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  • इंदौर में दर्दनाक हादसा, दोस्तों का इंतजार कर रही युवती को अज्ञात कार ने रौंदा, अस्पताल में तोड़ा दम

    इंदौर में दर्दनाक हादसा, दोस्तों का इंतजार कर रही युवती को अज्ञात कार ने रौंदा, अस्पताल में तोड़ा दम


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शनिवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक युवती की जिंदगी छीन ली। तेजाजी नगर थाना क्षेत्र के बायपास स्थित अंडरपास के पास दोस्तों का इंतजार कर रही 29 वर्षीय युवती को तेज रफ्तार अज्ञात कार ने टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल युवती को उसके दोस्त अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन कई घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर अज्ञात वाहन और चालक की तलाश शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान महालक्ष्मी नगर निवासी 29 वर्षीय साहिबा पिता मोहम्मद अफसर के रूप में हुई है। मूल रूप से भोपाल की रहने वाली साहिबा पिछले करीब दो वर्षों से इंदौर में रहकर इवेंट मैनेजमेंट से जुड़ा काम कर रही थीं। हादसा शनिवार रात करीब 11 बजे उस समय हुआ, जब वह अपने दोस्तों के साथ भोजन करने के लिए निर्धारित स्थान पर पहुंचने की कोशिश कर रही थीं।

    जानकारी के मुताबिक साहिबा को ढाबे का सही रास्ता नहीं मिल रहा था। उन्होंने अपने दोस्त अंकुर को फोन कर लोकेशन नहीं मिलने की जानकारी दी। इस पर अंकुर ने उन्हें तेजाजी नगर अंडरपास के पास रुकने के लिए कहा और बताया कि वह कुछ ही देर में उन्हें लेने पहुंच रहा है। साहिबा अपनी एक्टिवा लेकर वहीं इंतजार करने लगीं, लेकिन इससे पहले कि उनके दोस्त वहां पहुंचते, एक तेज रफ्तार अज्ञात कार ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी।

    हादसे के बाद साहिबा गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गईं। कुछ देर बाद जब अंकुर ने उन्हें दोबारा फोन किया तो किसी राहगीर ने कॉल रिसीव कर बताया कि उनका एक्सीडेंट हो गया है। सूचना मिलते ही अंकुर और उसका साथी सहज मौके पर पहुंचे और पहले घायल युवती को गौरव अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया।

    एमवाय अस्पताल में चिकित्सकों ने पूरी कोशिश की, लेकिन अत्यधिक चोटों के कारण रविवार तड़के करीब तीन बजे साहिबा ने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद दोनों दोस्त अस्पताल में मौजूद रहे, लेकिन मौत की पुष्टि होने के बाद वे शव छोड़कर चले गए। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    घटना की सूचना मृतका के परिजनों को भी दी गई। बताया जा रहा है कि साहिबा ने हादसे से पहले अपने भाई से भी संपर्क किया था। हालांकि, जानकारी मिलने के बावजूद परिजन रातभर इंदौर नहीं पहुंचे। पुलिस के अनुसार मृतका के भाई ने प्रारंभिक बातचीत में हादसे को लेकर कुछ सवाल उठाए हैं और दोस्तों पर भी संदेह जताया है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से साहिबा का अपने परिवार से नियमित संपर्क नहीं था।

    तेजाजी नगर थाना पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि हादसे के जिम्मेदार वाहन और चालक की पहचान की जा सके। प्रारंभिक जांच में मामला हिट एंड रन का माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग के कारण सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • 3 से 9 अगस्त के बीच केवल दो दिन बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले छुट्टियों की सूची जरूर देखें

    3 से 9 अगस्त के बीच केवल दो दिन बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले छुट्टियों की सूची जरूर देखें

    नई दिल्ली । अगस्त के पहले पूर्ण सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए बैंक अवकाश की जानकारी पहले से जानना महत्वपूर्ण है। 3 अगस्त से 9 अगस्त 2026 के बीच अधिकांश राज्यों में बैंक सामान्य कार्य दिवसों पर खुले रहेंगे, जबकि सप्ताहांत में निर्धारित अवकाश के कारण दो दिन शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। ऐसे में जिन लोगों को बैंक शाखा में जाकर जरूरी कार्य पूरे करने हैं, उन्हें पहले से अपनी योजना बना लेनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    भारतीय रिजर्व बैंक प्रत्येक महीने विभिन्न राज्यों के लिए बैंक अवकाश का कैलेंडर जारी करता है। इस सूची में राष्ट्रीय अवकाश, क्षेत्रीय त्योहारों से जुड़े अवकाश और साप्ताहिक छुट्टियां शामिल रहती हैं। चूंकि अलग-अलग राज्यों में स्थानीय पर्व और विशेष अवसर अलग हो सकते हैं, इसलिए कुछ स्थानों पर अतिरिक्त अवकाश भी घोषित किए जा सकते हैं। हालांकि 3 अगस्त से 9 अगस्त के बीच सामान्य परिस्थितियों में अधिकांश राज्यों में बैंक सोमवार से शुक्रवार तक नियमित रूप से संचालित होंगे।

    इस सप्ताह के दौरान 3 अगस्त सोमवार, 4 अगस्त मंगलवार, 5 अगस्त बुधवार, 6 अगस्त गुरुवार और 7 अगस्त शुक्रवार को बैंक शाखाएं सामान्य समय के अनुसार खुली रहेंगी। इन दिनों ग्राहक नकद जमा, निकासी, चेक जमा, डिमांड ड्राफ्ट, पासबुक अपडेट, ऋण संबंधी कार्य, खाता खुलवाने तथा अन्य बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। यदि किसी राज्य में स्थानीय अवकाश घोषित नहीं है तो इन दिनों सभी नियमित बैंकिंग गतिविधियां जारी रहेंगी।

    सप्ताह के अंत में 8 अगस्त को महीने का दूसरा शनिवार होने के कारण देशभर में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। इसके अगले दिन 9 अगस्त रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा, जिसके चलते बैंक शाखाओं में कोई नियमित कार्य नहीं होगा। इस प्रकार 3 अगस्त से 9 अगस्त के बीच सामान्य रूप से बैंक केवल दो दिन बंद रहेंगे। हालांकि कुछ राज्यों में स्थानीय त्योहार या विशेष सरकारी अवकाश घोषित होने पर संबंधित क्षेत्रों में अतिरिक्त छुट्टी लागू हो सकती है।

    बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को आवश्यक डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं का लाभ मिलता रहेगा। मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, एटीएम से नकद निकासी, आईएमपीएस, एनईएफटी तथा अन्य ऑनलाइन लेनदेन सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी। इससे ग्राहक बिना बैंक शाखा पहुंचे भी अधिकांश वित्तीय कार्य आसानी से कर सकेंगे। हालांकि चेक क्लियरेंस, शाखा में नकद जमा, केवाईसी अपडेट, दस्तावेज सत्यापन तथा कुछ विशेष बैंकिंग प्रक्रियाएं केवल कार्य दिवसों में ही पूरी की जा सकेंगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जिन ग्राहकों को बड़े वित्तीय लेनदेन, ऋण संबंधी दस्तावेज जमा करने, चेक क्लियर कराने या अन्य महत्वपूर्ण शाखा आधारित कार्य करने हैं, उन्हें अवकाश से पहले ही यह प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए। इससे छुट्टियों के दौरान किसी प्रकार की देरी या असुविधा से बचा जा सकता है। साथ ही बैंक जाने से पहले संबंधित बैंक की आधिकारिक अवकाश सूची की जांच करना भी उपयोगी रहेगा, क्योंकि विभिन्न राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अवकाश अलग-अलग हो सकते हैं। समय रहते योजना बनाकर ग्राहक अपनी बैंकिंग जरूरतों को बिना किसी परेशानी के पूरा कर सकते हैं।

  • AI और अनिश्चितता के दौर में मानसिक स्पष्टता बनेगी प्रभावी नेतृत्व की पहचान, सावन में शिव के प्रतीकों से मिलते हैं प्रबंधन के सूत्र

    AI और अनिश्चितता के दौर में मानसिक स्पष्टता बनेगी प्रभावी नेतृत्व की पहचान, सावन में शिव के प्रतीकों से मिलते हैं प्रबंधन के सूत्र

    नई दिल्ली । कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते प्रभाव, लगातार बदलते कारोबारी वातावरण और सूचनाओं की अत्यधिक उपलब्धता के बीच नेतृत्व की परिभाषा भी तेजी से बदल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में केवल अधिक जानकारी या उच्च बौद्धिक क्षमता ही किसी व्यक्ति को सफल नेता नहीं बनाती, बल्कि मानसिक स्पष्टता, संतुलित सोच और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता उसकी सबसे बड़ी ताकत बनती जा रही है। सावन के अवसर पर भगवान शिव के विभिन्न प्रतीकों को इसी दृष्टि से आधुनिक नेतृत्व और प्रबंधन से जोड़कर देखा जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सावन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का महीना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और मानसिक अनुशासन का भी समय है। तेज़ी से बदलती तकनीक और एआई आधारित कार्यप्रणाली के बीच निर्णय लेने वाले पदों पर बैठे लोगों के सामने हर दिन नई चुनौतियां आती हैं। ऐसे में मन को स्थिर रखना और परिस्थितियों का शांत होकर विश्लेषण करना प्रभावी नेतृत्व का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

    भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप को तनाव और दबाव प्रबंधन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन से निकले विष को शिव ने अपने कंठ में धारण किया, लेकिन उसे स्वयं पर हावी नहीं होने दिया। इसी संदेश को आधुनिक कार्यस्थल में इस रूप में देखा जाता है कि एक सक्षम नेता कठिन परिस्थितियों में घबराहट या तनाव को पूरी टीम पर हावी नहीं होने देता, बल्कि शांत रहकर समाधान की दिशा में कार्य करता है।

    शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा को मन और विचारों पर नियंत्रण का प्रतीक माना जाता है। वर्तमान समय में वरिष्ठ प्रबंधकों और निर्णय लेने वाले अधिकारियों को प्रतिदिन अनेक जटिल निर्णय लेने पड़ते हैं, जिससे मानसिक थकान और निर्णय संबंधी दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में मानसिक संतुलन, एकाग्रता और भावनात्मक नियंत्रण को प्रभावी नेतृत्व की अनिवार्य विशेषता माना जाता है।

    भगवान शिव के डमरू को संवाद, समन्वय और सामूहिक लय का प्रतीक माना जाता है। किसी भी संगठन में विभिन्न विभागों के बीच स्पष्ट संवाद, साझा उद्देश्य और पारदर्शी कार्यसंस्कृति संगठन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार जब पूरी टीम एक समान दृष्टिकोण और स्पष्ट संचार के साथ कार्य करती है, तब संगठन चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।

    इसी प्रकार शिव के तीसरे नेत्र को दूरदर्शिता और गहन समझ का प्रतीक माना जाता है। आधुनिक कॉर्पोरेट जगत में डेटा और विश्लेषण निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार हैं, लेकिन केवल आंकड़ों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना जाता। अनुभव, परिस्थितियों की समझ, मानवीय व्यवहार का आकलन और भविष्य की संभावनाओं को पहचानने की क्षमता भी सफल नेतृत्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यही कारण है कि रणनीतिक निर्णयों में विश्लेषण के साथ-साथ संतुलित अंतर्दृष्टि को भी महत्व दिया जाता है।

    विशेषज्ञों ने नेतृत्व के लिए एक पांच सूत्रीय मॉडल भी प्रस्तुत किया है, जिसमें निर्णय से पहले कुछ समय का शांत चिंतन, दबाव को संतुलित तरीके से संभालना, मानसिक स्थिरता बनाए रखना, आंकड़ों के साथ दूरदर्शिता का उपयोग करना और समय के अनुसार परिवर्तन स्वीकार करना प्रमुख सिद्धांत बताए गए हैं। इन सिद्धांतों का उद्देश्य व्यक्तियों को तेजी से बदलती परिस्थितियों में अधिक प्रभावी, संतुलित और जिम्मेदार नेतृत्व के लिए तैयार करना है।

    धार्मिक और प्रबंधन संबंधी विचारों का यह समन्वय इस बात पर बल देता है कि आधुनिक तकनीक के युग में सफलता केवल जानकारी की मात्रा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उस जानकारी का विवेकपूर्ण उपयोग, मानसिक स्पष्टता और परिस्थितियों के अनुरूप संतुलित निर्णय लेने की क्षमता ही किसी भी नेता को अलग पहचान दिला सकती है। सावन का संदेश भी आत्मसंयम, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से जीवन और कार्यक्षेत्र में संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा देता है।

  • सावन में दक्षिण काली पीठ का मध्यरात्रि अनुष्ठान बना आस्था का केंद्र, गंगा स्नान और रुद्राभिषेक के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु

    सावन में दक्षिण काली पीठ का मध्यरात्रि अनुष्ठान बना आस्था का केंद्र, गंगा स्नान और रुद्राभिषेक के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु

    नई दिल्ली । सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना, तप और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी दौरान हरिद्वार स्थित दक्षिण काली पीठ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। यहां प्रतिदिन मध्यरात्रि से पहले शुरू होने वाला विशेष धार्मिक अनुष्ठान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। स्थानीय भक्तों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालु भी इस आध्यात्मिक आयोजन में शामिल होकर पूजा-अर्चना और साधना का हिस्सा बन रहे हैं।

    मंदिर परिसर में प्रतिदिन देर रात तक भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहता है। आधी रात से पहले पवित्र गंगा में स्नान करने के बाद मौन साधना और भगवान शिव के विशेष पूजन का क्रम प्रारंभ होता है। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से रुद्राभिषेक संपन्न कराया जाता है। इस संपूर्ण धार्मिक प्रक्रिया को देखने और उसमें सहभागी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहते हैं।

    धार्मिक परंपरा के अनुसार आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज प्रतिदिन निर्धारित समय पर गंगा स्नान कर मौन व्रत धारण करते हैं। इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और वैदिक विधियों के अनुसार विशेष अनुष्ठान संपन्न कराया जाता है। अनुष्ठान पूर्ण होने पर उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी प्रदान किया जाता है। मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रों और शांत वातावरण के कारण श्रद्धालु इसे आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष अवसर मानते हैं।

    सावन के दौरान दक्षिण काली पीठ में केवल हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि कई अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भक्तों का कहना है कि यहां की पूजा-पद्धति, अनुशासित व्यवस्था और आध्यात्मिक वातावरण उन्हें हर वर्ष इस सिद्धपीठ तक आने के लिए प्रेरित करता है। कई श्रद्धालु गंगा स्नान और रुद्राभिषेक में भाग लेने को अपने धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव बताते हैं।

    मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि रात्रिकालीन साधना और भगवान शिव की आराधना से उन्हें मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। कुछ श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान के दौरान नाग देवता के दर्शन होने की बात भी साझा की। हालांकि ऐसे अनुभव व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक विश्वास से जुड़े हैं, जिन्हें श्रद्धालु दिव्य अनुभूति के रूप में देखते हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से भी श्रद्धालुओं को श्रद्धा और अनुशासन के साथ पूजा में भाग लेने की सलाह दी जाती है।

    मंदिर के सेवादारों के अनुसार दक्षिण काली पीठ को एक सिद्ध धार्मिक स्थल माना जाता है, जहां सावन के महीने में विशेष धार्मिक आयोजन नियमित रूप से संपन्न होते हैं। प्रतिदिन होने वाले रुद्राभिषेक, वैदिक मंत्रोच्चार और सामूहिक आराधना से पूरे परिसर में भक्ति का वातावरण बना रहता है। यही कारण है कि हर वर्ष सावन के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखने को मिलती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। इस अवधि में रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, महामृत्युंजय जाप और मौन साधना का विशेष महत्व बताया गया है। दक्षिण काली पीठ में इन परंपराओं का नियमित पालन होने से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक आकर्षण का केंद्र बन गया है। शांत रात्रिकालीन वातावरण, गंगा स्नान और वैदिक अनुष्ठानों का समन्वय भक्तों को आध्यात्मिक साधना का विशिष्ट अनुभव प्रदान करता है।

  • गजानन संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और दिनभर का पूरा पंचांग

    गजानन संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और दिनभर का पूरा पंचांग


    नई दिल्ली ।
    आज सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गजानन संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत रखा जा रहा है। भगवान गणेश को समर्पित यह व्रत विघ्नों के नाश, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक गणपति की पूजा करने और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। श्रद्धालु सुबह से ही पूजा-अर्चना और व्रत की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

    पंचांग के अनुसार आज सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। यह तिथि 1 अगस्त की रात्रि 11 बजकर 7 मिनट पर प्रारंभ हुई थी और 2 अगस्त की रात्रि 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ होगा। आज रविवार का दिन है तथा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और अतिगंड योग का संयोग बना हुआ है। दिनभर पंचक का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए कई लोग शुभ कार्यों में पंचांग के अनुसार समय का विशेष ध्यान रखेंगे।

    आज सूर्य का उदय सुबह 5 बजकर 56 मिनट पर हुआ, जबकि सूर्यास्त शाम 7 बजकर 11 मिनट पर होगा। गजानन संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय का विशेष महत्व होता है। आज चंद्रमा का उदय रात 9 बजकर 44 मिनट पर होगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करेंगे और इसके पश्चात ही व्रत का पारण करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रदर्शन के बिना संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।

    पूजा और शुभ कार्यों के लिए आज सुबह का चौघड़िया सुबह 5 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। वहीं शाम का चौघड़िया शाम 5 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। दूसरी ओर राहुकाल शाम 5 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस अवधि में नए या मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। यमगण्ड काल दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से 2 बजकर 24 मिनट तक तथा गुलिक काल शाम 4 बजकर 5 मिनट से 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

    ग्रहों की वर्तमान स्थिति के अनुसार सूर्य और बुध कर्क राशि में, चंद्रमा तथा राहु कुंभ राशि में, मंगल वृषभ राशि में, गुरु मिथुन राशि में, शुक्र कन्या राशि में, शनि मीन राशि में और केतु सिंह राशि में विराजमान हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से इन ग्रह स्थितियों का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग रूप में देखा जाता है। हालांकि किसी भी निर्णय से पहले व्यक्तिगत कुंडली का विचार करना अधिक उचित माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गजानन संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश को 11 अथवा 21 गांठ वाली दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु मोदक, लड्डू और अन्य प्रिय नैवेद्य अर्पित कर विघ्नहर्ता से सुख, समृद्धि और सफलता की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर करने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

  • हरिद्वार से दिल्ली तक निकली अनोखी कांवड़ यात्रा, मैकलारेन जैसी डमी कार में भगवान शिव की प्रतिमा ने खींचा सबका ध्यान

    हरिद्वार से दिल्ली तक निकली अनोखी कांवड़ यात्रा, मैकलारेन जैसी डमी कार में भगवान शिव की प्रतिमा ने खींचा सबका ध्यान

    नई दिल्ली । सावन माह में जारी कांवड़ यात्रा के बीच उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक अनोखी कांवड़ ने श्रद्धालुओं और राहगीरों का विशेष ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। मैकलारेन स्पोर्ट्स कार जैसी दिखने वाली विशेष डमी संरचना में भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित कर निकाली गई इस कांवड़ को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे रुकते नजर आए। दूर से देखने पर यह किसी वास्तविक लग्जरी स्पोर्ट्स कार जैसी दिखाई देती थी, लेकिन पास आने पर लोगों को पता चला कि यह श्रद्धालुओं द्वारा विशेष रूप से तैयार कराया गया प्रतिरूप है।

    यह अनोखी कांवड़ दिल्ली के नवादा गांव से आए छह शिवभक्तों द्वारा तैयार कराई गई है। श्रद्धालुओं ने 28 जुलाई को हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी से लगभग 40 लीटर गंगाजल लेकर अपनी यात्रा आरंभ की थी। यात्रा के दौरान गंगाजल को इसी विशेष रूप से डिजाइन की गई कांवड़ के भीतर सुरक्षित रखा गया। श्रद्धालुओं का उद्देश्य दिल्ली पहुंचकर अपने गांव के शिव मंदिर में भगवान शिव का विधि-विधान से जलाभिषेक करना है।

    श्रद्धालुओं के अनुसार, हर वर्ष कांवड़ यात्रा में नई-नई थीम और रचनात्मक डिज़ाइन देखने को मिलते हैं। इसी सोच के साथ इस बार उन्होंने पारंपरिक कांवड़ को आधुनिक स्वरूप देने का निर्णय लिया। सामूहिक चर्चा के बाद स्पोर्ट्स कार की थीम पर कांवड़ तैयार करने का विचार सामने आया और फिर भगवान शिव की प्रतिमा को उसके केंद्र में स्थापित कर इसे अंतिम रूप दिया गया। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल अपनी आस्था को एक अलग और आकर्षक रूप में प्रस्तुत करना था।

    जानकारी के अनुसार जिस स्पोर्ट्स कार से प्रेरणा लेकर यह मॉडल बनाया गया है, उसकी वास्तविक कीमत करोड़ों रुपये बताई जाती है। हालांकि यात्रा में शामिल वाहन पूरी तरह डमी मॉडल है और इसे केवल धार्मिक यात्रा के लिए तैयार किया गया है। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस विशेष प्रतिरूप को बनाने और सजाने में लगभग सात से आठ लाख रुपये का खर्च आया। आकर्षक रंग-सज्जा, आधुनिक डिज़ाइन और भगवान शिव की प्रतिमा के संयोजन ने इसे पूरी यात्रा का प्रमुख आकर्षण बना दिया।

    मुजफ्फरनगर से गुजरते समय इस अनोखी कांवड़ को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई राहगीरों ने पहली नजर में इसे असली स्पोर्ट्स कार समझ लिया। जब उन्हें इसके डमी मॉडल होने की जानकारी मिली तो उत्सुकता और बढ़ गई। बड़ी संख्या में लोगों ने इस अनूठी प्रस्तुति के साथ तस्वीरें और वीडियो बनाए। श्रद्धालुओं ने भी लोगों का अभिवादन करते हुए अपनी यात्रा जारी रखी।

    कांवड़ यात्रा के दौरान हर वर्ष श्रद्धालु अपनी आस्था को अलग-अलग कलात्मक और रचनात्मक स्वरूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। कहीं धार्मिक झांकियां तैयार की जाती हैं तो कहीं विशेष थीम पर आधारित कांवड़ बनाई जाती हैं। इस वर्ष मैकलारेन जैसी स्पोर्ट्स कार के रूप में तैयार की गई यह कांवड़ भी उसी रचनात्मक परंपरा का नया उदाहरण बनकर सामने आई है, जिसने धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक डिज़ाइन का अनोखा मेल प्रस्तुत किया।

    हरिद्वार से गंगाजल लेकर विभिन्न राज्यों और शहरों की ओर बढ़ रहे लाखों शिवभक्तों के बीच यह विशेष कांवड़ चर्चा का विषय बनी हुई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति है, जबकि यह अनूठी प्रस्तुति उसी भावना को अलग अंदाज में व्यक्त करने का माध्यम है। निर्धारित स्थान पर पहुंचकर वे भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और सावन माह की धार्मिक परंपरा का विधिवत पालन करेंगे।

  • टाइगर श्रॉफ, एल्विश यादव और अभिषेक बनर्जी पहली बार एक साथ आएंगे नजर, रेमो डिसूजा करेंगे एक्शन फिल्म का निर्देशन

    टाइगर श्रॉफ, एल्विश यादव और अभिषेक बनर्जी पहली बार एक साथ आएंगे नजर, रेमो डिसूजा करेंगे एक्शन फिल्म का निर्देशन

    नई दिल्ली । अभिनेता टाइगर श्रॉफ एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक्शन अवतार में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार हैं। उनकी आगामी फिल्म को लेकर आधिकारिक घोषणा हो चुकी है, जिसमें उनके साथ पहली बार डिजिटल क्रिएटर एल्विश यादव और अभिनेता अभिषेक बनर्जी भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्देशन प्रसिद्ध फिल्मकार और कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा करेंगे, जबकि फिल्म का निर्माण विकी जैन अपने प्रोडक्शन बैनर के तहत करेंगे। कलाकारों और निर्माण टीम की घोषणा के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है।

    यह फिल्म कई मायनों में खास मानी जा रही है। पहली बार टाइगर श्रॉफ और एल्विश यादव किसी फीचर फिल्म में एक साथ स्क्रीन साझा करेंगे। वहीं अपनी अलग अभिनय शैली के लिए पहचाने जाने वाले अभिषेक बनर्जी भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। तीनों कलाकारों की अलग-अलग पृष्ठभूमि और लोकप्रियता को देखते हुए फिल्म से एक नया सिनेमाई अनुभव मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। निर्माता और निर्देशक का मानना है कि यह संयोजन दर्शकों के लिए मनोरंजन और एक्शन का नया मिश्रण पेश करेगा।

    निर्माता के रूप में यह विकी जैन की पहली फिल्म होगी। लंबे समय से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा रखने वाले विकी जैन ने इसी प्रोजेक्ट के साथ अपने प्रोडक्शन सफर की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सिनेमा हमेशा से उनके लिए प्रेरणा का माध्यम रहा है और पहली ही फिल्म में अनुभवी कलाकारों तथा मजबूत रचनात्मक टीम के साथ काम करना उनके लिए उत्साह का विषय है। उनका विश्वास है कि यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी।

    निर्देशक रेमो डिसूजा ने भी इस प्रोजेक्ट को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जाएगा और इसमें एक्शन के साथ मनोरंजन का संतुलित मेल देखने को मिलेगा। रेमो के अनुसार टाइगर श्रॉफ की एक्शन क्षमता, अभिषेक बनर्जी की अभिनय प्रतिभा और एल्विश यादव की लोकप्रियता फिल्म को अलग पहचान देने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि फिल्म की कहानी और प्रस्तुति को आधुनिक दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

    फिल्म का आधिकारिक शीर्षक अभी सामने नहीं आया है, लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार यह हाई-ऑक्टेन एक्शन पर आधारित होगी। निर्माण टीम जल्द ही शूटिंग शेड्यूल, अन्य कलाकारों और रिलीज से जुड़ी जानकारियां साझा कर सकती है। फिलहाल फिल्म की स्टार कास्ट की घोषणा ने मनोरंजन जगत में चर्चा तेज कर दी है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    टाइगर श्रॉफ के लिए यह प्रोजेक्ट विशेष महत्व रखता है। पिछले कुछ समय में उनकी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है, ऐसे में यह नई एक्शन फिल्म उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। दूसरी ओर, एल्विश यादव के लिए भी यह बड़े पर्दे पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का अहम कदम होगा। वहीं अभिषेक बनर्जी अपने अलग अंदाज के अभिनय से फिल्म को और मजबूत बनाने की कोशिश करेंगे।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि लोकप्रिय कलाकारों, अनुभवी निर्देशक और एक्शन प्रधान कहानी का यह संयोजन दर्शकों के बीच अच्छी उत्सुकता पैदा कर चुका है। यदि निर्माण और प्रस्तुति उम्मीदों के अनुरूप रही, तो यह फिल्म आने वाले समय की चर्चित एक्शन फिल्मों में अपनी जगह बना सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें फिल्म के शीर्षक, शूटिंग की शुरुआत और रिलीज से जुड़ी अगली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं।

  • जुलाई की तेज बारिश भी नहीं कर पाई भरपाई, एमपी के ज्यादातर डैम आधे खाली, 43 जिलों में कम बारिश

    जुलाई की तेज बारिश भी नहीं कर पाई भरपाई, एमपी के ज्यादातर डैम आधे खाली, 43 जिलों में कम बारिश


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद के अनुरूप नहीं रही है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई तेज बारिश के बावजूद जून में हुई कमी की भरपाई नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका सबसे बड़ा असर जलाशयों और बांधों पर दिखाई दे रहा है, जहां अधिकांश बड़े डैम आधे भी नहीं भर पाए हैं। यदि अगस्त में अच्छी बारिश नहीं हुई तो प्रदेश के कई हिस्सों में जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।

    भारतीय मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 15.7 इंच बारिश दर्ज हुई है, जबकि इस अवधि तक सामान्य वर्षा 18.1 इंच होनी चाहिए थी। यानी करीब 2.4 इंच की कमी बनी हुई है। प्रदेश के 55 जिलों में से 43 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि पांच जिलों में तो 10 इंच से भी कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। सबसे कम बारिश मुरैना में केवल 6.3 इंच दर्ज हुई है।

    कम बारिश का असर प्रदेश के प्रमुख जलाशयों पर साफ दिखाई दे रहा है। कोलार, बाणसागर, बरना, कुंडालिया, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, गांधीसागर और तिघरा जैसे बड़े बांध अभी तक आधे भी नहीं भर पाए हैं। पिछले वर्ष जुलाई के अंत तक अधिकांश जलाशय लगभग भर चुके थे और कई डैमों के गेट भी खोलने पड़े थे, लेकिन इस बार केवल बैतूल स्थित सतपुड़ा डैम के सात गेट ही खोले गए हैं। जलाशयों में पानी कम होने के कारण कई शहरों में नियमित जलापूर्ति भी प्रभावित होने लगी है।

    कृषि क्षेत्र पर भी मानसून की स्थिति का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। शाजापुर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एस.एस. धाकड़ के अनुसार वर्तमान मौसम सोयाबीन की फसल के लिए अनुकूल है क्योंकि अभी हल्की और मध्यम बारिश फसल के विकास में मददगार है। हालांकि दाना बनने के समय अधिक पानी की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर खंडवा, खरगोन और बड़वानी जैसे जिलों में भारी बारिश के कारण खेतों में जलभराव हुआ है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं धान की खेती के लिए अब भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है।

    इस वर्ष मानसून भी प्रदेश में सामान्य से नौ दिन देरी से पहुंचा था। 24 जून को इसकी एंट्री हुई और अगले नौ दिनों में पूरे प्रदेश को कवर किया। शुरुआती देरी के कारण जून में वर्षा 30 प्रतिशत तक कम रही। जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति सुधरी और औसत वर्षा सामान्य से आठ प्रतिशत अधिक हो गई थी, लेकिन दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ गया। तीसरे और चौथे सप्ताह में तेज बारिश जरूर हुई, फिर भी शुरुआती कमी पूरी नहीं हो सकी।

    प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा बालाघाट जिले में करीब 24 इंच दर्ज की गई है, जबकि वर्षा प्रतिशत के लिहाज से बुरहानपुर सबसे आगे है, जहां सामान्य कोटे का लगभग 77 प्रतिशत पानी बरस चुका है। सीहोर, देवास, डिंडौरी और सिवनी जैसे जिलों में भी 20 इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड हुई है। दूसरी ओर मुरैना, दतिया, श्योपुर, रीवा और अलीराजपुर जैसे जिलों में बारिश का आंकड़ा 10 इंच से भी नीचे बना हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त के पहले सप्ताह में भारी बारिश का दौर कुछ समय के लिए थमा है, लेकिन अगले सप्ताह से प्रदेश में फिर सक्रिय मानसून की संभावना है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो जलाशयों में पानी बढ़ने के साथ किसानों और आम लोगों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल प्रदेश की नजरें अगस्त की बारिश पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही आने वाले महीनों में पेयजल उपलब्धता, सिंचाई और खरीफ फसलों की स्थिति तय करेगी।

  • हरियाली तीज 2026 की तिथि को लेकर दूर हुआ भ्रम, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत और होगी शिव-पार्वती की पूजा

    हरियाली तीज 2026 की तिथि को लेकर दूर हुआ भ्रम, 15 अगस्त को रखा जाएगा व्रत और होगी शिव-पार्वती की पूजा

    नई दिल्ली । सावन मास के प्रमुख पर्वों में शामिल हरियाली तीज वर्ष 2026 में 15 अगस्त, शनिवार को मनाई जाएगी। इस पर्व को लेकर तृतीया तिथि दो दिनों में पड़ने के कारण कई लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि हिंदू पंचांग के अनुसार उदया तिथि के आधार पर 15 अगस्त को ही हरियाली तीज का व्रत और पूजा करना शास्त्रसम्मत माना गया है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करेंगी, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।

    पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 को शाम 6 बजकर 46 मिनट पर आरंभ होगी और 15 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि 15 अगस्त को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदया तिथि के नियम के अनुसार इसी दिन हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में अधिकांश व्रत और त्योहार सूर्योदय के समय प्रभावी तिथि के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं, इसलिए इस वर्ष भी 15 अगस्त की तिथि को अंतिम मान्यता प्राप्त है।

    हरियाली तीज के दिन कई शुभ योग और पूजा के अनुकूल मुहूर्त भी बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 50 मिनट से 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जिसे पूजा और साधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से 1 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से 3 बजकर 42 मिनट तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 6 मिनट से 7 बजकर 29 मिनट तक तथा अमृत काल रात 8 बजकर 18 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इन शुभ समयों में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करना विशेष फलदायी माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज का व्रत अत्यंत कठिन और पुण्यदायी माना जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करती हैं। सामान्यतः हरे और लाल रंग को इस पर्व के लिए शुभ माना जाता है, जबकि काले, सफेद और भूरे रंग के वस्त्र पहनने से बचने की परंपरा है। पूजा के दौरान शिव-पार्वती का विधिवत पूजन, सुहाग सामग्री का अर्पण, कथा श्रवण और व्रत का संकल्प किया जाता है। कई परंपराओं में निर्जला व्रत का भी विधान बताया गया है और निर्धारित समय से पहले व्रत का पारण नहीं किया जाता।

    हरियाली तीज केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और सामाजिक संबंधों का भी महत्वपूर्ण पर्व है। इस अवसर पर विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, झूला झूलती हैं और सावन के पारंपरिक गीत गाकर उत्सव मनाती हैं। कई क्षेत्रों में मायके से विवाहित बेटियों के लिए सिंधारा भेजने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे स्नेह, सम्मान और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।

    धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इसी कारण हरियाली तीज का व्रत वैवाहिक सुख, प्रेम, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा, नियम और विधि-विधान के साथ किया गया यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है तथा सावन मास के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में इसकी विशेष धार्मिक मान्यता है।

  • रक्षाबंधन 2026 की तिथि को लेकर दूर हुआ भ्रम, 28 अगस्त को शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा भाई-बहन का पावन पर्व

    रक्षाबंधन 2026 की तिथि को लेकर दूर हुआ भ्रम, 28 अगस्त को शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा भाई-बहन का पावन पर्व

    नई दिल्ली । भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आजीवन सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व वर्ष 2026 में 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। सावन पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस महत्वपूर्ण सनातन पर्व को लेकर इस बार तिथि और भद्रा काल के कारण लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि पंचांग के अनुसार उदया तिथि के आधार पर 28 अगस्त को ही रक्षाबंधन मनाना शास्त्रसम्मत और शुभ माना गया है। यही कारण है कि ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य भी इसी दिन पर्व मनाने की सलाह दे रहे हैं।

    हिंदू पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 9 मिनट पर होगा और इसका समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर होगा। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए धार्मिक परंपरा के अनुसार इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। सनातन धर्म में अधिकांश प्रमुख पर्व उदया तिथि के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं, इसलिए इस वर्ष भी 28 अगस्त को ही मान्यता दी गई है।

    रक्षाबंधन पर शुभ मुहूर्त में राखी बांधने का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार बहनें 28 अगस्त को सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं। यह अवधि अत्यंत शुभ मानी गई है। इस दौरान पूजा-अर्चना, तिलक, आरती और रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा का पालन करना मंगलकारी माना जाता है। जो लोग किसी कारणवश इस समय में राखी नहीं बांध पाते, उनके लिए अभिजीत मुहूर्त भी उपलब्ध रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, जिसे भी शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।

    रक्षाबंधन पर भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान रक्षा सूत्र बांधना उचित नहीं माना जाता। वर्ष 2026 में 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। यही कारण है कि इस दिन राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है। राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को भद्रा का प्रभाव समाप्त हो चुका होगा, जिससे पूरे विधि-विधान और शुभ मुहूर्त में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकेगा।

    रक्षाबंधन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में पारिवारिक मूल्यों, विश्वास और स्नेह का भी प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों की हर परिस्थिति में रक्षा करने और जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लेते हैं। यही भावनात्मक रिश्ता इस पर्व को भारतीय समाज में विशेष महत्व प्रदान करता है।

    रक्षाबंधन से जुड़ी कई धार्मिक और ऐतिहासिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध प्रसंग महाभारत काल का माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण की उंगली घायल होने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। द्रौपदी के इस स्नेह और समर्पण से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया और बाद में संकट की घड़ी में उस वचन को निभाया। यही प्रसंग भाई-बहन के अटूट विश्वास, प्रेम और सुरक्षा के भाव का प्रतीक माना जाता है। इसी संदेश के साथ रक्षाबंधन का पर्व आज भी पूरे देश में श्रद्धा, उल्लास और पारिवारिक एकता के वातावरण में मनाया जाता है।