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  • Bihar के सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन के इंजन में लगी आग…. मची भगदड़

    Bihar के सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन के इंजन में लगी आग…. मची भगदड़


    सहरसा।
    बिहार (Bihar) के सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन (Simri Bakhtiyarpur Station) पर सोमवार तड़के बड़ा रेल हादसा टल गया। समस्तीपुर से सहरसा जा रही पैसेंजर ट्रेन (Passenger Train) (संख्या 63344) के इंजन (Engine) और उससे सटी एक बोगी में अचानक आग (Massive Fire) लग गई। घटना सुबह करीब 3 बजे की है। अंधेरे में ट्रेन से उठती लपटों और धुएं को देखकर स्टेशन परिसर में हड़कंप मच गया और यात्रियों के बीच अफरातफरी फैल गई।

    जानकारी के अनुसार, ट्रेन जैसे ही सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पहुंची, उसके इंजन से धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और लपटें पास की एक बोगी तक पहुंच गईं। उस समय अधिकांश यात्री नींद में थे। आग और धुएं का पता चलते ही बोगी में चीख-पुकार मच गई और यात्री जान बचाने के लिए बाहर निकलने लगे। स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों की मुस्तैदी से सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    सूचना मिलते ही आरपीएफ, स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने में दमकल कर्मियों को करीब ढाई घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी। सुबह लगभग 5:30 बजे आग पूरी तरह बुझा दी गई। इसके बाद सुबह 6 बजे के बाद रेल यातायात सामान्य हो सका।

    सिमरी बख्तियारपुर के स्टेशन अधीक्षक संजय कुमार सज्जन ने बताया कि घटना के कारण रेल परिचालन प्रभावित हुआ। इसके चलते कोसी एक्सप्रेस (सहरसा–पटना), जानकी एक्सप्रेस (मनिहारी–जयनगर), सहरसा–समस्तीपुर पैसेंजर और श्रावणी स्पेशल (सहरसा–देवघर) निर्धारित समय से देरी से चलीं। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी करते रहे। रेलवे ने घटना के वास्तविक कारणों की जांच शुरू कर दी है।

  • आम सिर्फ स्वाद ही नहीं, त्वचा की देखभाल में भी हो सकता है उपयोगी, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल

    आम सिर्फ स्वाद ही नहीं, त्वचा की देखभाल में भी हो सकता है उपयोगी, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल

    नई दिल्ली ।आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी लोकप्रियता केवल स्वाद तक सीमित नहीं है। पोषक तत्वों से भरपूर यह फल शरीर के साथ-साथ त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट त्वचा की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि कई लोग इसे अपने दैनिक आहार के साथ-साथ प्राकृतिक स्किनकेयर रूटीन का भी हिस्सा बनाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार आम में पर्याप्त मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है, जो शरीर में कोलेजन बनने की प्रक्रिया को समर्थन देता है। कोलेजन त्वचा को मजबूती, लचीलापन और स्वस्थ बनावट बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कोलेजन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे त्वचा पर महीन रेखाएं और ढीलापन दिखाई देने लगता है। ऐसे में विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं।

    आम में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन-ए में परिवर्तित हो सकता है। यह पोषक तत्व त्वचा की नई कोशिकाओं के निर्माण और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत की प्रक्रिया में मदद करता है। नियमित और संतुलित मात्रा में आम का सेवन त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में योगदान दे सकता है। विशेष रूप से रूखी और बेजान त्वचा वाले लोगों के लिए यह पोषण का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत माना जाता है।

    इस फल में विटामिन-ई भी पाया जाता है, जो त्वचा की नमी बनाए रखने में सहायक माना जाता है। यह त्वचा की बाहरी परत को पोषण देकर उसे मुलायम और कोमल बनाए रखने में मदद कर सकता है। जिन लोगों की त्वचा जल्दी रूखी हो जाती है, उनके लिए विटामिन-ई युक्त खाद्य पदार्थ लाभदायक माने जाते हैं। इसके अलावा आम में मौजूद कॉपर, पॉलीफेनोल्स और अन्य एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। फ्री रेडिकल्स को समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेतों का एक प्रमुख कारण माना जाता है।

    आम का उपयोग केवल भोजन के रूप में ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक स्किनकेयर में भी किया जाता है। इसके गूदे को दही या शहद के साथ मिलाकर फेस पैक तैयार किया जाता है, जिसे त्वचा को नमी और ताजगी देने के लिए उपयोग किया जाता है। वहीं, आम के गूदे में ओट्स जैसी प्राकृतिक सामग्री मिलाकर हल्का स्क्रब भी बनाया जाता है, जो त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने और त्वचा को साफ महसूस कराने में मदद कर सकता है।

    आम की गुठली से प्राप्त मैंगो बटर भी त्वचा की देखभाल में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें मौजूद फैटी एसिड त्वचा को गहराई से नमी प्रदान करने में सहायक होते हैं। इसी वजह से मैंगो बटर का उपयोग कई मॉइस्चराइजर, बॉडी लोशन और अन्य त्वचा देखभाल उत्पादों में किया जाता है। यह त्वचा को मुलायम बनाए रखने और उसकी प्राकृतिक नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि आम का सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है और अत्यधिक सेवन कुछ लोगों में त्वचा पर तेलीयपन या मुंहासों की समस्या बढ़ा सकता है। जिन लोगों की त्वचा पहले से ऑयली है या जिन्हें एक्ने की समस्या रहती है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा कुछ लोगों को आम के रस, गूदे या छिलके से एलर्जी भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार के प्रयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित माना जाता है।

  • बारिश में ऑयली स्किन से बढ़ सकती हैं त्वचा की समस्याएं, सही फेस वॉश का चुनाव बन सकता है असरदार उपाय

    बारिश में ऑयली स्किन से बढ़ सकती हैं त्वचा की समस्याएं, सही फेस वॉश का चुनाव बन सकता है असरदार उपाय

    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन बढ़ी हुई नमी और उमस त्वचा से जुड़ी कई परेशानियों को भी बढ़ा सकती है। विशेष रूप से ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वाले लोगों को इस मौसम में अतिरिक्त सीबम, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण चेहरे पर चिपचिपाहट महसूस होती है। यदि त्वचा की नियमित सफाई पर ध्यान न दिया जाए, तो मुंहासे, ब्लैकहेड्स, खुले रोमछिद्र और त्वचा की चमक कम होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में त्वचा के प्रकार के अनुसार सही फेस वॉश का चयन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान ऐसा फेस वॉश चुनना चाहिए जो त्वचा की गहराई से सफाई करे, अतिरिक्त तेल को नियंत्रित रखे और साथ ही त्वचा की प्राकृतिक नमी को भी बनाए रखे। अत्यधिक कठोर उत्पादों का इस्तेमाल करने से त्वचा रूखी हो सकती है, जबकि हल्के और संतुलित फॉर्मूले वाले फेस वॉश त्वचा को साफ रखने के साथ उसे ताजगी भी प्रदान करते हैं।

    ऑयली और मुंहासों की समस्या से परेशान लोगों के लिए सैलिसिलिक एसिड युक्त फेस वॉश उपयोगी विकल्प माना जाता है। यह रोमछिद्रों के भीतर जमा अतिरिक्त तेल और गंदगी को साफ करने में मदद करता है तथा ब्लैकहेड्स और पिंपल्स बनने की संभावना को कम करने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञ इसकी सलाह त्वचा की आवश्यकता के अनुसार दिन में एक या दो बार तक उपयोग करने की देते हैं।

    नीम और टी ट्री ऑयल वाले फेस वॉश भी मानसून में काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। इन प्राकृतिक तत्वों में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने और मुंहासों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन वाले लोगों के लिए यह संयोजन लाभदायक माना जाता है।

    यदि त्वचा पर धूल, प्रदूषण और अतिरिक्त तेल अधिक जमा होता है, तो एक्टिवेटेड चारकोल युक्त फेस वॉश भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह त्वचा की गहराई से सफाई करने में मदद करता है और चेहरे को ताजगी का एहसास देता है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसका अत्यधिक उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि बार-बार इस्तेमाल करने से कुछ लोगों की त्वचा रूखी महसूस हो सकती है।

    जेल बेस्ड फेस वॉश भी मानसून के मौसम में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। इनमें एलोवेरा, खीरा या हायल्यूरोनिक एसिड जैसे तत्व शामिल हो सकते हैं, जो त्वचा को बिना अधिक रूखा किए साफ करने में मदद करते हैं। यह फेस वॉश अतिरिक्त तेल हटाने के साथ त्वचा की हल्की नमी बनाए रखते हैं, जिससे चेहरा लंबे समय तक फ्रेश महसूस होता है। ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वाले लोगों के लिए इन्हें उपयुक्त माना जाता है।

    विटामिन सी युक्त फेस वॉश भी त्वचा की देखभाल में उपयोगी माने जाते हैं। यह चेहरे की डलनेस कम करने, त्वचा को ताजगी देने और पर्यावरणीय प्रभावों से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक हो सकते हैं। नियमित स्किनकेयर रूटीन के साथ इनका उपयोग त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फेस वॉश बदलना ही पर्याप्त नहीं है। मानसून में दिन में दो बार चेहरे की सफाई करना, पर्याप्त पानी पीना, हल्का मॉइश्चराइजर लगाना और त्वचा के अनुसार उपयुक्त स्किनकेयर उत्पादों का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या अपनाकर बारिश के मौसम में भी त्वचा को साफ, ताजा और स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।

  • ट्रंप के बयान से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर से नीचे

    ट्रंप के बयान से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर से नीचे


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ट्रंप ने संकेत दिए कि वह अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले रोकने का निर्देश देंगे और मध्य पूर्व में संघर्ष समाप्त करने की दिशा में समझौता करीब है। इसके बाद वैश्विक तेल बाजार में राहत देखने को मिली।

    ब्रेंट और अमेरिकी क्रूड दोनों सस्ते
    रविवार रात कारोबार के दौरान अमेरिकी WTI क्रूड करीब 5 प्रतिशत गिरकर 80.79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड भी लगभग 5 प्रतिशत लुढ़ककर 83.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 84 डॉलर के स्तर से नीचे है। हालांकि, मौजूदा कीमतें अब भी संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक बनी हुई हैं।

    संघर्ष से बाजार में बना रहा उतार-चढ़ाव
    फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से तेल बाजार में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। इस दौरान कई बार कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी पहुंच गई थीं।

    संघर्ष थमने से सप्लाई सुधरने की उम्मीद
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव कम होता है, तो फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति सामान्य हो सकेगी। पिछले कई महीनों से संघर्ष के कारण तेल और अन्य सामान लेकर चलने वाले कई टैंकर प्रभावित हुए थे, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना रहा।

    महंगाई पर भी पड़ा था असर
    तेल की ऊंची कीमतों का असर दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (ATF) की लागत पर पड़ा। कई देशों में ईंधन महंगा होने से परिवहन खर्च बढ़ा, हवाई किराए महंगे हुए और कुछ जगहों पर ईंधन की कमी के चलते राशनिंग जैसी व्यवस्था भी लागू करनी पड़ी।

    तेल कंपनियों को मिला फायदा
    ऊंची कीमतों के दौर में तेल और गैस कंपनियों को अच्छा मुनाफा हुआ। सप्लाई बाधित होने और परिवहन लागत बढ़ने से ईंधन की कीमतों में तेजी आई, जिसका लाभ ऊर्जा कंपनियों को मिला।

    भारत में तुरंत नहीं घटते पेट्रोल-डीजल के दाम
    विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने का असर भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर तुरंत नहीं दिखता। यहां ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव, रुपये-डॉलर विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत और केंद्र व राज्यों के टैक्स जैसे कई कारकों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं। इसलिए वैश्विक बाजार में आई गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

  • मोबाइल का लगातार बढ़ता इस्तेमाल बन रहा टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की वजह, समय से पहले कमजोर हो सकती है गर्दन

    मोबाइल का लगातार बढ़ता इस्तेमाल बन रहा टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की वजह, समय से पहले कमजोर हो सकती है गर्दन

    नई दिल्ली ।डिजिटल तकनीक ने लोगों की जिंदगी को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाया है, लेकिन इसके लगातार और गलत तरीके से इस्तेमाल के कारण कई नई स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इनमें टेक्स्ट नेक सिंड्रोम तेजी से बढ़ने वाली ऐसी समस्या है, जो लंबे समय तक मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की स्क्रीन पर झुककर देखने की आदत से जुड़ी मानी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सही सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है।

    टेक्स्ट नेक सिंड्रोम मुख्य रूप से गर्दन और सर्वाइकल स्पाइन से संबंधित समस्या है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक सिर को आगे झुकाकर मोबाइल या अन्य डिजिटल स्क्रीन देखता है, तो गर्दन की मांसपेशियों और रीढ़ पर सामान्य से कई गुना अधिक दबाव पड़ने लगता है। सामान्य स्थिति में सिर का भार सीमित रहता है, लेकिन जैसे-जैसे सिर आगे की ओर झुकता है, गर्दन को अधिक वजन संभालना पड़ता है। यही अतिरिक्त दबाव धीरे-धीरे मांसपेशियों में थकान, दर्द और संरचनात्मक बदलाव का कारण बन सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार मोबाइल देखने की आदत गर्दन की मांसपेशियों को तनावग्रस्त बनाए रखती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और रीढ़ की प्राकृतिक बनावट भी प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि इसे डिजिटल युग से जुड़ी ऐसी समस्या माना जा रहा है, जो समय से पहले गर्दन को कमजोर और कम लचीला बना सकती है।

    इस समस्या के कई शुरुआती संकेत दिखाई दे सकते हैं। गर्दन में लगातार दर्द या अकड़न, कंधों में जकड़न, पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, बार-बार सिरदर्द, गर्दन घुमाने में कठिनाई, मांसपेशियों में खिंचाव तथा हाथों या उंगलियों में सुन्नपन जैसे लक्षण इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं। कुछ लोगों में लंबे समय तक गलत पोश्चर बनाए रखने के कारण कंधे झुकने और गर्दन आगे की ओर निकलने जैसी शारीरिक स्थिति भी विकसित हो सकती है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक माना जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि टेक्स्ट नेक सिंड्रोम का सबसे बड़ा कारण आधुनिक जीवनशैली और स्क्रीन के सामने बिताया जाने वाला लंबा समय है। बिना ब्रेक लिए लगातार मोबाइल चलाना, लैपटॉप पर गलत मुद्रा में काम करना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना और कार्यस्थल पर उचित एर्गोनॉमिक व्यवस्था का अभाव इस समस्या के जोखिम को बढ़ा सकता है। बच्चों और युवाओं में बढ़ता स्क्रीन टाइम भी चिंता का विषय माना जा रहा है।

    इस समस्या से बचाव के लिए कुछ सरल आदतों को अपनाना प्रभावी हो सकता है। मोबाइल या टैबलेट का उपयोग करते समय स्क्रीन को आंखों के स्तर के करीब रखने का प्रयास करना चाहिए, ताकि गर्दन को बार-बार नीचे न झुकाना पड़े। बैठते समय रीढ़ को सीधा रखना और कंधों को संतुलित स्थिति में रखना भी जरूरी है। लगातार स्क्रीन देखने के बजाय नियमित अंतराल पर छोटे-छोटे ब्रेक लेना, गर्दन और ऊपरी पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग करना तथा शारीरिक गतिविधि को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना भी लाभदायक माना जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल उपकरणों का संतुलित और सही तरीके से उपयोग करने के साथ-साथ सही पोश्चर अपनाकर टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सुधारात्मक कदम उठाना लंबे समय तक गर्दन और रीढ़ के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • Gen-Z आंदोलन पर धीरेंद्र शास्त्री का संदेश, विरोध करें, लेकिन गाली-गलौज नहीं, संवाद और मर्यादा रहे

    Gen-Z आंदोलन पर धीरेंद्र शास्त्री का संदेश, विरोध करें, लेकिन गाली-गलौज नहीं, संवाद और मर्यादा रहे


    कटनी। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर एवं कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हाल में चर्चा में रहे Gen-Z आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और विरोध जताने का अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान अपशब्दों और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

    कटनी के कुठला क्षेत्र में अपने शिष्यों द्वारा निर्मित ‘बागेश्वर बालाजी’ मठ के कार्यक्रम में पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं से भारतीय संस्कृति और मर्यादा के अनुरूप संवाद करने की अपील की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में समसामयिक मुद्दों पर भी अपने विचार रखे।

    ‘विरोध हो, लेकिन मर्यादा के साथ’
    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी के परिवार या मां-बहन के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अनुरूप नहीं है। उनका कहना था कि असहमति व्यक्त करते समय भी भाषा और व्यवहार की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।

    युवाओं से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील
    उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। ऐसे में युवाओं को विवाद और कटुता के बजाय संवाद, शांति और संयम का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी बात प्रेमपूर्ण और शालीन भाषा में रखें।

    सावन और कांवड़ यात्रा पर भी दी सलाह
    धीरेंद्र शास्त्री ने सावन माह और कांवड़ यात्रा का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं से भगवान शिव की भक्ति पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए जिससे किसी की भावनाएं आहत हों या समाज में विवाद की स्थिति पैदा हो।

    संयम और संस्कार पर दिया जोर
    उन्होंने कांवड़ यात्रियों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि आचरण ऐसा होना चाहिए जिससे धर्म और समाज की गरिमा बनी रहे। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी संस्कृति, संस्कार, आपसी प्रेम और सामाजिक सद्भाव में निहित है, जिसे हर हाल में सुरक्षित रखना चाहिए।

  • सफदरजंग अस्पताल की बड़ी उपलब्धि: सीने की हड्डी काटे बिना बदला दिल का वॉल्व, बना विश्व रिकॉर्ड

    सफदरजंग अस्पताल की बड़ी उपलब्धि: सीने की हड्डी काटे बिना बदला दिल का वॉल्व, बना विश्व रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने रोबोटिक तकनीक की मदद से एक दुर्लभ और जटिल हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक कर चिकित्सा क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है। डॉक्टरों ने बिना सीने की हड्डी (स्टर्नम) काटे मरीज के खराब हृदय वाल्व को बदल दिया। अस्पताल का दावा है कि इस तरह की सर्जरी दुनिया में पहली बार इस तकनीक और प्रक्रिया से की गई है।

    दाईं ओर था मरीज का दिल
    मरीज जन्म से एक दुर्लभ हृदय विकार से पीड़ित था। उसका दिल सामान्य स्थिति के विपरीत सीने के दाईं ओर था। साथ ही, हृदय की प्रमुख धमनियां भी अपनी सामान्य संरचना से अलग थीं। इस असामान्य बनावट के कारण हृदय का एक वाल्व गंभीर रूप से लीक कर रहा था, जिससे दिल पर लगातार अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था और मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी।

    रोबोटिक तकनीक से हुई जटिल सर्जरी
    डॉ. अनुभव गुप्ता और उनकी टीम ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को अंजाम दिया। पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी की तरह सीने की हड्डी काटने के बजाय डॉक्टरों ने सीने में छोटे-छोटे चीरे लगाए। इसके बाद रोबोटिक आर्म्स और हाई-रिजॉल्यूशन 3D कैमरे की सहायता से खराब वाल्व को बदल दिया गया। ऑपरेशन से पहले डॉक्टरों ने मरीज के हृदय का 3D मॉडल तैयार किया, जिससे दिल की असामान्य संरचना को समझने और सर्जरी की सटीक योजना बनाने में मदद मिली।

    अस्पताल का विश्व रिकॉर्ड का दावा
    सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, इस तरह की दुर्लभ हृदय संरचना वाले मरीज में बाईं ओर से रोबोटिक तकनीक के जरिए वाल्व रिप्लेसमेंट करने का यह दुनिया का पहला मामला है। अस्पताल ने इसे चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

    रोबोटिक सर्जरी के फायदे
    डॉक्टरों के मुताबिक, इस तकनीक से ऑपरेशन के दौरान खून की कमी बहुत कम होती है। संक्रमण का खतरा घट जाता है, मरीज को कम दर्द होता है और वह अपेक्षाकृत कम समय में स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा सकता है।

    सरकारी अस्पताल के लिए बड़ी उपलब्धि
    अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा ने कहा कि यह सफलता सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है। उनके अनुसार, अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक के माध्यम से अब सरकारी अस्पतालों में भी जटिल से जटिल हृदय रोगों का प्रभावी उपचार संभव हो रहा है।

  • LIVE बुलेटिन में एंकर को आई झपकी, ट्रोल करने के बजाय सोशल मीडिया लोगों ने दिखाई संवेदनशीलता

    LIVE बुलेटिन में एंकर को आई झपकी, ट्रोल करने के बजाय सोशल मीडिया लोगों ने दिखाई संवेदनशीलता


    नई दिल्ली। लाइव न्यूज बुलेटिन के दौरान कुछ सेकंड के लिए ऊंघती नजर आईं एक न्यूज एंकर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, इस बार इंटरनेट पर ट्रोलिंग के बजाय लोगों ने एंकर के प्रति सहानुभूति दिखाई और उनके समर्थन में खुलकर सामने आए।

    कौन हैं एंकर?
    वायरल वीडियो अमेरिका के मेम्फिस स्थित FOX13 न्यूज चैनल का बताया जा रहा है। इसमें न्यूज एंकर डोमिनिक डिलन लाइव बुलेटिन पढ़ते समय कुछ पल के लिए आंखें बंद करती नजर आती हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें हल्की झपकी आ गई। यह दृश्य कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।

    सामने आई थकान की वजह
    वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने इसकी वजह जानने की कोशिश की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोमिनिक डिलन हाल ही में मैटरनिटी लीव के बाद काम पर लौटी हैं। वह दो छोटे बच्चों की मां हैं और बच्चों की देखभाल, नींद की कमी तथा काम की जिम्मेदारियों के कारण काफी थकी हुई थीं। यही वजह रही कि लाइव प्रसारण के दौरान उन्हें कुछ क्षणों के लिए झपकी आ गई।

    ट्रोलिंग नहीं, मिला समर्थन
    आमतौर पर ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर मजाक और मीम्स का कारण बनते हैं, लेकिन इस बार यूजर्स ने अलग रुख अपनाया। बड़ी संख्या में लोगों ने कहा कि कैमरे के सामने काम करने वाला व्यक्ति भी इंसान होता है और थकान किसी को भी महसूस हो सकती है। इसलिए किसी की एक छोटी-सी गलती के आधार पर उसे जज नहीं किया जाना चाहिए।

    भावुक कर देने वाले कमेंट
    सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने एंकर के समर्थन में संदेश लिखे। किसी ने लिखा, “उन्हें जज मत कीजिए, उनका साथ दीजिए।” वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि “वर्किंग पैरेंट्स के लिए नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता।”

    एंकर ने भी दिया सकारात्मक जवाब
    डोमिनिक डिलन ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे सहजता से लिया और समर्थन देने वाले लोगों का आभार जताया। उनके सकारात्मक रवैये की भी सोशल मीडिया पर काफी सराहना हुई।

    संवेदनशीलता का बना उदाहरण
    यह वायरल वीडियो केवल कुछ सेकंड की झपकी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने कामकाजी माता-पिता, विशेषकर छोटे बच्चों की परवरिश कर रही महिलाओं की चुनौतियों पर भी चर्चा छेड़ दी। कई लोगों का कहना है कि किसी की परिस्थितियों को समझे बिना उस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे अपनी चुनौतियां हो सकती हैं। ऐसे में आलोचना के बजाय संवेदनशीलता और सहयोग का भाव अधिक महत्वपूर्ण है।

  • 19 अगस्त से बदलेगी इन 4 राशियों की किस्मत! बुध के नक्षत्र में होगा गुरु का प्रवेश

    19 अगस्त से बदलेगी इन 4 राशियों की किस्मत! बुध के नक्षत्र में होगा गुरु का प्रवेश


    नई दिल्ली। अगस्त का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान कई प्रमुख ग्रहों की चाल बदलने वाली है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 19 अगस्त को देवगुरु बृहस्पति (गुरु) बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यह परिवर्तन कुछ राशियों के लिए करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है।

    क्यों खास है गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश?
    ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, संवाद, व्यापार और तर्क का कारक माना जाता है, जबकि गुरु ज्ञान, भाग्य, समृद्धि और विस्तार के प्रतीक हैं। गुरु के बुध के नक्षत्र में प्रवेश से निर्णय क्षमता मजबूत होने, नए अवसर मिलने, व्यापार में वृद्धि और रिश्तों में बेहतर तालमेल बनने की संभावना मानी जाती है।

    मिथुन राशि
    19 अगस्त के बाद मिथुन राशि के जातकों के रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिलने और व्यापार में नई डील मिलने के योग बन सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर भी मिल सकता है।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के लोगों के लिए यह गोचर लाभकारी माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। नई नौकरी के अवसर बनने, व्यापार के विस्तार और नए संबंध स्थापित होने के संकेत हैं, जिससे पारिवारिक माहौल भी सकारात्मक रह सकता है।

    तुला राशि
    तुला राशि के जातकों के लिए यह समय राहत देने वाला माना गया है। आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं। नया काम शुरू करने के लिए अनुकूल समय रहेगा। परिवार का सहयोग मिलेगा और आत्मविश्वास के साथ मानसिक शांति में भी वृद्धि हो सकती है।

    मकर राशि
    मकर राशि के लिए गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन शुभ फलदायी माना जा रहा है। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। व्यापार में लाभ, रुका हुआ धन वापस मिलने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता में सुधार के संकेत मिल सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार करें ये उपाय
    – भगवान विष्णु की पूजा करें।
    – पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
    – पीली दाल, हल्दी और केले का दान करें।
    – ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का नियमित जाप करें।
    – गाय को हरा चारा खिलाएं।
    – वाणी में मधुरता रखें और किसी की भावनाओं को आहत करने से बचें।

  • रांची में 'जंतर-मंतर' जैसा आंदोलन: JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप पर छात्रों का उग्र प्रदर्शन

    रांची में 'जंतर-मंतर' जैसा आंदोलन: JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप पर छात्रों का उग्र प्रदर्शन


    रांची। झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जयपाल सिंह स्टेडियम में चल रहा धरना अब राष्ट्रीय स्तर के आंदोलनों जैसी तस्वीर पेश कर रहा है। छात्र दिन-रात प्रदर्शन कर रहे हैं और एक छात्र नेता आमरण अनशन पर बैठ चुके हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि बेरोजगारी ने उनकी नींद पहले ही छीन ली है, अब वे सरकार को जगाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    बारिश और रातभर प्रदर्शन के बीच कायम रहा आंदोलन
    जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्र लगातार धरना दे रहे हैं। बारिश और खराब मौसम के बावजूद प्रदर्शन जारी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन नहीं रुकेगा। आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मांग की है कि 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

    क्या हैं छात्रों के आरोप?
    प्रदर्शन का मुख्य कारण 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम है। छात्रों का आरोप है कि कटऑफ तय करने में गंभीर अनियमितताएं हुईं। मेरिट सूची पर जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं थे। OMR शीट में हेरफेर की आशंका है। परीक्षा आयोजित करने वाली TDPL कंपनी को परीक्षा से पहले राज्य में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, फिर भी उसे जिम्मेदारी दी गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि केवल राज्य स्तर की जांच पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की CBI से जांच कराई जानी चाहिए।

    OMR में नए विकल्प की भी मांग
    छात्र भविष्य में विवाद रोकने के लिए OMR शीट में ‘Not Attempted’ (प्रश्न नहीं किया) का अलग विकल्प जोड़ने की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ की संभावना कम होगी और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

    आंदोलन पर सियासत भी तेज
    छात्रों के प्रदर्शन के बीच झारखंड की राजनीति भी गर्मा गई है। सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने सरकार के रुख का समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग उठाई है। विपक्ष का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामले में निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

    छात्रों को मिला CJP का समर्थन
    भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ चल रहे आंदोलन को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिला है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आंदोलनरत छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों का समर्थन किया। वहीं, पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी सोशल मीडिया के जरिए छात्रों के साथ खड़े रहने की बात कही।

    मशाल मार्च से बढ़ा दबाव
    करीब एक सप्ताह से जारी सत्याग्रह के बीच छात्रों ने रविवार को मशाल मार्च भी निकाला। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने हाथों में जलती मशालें लेकर विरोध प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि जब तक पूरे मामले की CBI जांच का निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।