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  • UP : ₹17 करोड़ की जाली करेंसी का खुला राज, PNB के करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोट, 3 अधिकारी सस्पेंड

    UP : ₹17 करोड़ की जाली करेंसी का खुला राज, PNB के करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोट, 3 अधिकारी सस्पेंड

    सहारनपुर। सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने से हड़कंप मच गया है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी का खुलासा महज 4.30 लाख रुपये की कमी से हुआ। आरबीआई के जयपुर कार्यालय भेजी गई रकम की जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक की टीम ने करेंसी चेस्ट की जांच शुरू की, जिसमें एक-एक नोट की पड़ताल के दौरान नकली नोटों का बड़ा जखीरा सामने आया।

    11.50 करोड़ रुपये भेजे गए थे जयपुर

    सहारनपुर में पीएनबी की करीब 72 शाखाएं हैं और दो करेंसी चेस्ट संचालित होते हैं। इनमें एक घंटाघर के पास सोफिया मार्केट और दूसरा गंगोह में है। 5 अगस्त से सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट से 11.50 करोड़ रुपये आरबीआई के जयपुर कार्यालय भेजे गए थे। इसमें सड़े-गले और कटे-फटे नोट भी शामिल थे।

    जयपुर में जमा रकम की जांच के दौरान अधिकारियों को 4,30,900 रुपये की कमी मिली। इसकी जानकारी मेरठ कार्यालय को दी गई। इसके बाद बैंक मुख्यालय से टीम सहारनपुर पहुंची और करेंसी चेस्ट में रखी रकम की जांच शुरू की गई।

    पहले मिले ₹7.40 करोड़ के नकली नोट

    जांच टीम ने करेंसी चेस्ट में रखे नोटों की बारीकी से जांच शुरू की। शुरुआती पड़ताल में करीब 7.40 करोड़ रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने की जानकारी सामने आई। जांच आगे बढ़ी तो नकली नोटों की संख्या और रकम भी बढ़ती गई।

    बैंक की टीम के मुताबिक, सोमवार देर रात तक करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने का दावा किया गया है। जांच अभी जारी है, इसलिए रकम और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    4-5 दिन से चल रही नोटों की जांच

    करेंसी चेस्ट में रखे नोटों की जांच पिछले चार-पांच दिनों से चल रही है। मेरठ और दिल्ली स्थित बैंक मुख्यालय से पहुंची टीमें एक-एक नोट की पड़ताल कर रही हैं। इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी मिलने के बाद बैंक के स्थानीय अधिकारियों से लेकर मुख्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है।

    करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे नकली नोट?

    इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नकली करेंसी बैंक के करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे। बैंक में रकम जमा होने से पहले नोटों की जांच की जाती है। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि असली नोटों के बंडलों में नकली नोट किस स्तर पर शामिल हुए और वे करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे।

    बड़े नेटवर्क की आशंका भी

    करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के बाद किसी बड़े नेटवर्क की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली नोट कहां तैयार किए गए, इनमें किस तरह के कागज और स्याही का इस्तेमाल हुआ और इन्हें असली नोटों के बीच किस स्तर पर मिलाया गया।

    तीन अधिकारी निलंबित, हाउसकीपर हटाया

    पीएनबी की मुख्य बैंक प्रबंधक निशा सिंह के मुताबिक, करेंसी चेस्ट में जाली नोट मिलने के बाद मुख्यालय से टीम भेजी गई है और जांच जारी है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि पार्ट टाइम हाउसकीपर को हटा दिया गया है।

    जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

  • सीतापुर में हिंदुस्तान प्लाईवुड फैक्टरी पर CBIC का छापा , 15 वाहनों से पहुंची टीम, दस्तावेजों की जांच जारी

    सीतापुर में हिंदुस्तान प्लाईवुड फैक्टरी पर CBIC का छापा , 15 वाहनों से पहुंची टीम, दस्तावेजों की जांच जारी

    सीतापुर। यूपी के सीतापुर में तंबौर कस्बे में स्थित इसराइल की हिंदुस्तान प्लाईवुड फैक्टरी पर मंगलवार को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) की टीम ने छापेमारी की। बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी कई वाहनों से फैक्टरी पहुंचे। टीम के साथ करीब 15 वाहन बताए जा रहे हैं, जिनमें कुछ पर भारत सरकार लिखा हुआ है।

    कार्रवाई के दौरान CBIC अधिकारियों ने फैक्टरी परिसर में मौजूद दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों की जांच शुरू की। टीम कारोबार से जुड़े कागजात और रिकॉर्ड खंगाल रही है। छापे की जानकारी मिलते ही फैक्टरी कर्मचारियों और आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया।

    इसराइल के घर पर भी पहुंची टीम
    सूत्रों के मुताबिक, CBIC की टीम ने फैक्टरी के अलावा इसराइल के आवास पर भी कार्रवाई की। घर के बाहर भी कई सरकारी वाहन खड़े देखे गए। हालांकि, छापेमारी किस मामले में की गई है और जांच का दायरा क्या है, इसे लेकर अधिकारियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी वजह
    कार्रवाई की खबर फैलने के बाद फैक्टरी और आवास के आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय स्तर पर छापे को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। फिलहाल अधिकारी दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच में जुटे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही छापेमारी की वास्तविक वजह, किसी तरह की बरामदगी या अन्य कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • भाकियू की महापंचायत में उमड़ा किसानों का हुजूम, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पहुंचे किसान, राकेश टिकैत भी शामिल

    भाकियू की महापंचायत में उमड़ा किसानों का हुजूम, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पहुंचे किसान, राकेश टिकैत भी शामिल


    मेरठ। किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की महापंचायत मेरठ मंडलायुक्त कार्यालय के बाहर कमिश्नरी पार्क में शुरू हो गई है। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ महापंचायत में पहुंचे हैं। इससे आसपास के रास्तों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लग गई हैं। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी मंच पर पहुंच चुके हैं और किसानों को संबोधित कर रहे हैं।

    आरती के साथ शुरू हुई
    महापंचायत
    महापंचायत की शुरुआत भगवान श्रीगणेश और मां सरस्वती की आरती के साथ हुई। इसके बाद रागिनी अंदाज में भगवान का आगमन कराया गया। धीरे-धीरे किसानों की संख्या बढ़ती गई और कमिश्नरी पार्क में भीड़ जुटने लगी।

    सिख समाज ने बांटा हलवा
    महापंचायत में पहुंचे सिख समाज के किसानों ने सेवा करते हुए हलवा बांटा। किसानों और वहां मौजूद लोगों को हलवा वितरित किया गया। इस दौरान महापंचायत में बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी देखने को मिली।

    ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में गद्दे और खाने का सामान भी लाए
    महापंचायत में शामिल होने के लिए किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पहुंचे। कई किसान अपने साथ कुर्सियां, गद्दे और खाने-पीने का सामान भी लेकर आए हैं। कमिश्नरी पार्क की ओर जाने वाले रास्तों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।

    बिजली, खाद और गन्ने के भुगतान समेत कई मुद्दे
    राकेश टिकैत मंच से किसानों को संबोधित कर रहे हैं। महापंचायत में किसान बिजली, खाद, चीनी की महंगाई और गन्ने के भुगतान समेत कई समस्याओं को लेकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।

    भाकियू के मुताबिक, इन समस्याओं को लेकर 21 जुलाई को अपर मंडलायुक्त अमित कुमार को मांग पत्र सौंपा गया था। संगठन का कहना है कि मांग पत्र दिए जाने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसी के चलते अब महापंचायत के जरिए किसानों की मांगें अधिकारियों के सामने रखी जा रही हैं।

    मांगें नहीं मानीं तो जेल भरो आंदोलन
    भाकियू पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि यदि किसानों की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन ने जरूरत पड़ने पर जेल भरो आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। ऐसे में महापंचायत को किसानों के आर-पार की लड़ाई के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    कमिश्नरी क्षेत्र में ट्रैफिक डायवर्जन
    महापंचायत को देखते हुए कमिश्नरी चौराहे और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था बदली गई है। सुबह 10:30 बजे से शाम 6 बजे तक कमिश्नरी चौराहे से कुटी चौराहे के बीच सामान्य वाहनों का आवागमन बंद रखा गया है। वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा रहा है।

  • यूपी: राम मंदिर ट्रस्ट की CEO सर्च कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, पैनल में शामिल नामों पर अब ट्रस्ट करेगा फैसला

    यूपी: राम मंदिर ट्रस्ट की CEO सर्च कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट, पैनल में शामिल नामों पर अब ट्रस्ट करेगा फैसला

    लखनऊ। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी। अब ट्रस्ट पैनल में शामिल नामों पर विचार कर अंतिम नाम तय करेगा।

    राम मंदिर परिसर में हुई बैठक
    राम मंदिर परिसर में हुई बैठक के बाद सर्च कमेटी के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज को रिपोर्ट सौंपी। इस दौरान ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। तीन सदस्यीय सर्च कमेटी में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावड़े भी शामिल हैं।

    CEO के लिए नामों का पैनल तैयार
    जानकारी के मुताबिक, चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद कमेटी ने CEO पद के लिए नामों का पैनल तैयार किया है। अब ट्रस्ट इस पैनल में शामिल नामों पर चर्चा करेगा और किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगाएगा। ट्रस्ट की 2 सितंबर को अहम बैठक प्रस्तावित है। इसी बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम की घोषणा होने की संभावना है।

    मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में होगी अहम भूमिका
    CEO की नियुक्ति को राम मंदिर के संचालन और प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नियुक्ति के बाद CEO मंदिर की प्रशासनिक और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं के संचालन में अहम भूमिका निभाएगा। अब सभी की निगाहें 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक पर टिकी हैं, जहां राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम पर अंतिम फैसला हो सकता है।

  • तेज बुखार और बॉडी पेन के बाद ममिता बैजू अस्पताल में भर्ती, डॉक्टर ने दी बेड रेस्ट की सलाह, ऑस्ट्रेलिया विजिट भी रद्द

    तेज बुखार और बॉडी पेन के बाद ममिता बैजू अस्पताल में भर्ती, डॉक्टर ने दी बेड रेस्ट की सलाह, ऑस्ट्रेलिया विजिट भी रद्द


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री ममिता बैजू की तबीयत अचानक खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तेज बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत के बाद डॉक्टरों की सलाह पर उनका इलाज शुरू किया गया। अभिनेत्री की बिगड़ती तबीयत के कारण उन्हें फिलहाल पूरी तरह आराम करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य संबंधी इस परेशानी का असर उनके पहले से तय कार्यक्रमों पर भी पड़ा है और उन्हें अपनी ऑस्ट्रेलिया यात्रा रद्द करनी पड़ी है। ममिता बैजू वहां होने वाले एक खास ओणम कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने वाली थीं लेकिन स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वह इस कार्यक्रम में पहुंच नहीं सकीं।

    ममिता बैजू ने खुद भी अपनी तबीयत और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वह अपने तय कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने से काफी निराश हैं। अभिनेत्री के अनुसार अगर उनकी तबीयत अनुमति देती तो वह निश्चित रूप से कार्यक्रम में शामिल होने की कोशिश करतीं लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है। इसी वजह से उन्हें यात्रा और सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द करने का कठिन फैसला लेना पड़ा। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजकों और उन लोगों से भी माफी मांगी जो उनसे मिलने और उनके कार्यक्रम में शामिल होने का इंतजार कर रहे थे।

    ममिता के ऑस्ट्रेलिया दौरे को लेकर आयोजकों की ओर से भी जानकारी साझा की गई। बताया गया कि अभिनेत्री की तबीयत ठीक नहीं होने और अस्पताल में इलाज चलने के कारण वह यात्रा करने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में 5 सितंबर को आयोजित होने वाले ओणम कार्यक्रम को भी आगे के लिए टाल दिया गया है। आयोजकों ने अभिनेत्री के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और कहा कि ममिता की टीम के साथ मिलकर कार्यक्रम की नई तारीख और स्थान को लेकर जल्द फैसला किया जाएगा।

    आयोजकों ने यह भी माना कि कार्यक्रम के स्थगित होने से फैंस और प्रतिभागियों को निराशा हुई है क्योंकि इसके लिए लंबे समय से तैयारियां की जा रही थीं। वॉलंटियर्स से लेकर परफॉर्मर्स और स्पॉन्सर्स तक कई लोग इस आयोजन को सफल बनाने के लिए काम कर रहे थे। हालांकि ममिता की सेहत को प्राथमिकता देते हुए कार्यक्रम को फिलहाल टालने का फैसला किया गया है। आयोजकों ने लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि ओणम समारोह जरूर आयोजित किया जाएगा और इसके लिए नई जानकारी जल्द साझा की जाएगी।

    ममिता बैजू ने अपने अभिनय करियर में कम उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने वर्ष 2016 में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर फिल्मी दुनिया में कदम रखा और इसके बाद कई फिल्मों में अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया। समय के साथ उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई और अपनी एक्टिंग के कारण दर्शकों के बीच लोकप्रिय होती चली गईं। उनके करियर में कई फिल्मों और अलग-अलग तरह के किरदारों ने उन्हें दर्शकों के करीब पहुंचाया।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो ममिता बैजू के पास आने वाले समय में भी कई प्रोजेक्ट हैं। वह अलग-अलग फिल्मों में नजर आने वाली हैं और उनके प्रशंसक उनकी नई फिल्मों का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल अभिनेत्री की तबीयत को लेकर फैंस चिंता जता रहे हैं और सोशल मीडिया पर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। अस्पताल में इलाज और डॉक्टरों की सलाह के बाद उम्मीद की जा रही है कि ममिता जल्द ठीक होकर अपने काम और आगामी प्रोजेक्ट्स में वापसी करेंगी।

  • खाड़ी संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की तेज आर्थिक छलांग, 7.8 प्रतिशत जीडीपी पर भाजपा का राहुल गांधी को जवाब

    खाड़ी संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की तेज आर्थिक छलांग, 7.8 प्रतिशत जीडीपी पर भाजपा का राहुल गांधी को जवाब


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने भारत की 7.8 प्रतिशत आर्थिक विकास दर को देश की बदलती आर्थिक ताकत का बड़ा प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत का यह प्रदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। खाड़ी क्षेत्र में संकट तेल आपूर्ति को लेकर चुनौतियां सप्लाई चेन में रुकावट और दुनिया के कई हिस्सों में जारी तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत गति बनाए रखी है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ऐसे कठिन वैश्विक माहौल में 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल करना सामान्य उपलब्धि नहीं बल्कि देश की आर्थिक क्षमता और मजबूत नीतिगत प्रबंधन का संकेत है।

    भाजपा नेता ने भारत की विकास दर की तुलना दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से करते हुए कहा कि कई विकसित और उभरते देशों की विकास रफ्तार भारत की तुलना में काफी कम रही है। उन्होंने कनाडा जर्मनी ब्रिटेन अमेरिका मलेशिया और दक्षिण कोरिया जैसी अर्थव्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के दौर में भारत ने अपेक्षाकृत अधिक मजबूत प्रदर्शन किया है। उनके अनुसार खाड़ी क्षेत्र में तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा लेकिन भारत ने इन परिस्थितियों में भी अपनी विकास गति को बनाए रखा।

    रविशंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को इस प्रदर्शन का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि मजबूत और स्थिर नेतृत्व किसी भी देश की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद जरूरी होता है। संकट के समय सही फैसले लेने और चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता ही किसी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाती है। उन्होंने वित्त मंत्रालय और वित्त मंत्री के आर्थिक प्रबंधन की भी सराहना की और कहा कि सरकार की नीतियों के साथ मैन्युफैक्चरिंग व्यापार निर्माण और सेवा क्षेत्र के योगदान ने देश की विकास दर को मजबूत बनाया है।

    भाजपा सांसद ने वर्ष 2013 की आर्थिक स्थिति और वर्तमान भारत के बीच तुलना करते हुए कहा कि एक समय देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रैजाइल फाइव यानी कमजोर मानी जाने वाली प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया जाता था। उस दौर में निवेशकों के बीच भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता थी और नीतिगत ठहराव की चर्चा होती थी। उन्होंने अपने पुराने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कुछ निवेशक भारत में अपने निवेश को लेकर चिंतित थे लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उनके अनुसार फ्रैजाइल फाइव से निकलकर 7.8 प्रतिशत की विकास दर तक पहुंचना भारत की आर्थिक यात्रा में बड़े बदलाव को दर्शाता है।

    रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को मृत अर्थव्यवस्था बताने वाला दावा ताजा जीडीपी आंकड़ों के सामने टिकता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी आर्थिक विकास और आर्थिक प्रबंधन को समझने में असफल रहे हैं और लगातार ऐसे बयान देते हैं जो देश की आर्थिक उपलब्धियों के विपरीत दिखाई देते हैं। भाजपा नेता ने कहा कि एक ओर विपक्ष देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर बताने की कोशिश करता है जबकि दूसरी ओर ताजा आंकड़े भारत की तेज विकास गति का प्रमाण दे रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा आर्थिक उपलब्धि को केवल एक तिमाही के आंकड़े तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यह पिछले कई वर्षों में हुए व्यापक बदलाव का परिणाम है। वैश्विक संकटों युद्धों तेल आपूर्ति की अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बावजूद भारत का मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि देश की अर्थव्यवस्था कठिन परिस्थितियों का सामना करने में पहले से अधिक सक्षम हुई है। रविशंकर प्रसाद के अनुसार भारत आज वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच मजबूती के साथ खड़ा है और 7.8 प्रतिशत की विकास दर उसी बदलती आर्थिक तस्वीर का सबसे बड़ा प्रमाण है।

  • मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद

    मानसून में सर्दी जुकाम से बचने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय! शरीर को गर्म और इम्युनिटी को मजबूत रखने में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली। बरसात का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान मौसम में नमी बढ़ने और तापमान में उतार चढ़ाव के कारण कई लोगों को सर्दी जुकाम खांसी और गले में खराश जैसी परेशानियां होने लगती हैं। बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना या अचानक ठंडी और गर्म जगह के बीच जाना भी परेशानी बढ़ा सकता है। हालांकि केवल बारिश में भीगना ही सर्दी जुकाम का सीधा कारण नहीं होता बल्कि वायरल संक्रमण इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में मानसून के दौरान साफ सफाई और रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देकर संक्रमण के जोखिम को कम करने की कोशिश की जा सकती है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले शरीर को गीला होने से बचाना जरूरी है। अगर आप बारिश में भीग जाते हैं तो घर पहुंचने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदलें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। गीले कपड़ों में लंबे समय तक रहने से असहजता बढ़ सकती है और शरीर को ठंड महसूस हो सकती है। बारिश के दिनों में बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखना भी उपयोगी आदत है।

    मानसून के दौरान हाथों की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहर से घर लौटने के बाद साबुन और पानी से हाथ अच्छी तरह धोएं। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचें क्योंकि वायरस और अन्य संक्रमण फैलाने वाले कण हाथों के जरिए शरीर तक पहुंच सकते हैं। अगर आसपास किसी व्यक्ति को सर्दी जुकाम है तो उसके बेहद करीब जाने से बचना और व्यक्तिगत सामान साझा न करना भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

    खानपान भी मानसून में सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। इस मौसम में ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन करना बेहतर माना जाता है। पर्याप्त पानी पीते रहें और डाइट में फल सब्जियां दालें और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करें। संतुलित आहार शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। बहुत ज्यादा तला भुना या लंबे समय तक रखा हुआ भोजन खाने से बचना भी बेहतर है।

    मानसून में पर्याप्त नींद लेना और शरीर को आराम देना भी जरूरी है। लगातार कम नींद और खराब दिनचर्या से शरीर की सामान्य प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखें और बहुत ज्यादा ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचें।

    अगर सर्दी जुकाम हो भी जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन मददगार हो सकता है। गले में खराश या नाक बंद होने जैसी परेशानी लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। तेज बुखार सांस लेने में परेशानी सीने में दर्द या लक्षणों के लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। मानसून में थोड़ी सावधानी और अच्छी स्वच्छता की आदतें अपनाकर सर्दी जुकाम समेत कई संक्रमणों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • बंदरगाहों पर घटेगी देरी, कारोबार को मिलेगी तेजी: नए कस्टम और बैंकिंग सुधारों से विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती

    बंदरगाहों पर घटेगी देरी, कारोबार को मिलेगी तेजी: नए कस्टम और बैंकिंग सुधारों से विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती


    नई दिल्ली । भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार अब आर्थिक सुधारों के अगले चरण की तैयारी में जुट गई है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बदलाव के बाद सरकार की नजर अब सीमा शुल्क प्रणाली को आधुनिक बनाने और बैंकिंग क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने पर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में आयात प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नई तकनीक और रिस्क आधारित जांच प्रणाली लागू की जा सकती है। साथ ही विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई गई है। सरकार का मानना है कि कारोबार की राह आसान करने और वित्तीय व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने से भारत की आर्थिक रफ्तार को नई मजबूती मिलेगी।

    जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान एक विशेष बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में पहले ही कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं लेकिन सीमा शुल्क व्यवस्था में अभी और बदलाव की जरूरत है। सरकार का फोकस भारतीय बंदरगाहों से आयात होने वाले सामान की आवाजाही को तेज और आसान बनाने पर है ताकि कारोबारियों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े और देश के प्रमुख बंदरगाहों पर भीड़ कम हो सके।

    सरकार जिस नई व्यवस्था पर विचार कर रही है उसमें आधुनिक स्कैनर और रिस्क आधारित आयात स्क्रीनिंग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत ज्यादा जोखिम वाले आयात की गहन जांच की जाएगी जबकि कम जोखिम वाले कंसाइनमेंट को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी। इस व्यवस्था से सीमा शुल्क अधिकारियों को संदिग्ध और संवेदनशील मामलों पर अधिक ध्यान देने में मदद मिलेगी जबकि सामान्य व्यापारिक गतिविधियां बिना अनावश्यक रुकावट के आगे बढ़ सकेंगी। इसका सीधा फायदा आयातकों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों को भी मिल सकता है।

    सरकार का यह कदम कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेज कस्टम क्लियरेंस से बंदरगाहों पर माल के लंबे समय तक रुके रहने की समस्या कम हो सकती है। इससे व्यापार की लागत घटने और कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ने की संभावना है। हालांकि वित्त मंत्री ने स्कैनर आधारित प्रणाली और ऑटोमैटिक मंजूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीमा शुल्क क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर काम जारी है।

    दूसरी ओर सरकार बैंकिंग सेक्टर को भी विकसित भारत 2047 की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है जो भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों के हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका और दिशा पर विचार करेगी। यह समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी जिसके आधार पर बैंकिंग क्षेत्र में आगे की रणनीति तय की जा सकती है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था को निवेश बढ़ाने, उद्योगों को वित्त उपलब्ध कराने और देश की विकास यात्रा को गति देने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

    वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर नियमों के अनुपालन का बोझ कम करने पर लगातार काम कर रही है। अब तक एक हजार से अधिक पुराने कानून हटाए जा चुके हैं और लगभग 40 हजार नियमों को सरल बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य नागरिकों और कंपनियों को जटिल प्रक्रियाओं से राहत देना और निवेश के लिए अधिक अनुकूल माहौल तैयार करना है।

    ये प्रस्तावित सुधार ऐसे समय में सामने आए हैं जब भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है। ऐसे में सरकार का नया सुधार एजेंडा स्पष्ट संकेत देता है कि तेज कारोबार आधुनिक सीमा शुल्क प्रणाली मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और सरल नियमों के जरिए भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

  • महंगाई और जमाखोरी पर लगाम की तैयारी: त्योहारों से पहले चीनी स्टॉक की सीमा घटाई, कीमतों को काबू में रखने की बड़ी कवायद

    महंगाई और जमाखोरी पर लगाम की तैयारी: त्योहारों से पहले चीनी स्टॉक की सीमा घटाई, कीमतों को काबू में रखने की बड़ी कवायद


    नई दिल्ली । त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने और जमाखोरी पर सख्त लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। सरकार ने देशभर में चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा को 4 हजार क्विंटल से घटाकर 2 हजार क्विंटल कर दिया है। यह नई व्यवस्था 15 सितंबर से लागू होकर 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। सरकार का उद्देश्य साफ है कि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी पैदा न हो और जमाखोरी के जरिए कीमतों को बढ़ाने की कोशिशों पर समय रहते रोक लगाई जा सके। उपभोक्ता मामले खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार नई सीमा लागू होने के बाद कोई भी व्यापारी किसी भी समय और किसी भी स्थान पर 2 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। इसके साथ ही स्टॉक मिलने की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक चीनी जमा रखने की भी अनुमति नहीं होगी।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब आने वाले महीनों में देशभर में त्योहारों का दौर शुरू होने वाला है और चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। मांग बढ़ने के साथ जमाखोरी और सट्टेबाजी की आशंका भी पैदा होती है जिससे आम उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। सरकार का मानना है कि स्टॉक की सीमा कम करने से बाजार में चीनी की लगातार आवाजाही बनी रहेगी और बड़े पैमाने पर माल जमा कर कृत्रिम कमी पैदा करने की संभावना कम होगी। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को उचित कीमतों पर चीनी की उपलब्धता के रूप में मिल सकता है।

    हालांकि सरकार ने देश के सभी क्षेत्रों के लिए एक जैसी सीमा लागू नहीं की है। कोलकाता और उसके आसपास के महानगरीय इलाकों के लिए चीनी स्टॉक की सीमा 4 हजार क्विंटल ही रखी गई है। इसके पीछे उस क्षेत्र की विशेष बाजार और आपूर्ति जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। कोलकाता उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों से चीनी मंगाकर पूर्वी भारत और उत्तर पूर्वी राज्यों तक इसकी आपूर्ति करता है। ऐसे में वहां स्टॉक सीमा कम करने से सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका हो सकती थी। सरकार ने इसी कारण कोलकाता क्षेत्र को नई सीमा से अलग रखते हुए पुरानी व्यवस्था जारी रखने का फैसला किया है।

    केंद्र सरकार ने केवल नियम बदलने तक ही अपनी कार्रवाई सीमित नहीं रखी है बल्कि देशभर में चीनी मिलों डीलरों और व्यापारियों के पास मौजूद स्टॉक की सघन निगरानी और भौतिक सत्यापन भी किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के जरिए जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने जानकारी छिपाने और चीनी की बिक्री व आवाजाही में होने वाली अनियमितताओं का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इन सख्त कदमों और बाजार में चीनी की बेहतर उपलब्धता का असर कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में एक्स मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है जबकि खुदरा बाजार में भी कीमतों में कमी का रुझान दिखने लगा है।

    आने वाले हफ्तों में सरकार की निगरानी और तेज रहने वाली है। चीनी मिलों व्यापारियों और डीलरों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन लगातार जारी रखा जाएगा ताकि कोई भी व्यक्ति या संस्था तय सीमा से अधिक चीनी जमा कर बाजार की स्थिति को प्रभावित न कर सके। त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग के बीच सरकार की यह रणनीति उपभोक्ताओं को राहत देने और बाजार में कीमतों को स्थिर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब यह देखना होगा कि स्टॉक सीमा में कटौती और लगातार निगरानी का असर खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों को कितना नियंत्रित कर पाता है।

  • टेकऑफ के कुछ मिनट बाद तकनीकी खराबी, इंडिगो की दिल्ली फ्लाइट वापस गोवा लौटी; एयरपोर्ट पर घोषित हुई फुल इमरजेंसी

    टेकऑफ के कुछ मिनट बाद तकनीकी खराबी, इंडिगो की दिल्ली फ्लाइट वापस गोवा लौटी; एयरपोर्ट पर घोषित हुई फुल इमरजेंसी


    नई दिल्ली । गोवा से दिल्ली जा रही इंडिगो की एक उड़ान में मंगलवार सुबह उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद तकनीकी समस्या सामने आने से यात्रियों और एयरपोर्ट प्रशासन में सतर्कता बढ़ गई। इंडिगो की उड़ान संख्या 6ई 2102 ने उत्तरी गोवा से सुबह करीब 9 बजकर 16 मिनट पर दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी लेकिन हवा में कुछ देर रहने के बाद चालक दल को विमान में तकनीकी खराबी का संकेत मिला। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पायलटों ने तत्काल विमान को वापस गोवा की ओर मोड़ने का फैसला किया और संबंधित अधिकारियों को स्थिति की जानकारी दी गई।

    तकनीकी समस्या की सूचना मिलते ही मनोहर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर आपातकालीन तैयारियां शुरू कर दी गईं। करीब 9 बजकर 30 मिनट पर एयरपोर्ट प्रशासन ने फुल इमरजेंसी घोषित कर दी ताकि किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षा और राहत एजेंसियां पूरी तरह तैयार रह सकें। हालांकि स्थिति नियंत्रण में रही और विमान ने गोवा एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी यात्री या चालक दल के सदस्य के घायल होने की कोई सूचना नहीं मिली।

    सुरक्षित लैंडिंग के बाद सभी यात्रियों को विमान से उतारकर बोर्डिंग क्षेत्र में पहुंचाया गया। एयरलाइन की ओर से यात्रियों की सुविधा और उनके आगे के सफर के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इंडिगो ने बताया कि तकनीकी खराबी का पता लगते ही मानक संचालन प्रक्रिया के तहत सभी आवश्यक कदम उठाए गए और पायलटों ने सावधानी बरतते हुए विमान को उसी एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारने का निर्णय लिया जहां से उड़ान भरी गई थी।

    एयरलाइन के अनुसार विमान को फिलहाल रखरखाव और तकनीकी जांच के लिए रोक दिया गया है। विशेषज्ञों द्वारा विमान की पूरी जांच की जा रही है और सभी आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद ही उसे दोबारा परिचालन में शामिल किया जाएगा। इंडिगो ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद भी जताया और कहा कि उन्हें जलपान उपलब्ध कराने के साथ लगातार जरूरी जानकारी दी गई। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि यात्रियों को उनके निर्धारित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं।

    इंडिगो ने अपने बयान में कहा कि यात्रियों चालक दल और विमान की सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तकनीकी संकेत को नजरअंदाज नहीं किया जाता। इसी कारण उड़ान के दौरान समस्या सामने आते ही एहतियातन विमान को वापस गोवा लाने का फैसला किया गया। समय रहते लिया गया यह निर्णय एक बार फिर विमानन क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल की अहमियत को रेखांकित करता है।

    यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले महीने इंडिगो को अपनी डिजिटल सेवाओं से जुड़ी तकनीकी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा था। एयरलाइन की वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन पर रुक रुक कर तकनीकी समस्याएं आने से कई यात्रियों को फ्लाइट बुकिंग वेब चेक इन और अन्य ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करने में परेशानी हुई थी। कंपनी ने उस समय अपने मुख्य आरक्षण प्लेटफॉर्म में तकनीकी दिक्कत की बात स्वीकार की थी। अब उड़ान के दौरान सामने आई तकनीकी समस्या के बाद एयरलाइन ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और वैकल्पिक प्रबंधन के जरिए यात्रियों को सुरक्षित रखने की प्राथमिकता दोहराई है। सबसे बड़ी राहत यही रही कि गोवा से दिल्ली जा रही यह फ्लाइट समय रहते वापस लौट आई और फुल इमरजेंसी के बावजूद सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित रहे।