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  • सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन साइड इफेक्ट्स के लिए मुआवजा देने का दिया आदेश: नो-फॉल्ट पॉलिसी लागू, एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं

    सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन साइड इफेक्ट्स के लिए मुआवजा देने का दिया आदेश: नो-फॉल्ट पॉलिसी लागू, एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सरकार को निर्देश दिया कि वैक्सीनेशन से किसी भी व्यक्ति को हुए नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाए। इसके लिए सरकार नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी बनाए।

    नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी का मतलब
    इस नीति के तहत अगर किसी व्यक्ति को वैक्सीन या दवा से नुकसान होता है, तो उसे मुआवजा मिल सकता है, चाहे इसमें किसी की गलती साबित हो या न हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम ही जारी रहेगा, अलग से एक्सपर्ट पैनल बनाने की जरूरत नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें
    साइड इफेक्ट्स के आंकड़े सार्वजनिक होंगे – वैक्सीन से जुड़े मामलों का डेटा समय-समय पर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध कराया जाएगा।

    सरकार की गलती साबित नहीं होती – मुआवजा नीति लागू होने का मतलब यह नहीं कि सरकार या कोई अन्य अथॉरिटी अपनी गलती मान रही है।

    याचिकाएं और पृष्ठभूमि
    यह आदेश रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन द्वारा 2021 में दायर याचिकाओं पर आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटियों की मौत कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के कारण हुई थी।

    करुण्या गोविंदन मामला: जुलाई 2021 में कोवीशील्ड वैक्सीन लगने के महीने भर बाद करुण्या की मौत हुई। राष्ट्रीय समिति ने मामले की जांच की, लेकिन पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण वैक्सीन को सीधे मौत का कारण नहीं माना गया।

    8 साल की रितिका मामला: मई 2021 में पहली डोज के 7 दिन बाद तेज बुखार और ब्रेन ब्लड क्लोटिंग के कारण मौत। परिवार ने RTI के जरिए पता लगाया कि मौत का कारण थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम था।

    ICMR और NCDC की स्टडी
    जुलाई 2025 में ICMR और NCDC ने स्टडी जारी की, जिसमें बताया गया कि 18-45 साल के लोगों में अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है। स्टडी में यह भी कहा गया कि गंभीर साइड इफेक्ट के मामले बहुत दुर्लभ (rare) हैं।

    अन्य संभावित कारणों में जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, पहले से मौजूद बीमारियां और कोविड के बाद के कॉम्प्लिकेशन शामिल हैं।

    भारत में विकसित कोविड वैक्सीन
    कोवैक्सिन – भारत बायोटेक ने ICMR के सहयोग से विकसित की।

    कोवीशील्ड – सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से बनाई।

    सुप्रीम कोर्ट का संदेश
    सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वैक्सीनेशन सुरक्षित और जरूरी है, और सरकार की जिम्मेदारी है कि साइड इफेक्ट्स के लिए उचित मुआवजा नीति लागू करे। जनता को इससे घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नो-फॉल्ट नीति से प्रभावित लोगों को राहत मिलेगी।

  • मोजाम्बिक में भीषण बाढ़ के बाद भारत की मदद: राहत सामग्री, चावल और दवाइयों की बड़ी खेप भेजी

    मोजाम्बिक में भीषण बाढ़ के बाद भारत की मदद: राहत सामग्री, चावल और दवाइयों की बड़ी खेप भेजी


    नई दिल्ली । पूर्वी अफ्रीका के देश मोज़ाम्बिक के मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। हजारों लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं और कई इलाकों में राहत और पुनर्वास कार्यों की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस कठिन समय में भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री और दवाइयों की खेप भेजी है।

    भारत के विदेश मंत्रालय भारत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से जानकारी दी कि मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान के तहत मोजाम्बिक को आवश्यक राहत सामग्री भेजी गई है। इस सहायता में 500 मीट्रिक टन चावल, अस्थायी आश्रय के लिए टेंट, हाइजीन किट और पुनर्वास कार्यों में उपयोग होने वाली कई जरूरी वस्तुएं शामिल हैं।

    इसके अलावा बाढ़ प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए करीब 10 मीट्रिक टन अतिरिक्त राहत सामग्री भी भेजी गई है। राहत अभियान के हिस्से के रूप में Indian Navy के एक जहाज के जरिए लगभग 3 मीट्रिक टन आवश्यक दवाइयां भी मोजाम्बिक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को मदद मिल सके।

    भारत इससे पहले भी समुद्री मार्ग के जरिए लगभग 86 मीट्रिक टन जीवन रक्षक दवाइयां मोजाम्बिक भेज चुका है। इन दवाइयों का उद्देश्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पीड़ित लोगों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद सबसे बड़ी चुनौतियों में खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल होती हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री, स्वच्छता किट और दवाइयां राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

    भारत ने अतीत में भी प्राकृतिक आपदाओं के समय कई मित्र देशों की मदद की है। हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीकी देशों के साथ भारत के मजबूत कूटनीतिक और मानवीय संबंध रहे हैं। आपदा के समय दी जाने वाली यह सहायता इन संबंधों को और मजबूत करने का काम करती है।

    भारत ने स्पष्ट किया है कि वह मानवीय, चिकित्सीय और लॉजिस्टिक सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल के माध्यम से भारत न केवल संकट के समय सहायता पहुंचा रहा है, बल्कि हिंद महासागर और अफ्रीका क्षेत्र में एक जिम्मेदार और भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।

  • उज्जैन में शीतला सप्तमी: मंदिरों में महिलाओं की भारी भीड़, ठंडे भोग से मांगी परिवार की सुख-समृद्धि

    उज्जैन में शीतला सप्तमी: मंदिरों में महिलाओं की भारी भीड़, ठंडे भोग से मांगी परिवार की सुख-समृद्धि


    उज्जैन धार्मिक नगरी उज्जैन में मंगलवार को शीतला सप्तमी पर श्रद्धालुओं ने मां शीतला का विधिपूर्वक पूजन किया। सुबह से ही शहर के प्रमुख शीतला माता मंदिरों और आसपास के मंदिरों में महिलाओं की भारी भीड़ नजर आई। महिलाएं अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए ठंडे भोग और ठंडाई अर्पित कर रही थीं।

    मंदिरों में भक्तिमय माहौल
    शहर के प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सुबह से महिलाएं दर्शन और पूजा के लिए पहुंच रही थीं। मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना का क्रम लगातार चलता रहा, और भक्तिमय वातावरण में महिलाएं भक्ति भाव से माता के दर्शन में लीन रही।

    सात दिनों तक चलती है पूजा परंपरा
    श्रद्धालु संतोष मालवीय ने बताया कि यह परंपरा सदियों पुरानी है। इसके अनुसार, एक दिन पहले भोजन तैयार किया जाता है और रात करीब एक बजे माता को भोग अर्पित किया जाता है। माता को ठंडा भोग अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और किसी प्रकार की परेशानी नहीं आती।

    मंदिरों में महिलाएं देर रात से ही पूजा के लिए जुटने लगती हैं और सात दिनों तक लगातार माता के दर्शन करती हैं।

    रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य की कामना
    श्रद्धालु शिल्पा मित्तल ने बताया कि शीतला माता की पूजा विशेषकर चैत्र कृष्ण सप्तमी या अष्टमी को की जाती है। इस दिन घर में नया भोजन नहीं बनाया जाता, बल्कि पहले दिन तैयार पकवान जैसे मीठे चावल, दही और पूड़ी माता को अर्पित किए जाते हैं।

    इस पूजा से चेचक और अन्य चर्म रोगों से रक्षा होती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि माता का आशीर्वाद घर में स्वास्थ्य और समृद्धि बनाए रखता है।

    बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचीं
    पूजा के दौरान महिलाएं हर दिन सुबह मंदिर पहुंचकर माता को जल और भोग अर्पित करती हैं। छठे दिन विशेष भोजन लाकर सामूहिक पूजा की जाती है और सातवें दिन विधि-विधान से समापन पूजा होती है।

    वर्षों पुरानी इस परंपरा को उज्जैन की महिलाएं आज भी पूर्ण श्रद्धा और आस्था के साथ निभा रही हैं। इस अवसर पर महिलाएं अपने घर से ठंडाई और भोग तैयार कर मंदिर पहुंचीं और माता से परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की।

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  • जबलपुर में गुजराती मोहल्ले की झुग्गियों में भीषण आग: 50 सालों से बसे परिवारों की रोजी-रोटी राख, 6 दमकलों ने पाया काबू

    जबलपुर में गुजराती मोहल्ले की झुग्गियों में भीषण आग: 50 सालों से बसे परिवारों की रोजी-रोटी राख, 6 दमकलों ने पाया काबू


    जबलपुर  जबलपुर के अधारताल थाना क्षेत्र स्थित गुजराती मोहल्ले में मंगलवार तड़के लगभग सुबह 5 बजे भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैल गई कि कुछ ही मिनटों में 8 से 10 झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम की 6 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

    रात के समय हुआ हादसा, लोग सो रहे थे
    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अधिकांश लोग उस समय झोपड़ियों में सो रहे थे। अचानक आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। लोग किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकले, लेकिन उनका सारा घरेलू सामान, पुराने कपड़े और लाखों रुपए का स्टॉक जलकर राख हो गया।

    पुराने कपड़े बेचकर करते थे गुजारा
    गुजराती मोहल्ले में करीब 15 परिवार पिछले 50 सालों से अपने प्लॉट पर झुग्गियों में रह रहे हैं। ये परिवार पुराने कपड़े बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं। आग इतनी भीषण थी कि सभी झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो गईं।

    10 लाख रुपए से ज्यादा का नुकसान
    पीड़ित परिवारों ने बताया कि इस हादसे में उनका करीब 10 लाख रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। उनका जीवन, रोजी-रोटी और बच्चों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई।

    कविता गुजराती ने आंसू भरी आंखों से बताया, “रात के वक्त अचानक आग लगी, बच्चे चीखने लगे। हमारी जीवनभर की जमापूंजी और बच्चों का भविष्य सब खाक हो गया। तन में जो कपड़े पहने हैं, वही बचा है।”

    बुजुर्ग महिला शशि गुजराती ने कहा, “मेरे 25 साल के बेटे की मौत के बाद भी मैं भीख मांगकर गुजारा करती थी। पाई-पाई जोड़कर जो 15 हजार रुपए बचाए थे, वह भी आग में जल गए।”

    दमकलकर्मियों की कड़ी मशक्कत
    घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम की फायर ब्रिगेड की 6 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने कई घंटों की मेहनत के बाद आग पर काबू पाया। आग बुझने के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली, हालांकि हादसे के दौरान पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

    राहत और आगे की तैयारी
    प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए आवश्यक राहत उपायों की योजना बनाने की बात कही है। आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।

  • बाजार की पाठशाला: सिबिल स्कोर खराब होने पर लोन में हो रही दिक्कत? जानें आसान उपाय

    बाजार की पाठशाला: सिबिल स्कोर खराब होने पर लोन में हो रही दिक्कत? जानें आसान उपाय


    नई दिल्ली। सिबिल (CIBIL) स्कोर एक तीन अंकों का नंबर होता है, जो 300 से 900 के बीच रहता है। यह बताता है कि आपने अपने पिछले लोन और क्रेडिट कार्ड बिलों का भुगतान कितनी जिम्मेदारी से किया। आम तौर पर:

    750 से 900 -उत्कृष्ट, लोन आसानी से मिलता है

    650 से 750 -अच्छा, मामूली परेशानी हो सकती है

    300 से 600 – खराब, लोन मुश्किल

    खराब स्कोर होने पर लोन मिलने में दिक्कत, ज्यादा ब्याज और कम क्रेडिट लिमिट जैसी समस्याएं आती हैं। होम लोन, कार लोन या प्रीमियम क्रेडिट कार्ड मिलना भी मुश्किल हो सकता है।

    स्कोर सुधारने के आसान तरीके
    1. समय पर भुगतान करें
    सबसे महत्वपूर्ण है ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बिल का समय पर भुगतान।

    एक दिन की देरी भी स्कोर को नुकसान पहुंचा सकती है।

    ऑटो-पे सुविधा सेट करना सबसे सुरक्षित तरीका है।

    2. क्रेडिट उपयोग अनुपात (CUR) कम रखें
    कुल क्रेडिट सीमा का 30% से अधिक उपयोग न करें।

    उदाहरण: क्रेडिट लिमिट 1 लाख है, तो 30 हजार से ज्यादा खर्च न करें।

    3. बार-बार आवेदन न करें
    हर नए लोन या क्रेडिट कार्ड आवेदन पर बैंक आपकी रिपोर्ट चेक करता है (हार्ड इन्क्वायरी) और इससे स्कोर कम हो सकता है।

    4. पुराने अकाउंट बंद न करें
    पुराना क्रेडिट इतिहास आपके स्कोर को बेहतर बनाता है। पुराने क्रेडिट कार्ड या लोन अकाउंट को सक्रिय रखना फायदेमंद होता है।

    5. अपनी रिपोर्ट समय-समय पर चेक करें
    गलत जानकारी पाएँ? जैसे भुगतान के बाद भी बकाया दिखना।

    CIBIL की डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन प्रक्रिया के जरिए सुधार करवाएं।

    खास सुझाव: सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड
    यदि स्कोर बहुत कम है और कोई बैंक कार्ड नहीं दे रहा:

    फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड लें।

    इसे जिम्मेदारी से उपयोग और समय पर भुगतान करें।

    इससे धीरे-धीरे आपका स्कोर सुधारता है और लोन और अन्य वित्तीय फैसले आसान होते हैं।

    सिबिल स्कोर केवल एक नंबर नहीं, बल्कि आपकी वित्तीय साख और भविष्य के वित्तीय फैसलों का आधार है। समय पर भुगतान, सही क्रेडिट उपयोग और रिपोर्ट की नियमित जांच से आप आसानी से इसे सुधार सकते हैं। 700+ का स्कोर आपके लिए लोन, क्रेडिट कार्ड और निवेश के दरवाजे खोलता है।

  • मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य, सरकार ने की निगरानी बढ़ाने की घोषणा

    मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य, सरकार ने की निगरानी बढ़ाने की घोषणा


    भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की स्थिति को लेकर स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी तरह की कमी नहीं है। मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप और पेट्रोलियम मंत्री डॉ. मोहन यादव ने सप्लाई की लगातार निगरानी के निर्देश दिए।

    मंत्री का बयान: आपूर्ति सामान्य, कोई परेशानी नहीं
    मंत्री काश्यप ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता है। घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी लगातार हो रही है और आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार अस्थायी रोक लगी है। यह निर्णय खाड़ी देशों में जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए लागू किया गया है।

    डीलर एसोसिएशन की चेतावनी: सोशल मीडिया से पैनिक फैल सकता है
    भोपाल पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि फिलहाल सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं है। ऑर्डर देने पर नियमित आपूर्ति मिल रही है।

    हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े पेट्रोल-डीजल और गैस की कमी से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाकर लोगों में पैनिक की स्थिति बनाई जा सकती है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से इस पर सख्त निगरानी रखने की अपील की।

    प्रदेश में खपत और स्टॉक की स्थिति
    अजय सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में सालाना पेट्रोल की खपत 1200 मीट्रिक लीटर और डीजल की खपत 1600 मीट्रिक लीटर के करीब है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल को स्टॉक करना संभव है, लेकिन घरेलू रसोई गैस के लिए यह कठिन है। इसलिए गैस पर विशेष निगरानी जरूरी है।

    घरेलू गैस की आपूर्ति निरंतर
    रसोई गैस डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि आर.के. गुप्ता ने बताया कि कॉमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी फिलहाल बंद है, लेकिन घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य है।उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम भोपाल जिला प्रशासन की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें स्थिति की समीक्षा कर आगे के निर्णय लिए जाएंगे।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी: तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश पर 20 गुना जवाबी कार्रवाई की धमकी

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी: तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश पर 20 गुना जवाबी कार्रवाई की धमकी


    वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य  में तेल आपूर्ति को रोकने या बाधित करने की कोई भी कोशिश की गई तो अमेरिका इसका बेहद सख्त जवाब देगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका अब तक हुए हमलों से बीस गुना ज्यादा जोरदार कार्रवाई कर सकता है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सत्य सामाजिक पर पोस्ट किए गए संदेश में कहा कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसके बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका आसानी से निशाना बनाए जा सकने वाले ठिकानों को नष्ट कर सकता है जिससे ईरान के लिए दोबारा व्यवस्थित होना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचेंगे।

    इससे पहले ट्रंप ने ट्रम्प नेशनल डोरल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक को खतरे में डालने की अनुमति किसी भी देश को नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कदम उठा रहा है और किसी भी आतंकी सरकार को दुनिया की तेल आपूर्ति को बंधक बनाने की इजाजत नहीं देगा।

    ट्रंप ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मजबूत मौजूदगी है और जरूरत पड़ने पर समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए माइन-क्लियरिंग ऑपरेशन और सैन्य एस्कॉर्ट जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना के पास दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक और उपकरण हैं जिनकी मदद से समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखा जा सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे तेल टैंकरों को राजनीतिक जोखिम बीमा देने पर भी विचार कर रहा है ताकि समुद्री व्यापार बाधित न हो। ट्रंप के अनुसार यदि खतरा बढ़ता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश जहाजों को इस संकरे समुद्री मार्ग से सुरक्षित एस्कॉर्ट भी कर सकते हैं।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि इस मार्ग का खुला रहना अमेरिका से ज्यादा एशिया और अन्य ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने खास तौर पर चीन का जिक्र करते हुए कहा कि यह रास्ता कई देशों के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि उनकी बड़ी ऊर्जा जरूरतें इसी मार्ग से पूरी होती हैं।

    दरअसल होर्मुज जलडमरूमध्य  फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव या सैन्य गतिविधि वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का यह बयान वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है।

  • ईरान में खामेनेई की मौत के बाद सड़कों पर हजारों लोग: दो साल की बच्ची के जनाजे में जुटा शोक

    ईरान में खामेनेई की मौत के बाद सड़कों पर हजारों लोग: दो साल की बच्ची के जनाजे में जुटा शोक



    नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान में जारी संघर्ष आज 11वें दिन प्रवेश कर गया है। जंग के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु की खबर ने पूरी दुनिया को हिला दिया।

    ईरान में खामेनेई के निधन की खबर मिलते ही महिलाओं और पुरुषों सहित हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। लोग हाथों में खामेनेई की तस्वीरें और मोमबत्तियां लिए हुए थे और उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान लोगों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि खामेनेई का आदर्श हमेशा जीवित रहेगा।

    दो साल की बच्ची के जनाजे में भारी शोक
    ईरान में शोक की भावना इतनी गहरी थी कि दो साल की बच्ची के जनाजे में भी हजारों लोग शामिल हुए। लोगों की भीड़ ने सड़कें भर दीं और सोशल मीडिया पर इस दौरान की PHOTOS और VIDEOS वायरल हो रही हैं।

    मिडिल ईस्ट और पड़ोसी देशों पर युद्ध का असर
    बीते 10 दिनों में इस संघर्ष ने मिडिल ईस्ट और आसपास के 10 से अधिक देशों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित की है।

    कुछ क्षेत्रों में बमबारी और सैन्य कार्रवाई का डर

    कई शहरों में विरोध प्रदर्शन और भारी भीड़

    नागरिकों में भय और असुरक्षा का माहौल

    विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के लगातार बढ़ते प्रभाव के कारण क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में है और आर्थिक संकट और आपूर्ति बाधित हो रही है।

    ईरान में शोक और अंतरराष्ट्रीय चिंता
    खामेनेई के समर्थन में प्रदर्शनकारी लोगों ने कहा कि उनका नेतृत्व ईरान और मुस्लिम समुदाय के लिए मार्गदर्शक था।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों ने संघर्ष को रोकने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है।ईरान में जारी प्रदर्शन और शोक के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जो विश्व समुदाय की चिंता बढ़ा रहे हैं।

  • काशी में बुढ़वा मंगल की महफिल सजी, होली के रंग के बाद विदेशी और देशी सैलानी हुए मंत्रमुग्ध

    काशी में बुढ़वा मंगल की महफिल सजी, होली के रंग के बाद विदेशी और देशी सैलानी हुए मंत्रमुग्ध


    नई दिल्ली। बुढ़वा मंगल’ होली के ठीक बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को मनाया जाता है। यह केवल होली का समापन नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द, संगीत और बुजुर्गों के सम्मान का जश्न है। स्थानीय लोग इस दिन नए कपड़े पहनकर घाटों पर पहुंचते हैं, कुल्हड़ में ठंडई और बनारसी मिठाइयों का स्वाद लेते हैं और बुजुर्गों को फूलों और अबीर से सम्मानित करते हैं।

    प्रभुनाथ त्रिपाठी, काशी निवासी, बताते हैं, “मंगलवार को ‘बुढ़वा मंगल’ के साथ होली की खुमारी का समापन होता है। यह सालों पुरानी रीत है, जिसमें खान-पान, गुलाल और संगीत का भी आनंद लिया जाता है।”

    गंगा घाटों पर संगीत और भक्ति
    इस महफिल का मुख्य आकर्षण गंगा घाट होते हैं। दशाश्वमेध घाट से अस्सी घाट तक बजड़े (नावों) सजाए जाते हैं और लोकगायक तथा कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हैं। फूलों, गद्दों, मसनद और इत्र की खुशबू से महकते घाट शाम को संगीत की महफिल में बदल जाते हैं।

    बनारस घराने की होरी, चैती, ठुमरी, बिरहा और कजरी की मधुर धुनें गूंजती हैं। कभी उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई, गिरिजा देवी की चैती, पंडित किशन महाराज का तबला और सितार की झंकार रातभर लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती थी। आज भी लोकगायक मां गंगा और हनुमान जी के चरणों में अपनी कला अर्पित करते हैं।

    घाटों की रंगीन छटा
    बुढ़वा मंगल के दिन दशाश्वमेध से अस्सी घाट तक संगीत, रंग और उत्सव का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। लोकगायक और कलाकार गंगा में खड़े बजड़े पर प्रस्तुति देते हैं। बनारसी घराने की धुनें शाम को सुरम्य और सुरीली बना देती हैं।

    यह महफिल काशी के अक्खड़पन, फक्कड़पन और आध्यात्मिकता का संगम प्रस्तुत करती है। सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव भी है।

    देश-विदेश से सैलानी
    इस दिन काशी में देश-विदेश से सैलानी भी पहुंचते हैं। वे गंगा तट पर बिखरे रंग, संगीत और बनारसी जोश का आनंद लेते हैं। घरों में स्वादिष्ट पकवान बनते हैं, मित्र और रिश्तेदार अंतिम होली मिलन करते हैं, और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान किया जाता है।

    ‘बुढ़वा मंगल’ केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति, संगीत, रंग और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह महफिल गंगा घाटों को रंगीन और जीवन से भर देती है, जो हर साल देश-विदेश से आए लोगों के लिए यादगार अनुभव बन जाती है।
  • टीम इंडिया को BCCI का ऐतिहासिक इनाम: ₹131 करोड़, भारत तीसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप चैंपियन

    टीम इंडिया को BCCI का ऐतिहासिक इनाम: ₹131 करोड़, भारत तीसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप चैंपियन



    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने पर टीम इंडिया के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के लिए ₹131 करोड़ का इनाम घोषित किया है। यह राशि खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के बीच उनके योगदान के अनुसार बांटी जाएगी।

    फाइनल मुकाबला: भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराया
    भारत ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से मात दी। इस जीत के साथ टीम इंडिया ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब अपने नाम किया और लगातार दो बार ट्रॉफी जीतने वाली पहली टीम बन गई।

    BCCI ने खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ और सिलेक्टर्स को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी और उम्मीद जताई कि टीम भविष्य में भी इसी तरह देश का नाम रोशन करती रहेगी।

    पुरस्कार राशि और बंटवारा
    कुल पुरस्कार राशि: ₹131 करोड़

    टीम इंडिया को मिली ICC प्राइज मनी: 3 मिलियन डॉलर (करीब ₹27.5 करोड़)

    रनर-अप न्यूजीलैंड: 1.6 मिलियन डॉलर (करीब ₹14.7 करोड़)

    इनाम का बंटवारा: खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के बीच योगदान के अनुसार

    भारत बना तीन बार का टी-20 वर्ल्ड कप विजेता
    टीम इंडिया ने अब तक तीन बार टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचा:

    2007: साउथ अफ्रीका में पहला खिताब

    2024: वेस्टइंडीज में दूसरा खिताब

    2026: अहमदाबाद में घरेलू मैदान पर तीसरा खिताब

    इस उपलब्धि के साथ भारत तीन बार की टी-20 वर्ल्ड कप चैंपियन बनने वाली दुनिया की पहली टीम बन गया। वेस्टइंडीज और इंग्लैंड केवल दो-दो बार खिताब जीत पाए हैं।

    जश्न के अनोखे अंदाज: सूर्या का ऐतिहासिक फोटोशूट
    टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने अलग-अलग अंदाज में जश्न मनाया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने गुजरात के गांधीनगर स्थित 500 साल पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी, अडालज नी वाव में ट्रॉफी के साथ फोटोशूट कर यादगार पल बनाए।

    BCCI की प्रतिक्रिया और भावी उम्मीदें
    BCCI ने खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि टीम भविष्य में भी इसी तरह देश का नाम रोशन करती रहे। बोर्ड ने खिलाड़ियों से उम्मीद जताई कि वे भविष्य में भी शानदार प्रदर्शन करते रहेंगे और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।