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  • कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    कैबिनेट की मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मंजूरी, दिल्ली में बनेगी 6 लेन द्वारका टनल, कानपुर-कबरई फोरलेन हाईवे से बुंदेलखंड को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश की सड़क अवसंरचना को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छह लेन वाली द्वारका टनल तथा उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक चार लेन हाईवे का निर्माण किया जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं से यातायात व्यवस्था में सुधार, यात्रा समय में कमी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कैबिनेट के निर्णय के अनुसार दिल्ली में करीब आठ किलोमीटर लंबी छह लेन द्वारका टनल का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 6,970 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। प्रस्तावित टनल शिवमूर्ति क्षेत्र से शुरू होकर वसंत कुंज के रास्ते बारापुला के निकट तक विकसित की जाएगी। परियोजना को लगभग पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    इस टनल के निर्माण से दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में लंबे समय से बनी ट्रैफिक समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही हवाई अड्डे, द्वारका, गुरुग्राम और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा अधिक सुगम और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा और ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।

    कैबिनेट ने दूसरी बड़ी परियोजना के रूप में उत्तर प्रदेश के कानपुर से कबरई तक लगभग 242 किलोमीटर लंबे फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग को भी मंजूरी प्रदान की है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 7,145 करोड़ रुपये होगी और इसे लगभग ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मार्ग आगे चलकर मध्य प्रदेश की दिशा में बेहतर सड़क संपर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा और बुंदेलखंड क्षेत्र को नई विकास संभावनाओं से जोड़ेगा।

    नई सड़क बनने के बाद कानपुर से कबरई के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने का अनुमान है। वर्तमान में इस मार्ग को तय करने में लगभग साढ़े तीन घंटे का समय लगता है, जबकि परियोजना पूरी होने के बाद यही दूरी करीब डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यावसायिक परिवहन को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक गतिविधियों, कृषि उत्पादों के परिवहन और क्षेत्रीय व्यापार को नई गति मिलेगी। बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग करता रहा है और यह परियोजना निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने और विभिन्न शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की भी संभावना है।

    केंद्र सरकार का उद्देश्य आधुनिक, सुरक्षित और तेज परिवहन नेटवर्क विकसित करना है, ताकि देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क और अधिक सशक्त हो सके। हाल के वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और सुरंग परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। नई स्वीकृत दोनों परियोजनाएं इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ओवैसी के बयान से सियासी घमासान, एनडीए नेताओं का पलटवार; बोले- जांच को सांप्रदायिक रंग देना अनुचित

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ओवैसी के बयान से सियासी घमासान, एनडीए नेताओं का पलटवार; बोले- जांच को सांप्रदायिक रंग देना अनुचित

    नई दिल्ली । राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। ओवैसी की टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मामले को धार्मिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय कानून और जांच की प्रक्रिया के आधार पर परखा जाना चाहिए। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

    ओवैसी ने अपने बयान में दावा किया था कि यदि ट्रस्ट में किसी मुस्लिम की भूमिका होती तो उसके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद कई भाजपा नेताओं ने इसे अनावश्यक और समाज में विभाजन पैदा करने वाला बयान बताया। उनका कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है तथा इसमें किसी भी प्रकार के धार्मिक भेदभाव का प्रश्न नहीं उठता।

    भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि पूरे मामले को हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि चढ़ावे और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उनके अनुसार विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जा चुका है और जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी ने भी ओवैसी के बयान की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रकार की टिप्पणियां राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में जांच पूरी होने से पहले उसे सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को सभी समुदायों के लिए समान रूप से आवश्यक बताया।

    उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने भी कहा कि चढ़ावा चोरी का मामला पूरी तरह कानूनी जांच का विषय है और इसे धार्मिक पहचान से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी संस्था में वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार जांच एजेंसियों को निष्पक्ष रूप से अपना कार्य करने दिया जाना चाहिए।

    इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियों ने आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों, बैंक खातों और संपत्तियों की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है। कई बैंक खातों का रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज और लेनदेन का विवरण एकत्र किया जा रहा है ताकि कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी श्रृंखला को समझा जा सके। जांच के दौरान कुछ अन्य व्यक्तियों और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है।

    मामले में पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गबन और वित्तीय अनियमितता किस स्तर पर हुई, इसमें कितनी धनराशि प्रभावित हुई तथा किन-किन लोगों की भूमिका रही। वहीं राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष ढंग से पूरी कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • डॉक्टर्स डे पर पीएम मोदी का चिकित्सा समुदाय को सलाम, वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों की समर्पण भावना को बताया देश का गौरव

    डॉक्टर्स डे पर पीएम मोदी का चिकित्सा समुदाय को सलाम, वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों की समर्पण भावना को बताया देश का गौरव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के डॉक्टरों और चिकित्सा समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण, सेवा भावना और मानवीय योगदान की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से वेनेजुएला में राहत एवं चिकित्सा सेवाएं दे रहे भारतीय चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के कार्यों को देश के लिए गर्व का विषय बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय डॉक्टर मानवता की सेवा के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय चिकित्सा समुदाय ने हर चुनौतीपूर्ण दौर में अपनी जिम्मेदारी का उत्कृष्ट निर्वहन किया है। उनका मानना है कि डॉक्टर केवल मरीजों का उपचार ही नहीं करते, बल्कि समाज में विश्वास, सुरक्षा और आशा का वातावरण भी तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में चिकित्सकों का समर्पण भारत की सेवा संस्कृति और मानवीय मूल्यों का सशक्त उदाहरण है।

    उन्होंने वेनेजुएला में संचालित राहत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कार्यरत भारतीय चिकित्सा दल चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावित लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। यह मिशन न केवल मानवीय सहायता का उदाहरण है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका को भी मजबूत करता है। उनके अनुसार, भारतीय डॉक्टरों की विशेषज्ञता और सेवा भावना विश्व समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई प्रदान कर रही है।

    प्रधानमंत्री ने चिकित्सकों के योगदान को भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की मेहनत, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा के कारण करोड़ों नागरिकों का स्वास्थ्य तंत्र पर विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने सभी चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका योगदान स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए विस्तार का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के अनुसार देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और मेडिकल शिक्षा के लिए स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर सीटों का व्यापक विस्तार किया गया है। इससे भविष्य के लिए अधिक प्रशिक्षित चिकित्सक तैयार हो रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच देश के दूरदराज क्षेत्रों तक बढ़ाने में सहायता मिल रही है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में चिकित्सा समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉक्टर निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने, चिकित्सा अनुसंधान को गति देने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। उनके अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार और मानव संसाधन का विस्तार देश की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

    वेनेजुएला में चल रहे मानवीय राहत अभियान के तहत भारत ने चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम, पोर्टेबल अस्पताल और बड़ी मात्रा में दवाइयों तथा राहत सामग्री की आपूर्ति की है। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे मानवीय प्रयास भारत की वैश्विक जिम्मेदारी और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करते हैं।

    राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री का संदेश चिकित्सा समुदाय के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। उन्होंने सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सेवा भावना के लिए शुभकामनाएं दीं।

  • जून में जीएसटी कलेक्शन में 13.9% की बढ़ोतरी, राजस्व संग्रह बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचा

    जून में जीएसटी कलेक्शन में 13.9% की बढ़ोतरी, राजस्व संग्रह बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचा


    नई दिल्ली। देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। जून 2026 में सकल जीएसटी राजस्व संग्रह बढ़कर करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 13.9 प्रतिशत अधिक है। इससे पहले मई में भी जीएसटी संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया था।

    जीएसटी महानिदेशालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में कुल 1,94,812 करोड़ रुपये का सकल जीएसटी संग्रह दर्ज किया गया। पिछले वर्ष जून में यह आंकड़ा 1,71,105 करोड़ रुपये था। इस तरह एक साल में जीएसटी राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

    आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू लेनदेन से प्राप्त जीएसटी संग्रह 6.5 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, आयात से मिलने वाला राजस्व 34.6 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी के साथ 60,038 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसने कुल संग्रह में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जून महीने में करदाताओं को दिए गए रिफंड (प्रतिदाय) में भी वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान कुल रिफंड 29.1 प्रतिशत बढ़कर 32,436 करोड़ रुपये रहा।

    चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान भी जीएसटी संग्रह में मजबूत बढ़त देखने को मिली। इस अवधि में कुल 6,31,699 करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 5,82,542 करोड़ रुपये था। यानी पहली तिमाही में राजस्व संग्रह में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिफंड समायोजित करने के बाद जून में शुद्ध जीएसटी संग्रह 11.2 प्रतिशत बढ़कर 1.62 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।

    गौरतलब है कि देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था लागू हुए अब नौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह कर प्रणाली 1 जुलाई 2017 से पूरे देश में लागू की गई थी और तब से यह अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का प्रमुख आधार बनी हुई है।

  • राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को भाजपा पर भगवान राम और राम मंदिर के मुद्दे को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी सनातन मूल्यों के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती है, जबकि भाजपा भगवान राम के नाम का उपयोग केवल चुनावी राजनीति के लिए करती है। उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है।

    प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि भाजपा चुनावी सभाओं और राजनीतिक अभियानों में भगवान राम तथा राम मंदिर का उल्लेख प्रमुखता से करती है, लेकिन आस्था के अनुरूप व्यवहार नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती है। उनके अनुसार, आस्था केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका व्यवहार में भी प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।

    उन्होंने राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है, ताकि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित मामलों में जिम्मेदारी तय करने के बजाय वास्तविक तथ्यों को सामने लाने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।

    केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की ओर से राम मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना को लेकर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल राजनीतिक बहस का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसी कारण लोग इस पर जवाब चाहते हैं।

    आम आदमी पार्टी के प्रमुख ने अपनी पार्टी की धार्मिक और सामाजिक पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में धार्मिक आयोजनों, भजन संध्याओं, मंदिरों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कई कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है। उनका कहना था कि इन प्रयासों का उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ के बजाय समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं का सम्मान करना है।

    उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने शासन के दौरान धार्मिक यात्राओं को सुविधाजनक बनाने और विभिन्न आस्था स्थलों से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठाए। उनके अनुसार, सनातन परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक मूल्यों के सम्मान को उनकी पार्टी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखती है।

    केजरीवाल के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर आम आदमी पार्टी इसे आस्था और जवाबदेही का विषय बता रही है, वहीं दूसरी ओर यह बयान आगामी राजनीतिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी के बीच यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में राम मंदिर और सनातन से जुड़े विषय सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने रह सकते हैं।

  • शिप्रा आरती में विवाद ने लिया हिंसक रूप, पूजन सामग्री बेचने को लेकर पुजारियों और महिलाओं के बीच हाथापाई, वायरल वीडियो जांच के दायरे में

    शिप्रा आरती में विवाद ने लिया हिंसक रूप, पूजन सामग्री बेचने को लेकर पुजारियों और महिलाओं के बीच हाथापाई, वायरल वीडियो जांच के दायरे में

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन स्थित रामघाट पर होने वाली प्रसिद्ध शिप्रा आरती के दौरान पूजन सामग्री बेचने को लेकर महिलाओं और पुजारियों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना में दोनों पक्षों के कई लोगों को चोटें आई हैं। मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वायरल वीडियो को भी साक्ष्य के रूप में जांच में शामिल किया गया है।

    जानकारी के अनुसार घटना रविवार शाम उस समय हुई जब रामघाट पर प्रतिदिन की तरह शिप्रा आरती संपन्न हो रही थी। आरती समाप्त होने के बाद दीपक और अन्य पूजन सामग्री बेचने को लेकर महिलाओं और पुजारियों के बीच कहासुनी शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई होने लगी। घटनास्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    महिला पक्ष का आरोप है कि आरती के दौरान उन्हें पूजन सामग्री बेचने से रोका गया, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। शिकायत में कहा गया है कि बहस के दौरान कथित रूप से गाली-गलौज की गई और विरोध करने पर पीतल की आरती से हमला किया गया। बीच-बचाव करने पहुंची अन्य महिलाओं के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है। घटना में कुछ महिलाओं को सिर और चेहरे पर चोटें आईं, जिनका उपचार कराया गया।

    दूसरी ओर पुजारी पक्ष ने भी महिलाओं पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आरती के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से महिलाओं को पूजन सामग्री बेचने से रोका गया था। इसी बात पर विवाद बढ़ गया और महिलाओं ने कथित रूप से उनके साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की। पुजारियों का दावा है कि धक्का-मुक्की के दौरान उनके हाथ में मौजूद जलती हुई आरती उन्हीं पर गिर गई, जिससे उन्हें चोटें आईं।

    पुलिस के अनुसार इस झड़प में दोनों पक्षों के तीन से चार लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। किसी भी घायल की स्थिति गंभीर नहीं बताई गई है। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल रहा, हालांकि स्थिति अब सामान्य है।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दोनों पक्षों के बीच हाथापाई होती दिखाई दे रही है। वीडियो में कुछ लोग पीतल की आरती और अन्य सामान फेंकते हुए भी नजर आ रहे हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे घटनाक्रम का मिलान अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से किया जा रहा है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा सके।

    महाकाल थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, वायरल वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के अनुरूप आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने धार्मिक स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विवाद से बचने की अपील भी की है।

  • चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हुईं निर्मला सीतारमण, द्विपक्षीय साझेदारी पर होगा फोकस

    चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हुईं निर्मला सीतारमण, द्विपक्षीय साझेदारी पर होगा फोकस


    नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को फ्रांस के लिए रवाना हो गईं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना, आर्थिक सहयोग को नई गति देना तथा निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में संबंधों को और विस्तार देना है।

    यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगी। इस दौरे का प्रमुख आकर्षण भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (Economic and Financial Dialogue-EFD) होगा, जिसकी सह-अध्यक्षता वह फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त तथा औद्योगिक एवं ऊर्जा संप्रभुता मंत्री रोलैंड लेस्क्योर के साथ ऐक्स-एन-प्रोवेंस में करेंगी। इस बैठक में दोनों देश आर्थिक सहयोग के नए अवसरों और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करेंगे।

    निर्मला सीतारमण वैश्विक कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों (सीईओ) के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी। इसके अलावा वह प्रमुख उद्योगपतियों के साथ आयोजित एक राउंडटेबल चर्चा में शामिल होकर भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, जारी संरचनात्मक सुधारों, निवेश की संभावनाओं और दीर्घकालिक विकास के अवसरों को प्रस्तुत करेंगी।

    वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त मंत्री यूरोप के प्रतिष्ठित वार्षिक मंच ‘लेस रेन्कॉन्ट्रेस इकोनॉमिक्स डी’एक्स-एन-प्रोवेंस’ में “नए मध्यम वर्ग के विकास को कैसे बढ़ावा दें” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भी हिस्सा लेंगी। इस सम्मेलन में दुनिया भर के नीति-निर्माता, केंद्रीय बैंक प्रमुख, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, अर्थशास्त्री और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर विचार साझा करेंगे।

    अपने दौरे के दौरान सीतारमण फ्रांस के कैडाराश स्थित इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) परियोजना का भी दौरा करेंगी। यह परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) ऊर्जा से जुड़ी दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजनाओं में शामिल है, जिसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देशों की भागीदारी है।

    इसके अलावा वित्त मंत्री ‘कैंपस साइबर’ का भी दौरा करेंगी, जो फ्रांस में साइबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास का प्रमुख केंद्र है। इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अनुभवों एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान की उम्मीद है।

    यात्रा के दौरान सीतारमण प्रोवेंस-आल्प्स-कोटे डी’अजूर (PACA) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनॉड म्यूसेलियर से भी मुलाकात करेंगी। इस बैठक में निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

    अपने चार दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में वित्त मंत्री फ्रांस में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ आयोजित एक सामुदायिक कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगी।

  • प्रीमियम कोच की व्यवस्था पर सवाल, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में गंदगी और चूहों से परेशान यात्रियों ने रेल मंत्री तक पहुंचाई शिकायत

    प्रीमियम कोच की व्यवस्था पर सवाल, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में गंदगी और चूहों से परेशान यात्रियों ने रेल मंत्री तक पहुंचाई शिकायत

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेनों में शामिल कर्नाटका संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की एसी फर्स्ट क्लास में यात्रा कर रहे यात्रियों ने साफ-सफाई और ऑनबोर्ड सेवाओं को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। यात्रियों का आरोप है कि भोपाल से तमिलनाडु की ओर यात्रा के दौरान उनके केबिन में पूरी रात चूहे और कॉकरोच घूमते रहे। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद यात्रा के दौरान समस्या का प्रभावी समाधान नहीं किया गया, जिससे पूरी रात उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा।

    यात्रियों के अनुसार एसी फर्स्ट क्लास के केबिन में चूहे और कॉकरोच लगातार दिखाई दे रहे थे। उनका कहना है कि प्रीमियम श्रेणी का टिकट लेने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलीं। उन्होंने ट्रेन के स्टाफ को कई बार स्थिति से अवगत कराया, लेकिन समस्या दूर करने के बजाय उन्हें संतोषजनक जवाब भी नहीं मिला। यात्रियों का आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने चूहों की मौजूदगी के लिए यात्रियों के भोजन को ही कारण बता दिया।

    यात्रा कर रहे अनिल तिवारी ने बताया कि उन्होंने ट्रेन स्टाफ से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि प्रीमियम श्रेणी के कोच की स्थिति ऐसी है तो यात्रियों का रेलवे की सेवाओं पर भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए मामले की जानकारी भी साझा की और कोच की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठाए।

    दूसरे यात्री शिवांश तिवारी ने दावा किया कि पूरी रात उनका परिवार आराम से सो नहीं सका। उनके अनुसार चूहे लगातार सीटों के आसपास घूमते रहे, जबकि कॉकरोच केबिन में दिखाई देते रहे। उन्होंने बताया कि रेलवे हेल्पलाइन 139 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी मौके पर केवल एक रैट ट्रैप रखा गया, जिससे तत्काल राहत नहीं मिल सकी। यात्रियों का कहना है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद यात्रा के दौरान स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ।

    सोशल मीडिया पर शिकायत सामने आने के बाद रेलवे की ओर से संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी भेजने और पीएनआर विवरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि यात्रियों का कहना है कि यह कार्रवाई यात्रा समाप्त होने तक उनके लिए व्यावहारिक राहत साबित नहीं हुई। उनका मानना है कि शिकायत मिलने के बाद ऑनबोर्ड टीम को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे।

    मामले पर भोपाल रेल मंडल के प्रवक्ता ने कहा कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और पूरे घटनाक्रम की जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि कहीं भी साफ-सफाई या रखरखाव में कमी पाई जाती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में यात्रियों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इस घटना के बाद भारतीय रेलवे की प्रीमियम श्रेणी की सेवाओं और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। यात्रियों का कहना है कि प्रथम श्रेणी के कोच में उच्च स्तर की सुविधाओं की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में यदि शिकायतों के बावजूद तत्काल समाधान नहीं मिलता है तो इससे न केवल यात्रियों का अनुभव प्रभावित होता है, बल्कि रेलवे की सेवा गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं। अब जांच रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि कोच में स्वच्छता और रखरखाव संबंधी दावों के अनुरूप व्यवस्थाएं थीं या नहीं।

  • डेढ़ साल के बच्चे की आंखों की रोशनी पर जांच रिपोर्ट, नोजल ड्रॉप से संक्रमण की आशंका खारिज; एम्स भोपाल में होगा कॉर्निया ट्रांसप्लांट

    डेढ़ साल के बच्चे की आंखों की रोशनी पर जांच रिपोर्ट, नोजल ड्रॉप से संक्रमण की आशंका खारिज; एम्स भोपाल में होगा कॉर्निया ट्रांसप्लांट

    मध्य प्रदेश  सागर जिले के बंडा सिविल अस्पताल में इलाज के बाद डेढ़ साल के बच्चे की आंखों की रोशनी प्रभावित होने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि बच्चे की आंखों की गंभीर समस्या का कारण अस्पताल में डाली गई कथित नोजल ड्रॉप नहीं, बल्कि कुपोषण और विटामिन-ए की कमी से विकसित हुए कॉर्नियल अल्सर हैं। हालांकि, जिस नोजल ड्रॉप का उल्लेख परिजनों ने किया है, वह बच्चे तक कैसे पहुंची, इसकी जांच अभी जारी है।

    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार बच्चे का उपचार फिलहाल भोपाल स्थित एम्स में चल रहा है, जहां उसकी आंखों की स्थिति को देखते हुए कॉर्निया ट्रांसप्लांट की तैयारी की जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चे के उपचार के लिए आवश्यक सभी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और शासन स्तर पर भी हरसंभव सहायता दी जाएगी।

    जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिस बैच की नोजल ड्रॉप को लेकर आरोप लगाए गए थे, वह अस्पताल के उपलब्ध स्टॉक में मौजूद ही नहीं थी। विशेषज्ञों ने बताया कि सामान्य सलाइन आधारित नोजल ड्रॉप से आंखों की स्थायी रोशनी जाना चिकित्सकीय दृष्टि से संभव नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में अधिकतम अस्थायी जलन या हल्की असुविधा हो सकती है, लेकिन स्थायी दृष्टि हानि का कारण नहीं बनती।

    यह मामला तब सामने आया था जब भूसा कमलपुर निवासी इंद्राज विश्वकर्मा अपने डेढ़ वर्षीय पुत्र विनय को सर्दी और आंखों में लालिमा की शिकायत के चलते बंडा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप था कि चिकित्सकीय पर्चे के आधार पर आई ड्रॉप की जगह उन्हें नोजल ड्रॉप दे दी गई, जिसे आंखों में डालने के बाद बच्चे की आंखों में तेज जलन हुई और बाद में उसकी रोशनी चली गई। हालत बिगड़ने पर बच्चे को पहले सागर और फिर भोपाल एम्स रेफर किया गया।

    परिजनों का यह भी दावा रहा कि भोपाल में चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान उन्हें इलाज में लापरवाही और संक्रमण की आशंका के बारे में बताया गया था। इसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया और परिवार ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

    मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की थी। टीम ने दो दिनों तक अस्पताल के रिकॉर्ड, दवा वितरण प्रणाली, चिकित्सकीय दस्तावेज और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की। जांच में विशेषज्ञों ने बच्चे की आंखों की समस्या को विटामिन-ए की कमी से उत्पन्न कॉर्नियल अल्सर से जुड़ा माना है, जो गंभीर कुपोषण की स्थिति में विकसित हो सकता है।

    हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। विशेष रूप से इस पहलू की पड़ताल की जा रही है कि परिजनों के पास कथित नोजल ड्रॉप कैसे पहुंची और उसका स्रोत क्या था। जांच पूरी होने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बच्चे के उपचार और दृष्टि बचाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में चिकित्सा जारी है।

  • अडाणी ग्रीन एनर्जी ने रचा इतिहास, 20 गीगावाट क्षमता हासिल करने वाली बनी देश की पहली कंपनी

    अडाणी ग्रीन एनर्जी ने रचा इतिहास, 20 गीगावाट क्षमता हासिल करने वाली बनी देश की पहली कंपनी


    नई दिल्ली। अडाणी समूह की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए 20 गीगावाट (GW) परिचालन क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही कंपनी यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की पहली कंपनी बन गई है। खास बात यह है कि इस क्षमता का अधिकांश हिस्सा नए ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के माध्यम से विकसित किया गया है।

    कंपनी के अनुसार, वर्तमान में एजीईएल हर वर्ष 52 अरब यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन कर रही है, जो भारत की कुल बिजली खपत का लगभग तीन प्रतिशत है। यह उत्पादन न्यूयॉर्क शहर की सालभर की बिजली जरूरत या मुंबई और नई दिल्ली की संयुक्त वार्षिक बिजली खपत के लगभग बराबर माना जा रहा है।

    बुधवार को जारी बयान में कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उसने 5,051 मेगावाट नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी। कंपनी का दावा है कि चीन के बाहर किसी भी ऊर्जा कंपनी द्वारा एक वर्ष में जोड़ी गई यह सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है।

    इस उपलब्धि पर एजीईएल के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कहा कि 20 गीगावाट का आंकड़ा पार करना कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति, अनुशासित कार्यान्वयन और टीम की प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कंपनी आज अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ मिलकर इतनी स्वच्छ बिजली उपलब्ध करा रही है, जो मुंबई और नई दिल्ली की संयुक्त वार्षिक बिजली आवश्यकता के बराबर है।

    कंपनी ने भविष्य की योजनाओं का भी खुलासा किया है। एजीईएल वित्त वर्ष 2026-27 में 10 गीगावाट-घंटा (GWh) बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता जोड़ने की तैयारी कर रही है। अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 50 गीगावाट-घंटा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने की योजना को गति मिलेगी।

    अडाणी ग्रीन एनर्जी वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में शामिल है। कंपनी ग्रिड से जुड़ी सौर, पवन, हाइब्रिड और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विकास, स्वामित्व और संचालन के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा देने पर काम कर रही है।