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  • एमपी में कलेक्टरों की होगी ग्राउंड रिपोर्ट, शिकायतों के समाधान से लेकर विकास तक हर पैमाने पर होगी रैंकिंग

    एमपी में कलेक्टरों की होगी ग्राउंड रिपोर्ट, शिकायतों के समाधान से लेकर विकास तक हर पैमाने पर होगी रैंकिंग


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। 7 अगस्त से शुरू होने वाला मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान केवल जनता की समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रदेश के सभी 55 कलेक्टरों के प्रदर्शन की असली परीक्षा भी बनेगा। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि इस अभियान के दौरान तैयार होने वाली जिलों की रैंकिंग भविष्य में कलेक्टरों की पोस्टिंग, बड़े जिलों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक महत्व तय करने का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

    मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने हाल ही में सभी कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर अभियान की रूपरेखा स्पष्ट की। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। यह अभियान 7 अगस्त से शुरू होकर 8 जनवरी तक चलेगा और इस दौरान प्रशासन की कार्यशैली का व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि कलेक्टरों का मूल्यांकन केवल शिकायतों के निपटारे की संख्या के आधार पर नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि शिविरों, जनसंवाद कार्यक्रमों और फील्ड विजिट के बाद संबंधित क्षेत्र में लंबित शिकायतों में वास्तव में कितनी कमी आई। इसके साथ ही यह भी परखा जाएगा कि आम नागरिकों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ और जिले में आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए प्रशासन ने कितना प्रभावी काम किया।

    मूल्यांकन के प्रमुख पैमानों में लोक सेवा प्रदाय व्यवस्था, शिकायतों के त्वरित समाधान, विभागीय समन्वय, आर्थिक विकास की रफ्तार और जनता के बीच प्रशासन की स्वीकार्यता शामिल रहेगी। सरकार कलेक्टरों की संवेदनशीलता और आम लोगों के साथ उनके व्यवहार को भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएगी। यानी केवल फाइलों में उपलब्ध आंकड़े ही नहीं, बल्कि जमीनी असर भी परखा जाएगा।

    अभियान के दौरान प्रत्येक शुक्रवार को विकासखंड और क्लस्टर स्तर तक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार रोस्टर तैयार होगा और जनसंवाद शिविरों में मिलने वाले नए आवेदनों का पंजीयन कर अगली यात्रा से पहले उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। यदि कोई मामला जिला स्तर पर हल नहीं हो सकता तो उसे संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या विभागाध्यक्ष के साथ समन्वय स्थापित कर समयबद्ध तरीके से निपटाया जाएगा।

    सरकार ने विभाग प्रमुखों को भी सक्रिय भूमिका सौंपी है। सभी विभागाध्यक्ष अपने-अपने विभागों की संस्थाओं के निरीक्षण के लिए मानक प्रारूप तैयार करेंगे, जबकि संभागायुक्त नियमित रूप से जिलों का दौरा कर अभियान की निगरानी करेंगे। साथ ही विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी जिलों में पहुंचकर निरीक्षण, समीक्षा और जनसंवाद कार्यक्रमों में भाग लेंगे। जहां मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव स्वयं दौरा करेंगे, वहां पूरे जिले की व्यापक समीक्षा के साथ ऑनलाइन समाधान कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

    जनविश्वास अभियान के तहत उद्योग और रोजगार को भी प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय कुटीर उद्योगों, एमएसएमई इकाइयों और उद्यमियों के साथ संवाद कर लाइसेंस, एनओसी, लोक सेवा गारंटी और अन्य प्रशासनिक अड़चनों का समाधान किया जाएगा, ताकि आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके।

    राज्य सरकार का उद्देश्य केवल प्रशासनिक निगरानी करना नहीं, बल्कि ऐसा प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार करना है, जिसमें प्रत्येक जिला बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रयास करे। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो मध्य प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और जनसेवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। जनविश्वास अभियान इस लिहाज से प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल साबित हो सकता है।

  • मस्जिद में नौकरी का सपना टूटा, 40 कमरों के टॉयलेट साफ कराए, भारतीय दूतावास ने कराई वतन वापसी

    मस्जिद में नौकरी का सपना टूटा, 40 कमरों के टॉयलेट साफ कराए, भारतीय दूतावास ने कराई वतन वापसी


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के दीवानगंज निवासी मोहम्मद फैजान बेहतर भविष्य और धार्मिक सेवा का सपना लेकर ओमान गए थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी एक दर्दनाक संघर्ष में बदल गई। मस्जिद में इमामत कराने का वादा करने वाले एजेंट ने उन्हें विदेश तो भेज दिया, लेकिन वहां उनसे धार्मिक कार्य की जगह 30 से 40 कमरों वाले सरकारी कार्यालय में टॉयलेट साफ कराने, बर्तन धुलवाने और सफाई का काम कराया गया। कई दिनों तक भूखे रहकर 14 से 15 घंटे मजदूरी करने को मजबूर फैजान आखिरकार भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की मदद से करीब ढाई महीने बाद अपने घर लौट सके।

    फैजान ने बताया कि जनवरी 2026 में उनकी मुलाकात एक एजेंट से हुई थी। एजेंट ने भरोसा दिलाया कि ओमान की एक मस्जिद में उन्हें इमाम के रूप में नियुक्त किया जाएगा। शुरुआत में 20 हजार रुपए लिए गए और बाद में मेडिकल व अन्य औपचारिकताओं के नाम पर कुल मिलाकर करीब दो लाख रुपए वसूल लिए गए। परिवार ने बड़ी मुश्किल से यह रकम जुटाई और 4 मई 2026 को फैजान ओमान के मस्कट पहुंच गए।

    मस्कट पहुंचने के बाद उन्हें दो-तीन दिन कंपनी के पास रखा गया, लेकिन जल्द ही सच्चाई सामने आ गई। जिस धार्मिक सेवा के लिए उन्हें भेजा गया था, उसकी जगह उन्हें एक मंत्रालय के कार्यालय में सफाई कर्मचारी बना दिया गया। रोजाना दर्जनों कमरों, टॉयलेट, बाथरूम और बर्तनों की सफाई कराई जाती थी। लंबे समय तक लगातार 14 से 15 घंटे काम लेने के बावजूद न तो उन्हें वेतन दिया गया और न ही भोजन की पर्याप्त व्यवस्था की गई।

    फैजान के मुताबिक जब भी उन्होंने वेतन या खाने के लिए पैसे मांगे तो कंपनी हर बार टालती रही। धीरे-धीरे उनके पास मौजूद सारी रकम खत्म हो गई। कई बार लगातार चार-चार दिन तक उन्हें बिना भोजन के रहना पड़ा। ऐसे कठिन समय में कंपनी ने कोई मदद नहीं की, बल्कि वहां रहने वाले कुछ भारतीय नागरिक उनके सहारा बने। मस्कट में रहने वाले नवाब भाई ने उन्हें खाने के लिए पैसे दिए, जबकि मोहम्मद खलील अहमद ने लगभग डेढ़ महीने तक अपने घर में रखकर भोजन और रहने की व्यवस्था की।

    मदद की उम्मीद में फैजान लगातार उस एजेंट से संपर्क करते रहे जिसने उन्हें विदेश भेजा था। शुरुआत में एजेंट हर बार एक-दो दिन इंतजार करने की बात कहकर उन्हें टालता रहा, लेकिन बाद में उसने उनका नंबर ही ब्लॉक कर दिया। जब फैजान ने कंपनी से भारत लौटने की इच्छा जताई तो उनसे 650 ओमानी रियाल जमा कराने की शर्त रख दी गई। इसी दौरान कंपनी ने उनका पासपोर्ट भी अपने कब्जे में ले लिया, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई।

    18 जुलाई को यह मामला भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन तक पहुंचा। उन्होंने तुरंत भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और भारतीय प्रवासी सहायता केंद्र को शिकायत भेजी। शिकायत मिलने के बाद भारतीय दूतावास ने दस्तावेजों की प्रक्रिया शुरू कराई और लेबर कोर्ट से एग्जिट परमिट दिलवाया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 26 जुलाई को उनकी वापसी की मंजूरी मिली। 28 जुलाई की रात फैजान मुंबई पहुंचे और 30 जुलाई को अपने गृह गांव दीवानगंज लौट आए।

    सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन ने बताया कि उन्होंने अब तक विदेशों में फंसे 1500 से अधिक भारतीयों की सुरक्षित वापसी में मदद की है। उनका कहना है कि यदि पीड़ित समय रहते सही दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराएं तो भारतीय दूतावास अधिकांश मामलों में प्रभावी कार्रवाई करता है। फैजान की आपबीती विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से सावधान रहने और केवल अधिकृत माध्यमों से ही विदेश जाने की अहम सीख भी देती है।

  • कंगना रनौत की टिप्पणी के बाद बढ़ी बहस, आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा पर दिया जोर

    कंगना रनौत की टिप्पणी के बाद बढ़ी बहस, आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा पर दिया जोर

    नई दिल्ली । अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की जेन-जी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद शुरू हुई बहस लगातार तेज होती जा रही है। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच अभिनेता आशुतोष राणा ने भाषा की गरिमा, संवाद की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार अभिव्यक्ति को लेकर अपनी राय साझा की है। उनके बयान को विवाद से इतर संतुलित और विचारशील दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी करने के बजाय भाषा के महत्व पर जोर दिया।

    हाल के दिनों में छात्र विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में कंगना रनौत की जेन-जी से जुड़ी टिप्पणी चर्चा का विषय बनी हुई है। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक बहस छिड़ गई। एक वर्ग ने उनकी भाषा और अभिव्यक्ति पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया। देखते ही देखते यह मुद्दा मनोरंजन जगत से निकलकर सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया।

    इसी क्रम में पटना प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में शब्दों की भूमिका पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व केवल उसके कार्यों से नहीं, बल्कि उसकी भाषा और व्यवहार से भी पहचाना जाता है। उनके अनुसार शब्द व्यक्ति के संस्कार, सोच और दृष्टिकोण का परिचय देते हैं, इसलिए बोलते समय संयम और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

    आशुतोष राणा ने कहा कि भाषा केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज में सम्मान और विश्वास का आधार भी बनती है। उन्होंने कहा कि एक ही शब्द किसी संबंध को मजबूत भी कर सकता है और अनावश्यक विवाद का कारण भी बन सकता है। इसलिए सार्वजनिक मंचों पर बोलने वाले लोगों को अपने शब्दों के प्रभाव और सामाजिक जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    इस विवाद पर मनोरंजन जगत के अन्य कलाकारों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। अभिनेता सोनू सूद ने भी हाल ही में सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को सोच-समझकर अपनी बात रखने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के बयान समाज के बड़े वर्ग को प्रभावित करते हैं, इसलिए संवाद में संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है।

    दूसरी ओर कंगना रनौत ने अपने बयान का बचाव करते हुए सोशल मीडिया पर कई पोस्ट साझा किए। उन्होंने छात्र आंदोलन और वायरल वीडियो से जुड़े संदर्भों का उल्लेख करते हुए अपने विचार दोहराए। साथ ही उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर भी अपनी राय रखी, जिसके बाद यह बहस और अधिक व्यापक हो गई। उनके समर्थक और आलोचक लगातार अपने-अपने पक्ष में तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।

    पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक जिम्मेदारी और भाषा की मर्यादा जैसे विषयों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति व्यक्त करते समय संवाद की गरिमा बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया, राजनीतिक विमर्श और मनोरंजन जगत में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है तथा आने वाले दिनों में भी इस पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

  • भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ की ऐतिहासिक रफ्तार, तीन दिन की रिकॉर्ड कमाई ने बदले हॉलीवुड फिल्मों के मानक

    भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ की ऐतिहासिक रफ्तार, तीन दिन की रिकॉर्ड कमाई ने बदले हॉलीवुड फिल्मों के मानक

    नई दिल्ली । हॉलीवुड सुपरहीरो फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ भारतीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। टॉम हॉलैंड की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म ने रिलीज के पहले तीन दिनों में ही ऐसी कमाई दर्ज की है, जिसने भारत में हॉलीवुड फिल्मों के कारोबार का नया अध्याय लिख दिया है। दर्शकों के बीच फिल्म को मिल रहे उत्साह और बड़े पैमाने पर टिकट बिक्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुपरहीरो शैली की फिल्मों का आकर्षण भारतीय बाजार में अब भी मजबूत बना हुआ है।

    फिल्म ने रिलीज के पहले दिन से ही जबरदस्त शुरुआत करते हुए लगभग 60 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन दर्ज किया। इस प्रदर्शन के साथ यह भारत में हॉलीवुड फिल्मों की सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई। शुरुआती दिन की सफलता ने यह संकेत दे दिया था कि फिल्म आगे भी मजबूत रफ्तार बनाए रख सकती है। दूसरे दिन भी टिकट खिड़की पर इसका प्रदर्शन स्थिर रहा और कुल नेट कारोबार 100 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया, जिससे इसकी मजबूत पकड़ और स्पष्ट हो गई।

    तीसरे दिन फिल्म की कमाई में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। शनिवार को दर्शकों की बढ़ी हुई संख्या का सीधा असर बॉक्स ऑफिस पर दिखाई दिया और फिल्म ने लगभग 66.75 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन दर्ज किया। इसके साथ ही तीन दिनों में इसका कुल भारतीय नेट संग्रह करीब 176.70 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी उपलब्धि के साथ ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ भारत में सबसे तेज 150 करोड़ रुपये का नेट बॉक्स ऑफिस आंकड़ा पार करने वाली हॉलीवुड फिल्म बन गई।

    देशभर में फिल्म को बड़े पैमाने पर स्क्रीन और शो उपलब्ध कराए गए हैं। लगभग 17 हजार शो के साथ रिलीज हुई इस फिल्म को महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी दर्शकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। कई प्रमुख मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघरों में दर्शक उपस्थिति मजबूत रही, जिससे टिकट बिक्री में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। प्रीमियम फॉर्मेट स्क्रीन पर भी फिल्म को अच्छी प्रतिक्रिया मिली, जिसने इसके कुल संग्रह को और मजबूती प्रदान की।

    फिल्म की सफलता का असर अन्य फिल्मों के प्रदर्शन पर भी दिखाई दे रहा है। इसी दौरान रिलीज हुई कई फिल्मों की तुलना में ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ ने टिकट खिड़की पर स्पष्ट बढ़त बनाए रखी है। लोकप्रिय किरदार, बड़े स्तर का प्रचार, व्यापक रिलीज और सकारात्मक दर्शक प्रतिक्रिया ने इसकी कमाई को लगातार गति दी है। यही कारण है कि शुरुआती सप्ताहांत में फिल्म ने अपेक्षाओं से बेहतर प्रदर्शन किया।

    मार्वल की यह नई पेशकश भारतीय बाजार में हॉलीवुड फिल्मों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। शुरुआती तीन दिनों के आंकड़े संकेत देते हैं कि फिल्म आने वाले दिनों में कई अन्य रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकती है। यदि सप्ताहांत के शेष दिनों में भी दर्शकों का उत्साह इसी तरह बना रहता है, तो इसका कुल बॉक्स ऑफिस संग्रह और अधिक ऊंचाई तक पहुंच सकता है।

    फिल्म कारोबार से जुड़े जानकारों का मानना है कि भारत में अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के लिए बढ़ती दर्शक संख्या, एडवांस बुकिंग का मजबूत रुझान और प्रीमियम सिनेमाघरों में बेहतर प्रदर्शन ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। फिलहाल ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ भारतीय बॉक्स ऑफिस पर सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है और इसकी कमाई के आगामी आंकड़ों पर पूरे फिल्म उद्योग की नजर बनी हुई है।

  • आप सैलरी बताइए, सरकार देगी', एमपी की नई हेल्थ पॉलिसी से ग्रामीण अस्पतालों की बदलेगी तस्वीर

    आप सैलरी बताइए, सरकार देगी', एमपी की नई हेल्थ पॉलिसी से ग्रामीण अस्पतालों की बदलेगी तस्वीर


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा और अनोखा कदम उठाया है। लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों में अब मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत ‘यू कोट, वी पे’ नीति लागू करने की तैयारी की गई है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य विशेषज्ञ डॉक्टरों को गांवों और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए आकर्षित करना है, ताकि गरीब और आदिवासी मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ न लगानी पड़े।

    नई नीति के तहत सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे बातचीत करेगी और उनसे पूछेगी कि ग्रामीण क्षेत्र में सेवाएं देने के लिए वे कितना वेतन चाहते हैं। डॉक्टर अपनी अपेक्षित सैलरी बताएंगे और आपसी सहमति के आधार पर उनका मानदेय तय किया जाएगा। यही वजह है कि इस योजना को ‘यू कोट, वी पे’ यानी ‘आप मांगिए, हम देंगे’ नाम दिया गया है। सरकार का मानना है कि तय वेतन की वजह से जो विशेषज्ञ डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से बचते हैं, वे इस व्यवस्था के बाद वहां सेवाएं देने के लिए तैयार होंगे।

    सरकार ने केवल आकर्षक वेतन तक ही इस योजना को सीमित नहीं रखा है। दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले डॉक्टरों को विशेष दुर्गम क्षेत्र भत्ता, बेहतर आवास और भविष्य में पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) में प्रवेश के दौरान अतिरिक्त लाभ भी मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को पीजी एडमिशन में प्राथमिकता और बोनस अंक दिए जाएंगे, जिससे उनका करियर भी तेजी से आगे बढ़ सके।

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। महिला रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों को सिजेरियन ऑपरेशन और जच्चा-बच्चा की सुरक्षा से जुड़े मामलों में अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाएगा। इससे ग्रामीण अस्पतालों में प्रसव के दौरान होने वाली जटिल परिस्थितियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकेगा और गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा।

    ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) और अन्य फील्ड स्टाफ को भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, टीकाकरण, स्वास्थ्य रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज करने और किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रमों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को बोनस दिया जाएगा। इससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।

    डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार सामान्य चिकित्सकों को मल्टी-स्किलिंग प्रशिक्षण भी दे रही है। इस प्रशिक्षण के जरिए एक डॉक्टर प्रसूति सेवाएं, बच्चों का प्राथमिक उपचार और बेसिक एनेस्थीसिया जैसी कई जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम होगा। इससे विशेषज्ञों की कमी के बावजूद मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं होगा।

    लोकसभा में रतलाम-झाबुआ-अलीराजपुर की सांसद अनिता नागरसिंह चौहान द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने भी स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि मध्य प्रदेश में 14 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है, जिनमें छह आदिवासी बहुल जिलों में स्थापित किए जाएंगे। इन मेडिकल कॉलेजों के निर्माण पर होने वाले खर्च का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ‘यू कोट, वी पे’ नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो मध्य प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर हो सकती है। इससे गरीब और आदिवासी परिवारों को अपने जिले में ही बेहतर इलाज मिलेगा, स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा बढ़ेगा और ग्रामीण चिकित्सा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

  • सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण: छह मिनट 23 सेकंड तक दिन में छाएगा अंधेरा

    सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण: छह मिनट 23 सेकंड तक दिन में छाएगा अंधेरा

    नई दिल्ली। 2 अगस्त 2027 को दुनिया एक बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना की गवाह बनेगी। इस दिन 21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा और पृथ्वी के कुछ हिस्सों में दिन के समय करीब 6 मिनट 23 सेकंड तक पूर्ण अंधेरा रहेगा।
    खगोलविद इसे इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण और दुर्लभ खगोलीय घटनाओं में से एक मान रहे हैं।

    क्यों खास है यह सूर्य ग्रहण?
    यह पूर्ण सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर से शुरू होकर दक्षिणी स्पेन, जिब्राल्टर, उत्तरी अफ्रीका और मध्य-पूर्व के कई हिस्सों से गुजरेगा। इसका सबसे लंबा पूर्ण चरण मिस्र के लक्सर के आसपास देखा जाएगा, जहां लगभग 6 मिनट 23 सेकंड तक सूर्य पूरी तरह चंद्रमा से ढका रहेगा।

    इतनी लंबी अवधि का पूर्ण सूर्य ग्रहण जमीन से देखने का अवसर बेहद दुर्लभ होता है। यही वजह है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक, खगोल फोटोग्राफर और लाखों स्काई-वॉचर्स इस घटना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

    इतना लंबा ग्रहण क्यों होगा?

    इस ग्रहण की असाधारण अवधि के पीछे पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की विशेष खगोलीय स्थिति जिम्मेदार होगी।

    ग्रहण के समय चंद्रमा पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब होगा, इसलिए उसका दृश्य आकार बड़ा दिखाई देगा।
    उसी समय पृथ्वी सूर्य से लगभग अपनी अधिकतम दूरी (एपहेलियन) के पास होगी, जिससे सूर्य सामान्य से थोड़ा छोटा दिखाई देगा।
    इन दोनों परिस्थितियों के कारण चंद्रमा सूर्य को अधिक समय तक पूरी तरह ढक सकेगा और पूर्ण ग्रहण की अवधि सामान्य ग्रहणों की तुलना में काफी लंबी होगी।
    किन देशों में दिखाई देगा?

    पूर्ण सूर्य ग्रहण का मार्ग हजारों किलोमीटर लंबा होगा।

    यह इन क्षेत्रों से होकर गुजरेगा।

    अटलांटिक महासागर
    दक्षिणी स्पेन
    जिब्राल्टर
    मोरक्को
    अल्जीरिया
    ट्यूनीशिया
    लीबिया
    मिस्र
    सूडान
    सऊदी अरब
    यमन
    सोमालिया

    मिस्र के लक्सर और न्यू वैली क्षेत्र को ग्रहण देखने के लिए सबसे बेहतरीन स्थान माना जा रहा है।

    भारत में यह पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

    पूर्ण ग्रहण के दौरान क्या-क्या दिखाई देगा?
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    पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ मिनटों के लिए दिन का उजाला शाम जैसा महसूस होगा। इस दौरान कई दुर्लभ खगोलीय दृश्य देखने को मिल सकते हैं-

    सूर्य का बाहरी चमकीला वातावरण कोरोना स्पष्ट दिखाई देगा।
    तापमान में कुछ समय के लिए गिरावट महसूस हो सकती है।

    आकाश में चमकीले ग्रह और कुछ तारे भी नजर आ सकते हैं।
    बेलीज़ बीड्स (Baily’s Beads) प्रभाव दिखाई देगा, जब सूर्य की किरणें चंद्रमा की घाटियों से छनकर आती हैं।
    डायमंड रिंग इफेक्ट (Diamond Ring Effect) भी दिखाई देगा, जो पूर्ण सूर्य ग्रहण के सबसे आकर्षक दृश्यों में गिना जाता है।
    वैज्ञानिकों के लिए क्यों अहम है?

    पूर्ण सूर्य ग्रहण केवल एक सुंदर प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन का भी महत्वपूर्ण अवसर होता है। इस दौरान वैज्ञानिक सूर्य के कोरोना, सौर चुंबकीय गतिविधियों और पृथ्वी के वायुमंडल पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत अध्ययन करते हैं। इसी वजह से 2 अगस्त 2027 का यह ग्रहण खगोल विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।

  • कॉमनवेल्थ में मध्य प्रदेश का दम, यामिनी और अजय बाबू ने जीते रजत पदक, सरकार देगी 25-25 लाख और नौकरी

    कॉमनवेल्थ में मध्य प्रदेश का दम, यामिनी और अजय बाबू ने जीते रजत पदक, सरकार देगी 25-25 लाख और नौकरी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का मान बढ़ाया है। जूडो में सागर जिले की किसान परिवार की बेटी यामिनी मौर्य और वेटलिफ्टिंग में अजय बाबू वल्लुरी ने रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर मध्य प्रदेश सरकार ने 25-25 लाख रुपए की पुरस्कार राशि और खेल नीति के तहत सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है और यह सफलता प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

    महिलाओं की 57 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में यामिनी मौर्य ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। स्वर्ण पदक के मुकाबले में उनका सामना इंग्लैंड की असेल्या टोपराक से हुआ, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद रजत पदक जीतकर उन्होंने मध्य प्रदेश और देश का नाम रोशन किया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यामिनी एक सामान्य किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता हरिओम मौर्य खेती करते हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटी के सपनों को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

    यामिनी के कोच दीपक रजक ने बताया कि उन्होंने पहली बार यामिनी की प्रतिभा को पुराने सदर स्कूल के मैदान में खेलते हुए पहचाना था। उन्होंने परिवार को समझाया कि बेटी में असाधारण क्षमता है और उसे नियमित प्रशिक्षण मिलना चाहिए। शुरुआत में आर्थिक स्थिति और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण परिवार थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन बाद में उन्होंने यामिनी का पूरा साथ दिया। लगातार मेहनत और अनुशासन के दम पर यामिनी ने राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाई और अब कॉमनवेल्थ गेम्स का रजत पदक जीतकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

    यामिनी के चाचा श्रीनाथ मौर्य ने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन आज उनकी उपलब्धि पूरे परिवार के संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यदि बेटियों को खेल और शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर मिले तो वे देश के लिए बड़ी सफलताएं हासिल कर सकती हैं। यामिनी की सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है।

    वहीं पुरुषों की 79 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में अजय बाबू वल्लुरी स्वर्ण पदक से केवल एक किलोग्राम दूर रह गए। मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले अजय के पिता भोपाल में पदस्थ हैं और इसी कारण वह लंबे समय से मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अजय ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 149 किलोग्राम वजन उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया, जबकि क्लीन एंड जर्क में 181 किलोग्राम वजन उठाकर गेम्स रिकॉर्ड की बराबरी भी की।

    हालांकि अंतिम प्रयास में मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने 184 किलोग्राम वजन उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बना दिया। उनका कुल स्कोर 331 किलोग्राम पहुंच गया और वे स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे। अजय बाबू महज एक किलोग्राम के अंतर से गोल्ड से चूक गए, लेकिन उनका प्रदर्शन पूरे प्रतियोगिता के दौरान बेहद शानदार रहा।

    दूसरी ओर महिलाओं की 10000 मीटर रेस वॉक में भारत की रवीना गायकवाड़ का अभियान निराशाजनक रहा। रेस वॉकिंग नियमों के उल्लंघन पर उन्हें तीन रेड कार्ड मिलने के बाद अयोग्य घोषित कर दिया गया और उनका सफर वहीं समाप्त हो गया।

    मध्य प्रदेश के दो खिलाड़ियों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यामिनी और अजय बाबू की सफलता प्रदेश के हजारों युवा खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें मेहनत के दम पर पूरा करने की प्रेरणा देती रहेगी।

  • उत्तराखंड में मुख्यमंत्री राहत कोष समेत दस प्रमुख विभागों की वेबसाइट पर साइबर हमला..

    उत्तराखंड में मुख्यमंत्री राहत कोष समेत दस प्रमुख विभागों की वेबसाइट पर साइबर हमला..


    नई दिल्ली ।
    उत्तराखंड में मुख्यमंत्री राहत कोष समेत दस प्रमुख सरकारी विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों पर अचानक हुए एक बड़े मालवेयर हमले के बाद हड़कंप मच गया। शनिवार को हुए इस साइबर हमले के तुरंत बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत प्रभावित सभी वेबसाइटों को बंद करना पड़ा, ताकि डेटा की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। साइबर सुरक्षा से जुड़ी तकनीकी टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद डेटा सेंटर में रखे गए बैकअप की मदद से अधिकांश वेबसाइटों का संचालन सुचारू कर दिया। हालांकि मुख्यमंत्री राहत कोष की वेबसाइट को पूरी तरह से सुरक्षित कर बहाल करने का काम देर तक जारी रहा।

    साइबर हमले की जानकारी मिलते ही सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी की विशेष टीम तुरंत हरकत में आई। तकनीकी विशेषज्ञों ने नेटवर्क में सेंध लगाने वाले मालवेयर को डिटेक्ट कर स्थिति को नियंत्रित किया। जिन प्रमुख विभागों के डिजिटल पोर्टल इस हमले से प्रभावित हुए, उनमें मुख्यमंत्री राहत कोष के अलावा लोक निर्माण विभाग, खाद्य आपूर्ति विभाग, उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा अभिकरण, राज्य कर विभाग, ईएसआईसी, परिवहन विभाग और पर्यटन विभाग शामिल हैं। शुरुआती तकनीकी पड़ताल में इस मालवेयर के तार विदेशी सर्वर से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    डिजिटल सेवाओं को सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई दूरदर्शी रणनीति इस संकट के समय बेहद कारगर साबित हुई। पूर्व में हुए सुरक्षा अनुभवों से सबक लेते हुए एजेंसी ने पहले ही सभी महत्वपूर्ण विभागों के डेटा का नियमित बैकअप सुरक्षित रखना शुरू कर दिया था। इसी बैकअप प्रणाली की वजह से साइबर हमलावरों के मंसूबे पूरी तरह कामयाब नहीं हो सके और महज कुछ ही घंटों के भीतर ज्यादातर वेबसाइटों को पुरानी स्थिति में लाकर शुरू कर दिया गया। सुरक्षा एजेंसियां अब इस हमले के स्रोत और हैकर्स के तरीकों का गहराई से विश्लेषण कर रही हैं।

    उत्तराखंड में सरकारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले वर्ष 2024 के अक्टूबर महीने में राज्य में एक बहुत बड़ा साइबर हमला हुआ था, जिसकी वजह से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन समेत करीब 90 सरकारी वेबसाइटें पूरी तरह ठप हो गई थीं। उस समय व्यवस्था को सामान्य करने में कई दिनों का समय लग गया था। उसी घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर साइबर सुरक्षा ढांचे को काफी मजबूत किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले हमले के बाद लागू किए गए कड़े सुरक्षा मानकों के कारण ही इस बार नुकसान को सीमित रखा जा सका।

    फिलहाल साइबर सुरक्षा विंग राज्य के पूरे डेटा सेंटर और सर्वर नेटवर्क पर पैनी नजर बनाए हुए है। किसी भी अन्य संभावित खतरे को रोकने के लिए फायरवॉल को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। डिजिटल सिस्टम की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह के मालवेयर अटैक को समय रहते नाकाम किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन सरकारी सेवाओं और आम जनता के डेटा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसके लिए सभी आवश्यक तकनीकी उपाय निरंतर किए जा रहे हैं।

  • कॉमनवेल्थ में रजत जीतकर दिखाई संवेदनशीलता, लवलीना ने असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित किया पदक

    कॉमनवेल्थ में रजत जीतकर दिखाई संवेदनशीलता, लवलीना ने असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित किया पदक


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने भले ही स्वर्ण पदक से मामूली दूरी पर रुककर रजत पदक जीता हो, लेकिन उन्होंने अपनी संवेदनशील सोच और मानवीय भावना से पूरे देश का दिल जीत लिया। ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन के बाद लवलीना ने अपना पहला कॉमनवेल्थ पदक असम के बाढ़ पीड़ितों को समर्पित कर दिया। उनकी इस भावनात्मक पहल पर उनके पिता टिकेन बोरगोहेन ने गर्व जताते हुए कहा कि बेटी ने खेल के साथ-साथ इंसानियत का भी बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।

    महिलाओं की 75 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा के फाइनल में लवलीना का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की अमासो ग्रीनटी से हुआ, जिसमें उन्हें 1-4 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि हार के बावजूद उन्होंने अपने करियर का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। मुकाबले के बाद उन्होंने इस उपलब्धि को असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को समर्पित करने का फैसला किया, जिसने उनकी जीत को और भी खास बना दिया।

    लवलीना के पिता टिकेन बोरगोहेन ने बताया कि बेटी प्रतियोगिता के दौरान भी लगातार असम के बाढ़ पीड़ितों की चिंता कर रही थी। उन्होंने कहा कि लवलीना ने उनसे फोन पर बातचीत के दौरान आग्रह किया था कि जितना संभव हो सके बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद की जाए। इसी सोच के साथ लवलीना अकादमी की ओर से लगातार राहत कार्यों में सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेटी द्वारा अपना पदक बाढ़ पीड़ितों को समर्पित करना पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है।

    उन्होंने कहा कि फाइनल में हार का थोड़ा दुख जरूर है, लेकिन सिल्वर मेडल भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। यह लवलीना का कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला पदक है और पूरे परिवार के लिए बेहद खुशी का क्षण है। उनके अनुसार पदक जीतने से भी बड़ी बात यह है कि लवलीना ने अपनी सफलता को जरूरतमंद लोगों के नाम कर दिया।

    लवलीना की इस उपलब्धि पर देशभर से उन्हें बधाइयां मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उन्हें शानदार प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। टिकेन बोरगोहेन ने इन सभी नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को मिलने वाला यह सम्मान उनके मनोबल को और मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि मुकाबले के बाद लवलीना से उनकी संक्षिप्त बातचीत हुई थी और वह रजत पदक जीतने से संतुष्ट होने के साथ-साथ आगे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए भी उत्साहित हैं।

    मुकाबले के बाद लवलीना ने भी स्वीकार किया कि स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का थोड़ा अफसोस जरूर है, लेकिन भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन ने उनकी खुशी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक है, इसलिए इसकी अहमियत उनके लिए बेहद खास है। उनका मानना है कि यदि वह देश के लिए स्वर्ण जीत पातीं तो खुशी और अधिक होती, लेकिन अब उनका पूरा ध्यान आगामी एशियाई खेलों पर है, जहां वह स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरेंगी।

    लवलीना बोरगोहेन ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि एक सच्चा खिलाड़ी केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रहता बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाता है। खेल के मैदान में संघर्ष और मैदान के बाहर संवेदनशीलता का यह अनूठा उदाहरण उन्हें देश के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बनाता है। उनकी उपलब्धि और मानवीय सोच आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को भी समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देती है।

  • बॉक्सिंग में गोल्डन पंच, एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन… भारत ने 16 मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ में बदली तस्वीर

    बॉक्सिंग में गोल्डन पंच, एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन… भारत ने 16 मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ में बदली तस्वीर


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार दिनों में शामिल हो गया। भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही दिन में 16 पदक जीतकर न केवल देश का गौरव बढ़ाया बल्कि पदक तालिका में भी लंबी छलांग लगाते हुए चौथा स्थान हासिल कर लिया। मुक्केबाजी, एथलेटिक्स और पैरा स्पर्धाओं में मिले शानदार परिणामों ने यह साबित कर दिया कि भारत अब कॉमनवेल्थ खेलों में एक मजबूत खेल शक्ति बनकर उभर रहा है।

    भारत ने 10वें दिन के बाद कुल 39 पदक अपने नाम कर लिए हैं। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय दल ने पदक तालिका में छह स्थान की छलांग लगाई और चौथे पायदान पर पहुंच गया। मेजबान स्कॉटलैंड को पीछे छोड़ते हुए भारत ने शीर्ष चार देशों में अपनी जगह मजबूत कर ली है।

    पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा लगातार कायम है। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने अब तक 61 स्वर्ण, 38 रजत और 50 कांस्य सहित कुल 149 पदक जीतकर पहला स्थान बरकरार रखा है। इंग्लैंड 99 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है, जबकि कनाडा 57 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत के चौथे स्थान पर पहुंचने के बाद स्कॉटलैंड पांचवें स्थान पर खिसक गया है। नाइजीरिया, वेल्स और न्यूजीलैंड क्रमशः छठे, सातवें और आठवें स्थान पर बने हुए हैं।

    भारतीय सफलता की सबसे बड़ी कहानी मुक्केबाजी से निकली, जहां खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते। इनमें सात स्वर्ण पदक शामिल रहे। पुरुष वर्ग में अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने स्वर्ण जीतकर देश का मान बढ़ाया। महिला वर्ग में जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी और प्रीति ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी का दबदबा साबित किया। वहीं जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीतकर भारत के पदकों की संख्या बढ़ाई।

    एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल ने रजत पदक हासिल किया, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। पैरा एथलेटिक्स की शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। भारतीय सेना के इस पैरा खिलाड़ी ने अपने संघर्ष और मेहनत से देश को गौरवान्वित किया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में अहम योगदान दिया।

    भारत के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए भी सकारात्मक संदेश दिया है। मुक्केबाजी में लगातार स्वर्ण पदकों की बरसात, एथलेटिक्स में नए रिकॉर्ड और पैरा खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारतीय खेलों का भविष्य पहले से कहीं अधिक मजबूत नजर आ रहा है।

    अब भारतीय दल की नजर बाकी प्रतियोगिताओं पर है, जहां पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ियों ने यही लय बरकरार रखी तो भारत पदक तालिका में और ऊपर पहुंच सकता है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह ऐतिहासिक दिन भारतीय खेलों के स्वर्णिम अध्याय के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा।