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  • 1 अप्रैल से महंगी होंगी Audi की गाड़ियां, कंपनी ने 2% तक बढ़ाई कीमतें

    1 अप्रैल से महंगी होंगी Audi की गाड़ियां, कंपनी ने 2% तक बढ़ाई कीमतें


    नई दिल्ली। भारत के लग्जरी कार बाजार में एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। जर्मन लग्जरी कार निर्माता Audi की भारतीय इकाई Audi India ने गुरुवार को अपनी गाड़ियों की कीमतों में 2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने की घोषणा की। कंपनी के अनुसार नई कीमतें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी और यह वृद्धि भारत में बिकने वाले सभी मॉडलों के एक्स-शोरूम दामों पर लागू होगी। कंपनी का कहना है कि हाल के महीनों में बढ़ती इनपुट लागत और मुद्रा दरों में उतार-चढ़ाव के कारण उत्पादन और संचालन की लागत बढ़ गई है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया है।

    कंपनी ने ग्राहकों पर असर कम रखने की कोशिश की
    ऑडी इंडिया के ब्रांड निदेशक Balbir Singh Dhillon ने कहा कि कंपनी ने कीमतों में बढ़ोतरी का निर्णय काफी सोच-समझकर लिया है और कोशिश की गई है कि ग्राहकों पर इसका असर न्यूनतम रहे। उन्होंने कहा कि हाल ही में कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता के कारण कंपनी की लागत बढ़ी है। ऐसे में कीमतों में सीमित बढ़ोतरी करना आवश्यक हो गया था। ढिल्लों ने भरोसा दिलाया कि कंपनी अपने ग्राहकों को बेहतर प्रोडक्ट और प्रीमियम अनुभव देने के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    कई लोकप्रिय सेडान और एसयूवी मॉडल भारत में उपलब्ध
    भारत में ऑडी की कई लग्जरी सेडान और एसयूवी मॉडल काफी लोकप्रिय हैं। कंपनी देश में प्रीमियम सेडान और एसयूवी सेगमेंट में कई विकल्प उपलब्ध कराती है। इनमें Audi A4, Audi A6 जैसी सेडान और Audi Q3, Audi Q5, Audi Q7 और Audi Q8 जैसी एसयूवी शामिल हैं। कीमतों में बढ़ोतरी इन सभी मॉडलों के एक्स-शोरूम दामों पर लागू होगी। हालांकि कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अलग-अलग मॉडल के हिसाब से कीमतों में कितनी वृद्धि होगी, लेकिन अधिकतम बढ़ोतरी 2 प्रतिशत तक हो सकती है।

    अन्य लग्जरी कार कंपनियां भी बढ़ा सकती हैं कीमतें
    ऑडी इंडिया के इस फैसले के बाद ऑटो सेक्टर में यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में अन्य लग्जरी कार निर्माता कंपनियां भी कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। आमतौर पर जब किसी बड़े ब्रांड की ओर से कीमतों में संशोधन किया जाता है, तो अन्य कंपनियां भी लागत बढ़ने का हवाला देकर इसी तरह के कदम उठा सकती हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले महीनों में लग्जरी कार सेगमेंट में कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    बिक्री और प्री-ओन्ड कार कारोबार में भी मजबूती
    ऑडी इंडिया के प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने पिछले साल जनवरी से जून की अवधि में भारत में 2,128 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की थी। इसके अलावा कंपनी का प्री-ओन्ड कार कारोबार भी लगातार मजबूत हो रहा है। ऑडी के ‘ऑडी अप्रूव्ड: प्लस’ कार्यक्रम के तहत बेची जाने वाली प्रमाणित प्री-ओन्ड कारों की मांग में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है। कंपनी के अनुसार इस सेगमेंट में जनवरी-जून अवधि के दौरान करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    देश में प्री-ओन्ड कार नेटवर्क का विस्तार
    ऑडी इंडिया अपने प्री-ओन्ड कार कारोबार को भी लगातार विस्तार दे रही है। फिलहाल देशभर में कंपनी के 26 प्री-ओन्ड कार शोरूम मौजूद हैं। कंपनी की योजना इस नेटवर्क को और मजबूत करने की है ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक प्रमाणित प्री-ओन्ड लग्जरी कारों की सुविधा पहुंचाई जा सके। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में लग्जरी कारों का बाजार धीरे-धीरे विस्तार कर रहा है और प्री-ओन्ड कार सेगमेंट भी इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद ऑडी जैसे प्रीमियम ब्रांड के लिए भारतीय बाजार में मांग बनी रहने की संभावना है।

  • वैश्विक संकट के बीच भी भारत की तेज रफ्तार, FY27 में 7% विकास दर की उम्मीद

    वैश्विक संकट के बीच भी भारत की तेज रफ्तार, FY27 में 7% विकास दर की उम्मीद


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रह सकती है। जापान के दिग्गज निवेश बैंक Nomura ने अपने ताजा आकलन में कहा है कि वित्त वर्ष 2027 में भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। हालांकि बैंक ने यह भी कहा कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा खिंचता है तो यह भारत के आर्थिक संतुलन की परीक्षा ले सकता है। इसके बावजूद मजबूत घरेलू मांग और संरचनात्मक सुधारों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी रहने की संभावना जताई गई है।

    भारत के ‘गोल्डीलॉक्स पीरियड’ की हो सकती है परीक्षा
    नोमुरा के मुताबिक वर्तमान समय भारत के लिए तथाकथित “गोल्डीलॉक्स पीरियड” जैसा है। अर्थशास्त्र में Goldilocks Economy उस स्थिति को कहा जाता है जब आर्थिक वृद्धि दर मजबूत होती है और महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रहती है। अगर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आता है, तो यह संतुलन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में भारत की आर्थिक नीतियों और घरेलू मांग की मजबूती की असली परीक्षा होगी।

    जीडीपी, महंगाई और चालू खाते के अनुमान में बदलाव
    नोमुरा की भारत और एशिया (जापान को छोड़कर) की मुख्य अर्थशास्त्री Sonal Varma ने अर्थशास्त्री Aurodeep Nandi के साथ मिलकर जारी रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2027 के लिए कुछ प्रमुख आर्थिक संकेतकों के अनुमान में बदलाव किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार चालू खाते के घाटे यानी Current Account Deficit (सीएडी) के अनुमान को 0.4 प्रतिशत बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का 1.6 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी Consumer Price Index आधारित महंगाई का अनुमान 0.7 प्रतिशत बढ़ाकर 4.5 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को मामूली रूप से 0.1 प्रतिशत घटाकर 7 प्रतिशत किया गया है।

    घरेलू खपत और उद्योग में बनी रह सकती है रफ्तार
    नोमुरा के अनुसार 2026 की पहली तिमाही के शुरुआती संकेत बताते हैं कि भारत में उपभोग और औद्योगिक गतिविधियों में गति बनी रह सकती है। हालांकि निर्यात और सरकारी खर्च में कुछ कमजोरी देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम बना हुआ है, खासकर प्राकृतिक गैस की संभावित कमी घरेलू उद्योग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।

    नीतिगत सुधार और वेतन वृद्धि से मिलेगा सहारा
    रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत की अर्थव्यवस्था को कई सकारात्मक कारकों से समर्थन मिल रहा है। इनमें पिछली नीतिगत ढील, संरचनात्मक सुधार, वेतन वृद्धि और वैश्विक व्यापार संबंधों में सुधार शामिल हैं। खास तौर पर अमेरिका के साथ व्यापार तनाव में कमी से भारत के लिए नए अवसर बन सकते हैं। इन कारकों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में चक्रीय सुधार देखने को मिल सकता है और विकास की रफ्तार बरकरार रह सकती है।

    ऊर्जा कीमतों से बढ़ सकता है महंगाई का दबाव
    नोमुरा ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं। फिलहाल कई एशियाई देशों में महंगाई अपेक्षाकृत कम स्तर पर है, लेकिन कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी से स्थिति बदल सकती है।

    ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है असर
    रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक मौद्रिक नीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे हालात में कई केंद्रीय बैंक फिलहाल अपनी नीति दरों को स्थिर रख सकते हैं, लेकिन अगर महंगाई का दबाव बढ़ता है तो भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना भी बन सकती है। ऐसे में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में आने वाले महीनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

  • कूटनीति की जीत: जयशंकर अराघची वार्ता के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने दी मंजूरी

    कूटनीति की जीत: जयशंकर अराघची वार्ता के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने दी मंजूरी


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री हमलों के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक राहत सामने आई है। भारत और ईरान के बीच उच्च स्तरीय बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय झंडाधारी तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। यह फैसला उस समय आया है जब इस क्षेत्र में अमेरिका यूरोप और इज़राइल से जुड़े जहाजों को लगातार खतरे और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है।

    इस महत्वपूर्ण फैसले की पृष्ठभूमि में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई फोन वार्ता को निर्णायक माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद ईरान ने भारत के प्रति सकारात्मक रुख दिखाते हुए भारतीय टैंकरों को इस संवेदनशील जलडमरूमध्य से गुजरने की विशेष अनुमति प्रदान की। कूटनीतिक सहमति के तुरंत बाद दो भारतीय तेल टैंकर पुष्पक’ और ‘परिमल को सुरक्षित रूप से होर्मुज से गुजरते हुए देखा गया जो इस समझौते के तुरंत प्रभाव में आने का स्पष्ट संकेत देता है।

    दरअसल हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कई विदेशी जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है इसलिए यहां की अस्थिरता सीधे तौर पर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करती है।

    ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस जलमार्ग को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है। ईरान की ओर से यह बयान भी सामने आया कि वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों से जुड़े तेल को होर्मुज से गुजरने नहीं देगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि क्षेत्रीय संघर्ष और दबाव की स्थिति में वह अपने भू-राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा।

    ऐसे तनावपूर्ण माहौल में भारत ने संतुलित और व्यावहारिक कूटनीति का परिचय देते हुए ईरान के साथ संवाद बनाए रखा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा और रणनीतिक संबंधों ने इस फैसले को संभव बनाया। यही कारण है कि जब कई देशों के जहाजों के सामने जोखिम बना हुआ है तब भारत के तेल टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिलना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

    फिलहाल स्थिति यह है कि जहां अमेरिका यूरोप और इज़राइल से जुड़े जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में प्रतिबंधों और हमलों का खतरा बना हुआ है वहीं भारत को मिली यह विशेष छूट वैश्विक कूटनीति में उसके संतुलित रुख और बढ़ते प्रभाव का संकेत देती है। यह घटनाक्रम इस बात का भी उदाहरण है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के दौर में संवाद और कूटनीति कितनी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

  • मिडिल ईस्ट संकट गहराया, Crude Oil की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पार

    मिडिल ईस्ट संकट गहराया, Crude Oil की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पार


    नई दिल्ली।मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया और कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है।

    ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई में तेज उछाल
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत 9 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 100.76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी मानक कच्चे तेल WTI Crude का भाव भी करीब 9 प्रतिशत की तेजी के साथ लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। तेल बाजार में इस तेज उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

    आईईए ने इमरजेंसी रिजर्व से तेल जारी करने का फैसला
    कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए International Energy Agency (आईईए) ने बड़ा कदम उठाया है। 32 सदस्य देशों वाले इस संगठन ने अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने की घोषणा की है। यह आईईए के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा इमरजेंसी रिलीज माना जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों में तेजी को कुछ हद तक नियंत्रित करना है।

    अमेरिका ने भी रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने की घोषणा की
    आईईए के फैसले के अलावा United States Department of Energy ने भी अलग से बड़ा ऐलान किया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने अपने Strategic Petroleum Reserve से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright के अनुसार इस तेल की आपूर्ति अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है और इसे पूरा होने में लगभग 120 दिन का समय लग सकता है।

    पहले भी 119 डॉलर तक पहुंच चुका है कच्चा तेल
    विशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतें पहले भी तेजी से बढ़ी थीं और एक समय यह 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में बाजार में कुछ स्थिरता आने के बाद कीमतें गिरकर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ गई थीं। लेकिन मौजूदा हालात ने फिर से बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र
    तेल बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह Strait of Hormuz में बढ़ता तनाव भी है। यह मध्य पूर्व का एक संकरा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया में उत्पादित होने वाले करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार होता है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

    तेल टैंकरों पर हमलों से बढ़ी चिंता
    मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। यही कारण है कि निवेशकों और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

  • शिवपुरी में दबंगई: पुरानी रंजिश में पिता-पुत्रों ने युवक को लाठी-डंडों से पीटा, सरेराह गोली चलाने का भी सनसनीखेज आरोप

    शिवपुरी में दबंगई: पुरानी रंजिश में पिता-पुत्रों ने युवक को लाठी-डंडों से पीटा, सरेराह गोली चलाने का भी सनसनीखेज आरोप

    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सिल्लारपुर में आपसी रंजिश के चलते खूनी संघर्ष का मामला सामने आया है। यहाँ एक ही परिवार के तीन सदस्यों (पिता और उसके दो बेटों) ने मिलकर एक युवक पर प्राणघातक हमला कर दिया। घटना के दौरान न केवल लाठी डंडों का इस्तेमाल हुआ बल्कि पीड़ित पक्ष ने आरोपियों पर दहशत फैलाने के लिए गोली चलाने की कोशिश करने का भी गंभीर आरोप लगाया है। इस हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    घर के बाहर खड़े युवक पर अचानक हमला
    प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना 11 मार्च की दोपहर करीब 3:30 बजे की है। ग्राम सिल्लारपुर निवासी 30 वर्षीय कांतेश ओझा अपने घर के बाहर खड़े थे तभी गाँव के ही प्रमोद केवट अपने दो बेटों शिवम केवट और सागर केवट के साथ वहाँ पहुँच गए। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश चली आ रही थी जिसे लेकर आरोपियों ने पहुँचते ही गाली गलौज शुरू कर दी। जब कांतेश ने अभद्र भाषा का विरोध किया तो पिता और बेटों ने आपा खो दिया और सुनियोजित तरीके से उन पर हमला बोल दिया।

    परिजनों ने बीच बचाव कर बचाई जान

    आरोपियों ने कांतेश को घेरकर लाठी डंडों और लात घूंसों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। हमले में कांतेश के बाएं हाथ की कलाई पीठ और दाहिने पैर की पिंडली में गंभीर चोटें आई हैं। चीख पुकार सुनकर कांतेश की पत्नी छाया ओझा और माँ हसमुखी ओझा तुरंत मौके पर पहुँचीं। महिलाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर बीच बचाव किया तब कहीं जाकर आरोपी वहाँ से हटे। भागते समय आरोपियों ने पीड़ित परिवार को पुलिस के पास जाने पर जान से मारने की धमकी भी दी।

    गोली चलाने के आरोप से सनसनी
    इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब घायल के भाई हरगोविंद झा ने सनसनीखेज दावा किया कि विवाद के दौरान आरोपियों ने गोली चलाने का भी प्रयास किया था ताकि इलाके में दहशत पैदा की जा सके। घटना के तुरंत बाद घायल कांतेश को 108 एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल ले जाया गया जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्होंने करैरा थाने पहुँचकर आपबीती सुनाई।

    पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर आरोपी प्रमोद केवट शिवम केवट और सागर केवट के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। थाना पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है और फरार आरोपियों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है। इस घटना के बाद से गाँव में तनाव का माहौल है जिसे देखते हुए पुलिस सतर्कता बरत रही है।

  • ग्वालियर में सीजन की सबसे गर्म रात, न्यूनतम तापमान 18.5 डिग्री; अगले 3-4 दिन और बढ़ेगी गर्मी

    ग्वालियर में सीजन की सबसे गर्म रात, न्यूनतम तापमान 18.5 डिग्री; अगले 3-4 दिन और बढ़ेगी गर्मी


    ग्वालियर । ग्वालियर में मौसम लगातार करवट बदल रहा है और गर्मी का असर अब दिन के साथ-साथ रातों में भी साफ महसूस होने लगा है। बुधवार की रात इस सीजन की अब तक की सबसे गर्म रात के रूप में दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार शहर का न्यूनतम तापमान 18.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो इस सीजन में अब तक का सबसे अधिक न्यूनतम तापमान है। इसके साथ ही हवा में नमी की मात्रा भी काफी कम हो गई है, जिससे वातावरण में गर्मी का असर और अधिक महसूस किया जा रहा है।

    दिन के समय भी तापमान लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को ग्वालियर का अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गुरुवार सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को गर्मी का अहसास करा दिया। सुबह 10 बजे के बाद से ही धूप इतनी तीखी हो गई कि लोगों को बाहर निकलने में परेशानी होने लगी। दोपहर होते-होते गर्मी का असर और बढ़ गया, जिसके कारण शहर की सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम आवाजाही दिखाई दी।

    भीषण गर्मी के चलते लोग केवल जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। दोपहर के समय बाजारों और प्रमुख सड़कों पर भी अपेक्षाकृत सन्नाटा देखने को मिला। गर्म हवाओं और तेज धूप के कारण लोगों को खासा असहज महसूस करना पड़ रहा है। मौसम में आए इस बदलाव का असर दैनिक जीवन के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

    मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले तीन से चार दिनों तक मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही बना रह सकता है। तापमान में ज्यादा राहत मिलने की संभावना फिलहाल कम है। विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। विशेष रूप से किसानों को भी अपनी फसलों का ध्यान रखने के लिए कहा गया है, क्योंकि तापमान में बढ़ोतरी का असर खेती पर भी पड़ सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने भी लोगों को इस मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ती गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए लोगों को अधिक मात्रा में तरल पदार्थ जैसे पानी, नींबू पानी, छाछ और अन्य पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाव किया जा सकेगा।

    इसके अलावा डॉक्टरों ने दोपहर के समय हल्का भोजन करने की सलाह दी है और खाने में ऐसी चीजों को शामिल करने को कहा है जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो। फल, सलाद और दही जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि दोपहर के समय तेज धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर और शरीर को पूरी तरह ढककर निकलना चाहिए, ताकि सीधे धूप के संपर्क से बचा जा सके।

    ग्वालियर में मार्च के महीने में ही इस तरह की गर्मी लोगों के लिए चिंता का विषय बन रही है। यदि तापमान में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले दिनों में गर्मी और अधिक तीखी हो सकती है। ऐसे में नागरिकों को मौसम के प्रति सतर्क रहते हुए अपनी दिनचर्या और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का भारतीय बाजार पर असर, BSE Sensex में एक फीसदी से ज्यादा गिरावट

    मिडिल ईस्ट तनाव का भारतीय बाजार पर असर, BSE Sensex में एक फीसदी से ज्यादा गिरावट


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष का असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सत्र की शुरुआत में ही बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ खुले। सुबह करीब 9:19 बजे BSE Sensex 963 अंक यानी लगभग 1.25 प्रतिशत गिरकर 75,899 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 303 अंक यानी करीब 1.27 प्रतिशत फिसलकर 23,563 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण निवेशकों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला।

    कई सेक्टरों में दिखा भारी दबाव
    शुरुआती कारोबार में बाजार के लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट देखी गई। ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, रियल्टी, मेटल, पीएसयू बैंक, डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव रहा। निवेशकों ने जोखिम से बचने की रणनीति अपनाते हुए कई सेक्टरों में मुनाफावसूली की। इस वजह से बाजार का मूड नकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बने रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
    केवल लार्जकैप ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट का असर देखा गया। Nifty Midcap 100 इंडेक्स करीब 1,070 अंक यानी 1.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,390 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty Smallcap 100 इंडेक्स लगभग 286 अंक यानी 1.75 प्रतिशत गिरकर 16,127 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक स्तर पर देखने को मिला।

    सेंसेक्स के कई बड़े शेयरों में गिरावट
    सेंसेक्स पैक के कई बड़े शेयर शुरुआती कारोबार में नुकसान में दिखाई दिए। इनमें प्रमुख रूप से Mahindra & Mahindra, Tata Steel, ICICI Bank, Titan Company, Larsen & Toubro, Maruti Suzuki, Bajaj Finance, State Bank of India, Axis Bank, Infosys और HDFC Bank जैसे शेयर शामिल रहे। दूसरी ओर आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जहां Tech Mahindra और HCLTech हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।

    एशियाई और अमेरिकी बाजारों से भी मिला कमजोर संकेत
    वैश्विक बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले हैं। एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजार जैसे Nikkei 225, Shanghai Composite, Hang Seng Index और KOSPI भी गिरावट के साथ खुले। वहीं अमेरिका में भी पिछला कारोबारी सत्र कमजोर रहा, जहां Dow Jones Industrial Average लाल निशान में बंद हुआ था। इन वैश्विक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
    बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी भी है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। खबर लिखे जाने तक Brent Crude लगभग 9.31 प्रतिशत की तेजी के साथ 100.54 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था, जबकि WTI Crude भी करीब 9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 95.14 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

    एफआईआई की बिकवाली से बढ़ा दबाव
    बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव भी बना हुआ है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 6,267.31 करोड़ रुपये की निकासी की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को कुछ सहारा देते हुए लगभग 4,965.53 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके बावजूद वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों की सतर्कता के कारण बाजार में गिरावट का रुख बना रहा।

  • बढ़ती डिमांड से मार्केट में कमी, Induction Cooktop क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर हुए आउट ऑफ स्टॉक

    बढ़ती डिमांड से मार्केट में कमी, Induction Cooktop क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर हुए आउट ऑफ स्टॉक


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के घरेलू बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। संभावित एलपीजी आपूर्ति बाधा की आशंका के बीच देशभर में इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक तेजी से बढ़ गई है। उपभोक्ता भविष्य में गैस सिलेंडर की कमी या कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के चलते वैकल्पिक कुकिंग विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कारण कई शहरों में इंडक्शन चूल्हों की खरीदारी तेजी से बढ़ गई है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इनकी उपलब्धता कम हो गई है।

    क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खत्म हुआ स्टॉक
    तेजी से बढ़ती मांग का असर क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर साफ देखा जा रहा है। कई शहरों में Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart और BigBasket जैसे प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन चूल्हे “आउट ऑफ स्टॉक” हो गए हैं। आमतौर पर ये प्लेटफॉर्म कुछ ही मिनटों में डिलीवरी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अचानक बढ़ी मांग के कारण इनके पास उपलब्ध स्टॉक तेजी से खत्म हो गया। इससे साफ है कि उपभोक्ता गैस के विकल्प के रूप में इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों को तेजी से अपना रहे हैं।

    ई-कॉमर्स साइट्स पर भी ऑर्डर में भारी उछाल
    सिर्फ क्विक-कॉमर्स ही नहीं बल्कि बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ी है। Amazon और Flipkart जैसी कंपनियों ने भी बिक्री में भारी बढ़ोतरी की पुष्टि की है। अमेजन इंडिया के एक प्रवक्ता के अनुसार पिछले दो दिनों में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में 30 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा राइस कुकर और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर जैसे उपकरणों की मांग भी सामान्य से लगभग चार गुना ज्यादा हो गई है, जबकि एयर फ्रायर और मल्टी-यूज इलेक्ट्रिक केतली की बिक्री लगभग दोगुनी हो गई है।

    कई राज्यों में अचानक बढ़ी मांग
    फ्लिपकार्ट के मुताबिक पिछले चार से पांच दिनों में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। कंपनी ने बताया कि दिल्ली, कोलकाता और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मांग विशेष रूप से तेज रही है। इन इलाकों में उपभोक्ता भविष्य में गैस की कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में कमी की आशंका के चलते वैकल्पिक कुकिंग विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।

    गैस आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंता
    मांग में आया यह उछाल इस बात का संकेत है कि घरों और छोटे व्यवसायों में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि कई लोग पहले से ही इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरण खरीदकर खुद को संभावित संकट के लिए तैयार करना चाहते हैं।

    जरूरी संस्थानों को प्राथमिकता देने की तैयारी
    रिपोर्ट के अनुसार तेल विपणन कंपनियों ने एलपीजी वितरकों से अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक संस्थानों को गैस आपूर्ति में प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार और ऊर्जा कंपनियां आपूर्ति की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और आवश्यक सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए पहले से कदम उठा रही हैं।

    सरकार ने बढ़ाया एलपीजी उत्पादन
    इस बीच Ministry of Petroleum and Natural Gas ने घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। मंत्रालय के अनुसार सरकार ने देश में एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि की है और इसे घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए निर्देशित किया गया है। इसके अलावा 8 मार्च को जारी आदेश में रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संभावित आपूर्ति संकट की स्थिति में भी उपभोक्ताओं को कुकिंग गैस की कमी का सामना न करना पड़े।

  • आईपीएल 2026 में फिर आमने-सामने Royal Challengers Bengaluru और Sunrisers Hyderabad, पहले मैच से जुड़ा खास इतिहास

    आईपीएल 2026 में फिर आमने-सामने Royal Challengers Bengaluru और Sunrisers Hyderabad, पहले मैच से जुड़ा खास इतिहास



    नई दिल्ली। 
    क्रिकेट फैंस के लिए बहुप्रतीक्षित Indian Premier League 2026 का आगाज 28 मार्च से होने जा रहा है। टूर्नामेंट के 19वें सीजन के पहले चरण का शेड्यूल Board of Control for Cricket in India (बीसीसीआई) ने जारी कर दिया है। इस सीजन का पहला मुकाबला Royal Challengers Bengaluru और Sunrisers Hyderabad के बीच खेला जाएगा। यह मैच बेंगलुरु के प्रसिद्ध M. Chinnaswamy Stadium में आयोजित होगा। हर साल की तरह इस बार भी ओपनिंग मैच को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

    2008 में शुरू हुई थी आईपीएल की शानदार परंपरा
    आईपीएल की शुरुआत 2008 में हुई थी और पहले ही मुकाबले ने टूर्नामेंट को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया था। उस मैच में Kolkata Knight Riders और Royal Challengers Bengaluru आमने-सामने थे। इस मुकाबले में कोलकाता ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 140 रन से बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके बाद हर सीजन का पहला मैच खास रोमांच लेकर आता रहा है और कई बार ओपनिंग मुकाबलों ने पूरे टूर्नामेंट की दिशा तय कर दी।

    शुरुआती वर्षों में बड़े मुकाबलों की शुरुआत
    आईपीएल 2009 में पहला मुकाबला Mumbai Indians और Chennai Super Kings के बीच खेला गया था, जिसमें मुंबई ने 19 रन से जीत हासिल की। 2010 में कोलकाता नाइट राइडर्स और Deccan Chargers के बीच मुकाबला हुआ, जिसमें केकेआर ने 11 रन से जीत दर्ज की। वहीं 2011 में चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच पहला मैच हुआ, जिसमें चेन्नई ने 2 रन से रोमांचक जीत हासिल की थी।

    कई टीमों ने दर्ज की यादगार जीत
    2012 में चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेले गए ओपनिंग मैच में मुंबई ने 8 विकेट से जीत दर्ज की थी। 2013 में Delhi Capitals और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मुकाबला हुआ, जिसमें केकेआर 6 विकेट से जीती। 2014 में कोलकाता और मुंबई के बीच मुकाबला हुआ और केकेआर ने 41 रन से जीत दर्ज की। इसके बाद 2015 में भी मुंबई और कोलकाता आमने-सामने हुए, जहां केकेआर ने 7 विकेट से जीत हासिल की।

    2016 के बाद भी जारी रहा रोमांच
    आईपीएल 2016 का पहला मुकाबला मुंबई इंडियंस और Rising Pune Supergiant के बीच खेला गया, जिसमें पुणे ने 9 विकेट से जीत दर्ज की। 2017 में सनराइजर्स हैदराबाद और आरसीबी के बीच ओपनिंग मैच हुआ, जिसमें हैदराबाद ने 35 रन से जीत हासिल की थी। 2018 में मुंबई और चेन्नई के बीच मैच हुआ और चेन्नई ने 1 विकेट से रोमांचक जीत दर्ज की।

    हाल के वर्षों में भी रोमांचक शुरुआत
    आईपीएल 2019 का पहला मुकाबला आरसीबी और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेला गया था, जिसमें चेन्नई 7 विकेट से विजयी रही। 2020 में मुंबई और चेन्नई के बीच मुकाबला हुआ और चेन्नई ने 5 विकेट से जीत हासिल की। 2021 में मुंबई और आरसीबी के बीच मैच हुआ, जिसमें आरसीबी ने 2 विकेट से रोमांचक जीत दर्ज की।

    नए दौर में नई टीमों की एंट्री
    2022 में चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच ओपनिंग मैच हुआ, जिसमें केकेआर ने 6 विकेट से जीत दर्ज की। 2023 में चेन्नई सुपर किंग्स और Gujarat Titans आमने-सामने हुए और गुजरात ने 5 विकेट से जीत हासिल की। 2024 में आरसीबी और चेन्नई के बीच मुकाबला हुआ, जिसमें चेन्नई 6 विकेट से विजयी रही। वहीं 2025 में कोलकाता नाइट राइडर्स और आरसीबी के बीच मैच हुआ और आरसीबी ने 7 विकेट से जीत दर्ज की।

    आईपीएल 2026 के ओपनिंग मैच पर सबकी नजरें
    अब आईपीएल 2026 का उद्घाटन मुकाबला आरसीबी और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेला जाएगा। दोनों टीमें मजबूत खिलाड़ियों से सजी हैं और फैंस को एक हाई-वोल्टेज मुकाबले की उम्मीद है। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार टूर्नामेंट के पहले मैच में कौन सी टीम जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत करती है।

  • Mark Butcher का बयान- Arshdeep Singh की फॉर्म ने बढ़ाई Jasprit Bumrah की प्रभावशीलता

    Mark Butcher का बयान- Arshdeep Singh की फॉर्म ने बढ़ाई Jasprit Bumrah की प्रभावशीलता


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के पूर्व सलामी बल्लेबाज Mark Butcher ने भारत के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज Arshdeep Singh की शानदार गेंदबाजी की जमकर सराहना की है। बुचर का मानना है कि नई गेंद से स्विंग कराने की अर्शदीप की क्षमता ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को और खतरनाक बना दिया है। उनकी सटीक लाइन-लेंथ और स्विंग ने विरोधी बल्लेबाजों के लिए रन बनाना मुश्किल कर दिया। बुचर के मुताबिक अर्शदीप के प्रभावी प्रदर्शन ने टीम को शुरुआती ओवरों में बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    बुमराह के रणनीतिक इस्तेमाल में मिली मदद
    मार्क बुचर का कहना है कि अर्शदीप सिंह की शानदार गेंदबाजी के कारण कप्तान Suryakumar Yadav को तेज गेंदबाज Jasprit Bumrah का रणनीतिक तरीके से इस्तेमाल करने की अधिक स्वतंत्रता मिली। उन्होंने कहा कि बुमराह भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के मुख्य स्तंभ हैं, लेकिन टीम प्रबंधन उन्हें मैच की स्थिति के अनुसार इस्तेमाल करता है। इससे विरोधी टीम यह अनुमान नहीं लगा पाती कि बुमराह किस ओवर में गेंदबाजी करेंगे। यही रणनीति कई अहम मौकों पर भारत के लिए फायदेमंद साबित हुई।

    दबाव वाले मैचों में दिखाया बेहतरीन नियंत्रण
    बुचर ने कहा कि भारतीय गेंदबाजों ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान दबाव भरे मुकाबलों में बेहतरीन नियंत्रण दिखाया। India national cricket team ने West Indies national cricket team, England national cricket team और New Zealand national cricket team जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ भी शानदार गेंदबाजी की। कठिन परिस्थितियों में गेंदबाजों ने जिम्मेदारी निभाई और विपक्षी बल्लेबाजी को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। बुचर का मानना है कि यही संतुलित गेंदबाजी भारत की सफलता की बड़ी वजह बनी।

    भारत की गेंदबाजी की गहराई बनी सबसे बड़ी ताकत
    एक क्रिकेट शो में बातचीत के दौरान बुचर ने कहा कि भले ही बुमराह गेंदबाजी आक्रमण की अगुआई करते हैं, लेकिन टीम के अन्य गेंदबाजों ने भी अहम योगदान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम की गेंदबाजी की गहराई और मौके बनाने की क्षमता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। अलग-अलग परिस्थितियों में अलग गेंदबाजों का प्रभावी प्रदर्शन टीम को संतुलन देता है और विरोधी टीमों पर दबाव बनाए रखता है।

    अर्शदीप और हार्दिक ने निभाई अहम भूमिका
    मार्क बुचर ने खासतौर पर अर्शदीप सिंह की नई गेंद से गेंदबाजी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट के दौरान शायद अर्शदीप ही ऐसे गेंदबाज थे जो गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा पा रहे थे। इसके अलावा ऑलराउंडर Hardik Pandya ने भी गेंद से शानदार प्रदर्शन किया और कई अहम मौकों पर टीम को विकेट दिलाकर मैच का रुख भारत के पक्ष में मोड़ दिया।

    बुमराह को ‘इंश्योरेंस पॉलिसी’ की तरह इस्तेमाल करती है टीम
    बुचर ने बताया कि आम तौर पर टी20 क्रिकेट में किसी तेज गेंदबाज से पावरप्ले में दो और डेथ ओवरों में दो ओवर कराने की उम्मीद की जाती है। लेकिन भारतीय टीम बुमराह को एक तरह की “इंश्योरेंस पॉलिसी” की तरह इस्तेमाल करती है। कई बार शुरुआत में हार्दिक पांड्या और अर्शदीप को ओवर दिए जाते हैं और जब मैच का रुख बदलने की जरूरत होती है, तब बुमराह को गेंद थमाई जाती है।

    टी20 विश्व कप में बुमराह का शानदार प्रदर्शन
    Jasprit Bumrah ने ICC Men’s T20 World Cup 2026 में भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने आठ मैचों में 14 विकेट हासिल किए। खासकर सेमीफाइनल और फाइनल जैसे बड़े मुकाबलों में उनकी घातक गेंदबाजी भारत की जीत का बड़ा कारण बनी। बुचर के अनुसार भारत की यही रणनीतिक सोच और गेंदबाजी संयोजन टीम को टी20 क्रिकेट में बाकी टीमों से अलग और मजबूत बनाता है।