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  • रायसेन के खेत में मिली 6-7 साल की बाघिन की लाश, बिजली के तार की चपेट में आने से मौत की आशंका

    रायसेन के खेत में मिली 6-7 साल की बाघिन की लाश, बिजली के तार की चपेट में आने से मौत की आशंका

    मध्य प्रदेश: के रायसेन जिले से वन्यजीवों से जुड़ी एक दुखद घटना सामने आई है। ओबेदुल्लागंज तहसील के दाहोद फॉरेस्ट रेंज के कागवान इलाके में एक किसान के खेत में 6 से 7 साल की वयस्क बाघिन मृत अवस्था में मिली। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

    प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि खेत में बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से बाघिन की मौत हुई हो सकती है। हालांकि, वन विभाग ने अभी मौत के कारण की अंतिम पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार, बाघिन की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर हेमंत रायकवार ने बताया कि बाघिन का शव सोमवार शाम जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर कागवान इलाके में किसान के खेत से बरामद किया गया। शुरुआती जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे बिजली का झटका लगने की आशंका सामने आई है। घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    घटना के बाद वन विभाग ने संबंधित क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया है। आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है, ताकि घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके और जांच प्रभावित न हो। अधिकारियों की टीम मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाने में लगी रही।

    वन विभाग के अनुसार, बाघिन के शव का पोस्टमार्टम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए के निर्धारित मानकों और प्रोटोकॉल के तहत कराया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव का नियमानुसार निस्तारण कर दिया गया। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बाघिन की मौत किन परिस्थितियों में हुई और खेत में मौजूद बिजली के तार की इसमें क्या भूमिका रही।

    मध्य प्रदेश को देश का सबसे बड़ा टाइगर स्टेट कहा जाता है। साल 2022 की राष्ट्रीय बाघ जनगणना में राज्य में 785 बाघ दर्ज किए गए थे, जो देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक संख्या थी। प्रदेश में वर्तमान में कुल 9 टाइगर रिजर्व हैं। ऐसे में किसी बाघ या बाघिन की मौत वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।

    खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए अवैध तरीके से बिजली के तार बिछाए जाने से वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा होने की आशंका बनी रहती है। रायसेन की इस घटना में भी बिजली के तार से करंट लगने की आशंका सामने आने के बाद वन विभाग सतर्क है। हालांकि, बाघिन की मौत का सटीक कारण जांच और पोस्टमार्टम से जुड़े निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • FCRA पंजीकरण के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में गृह मंत्रालय के दो अधिकारी गिरफ्तार, जांच के बीच बढ़ी हलचल

    FCRA पंजीकरण के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में गृह मंत्रालय के दो अधिकारी गिरफ्तार, जांच के बीच बढ़ी हलचल

    नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े दो अधिकारियों को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी एफसीआरए के तहत पंजीकरण कराने में मदद करने के बदले कथित तौर पर रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दोनों अधिकारियों को 28 सितंबर को दिल्ली में पकड़ा गया। इनमें एक वरिष्ठ लेखाकार और दूसरा लेखाकार बताया गया है। आरोपों की जांच जारी है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में से एक वर्तमान में मंत्रालय के विदेशी प्रभाग में तैनात था। दूसरा अधिकारी फिलहाल वेतन एवं लेखा कार्यालय में कार्यरत था और इससे पहले विदेशी प्रभाग में सेवाएं दे चुका है। शुरुआती पूछताछ में दोनों के कुछ संस्थाओं के संपर्क में रहने और एफसीआरए पंजीकरण तथा लाइसेंस के नवीनीकरण में मदद करने के बदले कथित तौर पर पैसे मांगने की जानकारी सामने आई है।

    मामला सामने आने के बाद एफसीआरए से जुड़ी सेवाओं की प्रक्रिया को लेकर भी लोगों को सावधान किया गया है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एफसीआरए से संबंधित सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं। किसी भी मध्यस्थ, एजेंट या निजी व्यक्ति को इन सेवाओं में मदद करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।

    मामले की जांच अभी जारी है। आरोपों की पुष्टि अदालत में होना बाकी है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इस कार्रवाई के बीच मंत्रालय ने भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख दोहराते हुए एफसीआरए सेवाओं से जुड़े मामलों में किसी अनधिकृत व्यक्ति के माध्यम से काम कराने से बचने की बात कही है।

    एफसीआरए के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए पंजीकरण जरूरी होता है। विदेशी फंडिंग से संबंधित गतिविधियों की निगरानी के लिए गृह मंत्रालय नोडल प्राधिकरण के रूप में काम करता है। इसी व्यवस्था के तहत पंजीकरण, नवीनीकरण और अन्य नियामकीय प्रक्रियाएं संचालित की जाती हैं।

    इसी बीच विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर संसद की संयुक्त समिति की बैठक भी हुई। 31 सदस्यीय समिति प्रस्तावित संशोधनों की विस्तृत जांच कर रही है। 29 सितंबर की बैठक में गृह और कानून मंत्रालय के अधिकारियों ने विधेयक के प्रावधानों और 2010 के मूल कानून में बदलाव की जरूरत को लेकर समिति के सामने जानकारी रखी।

    यह विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और बाद में दोनों सदनों की मंजूरी के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। समिति प्रस्तावित बदलावों की विभिन्न कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं से जांच कर रही है। विधेयक अभी संसद की समिति के विचाराधीन है और कानून नहीं बना है।

    प्रस्तावित संशोधनों में ऐसे संगठनों से जुड़े विदेशी अंशदान और संपत्तियों के प्रबंधन से संबंधित प्रावधान शामिल हैं, जिनका एफसीआरए प्रमाणपत्र समाप्त हो जाता है, रद्द कर दिया जाता है या जिसका नवीनीकरण नहीं हो पाता। समिति इन प्रावधानों पर विभिन्न पक्षों और विशेषज्ञों के विचार भी सुन रही है।

    एफसीआरए से जुड़े मौजूदा रिश्वत मामले और प्रस्तावित संशोधन विधेयक की संसदीय जांच अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। एक तरफ दो अधिकारियों पर मौजूदा पंजीकरण प्रक्रिया में कथित तौर पर रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ संसद की समिति विदेशी अंशदान से जुड़े कानून में प्रस्तावित बदलावों की समीक्षा कर रही है।

    मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि गिरफ्तार अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और एफसीआरए सेवाओं को लेकर अनधिकृत बिचौलियों से सावधान रहने की अपील की गई है।

  • राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    उत्तर प्रदेश: के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो भाजपा नौवां प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। उन्होंने विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी।

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को लखनऊ में राज्यसभा चुनाव की तैयारियों और विपक्षी दलों की रणनीति को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अगर राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो भाजपा की ओर से नौवां प्रत्याशी उतारा जाएगा।

    केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा राज्यसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवार मैदान में उतारे जा सकते हैं। अगर समाजवादी पार्टी तीसरे उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारती है तो भाजपा भी नौवां प्रत्याशी उतार सकती है। इस बयान के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच मुकाबले की चर्चा तेज हो गई है।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में सीटों के गणित के बीच उम्मीदवारों की संख्या महत्वपूर्ण हो गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की संभावना पर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में भाजपा की ओर से नौवां उम्मीदवार उतारने की बात सामने आने से चुनावी समीकरण और अधिक चर्चा में आ गए हैं।

    केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल साथ मिलकर चुनाव लड़ें या अलग-अलग, भाजपा वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने विपक्षी दलों की एकजुटता और चुनावी रणनीति को लेकर भी अपनी बात रखी।

    चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनावी परिस्थितियों के अनुसार चुनाव व्यवस्था को लेकर अपना रुख बदलते हैं। उनके अनुसार, जब इन दलों को चुनाव में सफलता मिलती है तो उन्हें चुनाव व्यवस्था ठीक दिखाई देती है, जबकि भाजपा या एनडीए को सफलता मिलने पर वही व्यवस्था सवालों के घेरे में बताई जाती है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने चुनाव परिणामों को अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने वर्ष 2004 और 2009 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बनने का उल्लेख किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन के प्रदर्शन का भी जिक्र किया।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में, जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, भाजपा गठबंधन ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 सीटें जीती थीं। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 325 सीटें हासिल की थीं, जबकि समाजवादी पार्टी 47 सीटों तक सीमित रह गई थी। मौर्य ने कहा कि चुनावी परिणामों को अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग तरीके से देखना उचित नहीं है।

    विपक्षी दलों की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ये दल अपनी सुविधा के अनुसार चुनाव परिणामों की व्याख्या करते हैं। उन्होंने इसके लिए “मीठा-मीठा गप-गप और तीखा-तीखा थू-थू” वाली टिप्पणी का इस्तेमाल किया।

    केशव प्रसाद मौर्य ने अपने राजनीतिक और वैचारिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए राम, कृष्ण और विश्वनाथ से जुड़े विषयों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीरामलला का भव्य मंदिर बन चुका है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विश्वनाथ से जुड़े विषय अभी शेष हैं। तेलंगाना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयानों से भाजपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और पार्टी संगठन के विस्तार तथा जनसेवा के संकल्प के साथ काम कर रही है।

  • अजीत अगरकर की जगह प्रज्ञान ओझा को मिली अंतरिम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी, स्थायी नियुक्ति पर भी बन सकती है सहमति

    अजीत अगरकर की जगह प्रज्ञान ओझा को मिली अंतरिम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी, स्थायी नियुक्ति पर भी बन सकती है सहमति

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम की सिलेक्शन कमिटी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अजीत अगरकर का कार्यकाल अभी 4 अक्टूबर तक है, लेकिन उससे पहले ही उन्हें सिलेक्शन कमिटी की मौजूदा बैठक से अलग कर दिया गया है। उनकी जगह कमिटी के सदस्य और पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा को फिलहाल अंतरिम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    मंगलवार 29 सितंबर को गुवाहाटी में हुई सिलेक्शन कमिटी की बैठक की अध्यक्षता प्रज्ञान ओझा ने की। इस बैठक में अजीत अगरकर शामिल नहीं हुए। आने वाले न्यूजीलैंड दौरे को लेकर टीम की रूपरेखा तैयार करने के लिए 30 सितंबर को होने वाले दूसरे वनडे के दौरान भी सभी चयनकर्ताओं के स्टेडियम में मौजूद रहने की बात कही गई है।

    प्रज्ञान ओझा को फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तहत कमिटी का प्रमुख बनाया गया है। हालांकि, आगे चलकर उन्हें स्थायी रूप से चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। नए सिलेक्टर की नियुक्ति और चयन समिति की संरचना स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि मौजूदा व्यवस्था कितने समय तक जारी रहती है।

    प्रज्ञान ओझा चयन समिति के मौजूदा सदस्यों में टेस्ट क्रिकेट के अनुभव के लिहाज से सबसे वरिष्ठ हैं। उन्होंने भारतीय टीम के लिए 24 टेस्ट मैच खेले हैं। मौजूदा चयन समिति में शिव सुंदर दास ने 23 टेस्ट, आरपी सिंह ने 14 टेस्ट और अजय रात्रा ने 6 टेस्ट मैच खेले हैं। इसी अनुभव के कारण चयन समिति की अध्यक्षता के लिए ओझा का नाम सामने आया है।

    ओझा ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज के तौर पर अपनी पहचान बनाई थी। अब वह चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें समिति के सदस्यों के बीच स्वीकार्य विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

    सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि प्रज्ञान ओझा की यह जिम्मेदारी केवल अस्थायी रहेगी या उन्हें आगे भी चयन समिति का प्रमुख बनाए रखा जाएगा। इसका जवाब नए चयनकर्ता के चयन के बाद सामने आएगा। यदि पार्थिव पटेल अजीत अगरकर की जगह चयन समिति में शामिल होते हैं, तो ऐसी स्थिति में उनके चेयरमैन बनने की संभावना भी बताई जा रही है।

    वहीं, अगर परिस्थितियां अलग रहती हैं तो प्रज्ञान ओझा चयन समिति के प्रमुख के पद पर बने रह सकते हैं। इस समय चयन समिति में नेतृत्व को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है और आगे होने वाले फैसलों के बाद तस्वीर साफ होगी।

    अजीत अगरकर के कार्यकाल की अवधि पूरी होने से पहले ही उन्हें चयन समिति की बैठक से अलग किए जाने के बाद क्रिकेट प्रशासन में बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, वर्तमान में प्रज्ञान ओझा की भूमिका अंतरिम है और स्थायी नियुक्ति को लेकर अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।

    न्यूजीलैंड के आगामी दौरे को देखते हुए चयन समिति के लिए आने वाले फैसले महत्वपूर्ण होंगे। टीम संयोजन, खिलाड़ियों के चयन और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा के बीच प्रज्ञान ओझा फिलहाल चयन समिति की कमान संभाल रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नई चयन समिति बनने के बाद चेयरमैन पद की जिम्मेदारी किसे मिलती है।

  • नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय

    नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने पर कांग्रेस में फिर चर्चा, दिग्विजय बोले- रोकना चाहिए था, सोनिया गांधी ने दी अलग राय


    नई दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति की मंगलवार को हुई बैठक में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से अलग होने का मुद्दा भी चर्चा में आया। बैठक में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से जाने नहीं देना चाहिए था और अगर वह साथ रहते तो राजनीतिक परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। इस पर सोनिया गांधी ने अलग राय रखते हुए कहा कि नीतीश कुमार को गठबंधन से बाहर जाना ही था।

    नीतीश कुमार पहले विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्होंने गठबंधन से अलग होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का रुख किया था। मंगलवार की बैठक में उनके इस फैसले और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। सामने आई जानकारी के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन के साथ बने रहते तो सियासी हालात अलग होते।

    दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर सोनिया गांधी ने कहा कि नीतीश कुमार INDIA गठबंधन में रुकना नहीं चाहते थे। उनके मुताबिक, वह गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाश रहे थे। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि उनका बाहर जाना पहले से तय दिशा में था। इस तरह बैठक में नीतीश कुमार के फैसले को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग आकलन सामने आए।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस चर्चा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर बोलना नहीं चाहते थे, लेकिन नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर निकलने के रास्ते तलाशने की बात सामने रखी। खड़गे के मुताबिक, गठबंधन का संयोजक बनने की उनकी कोशिश भी वास्तविक राजनीतिक प्रतिबद्धता के बजाय दिखावे तक सीमित थी। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार पहले उनसे राज्य की राजनीति में रहने और केंद्र में INDIA गठबंधन को समर्थन देने की बात कह चुके थे।

    नीतीश कुमार के मुद्दे पर हुई यह चर्चा ऐसे समय हुई, जब कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। कांग्रेस ने मतदाता सूची में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कीं। पार्टी की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक करने समेत कई मांगें रखी गईं।

    कांग्रेस की बैठक के अगले दिन INDIA गठबंधन की बैठक भी नई दिल्ली में निर्धारित थी। इसमें विपक्षी दलों के नेताओं को चुनाव आयोग, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति पर चर्चा करनी थी। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य घटक दलों के प्रमुख नेताओं की भागीदारी तय थी।

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बातचीत का एक हल्का-फुल्का पल भी चर्चा में रहा। बैठक में खड़गे ने राहुल गांधी के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि पार्टी उनके पीछे चल रही है। इस पर राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए पूछा कि वे बहुत पीछे तो नहीं हैं। इसके बाद खड़गे ने कहा कि पार्टी उनके साथ चल रही है।

    नीतीश कुमार को लेकर हुई चर्चा ने INDIA गठबंधन के गठन और उसके बाद बदले राजनीतिक समीकरणों को फिर से सामने ला दिया। एक तरफ दिग्विजय सिंह ने उनके गठबंधन में बने रहने को लेकर अलग संभावना व्यक्त की, वहीं सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके अलग होने को उनकी राजनीतिक दिशा से जुड़ा फैसला बताया। इसी बीच विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी संयुक्त रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं।

  • अजय देवगन की ‘दृश्यम 3’ की रिलीज से पहले ही धुआंधार कमाई, 4 लाख से ज्यादा टिकट बिकीं, एडवांस बुकिंग में 10 करोड़ पार

    अजय देवगन की ‘दृश्यम 3’ की रिलीज से पहले ही धुआंधार कमाई, 4 लाख से ज्यादा टिकट बिकीं, एडवांस बुकिंग में 10 करोड़ पार

    नई दिल्ली। अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘दृश्यम 3’ सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले ही बॉक्स ऑफिस पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। लंबे इंतजार के बाद फिल्म 2 अक्टूबर को थिएटर में रिलीज होने जा रही है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्साह है और एडवांस बुकिंग के आंकड़े भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं।

    ‘दृश्यम 3’ की कहानी को लेकर भी दर्शकों में खास दिलचस्पी बनी हुई है। ट्रेलर में विजय सलगांवकर और उसका परिवार एक बार फिर मुश्किल परिस्थितियों में नजर आता है। कहानी इस बार कोर्टरूम तक पहुंचती दिखाई दे रही है, जहां जज के सामने ऐसे तथ्य रखे जाने की बात सामने आती है, जिनके आधार पर परिवार को दोषी ठहराया जा सकता है या उसे हमेशा के लिए राहत मिल सकती है।

    फिल्म की एडवांस बुकिंग 27 सितंबर को शुरू की गई थी। रिलीज से पहले ही देशभर में 4 लाख से ज्यादा टिकट बिकने की जानकारी सामने आई है। एडवांस बुकिंग से फिल्म की कमाई 10 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। रिलीज से तीन दिन पहले सामने आए ये आंकड़े फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी को दिखाते हैं।

    एडवांस बुकिंग शुरू होने के पहले ही दिन फिल्म ने 6.65 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था। इस साल रिलीज हुई फिल्मों की एडवांस बुकिंग के आंकड़ों से तुलना करें तो ‘दृश्यम 3’ सिर्फ ‘धुरंधर 2’ से पीछे बताई जा रही है। ऐसे में 2 अक्टूबर को फिल्म की ओपनिंग पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

    फिल्म की पहले दिन की कमाई को लेकर भी चर्चा तेज है। उपलब्ध एडवांस बुकिंग आंकड़ों के आधार पर ‘दृश्यम 3’ की ओपनिंग 35 करोड़ रुपये से ज्यादा होने की संभावना जताई गई है। हालांकि वास्तविक कमाई का आंकड़ा फिल्म के रिलीज होने के बाद ही सामने आएगा।

    साल 2022 में रिलीज हुई ‘दृश्यम 2’ ने पहले दिन करीब 15 करोड़ रुपये की कमाई के साथ शुरुआत की थी। अब तीसरे पार्ट की रिलीज से पहले जिस तरह टिकटों की बिक्री हो रही है, उससे फिल्म की ओपनिंग को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है।

    ‘दृश्यम 3’ में अजय देवगन के साथ श्रिया सरन, इशिता दत्ता, तबू और रजत कपूर नजर आएंगे। इस बार कलाकारों की सूची में जयदीप अहलावत का नाम भी जुड़ा है। ट्रेलर में उनका किरदार महत्वपूर्ण और प्रभावशाली नजर आता है। फिल्म की कहानी में उनके किरदार की भूमिका को लेकर भी दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है।

    फिल्म की कहानी में इस बार सलगांवकर परिवार के पुराने राज के सामने आने का संकेत दिया गया है। हालांकि पिछली फिल्मों की तरह तीसरे भाग में भी कहानी के अंत में बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल सकता है। फिल्म के ट्रेलर ने कहानी को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब सिनेमाघरों में मिलने की उम्मीद है।

    ‘दृश्यम 3’ का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है। फिल्म 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। रिलीज से पहले एडवांस बुकिंग में 4 लाख से ज्यादा टिकटों की बिक्री और 10 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई ने फिल्म की शुरुआत को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।

  • बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी को वंदे मातरम गाने की दी चुनौती, ऋतिक रोशन की हैरानी भरी प्रतिक्रिया हुई वायरल

    बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी को वंदे मातरम गाने की दी चुनौती, ऋतिक रोशन की हैरानी भरी प्रतिक्रिया हुई वायरल

    नई दिल्ली। वंदे मातरम और पितृसत्ता को लेकर बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दी गई चुनौती का मामला एक बार फिर चर्चा में है। करीब एक महीने पुराने इस बयान पर बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    बांसुरी स्वराज ने पुणे में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी थी, जिसमें उन्होंने महिलाओं से पितृसत्ता के खिलाफ आवाज उठाने और इसे खत्म करने की बात कही थी। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में महिलाओं को बेटी, पत्नी या मां की भूमिका तक सीमित किए जाने की बात कही थी और ऐसी सोच के खिलाफ एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया था।

    इसी संदर्भ में बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा था कि अगर वह वास्तव में पितृसत्ता को खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें पूरा वंदे मातरम गाकर दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि उन्हें क्रिसमस कैरल गाने, पूरा वंदे मातरम गाने और शिव तांडव का पाठ करने में कोई परेशानी नहीं है। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी को पूरा वंदे मातरम गाने की चुनौती दी थी।

    बांसुरी स्वराज का यह बयान अगस्त में सामने आया था, लेकिन हाल ही में इसका वीडियो फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। वीडियो पर ऋतिक रोशन की प्रतिक्रिया ने इस मामले को और सुर्खियों में ला दिया। उन्होंने वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा, “Huh? Is this real. Wow.” ऋतिक की इस संक्षिप्त प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रखी।

    राहुल गांधी ने पुणे में महिलाओं को संबोधित करते हुए पितृसत्ता की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को अक्सर बेटी, पत्नी या मां जैसी भूमिकाओं तक सीमित कर दिया जाता है, जबकि उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान भी है। उन्होंने कहा था कि पितृसत्ता महिलाओं को दबाती, डराती और नियंत्रित करती है तथा इसे खत्म करने के लिए मिलकर काम करना जरूरी है।

    अपने संबोधन में राहुल गांधी ने मनुस्मृति का भी उल्लेख किया था और महिलाओं को सीमित भूमिकाओं में रखने वाली सोच की आलोचना की थी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। इसी क्रम में बांसुरी स्वराज ने वंदे मातरम के पूर्ण गायन को पितृसत्ता के खिलाफ उनके आह्वान से जोड़ते हुए चुनौती दी थी।

    ऋतिक रोशन की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक यूजर ने उनकी फिल्म कृष का जिक्र करते हुए उनसे अपने अंदर के कृष को बाहर लाने की बात कही। एक अन्य यूजर ने इसी पार्टी की नेता कंगना रनौत का जिक्र करते हुए प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने ऋतिक के कमेंट की तारीफ भी की और इसे मजेदार बताया।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ राहुल गांधी का महिलाओं और पितृसत्ता से जुड़ा बयान है, दूसरी तरफ बांसुरी स्वराज की ओर से वंदे मातरम को लेकर दी गई चुनौती और अब ऋतिक रोशन की प्रतिक्रिया है। पुराने वीडियो पर आई नई प्रतिक्रिया ने इस राजनीतिक बयान और उससे जुड़े सोशल मीडिया विमर्श को दोबारा सुर्खियों में ला दिया है।

  • राहुल भट्ट ने आलिया और पूजा की तुलना पर रखी राय, कहा- पूजा ज्यादा टैलेंटेड और इंटैलिजेंट हैं, आलिया की फिल्म च्वाइस शानदार

    राहुल भट्ट ने आलिया और पूजा की तुलना पर रखी राय, कहा- पूजा ज्यादा टैलेंटेड और इंटैलिजेंट हैं, आलिया की फिल्म च्वाइस शानदार

    नई दिल्ली। महेश भट्ट के बेटे राहुल भट्ट ने अपनी सौतेली बहनों आलिया भट्ट और पूजा भट्ट को लेकर खुलकर बात की है। राहुल ने दोनों की तुलना करते हुए पूजा को ज्यादा टैलेंटेड और इंटैलिजेंट बताया। हालांकि, उन्होंने आलिया की फिल्म च्वाइस, स्टारडम और अब तक के काम की भी तारीफ की और कहा कि उन्होंने उम्मीद से कहीं ज्यादा काम किया है।

    महेश भट्ट के चार बच्चे हैं। पहली शादी से उनके बच्चे पूजा भट्ट और राहुल भट्ट हैं, जबकि दूसरी शादी से आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट हैं। राहुल ने अपने परिवार और सौतेली मां सोनी के साथ रिश्तों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि आलिया और शाहीन के साथ उनका रिश्ता सम्मान और स्नेह वाला है।

    आलिया और शाहीन के साथ अपने रिश्ते के बारे में राहुल ने कहा कि उनके बीच एक सिविल डायनैमिक्स है। वह दोनों का सम्मान करते हैं और उनसे प्यार भी करते हैं। उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि शाहीन अब सेटल हैं। राहुल ने आलिया को लेकर भी खुशी जताई और कहा कि वह उनकी छोटी बहन हैं। उनके मुताबिक, आलिया उन्हें सनी-बनी कहकर बुलाती हैं।

    सौतेली मां सोनी के साथ रिश्ते को लेकर राहुल ने कहा कि वह काफी अच्छी हैं, लेकिन उनके बीच का रिश्ता एक तरह की फॉर्मैलिटी है। उन्होंने बताया कि परिवार के लोग उन्हें बुलाते हैं और वे पिता के जन्मदिन, क्रिसमस तथा दिवाली जैसे मौकों पर मिलते हैं।

    राहुल ने कहा कि परिवार के सदस्य जानते हैं कि वह मौजूद हैं और उन्हें लगता है कि वे उनके करीब हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शाहीन उनका ज्यादा सम्मान करती हैं। वहीं आलिया के बारे में राहुल ने कहा कि उनका स्टारडम है और वह थोड़ी अलग हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता उनकी रियल बहन पूजा भट्ट के साथ है।

    पूजा और आलिया के टैलेंट की तुलना पर राहुल ने अपनी राय विस्तार से रखी। उन्होंने कहा कि दोनों का जन्म अलग-अलग दौर में हुआ है। उनके मुताबिक, आलिया के पास ज्यादा प्रॉलिफिक बॉडी ऑफ वर्क है, जबकि पूजा की पर्सनैलिटी अलग है। उन्होंने पूजा के पहनावे और उनके व्यक्तित्व का भी जिक्र किया।

    राहुल ने कहा कि अगर दोनों की तुलना की जाए तो उनकी निजी राय में पूजा ज्यादा इंटैलिजेंट और टैलेंटेड हैं। उन्होंने पूजा को अपने सभी भाई-बहनों में टैलेंट के मामले में आगे बताया। साथ ही राहुल ने यह भी कहा कि आलिया की फिल्मों की च्वाइस काफी शानदार है और उनमें टैलेंट भी है।

    राहुल के मुताबिक, आलिया को पब्लिक रिलेशन और अपनी छवि को बनाने की अच्छी समझ है। उन्होंने कहा कि पूजा टैलेंट के मामले में पावरहाउस हैं, जबकि आलिया का अपना अलग प्रभाव और व्यक्तित्व है। राहुल ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बयान आलिया के खिलाफ नहीं है।

    उन्होंने आलिया के काम की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने उम्मीद से कहीं ज्यादा काम किया है और वह अपने आप में एक इंस्टीट्यूशन हैं। राहुल ने यह भी बताया कि वह आलिया के पति रणबीर कपूर से पांच-छह बार मिल चुके हैं। उनके मुताबिक, फिल्म एनिमल के दौरान रणबीर ने उनसे बंदूक पकड़ने के तरीके के बारे में भी पूछा था।

  • ईरान ने UN पर कसा शोले के ठाकुर वाला तंज, मीम में बताया निहत्था और बेबस, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

    ईरान ने UN पर कसा शोले के ठाकुर वाला तंज, मीम में बताया निहत्था और बेबस, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ईरान ने अब संयुक्त राष्ट्र पर भी तंज कसा है। भारत में स्थित ईरानी दूतावास की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक मीम में बॉलीवुड की चर्चित फिल्म शोले के किरदार ठाकुर बलदेव सिंह की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया। इस मीम के जरिए संयुक्त राष्ट्र की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठाने की कोशिश की गई है।

    ईरान पहले भी मीम के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों पर निशाना साधता रहा है। अलग-अलग देशों में मौजूद ईरानी दूतावासों की ओर से सोशल मीडिया पर कई बार ऐसे पोस्ट साझा किए गए हैं, जिनमें राजनीतिक घटनाक्रम को हास्य और लोकप्रिय संस्कृति से जोड़कर संदेश देने की कोशिश की गई। इस बार संयुक्त राष्ट्र को निशाना बनाने के लिए भारतीय सिनेमा के बेहद चर्चित किरदार ठाकुर को चुना गया।

    मंगलवार को साझा किए गए इस मीम में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई गई हैं। पहली तस्वीर में मार्वल के सुपरहीरो डॉक्टर स्ट्रेंज को दिखाया गया है, जिसके कई हाथ नजर आते हैं। इस तस्वीर के साथ लिखा गया है, “स्कूल की किताबों के मुताबिक यूएन।” इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि आम तौर पर संयुक्त राष्ट्र को एक ऐसी शक्तिशाली वैश्विक संस्था के रूप में देखा जाता है, जो अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मामलों में हस्तक्षेप करने और कार्रवाई करने की क्षमता रखती है।

    दूसरी तस्वीर में 1975 में रिलीज हुई चर्चित फिल्म शोले के किरदार ठाकुर बलदेव सिंह को दिखाया गया है। फिल्म की कहानी में ठाकुर के दोनों हाथ कटे हुए होते हैं। इसी तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए मीम में लिखा गया है, “वास्तविकता में UN।” इसके माध्यम से संयुक्त राष्ट्र की वास्तविक स्थिति को एक ऐसे किरदार से जोड़ने की कोशिश की गई है, जिसके पास अपने हाथ नहीं हैं और जो परिस्थितियों के सामने असहाय नजर आता है।

    ईरान ने यह मीम ऐसे समय में साझा किया है, जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा है। इसी दौरान वैश्विक स्तर पर कई गंभीर संघर्ष और कूटनीतिक तनाव चर्चा में हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव के दौरान संयुक्त राष्ट्र की ओर से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की अपील की जाती रही है।

    मीम के जरिए ईरानी पक्ष का संकेत यह है कि जब बड़े और शक्तिशाली देश सीधे संघर्ष में शामिल होते हैं, तब संयुक्त राष्ट्र के पास उन्हें रोकने की सीमित क्षमता रह जाती है। इसी विचार को समझाने के लिए फिल्म शोले के ठाकुर के किरदार का इस्तेमाल किया गया है। एक तस्वीर में कई हाथों वाले डॉक्टर स्ट्रेंज के जरिए संगठन की कागजी ताकत दिखाई गई है, जबकि दूसरी तस्वीर में हाथ कटे ठाकुर के जरिए उसकी कथित वास्तविक बेबसी को दर्शाने का प्रयास किया गया है।

    ईरान की इस तरह की सोशल मीडिया गतिविधियों को मीम डिप्लोमेसी के तौर पर भी देखा जाता है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कूटनीतिक बयानों के बजाय लोकप्रिय तस्वीरों, हास्य और इंटरनेट संस्कृति के माध्यम से राजनीतिक संदेश को लोगों तक पहुंचाना होता है। इस बार भारतीय फिल्म के चर्चित किरदार को शामिल किए जाने के कारण यह मीम खास तौर पर चर्चा में आया है।

  • MP में IPS अफसरों की नई जमावट की तैयारी, प्रमोशन के बाद होंगे बदलाव, भोपाल-इंदौर DCP पर नजर

    MP में IPS अफसरों की नई जमावट की तैयारी, प्रमोशन के बाद होंगे बदलाव, भोपाल-इंदौर DCP पर नजर


    भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस में सितंबर के बड़े फेरबदल के बाद एक बार फिर नई पोस्टिंग को लेकर हलचल तेज होने की चर्चा है। पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक संभावित बदलाव को लेकर अलग अलग स्तर पर कयास लगाए जा रहे हैं। 13 सितंबर को गृह विभाग ने 137 पुलिस अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया था। इसमें 10 IPS और 127 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी शामिल थे। अब एक बार फिर करीब 15 जिलों में SP स्तर पर बदलाव की संभावना की चर्चा सामने आ रही है। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर पुलिस कमिश्नरेट में DCP स्तर की जिम्मेदारियों पर भी नजर बनी हुई है। हालांकि इन सभी संभावित बदलावों की अंतिम तस्वीर गृह विभाग के आधिकारिक आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

    नई पोस्टिंग की चर्चा के पीछे कई प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं। IPS अधिकारियों के प्रमोशन के बाद कुछ मौजूदा पद खाली हो सकते हैं। ऐसे में उन रिक्तियों को भरने के लिए नई पदस्थापनाओं की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से इस संभावित सूची को केवल सामान्य तबादला प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा है बल्कि प्रमोशन के बाद बनने वाले नए प्रशासनिक समीकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

    जिला पुलिस अधीक्षक स्तर पर जबलपुर निवाड़ी सीधी ग्वालियर रतलाम छिंदवाड़ा और सागर जैसे जिलों को लेकर बदलाव की चर्चा है। हालांकि अभी किसी अधिकारी का नाम या पदस्थापना तय नहीं मानी जा सकती। सरकारी आदेश जारी होने तक संभावित नाम और जिलों को लेकर सामने आ रही जानकारी को सिर्फ चर्चा के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।

    संभावित फेरबदल का असर केवल जिलों तक सीमित रहने की बात नहीं है। ग्वालियर और जबलपुर रेंज की वरिष्ठ कमान में भी बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा है। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय बटालियन और रेडियो जैसे महत्वपूर्ण विभागों में तैनात अधिकारियों को लेकर भी नई जिम्मेदारियों के विकल्प सामने आ सकते हैं। यदि फील्ड और मुख्यालय स्तर पर एक साथ बदलाव होता है तो पुलिस महकमे में कई स्तरों पर नई प्रशासनिक जमावट देखने को मिल सकती है।

    भोपाल और इंदौर पर इसलिए भी विशेष नजर है क्योंकि दोनों शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू है और DCP स्तर के पद फील्ड पुलिसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रिक्त पदों या प्रमोशन के कारण बनने वाली नई जगहों पर किन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाती है यह आने वाले आदेशों से साफ हो सकता है। फिलहाल इन पदों को लेकर भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


    इस संभावित फेरबदल में कुछ अपेक्षाकृत जूनियर IPS अधिकारियों को फील्ड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना की चर्चा भी है। यदि ऐसा होता है तो जिलों और कमिश्नरेट में नई पीढ़ी के अधिकारियों को कमांड की जिम्मेदारी मिल सकती है। दूसरी ओर प्रमोशन के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की नई भूमिका तय होने से कई मौजूदा पदों पर बदलाव की जरूरत भी बन सकती है।

    इस बीच पुलिस महकाने में DGP पद से जुड़ा भविष्य का समीकरण भी महत्वपूर्ण रहेगा। मौजूदा DGP कैलाश मकवाना का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक बताया गया है। इसलिए आने वाले महीनों में होने वाली वरिष्ठ IPS अधिकारियों की पदस्थापनाओं को केवल तत्काल जिला स्तर के बदलाव के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। शीर्ष पुलिस नेतृत्व से जुड़ी आगामी प्रक्रिया का असर भी प्रशासनिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सितंबर में 137 अधिकारियों की पोस्टिंग के कुछ ही समय बाद नई सूची की चर्चा क्यों शुरू हुई है। इसके पीछे प्रमोशन रिक्त पद और प्रशासनिक जरूरत जैसे सामान्य कारण हो सकते हैं। बार बार तबादला होना अपने आप में किसी प्रशासनिक निष्कर्ष का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अब निगाह गृह विभाग के अगले आदेश पर है। आदेश सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बदलाव कितने जिलों तक सीमित रहता है और क्या इसका असर SP से लेकर IG और DCP स्तर तक दिखाई देता है।