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  • बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल

    बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल


    ढाका।
    बांग्लादेश के रंगपुर में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या का मामला गंभीर विवाद में बदल गया है। पुलिस ने हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कुछ अहम साक्ष्य सामने नहीं लाए जा रहे हैं।

    सबसे गंभीर सवाल परिवार की महिला सदस्यों से कथित दुष्कर्म को लेकर उठ रहा है। हालांकि, दुष्कर्म के आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की रिपोर्ट में महिलाओं के साथ दुष्कर्म का उल्लेख नहीं किया गया है।

    शवगृह कर्मचारी के दावे से बढ़ा विवाद

    स्थानीय मीडिया के एक स्टिंग ऑपरेशन में शवगृह के एक कर्मचारी ने महिलाओं के शवों से कथित तौर पर वीर्य मिलने का दावा किया। इस दावे के बाद मामले में दुष्कर्म की आशंका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र फॉरेंसिक या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना कि हत्या से पहले निश्चित तौर पर दुष्कर्म हुआ था, फिलहाल जल्दबाजी होगी।

    चारों की गला घोंटकर हत्या

    पुलिस रिपोर्ट के अनुसार स्कूल शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी, बेटी और बेटे की गला घोंटकर हत्या की गई। मामले में गणपति के रिश्तेदार मुग्धो दास और सिद्धार्थ दास को गिरफ्तार किया गया है।

    स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का आरोप है कि हत्या में और लोग भी शामिल हो सकते हैं और पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इन आरोपों की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    जांच डिटेक्टिव ब्रांच को सौंपी गई

    विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर डिटेक्टिव ब्रांच को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी हत्या की परिस्थितियों के साथ-साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

    इस बीच हिंदू संगठनों का विरोध जारी है। संगठनों ने मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फॉरेंसिक जांच में दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि होती है और क्या हत्या में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। इन दोनों सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • शक्कर की कीमत में 18% की गिरावट…, 55 रुपये प्रति किलो पर आए थोक दाम

    शक्कर की कीमत में 18% की गिरावट…, 55 रुपये प्रति किलो पर आए थोक दाम


    नई दिल्ली।
    चीनी के आयात (Sugar imports) की अनुमति और सट्टेबाजी व जमाखोरी पर सरकार (Government) के अंकुश का असर अब दिखने लगा है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा (Food Secretary Sanjeev Chopra) ने बताया कि चीनी की एक्स-मिल कीमत (Ex-mill price Sugar) (थोक भाव) 18 फीसदी घटकर 55 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है और आने वाले दिनों में इनमें और गिरावट आएगी। हालांकि, मिल भाव में आई गिरावट का असर खुदरा बाजारों में दिखना अभी बाकी है।

    उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, 24 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक भाव 58.29 रुपये और खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक, आमतौर पर मिल और खुदरा भाव में सात-आठ रुपये प्रति किलो का अंतर होता है। पिछले हफ्ते चीनी की एक्स-मिल कीमतें बढ़कर रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं।

    चोपड़ा ने इसके लिए मिलों की ओर से भाव बढ़ाने को जिम्मेदार ठहराया था। कहा, कीमतों में उछाल बुनियादी वजहों से नहीं आया है। देश में चीनी का पर्याप्त भंडार है। खाद्य सचिव ने कहा, भले ही विपणन वर्ष 2025-26 अक्तूबर-सितंबर) के लिए चीनी का उत्पादन पहले के 343 लाख टन के अनुमान से घटकर 306 लाख टन रह गया है, फिर भी देश में स्टॉक काफी है। घरेलू मांग 285 लाख टन है।


    10 लाख टन आयात को मिली मंजूरी

    चीनी के दाम बढ़ने के बाद सरकार ने पिछले सप्ताह 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी थी। इसके साथ ही थोक खरीदारों के लिए भंडार सीमा भी लागू की थी।


    कीमतों पर कितना असर

    मिल भावों में गिरावट का खुदरा बाजार की कीमतों पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है। चीनी की कीमत मंगलवार को लगभग एक रुपये बढ़कर करीब 64 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। एक दिन पहले खुदरा मार्केट में चीनी की औसत कीमत 63.05 रुपये प्रति किलो थी।

  • रक्षाबंधन पर बदल रहा गिफ्ट का अंदाज, Gen-Z चॉकलेट और गैजेट्स की जगह भाई-बहन को हेल्थ इंश्योरेंस दे रहा

    रक्षाबंधन पर बदल रहा गिफ्ट का अंदाज, Gen-Z चॉकलेट और गैजेट्स की जगह भाई-बहन को हेल्थ इंश्योरेंस दे रहा

    नई दिल्ली । रक्षाबंधन भाई और बहन के बीच प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का पर्व माना जाता है। समय के साथ इस त्योहार पर उपहार देने का तरीका भी बदल रहा है। युवा पीढ़ी खासकर Gen-Z अब केवल चॉकलेट, मिठाई, कपड़े या गैजेट देने के बजाय ऐसे उपहारों पर विचार कर रही है, जिनका लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिल सके। इसी बदलाव के बीच हेल्थ इंश्योरेंस को रक्षाबंधन के एक नए और उपयोगी उपहार के रूप में देखा जा रहा है।

    बीमा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक उपहारों पर त्योहार के दौरान कुछ हजार रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल सीमित समय तक ही रहता है। इसके विपरीत स्वास्थ्य बीमा ऐसा वित्तीय सुरक्षा साधन हो सकता है, जो बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने जैसी परिस्थितियों में आर्थिक बोझ कम करने में मदद करता है। यही वजह है कि युवा वर्ग त्योहार के उपहार को भविष्य की सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है।

    इस बदलाव को समझाने के लिए एक उदाहरण दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति रक्षाबंधन पर करीब 7,000 रुपये चॉकलेट, मिठाई या किसी अन्य उपहार पर खर्च करता है, तो यह राशि कुछ समय बाद पूरी तरह खर्च हो जाती है। वहीं इसी स्तर के खर्च को उपयुक्त स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के तौर पर इस्तेमाल करने पर भाई या बहन के लिए स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय सुरक्षा तैयार की जा सकती है।

    बताया गया है कि लगभग 7,000 रुपये के वार्षिक प्रीमियम में परिस्थितियों और पॉलिसी की शर्तों के अनुसार 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर उपलब्ध हो सकता है। हालांकि वास्तविक प्रीमियम उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, शहर, बीमा कंपनी, कवरेज, पॉलिसी की शर्तों और अन्य कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी पॉलिसी को लेने से पहले उसके लाभ, सीमाएं, प्रतीक्षा अवधि और बहिष्करण को समझना जरूरी है।

    मासिक हिसाब से देखें तो 7,000 रुपये का सालाना खर्च 600 रुपये से भी कम बैठता है। युवा उपभोक्ताओं के लिए यह राशि नियमित छोटे खर्चों के मुकाबले कम या समान हो सकती है। इसी सोच के कारण हेल्थ इंश्योरेंस को केवल बीमा उत्पाद नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के लिए जिम्मेदारी और आर्थिक सुरक्षा के तौर पर पेश किया जा रहा है।

    स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत भी इस बदलाव के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है। अस्पताल में भर्ती होने, जांच, दवाओं और उपचार पर होने वाला खर्च परिवार के बजट पर अचानक दबाव डाल सकता है। ऐसे समय में पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध होने पर पॉलिसी की शर्तों के अनुसार पात्र चिकित्सा खर्चों का भुगतान बीमा के माध्यम से किया जा सकता है।

    हालांकि हेल्थ इंश्योरेंस को रक्षाबंधन के उपहार के रूप में चुनते समय केवल प्रीमियम की रकम पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। बीमा राशि, नेटवर्क अस्पताल, कमरे के किराये की सीमा, सह-भुगतान, प्रतीक्षा अवधि, पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़े नियम और क्लेम प्रक्रिया जैसी बातों की जानकारी लेना जरूरी है। कम प्रीमियम वाली पॉलिसी हमेशा सबसे बेहतर विकल्प हो, यह जरूरी नहीं है।

    रक्षाबंधन के अवसर पर उपहारों का यह बदलता स्वरूप बताता है कि युवा पीढ़ी भावनात्मक रिश्तों के साथ वित्तीय योजना को भी महत्व दे रही है। चॉकलेट या मिठाई जैसे पारंपरिक उपहार अपनी जगह कायम हैं, लेकिन स्वास्थ्य बीमा जैसा विकल्प लंबे समय की जरूरतों को ध्यान में रखने वाला उपहार बन सकता है। सही पॉलिसी और पर्याप्त कवरेज का चुनाव भाई-बहन के रिश्ते में सुरक्षा की भावना को आर्थिक रूप भी दे सकता है।

  • चेहरे की डलनेस और टैनिंग से परेशान हैं तो पपीता आजमाएं, स्किन केयर में ऐसे करें इस्तेमाल

    चेहरे की डलनेस और टैनिंग से परेशान हैं तो पपीता आजमाएं, स्किन केयर में ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली ।
    पपीता सिर्फ स्वादिष्ट फल ही नहीं बल्कि स्किन केयर के लिए भी एक आसान घरेलू विकल्प माना जाता है। अगर चेहरा बेजान नजर आने लगा है त्वचा पर टैनिंग दिखाई दे रही है या स्किन की चमक कम हो गई है तो पपीते का इस्तेमाल किया जा सकता है। पपीते में पपेन नामक एंजाइम पाया जाता है जो त्वचा की सतह पर जमा मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ए और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं जो त्वचा की देखभाल में उपयोगी माने जाते हैं। यही वजह है कि पपीते को कई घरेलू स्किन केयर उपायों में शामिल किया जाता है।

    पपीते को चेहरे पर लगाने का सबसे आसान तरीका इसका फेस पैक बनाना है। इसके लिए पके हुए पपीते का थोड़ा सा गूदा लेकर अच्छी तरह मैश कर लें। इसे साफ चेहरे पर हल्की परत के रूप में लगाएं और करीब 10 से 15 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। पपीते का यह इस्तेमाल त्वचा को मुलायम महसूस कराने और चेहरे की डलनेस कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इसे पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए।

    अगर त्वचा बहुत ज्यादा रूखी रहती है तो पपीते में थोड़ा शहद मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है। शहद त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है जबकि पपीते में मौजूद एंजाइम त्वचा की सतह से मृत कोशिकाओं को हटाने में सहायक हो सकते हैं। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाने के बाद ज्यादा देर तक न रखें और कुछ समय बाद पानी से धो लें। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोग पपीते के साथ थोड़ी मात्रा में दही का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे त्वचा को ठंडक और नमी मिल सकती है।

    पपीते का इस्तेमाल त्वचा को एक्सफोलिएट करने के लिए भी किया जाता है लेकिन इसे चेहरे पर जोर से रगड़ना सही नहीं है। खासकर अगर त्वचा पर मुंहासे हैं लालिमा है कट लगा है या जलन हो रही है तो पपीते का इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है। प्राकृतिक चीज होने का मतलब यह नहीं है कि वह हर व्यक्ति की त्वचा के लिए सुरक्षित ही होगी। इसलिए पहली बार इस्तेमाल करने से पहले हाथ के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना जरूरी है।

    स्किन केयर में केवल फेस पैक लगाना ही पर्याप्त नहीं है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना अच्छी नींद लेना और धूप से त्वचा को बचाना भी जरूरी है। दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि लगातार धूप में रहने से टैनिंग और त्वचा संबंधी दूसरी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

    यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पपीते से तुरंत किसी चमत्कारी नतीजे की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इसका असर व्यक्ति की त्वचा के प्रकार और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर कर सकता है। अगर त्वचा पर लगातार दाने खुजली लालिमा या जलन जैसी समस्या बनी हुई है तो घरेलू उपायों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। कुल मिलाकर सही तरीके और सावधानी के साथ पपीता आपके सामान्य स्किन केयर रूटीन का एक आसान घरेलू हिस्सा बन सकता है।

  • IND vs SL: ऋषभ पंत की चोट ने बढ़ाई टीम इंडिया की टेंशन, कंधे पर लगी गेंद के बाद नहीं कर सके विकेटकीपिंग; चौथे दिन वापसी की उम्मीद

    IND vs SL: ऋषभ पंत की चोट ने बढ़ाई टीम इंडिया की टेंशन, कंधे पर लगी गेंद के बाद नहीं कर सके विकेटकीपिंग; चौथे दिन वापसी की उम्मीद


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के बीच टीम इंडिया की चिंता ऋषभ पंत की चोट को लेकर बढ़ गई है। मैच के तीसरे दिन पंत विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर नहीं उतर सके। उनकी जगह ध्रुव जुरेल ने विकेट के पीछे जिम्मेदारी संभाली। पंत को दूसरे दिन बल्लेबाजी के दौरान कंधे पर गेंद लगी थी जिसके बाद उनके शरीर पर चोट का असर दिखाई दिया और मूवमेंट भी सामान्य नहीं रही। टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने पंत की स्थिति को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि टीम उनकी चोट पर लगातार नजर रख रही है और उम्मीद है कि वह चौथे दिन विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर लौट सकते हैं।

    मोर्केल के मुताबिक पंत के कंधे पर गेंद लगने के बाद रात में भी उनकी चोट को लेकर चर्चा हुई थी। अगले दिन जब वह वार्मअप के लिए मैदान पर आए तो उनकी मूवमेंट सीमित नजर आई। यही वजह रही कि टीम प्रबंधन ने उन्हें विकेटकीपिंग से दूर रखने का फैसला किया। पंत तीसरे दिन ड्रेसिंग रूम में हाथ पर पट्टी बांधे भी नजर आए। हालांकि फिलहाल उनकी चोट को लेकर कोई गंभीर आधिकारिक अपडेट सामने नहीं आया है और टीम रातभर उनकी स्थिति पर नजर रखेगी।

    पंत का विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर होना टीम इंडिया के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोर्केल ने कहा कि पंत जिस तरह से खेल को पढ़ते हैं और मैदान की परिस्थितियों को समझते हैं वह टीम के लिए काफी उपयोगी है। ऐसे में भारतीय टीम चाहेगी कि पंत जल्द से जल्द पूरी तरह फिट होकर विकेट के पीछे लौटें। चौथे दिन उनकी उपलब्धता को लेकर फैसला उनकी फिटनेस और सुबह की स्थिति देखने के बाद लिया जा सकता है।

    पंत की चोट के बीच ध्रुव जुरेल ने विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाली। जुरेल पहले ही इस टेस्ट में बल्ले से शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं और शतक लगाकर अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं। ऐसे में अगर पंत चौथे दिन भी विकेटकीपिंग नहीं कर पाते हैं तो जुरेल पर एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी होगी। हालांकि टीम की पहली प्राथमिकता पंत को पूरी तरह फिट रखना होगी ताकि चोट आगे गंभीर रूप न ले।

    इसी बीच गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने कुलदीप यादव को लेकर भी अहम बात कही। कुलदीप वायरल फीवर की वजह से कोलंबो टेस्ट के लिए चयन की दौड़ से बाहर रहे। मोर्केल ने कहा कि अंतिम चयन का फैसला उनके हाथ में नहीं है लेकिन अगर कुलदीप पूरी तरह उपलब्ध होते तो उनका नाम निश्चित तौर पर चयन की चर्चा में शामिल होता। टीम प्रबंधन के मुताबिक कुलदीप गॉल से ही वायरल फीवर से जूझ रहे थे और इसी कारण उन्हें दूसरे टेस्ट में नहीं चुना गया।

    अब भारतीय टीम की नजर टेस्ट के चौथे दिन श्रीलंका की पारी को जल्द समेटने पर होगी। भारत ने बोर्ड पर 500 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया है और श्रीलंका के अभी दो विकेट बाकी हैं। मोर्केल ने कहा कि भारत को शुरुआत में एक सफलता हासिल करने पर ध्यान देना होगा और इसके बाद गेंदबाजों को लगातार सही लाइन और लेंथ के साथ दबाव बनाए रखना होगा।

    तीसरे दिन श्रीलंका के निचले क्रम ने भारतीय गेंदबाजों को कुछ समय तक जरूर परेशान किया। सोनल दिनुषा के साथ केशरा नुवंथा और लाहिरू कुमारा ने आखिरी दौर में संघर्ष किया। मोर्केल ने माना कि भारतीय टीम जल्द से जल्द श्रीलंका की पारी खत्म करना चाहती थी लेकिन टेस्ट क्रिकेट में निचले क्रम की साझेदारियां भी मुकाबले का रुख बदल सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कूकाबुरा गेंद के नरम पड़ने के बाद पिच से अतिरिक्त उछाल और तेजी हासिल करना गेंदबाजों के लिए मुश्किल हो सकता है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ऋषभ पंत चौथे दिन विकेटकीपिंग के लिए मैदान पर उतरेंगे। टीम इंडिया को उम्मीद है कि उनकी चोट रातभर में बेहतर होगी और वह फिर से दस्ताने संभाल पाएंगे। हालांकि अंतिम फैसला उनकी फिटनेस जांच के बाद ही होगा। पंत की वापसी भारत के लिए इसलिए भी अहम होगी क्योंकि टीम मजबूत स्थिति में है और मैच को निर्णायक दिशा में ले जाने के लिए विकेटकीपिंग के साथ उनकी मैदान पर मौजूदगी बड़ा फर्क डाल सकती है।

  • दिल की सेहत के लिए कौन सा तेल बेहतर, सरसों, जैतून और तिल के तेल समेत जानिए विशेषज्ञ की सलाह

    दिल की सेहत के लिए कौन सा तेल बेहतर, सरसों, जैतून और तिल के तेल समेत जानिए विशेषज्ञ की सलाह

    नई दिल्ली ।खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला तेल हमारी रोजमर्रा की डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में किस तरह के तेल का इस्तेमाल किया जाए और उसकी कितनी मात्रा ली जाए, यह सवाल लगातार चर्चा में रहता है। रिफाइंड तेल को लेकर भी कई तरह के दावे किए जाते हैं, लेकिन किसी एक तेल को सीधे तौर पर दिल के लिए जहर कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जा सकता। तेल का असर उसके प्रकार, फैटी एसिड की संरचना, इस्तेमाल की मात्रा और पूरी डाइट पर निर्भर करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक मात्रा में वसा का सेवन, खासकर संतृप्त और ट्रांस फैट की अधिकता, लंबे समय में कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी जोखिम को प्रभावित कर सकती है। इसलिए केवल तेल बदलना ही पर्याप्त नहीं है। भोजन में तेल की कुल मात्रा, तली हुई चीजों का सेवन और व्यक्ति की पूरी जीवनशैली भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    घी भारतीय रसोई में लंबे समय से इस्तेमाल होता आया है। इसमें वसा के साथ कुछ वसा में घुलने वाले विटामिन भी पाए जाते हैं। हालांकि घी में संतृप्त वसा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में लेना बेहतर माना जाता है। स्वस्थ व्यक्ति भी इसे जरूरत से ज्यादा लेने के बजाय संतुलित डाइट का हिस्सा बना सकता है।

    मक्खन भी वसा का स्रोत है और इसे भोजन में स्वाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन मक्खन में भी संतृप्त वसा पर्याप्त मात्रा में होती है। इसलिए इसे रिफाइंड तेल का असीमित विकल्प मानना उचित नहीं होगा। विशेष रूप से हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्रॉल या अन्य जोखिम वाले लोगों को अपने आहार में मक्खन और घी की मात्रा तय करने के लिए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    सरसों का तेल भारतीय भोजन में लंबे समय से लोकप्रिय रहा है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाए जाते हैं। इसमें अल्फा लिनोलेनिक एसिड भी मौजूद होता है। संतुलित मात्रा में इसका इस्तेमाल कई भारतीय व्यंजनों में किया जा सकता है। तेल खरीदते समय गुणवत्ता, शुद्धता और खाद्य सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना भी जरूरी है।

    ऑलिव ऑयल को भी हृदय के अनुकूल वसा के विकल्पों में शामिल किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से मोनोअनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट यौगिक मौजूद होते हैं। खासकर एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को बिना अत्यधिक गर्म किए इस्तेमाल करने से इसके प्राकृतिक घटकों का लाभ मिल सकता है।

    तिल का तेल भी एक विकल्प है। इसमें असंतृप्त वसा के साथ कुछ प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। इसका स्वाद भारतीय व्यंजनों के साथ अच्छी तरह मेल खाता है और सीमित मात्रा में इसे खाना पकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों की सलाह का मूल संदेश यह है कि किसी एक तेल को पूरी तरह चमत्कारी या नुकसानदेह मानने के बजाय अलग-अलग स्वस्थ वसा स्रोतों को संतुलित तरीके से डाइट में शामिल किया जाए। तेल को बार-बार गर्म करने, अत्यधिक तला भोजन खाने और जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने से बचना भी जरूरी है।

    जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, उनके लिए तेल का चुनाव व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार होना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ की सलाह अधिक उपयुक्त रहती है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल खाना पकाने का तेल बदलना पर्याप्त नहीं, बल्कि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से दूरी भी महत्वपूर्ण है।

  • पर्सनल लोन रिजेक्ट होने की पांच बड़ी वजहें, बैंक आवेदन मंजूर करने से पहले क्रेडिट स्कोर और आय समेत क्या देखते हैं

    पर्सनल लोन रिजेक्ट होने की पांच बड़ी वजहें, बैंक आवेदन मंजूर करने से पहले क्रेडिट स्कोर और आय समेत क्या देखते हैं

    नई दिल्ली ।पर्सनल लोन लेना कई लोगों के लिए अचानक आई आर्थिक जरूरत पूरी करने का आसान विकल्प माना जाता है। इसमें आमतौर पर किसी संपत्ति को गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती, लेकिन इसी कारण बैंक और वित्तीय संस्थान आवेदक की भुगतान क्षमता और आर्थिक स्थिति का बारीकी से आकलन करते हैं। आवेदन करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों की जांच नहीं करने पर लोन का आवेदन अस्वीकार हो सकता है।

    पर्सनल लोन की मंजूरी में क्रेडिट हिस्ट्री की अहम भूमिका होती है। यदि पहले लिए गए लोन या क्रेडिट कार्ड की EMI समय पर नहीं चुकाई गई है, भुगतान में बार-बार देरी हुई है या खाते में बकाया लंबे समय तक रहा है तो इससे आपकी क्रेडिट प्रोफाइल प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में बैंक को भविष्य में समय पर भुगतान को लेकर जोखिम दिखाई दे सकता है।

    इसलिए नया लोन लेने से पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जानकारी लेना उपयोगी होता है। रिपोर्ट में किसी पुराने भुगतान, खाते या व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ी गलती दिखाई दे तो उसे ठीक कराने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। बेहतर क्रेडिट इतिहास होने से आवेदन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, हालांकि केवल क्रेडिट स्कोर के आधार पर लोन मंजूरी सुनिश्चित नहीं होती।

    दूसरी बड़ी वजह कम आय या पहले से चल रही ज्यादा EMI हो सकती है। बैंक यह देखता है कि आवेदक की मासिक आमदनी कितनी है और उसका कितना हिस्सा पहले से मौजूद कर्ज चुकाने में खर्च हो रहा है। यदि आय की तुलना में मौजूदा वित्तीय जिम्मेदारियां अधिक हैं तो नई EMI चुकाने की क्षमता पर सवाल उठ सकता है।

    नौकरी या आय में अस्थिरता भी आवेदन प्रभावित कर सकती है। बार-बार नौकरी बदलना, मौजूदा नौकरी में कम अवधि या अनियमित आय बैंक के जोखिम आकलन को प्रभावित कर सकती है। स्वरोजगार करने वाले आवेदकों से आय की निरंतरता और आर्थिक स्थिति समझने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

    कम समय में कई लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करना भी सावधानी का विषय है। लगातार कई क्रेडिट आवेदन करने पर क्रेडिट प्रोफाइल में कई जांच दर्ज हो सकती हैं। इससे यह संकेत मिल सकता है कि व्यक्ति एक साथ कई जगह से कर्ज लेने की कोशिश कर रहा है। इसलिए एक आवेदन अस्वीकार होने के तुरंत बाद कई अन्य संस्थानों में आवेदन करने से बचना बेहतर है।

    दस्तावेजों में छोटी सी गलती भी आवेदन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। पहचान, आय, नौकरी, बैंक खाते या व्यक्तिगत विवरण में अलग-अलग जानकारी होने पर सत्यापन में परेशानी आ सकती है। आवेदन जमा करने से पहले सभी दस्तावेजों में नाम, पता, आय और रोजगार संबंधी विवरण सही तथा एक-दूसरे से मेल खाते होने चाहिए।

    यदि पर्सनल लोन का आवेदन अस्वीकार हो जाए तो तुरंत दूसरे बैंक या वित्तीय संस्थान में आवेदन करने के बजाय पहले अस्वीकृति का कारण समझना चाहिए। क्रेडिट रिपोर्ट की जांच, मौजूदा कर्ज की समीक्षा और दस्तावेजों में सुधार के बाद ही अगला आवेदन करना अधिक उचित होता है। लोन का एक बार रिजेक्ट होना स्थायी बाधा नहीं है, लेकिन अगला आवेदन करने से पहले उस कमी को दूर करना जरूरी है जिसकी वजह से पिछला आवेदन प्रभावित हुआ था।

  • शेयर मार्केट में पैसा डुबोना है या बढ़ाना, निवेश से पहले समझ लें ये नियम; इन जगहों पर गलती से भी न लगाएं पैसा

    शेयर मार्केट में पैसा डुबोना है या बढ़ाना, निवेश से पहले समझ लें ये नियम; इन जगहों पर गलती से भी न लगाएं पैसा

    नई दिल्ली । शेयर मार्केट में निवेश करके पैसा बढ़ाने की चाहत आज बहुत से लोगों में है लेकिन शेयर बाजार में कमाई जितनी आकर्षक दिखाई देती है इसमें जोखिम भी उतना ही मौजूद रहता है। इसलिए निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि पैसा कहां लगाया जाए और किन जगहों पर निवेश करने से बचना चाहिए। शेयर बाजार में कोई भी निवेश पूरी तरह जोखिम रहित नहीं होता और पुराने प्रदर्शन के आधार पर भविष्य में निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं दी जा सकती। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी भी निवेशकों को बाजार में पैसा लगाने से पहले जानकारी हासिल करने और जोखिम को समझने पर जोर देता है।

    अगर आप शेयरों में निवेश करना चाहते हैं तो सबसे पहले मजबूत कारोबार और बेहतर वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों पर नजर डालना बेहतर हो सकता है। किसी कंपनी का शेयर खरीदने से पहले उसके कारोबार का मॉडल कंपनी की कमाई कर्ज मुनाफा नकदी प्रवाह और भविष्य की संभावनाओं को समझना चाहिए। केवल इसलिए किसी शेयर को नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि उसकी कीमत कम है। कम कीमत वाला शेयर जरूरी नहीं कि सस्ता हो और महंगा दिखने वाला शेयर जरूरी नहीं कि खराब निवेश हो। निवेश का फैसला कंपनी की वास्तविक स्थिति और उसके मूल्यांकन को देखकर करना चाहिए।

    नए निवेशकों के लिए सबसे बड़ी गलती अक्सर एक ही कंपनी या एक ही सेक्टर में पूरा पैसा लगा देना होती है। बाजार में किसी एक कंपनी या सेक्टर पर ज्यादा निर्भरता जोखिम बढ़ा सकती है। अलग अलग कंपनियों और सेक्टर में निवेश करके पोर्टफोलियो में विविधता लाई जा सकती है। सेबी के निवेशक शिक्षा पोर्टल के अनुसार इंडेक्स म्यूचुअल फंड व्यापक स्तर पर कई शेयरों में निवेश के जरिए व्यक्तिगत शेयरों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

    अगर आपको कंपनियों का विश्लेषण करने का पर्याप्त अनुभव नहीं है तो म्यूचुअल फंड और इंडेक्स फंड जैसे विकल्पों को भी समझा जा सकता है। म्यूचुअल फंड में पेशेवर प्रबंधन और विविधीकरण जैसे फायदे हो सकते हैं लेकिन इनमें भी बाजार से जुड़ा जोखिम रहता है। इसलिए केवल यह सोचकर निवेश नहीं करना चाहिए कि म्यूचुअल फंड में नुकसान नहीं होगा।

    वहीं दूसरी तरफ उन शेयरों से सावधान रहना चाहिए जिनमें केवल सोशल मीडिया या किसी व्यक्ति की टिप के आधार पर तेजी की चर्चा हो रही हो। व्हाट्सऐप ग्रुप टेलीग्राम चैनल या सोशल मीडिया पोस्ट में किसी शेयर के जल्द दोगुना होने का दावा देखकर पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है। इसी तरह बिना कंपनी की जानकारी देखे लगातार अपर सर्किट या तेजी वाले शेयर के पीछे भागना भी नुकसान का कारण बन सकता है।

    निवेश करते समय अपनी पूरी बचत शेयर बाजार में लगाना भी सही रणनीति नहीं मानी जानी चाहिए। सबसे पहले अपनी वित्तीय जरूरतों और जोखिम उठाने की क्षमता को समझना जरूरी है। जिस पैसे की जरूरत निकट भविष्य में पड़ सकती है उसे अत्यधिक जोखिम वाले निवेश में लगाने से बचना चाहिए। बाजार में गिरावट आने पर घबराकर तुरंत बेचने के बजाय पहले यह समझना चाहिए कि गिरावट कंपनी की वास्तविक स्थिति से जुड़ी है या पूरे बाजार की अस्थायी कमजोरी है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि शेयर बाजार को जल्दी अमीर बनने का जरिया न समझें। लंबी अवधि का नजरिया अनुशासन और सही जानकारी निवेश की बेहतर नींव बन सकते हैं। अगर किसी निवेश को समझने में परेशानी हो तो सेबी के आधिकारिक निवेशक शिक्षा संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • भोपाल में आज मिलादुन्नबी का जुलूस: गंगा-जमुनी तहजीब का दिखेगा संदेश, कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट

    भोपाल में आज मिलादुन्नबी का जुलूस: गंगा-जमुनी तहजीब का दिखेगा संदेश, कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट


    भोपाल  भोपाल में बुधवार को मिलादुन्नबी के मौके पर मुस्लिम समाज की ओर से दो बड़े जुलूस निकाले जाएंगे। आयोजकों ने इस आयोजन को भोपाल की गंगा-जमुनी तहजीब आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देने वाला बताया है। जुलूस को लेकर पुलिस और प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं। शहर में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुराने और नए भोपाल के कई प्रमुख मार्गों पर जरूरत के अनुसार ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा। यातायात पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे जुलूस के दौरान प्रभावित मार्गों से बचें और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें।

    मंगलवारा क्षेत्र का मुख्य चल समारोह दोपहर करीब 2 बजे छावनी स्थित भारत टॉकीज से शुरू होगा। यहां से जुलूस सेंट्रल लाइब्रेरी इतवारा इस्लामपुरा बड़े मास्टर तिराहा बुधवारा इब्राहिमपुरा मोती मस्जिद और पीरगेट होते हुए इमामी गेट चौराहे तक पहुंचेगा जहां इसका समापन किया जाएगा। जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। इसके साथ ही अलग अलग अखाड़ों के दल भी अपनी पारंपरिक कला और शौर्य का प्रदर्शन करेंगे। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन शहर की साझा सांस्कृतिक विरासत और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का अवसर है।

    ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने अलग अलग स्थानों से निकलने वाले जुलूसों को एक मंच पर लाने की अपील भी की है। कमेटी के संरक्षक शमशुअल हसन बल्ली के मुताबिक सभी सामाजिक और मुस्लिम संगठनों से एकजुट होकर इमामी गेट पर जुलूस के समापन में शामिल होने की अपील की गई है। कमेटी का कहना है कि आयोजन को सामाजिक और धार्मिक सौहार्द का मंच बनाया जाएगा और इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप से बचने की कोशिश रहेगी।

    आयोजकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत सांसद आलोक शर्मा वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सनवर पटेल पूर्व सांसद आलोक संजर महापौर और विभिन्न सामाजिक तथा मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया है। कमेटी का उद्देश्य है कि भोपाल से भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब का सकारात्मक संदेश देशभर में जाए।

    इधर अशोका गार्डन क्षेत्र में भी मिलादुन्नबी का दूसरा जुलूस निकलेगा। यह जुलूस अशोका गार्डन से शुरू होकर पुष्प नगर पुलिया नूतन नगर रोड ऐशबाग रोड सोनिया कॉलोनी चौराहा दुर्गा धाम मंदिर रोड अशोका गार्डन थाना परिहार चौराहा मंडी चौराहा और प्रभात चौराहा होते हुए सुभाष नगर ओवरब्रिज से गुजरेगा। इसके बाद स्लाटर हाउस के सामने से जिंसी चौराहा पहुंचेगा जहां जुलूस का समापन होगा।

    जुलूसों को देखते हुए मंगलवारा क्षेत्र में दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे तक और अशोका गार्डन क्षेत्र में दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक जरूरत के अनुसार यातायात व्यवस्था बदली जाएगी। भारत टॉकीज से सेंट्रल लाइब्रेरी इतवारा और छावनी रोड से मंगलवारा थाना की ओर जाने वाले मार्गों के अलावा बुधवारा इब्राहिमपुरा मोती मस्जिद और पीरगेट क्षेत्र में भी ट्रैफिक प्रभावित रहेगा। जुलूस के दौरान मध्यम और भारी मालवाहक वाहनों के साथ अनुमति प्राप्त वाहनों तथा सिटी बसों की जुलूस मार्ग पर आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।

    यातायात पुलिस ने वाहन चालकों के लिए कई वैकल्पिक मार्ग भी तय किए हैं। रॉयल मार्केट से तीन मोहरा भोपाल टॉकीज और हमीदिया रोड होकर वाहन निकल सकेंगे। इसी तरह मोती मस्जिद रेतघाट कमला पार्क और पॉलीटेक्निक चौराहे के रास्ते भी आवागमन किया जा सकेगा। नादरा बस स्टैंड से अल्पना तिराहा संगम तिराहा सब्जी मंडी ओवरब्रिज बजरिया तिराहा और 80 फीट रोड होकर नए शहर की ओर जाने वाले वाहन जा सकेंगे।

    नए शहर न्यू मार्केट और मैदा मिल की तरफ से आने वाले वाहन कमला पार्क रेतघाट सदर मंजिल रॉयल मार्केट तीन मोहरा शाहजहांनाबाद थाना तिराहा और हमीदिया रोड होते हुए पुराने शहर और मुख्य रेलवे स्टेशन की ओर जा सकेंगे। वहीं अशोका गार्डन जुलूस के दौरान परिहार चौराहा प्रभात चौराहा सुभाष नगर ओवरब्रिज और जिंसी चौराहा क्षेत्र में भी जरूरत के अनुसार डायवर्जन रहेगा।

    यातायात पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि जुलूस के दौरान प्रतिबंधित मार्गों पर जाने से बचें और वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करें। यातायात संबंधी परेशानी होने पर कंट्रोल रूम के फोन नंबर 0755-2677340 पर संपर्क किया जा सकता है। प्रशासन की कोशिश है कि धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और शहर की सामान्य यातायात व्यवस्था भी बनी रहे।

  • बुधवार का दिन गणेश जी को करें समर्पित! इन आसान उपायों से मिलेगा बुद्धि धन और सौभाग्य का आशीर्वाद

    बुधवार का दिन गणेश जी को करें समर्पित! इन आसान उपायों से मिलेगा बुद्धि धन और सौभाग्य का आशीर्वाद

    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी के स्मरण और पूजा से करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का दिन भगवान गणेश को विशेष रूप से समर्पित माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और भक्तों को सुख समृद्धि तथा बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। बुधवार को गणेश जी की पूजा करने के साथ कुछ आसान उपाय भी किए जा सकते हैं।

    बुधवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की साफ सफाई करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। पूजा की शुरुआत गणेश जी के ध्यान से करें। इसके बाद उन्हें जल अर्पित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार फूल तथा दूर्वा चढ़ाएं। धार्मिक मान्यता में गणेश जी को दूर्वा बेहद प्रिय मानी जाती है। इसलिए पूजा में दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    गणेश जी की पूजा में लाल फूल चढ़ाने की भी परंपरा है। इसके साथ उन्हें मोदक या लड्डू का भोग लगाया जा सकता है। माना जाता है कि गणपति बप्पा को मोदक प्रिय हैं। भोग लगाने के बाद भगवान गणेश की आरती करें और अपनी मनोकामना उनके सामने रखें। पूजा के दौरान ऊं गं गणपतये नमः मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। श्रद्धा के अनुसार इस मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।

    बुधवार के दिन गणेश जी के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। गणेश जी को माता पार्वती और भगवान शिव का पुत्र माना जाता है। ऐसे में इस दिन परिवार के साथ गणेश जी की पूजा करने से घर के वातावरण में सकारात्मकता बढ़ने की धार्मिक मान्यता है।

    अगर किसी व्यक्ति के जीवन में लगातार काम रुक रहे हैं या किसी नए काम की शुरुआत में बार बार बाधाएं आ रही हैं तो बुधवार को गणेश जी की विशेष पूजा की जा सकती है। पूजा के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार भोजन या आवश्यक वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। इससे सेवा और परोपकार की भावना मजबूत होती है।

    हालांकि इन सभी उपायों को धार्मिक और आस्था से जुड़ी मान्यताओं के रूप में ही देखना चाहिए। इनके वैज्ञानिक रूप से निश्चित परिणाम का दावा नहीं किया जा सकता। भगवान गणेश की पूजा का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा और सकारात्मक भाव के साथ अपने जीवन में अच्छे कर्मों के लिए प्रेरित होना है। बुधवार को गणपति बप्पा का स्मरण कर उनके मंत्रों का जाप और जरूरतमंदों की मदद करने से मन में शांति और आत्मविश्वास बढ़ सकता है। इसलिए बुधवार को गणेश जी की पूजा करें और उनसे बुद्धि विवेक तथा जीवन की सही दिशा देने की प्रार्थना करें।