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  • सावधान! ये आदतें दे सकती हैं दांतों की इन जानलेवा बीमारियों को न्योता जानें सड़न से बचाने के उपाय

    सावधान! ये आदतें दे सकती हैं दांतों की इन जानलेवा बीमारियों को न्योता जानें सड़न से बचाने के उपाय


    नई दिल्ली । दांतों की सेहत से जुड़ी समस्याएं केवल असुविधा का कारण नहीं बनतीं बल्कि ये शरीर के अन्य हिस्सों पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं। दांतों की समस्याएं जैसे सड़न कैविटी मसूड़ों से खून आना और मुंह की बदबू न केवल हमारे आत्मविश्वास को प्रभावित करती हैं बल्कि शरीर के स्वास्थ्य के लिए भी खतरे की घंटी होती हैं। यदि आप यह समझते हैं कि आपकी कुछ आदतें दांतों की समस्याओं को जन्म देती हैं तो आपको अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की आवश्यकता हो सकती है।

    मीठी चीजों जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड से दांतों पर असर

    डेंटिस्ट डॉ. लीना गुलानी का कहना है कि अगर आप लगातार मीठे खाद्य पदार्थों जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं तो यह दांतों की सड़न और अन्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थों में शुगर अस्वास्थ्यकर फैट्स और आर्टिफिशियल फ्लेवर होते हैं जो दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचाते हैं। शुगर के साथ बैक्टीरिया दांतों में जमा हो जाते हैं जिससे सड़न और कैविटी का खतरा बढ़ जाता है। यदि लंबे समय तक ऐसा खानपान जारी रखा जाए तो यह मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं को भी जन्म दे सकता है। शुगर के अत्यधिक सेवन से दांतों में प्लाक और टार्टर का निर्माण होता है जिससे सड़न की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा जंक फूड जो अक्सर तला हुआ और नमकीन होता है दांतों में फंसा रह जाता है और इसे समय पर साफ न करने पर यह दांतों में सड़न पैदा कर सकता है।

    तंबाकू का सेवन दांतों के लिए गंभीर खतरा

    तंबाकू का सेवन न केवल शरीर के लिए हानिकारक है बल्कि यह दांतों और मसूड़ों के लिए भी बेहद खतरनाक है। डॉ. लीना गुलानी के अनुसार तंबाकू से दांतों में सड़न मसूड़ों से खून आना मुंह में बदबू और गम रोग जैसे गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे हो सकते हैं। तंबाकू से दांतों में पीला रंग और काले दाग पड़ सकते हैं। यह मसूड़ों की सूजन और मसूड़ों की बीमारी का कारण भी बनता है। इसके अलावा तंबाकू के सेवन से मुंह के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।

    दांतों की समस्याओं के लक्षणों को न करें नजरअंदाज

    यदि आपको दांतों में दर्द मसूड़ों में सूजन खून आना या मुंह से बदबू जैसी समस्याएं महसूस हों तो इसे हल्के में लेना बिल्कुल भी उचित नहीं है। डॉ. गुलानी का कहना है कि इन लक्षणों की अनदेखी करना दांतों की बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है जो बाद में गंभीर समस्याएं बन सकती हैं। समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श और इलाज लेने से बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है।

    सही टूथब्रश और डाइट का महत्व

    दांतों की सेहत को बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी चीज है सही टूथब्रश का चयन और उसे नियमित रूप से इस्तेमाल करना। डॉ. गुलानी के अनुसार दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना दांतों की सफाई और सड़न से बचाव में मदद करता है। इसके साथ ही बैलेंस्ड और हेल्दी डाइट का पालन करना भी बहुत महत्वपूर्ण है। भोजन में शुगर की मात्रा कम करने से न केवल दांतों की सड़न से बचा जा सकता है बल्कि यह आपके पूरे शरीर के लिए भी फायदेमंद होता है।इसके अलावा ज्यादा मीठी चीजों और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करने से बचें क्योंकि ये शरीर के लिए न केवल दांतों की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि आपके समग्र स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते हैं।

    फल सब्जियां दूध और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ दांतों को स्वस्थ रखने के लिए अच्छे विकल्प हो सकते हैं।दांतों की सेहत का ख्याल रखना हमारी जिम्मेदारी है और यह हमारे दैनिक जीवन की आदतों पर निर्भर करता है। यदि आप मीठे खाद्य पदार्थों जंक फूड या तंबाकू का सेवन करते हैं तो आपको दांतों की समस्याओं से बचने के लिए इन आदतों में बदलाव करने की आवश्यकता हो सकती है। समय पर विशेषज्ञ की सलाह और दांतों की सही देखभाल के जरिए आप इन समस्याओं से बच सकते हैं और लंबे समय तक स्वस्थ दांतों का आनंद ले सकते हैं।

  • कोहली की टीम का नया ठिकाना: चिन्नास्वामी में अब नहीं होंगे IPL मैच

    कोहली की टीम का नया ठिकाना: चिन्नास्वामी में अब नहीं होंगे IPL मैच

    नई दिल्ली। बेंगलुरु का एम चिन्नास्वामी स्टेडियम अब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का होम ग्राउंड नहीं होगा. IPL 2026 में आरसीबी अपने होम मैच नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम और रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में खेल सकती है. RCB के अलावा राजस्थान रॉयल्स भी अपना होम ग्राउंड बदल सकती है.

    रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने IPL 2025 का खिताब जीता था. उस ऐतिहासिक जीत के बाद चिन्नास्वामी स्टेडियम में विजेता टीम RCB के लिए जीत की परेड होने वाली थी. इसी दौरान स्टेडियम के बाहर भगदड़ मच गई थी, जिसके कारण 11 लोगों की मौत हो गई थी. उस दुखद घटना के बाद चिन्नास्वामी स्टेडियम में कोई उच्च स्तरीय क्रिकेट मैच नहीं खेला गया है.

    RCB को मिलेंगे 2 नए होमग्राउंड!
    खबर है कि RCB अगले सीजन यानी IPL 2026 में पांच मैच नवी मुंबई में खेल सकती है, जबकि 2 मुकाबले रायपुर में करवाए जा सकते हैं. आरसीबी मैनेजमेंट ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करके इस नतीजे पर पहुंचा है. पिछले साल चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ के बाद लगातार मैदान को लेकर सुरक्षा चिंताएं चर्चा का केंद्र बनी रही हैं. अभी तक चिन्नास्वामी स्टेडियम को किसी बड़े लेवल का मैच आयोजित करने की अनुमति नहीं मिल पाई है.

    रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पिछले सीजन बेहतरीन प्रदर्शन किया था. पॉइंट्स टेबल में RCB की टीम दूसरे स्थान पर रही थी. वहीं फाइनल में बेंगलुरु की टीम ने पंजाब किंग्स को 6 रनों से हराकर जीत दर्ज की थी. ये 18 साल में पहला मौका रहा जब RCB ने इंडियन प्रीमियर लीग का खिताब जीता.

    राजस्थान रॉयल्स का भी बदलेगा होमग्राउंड
    पिछले वर्ष राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव नहीं करवा पाई थी. उसके बाद आईपीएल चेयरमैन अरुण सिंह धूमल ने RCA से कहा था कि वह चुनाव नहीं करवा पाता है तो राजस्थान रॉयल्स की टीम अपने घरेलू मैच जयपुर में आयोजित नहीं करवा पाएगी.

  • इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए मूंगफली, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने

    इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए मूंगफली, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने


    नई दिल्ली । सर्दियों में धूप में बैठकर मूंगफली खाना एक लोकप्रिय शगल है खासतौर पर भारत में। यह न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि प्रोटीन फैट और फाइबर से भरपूर होने के कारण इसे गरीबों का बादाम भी कहा जाता है। हालांकि यह सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है लेकिन कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में मूंगफली का सेवन गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इस लेख में हम उन 5 खास परिस्थितियों पर प्रकाश डालेंगे जिनमें मूंगफली का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
    गंभीर एलर्जी से जूझ रहे लोग

    मूंगफली की एलर्जी दुनिया भर में सबसे आम और खतरनाक एलर्जी मानी जाती है। यह एलर्जी गंभीर परिणाम दे सकती है। यदि किसी व्यक्ति को मूंगफली से एलर्जी है तो उसे इससे बने उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए। एलर्जी की प्रतिक्रियाएं त्वचा पर चकत्ते खुजली दस्त और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षणों के रूप में सामने आ सकती हैं। गंभीर मामलों में एनाफिलेक्सिस एक प्रकार की जानलेवा एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है जो तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। इस कारण से मूंगफली या उससे बने उत्पादों से पूरी तरह से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

    वेट लॉस डाइट पर रहने वाले लोग
    मूंगफली पोषक तत्वों से भरपूर होने के बावजूद इसमें कैलोरी और फैट की मात्रा भी अधिक होती है। यदि आप वजन घटाने के लिए डाइट पर हैं तो मूंगफली का अत्यधिक सेवन आपके प्रयासों पर पानी फेर सकता है। एक मुट्ठी मूंगफली में 160 से 180 कैलोरी होती हैं जो वेट लॉस डाइट के लिए अनुपयुक्त हो सकती हैं। अत्यधिक फैट और कैलोरी के सेवन से आपका वजन बढ़ सकता है जिससे वेट लॉस के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए यदि आप वजन घटाना चाहते हैं तो मूंगफली का सेवन नियंत्रित मात्रा में करना चाहिए।

    हाई ब्लड प्रेशर के मरीज

    सामान्य मूंगफली में सोडियम की मात्रा बहुत कम होती है लेकिन बाजार में मिलने वाली अधिकतर मूंगफली ‘रोस्टेड और साल्टेड’ नमकीन होती हैं जिनमें अतिरिक्त नमक होता है। नमक का अत्यधिक सेवन उच्च रक्तचाप हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्तियों के लिए खतरनाक हो सकता है। यह रक्तचाप को अचानक बढ़ा सकता है जो हृदय रोगियों के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं तो नमकीन मूंगफली से बचें और केवल बिना नमक वाली मूंगफली का सेवन करें।

    शरीर में सूजन ,सूजन और जलन की समस्या

    मूंगफली में ओमेगा-6 फैटी एसिड की मात्रा अधिक होती है जबकि ओमेगा-3 की कमी होती है। शरीर में इन फैटी एसिड्स का असंतुलन सूजन और जलन की समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है। जो लोग पहले से ही जोड़ों के दर्द आर्थराइटिस या शरीर में सूजन से पीड़ित हैं उन्हें मूंगफली का सेवन बहुत सोच-समझ कर करना चाहिए। ओमेगा-6 का अत्यधिक सेवन सूजन बढ़ा सकता है जिससे इन समस्याओं में वृद्धि हो सकती है। इसीलिए ऐसे लोग मूंगफली के सेवन में सावधानी बरतें और डॉक्टर से परामर्श लें।


    मिनरल्स की कमी वाले लोग

    मूंगफली में फाइटिक एसिड पाया जाता है जो शरीर में आवश्यक मिनरल्स जिंक आयरन कैल्शियम मैग्नीशियम के अवशोषण में बाधा डालता है। यदि आप इन मिनरल्स की कमी से जूझ रहे हैं तो मूंगफली का अत्यधिक सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यह फाइटिक एसिड शरीर में इन महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी को बढ़ा सकता है जिससे अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे लोगों को मूंगफली के सेवन में संयम बरतना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

    मूंगफली का सेवन सेहत के लिए कई लाभकारी हो सकता है लेकिन यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। खासकर जिन लोगों को एलर्जी हाई ब्लड प्रेशर सूजन की समस्या या मिनरल्स की कमी है उन्हें मूंगफली से बचना चाहिए। किसी भी चीज की अति हानिकारक हो सकती है और यदि आप उपरोक्त में से किसी भी श्रेणी में आते हैं तो मूंगफली को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। इसके अलावा अगर आप सर्दियों में मूंगफली का आनंद लेना चाहते हैं तो सीमित मात्रा में और बिना नमक वाली मूंगफली का सेवन करना सबसे बेहतर रहेगा

  • शादी के बाद बॉलीवुड में पहली झलक: नूपुर सैनन और स्टेबिन बेन का पब्लिक डेब्यू

    शादी के बाद बॉलीवुड में पहली झलक: नूपुर सैनन और स्टेबिन बेन का पब्लिक डेब्यू

    नई दिल्ली।  सेलिब्रेशन ऑफिशियली खत्म हो गया है! नए शादीशुदा जोड़े नूपुर सैनन और स्टेबिन बेन ने आखिरकार एक शादीशुदा जोड़े के तौर पर पहली बार पब्लिक अपीयरेंस दी; दोनों को उदयपुर में अपनी स्टार-स्टडेड शादी की रस्मों के बाद घर लौटते समय एयरपोर्ट पर देखा गया।
    यह जोड़ा बहुत खुश दिख रहा था और उन्होंने साथ में पैपराज़ी को ग्रीट किया। नूपुर ने एक खूबसूरत नीले रंग का अनारकली पहना था, जिसके साथ उन्होंने अपना ब्राइडल चूड़ा और मंगलसूत्र पहना था। उनके बगल में, स्टेबिन सफेद मिरर-वर्क कुर्ते सेट में बहुत अच्छे लग रहे थे। सिंगर मुस्कुरा रहे थे और फोटोग्राफर्स से शादी की शुभकामनाएं खुशी-खुशी ले रहे थे।
    नूपुर की बहन, बॉलीवुड एक्टर कृति सैनन भी इस जोड़े के साथ वापस यात्रा के लिए शामिल हुईं। कृति ने चेक्ड कुर्ते सेट में एक आरामदायक लुक चुना था, और हाथ में एक जैकेट पकड़ी हुई थी। उन्हें अपने माता-पिता और कथित पार्टनर, कबीर बहिया के साथ अपनी फ्लाइट में चढ़ने से पहले एयरपोर्ट पर देखा गया।
    नूपुर और स्टेबिन की शादी के अंदर की बातें
    नूपुर और स्टेबिन का तीन दिन का सेलिब्रेशन परंपरा और हाई एनर्जी का मिश्रण था। शनिवार को एक सपनों जैसी क्रिश्चियन सेरेमनी के बाद, उन्होंने रविवार को एक पारंपरिक हिंदू शादी में सात फेरे लिए।

    HT सिटी से बात करने वाले एक सूत्र के अनुसार: “हिंदू फेरे की सेरेमनी एक शानदार बारात के साथ शुरू हुई, जिसमें लगभग सौ लोग पारंपरिक छतरियां लिए हुए थे। स्टेबिन, अपने दोस्तों के साथ, नाचते हुए वेन्यू तक पहुंचे, जिससे जुलूस एक हाई-एनर्जी सेलिब्रेशन में बदल गया।”

    नूपुर ने फूलों की सजावट के बीच एक इमोशनल ब्राइडल एंट्री की, जिसमें दूल्हा और दुल्हन दोनों ने कस्टम मनीष मल्होत्रा ​​के कपड़े पहने थे। फेरों के बाद पांच मिनट की आतिशबाजी और फूलों की बारिश हुई। दिशा पटानी, मौनी रॉय और करण कुंद्रा जैसे सेलिब्रिटी मेहमानों ने इस जश्न में हिस्सा लिया, जो बहुत सारे गाने और डांस के साथ खत्म हुआ।
  • 40 के बाद भी स्किन रहे ग्लोइंग और यंग: रोज़ अपनाएं ये 8 आसान रुटीन

    40 के बाद भी स्किन रहे ग्लोइंग और यंग: रोज़ अपनाएं ये 8 आसान रुटीन


    नई दिल्ली। 40 की उम्र के बाद भी त्वचा में नेचुरल ग्लो और युवा लुक बनाए रखना मुश्किल नहीं है। सही स्किनकेयर, हेल्दी डाइट, पर्याप्त नींद और स्ट्रेस-फ्री लाइफस्टाइल अपनाकर आप हर उम्र में हेल्दी और ग्लोइंग दिख सकती हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि बड़ी-बड़ी चीज़ों या महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं, बल्कि रोज़ाना के छोटे-छोटे हेल्दी रुटीन ही स्किन, एनर्जी और कॉन्फिडेंस को बनाए रखते हैं।

    1. स्किन क्लीनिंग और मॉइस्चराइजिंग:
    40 की उम्र में त्वचा ड्राई और डल दिखने लगती है। सुबह और शाम चेहरा अपनी स्किन टाइप के अनुसार माइल्ड क्लींजर से धोएं और हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर लगाएं। रात में नाइट क्रीम का इस्तेमाल करें, जिससे त्वचा रिपेयर होती है और सुबह फ्रेश ग्लो दिखाई देता है।

    2. सनस्क्रीन का महत्व:
    सन डैमेज त्वचा की एजिंग को तेज करता है। इसलिए घर के अंदर या बाहर, SPF 30 या उससे अधिक का सनस्क्रीन रोजाना लगाना जरूरी है। यह पिगमेंटेशन, झाइयां और झुर्रियों को कंट्रोल करता है और स्किन को लंबे समय तक हेल्दी रखता है।

    3. हेल्दी डाइट और पानी:
    ग्लो बाहर से नहीं, अंदर से आता है। डाइट में हरी सब्जियां, मौसमी फल, सलाद, नट्स और प्रोटीन शामिल करें। शुगर और प्रोसेस्ड फूड कम करें। रोजाना 8–10 गिलास पानी पीने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और त्वचा नेचुरली ब्राइट दिखती है। ओमेगा-3 फूड जैसे बादाम, अखरोट और बीज स्किन को प्लंप और ग्लोइंग बनाते हैं।

    4. पर्याप्त नींद और स्ट्रेस कम करना:
    40 के बाद स्ट्रेस का असर सीधे चेहरे पर दिखाई देता है। डार्क सर्कल, सूजन और डल स्किन इसके संकेत हैं। रोजाना 7–8 घंटे की नींद लें और योग, मेडिटेशन या हल्की वॉक से स्ट्रेस कम करें।

    5. एक्सरसाइज और फेस योगा:
    20–30 मिनट की डेली वॉक या एक्सरसाइज ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है और स्किन में नैचुरल रेडियंस लाती है। फेस योगा और मसाज मसल्स को टाइट रखते हैं और सैगिंग कम करते हैं। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या हल्के वेट्स मसल्स और हड्डियों के लिए भी फायदेमंद हैं।

    6. हार्श केमिकल्स से दूरी:
    40 के बाद हेवी मेकअप और हार्श स्किनकेयर स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सिंपल और कंसिस्टेंट रुटीन अपनाएं। नेचुरल या डर्मेटोलॉजिस्ट-रिकमेन्डेड प्रोडक्ट्स, गर्म पानी से चेहरा धोना और हायल्यूरोनिक एसिड या विटामिन C जैसी एक्टिव इंग्रेडिएंट्स स्किन को सपोर्ट करती हैं और नेचुरल ग्लो बनाए रखती हैं।

    7. स्ट्रेस-फ्री लाइफ:
    लंबे समय तक स्ट्रेस उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करता है। मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग और “मी-टाइम” जैसी आदतें मानसिक शांति देती हैं और चेहरे पर पॉजिटिव ग्लो लाती हैं।
    8. नियमित हेल्थ चेक-अप:
    40 की उम्र के बाद स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी हो जाती है। इससे संभावित समस्याओं को समय रहते पहचानकर नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।

    सबसे अहम बात यह है कि बड़ी चीज़ों की जरूरत नहीं, बल्कि रोज़ाना की छोटी-छोटी हेल्दी आदतें ही आपकी स्किन, एनर्जी और कॉन्फिडेंस को 40 की उम्र के बाद भी बनाए रख सकती हैं।

  • चेन स्मोकर भी थे टीवी के 'राम', लेकिन फैन की इस फटकार ने सिगरेट छोड़ने को किया मजबूर

    चेन स्मोकर भी थे टीवी के 'राम', लेकिन फैन की इस फटकार ने सिगरेट छोड़ने को किया मजबूर


    नई दिल्ली । टीवी के स्वर्ण युग में एक ऐसा चेहरा था, जिसने लाखों दिलों को छुआ और एक नई पहचान बनाई। वह चेहरा था अरुण गोविल का, जिन्होंने राम के किरदार को इतनी शिद्दत से निभाया कि लोग उन्हें असल में राम समझने लगे। लेकिन यह जो चेहरा राम के रूप में पूरे भारत में पूजा जाता था, वह कभी चेन स्मोकर भी था। हां यह सच है कि अरुण गोविल ने अपनी जवानी के दिनों में चेन स्मोकिंग की आदत भी डाली थी जो उनके जीवन का एक अंधेरा पहलू था। लेकिन क्या एक फैन की फटकार ने उन्हें सिगरेट छोड़ने के लिए प्रेरित किया आइए जानते हैं अरुण गोविल की इस अद्भुत जीवन यात्रा के बारे में, जो एक फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।

    अरुण गोविल की शुरुआत

    12 जनवरी 1958 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में जन्मे अरुण गोविल ने अभिनय में अपने करियर की शुरुआत की थी। लेकिन उनका असली मुकाम तब आया जब उन्होंने दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक रामायण में भगवान राम का किरदार निभाया। यह धारावाहिक भारतीय टेलीविजन का एक ऐतिहासिक पल था और अरुण गोविल का राम के रूप में अवतार लेने के बाद वह हर घर के प्रिय बन गए।राम के रूप में गोविल की भूमिका इतनी प्रभावशाली थी कि आज भी उन्हें लोग सम्मान और श्रद्धा की नजर से देखते हैं। जब भी वह सार्वजनिक स्थानों पर जाते हैं, लोग उन्हें सम्मान देने के लिए उनके चरणों में झुक जाते हैं। यह सम्मान केवल उनके अभिनय के कारण नहीं बल्कि उस सादगी शुचिता और आदर्श के कारण था, जिसे उन्होंने अपने जीवन में आत्मसात किया।

    चेन स्मोकिंग की आदत और उसका असर

    वहीं, इस अभिनेता का जीवन केवल सादगी और आदर्शों का ही नहीं था। जब वह एक युवा अभिनेता थे, तब उन्होंने चेन स्मोकिंग की आदत लगा ली थी। यह आदत उनकी शख्सियत का एक ऐसा हिस्सा बन चुकी थी जिसे वह आसानी से छोड़ नहीं पा रहे थे। यह आदत उनकी सेहत के लिए तो हानिकारक थी ही साथ ही उनके सार्वजनिक छवि पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा था। लेकिन वह इस पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं पा रहे थे, क्योंकि यह उनकी आदत का हिस्सा बन चुका था।

    फैन की फटकार और जीवन में बदलाव

    अरुण गोविल के जीवन में एक मोड़ तब आया, जब एक फैन ने उन्हें उनके सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करते हुए देखा। उस फैन ने उन्हें न केवल फटकार लगाई बल्कि उनकी आदत को लेकर एक कड़ा संदेश दिया। उसने कहा आप तो भगवान राम का किरदार निभाते हैं लेकिन आपकी यह आदत भगवान राम के आदर्शों के खिलाफ है। इस फटकार ने गोविल को चौंका दिया और वह अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रेरित हो गए इस फटकार का प्रभाव इतना गहरा था कि अरुण गोविल ने सिगरेट छोड़ने का संकल्प लिया। यह कदम उनके जीवन का एक बड़ा मोड़ था। उन्होंने न केवल अपने स्वास्थ्य के लिए बल्कि अपनी सार्वजनिक छवि और आदर्शों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए धूम्रपान छोड़ने का फैसला लिया।

    सादगी की मिसाल और जीवन की दिशा

    अरुण गोविल का जीवन केवल एक अभिनेता का जीवन नहीं था। उन्होंने अभिनय को एक तपस्या के रूप में देखा, जिसमें न केवल उनकी कला थी, बल्कि उनके भीतर की सादगी और शुचिता भी थी। उन्होंने कभी भी अपने अभिनय करियर को महज मनोरंजन का जरिया नहीं माना। उनके लिए यह एक मिशन था, जिसे उन्होंने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया। आज भी जब वह किसी सार्वजनिक मंच पर जाते हैं, तो लोग उन्हें आदर्श मानते हैं और उनके कदमों में श्रद्धा से झुकते हैं। यह सम्मान उनकी अभिनय कला से कहीं अधिक उनके जीवन के आदर्शों और सादगी के लिए है।अरुण गोविल की कहानी यह साबित करती है कि एक अभिनेता का जीवन केवल पर्दे पर दिखाए गए किरदार तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह अपनी निजी आदतों, व्यवहार और जीवन के सिद्धांतों से भी लोगों के दिलों में स्थान बनाता है।

  • ब्रैंडन किंग कप्तान, वेस्टइंडीज ने अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के लिए किया टीम ऐलान

    ब्रैंडन किंग कप्तान, वेस्टइंडीज ने अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के लिए किया टीम ऐलान

    नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2026 से पहले वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम अफगानिस्तान के खिलाफ 3 मैचों की टी20 सीरीज खेलकर अपनी तैयारियों को पुख्ता करेगी। यह सीरीज 19 से 22 जनवरी तक दुबई क्रिकेट स्टेडियम में खेली जाएगी। टीम 14 जनवरी को रवाना होगी और 16 जनवरी को यूएई पहुंचेगी।

    टीम में कप्तानी बदलाव

    नियमित कप्तान शाई होप इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं। उनकी जगह ब्रैंडन किंग को टीम का कप्तान बनाया गया है। ब्रैंडन किंग पहले भी कई मौकों पर टीम की कप्तानी कर चुके हैं।

    खिलाड़ियों की अनुपस्थिति और वापसी

    शाई होप, रोस्टन चेज और अकील हुसैन फिलहाल दक्षिण अफ्रीका में चल रही एसए20 लीग में खेल रहे हैं, इसलिए वे इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं। वहीं, शमर जोसेफ और एविन लुईस इंजरी से उबरकर टीम में लौट आए हैं। अल्जारी जोसेफ को फिट होने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है, इसलिए वह स्क्वॉड में नहीं हैं।

    नई और युवा प्रतिभाओं को मौका

    क्वेंटिन सैम्पसन को पहली बार टीम में शामिल किया गया है। वह रोवमैन पॉवेल की जगह लेंगे, जिन्हें वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत जेसन होल्डर और रोमारियो शेफर्ड के साथ इस सीरीज में आराम दिया गया है।

    हेड कोच डैरेन सैमी का संदेश

    हेड कोच डैरेन सैमी ने कहा कि यह सीरीज टी20 विश्व कप से पहले तैयारी का बेहतरीन मौका है। यह उन खिलाड़ियों के लिए भी मूल्यवान अवसर है जो 2025 के अंत में लंबे समय तक नहीं खेल पाए। सैमी ने बताया, “सबकॉन्टिनेंटल कंडीशन में प्रतिस्पर्धी मैच खेलना खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टीम की रणनीति समझने के लिए महत्वपूर्ण है।”

    टीम का प्रदर्शन और मुकाबले का रिकॉर्ड

    वेस्टइंडीज और अफगानिस्तान टी20 फॉर्मेट की रोचक टीमें हैं। दोनों टीमें अब तक 8 बार आमने-सामने आई हैं। इसमें 5 मैचों में वेस्टइंडीज और 3 मैचों में अफगानिस्तान की जीत दर्ज है।

    अफगानिस्तान सीरीज के लिए वेस्टइंडीज की 16 सदस्यीय टीम

    ब्रैंडन किंग (कप्तान), एलिक अथांजे, कीसी कार्टी, जॉनसन चार्ल्स, मैथ्यू फोर्ड, जस्टिन ग्रीव्स, शिमरॉन हेटमायर, आमिर जंगू, शमर जोसेफ, एविन लुईस, गुडाकेश मोती, खारी पियरे, क्वेंटिन सैम्पसन, जेडन सील्स, रेमन सिमंड्स, शमर स्प्रिंगर।

    इस सीरीज के जरिए वेस्टइंडीज अपनी टी20 विश्व कप 2026 की तैयारियों को मजबूत करेंगे और युवा व वापसी करने वाले खिलाड़ियों को मूल्यवान अनुभव मिलेगा।

  • तेज विकास, कम महंगाई-भारत को अपनानी चाहिए संतुलित और तटस्थ नीति: रिपोर्ट

    तेज विकास, कम महंगाई-भारत को अपनानी चाहिए संतुलित और तटस्थ नीति: रिपोर्ट

    नई दिल्ली। भारत इस समय आर्थिक विकास और कम महंगाई के संतुलित दौर में है, जिसे अर्थशास्त्री ‘गोल्डीलक्स फेज’ कह रहे हैं। मंगलवार को जारी एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया कि अब नीतियों को न तो बहुत सख्त और न ही बहुत ढीला रखना चाहिए, बल्कि लगभग तटस्थ नीति अपनाई जानी चाहिए।

    नीति का संतुलित दृष्टिकोण

    रिपोर्ट में सुझाया गया है कि 2026 में अर्थव्यवस्था और बाजार को सहारा देने के लिए ऐसी नीति सबसे बेहतर होगी जिसमें सरकारी खर्च पर नियंत्रण रखा जाए और ब्याज दरें आसान बनी रहें। यदि सरकार खर्च में सावधानी रखे और रिजर्व बैंक ब्याज दरों को आसान बनाए रखे, तो इससे निवेशकों और अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

    अंदरूनी कमजोरियों पर ध्यान

    हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अर्थव्यवस्था में कुछ कमजोरियां अभी भी मौजूद हैं। इनमें कंपनियों का कम निवेश और विदेशी पूंजी का सीमित प्रवाह शामिल है, जिन्हें सुधारना जरूरी होगा।

    बॉन्ड और विदेशी निवेश की उम्मीद

    बॉन्ड मार्केट्स ने 2026 की शुरुआत में राज्यों द्वारा कर्ज लेने की संभावना पहले ही ध्यान में रख ली है। आरबीआई द्वारा बॉन्ड खरीद, बजट में वित्तीय अनुशासन और भारत को ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल किए जाने से विदेशी निवेश आने की उम्मीद बढ़ी है।

    शेयर बाजार और आर्थिक सुधार

    रिपोर्ट के अनुसार, हाल के आर्थिक सुधारों, सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि और शेयरों के उचित दामों के कारण शेयर बाजार को फायदा मिल सकता है। हालांकि, लंबे समय तक लाभ के लिए कंपनियों का निवेश और विदेशी निवेश बढ़ाने वाले बड़े सुधार जरूरी हैं।

    ब्याज दर और महंगाई का अनुमान

    एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अगले साल महंगाई दर चार प्रतिशत से थोड़ी कम रहने की संभावना है। इससे आरबीआई पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव नहीं रहेगा और विकास धीमा होने पर दरें और कम करने की गुंजाइश भी रहेगी।

    वैश्विक घटनाओं का असर

    भंडारी ने बताया कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ से जुड़ी खबरें, ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने की प्रक्रिया और विकसित देशों में बढ़ती ब्याज दरें भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकती हैं।

    सरकार का वित्तीय संतुलन लक्ष्य

    केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक सार्वजनिक कर्ज महामारी से पहले के स्तर पर लाया जाए। इसके लिए अगले पांच वर्षों तक वित्तीय सुधार और खर्च पर नियंत्रण जरूरी होगा। निजीकरण के जरिए यह संतुलन स्थापित किया जा सकता है ताकि आर्थिक विकास पर असर कम से कम हो।

    राज्यों का कर्ज और घाटा

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई राज्यों में सार्वजनिक कर्ज बढ़ने की संभावना है, लेकिन 3 प्रतिशत की वित्तीय घाटे की सीमा के कारण यह नियंत्रित रहेगा। इस प्रकार, भारत 2026 में संतुलित विकास और तटस्थ नीतियों के जरिए आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की स्थिति में है।

  • खंडवा में फ्लोराइड पानी से स्वास्थ्य संकट,बच्चों के दांत और हड्डियां कमजोर, कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

    खंडवा में फ्लोराइड पानी से स्वास्थ्य संकट,बच्चों के दांत और हड्डियां कमजोर, कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


    खंडवा। जिले के किल्लौद विकासखंड के कई गांवों में पेयजल में अत्यधिक फ्लोराइड मिलने से स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीण और बच्चों में दांत पीले और कमजोर हो रहे हैं, वहीं हड्डियों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर मंगलवार को कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्कूली बच्चे कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर ऋषव गुप्ता को ज्ञापन सौंपा।

    बच्चों का शारीरिक विकास प्रभावित
    ज्ञापन में बताया गया कि फ्लोराइड युक्त पानी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। कम उम्र में ही उनके दांत खराब और पीले हो रहे हैं, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। साथ ही कई ग्रामीण हड्डियों की समस्याओं से जूझ रहे हैं। पूरे क्षेत्र में जनस्वास्थ्य की स्थिति गंभीर होने लगी है और स्थानीय प्रशासन की अनदेखी से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

    विधायक की चुप्पी पर कांग्रेस का हमला
    कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तमपाल सिंह पुरनी ने क्षेत्रीय विधायक नारायण पटेल की चुप्पी को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा, जिम्मेदार विधायक के मौन से यह स्पष्ट होता है कि वह अपने कार्यों के प्रति कितने उत्तरदायी हैं। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

    प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख मांगें
    जनसुनवाई में कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह पुरनी और शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं:

    किल्लौद ब्लॉक के सभी गांवों के पेयजल स्रोतों की तत्काल गुणवत्ता जांच कराई जाए।

    प्रभावित लोगों के लिए फ्लोराइड मुक्त और सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था शीघ्र की जाए।

    बच्चों और नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएं।

    समस्या के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालीन ठोस कार्ययोजना बनाई जाए और उसे लागू किया जाए।

    स्थानीय स्थिति और प्रशासनिक कदम
    ग्रामीणों का कहना है कि फ्लोराइड युक्त पानी पीने से न केवल स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि यह बच्चों और युवाओं के भविष्य को भी खतरे में डाल रहा है। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने और स्वास्थ्य, शिक्षा और जल सुरक्षा के लिए विशेष पहल करने की मांग की।

    सभी गांवों में नियमित जल परीक्षण और निगरानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई है। स्थानीय प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो कांग्रेस और ग्रामीण बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

    खंडवा के किल्लौद में इस पहल से यह संदेश गया कि स्वास्थ्य और सुरक्षित पेयजल को प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन जनता की इन मांगों पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

  • नौसेना की पहल: लक्षद्वीप में विशाल मेडिकल और सर्जिकल कैंप, कई विशेषज्ञ शामिल

    नौसेना की पहल: लक्षद्वीप में विशाल मेडिकल और सर्जिकल कैंप, कई विशेषज्ञ शामिल

    नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बल न केवल देश की रक्षा करते हैं, बल्कि अब नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसी कड़ी में नौसेना ने लक्षद्वीप में बहु-विशेषज्ञ मेगा मेडिकल एवं सर्जिकल शिविर आयोजित किया है। इस पहल के अंतर्गत कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी समेत अनेक सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं में परामर्श, जांच और उपचार प्रदान किया जा रहा है।

    उद्घाटन और आयोजन स्थल

    13 जनवरी को कवरत्ती स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने इस शिविर का औपचारिक उद्घाटन किया। शिविर 17 जनवरी तक चलेगा और लक्षद्वीप के पांच द्वीप-अमीनी, एंड्रॉथ, अगत्ती, कवरत्ती और मिनिकॉय-में विस्तारित किया गया है।

    स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार यह विशाल पैमाने का चिकित्सा शिविर दूरदराज के नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शिविर में व्यापक स्वास्थ्य जांच, शीघ्र निदान, समय पर चिकित्सकीय परामर्श, जरूरी उपचार और निशुल्क दवाओं का वितरण द्वीपवासियों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करेगा।

    बहु-विशेषज्ञ सेवाएं और मोतियाबिंद ऑपरेशन

    शिविर में कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी समेत बुनियादी और सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं की व्यवस्था है। कवरत्ती में नेत्र विज्ञान टीम मोतियाबिंद रोगियों के ऑपरेशन कर रही है, जबकि मरीजों को चश्मे, आई ड्रॉप्स और दवाएं भी प्रदान की जा रही हैं।

    सरकारी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों के अनुरूप

    यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के उद्देश्यों के अनुरूप है। शिविर ‘वन अर्थ, वन हेल्थ’ के वैश्विक स्वास्थ्य दर्शन के अनुसार उपचारात्मक, निवारक और प्रोत्साहक स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय प्रस्तुत करता है।

    नौसेना प्रमुख के विचार

    एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि यह पहल तीन दृष्टियों से अनूठी है-समन्वय, जिसमें तीनों सशस्त्र सेवाएं और स्थानीय प्रशासन मिलकर कार्य कर रहे हैं; विस्तार, जिसमें कई विशेषज्ञ शामिल हैं; और पैमाना, जिसमें बड़ी संख्या में चिकित्सा स्टाफ तैनात है। इससे नागरिक सैन्य सहयोग और अंतर-सेवा समन्वय मजबूत होता है।

    आधुनिक सुविधाओं और सहयोगी स्टाफ

    शिविर में देशभर के विभिन्न रक्षा चिकित्सा प्रतिष्ठानों से 29 मेडिकल अधिकारी, 2 नर्सिंग अधिकारी और 42 पैरामेडिकल कर्मी तैनात हैं। साथ ही जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक उपकरण, स्टोर और दवाओं से सपोर्ट किया गया है।

    यह बहु-विशेषज्ञ मेडिकल शिविर भारतीय नौसेना और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की सेवा-भावना, जिम्मेदारी और लक्षद्वीप के लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।