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  • शेयर बाजारों में गिरावट सेंसेक्स 250 अंक टूटा; निफ्टी भी गिरकर बंद हुआ

    शेयर बाजारों में गिरावट सेंसेक्स 250 अंक टूटा; निफ्टी भी गिरकर बंद हुआ


    नई दिल्ली । मंगलवार को शेयर बाजारों में गिरावट का रुख देखा गया। विदेशों से मिले मिश्रित संकेतों और घरेलू स्तर पर निवेशकों के बीच सतर्कता की भावना ने बाजार को दबाव में डाला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 250.48 अंक यानी 0.30 प्रतिशत गिरकर 83 627.69 अंक पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 57.95 अंक यानी 0.22 प्रतिशत गिरकर 25, 732.30 अंक पर रहा विदेशी बाजारों से मिले संकेतों में मिश्रित रुझान देखे गए जिससे घरेलू निवेशकों ने सतर्कता बरती। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई जो भारतीय बाजारों पर असर डालने का कारण बनी। इसके अलावा घरेलू स्तर पर भी कुछ प्रमुख कंपनियों के तिमाही परिणामों को लेकर निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी रही जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा।
    इस गिरावट के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि यह कोई लंबी अवधि की मंदी नहीं है। वे मानते हैं कि आगामी दिनों में बाजार में पुनः सुधार की संभावना हो सकती है खासकर अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ बेहतर होती हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी पोर्टफोलियो को सावधानीपूर्वक देखें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें। वहीं कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी पहलू मजबूत हैं और आने वाले समय में सकारात्मक रुझान दिख सकते हैं। सरकार के आर्थिक सुधारों और कॉरपोरेट क्षेत्र में संभावित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए बाजार में भी सुधार की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और निवेशकों को सतर्क रहना होगा।
    इसी के साथ मंगलवार को मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की गिरावट आई। मिडकैप इंडेक्स में 0.32 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.25 प्रतिशत की गिरावट आई। बैंकों और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखा गया जबकि ऊर्जा और कच्चे तेल से संबंधित कंपनियों में कुछ राहत मिली। कुल मिलाकर मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजारों के लिए नकारात्मक रहा हालांकि आने वाले दिनों में कुछ सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे बाजार की मौजूदा स्थिति को समझते हुए अपने निवेश निर्णय लें और लघु अवधि के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए धैर्य रखें।

  • MP की राजनीति हिली! दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस नेता के राज्यसभा मार्ग पर सस्पेंस

    MP की राजनीति हिली! दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस नेता के राज्यसभा मार्ग पर सस्पेंस

    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा सीट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। यह बयान कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा लिखे गए पत्र के संदर्भ में आया था। पत्र में आग्रह किया गया था कि आगामी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से किसी नेता को उम्मीदवार बनाना चाहिए। इस मांग के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई और सवाल उठने लगा कि क्या दिग्विजय सिंह एक बार फिर राज्यसभा जाएंगे या नहीं।

    दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया, “यह मेरे हाथ में नहीं है। पार्टी का फैसला जो भी होगा, वह सर्वमान्य होगा। इतना जरूर मैं कह सकता हूं कि मैं अपनी राज्यसभा सीट खाली कर रहा हूं।” उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार दिग्विजय सिंह राज्यसभा के लिए नहीं जाएंगे, जिससे मध्य प्रदेश की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं।

    दिग्विजय सिंह का वर्तमान कार्यकाल इस वर्ष जून में समाप्त हो रहा है। राज्य में कुल तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। कांग्रेस के पास 64, बीएपी के पास 1 और भारतीय जनता पार्टी के पास 165 विधायक हैं। इस हिसाब से राजनीतिक समीकरण, दलों की ताकत और उम्मीदवारों का चयन सभी के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

    राज्यसभा सीटों की इस लड़ाई में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से उम्मीदवार का चयन पार्टी की छवि और स्थानीय समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। दिग्विजय सिंह के फैसले के बाद अब कांग्रेस के नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सस्पेंस और रणनीति का माहौल है। राजनीतिक विश्लेषक इसे मध्य प्रदेश की सियासत में एक नया मोड़ भी मान रहे हैं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव हमेशा पार्टी की भीतरी ताकत और प्रभाव को दिखाने का मौका होते हैं।

    इस घटना ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में सामुदायिक समीकरणों और अनुभव को ध्यान में रखते हुए रणनीति बना रही है। दिग्विजय सिंह का यह कदम पार्टी के भीतर नए नेताओं के लिए अवसर और सियासी समीकरणों में बदलाव ला सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत को रोचक और रणनीतिक मोड़ दे दिया है, और अब सबकी निगाहें आगामी राज्यसभा चुनाव पर टिकी हुई हैं।

  • असम के संगीत जगत में शोक: 75 साल की उम्र में समर हजारिका का निधन

    असम के संगीत जगत में शोक: 75 साल की उम्र में समर हजारिका का निधन


    नई दिल्ली। असम के प्रसिद्ध संगीतकार और गायक समर हजारिका का मंगलवार को गुवाहाटी में निधन हो गया। उनकी उम्र 75 वर्ष थी। समर लंबे समय से बीमार चल रहे थे और हाल ही में अस्पताल से घर लौटे थे। उनका निधन गुवाहाटी के निजारापार इलाके में उनके घर पर हुआ, जहां उनके परिवार के अन्य सदस्य भी रहते हैं।
    परिवार ने उनके निधन की पुष्टि कर दी है।

    समर हजारिका, भारत रत्न से सम्मानित भूपेन हजारिका के सबसे छोटे भाई थे। वे दस भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और उन्होंने अपने जीवन में असमिया संगीत को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समर ने रेडियो, एल्बम और फिल्मों के लिए कई गाने गाए और संगीत तैयार किया।

    उनका संगीत करियर 1960 के दशक में शुरू हुआ। उनका पहला एल्बम “उत्तर कोंवर प्रोतिमा बरुआ देवी” 1968 में रिलीज हुआ। इसके अलावा उन्होंने असमिया फिल्मों में प्लेबैक सिंगर के रूप में भी काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में उपोपथ, बोवारी और प्रवती पोखिर गान शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने भूपेन हजारिका की विरासत को सम्मान देने वाले कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया और मोह बिसारिसु हेजार सोकुट जैसे प्रसिद्ध असमिया गीत गाए।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने समर हजारिका के निधन पर शोक व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि समर हजारिका की आवाज हर मौके को खास बनाती थी और असम की संस्कृति में उनका योगदान अमूल्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके जाने से असम ने एक और बेहतरीन आवाज खो दी। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी उनके निधन पर दुख जताया और बताया कि उनका जाना माघ बिहू के दिन और भी दुखद है।

    समर हजारिका के निधन से असमिया संगीत प्रेमियों के लिए एक बड़ी क्षति हुई है। उन्होंने अपने जीवन में न केवल असमिया संगीत को समृद्ध किया, बल्कि भूपेन हजारिका की विरासत को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई।

    उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

    भूपेन हजारिका के बारे में जानकारी
    डॉ. भूपेन हजारिका असम के सुप्रसिद्ध संगीतकार, गायक और गीतकार थे। उनका जन्म 8 सितंबर 1926 को असम में हुआ था। उन्होंने असमिया, हिंदी और बंगाली सहित कई भाषाओं में गीत लिखे और गाए। भूपेन हजारिका के लोकप्रिय असमिया गीतों में “मोइ एति जाजाबोर,” “बिस्तीर्ण पारेरे,” और “मानुहे मानुहोर बाबे” शामिल हैं। वहीं, हिंदी गीतों में उन्होंने “ओ गंगा बहती हो क्यों,” “समय ओ धीरे चलो” जैसे गीत दिए।

    समर हजारिका ने भूपेन हजारिका की संगीत विरासत को जीवित रखा और असमिया संस्कृति में संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका निधन असम और भारत के संगीत प्रेमियों के लिए अपूरणीय क्षति है।

  • अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026: वडोदरा के आसमान में दिखा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भव्य नज़ारा

    अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026: वडोदरा के आसमान में दिखा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भव्य नज़ारा

    नई दिल्ली। वडोदरा का वातावरण मंगलवार को उत्सवमय हो गया, जब गुजरात टूरिज्म, जिला प्रशासन और वडोदरा महानगरपालिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में देश-विदेश से आए 160 से अधिक पतंगबाजों ने अद्भुत और रंग-बिरंगी पतंगों के साथ अपने कौशल का प्रदर्शन किया, जिससे पूरा आसमान उत्सव की छटा से भर गया। इस अवसर पर वसुधैव कुटुंबकम का दृश्य भी देखने को मिला।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों का जादू

    महज भारत तक सीमित नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, यूके, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड समेत कई देशों के पतंगबाजों ने अनोखे डिजाइन और विविध आकृतियों वाली पतंगों के साथ अपने करतब दिखाए। इसके साथ ही बिहार, राजस्थान, तमिलनाडु सहित भारत के आठ राज्यों से आए पतंगबाजों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    उत्सव में बड़ी संख्या में दर्शक और मेहमान

    महोत्सव में जनता की भारी भीड़ उमड़ी, जिसमें जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में मेहमानों के लिए वडोदरा की विशेष ऊंझा जलेबी की व्यवस्था की गई, जिसने इस उत्सव को और भी यादगार बना दिया।

    सांसद डॉ. हेमांग जोशी की प्रतिक्रिया

    वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी ने कहा कि वडोदरा में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव बहुत ही जोरशोर से आयोजित हो रहा है। इस कार्यक्रम में 20 से अधिक देशों के विदेशी मेहमान शामिल हुए। उन्होंने बताया कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए दृष्टि का परिणाम है। उन्होंने कहा कि महोत्सव में वसुधैव कुटुंबकम का दृश्य विशेष रूप से देखने को मिला।

    म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू का संदेश

    वडोदरा महानगरपालिका के म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू ने बताया कि यह कार्यक्रम गुजरात टूरिज्म, जिला प्रशासन और महानगरपालिका के संयुक्त प्रयास से सफल हुआ है। उन्होंने कहा कि विदेशों और भारत के विभिन्न राज्यों से आए लोग वडोदरा की जनता के साथ मिलकर महोत्सव को सफल बनाने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए वडोदरा की जनता को इस कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाई दी।

    उत्सव की खासियत

    इस महोत्सव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि देश-विदेश के पतंगबाजों और स्थानीय प्रतिभागियों ने मिलकर रंगीन और विविध पतंगों से वडोदरा के आसमान को सजाया। दर्शकों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि यह महोत्सव सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक भावना को भी मजबूत करने वाला अवसर साबित हुआ।

  • कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की

    कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की


    नई दिल्ली । अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में खुदरा व्यापारियों के हितों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। कैट का कहना है कि बजट में खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए और साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए ताकि व्यापारियों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े।
    कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक सीट से लोकसभा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने मंगलवार को बताया कि संगठन ने वित्त मंत्री के समक्ष कुछ प्रमुख सुझाव रखे हैं। इन सुझावों में व्यापार के लिए सम्मान सरलता सुरक्षा और समान अवसर प्रदान करने की बात की गई है। खंडेलवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की है जिनमें “आत्मनिर्भर भारत” “मेक इन इंडिया” “डिजिटल इंडिया” और “लोकल के लिए वोकल” जैसे अभियानों ने देश के व्यापारिक वातावरण को एक नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि अब आगामी बजट में इन पहलों को और भी मजबूत बनाने की आवश्यकता है ताकि व्यापारियों को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।

    सस्ते ऋण की आवश्यकता
    कैट ने यह स्पष्ट किया है कि खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की उपलब्धता व्यापार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वर्तमान में व्यापारियों को उच्च ब्याज दरों पर ऋण मिलता है जिससे उनके लिए व्यापार में वृद्धि करना और नई चुनौतियों का सामना करना मुश्किल हो जाता है। अगर सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है तो छोटे और मंझले व्यापारी अपनी व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से चला सकते हैं जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसके अलावा व्यापारियों को ऋण के लिए कागजी प्रक्रिया में भी सरलता की आवश्यकता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह भी अनुरोध किया है कि ऋण लेने की प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि व्यापारी समय और श्रम की बचत कर सकें और अपने व्यापार को गति दे सकें।
    ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की आवश्यकता
    कैट ने यह भी कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर बेईमानी से प्रतिस्पर्धा की वजह से खुदरा व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। कई बार ई-कॉमर्स कंपनियां बड़े पैमाने पर डिस्काउंट और भारी प्रमोशन करती हैं जिनका छोटे व्यापारियों से मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह अनुरोध किया कि ई-कॉमर्स के नियमों को सख्त किया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि यह प्लेटफॉर्म्स खुदरा व्यापारियों के लिए एक समान अवसर प्रदान करें न कि उन्हें नुकसान पहुँचाए। कैट का कहना है कि इन अनुचित प्रतिस्पर्धाओं के कारण खुदरा व्यापारियों को न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि उनका सम्मान भी प्रभावित हो रहा है। यदि ई-कॉमर्स कंपनियों को नियंत्रित किया जाता है तो पारदर्शिता और समता को बढ़ावा मिलेगा जिससे सभी व्यापारी एक समान तरीके से व्यापार कर सकेंगे।

    सरकारी पहलों का महत्व
    प्रवीन खंडेलवाल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत छोटे और मंझले व्यापारियों को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए कई अवसर दिए गए हैं। वहीं मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों ने भारतीय व्यापारियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि इन पहलों को और भी मजबूत किया जाना चाहिए ताकि व्यापारियों को अधिक प्रोत्साहन मिले और वे वैश्विक बाजार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
    कैट का यह सुझाव है कि आगामी बजट में छोटे और मंझले खुदरा व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण भी सुनिश्चित किया जाए। यह कदम न केवल व्यापारियों के लिए अवसर पैदा करेगा बल्कि भारत के समग्र व्यापारिक वातावरण को भी एक नई दिशा दे सकता है। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को और भी सशक्त किया जाए ताकि देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार क्षेत्र में संतुलन बना रहे और छोटे व्यापारियों को भी समान अवसर प्राप्त हो सकें।

  • रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी ने ज़ोरदार वापसी कर पकड़ी रफ्तार

    रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी ने ज़ोरदार वापसी कर पकड़ी रफ्तार

    नई दिल्ली। सोमवार को ऐतिहासिक ऊंचाई छूने के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी ने गिरावट से उबरते हुए मजबूती दिखाई।

    एमसीएक्स पर सोना कमजोर, चांदी में उछाल

    एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 0.32 प्रतिशत टूटकर 1,41,577 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 0.50 प्रतिशत यानी 1,352 रुपये की तेजी के साथ 2,70,322 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। इससे साफ है कि रिकॉर्ड स्तर के बाद सोने में जहां दबाव बना, वहीं चांदी में खरीदारी लौटी।

    घरेलू बाजार में भी हल्की नरमी

    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम का भाव घटकर 1,40,482 रुपये रह गया, जो पिछले कारोबारी दिन 1,40,499 रुपये था। यह गिरावट भले ही मामूली हो, लेकिन यह संकेत देती है कि ऊंचे दामों पर निवेशक फिलहाल सतर्क हो गए हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिला संकेत

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार 4,600 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचा था। इसी रिकॉर्ड स्तर के बाद वैश्विक निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी पड़ा। हालांकि भू-राजनीतिक तनावों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी हुई है।

    भू-राजनीति और फेड पर टिकी नजर

    सोने में हालिया तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाने का ऐलान और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी बड़ा कारण रही। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल से जुड़ी जांच की खबरों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री के मुताबिक, निवेशकों की नजर अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दर नीति पर टिकी है।

    ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद

    हालिया अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट में उम्मीद से कम नौकरियां बढ़ने से यह भरोसा मजबूत हुआ है कि इस साल के अंत तक फेड ब्याज दरों में दो बार कटौती कर सकता है। यही उम्मीद कीमती धातुओं को मध्यम अवधि में सहारा दे रही है।

    तकनीकी स्तर और आगे का रुख

    विश्लेषकों के अनुसार सोने को 1,39,550 से 1,37,310 रुपये के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिल रहा है, जबकि ऊपर की ओर 1,44,350 से 1,46,670 रुपये पर रेजिस्टेंस है। चांदी के लिए 2,60,810 से 2,54,170 रुपये सपोर्ट जोन है और 2,71,810 से 2,74,470 रुपये रेजिस्टेंस।

    चांदी की लंबी अवधि में चमक

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि उद्योगों और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण चांदी की दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी रहेगी। ऐसे में आने वाले समय में चांदी की कीमतें सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

  • सीहोर 2026 में होगा ‘कृषि वर्ष’, किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने सड़कों पर उतरेगा कृषि रथ

    सीहोर 2026 में होगा ‘कृषि वर्ष’, किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने सड़कों पर उतरेगा कृषि रथ


    सीहोर । सीहोर जिले में वर्ष 2026 को विशेष रूप से ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। किसानों को खेती की आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और नवाचारों की सीधी जानकारी देने के उद्देश्य से जिलेभर में कृषि रथ अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान रबी सीजन के दौरान जिले के हर विकासखंड में संचालित होगा, जिससे अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके।

    मंगलवार को कलेक्टर बालागुरु के. ने कृषि विभाग के अधिकारियों को राज्य शासन के निर्देशों के अनुरूप कृषि रथों के प्रभावी संचालन के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित करना है।

    कृषि रथ बताएगा खेती के नए रास्ते
    कृषि रथ के माध्यम से किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, उन्नत बीजों का चयन, कीट एवं रोग प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी। इसके साथ ही फसल विविधीकरण, कृषि आधारित उद्यमिता, ई-तकनीक से जुड़ी योजनाएं और पराली प्रबंधन जैसे अहम विषयों पर भी मार्गदर्शन किया जाएगा।

    अभियान की शुरुआत जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कृषि रथों को हरी झंडी दिखाकर की जाएगी, जिससे गांव-गांव तक इसका प्रभावी संदेश पहुंचे।

    जिला और ब्लॉक स्तर पर होगी सख्त निगरानी
    अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में और विकासखंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अध्यक्षता में विशेष क्रियान्वयन समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां रथों के संचालन, कार्यक्रमों की रूपरेखा और पूरे अभियान की निगरानी करेंगी।

    तकनीकी विशेषज्ञ देंगे मौके पर समाधान
    प्रत्येक कृषि रथ के साथ एक तकनीकी दल रहेगा, जिसमें कृषि विभाग के अधिकारी और विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे।

    यह दल गांवों में जाकर किसानों की समस्याएं सुनेगा और उन्हें मौके पर ही आधुनिक कृषि समाधान उपलब्ध कराएगा।

    कृषि रथ अभियान की दैनिक प्रगति की जिला स्तर पर समीक्षा की जाएगी और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से किसानों की आय में वृद्धि होगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और जिले में नवाचार आधारित खेती को नई दिशा मिलेगी।

    कृषि वर्ष 2026 सीहोर के किसानों के लिए ज्ञान, तकनीक और समृद्धि का नया अध्याय साबित होने की उम्मीद है।

  • मैरी कॉम पर संगीन आरोप: एक्स हसबैंड ओनलर बोले– 2013 में दूसरे शख्स से था रिश्ता

    मैरी कॉम पर संगीन आरोप: एक्स हसबैंड ओनलर बोले– 2013 में दूसरे शख्स से था रिश्ता

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का परचम लहराने वाली विश्व चैंपियन मुक्केबाज मैरी कॉम इन दिनों अपनी खेल उपलब्धियों से ज्यादा निजी जीवन को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में मैरी कॉम ने अपने पूर्व पति ओनलर कोम पर धोखाधड़ी और आर्थिक गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए थे। अब ओनलर कोम ने इन आरोपों पर खुलकर जवाब दिया है और उन्हें पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।

    ‘आरोप झूठे, सच्चाई कुछ और’

    आईएएनएस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में ओनलर कोम ने कहा कि मैरी कॉम द्वारा लगाए गए आरोप सच्चाई से कोसों दूर हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी शादी में तनाव कोई नई बात नहीं थी, बल्कि यह समस्या एक दशक से भी अधिक समय पुरानी है। ओनलर के अनुसार, मैरी कॉम 2013 से ही अलग-अलग रिश्तों में थीं और 2017 से मैरी कॉम बॉक्सिंग एकेडमी से जुड़े एक व्यक्ति के साथ उनका रिश्ता रहा है।

    ‘मेरे पास सबूत हैं, लेकिन चुप रहा’

    ओनलर कोम ने कहा कि उनके पास इन दावों से जुड़े व्हाट्सएप मैसेज और अन्य सबूत मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने कभी सार्वजनिक रूप से बात नहीं की। उनका कहना है कि उन्हें मैरी कॉम के आगे बढ़ने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर उन्हें दोषी ठहराया जाना स्वीकार्य नहीं है।

    पैसों के आरोपों पर जवाब

    मैरी कॉम द्वारा लगाए गए पैसों की हेराफेरी के आरोपों पर ओनलर ने कहा कि अगर उन्होंने करोड़ों रुपये चुराए होते, तो आज उनकी जिंदगी की हालत कुछ और होती। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली में किराए के मकान में रह रहे हैं और उनके पास कोई बड़ी संपत्ति नहीं है। उन्होंने चुनौती दी कि अगर प्रॉपर्टी या पैसे उनके नाम पर हैं, तो मैरी कॉम सबूत पेश करें।

    बच्चों को लेकर भावुक बयान

    ओनलर कोम ने अपने बच्चों को लेकर भावुक होते हुए कहा कि वे अपने बेटों से मिलना चाहते हैं, जो फिलहाल बोर्डिंग स्कूल में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की परवरिश में उन्होंने हमेशा भूमिका निभाई है और उन्हें सिर्फ “इस्तेमाल करके छोड़ दिया गया” महसूस होता है।

    तलाक के बाद भी विवाद जारी

    ओनलर और मैरी कॉम की शादी 2005 में हुई थी और उनके चार बच्चे हैं। दोनों का 2023 में तलाक हो चुका है, लेकिन कानूनी और भावनात्मक विवाद अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा। ओनलर ने साफ कहा कि वह कोर्ट में लंबी लड़ाई नहीं चाहते, लेकिन अपने ऊपर लगे आरोपों को यूं ही स्वीकार भी नहीं करेंगे।

    निजी विवाद, सार्वजनिक बहस

    यह मामला अब एक निजी रिश्ते से निकलकर सार्वजनिक बहस का रूप ले चुका है। जहां एक ओर मैरी कॉम की लोकप्रियता और उपलब्धियां हैं, वहीं दूसरी ओर ओनलर कोम का कहना है कि सच को जाने बिना एकतरफा राय बनाई जा रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस विवाद में कानूनी तौर पर क्या सच सामने आता है।

  • मकर संक्रांति  2026: मकर संक्रांति के दिन इन रंगों के कपड़े पहनना होता है शुभ यहां जानें कैसे

    मकर संक्रांति 2026: मकर संक्रांति के दिन इन रंगों के कपड़े पहनना होता है शुभ यहां जानें कैसे


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है जो न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और इसका महत्व बहुत गहरा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य की गति और उनके मकर राशि में प्रवेश के साथ नई ऊर्जा का संचार होता है और पुराने को छोड़कर नए का स्वागत किया जाता है। इस दिन का आध्यात्मिक और भौतिक रूप से बड़ा महत्व है और यह जीवन में शुभ परिवर्तन और समृद्धि का संकेत माना जाता है।इसके साथ ही मकर संक्रांति के दिन एक और परंपरा है जो विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करती है और वह है इस दिन विशेष रंगों के कपड़े पहनने की मान्यता। माना जाता है कि सूर्य देव से जुड़े उज्ज्वल और ऊर्जावान रंग पहनने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति का भाग्य और सौभाग्य में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं कि इस दिन कौन से रंग शुभ माने जाते हैं और क्यों।

    पीला रंग सूर्य देव का प्रिय रंग

    मकर संक्रांति के दिन पीला रंग पहनने की परंपरा है। पीला रंग सूर्य देव का प्रिय रंग माना जाता है और यह ज्ञान समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन पीला रंग पहनने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। पीला रंग ऊर्जा और उत्साह को बढ़ावा देता है और इसे शुभ और सौभाग्यवर्धक माना जाता है। इसलिए मकर संक्रांति के दिन पीला रंग पहनकर हम सूर्य देव को सम्मान देते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं।

    नारंगी केसरिया रंग ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक

    नारंगी रंग जिसे केसरिया रंग भी कहा जाता है इस दिन एक और शुभ रंग है। नारंगी रंग ऊर्जा उत्साह और आध्यात्मिक शक्ति का संकेत देता है। यह रंग हमें जीवन में नयापन शक्ति और आत्मविश्वास का अहसास कराता है। मकर संक्रांति के दिन नारंगी रंग पहनने से न केवल हमारे भीतर ऊर्जा का संचार होता है बल्कि यह हमें मानसिक शांति और स्थिरता भी प्रदान करता है। इसके अलावा नारंगी रंग सूर्य के ऊर्जा से जुड़ा होता है और यही कारण है कि यह इस दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

    लाल रंग शक्ति और साहस का प्रतीक

    लाल रंग जो शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है मकर संक्रांति पर पहनने के लिए एक और शुभ रंग है। यह रंग जीवन में उत्साह और नकारात्मकता से लड़ने की शक्ति को बढ़ाता है। लाल रंग पहनने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और यह उसे किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए मानसिक और शारीरिक ताकत देता है। मकर संक्रांति के दिन लाल रंग पहनकर हम अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत कर सकते हैं और जीवन में सफलता की ओर बढ़ सकते हैं।

    सुनहरा रंग वैभव और सफलता का प्रतीक

    सुनहरा रंग जो सूर्य देव के साथ जुड़ा हुआ है वैभव सफलता और तेज का प्रतीक है। मकर संक्रांति के दिन सुनहरा रंग पहनना शुभ माना जाता है क्योंकि यह न केवल सूर्य के उज्ज्वल प्रकाश से जुड़ा है बल्कि यह व्यक्ति को समृद्धि और सफलता की दिशा में प्रेरित करता है। सुनहरा रंग पहनने से व्यक्ति के जीवन में खुशहाली और सफलता आती है। इसके अलावा यह रंग किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए आदर्श माना जाता है।

    किन रंगों से बचें

    जहां मकर संक्रांति पर कुछ रंगों को पहनना शुभ माना जाता है वहीं कुछ रंगों से बचने की भी सलाह दी जाती है। काला और गहरा नीला रंग इस दिन पहनने से परहेज किया जाता है क्योंकि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। इन रंगों का पहनना व्यक्ति की ऊर्जा को कमजोर कर सकता है और यह शुभता में कमी ला सकता है। इसलिए इस दिन काले और गहरे नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।

    मकर संक्रांति के दिन की अन्य परंपराएं

    मकर संक्रांति का त्योहार सिर्फ रंगों से जुड़ा नहीं है बल्कि इस दिन के साथ कई धार्मिक और सामाजिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देकर दान-पुण्य और स्नान करने से सुख-समृद्धि स्वास्थ्य और सफलता की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ के लड्डू भी बांटे जाते हैं जो एकता और मित्रता का प्रतीक होते हैं।मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जो सूर्य देव के प्रति आस्था और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन विशेष रंगों के कपड़े पहनकर हम अपनी जीवन शक्ति को सकारात्मक दिशा में मोड़ सकते हैं और सूर्य देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। पीला नारंगी लाल और सुनहरा रंग पहनने से न केवल शुभता और समृद्धि मिलती है बल्कि यह ऊर्जा और उत्साह से भी भर देता है। तो इस मकर संक्रांति इन रंगों के कपड़े पहनें और सूर्य देव से शुभ आशीर्वाद प्राप्त करें!

  • UP Politics: शिवसेना की एंट्री से सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल की मुश्किलें बढ़ीं, 2027 विधानसभा चुनाव में NDA में नया समीकरण

    UP Politics: शिवसेना की एंट्री से सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल की मुश्किलें बढ़ीं, 2027 विधानसभा चुनाव में NDA में नया समीकरण


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अब गर्म होती दिख रही हैं। एनडीए के घटक दलों में से शिवसेना (शिंदे गुट) ने राज्य में सक्रिय भूमिका निभाने का ऐलान कर दिया है, जिससे सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल (एस) की रणनीति पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है। शिवसेना ने साफ किया कि वह बीजेपी के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी और कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।

    शिवसेना के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक अभिषेक वर्मा ने कहा कि पार्टी अब यूपी में मजबूत स्थिति में है और इसे और बेहतर किया जाएगा। वर्मा ने स्पष्ट किया कि शिवसेना केवल विधानसभा चुनाव में ही नहीं, बल्कि जिला पंचायत, नगर पंचायत और निकाय चुनावों में भी सक्रिय होगी।

    उन्होंने कहा, “हम बीजेपी को बड़ा मानकर चुनाव लड़ेंगे, और कुछ सीटों पर हमारे उम्मीदवार उतारने की अनुमति भी मिल चुकी है।”

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना की एंट्री यूपी के राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल पैदा करेगी। सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वे पंचायत चुनाव अकेले लड़ेंगे और विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि किस दल की रणनीति प्रभावित होती है और किस सीट पर खेल बदल सकता है।

    उत्तर भारतीयों के साथ महाराष्ट्र में कथित भेदभाव और मारपीट के सवाल पर वर्मा ने स्पष्ट किया कि शिवसेना गुंडागर्दी नहीं करती।

    उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उद्धव ठाकरे के शिवसेना गुट से जुड़ी हैं। वर्मा ने आगे कहा, “अगर उत्तर भारतीयों से इतनी ही दिक्कत है, तो इसे बॉलीवुड या अन्य सार्वजनिक मंचों पर भी उजागर किया जा सकता है।”

    शिवसेना की सक्रियता से उत्तर प्रदेश में हिंदू वोट बैंक में हलचल और एनडीए के गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर नई रणनीति बन सकती है। बीजेपी के लिए यह चुनौती और अवसर दोनों है, क्योंकि गठबंधन में सीटों का बंटवारा और उम्मीदवार चयन अब और अधिक संवेदनशील मुद्दा बन गया है।

    पार्टी पदाधिकारी ने कहा कि यूपी में संगठन को मजबूत किया जाएगा, स्थानीय नेताओं और युवा कार्यकर्ताओं को जोड़कर पार्टी का नेटवर्क हर जिले में फैलाया जाएगा। यह कदम शिवसेना को सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल के मुकाबले चुनावी मैदान में मजबूती देने के साथ ही बीजेपी के लिए भी नए समीकरण तैयार करेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि 2027 विधानसभा चुनाव में शिवसेना की भागीदारी राज्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकती है। अब यह देखना रोचक होगा कि कौन सा दल इस नए मोड़ का फायदा उठाता है और किसकी रणनीति प्रभावित होती है। राजनीतिक हलचल और गठबंधन की राजनीति यूपी के मतदाताओं के लिए भी बेहद दिलचस्प और निर्णायक साबित हो सकती है।