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  • नवंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर, दिल्ली से चेन्नई तक बढ़े नए दाम..

    नवंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर, दिल्ली से चेन्नई तक बढ़े नए दाम..


    नई दिल्ली ।
    नवंबर महीने के पहले दिन आम लोगों और कारोबारियों से जुड़ी ईंधन की कीमतों में बदलाव किया गया है। तेल कंपनियों ने 1 नवंबर 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए रेट लागू कर दिए हैं। इस बार विभिन्न शहरों में इसकी कीमतों में अलग-अलग बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 10 रुपये महंगा होकर 2,820 रुपये का हो गया है। इससे पहले इसकी कीमत 2,810 रुपये थी। हालांकि, घरेलू रसोई गैस इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है और 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    कमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है। ऐसे में इसकी कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर इन कारोबारों के संचालन खर्च पर पड़ सकता है। नवंबर की शुरुआत में हुई यह वृद्धि अलग-अलग शहरों में अलग स्तर पर दर्ज की गई है। प्रमुख महानगरों में चेन्नई में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।

    चेन्नई में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 2,983 रुपये से बढ़कर 2,994.50 रुपये हो गई है। यहां प्रति सिलेंडर 11.50 रुपये की वृद्धि की गई है। मुंबई में इसकी नई कीमत 2,764 रुपये निर्धारित की गई है। वहीं, अहमदाबाद में कमर्शियल सिलेंडर का दाम 2,831.50 रुपये से बढ़कर 2,842 रुपये पहुंच गया है। इन बदलावों के बाद संबंधित शहरों के व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सिलेंडर खरीदने के लिए पहले से अधिक भुगतान करना होगा।

    दूसरी ओर घरेलू रसोई गैस की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू LPG सिलेंडर पहले की तरह 942 रुपये में उपलब्ध है। मुंबई में इसकी कीमत 941.50 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये बनी हुई है। अहमदाबाद में घरेलू गैस सिलेंडर का भाव 949 रुपये पर स्थिर रखा गया है। इस तरह कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक रसोई खर्च पर फिलहाल कीमतों में बदलाव का अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा।

    कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पहले 1 अक्टूबर 2026 को भी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर के दाम में 62.50 रुपये का इजाफा किया गया था। उस समय भी घरेलू रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखा गया था। अब नवंबर में दोबारा कीमत बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट और खानपान से जुड़े दूसरे व्यवसायों के सामने ईंधन पर अधिक खर्च करने की स्थिति बन सकती है।

    LPG के साथ ही 1 नवंबर से हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। दिल्ली में ATF का भाव 137.12 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 138.50 रुपये प्रति लीटर हो गया है। यह करीब एक प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इससे पहले अक्टूबर में हवाई ईंधन की कीमतों में 13.22 प्रतिशत यानी लगभग 16 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा हुआ था। नवंबर में हुई वृद्धि के साथ ATF लगातार चौथे महीने महंगा हुआ है।

    हवाई ईंधन एयरलाइंस कंपनियों के संचालन खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। कुल ऑपरेटिंग लागत में इसकी हिस्सेदारी लगभग 35 से 40 प्रतिशत बताई जाती है। ऐसे में ATF की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से विमानन कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर भविष्य में हवाई टिकटों की कीमतों पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल नवंबर की शुरुआत में कमर्शियल गैस और हवाई ईंधन महंगे हुए हैं, जबकि घरेलू रसोई गैस के उपभोक्ताओं को कीमतों में बदलाव से राहत मिली हुई है।

  • लाल परेड ग्राउंड पर आज सजेगा मध्यप्रदेश का गौरव, मोनाली ठाकुर की प्रस्तुति से लेकर देशज व्यंजन मेले तक होंगे खास आयोजन

    लाल परेड ग्राउंड पर आज सजेगा मध्यप्रदेश का गौरव, मोनाली ठाकुर की प्रस्तुति से लेकर देशज व्यंजन मेले तक होंगे खास आयोजन


    भोपाल । मध्यप्रदेश के 71वें स्थापना दिवस का मुख्य समारोह राजधानी भोपाल में रविवार को धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। तीन दिन तक चलने वाले राज्यस्तरीय आयोजन का सबसे बड़ा कार्यक्रम शाम 6 बजकर 30 मिनट पर लाल परेड ग्राउंड में होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समारोह का शुभारंभ करेंगे। इस बार स्थापना दिवस की थीम विरासत से विकास के पथ की ओर अग्रसर प्रदेश रखी गई है। इसके माध्यम से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान जनजातीय परंपराओं कृषि नवाचारों महिला उद्यमिता और विकास कार्यों की झलक दिखाई जाएगी। समारोह में आम नागरिक बिना किसी प्रवेश पत्र या पास के शामिल हो सकेंगे। वहीं स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए विशेष स्टूडेंट ब्लॉक बनाया गया है। विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए अपने संस्थान का पहचान पत्र दिखाना होगा।

    स्थापना दिवस के अवसर पर सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री लाल परेड ग्राउंड में आधुनिक कृषि प्रदर्शनी विकास दीर्घा महिला उद्यमिता मंडप और देशज व्यंजन मेले का उद्घाटन करेंगे। इन आयोजनों में प्रदेश की उपलब्धियों और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच दिया जाएगा। आधुनिक कृषि प्रदर्शनी में उन्नत बीज जैविक इनपुट्स स्मार्ट सिंचाई और एग्री स्टार्टअप्स से जुड़े नए प्रयोग देखने को मिलेंगे। महिला उद्यमिता मंडप और किसान बाजार में स्व-सहायता समूहों के उत्पाद हस्तशिल्प और स्थानीय वस्तुओं की प्रदर्शनी तथा बिक्री होगी।

    शाम के मुख्य समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता गायिका मोनाली ठाकुर की संगीत प्रस्तुति होगी। मुंबई से आए कलाकारों के साथ वे सुगम संगीत की प्रस्तुति देंगी। मोनाली ठाकुर बॉलीवुड के कई लोकप्रिय गीतों के लिए जानी जाती हैं। फिल्म लुटेरा का सवार लूं और दम लगा के हईशा का मोह मोह के धागे उनके चर्चित गीतों में शामिल हैं। उनकी आवाज से स्थापना दिवस की शाम संगीतमय होगी। कार्यक्रम में 71 बच्चे सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का गायन करेंगे। इसके बाद मध्यप्रदेश पुलिस बैंड राष्ट्रगान की प्रस्तुति देगा। समारोह का समापन आतिशबाजी के साथ होगा।

    इस अवसर पर शिक्षा और किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लाभार्थियों को भी सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना के तहत प्रदेश के 102 मेधावी विद्यार्थियों को एक-एक लाख रुपए की छात्रवृत्ति और प्रशस्ति-पत्र प्रदान करेंगे। जिलों से चयनित विद्यार्थियों में खंडवा के छह विद्यार्थी शामिल हैं। वहीं अशोकनगर बड़वानी नर्मदापुरम सिवनी सिंगरौली और उमरिया से चार-चार विद्यार्थियों का चयन किया गया है।

    किसानों के लिए भी इस बार स्थापना दिवस पर खास सौगात रखी गई है। किसान कल्याण स्वाभिमान पर्व क्विज के 165 विजेताओं को पुरस्कार दिए जाएंगे। इस ऑनलाइन प्रतियोगिता में प्रदेश के करीब 40 हजार किसानों ने भाग लिया था। चयनित किसानों को 55 ट्रैक्टर 55 बुलेट मोटरसाइकिल और 55 ई-स्कूटर दिए जाएंगे। प्रत्येक जिले से तीन विजेताओं का चयन किया गया है। भोपाल के विजेताओं को मुख्यमंत्री स्वयं पुरस्कार देंगे जबकि अन्य जिलों में प्रभारी मंत्री सम्मानित करेंगे।

    सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए भी विशेष तैयारियां की गई हैं। लाल परेड ग्राउंड में राजा भोज के भोपाल विषय पर 160 वॉटर कलर चित्रों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ की ओर से तैयार यह प्रदर्शनी शहर के ऐतिहासिक गौरव को सामने लाएगी। वहीं देशज व्यंजन मेले में मालवा निमाड़ बुंदेलखंड बघेलखंड और महाकौशल के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद मिलेगा। यह मेला प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक चलेगा।

    मुख्य समारोह से पहले स्थापना दिवस के पूर्वरंग कार्यक्रमों के तहत भोपाल में सांस्कृतिक गौरव यात्राएं भी निकाली गईं। इनमें 400 से अधिक लोक और जनजातीय कलाकारों ने हिस्सा लिया। गोंड बैगा भील कोरकू सहरिया और भारिया जनजातियों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। करमा सैला भगोरिया मटकी घूमर भांगड़ा पंथी और लेझिम जैसे लोकनृत्यों ने शहर की सड़कों को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। इस तरह मध्यप्रदेश का 71वां स्थापना दिवस संस्कृति विकास किसान कल्याण और प्रतिभाओं के सम्मान का बड़ा उत्सव बनने जा रहा है।

  • भोपाल में पहली बार सजेगी सेना दिवस परेड, आसमान में गरजेंगे लड़ाकू विमान और टैंकों से दिखेगी ताकत

    भोपाल में पहली बार सजेगी सेना दिवस परेड, आसमान में गरजेंगे लड़ाकू विमान और टैंकों से दिखेगी ताकत


    भोपाल । मध्यप्रदेश के 71वें स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल में सेना दिवस 2027 के आयोजनों का शुभारंभ एक खास पहल के साथ किया गया। शौर्य स्मारक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सुदर्शन चक्र कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान ने संकल्प वृक्ष का रोपण किया। इस पौधे को खास बनाने के लिए इसमें प्रदेश के सभी 55 जिलों से लाई गई मिट्टी मिलाई गई। एनसीसी कैडेट्स ने अपने-अपने जिलों से मिट्टी एकत्रित की और उसे कलशों में भरकर भोपाल पहुंचाया। इसके बाद सभी जिलों की मिट्टी को एक साथ मिलाकर संकल्प वृक्ष लगाया गया। इस पहल के माध्यम से प्रदेश की एकता और अखंडता का संदेश दिया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सेना और एनसीसी ने संकल्प वृक्ष के जरिए एक अनूठा प्रयोग किया है। प्रदेश के सभी 55 जिलों की मिट्टी को एक स्थान पर मिलाकर पौधे का रोपण करना मध्यप्रदेश की सामूहिक पहचान और एकजुटता को दर्शाता है। उन्होंने इस पहल के लिए सेना और एनसीसी के अधिकारियों तथा कैडेट्स को बधाई दी। मुख्यमंत्री के मुताबिक यह वृक्ष केवल एक पौधा नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की एकता और साझा संकल्प का प्रतीक है।

    भोपाल में अगले साल 15 जनवरी को 79वां सेना दिवस मनाया जाएगा। यह राजधानी के लिए एक ऐतिहासिक अवसर होगा क्योंकि पहली बार यहां सेना दिवस परेड का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भारतीय सेना की ताकत और आधुनिक युद्ध क्षमता का प्रदर्शन होगा। सेना की ओर से दिखाई गई लघु फिल्म में आयोजन की झलक प्रस्तुत की गई। इसमें आसमान में लड़ाकू विमानों की गर्जना से लेकर जमीन पर टैंकों की रफ्तार तक सेना के शौर्य को प्रदर्शित करने की तैयारी दिखाई गई।

    सेना दिवस परेड में सुदर्शन चक्र कोर के जवान कॉम्बैट ड्रिल्स और युद्ध कौशल का प्रदर्शन करेंगे। भारतीय टैंकों की ताकत के साथ आधुनिक सैन्य तकनीक और उपकरणों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस आयोजन के जरिए आम लोगों को सेना के अनुशासन वीरता और राष्ट्रसेवा की भावना को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। सेना की आधुनिक तैयारियों और युद्ध क्षमता की झलक युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 1 नवंबर से 15 जनवरी तक सेना दिवस से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है जबकि वर्ष 2027 युवा वर्ष होगा। ऐसे में युवा वर्ष की शुरुआत सेना के शौर्य और पराक्रम से होना मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि सैनिकों का अनुशासन और देश के प्रति समर्पण युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि स्थापना दिवस के अवसर पर शाम को प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए मंत्रियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। किसान कल्याण वर्ष के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं और विभिन्न कार्यक्रमों के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल विधायक भगवान सबनानी और महापौर मालती राय सहित सेना तथा प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

    सुदर्शन चक्र कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश सांस्कृतिक ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से देश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सेना दिवस परेड और इससे जुड़े कार्यक्रमों के सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार और प्रशासन हरसंभव सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी 55 जिलों से एनसीसी कैडेट्स द्वारा मिट्टी लाकर संकल्प वृक्ष का रोपण करना इस आयोजन को विशेष पहचान देता है।

    गौरतलब है कि भारत में हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1949 में फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने भारतीय सेना की कमान संभाली थी। इस ऐतिहासिक घटना की याद में सेना दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2027 में इसकी 79वीं वर्षगांठ होगी। भोपाल में होने वाली परेड प्रदेशवासियों को भारतीय सेना की वीरता और आधुनिक सैन्य क्षमता से रूबरू कराने का महत्वपूर्ण अवसर बनेगी।

  • पचमढ़ी के आर्मी एजुकेशन सेंटर में बायसन का हमला, फुटबॉल खेल रहे 26 वर्षीय जवान की मौत

    पचमढ़ी के आर्मी एजुकेशन सेंटर में बायसन का हमला, फुटबॉल खेल रहे 26 वर्षीय जवान की मौत

    मध्य प्रदेश: के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी में जंगली बायसन के हमले में सेना के एक जवान की मौत हो गई। घटना गुरुवार शाम आर्मी एजुकेशन सेंटर परिसर की है। यहां कुछ सैनिक फुटबॉल खेल रहे थे। इसी दौरान जंगल से अचानक निकला एक बायसन मैदान में पहुंच गया और सैनिकों की ओर दौड़ पड़ा। हमले में 26 वर्षीय जवान आकाश चौहान गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल मिलिट्री अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

    मृतक जवान की पहचान उत्तराखंड निवासी आकाश चौहान के रूप में हुई है। वह आर्मी एजुकेशन सेंटर में चीनी भाषा का प्रशिक्षण ले रहे थे और 17वीं कमांड रेजिमेंट में पदस्थ थे। घटना के बाद सैन्य परिसर में शोक का माहौल है। अचानक हुए इस हमले से वहां मौजूद सैनिक भी सकते में आ गए।

    जानकारी के अनुसार, सैनिक जब मैदान में फुटबॉल खेल रहे थे, तभी झाड़ियों से निकलकर बायसन वहां पहुंचा। उसने अचानक सैनिकों पर हमला कर दिया। इस दौरान आकाश चौहान उसकी चपेट में आ गए। बायसन ने पीछे से उन पर हमला किया और उसके सींग जवान के पेट के आसपास लगे। इससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। साथी सैनिकों ने उन्हें तत्काल उपचार के लिए मिलिट्री अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक पचमढ़ी संजीव शर्मा ने बताया कि सेना की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, सैनिक मैदान में फुटबॉल खेल रहे थे, तभी बायसन झाड़ियों से निकलकर वहां पहुंचा और उन पर हमला कर दिया। उन्होंने बताया कि आर्मी परिसर जंगल से लगा हुआ है। इस वजह से बायसन का झुंड कई बार जंगल से निकलकर परिसर में आ जाता है। हालांकि, इस तरह की घटना पहले कभी सामने नहीं आई थी। मामले की जांच की जा रही है।

    पचमढ़ी में पिछले कुछ दिनों से बायसन के झुंड की आवाजाही लगातार देखी जा रही है। पचमढ़ी थाने में पदस्थ एसएन यादव के मुताबिक, आकाश चौहान प्रशिक्षण के लिए यहां आए थे। वह उत्तराखंड में देहरादून के पास के रहने वाले थे। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में बायसन का झुंड कई बार पचमढ़ी नगर के भीतर भी दिखाई दिया है।

    एक दिन पहले ही बायसन का झुंड शहीद द्वार के पास स्थित छोटी पुलिया पर आकर बैठ गया था। इसके कारण कई घंटे तक वहां से आवागमन बंद रहा। सड़क पर झुंड की मौजूदगी के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन से बायसन के झुंड को वापस जंगल में भेजने की मांग भी की थी।

    स्थानीय स्तर पर इस दिशा में कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी बीच आर्मी एजुकेशन सेंटर परिसर में हुए हमले ने वन्यजीवों की आवाजाही और मानव आबादी के बीच बढ़ते टकराव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल घटना की जांच की जा रही है।

  • बुरहानपुर के गरबा मंडल ने जीते 21 लाख रुपये, इसी संस्था के लकी ड्रॉ में बच्चे को मिली थी फॉर्च्यूनर

    बुरहानपुर के गरबा मंडल ने जीते 21 लाख रुपये, इसी संस्था के लकी ड्रॉ में बच्चे को मिली थी फॉर्च्यूनर


    मध्य प्रदेश: के बुरहानपुर के एक गरबा मंडल ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल कर 21 लाख रुपये का पुरस्कार अपने नाम किया है। इस उपलब्धि के बाद मंडल के सदस्यों में खुशी का माहौल है। इस आयोजन की खास बात यह भी रही कि प्रतियोगिता कराने वाली संस्था पहले भी अपने एक लकी ड्रॉ को लेकर चर्चा में आ चुकी है। इसी संस्था के लकी ड्रॉ में कुछ समय पहले बुरहानपुर के छह साल के बच्चे के नाम करीब 50 लाख रुपये की टोयोटा फॉर्च्यूनर कार निकली थी।

    गरबा प्रतियोगिता का आयोजन खरगोन जिले की झिरनिया तहसील के आभापुरी स्थित श्री सरकार धाम नर नारायण सेवा संस्थान की ओर से किया गया था। संस्था की ओर से हर साल शरद पूर्णिमा पर इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष इसमें बुरहानपुर के गरबा मंडल ने पहला स्थान हासिल किया। विजेता मंडल को 21 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। पुरस्कार मिलने के बाद मंडल के सदस्यों ने उत्साह जताया और इस सफलता को सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।

    आयोजकों के मुताबिक, प्रतियोगिता कराने का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूक करना है। इसमें खास तौर पर जेनरेशन जेड यानी युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। संस्था का मानना है कि गरबा जैसे पारंपरिक आयोजनों के माध्यम से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का अवसर मिलता है।

    इस वर्ष प्रतियोगिता में बुरहानपुर के मंडल ने अपनी प्रस्तुति के आधार पर पहला स्थान हासिल किया। इसके लिए उसे 21 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया। विजेता पक्ष की ओर से इस पुरस्कार राशि को देश में आयोजित गरबा प्रतियोगिताओं में सबसे बड़ी राशि बताया गया है। हालांकि, यह दावा आयोजकों और विजेताओं की ओर से किया गया है।

    इसी संस्था का नाम इससे पहले एक लकी ड्रॉ के कारण भी चर्चा में आया था। बुरहानपुर के सीलमपुरा क्षेत्र में रहने वाले छह वर्षीय मेदांश रायकवार के नाम पर उसकी दादी किरण रायकवार ने करीब एक साल पहले गरबा कार्यक्रम के दौरान 200 रुपये का कूपन खरीदा था। उन्होंने कूपन पर अपने पोते का नाम दर्ज कराया था। उस समय परिवार को अंदाजा नहीं था कि इस कूपन के जरिए उन्हें इतना बड़ा पुरस्कार मिल सकता है।

    बाद में लकी ड्रॉ का परिणाम घोषित हुआ तो पहला पुरस्कार मेदांश के नाम निकला। उसे करीब 50 लाख रुपये कीमत की टोयोटा फॉर्च्यूनर कार मिली। इस खबर के बाद बच्चे के परिवार में खुशी का माहौल बन गया था। कार मिलने पर ढोल-नगाड़ों के साथ उसका स्वागत किया गया और वाहन की पूजा-अर्चना भी की गई थी।

    अब उसी संस्था की शरद पूर्णिमा गरबा प्रतियोगिता में बुरहानपुर के मंडल को 21 लाख रुपये का पुरस्कार मिला है। इस तरह कुछ समय के अंतराल में संस्था से जुड़े दो अलग-अलग आयोजनों के कारण बुरहानपुर चर्चा में रहा है। पहले लकी ड्रॉ में छह साल के बच्चे के नाम फॉर्च्यूनर कार निकली थी और अब गरबा प्रतियोगिता में शहर के मंडल ने पहला स्थान हासिल कर 21 लाख रुपये जीते हैं।

  • अहोई अष्टमी आज, संतान की लंबी उम्र के लिए माताएं रखेंगी व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, तारों के दर्शन और व्रत कथा

    अहोई अष्टमी आज, संतान की लंबी उम्र के लिए माताएं रखेंगी व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, तारों के दर्शन और व्रत कथा

    नई दिल्ली ।अहोई अष्टमी का व्रत आज 1 नवंबर 2026, रविवार को रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष धार्मिक महत्व है। यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, तरक्की और सुखी जीवन की कामना के लिए करती हैं। इस दिन महिलाएं सुबह से निर्जला या अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से अहोई माता की आराधना करने और व्रत कथा सुनने से संतान पर देवी की कृपा बनी रहती है।

    करवा चौथ के बाद आने वाला यह त्योहार उत्तर भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है। इसे अहोई आठे के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। इस दिन शाम को पूजा करने के बाद तारों को अर्घ्य देने की परंपरा है। कुछ परिवारों में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की भी मान्यता है।

    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि और शाम की पूजा परंपरा को ध्यान में रखते हुए व्रत 1 नवंबर को रखा जा रहा है। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। तारों के दर्शन का समय शाम करीब 6 बजे बताया गया है, जबकि चंद्रोदय रात करीब 11 बजकर 40 मिनट पर होगा। ये समय दिल्ली के पंचांग के अनुसार हैं। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय में अंतर हो सकता है।

    अहोई अष्टमी के दिन पूजा के लिए अहोई माता का चित्र या पोस्टर, रोली, अक्षत, हल्दी, फूल, माला, दीपक, घी, अगरबत्ती, जल से भरा कलश, दूध, फल और मिठाई की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा हलवा, पूरी, पुए, गेहूं और सरई की सात सींकें भी पूजा सामग्री में शामिल की जाती हैं। पूजा के लिए चौकी और लाल कपड़े का इस्तेमाल किया जाता है।

    व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करके संतान की खुशहाली के लिए व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम को पूजा स्थल की सफाई करके चौकी पर लाल कपड़ा बिछाया जाता है और अहोई माता का चित्र स्थापित किया जाता है। कुछ घरों में दीवार पर भी माता का चित्र बनाने की परंपरा है। इसके बाद माता को रोली, अक्षत, हल्दी, फूल और माला अर्पित की जाती है। दीपक जलाकर धूप-अगरबत्ती दिखाई जाती है और फल-मिठाई का भोग लगाया जाता है।

    पूजा के दौरान अहोई अष्टमी की व्रत कथा पढ़ी या सुनी जाती है। इसके बाद माता की आरती करके संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाती है। शाम को तारे दिखाई देने पर उन्हें जल से अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत का पारण किया जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई माता को मां पार्वती का स्वरूप माना जाता है। उन्हें संतान की रक्षा और परिवार की खुशहाली करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। पहले यह व्रत मुख्य रूप से पुत्र की लंबी उम्र के लिए रखा जाता था, लेकिन अब माताएं बेटे और बेटी दोनों के अच्छे स्वास्थ्य और सुखद भविष्य की कामना से यह व्रत करती हैं। इस पर्व का संबंध मथुरा के राधा कुंड से भी माना जाता है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले कई दंपति इस दिन राधा कुंड में स्नान और पूजा करते हैं।

    अहोई अष्टमी की प्रचलित कथा के अनुसार, एक साहूकार के सात बेटे, सात बहुएं और एक बेटी थी। दीपावली से पहले घर की साफ-सफाई के लिए उसकी बहुएं और बेटी जंगल में मिट्टी लेने गईं। मिट्टी खोदते समय साहूकार की बेटी की कुदाल से अनजाने में एक सेह के बच्चे की मृत्यु हो गई। अपने बच्चे को खोने से दुखी सेह ने साहूकार की बेटी को श्राप देने का निश्चय किया। छोटी बहू ने अपनी ननद को बचाने के लिए श्राप स्वयं लेने की बात कही। इसके बाद उसे संतान से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    कथा के अनुसार, छोटी बहू ने एक पंडित की सलाह पर गौ माता की सेवा शुरू की। उसकी श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर गौ माता ने उसकी सहायता की। बाद में सेह भी उसकी भक्ति से प्रसन्न हुई और उसने श्राप वापस ले लिया। इसके बाद छोटी बहू के जीवन में खुशियां लौट आईं। मान्यता है कि इसी घटना के बाद संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए अहोई माता का व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई।

  • रणबीर के राम अवतार ने जीता दिल, यश के रावण की भी हुई तारीफ, रामायण के 7 सीक्वेंस देखकर समीक्षक हुए भावुक

    रणबीर के राम अवतार ने जीता दिल, यश के रावण की भी हुई तारीफ, रामायण के 7 सीक्वेंस देखकर समीक्षक हुए भावुक


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण रिलीज से पहले ही लगातार चर्चा में बनी हुई है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच लंबे समय से उत्सुकता है और अब इसके वर्ल्ड प्रीमियर के बाद सामने आई शुरुआती प्रतिक्रियाओं ने इस उत्साह को और बढ़ा दिया है। मशहूर फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने फिल्म देखने के बाद इसे पूरे 5 स्टार दिए हैं। उन्होंने निर्देशक नितेश तिवारी की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय पर्दे पर इससे पहले इतनी भव्य और प्रभावशाली सिनेमाई प्रस्तुति देखने को नहीं मिली। उनके मुताबिक फिल्म में शानदार विजुअल्स बड़े स्तर का प्रोडक्शन गहरा भावनात्मक जुड़ाव और आध्यात्मिक अनुभव देखने को मिलता है। उन्होंने फिल्म के सात ऐसे दृश्यों का भी जिक्र किया जिन्होंने उनका दिल जीत लिया।

    तरण आदर्श ने अपने रिव्यू की शुरुआत जय श्री राम के उद्घोष के साथ की। उन्होंने लिखा कि रामायण केवल बड़े बजट और शानदार दृश्यों वाली फिल्म नहीं है बल्कि इसकी असली ताकत इसकी आत्मा और भावनाओं में छिपी है। फिल्म भारतीय संस्कृति की महिमा और बुराई पर अच्छाई की शाश्वत जीत का उत्सव मनाती है। उनके अनुसार इसकी पटकथा और कहानी दर्शकों को शुरुआत से लेकर अंत तक बांधे रखने की क्षमता रखती है। फिल्म में भव्यता के साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव भी देखने को मिलता है।

    ये सात दृश्य बने फिल्म की खास पहचान

    तरण आदर्श ने फिल्म के सात ऐसे सीक्वेंस बताए जिन्हें उन्होंने बेहद प्रभावशाली माना। इनमें शुरुआत में ब्रह्मा और रावण के बीच का दृश्य और उसके बाद रावण का लंका पर अपना अधिकार जताने वाला प्रसंग शामिल है। इसके अलावा जंगल में राक्षसों और भगवान राम के बीच होने वाली लड़ाई को भी उन्होंने खास बताया।

    फिल्म में सीता स्वयंवर का दृश्य भी उनके पसंदीदा सीक्वेंस में शामिल रहा। वहीं राजा दशरथ कैकेयी और भगवान राम के बीच इंटरवल से पहले आने वाला भावुक प्रसंग कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। रावण और उसके बहनोई विद्युतजीव के बीच एक्शन सीक्वेंस ने भी समीक्षक का ध्यान खींचा। इसके अलावा शूर्पणखा का प्रसंग और पुष्पक विमान पर रावण तथा जटायु के बीच होने वाली लड़ाई को भी उन्होंने फिल्म के यादगार दृश्यों में गिना।

    रणबीर और यश की एक्टिंग की तारीफ

    फिल्म में भगवान राम की भूमिका निभा रहे रणबीर कपूर के अभिनय की तरण आदर्श ने विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि रणबीर ने अपने किरदार को गरिमा सम्मान और मजबूती के साथ प्रस्तुत किया है। उनका संयमित स्वभाव भावपूर्ण आंखें और सहज अभिनय भगवान राम के व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाते हैं। वहीं रावण की भूमिका निभा रहे यश की स्क्रीन प्रेजेंस और दमदार अंदाज को भी उन्होंने शानदार बताया।

    सीता की भूमिका में नजर आ रहीं साई पल्लवी के अभिनय को भी उन्होंने सराहा। उनके मुताबिक अभिनेत्री ने अपने किरदार में स्वाभाविकता कोमलता और गरिमा बनाए रखी है। रवि दुबे ने भी अपने किरदार में दृढ़ता और ईमानदारी दिखाई है। इसके अलावा रकुल प्रीत सिंह सनी देओल शोभना लारा दत्ता और विवेक ओबेरॉय के काम की भी तारीफ की गई।

    रहमान और हंस जिमर के संगीत ने बढ़ाया प्रभाव

    फिल्म के संगीत को लेकर भी तरण आदर्श ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। एआर रहमान के गीत फिल्म के भावनात्मक माहौल को मजबूत बनाते हैं जबकि हंस जिमर और रहमान का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के नाटकीय प्रभाव को और गहरा करता है। उन्होंने विजुअल इफेक्ट्स कंपनी डीएनईजी के काम की भी जमकर तारीफ की। उनके अनुसार फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन और एक्शन सीक्वेंस भारतीय सिनेमा को एक अलग स्तर पर ले जाने वाले हैं।

    नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी रामायण 5 नवंबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में नजर आएंगे। अब तरण आदर्श की पांच सितारों वाली प्रतिक्रिया के बाद दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है। हालांकि फिल्म को दर्शकों की वास्तविक प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस पर मिलने वाला परिणाम रिलीज के बाद ही सामने आएगा।

  • रानी मुखर्जी के अभिनय ने पाकिस्तान में भी जीता दिल, परवेज मुशर्रफ ने खुद दिया था पाकिस्तान आने का न्योता

    रानी मुखर्जी के अभिनय ने पाकिस्तान में भी जीता दिल, परवेज मुशर्रफ ने खुद दिया था पाकिस्तान आने का न्योता


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की दुनिया में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिनकी कहानियां और किरदार देश की सीमाओं को पार कर लोगों के दिलों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी ही एक फिल्म थी वीर जारा जिसने भारत और पाकिस्तान दोनों जगह दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई थी। इस फिल्म में शाहरुख खान और प्रीति जिंटा मुख्य भूमिका में नजर आए थे लेकिन अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने भी अपने छोटे से किरदार से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी थी। उनका अभिनय इतना प्रभावशाली रहा कि पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की पत्नी बेगम सेहबा मुशर्रफ भी उनकी प्रशंसक बन गई थीं। यही वजह थी कि रानी मुखर्जी को पाकिस्तान आने का खास न्योता तक दिया गया था। यह किस्सा आज भी अभिनेत्री के करियर के यादगार पलों में शामिल है।

    यह पूरा मामला 16 अप्रैल 2005 का है जब दिल्ली के अशोका होटल में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की ओर से पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ और उनकी पत्नी के सम्मान में आधिकारिक रात्रिभोज आयोजित किया गया था। इस खास कार्यक्रम में राजनीति और विभिन्न क्षेत्रों की कई जानी मानी हस्तियों को आमंत्रित किया गया था। बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी को भी इस कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता मिला था। उनके लिए यह किसी खास उपलब्धि से कम नहीं था क्योंकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण आयोजन में भारतीय फिल्म जगत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला था।

    दरअसल रानी मुखर्जी की फिल्म वीर जारा कुछ समय पहले ही रिलीज हुई थी। फिल्म में उन्होंने सामिया सिद्दीकी नाम की पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता का किरदार निभाया था। कहानी में सामिया एक भारतीय कैदी वीर प्रताप सिंह को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ती है। इस भूमिका में रानी ने संवेदनशीलता और आत्मविश्वास के साथ अपने किरदार को पर्दे पर उतारा था। फिल्म में उनका किरदार भले ही मुख्य भूमिका में नहीं था लेकिन कहानी को आगे बढ़ाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके अभिनय ने भारतीय दर्शकों के साथ पाकिस्तान के दर्शकों को भी प्रभावित किया था।

    बताया जाता है कि रानी के इसी किरदार से परवेज मुशर्रफ की पत्नी बेगम सेहबा मुशर्रफ काफी प्रभावित थीं। आधिकारिक डिनर के दौरान रानी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की और इसके बाद परवेज मुशर्रफ तथा उनकी पत्नी से भी बातचीत की। इस मुलाकात में दोनों ने अभिनेत्री के काम की सराहना की और उन्हें पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया। रानी के लिए यह अनुभव बेहद खास था क्योंकि उनकी फिल्मों को सीमा पार भी पसंद किया जा रहा था।

    फिल्म क्रिटिक सुभाष के झा से बातचीत के दौरान रानी मुखर्जी ने इस मुलाकात को याद करते हुए बताया था कि जब उन्हें इस कार्यक्रम का न्योता मिला तो उन्हें पहले विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने इसे किसी सपने के सच होने जैसा अनुभव बताया था। अभिनेत्री के मुताबिक कार्यक्रम में मौजूद लोग बेहद विनम्र और जमीन से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा था कि इस आयोजन का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात थी।

    रानी ने यह भी बताया था कि पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य उनकी तस्वीरें खींच रहे थे और उनसे मिलकर काफी खुश थे। बातचीत के दौरान परवेज मुशर्रफ ने उन्हें बताया था कि पाकिस्तान में भी उनकी लोकप्रियता काफी ज्यादा है। उन्हें किसी भी समय पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया गया था।

    रानी मुखर्जी के लिए यह घटना इस बात का खास उदाहरण थी कि सिनेमा और अभिनय की कोई सीमा नहीं होती। वीर जारा और ब्लैक जैसी फिल्मों में उनके काम को मिली सराहना ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई। यही वजह है कि वर्ष 2005 का वह आधिकारिक डिनर और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति से हुई मुलाकात आज भी उनके करियर का एक यादगार किस्सा बना हुआ है।

  • शिवभक्तों के लिए जरूरी खबर, असली और नकली रुद्राक्ष में ऐसे पहचानें अंतर, इन चार बातों पर दें ध्यान

    शिवभक्तों के लिए जरूरी खबर, असली और नकली रुद्राक्ष में ऐसे पहचानें अंतर, इन चार बातों पर दें ध्यान


    नई दिल्ली । भगवान शिव की पूजा और उपासना में रुद्राक्ष का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रिय माना गया है और इसे धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा तथा मानसिक शांति मिलने की मान्यता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु रुद्राक्ष की माला या एकल दाने को अपने पास रखते हैं। लेकिन इसकी बढ़ती मांग के बीच बाजार में नकली रुद्राक्ष भी बेचे जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। कई बार प्लास्टिक लकड़ी या दूसरे बीजों से तैयार किए गए दानों को असली बताकर ग्राहकों को बेच दिया जाता है। ऐसे में जरूरी है कि रुद्राक्ष खरीदते समय उसकी बनावट और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए। कुछ सामान्य तरीकों से शुरुआती जांच जरूर की जा सकती है लेकिन किसी भी घरेलू परीक्षण को असली होने का पक्का प्रमाण नहीं मानना चाहिए।

    रुद्राक्ष की पहचान के लिए सबसे पहले उसकी प्राकृतिक बनावट पर ध्यान देना जरूरी है। असली रुद्राक्ष पर ऊपर से नीचे तक प्राकृतिक धारियां बनी होती हैं। इन धारियों को मुख कहा जाता है। हर दाने में मुखों की संख्या अलग-अलग हो सकती है। इनकी बनावट प्राकृतिक होती है और धारियां दाने के एक सिरे से दूसरे सिरे तक दिखाई देती हैं। नकली रुद्राक्ष में कई बार मशीन या हाथ से बनाई गई कृत्रिम लकीरें देखने को मिलती हैं। इसलिए खरीदते समय दाने को ध्यान से देखना चाहिए। हालांकि केवल धारियां देखकर भी असली होने का अंतिम फैसला नहीं किया जा सकता क्योंकि नकली दानों पर भी ऐसी बनावट तैयार की जा सकती है।

    दूसरा तरीका पानी से जुड़ा हुआ है। पारंपरिक रूप से कुछ लोग रुद्राक्ष को पानी से भरी कटोरी में डालकर उसकी जांच करते हैं। ऐसी मान्यता है कि असली रुद्राक्ष पानी में डूब जाता है जबकि नकली दाना ऊपर तैर सकता है। लेकिन यह तरीका पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। रुद्राक्ष की नमी उसके अंदर मौजूद हवा और प्राकृतिक संरचना के कारण उसका व्यवहार बदल सकता है। कई असली रुद्राक्ष भी पानी में तैर सकते हैं और कुछ नकली दाने डूब सकते हैं। इसलिए केवल इस परीक्षण के आधार पर खरीदारी का फैसला करना ठीक नहीं है।

    इसी तरह तांबे के सिक्कों वाला परीक्षण भी काफी प्रचलित है। इसमें रुद्राक्ष को तांबे के दो सिक्कों के बीच रखकर उसके कंपन या हलचल को देखने की बात कही जाती है। कुछ लोग इसे असली रुद्राक्ष की पहचान बताते हैं लेकिन इसके समर्थन में कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए सिक्कों के बीच किसी तरह की हलचल महसूस होना या नहीं होना रुद्राक्ष की शुद्धता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

    रुद्राक्ष पर रंग या पॉलिश चढ़ाकर उसे आकर्षक बनाने की संभावना भी रहती है। इसलिए खरीदते समय उसके रंग और सतह पर ध्यान देना चाहिए। यदि दाने पर असामान्य चमक दिखाई दे या रंग असमान नजर आए तो विक्रेता से उसकी प्रक्रिया और गुणवत्ता के बारे में जानकारी लें। सरसों के तेल में भिगोकर रंग जांचने का तरीका भी प्रचलित है लेकिन यह प्रमाणित जांच नहीं है। तेल के कारण प्राकृतिक दाने की सतह प्रभावित हो सकती है इसलिए बिना जानकारी के ऐसा प्रयोग करने से बचना चाहिए।

    रुद्राक्ष खरीदते समय सबसे जरूरी बात विश्वसनीय विक्रेता का चुनाव करना है। विक्रेता से दाने की उत्पत्ति और गुणवत्ता की जानकारी मांगें। महंगे या दुर्लभ मुखी रुद्राक्ष को खरीदने से पहले किसी अनुभवी विशेषज्ञ या विश्वसनीय रत्न एवं बीज परीक्षण प्रयोगशाला से जांच कराने पर विचार करें। जरूरत पड़ने पर माइक्रोस्कोप से इसकी प्राकृतिक संरचना और धारियों की जांच की जा सकती है।

    धार्मिक आस्था से जुड़े रुद्राक्ष को खरीदते समय जल्दबाजी और कम कीमत के लालच में फैसला नहीं करना चाहिए। याद रखें कि पानी का परीक्षण तांबे के सिक्के या तेल से जांच करने जैसे घरेलू नुस्खे असली होने की गारंटी नहीं देते। सही जानकारी और भरोसेमंद जांच ही नकली रुद्राक्ष खरीदने से बचने का बेहतर तरीका है।

  • मंदिर की छत से सीधे शिवलिंग पर गिरता है बारिश का पानी, माउंट आबू के शंकर मठ की अनोखी बनावट खींचती है भक्तों का ध्यान

    मंदिर की छत से सीधे शिवलिंग पर गिरता है बारिश का पानी, माउंट आबू के शंकर मठ की अनोखी बनावट खींचती है भक्तों का ध्यान


    नई दिल्ली । राजस्थान का नाम आते ही लोगों के मन में रेगिस्तान महल और ऐतिहासिक किलों की तस्वीर उभरने लगती है लेकिन इस प्रदेश में कई ऐसे धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं जो अपनी अनोखी बनावट और आध्यात्मिक वातावरण के कारण देशभर में पहचान रखते हैं। इन्हीं में से एक है माउंट आबू की अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित प्रसिद्ध शंकर मठ। यह मठ भगवान शिव के भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ ही अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। यहां की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मंदिर का शिखर किसी सामान्य गुंबद की तरह नहीं बल्कि विशाल शिवलिंग के आकार में बनाया गया है। इसके अलावा गर्भगृह में स्थापित 27 टन वजनी विशाल काले संगमरमर का शिवलिंग श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

    शंकर मठ का निर्माण और स्थापना भी अपने आप में एक लंबी आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मठ की नींव वर्ष 1960 से 1962 के बीच संत स्वामी महेशानंद गिरि महाराज ने रखी थी। इसके बाद वर्ष 1965 से यहां संतों और संन्यासियों का निवास शुरू हुआ। मंदिर परिसर के निर्माण की प्रक्रिया वर्ष 1975 में शुरू की गई। वर्तमान में मठ की देखरेख स्वामी पुण्यानंद गिरि महाराज के मार्गदर्शन में की जा रही है। अरावली की पहाड़ियों और हरियाली से घिरा होने के कारण यहां पहुंचने वाले लोगों को एक अलग तरह की शांति का अनुभव होता है।

    इस मठ की सबसे बड़ी पहचान गर्भगृह में स्थापित विशाल शिवलिंग है। यह शिवलिंग करीब 9.5 फीट ऊंचा और 7.5 फीट चौड़ा बताया जाता है। इसका वजन लगभग 27 टन है। इसे काले संगमरमर के एक ही विशाल पत्थर को तराशकर तैयार किया गया है। इसकी बनावट को लेकर भी कई रोचक बातें बताई जाती हैं। मान्यता के अनुसार पत्थर को तराशते समय उस पर भगवान शिव की तीसरी आंख और जटाओं जैसी आकृतियां उभर आई थीं। यही वजह है कि श्रद्धालु इस शिवलिंग को बेहद विशेष मानते हैं।

    मंदिर की एक और खास बात यहां होने वाला प्राकृतिक जलाभिषेक है। बारिश के मौसम में मंदिर की छत से पानी सीधे शिवलिंग पर गिरता है। श्रद्धालु इस दृश्य को बेहद पवित्र मानते हैं और इसे भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक कहते हैं। मंदिर का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया है और इसकी वास्तुकला इसे दूसरे शिव मंदिरों से अलग पहचान देती है। यहां पारंपरिक गुंबद की जगह शिवलिंग जैसी विशाल संरचना बनाई गई है।

    मंदिर परिसर में कमल का सुंदर तालाब और रुद्राक्ष के पेड़ भी मौजूद हैं। इनकी वजह से पूरे परिसर का वातावरण बेहद शांत और आकर्षक दिखाई देता है। यहां रुकने वाले श्रद्धालुओं के लिए शंकर धाम नाम से ठहरने की व्यवस्था भी बताई गई है। मठ में प्रतिदिन सुबह और शाम वेदांत तथा उपनिषदों का पाठ किया जाता है। भगवान शिव की दिन में तीन बार आरती होती है जबकि सोमवार को विशेष भस्म आरती का आयोजन किया जाता है। इसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    अगर आप माउंट आबू घूमने का कार्यक्रम बना रहे हैं तो शंकर मठ को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं। हालांकि दर्शन के लिए जाने से पहले मंदिर के समय का ध्यान रखना जरूरी है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक मुख्य मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। अपनी अनोखी वास्तुकला विशाल शिवलिंग और शांत आध्यात्मिक वातावरण के कारण शंकर मठ माउंट आबू के प्रमुख दर्शनीय धार्मिक स्थलों में शामिल है।