान एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री के.एम. सिंघल, अधीक्षण अभियंता श्री आर.सी. शर्मा, कार्यपालन अभियंता श्री ए.पी.एस. चौहान, श्री शशि शेखर, श्री रविराज पटेल, सहायक अभियंता श्री जितेन्द्र तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

  • Skin Care Tips: डल स्किन को अलविदा कहो, बस अपनाएं ये ट्रिक, सिर्फ 6 आसान टिप्स से निखार रहेगा दिन-रात

    Skin Care Tips: डल स्किन को अलविदा कहो, बस अपनाएं ये ट्रिक, सिर्फ 6 आसान टिप्स से निखार रहेगा दिन-रात

    नई दिल्ली । बदलते मौसम में सबसे पहले असर हमारी त्वचा पर दिखने लगता है. कभी रूखापन कभी ऑयलीनेस तो कभी पिंपल्स और रैशेज स्किन कन्फ्यूज हो जाती है. उसे आखिर चाहिए क्या. ऐसे में अगर सही देखभाल न की जाए तो चेहरा बेजान लगने लगता है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान और रोजमर्रा की आदतें अपनाकर आप बिना मेकअप भी चांद सा निखार पा सकते हैं. बदलते मौसम में थोड़ी सी सावधानी और नियमित स्किन केयर रूटीन अपनाकर आप अपनी त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग रख सकते हैं.
    याद रखिए असली खूबसूरती नैचुरल होती है. सही देखभाल से वही निखार सबसे ज्यादा दमकता है. मैक्स हॉस्पिटल में प्रिंसिपल कंसल्टेंट के तौर पर तैनात डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. साक्षी श्रीवास्तव का कहना है कि जब हम अपनी डाइट को बैलेंस करते हैं और केमिकल्स और मेकअप के बजाय नेचुरल चीज़ों पर ध्यान देते हैं तो स्किन ग्लो करती है.

    क्लेंजिंग है सबसे पहला कदम

    मौसम चाहे कोई भी हो दिन में 2 बार माइल्ड फेसवॉश से चेहरा साफ करना जरूरी है. इससे धूल-मिट्टी और अतिरिक्त ऑयल हटता है और पोर्स साफ रहते हैं, लेकिन बार-बार फेसवॉश करने से बचें, वरना स्किन ड्राई हो सकती है.

    मॉइश्चराइजर कभी न छोड़ें
    अक्सर लोग सोचते हैं कि गर्मी में मॉइश्चराइजर की जरूरत नहीं होती हैं, लेकिन बदलते मौसम में स्किन का बैलेंस बिगड़ जाता है. हल्का, वॉटर-बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं. ताकि त्वचा हाइड्रेटेड रहे और ग्लो बरकरार रहे.

    सनस्क्रीन है जरूरी

    धूप सर्दी-गर्मी नहीं देखती. बाहर निकलने से 15-20 मिनट पहले SPF 30 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन लगाएं. इससे टैनिंग, पिग्मेंटेशन और समय से पहले झुर्रियों से बचाव होता है.बाहर जाने से पहले सनस्क्रीन लगाना बहुत ज़रूरी है. खासकर गर्मियों में, सनस्क्रीन हमारी स्किन के लिए बहुत सारी प्रॉब्लम खड़ी कर सकता है, जिससे यह डल और इरिटेटेड दिखती है.

    हफ्ते में एक-दो बार एक्सफोलिएशन

    डेड स्किन हटाने के लिए हल्के स्क्रब या केमिकल एक्सफोलिएटर का इस्तेमाल करें. इससे त्वचा साफ और फ्रेश दिखती है, लेकिन ज्यादा स्क्रब करने से स्किन डैमेज हो सकती है. इसलिए संतुलन जरूरी है.

    पानी और डाइट पर ध्यान दें

    खूबसूरत त्वचा सिर्फ बाहर से नहीं, अंदर से भी बनती है. दिन में 7-8 गिलास पानी पिएं और अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां और विटामिन-सी से भरपूर चीजें शामिल करें. इससे त्वचा में नैचुरल ग्लो आता है.

    ब्यूटी स्लीप को न करें नजरअंदाज

    रात की 7-8 घंटे की नींद स्किन के लिए बेहद जरूरी है. सोते समय त्वचा खुद को रिपेयर करती है, जिससे चेहरा सुबह फ्रेश और चमकदार नजर आता है.

  • एसी का तापमान 26 डिग्री सेट करने पर बिजली बिल में 30 फीसदी तक की कमी..

    एसी का तापमान 26 डिग्री सेट करने पर बिजली बिल में 30 फीसदी तक की कमी..


    भोपाल : गर्मी में बिजली की खपत बढ़ने से बिजली बिल अधिक आता है, लेकिन कुछ तरीके अपना कर बिजली बिल में कमी की जा सकती है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि एक शोध से यह साबित हुआ है कि एसी का तापमान 26 डिग्री पर सेट करने से बिजली बिल में 30 प्रतिशत तक कमी हो सकती है। शोध के अनुसार, प्रत्येक डिग्री तापमान में वृद्धि के परिणामस्वरूप स्प्लिट एसी की ऊर्जा खपत में 6 प्रतिशत की कमी आती है।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अनुसार गर्मियों के दौरान एयर कंडीशनर के लगातार चलने के कारण बिजली का बिल चिंता का एक बड़ा कारण है। लेकिन एयर कंडीशनर का समझदारी से उपयोग करके आप इसे काफी हद तक कम कर सकते हैं। विद्युत वितरण कंपनी के द्वारा जारी सुझावों में सबसे महत्वपूर्ण है कि एसी को ऊंचे लेकिन आरामदायक तापमान पर चलाना चाहिए। विभिन्न एजेंसियों के शोधों से साबित हुआ है कि एसी के तापमान को 26 डिग्री सेल्सियस पर सेट करने से बिजली के बिल को 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

    दरसअल कमरे को तुरंत ठंडा करने के लिए तापमान को 18 डिग्री तक कम करना एक आम गलतफहमी है। जबकि 26 डिग्री सेल्सियस तक कम करने में लगने वाला समय वही रहता है, चाहे आप एसी का तापमान 18 या 26 डिग्री सेल्सियस पर सेट करें। जब आप कम तापमान सेट करते हैं, तो कमरे के तापमान को कम करने के लिए कंप्रेसर को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इसके परिणामस्वरूप अधिक बिल आता है। यहां तक कि अगर आप थर्मोस्टेट को 18 डिग्री पर सेट करने के बाद कुछ मिनटों के भीतर एसी बंद कर देते हैं, तो विभिन्न लीक के माध्यम से ठंडी हवा के फैलने से तापमान तेजी से बढ़ जाएगा, जिससे आपका प्रयास व्यर्थ हो जाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप थर्मोस्टेट को 26 डिग्री सेल्सियस पर सेट करते हैं और टाइमर को 2 घंटे के लिए सेट करते हैं और साथ में सीलिंग फैन चला देते हैं, तो यह आमतौर पर अच्छी नींद के लिए आरामदायक तापमान बनाए रखता है। इसलिए समझदारी से काम लेते हुए एसी को 26 डिग्री पर सेट करें तथा सीलिंग फैन एक या दो पाइंट पर जरूर चलाएं, ऐसा करने से बिजली बिल में कमी आ सकती है।

  • फिल्में जिनमें सितारों ने फीस नहीं ली और बनीं यादगार हिट

    फिल्में जिनमें सितारों ने फीस नहीं ली और बनीं यादगार हिट


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की कई फिल्मों ने न सिर्फ दर्शकों के दिलों में जगह बनाई बल्कि अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से भी यादगार साबित हुईं। कम लोग जानते हैं कि इन फिल्मों के लीड एक्टर्स ने अपनी फीस तक नहीं ली और सिर्फ प्यार और जुनून के लिए काम किया। साल 2018 में रिलीज़ हुई फिल्म मंटो में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपने किरदार में ऐसा दम दिखाया कि हर दर्शक उनकी अदाकारी का मुरीद हो गया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवाजुद्दीन ने इस फिल्म के लिए कोई फीस नहीं ली थी? उन्होंने सिर्फ अपने किरदार में पूरी तरह डूबकर काम किया। इससे पहले भी नवाजुद्दीन ने हरामखोर जैसी फिल्मों में बिना फीस काम किया था जो उनके पेशेवर समर्पण की मिसाल है।

    वहीं फिल्म भाग मिल्खा भाग में सोनम कपूर ने अपनी परफॉर्मेंस से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इंडस्ट्री की टैलेंटेड अभिनेत्रियों में शुमार सोनम ने इस फिल्म के लिए भी फीस नहीं ली सिर्फ नाम के लिए 11 रुपये स्वीकार किए। फिल्म में उनके काम को क्रिटिक्स और दर्शकों ने दोनों ने सराहा। इस फिल्म में फरहान अख्तर ने भी लीड रोल निभाया और उन्होंने भी बिना किसी फीस के काम किया। फरहान की मेहनत और फिल्म की तकनीकी दक्षता ने इसे बॉक्स ऑफिस पर हिट बनाना सुनिश्चित किया।

    बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की बात करें तो संजय लीला भंसाली की फिल्म ब्लैक में उनके अभिनय को हर किसी ने सराहा। यह फिल्म आज भी आइकॉनिक मानी जाती है और कम लोग जानते हैं कि अमिताभ ने इसके लिए एक भी रुपया फीस नहीं लिया था। उनके समर्पण और किरदार के प्रति ईमानदारी ने फिल्म की सफलता में अहम भूमिका निभाई। सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ फिल्म ओम शांति ओम में दीपिका पादुकोण ने लीड रोल प्ले किया। उनकी परफॉर्मेंस को दर्शकों ने बहुत सराहा लेकिन दीपिका ने इस फिल्म के लिए कोई फीस नहीं ली। उनकी मेहनत और स्क्रीन पर दमदार उपस्थिति ने फिल्म को और भी यादगार बना दिया।

    इसी तरह फिल्म ट्रैप्ड में राजकुमार राव ने एक लड़के का किरदार निभाया जो ऊंची और वीरान इमारत में फंस जाता है। राजकुमार ने इस चुनौतीपूर्ण रोल के लिए कोई भुगतान नहीं लिया। उनकी ईमानदार अदाकारी ने फिल्म के थ्रिल और सस्पेंस को और मजबूती दी। इन कहानियों से यह साबित होता है कि कभी-कभी सितारों का जुनून समर्पण और किरदार के प्रति ईमानदारी पैसे से भी बड़ी होती है। इन फिल्मों ने दर्शकों के दिलों में अपने लिए खास जगह बनाई और यह साबित किया कि अच्छी कहानी बेहतरीन परफॉर्मेंस और एक्टर्स का समर्पण ही असली सफलता की कुंजी है।