Blog

  • MP में मानसून ट्रिप का है प्लान तो इन जगहों पर जरूर जाएं! झरनों से लेकर जंगल और किलों तक मिलेगा शानदार नजारा

    MP में मानसून ट्रिप का है प्लान तो इन जगहों पर जरूर जाएं! झरनों से लेकर जंगल और किलों तक मिलेगा शानदार नजारा

    नई दिल्ली । मानसून का मौसम आते ही मध्य प्रदेश की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। बारिश की बूंदों के साथ पहाड़ों पर छाई हरियाली बहते झरने जंगलों की ताजगी और बादलों से घिरे खूबसूरत नजारे लोगों को घूमने के लिए आकर्षित करते हैं। अगर आप भी बारिश के मौसम में परिवार दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं तो मध्य प्रदेश आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। प्रदेश में ऐसी कई जगहें हैं जहां मानसून के दौरान प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत रूप में नजर आती है।

    मानसून ट्रैवल के लिए सबसे लोकप्रिय जगहों में पचमढ़ी का नाम सबसे ऊपर आता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी बारिश के मौसम में हरियाली से ढक जाता है। यहां पहाड़ों के बीच बादलों का नजारा और झरनों का बहता पानी पर्यटकों को खास अनुभव देता है। बी फॉल्स रजत प्रपात और जटाशंकर जैसी जगहों पर बारिश के दौरान प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। हालांकि झरनों के पास जाते समय स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है।

    इंदौर के आसपास रहने वाले लोगों के लिए पातालपानी मानसून में घूमने की अच्छी जगह हो सकती है। बारिश के दौरान यहां का झरना और आसपास की हरियाली मन मोह लेती है। दोस्तों और परिवार के साथ एक दिन की ट्रिप के लिए यह जगह आकर्षक विकल्प बन सकती है। तेज बारिश के समय पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है इसलिए झरने के बेहद करीब जाने से बचना चाहिए।

    जबलपुर की बात करें तो भेड़ाघाट मानसून में अलग ही रूप में नजर आता है। नर्मदा नदी के किनारे संगमरमर की ऊंची चट्टानें और आसपास का प्राकृतिक वातावरण बारिश के बाद बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। धुआंधार जलप्रपात भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। पानी का प्रवाह बढ़ने पर इसका नजारा और ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है लेकिन यहां भी सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय निर्देशों का ध्यान रखना जरूरी है।

    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का तामिया भी मानसून ट्रैवल के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है। पहाड़ियों घाटियों और घने जंगलों से घिरा यह इलाका बारिश के मौसम में बेहद हरा भरा नजर आता है। यहां से दिखाई देने वाले प्राकृतिक दृश्य और शांत वातावरण उन लोगों को खास पसंद आ सकते हैं जो भीड़भाड़ से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं।

    इसके अलावा मांडू भी बारिश के मौसम में घूमने के लिए आकर्षक जगह है। ऐतिहासिक इमारतों के साथ हरियाली और बादलों का मेल यहां के नजारों को खास बना देता है। भोपाल के आसपास भोजपुर और केरवा जैसे स्थान भी बारिश के दौरान प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।

    हालांकि मानसून में यात्रा करते समय खूबसूरत नजारों के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। नदी झरने और जलप्रपात के पास सेल्फी लेने के लिए जोखिम उठाने से बचें। मौसम का पूर्वानुमान देखकर यात्रा की योजना बनाएं और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले हासिल करें। इस तरह थोड़ी सावधानी के साथ मध्य प्रदेश का मानसून ट्रिप खूबसूरत यादों से भरपूर बनाया जा सकता है।

  • 18 साल बाद फिर साथ आएंगे अक्षय-सैफ: ‘हैवान’ से पहले देखिए 6 फिल्मों में कैसी रही जोड़ी की किस्मत

    18 साल बाद फिर साथ आएंगे अक्षय-सैफ: ‘हैवान’ से पहले देखिए 6 फिल्मों में कैसी रही जोड़ी की किस्मत


    नई दिल्ली। अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी एक बार फिर चर्चा में है। दोनों कलाकार फिल्म हैवान के जरिए लंबे समय बाद एक ही प्रोजेक्ट का हिस्सा बने हैं हालांकि इस बार दोनों एक साथ स्क्रीन पर दोस्त या साथी के तौर पर नहीं बल्कि अलग अलग भूमिकाओं में नजर आएंगे। सैफ अली खान फिल्म में लीड रोल निभा रहे हैं जबकि अक्षय कुमार विलेन के किरदार में दिखाई देंगे। फिल्म की रिलीज से पहले दर्शकों के बीच यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि आखिर अतीत में जब अक्षय और सैफ एक साथ फिल्मों में आए तो बॉक्स ऑफिस पर उनका प्रदर्शन कैसा रहा था।

    अक्षय कुमार और सैफ अली खान ने अपने करियर में करीब छह फिल्मों में साथ काम किया है। इन फिल्मों में कुछ को शानदार सफलता मिली तो कुछ फिल्मों का प्रदर्शन औसत या मिला जुला रहा। यानी दोनों की जोड़ी ने कई यादगार फिल्में जरूर दीं लेकिन केवल इन दोनों सितारों का साथ आना किसी फिल्म की सफलता की गारंटी नहीं रहा। इसके बावजूद दोनों कलाकारों की स्क्रीन केमिस्ट्री और अलग अलग अंदाज दर्शकों को पसंद आया है और यही वजह है कि हैवान को लेकर भी उम्मीदें काफी ज्यादा हैं।

    दोनों की सबसे चर्चित फिल्मों में साल 1994 में रिलीज हुई मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी का नाम सबसे ऊपर आता है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल करने वाली फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में अक्षय कुमार ने सख्त मिजाज पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया था जबकि सैफ अली खान एक ऐसे अभिनेता के रोल में नजर आए थे जो अपने अभिनय को बेहतर बनाने के लिए अक्षय के किरदार के साथ जुड़ जाता है। फिल्म में एक्शन कॉमेडी और दोनों कलाकारों की शानदार टाइमिंग ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया था। इसके गाने भी उस दौर में काफी लोकप्रिय हुए थे।

    साल 1994 में ही दोनों कलाकार फिल्म ये दिल्लगी में भी नजर आए। इसके बाद 1996 में तू चोर मैं सिपाही में दोनों ने साथ काम किया। साल 1998 में कीमत और 1999 में आरजू में भी अक्षय और सैफ की जोड़ी देखने को मिली। दोनों की साथ में आखिरी चर्चित फिल्मों में 2008 की टशन शामिल है। इन फिल्मों में दोनों ने अलग अलग तरह के किरदार निभाए और कई फिल्मों में उनकी जोड़ी ने दर्शकों का मनोरंजन किया।

    अब हैवान को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसकी कहानी और कलाकारों की भूमिकाओं को लेकर है। फिल्म में सैफ अली खान मुख्य किरदार में हैं जबकि अक्षय कुमार पहली बार उनके सामने खलनायक के अंदाज में दिखाई देंगे। दोनों के बीच टकराव फिल्म की सबसे बड़ी खासियतों में से एक माना जा रहा है। ऐसे में दर्शकों की नजर इस बात पर होगी कि दोनों दिग्गज अभिनेता एक दूसरे के सामने किस तरह का स्क्रीन प्रेजेंस दिखाते हैं।

    हैवान की उम्मीदों को बढ़ाने वाली दूसरी बड़ी वजह यह है कि यह एक सफल साउथ फिल्म का हिंदी रीमेक बताई जा रही है। मूल कहानी दर्शकों के बीच पहले ही अपनी पहचान बना चुकी है और ऐसे में हिंदी दर्शकों के लिए इसे बड़े सितारों के साथ पेश किया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन प्रियदर्शन कर रहे हैं। प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की जोड़ी इससे पहले हेरा फेरी और भूल भुलैया जैसी बेहद लोकप्रिय फिल्मों में काम कर चुकी है। यही कारण है कि हैवान को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता और बढ़ गई है।

    अक्षय और सैफ का पिछला रिकॉर्ड भले ही पूरी तरह ब्लॉकबस्टर नहीं रहा हो लेकिन दोनों ने मिलकर कुछ ऐसी फिल्में जरूर दी हैं जो आज भी दर्शकों को याद हैं। मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी जैसी सफलता इस जोड़ी के खाते में दर्ज है जबकि अन्य फिल्मों का प्रदर्शन अलग अलग रहा। अब हैवान में दोनों का समीकरण पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा। सैफ जहां कहानी के केंद्र में होंगे वहीं अक्षय का विलेन अवतार फिल्म में संघर्ष को नया रंग देगा।

    फिल्म की रिलीज के बाद ही साफ होगा कि अक्षय और सैफ की यह नई जोड़ी पुराने बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड को दोहरा पाती है या नहीं। फिलहाल दोनों सितारों की लोकप्रियता प्रियदर्शन का निर्देशन और साउथ की सफल कहानी का आधार हैवान को रिलीज से पहले ही एक चर्चित फिल्म बना चुका है।

  • Yash की Toxic के हिंदी वर्जन पर सेंसर बोर्ड की कैंची, गाली से लेकर ड्रग्स सीन तक में बदलाव; A सर्टिफिकेट के साथ होगी रिलीज

    Yash की Toxic के हिंदी वर्जन पर सेंसर बोर्ड की कैंची, गाली से लेकर ड्रग्स सीन तक में बदलाव; A सर्टिफिकेट के साथ होगी रिलीज


    नई दिल्ली। साउथ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म Toxic रिलीज से पहले ही सेंसर बोर्ड के फैसले को लेकर चर्चा में आ गई है। फिल्म के हिंदी वर्जन में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC ने कई बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। जहां फिल्म के तमिल वर्जन में सिर्फ एक डायलॉग पर आपत्ति जताई गई थी वहीं हिंदी वर्जन में गाली गलौज से लेकर ड्रग्स वाले सीन और अश्लील डायलॉग तक मेंYash Toxic Movie, Toxic CBFC Cuts, Yash New Movie, Bollywood South Cinema, Toxic Hindi Version बदलाव करने को कहा गया है। फिल्म बुधवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है और रिलीज से ठीक एक दिन पहले सेंसर बोर्ड के निर्देश सामने आने के बाद दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक हिंदी वर्जन में फिल्म के फर्स्ट हाफ में इस्तेमाल किए गए एक अपमानजनक शब्द को हटाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा सेकंड हाफ के एक सीन में बच्चे को दी गई गाली को म्यूट करने के लिए कहा गया है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म में दिखाए गए ड्रग्स के सेवन वाले एक सीन की अवधि भी कम करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सेकंड हाफ में मौजूद एक अश्लील डायलॉग को बदलने के लिए कहा गया है। यानी हिंदी दर्शकों के लिए फिल्म का कंटेंट सेंसर बोर्ड के निर्देशों के मुताबिक थोड़ा बदला हुआ नजर आएगा।

    फिल्म के डिसक्लेमर में भी बदलाव किया गया है। बताया गया है कि फिल्म के अंत में इस्तेमाल किया गया डिसक्लेमर तमिल भाषा में था। CBFC ने इसे हिंदी में करने का निर्देश दिया है। सभी जरूरी बदलाव पूरे किए जाने के बाद फिल्म के हिंदी वर्जन को A सर्टिफिकेट के साथ रिलीज की मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि फिल्म को केवल वयस्क दर्शक ही सिनेमाघरों में देख सकेंगे।

    Toxic की लंबाई भी दर्शकों के लिए खासा चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म का रन टाइम 194 मिनट 12 सेकंड बताया गया है। यानी फिल्म करीब 3 घंटे 14 मिनट लंबी है। इंटरवल और थिएटर में चलने वाले विज्ञापनों को जोड़ दिया जाए तो दर्शकों को सिनेमाघर में लगभग चार घंटे तक का समय देना पड़ सकता है। इतने लंबे रन टाइम के कारण फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता के साथ चर्चा भी तेज है।

    दिलचस्प बात यह है कि हिंदी वर्जन की तुलना में फिल्म के तमिल वर्जन पर सेंसर बोर्ड ने काफी कम सख्ती दिखाई। तमिल वर्जन को 20 अगस्त को सेंसर सर्टिफिकेट मिला था और इसमें सिर्फ एक बदलाव करने के लिए कहा गया था। फिल्म में मौजूद एक गाली वाले डायलॉग को बदलने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा तमिल वर्जन में किसी अन्य बदलाव की बात सामने नहीं आई थी।

    यश की Toxic लंबे समय से सुर्खियों में बनी हुई है। फिल्म में यश एक अलग और ग्रे शेड वाले किरदार में नजर आने वाले हैं। बड़े बजट की इस फिल्म को लेकर रिलीज से पहले ही जबरदस्त माहौल बना हुआ है। फिल्म की कहानी और यश का नया अवतार दर्शकों के बीच चर्चा का विषय है। अब सेंसर बोर्ड के बदलावों के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म का हिंदी वर्जन दर्शकों पर कितना असर डालता है।

    फिल्म की रिलीज रामायण से पहले हो रही है और ऐसे में बॉक्स ऑफिस पर भी इसके प्रदर्शन को लेकर काफी उम्मीदें हैं। यश की पिछली फिल्मों की लोकप्रियता और Toxic को लेकर बने हाईप को देखते हुए ट्रेड एक्सपर्ट्स की नजर इसकी ओपनिंग पर रहेगी। हालांकि फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है और बॉक्स ऑफिस पर कितनी बड़ी शुरुआत करती है इसका जवाब रिलीज के बाद ही सामने आएगा।

    फिलहाल Toxic के हिंदी वर्जन में सेंसर बोर्ड द्वारा किए गए बदलावों ने फिल्म की रिलीज से पहले ही इसे चर्चा में ला दिया है। गाली वाले शब्दों को हटाने या म्यूट करने से लेकर ड्रग्स सीन छोटा करने और अश्लील डायलॉग बदलने तक कई निर्देश दिए गए हैं। अब A सर्टिफिकेट के साथ रिलीज होने जा रही यह फिल्म यश के फैंस को कितना प्रभावित करती है यह देखने वाली बात होगी।

  • रक्षाबंधन पर गिफ्ट खरीदना रह गया तो घबराएं नहीं, क्विक कॉमर्स ऐप्स से मिनटों में चॉकलेट, फूल और मिठाई मंगाएं

    रक्षाबंधन पर गिफ्ट खरीदना रह गया तो घबराएं नहीं, क्विक कॉमर्स ऐप्स से मिनटों में चॉकलेट, फूल और मिठाई मंगाएं

    नई दिल्ली ।रक्षाबंधन के मौके पर भाई या बहन के लिए उपहार खरीदना अगर आखिरी समय तक टल गया है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्विक कॉमर्स सेवाओं के जरिए घर बैठे कुछ ही समय में कई तरह के गिफ्टिंग विकल्प तलाशे जा सकते हैं। चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक से लेकर ब्यूटी, ग्रूमिंग और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामान तक कई विकल्प अलग-अलग इलाकों में उपलब्ध हो सकते हैं।

    आखिरी समय में गिफ्ट ऑर्डर करने से पहले सबसे जरूरी बात अपने इलाके में उपलब्धता देखना है। संबंधित ऐप खोलकर लोकेशन दर्ज करने के बाद यह जांचना चाहिए कि चुना हुआ सामान आसपास के स्टोर में मौजूद है या नहीं। इसके साथ ही ऐप पर दिखाई जा रही अनुमानित डिलीवरी अवधि को भी देखना जरूरी है।

    Blinkit जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रक्षाबंधन के लिए कई तरह के छोटे और तुरंत दिए जा सकने वाले उपहार मिल सकते हैं। चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक के अलावा स्नैक्स, ब्यूटी तथा पर्सनल केयर से जुड़े उत्पाद भी विकल्प हो सकते हैं। भाई या बहन की पसंद को ध्यान में रखते हुए उपयोगी सामान चुनना आखिरी समय में भी बेहतर गिफ्ट तैयार करने का आसान तरीका हो सकता है।

    Zepto पर भी अलग-अलग क्षेत्रों में गिफ्टिंग से जुड़े कई उत्पाद उपलब्ध हो सकते हैं। चॉकलेट और दूसरे खाद्य उत्पादों के अलावा परफ्यूम, ब्यूटी तथा ग्रूमिंग से जुड़े सामान और रोजाना काम आने वाले उत्पादों को भी उपहार के तौर पर चुना जा सकता है। हालांकि हर इलाके में हर उत्पाद उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है।

    Swiggy Instamart भी आखिरी समय में गिफ्ट तलाशने वालों के लिए एक विकल्प हो सकता है। यहां उपलब्धता के आधार पर चॉकलेट, मिठाई, फूल, स्नैक्स और अन्य छोटे गिफ्टिंग आइटम देखे जा सकते हैं। भाई या बहन की पसंद की अलग-अलग चीजें एक साथ मंगाकर छोटा सा गिफ्ट कॉम्बिनेशन भी तैयार किया जा सकता है।

    हालांकि क्विक डिलीवरी का मतलब यह नहीं है कि हर ऑर्डर निश्चित रूप से 15 मिनट में पहुंच जाएगा। डिलीवरी का समय ग्राहक की लोकेशन, आसपास उपलब्ध स्टॉक, ऑर्डर की संख्या और उस समय की स्थानीय मांग पर निर्भर करता है। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर ऑर्डर की संख्या बढ़ने के कारण कुछ क्षेत्रों में सामान्य समय से अधिक देरी भी हो सकती है।

    इसीलिए ऑर्डर करने से पहले अनुमानित डिलीवरी समय जरूर जांचना चाहिए। यदि राखी बांधने या परिवार के साथ मिलने का समय बेहद करीब है, तो ऐसा सामान चुनना बेहतर हो सकता है जिसकी उपलब्धता स्पष्ट हो और जिसकी अनुमानित डिलीवरी निर्धारित समय से पहले दिखाई दे रही हो।

    गिफ्ट चुनने में ज्यादा समय नहीं है तो चॉकलेट, मिठाई, फूल और केक आसान विकल्प हो सकते हैं। इनके अलावा परफ्यूम, स्किन केयर, ग्रूमिंग उत्पाद, कॉफी और स्नैक कॉम्बो या भाई-बहन की पसंद का कोई छोटा उपयोगी सामान भी चुना जा सकता है। बजट के अनुसार एक से अधिक छोटी चीजों को मिलाकर व्यक्तिगत गिफ्ट तैयार किया जा सकता है।

    रक्षाबंधन पर आखिरी समय में खरीदारी करने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात जल्दबाजी में केवल डिलीवरी स्पीड देखकर ऑर्डर करना नहीं, बल्कि उपलब्धता, कीमत और अनुमानित डिलीवरी समय की जांच करना है। सही विकल्प चुनकर कम समय में भी भाई या बहन के लिए उपयोगी और पसंद आने वाला उपहार मंगाया जा सकता है।

  • अजय देवगन के धमाकेदार डेब्यू के पीछे थे कुकू कोहली, ‘फूल और कांटे’ से मिली पहचान; हार्ट अटैक ने ली जान

    अजय देवगन के धमाकेदार डेब्यू के पीछे थे कुकू कोहली, ‘फूल और कांटे’ से मिली पहचान; हार्ट अटैक ने ली जान


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के मशहूर फिल्म निर्देशक कुकू कोहली का निधन हो गया है। 1991 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म फूल और कांटे से अजय देवगन को बॉलीवुड में शानदार लॉन्च देने वाले कुकू कोहली ने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थे। जानकारी के मुताबिक स्टेंट प्रक्रिया के एक दिन बाद उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया जिसके बाद उनकी मौत हो गई। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई और कई कलाकारों तथा फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    कुकू कोहली को हिंदी सिनेमा में अजय देवगन के शुरुआती करियर को मजबूत आधार देने वाले फिल्ममेकर के तौर पर याद किया जाता है। फूल और कांटे अजय देवगन की डेब्यू फिल्म थी और इसी फिल्म ने उन्हें रातोंरात दर्शकों के बीच पहचान दिला दी थी। फिल्म में अजय देवगन की एंट्री का वह दृश्य आज भी बॉलीवुड की सबसे चर्चित एंट्री में गिना जाता है जिसमें वह दो चलती मोटरसाइकिलों पर पैर रखकर अनोखे अंदाज में नजर आए थे। फिल्म की सफलता ने अजय देवगन को एक नए एक्शन स्टार के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी।

    कुकू कोहली ने अपने करियर में कई लोकप्रिय फिल्मों का निर्देशन किया। फूल और कांटे के अलावा उन्होंने कोहराम सुहाग हकीकत और अनाड़ी नंबर वन जैसी फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया। उनकी फिल्मों में एक्शन ड्रामा और मनोरंजन का ऐसा मेल देखने को मिलता था जो उस दौर के दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय रहा। साल 2004 में उन्होंने वो तेरा नाम था फिल्म का निर्देशन किया था और यही उनके निर्देशन करियर की आखिरी फिल्म साबित हुई। इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्माण से दूरी बना ली थी।

    फिल्ममेकर अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कुकू कोहली के निधन की जानकारी साझा की। उनके निधन को भारतीय सिनेमा के लिए बड़ी क्षति बताया जा रहा है। फिल्म इंडस्ट्री में कुकू कोहली का योगदान खास तौर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि उन्होंने अजय देवगन जैसे कलाकार को शुरुआती दौर में ऐसा मंच दिया जिसने उनके लंबे और सफल फिल्मी करियर की नींव रखी।

    कुकू कोहली का असली नाम अवतार कोहली था। उनका जन्म 4 जून 1949 को पेशावर में हुआ था। बाद में वह मुंबई पहुंचे और फिल्मी दुनिया में अपना करियर शुरू किया। निर्देशन की दुनिया में आने से पहले उन्होंने दिग्गज फिल्ममेकर राज कपूर के साथ बतौर असिस्टेंट काम किया। राज कपूर के साथ काम करने के दौरान उन्होंने बॉबी सत्यम शिवम सुंदरम और प्रेम रोग जैसी चर्चित फिल्मों की मेकिंग को करीब से समझा। इस अनुभव ने उनकी फिल्म निर्माण की समझ को मजबूत किया और आगे चलकर उन्होंने खुद निर्देशन की कमान संभाली।

    कुकू कोहली की निजी जिंदगी भी कई वजहों से चर्चा में रही। उन्होंने 1990 में अभिनेत्री अरुणा ईरानी से शादी की थी। यह उनकी दूसरी शादी थी। उनकी पहली पत्नी रीटा कोहली थीं और पहली शादी से उनकी दो बेटियां पूजा कोहली और करिश्मा कोहली हैं। पूजा कोहली फिल्म निर्माण से जुड़ी रही हैं। कुकू कोहली और अरुणा ईरानी का रिश्ता लंबे समय तक फिल्मी दुनिया में चर्चा का विषय रहा।

    कुकू कोहली भले ही पिछले कई वर्षों से फिल्मों से दूर थे लेकिन उनका काम और खास तौर पर फूल और कांटे के जरिए अजय देवगन को दिया गया लॉन्च आज भी याद किया जाता है। एक ऐसी फिल्म जिसने एक नए अभिनेता को पहचान दिलाई और निर्देशक को भी हिंदी सिनेमा में अलग मुकाम दिया। उनके निधन से बॉलीवुड ने एक ऐसे फिल्ममेकर को खो दिया जिसने अपने दौर में मसाला और एक्शन फिल्मों को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। कुकू कोहली का नाम आने वाले समय में भी फूल और कांटे और अजय देवगन के यादगार डेब्यू के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा।

  • नौकरी छोड़ने की बढ़ती तैयारी के बीच कार्यस्थलों में जेन जी का प्रभाव बढ़ा, एआई को लेकर भी कर्मचारियों में चिंता

    नौकरी छोड़ने की बढ़ती तैयारी के बीच कार्यस्थलों में जेन जी का प्रभाव बढ़ा, एआई को लेकर भी कर्मचारियों में चिंता

    नई दिल्ली ।भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में कर्मचारियों के बीच नौकरी बदलने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार करीब हर दो में से एक कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहा है। वहीं, चार में से तीन कर्मचारी अगले 12 महीनों के भीतर अपनी मौजूदा कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं। यह स्थिति कंपनियों के सामने प्रतिभाओं को बनाए रखने की चुनौती को और गंभीर बनाती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक कार्यबल की संरचना में भी बड़ा बदलाव आया है। जेन जी यानी नई पीढ़ी के कर्मचारियों की हिस्सेदारी 2023 में 17 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 34 प्रतिशत हो गई है। यानी केवल तीन वर्षों में इस पीढ़ी की कार्यबल में हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है। इसके साथ ही कंपनियों को नई पीढ़ी की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप कार्यस्थल नीतियों में बदलाव की जरूरत महसूस हो रही है।

    जेन जी कर्मचारियों में वेतन, पहचान और पदोन्नति के मानदंडों को लेकर अस्पष्टता स्वीकार करने की क्षमता अपेक्षाकृत कम बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार जब उन्हें अपनी अपेक्षाओं और वास्तविक कार्यस्थल अनुभव के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है तो वे नौकरी बदलने का फैसला तेजी से ले सकते हैं।

    कर्मचारियों को बनाए रखने की समस्या केवल युवा कार्यबल तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के अनुसार 86 प्रतिशत फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं। व्यक्तिगत योगदान देने वाले कर्मचारियों में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत है। इससे प्रबंधन स्तर पर बढ़ते दबाव और असंतोष की स्थिति का संकेत मिलता है।

    फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे एक ओर प्रोजेक्ट पूरा करने और ग्राहकों की अपेक्षाओं का दबाव संभालते हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी टीम की जरूरतों और समस्याओं पर भी ध्यान देते हैं। संगठन में होने वाले बदलावों को कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी अक्सर इन्हीं स्तरों पर आती है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों की अपनी औपचारिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर अतिरिक्त प्रयास करने की इच्छा में कमी आई है। हालांकि कार्यस्थल की बुनियादी परिस्थितियों में सुधार हुआ है, लेकिन केवल सुविधाओं में बदलाव कर्मचारियों के लंबे समय तक जुड़े रहने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। कर्मचारी संगठन की संस्कृति, विकास के अवसर और काम की स्पष्टता जैसे व्यापक पहलुओं को भी महत्व दे रहे हैं।

    प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। करीब 10 में से छह संगठन अपने रोजमर्रा के कामकाज में एआई का उपयोग कर रहे हैं। इसके बावजूद केवल 10 में से दो कर्मचारियों ने पूरी तरह सहमति जताई कि उन्हें एआई उपकरणों से जुड़े संभावित फायदे और जोखिमों की पर्याप्त जानकारी दी गई है।

    इस स्थिति में कंपनियों के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ नई पीढ़ी के कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाओं को समझना होगा और दूसरी तरफ अनुभवी कर्मचारियों तथा प्रबंधकीय स्तर पर बढ़ते नौकरी बदलाव के रुझान को रोकना होगा। स्पष्ट वेतन और पदोन्नति व्यवस्था, बेहतर संवाद, विकास के अवसर और एआई के सुरक्षित इस्तेमाल की जानकारी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • चूहों को बिना मारे घर से भगाने के आसान उपाय, खाने की चीजें सुरक्षित रखने और प्रवेश के रास्ते बंद करने से घटेगा खतरा

    चूहों को बिना मारे घर से भगाने के आसान उपाय, खाने की चीजें सुरक्षित रखने और प्रवेश के रास्ते बंद करने से घटेगा खतरा

    नई दिल्ली । घर में चूहों की मौजूदगी छोटी परेशानी से शुरू होकर धीरे धीरे बड़ी समस्या बन सकती है। चूहे खाने की चीजों को दूषित करने के अलावा कपड़ों, फर्नीचर और बिजली के तारों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में कई लोग उन्हें मारने के बजाय घर से दूर रखने के घरेलू उपाय तलाशते हैं। हालांकि, हर इंटरनेट आधारित नुस्खा सुरक्षित नहीं होता और किसी भी जहरीले या रासायनिक पदार्थ को खाने वाली चीज में मिलाकर चूहों को खिलाना नुकसानदायक हो सकता है।

    चूहों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका उनके लिए घर में भोजन और सुरक्षित ठिकाने की उपलब्धता कम करना है। रसोई में खुले में रखे अनाज, बिस्किट, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थों को ढक्कन वाले मजबूत डिब्बों में रखना चाहिए। खाने के बाद बचे टुकड़ों को तुरंत साफ करना और रात में रसोई को अच्छी तरह साफ करके रखना भी जरूरी है।

    चूहे अक्सर सिंक के नीचे, रसोई की अलमारियों के पीछे, स्टोर रूम, पाइप के आसपास और दरवाजों के नीचे मौजूद छोटे रास्तों से घर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए इन स्थानों की नियमित जांच करनी चाहिए। दीवार में दिखाई देने वाले छोटे छेद, दरार या पाइप के आसपास की खाली जगह को उपयुक्त सामग्री से बंद करना घर में उनकी आवाजाही रोकने का महत्वपूर्ण उपाय है।

    घर में बेकार सामान, पुराने डिब्बे, कागज और कबाड़ लंबे समय तक जमा रहने पर चूहों को छिपने की जगह मिल सकती है। स्टोर रूम और रसोई के आसपास अनावश्यक सामान को व्यवस्थित रखना चाहिए। सफाई के दौरान उन कोनों और जगहों पर भी ध्यान देना जरूरी है, जहां आमतौर पर पहुंचना मुश्किल होता है।

    कुछ घरेलू उपायों में तेज गंध वाली चीजों का इस्तेमाल चूहों को किसी स्थान से दूर रखने के लिए किया जाता है, लेकिन इनकी प्रभावशीलता हर स्थिति में समान नहीं होती। खासकर फिनाइल, डिटर्जेंट या अन्य रासायनिक पदार्थों को आटे, चीनी या घी जैसी खाने की चीजों में मिलाकर चूहों के लिए रखना सुरक्षित तरीका नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे मिश्रण बच्चों और पालतू जानवरों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं।

    यदि चूहे पहले से घर में मौजूद हैं, तो उन्हें पकड़कर सुरक्षित तरीके से बाहर छोड़ने वाले उपयुक्त मानवीय ट्रैप का इस्तेमाल किया जा सकता है। ट्रैप को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां बच्चे या पालतू जानवर आसानी से न पहुंच सकें। समस्या ज्यादा होने पर प्रशिक्षित कीट नियंत्रण विशेषज्ञ की सहायता लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

    घर में चूहों की संख्या कम करने के लिए केवल उन्हें भगाने पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। यदि भोजन आसानी से उपलब्ध रहेगा और प्रवेश के रास्ते खुले रहेंगे, तो चूहे दोबारा घर में आ सकते हैं। इसलिए सफाई, भोजन का सुरक्षित भंडारण और प्रवेश मार्गों को बंद करना एक साथ जरूरी है।

    रसोई की नियमित सफाई के अलावा कूड़ेदान को खुला नहीं छोड़ना चाहिए। रातभर सिंक में गंदे बर्तन और खाने के अवशेष पड़े रहने से भी चूहों को आकर्षण मिल सकता है। घर के बाहर भी कचरा और भोजन के अवशेष जमा नहीं होने देने चाहिए।

    इस तरह चूहों को बिना मारे दूर रखने के लिए सबसे सुरक्षित रणनीति उनके भोजन, पानी और छिपने की जगहों को सीमित करना है। साथ ही घर में मौजूद संभावित प्रवेश मार्गों को बंद करके समस्या की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है। रासायनिक पदार्थों वाले ऐसे घरेलू नुस्खों से बचना बेहतर है जिनसे चूहों, बच्चों या पालतू जानवरों को नुकसान पहुंचने का खतरा हो।

  • आधी रात गायब हुआ 4 लाख का बैग, CCTV देखा तो पुलिस भी रह गई हैरान; कुत्ता निकला 'चोर'

    आधी रात गायब हुआ 4 लाख का बैग, CCTV देखा तो पुलिस भी रह गई हैरान; कुत्ता निकला 'चोर'


    मंदसौर  मध्य प्रदेश के मंदसौर जिला अस्पताल में आधी रात को हुई बैग चोरी की घटना ने सभी को हैरान कर दिया। अस्पताल में अपने बेटे का इलाज कराने पहुंची महिला के पास रखा करीब 4 लाख रुपये कीमत के सोने और चांदी के आभूषणों से भरा बैग अचानक गायब हो गया। परिवार को पहले आशंका हुई कि अस्पताल परिसर में किसी ने बैग पर हाथ साफ कर दिया है लेकिन जब पुलिस ने अस्पताल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली तो जो सच सामने आया उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। बैग किसी इंसान ने नहीं बल्कि एक कुत्ते ने मुंह में दबाकर अस्पताल से बाहर पहुंचाया था।

    मामला 23 और 24 अगस्त की दरमियानी रात का बताया जा रहा है। कयामपुर निवासी लताबाई अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए मंदसौर जिला अस्पताल आई थीं। महिला ने घर में रखे कीमती जेवर सुरक्षा की दृष्टि से अपने साथ अस्पताल लाए थे। बैग में करीब 4 लाख रुपये कीमत के सोने और चांदी के आभूषण के अलावा लगभग 2 हजार रुपये नकद और खाने पीने का सामान भी रखा था। रात करीब 1 बजे से सुबह 6 बजे के बीच महिला को बैग गायब होने का पता चला। लाखों रुपये के जेवरात गायब होने से परिवार के होश उड़ गए और उन्होंने तत्काल पुलिस से मदद मांगी।

    लताबाई ने कोतवाली पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद बिना देर किए अस्पताल परिसर और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। पुलिस को उम्मीद थी कि फुटेज से किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान हो सकेगी लेकिन कैमरे में जो दृश्य सामने आया उसने पूरे मामले को ही अलग मोड़ दे दिया। CCTV फुटेज में एक कुत्ता अस्पताल के सर्जिकल वार्ड के आसपास घूमता दिखाई दिया। कुछ देर बाद वही कुत्ता बैग को मुंह में दबाकर अस्पताल के दरवाजे से बाहर निकलता नजर आया।

    पुलिस ने इसके बाद कुत्ते की गतिविधियों और उसके जाने की दिशा का पता लगाने के लिए आसपास लगे दूसरे CCTV कैमरों की भी मदद ली। अलग अलग स्थानों की फुटेज को जोड़कर पुलिस टीम ने कुत्ते के रास्ते को ट्रेस किया और लगातार तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद पुलिस को ज्वेलरी से भरा बैग मिल गया। बैग में रखे सोने चांदी के आभूषण और अन्य सामान सुरक्षित पाए गए। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद पूरा सामान महिला को वापस सौंप दिया।

    कीमती सामान वापस मिलने के बाद लताबाई और उनके परिवार ने राहत की सांस ली। महिला ने पुलिस की तत्परता के लिए आभार जताया। अगर पुलिस समय रहते CCTV फुटेज खंगालकर कुत्ते की दिशा का पता नहीं लगाती तो लाखों रुपये के जेवरात बरामद करना मुश्किल हो सकता था। इस पूरे मामले में पुलिस की जांच का तरीका भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि आमतौर पर चोरी के मामलों में संदिग्ध इंसान की तलाश की जाती है लेकिन यहां जांच का रास्ता एक कुत्ते तक पहुंचा।

    हालांकि घटना ने जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर भी चिंता सामने आई है। सवाल यह है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर आवारा कुत्ते रात के समय वार्ड तक कैसे पहुंच रहे हैं। इस घटना में महिला का कीमती सामान वापस मिल गया लेकिन अगर बैग किसी दूसरी जगह चला जाता या कुत्ता उसे कहीं छोड़ देता तो लाखों रुपये के आभूषणों का पता लगाना काफी मुश्किल हो सकता था।

    फिलहाल इस अजीबोगरीब घटना की चर्चा पूरे मंदसौर में है। जिस मामले की शुरुआत लाखों रुपये की चोरी की आशंका से हुई थी उसका अंत एक ऐसे CCTV खुलासे के साथ हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पुलिस की तत्परता और CCTV की मदद से महिला का कीमती सामान सुरक्षित वापस मिल गया और यह मामला मंदसौर जिला अस्पताल की उन घटनाओं में शामिल हो गया जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।

  • पुतिन का ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ फिर तैयार? बुरेवेस्टनिक के संभावित टेस्ट से बढ़ी दुनिया की चिंता

    पुतिन का ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ फिर तैयार? बुरेवेस्टनिक के संभावित टेस्ट से बढ़ी दुनिया की चिंता


    नई दिल्ली।
    रूस की परमाणु क्षमता से लैस नई पीढ़ी की क्रूज मिसाइल बुरेवेस्टनिक (9M730 Burevestnik) एक बार फिर चर्चा में है। आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और विमानों की बढ़ती आवाजाही से ऐसी अटकलें तेज हुई हैं कि रूस इस परमाणु-संचालित मिसाइल का नया फ्लाइट टेस्ट कर सकता है। हालांकि, रूस ने संभावित परीक्षण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    बुरेवेस्टनिक को रूस लंबे समय से ऐसी मिसाइल के रूप में पेश करता रहा है जिसकी मारक क्षमता बेहद लंबी बताई जाती है। इसे परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम बताया गया है और इसकी खासियत इसका कथित परमाणु-ऊर्जा आधारित प्रोपल्शन सिस्टम है।

    नोवाया जेमल्या में बढ़ी हलचल

    हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, रूस के आर्कटिक क्षेत्र स्थित नोवाया जेमल्या में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रोगाचेवो एयरबेस पर दो Il-976 SKIP विमान पहुंचे हैं। इन विमानों का इस्तेमाल मिसाइल परीक्षण के दौरान उसके रास्ते और उड़ान से जुड़े आंकड़े जुटाने के लिए किया जाता है।

    बेस पर एक A-50U एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग विमान, चार An-26 परिवहन विमान, एक An-74 और कई हेलिकॉप्टर भी दिखाई दिए हैं। इसके अलावा पिछले बुरेवेस्टनिक परीक्षणों से जुड़े कुछ नागरिक जहाजों की भी बैरेंट्स और कारा सागर में मौजूदगी बताई गई है।

    नॉर्वे के रक्षा विश्लेषक थोर्ड अरे इवरसेन के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई दे रही गतिविधियां बुरेवेस्टनिक के पिछले परीक्षणों से मिलती-जुलती हैं। उनके अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि रूस मिसाइल के फ्लाइट टेस्ट की तैयारी कर रहा हो सकता है।

    14 परीक्षणों में कितनी बार सफल हुई?

    रिपोर्टों के मुताबिक, बुरेवेस्टनिक का अब तक करीब 14 बार परीक्षण किया जा चुका है, लेकिन इनमें सफलता सीमित रही है। रूस ने 2022 और 2025 के परीक्षणों को सफल बताया था।

    रूसी जनरल वैलेरी गेरासिमोव ने दावा किया था कि 2025 के कथित सफल परीक्षण के दौरान मिसाइल ने करीब 15 घंटे में 14,000 किलोमीटर की दूरी तय की। रूस का दावा है कि उड़ान के दौरान मिसाइल ने अलग-अलग ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज दिशाओं में निर्धारित गतिविधियां कीं और उसकी एयर डिफेंस से बचने की क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

    इसके मुकाबले 2022 में हुआ परीक्षण महज करीब दो मिनट तक चला था।

    इसे ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ क्यों कहा जाता है?

    बुरेवेस्टनिक की सबसे असामान्य विशेषता इसका कथित न्यूक्लियर पावर प्रोपल्शन सिस्टम है। इसी वजह से पश्चिमी विश्लेषकों में इसे लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं।

    इसे कभी-कभी ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ कहा जाता है। यह नाम 1986 की चेरनोबिल परमाणु दुर्घटना से जुड़ी आशंकाओं को दर्शाता है। चिंता यह है कि परमाणु रिएक्टर से संचालित इस तरह की मिसाइल के परीक्षण या दुर्घटना की स्थिति में रेडियोधर्मी सामग्री के फैलने का जोखिम पैदा हो सकता है।

    नाटो ने बुरेवेस्टनिक के लिए ‘Skyfall’ नाम इस्तेमाल किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व अधिकारी थॉमस कंट्रीमैन ने भी इस हथियार प्रणाली को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की थी।

    MIT के शोधकर्ताओं ने कैसे समझा डिजाइन?

    मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के शोधकर्ताओं ने रूसी मीडिया में उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो का विश्लेषण कर बुरेवेस्टनिक के आकार और संभावित डिजाइन का अनुमान लगाने की कोशिश की।

    प्रोफेसर जेक हेक्ला और उनके सहयोगी आर. स्कॉट केम्प के विश्लेषण के मुताबिक, मिसाइल रूस की बड़ी क्रूज मिसाइलों से बड़ी है, लेकिन अत्यधिक विशाल नहीं है।

    एयरोडायनामिक मॉडलिंग के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि इसे हवा में बनाए रखने के लिए करीब Mach 0.75, यानी लगभग 575 मील प्रति घंटे की गति की जरूरत हो सकती है। यह गति करीब-करीब किसी आधुनिक यात्री विमान की क्रूजिंग स्पीड के आसपास है।

    न्यूक्लियर रिएक्टर से कैसे मिलती है ताकत?

    शोधकर्ताओं के अनुसार, बुरेवेस्टनिक में डायरेक्ट-साइकिल एयर-ब्रीदिंग न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसी तकनीक इस्तेमाल होने की संभावना है।

    सरल शब्दों में समझें तो इस अवधारणा में हवा को इंजन के भीतर मौजूद परमाणु रिएक्टर से सीधे गुजारा जाता है। रिएक्टर की ऊर्जा हवा को बेहद गर्म करती है और गर्म हवा को पीछे की ओर तेजी से निकालकर थ्रस्ट पैदा किया जाता है।

    यह सामान्य परमाणु रिएक्टरों से अलग अवधारणा है, जहां रिएक्टर की गर्मी को एक अलग कूलेंट सिस्टम के जरिए दूसरे चरण में पहुंचाया जाता है।

    हेक्ला के मुताबिक, अप्रत्यक्ष सिस्टम की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती, लेकिन उसका अतिरिक्त वजन और जटिलता इसे कम संभावित विकल्प बनाती है।

    ‘असीमित रेंज’ का दावा कितना अहम?

    बुरेवेस्टनिक को लेकर रूस का सबसे बड़ा दावा इसकी बेहद लंबी या लगभग असीमित रेंज है। पारंपरिक क्रूज मिसाइलों में ईंधन की सीमा सबसे बड़ी बाधाओं में से एक होती है। परमाणु प्रोपल्शन का उद्देश्य इसी सीमा को काफी हद तक कम करना है।

    अगर यह तकनीक व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से काम करती है, तो मिसाइल लंबे समय तक हवा में रह सकती है और अप्रत्याशित दिशा से लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता हासिल कर सकती है। यही वजह है कि पश्चिमी देशों में इसके संभावित परीक्षणों पर नजर रखी जा रही है।

    हालांकि, बुरेवेस्टनिक की वास्तविक क्षमता, विश्वसनीयता और संचालन संबंधी दावों को लेकर स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सीमित है। रूस की ओर से संभावित नए परीक्षण की भी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!

    US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का प्रशासन देश में शरण पाने के लिए आवेदन कर चुके या फिलहाल आवेदन की प्रक्रिया में शामिल दो लाख तक विदेशी नागरिकों के कारोबारी और पर्यटन वीजा (Tourist Visa) रद्द करने की तैयारी कर रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह अमेरिकी इतिहास (American History) में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में वीजा रद्द किए जाने की सबसे बड़ी कार्रवाई होगी और इसे लेकर कानूनी चुनौतियां सामने आने की संभावना है।

    अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों और दो अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि इस फैसले को चुनौती नहीं दी गई या इसमें बदलाव नहीं किया गया, तो विदेश विभाग आने वाले हफ्तों में 2016 से 2026 के बीच जारी किए गए बी1 और बी2 वीजा रद्द करने की घोषणा कर सकता है। इसमें ऐसे वीजा धारक शामिल होंगे, जिन्होंने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया है या वर्तमान में शरण मांग रहे हैं। यह कार्रवाई गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के समन्वय से की जाएगी।


    क्या है बी1 और बी2 वीजा

    बी1 वीजा आम तौर पर कारोबारी यात्राओं के लिए जारी किए जाते हैं, जबकि बी2 वीजा पर्यटन, परिवार से मिलने या चिकित्सा उपचार के लिए जारी किए जाते हैं। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, ‘हम डीएचएस के साथ समन्वय कर ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान करने और उनके गैर-आप्रवासी वीजा रद्द करने का काम कर रहे हैं, जो अमेरिका में अल्पकालिक आगंतुक के रूप में आए थे, लेकिन बाद में यहां स्थायी रूप से रहने के लिए शरण का आवेदन दाखिल कर देते हैं।’

    उन्होंने वीजा रद्द किए जाने की संभावित संख्या पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, ‘चूंकि यह प्रक्रिया जारी रहेगी, इसलिए रद्द किए जाने वाले वीजा की संख्या लगातार बदलती रहेगी और यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।’


    क्या तुरंत देश से निकाल दिए जाएंगे 2 लाख लोग

    अधिकारियों ने कहा कि वीजा रद्द होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि संबंधित लोगों को तुरंत अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि फिलहाल जिन लोगों के शरण संबंधी मामले लंबित हैं, उनमें से अधिकांश की श्रेणी बदली जा सकती है, लेकिन वे कारोबारी या पर्यटन यात्री के रूप में अपना वीजा दर्जा खो देंगे।


    वीजा पर जारी हैं पाबंदियां

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले साल दूसरी बार कार्यभार संभालने के बाद से उनके प्रशासन ने वीजा आवेदकों पर लगातार पाबंदियां कड़ी की हैं। इनमें आवेदकों से उनके सोशल मीडिया इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मांगना, वीजा प्रक्रिया के लिए महंगे बॉन्ड जमा करने की अनिवार्यता और कुछ देशों के नागरिकों को वीजा जारी करने पर पूरी तरह रोक लगाना शामिल है।

    उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ऐसे लोगों को निशाने पर लिया, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे अमेरिका में प्रवेश करने के लिए पर्यटक और कारोबारी वीजा का इस्तेमाल करते हैं और फिर शरण के लिए आवेदन कर देते हैं।

    वर्तमान में बी1 और बी2 वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोगों से यह पुष्टि करने को कहा जाता है कि वे अमेरिका में शरण के लिए आवेदन नहीं करेंगे। साथ ही, उन्हें यह भी साबित करना होता है कि वे अपने देश लौटने का इरादा रखते हैं।


    करीब 2 लाख हो चुके हैं रद्द

    पिछले 18 महीनों में विदेश विभाग करीब 1.75 लाख वीजा रद्द कर चुका है। इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें नशे में वाहन चलाने से लेकर दुष्कर्म और लूट जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है या जिन पर ऐसे अपराधों के आरोप हैं। इसके अलावा अमेरिका की नीतियों, खासकर पश्चिम एशिया से जुड़ी नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने वाले कुछ लोगों के वीजा भी रद्द किए गए हैं।

    ट्रंप प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं द्वारा अमेरिका आकर यहां बच्चे को जन्म देकर उसे यहां की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य वाले विदेशियों के ‘बर्थ टूरिज्म’ (जन्म पर्यटन) पर भी कार्रवाई तेज कर दी है।