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  • एमपी में सड़क हादसों का भयावह आंकड़ा: एक साल में 1 लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं, हर 10 में से 6 पीड़ित युवा

    एमपी में सड़क हादसों का भयावह आंकड़ा: एक साल में 1 लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं, हर 10 में से 6 पीड़ित युवा


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। डायल-108 एंबुलेंस सेवा की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक वर्ष में प्रदेशभर में 1,03,294 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इन हादसों का सबसे ज्यादा शिकार युवा वर्ग हुआ है।

    रिपोर्ट के मुताबिक 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के लोग कुल दुर्घटनाओं में 61 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे अधिक प्रभावित रहे। इसके बाद 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 24 प्रतिशत लोग हादसों का शिकार बने। वहीं 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत, 0 से 15 वर्ष आयु वर्ग की 4 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की 3 प्रतिशत दर्ज की गई।

    जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सागर जिला सड़क हादसों के मामले में प्रदेश में सबसे ऊपर रहा, जहां एक वर्ष के दौरान 6,061 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इसके बाद इंदौर में 4,853 और भोपाल में 4,546 सड़क हादसे सामने आए। इसके अलावा छिंदवाड़ा, जबलपुर, धार और रीवा जैसे जिलों में भी तीन हजार से अधिक दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो बढ़ती सड़क असुरक्षा की ओर संकेत करती हैं।

    महीनेवार विश्लेषण में मई 2025 सबसे चिंताजनक महीना साबित हुआ, जब 12,047 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। जून और जुलाई में दुर्घटनाओं की संख्या में कुछ कमी देखी गई, लेकिन अगस्त के बाद फिर से बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया। त्योहारों के मौसम में अक्टूबर और नवंबर के दौरान भी हादसों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं। इनमें ओवर स्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, सड़क के ब्लैक स्पॉट, गड्ढे, क्षमता से अधिक सवारी बैठाना तथा लापरवाही और स्टंटबाजी प्रमुख हैं।

    डायल-108 एंबुलेंस सेवा के वरिष्ठ प्रबंधक तरुण सिंह परिहार के अनुसार, दुर्घटनाओं के बाद गंभीर चोटों का बड़ा कारण हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना है। उन्होंने लोगों से यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाने की अपील की है।

    वहीं भोपाल आरटीओ जितेंद्र शर्मा का कहना है कि सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवर स्पीडिंग है। उनके अनुसार यदि वाहन चालक निर्धारित गति सीमा का पालन करें तो सड़क दुर्घटनाओं में करीब 60 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

    हाल के दिनों में भोपाल में हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने भी लोगों का ध्यान सड़क सुरक्षा की ओर आकर्षित किया है। पुलिस के अनुसार तेज रफ्तार बाइक के डिवाइडर से टकराने की घटना में दो मेडिकल छात्रों की मौत हो गई थी। यह हादसा एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए केवल सख्त कानून ही नहीं, बल्कि जनजागरूकता, बेहतर सड़क ढांचा और जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार भी उतना ही जरूरी है। बढ़ते हादसों के बीच सड़क सुरक्षा अब प्रदेश के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

  • शेयरधारकों को नकदी लौटाने की तैयारी, लेकिन बाजार का भरोसा कमजोर; विप्रो के सामने आय वृद्धि और मुनाफे की चुनौती बरकरार

    शेयरधारकों को नकदी लौटाने की तैयारी, लेकिन बाजार का भरोसा कमजोर; विप्रो के सामने आय वृद्धि और मुनाफे की चुनौती बरकरार

    नई दिल्ली । देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल विप्रो इन दिनों निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। कंपनी ने 15,000 करोड़ रुपये के बड़े शेयर बायबैक कार्यक्रम की शुरुआत की है, लेकिन इसके बावजूद उसके शेयरों पर दबाव कम होता नजर नहीं आ रहा। बायबैक शुरू होने के साथ ही कंपनी के शेयर में गिरावट दर्ज की गई और यह कई वर्षों के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बाजार में हालिया कमजोरी के बीच विप्रो का प्रदर्शन व्यापक सूचकांकों की तुलना में अधिक कमजोर दिखाई दिया है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में लगातार गिरावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी है। वर्ष 2026 में अब तक कंपनी के शेयर मूल्य में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिससे निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा है।

    कंपनी ने शेयरधारकों को अतिरिक्त नकदी लौटाने के उद्देश्य से बायबैक योजना लागू की है। इसके तहत बड़ी संख्या में शेयर वापस खरीदे जाएंगे। बायबैक का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध कुल शेयरों की संख्या को कम करना और शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन करना माना जाता है। आमतौर पर ऐसी योजनाओं से प्रति शेयर आय और अन्य वित्तीय संकेतकों में सुधार की संभावना बढ़ जाती है।

    कंपनी का कहना है कि उसके पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है और वह पूंजी आवंटन की रणनीति के तहत निवेशकों को लाभ पहुंचाना चाहती है। बायबैक में छोटे निवेशकों के लिए भी एक हिस्सा सुरक्षित रखा गया है, जिससे खुदरा निवेशकों को भागीदारी का अवसर मिल सके। हालांकि बाजार की प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल कंपनी के भविष्य के कारोबार पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में कंपनी को कई परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बड़े ग्राहकों से मिलने वाले कारोबार में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने और कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लागू होने में देरी जैसी परिस्थितियां राजस्व वृद्धि पर असर डाल सकती हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी मांग में कमजोरी भी कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।

    आईटी उद्योग इस समय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में बढ़ते निवेश के कारण कंपनियों को नए अवसर तो मिल रहे हैं, लेकिन साथ ही प्रतिस्पर्धा और लागत का दबाव भी बढ़ रहा है। विप्रो भी इसी चुनौतीपूर्ण माहौल में अपनी विकास रणनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े सौदों का वास्तविक वित्तीय लाभ मिलने में समय लग सकता है। ऐसे में निकट अवधि में आय वृद्धि सीमित रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही कर्मचारियों के वेतन, नए प्रोजेक्ट्स की लागत और उभरती तकनीकों में निवेश से लाभप्रदता पर भी असर पड़ सकता है।

    इसके बावजूद कंपनी की मजबूत वैश्विक उपस्थिति, विविध ग्राहक आधार और डिजिटल सेवाओं में बढ़ता फोकस भविष्य के लिए सकारात्मक पहलू माने जा रहे हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि बायबैक कार्यक्रम के बाद कंपनी अपने कारोबारी प्रदर्शन और विकास योजनाओं को किस तरह आगे बढ़ाती है। आने वाली तिमाहियों के वित्तीय नतीजे निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतक साबित हो सकते हैं।

  • भारत में AI क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, TCS और Anthropic की साझेदारी से हजारों कर्मचारियों को मिलेगा उन्नत AI प्लेटफॉर्म

    भारत में AI क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, TCS और Anthropic की साझेदारी से हजारों कर्मचारियों को मिलेगा उन्नत AI प्लेटफॉर्म

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने एआई क्षेत्र की अग्रणी संस्था एंथ्रोपिक के साथ साझेदारी कर अपने डिजिटल परिवर्तन अभियान को नई दिशा देने का फैसला किया है। इस सहयोग का उद्देश्य विभिन्न उद्योगों में एआई आधारित समाधानों के विकास को गति देना और ग्राहकों को उन्नत तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराना है।

    इस साझेदारी के तहत टीसीएस अपने लगभग 50 हजार कर्मचारियों को Claude AI प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराएगी। इस पहल का लाभ इंजीनियरिंग, वित्त, कानूनी सेवाओं, विपणन, बिक्री और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत पेशेवरों को मिलेगा। कंपनी का मानना है कि कर्मचारियों को अत्याधुनिक एआई उपकरणों से जोड़ने से उत्पादकता बढ़ेगी और जटिल कार्यों को अधिक दक्षता के साथ पूरा किया जा सकेगा।

    टीसीएस इस सहयोग के अंतर्गत एक विशेष विशेषज्ञ टीम का गठन भी करेगी, जो Claude एआई मॉडल पर आधारित नए तकनीकी समाधान विकसित करेगी। कंपनी को इन एआई क्षमताओं और टूल्स तक शुरुआती पहुंच मिलने से वह अपने ग्राहकों के लिए तेजी से नवाचार करने की स्थिति में होगी। इससे एंटरप्राइज ग्राहकों को अत्याधुनिक एआई तकनीकों का लाभ अपेक्षाकृत कम समय में मिल सकेगा।

    दोनों कंपनियां मिलकर बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी प्रशासन, जीवन विज्ञान, विमानन, दूरसंचार और चिकित्सा प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करेंगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां डेटा सुरक्षा, विश्वसनीयता और नियामकीय अनुपालन सर्वोच्च प्राथमिकता रखते हैं। ऐसे क्षेत्रों में एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना इस साझेदारी का प्रमुख लक्ष्य माना जा रहा है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को एआई टूल्स से जोड़ना भविष्य की कार्यशैली को बदल सकता है। इससे न केवल कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि संगठन के भीतर नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता भी मजबूत होगी। आधुनिक व्यवसायों में एआई की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह कदम उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    यह साझेदारी ग्राहकों के लिए भी कई नए अवसर लेकर आएगी। कंपनियां ऐसे एआई समाधान विकसित करेंगी जो व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पुराने तकनीकी ढांचे को आधुनिक बनाने और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। इससे डिजिटल परिवर्तन परियोजनाओं की गति बढ़ने और परिचालन लागत को कम करने की संभावना भी जताई जा रही है।

    एआई तकनीक के तेजी से विस्तार के बीच यह सहयोग भारत के तकनीकी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर एआई अपनाने की बढ़ती मांग के बीच भारतीय आईटी कंपनियां नई तकनीकों में निवेश कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं। टीसीएस और एंथ्रोपिक की यह साझेदारी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

    उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित समाधान व्यवसायों की कार्यप्रणाली को व्यापक रूप से प्रभावित करेंगे। ऐसे में बड़े पैमाने पर एआई प्रशिक्षण, उन्नत प्लेटफॉर्म तक पहुंच और उद्योग-विशिष्ट समाधानों का विकास कंपनियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है।

  • TMC में बड़ी टूट के संकेत? बागी सांसदों की भूपेंद्र यादव से मुलाकात, 19 सांसदों की सूची से मचा सियासी हड़कंप

    TMC में बड़ी टूट के संकेत? बागी सांसदों की भूपेंद्र यादव से मुलाकात, 19 सांसदों की सूची से मचा सियासी हड़कंप


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती दिख रही है। पार्टी में असंतोष के बीच कई बागी नेताओं ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की। इस बैठक में टीएमसी के कुछ बागी सांसद भी मौजूद रहे।

    जानकारी के अनुसार, इस बैठक में प्रतिमा मंडल, माला रॉय, मिताली बाग और सयानी घोष शामिल रहीं। बताया जा रहा है कि यह बैठक करीब एक घंटे तक चली, जिसमें राजनीतिक हालात और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।

    सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के भीतर असंतोष केवल विधायकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब कई सांसद भी बागी रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि 19 सांसदों की एक सूची सामने आई है, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे प्रमुख नाम भी शामिल हैं। बताया यह भी जा रहा है कि इन सांसदों ने अपने हस्ताक्षर के साथ एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

    इस सूची के सामने आने के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। ऐसे में यदि 19 सांसदों के बागी होने का दावा सही साबित होता है, तो यह पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है।

    उधर, कोलकाता में पार्टी के बागी विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि 64 विधायक उनके समर्थन में हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी विधायक जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष को अपना पत्र सौंपेंगे और एक अलग राजनीतिक पहचान के साथ काम करेंगे।

    ऋतब्रत बनर्जी, जिन्हें 3 जून को टीएमसी से निष्कासित किया गया था, को विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी है। उनके अनुसार, उनका गुट अब पश्चिम बंगाल के हितों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक दिशा तय करेगा।

    फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर टीएमसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते दावों ने राज्य की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।

  • Gold ETF से निवेशकों ने निकाले ₹725 करोड़, मुनाफावसूली के बीच Silver ETF में बढ़ा निवेश

    Gold ETF से निवेशकों ने निकाले ₹725 करोड़, मुनाफावसूली के बीच Silver ETF में बढ़ा निवेश


    नई दिल्ली। कुछ महीने पहले तक सोना और चांदी निवेशकों की पहली पसंद बने हुए थे। तेजी से बढ़ती कीमतों और शानदार रिटर्न के चलते बड़ी संख्या में निवेशकों ने गोल्ड और सिल्वर ETF में पैसा लगाया था। सोशल मीडिया से लेकर वित्तीय सलाहकारों तक, हर जगह इन निवेश विकल्पों की चर्चा थी। हालांकि अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है।

    सोने और चांदी की कीमतों में हालिया नरमी के बीच निवेशकों का उत्साह भी कम हुआ है। गोल्ड ETF में निवेश घटने लगा है और मई 2026 में इस श्रेणी से भारी निकासी दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर सिल्वर ETF में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

    गोल्ड ETF से ₹725 करोड़ की निकासी
    भारतीय म्यूचुअल फंड संघ (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में गोल्ड ETF से ₹725 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई। इसके विपरीत अप्रैल में इस श्रेणी में ₹3,040 करोड़ का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया था। लगभग एक साल तक लगातार निवेश आकर्षित करने के बाद गोल्ड ETF में यह पहला बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

    हालांकि निकासी के बावजूद गोल्ड ETF का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) मजबूत बना हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में इसका आकार तीन गुना बढ़कर करीब ₹1.85 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो निवेशकों के बीच सोने की दीर्घकालिक मांग को दर्शाता है।

    क्यों बढ़ी मुनाफावसूली?
    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में आई इस कमजोरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें मुनाफावसूली, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर बदली उम्मीदें शामिल हैं।

    INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी के अनुसार, बाजार अब महंगाई से बचाव के लिए सोना खरीदने की रणनीति से हटकर ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के आधार पर निवेश का मूल्यांकन कर रहा है। अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़ों ने इस संभावना को कमजोर किया है कि फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में आक्रामक दर कटौती करेगा।

    उन्होंने कहा कि सोना कोई नियमित आय या रिटर्न नहीं देता। ऐसे में जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत होते हैं, तो सोना रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा, हाल के महीनों में सोने की कीमतों में तेज उछाल के बाद वैश्विक स्तर पर निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी बढ़ी है।

    लॉन्ग टर्म में सोना अब भी अहम
    विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक दबाव के बावजूद पोर्टफोलियो में जोखिम संतुलन और सुरक्षा के लिए सोना अब भी महत्वपूर्ण निवेश विकल्प बना हुआ है। हालांकि हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा लाभ बुक करने का दौर जारी है।

    सिल्वर ETF में बनी रही चमक
    जहां गोल्ड ETF से निवेशकों ने पैसा निकाला, वहीं सिल्वर ETF में मजबूत निवेश देखने को मिला। मई 2026 के दौरान सिल्वर ETF में ₹2,133 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग बढ़ने की उम्मीद और निवेशकों की बढ़ती रुचि इसके पीछे प्रमुख कारण हैं।

    दासानी के मुताबिक, सौर ऊर्जा, विद्युतीकरण और आपूर्ति संबंधी चुनौतियां चांदी की दीर्घकालिक मांग को समर्थन दे रही हैं। हालांकि निकट भविष्य में चांदी की कीमतों की दिशा भी अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की नीतियों पर निर्भर करेगी।

    नोट: सोना या चांदी समेत किसी भी निवेश विकल्प में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।

  • 'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' गीत के फिल्मांकन के समय कगार पर थी दो बड़े सितारों की जान, धर्मेंद्र की सूझबूझ से बची अभिनेत्री राखी

    'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' गीत के फिल्मांकन के समय कगार पर थी दो बड़े सितारों की जान, धर्मेंद्र की सूझबूझ से बची अभिनेत्री राखी

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की यादें जितनी दिलचस्प हैं, उतनी ही रोमांचित करने वाली उनकी शूटिंग से जुड़ी कहानियां भी हैं। सत्तर के दशक में तकनीकों और विशेष प्रभावों की कमी के कारण अक्सर निर्देशकों को वास्तविक लोकेशंस पर जाकर ही जोखिम भरे दृश्य फिल्माने पड़ते थे। ऐसा ही एक अविस्मरणीय और डरा देने वाला वाकया अभिनेता धर्मेंद्र और दिग्गज अभिनेत्री राखी के साथ घटित हुआ था। दोनों कलाकार अपनी एक बेहद मशहूर फिल्म के रोमांटिक गीत की शूटिंग कर रहे थे, जहां अचानक प्रकृति के एक अनपेक्षित खतरे से उनका आमना-सामना हो गया और सेट पर मौजूद सभी लोगों की जान हलक में आ गई थी।

    यह पूरी घटना निर्देशक राजश्री प्रोडक्शंस की साल 1970 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म जीवन मृत्यु के फिल्मांकन के समय की है। इस फिल्म का एक बेहद लोकप्रिय और कालजयी गीत झिलमिल सितारों का आंगन होगा दर्शकों के बीच आज भी उतना ही पसंद किया जाता है। आनंद बक्शी के लिखे और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के मधुर संगीत से सजे इस गीत को महान गायक मोहम्मद रफी और स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। इस बेहद शांत और रोमांटिक मिजाज के गाने को एक खूबसूरत झील के बीच नाव के ऊपर फिल्माया जा रहा था, जहां दोनों मुख्य कलाकार स्क्रिप्ट के अनुसार एक-दूसरे के आकर्षण में पूरी तरह डूबे हुए थे।

    शेड्यूल के मुताबिक जब कैमरे रोल हो रहे थे और धर्मेंद्र व राखी नाव पर सवार होकर रोमांटिक शॉट दे रहे थे, तभी अचानक पानी में कुछ संदिग्ध हलचल शुरू हुई। किनारे पर खड़े क्रू मेंबर्स और कैमरे के पीछे मौजूद टीम ने जब ध्यान से देखा, तो उनके होश उड़ गए क्योंकि एक विशालकाय मगरमच्छ तैरता हुआ सीधे कलाकारों की छोटी सी नाव की तरफ बढ़ रहा था। जंगली जानवर को इतने करीब देखकर सेट पर हड़कंप मच गया और चीख-पुकार मचने की स्थिति पैदा हो गई। नाव बीच पानी में होने के कारण दोनों ही स्टार्स बेहद असुरक्षित स्थिति में थे और जरा सी चूक एक बड़े हादसे में बदल सकती थी।

    ऐसी विपरीत और जानलेवा परिस्थिति में अभिनेता धर्मेंद्र ने गजब के साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। मगरमच्छ को नाव के बिल्कुल करीब पाकर उन्होंने घबराने के बजाय सबसे पहले अभिनेत्री राखी को सुरक्षित करने का प्रयास किया। उन्होंने राखी को पकड़कर धीरे से नाव के उस कोने से हटाया जिसके पास मगरमच्छ मंडरा रहा था और उन्हें सुरक्षित छोर पर ले आए। हालांकि इस भयानक घटना से दोनों ही कलाकार अंदर से काफी डर गए थे, लेकिन पेशेवर प्रतिबद्धता दिखाते हुए उन्होंने स्थिति सामान्य होने के बाद अपना काम जारी रखा और उस खूबसूरत गाने की शूटिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया।

    उल्लेखनीय है कि इसी फिल्म जीवन मृत्यु के जरिए अभिनेत्री राखी ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा था और धर्मेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बाद में इस जोड़ी ने ब्लैकमेल और क्षत्रिय जैसी कई अन्य यादगार फिल्मों में भी साथ काम किया, जिनके गाने जैसे पल पल दिल के पास आज भी एवरग्रीन माने जाते हैं। धर्मेंद्र ने खुद कई सालों बाद एक टेलीविजन रियलिटी शो के मंच पर इस मगरमच्छ वाली घटना का जिक्र करते हुए पुरानी यादों को ताजा किया था। यह किस्सा साबित करता है कि परदे पर दिखने वाले खूबसूरत नजारों के पीछे कलाकारों को कितनी कठिन और खतरनाक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था।

  • ट्रंप के दामाद की लग्जरी परियोजना पर अल्बानिया में विरोध, हजारों लोग सड़कों पर उतरे

    ट्रंप के दामाद की लग्जरी परियोजना पर अल्बानिया में विरोध, हजारों लोग सड़कों पर उतरे


    नई दिल्ली। अल्बानिया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर की प्रस्तावित लग्जरी रिजॉर्ट परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। राजधानी तिराना में बुधवार को हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह परियोजना पर्यावरण और राष्ट्रीय हितों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

    करीब 5 अरब यूरो की लागत से प्रस्तावित यह परियोजना ज़्वेर्नेक (Zvernec) क्षेत्र के पास विकसित की जानी है। यह इलाका एक संरक्षित वेटलैंड के नजदीक स्थित है, जहां फ्लेमिंगो, सील और समुद्री कछुओं समेत कई दुर्लभ जीव-जंतु पाए जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर पर्यटन परियोजना शुरू होने से इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने “अल्बानिया इज नॉट फॉर सेल” और “न्यू अल्बानिया” जैसे नारे लगाए। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एदी रामा के कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और शहर के प्रमुख बुलेवार्ड पर लंबी रैली निकाली।

    प्रदर्शन में शामिल लिआंड लाकरोरी ने कहा कि ज़्वेर्नेक परियोजना को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उनके अनुसार यह मामला पिछले 35 वर्षों से चली आ रही अपारदर्शी व्यवस्था का प्रतीक बन गया है और अब जनता बदलाव चाहती है।

    यह विवाद प्रधानमंत्री एदी रामा के लिए भी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है। वर्ष 2013 से सत्ता में मौजूद रामा की सरकार पर विपक्ष और आलोचक भ्रष्टाचार को प्रभावी ढंग से नियंत्रित न कर पाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं करने के आरोप लगाते रहे हैं।

    हालांकि, प्रधानमंत्री रामा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि परियोजना आगे बढ़ेगी और इसके क्रियान्वयन में सभी नियमों का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। रामा ने विशेष अभियोजन कार्यालय SPAK का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संस्था ने हाल के वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच शुरू की है।

    इसके बावजूद सरकार के प्रति लोगों का अविश्वास कम नहीं हुआ है। इसी वर्ष भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उपप्रधानमंत्री बेलिंडा बल्लुकु के खिलाफ भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। बाद में उन्हें पद से हटा दिया गया, लेकिन जनता की नाराजगी बनी हुई है।

    प्रदर्शनकारी फैबियो ब्राकाज का कहना है कि देश लंबे समय से एक जैसी राजनीति देख रहा है और अब नागरिक बेहतर प्रशासन तथा अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि जैरेड कुशनर और उनकी पत्नी इवांका ट्रंप इस परियोजना के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। कुछ वर्ष पहले दोनों ने नौका यात्रा के दौरान अल्बानिया का दौरा किया था, जिसके बाद यहां निवेश की योजना बनाई गई। पिछले महीने निर्माण स्थल के आसपास बाड़ लगाए जाने के बाद स्थानीय लोगों का विरोध और तेज हो गया। बढ़ते दबाव के चलते बाड़ हटानी पड़ी, लेकिन परियोजना को लेकर विवाद अभी भी जारी है।

  • एमपी में प्री-मानसून का असर तेज, 34 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, 6 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट

    एमपी में प्री-मानसून का असर तेज, 34 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, 6 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट

    भोपाल। मध्य प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय बनी हुई हैं। ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और तेज आंधी का दौर जारी है। बुधवार को 20 से अधिक जिलों में मौसम ने करवट ली, जबकि गुरुवार के लिए मौसम विभाग ने ग्वालियर और जबलपुर संभाग सहित 34 जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान हवाएं 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले सप्ताह मानसून के सक्रिय होने तक प्रदेश में प्री-मानसून का प्रभाव बना रहेगा। गुरुवार को मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है।

    हालांकि कई क्षेत्रों में आंधी और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, लेकिन गर्मी का असर अभी भी पूरी तरह कम नहीं हुआ है। बुधवार को खजुराहो लगातार दूसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 43.1 डिग्री, जबलपुर में 40.5 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और इंदौर में 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
    हालांकि कई क्षेत्रों में आंधी और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, लेकिन गर्मी का असर अभी भी पूरी तरह कम नहीं हुआ है। बुधवार को खजुराहो लगातार दूसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 43.1 डिग्री, जबलपुर में 40.5 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और इंदौर में 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय प्री-मानसून सिस्टम, ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। इसी के चलते 13 जून को ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कुछ जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है।

    इन जिलों में आंधी-बारिश की संभावना

    गुरुवार को ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में आंधी और बारिश होने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

    इन इलाकों में गर्मी का असर रहेगा

    इंदौर, धार, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भोपाल, विदिशा, सीहोर और राजगढ़ जिलों में गर्मी का असर बना रह सकता है।

    6 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट

    मौसम विभाग ने मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में गुरुवार को ओले गिरने की संभावना जताई है। वहीं 13 जून को ग्वालियर, भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर और दमोह जिलों में तेज आंधी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

  • मोहम्मद रफी के एक एवरग्रीन गाने ने पलट दी थी हिंदी सिनेमा की बाजी, धर्मेंद्र को मिला नया मुकाम तो फीका पड़ा राजेश खन्ना का जादू

    मोहम्मद रफी के एक एवरग्रीन गाने ने पलट दी थी हिंदी सिनेमा की बाजी, धर्मेंद्र को मिला नया मुकाम तो फीका पड़ा राजेश खन्ना का जादू

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में संगीतकारों, गायकों और अभिनेताओं के बीच की आपसी केमिस्ट्री ने कई बड़े सितारों के करियर की दिशा तय की है। सत्तर के दशक की शुरुआत में जब बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना बैक टू बैक 15 ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर सफलता के शिखर पर थे, तब उनकी फिल्मों में पार्श्वगायन के लिए किशोर कुमार पहली पसंद बन चुके थे। अधिकांश बड़े संगीत निर्देशकों द्वारा किशोर दा को प्राथमिकता दिए जाने के कारण, उस दौर के दिग्गज गायक मोहम्मद रफी का करियर कुछ समय के लिए डगमगाने लगा था। लेकिन साल 1973 में आई एक फिल्म और उसके एक सदाबहार गीत ने फिल्म इंडस्ट्री के पूरे परिदृश्य को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया।

    यह ऐतिहासिक बदलाव अभिनेता धर्मेंद्र की मुख्य भूमिका वाली फिल्म लोफर के माध्यम से देखने को मिला था। इस फिल्म में संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के निर्देशन में मोहम्मद रफी ने आज मौसम बड़ा बेईमान है गीत को अपनी जादुई आवाज दी थी। धर्मेंद्र और अभिनेत्री मुमताज पर फिल्माया गया यह रोमांटिक गीत रिलीज होते ही देश भर में एक बड़ा कल्ट क्लासिक साबित हुआ। इस एकल गीत की लोकप्रियता ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और यह उस दौर से लेकर आज तक भारतीय सिनेमा के सबसे पसंदीदा सदाबहार रोमांटिक गानों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।

    इस गाने की अभूतपूर्व सफलता ने मोहम्मद रफी के करियर को एक नई और बेहद मजबूत संजीवनी प्रदान करने का काम किया। इस जबरदस्त वापसी के बाद फिल्म जगत के तमाम दिग्गज संगीतकारों ने एक बार फिर रफी साहब की तरफ रुख करना शुरू कर दिया और उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए साइन किया जाने लगा। वहीं दूसरी ओर, इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने अभिनेता धर्मेंद्र के पैर भी इंडस्ट्री में मजबूती से जमा दिए। लोफर की सफलता के बाद धर्मेंद्र को बड़े बैनर्स की फिल्मों के ढेरों ऑफर्स मिलने लगे, जिससे हिंदी सिनेमा में एक्शन और रोमांस का एक नया दौर शुरू हुआ।

    इस संगीत सफर में आए बदलाव का सीधा असर तत्कालीन सुपरस्टार राजेश खन्ना के करियर पर भी देखने को मिला। इसी कालखंड के दौरान फिल्म इंडस्ट्री का झुकाव राजेश खन्ना के रोमांटिक अंदाज से हटकर धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की एंग्री यंग मैन और एक्शन इमेज की तरफ बढ़ने लगा था। साल 1975 में रिलीज हुई निर्देशक रमेश सिप्पी की ऐतिहासिक फिल्म शोले ने इस बदलाव पर अंतिम मुहर लगा दी थी। शोले में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने जो इतिहास रचा, उसने राजेश खन्ना के स्टारडम के दौर को काफी पीछे धकेल दिया और उनके करियर का ग्राफ तेजी से नीचे आने लगा।

    सिनेमाई विश्लेषकों के अनुसार, लोफर फिल्म का वह एक गाना महज एक हिट ट्रैक नहीं था, बल्कि वह बॉलीवुड में दो बड़े युगों के बीच का टर्निंग पॉइंट था। उसने जहां एक तरफ भारतीय संगीत के सबसे सुरीले गायक मोहम्मद रफी को उनका खोया हुआ सिंहासन वापस दिलाया, वहीं दूसरी तरफ धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों के लिए आगे का रास्ता साफ किया। यही कारण है कि आज भी जब हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली गानों और गानों से बदलने वाली स्टार्स की किस्मत का जिक्र होता है, तो मोहम्मद रफी और धर्मेंद्र के इस जुगलबंदी को सबसे पहले याद किया जाता है।

  • दांबुला ट्राई-सीरीज में अफगानिस्तान के खिलाफ मैदान पर उतरेगी इंडिया-ए, वैभव सूर्यवंशी के आईपीएल वाले तूफानी अंदाज का फैंस को इंतजार

    दांबुला ट्राई-सीरीज में अफगानिस्तान के खिलाफ मैदान पर उतरेगी इंडिया-ए, वैभव सूर्यवंशी के आईपीएल वाले तूफानी अंदाज का फैंस को इंतजार

    नई दिल्ली। श्रीलंका की धरती पर आयोजित की जा रही ए-टीमों की त्रिकोणीय एकदिवसीय सीरीज का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया है। प्रतियोगिता के महत्वपूर्ण मुकाबले में आज इंडिया-ए की टीम का सामना अफगानिस्तान-ए के साथ होने जा रहा है। इस मुकाबले को लेकर क्रिकेट जगत में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि भारतीय टीम में घरेलू और आईपीएल स्तर के कई उभरते हुए सितारे शामिल हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की चयन समिति ने इस दौरे पर युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में खुद को परखने का एक बड़ा मंच प्रदान किया है, जहां सभी की निगाहें भारत की नई ओपनिंग जोड़ी और टीम के रणनीतिक प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं।

    मैच के मुख्य आकर्षण भारत के 15 वर्षीय युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी बने हुए हैं, जिन्होंने हाल ही में समाप्त हुए इंडियन प्रीमियर लीग के 2026 सीजन में अपनी बल्लेबाजी से तहलका मचा दिया था। राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए इस बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज ने पूरे टूर्नामेंट में अपनी आक्रामक शैली का लोहा मनवाया था। उन्होंने सीजन के 16 मैचों में सर्वाधिक 776 रन बनाकर प्रतिष्ठित ऑरेंज कैप अपने नाम की थी। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 237.30 का रहा था, जो टी-20 क्रिकेट के इतिहास में किसी भी शीर्ष क्रम के बल्लेबाज के लिए बेहद असाधारण माना जाता है। उनके इसी फॉर्म को देखते हुए अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले इस मैच में भारतीय फैंस को एक बार फिर बड़ी पारियों और आतिशी बल्लेबाजी की उम्मीद है।

    हालांकि इस ट्राई-सीरीज के पहले मुकाबले में श्रीलंका-ए के खिलाफ खेलते हुए भारतीय शीर्ष क्रम पूरी तरह लड़खड़ा गया था। उस मैच में वैभव सूर्यवंशी महज 14 रन बनाकर पवेलियन लौट गए थे, जिससे टीम इंडिया को शुरुआती झटके लगे थे। लेकिन क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि एक या दो पारियों की विफलता इस युवा खिलाड़ी के आत्मविश्वास को कम नहीं कर सकती। तकनीकी रूप से सक्षम और लंबी पारियां खेलने में माहिर सूर्यवंशी अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेकर इस मुकाबले में नई शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दांबुला की पिच आमतौर पर शुरुआत में तेज गेंदबाजों को मदद करती है, जिससे भारतीय ओपनर्स के संयम और शॉट चयन की कड़ी परीक्षा होगी।

    दूसरी ओर विपक्षी टीम अफगानिस्तान-ए को हल्के में आंकना भारतीय टीम के लिए बड़ी भूल साबित हो सकता है। अफगानी टीम के पास कई ऐसे विश्वस्तरीय स्पिनर्स और तेज गेंदबाज मौजूद हैं जो किसी भी मजबूत बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं। विशेषकर सीमित ओवरों के क्रिकेट में अफगानिस्तान की ए-टीम ने पिछले कुछ समय में बेहतरीन खेल दिखाया है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए क्रीज पर समय बिताना होगा और पावरप्ले का बुद्धिमानी से इस्तेमाल करना होगा। कप्तान और टीम प्रबंधन ने मैच से पहले रणनीति को लेकर लंबी चर्चा की है, जिसमें मध्यक्रम को मजबूती देने और अंत के ओवरों में तेजी से रन बटोरने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    इस त्रिकोणीय श्रृंखला में आगे की राह तय करने के लिहाज से भारत के लिए यह मुकाबला जीतना बेहद अनिवार्य माना जा रहा है। युवा खिलाड़ियों के पास खुद को राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरों में बनाए रखने का यह सबसे बेहतरीन अवसर है। यदि वैभव सूर्यवंशी और उनके साथी बल्लेबाज आज के मैच में अफगानिस्तान के गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ एक बड़ा स्कोर खड़ा करने में सफल रहते हैं, तो भारतीय टीम की स्थिति सीरीज में काफी मजबूत हो जाएगी। पूरे देश के क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें आज दोपहर शुरू होने वाले इस हाई-वोल्टेज मुकाबले के लाइव स्कोरकार्ड और भारतीय टीम के प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं।