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  • बंगाल में पकड़े गए बांग्लादेश के दो आरोपी, युवा नेता हादी की हत्या में बताए जा रहे शामिल

    बंगाल में पकड़े गए बांग्लादेश के दो आरोपी, युवा नेता हादी की हत्या में बताए जा रहे शामिल


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सीमा के पास पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन पर बांग्लादेश के युवा नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शरिफ उस्मान हादी की हत्या में शामिल होने का आरोप है।

    पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बोंगांव सीमा क्षेत्र में छापेमारी कर दोनों संदिग्धों को पकड़ा। पुलिस के मुताबिक आरोपी भारत में छिपे हुए थे और मौका मिलते ही वापस बांग्लादेश भागने की योजना बना रहे थे।

    गुप्त सूचना के बाद हुई कार्रवाई

    पुलिस को सूचना मिली थी कि बांग्लादेश में गंभीर अपराध करने के बाद दो लोग अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए हैं। इसके बाद STF ने बोंगांव इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया।

    7 और 8 मार्च की रात छापेमारी कर दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी पहचान राहुल उर्फ फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों पर हत्या और वसूली जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं।

    मेघालय सीमा से भारत में घुसे

    जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी मेघालय सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे। इसके बाद वे अलग-अलग जगहों पर घूमते रहे और अंत में पश्चिम बंगाल के बोंगांव इलाके में पहुंच गए।

    पुलिस को शक है कि वे कुछ समय तक सीमा के पास छिपे रहने के बाद फिर से बांग्लादेश भागने की योजना बना रहे थे।

    ढाका में हुई थी गोली मारकर हत्या

    जानकारी के अनुसार 12 दिसंबर को ढाका के बिजयनगर इलाके में शरिफ उस्मान हादी पर उस समय हमला किया गया था जब वह रिक्शा से यात्रा कर रहे थे। हमलावरों ने करीब से गोली चलाई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

    बेहतर इलाज के लिए 15 दिसंबर को उन्हें एयर एंबुलेंस से सिंगापुर भेजा गया, लेकिन 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।

    हत्या के बाद ढाका में प्रदर्शन

    हादी की मौत के बाद ढाका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनके समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग की थी। उस समय मोहम्मद यूनुस ने इस घटना के बाद राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया था।

    बताया जाता है कि हादी को फरवरी 2026 के राष्ट्रीय चुनाव में ढाका-8 सीट से संभावित उम्मीदवार माना जा रहा था।

    आगे की जांच जारी

    पुलिस ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या की साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे और भारत में आने के बाद आरोपियों ने किन लोगों से संपर्क किया।

  • ईरान के समर्थन पर सियासी घमासान: केरल CM के बयान से BJP नाराज

    ईरान के समर्थन पर सियासी घमासान: केरल CM के बयान से BJP नाराज


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की राजनीति पर भी दिखाई देने लगा है। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा ईरान के समर्थन में दिए गए बयान को लेकर भाजपा ने कड़ा विरोध जताया है।

    भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री का बयान “तुष्टीकरण की राजनीति” से प्रेरित है।

    भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साधा निशाना

    राजधानी तिरुवनंतपुरम में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री विजयन के बयान की आलोचना की।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ईरान पर हुए हमलों की तो आलोचना कर रहे हैं, लेकिन ईरान द्वारा Gulf Cooperation Council के सदस्य देशों पर किए जा रहे हमलों पर चुप हैं।

    चंद्रशेखर ने कहा कि इन खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में मलयाली लोग रहते हैं, इसलिए राज्य सरकार को उनकी सुरक्षा को भी ध्यान में रखना चाहिए।

    ‘केवल ईरान के बारे में ही क्यों बोल रहे हैं?’

    भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए कहा,
    “आप सिर्फ ईरान के बारे में ही क्यों बोल रहे हैं? क्या यह आपकी तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा नहीं है? ईरान द्वारा किए गए हमलों की आप निंदा क्यों नहीं करते?”

    भाजपा का क्या है रुख?

    इस मुद्दे पर भाजपा के रुख को लेकर पूछे गए सवाल पर चंद्रशेखर ने कहा कि भाजपा या केंद्र सरकार ईरान के खिलाफ नहीं है।

    उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता और किसी भी विवाद को कूटनीतिक तरीके से सुलझाया जाना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने ही ईरानी जहाज को कोच्चि बंदरगाह पर लंगर डालने की अनुमति दी थी।

    विजयन ने क्या कहा था?

    दरअसल, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की आलोचना की थी। उनका कहना था कि इन हमलों का कोई उचित कारण नहीं है और यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।

    उन्होंने यह भी कहा कि कुछ शक्तिशाली देश मिलकर वैश्विक शांति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या को अमानवीय और क्रूर बताया और भारत सरकार से इस पर विरोध दर्ज कराने की मांग की थी।

    मुख्यमंत्री के इसी बयान को लेकर अब केरल में सियासी विवाद तेज हो गया है। 

  • राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी का पलटवार, दिखाई पुरानी फोटो

    राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी का पलटवार, दिखाई पुरानी फोटो


    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार पर राष्ट्रपति के “अपमान” का आरोप लगाए जाने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर दिखाकर पलटवार किया।

    कोलकाता में धरना स्थल से ममता बनर्जी ने एक तस्वीर दिखाते हुए दावा किया कि उसमें प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी बैठे हुए हैं, जबकि राष्ट्रपति उनके बगल में खड़ी दिखाई दे रही हैं।

    ‘राष्ट्रपति का अपमान हमारी संस्कृति नहीं’

    ममता बनर्जी ने उस तस्वीर को “सबूत” बताते हुए कहा,
    “इस तस्वीर में प्रधानमंत्री बैठे हैं और राष्ट्रपति खड़ी हैं। हम ऐसा कभी नहीं करते। राष्ट्रपति का अपमान करने की संस्कृति भाजपा की है, हमारी नहीं।”

    उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राष्ट्रपति पद और भारत के संविधान का पूरा सम्मान करती है और इस मामले में राज्य सरकार को दोष नहीं दिया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति ने जताई थी नाराजगी

    दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंची थीं, जहां उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में भाग लेना था। बताया गया कि वहां मुख्यमंत्री या किसी मंत्री के मौजूद न होने पर राष्ट्रपति ने नाराजगी जताई थी।

    उन्होंने सिलीगुड़ी के पास अपने कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया था।

    राज्य सरकार ने क्या कहा

    ममता बनर्जी ने सफाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार को राष्ट्रपति के कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई थी और निजी आयोजकों ने भी उनसे कोई समन्वय नहीं किया।

    उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम स्थल पर कथित अव्यवस्था—जैसे गंदगी और महिलाओं के लिए शौचालय की कमी—की जिम्मेदारी आयोजकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की है, क्योंकि कार्यक्रम उसी की जमीन पर आयोजित किया गया था।

    भाजपा का आरोप

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर हमला तेज करते हुए कहा कि एक महिला आदिवासी नेता और देश की राष्ट्रपति का अपमान किया गया है।

    उन्होंने कहा कि राज्य की जागरूक जनता इस घटना को कभी माफ नहीं करेगी। प्रधानमंत्री ने यह बात दिल्ली में दिल्ली मेट्रो के दो नए कॉरिडोर और अन्य परियोजनाओं के उद्घाटन के बाद कही।

    इस पूरे विवाद के बाद केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।

  • रीवा एक्सप्रेस में आशुतोष ब्रह्मचारी पर जानलेवा हमला: केस दर्ज

    रीवा एक्सप्रेस में आशुतोष ब्रह्मचारी पर जानलेवा हमला: केस दर्ज

    प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो मामला दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी पर रविवार तड़के ट्रेन में हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना रीवा एक्सप्रेस में उस समय हुई जब वह गाजियाबाद से प्रयागराज की ओर सफर कर रहे थे।

    आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया है कि सुबह करीब 5 बजे सिराथू रेलवे स्टेशन के पास एक अज्ञात हमलावर ने उनके चेहरे पर धारदार हथियार से हमला कर नाक काटने की कोशिश की। किसी तरह उन्होंने ट्रेन के टॉयलेट में खुद को बंद कर जान बचाई और जीआरपी कंट्रोल रूम को सूचना दी।

    प्रयागराज पहुंचते ही दर्ज हुआ मुकदमा

    ट्रेन के प्रयागराज जंक्शन पहुंचने के बाद ब्रह्मचारी ने जीआरपी थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराया और देर रात अज्ञात हमलावर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118-1 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

    हालांकि मेडिकल रिपोर्ट में धारदार हथियार से गंभीर हमले की पुष्टि नहीं हुई। डॉक्टरों के अनुसार चोट खरोंच जैसी पाई गई और एक्स-रे व सीटी स्कैन में भी गंभीर चोट के संकेत नहीं मिले।

    CCTV में नहीं दिखा संदिग्ध

    जांच कर रही जीआरपी ने सिराथू से लेकर प्रयागराज जंक्शन तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं, लेकिन अभी तक कोई संदिग्ध सामने नहीं आया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि हमलावर को कैसे पता चला कि आशुतोष ब्रह्मचारी उसी ट्रेन से यात्रा कर रहे थे।

    ट्रेन स्टाफ से भी पूछताछ

    ट्रेन के कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है। ड्यूटी पर मौजूद सीआईटी मुस्ताक अहमद ने बताया कि सुबह करीब सवा पांच बजे अटेंडेंट ने उन्हें एसी कोच में एक यात्री पर हमले की सूचना दी थी।

    उन्होंने प्राथमिक उपचार की सलाह दी, लेकिन ब्रह्मचारी ने प्रयागराज पहुंचकर इलाज कराने की बात कही।

    ‘नाक काटने पर 21 लाख का इनाम’ का आरोप

    आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया है कि सार्वजनिक मंच से उनकी नाक काटने पर 21 लाख रुपये देने की घोषणा की गई थी। उनके मुताबिक उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद और अन्य लोगों के खिलाफ नाबालिगों के यौन शोषण का मामला दर्ज कराया था, जिसके कारण यह हमला कराया गया।

    उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने साजिश रचकर उन पर हमला करवाया, हालांकि इन आरोपों की पुलिस अभी जांच कर रही है।

    सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने का दावा

    इस बीच सोशल मीडिया पर स्वाति अघोरी नाम से बने एक अकाउंट द्वारा हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक पोस्ट में लिखा गया कि हमला किया गया था, लेकिन आशुतोष ब्रह्मचारी बच गए।

    हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस भी इसकी जांच कर रही है।

  • मप्र में 8 हजार डॉक्टर आज से हड़ताल पर… बिगड़ सकती है स्वास्थ्य व्यवस्था

    मप्र में 8 हजार डॉक्टर आज से हड़ताल पर… बिगड़ सकती है स्वास्थ्य व्यवस्था


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में आज स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल पर चले गए हैं। मध्य प्रदेश में आज स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के चलते डॉक्टर ओपीडी में मरीज नहीं देखेंगे और सामान्य ऑपरेशन भी नहीं करेंगे। केवल अति गंभीर मरीजों का इलाज जारी रहेगा।

    जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में यह हड़ताल लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लागू करने की मांग को लेकर की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शासन के आदेश के अनुसार सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया और न ही बकाया एरियर का भुगतान हुआ है।

    डॉक्टरों के अनुसार इस संबंध में कई बार शासन और संबंधित विभागों से निवेदन किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    हड़ताल के कारण प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में हर्निया, रॉड इंप्लांट सहित कई सामान्य ऑपरेशन टल सकते हैं, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि आपातकालीन सेवाएं और गंभीर मरीजों का इलाज पहले की तरह जारी रहेगा।

    जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के डॉ. ब्रिजेंद्र ने बताया कि हड़ताल की सूचना प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और विभागाध्यक्षों को दे दी गई है। इसके तहत ओपीडी और अन्य इलेक्टिव सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा।

    गौरतलब है कि जूनियर डॉक्टर पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। डॉक्टरों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल शासन द्वारा जारी आदेश के क्रियान्वयन और लंबित एरियर के भुगतान की मांग को लेकर है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द फैसला नहीं करती है तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

  • MP के पुलिस ट्रेनिंग केंद्रों में अब ‘दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ से होगी दिन की शुरुआत, विपक्ष ने उठाए सवाल

    MP के पुलिस ट्रेनिंग केंद्रों में अब ‘दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ से होगी दिन की शुरुआत, विपक्ष ने उठाए सवाल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों (Police Training Centres) में अब दिन की शुरुआत ‘श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ के पाठ से होगी। पुलिस प्रशिक्षण विंग के इस नए निर्देश के बाद राज्य में एक बार फिर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इसे सरकारी संस्थानों की निष्पक्षता से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ बीजेपी (BJP) ने इसे भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बताते हुए इसका बचाव किया है।

    दरअसल, पुलिस प्रशिक्षण विंग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने राज्य के सभी पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों (PTS) को निर्देश जारी किया है कि हर दिन प्रशिक्षण शुरू होने से पहले परिसर में लगे लाउडस्पीकरों के जरिए ‘श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ बजाया जाए, ताकि प्रशिक्षक और भर्ती दोनों इसे सुन सकें।


    एडीजी ने बताई वजह

    एडीजी ने कहा कि दक्षिणामूर्ति को ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है। उनके मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी के लिए केवल जानकारी होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे विवेक, संवेदनशीलता और सहानुभूति भी होनी चाहिए। उनका मानना है कि स्तोत्र के माध्यम से प्रशिक्षुओं में नैतिक स्पष्टता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।


    पहले भी हो चुका है ऐसा निर्देश

    दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब पुलिस प्रशिक्षण में धार्मिक या दार्शनिक ग्रंथों को शामिल किया गया हो। पिछले साल भी विभाग ने आठ पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों में रात के ध्यान सत्र से पहले भागवद गीता का एक अध्याय पढ़ने का सुझाव दिया था। इससे पहले प्रशिक्षुओं को रामचरितमानस के दोहे पढ़ने के लिए भी कहा गया था। अधिकारियों का कहना था कि इससे लगभग 4000 प्रशिक्षुओं में अनुशासन और नैतिक सोच को बढ़ावा मिलेगा।


    कांग्रेस ने उठाए सवाल

    नए आदेश के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि कानून व्यवस्था संभालने वाली संस्थाओं को पूरी तरह तटस्थ होना चाहिए और किसी एक आस्था से जुड़ी परंपरा को बढ़ावा देना ठीक नहीं है।


    बीजेपी का पलटवार

    भाजपा ने इस पहल का बचाव किया है। पार्टी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि गीता या दक्षिणामूर्ति स्तोत्र जैसे ग्रंथ सांप्रदायिक नहीं बल्कि ज्ञान, अनुशासन और कर्तव्य की शिक्षाएं देते हैं। उनके मुताबिक, इन्हें सांप्रदायिक बताना भारत की सभ्यतागत परंपरा को न समझने जैसा है।

    पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले से ही योग, ध्यान और मानसिक अनुशासन शामिल हैं और यह पहल उसी का हिस्सा है। उनका दावा है कि इसका उद्देश्य धार्मिक अभ्यास लागू करना नहीं बल्कि नैतिक सोच और संवेदनशीलता को मजबूत करना है। हालांकि, इस निर्देश के बाद एक बार फिर मध्य प्रदेश की पुलिस ट्रेनिंग व्यवस्था सियासी बहस के केंद्र में आ गई है, जहां सांस्कृतिक परंपरा और संस्थागत तटस्थता को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।

  • T20 विश्व कप जीत के बाद आलोचकों पर बरसे गौतम गंभीर, बोले- वह ड्रेसिंग रूम के प्रति जवाबदेह, सोशल मीडिया नहीं

    T20 विश्व कप जीत के बाद आलोचकों पर बरसे गौतम गंभीर, बोले- वह ड्रेसिंग रूम के प्रति जवाबदेह, सोशल मीडिया नहीं


    अहमदाबाद।
    टीम इंडिय (Team India) ने आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 (ICC Men’s T20 World Cup 2026) के फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया. 8 मार्च (रविवार) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हुए मुकाबले में भारतीय टीम ने कीवियों को जीत के लिए 256 रनों का टारगेट दिया था. टारगेट का पीछा करते हुए कीवी टीम 19 ओवर में 159 रनों पर ही पैक हो गई.

    इस ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर (Head Coach Gautam Gambhir) ने आलचकों पर जमकर निशाना साधा. गंभीर ने कहा कि वह ड्रेसिंग रूम में मौजूद लोगों के प्रति ही जवाबदेह हैं. उनकी जिम्मेदारी केवल टीम और सपोर्ट स्टाफ तक ही है, साथ ही सोशल मीडिया की आलोचना उन्हें प्रभावित नहीं करती. गंभीर ने टी20 विश्व कप में भारत की खिताबी जीत दिग्गज खिलाड़ियों वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ को समर्पित की.

    गौतम गंभीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘मेरी जिम्मेदारी सोशल मीडिया पर लोगों के लिए नहीं है. मेरी जिम्मेदारी उन 30 लोगों के लिए है जो ड्रेसिंग रूम में हैं.’ गंभीर 2007 में भारत के पहले टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे. अब 2026 में कोच के तौर उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप खिताब जीतकर इतिहास रच दिया।

    गौतम गंभीर कहते हैं, ‘कोच उतना ही अच्छा होता है जितनी अच्छी उसकी टीम. खिलाड़ी ही मुझे ऐसा कोच बनाते हैं जो मैं हूं.’ भारत की जीत में विकेटकीपर संजू सैमसन (89 रन), ओपनर अभिषेक शर्मा (52 रन) और ईशान किशन (54 रन) की आक्रामक बल्लेबाजी ने बड़ी भूमिका निभाई।

    गौतम गंभीर ने कहा कि भारतीय क्रिकेट में अब ट्रॉफी को प्राथमिकता देनी चाहिए, व्यक्तिगत रिकॉर्ड को नहीं. गंभीर कहते हैं, ‘हमने बहुत समय तक माइलस्टोन्स के जश्न मनाए. माइलस्टोन्स मायने नहीं रखते, ट्रॉफी मायने रखती है. मैं यह खिताब राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण को समर्पित करता हूं. राहुल भाई ने भारतीय क्रिकेट के लिए जो कुछ किया है, उसके लिए. वहीं वीवीएस लक्ष्मण ने जिस तरह से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) का नेतृत्व किया है, उसके लिए गौतम गंभीर ने भारतीय टीम की निडर और साहसी बल्लेबाजी की भी जमकर तारीफ की. गंभीर कहते हैं, ‘हमें अब हार का डर छोड़ना होगा. 120 रन बनाकर आउट होना ठीक है. हमारी ताकत साहस और हिम्मत है. सेमीफाइनल और फाइनल में 250-250 रन बनाना इसका प्रमाण है।

    कप्तान सूर्यकुमार यादव ने गौतम गंभीर के नेतृत्व की तारीफ की और उनके साथ भरोसे और समझ को रेखांकित किया. सूर्या कहते हैं, ‘मैंने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) में चार साल गौतम गंभीर की कप्तानी में खेला. कभी बहस नहीं हुई क्योंकि हमारी प्राथमिकता हमेशा टीम की जीत रही।

    गौतम गंभीर ने सूर्यकुमार यादव की सराहना की और दोहराया कि ट्रॉफी जीतना व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज्यादा महत्वपूर्ण है. गंभीर कहते हैं, ‘सूर्या ने मेरा काम आसान किया. अब हमारी जिम्मेदारी ट्रॉफी जीतने की है, उपलब्धियों का जश्न मनाने की नहीं.’भारत की टीम निडर, साहस और मेहनत के दम पर टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने में सफल हुई. कोच गौतम गंभीर ने यह जीत खिलाड़ियों की मेहनत और ट्रॉफी की अहमियत के नाम समर्पित की।

  • अस्पताल के उद्घाटन समारोह में पहुंचे जूनियर NTR, झलक पाने के लिए बेकाबू हुए फैंस, जमकर तोड़फोड़

    अस्पताल के उद्घाटन समारोह में पहुंचे जूनियर NTR, झलक पाने के लिए बेकाबू हुए फैंस, जमकर तोड़फोड़


    बेंगलुरु।
    साउथ के सुपरस्टार एक्टर जूनियर एनटीआर (South Superstar Actor Junior NTR) का एक अस्पताल का दौरा उस वक्त मुसीबत बन गया, जब उनके फैंस की भारी भीड़ ने वहां हंगामा खड़ा कर दिया। रविवार को एक्टर बेंगलुरु के निजी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (Super Specialty Hospital) के उद्घाटन समारोह में पहुंचे थे। जूनियर एनटीआर की एक झलक पाने के लिए हजारों की संख्या में फैंस अस्पताल पहुंच गए, जिससे वहां भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए और बिल्डिंग के अंदर काफी तोड़फोड़ भी हुई। फैंस की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि एक वायरल वीडियो में भीड़ के धक्के से एक एस्केलेटर टूटता नजर आ रहा है। फैंस की इस दीवानगी और नए हॉस्पिटल में हुई तोड़फोड़ पर सोशल मीडिया यूजर्स का रिएक्शन भी देखने लायक है।


    बेकाबू भीड़ की वजह से हुई यह तोड़फोड़

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे फैंस की भारी भीड़ अस्पताल के अंदर घुस गई है। भीड़ का दबाव इतना ज्यादा था कि अस्पताल की एक एस्केलेटर पूरी तरह चकनाचूर हो गई। इस दौरान वहां मौजूद मरीजों और स्टाफ के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षाकर्मी और बाउंसर्स भी भीड़ को रोकने में नाकाम साबित हुए और उन्हें रास्ता बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक बड़ी चुनौती सुपरस्टार की सेफ्टी इनश्योर करना भी था।


    पुलिस को करना पड़ा हल्का लाठी चार्ज

    जब हालात ऑर्गनाइजर्स और प्राइवेट सिक्योरिटी टीम के कंट्रोल से बाहर हो गई, तो पुलिस को दखल देना पड़ा। खबर है कि भीड़ को तितर-बितर करने और अस्पताल परिसर को खाली कराने के लिए पुलिस को हल्का लाठी चार्ज भी करना पड़ा। वीडियो क्लिप्स में एक फैन को एस्केलेटर टूटने के बाद उस पर गिरते देखा जा सकता है, जिसे पास खड़े शख्स ने किसी तरह उठाया। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की अराजकता देखकर हर कोई हैरान रह गया।


    सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

    इस घटना के वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर लोगों ने फैंस और मैनेजमेंट की जमकर क्लास लगाई। एक यूजर ने इसे ‘दुनिया का सबसे खराब फैंडम’ करार दिया, तो वहीं दूसरे ने सवाल उठाया कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने बिना सोचे-समझे इतने लोगों को अंदर आने ही क्यों दिया? कुछ लोगों ने जूनियर एनटीआर की भी आलोचना की और उनके फैंस से दूरी बनाए रखने के व्यवहार पर सवाल उठाए। वहीं, कई यूजर्स ने इस भीड़ को मेंटल बताते हुए कहा कि अस्पताल में ऐसा व्यवहार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। वर्क फ्रंट की बात करें तो जूनियर एनटीआर को आखिरी बार फिल्म ‘वॉर 2’ में देखा गया था, जिससे उन्होंने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया।

  • लोकसभा अध्यक्ष बिरला के खिलाफ आज अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में चर्चा…

    लोकसभा अध्यक्ष बिरला के खिलाफ आज अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में चर्चा…


    नई दिल्ली।
    पूरे 39 वर्षों के बाद सोमवार को फिर संसद में लोकसभा अध्यक्ष (Lok Sabha Speaker) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। प्रस्ताव पर करीब दस घंटे तक चर्चा होने की उम्मीद है। बहस के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने पूरी तैयारी की है। केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने जहां सत्तापक्ष की तरफ से चर्चा में हिस्सा लेने वाली सदस्यों के साथ बैठक की, वहीं कांग्रेस (Congress) ने भी बैठक कर रणनीति पर चर्चा की है।

    संसद के बजट सत्र के दूसरे हिस्से की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ होगी। लोकसभा में सबसे पहले शिलांग से सांसद डॉ. रिकी एजे सिंगकॉन को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद सदन कुछ देर के लिए स्थगित हो सकता है। कार्यसूची में प्रस्ताव पर चर्चा को शामिल किया है, हालांकि सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं।

    सूत्रों का कहना है कि सत्तापक्ष पूरी मजबूती के साथ विपक्ष के आरोपों का खंडन करेगा। सरकार की ओर से भी उन घटनाओं का हवाला दिए जाने की संभावना है जिनमें विपक्षी नेताओं ने कथित तौर पर राष्ट्रपति, राज्यपालों, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक अधिकारियों के प्रति अनादर दिखाया है। वहीं, विपक्षी पार्टियां भी सरकार को घेरने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगी।


    TMC ने भी किया समर्थन

    संसदीय सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के 118 सांसदों ने प्रस्ताव के समर्थन में नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस ने हस्ताक्षर नहीं किए थे, पर नए घटनाक्रम में टीएमसी ने भी प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्णय लिया है। एनसीपी (शरद पवार) ने भी अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है, पर माना जा रहा है कि एनसीपी (एसपी) विपक्षी दलों के खिलाफ नहीं जाएगी।


    वैश्विक संघर्ष और उसके प्रभावों को लेकर भी बढ़ सकता है गतिरोध

    लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के साथ दूसरे चरण में वैश्विक संघर्ष और उसके प्रभावों को लेकर भी गतिरोध बढ़ सकता है। कांग्रेस पहले ही विदेश नीति पर चर्चा की मांग कर चुकी है। अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका के रूस से तेल खरीदनों को लेकर बयानों पर भी विपक्ष सरकार को घेर सकता है।


    अब तक तीन बार आए प्रस्ताव

    लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए अब तक तीन औपचारिक प्रस्ताव पेश किए गए हैं, पर कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। सबसे पहले 1954 में तत्कालीन अध्यक्ष जीवी मावलंकर के खिलाफ समाजवादी नेता विग्नेश्वर मिश्रा ने पेश किया, पर इस पर सदन में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला और प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया है। इसके बाद 1966 में सरदार हुकुम सिंह के खिलाफ समाजवादी नेता मधु लिमये ने पेश किया। इस पर चर्चा हुई और प्रस्ताव गिर गया।

    तीसरी बार 1987 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के खिलाफ वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इसको भी जरूरी बहुमत नहीं मिला और यह भी पारित नहीं हो सका। इसके बाद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने की बात हुई थी, पर बाद में विपक्ष ने नोटिस देने का फैसला छोड़ दिया था।


    बिरला नहीं रहेंगे सदन में मौजूद

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का निपटारा नहीं हो जाता तब तक वे सदन में मौजूद नहीं रहेंगे।

  • अज्ञातवास का रहस्य: क्यों बने अर्जुन ‘बृहन्नला’, उर्वशी के श्राप ने कैसे बना दिया पांडवों के लिए वरदान

    अज्ञातवास का रहस्य: क्यों बने अर्जुन ‘बृहन्नला’, उर्वशी के श्राप ने कैसे बना दिया पांडवों के लिए वरदान


    नई दिल्‍ली । भारतीय महाकाव्य महाभारत में अनेक ऐसे प्रसंग हैं जिनमें श्राप भी अंततः वरदान बनकर सामने आते हैं। ऐसा ही एक रहस्यमय प्रसंग उस समय का है जब पांडवों को अपने वनवास के अंतिम वर्ष में अज्ञातवास बिताना पड़ा। इस दौरान महान धनुर्धर अर्जुन ने बृहन्नला नाम से किन्नर का रूप धारण किया था। दिलचस्प बात यह है कि यह रूप उन्हें स्वर्गलोक में मिली एक घटना के कारण प्राप्त हुआ था जिसने आगे चलकर पांडवों की रक्षा में अहम भूमिका निभाई।

    कथा के अनुसार एक समय अर्जुन अपने दिव्य अस्त्र शस्त्रों की प्राप्ति के लिए स्वर्गलोक गए थे जहां उनके पिता इंद्र का निवास था। वहां अर्जुन की वीरता तेज और सौंदर्य से प्रभावित होकर प्रसिद्ध अप्सरा उर्वशी उन पर मोहित हो गईं। उन्होंने अर्जुन के सामने प्रेम प्रस्ताव रखा लेकिन अर्जुन ने अत्यंत विनम्रता के साथ उसे अस्वीकार कर दिया। अर्जुन ने कहा कि वह उर्वशी को माता के समान मानते हैं क्योंकि वह उनके पूर्वज पुरुरवा की पत्नी रह चुकी थीं। इस कारण वह उन्हें मातृभाव से देखते हैं।

    अर्जुन की यह बात सुनकर उर्वशी को गहरा अपमान महसूस हुआ। क्रोधित होकर उन्होंने अर्जुन को श्राप दे दिया कि वह नपुंसक यानी किन्नर बन जाएंगे। यह श्राप सुनकर अर्जुन व्यथित हो गए और उन्होंने अपनी पीड़ा इंद्रदेव को बताई। तब इंद्रदेव ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा कि यह श्राप स्थायी नहीं रहेगा बल्कि केवल एक वर्ष के लिए प्रभावी होगा। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में यही श्राप उनके लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

    समय बीता और वह अवसर भी आ गया जब पांडवों को 12 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना था। अज्ञातवास के दौरान यदि उनकी पहचान उजागर हो जाती तो उन्हें फिर से वनवास भुगतना पड़ता। ऐसे में अर्जुन के लिए उर्वशी का श्राप वास्तव में वरदान बन गया। उन्होंने बृहन्नला नाम से किन्नर का रूप धारण किया और विराट नगरी में रहने लगे।

    इस दौरान अर्जुन ने राजा विराट की पुत्री उत्तरा को नृत्य और संगीत की शिक्षा देने का कार्य किया। बृहन्नला के रूप में अर्जुन ने न केवल अपनी पहचान छिपाए रखी बल्कि पांडवों के अज्ञातवास को सफलतापूर्वक पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    अज्ञातवास के समय अन्य पांडवों ने भी अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग अलग रूप धारण किए थे। युधिष्ठिर कंक नाम से राजसभा में सलाहकार बने भीम बल्लव नाम से रसोइया बने नकुल अस्तबल की देखभाल करने लगे और सहदेव गायों की सेवा में लग गए। वहीं द्रौपदी सैरंध्री बनकर रानी सुदेष्णा की दासी के रूप में केश सजाने का कार्य करने लगीं। इस प्रकार उर्वशी का दिया हुआ श्राप अंततः पांडवों के लिए वरदान साबित हुआ और अर्जुन के बृहन्नला रूप ने महाभारत की कथा में एक अनोखा और प्रेरणादायक अध्याय जोड़ दिया।