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  • पाकिस्‍तान को एक और झटका: सिंधु जल संधि के बाद रावी पर भारत का फोकस, उझ परियोजना को मिली रफ्तार

    पाकिस्‍तान को एक और झटका: सिंधु जल संधि के बाद रावी पर भारत का फोकस, उझ परियोजना को मिली रफ्तार


    नई दिल्ली।
    सिंधु जल संधि को लेकर भारत के सख्त रुख के बीच जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से लंबित उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना को गति देने की कवायद तेज हो गई है। केंद्र सरकार का जोर रावी नदी के भारत के हिस्से के जल का अधिकतम उपयोग देश में ही सुनिश्चित करने पर है। परियोजना के पूरा होने से सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में लाभ मिलने की उम्मीद है।

    केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को उझ परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उन राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जो लंबे समय से लंबित हैं और जिनकी देरी से देश को नुकसान उठाना पड़ा है।

    उझ और शाहपुरकंडी परियोजना पर जोर

    डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उझ मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट और शाहपुरकंडी परियोजना केवल विकास से जुड़ी योजनाएं नहीं हैं, बल्कि देश के जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और रणनीतिक हितों से भी इनका संबंध है। लंबे समय तक परियोजनाओं के अटके रहने के कारण रावी और उसकी सहायक नदियों का उपलब्ध पानी पर्याप्त मात्रा में उपयोग नहीं किया जा सका।

    उन्होंने बताया कि उझ परियोजना की कल्पना करीब 100 वर्ष पहले की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह आगे नहीं बढ़ सकी। इसी तरह शाहपुरकंडी परियोजना भी करीब चार दशक तक लंबित रही।

    जमीन उपलब्ध होते ही शुरू होगा काम

    सरकार अब परियोजना के निर्माण को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पूरी जमीन के अधिग्रहण का इंतजार किए बिना जहां जमीन उपलब्ध है, वहां निर्माण कार्य शुरू किया जाए। बाकी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया इसके साथ ही चलती रहेगी।

    सरकार का मानना है कि इस तरीके से परियोजना को पूरा करने में लगने वाला समय कम किया जा सकेगा और इसके लाभ लोगों तक जल्द पहुंचेंगे।

    गुणवत्ता और समयसीमा पर जोर

    केंद्रीय मंत्री ने परियोजना से जुड़ी एजेंसियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता, सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने नई तकनीक और बेहतर कार्यप्रणाली अपनाकर परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया।

    सिंचाई और बिजली उत्पादन को मिलेगा लाभ

    उझ और शाहपुरकंडी परियोजनाओं के माध्यम से भारत के हिस्से के जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग किए जाने की योजना है। इससे क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ पेयजल उपलब्धता और बिजली उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास में भी इन परियोजनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शाहपुरकंडी परियोजना को वर्ष 2019 में दोबारा गति दी गई थी और अब यह लगभग पूरी होने की स्थिति में है। वहीं, उझ परियोजना को 2026 में फिर से गति देने का उद्देश्य वर्षों से लंबित परियोजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारना है। सरकार का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर उनका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

  • बारिश से जूझते केरल में राजनीतिक घमासान, CPIM सांसद ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल

    बारिश से जूझते केरल में राजनीतिक घमासान, CPIM सांसद ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।केरल में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। राज्य के अनेक हिस्सों में जलभराव, बाढ़ जैसी स्थिति और भूस्खलन की आशंका के बीच प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। इसी बीच राज्य की राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। माकपा के राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि आपदा की इस घड़ी में उन्हें राहत कार्यों का नेतृत्व करने पर पूरा ध्यान देना चाहिए था।

    राजनीतिक विवाद उस समय शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री मलप्पुरम जिले के पोन्नानी क्षेत्र में यूथ लीग के एक नेता के घर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ए.ए. रहीम ने कहा कि जब राज्य के कई जिले प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं और हजारों लोग कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, तब मुख्यमंत्री की उपस्थिति ऐसे कार्यक्रम में उचित संदेश नहीं देती।

    रहीम ने कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी जिम्मेदारी राहत एवं बचाव कार्यों का प्रभावी समन्वय करना है। उनके अनुसार ऐसे समय में प्रशासनिक नेतृत्व का सक्रिय रूप से मैदान में दिखाई देना लोगों के बीच भरोसा पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा की गंभीर स्थिति के दौरान निजी कार्यक्रमों में शामिल होना जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

    उन्होंने यह भी कहा कि जब पूरा राज्य भारी बारिश, बाढ़ और अनिश्चितता के माहौल से गुजर रहा हो, तब सरकार का पूरा ध्यान प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और बचाव अभियान को तेज करने पर होना चाहिए। रहीम ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे अन्य सभी गतिविधियों को पीछे छोड़कर राज्य में चल रहे राहत कार्यों की निगरानी स्वयं करें ताकि प्रभावित लोगों तक सहायता तेजी से पहुंच सके।

    दूसरी ओर, केरल में लगातार हो रही वर्षा के कारण कई जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नदियों का जलस्तर बढ़ने, निचले इलाकों में जलभराव और कुछ स्थानों पर भूस्खलन की घटनाओं ने प्रशासन की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। कई सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है और स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रभावित इलाकों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों के भोजन, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए हुए है और मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठा रहा है।

    अब तक राज्य में बारिश से जुड़ी घटनाओं में छह लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है, जबकि छह अन्य लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। विभिन्न जिलों में कुल 65 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 1400 से अधिक लोगों को सुरक्षित ठहराया गया है। प्रशासन का कहना है कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त राहत उपाय भी लागू किए जाएंगे। इस बीच, आपदा के बीच शुरू हुआ राजनीतिक विवाद भी राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • भूमि पेडनेकर ने पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र नारों पर जताई आपत्ति, युवाओं से शालीन संवाद बनाए रखने की अपील

    भूमि पेडनेकर ने पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र नारों पर जताई आपत्ति, युवाओं से शालीन संवाद बनाए रखने की अपील

    नई दिल्ली । अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने हाल ही में छात्र आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगाए गए अभद्र नारों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सार्वजनिक संवाद में शालीनता बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना और किसी नीति या फैसले का विरोध करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का प्रयोग मर्यादित भाषा और सम्मानजनक व्यवहार के साथ किया जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्र आंदोलन से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    भूमि पेडनेकर ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा कि हाल के दिनों में सामने आए कुछ वीडियो देखकर उन्हें निराशा हुई। उनके अनुसार, किसी भी मुद्दे पर असहमति व्यक्त करना स्वाभाविक है, लेकिन देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि विचारों का मतभेद लोकतंत्र की ताकत है, परंतु संवाद की भाषा हमेशा संयमित और सम्मानजनक रहनी चाहिए।

    अभिनेत्री ने अपने संदेश में सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोग अपने घर के बड़े-बुजुर्गों से सम्मानपूर्वक बातचीत करते हैं, उसी तरह सार्वजनिक जीवन में भी भाषा की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है। उनका मानना है कि कटु और अपमानजनक शब्द किसी भी समस्या का समाधान नहीं करते, बल्कि सामाजिक वातावरण को और अधिक तनावपूर्ण बना देते हैं।

    भूमि पेडनेकर ने विशेष रूप से युवाओं से संयम और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा हमेशा सभ्य संवाद, आपसी सम्मान और विचारों के आदान-प्रदान पर आधारित रही है। यदि नई पीढ़ी भी इसी परंपरा का पालन करेगी तो लोकतांत्रिक विमर्श और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि असहमति व्यक्त करते समय भी दूसरों के सम्मान का ध्यान रखना समाज के हित में है।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम और छात्र आंदोलन के दौरान कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा राजनीतिक नेताओं और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के दावे किए गए, जिसके बाद इस विषय पर विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। इसी क्रम में भूमि पेडनेकर ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी राय व्यक्त की।

    इस मुद्दे पर इससे पहले अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत भी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि किसी भी आंदोलन में अभद्र व्यवहार स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध छात्रों के आंदोलन से नहीं, बल्कि प्रदर्शन के दौरान प्रयोग की गई आपत्तिजनक भाषा और आचरण से था।

    भूमि पेडनेकर के बयान के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ संवाद की मर्यादा भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर मतभेद स्वाभाविक हो सकते हैं, लेकिन सम्मानजनक भाषा और जिम्मेदार व्यवहार लोकतांत्रिक संस्कृति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सार्वजनिक जीवन में संयमित संवाद और परस्पर सम्मान को बनाए रखने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

  • पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली नाबालिग की माफी के बाद कंगना रनौत ने माता-पिता से की बच्चों को वैचारिक प्रभाव से बचाने की अपील

    पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली नाबालिग की माफी के बाद कंगना रनौत ने माता-पिता से की बच्चों को वैचारिक प्रभाव से बचाने की अपील

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में माफी मांगने वाली 15 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़ा विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया देते हुए अभिभावकों से अपने बच्चों के मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किशोर उम्र के बच्चों को गलत संगत और ऐसे वैचारिक प्रभावों से बचाने की आवश्यकता है, जो उन्हें भड़काऊ या अनुचित व्यवहार की ओर ले जा सकते हैं।

    कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि संबंधित किशोरी स्वयं यह स्वीकार कर रही है कि वह पहले कभी प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई पोस्ट या टिप्पणी नहीं करती थी, लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों के कहने पर उसने आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के सामाजिक और वैचारिक परिवेश पर ध्यान दें तथा उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए सही दिशा प्रदान करें। उन्होंने अपने संदेश में कुछ वैचारिक समूहों की आलोचना करते हुए समाज से आत्ममंथन की भी अपील की।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में एक नाबालिग लड़की प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करती दिखाई दी। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और इसके संबंध में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हुई।

    मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना क्षेत्र में एक महिला की शिकायत पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक और सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया। बाद में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मामला दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया, जहां संबंधित तथ्यों और शिकायत की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

    विवाद के बीच 15 वर्षीय लड़की ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उसने कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस गई थी, जहां कुछ लोगों ने उसे आपत्तिजनक नारे और शब्द दोहराने के लिए उकसाया। उसने स्वीकार किया कि उससे गंभीर गलती हुई और वह अपने व्यवहार को लेकर बेहद शर्मिंदा है। किशोरी ने देशवासियों से क्षमा मांगते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में वह ऐसी गलती दोबारा नहीं करेगी।

    इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ-साथ उनकी दिवंगत मां के लिए भी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई बच्चा गुमराह होकर ऐसी गलती करता है तो उसे सही मार्ग दिखाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने ऐसे बच्चों को माफ करने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने की बात कही।

    दूसरी ओर, विरोध प्रदर्शन से जुड़े संगठन के प्रतिनिधियों ने इस मामले में दर्ज शिकायत पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अपमानजनक भाषा के मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा रही है, तो सभी पक्षों के लिए समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और संबंधित एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी कर रही हैं। इस बीच, नाबालिग की माफी, कंगना रनौत की प्रतिक्रिया और प्रधानमंत्री की अपील ने इस मुद्दे को सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना दिया है।

  • रिकॉर्ड प्रोडक्शन के बावजूद मारुति की 1.6 लाख कारों की बुकिंग लंबित, मांग के आगे सीमित डीलर इन्वेंट्री

    रिकॉर्ड प्रोडक्शन के बावजूद मारुति की 1.6 लाख कारों की बुकिंग लंबित, मांग के आगे सीमित डीलर इन्वेंट्री

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने जुलाई महीने में उत्पादन और बिक्री के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी ने एक ही महीने में अब तक का सर्वाधिक वाहन उत्पादन दर्ज करते हुए घरेलू बाजार में रिकॉर्ड स्तर की बिक्री भी हासिल की। इसके बावजूद ग्राहकों की मजबूत मांग के कारण डीलर नेटवर्क में उपलब्ध वाहनों का स्टॉक सामान्य स्तर से काफी नीचे पहुंच गया है। कंपनी के अनुसार बड़ी संख्या में ग्राहकों की बुकिंग अभी भी लंबित है, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच अंतर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

    कंपनी ने जुलाई के दौरान कुल 2,48,845 वाहनों का उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष इसी महीने के 1,87,073 वाहनों की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत अधिक है। इससे पहले कंपनी का सर्वोच्च मासिक उत्पादन मार्च 2026 में दर्ज किया गया था, जब 2,31,933 इकाइयों का निर्माण हुआ था। नए आंकड़ों ने उस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है और कंपनी की उत्पादन क्षमता में हालिया विस्तार का प्रभाव साफ दिखाई दिया है।

    जुलाई में मारुति सुजुकी ने घरेलू बाजार में यात्री वाहनों की अब तक की सबसे अधिक थोक बिक्री दर्ज की। कंपनी ने 1,96,203 यात्री वाहन डीलरों तक पहुंचाए, जो पिछले वर्ष जुलाई के मुकाबले करीब 43 प्रतिशत अधिक है। हल्के वाणिज्यिक वाहनों को शामिल करने पर कुल घरेलू बिक्री 2,00,123 इकाइयों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। लगातार बढ़ती मांग ने कंपनी की बाजार स्थिति को और मजबूत किया है।

    रिकॉर्ड उत्पादन और बिक्री के बावजूद कंपनी के डीलर नेटवर्क में उपलब्ध वाहनों का स्टॉक सामान्य स्तर से काफी कम बना हुआ है। वर्तमान में डीलरों के पास औसतन केवल 16 दिनों की इन्वेंट्री उपलब्ध है, जबकि ऑटो उद्योग में सामान्य रूप से लगभग 30 दिनों का स्टॉक पर्याप्त माना जाता है। इसका अर्थ है कि बाजार में मांग की गति उत्पादन और आपूर्ति की तुलना में अधिक बनी हुई है। कंपनी के पास लगभग 1.6 लाख वाहनों की बुकिंग लंबित है, जिन्हें आने वाले समय में ग्राहकों तक पहुंचाया जाएगा।

    मॉडलवार उत्पादन पर नजर डालें तो कॉम्पैक्ट कारों और यूटिलिटी वाहनों दोनों श्रेणियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। ऑल्टो और एस-प्रेसो जैसे एंट्री-लेवल मॉडलों का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा। वहीं बलेनो, सेलेरियो और स्विफ्ट जैसे लोकप्रिय कॉम्पैक्ट मॉडलों का उत्पादन एक लाख से अधिक इकाइयों तक पहुंच गया। ब्रेजा, अर्टिगा और फ्रॉन्क्स जैसे यूटिलिटी वाहनों की मांग भी मजबूत बनी रही और इनके उत्पादन में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके अलावा ईको वैन और सुपर कैरी जैसे वाणिज्यिक मॉडलों के उत्पादन में भी वृद्धि देखने को मिली।

    कंपनी की उत्पादन क्षमता में हाल ही में और विस्तार हुआ है। गुजरात के हंसलपुर स्थित चौथे संयंत्र में उत्पादन शुरू होने के बाद हरियाणा और गुजरात में मौजूद सभी विनिर्माण इकाइयों की संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़कर 29 लाख वाहन हो गई है। इस विस्तार से भविष्य में बढ़ती मांग को पूरा करने और ग्राहकों की प्रतीक्षा अवधि कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए जुलाई का प्रदर्शन सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उत्पादन, बिक्री और लंबित बुकिंग के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि उपभोक्ता मांग मजबूत बनी हुई है। आने वाले महीनों में यदि उत्पादन इसी गति से जारी रहता है तो डीलर इन्वेंट्री में सुधार आने के साथ ग्राहकों की प्रतीक्षा अवधि भी कम हो सकती है। फिलहाल कंपनी का रिकॉर्ड प्रदर्शन भारतीय यात्री वाहन बाजार में उसकी मजबूत स्थिति को और सुदृढ़ करता है।

  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला संक्रमण तेजी से फैला, WHO ने वैश्विक सतर्कता और तत्काल कार्रवाई की अपील

    डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला संक्रमण तेजी से फैला, WHO ने वैश्विक सतर्कता और तत्काल कार्रवाई की अपील

    नई दिल्ली । डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस का मौजूदा प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि संक्रमण की रफ्तार पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह और अधिक व्यापक तबाही का कारण बन सकता है। मई 2026 में घोषित इस प्रकोप ने अब तक हजारों लोगों को संक्रमित किया है और बड़ी संख्या में मौतें दर्ज की गई हैं। बढ़ते मामलों के कारण यह दुनिया के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी इबोला महामारी बन चुकी है।

    स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार यह प्रकोप बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि संक्रमण की रोकथाम के लिए संक्रमित व्यक्ति की शीघ्र पहचान, संपर्क में आए लोगों की निगरानी, संक्रमण नियंत्रण और समुदाय स्तर पर जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण उपाय माने जा रहे हैं। स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के ताजा आकलन के अनुसार जुलाई के अंत तक इबोला संक्रमण के मामलों की संख्या 3,600 से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि लगभग 1,600 लोगों की मौत हो चुकी है। मृत्यु दर भी काफी अधिक बनी हुई है, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है। संगठन का कहना है कि कई क्षेत्रों में संक्रमण की नई कड़ियां लगातार सामने आ रही हैं, जिससे प्रकोप पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    कांगो का उत्तर-पूर्वी इतुरी प्रांत इस महामारी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। यह इलाका लंबे समय से संघर्ष, विस्थापन और मानवीय संकट जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। बड़ी संख्या में लोगों का लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, स्वच्छ पानी और पर्याप्त चिकित्सा संसाधनों की कमी संक्रमण को नियंत्रित करने के प्रयासों को और कठिन बना रही है। पड़ोसी देशों की सीमाओं से लोगों की आवाजाही भी स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान प्रकोप ने वर्ष 2018 से 2020 के बीच कांगो में फैली पिछली बड़ी इबोला महामारी के मामलों का आंकड़ा भी पीछे छोड़ दिया है। अब यह पश्चिम अफ्रीका में वर्ष 2014 से 2016 के बीच फैली ऐतिहासिक महामारी के बाद दूसरी सबसे बड़ी इबोला महामारी के रूप में दर्ज हो चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो संक्रमण का दायरा और बढ़ सकता है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाएं प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, जांच, उपचार सुविधाओं के विस्तार और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने के लिए क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता भी बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान, संक्रमित मरीजों का पृथक्करण और स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन ही इस महामारी के प्रभाव को सीमित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय की नजर अब कांगो की स्थिति पर बनी हुई है, क्योंकि यह प्रकोप केवल एक देश ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर चुनौती बन चुका है।

  • ईंधन खपत के नए आंकड़े जारी, पेट्रोल-डीजल और एटीएफ की बिक्री बढ़ी, एलपीजी की मांग घटी

    ईंधन खपत के नए आंकड़े जारी, पेट्रोल-डीजल और एटीएफ की बिक्री बढ़ी, एलपीजी की मांग घटी

    नई दिल्ली । जुलाई 2026 के दौरान देश में पेट्रोल और डीजल की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के शुरुआती बिक्री आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल दोनों की खपत पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मजबूत रही। वहीं विमान ईंधन की मांग में भी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एलपीजी की बिक्री में गिरावट देखने को मिली। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि कमजोर मानसून, कृषि गतिविधियों में बदलाव और ऊर्जा उपयोग के बदलते पैटर्न ने इन आंकड़ों को प्रभावित किया है।

    जुलाई के दौरान पेट्रोल की बिक्री में लगभग 9.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। कुल बिक्री 34.5 लाख टन तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में काफी अधिक रही। हालांकि जून के मुकाबले इसमें हल्की गिरावट दर्ज हुई, लेकिन वार्षिक आधार पर मांग में मजबूती बनी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि निजी वाहनों की बढ़ती आवाजाही, यात्रा गतिविधियों में तेजी और शहरी क्षेत्रों में ईंधन की लगातार मांग ने पेट्रोल की बिक्री को सहारा दिया।

    डीजल की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। जुलाई के दौरान इसकी खपत करीब 10.7 प्रतिशत बढ़कर 71.2 लाख टन तक पहुंच गई। डीजल देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख ईंधन माना जाता है क्योंकि इसका उपयोग माल परिवहन, कृषि उपकरणों, सिंचाई पंपों और औद्योगिक गतिविधियों में बड़े पैमाने पर होता है। सामान्य से कम मानसूनी वर्षा के कारण कई क्षेत्रों में सिंचाई की आवश्यकता बढ़ी, जिससे डीजल की मांग में तेजी देखने को मिली।

    विमान ईंधन यानी एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की बिक्री में भी सकारात्मक रुझान सामने आया। जुलाई में इसकी बिक्री लगभग 2.9 प्रतिशत बढ़कर 6.59 लाख टन के स्तर पर पहुंच गई। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में निरंतर बढ़ोतरी तथा विमान सेवाओं के संचालन में विस्तार को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। इससे विमानन क्षेत्र में गतिविधियों के मजबूत बने रहने के संकेत भी मिलते हैं।

    इसके विपरीत, एलपीजी की बिक्री में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। जुलाई के दौरान इसकी खपत लगभग 17.4 प्रतिशत घटकर 23.7 लाख टन रह गई। ऊर्जा क्षेत्र के अधिकारियों का मानना है कि कुछ उपभोक्ताओं ने पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी की ओर रुख किया है, जिससे एलपीजी की मांग प्रभावित हुई है। इसके अलावा ऊर्जा उपयोग के तरीकों में बदलाव और वैकल्पिक ईंधन के बढ़ते इस्तेमाल का असर भी एलपीजी की बिक्री पर दिखाई दिया।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की मांग में आने वाले ऐसे बदलाव देश की आर्थिक गतिविधियों और उपभोक्ता व्यवहार का महत्वपूर्ण संकेत होते हैं। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती बिक्री परिवहन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देती है, जबकि एलपीजी की घटती मांग घरेलू ऊर्जा उपभोग में बदलते रुझानों की ओर इशारा करती है। आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति, कृषि उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों के आधार पर ईंधन की मांग में और परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

    जुलाई के शुरुआती बिक्री आंकड़े यह दर्शाते हैं कि देश में पारंपरिक परिवहन ईंधनों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। वहीं घरेलू ऊर्जा क्षेत्र में वैकल्पिक विकल्पों का उपयोग धीरे-धीरे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा बाजार की यह बदलती तस्वीर भविष्य में ईंधन उपभोग के नए रुझानों को भी प्रभावित कर सकती है। सरकार और तेल विपणन कंपनियां भी मांग के इन पैटर्न पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखा जा सके।

  • अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके संगठन से जुड़े वित्तीय एवं कानूनी मामलों को लेकर नया विवाद सामने आया है। गुजरात के सूरत निवासी एक RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और संबंधित कर अधिकारियों से कई बिंदुओं पर विस्तृत जांच कराने की मांग की है। शिकायत में अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति, पार्टी की वैधानिक स्थिति तथा हाल ही में घोषित लीगल डिफेंस फंड के वित्तीय और कर संबंधी पहलुओं की निष्पक्ष जांच का आग्रह किया गया है।

    शिकायत में कहा गया है कि अभिजीत दिपके के पिता महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी रहे हैं। ऐसे में यह जानने की आवश्यकता बताई गई है कि परिवार की आय और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विदेश में उच्च शिक्षा के लिए होने वाले खर्च का प्रबंध किस प्रकार किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि इस संबंध में सभी वित्तीय स्रोत वैध हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, जबकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

    विवाद केवल व्यक्तिगत संपत्ति तक सीमित नहीं है। शिकायत में कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी स्थिति पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि संगठन राजनीतिक दल की तरह सक्रिय दिखाई देता है, इसलिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या उसका पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक दल के रूप में हुआ है या नहीं। शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि संगठन की वैधानिक स्थिति की आधिकारिक जांच कर आवश्यक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर धन जुटा रहा है या बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहा है, तो उसके कानूनी स्वरूप और नियामकीय अनुपालन की पुष्टि होना आवश्यक है। उनका तर्क है कि इससे राजनीतिक वित्तपोषण की पारदर्शिता बनी रहती है और आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होता है।

    इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू लीगल डिफेंस फंड से भी जुड़ा है। यह फंड उन लोगों की कानूनी सहायता के लिए घोषित किया गया था जो विभिन्न मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। इसी संदर्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा चर्चा का विषय बनी। अब शिकायतकर्ता ने इस राशि पर लागू होने वाले कर नियमों और GST अनुपालन की भी जांच कराने की मांग की है।

    कर अधिकारियों को भेजे गए पत्र में यह आग्रह किया गया है कि संबंधित राशि पर वस्तु एवं सेवा कर के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं, तथा यदि लागू होते हैं तो निर्धारित नियमों का पालन किया गया है या नहीं, इसकी जांच की जाए। शिकायतकर्ता का मानना है कि बड़ी वित्तीय घोषणाओं के मामलों में कर संबंधी सभी औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    फिलहाल संबंधित संस्थाओं की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। यदि चुनाव आयोग और कर विभाग इस मामले में जांच प्रारंभ करते हैं, तो उसके निष्कर्षों से संगठन की वैधानिक स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और कर अनुपालन से जुड़े कई प्रश्नों पर स्पष्टता आ सकती है। वहीं, मामले में लगाए गए सभी आरोप अभी जांच और आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • डॉक्टर की चेतावनी, परिवार से छुपाया सच और फिर नई शुरुआत, राम कपूर ने सुनाई संघर्ष से वापसी की कहानी

    डॉक्टर की चेतावनी, परिवार से छुपाया सच और फिर नई शुरुआत, राम कपूर ने सुनाई संघर्ष से वापसी की कहानी

    नई दिल्ली ।लोकप्रिय अभिनेता राम कपूर ने रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ में अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि करियर के शिखर पर पहुंचने के बावजूद वह मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन दौर से गुजर रहे थे। अभिनेता ने स्वीकार किया कि एक समय उनकी सेहत इतनी खराब हो गई थी कि डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर परिणामों की चेतावनी दी थी। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने इस स्थिति की जानकारी अपनी पत्नी गौतमी कपूर और परिवार के अन्य सदस्यों से भी लंबे समय तक छुपाकर रखी।

    राम कपूर ने कहा कि जिस समय उन्हें टीवी धारावाहिक ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ से व्यापक लोकप्रियता मिल रही थी, उसी दौरान उनका निजी जीवन कई चुनौतियों से घिरा हुआ था। बाहर से सब कुछ सामान्य और सफल दिखाई देता था, लेकिन भीतर वह लगातार मानसिक तनाव और अवसाद का सामना कर रहे थे। उन्होंने बताया कि लगातार काम का दबाव, अनियमित दिनचर्या और अपनी सेहत की अनदेखी ने उनकी स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया।

    अभिनेता ने बताया कि समय के साथ उनका वजन लगातार बढ़ता गया और जीवनशैली पूरी तरह असंतुलित हो गई। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में उन्होंने अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं दी। जब चिकित्सकीय जांच कराई गई तो डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उन्होंने तुरंत अपनी आदतों में सुधार नहीं किया, तो आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका ब्लड शुगर स्तर कई बार सामान्य सीमा से काफी ऊपर पहुंच जाता था, जिससे जोखिम लगातार बढ़ रहा था।

    राम कपूर ने अपने व्यवहार को याद करते हुए आत्मस्वीकृति भी जताई। उन्होंने कहा कि सफलता और व्यस्तता के बीच वह खुद को खो बैठे थे। उन्होंने माना कि वह शूटिंग पर समय से नहीं पहुंचते थे, कई बार अनुशासन का पालन नहीं करते थे और सहकर्मियों के साथ भी उनका व्यवहार पहले जैसा नहीं रह गया था। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय की अपनी गलतियों को याद करके आज भी उन्हें अफसोस होता है और वह उस दौर को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी सीख मानते हैं।

    उन्होंने यह भी बताया कि अपनी मानसिक और शारीरिक परेशानियों के बारे में उन्होंने परिवार को पूरी सच्चाई नहीं बताई थी। उनका मानना था कि इससे उनके अपने लोग अनावश्यक रूप से चिंतित हो जाएंगे। हालांकि समय के साथ उन्हें यह एहसास हुआ कि मुश्किल परिस्थितियों में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों ने उन्हें जीवन को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा दी और आगे बढ़ने का हौसला दिया। उनके अनुसार यदि परिवार का भावनात्मक सहारा नहीं मिलता, तो परिस्थितियां और अधिक कठिन हो सकती थीं।

    राम कपूर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपने जीवन में कई सकारात्मक बदलाव किए हैं। उन्होंने अपनी दिनचर्या, खानपान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना शुरू किया तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी लगातार प्रयास किए। अभिनेता का कहना है कि अब वह पहले की तुलना में अधिक संतुलित, खुश और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। उन्होंने अपने अनुभव के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि सफलता के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासित जीवनशैली और परिवार का साथ भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यही कठिन समय में व्यक्ति को संभालने की सबसे बड़ी ताकत बनते हैं।

  • पीएम मोदी की अपील के बाद नाबालिग लड़की की मां ने जताया आभार, एफआईआर वापस लेने की लगाई गुहार

    पीएम मोदी की अपील के बाद नाबालिग लड़की की मां ने जताया आभार, एफआईआर वापस लेने की लगाई गुहार

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र नारेबाजी करने के आरोप में चर्चा में आई 15 वर्षीय नाबालिग लड़की की मां ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि उनकी बेटी को सुधार का अवसर देकर नया जीवन मिला है। उन्होंने कहा कि कठोर कार्रवाई की बजाय क्षमा और मार्गदर्शन का संदेश समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण है। साथ ही उन्होंने बेटी के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की भी अपील की है।

    यह मामला उस समय चर्चा में आया जब एक प्रदर्शन के दौरान नाबालिग लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वह प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाती दिखाई दी। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू की और इस संबंध में मामला दर्ज किया गया। बाद में यह मामला संबंधित थाने को स्थानांतरित कर दिया गया, जहां आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    इस घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए कहा कि प्रदर्शनों के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले कई बच्चे परिस्थितियों और बहकावे का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। समाज को ऐसे बच्चों को अपराधी की तरह देखने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास करना चाहिए ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

    प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद संबंधित नाबालिग लड़की ने भी सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माफी मांगी। उसने कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ दिल्ली के कनॉट प्लेस घूमने गई थी और वहीं पास में चल रहे प्रदर्शन के दौरान दूसरों के प्रभाव में आकर आपत्तिजनक नारे लगाने लगी। लड़की ने स्वीकार किया कि उससे गंभीर गलती हुई और उसने इसे अपने जीवन की पहली तथा अंतिम भूल बताते हुए देशवासियों से क्षमा मांगी।

    लड़की की मां ने भावुक होकर कहा कि संयोग से जिस दिन प्रधानमंत्री ने क्षमा का संदेश दिया, उसी दिन उनकी बेटी का जन्मदिन भी था। उनके अनुसार यह उनकी बेटी के लिए सबसे बड़ा उपहार है, क्योंकि उसे अपनी गलती सुधारने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि परिवार अपनी भूल स्वीकार करता है और चाहता है कि गलत नाम और उम्र के साथ दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए, ताकि उनकी बेटी सामान्य जीवन की ओर लौट सके और अपनी पढ़ाई तथा भविष्य पर ध्यान दे सके।

    मां ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार से एक व्यापक नीति बनाने की भी मांग की। उनका कहना है कि कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण हो और उन्हें राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने से भी रोका जाए, क्योंकि कम उम्र में बच्चे आसानी से दूसरों के प्रभाव में आ सकते हैं।

    इस बीच पूरे घटनाक्रम को लेकर सार्वजनिक स्तर पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के सुधारवादी दृष्टिकोण की सराहना की है, जबकि कुछ ने कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। फिलहाल संबंधित एफआईआर और मामले की आगे की कार्रवाई पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जारी है। यह प्रकरण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया की भूमिका, नाबालिगों की जिम्मेदारी और कानून के बीच संतुलन को लेकर भी नई चर्चा का विषय बन गया है।