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  • भारत ने समुद्र में पनडुब्बियों का अभेद्य किला तैयार किया, पाकिस्तान और चीन की नींद उड़ाने की तैयारी

    भारत ने समुद्र में पनडुब्बियों का अभेद्य किला तैयार किया, पाकिस्तान और चीन की नींद उड़ाने की तैयारी


    नई दिल्‍ली । भारत ने अपने समुद्री सुरक्षा तंत्र को अब तक के सबसे मजबूत रूप में बदल दिया है। अब देश के पश्चिमी और पूर्वी तट पर पनडुब्बियों का एक जाल बिछा हुआ है जो पाकिस्तान और चीन जैसी चुनौतियों को नापाक कदम उठाने से पहले ही रोक सकेगा। भारतीय नौसेना की यह शक्ति सिर्फ डराने के लिए नहीं बल्कि रणनीतिक और सामरिक संतुलन बनाए रखने के लिए है।

     भारतीय नौसेना के बेड़े में लगभग 20-21 मारक पनडुब्बियां शामिल हैं। इनमें से 17 डीजल-पॉवर्ड अटैक पनडुब्बियां हैं जबकि कम से कम 2 न्यूक्लियर पॉवर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां सक्रिय हैं। इसके अलावा एक पनडुब्बी रूस से लीज पर ली गई है।

    सबसे महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि भारत अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन S-4 को अप्रैल या मई तक सेवा में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहली बार सामरिक बल कमान के तहत भारत के पास तीन परिचालन एसएसबीएन हो जाएंगे जो देश की परमाणु समुद्री क्षमताओं को और मजबूत करेंगे।

    भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां पश्चिमी तट पर मुंबई और पूर्वी तट पर विशाखापत्तनम के पास तैनात हैं। हाल ही में दो नए पनडुब्बी अड्डे बनाए गए हैं। पहला कारवार मुंबई से 500 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। दूसरा आईएनएस वर्षा पूर्वी तट पर काकीनाडा के पास है जहां भूमिगत पनडुब्बी ठिकाने बनाए गए हैं। इसे चीन के हालिया उन्नयन के जवाब में भारत की नौसैनिक परमाणु क्षमता बढ़ाने की बड़ी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।

    भारत ने फरवरी 2015 में स्वदेशी 6 न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक सबमरींस को अपने बेड़े में शामिल करने की परियोजना को मंजूरी दी थी। ये पनडुब्बियां विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में बनाई जा रही हैं। हालांकि स्वदेशी न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक क्लास की पूरी क्षमता हासिल करना अभी लगभग एक दशक दूर का लक्ष्य है। अनुमान है कि इसकी पहली पनडुब्बी 2036 तक ही बेड़े में शामिल होगी।

    भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर है जिसकी सीमा पाकिस्तान से मिलती है। वहीं पूर्वी तट पर बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर हैं जहां चीन के जासूसी जहाज अक्सर गतिविधियां करते रहते हैं। भारतीय पनडुब्बियों का यह जाल दुश्मनों के लिए सिर्फ चेतावनी नहीं बल्कि वास्तविक सामरिक खतरा है। इसमें न्यूक्लियर पॉवर्ड और हमलावर पनडुब्बियां शामिल हैं जो समुद्र में किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। इस प्रकार भारत ने समुद्र के भीतर एक अभेद्य किला तैयार कर लिया है जो न केवल देश की रक्षा करता है बल्कि दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन बनाए रखने में भी निर्णायक भूमिका निभाता है।

  • दिल्ली का सबसे महंगा रिटेल बाजार: खान मार्केट ने कायम रखा शीर्ष स्थान

    दिल्ली का सबसे महंगा रिटेल बाजार: खान मार्केट ने कायम रखा शीर्ष स्थान


    नई दिल्‍ली । दिल्ली में रिटेल मार्केट के मामले में खान मार्केट की रौनक बरकरार है। यदि आप सोच रहे हैं कि कनॉट प्लेस में दुकान खोलना सबसे महंगा है, तो आप गलत हैं। राजधानी के लुटियंस जोन में स्थित खान मार्केट आज भी देश का सबसे महंगा शॉपिंग हब बना हुआ है। सीमित जगह और बड़े बड़े ब्रांड्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने यहां किराए को लगातार ऊंचाई पर बनाए रखा है। अंतरराष्ट्रीय और प्रीमियम ब्रांड्स की मौजूदगी इसे हाई-एंड ग्राहकों के लिए खास बनाती है।

    कुशमैन एंड वेकफील्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, खान मार्केट में अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में दुकानों का मासिक किराया 1,700 से 1,800 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां की मांग अब स्टेटस सिंबल बन चुकी है। सीमित रिटेल स्पेस और बड़े ब्रांड्स की भारी भीड़ के कारण नई जगह पाना लगभग असंभव हो गया है। यही वजह है कि खान मार्केट लगातार देश के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित शॉपिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।

    कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में भी किराए में करीब 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब दुकानदारों को 1,150 से 1,250 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह किराया देना पड़ रहा है। वहीं, गुरुग्राम का गैलेरिया मार्केट सबसे अधिक 14 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अब कनॉट प्लेस के बराबर किराया दर्ज कर रहा है।

    उत्तर दिल्ली के छात्र और युवा केंद्रित बाजार कमला नगर में किराए में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब यहां किराया 480 से 510 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गया है। नोएडा के सेक्टर-18 में भी किराया 8 प्रतिशत बढ़कर 200 से 220 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गया है। दक्षिणी दिल्ली के प्रमुख बाजार साउथ एक्सटेंशन और लाजपत नगर  में 3 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। करोल बाग  में दुकानों का मासिक किराया बढ़कर 395 से 415 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच पहुंच गया है।

    कुशमैन एंड वेकफील्ड के कार्यकारी प्रबंध निदेशक गौतम सराफ का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर के रिटेल बाजारों में यह उछाल प्राइम लोकेशंस पर जगह की कमी और लगातार बढ़ती मांग का संकेत है। 2025 में दिल्ली-एनसीआर में करीब 22.5 लाख वर्ग फुट रिटेल स्पेस किराए पर लिया गया, जो 2019 के बाद का सबसे उच्च स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीमियम लोकेशंस पर बढ़ती मांग के कारण आने वाले समय में भी किराए में बढ़ोतरी का रुझान जारी रह सकता है।

  • केजरीवाल सिसोदिया की फिर बढ़ी मुश्किलें, तुषार मेहता की दलीलों से दिल्ली शराब नीति केस में आया नया मोड़

    केजरीवाल सिसोदिया की फिर बढ़ी मुश्किलें, तुषार मेहता की दलीलों से दिल्ली शराब नीति केस में आया नया मोड़


    नई दिल्‍ली । दिल्ली शराब नीति मामले में नया मोड़ आया है। कथित आबकारी नीति घोटाला मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ED के हवाला एंगल से जुड़े मामले में फिलहाल आगे की सुनवाई नहीं होगी जब तक हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती। हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी होने तक ईडी से जुड़े मामले में अरविंद केजरीवाल मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों की आरोपमुक्ति फिलहाल प्रभावी नहीं मानी जाएगी। और सभी आरोपमुक्त आरोपियों को नोटिस जारी किया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की गई है।

    अदालत ने इस मामले में निचली अदालत से आरोपमुक्त किए गए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है। वहीं अदालत ने राउज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश के एक हिस्से पर रोक लगाने की बात कही है जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की गई थी। उच्च न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि निचली अदालत के कुछ अवलोकन तथ्यात्मक रूप से सही नहीं थे। हालांकि अदालत ने फिलहाल निचली अदालत के उस आदेश पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई है जिसमें केजरीवाल सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को आरोपमुक्त किया गया था। ऐसे में इस चरण में CBI को तत्काल राहत नहीं मिली है।

    उच्च न्यायालय ने कहा कि वह निचली अदालत को प्रवर्तन निदेशालय ईडी द्वारा धनशोधन मामले की जांच पर कार्यवाही को बाद की तारीख तक स्थगित करने का आदेश देगी। सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा किए गए अनुरोध पर उच्च न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि वह सीबीआई अधिकारियों पर अधीनस्थ अदालत द्वारा की गई पूर्वग्रहपूर्ण टिप्पणियों के अमल पर रोक लगाएगी। मेहता ने अदालत से सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए समय निर्धारित करके अंतिम निर्णय लेने का आग्रह किया। मेहता ने तर्क दिया कि आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और सिसोदिया को अरोप मुक्त करने का निचली अदालत का आदेश अनुचित था और आपराधिक कानून को ही उलट देता है।

    शराब नीति का मामला सबसे बड़े घोटालों में से एक

    तुषार मेहता ने उच्च न्यायालय से कहा कि शराब नीति मामला सबसे बड़े घोटालों में से एक था और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण था। मेहता ने दावा किया कि निचली अदालत ने केजरीवाल सिसोदिया और अन्य के पक्ष में बिना सुनवाई के आरोप मुक्त करने का आदेश सुना दिया। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी ने शराब नीति में हेरफेर के लिए साजिश और रिश्वतखोरी को दर्शाने वाले विस्तृत सबूत जुटाए थे। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सिसोदिया और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं और सीबीआई के मामले के पक्ष में कई गवाह हैं।

    बता दें कि निचली अदालत ने 27 फरवरी को केजरीवाल सिसोदिया और 21 अन्य को आरोप मुक्त कर दिया और सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा कि उसका मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से विफल रहा और पूरी तरह से निराधार साबित हुआ। इस मामले में जिन 21 लोगों को क्लीन चिट दी गई है उनमें तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता भी शामिल हैं। सीबीआई आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार द्वारा अब रद्द की जा चुकी शराब नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है।

    हाईकोर्ट के फैसले पर आप का बयान

    दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर संजय सिंह ने कहा सबसे पहले तो उन्हें कोई स्टे नहीं मिला है जो सीबीआई के लिए एक झटका है। दूसरा हम अपने वकीलों से सभी जानकारी जुटाने के बाद आधिकारिक रूप से अपना पक्ष रखेंगे। उन्हें कोई स्टे नहीं मिला है। CBI कोर्ट का फैसला अभी भी बरकरार है और उस पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।

  • दिव्यांग पेंशन पर टैक्स के खिलाफ भड़के पूर्व सैनिक, रिटायर्ड मेजर जनरल बोले– अग्निवीर योजना से कमजोर होगी सेना

    दिव्यांग पेंशन पर टैक्स के खिलाफ भड़के पूर्व सैनिक, रिटायर्ड मेजर जनरल बोले– अग्निवीर योजना से कमजोर होगी सेना


    भोपाल। केंद्र सरकार के हालिया बजट में पूर्व सैनिकों की दिव्यांग पेंशन पर इनकम टैक्स लगाने के फैसले को लेकर देशभर में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। इसी मुद्दे को लेकर भोपाल में कांग्रेस भूतपूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रिटायर्ड मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के लिए अपनी जान और शरीर तक दांव पर लगाने वाले सैनिकों की पेंशन पर टैक्स लगाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और असंवेदनशील फैसला है।

    श्याम श्रीवास्तव ने कहा कि दिव्यांग पेंशन उन सैनिकों को दी जाती है, जो युद्ध, ऑपरेशन या ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से घायल होकर दिव्यांग हो जाते हैं। यह पेंशन उनकी मुख्य पेंशन का एक निर्धारित हिस्सा होती है, जो उनके जीवन-यापन और इलाज में मदद करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब इस दिव्यांग पेंशन पर भी इनकम टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है, जो 30 प्रतिशत तक हो सकता है। श्रीवास्तव ने कहा कि 1922 में बने पहले इनकम टैक्स कानून में स्पष्ट प्रावधान था कि ऐसे सैनिकों की पेंशन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन करीब 100 साल बाद सरकार ने उस पर भी टैक्स लगाने का फैसला कर लिया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सरकार पूर्व सैनिकों की पेंशन पर टैक्स लगाकर कितना राजस्व जुटा लेगी, जबकि इससे सैनिकों का मनोबल जरूर टूटेगा।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व सैनिकों के लिए चल रही एक्स-सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई। श्रीवास्तव ने कहा कि यह योजना पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन हाल के समय में बजट की कमी के कारण इसकी हालत खराब होती जा रही है। उनका आरोप है कि कई निजी अस्पतालों के बिल महीनों से लंबित पड़े हैं, जिसके कारण कई अस्पतालों ने पूर्व सैनिकों का इलाज करना बंद कर दिया है। इससे हजारों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

    रिटायर्ड मेजर जनरल ने सेना में लागू अग्निवीर योजना को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक प्रयोग बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत युवाओं की चार साल के लिए अस्थायी भर्ती की जाती है और बाद में 75 प्रतिशत जवानों को सेवा से बाहर कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं को चार साल बाद वापस भेज दिया जाएगा, उन्हें न तो पेंशन मिलेगी, न ग्रेच्युटी और न ही शहीद होने पर मिलने वाली सुविधाएं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यही व्यवस्था जारी रही तो आने वाले 8 से 10 वर्षों में सेना में स्थायी सैनिकों की संख्या लगातार घटती जाएगी और अग्निवीरों की संख्या बढ़ती जाएगी।

    श्याम श्रीवास्तव के अनुसार वर्तमान में भारतीय सेना में करीब 14 लाख सैनिक हैं, लेकिन यदि नियमित भर्ती कम होती रही और अग्निवीरों की संख्या बढ़ती गई, तो भविष्य में केवल लगभग साढ़े तीन लाख स्थायी सैनिक ही रह जाएंगे, जो पूरी तरह प्रशिक्षित और युद्ध के लिए तैयार होंगे। उन्होंने मांग की कि सभी अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल किया जाए ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।

    इसके अलावा उन्होंने मध्य प्रदेश में पूर्व सैनिकों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तृतीय श्रेणी की नौकरियों में 10 प्रतिशत और चतुर्थ श्रेणी में 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन चयन प्रक्रिया में इसका सही लाभ पूर्व सैनिकों को नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि यदि आरक्षण का सही तरीके से पालन हो, तो पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने हाल के वर्षों में कुछ राज्यों में सैनिकों और पूर्व सैनिकों के साथ पुलिस द्वारा कथित दुर्व्यवहार की घटनाओं की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जो लोग देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, उनके साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। पूर्व सैनिकों ने सरकार से मांग की है कि दिव्यांग पेंशन पर लगाए गए टैक्स के फैसले को तुरंत वापस लिया जाए और सैनिकों से जुड़े सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए।

  • T20 World Cup 2026: भारत बना चैंपियन, करोड़ों की इनामी बारिश; रनर-अप न्यूजीलैंड भी मालामाल

    T20 World Cup 2026: भारत बना चैंपियन, करोड़ों की इनामी बारिश; रनर-अप न्यूजीलैंड भी मालामाल


    नई दिल्ली। भारत ने T20 World Cup 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने घर में इतिहास रच दिया। अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में 8 मार्च को खेले गए फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर तीसरी बार टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत टी20 विश्व कप में सबसे ज्यादा बार चैंपियन बनने वाली टीम बन गया।

    फाइनल मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन ने शानदार अर्धशतकीय पारियां खेलीं। जवाब में न्यूजीलैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और 19 ओवर में 159 रन पर सिमट गई।

    इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही टीम इंडिया पर करोड़ों रुपये की इनामी बारिश भी हुई। International Cricket Council (ICC) ने T20 World Cup 2026 के लिए कुल 13.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 123.77 करोड़ रुपये का प्राइज पूल रखा था, जो पिछले संस्करण की तुलना में करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है।

    टूर्नामेंट की विजेता टीम होने के नाते भारत को 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 27.48 करोड़ रुपये की प्राइज मनी मिली। वहीं फाइनल में हारने वाली न्यूजीलैंड की टीम भी खाली हाथ नहीं लौटी। रनर-अप रहने पर कीवी टीम को 1.6 मिलियन डॉलर यानी लगभग 14.65 करोड़ रुपये की राशि दी गई।

    सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली लेकिन फाइनल में जगह नहीं बना सकने वाली टीमों को भी अच्छी खासी इनामी राशि मिली। दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड को सेमीफाइनलिस्ट के रूप में 790,000 डॉलर यानी करीब 7.24 करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया गया।

    वहीं सुपर-8 चरण तक पहुंचने के बाद सेमीफाइनल में जगह बनाने से चूकने वाली टीमों को भी ICC ने सम्मानजनक इनाम दिया। इस चरण में बाहर होने वाली टीमों को 380,000 डॉलर यानी करीब 3.48 करोड़ रुपये मिले। इनमें जिम्बाब्वे, वेस्टइंडीज, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी टीमें शामिल रहीं।

    ग्रुप स्टेज में हिस्सा लेने वाली सभी टीमों को भी ICC की ओर से 250,000 डॉलर यानी करीब 2.29 करोड़ रुपये की गारंटीड प्राइज मनी दी गई।

  • मध्यप्रदेश ने जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 को दी अंतिम रूप, अमृत मित्र संभालेंगे जल संरक्षण की कमान

    मध्यप्रदेश ने जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 को दी अंतिम रूप, अमृत मित्र संभालेंगे जल संरक्षण की कमान


    भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रदेश की जल संपदा को संरक्षित करने और नगरीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 की व्यापक कार्य योजना को अंतिम रूप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा निर्देशों के अनुरूप तैयार यह योजना पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है।

    अभियान के तहत सभी नगरीय निकायों को नदियों तालाबों बावडियों और नालों के किनारे किए गए अतिक्रमण को चिह्नित कर तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे न केवल जल संरचनाओं का प्राकृतिक स्वरूप लौटेगा बल्कि वर्षा जल के प्रवाह से भू जल स्तर में भी वृद्धि होगी।

    अभियान में बुनियादी ढांचे और स्वच्छता कार्यों के लिए वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। अमृत 2.0 के तहत 112 जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाएगा जिनका क्षेत्रफल लगभग 3315 एकड़ है और इस पर 67 करोड़ रुपये का निवेश होगा। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत 100 प्रमुख नालों के शुद्धिकरण पर 664 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। भविष्य में 1000 जल ग्रहण संरचनाओं का वैज्ञानिक संवर्धन और 5000 नाले नालियों की सघन सफाई एवं सौंदर्यीकरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में 5000 नई रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणालियां स्थापित की जाएंगी।

    नागरिक सुविधाओं के विस्तार में प्रमुख बाजारों बस स्टैंडों और सार्वजनिक चौराहों पर सुव्यवस्थित प्याऊ स्थापित किए जाएंगे जिससे ग्रीष्मकाल में राहगीरों और आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा। पर्यावरण संरक्षण के हिस्से के रूप में अमृत 2.0 के तहत 116 निकायों में 300 एकड़ क्षेत्र को हरित क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा जिस पर लगभग 29 करोड़ रुपये खर्च होंगे। आगामी मानसून सत्र में 1 करोड़ पौधों का रोपण भी किया जाएगा।

    युवा सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए 5000 युवाओं को अमृत मित्र के रूप में MY Bharat पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा। ये युवा जल संरक्षण के प्रति जन जागरूकता फैलाने और अभियान को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इस एकीकृत कार्य योजना से प्रदेश की जल धरोहर संरक्षित होगी और स्वच्छ हरित मध्यप्रदेश के संकल्प को साकार करने में मदद मिलेगी।

  • जबलपुर में साइबर ठगी: बुजुर्ग के खाते से एक लाख रुपये उड़ा लिए, योनो लिंक पर क्लिक कर हुआ हैक

    जबलपुर में साइबर ठगी: बुजुर्ग के खाते से एक लाख रुपये उड़ा लिए, योनो लिंक पर क्लिक कर हुआ हैक


    जबलपुर । जबलपुर में साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग नागरिक को अपना शिकार बना लिया। गोराबाजार थाना क्षेत्र के निवासी प्रभाकर मोहिते ने पुलिस को शिकायत दी कि उनके खाते से करीब एक लाख रुपये ठगी के जरिए गायब हो गए।

    शिकायत में बताया गया कि ठगों ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर बताया कि उनके एसबीआई योनो ऐप का एक्सपायर हो गया है। इसके बाद उन्होंने प्रभाकर मोहिते को एक लिंक भेजा और उस पर क्लिक करने को कहा। लिंक पर क्लिक करते ही बुजुर्ग का मोबाइल हैक हो गया। इसके तुरंत बाद उनके खाते से कई ट्रांजेक्शन के जरिए कुल एक लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए गए।

    गोराबाजार थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर अज्ञात साइबर अपराधियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों को चेताया है कि कभी भी मोबाइल लिंक या कॉल पर बैंक की जानकारी साझा न करें और ऐसे संदिग्ध संदेश आने पर सीधे अपने बैंक या पुलिस से संपर्क करें।

    इस घटना ने एक बार फिर साइबर ठगी के नए तरीकों की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल या इंटरनेट बैंकिंग इस्तेमाल करते समय हमेशा सुरक्षित ऐप और आधिकारिक वेबसाइटों का ही प्रयोग करें।

  • SIR पूरा, लेकिन सियासत जारी: दिग्विजय ने चुनाव आयोग में मतदाता गड़बड़ी का आरोप लगाया

    SIR पूरा, लेकिन सियासत जारी: दिग्विजय ने चुनाव आयोग में मतदाता गड़बड़ी का आरोप लगाया


    भोपाल । भोपाल में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का काम पूरा हो गया है लेकिन सियासत थमने का नाम नहीं ले रही। सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह चुनाव आयोग पहुंचे। उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ी के सबूत प्रस्तुत किए और गंभीर आरोप लगाए कि एसआईआर में फर्जी नाम जोड़े गए और कुछ नाम हटा दिए गए। उनका कहना है कि यह बीजेपी सरकार के दबाव में हुआ।

    दिग्विजय सिंह के साथ पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। उन्होंने चुनाव आयोग से मुलाकात कर शिकायत की और आश्वासन प्राप्त किया कि मामले की जांच की जाएगी। दिग्विजय ने चुनाव आयोग का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने उनकी बात सुनी और गड़बड़ी के दस्तावेजों को स्वीकार किया।

    विशेष रूप से उन्होंने तीन अलग अलग घरों में 30 से अधिक मतदाता होने की शिकायत दी। मकान मालिकों ने बताया कि उनके घर में वास्तविक तौर पर केवल 6 या 7 सदस्य हैं लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी हुई मतदाता सूची में एक मकान नंबर पर 30 से अधिक सदस्य दर्शाए गए।
    दिग्विजय सिंह ने यह शिकायत भोपाल की नरेला विधानसभा क्षेत्र से लेकर गए थे।

    उनका कहना है कि यह गंभीर अनियमितता है और इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती है।चुनाव आयोग ने इस मामले में जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि शिकायत का उचित समाधान किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने मध्यप्रदेश में मतदाता सूची सुधार और उसकी वैधता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • उमंग सिंघार ने आदिवासी इलाकों से बढ़ते पलायन पर सरकार पर साधा निशाना, बोले- ये गंभीर मानवीय संकट है

    उमंग सिंघार ने आदिवासी इलाकों से बढ़ते पलायन पर सरकार पर साधा निशाना, बोले- ये गंभीर मानवीय संकट है


    भोपाल। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचलों से लगातार हो रहे पलायन को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रोजगार, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की तलाश में अपने ही राज्य से बाहर जाने को मजबूर हो रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान और अस्तित्व से जुड़ा गंभीर मानवीय संकट है।

    सिंघार ने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन से जुड़े आदिवासी समुदाय आज अपने गांव और खेत छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए विवश हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का यह पलायन उनकी पहचान और सम्मान से जुड़ा एक गहरा सामाजिक संकट बनता जा रहा है।

    भाजपा सरकार की नीतियों को ठहराया जिम्मेदार

    आदिवासियों के पलायन के मुद्दे पर उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि वर्षों से सत्ता में रही सरकार दलित और आदिवासी समाज के मुद्दों पर केवल घोषणाएं और प्रचार तक सीमित रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी गौरव के नाम पर कार्यक्रम तो आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आदिवासी परिवारों को रोजगार और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिसके कारण उन्हें प्रदेश छोड़कर जाना पड़ रहा है।

    सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट संकेत

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की भी कमी बनी हुई है। उनका कहना है कि जब किसी प्रदेश के मूल निवासी ही अपनी जमीन और गांव छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएं, तो यह सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट संकेत है।

    उल्लेखनीय है कि मध्‍य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों से हर वर्ष बड़ी संख्या में मजदूर काम की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करते हैं। इस मुद्दे को लेकर अब कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आदिवासी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया है।

  • ग्वालियर में फटे पाइप वाली फायर ब्रिगेड के कारण आग बुझाने में 7 घंटे, एक महिला की मौत

    ग्वालियर में फटे पाइप वाली फायर ब्रिगेड के कारण आग बुझाने में 7 घंटे, एक महिला की मौत


    ग्वालियर । ग्वालियर के कोतवाली थाना क्षेत्र में रविवार शाम करीब 4 बजे बालाबाई बाजार स्थित एक व्यापारी के मकान में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से भड़क गई कि घर में मौजूद छह लोग खिड़कियों तक ही सीमित रह गए। फायर ब्रिगेड के दमकलकर्मियों ने पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला लेकिन घर की बहू अंकिता अग्रवाल का दम घुट गया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    घटना की खबर सुनते ही उनके पिता अशोक अग्रवाल को हार्ट अटैक आया और उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आग को बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं लेकिन पाइप कई जगह से फटे हुए थे और पानी का बड़ा हिस्सा सड़क पर बहता रहा। कुछ स्थानीय लोग ईंट पत्थर लगाकर पाइप की लीकेज को बंद करने की कोशिश करते रहे। कई गाड़ियों में पानी का प्रेशर कम होने के कारण आग पर काबू पाने में लगातार देरी होती रही।

    बालाबाई बाजार का इलाका संकरा होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को अंदर तक पहुंचने में भी समस्या आई। खराब पाइप लीकेज और कम प्रेशर वाली गाड़ियों ने आग बुझाने की प्रक्रिया को और धीमा कर दिया। नतीजतन आग को काबू में करने में सात घंटे से ज्यादा का समय लग गया। फायर ब्रिगेड की 10 से अधिक गाड़ियों के साथ टैंकरों से भी पानी मंगाया गया। अपर आयुक्त प्रदीप तोमर के अनुसार 35 से अधिक फायर ब्रिगेड गाड़ियों का पानी आग बुझाने में इस्तेमाल हुआ। एसडीआरएफ की टीम भी राहत कार्य में लगी रही।

    मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि अगर पहली फायर ब्रिगेड की गाड़ी पूरी तरह से कार्यशील होती तो आग को शुरुआती समय में ही नियंत्रित किया जा सकता था।कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि फायर ब्रिगेड वाहनों की नियमित सर्विसिंग और टेस्टिंग जरूरी है। उन्होंने नगर निगम आयुक्त को जानकारी देने और फायर ब्रिगेड व्यवस्थाओं की जांच कराने के निर्देश दिए। इस हादसे ने ग्वालियर में फायर ब्रिगेड की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं और शहर में आपातकालीन प्रतिक्रिया में सुधार की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया।