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  • एंटीलिया विस्फोटक और मनसुख हिरेन हत्याकांड में सचिन वाजे को जमानत, कोर्ट ने लगाईं कड़ी पाबंदियां

    एंटीलिया विस्फोटक और मनसुख हिरेन हत्याकांड में सचिन वाजे को जमानत, कोर्ट ने लगाईं कड़ी पाबंदियां


    नई दिल्ली। मुंबई के चर्चित एंटीलिया विस्फोटक मामले और मनसुख हिरेन हत्याकांड में पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को विशेष एनआईए अदालत से जमानत मिल गई है। विशेष न्यायाधीश चकोर एस. बाविस्कर ने 29 सितंबर 2026 को वाजे की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई के लिए कई कड़ी शर्तें तय की हैं। अदालत ने इस फैसले में वाजे के लंबे समय से हिरासत में रहने, मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में लगने वाले संभावित समय और सह-आरोपियों को मिली राहत जैसे पहलुओं पर विचार किया। वाजे को 1 लाख रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि के स्थानीय जमानतदार पर रिहा किया जाएगा।

    जमानत के साथ अदालत ने वाजे की गतिविधियों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं। मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होने तक वह मुंबई, नवी मुंबई, रायगढ़, ठाणे और पालघर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। उन्हें सात दिनों के भीतर इन जिलों से बाहर प्रस्तावित आवास का पता अदालत को देना होगा। इसके अलावा अपना पासपोर्ट एनआईए के पास जमा करना होगा। वाजे को प्रत्येक रविवार दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच स्थानीय पुलिस स्टेशन में उपस्थित होकर हाजिरी देनी होगी। एनआईए या पुलिस की ओर से कॉल अथवा वीडियो कॉल किए जाने पर उन्हें अपनी लोकेशन की जानकारी भी देनी होगी। अदालत की तय शर्तों का उल्लंघन होने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    जमानत पर विचार करते समय अदालत ने मामले में यूएपीए के तहत आतंकवादी कृत्य और देश की आर्थिक सुरक्षा को खतरे से जुड़े पहलुओं को भी देखा। आदेश में कथित विस्फोटक सामग्री, गवाहों के बयान और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों का संदर्भ दिया गया। अदालत के सामने यह भी तथ्य रहा कि सचिन वाजे 13 मार्च 2021 से हिरासत में हैं। मामले में करीब 320 गवाह बताए गए हैं और चार्जशीट 14,000 से अधिक पन्नों की है। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लगने की संभावना को भी अदालत ने जमानत पर विचार करने के दौरान ध्यान में रखा। इसके साथ ही सह-आरोपी प्रदीप शर्मा और सुनील माने को मिली जमानत का पहलू भी सामने आया।

    मामला 25 फरवरी 2021 को उस समय सामने आया था, जब दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास विस्फोटक से लदी एक एसयूवी कार बरामद हुई थी। व्यवसायी मनसुख हिरेन ने दावा किया था कि यह एसयूवी उनके पास से चोरी हुई थी। इसके कुछ दिनों बाद 5 मार्च 2021 को पड़ोसी जिले ठाणे में हिरेन का शव मिला। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और सचिन वाजे को गिरफ्तार किया गया। एनआईए के अनुसार, वाजे मुकेश अंबानी के आवास के पास एसयूवी खड़ी करने में संलिप्त था। एजेंसी ने दावा किया कि इसका मकसद अमीर लोगों में दहशत पैदा करना और एक बड़े नेता की ओर से कथित तौर पर तय किए गए 100 करोड़ रुपये के मासिक उगाही के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पैसे वसूलना था।

    एनआईए ने यह भी दावा किया कि पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा अपनी खोई हुई पहचान वापस पाना चाहता था। जांच एजेंसी के अनुसार, इसके बाद सचिन वाजे ने मनसुख हिरेन की हत्या की साजिश रची। एजेंसी का दावा था कि हिरेन ने विस्फोटक मामले में दोष लेने से इनकार कर दिया था और उसे ऐसी कमजोर कड़ी माना जा रहा था, जो कथित साजिश का खुलासा कर सकता था। इन आरोपों और मामले में चल रही न्यायिक प्रक्रिया के बीच अदालत ने वाजे को जमानत तो दी है, लेकिन गवाहों के बयान दर्ज होने तक पांच जिलों में प्रवेश समेत कई प्रतिबंध लागू रहेंगे।

  • INDIA ब्लॉक की बैठक कल, SIR और चुनाव आयोग पर विपक्ष बनाएगा संयुक्त रणनीति, अखिलेश यादव नहीं होंगे शामिल

    INDIA ब्लॉक की बैठक कल, SIR और चुनाव आयोग पर विपक्ष बनाएगा संयुक्त रणनीति, अखिलेश यादव नहीं होंगे शामिल


    नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली में होगी। बैठक में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR, चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दल संसद में प्रस्ताव लाने और इन मुद्दों पर संयुक्त रूप से आगे की रणनीति तैयार करने पर भी विचार कर सकते हैं। करीब साढ़े तीन महीने बाद होने वाली इस बैठक में चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा हो सकती है।

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह पार्टी का एक अन्य नेता प्रतिनिधित्व करेगा। वहीं, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़ेंगे। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के मुताबिक, पार्टी 2 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन की तैयारियों में व्यस्त है। पार्टी ने संबंधित प्रदर्शन को समर्थन देने की बात भी कही है। ऐसे में बैठक में उद्धव ठाकरे की भागीदारी ऑनलाइन होगी, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव के स्थान पर दूसरा नेता मौजूद रहेगा।

    बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के शामिल होने की संभावना है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, सांसद अभिषेक बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और CPI(M) महासचिव एमए बेबी के भी पहुंचने की उम्मीद है। एमए बेबी ने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के बाद बताया था कि कांग्रेस बैठक के लिए विपक्षी दलों के बीच समन्वय कर रही है। उनके मुताबिक, केजरीवाल ने चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान की जरूरत पर जोर दिया और इस मुद्दे पर अपनी पार्टी में चर्चा करने की बात कही।

    I.N.D.I.A. ब्लॉक की पिछली बैठक 8 जून को हुई थी, जिसमें 23 विपक्षी दल शामिल हुए थे। उस बैठक में SIR और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, आम आदमी पार्टी और DMK उस बैठक में शामिल नहीं हुई थीं। इसके बावजूद 28 जून को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को भेजे गए विपक्षी दलों के संयुक्त पत्र पर AAP और DMK ने भी हस्ताक्षर किए थे। पत्र में चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। पिछली बैठक के बाद अब विपक्षी दल एक बार फिर इन विषयों पर साथ बैठने जा रहे हैं।

    30 सितंबर की बैठक में विपक्षी दलों के बीच समन्वय, SIR के खिलाफ संभावित संयुक्त कार्रवाई और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे की दिशा तय करने पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग और संसद में प्रस्ताव लाने से जुड़े विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। बैठक में अलग-अलग विपक्षी दलों के रुख और आगे की संयुक्त रणनीति को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है।

  • तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी के भगवान शिव और राम पर बयान से विवाद, BJP ने कांग्रेस पर लगाया मानसिक दिवालियापन का आरोप

    तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी के भगवान शिव और राम पर बयान से विवाद, BJP ने कांग्रेस पर लगाया मानसिक दिवालियापन का आरोप


    नई दिल्ली। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के भगवान शिव और भगवान राम को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। रेवंत रेड्डी ने एक कार्यक्रम के दौरान बीजेपी पर भगवान राम को राजनीतिक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर बीजेपी की ओर से ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया जाता है, जबकि ‘हर हर महादेव’ का जयघोष नहीं किया जाता। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव को गरीबों का देवता और भगवान राम को अमीरों का भगवान बताया। उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

    रेवंत रेड्डी ने अपने संबोधन में भगवान शिव और भगवान राम की आस्था को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के संदर्भ में भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में भगवान राम की पूजा अधिक होती है, जबकि दक्षिण भारत में भगवान शिव के प्रति आस्था मजबूत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी ने भगवान राम को राजनीतिक भावना से जोड़ दिया है और उन्हें राजनीतिक प्रतीक बना लिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बीजेपी के सार्वजनिक कार्यक्रमों में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया जाता है, लेकिन ‘हर हर महादेव’ का नारा क्यों नहीं लगाया जाता। इसी दौरान उन्होंने भगवान शिव को ‘गरीबों का भगवान’ और भगवान राम को ‘अमीरों का भगवान’ बताया।

    मुख्यमंत्री ने अपने बयान में गांधी परिवार और संघ परिवार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने गांधी परिवार को देश के लिए बलिदान का प्रतीक बताया, जबकि संघ परिवार पर धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर भारत को बांटने का आरोप लगाया। रेवंत रेड्डी ने कहा कि भगवान राम को बीजेपी ने राजनीतिक भावना से जोड़ दिया है। उन्होंने भगवान शिव को गरीबों का देवता बताते हुए कहा कि यही वजह है कि बीजेपी के कार्यक्रमों में ‘हर हर महादेव’ की जगह ‘जय श्री राम’ का नारा सुनाई देता है। उनके इस बयान के बाद धार्मिक प्रतीकों और राजनीति के संबंध को लेकर सियासी बहस तेज हो गई।

    रेवंत रेड्डी की टिप्पणी पर बीजेपी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री के बयान को मानसिक दिवालियापन बताया। बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी की आलोचना की। उनका कहना है कि भगवान शिव और भगवान राम को अलग-अलग सामाजिक वर्गों से जोड़कर इस तरह की टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी रेवंत रेड्डी के बयान पर आपत्ति जताई और कहा कि मुख्यमंत्री को इस तरह की टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए।

    इस पूरे विवाद के केंद्र में रेवंत रेड्डी की भगवान शिव, भगवान राम और बीजेपी की धार्मिक राजनीति को लेकर की गई टिप्पणियां हैं। मुख्यमंत्री ने ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ के नारों का अंतर बताते हुए बीजेपी पर भगवान राम को राजनीतिक प्रतीक बनाने का आरोप लगाया। वहीं बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद ने उनके बयान को लेकर कड़ा विरोध जताया और इसे मानसिक दिवालियापन बताया। इस बयान के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच धार्मिक प्रतीकों, राजनीतिक विचारधारा और उत्तर-दक्षिण भारत के संदर्भ में बयानबाजी तेज हो गई है।

  • कैंसर की दवाओं की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ₹3,000 की दवा ₹27,000 में मिलने पर उठे सवाल

    कैंसर की दवाओं की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ₹3,000 की दवा ₹27,000 में मिलने पर उठे सवाल

    नई दिल्ली: में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की ऊंची कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने दवाओं के प्राइस टू रिटेलर यानी PTR और अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP के बीच बड़े अंतर पर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान कैंसर की एक दवा का उदाहरण देते हुए बताया गया कि करीब 3,000 रुपये की PTR वाली दवा का MRP 27,000 रुपये है। अदालत ने सवाल किया कि जब दवा की कीमत रिटेलर के लिए करीब 3,000 रुपये है, तो उसका अधिकतम खुदरा मूल्य 27,000 रुपये क्यों रखा गया है। अदालत ने यह भी पूछा कि आवश्यक दवाओं को मूल्य नियंत्रण के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर यानी DPCO के तहत आवश्यक और गैर-आवश्यक दवाओं के बीच अंतर पर भी सवाल उठाए। पीठ ने पूछा कि जरूरी दवाओं के लिए एक समान मूल्य निर्धारण मानदंड क्यों नहीं अपनाया जा सकता। अदालत ने कॉरपोरेट अस्पतालों में दवाओं की बिक्री की व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। पीठ ने कहा कि मरीजों को अक्सर अस्पतालों की इन-हाउस फार्मेसी से ही दवाएं खरीदने के लिए कहा जाता है। अदालत ने सरकारी योजनाओं के तहत इलाज करा रहे मरीजों की दवाओं के खर्च को लेकर भी सवाल किया और कहा कि अंततः इसका बोझ करदाताओं पर पड़ता है।

    केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसा समाधान तलाशने की जरूरत है, जिसमें सभी पक्षों के हितों के बीच संतुलन बना रहे। अदालत ने दवाओं की कीमतों में अंतर और आवश्यक दवाओं के मूल्य नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई जारी रखी। कैंसर की दवा के PTR और MRP के बीच सामने आए भारी अंतर को लेकर अदालत ने यह जानने की कोशिश की कि दवाओं की कीमत तय करने की मौजूदा व्यवस्था में इतना बड़ा अंतर क्यों मौजूद है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

    दूसरी ओर, केरल हाई कोर्ट ने भी सस्ती जीवनरक्षक कैंसर दवाओं की उपलब्धता को लेकर केंद्र सरकार की शक्तियों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने पेटेंट अधिनियम, 1970 का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक हित में केंद्र सरकार के पास जीवनरक्षक दवाओं के निर्माण और आपूर्ति की व्यवस्था करने की शक्ति है। जरूरत पड़ने पर सरकार किसी कंपनी को दवा बनाने के लिए निर्देश दे सकती है। यह मामला महंगी कैंसर दवाओं को लेकर जून 2022 में दाखिल याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ता की सुनवाई पूरी होने से पहले ही मृत्यु हो गई थी। अदालत ने कहा कि सरकार को सस्ती दवाओं की जरूरत, मरीजों की संख्या और सब्सिडी से होने वाले लाभ का आकलन करना चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने तत्काल दवाओं का उत्पादन शुरू करने का आदेश नहीं दिया।

    इन दोनों मामलों में कैंसर के इलाज की बढ़ती लागत, दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता और आम मरीजों के लिए सस्ती जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दवाओं के PTR और MRP के बीच बड़े अंतर पर सवाल उठे हैं, जबकि केरल हाई कोर्ट ने सार्वजनिक हित में सरकार के पास मौजूद कानूनी शक्तियों पर टिप्पणी की है। दोनों सुनवाइयों में दवाओं की कीमत तय करने की व्यवस्था और मरीजों पर पड़ने वाले खर्च से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई है।

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- लोकतंत्र को कमजोर कर रही चुनाव प्रक्रिया

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- लोकतंत्र को कमजोर कर रही चुनाव प्रक्रिया

    नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। दिल्ली के इंदिरा भवन में हुई बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग को लेकर चर्चा की गई। खड़गे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं और मतदाता सूची से नाम हटाकर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।

    खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश के पूर्वजों द्वारा बनाई गई मजबूत लोकतांत्रिक नींव को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया है। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में उन्होंने कहा कि पूरा देश अब जानता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का उद्देश्य भाजपा को लाभ पहुंचाना है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि जिनके दबाव में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कथित तौर पर ऐसा किया, प्रधानमंत्री मोदी को भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर पार्टी की चिंताओं को बैठक में रखा।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर भी अपनी मांग सामने रखी। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने और अपील करने का अवसर भी मिलना चाहिए। खड़गे ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और फैसलों में पारदर्शिता की मांग की। उनका कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव से जुड़े निर्णयों के संबंध में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता बनी रहे।

    खड़गे ने कहा कि देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी एक बार फिर कांग्रेस के कंधों पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों के दौरान देश की मजबूत लोकतांत्रिक नींव को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया है। उनके अनुसार, चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई।

    मंगलवार की बैठक में खड़गे के बयानों के केंद्र में चुनाव आयोग की भूमिका, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और चुनावी फैसलों में पारदर्शिता के मुद्दे रहे। खड़गे ने अपने आरोपों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई और प्रधानमंत्री मोदी से भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है।

  • पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अहम बातचीत, अंतरिम डील आगे बढ़ाने पर जोर

    पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अहम बातचीत, अंतरिम डील आगे बढ़ाने पर जोर

    नई दिल्ली, 29 सितंबर। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देश संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में भी प्रयास कर रहे हैं।

    पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वह 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को विस्कॉन्सिन के मिल्वौकी में होने वाली जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होने की संभावना है।यात्रा के दौरान गोयल की अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के साथ होने वाली बातचीत पर विशेष ध्यान रहेगा। दोनों पक्ष भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने और 7 फरवरी 2026 के संयुक्त बयान के अनुरूप अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।

    भारत की प्राथमिकताओं में अपने निर्यातकों के लिए बेहतर बाजार पहुंच और प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में स्पष्ट टैरिफ लाभ हासिल करना शामिल है। भारत चाहता है कि उसके उत्पादों को अमेरिकी बाजार में ऐसी परिस्थितियां मिलें, जिससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हो और व्यापारिक अवसरों का विस्तार हो सके।

    दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की रूपरेखा को लेकर बातचीत पहले से जारी है। भारत मुख्य रूप से मोस्ट फेवर्ड नेशन यानी एमएफएन टैरिफ व्यवस्था के तहत काम करता है, जबकि अमेरिका मौजूदा समय में कार्यकारी आदेशों के जरिए टैरिफ लागू कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करना महत्वपूर्ण है, जिससे टैरिफ संबंधी अंतर को संबोधित किया जा सके और कंपनियों को प्राथमिकता आधारित बाजार पहुंच मिल सके।जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भारत विश्व व्यापार संगठन के केंद्र में रहते हुए नियम-आधारित, खुली, समावेशी, पारदर्शी, न्यायसंगत और भेदभावरहित वैश्विक व्यापार व्यवस्था के समर्थन पर जोर देगा। साथ ही विकासशील देशों के लिए पर्याप्त नीतिगत लचीलापन बनाए रखने की आवश्यकता भी उठाई जाएगी।

    अमेरिका यात्रा के दौरान पीयूष गोयल व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से कई द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। इन चर्चाओं में किसानों, मछुआरों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों और अन्य कारोबारी वर्गों के लिए नए अवसर पैदा करने से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा।गोयल मिल्वौकी और शिकागो में विनिर्माण, उपभोक्ता वस्तु, कृषि व्यवसाय, रिटेल और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख अमेरिकी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में भारत में निवेश, विनिर्माण क्षमता के विस्तार, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति शृंखला साझेदारी जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

    इस यात्रा के दौरान व्यापार समझौते के साथ भारत-अमेरिका व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों पर भी बातचीत होगी। जी20 मंच पर बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और द्विपक्षीय स्तर पर बाजार पहुंच तथा टैरिफ संबंधी विषयों पर चर्चा के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

  • ‘मेरा बेटा जिंदा लौटेगा सोचा था, अब उसकी लाश मिली’, मां का छलका दर्द, आश्रम से 10 बार लौटाए जाने का दावा, परिवार में पसरा मातम

    ‘मेरा बेटा जिंदा लौटेगा सोचा था, अब उसकी लाश मिली’, मां का छलका दर्द, आश्रम से 10 बार लौटाए जाने का दावा, परिवार में पसरा मातम


    जबलपुर । जबलपुर के परसवाड़ा निवासी 27 वर्षीय दीपक उर्फ रसिक दुलारी शरण की वृंदावन में मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। परिवार ने घटना को लेकर कई सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दीपक की मां उमा पटेल का कहना है कि उनका बेटा करीब दो साल पहले वृंदावन गया था और उसके बाद परिवार उसकी एक झलक के लिए भी तरसता रहा। परिवार का दावा है कि वे कई बार वृंदावन पहुंचे लेकिन उन्हें दीपक से मिलने नहीं दिया गया। अब उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है।

    परिवार के मुताबिक दीपक पढ़ाई पूरी करने के बाद सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था। उसने लिखित परीक्षा और दौड़ में सफलता हासिल की थी लेकिन शारीरिक परीक्षा में वह चयनित नहीं हो सका। इसके बाद उसका झुकाव धार्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ने लगा। वह गांव में भजन और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रहने लगा था। साल 2023 में वह भय्याजी सरकार दादा गुरु की नर्मदा परिक्रमा सेवा टोली से भी जुड़ा था।

    करीब आठ महीने बाद जब दीपक जबलपुर लौटा तो उसके व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा। वह बार बार वृंदावन जाने की इच्छा जताता था। परिवार की ओर से आपत्ति के बावजूद फरवरी 2024 में वह वृंदावन चला गया और वहां आश्रम में सेवा करने लगा। कुछ समय बाद उसने अपने माता पिता को फोन कर गुरु दीक्षा लेने की जानकारी दी। उसने परिवार से कहा था कि उसका जबलपुर में मन नहीं लगता और वह आश्रम में रहकर सेवा करना चाहता है।

    परिवार का कहना है कि उन्होंने बेटे की इच्छा का सम्मान किया। बाद में दीपक कुछ समय के लिए जबलपुर भी आया लेकिन धीरे धीरे परिवार से उसका संपर्क कम होता गया। उसके पास मोबाइल नहीं रहता था और करीब चार महीने बाद संपर्क पूरी तरह बंद हो गया। जुलाई 2024 में माता पिता और उसका छोटा भाई वृंदावन पहुंचे लेकिन परिवार के अनुसार उन्हें दीपक से मिलने नहीं दिया गया।

    परिजनों का दावा है कि इसके बाद वे कई बार वृंदावन गए। परिवार के मुताबिक 10 से ज्यादा बार आश्रम पहुंचने के बावजूद उन्हें गेट से ही वापस लौटना पड़ा। जून 2026 में 17 से अधिक परिजन एक साथ वृंदावन पहुंचे थे लेकिन तब भी दीपक से मुलाकात नहीं हो सकी। इस दौरान परिवार को जानकारी मिली कि आश्रम में दीपक का नाम रसिक दुलारी शरण हो गया है। परिवार का कहना है कि यह नाम कब बदला गया इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई।

    दीपक की मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार की परेशानी और बढ़ गई। परिजनों के मुताबिक उन्हें फोन पर बताया गया कि दीपक के साथ हादसा हुआ है और वह इमारत से गिर गया है। इसके बाद परिवार वृंदावन के लिए रवाना हुआ। परिवार का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद उन्हें यह पता लगाने में भी काफी परेशानी हुई कि दीपक को किस अस्पताल में ले जाया गया है और उसका शव कहां रखा है।

    काफी तलाश के बाद परिजन अस्पताल पहुंचे जहां उन्हें दीपक का शव मिला। परिवार का कहना है कि शुरुआत में उन्हें केवल हादसे और उपचार की जानकारी दी गई थी। बाद में सामने आई मौत की जानकारी ने परिवार को झकझोर दिया। दीपक की मां का कहना है कि उनका बेटा सेना में जाना चाहता था लेकिन बाद में भक्ति की राह पर चला गया और अब परिवार के पास उसकी यादें ही बची हैं।

    परिवार ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दीपक दो साल से परिवार से दूर था और कई बार वृंदावन जाने के बावजूद उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। अब वे यह जानना चाहते हैं कि उसके साथ आखिर क्या हुआ और उसकी मौत से पहले की पूरी परिस्थितियां क्या थीं। मामले में जांच के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • म्यांमार के रखाइन में बाजार के पास हवाई हमला, 49 लोगों की मौत, 58 घायल; 22 की हालत गंभीर

    म्यांमार के रखाइन में बाजार के पास हवाई हमला, 49 लोगों की मौत, 58 घायल; 22 की हालत गंभीर

    नई दिल्ली। म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य में स्थानीय बाजार के पास हुए हवाई हमले में कम से कम 49 लोगों की मौत हो गई, जबकि 58 अन्य घायल बताए गए हैं। क्याउक्ताव टाउनशिप में सोमवार दोपहर हुए इस हमले में बाजार में सामान बेच रहे व्यापारी, खरीदारी करने पहुंचे लोग और राहगीर भी चपेट में आ गए। घायलों में 22 लोगों की हालत गंभीर बताई गई है। हमले के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, हताहतों की संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

    अराकान आर्मी की ओर से मंगलवार तड़के जारी बयान के मुताबिक, सोमवार दोपहर एक लड़ाकू विमान ने क्याउक्ताव टाउनशिप में स्थित स्थानीय बाजार के पास दो बम गिराए। संगठन के अनुसार, हमले में 49 लोगों की मौत हुई और 58 लोग घायल हुए। घायलों में 22 की स्थिति गंभीर बताई गई है। रखाइन में बचाव कार्य से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी वाई हुन आंग ने भी घटनास्थल पर मौजूद बचावकर्मियों के हवाले से हताहतों की संख्या की पुष्टि की। हमले के बाद प्रभावित इलाके में बचाव और राहत से जुड़े प्रयास किए गए।

    क्याउक्ताव टाउनशिप म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य में स्थित है और इस क्षेत्र पर शक्तिशाली जातीय सशस्त्र संगठन अराकान आर्मी का नियंत्रण है। यह इलाका मांडले से करीब 340 किलोमीटर पश्चिम में है। हमले की चपेट में आया बाजार पूरे रखाइन राज्य के प्रमुख थोक केंद्रों में शामिल बताया गया है। यहां अलग-अलग इलाकों से व्यापारी और खरीदार पहुंचते थे। बचाव कार्य से जुड़े अधिकारी वाई हुन आंग ने इस हमले को रखाइन में हुए सबसे घातक हवाई हमलों में से एक बताया है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    हमले के बाद अराकान आर्मी ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों और संगठनों के खिलाफ जल्द प्रभावी जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। इस घटना को म्यांमार में लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच हुई एक बड़ी हिंसक घटना के तौर पर बताया गया है। क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई और सशस्त्र संगठनों के बीच संघर्ष के कारण आम लोगों की सुरक्षा लगातार प्रभावित होती रही है। बाजार जैसे सार्वजनिक स्थान पर हमले के कारण बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

    म्यांमार में 1 फरवरी 2021 को सेना द्वारा आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को सत्ता से हटाए जाने के बाद से संघर्ष जारी है। सैन्य शासन के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई के बाद कई लोकतंत्र समर्थक समूहों ने हथियार उठा लिए थे। इसके बाद सेना और विभिन्न विद्रोही संगठनों के बीच संघर्ष तेज हुआ। देश के कई हिस्सों में हवाई हमलों और सशस्त्र झड़पों की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसी जारी संघर्ष के बीच पश्चिमी रखाइन राज्य के क्याउक्ताव टाउनशिप में बाजार के पास हुए इस हवाई हमले में 49 लोगों की मौत और 58 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई, आयोग के फैसलों की प्रक्रिया पर उठे सवाल

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई, आयोग के फैसलों की प्रक्रिया पर उठे सवाल


    नई दिल्ली।
    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। मामले को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने उठाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग रखी, जिसके बाद अदालत ने याचिका को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी। याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि क्या चुनाव आयोग जैसे बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्थान से जुड़े फैसले अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए जा सकते हैं।

    याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के नाम पर कुछ फैसले चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना लिए गए। इसमें कहा गया है कि आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के संबंधित कानून की धारा 18 के तहत सामूहिक रूप से फैसले लेने की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। याचिका में चुनाव आयोग के बहुसदस्यीय स्वरूप, निर्णय लेने की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने समेत कई मांगें भी की गई हैं।

    मामले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से सवाल उठाया गया है कि SIR से जुड़े फैसले पूरे आयोग की सहमति या बहुमत से लिए गए थे या नहीं। याचिका में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मामलों में आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों को चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा गया है और इसी आधार पर याचिका में आयोग के सामूहिक निर्णय लेने के अधिकार तथा प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।

    याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ी मांगों के साथ यह भी कहा गया है कि आयोग में निहित सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आयोग के नाम पर लिए गए फैसलों में सभी सदस्यों की भूमिका और सहमति किस तरह रही। इस मामले का एक प्रमुख हिस्सा SIR से जुड़े निर्णय हैं, जिनको लेकर याचिका में यह जानने की मांग की गई है कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिए गए थे या नहीं।

    वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र प्रशासनिक मुद्दों से जुड़े थे और उनका SIR या आयोग के नीतिगत फैसलों से संबंध नहीं था। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया, मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर उठाए गए सवालों पर सुनवाई होगी। अदालत अगले सप्ताह इस मामले में याचिका में की गई मांगों और उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगी।

  • शरद पवार ने NCP विलय की अटकलों पर साफ किया रुख, बोले- हम कहीं नहीं जाएंगे, साथ आना है तो हमारे साथ आएं

    शरद पवार ने NCP विलय की अटकलों पर साफ किया रुख, बोले- हम कहीं नहीं जाएंगे, साथ आना है तो हमारे साथ आएं

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में NCP (SP) के संभावित विलय और NDA के साथ जाने को लेकर चल रही अटकलों के बीच शरद पवार ने सोमवार को पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया। मुंबई में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए NCP (SP) प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी कहीं नहीं जाने वाली है। उन्होंने साफ कहा कि यदि किसी को उनके साथ आना है तो वह उनके साथ आए। शरद पवार के इस बयान से पार्टी के किसी दूसरे दल में विलय करने और सत्ता पक्ष के साथ जाने की चर्चाओं के बीच उनका रुख सामने आ गया है।

    शरद पवार ने कहा कि पार्टी को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। पिछले कई महीनों से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि NCP (SP) भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA के साथ जा सकती है। इसके साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर भी चर्चा होती रही है। सोमवार को मुंबई में आयोजित पार्टी की बैठक में शरद पवार ने इन चर्चाओं के बीच स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी सत्ता हासिल करने के लिए किसी दूसरे दल में विलय नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि अब संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा।

    पार्टी की राज्य इकाई की बैठक करीब ढाई घंटे तक चली। इस दौरान संगठन से जुड़े मुद्दों के साथ सूखे की स्थिति और किसानों की समस्याओं पर भी चर्चा हुई। शरद पवार ने कहा कि बैठक में उन्हें सूखे को लेकर कई तरह की मांगें और सुझाव मिले हैं। उन्होंने सूखा राहत के मुद्दे पर सरकार को आंदोलन की चेतावनी भी दी। बैठक में किसानों से जुड़े विषयों पर चर्चा के साथ सूखे की स्थिति को लेकर पार्टी की आगे की रणनीति पर भी विचार किया गया। शरद पवार ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के सामने मांगें रखने की बात कही।

    शरद पवार के बयान में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को भी अप्रत्यक्ष संदेश माना गया। सुनेत्रा पवार अजित पवार गुट से जुड़ी हैं। NCP के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर लंबे समय से राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। ऐसे समय में शरद पवार ने कहा कि NCP (SP) कहीं नहीं जा रही है और अगर किसी को उनके साथ आना है तो वह उनके साथ आए। उनके इस रुख के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।

    NCP (SP) फिलहाल महा विकास आघाड़ी का हिस्सा है। इस गठबंधन में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूटीबी) और कांग्रेस भी शामिल हैं। शरद पवार के बयान से पार्टी की मौजूदा राजनीतिक दिशा को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है। वहीं, बैठक में सूखे और किसानों की समस्याओं को लेकर भी पार्टी ने सरकार पर दबाव बनाने का संकेत दिया। इस तरह सोमवार की बैठक में संगठन को मजबूत करने, विलय की अटकलों और सूखा राहत जैसे प्रमुख मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे।